*मनीष सिसोदिया की बढ़ी हैं मुश्किलें, जासूसी मामले में केस चलाने की गृहमंत्रालय ने दी मंजूरी, जानें क्या है पूरा मामला*

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शराब नीति पर घिरे उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। दरअसल, गृहमंत्रालय ने फीड बैक यूनिट मामले में केस चलाने के निर्देश दिये हैं। गृहमंत्रालय के आदेश के बाद सीबीआई अब मनीष सिसोदिया के खिलाफ "फीडबैक यूनिट" (एफबीयू) के मामले में मुकदमा दर्ज करेगी। सीबीआई ने गृह मंत्रालय से मनीष सिसोदिया के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की थी।

फीडबैक यूनिट पर राजनीतिक जासूसी का आरोप

सीबीआई ने 12 जनवरी, 2023 को सतर्कता विभाग को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें सिसोदिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने के लिए राज्यपाल की मंजूरी मांगी थी। ऐसे आरोप लगाए गए थे कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने 2016 में "फीडबैक यूनिट" (एफबीयू) बनाई थी और इसका इस्तेमाल राजनीतिक जासूसी के लिए होता था।सीबीआई अफसरों के मुताबिक, एफबीयू के लिए 1 करोड़ रुपए का सिक्रेट फंड भी आवंटित किया गया था।इसके बाद, सीबीआई के अनुरोध को गृह मंत्रालय के पास भेज दिया गया था। 

एफबीयू पर आप और सिसोदिया के निजी हित में काम करने का आरोप

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने कहा कि फीडबैक यूनिट एफबीयू द्वारा तैयार की गई 60% रिपोर्ट्स सतर्कता विभाग से संबंधित मामलों से संबंधित थीं, जबकि 40% राजनीतिक खुफिया जानकारी के बारे में थीं। एजेंसी ने दावा किया कि इकाई दिल्ली सरकार के हित में नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी और सिसोदिया के निजी हित में काम कर रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने यह भी दावा किया कि यूनिट की रिपोर्ट के आधार पर किसी लोक सेवक या विभाग के खिलाफ कोई औपचारिक कार्रवाई नहीं की गई।

क्या है फीडबैक यूनिट केस?

बता दें कि, 2015 के विधानसभा चुनाव जीतने के कुछ महीनों के भीतर आम आदमी पार्टी की सरकार ने कथित तौर पर सतर्कता विभाग को मजबूत करने के लिए एक "फीडबैक यूनिट" (एफबीयू) बनाई थी। दरअसल आप सरकार, एंटी करप्शन ब्यूरो(एसीबी) को खो चुकी थी। एसीबी को दिल्ली के लेफ्टीनेंट गवर्नर के अधीन कर दिया गया था। एसीबी का काम सरकारी विभागों और बाबुओं पर निगरानी रखना था ताकि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की जा सके। उस वक्त मुकेश कुमार मीना को एसीबी का मुखिया बनाया गया और वो तत्कालीन एलजी नजीब जंग को रिपोर्ट कर रहे थे।केजरीवाल सरकार के हाथ से जब इतना बड़ा हथियार छिन गया तो आम आदमी पार्टी की सरकार ने सतर्कता विभाग फीड बैक यूनिट के गठन का फैसला किया।इसका मकसद दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले सरकारी संस्थान, स्वायत्त संस्थान, और दूसरे विभागों पर निगरानी रखना था। 29 सितंबर 2015 को एफबीयू का गठन किया गया था।

दिल्ली को मिलेगा नया मेयर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मतदान आज

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आज दिल्ली को नया मेयर मिलने की पूरी उम्मीद है। दिल्ली नगर निगम का चुनाव परिणाम आने के ढ़ाई महीने के बाद आज मेयर का चुनाव होने की पूरी उम्मीद है। तीन बार टल जाने के बाद आज आखिरकार दिल्ली मेयर पद के लिए आज चुनाव होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव को लेकर रास्ता साफ हुआ है। ।जिसके बाद उम्मीद है कि दिल्ली को आज को नया मेयर मिल जाएगा

एमसीडी चुनाव के बाद चौथी बार पार्षद और अन्य सदस्यों की बैठक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें मेयर और डिप्टी मेयर समेत स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों का चुनाव होगा। कोर्ट के आदेश के बाद सभी 274 पार्षद और सदस्य मेयर चुनने के लिए मतदान करेंगे। एमसीडी सदन में मेयर का चुनाव सुबह 11 बजे से होगा, जिसमें 250 पार्षद, दिल्ली के 10 सांसद और 14 विधायक अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

बता दें कि दिल्ली नगर निगम के लिए चुनाव नवंबर-दिसंबर 2022 में हुआ था। एमसीडी चुनाव परिणाम भी सात दिसंबर को आ गए थे। उसके बाद नवनिर्वाचित पार्षदों, नामित विधायकों, दिल्ली के लोकसभा और राज्यसभा के 10 सांसदों को वोटिंग के जरिए नए मेयर, डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों का चुनाव करना था। इसको लेकर आज से पहले तीन और बैठकें हुई थीं। इन बैठकों का आयोजन 6 जनवरी, 24 जनवरी और 6 फरवरी को हुआ था। तीनों मेयर चुनाव कराने के मकसद से आहूत एमसीडी सदन की बैठक आप-बीजेपी पार्षदों व नेताओं के हंगामों की वजह से बेनतीजा साबित हुईं। तीनों बार पीठासीन अधिकारी सत्या शर्मा ने बैठक को स्थगित कर दिया। दिल्ली एमसीडी के मेयर चुनाव में मनोनीत पार्षदों की वोटिंग हंगामे की मुख्य वजह थी। बीजेपी का कहना था कि मनोनीत सदस्यों को एमसीडी मेयर चुनाव में वोट देने का अधिकार है जबकि आप का कहना था कि मनोनीत सदस्यों का वोट करना संविधान के खिलाफ है।

जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने जल्द से जल्द चुनाव कराने के निर्देश जारी किए।सुनवाई करते हुए 17 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने 24 घंटे के अंदर मेयर का चुनाव कराने की अधिसूचना जारी करने के आदेश दिए थे।साथ ही कहा था कि इस चुनाव में नामित सदस्य यानी एल्डरमैन वोट नहीं डाल सकेंगे, क्योंकि उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं है।सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से आम आदमी पार्टी को बड़ी राहत मिली है। क्योंकि वह लगातार एल्डरमैन द्वारा वोटिंग का विरोध कर रही थी।

सात दिसंबर को घोषित एमसीडी चुनाव के नतीजों में भाजपा को 104, आप को 134 और कांग्रेस को नौ सीटें मिली थीं। तीन निर्दलीय भी चुने गए थे। बाद में एक निर्दलीय उम्मीदवार आप में शामिल हो गया और दूसरा भाजपा में शामिल हो गया। लिहाजा, अब सदन में सिर्फ एक निर्दलीय उम्मीदवार है।

दिल्ली में फिर सियासी हलचल तेज, मेयर चुनाव के लिए आज तीसरी बार तैयारी

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दिल्ली में नगर निकाय चुनाव हुए दो महीने का समय बीत चुका है पर अब तक शहर को नया मेयर नहीं मिला है। हंगामे, हाथापाई और धरना प्रदर्शन के बीच दिल्ली नगर निगम मेयर पद का चुनाव दो बार पहले ही टल चुका है। आज तीसरी बार दिल्ली के मेयर को चुनने के लिए नगर निगम (एमसीडी) सदन की बैठक बुलाई गई है। ऐसे में अहम सवाल यही है कि क्या आज मेयर चुना जाएगा या नहीं?

6 जनवरी और 24 जनवरी को टल चुका है चुनाव

दिल्ली नगर निगम अधिनियम (DMC Act) 1957 के तहत मेयर और डेप्युटी मेयर का चुनाव नगर निकाय सदन की पहली बैठक में ही हो जाना चाहिए। हालांकि ऐसा नहीं हो सका है। यह चुनाव दो बार टाला जा चुका है। मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव के लिए आज तीसरी बार मीटिंग हो रही है।इससे पहले दो बार 6 जनवरी और 24 जनवरी को सदन में हंगामे के चलते चुनाव नहीं हो पाया था।भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के पार्षदों के हंगामे की वजह से पीठासीन अधिकारी ने महापौर का चुनाव कराए बिना कार्यवाही स्थगित कर दिया था।

आप की शैली ओबेरॉय और भाजपा की रेखा गुप्ता के बीच टक्कर

भाजपा ने मेयर पद के लिए रेखा गुप्ता को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं आप की ओर से शैली ओबरॉय महापौर पद की दौड़ में शामिल हैं। उप महापौर के लिए आप और भाजपा ने क्रमश: आले मोहम्मद इकबाल और कमल बागरी को मैदान में उतारा है। सोमवार को महापौर और उप महापौर के साथ एमसीडी की स्थायी समिति के छह सदस्यों का भी चुनाव होना है।

बता दें कि दिल्ली नगर निगम का चुनाव बीते साल दिसंबर में हुआ था। दिल्ली में नगर निगम के लिए चार दिसंबर को वोट डाले गए थे और सात दिसंबर को रिजल्ट आए थे। आम आदमी पार्टी 134 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी जबकि 15 सालों से एमसीडी की सत्ता पर काबिज भाजपा को 104 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस ने 9 सीटें जीती थीं।

इंदिरा गांधी ने मेरे पिता को पद से हटाया”, बोले एस जयशंकर, जानें- पूरा किस्सा

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केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खुलासा किया है कि उनके ब्यूरोक्रेट पिता को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सचिव पद से हटा दिया था। साथ उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने भी उनके पिता की जगह उनसे जूनियर आदमी को नियुक्त कर दिया था।

समाचार एजेंसी एएनआई से खास बातचीत में उन्होंने बताया,मेरे पिता भी नौकरशाह थे। वह सचिव बने थे, पर उन्हें उस पद से हटा दिया गया था। साल 1980 में जब इंदिरा गांधी फिर से चुनी गई थीं, तब वही पहले सेक्रेट्री थे, जिनको उन्होंने हटाया था।

पिता बहुत ईमानदार थे, शायद समस्या इसी वजह से हुई हो-जयशंकर

जयशंकर ने कहा कि उनके पिता भी बहुत ईमानदार व्यक्ति थे, हो सकता है कि समस्या इसी वजह से हुई हो, मुझे नहीं पता। लेकिन तथ्य यह था कि नौकरशाही में उन्होंने अपने करियर को एक तरह से रुकते हुए देखा था। उसके बाद वो फिर कभी सचिव नहीं बने। उन्हें राजीव गांधी काल के दौरान किसी जूनियर व्यक्ति को उनकी जगह पर कैबिनेट सचिव बना गया था। यह कुछ ऐसा था जिसे वो महसूस करते थे। हमने शायद ही कभी इसके बारे में बात की हो। इसलिए जब मेरे बड़े भाई सचिव बने तो उन्हें बहुत- बहुत गर्व हुआ।

राजनयिक से राजनेता के सफर के बारे में की बात

इस दौरान जयशंकर ने राजनयिक से राजनेता बनने पर भी चर्चा की। विदेश सचिव के बाद अचानक विदेश मंत्री बनाए जाने का फैसला सभी के साथ उनके लिए भी हैरान करने वाला था, उन्होंने खुद इसे स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि कैसे नौकरशाही से वो राजनीति में आए। जयशंकर जनवरी 2015 से जनवरी 2018 तक विदेश सचिव थे और इससे पहले उन्होंने चीन और अमेरिका सहित प्रमुख देशों में राजदूत के पदों पर काम किया था। 2011 में चीन में मेरी उनसे पहली मुलाकात हुई थी। वो गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में वहां आए थे। सच कहूं तो उन्होंने मुझ पर बहुत बड़ा प्रभाव डाला था। 2011 तक मैंने कई मुख्यमंत्रियों को आते-जाते देखा था, लेकिन मैंने किसी को उनसे ज्यादा तैयार होकर आते नहीं देखा था। 2019 में जब मोदी सरकार की सत्ता में वापसी हुई तो पीएम मोदी ने उन्हें अपने कैबिनेट में जगह दी और विदेश मंत्री बनाया।

*यूक्रेन के साथ युद्ध के लिए कौन जिम्मेदार? रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने इनपर उठाई अंगुली*

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यूक्रेन के खिलाफ जंग को एक साल पूरे होने से ठीक दो दिन पहले और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के यूक्रेन दौरे के ठीक एक दिन बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन देश को संबोधित किया।अपने संबोधन के दौरान पुतिन ने कहा कि वह ऐसे समय देश को संबोधित कर रहे हैं जो देश के लिए मुश्किलों भरा और अहम है। पूरी दुनिया में बड़े बदलाव हो रहे हैं। 

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रूस ने जंग टालने की तमाम कोशिशें कीं-पुतिन

अपने संबोधन में पुतिन ने कहा- रूस ने शुरुआत में जंग को टालने के लिए तमाम डिप्लोमैटिक कोशिशें कीं, लेकिन नाटो और अमेरिका ने इन्हें कामयाब नहीं होने दिया। हम अब भी बातचीत चाहते हैं, लेकिन इसके लिए शर्तें मंजूर नहीं है। रूस के राष्ट्रपति ने आगे कहा, पश्चिम ताकतों की दखल की वजह से हम आगे बढ़े, जेलेंस्की को बात करने का मौका दिया गया था। 

नाटो ने यूक्रेन को बरगलाया-पुतिन

नाटो ने यूक्रेन को बरगलाया और उकसाने का काम किया है। यूक्रेन ने दुनिया को युद्ध में धकेला है। पुतिन ने कहा रूस ने सालों तक पश्चिमी देशों के साथ बातचीत के लिए तत्परता दिखाई, लेकिन उसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया।

अमेरिका ने यूक्रेन के मामले को वैश्विक बना दिया

पुतिन ने कहा कि यूक्रेन को लॉन्ग रेंज डिफेंस सिस्टम दिए जा रहे हैं। हमारे बॉर्डर पर इसकी वजह से खतरा मंडरा रहा है। रूस और यूक्रेन का मामला लोकल था। अमेरिका और उसके साथियों ने इसे दुनिया का मसला बना दिया। अमेरिका और उसके साथी महज अपना दबदबा बढ़ाने की साजिश के खातिर दूसरों को मोहरा बना रहे हैं। वेस्टर्न पावर ने ही जंग के जिन्न को बोतल से बाहर निकाला है, और वो ही इसे वापस बोतल में डाल सकते हैं। हम तो सिर्फ अपने देश और लोगों की हिफाजत करना चाहते हैं और यही कर भी रहे हैं।

हमारी पीठ के पीछे अलग साजिश रची जा रही थी-पुतिन

पुतिन ने कहा कि डोनबास इलाके में शांति स्थापित करने के लिए हमने हरसंभव कोशिश की थी जो कि 2014 के बाद से ही संवेदनशील बना हुआ था लेकिन हमारी पीठ के पीछे अलग साजिश रची जा रही थी। पुतिन ने कहा कि यूक्रेन और डोनबास झूठ के सिंबल बन गए हैं। रूसी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में दावा किया कि यूक्रेन के लोग अपने पश्चिमी आकाओं के बंधक बन गए हैं। पश्चिमी देशों ने यूक्रेन की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सेना पर कब्जा कर लिया है।

नागालैंड से कब हटेगा AFSPA? केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनावी रैली से कर दिया ऐलान


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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि विवादास्पद सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (AFSPA) अगले तीन-चार साल में पूरे नागालैंड से हटा लिया जाएगा। अमित शाह ने नागालैंड के पूर्वोत्तर हिस्से के तुएनसांग शहर में एक चुनावी रैली में कहा कि नागा शांति वार्ता चल रही है और पीएम नरेंद्र मोदी की पहल से इलाके में हमेशा के लिए शांति बहाल हो जाएगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक रैली में कहा कि उम्मीद है कि अगले तीन-चार साल में पूरे नागालैंड से AFSPA हटा दिया जाएगा। नागालैंड के तुएनसांग में एक रैली में शाह ने कहा कि नागा शांति वार्ता चल रही है, उम्मीद है कि पीएम नरेंद्र मोदी की पहल रंग लाएगी। तुएनसांग रैली में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर में हिंसा में 70 फीसदी की कमी, सुरक्षा बलों की मौत में 60 फीसदी की कमी, नागरिकों की मौत में 83 फीसदी की कमी आई है। अमित शाह ने कहा कि विकास, पूर्वी नागालैंड के अधिकारों से जुड़े कुछ मुद्दे हैं। जिनको चुनाव के बाद हल कर दिया जाएगा।

नागालैंड में आतंकवादियों से निपटने के लिए सेना को मिला हुआ विवादास्पद ‘सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम’ (AFSPA) लंबे समय से विवाद का मुद्दा बना हुआ है। अप्रैल 2022 में अमित शाह ने असम, नागालैंड और मणिपुर के कई जिलों से AFSPA को वापस लेने की घोषणा की थी। उन्होंने तब यह कहा था कि ये कदम उग्रवाद को खत्म करने और पूर्वोत्तर में स्थाई शांति बहाल करने की सरकार की लगातार कोशिशों का नतीजा है। कई समझौतों के कारण राज्य में सुरक्षा स्थिति बेहतर हुई है और तेजी से विकास हुआ है। गौरतलब है कि नागालैंड में विधानसभा के चुनाव के लिए 27 फरवरी को वोट पड़ने वाले हैं। जबकि मतगणना दो मार्च को होगी।

आगामी विधानसभा चुनावों में नागालैंड के लोगों से भारतीय जनता पार्टी (BJP) को वोट देने की अपील करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोगों को भरोसा दिया कि सत्ता में आने पर बीजेपी-एनडीपीपी सरकार राज्य की सभी समस्याओं को हल करने की कोशिश करेगी। तुएनसांग में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि इसमें नागा शांति प्रक्रिया भी शामिल है, जो 25 वर्षों से बिना किसी समाधान के चल रही है। शाह ने कहा कि ‘मैं आप सभी को 2014 से पहले के नागालैंड की याद दिलाना चाहता हूं। फायरिंग और खून-खराबे से लोग सहमे हुए थे। लेकिन मोदी सरकार ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर नागा शांति वार्ता को आगे बढ़ाया। आज नगालैंड शांति के साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ा है।

'मैं चीन का नाम ले रहा हूं', राहुल गांधी पर बरसे विदेश मंत्री जयशंकर, कहा- LAC पर सेना PM मोदी ने भेजी कांग्रेस सांसद ने नहीं

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चीन के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के केंद्र सरकार पर लगाए गए आरोपों पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पलटवार किया है। जयशंकर की टिप्पणी संसद में विपक्ष के विरोध की पृष्ठभूमि में आई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि सरकार तवांग में चीनी सेना के साथ संघर्ष पर चर्चा से इनकार कर रही है। उन्होंने पीएम मोदी की अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस की आलोचना के समय पर भी सवाल उठाया।

कांग्रेस के आरोपों पर उन्होंने कहा कि भारत ने चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच बड़ी संख्या में एलएसी पर सैनिकों को भेजा है। कांग्रेस के आरोपों पर कहा कि भारत ने चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच बड़ी संख्या में एलएसी पर सैनिकों को भेजा है।

जयशंकर ने कहा कि यह पीएम नरेंद्र मोदी ही थे जिन्होंने भारतीय सेना को एलएसी पर भेजा

उन्होंने कहा कि भारत ने चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच बड़ी संख्या में सैनिकों को भेजा

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के चीन से डरने के सवाल पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तीखा हमला बोला है. विदेश मंत्री ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही थे जिन्होंने भारतीय सेना को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भेजा न कि वायनाड के सांसद ने। केंद्र सरकार द्वारा तवांग झड़प पर चर्चा से परहेज करने के विपक्ष के आरोपों के बीच उनकी यह टिप्पणी आई है. उन्होंने कहा, अगर हम उदार हो रहे थे, तो भारतीय सेना को एलएसी पर किसने भेजा राहुल गांधी ने उन्हें नहीं भेजा, नरेंद्र मोदी ने भेजा।

वहीं कांग्रेस के आरोपों पर कहा कि भारत ने चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच बड़ी संख्या में एलएसी पर सैनिकों को भेजा है। विदेश मंत्री ने कहा, चीन की सीमा पर आज हमारे पास इतिहास की सबसे बड़ी तैनाती है और मैं चीन का नाम ले रहा हूं वह कांग्रेस के इस आरोप के बारे में एक सवाल का जवाब दे रहे थे कि न तो पीएम मोदी और न ही विदेश मंत्री ने चीन का जिक्र किया। जयशंकर की टिप्पणी संसद में विपक्ष के विरोध की पृष्ठभूमि में आई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि सरकार तवांग में चीनी सेना के साथ संघर्ष पर चर्चा से इनकार कर रही है।

उन्होंने पीएम मोदी की अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस की आलोचना के समय पर भी सवाल उठाया। विदेश मंत्री ने ANI के साथ अपने इंटरव्यू में जॉर्ज सोरोस के सवाल पर कहा कि यह दूसरे तरीके से राजनीति है। क्यों एक साथ ऐसी रिपोर्ट में उछाल आया है? आप एक डॉक्यूमेंट्री बनाना चाहते हैं, 1984 में बहुत कुछ हुआ, उस पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाएं। यह आकस्मिक नहीं है। लंदन और न्यूयॉर्क में चुनाव का मौसम निश्चित रूप से शुरू हो गया है।

फरवरी में ही 40 डिग्री पहुंचा पारा, जून में क्या होगा हाल?

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सर्दियों की विदाई ठीक से हुई नहीं कि गर्मियों की “जोरदार” वापसी हो गई है। अभी वसंत खत्म भी नहीं हुआ है कि सूरज ‘चाचू’ ने रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। प्रचंड शीतलहरी झेल चुके लोगों ने अभी गुलाबी ढंग का मजा लेना ही शुरू किया था कि पारा ने तेजी से चढ़ना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में तेजी के साथ मौसम में बदलाव देखने को मिला है। देश के कई भागों में तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया है।उत्तर भारत में तापमान फरवरी में ही 40 डिग्री तक पहुंचता दिख रहा है।ये हाल गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और देश के कई हिस्सों का है।

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इस साल रिकॉर्ड तोड़ेगी गर्मी

महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश के कई जगहों पर तो अभी से ही बेतहाशा गर्मी पड़ने लगी है। गुजरात से लेकर महाराष्ट्र राजस्थान तक में पारा 40 डिग्री के पार जाने को आमादा है। धर्मशाला में 52 साल रिकॉर्ड टूट गया। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक उत्तर और मध्य भारत में अगले कुछ दिनों में मिनिमम टेंपरेचर दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। अगर ऐसा ही रहा तो इस साल गर्मी रिकॉर्ड तोड़ सकती है।

फरवरी में औसत तापमान में नौ डिग्री अधिक की बढ़ोतरी

मौसम विभाग ने कहा है कि फरवरी में औसत तापमान में नौ डिग्री अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विभाग ने एक चेतावनी में कहा है कि उत्तर भारत में आने वाले दिनों में गर्मी और अधिक बढ़ सकती है। तापमान में बढ़ोतरी की वजह से प्री-मॉनसून एक्टिविटी भी कमजोर पड़ सकती है।

लाहौर में बैठकर जावेद अख्तर ने पाकिस्तान को धोया, कहा-मुंबई पर हमला करने वाले आपके मुल्क में घूम रहे

# javed_akhtar_in_pakistan_on_mumbai_attacks

अपने गीतों के लिए महशूर जावेद अख्तर चर्चा में हैं। इस बार जावेद अख्तर की कलम ने नहीं उनकी जुबान से निकले अल्फाज सुर्खियों में हैं। कहतें हैं ना, “घुसकर मारना”। जावेद अख्तर ने कुछ ऐसा ही किया है। लाहौर में बैठकर उन्होंने पाकिस्तान की बोलती बंद कर दी। अब सोशल मीडिया पर उनके वीडियो खूब शेयर किए जा रहे हैं।

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दरअसल, जावेद फ़ैज़ फेस्टिवल में शिरकत करने लाहौर गए हैं, जहां उन्होंने कुछ ऐसा कह डाला कि जिसकी पाकिस्तान के लोगों को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं रही होगी। पाकिस्तान को सुनाई गई जावेद की ये खरी-खरी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो कहते हुए सुने जा सकते हैं, हकीकत ये है कि हम दोनों एक दूसरे को इल्ज़ाम ना दें। उससे बात नहीं होगी। अहम बात ये है कि जो गरम है फिजा, वो कम होनी चाहिए। हम तो बम्बई के लोग हैं। हमने देखा वहां कैसे हमला हुआ था। वो लोग नॉर्वे से तो नहीं आए, ना मिस्र से आए थे, वो लोग अभी भी आपके मुल्क में घूम रहे हैं। तो ये शिकायत अगर हिंदुस्तानी के दिल में हो तो आपको बुरा नहीं मानना चाहिए।

पाकिस्तान में दिया जावेद अख्तर का ये बयान सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। लोगों ने गीतकार के बयान की तारीफ की है। खास कर के भारत के लोग इस वीडियो को सोशल मीडिया पर खूब शेयर कर रहे हैं। 

हालांकि, जावेद अख्तर ने भारत और पाकिस्तान में होने वाले कार्यक्रमों को लेकर भी बोला। उन्होंने कहा कि हमने तो नुसरत के बड़े-बड़े फंक्शन किए, मेहंदी हसन के बड़े-बड़े फंक्शन किए... आपके मुल्क में तो लता मंगेशकर का कोई फंक्शन नहीं हुआ। इस पर पाकिस्तानी भी तालियां बजाने से खुद को रोक नहीं पाए।

पासपोर्ट के लिए परेशान महबूबा मुफ्ती, मां को ले जाता चाहती हैं मक्का, विदेश मंत्री जयशंकर को पत्र लिखकर मांगी मदद

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जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री व पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने अपने पासपोर्ट के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर से हस्तक्षेप करने की अपील की है।महबूबा का कहना है कि वो पिछले तीन सालों से पासपोर्ट का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि हज पर जाने के लिए उन्होंने 3 साल पहले आवेदन दिया था, लेकिन अभी तक पासपोर्ट रिन्यू का काम पूरा नहीं हो पाया है।

पीडीपी चीफ ने पासपोर्ट के मामले में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को पत्र लिखकर दखल की मांग की है।अपने खत में महबूबा मुफ्ती ने बताया कि वह अपनी 80 वर्षीय मां को तीर्थ यात्रा पर मक्का ले जाने के लिए पिछले तीन साल से पासपोर्ट का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उनका और उनकी बेटी का पासपोर्ट रिन्यूअल एप्लीकेशन पिछले 3 साल से पेंडिंग है। महबूबा ने लिखा कि अपनी मां के साथ हज के लिए जाना चाहती हैं, लेकिन पासपोर्ट जारी करने में लगातार देरी से परेशानी हो रही है।

महबूबा ने पत्र में कहा, मैं आपको इस विषय के बारे में लिख रही हूं जो अनवाश्यक रूप से पिछले तीन सालों से खींचा जा रहा है। उन्होंने कहा, मेरी मां (गुलशन नजीर) और मैंने मार्च 2020 में पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए आवेदन दिया था। जम्मू कश्मीर सीआईडी ने यह रिपोर्ट दी थी कि मेरी 80 वर्षीय मां और मुझे पासपोर्ट जारी करने से राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचेगा। जम्मू कश्मीर में यह नियम हो गया है कि राष्ट्र हित का बहाना बनाकर पत्रकारों, छात्रों सहित हजारों लोगों और अन्य के पासपोर्ट आवेदन मनमाने तरीके से खारिज कर दिए जाएं।

20 फरवरी को लिखे पत्र में मुफ्ती ने कहा है कि इस मामले में जम्मू उच्च न्यायालय का भी रुख किया। तीन साल तक मामला खिंचने के बाद अदालत ने श्रीनगर स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को यह स्पष्ट संदेश दिया कि उसे अस्पष्ट आधार पर पासपोर्ट जारी करने से इनकार कर सीआईडी के प्रतिनिधि जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, मुझे भारत के पासपोर्ट प्राधिकरण से संपर्क करने को कहा गया। उन्होंने लिखा है कि वह 2021 से कई बार भारतीय पासपोर्ट प्राधिकरण तक पहुंच चुकी हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। दुर्भाग्य से, मुझे अभी तक सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। मेरा पासपोर्ट जारी करने में अत्यधिक और जानबूझकर देरी मेरे मौलिक अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। कल्पना भी नहीं कर सकते कि एक सामान्य कश्मीरी किस स्थिति से गुजरता है।