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Jun 23 2022, 10:11

बिहार में तेजी से बढ़ रहा कोरोना, पटना में पीएमसीएच के 3 डॉक्टर समेत मिले 83 नए मरीज 

डेस्क : बिहार मे एक बार फिर से कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। चार महीने 17 दिन बाद एक बार फिर पटना में कोरोना विस्फोट हुआ है। पिछले 24 घंटे में पटना में कोरोना का ग्राफ दोगुना हो गया है, मंगलवार को 39 संक्रमित मिले थे। वहीं बुधवार को एकबार फिर पटना में पीएमसीएच के तीन डॉक्टर समेत कुल 83 नए संक्रमित मिले हैं। वहीं राज्य में 126 लोग संक्रमित पाए गए हैं। 

इससे पहले पांच फरवरी को 129 संक्रमित मिले थे। जबकि छह फरवरी को 44 और चार फरवरी को 86 संक्रमित मिले थे। इस वर्ष सबसे ज्यादा संक्रमित 11 जनवरी को 2018 मिले थे। पीएमसीएच के संक्रमितों में एक सीनियर डॉक्टर और दो जूनियर महिला डॉक्टर शामिल हैं। 

बुधवार को एक ही परिवार और मोहल्ले के कई संक्रमित मिले हैं। गांधीनगर में एक ही परिवार के तीन, बहादुरपुर हाउसिंग कॉलोनी में तीन, बिहटा में पांच, दानापुर में पांच, संदलपुर के तीन, सिपारा के दो, कंकड़बाग के चार, शेखपुरा के दो लोग संक्रमित मिले। अब कुल सक्रिय संक्रमितों की संख्या 258 पर पहुंच गई है।

बुधवार को मिले एजी कॉलोनी के एक 38 वर्षीय संक्रमित का इंग्लैंड से यात्रा इतिहास भी है। संक्रमित युवक होम आइसोलेशन में है। स्वास्थ्य विभाग की टीम उसकी जिनोम सिक्वेंसिंग भी करा सकती है।


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Jun 23 2022, 10:09

4 साल से प्रखंड शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने से पटना हाईकोर्ट नाराज, शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों के वेतन भुगतान पर रोक लगाने का दिया आदेश  

डेस्क : शिक्षकों के वेतन नहीं मिलने से पटना हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए वित्त विभाग को शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव समते जिले के वरीय शिक्षा पदाधिकारियों के वेतन पर रोक लगाने का आदेश दिया है। 

दरअसल वैशाली के 30 प्रखंड शिक्षकों की नियुक्ति के चार साल बाद भी वेतन नहीं मिला है। पटना हाईकोर्ट ने इस मामले को लेकर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने वित्त विभाग के सचिव को आदेश दिया है कि शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव सहित जिले के वरीय शिक्षा पदाधिकारियों के वेतन भुगतान पर अगले आदेश तक रोक लगा दें।

बुधवार को न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा की एकलपीठ ने उमेश कुमार सुमन व अन्य द्वारा दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। वैशाली के इन प्रखंड शिक्षकों से लगातार चार साल से काम लिया जा रहा है। 

कोर्ट को बताया गया कि वर्ष 2008 के शिक्षक नियोजन की रिक्तियों के आलोक में जिला शिक्षक प्राधिकार के आदेश पर 2018 में इन शिक्षकों की नियुक्ति प्रखंड शिक्षक के पद पर की गई थी। नियुक्ति के बाद इन तमाम शिक्षकों से लगातार काम भी लिया जाता रहा, लेकिन जब भी वेतन भुगतान की बारी आई, तो शिक्षा विभाग ने उनकी अहर्ता पर सवाल उठाते हुए वेतन पर रोक लगाए रखा। 

कोर्ट को बताया गया कि हाईकोर्ट ने पिछले साल नवंबर में ही शिक्षा विभाग को आदेश दिया था कि नियुक्ति होने के बाद वेतन पर अहर्ता को लेकर रोक लगाना अनुचित है। अहर्ता पर सवाल उठाने की बजाए शिक्षकों को सेवा के दौरान ही अपनी अहर्ता को अपग्रेड करने का मौका देना चाहिए। इस दिशा में भी हाईकोर्ट ने विभाग को ठोस कदम उठाने का भी निर्देश दिया था।

छह महीने बीतने के बाद भी विभाग की तरफ से न ही कोई ठोस उपाय निकाले गए और न ही शिक्षकों को वेतन का भुगतान ही किया गया। मामले पर अगली सुनवाई 11 जुलाई को की जाएगी।


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Jun 23 2022, 09:50

बिहार में जातीय जनगणना में फंस सकता है पेंच, नीतीश सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर

बिहार में अपने स्तर से जातीय जनगणना कराने के सरकारी फैसले पर ग्रहण लग सकता है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किया गया है। इस याचिका में संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए जाति आधारित जनगणना पर रोक लगाने की गुहार लगाई गयी है। शशि आनंद नामक व्यक्ति ने जातीय जनगणना कराने के नीतीश सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि यह फैसला न सिर्फ संविधान के खिलाफ है बल्कि इसके लिए आकस्मिकता निधि से 500 करोड़ रूपये खर्च करने का फैसला भी गलत है। 

  शशि आनंद की ओर से कोर्ट में याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने कहा कि आकस्मिकता निधि के पैसे से जातीय जनगणऩा कराना गलत है और यह संविधान की धारा का उल्लंघन है। संविधान के अनुच्छेद 267 में आकस्मिकता निधि और उसे खर्च किये जाने का उल्लेख किया गया है। इसके तहत सिर्फ अप्रत्याशित स्थिति में ही आकस्मिक फंड का उपयोग किया जा सकता है लेकिन नीतीश सरकार इसी पैसे से जातीय जनगणना करा रही है।

याचिका में कहा गया है कि बिहार सरकार ने 02 जून 2022 को मंत्रिमंडल की बैठक में आकस्मिकता निधि से 500 करोड़ रूपये निकाल कर जातीय जनगणना कराने का फैसला लिया है। राज्यपाल ने 06 जून को इससे सम्बंधित अधिसूचना भी जारी कर दी है। अधिवक्ता ने सरकार के फैसले को असंवैधानिक करार दिया है।

उधर याचिका दाखिल किए जाने के बाद प्रशासनिक महकमे में चर्चाओं का दौर जारी है।


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Jun 23 2022, 09:46

जब लालू ने यशवंत सिन्हा को हराने के लिए गुजराल को उतारा था, जानिए एक तेज तर्रार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के राजनेता बनने की दिलचस्प कहानी

पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा को विपक्ष ने राष्ट्रपति के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है। बिहार के बक्सर में जन्मे यशवंत सिन्हा की पढ़ाई से लेकर नौकरी और सियासत तक की जड़ें बिहार से जुड़ी हैं। सियासत में कदम रखने से पहले 24 साल तक वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे। यहां उनकी पहचान एक तेज तर्रार अफसर के रूप में रही।

इस दौरान वे बिहार के दिग्गज समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर के निजी सचिव बने। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा को अलविदा कह राजनीति में कदम रखा। उन्होंने अपनी सियासी पारी की शुरुआत जनता पार्टी से की।

1988 में राज्यसभा सदस्य चुने गए। 1990-1991 के दौरान वे चंद्रशेखर की सरकार में वित्त मंत्री रहे। लेकिन सियासत में असल पहचान उन्हें बिहार विधानसभा से मिली । साल 1995 में यशवंत सिन्हा भाजपा के टिकट पर रांची से चुनाव जीत कर बिहार विधानसभा पहुंचे थे। बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार थी। तब की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तब राजद सुप्रीमो के खिलाफ सदन में कोई भी नेता कुछ भी बोलने से बचते थे। यशवंत सिन्हा ने यहां भी अपनी तार्किकता का परिचय दिया और लालू प्रसाद को करारा जवाब दिया था।

उनसे सियासी गणित सीखने वाले प्रेम रंजन पटेल कहते हैं कि वो केवल लालू को जवाब ही नहीं दिए बल्कि सरकार को आइना भी दिखाया। राज्य की बदतर कानून व्यवस्था पर उन्होंने सरकार से तीखे सवाल पूछे। फैक्ट के साथ अपने तर्क रखे। मजबूती से मुद्दों को उठाया। यहां के बाद उनकी एक दबंग और काबिल छवि के नेता की पहचान बनी।

यशवंत सिन्हा केंद्र के वित्त मंत्री रहते हुए 1991 का मध्यावधि चुनाव लड़ने पटना आए थे, लेकिन लालू यादव उन्हें किसी भी सूरत में पटना से जीतने नहीं देना चाहते थे। उन्होंने उनके खिलाफ तब पंजाब के नेता आईके गुजराल को मैदान में उतारा था। उन्होंने उन्हें यादव बताकर यहां प्रचार किया। नाक की यह लड़ाई इस कदर बढ़ गई कि चुनाव को रद्द करना पड़ा। न गुजराल जीते न यशवंत सिन्हा।

बीजेपी ने 1996 में पहले उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया। इसके बाद उन्हें बिहार BJP का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। उस दौरान उनके कार्यकारिणी में पदाधिकारी रहे एक नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं कि वे प्रदेश अध्यक्ष तो बन गए थे, लेकिन अपने ही नेता को नहीं पहचानते थे। वे बैठक में हमेशा एक लोकल नेता को रखते थे। जैसे ही कोई बोलने के लिए हाथ उठाता था वो पीछे से उनका नाम उनके कान में बोल देता था। फिर वो उसका नाम लेकर बुलाते थे।


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Jun 22 2022, 11:50

कलतक केन्द्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाने वाले बिहार के पूर्व सीएम मांझी केन्द्र के इस फैसले से हुए गदगद, कहा-मोदी है तो मुमकिन है 

डेस्क : केन्द्र सरकार के अग्निपथ योजना को लेकर सवाल उठाने वाले बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने अचानक अपना रुख बदल लिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया के ट्वीटर पर प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए लिखा है कि मोदी है तो मुमकिन है। 

दरअसल मांझी ने पीएम की तारीफ राष्ट्रपति पद के लिए आदिवासी समुदाय से आनेवाली महिला को एनडीए प्रत्याशी बनाए जाने पर की है। पीएम मोदी के नेतृत्ववाली एनडीए ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है। झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाए जाने पर जीतन राम मांझी बेहद खुश हैं। उन्होने इसके लिए द्रौपदी मुर्मू को बधाई के साथ-साथ पीएम मोदी की तारीफ की है। 

उन्होने अपने सोशल मीडिया के ट्वीटर पर ट्वीट किया है। जिसमें उन्होंने लिखा है... 'पूर्व राज्यपाल,आदिवासी समुदाय की शान,हमारी बहन श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी को NDA की तरफ से राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाएं जानें पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। ये गर्व का क्षण है जब लगातार दूसरी बार हमारे बीच से कोई राष्ट्रपति बनने जा रहा है। “मोदी है तो मुमकिन है।”


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Jun 22 2022, 11:36

अग्निपथ योजना के विरोध में विपक्ष ने किया राजभवन मार्च, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी ने केन्द्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

डेस्क : सेना बहाली में केन्द्र की नई योजना अग्निपथ का पूरे देश में विरोध जारी है। खासकर बिहार, यूपी में इस योजना के प्रति युवाओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। इसके विरोध में पिछले दिनों भारी हंगामा हुआ। वहीं अब इस योजना का राजनीतिक दलों द्वारा भी विरोध किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज अग्निपथ योजना के विरोध में बिहार के विपक्षी दलों ने राजभवन मार्च किया। 

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में कांग्रेस को छोड़ महागठबंधन से जुड़े दलों के एमएलए और एमएलसी ने विधानमंडल से राजभवन तक मार्च किया। इस मार्च में तेजस्वी यादव के साथ ही विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी, राजद विधायक व तेजस्वी के बड़े भाई तेजप्रताप यादव और राजद तथा वाम दलों के दर्जनों नेता शामिल हुए रहे।

इस दौरान महागठबंधन के नेताओं ने केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नेताओं ने रोजगार के नाम पर बेरोजगारों को बरगलाना बंद करो, अग्निपथ वापस लो के नारों के साथ मोदी सरकार पर हमला किया। वहीं नेताओं ने अग्निपथ और देश में बेरोजगारी को लेकर केंद्र सरकार को विफल बताया।  

वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अग्निपथ योजना को देश के युवाओं के साथ छलावा करार देते हुए कहा कि अग्निपथ किसी भी तरह से देशहित में नहीं है। मोदी सरकार युवाओं को रोजगार देने नहीं छीनने आई है। मोदी सरकार ने जो 2 करोड़ रोजगार देने की घोषणा की थी उसका क्या हुआ। अब अग्निपथ के नाम पर 4 साल सेना में काम करने का मौका मिलेगा तो सवाल है कि चार साल के बाद वे युवा क्या करेंगे। देश के युवाओं और सेना दोनों के लिए अग्निपथ हितकर नहीं है।


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Jun 22 2022, 09:52

बड़ी खबर : बिहार की भिक्षावृत्ति निवारण योजना मॉडल के रुप में हुआ स्वीकार, योजना को केंद्र ने अपनाया

डेस्क : बिहार सरकार की भिक्षावृति निवारण योजना को लेकर एक बड़ी खबर है। बिहार की इस योजना को केन्द्र सरकार ने मॉडल के रूप में स्वीकार कर लिया है। यही नहीं 10 राज्यों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने की योजना पर काम भी शुरू कर दिया है। यह जानकारी राज्य योजना पर्षद के उपाध्यक्ष व योजना विकास मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने दी है।

उन्होंने बताया कि बिहार मॉडल को पटना के अलावा मुंबई, चेन्नई, भोपाल, लखनऊ, कोलकाता, दिल्ली, इंदौर, नागपुर, हैदराबाद में इस योजना का कार्यान्वयन किया जाएगा। इस योजना के तहत पायलट प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन के आधार पर केन्द्र सरकार द्वारा एक नयी योजना ‘स्माइल’ शुरू की गयी है।

इसके पहले यादव ने समाज कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं-परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में मौजूद विभाग के सचिव प्रेम सिंह मीणा ने बताया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत 10.65 लाख लाभुकों में से 82.95 लाख को डीबीटी के माध्यम से मासिक पेंशन दी जा रही है। शेष 20 लाख लाभार्थियों के जीवन प्रमाणीकरण के लिए डोर टू डोर भौतिक सत्यापन का कार्य किया जा रहा है। 

पोषण के लिए जागरूकता लाने के लिए पोषण माह का आयोजन किया गया, जिसमें 2.18 करोड़ गतिविधियों का संचालन किया गया।


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Jun 22 2022, 09:50

शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी का प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय को स्पष्ट निर्देश, यूजी और पीजी का परीक्षा लेकर सत्र को हर हाल में करें नियमित

डेस्क : प्रदेश के विश्वविद्यालयों में सेसन को रेग्यूलर करने को लेकर शिक्षा विभाग सख्त हो गया है। इसे लेकर प्रदेश के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने प्रदेश के सभी 13 परंपरागत विश्वविद्यालयों को दो टूक कहा है कि स्नातक और स्नातकोत्तर (यूजी व पीजी) के सत्र को हर हाल में अद्यतन करें। इसके लिए उन्हें दिसम्बर तक का समय दिया गया है।

शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने मंगलवार को विभागीय सभागार में अपनी अध्यक्षता में समीक्षा बैठक की। इस बैठक में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह, सचिव असंगबा चुबा आओ, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. रेखा कुमारी के अलावा सभी विवि के कुलपति, कुलसचिव एवं परीक्षा नियंत्रक शामिल हुए। 

बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री ने सभी विश्वविद्यालयों से कहा कि परीक्षाएं, कक्षाएं व परीक्षाएं ससमय, नियमित चलें। यूजी-पीजी तथा व्यवसायिक पाठ्यक्रमों के लंबित बैकलॉग सत्रों को नियमित करते हुए शैक्षणिक सत्र 2021-22 तक लंबित शैक्षणिक सत्रों की परीक्षा का आयोजन एवं परीक्षाफल का प्रकाशन दिसम्बर 2022 तक करना सुनिश्चित करें ताकि सभी विश्वविद्यालयों के सत्र को नियमित किया जा सके। इस दौरान मंत्री ने सभी कुलपतियों को 9 सितम्बर 2021 को राज्यपाल सह कुलाधिपति के निर्देश की भी याद दिलाई।

समीक्षा बैठक में मंत्री श्री चौधरी ने विश्वविद्यालयों और विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया। सभी लंबित मामलों को समन्वय से शीघ्र निपटाने को कहा। विभाग से मांगी गई सूचनाओं को शीघ्र उपलब्ध कराएं। नैक मान्यता को लेकर विश्वविद्यालयों को सुस्ती तोड़ने को कहा गया। 

जेपी छपरा, वीकेवीएस आरा, बीएन मंडल मेधपुरा, नालंदा खुला विवि पटना, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, मुंगेर विश्वविद्यालय, पूर्णिया विश्वविद्यालय को नैक मान्यता की पहल करने का निर्देश दिया गया। बैठक में लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र को लेकर भी नाराजगी जाहिर की गई। अरवल, बांका, गोपालगंज, शिवहर, लखीसराय में इसी सत्र से पीजी की पढ़ाई आरंभ होगी। अबतक इससे वंचित इन पांच जिलों के आधारभूत संरचना वाले कालेज से शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव मांगा है ताकि 2022-24 से से ही यहां स्नातकोत्तर की पढ़ाई प्रारम्भ हो सके।


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Jun 21 2022, 19:47

अग्निपथ के विरोध में हुए हिंसा और हंगामे पर मंत्री रामसूरत राय का बड़ा बयान, कहा- इस आंदोलन के पीछे आतंकवादी और राजनैतिक गुंडों का हाथ

डेस्क : केन्द्र सरकार द्वारा सेना में भर्ती की ऩई योजना अग्निपथ को लेकर पूरे देश में घमासान जारी है। बीते दिनों इसके विरोध में भारी हंगामा और हिंसा हुई। इधर बिहार में भी जमकर बबाल हुआ और कई जगहों पर तोड़-फोड और ट्रेनें जलाई गईं।

इधर इस हंगामें के लिए बिहार सरकार के भू-राजस्व मंत्री व बीजेपी नेता रामसूरत राय ने विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया है। आज मंगलवार को मुजफ्फरपुर में विश्व योग दिवस समारोह में पहुंचे बीजेपी कोटे से मंत्री रामसूरत राय ने कहा कि राजनैतिक गुंडों ने युवाओं के आन्दोलन पर कब्जा कर लिया है और PM नरेन्द्र मोदी को बदनाम करने के लिए तुच्छ राजनीति हो रही है। वहीं उन्होंने युवाओं के प्रदर्शन में आतंकियों का हाथ होने की भी आशंका जताई। मंत्री ने इसके लिए कांग्रेस पार्टी को जिम्मेदार ठहराया।

मंत्री रामसूरत राय ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस आंदोलन के पीछे अब आतंकवादी और राजनैतिक गुंडों का हाथ है। सेना में जाने के इच्छुक युवक इस योजना को समझ चुके हैं। इसलिए वे अब पीछे हट चुके हैं और अब इसमें आतंकवादी और गुंडे शामिल हो गए हैं। युवाओं की भावना को हथियार बनाकर वे लोग अपनी राजनीति रोटी पका रहे हैं। इन लोगों को देश या छात्रों के भविष्य से कोई मतलब नहीं है।

उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना देश के नौजवानों के लिए बहुत बेहरतरीन और सुनहरा मौका है। नौजवान अपनी राह से भटके नहीं बल्कि इस मौके का लाभ उठाएं। इससे हमारे बच्चों का भविष्य उज्वल होगा। एक सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि नियमों में सशोधन होते रहते हैं इसमें जरूरत पर आगे भी संशोधन हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि हिंसा किसी भी सूरत में देशहित मे नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर पर निशाना साधते हुए कहा कि विरोधियों के पास न दिमाग है और न कोई चश्मा।


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Jun 21 2022, 19:47

24 जून से शुरु होने जा रहे बिहार विधान मंडल के सत्र से पहले विस अध्यक्ष विजय सिन्हा ने की महत्वपूर्ण बैठक, अधिकारियों को दिए कई जरुरी निर्देश

डेस्क : 24 जून, 2022 से बिहार विधान मंडल की सत्र की शुरुआत होने जा रही है। सत्र के दौरान सुरक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था, चिकित्सा, सफाई, पार्किंग सहित अन्य सभी व्यवस्था सुचारू रूप से करने के उद्येश्य से बिहार विधान सभा के अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने आज एक उच्चस्तरीय बैठक विधान सभा के प्रथम तल पर अवस्थित सभागार में आयोजित की। इस बैठक के दौरान विधान सभा अध्यक्ष श्री सिन्हा ने उपस्थित मुख्य सचिव तथा पुलिस महानिदेशक को सभी व्यवस्थायें चाक-चौबंद कर लेने का निर्देश दिया।

बैठक में उन्होंने कहा कि विधायक लोकतंत्र के सजग प्रहरी हैं। जनप्रतिनिधि होने के कारण उन्हें जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए कदम उठाना पड़ता है। प्रश्न पूछना उनका महत्वपूर्ण विधायी अधिकार है। ऐसे में कार्यपालिका में बैठे पदाधिकारी हर हाल में सदस्यों द्वारा पूछे जा रहे प्रश्नों का शत-प्रतिशत उत्तर चलते सत्र में प्राथमिकता से उपलब्ध कराने में सरकार को सहयोग करें।

17वीं बिहार विधान सभा में सदस्यों के द्वारा पूछे गये कतिपय प्रश्नों के उत्तर सभा सचिवालय को अबतक नहीं उपलब्ध कराने वाले विभिन्न विभागों के दोषी पदाधिकारियों को चिन्हित कर सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई कर इससे उन्हें भी अवगत कराये। प्रश्नों के उत्तर को अबतक नहीं भेजा जाना घोर लापरवाही और बिहार की जनता के प्रति गैर जवाबदेही मानी जायेगी। इसे किसी भी प्रकार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। लोकसेवकों को विधायिका की गरिमा तथा मर्यादा को बढ़ाने और उनके मान-सम्मान के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल के निर्देशों का पालन नहीं करना अनुशासनहीनता मानी जायेगी।

विधान सभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने बैठक में कहा कि विधानमंडल परिसर सुरक्षा के दृष्टिकोण से अतिसंवेदनशील स्थल है। इसकी सुरक्षा में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने का निर्देश मुख्य सचिव तथा पुलिस महानिदेशक को दिया तथा इसके लिए स्वीकृत सुरक्षा बल को पूर्णरूपेण प्रतिनियुक्त करने का निदेश भी उन्हें दिया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूर्ण नशाबंदी की पक्षधर है। ऐसे में चलते सत्र के दौरान प्रशासन विधानमंडल परिसर में प्रतिनियुक्त सुरक्षाकर्मियों सहित अन्य कर्मियों तथा पदाधिकारियों की प्रतिदिन रैंडम जॉच करे तथा इसकी जाँच रिपोर्ट से सभा सचिव को अवगत कराये।