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Oct 10 2021, 14:05

पूरी तरह डिजिटल होगी इस बार हज़ यात्रा की प्रक्रिया, 2020-21 में आवेदन करने वाली महिलाओं को फिर से मिलेगा मौका





डेस्क: दो साल से हज यात्रा की राह देख रहे लोगों के लिए खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने इस साल हज यात्रा के लिए तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने मुंबई स्थित हज हाउस में ऑनलाइन बुकिंग केंद्र के उद्घाटन के दौरान कहा कि भारत में 2022 की हज यात्रा की पूरी प्रक्रिया 100 प्रतिशत डिजिटल होगी। हालांकि, इसकी घोषणा 21 अक्तूबर को होने वाली समीक्षा बैठक के बाद की जाएगी। 


नकवी ने बताया कि इस बैठक में अल्पसंख्यक मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं नागर विमानन मंत्रालय के अधिकारी, सऊदी अरब में भारत के राजदूत, जेद्दा में भारत के महावाणिज्यदूत और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। 


20-2021 में आवेदन करने वाली महिलाओं को मिलेगा मौका

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 2020 व 2021 में कोरोना के चलते हज यात्रा नहीं हो पाई थी। 2020 में 700 से अधिक महिलाओं ने 'मेहरम’ (पुरुष साथी) के बिना आवेदन किया था। वहीं 2021 में 2100 से अधिक महिलाओं के आवेदन आए थे। इन महिलाओं को 2022 में हज यात्रा का दोबारा मौका दिया जाएगा, अगर वे यात्रा पर जाना चाहेंगी। 

इंडोनेशिया के बाद सबसे ज्यादा भारत से जाते हैं यात्री

मंत्री ने बताया कि भारत से बड़ी संख्या में लोग हज यात्रा को जाते हैं। इंडोनिशिया से सबसे ज्यादा यात्री जाते हैं, इसके बाद दूसरा नंबर भारत का है। यहां से सबसे ज्यादा संख्या में हज यात्री भेजे जाते हैं। 

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Oct 10 2021, 12:18

कोरोना अपडेट: 208 दिनों बाद मिले सबसे कम सक्रिय मरीज, बीते 24 घंटे में 18166 मामले, 214 लोगों की मौत



डेस्क: देश में त्यौहारों के बीच जहां कोरोना के मामले रविवार को भी 20 हजार से नीचे आए हैं, वहीं सक्रिय मरीजों की संख्या भी 208 दिनों के बाद सबसे कम आई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़े के मुताबिक बीते 24 घंटों के दौरान कोरोना के 18,166 नए मामले सामने आए हैं और 214 लोगों की मौत हुई है। हालांकि इस दौरान 23,624 लोग स्वस्थ भी हुए हैं। वहीं सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि भारत में अब कोरोना के 2,30,971 सक्रिय मरीज बचे हैं जो कि 208 दिनों में सबसे कम हैं। जबकि रिकवरी दर 97.99 फीसदी दर्ज की गई है, जो मार्च 2020 के बाद से सबसे अधिक है।


शनिवार को आए थे 19,740 नए मामले

 
वहीं शनिवार को बीते 24 घंटे में देशभर में कोरोना के 19,740 नए मामले दर्ज किए गए थे। इससे पहले शुक्रवार को 21 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आए थे। त्यौहार के मौसम में कोरोना के आंकड़े कम आना लोगों के लिए राहत की खबर है। 

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Oct 10 2021, 12:16

*भारत-चीन के बीच 13वें दौर की वार्ता हुई शुरू, सेना की वापसी पर रहेगा जोर*





डेस्क: पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर शांति बहाली के लिए भारत और चीन के बीच उच्च सैन्य स्तर की 13वें दौर की वार्ता रविवार सुबह 10:30 बजे शुरू हो गई। बैठक में भारत तनातनी वाले शेष बिंदुओं से चीनी सेना की पूरी तरह वापसी पर जोर देगा। इसके अलावा डेपसांग और देमचोक के मुद्दे पर भी चर्चा होगी। 

*12वें दौर में 9 घंटे चली थी बातचीत*

31 जुलाई को भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की 12वें दौर की वार्ता हुई थी। यह वार्ता करीब नौ घंटे तक चली थी। इसमें भारत ने पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा व अन्य तनाव वाले स्थानों से सेना व हथियारों को जल्दी हटाने पर जोर दिया गया था। बैठक में दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध खत्म करने पर बातचीत की। चर्चा के दौरान भारत व चीन ने सीमा विवाद को लेकर विस्तार से चर्चा की थी। 


14 जुलाई को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी। उस वक्त दुशांबे में शंघाई सहयोग सम्मेलन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर हुई इस मुलाकात में एलएसी को लेकर चल रहे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। जयशंकर ने कहा था कि स्थिति में एकतरफा परिवर्तन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा था कि सीमा क्षेत्रों में हमारे संबंधों के विकास के लिए शांति और व्यवस्था की पूरी तरह वापसी बहुत जरूरी है। 


दोनों देश पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से अपने-अपने सैनिकों और हथियारों को हटाने की प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। लेकिन, टकराव वाली बाकी जगहों पर सैनिकों को वापस ले जाने की शुरुआत अभी तक नहीं हो पाई है। दोनों के बीच पिछले साल मई से पूर्वी लद्दाख में कुछ स्थानों को लेकर सैन्य गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। 


*एलएसी पर जब तक चीनी सैनिक मौजूद, मोर्चे पर डटे रहेंगे हमारे भी जवान: नरवणे*

बैठक से ठीक एक दिन पहले सेना प्रमुख ने शनिवार को दो टूक कहा कि जब तक चीनी सैनिक वहां मौजूद रहेंगे, तब तक हमारे जवान भी डटे रहेंगे। सेना उनकी हर गतिविधि पर नजर रख रही है और किसी भी हरकत का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने अफगानिस्तान के आतंकियों की घुसपैठ को भी गंभीर मसला बताया। 

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Oct 10 2021, 10:36

पेट्रोलियम सचिव ने बिजली संकट पर दिया जवाब, बवाना और प्रगति स्टेशनों को सभी आवश्यक मात्रा में की जाएगी गैस की आपूर्ति




डेस्क: कोयले की किल्लत ने देश को बड़े बिजली संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। देश के कई राज्यों में बिजली संकट के बादल मंडरा रहे हैं। दिल्ली, पंजाब, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में बिजली का संकट पैदा हो सकता है। इस बिजली संकट को लेकर उर्जा मंत्री की ओर से कारण बताए गए हैं। उर्जा मंत्री ने कहा कि, अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार के कारण बिजली की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि और सितंबर में कोयला खदान क्षेत्रों में भारी वर्षा ने कोयले के उत्पादन को प्रभावित किया है।


बिजली मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि, इसके अलावा आयातित कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते घरेलू कोयले पर निर्भरता बढ़ी है। जिसके चलते बिजली संयंत्रों में कोयले के स्टॉक में कमी देखने को मिली है। बिजली मंत्रालय ने कहा है कि बिजली की दैनिक खपत 4 अरब यूनिट प्रति दिन से अधिक हो गई है और 65-70% मांग कोयले से चलने वाले बिजली सयंत्र से ही पूरी की जा रही है।


मंत्रालय ने कहा कि बिजली मंत्रालय द्वारा गठित कोर मैनेजमेंट टीम (सीएमटी) दैनिक आधार पर कोयले के स्टॉक की बारीकी से निगरानी और प्रबंधन कर रही है और कोल इंडिया लिमिटेड के साथ अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है। इसके साथ यह भी कहा गया है कि भारतीय रेलवे बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति में सुधार करेगा।कोल इंडिया द्वारा कोयले का कुल प्रेषण(डिस्पेच) 7 अक्टूबर को 1.501 मीट्रिक टन तक पहुंच गया।

कोयला और कोल इंडिया मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि वे प्रेषण बढ़ाने के लिए सर्वोत्तम प्रयास कर रहे हैं। अगले 3 दिनों में बिजली क्षेत्र को कोयला डिस्पैच प्रति दिन 1.6 मीट्रिक टन होने की उम्मीद है, बाद में 1.7 मीट्रिक टन प्रति दिन का लक्ष्य है। पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में कोयले की कमी से बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है। कई राज्यों ने तो यहां तक कह दिया है कि अगर जल्द ही मांग पूरी नहीं हुई तो बिजली की किल्लत हो जाएगी।


उधर केंद्रीय ऊर्जा सचिव ने कहा कि, पेट्रोलियम सचिव ने जवाब दिया है कि बवाना और प्रगति स्टेशनों को सभी आवश्यक मात्रा में गैस की आपूर्ति की जाएगी। एनटीपीसी को दादरी और जाज्जर स्टेशनों के लिए राष्ट्रीय औसत के बराबर कोयला स्टॉक बढ़ाने और पूर्ण उपलब्धता देने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि, दिल्ली डिस्कॉम दादरी से बिजली का शेड्यूल नहीं कर रही है क्योंकि वे 25 साल बाद पीपीए से बाहर निकलना चाहती हैं। उन्हें पावर निर्धारित करने की सलाह दी गई है। 

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Oct 10 2021, 09:06

नि:सन्तानों की गोद भरनेवाली स्कन्दमाता का विशेष भोग एवं पूजा-विधि

माता जगतजननी, जगदम्बा भवानी दुर्गा देवी के पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता के रूप में जाना जाता है । इन्हें स्कन्द कुमार कार्तिकेय की जननी के वजह से स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है । कार्तिकेय को पुराणों में कुमार, शौर, शक्तिधर आदि के नाम से भी इनके शौर्य का वर्णन किया गया है । इनका वाहन मयूर है अतः इन्हें मयूरवाहन के नाम से भी जाना जाता है । इन्हीं भगवान स्कन्द की माता होने के कारण दुर्गा के इस पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता कहा जाता है ।
 
नवरात्रि के नव दिनों तक व्रत और उपवास करनेवाले साधक का मन इस दिन अर्थात पांचवें दिन विशुद्ध चक्र में होता है । क्योंकि माता स्कन्दमाता की पूजा नवरात्रि में पांचवें दिन की जाती है । इनके विग्रह में स्कन्द जी बालरूप में माता की गोद में बैठे रहते हैं । स्कन्द मातृस्वरूपिणी देवी की चार भुजायें हैं, ये दाहिनी ऊपरी भुजा में भगवान स्कन्द को गोद में पकड़े हैं और दाहिनी निचली भुजा जो ऊपर को उठी है, उसमें कमल का फुल पकड़ा हुआ है ।

माता का वर्ण पूर्णतः शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं । इसी वजह से इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है परन्तु इनका भी वाहन सिंह ही है । स्कन्द माता की पूजा भक्तों को उनके माता के वात्सल्य से भर देता है । एकाग्रभाव से मन को पवित्र करके माँ की स्तुति करने से समस्त दुःखों से मुक्ति मिलती है तथा व्यक्ति का मोक्ष का मार्ग भी सुलभ हो जाता है ।

रूप और सौंदर्य की अद्वितिय आभा लिए हुए माता अभय मुद्रा में कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं । पद्मासना देवी, विद्यावाहिनी दुर्गा तथा सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी यही स्कन्दमाता ही हैं । इनकी उपासना से साधक अलौकिक तेज पाता है, क्योंकि यही हिमालय की पुत्री पार्वती भी हैं । इन्हें ही माहेश्वरी और गौरी के नाम से जाना जाता है जो अपने पुत्र से अत्यधिक प्रेम करती हैं ।

इनको अपने पुत्र के नाम के साथ संबोधित किया जाना अच्छा लगता है । जो भक्त माता के इस स्वरूप की पूजा करते है मां उस पर अपने पुत्र के समान ही स्नेह लुटाती हैं । स्कंदमाता की पूजा उसी प्रकार से करना चाहिए जैसे अन्य सभी देवियों का पूजन किया जाता है । शुद्ध चित से देवी का स्मरण करना चाहिए तथा पंचोपचार, षोडशोपचार या फिर अपने सामर्थ्य के अनुसार स्कन्दमाता की पूजा करने के पश्चात भगवान शिव जी की पूजा करनी चाहिए ।

जो भक्त देवी स्कन्द माता की भक्ति-भाव सहित पूजन करते हैं उसे देवी की कृपा प्राप्त होती है । देवी की कृपा से भक्त की मुराद पूरी होती है और घर में सुख, शांति एवं समृद्धि सदैव बनी रहती है । वात, पित्त, कफ जैसी बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति को स्कंदमाता की पूजा करनी चाहिए । कुमार कार्तिकेय की माता के रूप में इनकी पूजा करने से माता पूर्णत: वात्सल्य लुटाती हुई नज़र आती हैं ।

माता का पांचवा रूप शुभ्र अर्थात श्वेत है परन्तु जब-जब अत्याचारियों का अत्याचार बढ़ता है तब-तब माता संत जनों की रक्षा के लिए सिंह पर सवार होकर दुष्टों का संहार करने चली आती हैं । शास्त्रों में कहा गया है कि आज के दिन साधकों का मन विशुद्ध चक्र में स्थित होता है, जिससे साधक के मन में समस्त बाह्य क्रियाओं और चित्तवृत्तियों का लोप हो जाता है । साधक ध्यान के माध्यम से चैतन्य स्वरूप की ओर अग्रसर होने लगता है ।

सच्चा साधक अपनी साधना से समस्त लौकिक एवं सांसारिक माया के बन्धनों को त्याग कर वह पद्मासना माँ स्कन्दमाता के रूप में पूर्णतः समाहित हो जाता है । परन्तु साधक को चाहिए की अपने मन को एकाग्र रखते हुए साधना के पथ पर आगे बढे । पंचमी तिथि को स्कन्द माता सामान्य पूजा से ही अपने भक्त को पुत्र के समान स्नेह करती हैं । नि:सन्तान व्यक्ति आज माता का पूजन-अर्चन तथा मंत्र जप करके पुत्रदयिनी माता से पुत्र प्राप्त कर सकते हैं ।

स्कन्दमाता का विशेष भोग:

मारकंडेय पुराण में स्कंदमाता की आराधना का काफी महत्व बताया गया है । इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और भक्त मोक्ष की प्राप्ति करता है ।

नवरात्रि में पंचमी के दिन पूजा करके भगवती स्कंदमाता को केले का भोग लगाना चाहिए । इस प्रसाद को स्वयं ग्रहण न करके किसी श्रेष्ठ ब्राह्मण को देना चाहिए ।

इस प्रकार अपनी परम्परा अनुसार भी यत्र-तत्र माता को भोग समर्पित करने का विधान है । लेकिन विशेष रूप से केले के भोग से माता प्रसन्न होती हैं और भक्तों की समस्त इच्छाओं को पूर्ण करती हैं । 

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Oct 10 2021, 06:25


भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की गुमनाम नायिका, जिसने नहीं लिया देश सेवा का कोई मूल्य

यूं तो भारतीय इतिहास में कई महिलाओं का जिक्र है जिसने अंग्रेजों से लोहा लिया। हालांकि कई नाम ऐसे है, जो उस फेहरिस्त में छूट गए हैं। उमाबाई कुंडापुर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की ऐसी ही एक गुमनाम नायिका हैं। देश जरूर उन वीरांगनाओं के बारे में जानना चाहेगा। नमक सत्याग्रह के समय काफी महिलाओं को जेल में रखा गया था। ऐसी महिलाएं जब जेल से रिहा हुईं तब उनमें से बहुतों को उनके परिवार ने स्वीकार नहीं किया। उमाबाई का घर ही ऐसी महिलाओं का शरणस्थल बना। 

1934 में बिहार में भूकंप के समय उमाबाई और उनकी स्वयंसेवी महिलाओं ने रिफ्यूजी कैंप में जाकर रात-दिन सेवाकार्य किया। इन्हीं दिनों वे प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और आचार्य कृपलानी के संपर्क में भी आईं। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में अपने खराब स्वास्थ्य के कारण वे भाग न ले सकीं। लेकिन उनका घर स्वतंत्रता सेनानियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना रहा। 1946 में महात्मा गांधी ने उन्हें कस्तूरबा ट्रस्ट, कर्नाटक ब्रांच का हेड बनाया। यह ट्रस्ट गांवों से महिलाओं को जोड़ने और उन्हें ग्राम सेविका बनाने के लिए प्रेरित करता था।

स्वतंत्रता मिलने के बाद उन्हें कई तरह के राजनीतिक पद और पुरस्कार देने की पेशकश हुई। उन्होंने देश की सेवा का कभी कोई मूल्य नहीं लिया। उन्होंने एवार्ड, पेंशन तक लेने से इनकार कर दिया। वे बाकी सारी जिंदगी हुबली के एक छोटे से घर ‘आनंद स्मृति’ में रहकर काम करती रहीं और 1992 को वे दुनिया छोड़ गयीं।

उमाबाई कुंडापुर ऐसी योद्धा थी जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के समय न केवल एक बड़े स्वयंसेवी संगठन का गठन किया, बल्कि उन्होंने ऐसी महिलाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ा जो कभी घर से बाहर नहीं निकली थीं। वे इस बात में भाग्यशाली रहीं कि उनकी शादी ऐसे परिवार में हुई, जो महिलाओं के मामले में प्रगतिशील था। इसी के कारण उन्हें ससुराल में पढ़ने-लिखने और काम करने का पूरा मौका मिला। इस अवसर को उन्होंने देश की सेवा में लगा दिया।

उमाबाई का जन्म मैंगलोर में 1892 में गोलिकेरि कृष्णराव और जुंगाबाई के घर हुआ। भवानी गोलिकेरि के नाम के साथ वे तेरह साल की अवस्था तक अपने माता-पिता के घर रहीं। उनकी शादी संजीव राव कुंडापुर से हो गई। अपने श्वसुर आनंद राव कुंडापुर के कारण वे आगे की पढ़ाई कर सकीं। उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा मुंबई के अलेक्जेंडर हाईस्कूल से पास की। शिक्षा पूरी करने के बाद उमाबाई अपने श्वसुर की सहायक के रूप में महिलाओं को पढ़ाने का काम करने लगीं। गौनदेवी महिला समाज के जरिए वे सामाजिक कामों से जुड़ गई थीं। कुछ साल व्यतीत होने के बाद उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। 25 वर्ष की अवस्था में ही उनके पति संजीव राव का देहांत टीबी से हो गया। अपने बेटे की मृत्यु के बाद आनंद राव अपनी पुत्रवधू सहित हुबली में आकर बस गए। यहां उन्होंने कर्नाटक प्रेस की स्थापना की। उन्होंने यहां भी बालिकाओं को शिक्षित करने की मुहिम के तहत तिलक कन्याशाला की स्थापना की। जिसको संवारने का काम उमाबाई ने संभाला।

1924 में स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस के प्रमुख नेता डॉ एनएस हार्डिकर ने युवाओं को संगठित करने के लिए हिन्दुस्तानी सेवा दल का गठन किया। इसी संगठन की महिला विंग की नेता उमाबाई को बनाया गया और उन्होंने यह काम बखूबी संभाला। वे महिलाओं के शारीरिक प्रशिक्षण और ट्रेनिंग के लिए कैम्प लगाती थीं। नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भी उन्होंने बड़ी संख्या में सभी तरह की महिलाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने का काम किया। यहां तक धारवाड़ जैसे पिछड़े इलाके की महिलाएं भी शामिल हुईं। इसी का परिणाम था कि बेलगाम में 1924 के अखिल भारतीय कांग्रेस सम्मेलन में 150 महिलाओं को सेवा के लिए भेजा गया था।

1932 में नमक सत्याग्रह के लिए उमाबाई को गिरफ्तार किया गया और उन्हें चार महीने यरवदा जेल में रखा गया। इसी बीच उनकी प्रेस को गैरकानूनी बताकर बालिका स्कूल सहित सील कर दिया गया। इसी बीच उनके श्वसुर आनंदराव का देहांत हो गया। यह उमाबाई के लिए बड़ी क्षति थी। बचपन से लेकर उन्होंने जो कुछ भी किया वह आनंद राव की छत्रछाया में रहकर ही किया था, वे उनके पथ प्रदर्शक रहे। इसलिए उमाबाई ने उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए उनके ही पदचिन्हों पर चलने का निर्णय लिया। 

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Oct 10 2021, 06:24


भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की गुमनाम नायिका, जिसने नहीं लिया देश सेवा का कोई मूल्य

यूं तो भारतीय इतिहास में कई महिलाओं का जिक्र है जिसने अंग्रेजों से लोहा लिया। हालांकि कई नाम ऐसे है, जो उस फेहरिस्त में छूट गए हैं। उमाबाई कुंडापुर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की ऐसी ही एक गुमनाम नायिका हैं। देश जरूर उन वीरांगनाओं के बारे में जानना चाहेगा। नमक सत्याग्रह के समय काफी महिलाओं को जेल में रखा गया था। ऐसी महिलाएं जब जेल से रिहा हुईं तब उनमें से बहुतों को उनके परिवार ने स्वीकार नहीं किया। उमाबाई का घर ही ऐसी महिलाओं का शरणस्थल बना। 

1934 में बिहार में भूकंप के समय उमाबाई और उनकी स्वयंसेवी महिलाओं ने रिफ्यूजी कैंप में जाकर रात-दिन सेवाकार्य किया। इन्हीं दिनों वे प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और आचार्य कृपलानी के संपर्क में भी आईं। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में अपने खराब स्वास्थ्य के कारण वे भाग न ले सकीं। लेकिन उनका घर स्वतंत्रता सेनानियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना रहा। 1946 में महात्मा गांधी ने उन्हें कस्तूरबा ट्रस्ट, कर्नाटक ब्रांच का हेड बनाया। यह ट्रस्ट गांवों से महिलाओं को जोड़ने और उन्हें ग्राम सेविका बनाने के लिए प्रेरित करता था।

स्वतंत्रता मिलने के बाद उन्हें कई तरह के राजनीतिक पद और पुरस्कार देने की पेशकश हुई। उन्होंने देश की सेवा का कभी कोई मूल्य नहीं लिया। उन्होंने एवार्ड, पेंशन तक लेने से इनकार कर दिया। वे बाकी सारी जिंदगी हुबली के एक छोटे से घर ‘आनंद स्मृति’ में रहकर काम करती रहीं और 1992 को वे दुनिया छोड़ गयीं।

उमाबाई कुंडापुर ऐसी योद्धा थी जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के समय न केवल एक बड़े स्वयंसेवी संगठन का गठन किया, बल्कि उन्होंने ऐसी महिलाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ा जो कभी घर से बाहर नहीं निकली थीं। वे इस बात में भाग्यशाली रहीं कि उनकी शादी ऐसे परिवार में हुई, जो महिलाओं के मामले में प्रगतिशील था। इसी के कारण उन्हें ससुराल में पढ़ने-लिखने और काम करने का पूरा मौका मिला। इस अवसर को उन्होंने देश की सेवा में लगा दिया।

उमाबाई का जन्म मैंगलोर में 1892 में गोलिकेरि कृष्णराव और जुंगाबाई के घर हुआ। भवानी गोलिकेरि के नाम के साथ वे तेरह साल की अवस्था तक अपने माता-पिता के घर रहीं। उनकी शादी संजीव राव कुंडापुर से हो गई। अपने श्वसुर आनंद राव कुंडापुर के कारण वे आगे की पढ़ाई कर सकीं। उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा मुंबई के अलेक्जेंडर हाईस्कूल से पास की। शिक्षा पूरी करने के बाद उमाबाई अपने श्वसुर की सहायक के रूप में महिलाओं को पढ़ाने का काम करने लगीं। गौनदेवी महिला समाज के जरिए वे सामाजिक कामों से जुड़ गई थीं। कुछ साल व्यतीत होने के बाद उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। 25 वर्ष की अवस्था में ही उनके पति संजीव राव का देहांत टीबी से हो गया। अपने बेटे की मृत्यु के बाद आनंद राव अपनी पुत्रवधू सहित हुबली में आकर बस गए। यहां उन्होंने कर्नाटक प्रेस की स्थापना की। उन्होंने यहां भी बालिकाओं को शिक्षित करने की मुहिम के तहत तिलक कन्याशाला की स्थापना की। जिसको संवारने का काम उमाबाई ने संभाला।

1924 में स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस के प्रमुख नेता डॉ एनएस हार्डिकर ने युवाओं को संगठित करने के लिए हिन्दुस्तानी सेवा दल का गठन किया। इसी संगठन की महिला विंग की नेता उमाबाई को बनाया गया और उन्होंने यह काम बखूबी संभाला। वे महिलाओं के शारीरिक प्रशिक्षण और ट्रेनिंग के लिए कैम्प लगाती थीं। नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भी उन्होंने बड़ी संख्या में सभी तरह की महिलाओं को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने का काम किया। यहां तक धारवाड़ जैसे पिछड़े इलाके की महिलाएं भी शामिल हुईं। इसी का परिणाम था कि बेलगाम में 1924 के अखिल भारतीय कांग्रेस सम्मेलन में 150 महिलाओं को सेवा के लिए भेजा गया था।

1932 में नमक सत्याग्रह के लिए उमाबाई को गिरफ्तार किया गया और उन्हें चार महीने यरवदा जेल में रखा गया। इसी बीच उनकी प्रेस को गैरकानूनी बताकर बालिका स्कूल सहित सील कर दिया गया। इसी बीच उनके श्वसुर आनंदराव का देहांत हो गया। यह उमाबाई के लिए बड़ी क्षति थी। बचपन से लेकर उन्होंने जो कुछ भी किया वह आनंद राव की छत्रछाया में रहकर ही किया था, वे उनके पथ प्रदर्शक रहे। इसलिए उमाबाई ने उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए उनके ही पदचिन्हों पर चलने का निर्णय लिया। 

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Oct 09 2021, 22:21



Narcotics Control Bureau summons film producer Imtiyaz Khatri to appear before it today in Mumbai. 

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Oct 09 2021, 22:20

Summoning  who is the son of a politically powerful builder  has given ripples to many in Maharashtra. He is the same Imtiaz Khatri who was seen in a video intimidating our Sushant. This is the biggest crackdown on नशेड़ी गंजेड़ी चरसी lobby till now. Well done . 

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Oct 09 2021, 22:18

According to reports, the company stopped all ads featuring Shah Rukh Khan after it faced backlash on the micro-blogging site.