Howrahnewshindi

Jun 18 2021, 18:53

नारद स्टिंग मामला : कानून मंत्री की याचिका पर सुनवाई 22 को
  


कोलकाता/नयी दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने नारद स्टिंग से जुड़े मामले में सीबीआई द्वारा 17 मई को चार नेताओं की गिरफ्तारी के दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कानून मंत्री मलय घटक की भूमिका पर उनके द्वारा हलफनामा दाखिल करने से कलकत्ता उच्च न्यायालय के इनकार के खिलाफ अपील पर 22 जून को सुनवाई करने का फैसला किया.

न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यन की अवकाशकालीन पीठ ने उच्च न्यायालय से सोमवार को मामले की सुनवाई नहीं करने का अनुरोध किया, लेकिन शीर्ष अदालत आदेश के खिलाफ राज्य सरकार और मलय घटक की अपीलों पर एक दिन बाद विचार करेगी.

पीठ ने आदेश में कहा, ‘‘मंगलवार को सूचीबद्ध करें. सॉलिसिटर जनरल (तुषार मेहता) ने पेश किया है. विशेष अवकाशकालीन याचिकाओं की प्रति उन्हें सौंपी जाये. इस बीच हमें आशा है कि उच्च न्यायालय सोमवार की सुनवाई को बुधवार तक के लिए टाल देगा.’’ कलकत्ता उच्च न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की पीठ ने नौ जून को नारद स्टिंग टेप मामले को सीबीआई की विशेष अदालत से उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने की सीबीआई की अर्जी पर सुनवाई की थी. पीठ ने कहा था कि मामले में चार नेताओं की गिरफ्तारी के दिन ममता बनर्जी और मलय घटक की भूमिकाओं के लिए उनके द्वारा पेश हलफनामे पर विचार करने का बाद में फैसला किया जायेगा.
कानून मंत्री और राज्य सरकार की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी और विकास सिंह ने कहा कि उच्च न्यायालय के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लाना जरूरी है क्योंकि वे 17 मई को संबंधित व्यक्तियों की भूमिका पर विचार कर रहे हैं. श्री द्विवेदी ने कहा कि कानून मंत्री कैबिनेट की बैठक में हिस्सा ले रहे थे और वह सुनवाई के समय अदालत परिसर में नहीं थे. उन्होंने कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारी भी मौके पर नहीं थे क्योंकि एजेंसी के वकील ने डिजिटल तरीके से सुनवाई में हिस्सा लिया.

आरोप लगाया गया है कि राज्य के सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने मामले में 17 मई को चारों नेताओं की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई को अपना वैधानिक कर्तव्य निभाने में अड़चन डालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी. पीठ ने कहा, ‘‘आप आंशिक रूप से सही नहीं हो सकते हैं. यह कहा गया था कि वह (कानून मंत्री) अदालत में थे.’’ श्री द्विवेदी ने कहा, ‘‘सीबीआई ऐसी एजेंसी है जिसका लक्ष्य सच सामने लाना है. वे खुद सीबीआई कार्यालय में थे और डिजिटल तरीके से अदालत को संबोधित किया था. उन्हें नहीं पता था कि अदालत में क्या हुआ है. विधि मंत्री इस पर अदालत को अबतक अवगत नहीं करा पाये हैं.’’ श्री सिंह ने कहा कि नियमों के तहत हलफनामा दाखिल करने का अधिकार है और सीबीआई ने तीन हलफनामे दाखिल किए और अदालत से इसकी अनुमति नहीं ली थी.

उच्च न्यायालय ने नौ जून को ममता बनर्जी और मलय घटक के हलफनामे पर बाद में विचार करने का फैसला किया था. सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि हलफनामों को देरी के आधार पर स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि वे उनकी दलीलें पूरी होने के बाद दायर किए गए थे. नारद स्टिंग टेप मामले को सीबीआई की विशेष अदालत से उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने के लिए दाखिल एक याचिका में मुख्यमंत्री और कानूनी मंत्री को पक्ष बनाया गया है. सीबीआई ने दावा किया था कि चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री कोलकाता में सीबीआई कार्यालय में धरना देने लगीं, वहीं घटक बंशाल अदालत परिसर में मौजूद थे जहां सीबीआई की विशेष अदालत में डिजिटल तरीके से मामले की सुनवाई हो रही थी.

उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने नारद स्टिंग मामले में मंत्री सुब्रत मुखर्जी और फिरहाद हकीम, तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा और कोलकाता के पूर्व मेयर शोभन चटर्जी को गिरफ्तार किया था. उच्च न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई स्थगित कर दी थी और सोमवार को अगली सुनवाई के लिए मामले को सूचीबद्ध किया था. 

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Jun 18 2021, 18:13

चुनाव बाद हिंसा की घटनाओं को लेकर हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को दी चेतावनी
  


–हिंसा की घटनाओं की जांच करेगा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

–राज्य मानवाधिकार आयोग को करनी होगी मदद

कोलकाता. विधानसभा चुनाव बाद राज्य के कई क्षेत्रों में हिंसा की घटनाएं सामने आयी हैं. इन हिंसा की घटनाओं को लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि इन घटनाओं की जांच के लिए राज्य सरकार को मदद करनी होगी. शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय पीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने हाइकोर्ट में जो रिपोर्ट जमा किये हैं, उसमें राज्य सरकार ने हिंसा की घटनाओं से इंकार किया है. लेकिन हमारे पास जो आरोप दर्ज किये गये हैं, उसमें चुनाव बाद राज्य के हिंसा की घटनाओं के सबूत हैं. 

साथ ही हाइकोर्ट ने कहा कि चुनाव बाद हिंसा की वजह से घर छोड़ कर भागे लोगों को वापस लाने के लिए हाइकोर्ट ने केंद्र व राज्य के मानवाधिकार आयोग, स्टेट लीगल सर्विस के प्रतिनिधि को लेकर कमेटी बनायी थी. लेकिन आरोप है कि इस मामले की जांच व लोगों को वापस लाने में राज्य मानवाधिकार आयोग ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का सहयोग नहीं किया. 

हाइकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि हिंसा के मामलों की जांच के लिए राज्य मानवाधिकार आयोग को जांच में पूरा सहयोग करना होगा. हाइकोर्ट ने कहा कि चुनाव बाद हिंसा के मामलों की राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग जांच कर अदालत में रिपोर्ट जमा करेगी और राज्य मानवाधिकार आयोग को इसके लिए पूरी मदद करनी होगी. अगर राज्य सरकार द्वारा इस आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो उनके खिलाफ अदालत अवमानना के तहत कार्रवाई की जायेगी. 

गौरतलब है कि चुनाव बाद हिंसा की वजह से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अभी भी हजारों लोग घर से बाहर हैं. इन लोगों को वापस घर लाने, सुरक्षा प्रदान करने की मांग करते हुए हाइकोर्ट में याचिका दायर की गयी है, जिस पर शुक्रवार को हाइकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय बेंच पर में इस मामले की सुनवाई हुई. इस संबंध में याचिकाकर्ताओं की वकील प्रियंका टिबरेवाल ने हाइकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि हमने बार-बार चुनाव बाद हुई हिंसा व प्रताड़ना को लेकर आवाज उठायी है. राज्य सरकार दावा कर रही थी कि चुनाव बाद हिंसा की घटनाएं नहीं हुई. लेकिन आज उनका झूठ सामने आ गया और हमारी बात सही साबित हुई. जानकारी के अनुसार, स्टेट लीगल सर्विस ने राज्य में चुनाव बाद हिंसा की 3000 से भी अधिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए हाइकोर्ट में रिपोर्ट जमा की है. इसके अलावा हम लोगों ने और भी हिंसा की घटनाओं को लेकर अतिरिक्त हलफनामा जमा किया है. प्रियंका टिबरेवाल ने आगे कहा कि हाइकोर्ट के इस आदेश के बाद अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रतिनिधि बंगाल आयेंगे और राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे. 

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Jun 18 2021, 17:59

शुभेंदु के खिलाफ ममता की याचिका पर 24 जून को होगी सुनवाई,सुनवाई के दिन हाइकोर्ट में उपस्थित रह सकती हैं मुख्यमंत्री
  



कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के बीच नंदीग्राम विधानसभा सीट को लेकर अभी लड़ाई खत्म नहीं हुई. चुनाव बेशक बीत गया है और परिणाम भी सामने आ गया है, लेकिन लड़ाई अभी जारी है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम सीट के लिए हुई मतगणना को चुनौती देते हुए हाइकोर्ट में याचिका दायर की है. कलकत्ता हाइकोर्ट ने विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के नंदीग्राम विधानसभा सीट से निर्वाचन को चुनौती देने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई 24 जून के लिए स्थगित कर दी है. 

ममता बनर्जी के वकील ने न्यायाधीश कौशिक चंदा की पीठ के समक्ष शुक्रवार को मामले को पेश किया. न्यायाधीश कौशिक चंदा ने कहा कि ममता बनर्जी को सुनवाई के पहले दिन पेश होना होगा, क्योंकि यह एक चुनाव से संबंधित याचिका है.

 इस पर ममता बनर्जी के वकील ने कहा कि वह कानून का पालन करेंगी. इस पर अदालत ने मामले पर सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार का दिन तय किया. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने अपनी याचिका में भाजपा विधायक अधिकारी पर जन प्रतिनिधि कानून, 1951 की धारा 123 के तहत भ्रष्ट आचरण अपनाने का आरोप लगाया है. ममता बनर्जी ने याचिका में यह भी दावा किया कि मतगणना प्रक्रिया में विसंगतियां थीं.  

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र से शुभेंदु अधिकारी को विजेता घोषित किया था. पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भारी जीत दर्ज करने वाली सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट पर कभी सहयोगी रहे भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से हार गयी थीं. निर्वाचन आयोग ने बताया था कि नंदीग्राम सीट से शुभेंदु अधिकारी 1,956 मतों से विजयी हुए हैं. आयोग ने पुष्टि की है कि शुभेंदु अधिकारी को 110,764 मत मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी बनर्जी के पक्ष में 108,808 मत पड़े. आधिकारिक नतीजे आने से पहले घंटों तक भ्रम की स्थिति रही, क्योंकि मीडिया के एक धड़े में शुभेंदु अधिकारी पर ममता बनर्जी की जीत की खबर चलने लगी थी.

इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने इसके मद्देनजर मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर दोबारा मतगणना कराने की मांग की थी. हालांकि, चुनाव आयोग ने नंदीग्राम विधानसभा सीट पर फिर से मतगणना कराने के तृणमूल कांग्रेस के अनुरोध को खारिज कर दिया था.

ममता बनर्जी ने ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ और चुनाव आयोग के संबंधित अधिकारी द्वारा दोबारा मतगणना की मांग को ठुकराने का आरोप लगाते हुए नतीजों की घोषणा के बाद कहा था कि इस मुद्दे को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया जायेगा. ममता बनर्जी ने नंदीग्राम के निर्वाचन अधिकारी द्वारा सीईओ कार्यालय को भेजे एक कथित एसएमएस को सार्वजनिक करते हुए दावा किया था कि उन्होंने आशंका जतायी थी कि अगर वह फिर से मतगणना के आदेश देते हैं तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और आत्महत्या तक करनी पड़ सकती है. भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं. 

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Jun 18 2021, 17:55

खून की कमी को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने किया रक्तदान शिविर का आयोजन,मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी सहित 50 ने किया रक्तदान
  


हावड़ा:  ब्लड बैंकों में लगातार खून की कमी को दूर करने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने प्रत्येक विधायकों से रक्तदान शिविर का आयोजन कर खून की किल्लत को दूर करने का आग्रह किया था. विधायकों के पहल पर पिछले रविवार शहर के कई इलाकों में रक्तदान शिविर का आयोजन भी हुआ. बावजूद इसके ब्लड बैंक में खून की कमी बरकरार है. आखिरकार, इस संकट से उबरने के लिए शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी सामने आये और रक्तदान शिविर का आयोजन करते हुए रक्तदान किया. स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच रक्तदान करने के प्रति उत्साह बढ़े, इसके लिए खुद मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी निताई चंद्र मंडल ने रक्तदान करके शिविर का उद्घटान किया. उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा तय किये दिशा-निर्देंशों के अनुसार, सोशल डिस्टैंसिग का पालन करते हुए स्वास्थ्य विभाग के कुल 50 कर्मचारियों ने रक्तदान किया. इन 50 में डॉक्टर भी शामिल थे.

दो वर्षों से खून की कमी बनी हुई है.

खून की कमी से सबसे अधिक परेशानी थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों को होती है. इसके अलावा ऑपरेशन के समय व दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने वाले लोगों को खून की जरूरत पड़ती है. प्रसव के दौरान भी खून की जरूरत पड़ने की संभावना बनी रहती है. यह सच है कि जिले के दो सरकारी ब्लड बैंकों में जरूरत के मुताबिक ब्लड नहीं है. इसी कमी को दूर करने के लिए सभी आयोजकों से अपील की गयी है कि वे रक्तदान शिविर का आयोजन करें. इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी शिविर का आयोजन किया गया. पहले जहां 100-150 लोग रक्तदान करते थे, वह अब कोविड प्रोटोकॉल के तहत घटकर 50 पर पहुंच गया है. कोरोना के डर से 50 लोग भी नहीं पहुंचते हैं. खून की कमी दूर करने के लिए सभी को आगे आने की जरूरत है.
निताई चंद्र मंडल, मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी.

वर्ष 2019 तक ब्लड बैंकों में खून की कमी नहीं थी. यह परेशानी पिछले साल से शुरू हुई है. खून के लिए भटक रहे मरीज के परिजनों को राहत देने के लिए कुछ युवाओं को साथ लेकर पिछले वर्ष व्हाट्सएप ग्रुप (रक्तदाता) बनाया गया. ग्रुप में कई सारे लोगों को जोड़ा भी गया. अब तक इस ग्रुप के माध्यम से 123 डोनर की मदद से कुल 72 मरीजों को खून उपलब्ध कराया गया है. खून की कमी से पूरे जिले में छह थैलेसीमिया से ग्रसित मरीजों की मौत भी हुई है. निश्चित रूप से खून की कमी बड़ी समस्या है.
शुभोजीत दोलई, व्हाट्सएप ग्रुप के सदस्य.


खून की कमी के मुख्य कारण-
वर्ष 2020 के मार्च महीने में लॉकडाउन लागू होते ही रक्तदान शिविर का आयोजन पूरी तरह से बंद हो गया. अगस्त महीने के बाद स्थिति कुछ सामान्य हुई. रक्तदान शिविर का आयोजन शुरू भी हुआ, लेकिन रक्तदाताओं की कमी आयोजकों के लिए परेशानी बन गयी. इसके बाद दुर्गा पूजा की तैयारी शुरू हो गयी. वर्ष 2021 के मार्च व अप्रैल महीने में विधानसभा चुनाव के कारण शिविर का आयोजन नहीं हो सका. चुनाव खत्म होते ही कोरोना की दूसरी लहर ने पूरे देश में कहर बरपा दिया. राज्य सरकार ने फिर से कोरोना पाबंदिया (लॉकडाउन) लागू कर दिया. 
. जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 में पूरे जिले में करीब 90 जगहों पर रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ था. वहीं, वर्ष 2020 के मार्च महीने में लॉकडाउन लागू होते ही शिविर का आयोजन होना बंद हो गया. पिछले वर्ष अगस्त व सितंबर महीने में सिर्फ 20-25 जगहों पर रक्तदान हुए. इस वर्ष भी स्थिति इसी तरह है. अभी रक्तदान शिविर में जाकर खून देने से अधिक लोगों को वैक्सीन लेने की चिंता है. बताया जाता है कि कोविड के लिए वैक्सीन लेने वाला व्यक्ति अगले 14 दिनों तक रक्तदान नहीं कर सकता है. 

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Jun 18 2021, 17:12

दपूरे- यात्रियों का सुरक्षा के लिए रेलवे सुरक्षा बल का सराहनीय प्रदर्शन
  


कोलकाता: दक्षिण पूर्व रेलवे आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) के जवान रेल यात्रियों की सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ रेलवे संपत्ति और उसके महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. वर्ष 2020-21 के दौरान दपूरे के सुरक्षा विभाग ने न केवल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सफलता हासिल की, बल्कि सामाजिक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में भी अहम भूमिका निभाई. 

आरपीएफ ने दपूरे के अधिकार क्षेत्र में रहने वाले 2.5 लाख से अधिक जरूरतमंदों के बीच भोजन और राशन पैकेट वितरित किया. इसके अलावा आरपीएफ की महिला टीम ने 368 नाबालिगों को अपने हिफाजत में लेकर उनके परिजनों को सौंप दिया. 

दपूरे की माई सहेली टीम ने सभी डिविजनों में महिला यात्रियों की यात्रा के दौरान सहायता करने के लिए अग्रणी भूमिका निभा रही है. मालूम रहे कि अकेले यात्रा करते समय महिला यात्रियों और उनके सामान की सुरक्षा के लिए इस विशेष टीम का गठन किया गया है. 

पिछले महीने कुल 42 बदमाशों को गिरफ्तार किया गया था और रेलवे की संपत्ति चोरी करने के आरोप में 1,33,790 रुपये बतौर जुर्माना वसूला गया. 

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Jun 17 2021, 20:43

11,504 बार डुबकी लगाकर इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में नाम किया दर्ज
  



हावड़ा: मध्य हावड़ा के तेलकल घाट के रहने वाले मुकेश गुप्ता तैराकी हैं. 17 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने हुगली नदी में 11,504 बार डुबकी लगाकर इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में अपना नाम दर्ज करा लिया. उन्होंने चार घंटे 10 मिनट 38 सेकेंड में 11 हजार 504 बार डुबकी लगायी. 

गुरुवार को इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स के सदस्य आनंद वेदांत ने मुकेश को प्रमाणपत्र, बुक, मेडल और पेन देकर उन्हें पुरस्कृत किया. इस मौके पर वार्ड 29 के पूर्व पार्षद शैलेश राय उपस्थित थे. 

मुकेश ने बताया कि सुबह सात बजे से उसने डुबकी लगाना शुरू किया और यह रिकार्ड स्थापित किया. इसके लिए वह ढाई महीने से अभ्यास कर रहे थे. इस मौके पर काफी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे. 

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Jun 17 2021, 19:58

95 के बाद 92 साल के वृद्ध ने दी कोरोना को मात
  


हावड़ा:  95 साल की नंदरानी आर्चाय के बाद 92 साल के गोपीनाथ कुंडु ने कोरोना को मात दे दी. वह ग्रामीण हावड़ा के फुलेश्वर स्थित संजीवन अस्पताल में दाखिल थे. 23 दिनों के इलाज के बाद गुरुवार उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया. यह जानकारी अस्पताल के निदेशकर शुभाशीष मित्रा ने दिया. 

डॉ मित्रा ने बताया कि 25 मई को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. वह संक्रमण, बुखार और खांसी से पीड़ित थे. मरीज की उम्र अधिक होने के कारण डॉक्टरों के लिए एक चुनौती थी. प्रोफेसर एस चौधरी, डॉ के बसु रे, डॉ ए सामंत के नेतृत्व में एक टीम गठित की गयी. क्रिटिकल केयर यूनिट में इलाज शुरू हुआ और अंतत 15 जून को उनका कोविड रिपोर्ट निगेटिव आया. दो दिनों तक निरीक्षण में रखने के बाद उन्हें गुरुवार को डिस्चार्ज कर दिया गया. 

उल्लेखनीय है कि मध्यमग्राम की रहने वालीं 95 वर्षीय नंदरानी आचार्य भी कोरोना से पीड़ित हुई थी. मेट्रो रेलवे के तपन सिन्हा मेमोरियल अस्पताल में उन्हें भरती किया गया था और वह भी कोरोना को मात देने में सफल हुई थीं. 

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Jun 17 2021, 19:45

शहर के साथ-साथ रेल पटरियों पर लगा पानी, ट्रेन से उतर कर पैदल स्टेशन पहुंचे यात्री
  


हावड़ा: पिछले दो दिनों से हो रही लगातार बारिश से पूरा शहर फिर से पानी-पानी हो गया. दशकों से जूझ रही जलजमाव की समस्या से शहर को मुक्ति कब मिलेगी, इसका जबाव किसी के पास नहीं है. हालांकि पिछले दिनों मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नगर निगम को जलजमाव की समस्या से निबटने के लिए मास्टर प्लान तैयार करने को कहा है. सीएम के इस निर्देश के बाद निगम आयुक्त धवल जैन ने शहरी विकास व नगरपालिका मामलों की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्या से मुलाकात भी की है, लेकिन वर्षों पुरानी यह समस्या आज भी शहरवासियों के लिए सिरदर्द बनी हुई है. 

बताया जाता है कि नगर निगम के पास शहर के भूमिगत नालों का कोई नक्शा नहीं है. यही कारण है कि जलजमाव की समस्या का निदान स्थायी तौर पर नहीं हो पा रहा है. दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश से सत्यबाला, लिलुआ, इस्ट-वेस्ट बाइपास, पंचान्नतला रोड, टिकियापाड़ा, बेलगछिया, बांधाघाट, बनारस रोड सहित अन्य इलाके घुटने भर पानी में चले गये. 

वहीं दूसरी तरफ, हावड़ा स्टेशन के पहले रेलवे पटरियों पर पानी जमने की खबर है. पटरियों पर पानी जमने से रेल सेवा प्रभावित हुई. स्टाफ स्पेशल लोकल ट्रेनों से हावड़ा जाने वाले यात्री कारशेड के पास ही ट्रेन से उतर गये और रेल पटरी होते हुए पैदल हावड़ा स्टेशन पहुंचे.

 उलबेड़िया में जमीन धंसी-
 उलबेड़िया काली नगर में वर्षा के कारण जमीन धंस गयी. करीब 50 मीटर रास्ते की जमीन धंसने से अफरा-तफरी मच गयी. जमीन धंसने से पांच दुकानें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं. 

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Jun 17 2021, 19:16

आठ स्पेशल ट्रेनों के परिचालन अवधि में हुआ विस्तार
  


कोलकाता: यात्रियों की सुविधा के लिये 30 जून तक आठ स्पेशल ट्रेनों के परिचालन अवधि का विस्तार अगली सूचना तक किया गया है.  इन ट्रेनों के चलने के दिन, ठहराव एवं समय पहले की तरह रहेगा. इसमें सभी कोच आरक्षित श्रेणी के होंगे.

ट्रेनों के नाम-
. 05048/05047, गोरखपुर-कोलकाता-कोलकाता पूजा स्पेशल का का विस्तार 30 जून तक.
. 05050/05049, गोरखपुर-कोलकाता-गोरखपुर स्पेशल का विस्तार 30 जून तक.
. 05052/05051, गोरखपुर-कोलकाता स्पेशल का विस्तार 30 जून तक.
. 05022/05021, गोरखपुर-शालीमार स्पेशल का विस्तार 30 जून तक. 

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Jun 17 2021, 18:52

विदेशी होटल में नौकरी देने का प्रलोभन देकर ठगी,
  


- दूसरे के अकाउंट व फोन नंबर के माध्यम से की  जालसाजी

हावड़ा:  हांगकांग के एक होटल में नौकरी देने का प्रलोभन देकर एक युवक से 53 हजार रुपये की जालसाजी की गयी. ठगी का शिकार होने के बाद युवक थाने पहुंचा और घटना की लिखित शिकायत दर्ज करायी. 

घटना ग्रामीण हावड़ा के उलबेड़िया की है. जिला पुलिस की साइबर क्राइम डिविजन मामले की जांच में जुटी है. हालांकि अभी तक जालसाजों को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है. पुलिस का प्राथमिक अनुमान है कि इस जालसाजी के पीछे झारखंड का जामताड़ा गैंग शामिल है.

क्या है घटना- 
 25 वर्षीय युवक का घर पूर्व बर्दवान के माधबडीही में है. वह उलबेड़िया में अपने दोस्त के घर रहता है. कोरोना काल में नौकरी चली गयी. नौकरी की तलाश में उसने एक वेबसाइट पर हांगकांग के एक होटल में नौकरी का आवदेन देखा. दिये गये फोन नंबर पर उसने संपर्क साधा. नौकरी तय हो गयी. सर्विस चार्ज के तौर पर युवक को 53 हजार रुपये देने के लिए कहा गया. युवक ने तीन किस्तों में रुपये का भुगतान कर दिया. कुछ दिनों के बाद युवक को हांगकांग का वीजा और होटल में नौकरी का नियुक्ति पत्र भेजा गया. 

युवक ने बताया कि इससे पहले होटल के अधिकारियों ने उसका 'वर्चुअल' तरीके से साक्षात्कार भी लिया था. वीजा को देखकर युवक को शक हुआ. उसने भारतीय विदेश कार्यालय की वेबसाइट पर जाकर वीजा के सत्यापन की पुष्टि की, तभी उसे पता चला कि वह ठगी का शिकार हुआ है. उसका नाम वीजा की सूची में नहीं था. 

बिना देर किये उसने नियुक्ति और वीजा भेजने वाली उक्त एजेंसी से संपर्क किया और कहा कि उसे नौकरी की जरूरत नहीं है. 53 हजार रुपये उसे लौटा दिये जायें. एजेंसी ने रुपये लौटने से इंकार कर दिया और इसके कुछ देर बाद ही फोन स्वीच ऑफ हो गया. ठगी का शिकार होते ही उसने उलबेड़िया थाने में शिकायत दर्ज करायी. मामले की गंभीरता को देखते हुए  साइबर क्राइम डिवीजन को जांच का जिम्मा सौंप दिया गया. 

 जांच करने उतरी पुलिस को पता चला कि जालसाजों ने युवक को फोन नंबर से 'गूगल पे' के माध्यम से रुपये भेजने को कहा था. फोन नंबर के आधार पर पुलिस को पता चला कि कोलकाता के मटियाब्रुज के रहने वाले एक व्यक्ति के अकाउंट में रुपया ट्रांसफर हुआ था. पुलिस ने उस व्यक्ति के पास पहुंची. पूछताछ के दौरान उसने पुलिस को बताया कि उसके अकाउंट में इतने रुपये कैसे व कहां से आ गये, इसके बारे में उसे कुछ नहीं पता. उसने बताया कि 53 हजार रुपये अकाउंट में आने के बाद तुरंत एक व्यक्ति ने फोन किया और कहा कि गलती से उसके खाते में रुपया ट्रांसफर हो गया है. रुपये नहीं लौटाने पर वह पुलिस लेकर पहुंच जायेगा. फोन करने वाले व्यक्ति ने रुपये लौटाने के लिए उससे डेबिट कार्ड का नंबर मांगा. उसने डेबिट कार्ड का नंबर बता दिया. नंबर बताते ही उसके अकाउंट से 53 हजार रुपये निकल गये. पुलिस के मुताबिक, जालसाजों ने दूसरों के अकाउंट नंबर और फोन नंबर के हवाले से जालसाजी करने में कामयाब हो गये. पुलिस जालसाजों की तलाश में जुटी है.