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Jun 08 2021, 16:18

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पूर्वी लद्दाख में चीन फिर कर रहा सैन्य अभ्यास,  हर हरकत पर है भारत की नजर

पूर्वी लद्दाख में हिंसक संघर्ष के बाद भारत-चीन के बीच जारी गतिरोध करीब एक साल से जारी है। तनाव को कम करने के लिए कई चरणों की कूटनीतिक और सैन्य स्तर की बातचीत हो चुकी है। हालांकि इसका कोई हल नहीं निकला है। अब इस  गतिरोध के बीच चीन की वायुसेना ने पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा से थोड़ी दूर एयरबेस पर सैन्य अभ्यास किया। पिछले दिनों किए गए इस सैन्य अभ्यास में चीन के 20 से 22 लड़ाकू विमान शामिल रहे।

चीनी वायुसेना का यह सैन्य अभ्यास काशगर, होटान, गार गुंसा हवाई अड्डों से संचालित किया गया। भारतीय सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस सैन्य अभ्यास के दौरान चीन के लड़ाकू विमान अपनी ही सीमा में रहे. फिर भी भारतीय पक्ष इस पर लगातार नजर बनाए रहा।

गौरतलब है कि चीन से लगती सीमा पर भारतीय वायुसेना ने भी अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। मिग-29 विमानों समेत अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों को नजदीकी एयरबेस पर तैनात कर दिया गया है। समय-समय पर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान भी सीमा के इस तरफ उड़ान भरते रहते हैं। इस तरह की कवायद बीते एक साल खासकर पूर्वी लद्दाख के हिंसक संघर्ष के बाद बढ़ गई है।

एएनआई के सूत्रों के मुताबिक, चीनी सेना के लोग सालों से यहां गर्मियों में सैन्य अभ्यास करते आ रहे हैं। पिछले साल भी उन्हें इस दौरान यहां अभ्यास करते पाया गया था, लेकिन फिर वो यहां से आक्रामक तरीके से पूर्वी लद्दाख की ओर बढ़ गए थे। फिलहाल चीनी सेना अपने पुराने हिस्से तक सीमित है जिसमें कई जगह फासला 100 किलोमीटर से ज्यादा भी है। सूत्रों का कहना है कि ये खबर इसलिए भी अहमियत रखती है क्योंकि आपसी संधि के बाद पैंगोंग सो झील से दोनों ही मुल्कों ने अपनी सेना को वापस बुलाया लिया था और तब से ही गोगरा हाइट्स सहित हॉट स्प्रिंग के कई इलाकों, टकराव के विषयों को लेकर दोनों ही देशों के बीच बातचीत का दौर जारी है।

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Jun 08 2021, 16:18

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पूर्वी लद्दाख में चीन फिर कर रहा सैन्य अभ्यास,  हर हरकत पर है भारत की नजर

पूर्वी लद्दाख में हिंसक संघर्ष के बाद भारत-चीन के बीच जारी गतिरोध करीब एक साल से जारी है। तनाव को कम करने के लिए कई चरणों की कूटनीतिक और सैन्य स्तर की बातचीत हो चुकी है। हालांकि इसका कोई हल नहीं निकला है। अब इस  गतिरोध के बीच चीन की वायुसेना ने पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा से थोड़ी दूर एयरबेस पर सैन्य अभ्यास किया। पिछले दिनों किए गए इस सैन्य अभ्यास में चीन के 20 से 22 लड़ाकू विमान शामिल रहे।

चीनी वायुसेना का यह सैन्य अभ्यास काशगर, होटान, गार गुंसा हवाई अड्डों से संचालित किया गया। भारतीय सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस सैन्य अभ्यास के दौरान चीन के लड़ाकू विमान अपनी ही सीमा में रहे. फिर भी भारतीय पक्ष इस पर लगातार नजर बनाए रहा।

गौरतलब है कि चीन से लगती सीमा पर भारतीय वायुसेना ने भी अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। मिग-29 विमानों समेत अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों को नजदीकी एयरबेस पर तैनात कर दिया गया है। समय-समय पर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान भी सीमा के इस तरफ उड़ान भरते रहते हैं। इस तरह की कवायद बीते एक साल खासकर पूर्वी लद्दाख के हिंसक संघर्ष के बाद बढ़ गई है।

एएनआई के सूत्रों के मुताबिक, चीनी सेना के लोग सालों से यहां गर्मियों में सैन्य अभ्यास करते आ रहे हैं। पिछले साल भी उन्हें इस दौरान यहां अभ्यास करते पाया गया था, लेकिन फिर वो यहां से आक्रामक तरीके से पूर्वी लद्दाख की ओर बढ़ गए थे। फिलहाल चीनी सेना अपने पुराने हिस्से तक सीमित है जिसमें कई जगह फासला 100 किलोमीटर से ज्यादा भी है। सूत्रों का कहना है कि ये खबर इसलिए भी अहमियत रखती है क्योंकि आपसी संधि के बाद पैंगोंग सो झील से दोनों ही मुल्कों ने अपनी सेना को वापस बुलाया लिया था और तब से ही गोगरा हाइट्स सहित हॉट स्प्रिंग के कई इलाकों, टकराव के विषयों को लेकर दोनों ही देशों के बीच बातचीत का दौर जारी है।

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Jun 08 2021, 15:47

guidelinesforcovidvaccination
  

राज्यों को आबादी और मरीजों के हिसाब से मिलेगी वैक्सीन, कोविड टीकाकरण की नई गाइडलाइंस जारी

केंद्र सरकार की ओर से 21 जून से लागू होने वाले राष्ट्रीय कोविड टीकाकरण के लिए संशोधित गाइडलाइन जारी किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एलान के ठीक एक दिन बाद भारत सरकार ने टीकाकरण अभियान की नई गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। नई गाइडलाइंस के मुताबिक, केंद्र सरकार वैक्सीन निर्माता कंपनियों से 75 फीसदी वैक्सीन खरीद कर मुफ्त में राज्यों को देगी। हालांकि निजी अस्पतालों के लिए वैक्सीन की कीमत दवा बनाने वाली कंपनियां ही तय करेंगी।

इस संशोधित गाइडलाइन में कहा गया है कि केंद्र की ओर से राज्यों को आबादी, संक्रमण और वैक्सीनेशन की रफ्तार के आधार पर टीकों का आवंटन किया जाएगा। संशोधित गाइडलाइन में जो प्रमुख बातें कही गई हैः उसमे-
-जनसंख्या के आधार पर होगा वैक्सीन का निर्धारण। इसका मतलब जिस राज्य की जनसंख्या अधिक होगी वहां अधिक वैक्सीन दी जाएगी।
-राज्य में कोराना का संक्रमण कितना है यह भी वैक्सीन निर्धारित करने का पैमाना होगा। जहां कोरोना अधिक उस राज्य को वैक्सीन अधिक दी जाएगी।
-वैक्सीन की बर्बादी को लेकर खास हिदायत दी गई है। जिस राज्य में टीकों की बर्बादी ज्यादा होगी उस राज्य में डोज कम दी जा सकती है।
-प्राइवेट हॉस्पिटल में मिलने वाली वैक्सीन को लेकर कहा गया है कि यहां वैक्सीन निर्माता कंपनियां कीमत निर्धारित करेंगी।
-राज्यों को इस बात की छूट दी गई है कि 18 साल से अधिक आयु वर्ग के लिए प्रॉयरिटी अपने हिसाब से तय कर सकते हैं।


बता दें कि पुरानी नीति के मुताबिक केंद्र सरकार 50 फीसदी वैक्सीन खरीदती थी लेकिन अब 75 फीसदी खरीदेगी। पुरानी नीति के मुताबिक, 25 फीसदी राज्यों को वैक्सीन खरीदनी होती थी लेकिन नई नीति के मुताबिक, राज्य अब वैक्सीन नहीं खरीदेंगे। हालांकि निजी अस्पतालों के लिए नई नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 

नई नीति के मुताबिक क्या बदलेगा? 
-केंद्र सरकार जितनी खुराकें खरीदती थी, उनमें से 50 फीसदी प्राथमिकता समूह और 45+ आयु वालों के लिए राज्य को देती थी लेकिन 50 फीसदी की जगह 75 फीसदी वैक्सीन मुफ्त में दी जाएगी। इसके तहत 18+ लोगों को भी वैक्सीन मुफ्त में लगाई जाएगी।
-एक मई तक राज्यों को 18+ लोगों के लिए वैक्सीन खुद से बाजार से खरीदनी होती थी लेकिन अब केंद्र सरकार मुफ्त में राज्यों को भी वैक्सीन मुहैया कराएगी। 
-45+ आयु के लोगों को मुफ्त में वैक्सीन लगाने का फायदा मिलता रहेगा, लेकिन  निजी अस्पताल में लगवाने के लिए पहले की तरह पैसों के भुगतान करना होगा। 
-18-44 उम्र के लोग 21 जून से सरकारी केंद्रों पर मुफ्त में वैक्सीन लगवा सकेंगे। हालांकि निजी अस्पतालों में पैसे चुकाने होंगे। 


बता दें कि सोमवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में पीएम ने कहा कि पूरे देश में 18 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों के वै

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Jun 08 2021, 14:52

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आगरा के एक अस्पताल में ऑक्सीजन मॉक ड्रिल, 22 कोरोना मरीजों की मौत के बाद उठ रहे सवाल ?

क्या ये सामूहिक नरसंहार नहीं है ?

इस कोरोना काल में सरकारों से लेकर अस्पताल प्रबंधन तक की खामिया उजागर हुई है। कोरोना का कोई इलाज नहीं है, ये सोचकर खूब प्रयोग किए गए। कभी कोई दवा कोरोना मरीजों के लिए वरदार साबित हो रही थी, तो अचानक उसके प्रभाव नहीं देखे जाने लगे। ऐसा प्लाज्मा से लेकर रेमडिसीवर तक के साथ हुआ। ऐसे ही एक मामला उत्तर प्रदेश से सामने आया है, जहां कथित तौर पर मरने वालों की पहचान करने के लिए मॉक ड्रिल किया गया।

उत्तर प्रदेश के आगरा के पारस अस्पताल में 26 अप्रैल को कोरोना संक्रमित 22 मरीजों के मारे जाने की घटना को बयान करते डॉक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। अस्पताल में 5 मिनट के लिए मॉक ड्रिल के तौर पर ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर दी थी। कथित वीडियो में सुना जा सकता है कि अस्पताल मालिक ने ऐसा करने के पीछे उन मरीजों की पहचान करने को वजह बताया, जिनकी बिना ऑक्सीजन के मौत हो सकती है। अब इस पूरे मामले में जांच की बात कही गई है।

अस्पताल मालिक के कथित वीडियो क्लिप में वो कहता हुआ सुनाई दे रहा है
“हमें ये बताया गया कि मुख्यमंत्री तक को ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है, इसीलिए हमने मरीजों को डिस्चार्ज करना शुरू कर दिया। हमने परिवारों को समझाना शुरू किया। इनमें से कुछ लोग मान गए, लेकिन कुछ ऐसे थे जिन्होंने कहा कि वो नहीं जाएंगे। तो मैंने कहा कि ठीक है एक मॉक ड्रिल करते हैं। हम पता लगाएंगे कि कौन मर सकता है और कौन जिंदा रहेगा। तो हमने सुबह 7 बजे एक मॉक ड्रिल किया। किसी को पता नहीं चला। इसके बाद हमने 22 मरीजों की पहचान की, हमें लगा कि इनकी मौत हो सकती है। ये 5 मिनट तक की गई। वो सभी नीले पड़ने लगे थे।”

सरकार करेगी मामले की जांच
इस वीडियो के सामने आने के बाद हडकंप मच गया है। उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन दबाव में हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा कि उन्हें पारस अस्पताल में ऑक्सिजन मुहैया किए जाने में हुई समस्या की शिकायत मिली है। इसकी जांच की जा रही है। वहीं, जिले के डीएम ने कहा कि 26 अप्रैल को पारस अस्पताल में सात मरीजों की ही मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में उस दिन 22 गंभीर मरीज भर्ती थे, लेकिन उन सबकी मौत का कोई डीटेल नहीं है। उन्होंने वायरल वीडियो की जांच किए जाने की भी बात कही है।

अस्पताल प्रबंधन की सफाई
अब इस घटना के सामने आने के बाद और जांच शुरू होने के बाद अस्पताल के मालिक ने अपनी सफाई में कहा कि, हम ऑक्सीजन की किल्लत को दूर करने की कोशिश कर रहे थे। अप्रैल के तीसरे हफ्ते में जब ऑक्सीजन की कमी थी तो हम मरीजों की पहचान कर रहे थे। कौन सा मरीज हाई फ्लो कर रहा है, कौन सा लो फ्लो कर रहा है। मॉक ड्रिल का मतलब किसी घटना के लिए एहतियात बरतना होता है। इसमें हमन

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Jun 08 2021, 14:52

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आगरा के एक अस्पताल में ऑक्सीजन मॉक ड्रिल, 22 कोरोना मरीजों की मौत के बाद उठ रहे सवाल ?

क्या ये सामूहिक नरसंहार नहीं है ?

इस कोरोना काल में सरकारों से लेकर अस्पताल प्रबंधन तक की खामिया उजागर हुई है। कोरोना का कोई इलाज नहीं है, ये सोचकर खूब प्रयोग किए गए। कभी कोई दवा कोरोना मरीजों के लिए वरदार साबित हो रही थी, तो अचानक उसके प्रभाव नहीं देखे जाने लगे। ऐसा प्लाज्मा से लेकर रेमडिसीवर तक के साथ हुआ। ऐसे ही एक मामला उत्तर प्रदेश से सामने आया है, जहां कथित तौर पर मरने वालों की पहचान करने के लिए मॉक ड्रिल किया गया।

उत्तर प्रदेश के आगरा के पारस अस्पताल में 26 अप्रैल को कोरोना संक्रमित 22 मरीजों के मारे जाने की घटना को बयान करते डॉक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। अस्पताल में 5 मिनट के लिए मॉक ड्रिल के तौर पर ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर दी थी। कथित वीडियो में सुना जा सकता है कि अस्पताल मालिक ने ऐसा करने के पीछे उन मरीजों की पहचान करने को वजह बताया, जिनकी बिना ऑक्सीजन के मौत हो सकती है। अब इस पूरे मामले में जांच की बात कही गई है।

अस्पताल मालिक के कथित वीडियो क्लिप में वो कहता हुआ सुनाई दे रहा है
“हमें ये बताया गया कि मुख्यमंत्री तक को ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है, इसीलिए हमने मरीजों को डिस्चार्ज करना शुरू कर दिया। हमने परिवारों को समझाना शुरू किया। इनमें से कुछ लोग मान गए, लेकिन कुछ ऐसे थे जिन्होंने कहा कि वो नहीं जाएंगे। तो मैंने कहा कि ठीक है एक मॉक ड्रिल करते हैं। हम पता लगाएंगे कि कौन मर सकता है और कौन जिंदा रहेगा। तो हमने सुबह 7 बजे एक मॉक ड्रिल किया। किसी को पता नहीं चला। इसके बाद हमने 22 मरीजों की पहचान की, हमें लगा कि इनकी मौत हो सकती है। ये 5 मिनट तक की गई। वो सभी नीले पड़ने लगे थे।”

सरकार करेगी मामले की जांच
इस वीडियो के सामने आने के बाद हडकंप मच गया है। उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन दबाव में हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा कि उन्हें पारस अस्पताल में ऑक्सिजन मुहैया किए जाने में हुई समस्या की शिकायत मिली है। इसकी जांच की जा रही है। वहीं, जिले के डीएम ने कहा कि 26 अप्रैल को पारस अस्पताल में सात मरीजों की ही मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में उस दिन 22 गंभीर मरीज भर्ती थे, लेकिन उन सबकी मौत का कोई डीटेल नहीं है। उन्होंने वायरल वीडियो की जांच किए जाने की भी बात कही है।

अस्पताल प्रबंधन की सफाई
अब इस घटना के सामने आने के बाद और जांच शुरू होने के बाद अस्पताल के मालिक ने अपनी सफाई में कहा कि, हम ऑक्सीजन की किल्लत को दूर करने की कोशिश कर रहे थे। अप्रैल के तीसरे हफ्ते में जब ऑक्सीजन की कमी थी तो हम मरीजों की पहचान कर रहे थे। कौन सा मरीज हाई फ्लो कर रहा है, कौन सा लो फ्लो कर रहा है। मॉक ड्रिल का मतलब किसी घटना के लिए एहतियात बरतना होता है। इसमें हमन

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Jun 08 2021, 13:03

56 साल की आशीष लता रामगोबिन को डरबन की एक अदालत ने 62 लाख रुपये जालसाजी में सात साल की सजा सुनाई,आशीष लता  महात्मा गांधी की परपोती हैं  
  


डरबन। दक्षिण अफ्रीका में रह रही महात्मा गांधी की परपोती को फर्जीवाड़े के आरोप में जेल भेज दिया गया। 56 साल की आशीष लता रामगोबिन को डरबन की एक अदालत ने उन्हें 62 लाख रुपये की धोखाधड़ी और जालसाजी मामले में सात साल जेल की सजा सुनाई है।  

कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया जिसमें आशीष लता रामगोबिन को दोषी करार दिया गया।

खुद को कारोबारी बताने वाली लता ने स्थानीय कारोबारी से धोखे से 62 लाख रुपये हड़प लिए। धोखाधड़ी का शिकार हुए एसआर महाराज ने बताया कि लता ने उन्हें मुनाफे का लालच देकर उनसे पैसे लिए थे।  

लता पर बिजनसमैन एसआर महाराज को धोखा देने का आरोप लगा था। महाराज ने लता को एक कनसाइंमेंट के इम्पोर्ट और कस्टम क्लियर करने लिए  62 लाख रुपये दिए थे, लेकिन ऐसा कोई कनसाइंमेट था ही नहीं। लता ने वादा किया था कि वो इसके मुनाफे का हिस्सा एसआर महाराज को देंगी।

आशीष लता मशहूर मानवाधिकार नेत्री इला गांधी और दिवंगत मेवाराम रामगोविंद की बेटी है।

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Jun 08 2021, 12:58

यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए बड़े नेताओं का दौरा शुरू, सीएम योगी ने किया दावा अगलेबचुनाव में भी भाजपा एक तिहाई बहुमत से जीत दर्ज करेगी
  


उत्तर प्रदेश में अगले साल चुनाव होने वाले हैं. इसे लेकर बीजेपी के बड़े नेताओं का यूपी दौरा शुरु हो गया है. इस बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह दावा किया है कि 2022 के चुनाव में बीजेपी राज्य में दो तिहाई बहुमत से चुनाव जीतेगी. 

हालांकि आरएसएस और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के लखनऊ दौरे के बाद मीडिया में आ रही यूपी बीजेपी संगठन और सरकार में बदलाव की बात को मुख्यमंत्री ने खारिज किया है. उन्होंने कहा कि यह मीडिया की उपज है. 

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ लोग बीजेपी और आरएसएस के नेताओं की बैठक और लखनऊ दौरे को लेकर अलग अलग व्याख्या कर रहे हैं. 

साथ ही इसे एक नया राजनीतिक मोड़ देने की कोशिश कर रहे हैं पर यह निराधार है. सीएम योगी ने कहा कि सुर्खियां बटोरने के लिए और लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए खबर को सनसनीखेज बनाना मीडिया की मजबूरी है. 

आगे बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नेताओं का लखनऊ आना और उनसे मुलाकात करना कोई नयी बात नहीं है. बीजेपी कैडर आधारित पार्टी है. यहां भाई भतिजावाद नहीं चलता है. पार्टी हमेशा अपने कैडर को सक्रिय रखती है. इसलिए पार्टी के वरिष्ठ नेता हर दो महीने में एक बार मिलते हैं औ्र राज्य इकाईयों के साथ बैठक करते हैं. उन्होंने बताया कि यूपी के प्रदेश प्रभारी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राधामोहन सिंह महीने में दो बार यूपी आते हैं. 

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सत्तारुढ़ पार्टी होने के नाते कोरोना संक्रमण के दौर में हमने लोगों को राहत पहुंचाने के लिए कई सारे कार्य किये हैं. हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा दिये गये दिशानिर्देशों के अनुसार काम किया है. उन्होंने कहा कि जहां कोरोना की पहली और दूसरी लहर में बीजेपी और संघ के कार्यकर्ता लोगों को राहत पहुंचाने में जुटे थे वहीं दूसरी पार्टी के कार्यकर्ता कहीं नजर नहीं आ रहे थे.

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Jun 08 2021, 12:02

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उत्तर प्रदेश हुआ अनलॉक, शाम सात बजे से सुबह सात बजे तक लागू रहेंगी बंदिशें

उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर कमजोर होती जा रही है। जिसे देखते हुए लखनऊ, मेरठ, गोरखपुर समेत प्रदेश के सभी 75 जिलों को कोरोना कर्फ्यू से मुक्त कर दिया गया। अब सिर्फ 7 बजे शाम से 7 बजे सुबह तक नाइट कर्फ्यू जारी रहेगा। 
बता दें की जारी किए गए निर्देशों के अनुसार, जिन जिलों में 600 से कम संक्रमण के मामले होंगे उन जिलों को कोरोना कर्फ्यू से राहत मिलेगी। अब प्रदेश के सभी जिलों में कोरोना संक्रमितों की संख्या 600 से कम हो गई है। अत: जिलों को बाजार खोलने की अनुमति दे दी गई है। बीते 24 घंटे में प्रदेश में कोरोना के 797 नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान 2.85 लाख नमूनों की जांच की गई। रिकवरी रेट 97.1 फीसदी है। पॉजिटिविटी रेट 0.2 फीसदी है। प्रदेश में मंगलवार सुबह तक कुल सक्रिय मामले 14000 रह गए हैं। 

प्रदेश सरकार ने बीते रविवार को आदेश जारी किया था कि 600 से अधिक सक्रिय केस वाले जिलों में दिन का कर्फ्यू समाप्त कर दिया जाए। इससे 55 जिलों में आंशिक कोरोना कर्फ्यू से राहत मिल गई। जो 20 जिले बचे थे, उसमें भी बारी-बारी से पांच दिनों में 16 जिलों में सक्रिय केस 600 से कम हो गए और दिन का कर्फ्यू हटा दिया गया।

ये रहेगी छूट
-सभी बाजार सुबह सात से शाम सात बजे तक खुलेंगे, सप्ताह में शनिवार और रविवार को बाजार बंद रहेंगे।
-कोरोना अभियान से जुड़े फ्रंटलाइन सरकारी विभागों में पूरी उपस्थिति रहेगी। शेष सरकारी दफ्तरों में 50 फीसदी कर्मी रहेंगे। उन सभी को रेटोशन से बुलाया जाएगा, -प्रत्येक निजी कंपनी में कोविड हेल्प डेस्क बनाई जाएगी। 
-औद्योगिक संस्थान खुले रहेंगे। इन संस्थानों में कार्यरत कर्मचारी अपना पहचान पत्र या इकाई के प्रमाण पत्र के आधार पर आने और जाने की अनुमति रहेगी। प्रत्येक इकाई में कोविड हेल्प डेस्क बनेगी। 
-सब्जी मंडी पूरी तरह खुलेंगी। घनी आबादी में स्थित सब्जी मंडी को प्रशासन खुले स्थान पर संचालित कराएगा।
-रेलवे स्टेशन एवं रोडवेज बस में दो गज की दूरी और मास्क है जरूरी की अनिवार्यता रहेगी। इसी के साथ स्क्रीनिंग और एंटीजन टेस्टिंग की जाएगी। कोरोना के मरीज पाए जाने पर अस्तपाल भेजा जाएगा। 
-बैंक, बीमा कंपनी, भुगतान प्रणाली और अन्य दफ्तर खुले रहेंगे। 
-एक्सप्रेसवे और हाईवे किनारे ढाबे खुलेंगे। रेहड़ी पटरी, ठेली खोमचे आदि खुलेंगे।
- ट्रांसपोर्ट कपंनी के कार्यलय,लॉजिस्टिक कंपनी के दफ्तर, वेयर हाउस खुलेंगे।
-कंटेनमेंट जोन छोड़कर शेष स्थानों में धार्मिक स्थलों के अंदर एक बार में एक स्थान पर पांच लोग ही जा सकेंगे। -
जनपद के अंदर बसों का संचालन किया जाएगा। यात्रियों के लिए मास्क  लगाना जरूरी किया गया है। सभी यात्रियों की जांच कराई जाएगी।ऑटो और ई-रिक्शा में तीन और चार पहिया वाहन में चार लोग बैठ सकेंगे।
-अंडे, मांस और मछली की दुकाने पर्याप्त सफाई के साथ

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     @India   जनपद में गेहूं क्रय केंद्र और राशन की दुकानें खुलेंगी।
    -उद्यान विभाग की नर्सरी खुलेंगी। राजस्व और चकबंदी कोर्ट कोविड-19 के प्रोटोकॉल के तहत खुलेंगे। सरकारी और निजी निर्माण कार्य कराए जाएंगे।
    
    इन पर पाबंदी
    -स्कूल, कॉलेज तथा शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे। हालांकि माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग प्रशासनिक कार्य के लिए खुले रहेंगे
    -रेस्टोरेंट बंद रहेंगे, लेकिन होम डिलीवरी चालू रहेगी-
    -कोचिंग संस्थान, सिनेमा हॉल, जिम, स्वीमिंग पूल, क्लब और शॉपिंग मॉल बंद रहेंगे। 
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Jun 08 2021, 11:51

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महाराष्ट्र में 47 बार अपना स्वरुप बदल चुका है कोरोना वायरस, वैज्ञानिकों ने चेताया-सावधानी नहीं बरती, तो तीसरी लहर होगी और घातक

देश में कोरोना का कहर लगातार कम हो रहा है, लेकिन इसका खतरा अभी टला नहीं है। कोरोना वायरस के म्यूटेशन को लेकर एक और चौंकान्ने वाला खुलासा हुआ है। वैज्ञानिकों के मुताबिक कोरोना वायरस ने एक ही राज्य में 47 बार अपना स्वरुप बदला है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर सावधानी नहीं बरती तो तीसरी लहर और भी अधिक घातक हो सकती है क्योंकि वायरस में म्यूटेशन तेजी से हो रहे हैं।


अकेले महाराष्ट्र पर ही अध्ययन में जानकारी मिली कि तीन महीने के दौरान वहां अलग अलग जिलों के लोगों में नए-नए वैरिएंट की भरमार है। वैज्ञानिकों को अंदेशा यह भी है कि प्लाज्मा, रेमडेसिविर और स्टेरॉयड युक्त दवाओं के जमकर हुए इस्तेमाल की वजह से म्यूटेशन को बढ़ावा मिला है। इसीलिए दूसरे राज्यों में भी सिक्वेसिंग को बढ़ाने की जरूरत है।

फरवरी माह से ही वायरस में अधिक म्यूटेशन
पुणे स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी (एनआईवी), भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और नई दिल्ली स्थित नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) के इस संयुक्त अध्ययन में महाराष्ट्र की जिलेवार स्थिति को शामिल किया है क्योंकि देश में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमण का असर पिछले एक साल में इसी राज्य में सबसे ज्यादा है। एनआईवी से डॉ. प्रज्ञा यादव ने बताया कि महाराष्ट्र में बीते फरवरी माह से ही वायरस के एस प्रोटीन में सबसे अधिक म्यूटेशन देखने को मिले हैं। एक-एक म्यूटेशन के बारे में जानकारी ली जा रही है। 

इनमें से कई म्यूटेशन के बारे में हमें पहले से जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि वायरस में लगातार होते म्यूटेशन और संक्रमण के बढ़ने से एक गंभीर स्थिति का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। वहीं एनसीडीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बी.1.617 वैरिएंट अब तक 54 देशों में मिल चुका है। इसी के एक अन्य म्यूटेशन को डेल्टा वैरिएंट नाम विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दिया है। हालांकि भारत में दूसरी लहर के दौरान स्थानीय स्तर पर हो रहे म्यूटेशन को लेकर और अधिक जीनोम सिक्वेसिंग की आवश्यकता है ताकि गंभीर म्यूटेशन (वीओसी) का पता चल सके।

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     @India   सभी सैंपल में 47 बार वायरस के म्यूटेशन
    महाराष्ट्र में कई जिलों में नवंबर 2020 से 31 मार्च 2021 तक 733 सैंपल को एकत्रित कर जीनोम सिक्वेसिंग की गई ताकि पता चले कि वायरस के कौन कौन से वैरिएंट फैल रहे हैं? हैरानी तब हुई जब वैज्ञानिकों ने एक के बाद एक सभी सैंपल में 47 बार वायरस के म्यूटेशन देखे। इससे पहले देश में कभी ऐसा देखने को नहीं मिला। हालांकि इटली, फ्रांस, यूके और अमेरिका को देखते हुए इसका अंदेशा जरूर था। 733 में से 598 सैंपल की सिक्वेसिंग में जब वैज्ञानिकों को कामयाबी मिली तो पता चला कि इसमें डेल्टा वैरिएंट के अलावा भी बहुत से वैरिएंट महाराष्ट्र के लोगों में फैल रहे हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच चुके हैं।
    
    जांच में कई वैरिएंट आए सामने
    अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों को हैरानी तब हुई जब 273 सैंपल में बी. 1.617, 73 में बी.1.36.29, 67 में बी.1.1.306, 31 में बी.1.1.7, 24 में बी.1.1.216, 17 में बी.1.596 और 15 सैंपल में बी.1.1 वैरिएंट मिला। इनके अलावा 17 लोगों के सैंपल में बी.1 और बी.1.36 वैरिएंट 12 लोगों के सैंपल में मिला है। इनके अलावा और भी कई म्यूटेशन जांच में मिले हैं जिन पर अध्ययन चल रहे हैं।
    
    म्यूटेशन स्पाइक प्रोटीन और आरबीडी संरचना के बाहर
    अध्ययन में पता चला है कि पश्चिमी महाराष्ट्र के जिले पुणे, मुंबई, ठाणे और नासिक में कोरोना वायरस के कई वंश घूम रहे हैं। जबकि इससे पहले पूर्वी महाराष्ट्र के जिले बी.1.617 वंश सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा था।  पुणे, थाणे, औरंगाबाद सहित पश्चिमी राज्य में डेल्टा वैरिएंट के अलग अलग म्यूटेशन मिले हैं। ज्यादातर म्यूटेशन स्पाइक और आरबीडी के भीतर संरचना में हुए हैं लेकिन इसी साल फरवरी माह के बाद से यह म्यूटेशन स्पाइक प्रोटीन और आरबीडी संरचना के बाहर भी देखने को मिले हैं जोकि सीधे तौर पर गंभीरता की ओर इशारा करता है।
    
    इन राज्यों में सिक्वेसिंग बढ़ाने की अपील
    वैज्ञानिकों ने उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, मध्यप्रदेश, राजस्थान, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना सहित उन राज्यों में सिक्वेसिंग बढ़ाने की अपील की है जहां पिछले दिनों सबसे ज्यादा संक्रमण का असर देखने को मिला था। इन राज्यों में कई जिले ऐसे भी थे जहां संक्रमण दर 40 फीसदी तक पहुंच गई थी जोकि दुनिया के अन्य किसी भी देश में देखने को नहीं मिली थी। 
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Jun 08 2021, 11:10

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कोर्ट की कार्यवाही की होगी लाइव स्ट्रीमिंग, सुप्रीम कोर्ट की ई समिति ने जारी किया मसौदा

सरकार जल्द ही हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट में हो रही सुनवाई का लाइव स्ट्रीमिंग शुरु करने वाली है. सुप्रीम कोर्ट की ई समिति ने कोर्ट कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए मसौदा जारी किया है. साथ ही 30 जून तक सभी स्टेकहोल्डर्स से इसपर सुझाव भी मांगे हैं. सुप्रीम कोर्ट की ई समिति की वेबसाइट पर यह ड्राफ्ट उलपब्ध है. कोर्ट का कहना है कि लाइव स्ट्रीमिंग में शामिल होना भी कोर्ट तक पहुंचने के अधिकार में शामिल है. 

कोर्टरुम में लगाये गये कैमरे जज वकीलों, वादियों, आरोपियों और गवाहों सभी पर फोकस रहेंगे. इसके आम जनता घर बैठे देश के सबसे बेहतर वकीलों के बहस करते हुए लाइव देख पायेंगे और जानकारी हासिल कर पाएंगे. समिति के अध्यक्ष चंद्रचूड़ सिंह ने कहा कि सभी हाईकोर्ट से न्यायधीशों को मसौदा साझा किया गया है और सुझाव मांगे गये हैं. साथ ही पूरे भारत के अदालतों में हो रही कार्रवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के बेहतर कार्यान्वयन के लिए सुझाव दिये गये हैं. 

लाइव स्ट्रीमिंग के लिए तैयार मसौदे के अनुसार कोर्ट रुम में पांच एंगल से कैमरे लगाये जाएंगे. इनमें एक कैमरा जज की ओर, दूसरा और तीसरा कैमरा जिरह कर रहे दोनों पक्षों के वकीलों की ओर रहेगा. जबकि चौथा और पांचवा कैमरा आरोपी और गवाह की तरफ फोकस रहेगा. 

इसके प्रसारण के नियमों के अनुसार कोर्ट के कार्रवाही की लाइव स्ट्रीमिंग करने का अधिकार सिर्फ कोर्ट के पास होगा. कोर्ट के अलावा और कोई भी कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग नहीं कर सकता है. इसके साथ ही लाइव स्ट्रीमिंग की रिकॉर्डिंग को भी प्रसारित करने का अधिकार सिर्फ कोर्ट को होगा. मसौदा के तहत इसका प्रसारण करने के लिए दोषी पाये जाने पर कॉपीराइन कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है. आईटी कानूनों के तहत यह दंडनीय अपराध माना जाएगा. 

प्रसारण के लिए अधिकृत व्यक्ति के अलावा इसका प्रसारण इलेक्ट्रॉनिल प्रिंट या डिजिटल मीडिया भी नहीं कर सकते हैं. इसके अलावा मैसेंजिंग एप पर भी इसका प्रसारण या प्रसार करने की मनाही होगी. इस नियम के खिलाफ काम करने  वाले किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. 

इस मसौदे को जस्टिस डॉ चंद्रचूड़ सिंह की अध्यक्षता वाली ई समिति ने दिल्ली हाई कोर्ट से जज न्यायधीश राजीव शकधर और वर्तमान सांसद सतीश के शर्मा के साथ व्यापक विचार विमर्श के बाद बनाया गया है. गौरतलब है कि 26 सितंबर 2018 को तीन जजों की बेंच स्वप्निल त्रिपाठी  ने अदालती कार्यवाही के लाइव प्रसारण पर सहमति जतायी थी. 

हालांकि मसौदे में यह भी बताया गया है कि वैवाहिक मामले, महिलाओं के खिलाफ लैंगिक हिंसा के मामले, यौन शोषण से जुड़े मामले, पॉक्सो एक्ट और जुवेनाइल के तहत आने वाले मामलों की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग नहीं की जाएगी. इसके अलावा संबंधिक कोर्ट के 

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     @India   जज अपने विवेक के आधार पर उन मामलों की भी लाइव स्ट्रीमिंग रोक सकते हैं जिससे समुदायों की बीच दुश्मनी हो सकती है या कानून व्यवस्था के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है.