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May 23 2021, 12:59

लॉकडाउन का बिहार में दिख रहा बड़ा असर, संक्रमण दर में दर्ज की जा रही लगातार गिरावट, विस्तारित किया सकता है लॉकडाउन
  

 
पटना : लॉकडाउन का बिहार में अच्छा-खासा असर दिखने को मिला है। कोरोना संक्रमण की दर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले कुछ दिनों के आंकड़ो पर नजर डाला जाए तो 15 दिनों पहले तक जहां संक्रमितों की संख्या 15 हजार के पार से नीचे नहीं आ रहा था। वहीं लॉकडाउन-2 के बाद यह घटकर 5 हजार के नीचे आ गया है। 


संक्रमण के बढ़ते रफ्तार पर लगाम लगने के बाद अब प्रदेश की सरकार लॉकडाउन को एक बार से विस्तारित किये जाने पर विचार कर रही है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार 26 मई को लॉकडाउन-2 की अवधि समाप्त होने के बाद इसे 31 मई या जून के पहले हफ्ते तक विस्तारित किया जा सकता है। 

मिली रही जानकारी के अनुसार अगले  दो दिनों के अंदर कोरोना को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक होने जा रही है।  इस बैठक में लॉकडाउन बढ़ाने पर भी फैसला लिया जाएगा। 

चर्चा है कि इस बार राज्य सरकार कुछ नई छूट दे सकती है। वहीं, क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की इस बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस किया जाएगा।

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May 23 2021, 12:30

रेलवे पर कोरोना की मार : 48 घंटे के अंदर ECR ने 23 ट्रेनों को किया रद्द
  


पटना : अन्य कारोबार के साथ-साथ कोरोना का रेलवे पर भी बड़ा असर पड़ा है। लंबी और कम दूरी, दोनों ही प्रकार के स्पेशल ट्रेनों में यात्रियों की भारी कमी हो गई है। यात्रियों की कमी से लगातार पूर्व मध्य रेल उन स्पेशल ट्रेनों के परिचालन को बंद कर रही है, जिनमें पैसेंजर्स सफर ही नहीं कर रहे हैं। 

लगातार दूसरे दिन पूर्व मध्य रेलवे की तरफ से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया। शनिवार को एक आदेश जारी कर 5 मेल/एक्सप्रेस व 6 पैसेंजर ट्रेनों समेत कुल 11 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों के परिचालन को अगले आदेश तक रद्द कर दिया गया है।

बता दें इससे पहले शुक्रवार को 12 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों के परिचालन को रद्द किए जाने की घोषणा रेलवे की तरफ से की गई थी। 29 अप्रैल से लेकर 22 मई तक में पूर्व मध्य रेलवे पटना, दानापुर, फतुहा, राजगीर, बरौनी, सोनपुर और मुजफ्फरपुर समेत अपने अलग-अलग स्टेशनों से खुलने वाले कुल 50 जोड़ी यानी 100 ट्रेनों के परिचालन को कैंसिल कर चुकी है। 

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोरोना काल में रेलवे को आर्थिक मोर्च पर कितना नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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May 23 2021, 08:02

बिहार सरकार ने ब्लैक फंगस को महामारी घोषित किया, पटना के चार अस्पतालों में इलाज का किया प्रबंध। 
  


कोरोना के बाद ब्लैक फंगस बड़ी परेशानी का कारण बनता जा रहा है। बिहार में लगातार ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। एक महीने में सूबे में लगभग 100 से ज्यादा मरीज ब्लैक फंगस के मिले हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या से चिंतित राज्य सरकार ने इस रोग को महामारी की श्रेणी में शामिल किया है।

 स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि ब्लैक फंगस के मरीजों के बेहतर इलाज के लिए राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है। सरकार ने इसे एपिडेमिक डिजीज एक्ट के तहत महामारी के रूप में घोषित किया है। 

उन्होंने बताया कि सभी अस्पतालों को ब्लैक फंगस के मरीजी के इलाज के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार के गाइडलाइंस का अनुपालन करना होगा।

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ब्लैक फंगस के मरीजों के इलाज के लिए आरएमआरआई में दवाई का भंडारण किया गया है। राजधानी पटना में एम्स , आईजीआईएमएस , पीएमसीएच तथा एनएमसीएच में इलाज की विशेष व्यवस्था की गयी है। 
केंद्र सरकार ने पहले ही ब्लैक फंगस को महामारी की सूची में शामिल कर लिया है। बिहार से पहले ब्लैक फंगस को केंद्र सरकार के साथ - साथ हरियाणा , राजस्थान और तेलंगाना ने पहले ही महामारी घोषित कर दिया है। ब्लैक फंगस के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए पिछले दिनों यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इसे महामारी घोषित कर दिया था। आज बिहार सरकार भी महामारी की सूची में इस बीमारी को शामिल कर दिया है।

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May 22 2021, 14:39

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बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में बीजेपी ने बहाए करीब 72 करोड़ रूपये, कोरोना काल में एक सीट पर झोंके 96 लाख
क्या इतने रूपयों और समय में कोरोना से लड़ने के लिए कुछ नहीं किया जा सकता था ?

चुनाव में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है, ये तो हम सभी जानते हैं। अब एक रिपोर्ट में ये बात खुलकर सामने आई है। बीजेपी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में करीब 72 करोड़ रूपये खर्च किए। ये खर्चा उस वक्त किया गया जब देश कोरोना जैसी महामारी से जूझ रही है। 
चुनाव आयोग को दिए अपने खर्च के ब्योरे में बीजेपी ने बताया है कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने 71.73 करोड़ रूपये खर्च के हैं। पार्टी का सबसे ज्यादा खर्चा अपने स्टार प्रचारकों पर हुआ। बीजेपी ने खर्च का यह ब्योरा मार्च महीने में जमा किया था, जिसे आयोग ने शुक्रवार को सार्वजनिक किया।

स्टार प्रचारकों के चार्टर्ड विमानों पर 24.07 करोड़ रुपये खर्च
बता दें कि पिछले साल हुए बिहार चुनाव में रैलियों की खूब धूम रही। पार्टी के स्टार प्रचारकों ने हेलीकॉप्टर से उड़ान भरी। रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी ने बिहार विधानसभा चुनाव में अपने केंद्रीय मुख्यालय के खातों से लगभग 26.7 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा, राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ जैसे स्टार प्रचारकों की यात्रा के लिए चार्टर्ड विमानों पर 24.07 करोड़ रुपये खर्च हुए। 

विमान और टैक्सी के इस्तेमाल पर खर्चे 1.5 करोड़
भाजपा की राज्य इकाई ने सुशील कुमार मोदी, देवेंद्र फडणवीस, और शाहनवाज हुसैन जैसे अपने स्टार प्रचारकों के लिए विमान और टैक्सी के इस्तेमाल पर 1.5 करोड़ रुपये खर्च किए। अन्य नेताओं की ट्रेन व टैक्सी यात्राओं पर 45.6 लाख रुपये खर्च किए गए।


बिहार इकाई ने चुनाव में कुल 28 करोड़ रुपये खर्च किए
निर्वाचन आयोग को सौंपे गए खर्च संबंधी ब्योरे के मुताबिक पार्टी की बिहार इकाई ने चुनाव के दौरान कुल 28 करोड़ रुपये खर्च किए जबकि उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता के रूप में उसने 16.5 करोड़ खर्च किए।

प्रत्येक उम्मीदवारों को मिले 15-15 लाख
औसत आंकड़ों की बात करें तो बीजेपी ने एक विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ने के लिए 96 लाख रूपये खर्च किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी की ओर से सभी उम्मीदवारों को 15-15 लाख रुपये दिए गए। बिहार इकाई ने मीडिया के विभिन्न माध्यमों से विज्ञापनों के लिए 16 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए, जिसमें गूगल इंडिया को दिए गए 1.59 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। 

खर्च करीब 71.73 करोड़, पावती तकरीबन 35.83 करोड़
चुनाव की घोषणा से लेकर इसके पूरा होने तक पार्टी के केंद्रीय मुख्यालय और राज्य इकाई द्वारा किया पूरा खर्च करीब 71.73 करोड़ बैठता है, जबकि इस अवधि के दौरान कुल पावती तकरीबन 35.83 करोड़ रही। चुनाव की घोषणा के पूर्व पार्टी के केंद्रीय मुख्यालय और राज्य इकाई के खाते में जमा रकम 2376.90 करोड़ रुपये थी और चुनाव बाद शेष जमा राशि 2279.9

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May 22 2021, 11:12

बिहार ने फिर दिखाया रास्ता: PMCH  के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के HOD डॉ. एसएन सिंह ने किया रिसर्च, अब एक बूंद खून के टेस्ट से कोरोना के 6 स्टेज का चलेगा पता
  


 



(डेस्क ):  PMCH के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के HOD डॉ. एसएन सिंह ने देश को कोरोना की तीसरी लहर से बचाने का तरीका तलाश किया है। रिसर्च के आधार पर उनका दावा है कि रैपिड एंटिजन और रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट को एक साथ करने से कोरोना की तीसरी लहर देश में नहीं आ सकती है। उसे समय से रोका जा सकता है।


डॉ. सिंह का दावा है कि इस मॉडल से कोरोना के 6 स्टेज का पता चलेगा। उन्होंने पीएम मोदी को पत्र लिखकर इस मॉडल के 5 फायदे भी गिनाए हैं। साथ ही पूरे देश में इसे लागू करने की अपील की है। 

उन्होंने पहले खुद, फिर पत्नी पर रिसर्च किया। इसके बाद करीब 100 लोगों पर रिसर्च के बाद वे तीसरी लहर को रोकने का दावा कर रहे हैं।

पहले खुद पर फिर पत्नी पर किया रिसर्च

एचओडी डॉ. एसएन सिंह ने पीएम के अलावा इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के डायरेक्टर जनरल बलराम भार्गव और नीति अयोग के सदस्य वीके पाॅल को भी पत्र लिखा है। उन्होंने रिसर्च की शुरुआत सबसे पहले खुद पर ही की। एक सप्ताह, दो सप्ताह और तीन सप्ताह तक एंटीबॉडी जांच करते गए। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी पर जांच को लेकर शोध किया।

परिवार के अन्य सदस्यों पर शोध करते-करते 100 लोगों की जांच की। इसमें उन्हें बड़ी सफलता मिली और वह मॉडल मिल गया। जिस पर चाइना और साउथ कोरिया भी काम कर चुका है। डॉ. एसएन सिंह बिहार के काफी चर्चित और प्रतिष्ठित शोधकर्ता हैं। वे अब तक कई शोध कर चुके हैं।

कैसे किया रिसर्च

डॉ. एसएन सिंह ने एंटीजन टेस्ट और एंटीबॉडी टेस्ट के साथ एलाइजा IGM का टेस्ट किया। इस बड़े शोध में पाया कि दोनों टेस्ट की संयुक्त पहचान 90 से 100 प्रतिशत तक रही, जो RT-PCR जांच से लगभग 50 गुणा अधिक रही। जिन लोगों का दोनों टेस्ट निगेटिव आया। उस पर फिर से एलाइजा IGM टेस्ट कराया। एक- एक कर किए गए 100 लोगों पर शोध में चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

फिर इस नतीजे पर पहुंचे कि अगर एंटीजन टेस्ट और एंटीबॉडी टेस्ट को संयुक्त रूप से स्क्रीनिंग टेस्ट में इस्तेमाल किया जाए तो देश का करोड़ों रुपए बचेगा। साथ ही काफी तेजी से जांच हो जाएगी। मरीज का इलाज और आइसोलेशन भी उतनी ही तेजी से हो सकेगा। इससे RT-PCR की जांच रिपोर्ट के लिए होने वाला लंबा इंतजार और इससे फैलने वाले संक्रमण पर रोक लग जाएगा।

रैपिड एंटीबॉडी का ऐसे आ जाएगा रिजल्ट

टेस्ट कार्ड में M और G एंटीबॉडी की लाइन दिखाई पड़ती है। जिसकी गिनती बड़ी आसानी से की जा सकती है।
अगर हल्की M लाइन दिखती है तो 7 दिनों के आसपास का कोरोना है।
अगर गाढ़ी M लाइन दिखी तो कोरोना एक से दो सप्ताह के बीच का है।
अगर गाढ़ी M लाइन और हल्की G लाइन दिखी तो कोरोना दो से तीन सप्ताह का है।
अगर गाढ़ी M लाइन और गाढ़ी G लाइ

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     @Bihar  अगर केवल गाढ़ी G लाइन आई तो कोरोना 6 वीक के बाद का है जो एंटीबॉडी के रूप में है।
    यह एंटीबॉडी 6 से 9 महीने तक रह सकती है। यह पोस्ट कोरोना का संकेत होगा।
    जांच के नए मॉडल का PM को बताया 5 फायदा
    
    PM नरेंद्र मोदी को भेजे गए रजिस्टर्ड पत्र और ईमेल में लिखा है कि ऐसे ही मॉडल से चाइना और साउथ कोरिया के साथ दुनिया के कई देश कोरोना पर काबू पा चुके हैं। उन्होंने PM को भेजे पत्र में बताया है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट और रैपिट एंटीबॉडी टेस्ट दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। दोनों टेस्ट का एक साथ स्क्रीनिंग टेस्ट शुरू करने से देश को 5 बड़े फायदे होंगे।
    
    दोनों टेस्ट की संयुक्त पहचान क्षमता 90 से 100 प्रतिशत है, जो RT-PCR की 50 प्रतिशत की क्षमता से लगभग दोगुनी अधिक है। दोनों रैपिड टेस्ट निगेटिव आने के बाद एलाइजा IGM एंटीबॉडी टेस्ट करना होगा। ऐसा करने से कोरोना मरीजों की पहचान काफी तेजी से होगी।
    
    कोरोना जांच सभी जगह आसानी से हो पाएगी। कोई भी व्यक्ति मिनटों में ट्रेनिंग लेकर जांच दोनों रैपिड टेस्ट से कर सकेगा। यह टेस्ट बिना किसी लैब सेटअप के शहरों और ग्रामीणें इलाकों में किया जा सकता है।
    
    कोरोना की जांच की संख्या में हर दिन कई गुना बढ़ोत्तरी की जा सकेगी। मरीजों की तेजी से पहचान कर उन्हें तत्काल आइसोलेशन में रखा जा सकेगा। जांच बढ़ाने के लिए कोई बड़ा उपाय भी नहीं करना होगा।
    कम्युनिटी ट्रांसमिशन पर पूरी तरह से ब्रेक लगाया जा सकेगा और अंततः: हमें कोरोना से मुक्ति मिल जाएगी। कम्युनिटी ट्रांसमिशन का खतरा ही कोरोना में संवेदनशील होता है और इस पर तो मिनटों में काबू पाया जा सकेगा।
    
    इकोनॉमिक रिवाइवल का बड़ा फायदा होगा। दोनों रैपिड किट और एलाइजा IGM किट RT PCR की तुलना में 50 से 100 गुणा सस्ते हैं। यह अत्यंत सरल भी हैं। इस तरह राज्य और देश का करोड़ों रुपए हर दिन का बचत होगा। इससे कोरोना के कहर से लड़खड़ाती हमारी अर्थ व्यवस्था पुनर्जीवित हो उोगी।
    पूरे देश में लागू करने की मांग
    
    डॉ. एसएन सिंह कहते हैं कि जब रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट 6 स्टेज बता रहा है तो क्यों न इसे पूर देश में तत्काल लागू कर दिया जाए। उन्होंने बताया कि RT-PCR के एक जांच पर लगभग 2500 से 5000 का खर्च आता है। जबकि, किट से आसानी से 10 से 20 रुपए में उससे अधिक तेज और 6 स्टेज की जांच हो जाएगी। इसके बाद भी इसे क्यों नहीं जांच में लाया जा सका है।
    
    उन्होंने कहा कि CM नीतीश कुमार को भी पत्र लिखा है, जिसमें 15 से 20 दिन में कोरोना कंट्रोल करने का तरीका सुझाया है। CM ने इस पत्र की कॉपी राज्य के सभी सिविल सर्जन, मेडिकल कॉलेजों, डीएम, पुलिस अधिकारियों, चिकित्सा संस्थानों के साथ हर स्वास्थ्य व सुरक्षा से जुड़े सभी विभाग के आला अफसरों को सर्कुलेट कराई है। 
    
    इसमें कोरोना को काबू करने को लेकर हर उपाए सुझाए गए हैं। टीकाकरण से लेकर टेस्टिंग तक की टिप्स है। 
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May 21 2021, 12:50

प्रमंडल के ही निवासी है हमारे स्वास्थ्य मंत्री,  फिर भी सारण में स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह फेल : जितेन्द्र कुमार राय 
  


छपरा : मढ़ौरा के राजद विधायक जितेंद्र कुमार राय ने प्रदेश की नीतीश सरकार औऱ खासकर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पपर जमकर हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि सरकार की नाकामियों के कारण जिले का स्वास्थ्य विभाग बीमार पड़ चुका है. प्रमंडल के ही निवासी है हमारे मंत्री फिर भी स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह फेल हो चुकी है. 

उन्होंने कहा कि सरकार पन्द्रह वर्षों से कुंभकर्णी निद्रा में सोई हुई है. जिले के अधिकांश एपीएचसी और सब सेंटर मृतप्राय हो चुके हैं. आज तक उनका भवन भी नहीं बना और ना ही कभी उसमें डॉक्टर, नर्सेज और पैरामेडिकल स्टाफ ही बैठते हैं.

जितेन्द्र राय ने कहा कि सरकार का पूरा सिस्टम फेल है. मढ़ौरा के रेफरल अस्पताल में अभी तक आइसोलेशन वार्ड और ऑक्सीजन इत्यादि की सुविधा नहीं उपलब्ध कराई गई है. जिले के सदर अस्पताल एवं सभी रेफरल अस्पतालो में सरकार की घोषणा के बाद भी ऑक्सीजन प्लांट खोलने की दिशा में कोई काम नहीं हुआ है. जिले के सभी अस्पतालों में डाक्टरों का घोर अभाव है. नई नियुक्तियों के लिए कोई पहल नहीं की जा रही.

उन्होंने कहा कि जिले के अधिकारी और सरकारी दल के नेताओं की चुप्पी बता रही है की सभी की मिलीभगत से जिले का स्वास्थ्य सिस्टम फेल हुआ है. जीतेंद्र राय ने कहा की जिले के किसी भी अस्पतालों में रोगी कल्याण समिति कार्यरत नही है. उनकी बैठके कागजों में कर ली जाती है. रोगी कल्याण समिति से रोगियों के हक की बातें नहीं कर केवल भ्रष्टाचार की बाते होती हैं.

जितेन्द्र राय ने कहा कि मुख्यमंत्री का इकबाल समाप्त हो चुका है. मुख्यमंत्री जी थक चुके है अब तो उन्हें कोई अधिकारी भी नहीं सुन रहा है. जब कोई नहीं सुने तो इस्तीफा दे देना चाहिए.

विधायक ने कहा कि आज हमारे नेता लालू यादव की ही देन है कि दरियापुर रेल चक्का कारखाना से ऑक्सीजन का भी उत्पादन हो रहा है. लेकिन केन्द्र और राज्य सरकार सारण जिला के लिए ऑक्सीजन नहीं दे रह है. जबकि इस प्लांट पर सारण का हक बनता है. सारण को उत्पादन का 30 प्रतिशत मिलना चाहिए.

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May 21 2021, 12:09

छपरा : कोरोना की दूसरी लहर में बढ़ी घरेलू हिंसा, पति-पत्नी के बीच हो रही मारपीट, थाने तक पहुंच रहा मामला
  


छपरा : कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर आम से खास तक परेशान है। पुलिस प्रशासन विधि व्यवस्था के साथ लॉक डाउन पालन कराने में परेशान है। वहीं कोरोना की दूसरी लहर में घरेलू हिंसा व चोरी की बढ़ी घटना से लोग परेशान हैं। एक पखवारे में घरेलू हिंसा को लेकर जहां तीन महिलाओं को प्रताड़ित कर परिजनों ने घर से निकाला वहीं मारपीट की घटना में दो दर्जन से अधिक लोग जख्मी हुए। 

पांच लाख रुपए मूल्य से अधिक की सम्पत्ति चोरी की घटना हुई तो अलग-अलग जगहों से छह बाइक व एक बोलेरो चोरी होने की घटना से लोग डर गये। पुलिस द्वारा मामलों की तहकीकात की जा रही है। 
 
जिले के मशरक थाना क्षेत्र से घरेलू हिंसा की कई वारदात सामने आई है। थाना क्षेत्र के बंगरा गांव के स्व भोला राय की पुत्री माला कुमारी की शादी पिछले वर्ष लॉक डाउन में बलहा गांव के पंकज यादव से हुई। भारी भरकम दहेज व उपहार भी देने की बात प्राथमिकी में पीड़िता ने कही है। बावजूद इसके दहेज की खातिर हमेशा मारपीट की गई। 5 मई को लॉक डाउन शुरू होते ही पति सहित सभी ने कमरे में बंद कर मारपीट की। 11 मई को माला के भाई को जानकारी मिली तब वह पहुँचा । जहां बहन के साथ भाई व अन्य को पीट कर भगा दिया गया । जख्मी दोनों का इलाज गोपालगंज अस्पताल में हुआ। 


मशरक के शेखपुरा में ब्याही गई बिन बाप की बेटी को मार पीटकर घर से निकालने की शर्मनाक घटना से लॉक डाउन में ब्याहता परेशान है । मशरक दक्षिण टोला निवासी सुरेश नट की पुत्री प्रतिमा की शादी दो वर्ष पूर्व अचितपुर में हुई। शादी के बाद दहेज के लिए मारपीट व पति के नहीं रहने पर अन्य द्वारा बदनीयती करने से प्रताड़ित रहने की बात प्राथमिकी में पीड़िता ने कही है । घर से निकाले जाने पर पर पिता के घर रहने को मजबूर पीड़िता से तीन दिन पूर्व यहां भी पहुंच मारपीट की घटना हुई । अपने साथ अपने बच्चे की सुरक्षा की गुहार पुलिस से लगाई है।

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May 19 2021, 15:42

पटना के पारस अस्पताल के कोविड आईसीयू में भर्ती जिस महिला मरीज के साथ छेड़खानी का लगा था आरोप, उसकी हुई मौत, भारी संख्या में पुलिस तैनात
  




पटना: पारस अस्पताल के कोविड आईसीयू में भर्ती जिस महिला मरीज के साथ छेड़खानी का आरोप लगा था, उसकी बुधवार सुबह मौत हो गई। 

बता दें कि पीड़िता की बेटी ने एक दिन पहले मंगलवार को मीडिया के सामने कहा था कि मां अब ठीक होने पर खुद बयान देगी, कि उसके साथ क्या गलत हुआ है। पीड़िता की मौत की सूचना मिलते ही दो थानों की पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने पीड़िता की बेटी का फर्द बयान दर्ज किया है। इंस्पेक्टर राम शंकर सिंह ने बताया कि दो दिन से पुलिस जांच कर रही थी। बावजूद स्वजन लिखित शिकायत नहीं किये। 

पीड़िता की बेटी के बयान के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं अस्पताल प्रशासन ने मरीज की 1.60 लाख रुपए की फीस माफ कर दी है। इस मामले में आरोप अस्‍पताल के ही स्‍टाफ पर लगा था। महिला की बेटी ने एक वीडियो बनाया था, जिसके आधार पर मरीज के साथ सामूहिक दुष्‍कर्म होने की आशंका भी जताई थी। खुद महिला की बेटी ने कहा था कि तीन-चार लोगों ने मरीज के साथ तब गलत हरकत की, जब साथ में दूसरा कोई नहीं था। हालांकि बाद में महिला की बेटी ने कहा था कि उसने कोई वीडियो वायरल नहीं किया है और न ही कोई प्राथमिकी दर्ज कराई है। बताया जा रहा है कि महिला नालंदा की रहने वाली थी। वह आंगनबाड़ी सेविका थी। 

मामले में जन अधिकार पार्टी के सुप्रीमो पप्‍पू यादव ने कहा है कि मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के गांव की रहने वाली उस महिला को मार दिया गया। उन्‍होंने कहा कि महिला का ऑक्‍सीजन लेवल 89 था और उसके फेफड़े भी बहुत अधिक संक्रमित नहीं थे। इसके बावजूद उसे वेंटिलेटर पर रखा गया तभी यह तय हो गया था कि दुष्‍कर्म का पाप छिपाने के लिए उसे मार दिया जाएगा। बिहार महिला समाज की अध्‍यक्ष निवेदिता झा ने निष्‍पक्ष जांच उच्‍च स्‍तरीय टीम से कराने की मांग की है। 

वहीं अस्‍पताल प्रशासन ने दावा किया था कि इस महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। वह बार-बार मेडिकल उपकरणों को निकाल देती है। जिस वार्ड में महिला का इलाज हो रहा है, वहां और भी कई मरीज भर्ती हैं। जैसा आरोप लगाया जा रहा है, वैसा कुछ वहां हो ही नहीं सकता। वीडियो वायरल होने के बाद भी पुलिस ने अस्‍पताल जाकर जांच की थी और सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगाला था।
वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद पुलिस मामले को खुद संज्ञान में लेते हुए पारस अस्पताल पहुंच गई और जांच में जुट गई। 

इधर अस्पताल प्रशासन भी आरोप को बेबुनियाद बताया और जांच में पुलिस का सहयोग करने का दावा किया। पुलिस अस्पताल पहुंची और वहां के कई स्टाफ से लेकर भर्ती मरीजों के स्वजन से भी पूछताछ की। बुधवार को सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर पीड़िता की मौत हो गई। अस्पताल के बाहर  पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

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May 19 2021, 13:57

बिहार में ब्लैक फंगस के बाद अब हैप्पी हाइपोक्सिया बना जानलेवा, पिछले 20 दिनों से पटना एम्स में आ रहे ज्यादा केस
  




कोरोना संकट काल में जहां एक तरफ ब्लैक फंगस पूरे बिहार में डॉक्टरों के लिए चुनौती बन रहा है, वहीं दूसरी तरफ हैप्पी हाइपोक्सिया कोरोना संक्रमित के लिए जानलेवा साबित हो रहा है | मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी पटना के एम्स, आइजीआइएमएस व पीएमसीएच के कोविड वार्ड में इससे पीड़ित कई मरीज सामने आया है | 

डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना मरीजों में शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखता | मरीज अपने आप को ठीक ही महसूस करता है |  लेकिन अचानक ऑक्सीजन लेवल गिरने से स्थिति गंभीर हो जाती है | 

युवाओं में पता नहीं चलता लक्षण

युवाओं में 70 से 80 फीसदी से नीचे आ जाने पर भी संक्रमण का पता नहीं चलता है | 

लेकिन शरीर में कार्बन डाईआक्साइड का स्तर बढ़ने से मरीज बेहोशी की हालत में पहुंच जाता है। इस स्थिति में जब तक मरीज अस्पताल पहुंचते हैं, तब तक ऑक्सीजन लेवल गिरकर 50 से नीचे आ जाता है। इसकी वजह से ब्रेन हेमरेज, कार्डियक अरेस्ट या सिर में थक्के जमने से मौत हो जाती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में हैप्पी हाइपोक्सिया के कारण करीब पांच फीसदी मौतें हुई हैं | समय-समय पर शरीर के ऑक्सीजन स्तर की जांच करके बचा जा सकता है |

इसे रोगियों में देखा जाता है कि ऑक्सीजन का स्तर काफी कम होने पर सांस लेने में परेशानी होने लगती है | मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी से कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं | दिमाग भी चिड़चिड़ा होने लगता है. एनएफ| होठों का रंग बदलने लगता है और होठ लाल से नीले पड़ने लगता है | त्वचा का रंग भी लाल या पर्पल दिखने लगता है | पसीने में भी पीड़ित व्यक्ति का रंग बदला हुआ नजर आता है |


पटना एम्स के कोविड वार्ड के नोडल पदाधिकारी डॉ संजीव कुमार ने बताया कि पिछले करीब 20 दिनों से एम्स में हैप्पी हाइपोक्सिया बीमारी के अधिक केस आ रहे हैं | इनमें कुछ की मौत हो रही है, तो अधिकांश मरीज ठीक भी हो रहे हैं |


डॉ संजीव ने बताया कि हैप्पी हाइपोक्सिया कोरोना का एक नया लक्षण है | इसमें संक्रमति मरीज को बुखार, खांसी, सर्दी, सांस फूलने की समस्या नहीं होती है, लेकिन अचानक ऑक्सीजन लेवल गिरने से मरीज की जान खतरे में पड़ सकती है |

 हाइपोक्सिया किडनी, दिमाग, दिल और अन्य प्रमुख अंगों के काम को प्रभावित करता है |

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May 19 2021, 12:23

गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते को किया शर्मसार, नाबालिग छात्र के प्राइवेट पार्ट को गर्म आयरन से दागा
  


बेगूसराय : जिले से एक हैवानियत भरी खबर सामने आई है। जहां एक शिक्षक ने अपने ही मासूम छात्र के प्राइवेट पार्ट को गर्म आयरन से दाग दिया है। इस बावत छात्र के परिजनो द्वारा थाने में मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। 

घटना के संबंध में बताया गया है कि जिले के सदर प्रखंड के चांदपुरा स्थित एक निजी विद्यालय के शिक्षकों ने हॉस्टल में रह रहे 10 वर्षीय छात्र के प्राइवेट पार्ट को गर्म आयरन से दाग दिया। इससे वह बुरी तरह जख्मी हो गया। इस घटना को तब अंजाम दिया गया, स्कूल-कॉलेज से लेकर हॉस्टल तक बंद रखने का आदेश है। इसके बावजूद स्कूल संचालक ने कोविड गाइडलाइन व लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाते हुए छात्र के साथ आपराधिक घटना को अंजाम दिया। 

पीड़ित छात्र की शिकायत पर नीमाचांदपुरा थानाध्यक्ष अमित कुमार कांत ने स्कूल के शिक्षक राहुल कुमार व चंदन कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

चांदपुरा चित्तरंजन टोला निवासी पीड़ित छात्र की मां ने पुलिस को बताया कि उसका बेटा घर आया। उसे नहाने के लिए ले गई। कपड़ा हटाने पर देखा कि उसके पैखाना के रास्ते के दोनों भाग जले हुए थे और उससे पस निकल रहे थे। उन्होंने अपने बेटा से जलने का सच जाना तो उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। 

प्रेम ने अपनी मां को बताया कि हॉस्टल में शिक्षक ने आयरन गर्म कर दाग दिया। जलन से जब वह छटपटाने लगा तो उसका इलाज कराता रहा। साथ ही धमकी दी कि आयरन से जलाने की बात कहेगा तो स्कूल से नाम काट कर हटा देंगे। उसकी बात को सुनने के बाद आसपास के लोगों को भी सूचना दी व नीमाचांदपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी। 

थानाध्यक्ष अमित कुमार कांत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पीसी स्कूल पहुंच वहां से आरोपित दो शिक्षकों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।