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May 17 2021, 15:58

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कोलकाता में सीबीआई दफ्तर के बाहर जुटी टीएमसी कार्यकताओं की भीड़,  पथराव और लाठीचार्ज

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर सियासी बवाल शुरू हो गया है। सीबीआई की ओर से टीएमसी के दो मंत्रियों समेत चार नेताओं को गिरफ्तार करने के बाद वहां राजनैतिक भूचाल मच गया है। टीएमसी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई कार्यालय के बाहर टीएमसी के कार्यकर्ता भारी संख्या में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि सीबीआई के दफ्तर के बाहर सैकड़ों की संख्या में टीएमसी कार्यकर्ताओं की ओर से पथराव भी किया गया। वहीं दफ्तर के अंदर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी लंबे समय से मौजूद हैं। तृणमूल कांग्रेस के समर्थक यहां झंडे लहरा रहे हैं और सीबीआई तथा केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन करने से रोकने के लिए पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया। तनाव को देखते हुए यहां बड़ी संख्या में सीआरपीएफ के जवान तैनात किए गए हैं। कोलकाता पुलिस के जवान भी बड़ी संख्या में यहां मौजूद हैं। साथ ही परिसर में अवरोधक लगाए गए हैं। 

सीबीआई ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के नेता फरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी और मदन मित्रा के साथ पार्टी के पूर्व नेता शोभन चटर्जी को नारदा स्टिंग मामले में कोलकाता में गिरफ्तार किया। नारदा स्टिंग मामले में कुछ नेताओं द्वारा कथित तौर पर धन लिए जाने के मामले का खुलासा हुआ था।

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May 17 2021, 15:50

सीबीआई शुभेंदु अधिकारी को क्यों छोड़ रहा, नारदा के सैमुएल ने सीबीआई की कार्रवाई पर उठाया सवाल
  


जिस नारदा स्टिंग के कारण आज मंत्री विधायक फिरहाद हाकिम , सुब्रतो मुखर्जी, शोभन चटर्जी, मदन मित्र को सीबीआई ने गिरफ्तार किया उसी मामले में भाजपा विधायक दल के नेता शुभेंदु अधिकारी , मुकुल राय को क्यों अरेस्ट नहीं किया जा रहा है। इस मामले को लेकर नारदा के मैथ्यू सैमुएल आज सामने आए तथा कहा कि चार हाई प्रोफाइल लोग गिरफ्तार हुए हैं यह खुशी की बात है लेकिन शुभेंदु को क्यों छोड़ा गया यह अहम सवाल है।

स्पीकर से नहीं ली गई अनुमति

विधानसभा के स्पीकर विमान बनर्जी ने कहा कि कोलकाता हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि विधायक को अरेस्ट करने के पहले स्पीकर की अनुमति लेनी पड़ेगी। हालांकि आज की गिरफ्तारी में ऐसा कुछ नहीं हुआ।

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May 17 2021, 14:40

भोलेनाथ के जयकारों के साथ केदारनाथ धाम के कपाट खुले, केवल तीर्थ पुरोहित पूजा में शामिल,  11 क्विंटल फूलों से सजा मंदिर
  



उत्तराखंड में भगवान केदारनाथ धाम के कपाट आज सुबह 5 बजे खुल गए। कोरोना वायरस के कारण इस मौके भक्तों की कमी देखने को मिली। पिछले साल भी कोरोना वायरस के चलते भक्तों की कमी थी। बता दें कि  19 नवंबर को केदारनाथ धाम के कपाट बंद किए गए थे।
केदारनाथ धाम के पट खुलने से पहले पूरे मंदिर को 11 कुंतल फूलों से सजाया गया। इस दौरान पूरे केदारनाथ धाम का वातावरण भक्तिमय रहा। मंदिर के कपाट खुलने के दौरान केदारनाथ रावल भीमाशंकर लिंग और मंदिर के मुख्य पुजारी बागेश लिंग, प्रशासन के लोग और स्थानीय लोग मौजूद रहे। सरकार और देवस्थानमं बोर्ड ने कोरोना गाइडलाइंस का पालन करते हुए सोमवार को केदारनाथ के कपाट खोले। हालांकि अभी किसी को भी मंदिर के गर्भगृह में जाने की इजाजत नहीं है।
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने ट्वीट कर कहा कि विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ धाम के कपाट आज सोमवार को प्रातः 5 बजे विधि-विधान से पूजा-अर्चना और अनुष्ठान के बाद खोल दिए गए। मेष लग्न के शुभ संयोग पर मंदिर का कपाटोद्घाटन किया गया। मैं बाबा केदारनाथ से सभी को निरोगी रखने की प्रार्थना करता हूं।

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May 17 2021, 14:33

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क्या सरकार के रुख के कारण शाहिद जमील ने दिया इस्तीफा ?


भारत के टॉप वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील ने केंद्र के अहम साइंटिफिक एडवाइजर ग्रुप से इस्तीफा दे दिया है। वे SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम ग्रुप (INSACOG) के अध्यक्ष थे। शाहिद पर वायरस के जीनोम स्ट्रक्चर की पहचान की जिम्मेदारी थी। जीनोमिक्स कंसोर्टियम ग्रुप इसी साल जनवरी में बनाई गई थी।

हालांकि, अभी तक जमील के इस्तीफे के पीछे की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है। हालांकि, कोरोना वायरस महामारी के दौरान पिछले कुछ वक्त में वो सरकार के रुख की आलोचना करते दिखे थे, खासकर दूसरी लहर के दौरान। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या उन्होंने सरकार के रुख के चलते ही इस्तीफा दिया है?

बता दें कि हाल ही में, अशोका यूनिवर्सिटी में त्रिवेदी स्कूल ऑफ बायोसाइंस के डायरेक्टर शाहिद जमील ने न्यूयॉर्क टाइम्स में एक लेख लिखा था। जिसमें उन्होंने विस्तार से बताया था कि कोरोना से भारत में जो हालात पैदा हुए हैं, उनसे भारत किस तरह निपट सकता है। उन्होंने कोरोना संकट से निपटने के सरकार के उपायों पर कुछ सवाल भी उठाए थे। सरकार को पॉलिसी बनाने में अड़ियल रवैया छोड़ने की सलाह भी दी थी।

मोदी सरकार को दी थी वैज्ञानिकों की बात सुनने की सलाह
शाहिद जमील ने अपने लेख में मोदी सरकार को यह सलाह दी थी कि वो वैज्ञानिकों की बात सुने। पॉलिसी बनाने में जिद्दी रवैया छोड़ें। जमील ने कोरोना के नए वैरिएंट की तरफ ध्यान दिलाया और लिखा कि एक वायरोलॉजिस्ट के तौर पर मैं पिछले साल से ही कोरोना और वैक्सीनेशन पर नजर बनाए हुए हूं। मेरा मानना है कि कोरोना के कई वैरिएंट्स फैल रहे हैं और ये वैरिएंट्स ही कोरोना की अगली लहर के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। 

वैज्ञानिकों की डाटा आधारित बातें नहीं सुनी गई- डॉ. जमील
न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखे लेख में डॉ. जमील ने भारत में पॉलिसी बनाने के तरीके पर भी सवाल उठाए थे। आरोप लगाया था कि वैज्ञानिकों की डाटा आधारित बातें नहीं सुनी जाती। उन्होंने लिखा था- कोरोना से लड़ने के सभी उपायों का हमारे साथी वैज्ञानिकों ने बहुत सहयोग किया है। लेकिन उन्हें साक्ष्य आधारित नीति निर्माण को लेकर बहुत अड़ियल प्रतिरोध झेलना पड़ रहा है। 30 अप्रैल को भारत के वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री से अपील की थी कि उन्हें डाटा उपलब्ध कराया जाए, ताकि वो आगे की स्टडी, अनुमान और इस वायरस से निपटने के उपाय बता सकें। भारत में जब से महामारी बेकाबू हुई है, डाटा के आधार पर फैसला लेना भी इसकी बलि चढ़ गया है।

वैक्सीनेशन ड्राइव लड़खड़ा गई- डॉ. जमील
डॉ. जमील ने लेख में लिखा था कि भारत धीमी वैक्सीनेशन को सहन नहीं कर सकता। ये समय भारी संख्या में वैक्सीनेट करने का है। तेजी से वैक्सीनेशन के जरिए ही कोरोना संक्रमण को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा था कि शुरू में सरकार का 60 साल या 45 साल से ऊपर के गंभीर

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May 17 2021, 14:30

बंगाल के दो मंत्री को सीबीआई ने किया गिरफ्तार, ममता पहुंची सीबीआई दफ्तर, कहा मुझे भी गिरफ्तार करो
  




राज्यपाल के इजाज़त देने के बाद ही यह उम्मीद की जा रही थी कि ममता मंत्रिमंडल के सदस्य अरेस्ट होंगे। अभी शपथ ग्रहण के चंद दिन ही हुए थे कि सीबीआई ने नारद स्टिंग की फ़ाइल खोल दी और ममता के करीबी माने जानेवाले दो मिनिस्टर फिरहाद हाक़िम बॉबी और सुब्रतो मुखर्जी को गिरफ्तार कर लिया। शुभेंदु के पार्टी छोड़ने के बाद बॉबी हाकिम सीएम के राइट हैंड बन गए थे।
नारद घूस कांड में पश्चिम बंगाल के मंत्री फ़िरहाद हक़ीम और सुब्रत मुखर्जी की गिरफ़्तारी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ख़ुद सीबीआई दफ़्तर पहुँच गईं और अफ़सरों को चुनौती देते हुए कहा कि वे उन्हें गिरफ़्तार करें। 
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने इसके पहले सोमवार सुबह फ़िरहाद हक़ीम को कथित नारद घूस कांड में गिरफ़्तार कर लिया। वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नजदीक समझे जाते हैं और इस बार के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर कोलकाता पोर्ट से चुने गए हैं।
सीबीआई मदन मित्र और शोभन देव चट्टोपाद्याय को भी कोलकाता स्थित केंद्र सरकार के परिसर निज़ाम पैलेस ले गई है, जहाँ उनसे पूछताछ की जा रही है। ये तीनों ही तृणमूल कांग्रेस के विधायक हैं।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने दी अनुमति

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनकड़ ने बीते दिनों ही सीबीआई को इसकी इजाज़त दी थी। टीएमसी ने कहा कि कोरोना काल में चुनाव कराकर , सेंट्रल एजेंसियों का दुरुपयोग करने के बाद भी जब मोदी-शाह सत्ता हासिल नहीं कर पाए तब गवर्नर को आगे कर एक चुनी हुई सरकार को परेशान कर रहे हैं।

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May 17 2021, 13:37

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भारत में स्थिति अभी और हो सकती है गंभीर, WHO की चेतावनी

भारत में सोमवार को कोरोना वायरस के नए मामलों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि दैनिक मौतें 4,000 से ऊपर रहीं और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि ग्रामीण क्षेत्रों में टेस्टिंग की कमी के कारण ये गिनती अविश्वसनीय थी। मामलों में गिरावट का मतलब ये नहीं है कि संक्रमण सबसे ऊंचाई पर चढ़ कर उतर रहा है। बल्कि नया संक्रमण B.1.617 देश विदेशों में पांव पसार रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने द हिंदु से बातचीत में कहा कि भारत में कई ऐसे हिस्से हैं जहां संक्रमण अपने चरम पर नहीं पहुंचा है।स्वामीनाथन ने चिंता जताई है कि स्थिति अभी और गंभीर हो सकती है। उन्होंने कहा कि राज्यों में पर्याप्त संख्या में टेस्टिंग ही नहीं हो रही इसलिए संक्रमण के मामलों में कमी दिख रही है। 

इधर, स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों पर अगर गौर करें तो रोजाना सामने आने वाले मामले 4 लाख की संख्या को पार कर गए थे। हालांकि राहत की बात यह है कि अब यह संख्या तीन लाख के नीचे जाती हुई दिख रही है। covid19india.org द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक बीते 24 घंटे में 2.81 लाख के करीब नए मामले सामने आए हैं। कोरोना के नए मामलों की संख्या में भले ही गिरावट देखने को मिली है, लेकिन इस महामारी से मरने वालों की संख्या चार लाख के करीब आज भी बनी रही। बीते 24 घंटे में इस बीमारी से 4 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई।

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May 17 2021, 11:59

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*हरिद्वार के कोविड अस्पताल में 18 दिन में हुई 65 लोगों की मौत, कोविड कंट्रोल रूम को नहीं है कोई जानकारी*

हरिद्वार के कोविड अस्पताल में अब तक कोरोना से 65 मरीजों की मौत हो चुकी है। आरोप है कि अस्पताल ने इन मौतों की सूचना को प्रशासन से छिपाया। 25 अप्रैल से 12 मई के बीच हुए इन मौतों की कोविड कंट्रोल रूम को जानकारी नहीं दी गई। राज्य सरकार के कोविड कंट्रोल के नोडल अधिकारी ने हॉस्पिटल और सीएमओ हरिद्वार को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है। बता दें कि बाबा बर्फानी हॉस्पिटल को एक निजी धार्मिक संस्था संचालित करती है। कुंभ मेले के दौरान प्रशासन ने इसे 500 बेड के कोविड केयर हॉस्पिटल में तब्दील कर दिया था।


18 दिन में हुई 65 लोगों की मौत 

मौत का आंकड़ा 25 अप्रैल से 12 मई के बीच का है। इस दौरान अस्पताल में कोरोना से 65 मरीजों की मौत हो गई।18 दिन में हर रोज मौत होती रही, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने समय से सूचना देना जरूरी नहीं समझा।
स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की जांच के बाद मामला सामने आया। जबकि उत्तराखंड सरकार का आदेश है कि राज्य में जिस अस्पताल में भी कोरोना मरीजो की इलाज के दौरान मौत हो जाती है तो उसकी जानकारी 24 घंटे के भीतर राज्य कोविड कंट्रोल रूम को देनी अनिवार्य है। मगर इसकी जानकारी स्टेट कॉविड कंट्रोल रूम को नहीं दी गई। 


वहीं, हरिद्वार के जिलाधिकारी का कहना है कि अस्पताल द्वारा दिये गए डाटा को डॉक्टरों के छुट्टी पर होने की वजह से समय से एंट्री नहीं किया जा सका इसलिए यह सारा भ्रम पैदा हुआ।
सवाल है क्या कोरोना सं जारी जंग के बीच जब देश में डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ की कमी है, तब भी डॉक्टर छुट्टी पर हैं ?

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May 17 2021, 11:24

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नारदा घोटाला मामले में ममता के दो मंत्रियों समेत 4 नेताओं को सीबीआई ने किया गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सरकार बनने के बाद एक बार फिर नारदा घोटाले पर कार्रवाई शुरू हो गई है। सीबीआई ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के 2 मंत्रियों समेत 4 नेताओं को अरेस्ट कर लिया गया है। एजेंसी ने सोमवार को मंत्री फिरहाद हाकिम और सुब्रत मुखर्जी को अरेस्ट कर लिया। इसके अलावा टीएमसी के ही विधायक मदन मित्रा और कोलकाता के पूर्व मेयर सुवन चटर्जी को भी अरेस्ट किया गया है। इन नेताओं को नारदा स्टिंग ऑपरेशन के मामले में गिरफ्तार किया गया है। सोमवार को एजेंसी की टीम इन अधिकारियों के घर पर पहुंची और उन्हें पूछताछ के लिए कोलकाता के निजाम पैलेस स्थित अपने दफ्तर लेकर आई थी। 

सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के बाद इन नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है और आज दिन में उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा। राज्य के गवर्नर जगदीप धनखड़ की ओर से इन नेताओं के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी सीबीआई को दिए जाने के बाद यह एक्शन लिया गया है। 


टीएमसी ने कहा, बदला लेने जैसी सोच
सीबीआई की कार्रवाई को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि हम इसकी निंदा करते हैं और यह बदला लेने जैसी सोच है। वहीं बीजेपी का कहना है कि इन गिरफ्तारियों में उसका कोई रोल नहीं है। पार्टी के प्रवक्ता समिक भट्टाचार्जी ने कहा, 'हमें कुछ नहीं कहना है। बीजेपी का इससे कुछ भी लेना-देना नहीं है।' मंत्रियों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर से 2016 से पहले उभरे नारदा स्कैम के मामले को सामने ला दिया है। दरअसल नारदा स्टिंग ऑपरेशन में टीएमसी के कई सीनियर नेता एक फर्जी कंपनी की मदद के बदले में कैश लेते दिखे थे।

क्या है पूरा मामला?
साल 2016 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले नारद न्यूज के सीईओ मैथ्यू सैमुएल ने एक स्टिंग वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में वे एक कंपनी के प्रतिनिधि के तौर पर तृणमूल कांग्रेस के सात सांसदों, तीन मंत्रियों और कोलकाता नगर निगम के मेयर शोभन चटर्जी से मिले थे और एक काम के बदले मोटी रकम देते नजर आए थे। बताया गया था कि ये टेप 2014 में बनाया गया था। जिसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने मार्च, 2017 में स्टिंग ऑपरेशन को लेकर सीबीआई जांच का आदेश दिया था।

स्टिंग में मुकुल राय और शुभेंदु अधिकारी समेत कई बड़े नाम
स्टिंग ऑपरेशन में मौजूदा बीजेपी नेता मुकुल राय, ममता के पूर्व सहयोगी और फिलहाल बीजेपी विधायक शुभेंदु अधिकारी, सुब्रत मुखर्जी, सुल्तान अहमद, काकोली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, शोभन चटर्जी, मदन मित्रा, इकबाल अहमद और फिरहाद का नाम सामने आया था।

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May 17 2021, 11:08

दवाओं ,अनाज की जमाखोरी और कालाबाजारी पर बनी दिलीप कुमार की 1953 मे बनी फिल्म 'फुटपाथ' ने याद ताजा कर दी,: धर्मेन्द्र
  


 मुंबई : देश में कोरोना महामारी के बीच दवाओं की  भारी किल्लत है। वहीं जरूरी दवाओं और ऑक्सीजन की कालाबाजारी की शिकायतें भी लगातार मिल रही हैं। कोरोना मरीजों को लगने वाले इंजेक्शन के लिए लोगों को कई गुना पैसा देना पड़ रहा है। इसको लेकर मशहूर अभिनेता धर्मेंद्र ने दुख जाहिर किया है। 

उन्होंने दिलीप कुमार की 1953 में रिलीज हुई फिल्म से एक विडियो क्लिप शेयर करते हुए कहा है कि वही हो रहा है, जो तब हुआ था।

दिलीप कुमार की फिल्म का वीडियो किया शेयर
दवाओं और अनाज की जमाखोरी और कालाबाजारी पर बनी दिलीप कुमार की साल 1953 में रिलीज हुई फिल्म 'फुटपाथ' का सीन शेयर करते हुए धर्मेंद्र ने ट्विटर पर लिखा है, '1952 में जो हो रहा था आज भी वही हो रहा.

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May 17 2021, 10:54

- in- gujarat
  

गुजरात में 1 मार्च से 10 मई के बीच जारी किए गए करीब 1.23 लाख डेथ सर्टिफिकेट, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक महज 4 हजार लोगों ने तोड़ा दम

देश में कोरोना कहर बरपा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों ने ही लोगों को भयभीत कर रखा है। इस बीच कोरोना से हो रही मौतों के आंकड़ों पर सवाल उठ रहे हैं।  
देशभर में जारी कोरोना कहर के बीच गुजरात से डराने वाले आंकड़े सामने आए हैं। गुजराती न्यूजपेपर ने सरकार द्वारा जारी किए गए डेथ सर्टिफिकेट के आंकड़ों के आधार पर दावा किया है कि राज्य में पिछले साल इसी अवधि की तुलना में 1 मार्च से 10 मई के बीच करीब 61,000 अधिक मौतें हुई हैं। 

गुजराती अखबार दिव्य भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 मार्च से 10 मई के बीच गुजरात में करीब 1 लाख 23 हजार 871 डेथ सर्टिफिकेट जारी किए हैं, जो पिछले साल की तुलना में करीब 65 हजार अधिक है। पिछले साल इसी अवधि के दौरान 58000 डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए थे। यह आंकड़ा गुजरात के 33 जिलों और आठ बड़े शहरों की नगर निकाय द्वारा जारी किए डेथ सर्टिफिकेट के आधार पर अखबार ने पेश किया है। वहीं सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान यानी 1 मार्च से 10 मई के बीच 33 जिलों में कोरोना से 4218 लोगों की मौतें हुई हैं।

जारी डेथ सर्टिफिकेट और सरकारी आंकड़ों में बड़ा अंतर क्यों ?
अखबार ने गुजरात के सभी जिलों की ओर से जारी डेथ सर्टिफिकेट का भी आंकड़ा पेश किया है।साथ ही अखबार ने हर जिलों में हुई कोरोना से मौत का सरकारी आंकड़ा भी दिखाया है।  रिपोर्ट के मुताबिक अहमदाबाद में 1 मार्च से 10 मई के बीच 13,593 डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं, जबकि पिछले साल सिर्फ 7,786 जारी किए गए थे। वहीं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इसी अवधी में इस साल सिर्फ 2,126 लोगों की मौत कोरोना महामारी से हुई है। 
इसके अलावा राजकोट में करीब 10,878 डेथ सर्टिफिकेट जारी के गए हैं। हालांकि सरकार के अनुसार इतने दिनों में सिर्फ 288 लोगों की मौत कोरोना से हुई है। वहीं पिछले साल
1 मार्ट से 10 मई के बीच 2,583 डेथ सर्टिफ्केट जारी किए गए थे। ये गुजरात के एक या दो जिलों का नहीं है, बल्कि इस तरफ की हेरफेर हर जिलों के आंकड़ों में देखी जा रही है।

क्या मौतों के आंकड़ों को कम कर दिखाया जा रहा
इन आंकड़ों के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर गुजरात में इतनी मौतें क्यों हो रही हैं। क्या कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़ों को कहीं कम करके तो नहीं दिखाया जा रहा। क्या इन मौतों का कोरोना से भी कोई कनेक्शन है? 
लोकल गुजराती अखबारों में कई क्षेत्रों में आधिकारिक आंकड़ों की तुलना में कोविड से होने वाली मौतों को ज्यादा बताया जा रहा है। इनमें से कई राज्य के श्मशान घाटों के आंकड़ों पर आधारित थे। बता दें कि गुजरात में कोरोना से होने वाली मौतों का आलम यह है कि श्मशान घाटों और शवदाह गृहों पर लाइनें लग रही हैं।

न्यूयॉर

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     @India   टाइम्स ने भी कहा हो रही 5 गुना ज्यादा मौते*
    बता दें कि पिछले दिनों न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि गुजरात सहित कई राज्यों में कोरोना से हो रही मौतों के आंकड़ों में छेड़छाड़ की जा रही है। मिशिगन यूनिवर्सिटी के महामारी एक्सपर्ट भ्रमर मुखर्जी ने न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखा था कि सरकारी आंकड़ों से करीब 5 गुना ज्यादा मौतें इस महामारी की वजह से हो रही है।