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Mar 24 2020, 16:51

सूंघने और स्वाद की क्षमता का खत्म होना कोरोनोवायरस संक्रमण के लिए अजीबोगरीब लक्षण माने जा रहे हैं
  



अब तक कोरोना वायरस से संक्रमित होने वालों में सर्दी, खांसी, बुखार और निमोनिया जैसे मिलते जुलते लक्षण का होना बता जा रहा था, लेकिन अब ब्रिटेन में डाक्टर्स के एक समूह ने संक्रमित मरीजों के कुछ अजीबोगरीब लक्षण बताए हैं।इन डाक्टरस ने उन लोगों के लिए परीक्षण और अलगाव की सिफारिश की है जो गंध और स्वाद लेने की क्षमता खो देते हैं, भले ही उनके पास कोरोना से संक्रमित होने के कोई और लक्षण भले ही न हों।

इन डाक्टर्स ने कुछ ऐसे मरीजों का उदाहरण भी दिया है। एक माँ जो कोरोनावायरस से संक्रमित थी, उसके बच्चे के डायपर की गंध उसे नहीं आ रही थी। वो रसोइया जो आमतौर पर हर मसाले को एक रेस्तरां डिश में नाम दे सकता हैं,संक्रमण के बाद उन्हें करी या लहसुन, और भोजन का स्वाद मामूल नहीं चला। एक और शख्स का कहना है कि वे शैम्पू की खुशबू या कूड़े की दुर्गंध को अलग नहीं कर सकते। एनोस्मिया, गंध की भावना की हानि, और उम्र के साथ, स्वाद का का एहसास कम हो जाना, कोविद -19 के अजीबोगरीब गप्पी संकेत के रूप में उभरे हैं।

ब्रिटिश कान, नाक और गले के डॉक्टरों ने दुनिया भर के रिपोर्टों का हवाला देते हुए, उन वयस्कों को अलग रहने की सलाह दी है जिन्होंने अपनी सूंधने की क्षमता को खो दी हैं, भले ही उनके पास कोरोना से संक्रमण के कोई अन्य लक्षण न हों। ऐसा उन्होंने बीमारी के प्रसार को धीमा करने के लिए कहा है। हालांकि इस तरह के डेटा सीमित है, लेकिन डॉक्टर चेतावनी देने के लिए चिंतित हैं।
ब्रिटिश राइनोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो क्लेयर हॉपकिंस ने ईमेल में लिखा है, "हम वास्तव में जागरूकता बढ़ाना चाहते हैं कि यह संक्रमण का संकेत है और जिस किसी की भी सूंधने की भावना को नुकसान पहुंचाता है, उसे अलग-थलग करना चाहिए।" "यह संचरण को धीमा करने और जीवन को बचाने में योगदान दे सकता है।"



source : http://bit.ly/2WyKqQL

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     @India  वह और ईएनटी यूके के अध्यक्ष निर्मल कुमार, ब्रिटेन में कान, नाक और गले के डॉक्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक समूह ने एक संयुक्त बयान जारी कर स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों से व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करने का आग्रह किया है, जो किसी भी ऐसे मरीज का इलाज करते हैं, जो गंध की इंद्रियों को खो देते हैं और इसके खिलाफ सलाह देते हैं किसी पर भी नॉनसेंशियल साइनस एंडोस्कोपी प्रक्रिया करना, क्योंकि वायरस नाक और गले में दोहराता है और एक परीक्षा खाँसी या छींक को संकेत दे सकती है जो डॉक्टर को उच्च स्तर के वायरस को उजागर करती है।
    डॉ हॉपकिंस ने कहा कि ब्रिटेन में दो कान, नाक और गले के विशेषज्ञ जो कोरोनोवायरस से संक्रमित थे, गंभीर स्थिति में हैं। डॉ हॉपकिंस ने कहा कि चीन के वुहान से पहले की रिपोर्ट में, जहां कोरोनोवायरस पहली बार सामने आया था, ने चेतावनी दी थी कि कान, नाक और गले के विशेषज्ञ के साथ-साथ नेत्र चिकित्सक भी संक्रमित थे और बड़ी संख्या में मर रहे थे।
    ब्रिटिश चिकित्सकों ने अन्य देशों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि कोरोनोवायरस रोगियों की ज्यादा संख्या ने एनोस्मिया का अनुभव किया, उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया में, जहां परीक्षण व्यापक रूप से हुआ है, 30 प्रतिशत 2,000 रोगियों ने सकारात्मक एनोस्मिया का परीक्षण किया जो प्रमुख पेशी लक्षण के रूप में थे । 
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Mar 24 2020, 16:30

कोरोना संकट के बीच सरकार के 10 बड़े ऐलान, यहां जानें-आपको क्या मिला
  


फाइनेंशियल ईयर का आखिरी महीना चल रहा है और इस महीने में कोरोना वायरस के कहर से पूरा देश परेशान है. इस बीच, सरकार से आम जनता के लिए राहत की खबर मिली है. आइए, 10 प्वाइंट में जानते हैं कुछ राहत की बातें..

- अगले 3 महीने के लिए ATM से कैश निकालना फ्री कर दिया गया है. मतलब ये कि अगर आप किसी भी बैंक के एटीएम से कैश निकालते हैं तो उस पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. इसके साथ ही मिनिमम बैलेंस का झंझट भी खत्म हो गया है. मतलब बैंक अकाउंट में कैश रखने की जरूरत नहीं है. डिजिटल ट्रेड के लिए बैंक चार्जेज को घटाया गया है. इसका मकसद डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देना है.

- सरकार ने आधार-पैन लिंक करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 30 जून 2020 तक कर दी है. अब तक ये डेडलाइन 31 मार्च थी. कहने का मतलब ये है कि आप 30 जून 2020 तक आधार और पैन की लिंकिंग करा सकते हैं.

- विवाद से विश्वास स्कीम को भी अब 30 जून कर दिया गया है. 31 मार्च के बाद 30 जून तक कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा. बता दें कि विवाद से विश्वास का उद्देश्य उन लोगों को राहत देना है जिनकी टैक्स देनदारी को लेकर कई तरह का विवाद है.

- वित्त वर्ष 2018-19 के लिए टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 30 जून कर दिया गया है. अब तक इसकी डेडलाइन 31 मार्च 2020 थी. अब नई डेडलाइन पर लेट पेमेंट्स के लिए ब्याज दर को 12 फीसदी से घटाकर 9 फीसदी कर दिया गया है.

- हालांकि टीडीएस डिपॉजिट के लिए डेडलाइन नहीं बढ़ाई गई है. लेकिन 30 जून 2020 तक देर से भरे गए टीडीएस के लिए ब्याज दर को घटाकर 9 फीसदी कर दिया गया है. बता दें कि वर्तमान में ये दर 18 फीसदी है.

- जीएसटी फाइलिंग को लेकर भी सरकार ने राहत दी है. दरअसल, मार्च, अप्रैल और मई के लिए जीएसटी रिटर्न भरने के लिए समय सीमा को भी बढ़ाकर 30 जून 2020 कर दिया गया है.

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     @India  - वहीं 5 करोड़ रुपये से कम सालाना टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए लेट जीएसटी रिटर्न भरने पर कोई ब्याज, लेट फीस व पेनल्टी नहीं लगेगी. इससे ज्यादा के टर्नओवर वाली कंपनियों पर पहले 15 दिन के लिए कोई लेट फीस और पेनल्टी नहीं लगेगी.
    
    - हालांकि, 15 दिन के बाद उनके लिए ब्याज, पेनल्टी या लेट फीस 9 फीसदी की दर पर होगी. इसके अलावा कंपो​जीशन स्कीम का लाभ लेने के लिए भी डेडलाइन 30 जून 2020 कर दी गई है.
    
    - एक्सपोर्टर, इंपोर्टर को राहत देने के लिए 30 जून 2020 तक कस्टम क्लियरेंस 24 घंटे सातों दिन होगा.
    
    - कॉर्पोरेट को राहत देते हुए यह कहा गया कि बोर्ड बैठक 60 दिनों के लिए टाला जा सकता है. यह राहत फिलहाल अगली दो तिमाही के लिए है.
    
    - वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कोरोना वायरस लॉकडाउन के मद्देनजर विभिन्न क्षेत्रों की मदद के लिये सरकार जल्द ही आर्थिक पैकेज की घोषणा करेगी. उन्होंने कहा कि देरी नहीं होगी, पैकेज की घोषणा जल्द ही की जाएगी. 
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Mar 24 2020, 15:35

मायलैब की पहली मेड-इन-इंडिया COVID-19 परीक्षण किट को वाणिज्यिक स्वीकृति
  


पुणे स्थित आणविक डायग्नोस्टिक्स कंपनी मायलाब डिस्कवरी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, जो आणविक डायग्नोस्टिक किटों में माहिर है, ने छह सप्ताह के रिकॉर्ड समय में कोविद - 19 के लिए टेस्ट किट विकसित की है। टेस्ट किट को सोमवार को वाणिज्यिक उत्पादन की अनुमति मिल गई। ऐसी अनुमति पाने वाली यह देश की पहली कंपनी है।ष्टता हासिल की है।
देश की पहली कोरोना टेस्टिंग किट
माईलाब डिस्कवरी सॉल्यूशंस के प्रबंध निदेशक हंसमुख रावल, ने कहा "मेक इन इंडिया 'और स्थानीय और केंद्र सरकार के समर्थन पर जोर देने के साथ, WHO / CDC दिशानिर्देशों के अनुसार कोविद - 19 किट बनाया गया है। यह रिकॉर्ड समय में विकसित और मूल्यांकन किया गया था"। उन्होंने आगे कहा कि इस राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान आईसीएमआर, एनआईवी, बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (बीआईआरएसी) के मूल्यांकन केंद्र के नियामक निकायों (सीडीएससीओ / एफडीए) से समर्थन और तत्काल कार्रवाई सराहनीय है।
मायलैब को किट बनाने का कई वर्षों का अनुभव है। मायलाब वर्तमान में ब्लड बैंकों / अस्पतालों, मात्रात्मक एचआईवी, एचबीवी और एचसीवी किट के लिए आईडी-एनएटी स्क्रीनिंग किट बनाती है। माईलैब को इसी के तहत कोविद - 19 किट बनाने के लिए ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से भी मंजूरी मिली है। 
तेजी से संक्रमण का पता लगाने में सक्षम
मायलैब के कार्यकारी निदेशक शैलेंद्र कावडे ने कहा किट का आईसीएमआर ने परीक्षण किया है, और सीडीएससीओ द्वारा अनुमोदित है। ये किट काफी तेजी से संक्रमण का पता लगाती है।
वर्तमान में, भारत प्रति मिलियन जनसंख्या पर किए गए परीक्षण के मामले में सबसे नीचे है। यह संख्या 6.8 है। दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे देशों ने परीक्षण की संख्या बढ़ाकर कोरोनोवायरस मामलों की बढ़ती संख्या को समाहित किया है।
अब तक जर्मनी से लाखों परीक्षण किटों की सोर्सिंग हो चुकी है
अब तक भारत सरकार जर्मनी से लाखों परीक्षण किटों की सोर्सिंग कर रही है ताकि कोरोनोवायरस के रोगियों के निदान के लिए परीक्षण की सुविधा दी जा सके। हालांकि, विदेशी किटों पर निर्भरता परेशान करने वाली है और ग्राउंडेड एयरलाइनों के कारण आपूर्ति अवरुद्ध हो रही है।

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     @India  एक सप्ताह में 1 लाख परीक्षणों का निर्माण
    मायलैब ने वादा किया कि यह एक सप्ताह में 1 लाख परीक्षण किट का निर्माण कर सकता है। जिसे जरूरत पड़ने पर और बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा, कंपनी का दावा है कि इसके एक किट के साथ लगभग 100 रोगियों का परीक्षण कर सकते हैं। स्वचालित पीसीआर के साथ एक औसत प्रयोगशाला एक दिन में 1000 से अधिक रोगियों का परीक्षण कर सकती है।
    2.5 घंटे के भीतर संक्रमण का पता
    परीक्षण किटों की स्थानीय सोर्सिंग के साथ, यह भारत के लिए एक सफलता होगी क्योंकि माईलैब द्वारा परीक्षण किट को वर्तमान खरीद लागत का लगभग एक-चौथाई खर्च होगा। इसके अलावा, Mylab PathoDetect COVID-19 गुणात्मक पीसीआर किट स्क्रीन और वर्तमान प्रोटोकॉल द्वारा लिए गए सात-प्लस घंटे की तुलना में 2.5 घंटे के भीतर संक्रमण का पता लगाता है। इसका मतलब यह है कि प्रयोगशालाएं एक मशीन पर एक ही समय में दो बार प्रतिक्रियाएं करने में सक्षम होंगी। 
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Mar 24 2020, 15:28

कोरोना वायरस से बचने के बताएं उपाय, सरकार देगी एक लाख का पुरस्कार, छात्रों से मांगे गए हैं आइडिया
  



तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस के मामले को देखते हुए बिहार सरकार ने छात्रों से बचाव के उपाय मांगे हैं। सरकार ने टेक्निकल छात्रों और स्टार्टअप कंपनियों से भी सुझाव मांगी है। बेस्ट आइडिया देने वालों को सरकार एक लाख रुपये का पुरस्कार भी देगी। आल इंडिया कॉउंसिल फ़ॉर टेक्निकल एडुकेशन की ओर से कोविड-19 सोलुयूशन चैलेंज के बारे में बताया गया है। सरकार उनकी भी जानकारी जुटा रही जिन्होंने टेक्नोलॉजी और इनोवेटिव सोलुशन विकसित किये हैं। सरकार द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में कम्युनिटी को शामिल करने के लिए अपने-अपने समाधान साझा करें। 31 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन करने की तिथि है। बेस्ट समाधान बताने वाले तीन को पुरस्कृत किया जाएगा। प्रथम को।एक लाख, द्वितीय को 50 हजार और तृतीय को 25 हजार रुपये इनाम दिये जायेंगे।

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Mar 24 2020, 15:09

मुंबई क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई, 14 करोड़ रुपये का फेस मास्क जब्त
  


मुंबई - कोरोना के कहर के बीच देश भर से मास्क और सेनेटाइजर के काला बाजारी की खबरे लगातार आ रही हैं। इसी बीच मुंबई से बड़ी खबर मिल रही है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 करोड़ रुपये का फेस मास्क जब्त किया है।
मुंबई क्राइम ब्रांच की इस सफलता के बाद महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने बताया कि पुलिस ने अंधेरी और भिवंडी के गोदामों में छापा मारी कर 25 लाख मास्क ज़ब्त किए हैं। जिसमें कुल 15 करोड़ रुपये के 3 लाख N95 मास्क शामिल हैं।इस मामले में  4 लोगों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है जबकि 2 लोग फरार होने में कामयाब रहे।

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Mar 24 2020, 15:01

लाॅकडाउन में लापरवाही बरती तो खानी पड़ सकती है जेल की हवा, 123 साल पुराने कानून का लिया जा सकता है सहारा*
  


कोरोना के हराने के लिए केन्द्र समेत राज्य सरकारों ने कमर कस ली है। वायरस इससे ज्यादा ना फैले इसके लिए पूरे देश में लाकडाउन है,बावजूद इसके लोग इसे नजरअंदाज कर रहे हैं। जिसके बाद धारा 144 लागू कर दी गई है। इसके साथ ही एक और धारा है जिससे लोगों को डरने की जरूरत है,  धारा 188। इस कानून को तोड़ा तो सीधे जेल की हवा खानी पड़ेगी, जेल का पानी पीना पड़ेगा।
महामारी रोक कानून 1897 है प्रभावी
इस वक्त पूरे देश में धारा 188 लागू है। Epedemic Diseases Act 1897 के तहत अब राज्य और केंद्र सरकारें विशेष अधिकारों के जरिए कोरोना की रोकथाम के प्रयास कर सकेंगी। इस कानून के तहत सरकार किसी भी उस व्यक्ति को जेल में डाल सकती हैं जो दिशानिर्देशों का का उल्लंधन करता दिखे। 123 साल बाद भी ये कानून प्रभावी है। इस कानून को पहली बार 1896 में तब लागू किया गया था जब बॉम्बे प्रेसीडेंसी में प्लेग महामारी फैल गई थी।
इस कानून को तब ही लागू किया जाता है जब सरकारों को ये लगने लगता है कि मौजूदा नियमों के तहत रोकथाम नहीं हो पा रही है। इसके तहत केंद्र या राज्य सरकार को विशेष अधिकार मिलते हैं कि वो किसी इलाके को डेंजर जोन मान सकती हैं। इस इलाके में आने-जाने वाले किसी भी व्यक्ति या किसी अन्य चीज की जांच सरकार कर सकती है।

कानून के सेक्शन 2A के मुताबिक केंद्र सरकार को ये अधिकार प्राप्त हो जाता है कि वो देश के बंदरगाहों पर आने वाले किसी भी जहाज की जांच कर सकती है। गौरतलब है कि जब ये कानून बना था तब विदेश यात्राओं का एकमात्र साधन पानी जहाज था। अगर किसी विदेशी यात्री के जरिए महामारी का वायरस फैलने की आशंका होती थी सरकारें ये उपाय करती थीं। वैसे कोरोना के संदर्भ में भी देखें तो चीन से ये वायरस दूसरे देशों में यात्रियों के जरिए ही पहुंचा है।

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     @India  कानून तोड़ा तो 6 महीने की सजा और एक हजार जुर्माना
    महामारी रोक कानून 1897 का इस्तेमाल किसी इलाके में आवाजाही रोकने और मरीज को उसके घर या अस्पताल में क्वारेंटाइन करने के लिए किया जाता है। इसी कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को एय़रपोर्ट, रेलवे स्टेशन या किसी सार्वजनिक जगह से पकड़कर बिना कारण बताए अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता है।ऐसे में अगर कोई व्यक्ति अस्पताल जाने से इनकार करता है या सबसे अगर रहने से भी इनकार करता है तो उसपर धारा 188 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।जिसके तहत कम से कम 6 महीने की सजा और एक हजार रूपया जुर्माना भी लगाया जा सकता है। 
    
    तो कोरोना के मुसीबत के बीच सरकार और प्रशासन की बात ना मानकर धारा 188 का उल्लंधन एक और मुसीबत खुद के लिए ना बुलाए। अच्छा होगा कानून का पालन करें और खुद के साथ साथ दूसरों को भी कोरोना के खतरे से बचाएं। 
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Mar 24 2020, 12:10

कोरोना वायरस- सिंगापुर, हांगकांग और ताइवान जैसे देशों से सबक लेने की है जरूरत 
  

कोविड -19 तेजी से संक्रमित होने वाली बीमारी है। हालांकि कुछ सावधानियां बरतकर इसे फैलने से रोका भी जा सकता है। जैसा की कई एशियाई देशों ने किया। पश्चिमी देशों से तुलना करें तो सिंगापुर, हांगकांग और ताइवान में कई हफ़्ते पहले ही कोरोना वायरस फैल गया था।मगर चीन के नज़दीक होने के बावजूद इन एशियाई देशों में संक्रमण के मामले दुनिया के अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है।
दुनियाभर में जिस तरह के हालात हैं, ऐसे में इन देशों ने ऐसा क्या अलग किया इससे दूसरे देशों को सबक लेने की जरूरत है? आइए नज़र डालते हैं ताइवान जैसे देशों में कम हुए संक्रमण की वजहों पर -  
पहला सबक सोशल डिस्टैंसिंग को बढ़ावा देना 
स्वास्थ्य विशेषज्ञ की माने तो संक्रमित लोगों को अलग रखने और सोशल डिस्टैंसिंग यानी भीड़भाड़ में जाने और लोगों के क़रीब जाने से बचने को बढ़ावा देकर इसपर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।
पश्चिमी देशों में ये क़दम उठाए गए लेकिन देर से। कई देश इसे लेकर तुरंत हरकत में नहीं आए। विश्व स्वास्थ्य संगठन में रिसर्च पॉलिसी के पूर्व निदेशक तिक्की पंगेस्तू कहते हैं, "अमरीका और ब्रिटेन ने एक अवसर गंवाया है. उनके पास चीन के बाद दो महीने थे मगर उन्हें लगा कि चीन बहुत दूर है और उन्हें कुछ नहीं होगा."
WHO को चीन ने बीते साल 31 दिसंबर को ही 'सार्स जैसे रहस्यमय निमोनिया' के मामलों की जानकारी दी थी।हालांकि उस समय तक इंसानों से एक-दूसरे में इसके फैलने की बात नहीं की गई थी।उस वक्त तक वायरस को लेकर ज्यादा जानकारी भी नहीं थी मगर तीन दिनों के अंदर सिंगापुर, ताइवान और हांगकांग ने अपनी सीमाओं पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी।
ताइवान ने वुहान से आने वाले विमानों के यात्रियों को नीचे उतारने से पहले उनकी जांच भी की। जैसे जैसे वैज्ञानिकों को इस वायरस के बारे में और पता चला, यह सामने आया कि जिन संक्रमित लोगों के अंदर लक्षण नहीं पाए गए हैं, वे भी दूसरों में संक्रमण फैला सका है। इसलिए कोरोना की पुष्टि के लिए टेस्ट किया जाना बेहद अहम बन गया।
दूसरा सबक ज्यादा से ज्यादा टेस्ट किया जाना
शुरू में दक्षिण कोरिया में कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े। मगर इसने संक्रमण की पुष्टि के लिए टेस्ट विकसित किया और 2 लाख 90 हजार से अधिक लोगों का परीक्षण किया। हर रोज यहां करीब 10 हजार लोगों का मुफ्त परीक्षण हो रहा है।
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में इमर्जिंग इन्फ़ेक्शियस डिज़ीज़िस के प्रोफ़ेसर ओई इंग इयॉन्ग कहते हैं, "जिस तरह से उन्होंने इंतज़ाम किए और जनता के टेस्ट करवाए, वह कमाल है."
2015 में जब मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रॉम फैला था, तब दक्षिण कोरिया में 35 लोगों की मौत हुई थी। तभी से यहां संक्रामक बीमारियों के टेस्ट की मंज़ूरी के लिए विशेष सिस्टम है ताकि तुरंत टेस्ट किए जा सकें।
वहीं, अमरीका में ट

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     @India   वहीं, अमरीका में टेस्टिंग में देरी की गई। शुरुआती टेस्ट किट ख़राब थे और प्राइवेट लैब में करवाए जाने वाले टेस्ट को मंज़ूरी मिलने में देरी हुई। बहुत सारे लोग महंगे होने के कारण टेस्ट नहीं करवा पाए। बाद में क़ानून बनाया गया और सभी के लिए फ्री टेस्टिंग का प्रावधान किया गया।
    वहीं कुछ देशों में के पास टेस्ट के लिए पर्याप्त किट्स नहीं हैं, जिसके कारण उन देशों में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े।
    तीसरा सबक लोगों का ट्रेस करना
    वायरस के फैलाव को रोकने के लिए जिन लोगों में लक्षण हैं, उनकी पहचान करना ही काफी नहीं है।बल्कि संक्रमित लोग किस-किस के संपर्क में आ चुके हैं, इसका पता लगाना भी काफ़ी अहम है। सिंगापुर में जासूसों ने 6,000 ऐसे लोगों को सीसीटीवी फुटेज वगैरह के माध्यम से ट्रेस किया जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में हो सकते थे।
    फिर इनका टेस्ट किया गया और उन्हें साफ़ नतीजा आने तक अकेले में रहने का आदेश दिया गया। हांगकांग में तो उन लोगों को भी ट्रेस किया जाता है जो किसी संक्रमित व्यक्ति में लक्षण दिखने से दो दिन पहले तक उसके संपर्क में आए हों।
    जिन लोगों को खुद ही अकेले रहने के लिए कहा गया है, वे ऐसा कर रहे हैं या नहीं, यह जांचने के लिए कई तरीके अपनाए गए हैं। हांगकांग में विदेश से आने वाले लोगों को बांह में एक इलेक्ट्रिक ब्रेसलेट पहनना होता है जो उनकी मूवमेंट को ट्रैक करता है।
    चौथा सबक- समय रहते सामाजिक दूरी बनाना
    किसी भी व्यापक संक्रमण को रोकना है तो उसके लिए सोशल डिस्टेंसिंग को सबसे बेहतर तरीका माना जाता है। मगर इसमें जितनी देरी की जाए, बाद में काबू पाने के लिए उतने ही अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। ठीक वैसे ही जैसा चीन में हुआ। चीन के वुहान में, जहां से वायरस फैला, शटडाउन शुरू होने से पहले ही 50 लाख लोग वहां से अन्य जगहों पर जा चुके थे।
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Mar 24 2020, 11:24

ब्रेकिंग : आज रात 8 बजे फिर देश को संबोधित करेंगे पीएम मोदी, कोरोना वायरस पर करेंगे बात
  


देश में लगातार बढ़ते जा रहे कोरोना वायरस के मामलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार शाम को एक बार फिर देश को संबोधित करेंगे. पीएम मोदी आज शाम को 8 बजे राष्ट्र को संबोधन देंगे. इससे पहले 19 मार्च को पीएम ने देश को संबोधित किया था और जनता कर्फ्यू का ऐलान किया था.

देश में कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों की संख्या बढ़कर 500 के पार हो चुकी है और अबतक 10 मौत हो गई हैं. ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों ने लॉकडाउन का ऐलान किया था, कई राज्यों में कर्फ्यू भी लगाया गया है.

लॉकडाउन का कई राज्यों में हुआ था उल्लंघन

बता दें कि कोरोना वायरस के चलते देश के 30 राज्यों में लॉकडाउन किया गया है. लेकिन सोमवार को जो तस्वीरें आई थीं उनमें देखने को मिला था कि लोग सड़कों पर आ रहे हैं और लॉकडाउन का पालन नहीं कर रहे हैं. खुद प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर लोगों से अपील की थी कि वे लॉकडाउन को गंभीरता से लें और राज्य सरकार कानून का पालन करवाएं.

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Mar 24 2020, 11:23

ब्रेकिंग : आज रात 8 बजे फिर देश को संबोधित करेंगे पीएम मोदी, कोरोना वायरस पर करेंगे बात
  


देश में लगातार बढ़ते जा रहे कोरोना वायरस के मामलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार शाम को एक बार फिर देश को संबोधित करेंगे. पीएम मोदी आज शाम को 8 बजे राष्ट्र को संबोधन देंगे. इससे पहले 19 मार्च को पीएम ने देश को संबोधित किया था और जनता कर्फ्यू का ऐलान किया था.

देश में कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों की संख्या बढ़कर 500 के पार हो चुकी है और अबतक 10 मौत हो गई हैं. ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों ने लॉकडाउन का ऐलान किया था, कई राज्यों में कर्फ्यू भी लगाया गया है.

लॉकडाउन का कई राज्यों में हुआ था उल्लंघन

बता दें कि कोरोना वायरस के चलते देश के 30 राज्यों में लॉकडाउन किया गया है. लेकिन सोमवार को जो तस्वीरें आई थीं उनमें देखने को मिला था कि लोग सड़कों पर आ रहे हैं और लॉकडाउन का पालन नहीं कर रहे हैं. खुद प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर लोगों से अपील की थी कि वे लॉकडाउन को गंभीरता से लें और राज्य सरकार कानून का पालन करवाएं.

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Mar 24 2020, 10:41

दिल्ली: शाहीन बाग के बाद सीलमपुर, जामिया और हौजरानी से हटाए गए प्रदर्शनकारी
  


प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हटाया
दिल्ली के शाहीन बाग से प्रदर्शनकारियों का टेंट उखाड़ने के बाद पुलिस ने सीलमपुर, जामिया और हौजरानी में भी कार्रवाई की. सीलमपुर में कई दिनों से नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर धरना प्रदर्शन चल रहा था. मंगलवार सुबह भारी पुलिस फोर्स की तैनाती के बीच प्रदर्शनकारियों के टेंट उखाड़ दिए गए हैं. साथ ही 66 फुटा रोड को खाली करा लिया गया है.

इसके अलावा जामिया और हौजरानी इलाके से भी प्रदर्शनकारियों को हटा दिया गया है. प्रदर्शनकारियों का सामान पुलिस अपने साथ ले गई. पुलिस का कहना है कि दिल्ली में कोरोना वायरस के कारण धारा-144 लागू है और पांच से अधिक लोगों को इकट्ठा होने की इजाजत नहीं दी जा रही है. हमने लोगों से अपील की थी कि वह धरना प्रदर्शन खाली कर दें, लेकिन लोगों ने अपील नहीं मानी. इसके बाद हमें यह कार्रवाई करनी पड़ी.

इससे पहले 101 दिन से चल रहे शाहीन बाग प्रदर्शन स्थल को दिल्ली पुलिस ने खाली करवा दिया है. अब ड्रोन कैमरों से इलाके पर नजर रखी जा रही है. साउथ ईस्ट दिल्ली के डीसीपी ने बताया कि जब प्रदर्शन को हटाने पुलिस पहुंची तो तकरीबन पचास लोग थे, जिनमें से कुछ लोगों ने ही विरोध किया, बाकी सब आसानी से चले गए. नौ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है.

लगभग पूरा देश लॉकडाउन

कोरोना वायरस के कारण 30 राज्यों के 548 जिले लॉकडाउन है. दिल्ली के सात जिले भी लॉकडाउन है. सरकारों ने लोगों से घर में रहने की अपील की है. यही वजह है कि लखनऊ के घंटाघर और चेन्नई में चल रहे सीएए विरोधी प्रदर्शन को स्थगित कर दिया गया था, जबकि दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में धरना प्रदर्शन जारी था. पुलिस ने आज सभी धरना प्रदर्शन स्थल को खाली करा लिया है.