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Feb 29 2020, 12:50

प्रयागराज पहुंचे पीएम मोदी, दिव्यांगों को बांटे उपकरण
  


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज परेड मैदान में दिव्यांगजनों को उपकरण वितरित किये. वह तीन सौ दिव्यांगजन से अलग से मन की बात भी करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को करीब 11 बजे परेड मैदान स्थित कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तीर्थराज, प्रयागराज में आकर हमेशा ही एक अलग पवित्रता और ऊर्जा का एहसास होता है. पिछले साल फरवरी में मैं कुम्भ के दौरान इस पवित्र धरती पर आया था. तब संगम में स्नान करके और उसके साथ-साथ मुझे एक और शौभाग्य मिला था.

हमें वरिष्ठजनों का सेवा करने का अवसर मिला है. यहां करीब 27 हजार साथियों को उपकरण किए गए हैं किसी को ट्रायसकिल मिली, किसी व्हीलचेयर मिली है.हमें बताया गया है कि इस सामाजिक अधिकारता शिविर में कई रिकॉर्ड बनेंगे.

कार्यक्रम की शुरुआत करने के साथ ही यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेला को पीएम मोदी के प्रयासों और आशीर्वाद के कारण वैश्विक मान्यता मिली है. गंगा साफ हुई है.

सीएम योगी ने कहा कि पीएम मोदी की वजह से दिव्यांगजन को सम्मान मिला है. दिव्यांगजनों को मोटरसाइकिल, ट्राइसाइकिलों बांटा गया है. विकलांग लोगों को 500 रुपये मासिक पेंशन भी मिल रही है. हम बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग के लोगों को सभी विकास योजनाओं का लाभ देने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

देश में यह सबसे बड़ा वितरण शिविर है, जिसमें सबसे अधिक संख्या में लाभान्वितों को शामिल किया गया है, साथ ही इसमें वितरित किए जाने वाली उपकरणों और सहायता यंत्रों की संख्या तथा उनका मूल्य सबसे अधिक है.

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट के जरिए कहा है कि वह शनिवार को प्रयागराज के बहनों और भाइयों से मुलाकात का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं. वह प्रयागराज के साथ चित्रकूट में भी कार्यक्रमों में शामिल होंगे.

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट के जरिए कहा कि प्रयागराज का कार्यक्रम दिव्यांगजन के सम्मान और सहयोग का है. यह समाज कल्याण अभियान के तहत वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग जन के लिए लगने वाले सबसे बड़े शिविरों में से एक होगा. उन्हें सहायता उपकरण प्रदान किए जाएंगे. यह दिव्यांगजन के लिए बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित करने के हमारे प्रयासों का एक हिस्सा है. वह चित्रकूट में बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे की आधारशिला रखने के लिए खुश हैं.

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Feb 29 2020, 08:49

बंगाल में हिंदुओ पर हो रहा अत्याचार को दिखाने से मीडिया भी डरती है – फिलिस चेस्लर
  


भारत में मुसलमानों की वनिस्पत हिन्दुओं की स्थिति और उनके हितों पर बात करने से यहां की सरकारें, नेता मीडिया सभी कतराते हैं।सभी लोगों ने इस तरफ से आंखें मूंद रखी हैं, क्योंकि उन्हें "राजनीतिक रूप से गलत" या "इस्लामोफोबिक" कहे जाने का डर सताता है।
हालांकि अपवाद तो सभी जगह होते हैं, इस मामले में भी सौभाग्य से कुछेक बिरले बहादुर हिंदू हैं जो भारत में मुस्लिम आतंकवादी अभियान के खिलाफ मोर्चा ले रहे हैं। उनमें से एक नाम तपन घोष का हैं। हिंदू सॉलिडैरिटी मूवमेंट के संस्थापक इसी तपन घोष के इंटरव्यू के आधार पर अमेरिकी वेबसाइट फाॅक्स न्यूज में छपा एक लेख काफी चर्चा में हैं।इसके लेखक फिलिस चेस्लर ने पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की स्थिति को बड़ी ही सहजता से दर्शाया है।इस लेख में फिलिस चेस्लर ने बताया है कि किस तरह से प.बंगाल में रहने वाले हिंदुओं, खासकर उन ग्रामीण इलाकों में जो बांग्लादेश की सीमा से मिलते हैं, अवैध रूप से भारत आने वाले मुस्लिम उनपर अत्याचार कर रहे हैं।
फिलिस ने लिखा है कि, ‘मुसलमान अवैध रूप से सीमा पार कर आ रहे हैं और देश में रहने वाली आबादी को हिंसक रूप से विस्थापित किया जा रहा है। स्थानीय लोग उनसे भयभीत हैं।लेकिन उनकी मदद करने वाला कोई नहीं है। पुलिस कभी कभार दिख भी जाती है, लेकिन सरकार और मीडिया ने तो बिल्कुल नहीं।दोनों अपराधियों और आतंकवादियों से डरे हुए हैं, जो इन अप्रवासियों का फायदा उठा रहे हैं।’
फिलिस ने लिखा है कि वे बात यूरोप या उत्तरी अमेरिका का नहीं है।बात उन मुसलमानों की हो रही है, जो भारत के पश्चिम बंगाल क्षेत्र में अवैध तरीके से आ रहे हैं।ये बांग्लादेशी अप्रवासीय अपराधिक गतिविधियों, जैसे हथियार, ड्रग्स और वेश्यावृति के लिए रास्ता तैयार कर रहे हैं, ये लोगों के घर या संपत्ति को या तो नष्ट कर देते हैं या कब्जा कर लेते हैं। वे युवा, बुजुर्गों और विशेषकर लड़कियों और महिलाओं पर हमला कर रहे हैं, उनका अपहरण करते हैं, जबरन धर्मांतरित करते हैं, या वेश्यालय में यातना देते हैं। जो वैश्विक जिहाद को भी बढ़ावा देता है।

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     @India   फिलिस ने साफ शब्दों ने लिखा है कि आपने इस तरह की खबरें पश्चिमी मुख्यधारा की मीडिया में या भारतीय मीडिया में भी नहीं पढ़ा होगा। मीडिया ने इस मामले में आंखें बंद कर ली है। क्योंकि उन्हें "राजनीतिक रूप से गलत" या "इस्लामोफोबिक" कहे जाने का डर है। इसके अलावा वे इसे उजागर करने के बाद होने वाले अंजामों से भी डरते हैं।

    इस्लामिक चरमपंथ की निंदा करने वाले एक लेख के चलते इस्लामिक उग्रवादियों ने जब कोलकाता में प्रसिद्ध अखबार ’द स्टेट्समैन’ के कार्यालय में तोड़फोड़ की, तो इस्लामिक चरमपंथ की निंदा करने वाले एक लेख के प्रतिकार के बदले में, भारतीय प्रेस चुप रहा। इसके बाद अखबार के संपादक और प्रकाशक को मुस्लिम भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया ।जबकि  दंगाइयों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
    फिलिस ने लिखा है कि थोड़े ही हिंदू हैं जो भारत में मुस्लिम आतंकवादी अभियान के खिलाफ मोर्चा ले रहे हैं। उनमें से एक तपन घोष हैं, जिनसे मैंने हाल ही में न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान मुलाकात की। वे यहां हिंदुओं के उत्पीड़न के बारे में बात करने आए थे। 2008 में, घोष ने "हिंदू समति" (हिंदू सॉलिडैरिटी मूवमेंट) की स्थापना की, जो पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश दोनों में सताए गए हिंदू समुदायों की सेवा करता है।

    तपन घोष ने इंटरव्यू में बताया है कि, भारत में हिंदुओं का मुस्लिम उत्पीड़न कोई नई बात नहीं है। 800 सालों की अवधि में, लाखों हिंदुओं को मुसलमानों द्वारा काफिर कहकर मार दिया गया या तलवार की जोर पर उनका धर्म परिवर्तित कराया गया। 1946-1947 में, जब ब्रिटिश भारत को भारत और पाकिस्तान में विभाजित किया गया था, तो मुस्लिमों ने कलकत्ता, पश्चिम बंगाल की राजधानी में हजारों हिंदुओं का नरसंहार किया। 1950 और 1960 के दशक के दौरान हिंदू-विरोधी दंगे और नरसंहार जारी रहे, लेकिन यह 1972 में पाकिस्तान से बांग्लादेश देश अलग हुआ तो इन इलाके में हिंदुओं के लिए हालात और ज्यादा बिगड़ गए।
    बांग्लादेश के लिए मुक्ति आंदोलन की विशेषता थी हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार और मुक्ति-समर्थक मुसलमानों का बढ़ना।इस समय हिंदुओ को पूर्वी पाकिस्तान के इस्लामीकरण  में बाधा माना जाता था।
    मार्च 1971 में, पाकिस्तान की सरकार और बांग्लादेश में उसके समर्थकों ने सभी समर्थक मुक्ति गतिविधियों को कुचलने के लिए "ऑपरेशन सर्चलाइट" नाम से एक हिंसक ऑपरेशन शुरू किया। बांग्लादेशी सरकारी आंकड़ों ने मरने वालों की संख्या 3 लाख बताई है, हालांकि लगभग 30 लाख हिंदुओं का कोई अता पता नहीं चला और उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। भारत और अमेरिकी अधिकारियों ने इसे नरसंहार करार दिया।
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Feb 29 2020, 08:46

पुलवामा हमले की जांच कर रही एनआईए को मिली बड़ी कामयाबी, हमलावर को पनाह देने वाला जैश आतंकी गिरफ्तार
  


नई दिल्ली - जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए फिदायीन हमले के मामले में एनआईए को बड़ी सफलता मिली है।एनआईए ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शाकिर बशीर मागरे को गिरफ्तार किया है। शाकिर जैश का ओवरग्राउंड वर्कर है और इसी ने पुलवामा हमले को अंजाम देने वाले आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार को पनाह दी थी।

शाकिर की पुलवामा हमले में थी सक्रिय भूमिका
एनआईए ने एक बयान जारी कर बताया कि शाकिर की पुलवामा हमले में सक्रिय भूमिका थी। शाकिर ने आदिल अहमद डार को पनाह देने के अलावा उसे हमले के लिए जरूरी सामान भी मुहैया कराया था। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी  के सामने अब तक चुनौती बनी हुई है कि आखिर इस हमले का असली मास्टरमाइंड कौन था। एनआईए के पास इस हमले के मुख्य आरोपी के बारे में अब तक कोई ठोस सूचना या साक्ष्य नहीं है। हालांकि शाकिर की गिरफ्तारी एनआईए के लिए बड़ी सफलता है और एजेंसी को इससे काफी अहम जानकारी मिल सकती हैं।

शाकिर ने आईडी बनवाने में मदद की
शाकिर की गिरफ्तारी पर एनआईए ने एक बयान जारी कर कहा, 'पूछताछ में शाकिर ने खुलासा किया है कि वही आदिल अहमद डार और पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद उमर फारूक को 2018 के आखिर में अपने घर लाया था। फरवरी 2019 में हमले को अंजाम देने तक ये दोनों इसी के घर पर रुके। इसी ने आईईडी बनाने में दोनों की मदद की। आगे की पूछताछ के लिए शाकिर को 15 दिन की हिरासत में लिया गया है।'

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Feb 29 2020, 07:47

ताहिर हुसैन के झूठे कथन को समझें IslamicTerrorists
  


उनका कथन - "वीडियो में, हुसैन ने कहा," मैं ताहिर हुसैन, AAP से पार्षद हूं। मैं हर किसी को बताना चाहता हूं कि मेरे बारे में जो भी खबरें फैलाई और दिखाई जा रही हैं, वह बिल्कुल झूठी है। यह मेरे ऊपर खेली जा रही गंदी राजनीति है। जब से कपिल मिश्रा ने अपना भड़काऊ भाषण दिया, तब से दिल्ली के हालात खराब हैं। कई जगहों पर पथराव हुआ है और कई अन्य चीजें बताई जा रही हैं। यहाँ भी वही हुआ, जहाँ हमने तुरंत प्रतिक्रिया दी और पुलिस को बुलाया। एक बड़ी भीड़ ने मेरा ऑफिस का गेट तोड़ दिया था और छत पर चढ़ गई थी। मैंने पुलिस से मदद मांगी और वे कुछ घंटे बाद पहुंच गए और फिर स्थिति को नियंत्रण में लाया गया। "

यह कैसे गलत है -
1) अगर ऐसा है तो भीड़ ने उसे अच्छी हालत में क्यों छोड़ दिया। उसका चेहरा, शरीर पर कोई संघर्ष नहीं दिखाता है।
जो भीड़ दूसरे के घर में गई और युवा लड़कों को खींचकर उनके साथ मारपीट की और उन्हें घिनोने तरीके से  मार डाला  .. मोहमद ताहिर अछूता  रह गया।
2) तस्वीर में देखें ताहिर अपनी छत पर बेखौफ आराम से चलते हुए पाया जाता है।

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Feb 29 2020, 13:49

दिल्ली की जनता पूछ रही है "कहाँ हैं गृहमंत्री अमित शाह?"
  

ितशाह

दिल्ली की दिल दहला देने वाली दंगा जिसमें रिपोर्टेड 42 लोग मरे गए जिसमें २१ गोली से मरे गए और बाकी स्टब्बिंग से या फिर स्टब्बिंग और आग से जल कर । २०० से भी ज्यादा घायल हैं। 
क्या किसी ने अमित शाह को एक बार भी उन इलाकों में किसी ने देखा जहाँ लोगों की जिंदगी बर्बाद हो गयी। एक - दो नहीं सैकड़ों की जिंदगी।  
हमारे गृह मंत्री आज भुवनेश्वर (उड़ीसा) में आयोजित विशाल जन समावेश को संबोधित किया।
सोर्स ट्विटर अकाउंट 
प्रश्न यह उठता है , 
१) जो जगह राष्ट्रपति भवन से कुछ ही दूर है वह भी सुरक्छित नहीं है ??
२) भारत में १०० करोड़ तो किसी के स्वागत में खर्च कर दिया जाता है पर देश की राजधानी में आम आदमी के सुरक्षा  करने में ३ दिन लग जाती है ??
३) कहीं जाने जा रही थीं और कहीं जश्न मनाया जा रहा था ??
४) इन सब के पीछे क्या सरकार ३ दिन चुप चाप बैठी रही, तो वह दोषी नहीं ??
कुछ पुलिस की गोली इस सरे दंगे को रोक सकती थी 

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Feb 28 2020, 22:32

# ब्रेकिंग |
  


दिल्ली सरकार ने  कन्हैया  कुमार  पर  मुकदमा चलाने की मंजूरी दी |

अभी तक 
  जेएनयू देशद्रोह मामले में कन्हैया कुमार पर कोई भी मुकदमा चलने की मंजूरी श्री अरविन्द केजरीवाल की सरकार ने मंजूरी नहीं दी | 
अब  कन्हैया कुमार को मुकदमे का सामना करना पड़ेगा |

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Feb 28 2020, 22:29

दिल्ली दंगे: अंकित शर्मा को चार से छह घंटे तक 400 से अधिक बार चाकू मारा गया, हमारे जीवन में ऐसा कभी नहीं देखा गया, ’फोरेंसिक डॉक्टरों का कहना  
  

_Islamic_Terrorism

मारे गए इंटेलिजेंस ब्यूरो के कांस्टेबल अंकित शर्मा का शव चांद बाग में एक खाई से बरामद किया गया था। उसके शरीर को तब अधिकारियों द्वारा शव परीक्षण के लिए भेजा गया था। शव परीक्षण रिपोर्ट अब सामने आई है और इसने उस भयावह क्रूरता का खुलासा किया है जो उसके शरीर भयावह क्रूरता उतारी गई थी, जब उसके शरीर को AAP नेता ताहिर हुसैन के घर के पीछे खाई में फेंक दिया गया था।

ऑटोप्सी रिपोर्ट कहती है कि अंकित शर्मा को 400 से अधिक बार चाकू मारा गया था, और उनके शरीर को विश्वास से परे काट दिया गया है। उसके पूरे शरीर पर जख्म के निशान हैं और इसके एक हिस्से को भी नहीं बख्शा गया है। वह चार से छह घंटे, संभवतः छह व्यक्तियों द्वारा एक साथ, छः घंटे के लिए छुरा घोंपा गया था। इसके अलावा, उसकी आंतों को अलग कर दिया गया था, शव परीक्षा रिपोर्ट कहती है। फोरेंसिक डॉक्टरों ने कथित तौर पर कहा है कि उन्होंने अपने जीवन में इस तरह के बुरे बदलाव को नहीं देखा है। रिपोर्ट कहती है कि शरीर में "कई घर्षण थे .. गहरी कटौती .. तेज धार वाली वस्तुओं द्वारा"।

पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के पैनल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अंकित शर्मा को बेरहमी से मारा गया था और बार-बार चाकू मारा गया था, जिससे उसकी मौत हुई थी।

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Feb 28 2020, 22:29

दिल्ली दंगे: अंकित शर्मा को चार से छह घंटे तक 400 से अधिक बार चाकू मारा गया, हमारे जीवन में ऐसा कभी नहीं देखा गया, ’फोरेंसिक डॉक्टरों का कहना  
  

_Islamic_Terrorism

मारे गए इंटेलिजेंस ब्यूरो के कांस्टेबल अंकित शर्मा का शव चांद बाग में एक खाई से बरामद किया गया था। उसके शरीर को तब अधिकारियों द्वारा शव परीक्षण के लिए भेजा गया था। शव परीक्षण रिपोर्ट अब सामने आई है और इसने उस भयावह क्रूरता का खुलासा किया है जो उसके शरीर भयावह क्रूरता उतारी गई थी, जब उसके शरीर को AAP नेता ताहिर हुसैन के घर के पीछे खाई में फेंक दिया गया था।

ऑटोप्सी रिपोर्ट कहती है कि अंकित शर्मा को 400 से अधिक बार चाकू मारा गया था, और उनके शरीर को विश्वास से परे काट दिया गया है। उसके पूरे शरीर पर जख्म के निशान हैं और इसके एक हिस्से को भी नहीं बख्शा गया है। वह चार से छह घंटे, संभवतः छह व्यक्तियों द्वारा एक साथ, छः घंटे के लिए छुरा घोंपा गया था। इसके अलावा, उसकी आंतों को अलग कर दिया गया था, शव परीक्षा रिपोर्ट कहती है। फोरेंसिक डॉक्टरों ने कथित तौर पर कहा है कि उन्होंने अपने जीवन में इस तरह के बुरे बदलाव को नहीं देखा है। रिपोर्ट कहती है कि शरीर में "कई घर्षण थे .. गहरी कटौती .. तेज धार वाली वस्तुओं द्वारा"।

पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के पैनल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अंकित शर्मा को बेरहमी से मारा गया था और बार-बार चाकू मारा गया था, जिससे उसकी मौत हुई थी।

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Feb 28 2020, 22:23

Twitter की इंडिया पालिसी हेड  अपना tweets डिलीट कर दी जब  उनका राजनीतिक पक्षपात पाया गया
  



यह कथित तौर पर एक अन्य ट्विटर इंडिया कर्मचारी, रहेल खुर्शीद की याद दिलाता है, -- एक 15 वर्षीय लड़की का कन्हैया कुमार के खिलाफ राजनीतिक विचार रखने की हिम्मत करने पर उसका  मजाक उड़ाया गया,  जो खुर्शीद की अपनी विश्वदृष्टि के अनुरूप नहीं थी।
इससे पहले, ट्विटर के सीईओ ने स्वीकार किया था कि उसके कर्मचारियों के पास वाम झुकाव वाला पक्षपात है। और बार बार राइट विंग के अकाउंट को निलंबित (ब्लॉक )  किया गया है  जो  इस संदेह को और मजबूत करता है  कि ट्विटर विचारधारा के आधार पर चुनिंदा लक्ष्यीकरण कर रहा है।
 को बेवजह कारणों से निलंबित कर दिया गया। इससे कई लोग नाराज हो गए जिन्होंने इस  पर सवाल उठाए।
निलंबन के बाद, कई राइट विंग  राजनीतिक पक्षपात की जड़ की तलाश शुरू कर दी। उन्होंने महिमा कौल के कई ट्वीट्स खोले जो ट्विटर इंडिया पालिसी हेड  हैं। ट्वीट में मोदी-विरोधी, राहुल गांधी और कई के अनुसार, कौल के खुद के राजनीतिक पक्षपात को इंगित किया गया था, जो ट्विटर इंडिया के वैचारिक रूप से पक्षपाती दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है। जब इन ट्वीट्स को खोदना शुरू किया गया, तो कौल ने कथित तौर पर उनमें से कई को हटा दिया। 

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Feb 28 2020, 20:03

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र व दिल्ली सरकार को नोटिस भेजकर पूछा-शाहीनबाग को कौन कर रहा है फंडिंग ? अगली सुनवाई के लिए 13 अप्रैल की तिथि मुकर्रर 
  




 दिल्ली में हिंसा और नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) के खिलाफ जारी प्रदर्शन की कई याचिकाओं पर शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई की गई है। शाहीनबाग समेत अन्य आठ इलाकों में जारी विरोध प्रदर्शन को लेकर दायर याचिका में पूछा गया कि इनकी फंडिंग कौन कर रहा है। याचिका पर  दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार , राज्य सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। बता दें कि याचिकाकर्ता अजय गौतम ने हाईकोर्ट में अर्जी डाली थी कि इन प्रदर्शनों से दिल्ली में हिंसा हुई और माहौल बना है। जांच हो कि इन धरना प्रदर्शनों की फंडिंग कौन कर रहा है। अब हाई कोर्ट ने इस याचिका पर 30 अप्रैल तक जवाब देने  कहा है। मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डी एन पटेल की अगुवाई वाली बेंच ने की। दिल्ली हाई कोर्ट में इस दौरान सोनिया गांधी , राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, वारिस पठान के बयानों पर भी सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इन नेताओं के भड़काऊ बयान ने लोगों को उकसाया।  हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अप्रैल की तिथि मुकर्रर की है।