घाघरा में नहाते समय दो युवतियां डूबीं, तलाश में जुटी रेस्क्यू टीम
-  मधुबन क्षेत्र के गाज़ियापुर घाट पर हुआ हादसा, परिजनों में मचा कोहराम

मऊ। जनपद के मधुबन थाना क्षेत्र अंतर्गत गाज़ियापुर गांव के समीप घाघरा नदी में स्नान के दौरान दो युवतियां तेज बहाव की चपेट में आकर डूब गईं। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और परिजनों में कोहराम मच गया।
सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी एवं गोताखोरों की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई। दोनों युवतियों की तलाश के लिए नदी में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। बचाव कार्य में स्थानीय ग्रामीण भी प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों युवतियां नदी में स्नान कर रही थीं, तभी अचानक गहरे पानी और तेज धारा में फंस गईं। देखते ही देखते वे नदी में लापता हो गईं। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए।
प्रशासन ने बताया कि गोताखोरों और राहत-बचाव दल की मदद से युवतियों की खोजबीन जारी है। साथ ही लोगों से नदियों और जलाशयों के किनारे विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है।
KEM अस्पताल  नामांतरण मामला, किंग एडवर्ड गुलामी के दौर का प्रतीक : मंगल प्रभात लोढ़ा
मुंबई।  किंग एडवर्ड मेमोरियल (KEM) अस्पताल के नाम परिवर्तन के संबंध में आज विधान परिषद में मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने विपक्ष को करारा जवाब दिया। लोढ़ा ने स्पष्ट रूप से कहा कि ब्रिटिश शासनकाल भारत के शोषण का काल था। उन्होंने कहा, “किंग एडवर्ड भारत के लिए गौरव का विषय नहीं है, बल्कि वह गुलामी के दौर का प्रतीक है।” आगे उन्होंने कहा, “किंग एडवर्ड ने भारत को गुलाम बनाया था और देश की संपत्ति लूटकर इंग्लैंड ले गया था। यह कहना कि किंग एडवर्ड ने धन दिया था, पूरी तरह भ्रामक है।” इस संदर्भ में उन्होंने कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए कहा, “लाखों भारतीयों की मृत्यु के लिए जिम्मेदार किंग एडवर्ड कसाब जैसा व्यक्ति था। किंग एडवर्ड के नाम का समर्थन करने वालों की हम निंदा करते हैं। केईएम के नाम परिवर्तन के लिए हमने तीन नामों के विकल्प दिए हैं और सरकार इस संबंध में उचित निर्णय लेगी।” मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित तीनों नामों में से किसी भी विकल्प का चयन किया जाए, उसका संक्षिप्त रूप ‘केईएम’ ही रहेगा। ट्रम्प टॉवर का नाम बदलने को लेकर प्रश्न उठाए जाने पर माननीय मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने स्पष्ट किया कि ट्रम्प नाम केवल व्यावसायिक साझेदारी के कारण दिया गया है और इसका किसी भी प्रकार के गौरव या महिमामंडन से कोई संबंध नहीं है। इस दौरान विधान परिषद सदस्य श्री मिलिंद नार्वेकर ने माननीय मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के व्यवसाय पर प्रश्न उठाया। इसका जवाब देते हुए लोढ़ा ने कहा, “मेरा व्यवसाय पूरी दुनिया जानती है और मेरी आय का स्रोत भी सभी को ज्ञात है। लेकिन आपका व्यवसाय क्या है, यह हमें नहीं पता। फिर भी आप मुझसे बड़ी गाड़ी में घूमते हैं,” ऐसा उन्होंने पलटवार करते हुए कहा।
जिले के 90+ कोचिंग सेंटर में से सिर्फ 12 के पास फायर एनओसी: मानकों की अनदेखी, बच्चों की सुरक्षा पर सवाल

जिले भर में 90 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हैं, लेकिन डीआईओएस कार्यालय में सिर्फ 15 पंजीकृत हैं। इनमें से केवल 12 कोचिंग सेंटरों ने अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिया है। लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में हुए हादसे के बाद जिले में कोचिंग सेंटरों के संचालन और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

शासन ने कोचिंग सेंटरों के संचालन के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित किए हैं। इनमें पंजीकरण, अग्निशमन एनओसी, अग्निशमन उपकरण, योग्य शिक्षक, उचित बैठने की व्यवस्था, शौचालय, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग और स्वच्छता जैसे मानक शामिल हैं। इसके बावजूद, जिले के कई सेंटरों पर इन मानकों की अनदेखी देखी गई।

लखनऊ हादसे के बाद एक टीम ने जिले भर में कोचिंग सेंटरों की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कई सेंटर तंग गलियों या बेसमेंट में संचालित होते मिले। कुछ सेंटरों में तीन से चार कमरों में कई शिफ्टों में कक्षाएं चल रही थीं।

ज्ञानपुर में मिश्रा मार्केट के पीछे संकरी गली और भदोही में ज्ञानदेवी स्कूल के पास बेसमेंट में कोचिंग सेंटर संचालित पाए गए, जहां एक शिफ्ट में 100 से 125 बच्चे पढ़ते हैं। गोपीगंज के वार्ड नंबर एक स्थित महात्मा गांधी लिंक मार्ग पर भी सुरक्षा व्यवस्था का अभाव दिखा।

भदोही के रजपुरा फेज-टू, चौरी रोड, औराई रोड, मूंसीलाटपुर और स्टेशन रोड स्थित कोचिंग सेंटरों के तीन से चार कमरों में बच्चे पढ़ते मिले। जमुनीपुर में एक शटर के भीतर कोचिंग संचालित होती दिखी। नईबाजार के उत्तरा फाटक, आजादनगर और चांदनी चौक में भी ऐसे सेंटर मिले, जहां केवल एक निकास द्वार था और अग्निशमन व्यवस्था नदारद थी।

डीआईओएस अंशुमान ने बताया कि जिले की तीनों तहसीलों में दो सदस्यीय टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें जिले भर में कोचिंग सेंटरों की जांच करेंगी। मानक के अनुरूप न मिलने पर उन्हें बंद कराया जाएगा और जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।


फीस मोटी, लेकिन व्यवस्थाएं शून्य
बच्चों का भविष्य संवारने के नाम पर कोचिंग संचालक विद्यार्थियों से मोटी फीस वसूल रहे हैं। गणित, साइंस और अन्य महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई के लिए संचालक 500 से एक हजार रुपये तक शुल्क ले रहे हैं, लेकिन सेंटरों पर व्यवस्थाएं शून्य हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

एक माह पहले पंजीकरण के लिए दी थी चेतावनी
जिला विद्यालय निरीक्षक अंशुमान ने बताया कि एक माह पहले सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी संचालकों को पंजीकरण कराने का निर्देश दिया गया था, लेकिन केवल 15 कोचिंग सेंटरों ने पंजीकरण कराया। इसी प्रकार अग्निशमन विभाग ने गर्मी शुरू होने से पहले सभी को एनओसी के लिए पत्र जारी किया था, लेकिन केवल 12 ने एनओसी ली।

कोचिंग खोलने के लिए ये मानक अनिवार्य
पार्किंग की सुचारु व्यवस्था होनी चाहिए।
कोचिंग में उतने ही बच्चों को बैठाया जाए, जितनी सीटें उपलब्ध हों।
लड़के एवं लड़कियों के लिए अलग-अलग वॉशरूम होने चाहिए।
इमरजेंसी अलार्म का होना आवश्यक है।
यदि कोचिंग क्लास बेसमेंट में है, तो वहां दो दरवाजे होना जरूरी है।
प्रत्येक कमरे में दो दरवाजे और सीसीटीवी कैमरा होना चाहिए।




जिले में संचालित कोचिंग सेंटरों की जांच के लिए टीम गठित हो चुकी है। दो टीमें जिले भर के कोचिंग सेंटरों पर पहुंचकर उनकी फायर सेफ्टी की जानकारी लेंगी। ओम प्रकाश, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी
5 कोचिंग संस्थान व लाइब्रेरी सील,मानक न पूरा होने पर हुई कार्रवाई
*रजिस्ट्रेशन व अग्निशमन यंत्र नहीं मिलने पर कार्रवाई

गोंडा। लखनऊ में हुए कोचिंग अग्निकांड के बाद जिले में भी कार्रवाई की गई है।जिला विद्यालय निरीक्षक डाक्टर रामचंद्र ने मंगलवार को अभियान चलाकर पांच लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटरों को सील कर दिया है।यह कार्रवाई सुरक्षा मानकों और पंजीकरण नियमों का पालन न करने पर की गई है।सील किए गए संस्थानों में कटरा बाजार विकास खंड की लाइब्रेरी सुपर इंस्टीट्यूट सेंटर शामिल है।इसका पंजीकरण वर्ष 2019 में हुआ था,परन्तु इसका नवीनीकरण नहीं कराया गया था।सेंटर पर अग्निशमन यंत्र भी नहीं था और न ही किसी प्रकार के मानक पूरे किए जा रहे थे।इसी तरह एनसीएम लाइब्रेरी व कम्प्यूटर इंस्टीट्यूट का भी पंजीकरण नहीं था,जिसे सील कर दिया गया।पीसीएस कोचिंग सेंटर व लाइब्रेरी बंद पाई गई और उसे भी सील कर दिया गया।ज्ञान धारा लाइब्रेरी में दो कमरे व आठ बच्चे मिले परन्तु कोई अभिलेख नहीं दिखाया जा सका,जिसके बाद इसे भी सील कर दिया गया।इसी क्रम में डिजिटल लाइब्रेरी और दैनिक लाइब्रेरी का भी निरीक्षण करने पर पूरे मानक नहीं पाए गए,जिसके कारण इन्हें भी सील कर दिया गया है।जिला विद्यालय निरीक्षक डाक्टर रामचंद्र ने सोमवार को ही सभी कोचिंग व लाइब्रेरी संचालकों को नोटिस जारी कर सुविधाओं के संबंध में जानकारी मांगा था और निर्धारित समय सीमा पूर्ण होते ही जिला विद्यालय निरीक्षक ने एक्शन लेना प्रारंभ कर दिया।जिला विद्यालय निरीक्षक डाक्टर रामचंद्र ने बताया कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा।उन्होंने कहा कि जो भी कोचिंग संस्थान व लाइब्रेरी मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं,उन्हें तत्काल प्रभाव से सील किया जाएगा और उनके खिलाफ अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।जिला विद्यालय निरीक्षक ने स्पष्ट किया कि बच्चों की जिंदगी के साथ कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी को कोचिंग संचालन के नियमों का पालन करना होगा।उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी के पंजीकरण की अभी कोई गाइड लाइन नहीं है परन्तु जो भी सुरक्षा मानक हैं उसको देखा जा रहा है तथा उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
लखनऊ अग्निकांड: धुएं में घुल गई दोस्ती, राख हो गए सपने—सूरज और संयम की अधूरी कहानी
लखनऊ । लखनऊ के अलीगंज की वह इमारत अब सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं रही। वह एक ऐसी याद बन चुकी है, जहां हर कोना किसी न किसी छात्र की आखिरी सांस का गवाह है। कोचिंग और एनीमेशन सेंटर में लगी आग ने न सिर्फ 15 जिंदगियां छीन लीं, बल्कि कई घरों की पूरी दुनिया उजाड़ दी।

इन 15 कहानियों में सबसे ज्यादा दिल को तोड़ देने वाली कहानी दो दोस्तों—सूरज और संयम—की है। कानपुर के गोविंदनगर और बर्रा के रहने वाले ये दोनों नाम अब सिर्फ एक हादसे के नहीं, बल्कि एक ऐसी दोस्ती के प्रतीक बन गए हैं जो जिंदगी से आगे जाकर भी साथ रही—लेकिन लौटकर कभी नहीं आई।

बचपन से शुरू हुई कहानी, जो आग में खत्म हो गई

सूरज और संयम की दोस्ती किसी कहानी जैसी नहीं थी, वह जिंदगी का हिस्सा थी। रतनलालनगर के दून स्कूल में दोनों ने साथ पढ़ाई की, साथ शरारतें कीं, साथ सपने देखे। टीचर उन्हें हमेशा एक जोड़ी की तरह याद रखते थे—जहां एक बोलता था, दूसरा समझ जाता था।

स्कूल के बाद भी यह साथ नहीं टूटा। दोनों ने एक ही एनीमेशन स्टूडियो में नौकरी जॉइन की। परिवारों को भरोसा था कि यह दोस्ती अब भविष्य की सफलता बनेगी। लेकिन किसे पता था कि यह साथ एक ही आग में खत्म होने वाला है।

वह दोपहर, जब धुआं किस्मत बन गया

अलीगंज स्थित उस इमारत में रोज़ की तरह क्लास चल रही थी। किसी को यह अहसास नहीं था कि ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद वेयरहाउस में उठती एक चिंगारी कुछ ही मिनटों में मौत का तूफान बन जाएगी।

दोपहर करीब ढाई बजे आग लगी। पहले किसी ने इसे मामूली समझा, लेकिन कुछ ही मिनटों में धुआं इतनी तेजी से ऊपर की मंजिलों तक पहुंचा कि तीसरी मंजिल पर मौजूद छात्र फंस गए। सीढ़ियों से उतरना मुश्किल हो गया, खिड़कियों से बाहर की हवा भी जहरीली हो चुकी थी।

कुछ छात्रों ने मदद के लिए चिल्लाया, कुछ ने फोन उठाए, कुछ ने खिड़कियों से झांककर आखिरी उम्मीद तलाशने की कोशिश की—लेकिन आग उम्मीदों से तेज थी।

आखिरी फैसला—साथ जिए, साथ मरेंगे

इसी अफरा-तफरी के बीच सूरज और संयम भी फंस गए। परिजनों के अनुसार, दोनों ने भागने की कोशिश की, लेकिन धुआं इतना घना था कि सांस लेना मुश्किल हो गया। शायद उसी पल दोनों ने एक-दूसरे का हाथ नहीं छोड़ा।

कहा जाता है कि दोनों ने किसी कमरे या बाथरूम में खुद को बंद कर लिया, यह सोचकर कि शायद वहां थोड़ी देर और सांस मिल जाए। लेकिन आग ने दीवारों तक को गर्म कर दिया था। दम घुटने से दोनों की मौत हो गई—लेकिन सबसे दर्दनाक बात यह थी कि वे आखिरी पल तक भी साथ थे।

यह सिर्फ मौत नहीं थी, यह उस दोस्ती का अंत था जो जिंदगी से बड़ी लगती थी।

घर पहुंचे तो टूट गया आसमान

जब संयम का शव गोविंदनगर पहुंचा, मां सोनिया की चीख ने पूरे मोहल्ले को हिला दिया। वह बार-बार बेटे को पकड़कर पूछती रहीं—“बोल क्यों नहीं रहा तू? अभी तो ठीक था ना तू…” हर शब्द जैसे किसी दिल पर हथौड़ा था।

पड़ोसी भी रो पड़े, क्योंकि संयम वही लड़का था जो हमेशा मुस्कुराकर मिलता था। किसी ने सोचा भी नहीं था कि उसकी मुस्कान इतनी जल्दी खामोश हो जाएगी।

इधर सूरज के घर का हाल भी अलग नहीं था। मां मीरा बेटे के शव से लिपटकर बार-बार बेहोश हो रही थीं। कुछ घंटे पहले ही बेटा उन्हें फोन पर कहकर गया था कि वह ठीक है। लेकिन लौटकर वह खुद नहीं आया।

जिम्मेदारियों से भरा एक अधूरा सफर

सूरज सिर्फ एक छात्र या कर्मचारी नहीं था। वह अपने परिवार की रीढ़ था। पिता की मौत के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उसी पर आ गई थी। छोटे भाई और बहन की पढ़ाई, घर का खर्च, भविष्य की उम्मीदें—सब कुछ उसी के कंधों पर था।

वह हाल ही में शादी के लिए लड़की देखने भी गया था। घर में नई शुरुआत की बातें हो रही थीं। लेकिन अब वहां सिर्फ सन्नाटा है—और एक ऐसा खालीपन, जिसे कोई भर नहीं सकता।

रेस्क्यू, जो देर से पहुंचा

हादसे के बाद SDRF और दमकल विभाग ने बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि नियंत्रण पाना मुश्किल हो गया। दो घंटे के भीतर 15 शव बरामद किए गए और कई घायल अस्पताल पहुंचाए गए।

हर निकला हुआ शव एक कहानी खत्म कर रहा था, और हर घायल आंखें एक नई उम्मीद ढूंढ रही थीं।

अंतिम यात्रा—जहां दोस्ती भी जल उठी

सूरज और संयम का अंतिम संस्कार अलग-अलग स्थानों पर हुआ, लेकिन दोनों घरों की हालत एक जैसी थी—टूटा हुआ परिवार, सूनी आंखें और खत्म होते सपने।

मोहल्ले के लोग आज भी कहते हैं कि दोनों की दोस्ती इतनी गहरी थी कि मौत भी उन्हें अलग नहीं कर सकी। वे साथ जिए, साथ काम किया और साथ ही इस दुनिया से चले गए।

एक सवाल, जो हर दिल में रह गया

यह हादसा सिर्फ आग नहीं था। यह एक चेतावनी थी—उन लापरवाहियों की, जिनके बीच हम अपने बच्चों को छोड़ देते हैं।

क्या यह हादसा टल सकता था? क्या ये 15 जिंदगियां बच सकती थीं?

इन सवालों के जवाब शायद कभी न मिलें, लेकिन सूरज और संयम की कहानी हमेशा याद दिलाती रहेगी कि कुछ दोस्तियां इतनी सच्ची होती हैं कि वे मौत के बाद भी खत्म नहीं होतीं—बस खामोश हो जाती हैं।
UN में भारत ने फिर पाकिस्‍तान को लताड़ा, कश्मीर के जिक्र पर सीखा दिया सबक

#indiaslamspakistanatunscarriaformula_meeting

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एरिया फॉर्मूला बैठक में भारत ने पाकिस्तान को फिर कड़ा जवाब दिया है। भारत ने जम्मू-कश्मीर पर की गई पाकिस्तान की टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और यह भारत का आंतरिक मामला है।

जम्मू-कश्मीर पर पाक की टिप्पणी को बताया गैर जरूरी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चीन और पाकिस्तान की ओर से आयोजित एरिया फॉर्मूला बैठक के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया। भारतीय राजदूत ने हरीश पर्वतनेनी कहा, "यह हैरानी की बात है कि सह अध्यक्ष होने के बावजूद पाकिस्तान ने एरिया फॉर्मूला बैठक का राजनीतिक करण किया और भारत के जम्मू-कश्मीर इलाके पर गैर जरूरी टिप्पणियां कीं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि "केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का मामला पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। यह हमेशा से ऐसा ही रहा है, अभी भी है और आगे भी ऐसा ही रहेगा।"

यूएन को भी दिखाया आईना

भारत ने इस मौके पर सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों और मध्यस्थता तंत्रों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए। पी. हरीश ने कहा कि समय के साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां बदलती हैं, ऐसे में सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और मध्यस्थता ढांचों की भी समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्‍टर-6 के तहत बनाए गए मध्यस्थता तंत्र स्थायी नहीं माने जा सकते और बदलते वैश्विक परिदृश्य में उनकी उपयोगिता का आकलन जरूरी है।

गंगा दशहरा पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर मनौती मांगी
घाटों पर पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही, बैरीकेटिंग के आगे, श्रद्धालु स्नान न करें सुरक्षा करनी सीटी बजाते रहे

फर्रुखाबाद l गंगा दशहरा को लेकर जनपद के पांचाल घाट,श्रंगीरामपुर और ढाई घाट पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान कर डुबकी लगाई और पूजा अर्चना कर मनौती भी मांगी । पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने कहां कि जनपद के तीनों घाटों पर सुरक्षा की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है l उन्होंने कहा कि घाटों पर अस्थाई रूप से किनारे किनारे वेरीकेटिंग भी की गई है क्योंकि इन घाटों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान करने के लिए आसपास जनपदों से आते हैं इसलिए इन घाटों पर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है । उन्होंने कहा कि स्नान करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सुरक्षा कर्मी बराबर सीटी बजाकर चेतावनी दे रहे थे कि ज़्यादा गहराई में स्नान ना करें बल्कि किनारे बैठकर स्नान करें।
आजमगढ़:-पहले ही प्रयास में एग्रीकल्चर टेक्निकल असिस्टेंट परीक्षा में सफल हुईं आंधीपुर की रुचि यादव, क्षेत्र में खुशी की लहर
वी कुमार यदुवंशी
आजमगढ़। फूलपुर तहसील क्षेत्र के आधीपुर गांव निवासी कुमारी रुचि यादव ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित एग्रीकल्चर टेक्निकल असिस्टेंट (टीए) परीक्षा में पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्त कर अपने परिवार एवं क्षेत्र का नाम रोशन किया है। कल देर शाम में परिणाम घोषित होने के बाद परिजनों, रिश्तेदारों एवं क्षेत्रवासियों में खुशी का माहौल है। रुचि यादव, पुत्री कैलाश प्रसाद उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, लगन एवं निरंतर अध्ययन के बल पर यह सफलता हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि से गांव एवं आसपास के क्षेत्र में हर्ष का वातावरण है तथा बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। रुचि यादव की प्रारंभिक शिक्षा हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट की पढ़ाई मथुरा इंटर कॉलेज, नाहरपुर से हुई। इसके बाद उन्होंने टीडी कॉलेज, जौनपुर से बीएससी (एग्रीकल्चर) एवं बीटीसी की शिक्षा प्राप्त की। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए वह जौनपुर में रहकर निरंतर अध्ययन कर रही थीं। कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने पहले ही प्रयास में यह सफलता अर्जित की। रुचि यादव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवारजनों, गुरुजनों एवं अपनी कड़ी मेहनत को दिया है। उन्होंने कहा कि नियमित अध्ययन, आत्मविश्वास और परिवार के सहयोग से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। परिवार के लोगों ने बताया कि रुचि शुरू से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर और मेहनती रही हैं। उनकी इस सफलता से क्षेत्र के अन्य छात्र-छात्राओं को भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरणा मिलेगी। ग्रामीणों एवं शुभचिंतकों ने रुचि यादव को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल बना हुआ है।
आजमगढ़: पोखरें में डूबने से बालक की मौत, परिजनों का रो रोकर बुरा हाल
आजमगढ़।निजामाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत फरिहा ग्राम के सवाई मोहल्ले में स्थित पोखरे के पास खेल रहे बच्चों के साथ युसूफ पुत्र अशफाक जिसकी उम्र 6 वर्ष खेल रहा था . पोखरे में फिसल कर गिरने की वजह से डूब कर मौत हो गई. ग्रामीण जनता ने बताया कि बच्चों के पानी में गिरते ही साथ खेल रहे अन्य बच्चों ने शोर मचाना शुरू किया. जब तक ग्रामीण मौके पर पहुंचे तब तक यूसुफ पानी में डूब चुका था. ग्रामीणों ने बच्चों को पोखरी से बाहर निकालें . परिजन और ग्रामीण तत्काल उसे अस्पताल लेकर पहुंचे . चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत्यु घोषित कर दिया . युसूफ दो भाई और एक बहन मैं दूसरे नंबर पर था. सवाई मोहल्ले में मातम छाया हुआ है. परिवार के लोगों को रो-रो कर बुरा हाल हो गया है.
आजमगढ़: बीपीएससी व सीए बनने वाले युवको का गांव में हुआ सम्मान दिखी गंगा जमुनी तहजीब
आजमगढ़। जनपद के अहरौला थाना क्षेत्र के परगाशपुर गांव निवासी उदय प्रताप यादव पुत्र सुभाष ने बिहार पीसीएस में पांचवी रैंक प्राप्त की है वही गांव के ही मु. अब्दुल्ला पुत्र निजामुद्दीन सीए की परीक्षा पास कर चार्टर अकाउंटेंट बने हैं दोनों युवक मंगलवार को जब गांव मे एक साथ पहुंचे तो गंगा जमुनी तहजीब देखते ही बनती थी हर वर्ग हर समाज के लोगों ने दोनों युवकों का गांव में पहुंचने पर माला फूल बनाकर स्वागत सम्मान किया और इस प्रतिभा पर गर्व हो रहा था अपने गांव में पहुंचे तो ढोल नगाड़े के साथ दोनों युवाओं का गांव वालों ने स्वागत किया और माला फूल पहना कर सम्मानित किया गया मौके पर पहुंचे क्षेत्रीय विधायक डॉक्टर संग्राम यादव ने बिहार पीसीएस में पांचवी रैंक प्राप्त करने वाले उदय प्रताप यादव व सीए बनने वाल मोहम्मद अब्दुल्ला को अंगवस्त्र स्मृति चिन्ह के रूप में संविधान की किताब देकर सम्मानित किया डॉ. यादव ने कहा आज बहुत ही गौरव का विषय है और युवाओं के लिए प्रेरणा भी है कि गांव के साथ पढ़ने वाले दो युवक जो एक बीपीएससी 70 वी परीक्षा में गांव और परिवार का नाम रोशन किया है तो मु. अब्दुल्ला सीए बने इन युवाओं से लोगों को प्रेरणा लेनी चाहिए वही बीपीएससी में पांचवी रैंक प्राप्त करने वाले उदय प्रताप यादव ने इसका श्रेय अपने चाचा मुन्नू यादव को दिया सीए बनने वाले मोहम्मद अब्दुल्ला ने भी अपने मुंबई में रह रहे चाचा जबैद अली को दिया वहीं अपने पिता निजामुद्दीन को भी टेंट हाउस के छोटे से व्यवसाय से परिवार और पढ़ाई के लिए भी कुछ-कुछ पैसे निकाल कर सहयोग करते रहे जिससे आज सफलता मिली है। दोनों लोगों का गांव में पहुंचने पर गांव वालों ने स्वागत सम्मान किया। इस मौके पर प्रभुदीन यादव, साहबलाल, श्री चंद यादव,सज्जन, रामलाल यादव, वंशराज यादव, दिनेश यादव, बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।।
घाघरा में नहाते समय दो युवतियां डूबीं, तलाश में जुटी रेस्क्यू टीम
-  मधुबन क्षेत्र के गाज़ियापुर घाट पर हुआ हादसा, परिजनों में मचा कोहराम

मऊ। जनपद के मधुबन थाना क्षेत्र अंतर्गत गाज़ियापुर गांव के समीप घाघरा नदी में स्नान के दौरान दो युवतियां तेज बहाव की चपेट में आकर डूब गईं। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और परिजनों में कोहराम मच गया।
सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी एवं गोताखोरों की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई। दोनों युवतियों की तलाश के लिए नदी में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। बचाव कार्य में स्थानीय ग्रामीण भी प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों युवतियां नदी में स्नान कर रही थीं, तभी अचानक गहरे पानी और तेज धारा में फंस गईं। देखते ही देखते वे नदी में लापता हो गईं। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए।
प्रशासन ने बताया कि गोताखोरों और राहत-बचाव दल की मदद से युवतियों की खोजबीन जारी है। साथ ही लोगों से नदियों और जलाशयों के किनारे विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है।
KEM अस्पताल  नामांतरण मामला, किंग एडवर्ड गुलामी के दौर का प्रतीक : मंगल प्रभात लोढ़ा
मुंबई।  किंग एडवर्ड मेमोरियल (KEM) अस्पताल के नाम परिवर्तन के संबंध में आज विधान परिषद में मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने विपक्ष को करारा जवाब दिया। लोढ़ा ने स्पष्ट रूप से कहा कि ब्रिटिश शासनकाल भारत के शोषण का काल था। उन्होंने कहा, “किंग एडवर्ड भारत के लिए गौरव का विषय नहीं है, बल्कि वह गुलामी के दौर का प्रतीक है।” आगे उन्होंने कहा, “किंग एडवर्ड ने भारत को गुलाम बनाया था और देश की संपत्ति लूटकर इंग्लैंड ले गया था। यह कहना कि किंग एडवर्ड ने धन दिया था, पूरी तरह भ्रामक है।” इस संदर्भ में उन्होंने कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए कहा, “लाखों भारतीयों की मृत्यु के लिए जिम्मेदार किंग एडवर्ड कसाब जैसा व्यक्ति था। किंग एडवर्ड के नाम का समर्थन करने वालों की हम निंदा करते हैं। केईएम के नाम परिवर्तन के लिए हमने तीन नामों के विकल्प दिए हैं और सरकार इस संबंध में उचित निर्णय लेगी।” मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित तीनों नामों में से किसी भी विकल्प का चयन किया जाए, उसका संक्षिप्त रूप ‘केईएम’ ही रहेगा। ट्रम्प टॉवर का नाम बदलने को लेकर प्रश्न उठाए जाने पर माननीय मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने स्पष्ट किया कि ट्रम्प नाम केवल व्यावसायिक साझेदारी के कारण दिया गया है और इसका किसी भी प्रकार के गौरव या महिमामंडन से कोई संबंध नहीं है। इस दौरान विधान परिषद सदस्य श्री मिलिंद नार्वेकर ने माननीय मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा के व्यवसाय पर प्रश्न उठाया। इसका जवाब देते हुए लोढ़ा ने कहा, “मेरा व्यवसाय पूरी दुनिया जानती है और मेरी आय का स्रोत भी सभी को ज्ञात है। लेकिन आपका व्यवसाय क्या है, यह हमें नहीं पता। फिर भी आप मुझसे बड़ी गाड़ी में घूमते हैं,” ऐसा उन्होंने पलटवार करते हुए कहा।
जिले के 90+ कोचिंग सेंटर में से सिर्फ 12 के पास फायर एनओसी: मानकों की अनदेखी, बच्चों की सुरक्षा पर सवाल

जिले भर में 90 से अधिक कोचिंग सेंटर संचालित हैं, लेकिन डीआईओएस कार्यालय में सिर्फ 15 पंजीकृत हैं। इनमें से केवल 12 कोचिंग सेंटरों ने अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिया है। लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में हुए हादसे के बाद जिले में कोचिंग सेंटरों के संचालन और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

शासन ने कोचिंग सेंटरों के संचालन के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित किए हैं। इनमें पंजीकरण, अग्निशमन एनओसी, अग्निशमन उपकरण, योग्य शिक्षक, उचित बैठने की व्यवस्था, शौचालय, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग और स्वच्छता जैसे मानक शामिल हैं। इसके बावजूद, जिले के कई सेंटरों पर इन मानकों की अनदेखी देखी गई।

लखनऊ हादसे के बाद एक टीम ने जिले भर में कोचिंग सेंटरों की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कई सेंटर तंग गलियों या बेसमेंट में संचालित होते मिले। कुछ सेंटरों में तीन से चार कमरों में कई शिफ्टों में कक्षाएं चल रही थीं।

ज्ञानपुर में मिश्रा मार्केट के पीछे संकरी गली और भदोही में ज्ञानदेवी स्कूल के पास बेसमेंट में कोचिंग सेंटर संचालित पाए गए, जहां एक शिफ्ट में 100 से 125 बच्चे पढ़ते हैं। गोपीगंज के वार्ड नंबर एक स्थित महात्मा गांधी लिंक मार्ग पर भी सुरक्षा व्यवस्था का अभाव दिखा।

भदोही के रजपुरा फेज-टू, चौरी रोड, औराई रोड, मूंसीलाटपुर और स्टेशन रोड स्थित कोचिंग सेंटरों के तीन से चार कमरों में बच्चे पढ़ते मिले। जमुनीपुर में एक शटर के भीतर कोचिंग संचालित होती दिखी। नईबाजार के उत्तरा फाटक, आजादनगर और चांदनी चौक में भी ऐसे सेंटर मिले, जहां केवल एक निकास द्वार था और अग्निशमन व्यवस्था नदारद थी।

डीआईओएस अंशुमान ने बताया कि जिले की तीनों तहसीलों में दो सदस्यीय टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें जिले भर में कोचिंग सेंटरों की जांच करेंगी। मानक के अनुरूप न मिलने पर उन्हें बंद कराया जाएगा और जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।


फीस मोटी, लेकिन व्यवस्थाएं शून्य
बच्चों का भविष्य संवारने के नाम पर कोचिंग संचालक विद्यार्थियों से मोटी फीस वसूल रहे हैं। गणित, साइंस और अन्य महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई के लिए संचालक 500 से एक हजार रुपये तक शुल्क ले रहे हैं, लेकिन सेंटरों पर व्यवस्थाएं शून्य हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

एक माह पहले पंजीकरण के लिए दी थी चेतावनी
जिला विद्यालय निरीक्षक अंशुमान ने बताया कि एक माह पहले सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी संचालकों को पंजीकरण कराने का निर्देश दिया गया था, लेकिन केवल 15 कोचिंग सेंटरों ने पंजीकरण कराया। इसी प्रकार अग्निशमन विभाग ने गर्मी शुरू होने से पहले सभी को एनओसी के लिए पत्र जारी किया था, लेकिन केवल 12 ने एनओसी ली।

कोचिंग खोलने के लिए ये मानक अनिवार्य
पार्किंग की सुचारु व्यवस्था होनी चाहिए।
कोचिंग में उतने ही बच्चों को बैठाया जाए, जितनी सीटें उपलब्ध हों।
लड़के एवं लड़कियों के लिए अलग-अलग वॉशरूम होने चाहिए।
इमरजेंसी अलार्म का होना आवश्यक है।
यदि कोचिंग क्लास बेसमेंट में है, तो वहां दो दरवाजे होना जरूरी है।
प्रत्येक कमरे में दो दरवाजे और सीसीटीवी कैमरा होना चाहिए।




जिले में संचालित कोचिंग सेंटरों की जांच के लिए टीम गठित हो चुकी है। दो टीमें जिले भर के कोचिंग सेंटरों पर पहुंचकर उनकी फायर सेफ्टी की जानकारी लेंगी। ओम प्रकाश, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी
5 कोचिंग संस्थान व लाइब्रेरी सील,मानक न पूरा होने पर हुई कार्रवाई
*रजिस्ट्रेशन व अग्निशमन यंत्र नहीं मिलने पर कार्रवाई

गोंडा। लखनऊ में हुए कोचिंग अग्निकांड के बाद जिले में भी कार्रवाई की गई है।जिला विद्यालय निरीक्षक डाक्टर रामचंद्र ने मंगलवार को अभियान चलाकर पांच लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटरों को सील कर दिया है।यह कार्रवाई सुरक्षा मानकों और पंजीकरण नियमों का पालन न करने पर की गई है।सील किए गए संस्थानों में कटरा बाजार विकास खंड की लाइब्रेरी सुपर इंस्टीट्यूट सेंटर शामिल है।इसका पंजीकरण वर्ष 2019 में हुआ था,परन्तु इसका नवीनीकरण नहीं कराया गया था।सेंटर पर अग्निशमन यंत्र भी नहीं था और न ही किसी प्रकार के मानक पूरे किए जा रहे थे।इसी तरह एनसीएम लाइब्रेरी व कम्प्यूटर इंस्टीट्यूट का भी पंजीकरण नहीं था,जिसे सील कर दिया गया।पीसीएस कोचिंग सेंटर व लाइब्रेरी बंद पाई गई और उसे भी सील कर दिया गया।ज्ञान धारा लाइब्रेरी में दो कमरे व आठ बच्चे मिले परन्तु कोई अभिलेख नहीं दिखाया जा सका,जिसके बाद इसे भी सील कर दिया गया।इसी क्रम में डिजिटल लाइब्रेरी और दैनिक लाइब्रेरी का भी निरीक्षण करने पर पूरे मानक नहीं पाए गए,जिसके कारण इन्हें भी सील कर दिया गया है।जिला विद्यालय निरीक्षक डाक्टर रामचंद्र ने सोमवार को ही सभी कोचिंग व लाइब्रेरी संचालकों को नोटिस जारी कर सुविधाओं के संबंध में जानकारी मांगा था और निर्धारित समय सीमा पूर्ण होते ही जिला विद्यालय निरीक्षक ने एक्शन लेना प्रारंभ कर दिया।जिला विद्यालय निरीक्षक डाक्टर रामचंद्र ने बताया कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा।उन्होंने कहा कि जो भी कोचिंग संस्थान व लाइब्रेरी मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं,उन्हें तत्काल प्रभाव से सील किया जाएगा और उनके खिलाफ अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।जिला विद्यालय निरीक्षक ने स्पष्ट किया कि बच्चों की जिंदगी के साथ कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी को कोचिंग संचालन के नियमों का पालन करना होगा।उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी के पंजीकरण की अभी कोई गाइड लाइन नहीं है परन्तु जो भी सुरक्षा मानक हैं उसको देखा जा रहा है तथा उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
लखनऊ अग्निकांड: धुएं में घुल गई दोस्ती, राख हो गए सपने—सूरज और संयम की अधूरी कहानी
लखनऊ । लखनऊ के अलीगंज की वह इमारत अब सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं रही। वह एक ऐसी याद बन चुकी है, जहां हर कोना किसी न किसी छात्र की आखिरी सांस का गवाह है। कोचिंग और एनीमेशन सेंटर में लगी आग ने न सिर्फ 15 जिंदगियां छीन लीं, बल्कि कई घरों की पूरी दुनिया उजाड़ दी।

इन 15 कहानियों में सबसे ज्यादा दिल को तोड़ देने वाली कहानी दो दोस्तों—सूरज और संयम—की है। कानपुर के गोविंदनगर और बर्रा के रहने वाले ये दोनों नाम अब सिर्फ एक हादसे के नहीं, बल्कि एक ऐसी दोस्ती के प्रतीक बन गए हैं जो जिंदगी से आगे जाकर भी साथ रही—लेकिन लौटकर कभी नहीं आई।

बचपन से शुरू हुई कहानी, जो आग में खत्म हो गई

सूरज और संयम की दोस्ती किसी कहानी जैसी नहीं थी, वह जिंदगी का हिस्सा थी। रतनलालनगर के दून स्कूल में दोनों ने साथ पढ़ाई की, साथ शरारतें कीं, साथ सपने देखे। टीचर उन्हें हमेशा एक जोड़ी की तरह याद रखते थे—जहां एक बोलता था, दूसरा समझ जाता था।

स्कूल के बाद भी यह साथ नहीं टूटा। दोनों ने एक ही एनीमेशन स्टूडियो में नौकरी जॉइन की। परिवारों को भरोसा था कि यह दोस्ती अब भविष्य की सफलता बनेगी। लेकिन किसे पता था कि यह साथ एक ही आग में खत्म होने वाला है।

वह दोपहर, जब धुआं किस्मत बन गया

अलीगंज स्थित उस इमारत में रोज़ की तरह क्लास चल रही थी। किसी को यह अहसास नहीं था कि ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद वेयरहाउस में उठती एक चिंगारी कुछ ही मिनटों में मौत का तूफान बन जाएगी।

दोपहर करीब ढाई बजे आग लगी। पहले किसी ने इसे मामूली समझा, लेकिन कुछ ही मिनटों में धुआं इतनी तेजी से ऊपर की मंजिलों तक पहुंचा कि तीसरी मंजिल पर मौजूद छात्र फंस गए। सीढ़ियों से उतरना मुश्किल हो गया, खिड़कियों से बाहर की हवा भी जहरीली हो चुकी थी।

कुछ छात्रों ने मदद के लिए चिल्लाया, कुछ ने फोन उठाए, कुछ ने खिड़कियों से झांककर आखिरी उम्मीद तलाशने की कोशिश की—लेकिन आग उम्मीदों से तेज थी।

आखिरी फैसला—साथ जिए, साथ मरेंगे

इसी अफरा-तफरी के बीच सूरज और संयम भी फंस गए। परिजनों के अनुसार, दोनों ने भागने की कोशिश की, लेकिन धुआं इतना घना था कि सांस लेना मुश्किल हो गया। शायद उसी पल दोनों ने एक-दूसरे का हाथ नहीं छोड़ा।

कहा जाता है कि दोनों ने किसी कमरे या बाथरूम में खुद को बंद कर लिया, यह सोचकर कि शायद वहां थोड़ी देर और सांस मिल जाए। लेकिन आग ने दीवारों तक को गर्म कर दिया था। दम घुटने से दोनों की मौत हो गई—लेकिन सबसे दर्दनाक बात यह थी कि वे आखिरी पल तक भी साथ थे।

यह सिर्फ मौत नहीं थी, यह उस दोस्ती का अंत था जो जिंदगी से बड़ी लगती थी।

घर पहुंचे तो टूट गया आसमान

जब संयम का शव गोविंदनगर पहुंचा, मां सोनिया की चीख ने पूरे मोहल्ले को हिला दिया। वह बार-बार बेटे को पकड़कर पूछती रहीं—“बोल क्यों नहीं रहा तू? अभी तो ठीक था ना तू…” हर शब्द जैसे किसी दिल पर हथौड़ा था।

पड़ोसी भी रो पड़े, क्योंकि संयम वही लड़का था जो हमेशा मुस्कुराकर मिलता था। किसी ने सोचा भी नहीं था कि उसकी मुस्कान इतनी जल्दी खामोश हो जाएगी।

इधर सूरज के घर का हाल भी अलग नहीं था। मां मीरा बेटे के शव से लिपटकर बार-बार बेहोश हो रही थीं। कुछ घंटे पहले ही बेटा उन्हें फोन पर कहकर गया था कि वह ठीक है। लेकिन लौटकर वह खुद नहीं आया।

जिम्मेदारियों से भरा एक अधूरा सफर

सूरज सिर्फ एक छात्र या कर्मचारी नहीं था। वह अपने परिवार की रीढ़ था। पिता की मौत के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उसी पर आ गई थी। छोटे भाई और बहन की पढ़ाई, घर का खर्च, भविष्य की उम्मीदें—सब कुछ उसी के कंधों पर था।

वह हाल ही में शादी के लिए लड़की देखने भी गया था। घर में नई शुरुआत की बातें हो रही थीं। लेकिन अब वहां सिर्फ सन्नाटा है—और एक ऐसा खालीपन, जिसे कोई भर नहीं सकता।

रेस्क्यू, जो देर से पहुंचा

हादसे के बाद SDRF और दमकल विभाग ने बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि नियंत्रण पाना मुश्किल हो गया। दो घंटे के भीतर 15 शव बरामद किए गए और कई घायल अस्पताल पहुंचाए गए।

हर निकला हुआ शव एक कहानी खत्म कर रहा था, और हर घायल आंखें एक नई उम्मीद ढूंढ रही थीं।

अंतिम यात्रा—जहां दोस्ती भी जल उठी

सूरज और संयम का अंतिम संस्कार अलग-अलग स्थानों पर हुआ, लेकिन दोनों घरों की हालत एक जैसी थी—टूटा हुआ परिवार, सूनी आंखें और खत्म होते सपने।

मोहल्ले के लोग आज भी कहते हैं कि दोनों की दोस्ती इतनी गहरी थी कि मौत भी उन्हें अलग नहीं कर सकी। वे साथ जिए, साथ काम किया और साथ ही इस दुनिया से चले गए।

एक सवाल, जो हर दिल में रह गया

यह हादसा सिर्फ आग नहीं था। यह एक चेतावनी थी—उन लापरवाहियों की, जिनके बीच हम अपने बच्चों को छोड़ देते हैं।

क्या यह हादसा टल सकता था? क्या ये 15 जिंदगियां बच सकती थीं?

इन सवालों के जवाब शायद कभी न मिलें, लेकिन सूरज और संयम की कहानी हमेशा याद दिलाती रहेगी कि कुछ दोस्तियां इतनी सच्ची होती हैं कि वे मौत के बाद भी खत्म नहीं होतीं—बस खामोश हो जाती हैं।
UN में भारत ने फिर पाकिस्‍तान को लताड़ा, कश्मीर के जिक्र पर सीखा दिया सबक

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एरिया फॉर्मूला बैठक में भारत ने पाकिस्तान को फिर कड़ा जवाब दिया है। भारत ने जम्मू-कश्मीर पर की गई पाकिस्तान की टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और यह भारत का आंतरिक मामला है।

जम्मू-कश्मीर पर पाक की टिप्पणी को बताया गैर जरूरी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चीन और पाकिस्तान की ओर से आयोजित एरिया फॉर्मूला बैठक के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया। भारतीय राजदूत ने हरीश पर्वतनेनी कहा, "यह हैरानी की बात है कि सह अध्यक्ष होने के बावजूद पाकिस्तान ने एरिया फॉर्मूला बैठक का राजनीतिक करण किया और भारत के जम्मू-कश्मीर इलाके पर गैर जरूरी टिप्पणियां कीं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि "केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का मामला पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। यह हमेशा से ऐसा ही रहा है, अभी भी है और आगे भी ऐसा ही रहेगा।"

यूएन को भी दिखाया आईना

भारत ने इस मौके पर सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों और मध्यस्थता तंत्रों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए। पी. हरीश ने कहा कि समय के साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां बदलती हैं, ऐसे में सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और मध्यस्थता ढांचों की भी समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्‍टर-6 के तहत बनाए गए मध्यस्थता तंत्र स्थायी नहीं माने जा सकते और बदलते वैश्विक परिदृश्य में उनकी उपयोगिता का आकलन जरूरी है।

गंगा दशहरा पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाकर मनौती मांगी
घाटों पर पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही, बैरीकेटिंग के आगे, श्रद्धालु स्नान न करें सुरक्षा करनी सीटी बजाते रहे

फर्रुखाबाद l गंगा दशहरा को लेकर जनपद के पांचाल घाट,श्रंगीरामपुर और ढाई घाट पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान कर डुबकी लगाई और पूजा अर्चना कर मनौती भी मांगी । पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने कहां कि जनपद के तीनों घाटों पर सुरक्षा की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है l उन्होंने कहा कि घाटों पर अस्थाई रूप से किनारे किनारे वेरीकेटिंग भी की गई है क्योंकि इन घाटों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान करने के लिए आसपास जनपदों से आते हैं इसलिए इन घाटों पर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है । उन्होंने कहा कि स्नान करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सुरक्षा कर्मी बराबर सीटी बजाकर चेतावनी दे रहे थे कि ज़्यादा गहराई में स्नान ना करें बल्कि किनारे बैठकर स्नान करें।
आजमगढ़:-पहले ही प्रयास में एग्रीकल्चर टेक्निकल असिस्टेंट परीक्षा में सफल हुईं आंधीपुर की रुचि यादव, क्षेत्र में खुशी की लहर
वी कुमार यदुवंशी
आजमगढ़। फूलपुर तहसील क्षेत्र के आधीपुर गांव निवासी कुमारी रुचि यादव ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित एग्रीकल्चर टेक्निकल असिस्टेंट (टीए) परीक्षा में पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्त कर अपने परिवार एवं क्षेत्र का नाम रोशन किया है। कल देर शाम में परिणाम घोषित होने के बाद परिजनों, रिश्तेदारों एवं क्षेत्रवासियों में खुशी का माहौल है। रुचि यादव, पुत्री कैलाश प्रसाद उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, लगन एवं निरंतर अध्ययन के बल पर यह सफलता हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि से गांव एवं आसपास के क्षेत्र में हर्ष का वातावरण है तथा बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। रुचि यादव की प्रारंभिक शिक्षा हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट की पढ़ाई मथुरा इंटर कॉलेज, नाहरपुर से हुई। इसके बाद उन्होंने टीडी कॉलेज, जौनपुर से बीएससी (एग्रीकल्चर) एवं बीटीसी की शिक्षा प्राप्त की। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए वह जौनपुर में रहकर निरंतर अध्ययन कर रही थीं। कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने पहले ही प्रयास में यह सफलता अर्जित की। रुचि यादव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवारजनों, गुरुजनों एवं अपनी कड़ी मेहनत को दिया है। उन्होंने कहा कि नियमित अध्ययन, आत्मविश्वास और परिवार के सहयोग से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। परिवार के लोगों ने बताया कि रुचि शुरू से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर और मेहनती रही हैं। उनकी इस सफलता से क्षेत्र के अन्य छात्र-छात्राओं को भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरणा मिलेगी। ग्रामीणों एवं शुभचिंतकों ने रुचि यादव को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल बना हुआ है।
आजमगढ़: पोखरें में डूबने से बालक की मौत, परिजनों का रो रोकर बुरा हाल
आजमगढ़।निजामाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत फरिहा ग्राम के सवाई मोहल्ले में स्थित पोखरे के पास खेल रहे बच्चों के साथ युसूफ पुत्र अशफाक जिसकी उम्र 6 वर्ष खेल रहा था . पोखरे में फिसल कर गिरने की वजह से डूब कर मौत हो गई. ग्रामीण जनता ने बताया कि बच्चों के पानी में गिरते ही साथ खेल रहे अन्य बच्चों ने शोर मचाना शुरू किया. जब तक ग्रामीण मौके पर पहुंचे तब तक यूसुफ पानी में डूब चुका था. ग्रामीणों ने बच्चों को पोखरी से बाहर निकालें . परिजन और ग्रामीण तत्काल उसे अस्पताल लेकर पहुंचे . चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत्यु घोषित कर दिया . युसूफ दो भाई और एक बहन मैं दूसरे नंबर पर था. सवाई मोहल्ले में मातम छाया हुआ है. परिवार के लोगों को रो-रो कर बुरा हाल हो गया है.
आजमगढ़: बीपीएससी व सीए बनने वाले युवको का गांव में हुआ सम्मान दिखी गंगा जमुनी तहजीब
आजमगढ़। जनपद के अहरौला थाना क्षेत्र के परगाशपुर गांव निवासी उदय प्रताप यादव पुत्र सुभाष ने बिहार पीसीएस में पांचवी रैंक प्राप्त की है वही गांव के ही मु. अब्दुल्ला पुत्र निजामुद्दीन सीए की परीक्षा पास कर चार्टर अकाउंटेंट बने हैं दोनों युवक मंगलवार को जब गांव मे एक साथ पहुंचे तो गंगा जमुनी तहजीब देखते ही बनती थी हर वर्ग हर समाज के लोगों ने दोनों युवकों का गांव में पहुंचने पर माला फूल बनाकर स्वागत सम्मान किया और इस प्रतिभा पर गर्व हो रहा था अपने गांव में पहुंचे तो ढोल नगाड़े के साथ दोनों युवाओं का गांव वालों ने स्वागत किया और माला फूल पहना कर सम्मानित किया गया मौके पर पहुंचे क्षेत्रीय विधायक डॉक्टर संग्राम यादव ने बिहार पीसीएस में पांचवी रैंक प्राप्त करने वाले उदय प्रताप यादव व सीए बनने वाल मोहम्मद अब्दुल्ला को अंगवस्त्र स्मृति चिन्ह के रूप में संविधान की किताब देकर सम्मानित किया डॉ. यादव ने कहा आज बहुत ही गौरव का विषय है और युवाओं के लिए प्रेरणा भी है कि गांव के साथ पढ़ने वाले दो युवक जो एक बीपीएससी 70 वी परीक्षा में गांव और परिवार का नाम रोशन किया है तो मु. अब्दुल्ला सीए बने इन युवाओं से लोगों को प्रेरणा लेनी चाहिए वही बीपीएससी में पांचवी रैंक प्राप्त करने वाले उदय प्रताप यादव ने इसका श्रेय अपने चाचा मुन्नू यादव को दिया सीए बनने वाले मोहम्मद अब्दुल्ला ने भी अपने मुंबई में रह रहे चाचा जबैद अली को दिया वहीं अपने पिता निजामुद्दीन को भी टेंट हाउस के छोटे से व्यवसाय से परिवार और पढ़ाई के लिए भी कुछ-कुछ पैसे निकाल कर सहयोग करते रहे जिससे आज सफलता मिली है। दोनों लोगों का गांव में पहुंचने पर गांव वालों ने स्वागत सम्मान किया। इस मौके पर प्रभुदीन यादव, साहबलाल, श्री चंद यादव,सज्जन, रामलाल यादव, वंशराज यादव, दिनेश यादव, बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।।