प्रयागराज बारा के जारी गड़ैया कला में 33/11 केवी विद्युत उपकेन्द्र की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, मामला उजागर

प्रयागराज, विश्वनाथ प्रताप सिंह

कौंधियारा उपखण्ड अधिकारी ने अधिकारियों को पत्र लिखकर कब्जा हटवाने और जमीन की पैमाइश कराने की मांग पर हल्का लेखपाल व आर आई मौजूद।

उपकेन्द्र के पीछे खाली भूमि पर अज्ञात लोगों द्वारा जबरन निर्माण किए जाने का शिकायती पत्र में उल्लेख। 

उपखण्ड अधिकारी ने अवैध कब्जा रोकने के साथ दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की प्रशासन से अपील की।

सदर से आए SDM और तहसीलदार की टीम भी बारा क्षेत्र में सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से नहीं बचा पा रही।

क्षेत्र में लगातार अतिक्रमण की शिकायतें, लेकिन बड़े भूमाफियाओं पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं।  

 कई गांवों में होलिका, तालाब और किसानों की जमीनों पर अवैध कब्जे के आरोप।  

एसडीएम गणेश कनौजिया और तहसीलदार अनिल कुमार पाठक की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे..।

 यह पूरा मामला जारी पावर हाउस का बताया जा रहा है जानकारी यह प्राप्त हो रही है कि पास में लगी जमीन अरुण सिंह की बताई जा रही है जहां पर उनके द्वारा जेसीबी से विद्युत विभाग की लगे कुछ बोल केवल इत्यादि सामान रखे हुए थे जिनको उनके द्वारा हटवा दिया गया है और उस जमीन में अपना कब्जा दखल किए हुए हैं जहां पर बिजली विभाग के एसडीओ द्वारा लिखित शिकायत की गई है जिसकी जांच हल्का लेखपाल आर आई को बुलाकर कराई जा रही है। देखना है अब यह है कि इस मामले में संबंधित अधिकारी कार्रवाई के नाम पर कितना करते हैं या उनके दबाव में आकर मामले को ठंडा बस्ती में डाल देते हैं।... सवाल यह खड़ा होता है कि क्या... उस दबंग किस्म व्यक्ति से क्या उस जमीन का कब्जा हटाया जा सकता है। फिलहाल अभी उस जमीन की बिना पैमाइश की पुष्टि नहीं की जा सकती हैं.

 यदि वह जमीन किस की थी तो उसमें पहले से कब्जा क्यों नहीं हुआ।

जब जमीन पर विद्युत विभाग का कब्जा था तो किसान द्वारा उस कब्जे को क्यों हटाया गया।

यदि किसान को लगता की जमीन मेरी हैं और मेरा कब्जा होना था तो राजस्व टीम क्यों नहीं बुलाई।

 अब बात आती है विद्युत विभाग की जब पहले से ही जमीन पर कब्जा था तो किसान द्वारा उस विद्युत विभाग की जमीन बिना पैमाइश कराये और बिना सूचना दिए हुए क्यों हटाया गया।

जब सरकारी व्यक्तियों अथवा थाना चौकी पावर हाउस सरकारी तालाब की जमीन सुरक्षित नहीं है तो आम पब्लिक कैसे सुरक्षित रह पाएंगे।

स्किलिंग से रोजगार तक: आधुनिक तकनीक के सहारे यूपी बनेगा देश का सबसे बड़ा स्किल हब
* गोरखपुर में ‘संवाद’ कार्यक्रम, सरकार-उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों ने तैयार किया रोजगार आधारित कौशल विकास का रोडमैप

गोरखपुर / लखनऊ। उत्तर प्रदेश को देश की “स्किल कैपिटल” बनाने की दिशा में सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। युवाओं को आधुनिक तकनीक, उद्योगों की जरूरतों और रोजगार आधारित प्रशिक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से मंगलवार को गोरखपुर के होटल रमाडा में “संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) द्वारा किया गया, जिसमें सरकार, उद्योग जगत, निजी आईटीआई संचालकों और प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने की। इस दौरान प्रमुख सचिव डॉ हरि ओम , मिशन निदेशक पुलकित खरे  तथा संयुक्त निदेशक मयंक गंगवार सहित कई अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे।

* “डिग्री नहीं, रोजगार देने वाला हुनर जरूरी”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि आज के समय में युवाओं को केवल डिग्री नहीं बल्कि रोजगार देने वाला कौशल उपलब्ध कराना सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण देकर युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने Tata Technologies के साथ एमओयू कर प्रदेश के 150 सरकारी आईटीआई को एआई, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, एडवांस डिजाइनिंग और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसी तकनीकों से लैस किया है। जल्द ही 62 और आईटीआई को इस परियोजना से जोड़ा जाएगा।

* “स्किल टू एम्प्लॉयमेंट” मॉडल पर सरकार का फोकस
मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण संस्थानों को केवल प्रमाणपत्र देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप दक्ष बनाना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार अब “स्किल टू एम्प्लॉयमेंट” मॉडल पर काम कर रही है, जिसमें प्रशिक्षण के साथ रोजगार सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 300 से अधिक सरकारी और 3000 से अधिक निजी आईटीआई संचालित हो रहे हैं। वहीं पिछले वर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को अप्रेंटिसशिप से जोड़ा गया, जो देश में सर्वाधिक है।

* तकनीक और उद्योगों से जुड़ रहा कौशल विकास
प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने कहा कि कौशल विकास अब केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव बन चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को ऐसा हुनर देना चाहती है जिससे वे स्थायी रोजगार प्राप्त कर सकें और बड़े शहरों की ओर पलायन कम हो।
मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत “प्रोजेक्ट प्रवीण” के जरिए स्कूली स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के 2500 से अधिक स्कूल इस योजना से जुड़ चुके हैं और लगभग ढाई लाख विद्यार्थियों का नामांकन किया गया है।
उन्होंने बताया कि “कौशल दोस्त” AI चैटबॉट, “कौशल दर्पण” प्लेटफॉर्म और “कौशल दिशा” ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म जैसी डिजिटल पहल के जरिए युवाओं को आधुनिक प्रशिक्षण और रोजगार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

* उत्कृष्ट प्रशिक्षार्थियों को किया सम्मानित
कार्यक्रम के अंत में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षार्थियों और प्रशिक्षकों को मंत्री कपिल देव अग्रवाल द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
आर.एस.ए.सी. में आकाशीय बिजली पर उच्च स्तरीय मंथन, पूर्वानुमान और बचाव के उपायों पर जोर

* इसरो, एनडीएमए और एसडीएमए के विशेषज्ञों ने साझा किए सुझाव, ग्राउंड सेंसर नेटवर्क विस्तार पर चर्चा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत संचालित रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (आर.एस.ए.सी.), लखनऊ में आकाशीय बिजली (लाइटनिंग) से बचाव एवं उसके प्रभावी न्यूनीकरण के उपायों पर उच्च स्तरीय वैज्ञानिक विचार-विमर्श आयोजित किया गया। कार्यक्रम में इसरो, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA), स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (SDMA) सहित विभिन्न संस्थाओं के विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियों के माध्यम से आकाशीय बिजली के वैज्ञानिक एवं तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। इसरो के वैज्ञानिकों ने ग्राउंड सेंसर के जरिए डेटा संग्रहण और उसे ‘भुवन पोर्टल’ पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जानकारी दी। साथ ही प्रदेश में ग्राउंड सेंसर नेटवर्क के विस्तार की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
एनडीएमए के विशेषज्ञों ने आकाशीय बिजली से जुड़े सामुदायिक मूल्यांकन, जनजागरूकता, क्षमता विकास और प्रबंधन कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने प्रदेश में आकाशीय बिजली से निपटने के लिए संस्थागत और ऑपरेशनल फ्रेमवर्क की रूपरेखा प्रस्तुत की।
बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि आकाशीय बिजली के पूर्वानुमान से जुड़ी सटीक जानकारी को एकीकृत प्लेटफॉर्म के माध्यम से आम लोगों तक सरल और सुलभ रूप में पहुंचाया जाए। इसके साथ ही विभिन्न स्टेकहोल्डर्स ने जोखिम वाले क्षेत्रों (हॉटस्पॉट्स) की पहचान और बचाव उपायों पर अपने सुझाव साझा किए।
इस अवसर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और आर.एस.ए.सी. के वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक मौजूद रहे।
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तालाब पर ताज, कानून पर लाज!’—अमिलिया में जिंदा दफ्न हुआ जलस्रोत, बेनकाब हुआ पूरा सिस्टम

विश्वनाथ प्रताप सिंह

बारा तहसील बना मूक दर्शक’—तहसीलदार से SDM तक खामोशी, कब्जेदारों की बल्ले-बल्ले!

प्रयागराज। अमिलिया,प्रयागराज। यह सिर्फ खबर नहीं—यह जमीनी हकीकत का वह आईना है जिसमें पूरा सिस्टम बेनकाब खड़ा है। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत अमिलिया तरहार गांव में सरकारी तालाब अब इतिहास बन चुका है। जहां कभी पानी की लहरें थीं, वहां आज मिट्टी, मलबा और पक्के निर्माण खड़े हैं—और यह सब प्रशासन की खुली आंखों के सामने हुआ।

तालाब जिंदा था… उसे मार दिया गया!’—कागजों में जल, जमीन पर जंगलराज

राजस्व रिकॉर्ड चीख-चीखकर बता रहे हैं कि आराजी संख्या 299 और 307 आज भी पोखरी तालाब हैं। लेकिन मौके पर हकीकत ऐसी है कि तालाब को पूरी तरह पाटकर उस पर कब्जा कर लिया गया है। यह कोई साधारण अतिक्रमण नहीं—यह जलस्रोत की सुनियोजित हत्या है।

मीडिया ने मचाया शोर, सिस्टम रहा ठंडा’—हफ्तों से उठ रही आवाज, असर शून्य

सोशल मीडिया, अखबार, स्थानीय पत्रकार—हर प्लेटफॉर्म से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। अधिकारियों को बार-बार चेताया गया, खबरें छपीं, तस्वीरें सामने आईं लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात। अब गांव में एक ही बात गूंज रही है—“दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही जल चुकी है!

धारा 67 दम तोड़ चुकी?’—आदेश जारी, कब्जा बरकरार

2020-21 में धारा 67 के तहत बेदखली और क्षतिपूर्ति के आदेश पास हुए। यानी कानून ने अपनी भूमिका निभाई—लेकिन उसे लागू करने वालों ने हथियार डाल दिए।

आदेश फाइलों में कैद हैं, और जमीन पर कब्जेदार आज भी राज कर रहे हैं।

कोर्ट भी बेबस न्यायिक निर्देशों की खुली अवहेलना न्यायालय ने साफ कहा—कार्रवाई करो। लेकिन बारा तहसील का सिस्टम मानो सुनने को तैयार ही नहीं। यह सवाल अब जोर पकड़ रहा है—क्या कुछ अधिकारी खुद को कोर्ट से भी ऊपर मान बैठे हैं?

‘पूरा महकमा कटघरे में’—तहसीलदार, नायब, कानूनगो, लेखपाल सब पर सवाल

इस पूरे प्रकरण में: तहसीलदार,

नायब तहसीलदार,कानूनगो

संबंधित लेखपाल, और उपजिलाधिकारी (SDM) सभी की भूमिका सवालों के घेरे में है। आखिर किसकी जिम्मेदारी थी? किसने आंखें मूंदी? और किसके इशारे पर यह सब होने दिया गया?

तालाब नहीं, पूरा तंत्र पाटा गया!’—जिंदा हकीकत से इनकार नहीं

यह कहना गलत नहीं होगा कि अमिलिया में सिर्फ तालाब नहीं पाटा गया—बल्कि कानून, पर्यावरण और प्रशासनिक जवाबदेही—तीनों को एक साथ दफ्न कर दिया गया है। पूरा तालाब “बक्सा” कर बंद कर दिया गया, और जिम्मेदार अफसर मूकदर्शक बने रहे।

इतना नमक कि निगलना मुश्किल’—गांव में उबल रहा गुस्सा

ग्रामीणों का कहना है—अगर दाल में नमक ज्यादा हो जाए तो वह निगली नहीं जाती, और यहां तो हालात ऐसे हैं कि पूरी व्यवस्था ही बेस्वाद हो चुकी है। भरोसा टूट चुका है।

अब जिलाधिकारी ही आखिरी उम्मीद’—जिलाधिकारी से सीधे हस्तक्षेप की मांग

सूत्र साफ संकेत दे रहे हैं कि बारा तहसील स्तर पर यह मामला सुलझाने की क्षमता या इच्छाशक्ति दोनों खत्म हो चुकी हैं। अब ग्रामीणों की नजरें सीधे जिलाधिकारी प्रयागराज पर टिक गई हैं। मांग है कि: पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो। जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया जाए और तत्काल प्रभाव से कब्जा हटाया जाए

सीएम का फरमान बनाम जमीनी सच्चाई बड़ा विरोधाभास

उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ का साफ संदेश है—भू-माफिया किसी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे। लेकिन अमिलिया में पूरा तालाब ही बक्सा कर कब्जा लिया गया, और प्रशासन चुप है। यह जमीनी हकीकत सरकार के दावों पर भी सवाल खड़ा कर रही है।

आज तालाब गया, कल पानी जाएगा’—भविष्य खतरे में

यह सिर्फ जमीन नहीं यह आने वाली पीढ़ियों का पानी है। अगर आज भी नहीं चेते तो कल प्यास ही विरासत बनेगी।

आखिरी सवाल, सबसे बड़ा सवाल—कानून जिंदा है या मर चुका है।

अमिलिया अब सिर्फ एक गांव नहीं यह सिस्टम की साख का रणक्षेत्र बन चुका है। अब देखना है—कानून की जीत होती है या दबंगई फिर एक बार ताज पहन लेती है।

देवरिया जिले के बरहज SDM विपिन द्विवेदी निलंबित

देवरिया । बरहज तहसील के उपजिलाधिकारी (SDM) विपिन द्विवेदी को नलकूप जमीन विवाद मामले में दोषी पाए जाने के बाद निलंबित कर दिया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, नलकूप की जमीन से जुड़े विवाद में प्रशासनिक स्तर पर अनियमितता और लापरवाही की शिकायतें सामने आई थीं। जांच के बाद यह पाया गया कि SDM स्तर पर सही कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते मामला और गंभीर हो गया।
SDM विपिन द्विवेदी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर  राजस्व परिषद से संबद्ध किया गया है
उनके ऊपर विभागीय जांच आगे भी जारी रहेगी ।
उपराष्ट्रपति का रांची दौरा: सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, एयरपोर्ट से IIM रांची तक का इलाका 'नो फ्लाइंग जोन' घोषित

रांची | 26 मार्च 2026: भारत के माननीय उपराष्ट्रपति के प्रस्तावित रांची आगमन और प्रस्थान को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े रुख अख्तियार कर लिए हैं। उपराष्ट्रपति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रांची के अनुमंडल दंडाधिकारी (SDM) सदर ने शहर के एक बड़े हिस्से को 'नो फ्लाइंग जोन' (No Flying Zone) घोषित कर दिया है।

इन इलाकों में उड़ने वाली वस्तुओं पर पाबंदी

जारी आदेश के अनुसार, दिनांक 28 मार्च 2026 को उपराष्ट्रपति के रूट और कार्यक्रम स्थलों के आसपास सुरक्षा घेरा बेहद सख्त रहेगा।

प्रभावित क्षेत्र: बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से हिनू चौक, बिरसा चौक, अरगोड़ा चौक से लेकर लोकभवन और भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रांची तक।

परिधि: इन मार्गों और स्थलों की 200 मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार के ड्रोन (Drones), पैराग्लाइडिंग (Paragliding) और हॉट एयर बैलून (Hot Air Balloons) को उड़ाना पूर्णतः वर्जित रहेगा।

निषेधाज्ञा और समय सीमा

सुरक्षा के दृष्टिकोण से अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर द्वारा BNSS की धारा-163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह निषेधाज्ञा जारी की गई है।

लागू होने का समय: यह पाबंदी 28 मार्च 2026 को प्रातः 06:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक प्रभावी रहेगी।

कड़ी कार्रवाई: आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक मुस्तैदी

उपराष्ट्रपति के आगमन को लेकर रांची जिला प्रशासन और पुलिस बल अलर्ट मोड पर है। रूट लाइनिंग से लेकर कार्यक्रम स्थलों तक की सुरक्षा की कमान वरीय अधिकारियों ने संभाल ली है। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे सुरक्षा मानकों का पालन करें और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत सूचित करें।

राष्ट्रपति का रांची दौरा: बिरसा मुंडा एयरपोर्ट की परिधि "No Flying Zone" घोषित, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

रांची: भारत की माननीय राष्ट्रपति महोदया के 26 फरवरी 2026 को प्रस्तावित रांची आगमन और प्रस्थान को लेकर जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से अनुमंडल दंडाधिकारी (SDM) सदर, रांची ने बिरसा मुंडा एयरपोर्ट की परिधि को पूरी तरह से 'नो फ्लाइंग जोन' (No Flying Zone) घोषित कर दिया है।

क्या-क्या रहेगा प्रतिबंधित?

प्रशासन द्वारा जारी निषेधाज्ञा के अनुसार, चिन्हित क्षेत्र और उसके ऊपर:

ड्रोन (Drones)

पैराग्लाइडिंग (Paragliding)

हॉट एयर बैलून (Hot Air Balloons)

का संचालन पूरी तरह से वर्जित रहेगा।

निषेधाज्ञा का समय:

अनुमंडल दंडाधिकारी द्वारा BNSS की धारा-163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश जारी किया गया है। यह निषेधाज्ञा 26 फरवरी 2026 को प्रातः 06:00 बजे से लेकर रात्रि 10:00 बजे तक प्रभावी रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी।

आरंग की गुजरा पंचायत में बगावत, सरपंच के खिलाफ पंचों का मोर्चा

आरंग | रायपुर: रायपुर जिले के आरंग विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गुजरा में पंचायत राजनीति गरमा गई है। सरपंच बिंदू बंजारे के खिलाफ उपसरपंच सहित कई पंचों ने मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। पंचों ने अनुविभागीय अधिकारी (SDM) अभिलाषा पैकरा को ज्ञापन सौंपकर सरपंच के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने की औपचारिक मांग की है।

“सरपंच नहीं, भाई चला रहा है पंचायत”

पंचों का आरोप है कि पंचायत के कार्यों में पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। ज्ञापन में कहा गया है कि सरपंच के स्थान पर उनका भाई पंचायत के कामकाज को संचालित कर रहा है, जबकि वह गांव का निवासी भी नहीं है।

आरोप यह भी है कि सरपंच स्थायी रूप से अपने मायके बेमचा (महासमुंद) में रहती हैं और पंचायत मुख्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहतीं।

जरूरी दस्तावेजों के लिए भटक रहे ग्रामीण

सरपंच की अनुपस्थिति के कारण ग्रामीणों को जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और राशन कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेजों के लिए परेशान होना पड़ रहा है। पंचायत कार्यालय में समय पर कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं रहता, जिससे आम लोगों के काम अटक रहे हैं।

फर्जी आहरण और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

पंचों ने एसडीएम के सामने भ्रष्टाचार से जुड़े कई ठोस आरोप भी रखे हैं—

₹6 लाख का काम गोपनीय रखा गया: स्कूल के प्ले ग्राउंड समतलीकरण के लिए स्वीकृत राशि की जानकारी पंचों से छिपाई गई।

पानी टैंकर में फर्जीवाड़ा: अक्टूबर 2025 में पानी टैंकर के नाम पर ₹40 हजार से अधिक की राशि निकाली गई, जबकि गांव में पानी सप्लाई नहीं हुई।

पुरानी मशीन, नया बिल: पुराने मोटर पंप को नया बताकर ₹32 हजार के भुगतान का आरोप।

सचिव से मिलीभगत और बदसलूकी का आरोप

झारखंड के हुनर का चीन में बजेगा डंका: 'कौशल उत्कर्ष' के विजेता बने राज्य के राजदूत; हर प्रखंड में खुलेंगे नए कौशल केंद्र

राँची, 30 जनवरी 2026: झारखंड के युवाओं के सपनों को नई उड़ान देते हुए श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा आयोजित ‘झारखंड कौशल उत्कर्ष’ प्रतियोगिता का भव्य समापन हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित श्रम मंत्री श्री संजय प्रसाद यादव ने 39 विजेताओं को सम्मानित किया और घोषणा की कि युवाओं को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित करने के लिए राज्य के सभी प्रखंडों में नए कौशल केंद्र खोले जाएंगे।

चीन में होने वाली वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता का रास्ता साफ

मंत्री श्री संजय प्रसाद यादव ने विजेताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ये युवा केवल पदक विजेता नहीं हैं, बल्कि चीन में होने वाली 'India Skills Competition 2026' के लिए झारखंड के राजदूत हैं। प्रतियोगिता के स्वर्ण और रजत पदक विजेता अब ओडिशा, कर्नाटक और तमिलनाडु में अगले राउंड के लिए अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। वहां सफल होने वाले प्रतिभागी विश्व स्तरीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

वैश्विक रोजगार के लिए प्रतिष्ठित संस्थानों से MoU

झारखंड के युवाओं को केवल प्रशिक्षण ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर प्लेसमेंट दिलाने के लिए विभाग ने कई प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन साझेदारियों से राज्य के प्रशिक्षित युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी के द्वार खुलेंगे।

बेहतर प्रबंधन के लिए राँची की टीम सम्मानित

समारोह के दौरान नवाचार और बेहतर प्रबंधन के लिए राँची के उप-श्रमायुक्त-सह-जिला कौशल पदाधिकारी और उनकी पूरी टीम को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। मंत्री ने JSDMS को युवाओं का 'सतत सारथी' बताते हुए कौशल विकास के क्षेत्र में झारखंड के स्वर्णिम भविष्य की नींव रखी।

प्रयागराज बारा के जारी गड़ैया कला में 33/11 केवी विद्युत उपकेन्द्र की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, मामला उजागर

प्रयागराज, विश्वनाथ प्रताप सिंह

कौंधियारा उपखण्ड अधिकारी ने अधिकारियों को पत्र लिखकर कब्जा हटवाने और जमीन की पैमाइश कराने की मांग पर हल्का लेखपाल व आर आई मौजूद।

उपकेन्द्र के पीछे खाली भूमि पर अज्ञात लोगों द्वारा जबरन निर्माण किए जाने का शिकायती पत्र में उल्लेख। 

उपखण्ड अधिकारी ने अवैध कब्जा रोकने के साथ दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की प्रशासन से अपील की।

सदर से आए SDM और तहसीलदार की टीम भी बारा क्षेत्र में सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से नहीं बचा पा रही।

क्षेत्र में लगातार अतिक्रमण की शिकायतें, लेकिन बड़े भूमाफियाओं पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं।  

 कई गांवों में होलिका, तालाब और किसानों की जमीनों पर अवैध कब्जे के आरोप।  

एसडीएम गणेश कनौजिया और तहसीलदार अनिल कुमार पाठक की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे..।

 यह पूरा मामला जारी पावर हाउस का बताया जा रहा है जानकारी यह प्राप्त हो रही है कि पास में लगी जमीन अरुण सिंह की बताई जा रही है जहां पर उनके द्वारा जेसीबी से विद्युत विभाग की लगे कुछ बोल केवल इत्यादि सामान रखे हुए थे जिनको उनके द्वारा हटवा दिया गया है और उस जमीन में अपना कब्जा दखल किए हुए हैं जहां पर बिजली विभाग के एसडीओ द्वारा लिखित शिकायत की गई है जिसकी जांच हल्का लेखपाल आर आई को बुलाकर कराई जा रही है। देखना है अब यह है कि इस मामले में संबंधित अधिकारी कार्रवाई के नाम पर कितना करते हैं या उनके दबाव में आकर मामले को ठंडा बस्ती में डाल देते हैं।... सवाल यह खड़ा होता है कि क्या... उस दबंग किस्म व्यक्ति से क्या उस जमीन का कब्जा हटाया जा सकता है। फिलहाल अभी उस जमीन की बिना पैमाइश की पुष्टि नहीं की जा सकती हैं.

 यदि वह जमीन किस की थी तो उसमें पहले से कब्जा क्यों नहीं हुआ।

जब जमीन पर विद्युत विभाग का कब्जा था तो किसान द्वारा उस कब्जे को क्यों हटाया गया।

यदि किसान को लगता की जमीन मेरी हैं और मेरा कब्जा होना था तो राजस्व टीम क्यों नहीं बुलाई।

 अब बात आती है विद्युत विभाग की जब पहले से ही जमीन पर कब्जा था तो किसान द्वारा उस विद्युत विभाग की जमीन बिना पैमाइश कराये और बिना सूचना दिए हुए क्यों हटाया गया।

जब सरकारी व्यक्तियों अथवा थाना चौकी पावर हाउस सरकारी तालाब की जमीन सुरक्षित नहीं है तो आम पब्लिक कैसे सुरक्षित रह पाएंगे।

स्किलिंग से रोजगार तक: आधुनिक तकनीक के सहारे यूपी बनेगा देश का सबसे बड़ा स्किल हब
* गोरखपुर में ‘संवाद’ कार्यक्रम, सरकार-उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों ने तैयार किया रोजगार आधारित कौशल विकास का रोडमैप

गोरखपुर / लखनऊ। उत्तर प्रदेश को देश की “स्किल कैपिटल” बनाने की दिशा में सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। युवाओं को आधुनिक तकनीक, उद्योगों की जरूरतों और रोजगार आधारित प्रशिक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से मंगलवार को गोरखपुर के होटल रमाडा में “संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) द्वारा किया गया, जिसमें सरकार, उद्योग जगत, निजी आईटीआई संचालकों और प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने की। इस दौरान प्रमुख सचिव डॉ हरि ओम , मिशन निदेशक पुलकित खरे  तथा संयुक्त निदेशक मयंक गंगवार सहित कई अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे।

* “डिग्री नहीं, रोजगार देने वाला हुनर जरूरी”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि आज के समय में युवाओं को केवल डिग्री नहीं बल्कि रोजगार देने वाला कौशल उपलब्ध कराना सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण देकर युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने Tata Technologies के साथ एमओयू कर प्रदेश के 150 सरकारी आईटीआई को एआई, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, एडवांस डिजाइनिंग और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसी तकनीकों से लैस किया है। जल्द ही 62 और आईटीआई को इस परियोजना से जोड़ा जाएगा।

* “स्किल टू एम्प्लॉयमेंट” मॉडल पर सरकार का फोकस
मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण संस्थानों को केवल प्रमाणपत्र देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप दक्ष बनाना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार अब “स्किल टू एम्प्लॉयमेंट” मॉडल पर काम कर रही है, जिसमें प्रशिक्षण के साथ रोजगार सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 300 से अधिक सरकारी और 3000 से अधिक निजी आईटीआई संचालित हो रहे हैं। वहीं पिछले वर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को अप्रेंटिसशिप से जोड़ा गया, जो देश में सर्वाधिक है।

* तकनीक और उद्योगों से जुड़ रहा कौशल विकास
प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने कहा कि कौशल विकास अब केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव बन चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को ऐसा हुनर देना चाहती है जिससे वे स्थायी रोजगार प्राप्त कर सकें और बड़े शहरों की ओर पलायन कम हो।
मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत “प्रोजेक्ट प्रवीण” के जरिए स्कूली स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के 2500 से अधिक स्कूल इस योजना से जुड़ चुके हैं और लगभग ढाई लाख विद्यार्थियों का नामांकन किया गया है।
उन्होंने बताया कि “कौशल दोस्त” AI चैटबॉट, “कौशल दर्पण” प्लेटफॉर्म और “कौशल दिशा” ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म जैसी डिजिटल पहल के जरिए युवाओं को आधुनिक प्रशिक्षण और रोजगार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

* उत्कृष्ट प्रशिक्षार्थियों को किया सम्मानित
कार्यक्रम के अंत में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षार्थियों और प्रशिक्षकों को मंत्री कपिल देव अग्रवाल द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
आर.एस.ए.सी. में आकाशीय बिजली पर उच्च स्तरीय मंथन, पूर्वानुमान और बचाव के उपायों पर जोर

* इसरो, एनडीएमए और एसडीएमए के विशेषज्ञों ने साझा किए सुझाव, ग्राउंड सेंसर नेटवर्क विस्तार पर चर्चा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत संचालित रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (आर.एस.ए.सी.), लखनऊ में आकाशीय बिजली (लाइटनिंग) से बचाव एवं उसके प्रभावी न्यूनीकरण के उपायों पर उच्च स्तरीय वैज्ञानिक विचार-विमर्श आयोजित किया गया। कार्यक्रम में इसरो, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA), स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (SDMA) सहित विभिन्न संस्थाओं के विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियों के माध्यम से आकाशीय बिजली के वैज्ञानिक एवं तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। इसरो के वैज्ञानिकों ने ग्राउंड सेंसर के जरिए डेटा संग्रहण और उसे ‘भुवन पोर्टल’ पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जानकारी दी। साथ ही प्रदेश में ग्राउंड सेंसर नेटवर्क के विस्तार की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
एनडीएमए के विशेषज्ञों ने आकाशीय बिजली से जुड़े सामुदायिक मूल्यांकन, जनजागरूकता, क्षमता विकास और प्रबंधन कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने प्रदेश में आकाशीय बिजली से निपटने के लिए संस्थागत और ऑपरेशनल फ्रेमवर्क की रूपरेखा प्रस्तुत की।
बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि आकाशीय बिजली के पूर्वानुमान से जुड़ी सटीक जानकारी को एकीकृत प्लेटफॉर्म के माध्यम से आम लोगों तक सरल और सुलभ रूप में पहुंचाया जाए। इसके साथ ही विभिन्न स्टेकहोल्डर्स ने जोखिम वाले क्षेत्रों (हॉटस्पॉट्स) की पहचान और बचाव उपायों पर अपने सुझाव साझा किए।
इस अवसर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और आर.एस.ए.सी. के वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक मौजूद रहे।
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तालाब पर ताज, कानून पर लाज!’—अमिलिया में जिंदा दफ्न हुआ जलस्रोत, बेनकाब हुआ पूरा सिस्टम

विश्वनाथ प्रताप सिंह

बारा तहसील बना मूक दर्शक’—तहसीलदार से SDM तक खामोशी, कब्जेदारों की बल्ले-बल्ले!

प्रयागराज। अमिलिया,प्रयागराज। यह सिर्फ खबर नहीं—यह जमीनी हकीकत का वह आईना है जिसमें पूरा सिस्टम बेनकाब खड़ा है। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत अमिलिया तरहार गांव में सरकारी तालाब अब इतिहास बन चुका है। जहां कभी पानी की लहरें थीं, वहां आज मिट्टी, मलबा और पक्के निर्माण खड़े हैं—और यह सब प्रशासन की खुली आंखों के सामने हुआ।

तालाब जिंदा था… उसे मार दिया गया!’—कागजों में जल, जमीन पर जंगलराज

राजस्व रिकॉर्ड चीख-चीखकर बता रहे हैं कि आराजी संख्या 299 और 307 आज भी पोखरी तालाब हैं। लेकिन मौके पर हकीकत ऐसी है कि तालाब को पूरी तरह पाटकर उस पर कब्जा कर लिया गया है। यह कोई साधारण अतिक्रमण नहीं—यह जलस्रोत की सुनियोजित हत्या है।

मीडिया ने मचाया शोर, सिस्टम रहा ठंडा’—हफ्तों से उठ रही आवाज, असर शून्य

सोशल मीडिया, अखबार, स्थानीय पत्रकार—हर प्लेटफॉर्म से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। अधिकारियों को बार-बार चेताया गया, खबरें छपीं, तस्वीरें सामने आईं लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात। अब गांव में एक ही बात गूंज रही है—“दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही जल चुकी है!

धारा 67 दम तोड़ चुकी?’—आदेश जारी, कब्जा बरकरार

2020-21 में धारा 67 के तहत बेदखली और क्षतिपूर्ति के आदेश पास हुए। यानी कानून ने अपनी भूमिका निभाई—लेकिन उसे लागू करने वालों ने हथियार डाल दिए।

आदेश फाइलों में कैद हैं, और जमीन पर कब्जेदार आज भी राज कर रहे हैं।

कोर्ट भी बेबस न्यायिक निर्देशों की खुली अवहेलना न्यायालय ने साफ कहा—कार्रवाई करो। लेकिन बारा तहसील का सिस्टम मानो सुनने को तैयार ही नहीं। यह सवाल अब जोर पकड़ रहा है—क्या कुछ अधिकारी खुद को कोर्ट से भी ऊपर मान बैठे हैं?

‘पूरा महकमा कटघरे में’—तहसीलदार, नायब, कानूनगो, लेखपाल सब पर सवाल

इस पूरे प्रकरण में: तहसीलदार,

नायब तहसीलदार,कानूनगो

संबंधित लेखपाल, और उपजिलाधिकारी (SDM) सभी की भूमिका सवालों के घेरे में है। आखिर किसकी जिम्मेदारी थी? किसने आंखें मूंदी? और किसके इशारे पर यह सब होने दिया गया?

तालाब नहीं, पूरा तंत्र पाटा गया!’—जिंदा हकीकत से इनकार नहीं

यह कहना गलत नहीं होगा कि अमिलिया में सिर्फ तालाब नहीं पाटा गया—बल्कि कानून, पर्यावरण और प्रशासनिक जवाबदेही—तीनों को एक साथ दफ्न कर दिया गया है। पूरा तालाब “बक्सा” कर बंद कर दिया गया, और जिम्मेदार अफसर मूकदर्शक बने रहे।

इतना नमक कि निगलना मुश्किल’—गांव में उबल रहा गुस्सा

ग्रामीणों का कहना है—अगर दाल में नमक ज्यादा हो जाए तो वह निगली नहीं जाती, और यहां तो हालात ऐसे हैं कि पूरी व्यवस्था ही बेस्वाद हो चुकी है। भरोसा टूट चुका है।

अब जिलाधिकारी ही आखिरी उम्मीद’—जिलाधिकारी से सीधे हस्तक्षेप की मांग

सूत्र साफ संकेत दे रहे हैं कि बारा तहसील स्तर पर यह मामला सुलझाने की क्षमता या इच्छाशक्ति दोनों खत्म हो चुकी हैं। अब ग्रामीणों की नजरें सीधे जिलाधिकारी प्रयागराज पर टिक गई हैं। मांग है कि: पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो। जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया जाए और तत्काल प्रभाव से कब्जा हटाया जाए

सीएम का फरमान बनाम जमीनी सच्चाई बड़ा विरोधाभास

उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ का साफ संदेश है—भू-माफिया किसी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे। लेकिन अमिलिया में पूरा तालाब ही बक्सा कर कब्जा लिया गया, और प्रशासन चुप है। यह जमीनी हकीकत सरकार के दावों पर भी सवाल खड़ा कर रही है।

आज तालाब गया, कल पानी जाएगा’—भविष्य खतरे में

यह सिर्फ जमीन नहीं यह आने वाली पीढ़ियों का पानी है। अगर आज भी नहीं चेते तो कल प्यास ही विरासत बनेगी।

आखिरी सवाल, सबसे बड़ा सवाल—कानून जिंदा है या मर चुका है।

अमिलिया अब सिर्फ एक गांव नहीं यह सिस्टम की साख का रणक्षेत्र बन चुका है। अब देखना है—कानून की जीत होती है या दबंगई फिर एक बार ताज पहन लेती है।

देवरिया जिले के बरहज SDM विपिन द्विवेदी निलंबित

देवरिया । बरहज तहसील के उपजिलाधिकारी (SDM) विपिन द्विवेदी को नलकूप जमीन विवाद मामले में दोषी पाए जाने के बाद निलंबित कर दिया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, नलकूप की जमीन से जुड़े विवाद में प्रशासनिक स्तर पर अनियमितता और लापरवाही की शिकायतें सामने आई थीं। जांच के बाद यह पाया गया कि SDM स्तर पर सही कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते मामला और गंभीर हो गया।
SDM विपिन द्विवेदी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर  राजस्व परिषद से संबद्ध किया गया है
उनके ऊपर विभागीय जांच आगे भी जारी रहेगी ।
उपराष्ट्रपति का रांची दौरा: सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, एयरपोर्ट से IIM रांची तक का इलाका 'नो फ्लाइंग जोन' घोषित

रांची | 26 मार्च 2026: भारत के माननीय उपराष्ट्रपति के प्रस्तावित रांची आगमन और प्रस्थान को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े रुख अख्तियार कर लिए हैं। उपराष्ट्रपति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रांची के अनुमंडल दंडाधिकारी (SDM) सदर ने शहर के एक बड़े हिस्से को 'नो फ्लाइंग जोन' (No Flying Zone) घोषित कर दिया है।

इन इलाकों में उड़ने वाली वस्तुओं पर पाबंदी

जारी आदेश के अनुसार, दिनांक 28 मार्च 2026 को उपराष्ट्रपति के रूट और कार्यक्रम स्थलों के आसपास सुरक्षा घेरा बेहद सख्त रहेगा।

प्रभावित क्षेत्र: बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से हिनू चौक, बिरसा चौक, अरगोड़ा चौक से लेकर लोकभवन और भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रांची तक।

परिधि: इन मार्गों और स्थलों की 200 मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार के ड्रोन (Drones), पैराग्लाइडिंग (Paragliding) और हॉट एयर बैलून (Hot Air Balloons) को उड़ाना पूर्णतः वर्जित रहेगा।

निषेधाज्ञा और समय सीमा

सुरक्षा के दृष्टिकोण से अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर द्वारा BNSS की धारा-163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह निषेधाज्ञा जारी की गई है।

लागू होने का समय: यह पाबंदी 28 मार्च 2026 को प्रातः 06:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक प्रभावी रहेगी।

कड़ी कार्रवाई: आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक मुस्तैदी

उपराष्ट्रपति के आगमन को लेकर रांची जिला प्रशासन और पुलिस बल अलर्ट मोड पर है। रूट लाइनिंग से लेकर कार्यक्रम स्थलों तक की सुरक्षा की कमान वरीय अधिकारियों ने संभाल ली है। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे सुरक्षा मानकों का पालन करें और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत सूचित करें।

राष्ट्रपति का रांची दौरा: बिरसा मुंडा एयरपोर्ट की परिधि "No Flying Zone" घोषित, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

रांची: भारत की माननीय राष्ट्रपति महोदया के 26 फरवरी 2026 को प्रस्तावित रांची आगमन और प्रस्थान को लेकर जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से अनुमंडल दंडाधिकारी (SDM) सदर, रांची ने बिरसा मुंडा एयरपोर्ट की परिधि को पूरी तरह से 'नो फ्लाइंग जोन' (No Flying Zone) घोषित कर दिया है।

क्या-क्या रहेगा प्रतिबंधित?

प्रशासन द्वारा जारी निषेधाज्ञा के अनुसार, चिन्हित क्षेत्र और उसके ऊपर:

ड्रोन (Drones)

पैराग्लाइडिंग (Paragliding)

हॉट एयर बैलून (Hot Air Balloons)

का संचालन पूरी तरह से वर्जित रहेगा।

निषेधाज्ञा का समय:

अनुमंडल दंडाधिकारी द्वारा BNSS की धारा-163 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश जारी किया गया है। यह निषेधाज्ञा 26 फरवरी 2026 को प्रातः 06:00 बजे से लेकर रात्रि 10:00 बजे तक प्रभावी रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी।

आरंग की गुजरा पंचायत में बगावत, सरपंच के खिलाफ पंचों का मोर्चा

आरंग | रायपुर: रायपुर जिले के आरंग विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गुजरा में पंचायत राजनीति गरमा गई है। सरपंच बिंदू बंजारे के खिलाफ उपसरपंच सहित कई पंचों ने मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। पंचों ने अनुविभागीय अधिकारी (SDM) अभिलाषा पैकरा को ज्ञापन सौंपकर सरपंच के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने की औपचारिक मांग की है।

“सरपंच नहीं, भाई चला रहा है पंचायत”

पंचों का आरोप है कि पंचायत के कार्यों में पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो चुकी है। ज्ञापन में कहा गया है कि सरपंच के स्थान पर उनका भाई पंचायत के कामकाज को संचालित कर रहा है, जबकि वह गांव का निवासी भी नहीं है।

आरोप यह भी है कि सरपंच स्थायी रूप से अपने मायके बेमचा (महासमुंद) में रहती हैं और पंचायत मुख्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहतीं।

जरूरी दस्तावेजों के लिए भटक रहे ग्रामीण

सरपंच की अनुपस्थिति के कारण ग्रामीणों को जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और राशन कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेजों के लिए परेशान होना पड़ रहा है। पंचायत कार्यालय में समय पर कोई जिम्मेदार मौजूद नहीं रहता, जिससे आम लोगों के काम अटक रहे हैं।

फर्जी आहरण और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

पंचों ने एसडीएम के सामने भ्रष्टाचार से जुड़े कई ठोस आरोप भी रखे हैं—

₹6 लाख का काम गोपनीय रखा गया: स्कूल के प्ले ग्राउंड समतलीकरण के लिए स्वीकृत राशि की जानकारी पंचों से छिपाई गई।

पानी टैंकर में फर्जीवाड़ा: अक्टूबर 2025 में पानी टैंकर के नाम पर ₹40 हजार से अधिक की राशि निकाली गई, जबकि गांव में पानी सप्लाई नहीं हुई।

पुरानी मशीन, नया बिल: पुराने मोटर पंप को नया बताकर ₹32 हजार के भुगतान का आरोप।

सचिव से मिलीभगत और बदसलूकी का आरोप

झारखंड के हुनर का चीन में बजेगा डंका: 'कौशल उत्कर्ष' के विजेता बने राज्य के राजदूत; हर प्रखंड में खुलेंगे नए कौशल केंद्र

राँची, 30 जनवरी 2026: झारखंड के युवाओं के सपनों को नई उड़ान देते हुए श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा आयोजित ‘झारखंड कौशल उत्कर्ष’ प्रतियोगिता का भव्य समापन हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित श्रम मंत्री श्री संजय प्रसाद यादव ने 39 विजेताओं को सम्मानित किया और घोषणा की कि युवाओं को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित करने के लिए राज्य के सभी प्रखंडों में नए कौशल केंद्र खोले जाएंगे।

चीन में होने वाली वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता का रास्ता साफ

मंत्री श्री संजय प्रसाद यादव ने विजेताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ये युवा केवल पदक विजेता नहीं हैं, बल्कि चीन में होने वाली 'India Skills Competition 2026' के लिए झारखंड के राजदूत हैं। प्रतियोगिता के स्वर्ण और रजत पदक विजेता अब ओडिशा, कर्नाटक और तमिलनाडु में अगले राउंड के लिए अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। वहां सफल होने वाले प्रतिभागी विश्व स्तरीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

वैश्विक रोजगार के लिए प्रतिष्ठित संस्थानों से MoU

झारखंड के युवाओं को केवल प्रशिक्षण ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर प्लेसमेंट दिलाने के लिए विभाग ने कई प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन साझेदारियों से राज्य के प्रशिक्षित युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी के द्वार खुलेंगे।

बेहतर प्रबंधन के लिए राँची की टीम सम्मानित

समारोह के दौरान नवाचार और बेहतर प्रबंधन के लिए राँची के उप-श्रमायुक्त-सह-जिला कौशल पदाधिकारी और उनकी पूरी टीम को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। मंत्री ने JSDMS को युवाओं का 'सतत सारथी' बताते हुए कौशल विकास के क्षेत्र में झारखंड के स्वर्णिम भविष्य की नींव रखी।