मऊ से SDM अवधेश कुमार चौहान का तबादला

मऊ से SDM अवधेश कुमार चौहान का तबादला, वाराणसी रवाना होते समय कही भावुक बात
मऊ सदर के उपजिलाधिकारी (SDM) अवधेश कुमार चौहान का स्थानांतरण वाराणसी कर दिया गया है। कार्यभार छोड़ने के बाद वाराणसी रवाना होते समय उन्होंने मऊ के लोगों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि "मऊ में मिला स्नेह और सहयोग हमेशा याद रहेगा। यहां के लोगों का अपनापन मेरे लिए अविस्मरणीय है।" उन्होंने यह भी कहा कि जहां भी जिम्मेदारी मिलेगी, पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ जनता की सेवा करते रहेंगे।
तुलसीपुर के विकास में एक नया ऐतिहासिक अध्याय!
आज एक नए स्वर्णिम युग की शुरुआत हुई है!

बलरामपुर । अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है कि आज दिनांक 15 जुलाई 2026 को आदर्श नगर पंचायत तुलसीपुर के नए, भव्य और अत्याधुनिक भवन के निर्माण हेतु भूमि पूजन का कार्यक्रम पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ।
इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनते हुए, क्षेत्र के लोकप्रिय एवं यशस्वी विधायक  कैलाश नाथ शुक्ला जी एवं सम्मानित SDM राकेश कुमार जयंत  के कर-कमलों द्वारा विधि-विधान से भूमि पूजन का कार्य संपन्न कराया गया।
इस गरिमामयी अवसर पर मुख्य उपस्थिति:
अदनान फिरोज  (नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि) – जिनके कुशल नेतृत्व में तुलसीपुर विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
समस्त सम्मानित सभासद गण – जनता की आवाज़ और विकास के सच्चे सारथी।
नगर पंचायत के कर्मठ कर्मचारी बंधु – जिनकी मेहनत से हर संकल्प धरातल पर उतरता है।
"यह नया भवन सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि तुलसीपुर के उज्ज्वल भविष्य, सुदृढ़ व्यवस्था और जन-सेवा के नए संकल्प का प्रतीक बनेगा।"
तुलसीपुर की देवतुल्य जनता को इस ऐतिहासिक सौगात के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं! प्रगति का यह रथ अब रुकने वाला नहीं है।
भूमाफियाओं पर अवैध कब्जे और प्लॉटिंग का आरोप
राजस्व रिपोर्ट के आधार पर SDM ने थाने को भेजा FIR दर्ज करने का पत्र

प्रयागराज

Sb न्यूज से ब्यूरो चीफ विश्वनाथ प्रताप सिंह


शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत तहसील बारा के ग्राम जनवा में भूमिधरी जमीन पर अवैध कब्जे और जबरन प्लॉटिंग का मामला सामने आया है। राजस्व टीम के स्थलीय निरीक्षण में कब्जे की पुष्टि के बाद उपजिलाधिकारी बारा गणेश कनौजिया ने शंकरगढ़ थाने को आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए पत्र भेजा है। ग्राम ओझापट्टी मानपुर निवासी राजीव कुमार सिंह पुत्र हरिमोहन सिंह ने 25.06.2026 को शंकरगढ़ थाने में दी गई तहरीर में बताया कि उनकी भूमिधरी भूमि गाटा संख्या 630/1, 629, 628 ग्राम जनवा, तहसील बारा में स्थित है। आरोप है कि हिमांशु कुशवाहा पुत्र दिलीप कुशवाहा निवासी चाका, परगना अरेैल, तहसील करछना और उमाकान्त कुशवाहा पुत्र उदयराज कुशवाहा निवासी बसहिया, तहसील करछना सहित अन्य लोगों ने शोर-शराबे के बल पर उक्त भूमि पर जबरन कब्जा कर लिया है। पीड़ित का कहना है कि भूमाफियाओं ने जमीन पर गेट लगाकर काली रोड का निर्माण शुरू कर दिया है और प्लॉटिंग का कार्य भी किया जा रहा है। इस संबंध में राजस्व टीम और तहसील बारा द्वारा 26.06.2026 को किए गए स्थलीय निरीक्षण में अवैध कब्जे की पुष्टि हुई।उपजिलाधिकारी बारा ने 25.06.2026 के आदेश और राजस्व आख्या में उल्लेखित तथ्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा है। पीड़ित राजीव कुमार सिंह ने न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि वह प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। शंकरगढ़ थाना पुलिस का कहना है कि तहरीर और SDM के पत्र के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
कोटक महिंद्रा बैंक के चेयरमैन व शाखा प्रबंधक की गिरफ्तारी के आदेश

नया जन सुविधा केंद्र जहाँ दूध की रखवाली करेगी बिल्लियां


जौनपुर। जौनपुर कलेक्ट्रेट में बुधवार को डीएम सैमुअल पॉल एन. और एसपी कुंवर अनुपम सिंह ने सुबह 8 से रात 10 बजे तक चलने वाले ‘जन सुविधा केन्द्र’ का ढोल पीटकर शुभारंभ कर दिया। दावा बड़ा है - शिकायत दर्ज होते ही व्हाट्सएप से लेखपाल-कानूनगो को अलर्ट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई, रोस्टरवार कर्मचारी, पुलिस की डबल शिफ्ट। डीएम ने लापरवाह अफसरों का ‘काला चिट्ठा’ बनाने की धमकी भी दे डाली। पर सवाल खून जमा देने वाला है - क्या यह भी ‘ढाक के तीन पात’ साबित होगा? जनसुनवाई पोर्टल, CM हेल्पलाइन, PMO-PG, थाना-तहसील दिवस - हर ‘समाधान’ का मंच पहले भी बना।

नतीजा? पोर्टल पर ‘निस्तारित’ का ठप्पा और जमीन पर पीड़ित की लाश सड़ती रही। असली कोढ़ है ‘आरोपी ही जांच अधिकारी’ का नंगा खेल। जनता दर्शन में CM योगी के हाथ में दिया पत्र हो या PMO की गुहार - हर फरियाद घूमकर उसी थाने, तहसील, ब्लॉक में दफन हो जाती है, जहां अत्याचारी धनबली मठाधीशों का साम्राज्य है। जांच उसी भ्रष्ट CO, SDM, दरोगा, लेखपाल, BDO, BSA के हवाले, जिस पर रिश्वत और गुंडागर्दी के आरोप हैं। वह फर्जी रिपोर्ट ठोंकता है, उल्टा पीड़ित को झूठे केस में फंसा देता है, या ‘कागजी निस्तारण’ का ढोंग रच देता है।

इसके पीछे वही ‘इच्छाधारी मठाधीश’ हैं जो हर सरकार में पाला बदलकर सत्ता की मलाई चाटते हैं। सरकार किसी की हो, इनका दबदबा अमर है। स्थानीय दलाल जनप्रतिनिधियों को घूस खिलाकर हर फाइल खरीद ली जाती है। भ्रष्टाचार का रेट-कार्ड खुला है - गरीब का खून चूसना और सरकारी खजाना लूटना। नीचे सिपाही से ऊपर मंत्री तक हर टेबल का प्रतिशत फिक्स है। रात 10 बजे तक शिकायत लेने से क्या होगा, जब सुबह 10 बजे वही भेड़िया फाइल दबा देगा? मुख्यमंत्री जी, आप जनता दर्शन में सिर झुकाकर फरियाद सुनते हो, पर अगली सुबह वही पत्र उसी कसाई के पास पहुंच जाता है।

जब तक ‘क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट जांच’ अनिवार्य नहीं होगी, आरोपी अफसर को लात मारकर बाहर नहीं फेंका जाएगा, वीडियो रिकॉर्डिंग और पब्लिक ट्रैकिंग नहीं होगी - तब तक नया जन सुविधा केन्द्र भी पुराने पोर्टलों की तरह कागजी शेर ही रहेगा। पहले थाना-तहसील ब्लॉक का कोढ़ काटो, वरना ‘रामराज्य’ का ढोल पीटना बंद करो।
प्रयागराज बारा के जारी गड़ैया कला में 33/11 केवी विद्युत उपकेन्द्र की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, मामला उजागर

प्रयागराज, विश्वनाथ प्रताप सिंह

कौंधियारा उपखण्ड अधिकारी ने अधिकारियों को पत्र लिखकर कब्जा हटवाने और जमीन की पैमाइश कराने की मांग पर हल्का लेखपाल व आर आई मौजूद।

उपकेन्द्र के पीछे खाली भूमि पर अज्ञात लोगों द्वारा जबरन निर्माण किए जाने का शिकायती पत्र में उल्लेख। 

उपखण्ड अधिकारी ने अवैध कब्जा रोकने के साथ दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की प्रशासन से अपील की।

सदर से आए SDM और तहसीलदार की टीम भी बारा क्षेत्र में सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से नहीं बचा पा रही।

क्षेत्र में लगातार अतिक्रमण की शिकायतें, लेकिन बड़े भूमाफियाओं पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं।  

 कई गांवों में होलिका, तालाब और किसानों की जमीनों पर अवैध कब्जे के आरोप।  

एसडीएम गणेश कनौजिया और तहसीलदार अनिल कुमार पाठक की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे..।

 यह पूरा मामला जारी पावर हाउस का बताया जा रहा है जानकारी यह प्राप्त हो रही है कि पास में लगी जमीन अरुण सिंह की बताई जा रही है जहां पर उनके द्वारा जेसीबी से विद्युत विभाग की लगे कुछ बोल केवल इत्यादि सामान रखे हुए थे जिनको उनके द्वारा हटवा दिया गया है और उस जमीन में अपना कब्जा दखल किए हुए हैं जहां पर बिजली विभाग के एसडीओ द्वारा लिखित शिकायत की गई है जिसकी जांच हल्का लेखपाल आर आई को बुलाकर कराई जा रही है। देखना है अब यह है कि इस मामले में संबंधित अधिकारी कार्रवाई के नाम पर कितना करते हैं या उनके दबाव में आकर मामले को ठंडा बस्ती में डाल देते हैं।... सवाल यह खड़ा होता है कि क्या... उस दबंग किस्म व्यक्ति से क्या उस जमीन का कब्जा हटाया जा सकता है। फिलहाल अभी उस जमीन की बिना पैमाइश की पुष्टि नहीं की जा सकती हैं.

 यदि वह जमीन किस की थी तो उसमें पहले से कब्जा क्यों नहीं हुआ।

जब जमीन पर विद्युत विभाग का कब्जा था तो किसान द्वारा उस कब्जे को क्यों हटाया गया।

यदि किसान को लगता की जमीन मेरी हैं और मेरा कब्जा होना था तो राजस्व टीम क्यों नहीं बुलाई।

 अब बात आती है विद्युत विभाग की जब पहले से ही जमीन पर कब्जा था तो किसान द्वारा उस विद्युत विभाग की जमीन बिना पैमाइश कराये और बिना सूचना दिए हुए क्यों हटाया गया।

जब सरकारी व्यक्तियों अथवा थाना चौकी पावर हाउस सरकारी तालाब की जमीन सुरक्षित नहीं है तो आम पब्लिक कैसे सुरक्षित रह पाएंगे।

स्किलिंग से रोजगार तक: आधुनिक तकनीक के सहारे यूपी बनेगा देश का सबसे बड़ा स्किल हब
* गोरखपुर में ‘संवाद’ कार्यक्रम, सरकार-उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों ने तैयार किया रोजगार आधारित कौशल विकास का रोडमैप

गोरखपुर / लखनऊ। उत्तर प्रदेश को देश की “स्किल कैपिटल” बनाने की दिशा में सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। युवाओं को आधुनिक तकनीक, उद्योगों की जरूरतों और रोजगार आधारित प्रशिक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से मंगलवार को गोरखपुर के होटल रमाडा में “संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) द्वारा किया गया, जिसमें सरकार, उद्योग जगत, निजी आईटीआई संचालकों और प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने की। इस दौरान प्रमुख सचिव डॉ हरि ओम , मिशन निदेशक पुलकित खरे  तथा संयुक्त निदेशक मयंक गंगवार सहित कई अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे।

* “डिग्री नहीं, रोजगार देने वाला हुनर जरूरी”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि आज के समय में युवाओं को केवल डिग्री नहीं बल्कि रोजगार देने वाला कौशल उपलब्ध कराना सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण देकर युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने Tata Technologies के साथ एमओयू कर प्रदेश के 150 सरकारी आईटीआई को एआई, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, एडवांस डिजाइनिंग और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसी तकनीकों से लैस किया है। जल्द ही 62 और आईटीआई को इस परियोजना से जोड़ा जाएगा।

* “स्किल टू एम्प्लॉयमेंट” मॉडल पर सरकार का फोकस
मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण संस्थानों को केवल प्रमाणपत्र देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप दक्ष बनाना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार अब “स्किल टू एम्प्लॉयमेंट” मॉडल पर काम कर रही है, जिसमें प्रशिक्षण के साथ रोजगार सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 300 से अधिक सरकारी और 3000 से अधिक निजी आईटीआई संचालित हो रहे हैं। वहीं पिछले वर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को अप्रेंटिसशिप से जोड़ा गया, जो देश में सर्वाधिक है।

* तकनीक और उद्योगों से जुड़ रहा कौशल विकास
प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने कहा कि कौशल विकास अब केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव बन चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को ऐसा हुनर देना चाहती है जिससे वे स्थायी रोजगार प्राप्त कर सकें और बड़े शहरों की ओर पलायन कम हो।
मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत “प्रोजेक्ट प्रवीण” के जरिए स्कूली स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के 2500 से अधिक स्कूल इस योजना से जुड़ चुके हैं और लगभग ढाई लाख विद्यार्थियों का नामांकन किया गया है।
उन्होंने बताया कि “कौशल दोस्त” AI चैटबॉट, “कौशल दर्पण” प्लेटफॉर्म और “कौशल दिशा” ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म जैसी डिजिटल पहल के जरिए युवाओं को आधुनिक प्रशिक्षण और रोजगार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

* उत्कृष्ट प्रशिक्षार्थियों को किया सम्मानित
कार्यक्रम के अंत में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षार्थियों और प्रशिक्षकों को मंत्री कपिल देव अग्रवाल द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
आर.एस.ए.सी. में आकाशीय बिजली पर उच्च स्तरीय मंथन, पूर्वानुमान और बचाव के उपायों पर जोर

* इसरो, एनडीएमए और एसडीएमए के विशेषज्ञों ने साझा किए सुझाव, ग्राउंड सेंसर नेटवर्क विस्तार पर चर्चा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत संचालित रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (आर.एस.ए.सी.), लखनऊ में आकाशीय बिजली (लाइटनिंग) से बचाव एवं उसके प्रभावी न्यूनीकरण के उपायों पर उच्च स्तरीय वैज्ञानिक विचार-विमर्श आयोजित किया गया। कार्यक्रम में इसरो, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA), स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (SDMA) सहित विभिन्न संस्थाओं के विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियों के माध्यम से आकाशीय बिजली के वैज्ञानिक एवं तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। इसरो के वैज्ञानिकों ने ग्राउंड सेंसर के जरिए डेटा संग्रहण और उसे ‘भुवन पोर्टल’ पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जानकारी दी। साथ ही प्रदेश में ग्राउंड सेंसर नेटवर्क के विस्तार की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
एनडीएमए के विशेषज्ञों ने आकाशीय बिजली से जुड़े सामुदायिक मूल्यांकन, जनजागरूकता, क्षमता विकास और प्रबंधन कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने प्रदेश में आकाशीय बिजली से निपटने के लिए संस्थागत और ऑपरेशनल फ्रेमवर्क की रूपरेखा प्रस्तुत की।
बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि आकाशीय बिजली के पूर्वानुमान से जुड़ी सटीक जानकारी को एकीकृत प्लेटफॉर्म के माध्यम से आम लोगों तक सरल और सुलभ रूप में पहुंचाया जाए। इसके साथ ही विभिन्न स्टेकहोल्डर्स ने जोखिम वाले क्षेत्रों (हॉटस्पॉट्स) की पहचान और बचाव उपायों पर अपने सुझाव साझा किए।
इस अवसर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और आर.एस.ए.सी. के वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक मौजूद रहे।
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तालाब पर ताज, कानून पर लाज!’—अमिलिया में जिंदा दफ्न हुआ जलस्रोत, बेनकाब हुआ पूरा सिस्टम

विश्वनाथ प्रताप सिंह

बारा तहसील बना मूक दर्शक’—तहसीलदार से SDM तक खामोशी, कब्जेदारों की बल्ले-बल्ले!

प्रयागराज। अमिलिया,प्रयागराज। यह सिर्फ खबर नहीं—यह जमीनी हकीकत का वह आईना है जिसमें पूरा सिस्टम बेनकाब खड़ा है। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत अमिलिया तरहार गांव में सरकारी तालाब अब इतिहास बन चुका है। जहां कभी पानी की लहरें थीं, वहां आज मिट्टी, मलबा और पक्के निर्माण खड़े हैं—और यह सब प्रशासन की खुली आंखों के सामने हुआ।

तालाब जिंदा था… उसे मार दिया गया!’—कागजों में जल, जमीन पर जंगलराज

राजस्व रिकॉर्ड चीख-चीखकर बता रहे हैं कि आराजी संख्या 299 और 307 आज भी पोखरी तालाब हैं। लेकिन मौके पर हकीकत ऐसी है कि तालाब को पूरी तरह पाटकर उस पर कब्जा कर लिया गया है। यह कोई साधारण अतिक्रमण नहीं—यह जलस्रोत की सुनियोजित हत्या है।

मीडिया ने मचाया शोर, सिस्टम रहा ठंडा’—हफ्तों से उठ रही आवाज, असर शून्य

सोशल मीडिया, अखबार, स्थानीय पत्रकार—हर प्लेटफॉर्म से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। अधिकारियों को बार-बार चेताया गया, खबरें छपीं, तस्वीरें सामने आईं लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात। अब गांव में एक ही बात गूंज रही है—“दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही जल चुकी है!

धारा 67 दम तोड़ चुकी?’—आदेश जारी, कब्जा बरकरार

2020-21 में धारा 67 के तहत बेदखली और क्षतिपूर्ति के आदेश पास हुए। यानी कानून ने अपनी भूमिका निभाई—लेकिन उसे लागू करने वालों ने हथियार डाल दिए।

आदेश फाइलों में कैद हैं, और जमीन पर कब्जेदार आज भी राज कर रहे हैं।

कोर्ट भी बेबस न्यायिक निर्देशों की खुली अवहेलना न्यायालय ने साफ कहा—कार्रवाई करो। लेकिन बारा तहसील का सिस्टम मानो सुनने को तैयार ही नहीं। यह सवाल अब जोर पकड़ रहा है—क्या कुछ अधिकारी खुद को कोर्ट से भी ऊपर मान बैठे हैं?

‘पूरा महकमा कटघरे में’—तहसीलदार, नायब, कानूनगो, लेखपाल सब पर सवाल

इस पूरे प्रकरण में: तहसीलदार,

नायब तहसीलदार,कानूनगो

संबंधित लेखपाल, और उपजिलाधिकारी (SDM) सभी की भूमिका सवालों के घेरे में है। आखिर किसकी जिम्मेदारी थी? किसने आंखें मूंदी? और किसके इशारे पर यह सब होने दिया गया?

तालाब नहीं, पूरा तंत्र पाटा गया!’—जिंदा हकीकत से इनकार नहीं

यह कहना गलत नहीं होगा कि अमिलिया में सिर्फ तालाब नहीं पाटा गया—बल्कि कानून, पर्यावरण और प्रशासनिक जवाबदेही—तीनों को एक साथ दफ्न कर दिया गया है। पूरा तालाब “बक्सा” कर बंद कर दिया गया, और जिम्मेदार अफसर मूकदर्शक बने रहे।

इतना नमक कि निगलना मुश्किल’—गांव में उबल रहा गुस्सा

ग्रामीणों का कहना है—अगर दाल में नमक ज्यादा हो जाए तो वह निगली नहीं जाती, और यहां तो हालात ऐसे हैं कि पूरी व्यवस्था ही बेस्वाद हो चुकी है। भरोसा टूट चुका है।

अब जिलाधिकारी ही आखिरी उम्मीद’—जिलाधिकारी से सीधे हस्तक्षेप की मांग

सूत्र साफ संकेत दे रहे हैं कि बारा तहसील स्तर पर यह मामला सुलझाने की क्षमता या इच्छाशक्ति दोनों खत्म हो चुकी हैं। अब ग्रामीणों की नजरें सीधे जिलाधिकारी प्रयागराज पर टिक गई हैं। मांग है कि: पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो। जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया जाए और तत्काल प्रभाव से कब्जा हटाया जाए

सीएम का फरमान बनाम जमीनी सच्चाई बड़ा विरोधाभास

उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ का साफ संदेश है—भू-माफिया किसी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे। लेकिन अमिलिया में पूरा तालाब ही बक्सा कर कब्जा लिया गया, और प्रशासन चुप है। यह जमीनी हकीकत सरकार के दावों पर भी सवाल खड़ा कर रही है।

आज तालाब गया, कल पानी जाएगा’—भविष्य खतरे में

यह सिर्फ जमीन नहीं यह आने वाली पीढ़ियों का पानी है। अगर आज भी नहीं चेते तो कल प्यास ही विरासत बनेगी।

आखिरी सवाल, सबसे बड़ा सवाल—कानून जिंदा है या मर चुका है।

अमिलिया अब सिर्फ एक गांव नहीं यह सिस्टम की साख का रणक्षेत्र बन चुका है। अब देखना है—कानून की जीत होती है या दबंगई फिर एक बार ताज पहन लेती है।

मऊ से SDM अवधेश कुमार चौहान का तबादला

मऊ से SDM अवधेश कुमार चौहान का तबादला, वाराणसी रवाना होते समय कही भावुक बात
मऊ सदर के उपजिलाधिकारी (SDM) अवधेश कुमार चौहान का स्थानांतरण वाराणसी कर दिया गया है। कार्यभार छोड़ने के बाद वाराणसी रवाना होते समय उन्होंने मऊ के लोगों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि "मऊ में मिला स्नेह और सहयोग हमेशा याद रहेगा। यहां के लोगों का अपनापन मेरे लिए अविस्मरणीय है।" उन्होंने यह भी कहा कि जहां भी जिम्मेदारी मिलेगी, पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ जनता की सेवा करते रहेंगे।
तुलसीपुर के विकास में एक नया ऐतिहासिक अध्याय!
आज एक नए स्वर्णिम युग की शुरुआत हुई है!

बलरामपुर । अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है कि आज दिनांक 15 जुलाई 2026 को आदर्श नगर पंचायत तुलसीपुर के नए, भव्य और अत्याधुनिक भवन के निर्माण हेतु भूमि पूजन का कार्यक्रम पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ।
इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनते हुए, क्षेत्र के लोकप्रिय एवं यशस्वी विधायक  कैलाश नाथ शुक्ला जी एवं सम्मानित SDM राकेश कुमार जयंत  के कर-कमलों द्वारा विधि-विधान से भूमि पूजन का कार्य संपन्न कराया गया।
इस गरिमामयी अवसर पर मुख्य उपस्थिति:
अदनान फिरोज  (नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि) – जिनके कुशल नेतृत्व में तुलसीपुर विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
समस्त सम्मानित सभासद गण – जनता की आवाज़ और विकास के सच्चे सारथी।
नगर पंचायत के कर्मठ कर्मचारी बंधु – जिनकी मेहनत से हर संकल्प धरातल पर उतरता है।
"यह नया भवन सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि तुलसीपुर के उज्ज्वल भविष्य, सुदृढ़ व्यवस्था और जन-सेवा के नए संकल्प का प्रतीक बनेगा।"
तुलसीपुर की देवतुल्य जनता को इस ऐतिहासिक सौगात के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं! प्रगति का यह रथ अब रुकने वाला नहीं है।
भूमाफियाओं पर अवैध कब्जे और प्लॉटिंग का आरोप
राजस्व रिपोर्ट के आधार पर SDM ने थाने को भेजा FIR दर्ज करने का पत्र

प्रयागराज

Sb न्यूज से ब्यूरो चीफ विश्वनाथ प्रताप सिंह


शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत तहसील बारा के ग्राम जनवा में भूमिधरी जमीन पर अवैध कब्जे और जबरन प्लॉटिंग का मामला सामने आया है। राजस्व टीम के स्थलीय निरीक्षण में कब्जे की पुष्टि के बाद उपजिलाधिकारी बारा गणेश कनौजिया ने शंकरगढ़ थाने को आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए पत्र भेजा है। ग्राम ओझापट्टी मानपुर निवासी राजीव कुमार सिंह पुत्र हरिमोहन सिंह ने 25.06.2026 को शंकरगढ़ थाने में दी गई तहरीर में बताया कि उनकी भूमिधरी भूमि गाटा संख्या 630/1, 629, 628 ग्राम जनवा, तहसील बारा में स्थित है। आरोप है कि हिमांशु कुशवाहा पुत्र दिलीप कुशवाहा निवासी चाका, परगना अरेैल, तहसील करछना और उमाकान्त कुशवाहा पुत्र उदयराज कुशवाहा निवासी बसहिया, तहसील करछना सहित अन्य लोगों ने शोर-शराबे के बल पर उक्त भूमि पर जबरन कब्जा कर लिया है। पीड़ित का कहना है कि भूमाफियाओं ने जमीन पर गेट लगाकर काली रोड का निर्माण शुरू कर दिया है और प्लॉटिंग का कार्य भी किया जा रहा है। इस संबंध में राजस्व टीम और तहसील बारा द्वारा 26.06.2026 को किए गए स्थलीय निरीक्षण में अवैध कब्जे की पुष्टि हुई।उपजिलाधिकारी बारा ने 25.06.2026 के आदेश और राजस्व आख्या में उल्लेखित तथ्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा है। पीड़ित राजीव कुमार सिंह ने न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि वह प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। शंकरगढ़ थाना पुलिस का कहना है कि तहरीर और SDM के पत्र के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
कोटक महिंद्रा बैंक के चेयरमैन व शाखा प्रबंधक की गिरफ्तारी के आदेश

नया जन सुविधा केंद्र जहाँ दूध की रखवाली करेगी बिल्लियां


जौनपुर। जौनपुर कलेक्ट्रेट में बुधवार को डीएम सैमुअल पॉल एन. और एसपी कुंवर अनुपम सिंह ने सुबह 8 से रात 10 बजे तक चलने वाले ‘जन सुविधा केन्द्र’ का ढोल पीटकर शुभारंभ कर दिया। दावा बड़ा है - शिकायत दर्ज होते ही व्हाट्सएप से लेखपाल-कानूनगो को अलर्ट, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई, रोस्टरवार कर्मचारी, पुलिस की डबल शिफ्ट। डीएम ने लापरवाह अफसरों का ‘काला चिट्ठा’ बनाने की धमकी भी दे डाली। पर सवाल खून जमा देने वाला है - क्या यह भी ‘ढाक के तीन पात’ साबित होगा? जनसुनवाई पोर्टल, CM हेल्पलाइन, PMO-PG, थाना-तहसील दिवस - हर ‘समाधान’ का मंच पहले भी बना।

नतीजा? पोर्टल पर ‘निस्तारित’ का ठप्पा और जमीन पर पीड़ित की लाश सड़ती रही। असली कोढ़ है ‘आरोपी ही जांच अधिकारी’ का नंगा खेल। जनता दर्शन में CM योगी के हाथ में दिया पत्र हो या PMO की गुहार - हर फरियाद घूमकर उसी थाने, तहसील, ब्लॉक में दफन हो जाती है, जहां अत्याचारी धनबली मठाधीशों का साम्राज्य है। जांच उसी भ्रष्ट CO, SDM, दरोगा, लेखपाल, BDO, BSA के हवाले, जिस पर रिश्वत और गुंडागर्दी के आरोप हैं। वह फर्जी रिपोर्ट ठोंकता है, उल्टा पीड़ित को झूठे केस में फंसा देता है, या ‘कागजी निस्तारण’ का ढोंग रच देता है।

इसके पीछे वही ‘इच्छाधारी मठाधीश’ हैं जो हर सरकार में पाला बदलकर सत्ता की मलाई चाटते हैं। सरकार किसी की हो, इनका दबदबा अमर है। स्थानीय दलाल जनप्रतिनिधियों को घूस खिलाकर हर फाइल खरीद ली जाती है। भ्रष्टाचार का रेट-कार्ड खुला है - गरीब का खून चूसना और सरकारी खजाना लूटना। नीचे सिपाही से ऊपर मंत्री तक हर टेबल का प्रतिशत फिक्स है। रात 10 बजे तक शिकायत लेने से क्या होगा, जब सुबह 10 बजे वही भेड़िया फाइल दबा देगा? मुख्यमंत्री जी, आप जनता दर्शन में सिर झुकाकर फरियाद सुनते हो, पर अगली सुबह वही पत्र उसी कसाई के पास पहुंच जाता है।

जब तक ‘क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट जांच’ अनिवार्य नहीं होगी, आरोपी अफसर को लात मारकर बाहर नहीं फेंका जाएगा, वीडियो रिकॉर्डिंग और पब्लिक ट्रैकिंग नहीं होगी - तब तक नया जन सुविधा केन्द्र भी पुराने पोर्टलों की तरह कागजी शेर ही रहेगा। पहले थाना-तहसील ब्लॉक का कोढ़ काटो, वरना ‘रामराज्य’ का ढोल पीटना बंद करो।
प्रयागराज बारा के जारी गड़ैया कला में 33/11 केवी विद्युत उपकेन्द्र की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, मामला उजागर

प्रयागराज, विश्वनाथ प्रताप सिंह

कौंधियारा उपखण्ड अधिकारी ने अधिकारियों को पत्र लिखकर कब्जा हटवाने और जमीन की पैमाइश कराने की मांग पर हल्का लेखपाल व आर आई मौजूद।

उपकेन्द्र के पीछे खाली भूमि पर अज्ञात लोगों द्वारा जबरन निर्माण किए जाने का शिकायती पत्र में उल्लेख। 

उपखण्ड अधिकारी ने अवैध कब्जा रोकने के साथ दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की प्रशासन से अपील की।

सदर से आए SDM और तहसीलदार की टीम भी बारा क्षेत्र में सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से नहीं बचा पा रही।

क्षेत्र में लगातार अतिक्रमण की शिकायतें, लेकिन बड़े भूमाफियाओं पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं।  

 कई गांवों में होलिका, तालाब और किसानों की जमीनों पर अवैध कब्जे के आरोप।  

एसडीएम गणेश कनौजिया और तहसीलदार अनिल कुमार पाठक की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे..।

 यह पूरा मामला जारी पावर हाउस का बताया जा रहा है जानकारी यह प्राप्त हो रही है कि पास में लगी जमीन अरुण सिंह की बताई जा रही है जहां पर उनके द्वारा जेसीबी से विद्युत विभाग की लगे कुछ बोल केवल इत्यादि सामान रखे हुए थे जिनको उनके द्वारा हटवा दिया गया है और उस जमीन में अपना कब्जा दखल किए हुए हैं जहां पर बिजली विभाग के एसडीओ द्वारा लिखित शिकायत की गई है जिसकी जांच हल्का लेखपाल आर आई को बुलाकर कराई जा रही है। देखना है अब यह है कि इस मामले में संबंधित अधिकारी कार्रवाई के नाम पर कितना करते हैं या उनके दबाव में आकर मामले को ठंडा बस्ती में डाल देते हैं।... सवाल यह खड़ा होता है कि क्या... उस दबंग किस्म व्यक्ति से क्या उस जमीन का कब्जा हटाया जा सकता है। फिलहाल अभी उस जमीन की बिना पैमाइश की पुष्टि नहीं की जा सकती हैं.

 यदि वह जमीन किस की थी तो उसमें पहले से कब्जा क्यों नहीं हुआ।

जब जमीन पर विद्युत विभाग का कब्जा था तो किसान द्वारा उस कब्जे को क्यों हटाया गया।

यदि किसान को लगता की जमीन मेरी हैं और मेरा कब्जा होना था तो राजस्व टीम क्यों नहीं बुलाई।

 अब बात आती है विद्युत विभाग की जब पहले से ही जमीन पर कब्जा था तो किसान द्वारा उस विद्युत विभाग की जमीन बिना पैमाइश कराये और बिना सूचना दिए हुए क्यों हटाया गया।

जब सरकारी व्यक्तियों अथवा थाना चौकी पावर हाउस सरकारी तालाब की जमीन सुरक्षित नहीं है तो आम पब्लिक कैसे सुरक्षित रह पाएंगे।

स्किलिंग से रोजगार तक: आधुनिक तकनीक के सहारे यूपी बनेगा देश का सबसे बड़ा स्किल हब
* गोरखपुर में ‘संवाद’ कार्यक्रम, सरकार-उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों ने तैयार किया रोजगार आधारित कौशल विकास का रोडमैप

गोरखपुर / लखनऊ। उत्तर प्रदेश को देश की “स्किल कैपिटल” बनाने की दिशा में सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। युवाओं को आधुनिक तकनीक, उद्योगों की जरूरतों और रोजगार आधारित प्रशिक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से मंगलवार को गोरखपुर के होटल रमाडा में “संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) द्वारा किया गया, जिसमें सरकार, उद्योग जगत, निजी आईटीआई संचालकों और प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने की। इस दौरान प्रमुख सचिव डॉ हरि ओम , मिशन निदेशक पुलकित खरे  तथा संयुक्त निदेशक मयंक गंगवार सहित कई अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे।

* “डिग्री नहीं, रोजगार देने वाला हुनर जरूरी”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि आज के समय में युवाओं को केवल डिग्री नहीं बल्कि रोजगार देने वाला कौशल उपलब्ध कराना सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण देकर युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने Tata Technologies के साथ एमओयू कर प्रदेश के 150 सरकारी आईटीआई को एआई, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, एडवांस डिजाइनिंग और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसी तकनीकों से लैस किया है। जल्द ही 62 और आईटीआई को इस परियोजना से जोड़ा जाएगा।

* “स्किल टू एम्प्लॉयमेंट” मॉडल पर सरकार का फोकस
मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण संस्थानों को केवल प्रमाणपत्र देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप दक्ष बनाना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार अब “स्किल टू एम्प्लॉयमेंट” मॉडल पर काम कर रही है, जिसमें प्रशिक्षण के साथ रोजगार सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 300 से अधिक सरकारी और 3000 से अधिक निजी आईटीआई संचालित हो रहे हैं। वहीं पिछले वर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को अप्रेंटिसशिप से जोड़ा गया, जो देश में सर्वाधिक है।

* तकनीक और उद्योगों से जुड़ रहा कौशल विकास
प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने कहा कि कौशल विकास अब केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव बन चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को ऐसा हुनर देना चाहती है जिससे वे स्थायी रोजगार प्राप्त कर सकें और बड़े शहरों की ओर पलायन कम हो।
मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत “प्रोजेक्ट प्रवीण” के जरिए स्कूली स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के 2500 से अधिक स्कूल इस योजना से जुड़ चुके हैं और लगभग ढाई लाख विद्यार्थियों का नामांकन किया गया है।
उन्होंने बताया कि “कौशल दोस्त” AI चैटबॉट, “कौशल दर्पण” प्लेटफॉर्म और “कौशल दिशा” ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म जैसी डिजिटल पहल के जरिए युवाओं को आधुनिक प्रशिक्षण और रोजगार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

* उत्कृष्ट प्रशिक्षार्थियों को किया सम्मानित
कार्यक्रम के अंत में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षार्थियों और प्रशिक्षकों को मंत्री कपिल देव अग्रवाल द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
आर.एस.ए.सी. में आकाशीय बिजली पर उच्च स्तरीय मंथन, पूर्वानुमान और बचाव के उपायों पर जोर

* इसरो, एनडीएमए और एसडीएमए के विशेषज्ञों ने साझा किए सुझाव, ग्राउंड सेंसर नेटवर्क विस्तार पर चर्चा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत संचालित रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (आर.एस.ए.सी.), लखनऊ में आकाशीय बिजली (लाइटनिंग) से बचाव एवं उसके प्रभावी न्यूनीकरण के उपायों पर उच्च स्तरीय वैज्ञानिक विचार-विमर्श आयोजित किया गया। कार्यक्रम में इसरो, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA), स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (SDMA) सहित विभिन्न संस्थाओं के विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने प्रस्तुतियों के माध्यम से आकाशीय बिजली के वैज्ञानिक एवं तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। इसरो के वैज्ञानिकों ने ग्राउंड सेंसर के जरिए डेटा संग्रहण और उसे ‘भुवन पोर्टल’ पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जानकारी दी। साथ ही प्रदेश में ग्राउंड सेंसर नेटवर्क के विस्तार की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
एनडीएमए के विशेषज्ञों ने आकाशीय बिजली से जुड़े सामुदायिक मूल्यांकन, जनजागरूकता, क्षमता विकास और प्रबंधन कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने प्रदेश में आकाशीय बिजली से निपटने के लिए संस्थागत और ऑपरेशनल फ्रेमवर्क की रूपरेखा प्रस्तुत की।
बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि आकाशीय बिजली के पूर्वानुमान से जुड़ी सटीक जानकारी को एकीकृत प्लेटफॉर्म के माध्यम से आम लोगों तक सरल और सुलभ रूप में पहुंचाया जाए। इसके साथ ही विभिन्न स्टेकहोल्डर्स ने जोखिम वाले क्षेत्रों (हॉटस्पॉट्स) की पहचान और बचाव उपायों पर अपने सुझाव साझा किए।
इस अवसर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और आर.एस.ए.सी. के वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक मौजूद रहे।
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तालाब पर ताज, कानून पर लाज!’—अमिलिया में जिंदा दफ्न हुआ जलस्रोत, बेनकाब हुआ पूरा सिस्टम

विश्वनाथ प्रताप सिंह

बारा तहसील बना मूक दर्शक’—तहसीलदार से SDM तक खामोशी, कब्जेदारों की बल्ले-बल्ले!

प्रयागराज। अमिलिया,प्रयागराज। यह सिर्फ खबर नहीं—यह जमीनी हकीकत का वह आईना है जिसमें पूरा सिस्टम बेनकाब खड़ा है। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत अमिलिया तरहार गांव में सरकारी तालाब अब इतिहास बन चुका है। जहां कभी पानी की लहरें थीं, वहां आज मिट्टी, मलबा और पक्के निर्माण खड़े हैं—और यह सब प्रशासन की खुली आंखों के सामने हुआ।

तालाब जिंदा था… उसे मार दिया गया!’—कागजों में जल, जमीन पर जंगलराज

राजस्व रिकॉर्ड चीख-चीखकर बता रहे हैं कि आराजी संख्या 299 और 307 आज भी पोखरी तालाब हैं। लेकिन मौके पर हकीकत ऐसी है कि तालाब को पूरी तरह पाटकर उस पर कब्जा कर लिया गया है। यह कोई साधारण अतिक्रमण नहीं—यह जलस्रोत की सुनियोजित हत्या है।

मीडिया ने मचाया शोर, सिस्टम रहा ठंडा’—हफ्तों से उठ रही आवाज, असर शून्य

सोशल मीडिया, अखबार, स्थानीय पत्रकार—हर प्लेटफॉर्म से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। अधिकारियों को बार-बार चेताया गया, खबरें छपीं, तस्वीरें सामने आईं लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात। अब गांव में एक ही बात गूंज रही है—“दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही जल चुकी है!

धारा 67 दम तोड़ चुकी?’—आदेश जारी, कब्जा बरकरार

2020-21 में धारा 67 के तहत बेदखली और क्षतिपूर्ति के आदेश पास हुए। यानी कानून ने अपनी भूमिका निभाई—लेकिन उसे लागू करने वालों ने हथियार डाल दिए।

आदेश फाइलों में कैद हैं, और जमीन पर कब्जेदार आज भी राज कर रहे हैं।

कोर्ट भी बेबस न्यायिक निर्देशों की खुली अवहेलना न्यायालय ने साफ कहा—कार्रवाई करो। लेकिन बारा तहसील का सिस्टम मानो सुनने को तैयार ही नहीं। यह सवाल अब जोर पकड़ रहा है—क्या कुछ अधिकारी खुद को कोर्ट से भी ऊपर मान बैठे हैं?

‘पूरा महकमा कटघरे में’—तहसीलदार, नायब, कानूनगो, लेखपाल सब पर सवाल

इस पूरे प्रकरण में: तहसीलदार,

नायब तहसीलदार,कानूनगो

संबंधित लेखपाल, और उपजिलाधिकारी (SDM) सभी की भूमिका सवालों के घेरे में है। आखिर किसकी जिम्मेदारी थी? किसने आंखें मूंदी? और किसके इशारे पर यह सब होने दिया गया?

तालाब नहीं, पूरा तंत्र पाटा गया!’—जिंदा हकीकत से इनकार नहीं

यह कहना गलत नहीं होगा कि अमिलिया में सिर्फ तालाब नहीं पाटा गया—बल्कि कानून, पर्यावरण और प्रशासनिक जवाबदेही—तीनों को एक साथ दफ्न कर दिया गया है। पूरा तालाब “बक्सा” कर बंद कर दिया गया, और जिम्मेदार अफसर मूकदर्शक बने रहे।

इतना नमक कि निगलना मुश्किल’—गांव में उबल रहा गुस्सा

ग्रामीणों का कहना है—अगर दाल में नमक ज्यादा हो जाए तो वह निगली नहीं जाती, और यहां तो हालात ऐसे हैं कि पूरी व्यवस्था ही बेस्वाद हो चुकी है। भरोसा टूट चुका है।

अब जिलाधिकारी ही आखिरी उम्मीद’—जिलाधिकारी से सीधे हस्तक्षेप की मांग

सूत्र साफ संकेत दे रहे हैं कि बारा तहसील स्तर पर यह मामला सुलझाने की क्षमता या इच्छाशक्ति दोनों खत्म हो चुकी हैं। अब ग्रामीणों की नजरें सीधे जिलाधिकारी प्रयागराज पर टिक गई हैं। मांग है कि: पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो। जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया जाए और तत्काल प्रभाव से कब्जा हटाया जाए

सीएम का फरमान बनाम जमीनी सच्चाई बड़ा विरोधाभास

उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ का साफ संदेश है—भू-माफिया किसी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे। लेकिन अमिलिया में पूरा तालाब ही बक्सा कर कब्जा लिया गया, और प्रशासन चुप है। यह जमीनी हकीकत सरकार के दावों पर भी सवाल खड़ा कर रही है।

आज तालाब गया, कल पानी जाएगा’—भविष्य खतरे में

यह सिर्फ जमीन नहीं यह आने वाली पीढ़ियों का पानी है। अगर आज भी नहीं चेते तो कल प्यास ही विरासत बनेगी।

आखिरी सवाल, सबसे बड़ा सवाल—कानून जिंदा है या मर चुका है।

अमिलिया अब सिर्फ एक गांव नहीं यह सिस्टम की साख का रणक्षेत्र बन चुका है। अब देखना है—कानून की जीत होती है या दबंगई फिर एक बार ताज पहन लेती है।