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भोपाल में होगी आरएसएस की समन्वय बैठक, भाजपा के वरिष्ठ नेता भी होंगे शामिल

 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को RSS की समन्वय बैठक होने जा रही है. इस बैठक में RSS एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता सम्मिलित होंगे. यह मध्य प्रदेश में नियमित रूप से होने वाली बैठक है. यूपी में सत्ता एवं संगठन के बीच मचे घमासान की खबरों के बीच भोपाल में आज RSS एवं भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की बैठक रखी गई है. इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश एवं क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल सम्मिलित होंगे. 

वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा एवं प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा भी बैठक में भाग लेंगे. जबलपुर में इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव के चलते मुख्यमंत्री मोहन यादव इसमें सम्मिलित नहीं होंगे मगर शाम को जबलपुर से वापस आने पर वह सम्मिलित हो सकते हैं. बैठक में भारतीय मजदूर संघ के 70वें स्थापना दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम की तैयारियों पर भी चर्चा होगी. इससे पहले लोकसभा चुनाव 2024 में निराशाजनक प्रदर्शन की समीक्षा सहित तमाम मुद्दों को लेकर RSS एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बड़े नेताओं के बीच भी बैठक होनी थी. मगर बैठक से एक दिन पहले ही इसे स्थगित कर दिया गया. यह बैठक शनिवार एवं रविवार को प्रस्तावित थी. 

हालांकि, इस बैठक के बारे में कोई औपचारिक खबर नहीं दी गई थी. मगर बताया जा रहा था कि ये बैठक RSS के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार की उपस्थिति में होनी थी. जानकारी के मुताबिक, अरुण कुमार के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, यूपी भाजपा अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी एवं संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की बैठक होनी थी. हालांकि, ये बैठक क्यों स्थगित की गई इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.

Delhincr

Jul 12 2024, 16:00

आज का इतिहास: महात्मा गांधी की हत्या के चलते RSS पर लगा प्रतिबंध सशर्त लिया गया था वापस, जानिए 12 जुलाई की महत्वपूर्ण घटनाएं


नयी दिल्ली : देश में 12 जुलाई की तारीख कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए याद किया जाएगा। इसी दिन नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या के आरोप के चलते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर लगा प्रतिबंध 12 जुलाई 1949 को सशर्त हटा लिया गया था।

12 जुलाई का दिन कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी है। जनवरी 1948 में नाथुराम गोडसे द्वारा महात्मा गांधी की हत्या किये जाने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर लगाये गये प्रतिबंध को 12 जुलाई 1949 के दिन ही सशर्त हटा लिया गया था।

देश दुनिया के इतिहास में 12 जुलाई की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार लेखा जोखा इस प्रकार है:-

1290 - इंग्लैंड के सम्राट एडवर्ड प्रथम के आदेश पर यहूदियों को बाहर निकाला गया।

1346 - लक्जमबर्ग के चार्ल्स चतुर्थ को रोमन साम्राज्य का शासक नियुक्त किया गया।

1673 - नीदरलैंड और डेनमार्क के बीच रक्षा संधि पर हस्ताक्षर हुए।

1690 - विलियम ऑफ ऑरेंज के नेतृत्व में प्रोटेस्टेंटों ने रोमन कैथोलिक सेना को पराजित किया।

1801 - अल्जीसिरास की लड़ाई में ब्रिटेन ने फ्रांस और स्पेन को पराजित किया।

1823 - भारत में निर्मित प्रथम वाष्प इंजन युक्त जहाज ‘डायना’ का कलकत्ता (अब कोलकाता) में जलावतरण।

1862 - अमेरिकी कांग्रेस ने मेडल ऑफ ऑनर को प्राधिकृत किया।

1912 - ‘क्वीन एलिजाबेथ’

 अमेरिका में प्रदर्शित होने वाली पहली विदेशी फिल्म बनी।

1918 - टोकायाम की खाड़ी में जापानी युद्धपोत में विस्फोट में 500 लोगों की मौत।

1935 - बेल्जियम ने तत्कालीन सोवियत संघ को मान्यता दी।

1949 - महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर लगाए गए प्रतिबंध को सशर्त हटाया गया।

1957 - अमेरिकी सर्जन लेरोय इ बर्नी ने बताया कि धूम्रपान और फेफड़े के कैंसर में सीधा संबंध होता है।

1960 - भागलपुर और रांची यूनिवर्सिटी की स्थापना।

1970 - अलकनंदा नदी में आई भीषण बाढ़ ने 600 लोगों की जान ली।

1990 : प्रसिद्ध सोवियत नेता और रूसी संसद के अध्यक्ष बोरिस येल्तसिन ने सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी से इस्तीफा दिया।

1994 - फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन के अध्यक्ष यासर अराफात 27 वर्षों का निर्वासित जीवन गुजारने के बाद गाजा पट्टी आये।

1997 : नोबल पुरस्कार से सम्मानित मलाला युसुफजई का पाकिस्तान में जन्म।

1998 : फ्रांस और ब्राजील के बीच हुए फुटबॉल विश्वकप के फाइनल को कुल 1.7 अरब लोगों ने देखा।

2001 : अगरतला से ढाका के बीच ‘मैत्री’ बस सेवा की शुरुआत।

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Jul 10 2024, 20:00

आरएसएस ने “धार्मिक असंतुलन” को लेकर जताई चिंता, बताई जनसंख्या नियंत्रण कानून की क्यों है जरूरत

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने वीकली मैगजीन में राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की मांग की है। विश्‍व जनसंख्‍या दिवस पर आरएसएस से जुड़ी पत्रिका ने देश के कुछ इलाकों में मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ 'जनसांख्यिकीय असंतुलन' बढ़ने का दावा करते हुए कहा कि एक व्यापक राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण नीति की जरूरत है। आरएसएस ने दावा किया है कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि जनसंख्या वृद्धि किसी भी धार्मिक समुदाय या क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव न डाले, जिससे अन्यथा “सामाजिक-आर्थिक असमानताएं और राजनीतिक संघर्ष हो सकते हैं।”

ऑर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने डेमोग्राफी, डेमोक्रेसी एंड डेस्टिनी नामक लेख में लिखा है। संपादकीय के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या स्थिर होने के बावजूद यह सभी धर्मों और क्षेत्रों में समान नहीं है। कुछ क्षेत्रों खासकर सीमावर्ती जिलों में मुस्लिम आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसमें लिखा गया है कि पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और उत्तराखंड जैसे सीमावर्ती राज्यों में सीमाओं पर 'अवैध विस्थापन' की वजह से 'अप्राकृतिक' तरीके से जनसंख्या वृद्धि हो रही है।

पत्रिका में लिखा गया है कि पश्चिम और दक्षिण के राज्य जनसंख्या नियंत्रण उपायों को लागू करने में अपेक्षाकृत बेहतर काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें जनगणना के बाद आबादी में बदलाव होने पर संसद में कुछ सीट कम होने का डर है।संपादकीय के अनुसार, लोकतंत्र में जब प्रतिनिधित्व के लिए संख्या महत्वपूर्ण होती हैं और जनसांख्यिकी भाग्य का फैसला करती है, तो हमें इस प्रवृत्ति के प्रति और भी अधिक सतर्क रहना चाहिए।  

पत्रिका के अनुसार, 'हमें यह सुनिश्चित करने के लिए नीतियों की जरूरत है कि जनसंख्या वृद्धि से किसी एक धार्मिक समुदाय या क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़े जिससे सामाजिक-आर्थिक असमानता और राजनीतिक संघर्ष की स्थिति बन सकती है। उसने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय संगठनों, शोध संस्थानों और परामर्शदात्री एजेंसियों के माध्यम से आगे बढ़ाए जा रहे बाहरी एजेंडे से प्रभावित होने के बजाय हमें देश में संसाधनों की उपलब्धता, भविष्य की आवश्यकताओं और जनसांख्यिकीय असंतुलन की समस्या को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक राष्ट्रीय जनसंख्या नीति बनाने का प्रयास करना चाहिए और उसे सभी पर समान रूप से लागू करना चाहिए।

संपादकीय में आरोप लगाया गया है, 'राहुल गांधी जैसे नेता यदा-कदा हिंदू भावनाओं का अपमान कर सकते हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस्लामवादियों द्वारा महिलाओं पर किए गए अत्याचारों को स्वीकार करते हुए भी मुस्लिम कार्ड खेल सकती हैं और द्रविड़ पार्टियां सनातन धर्म को गाली देने में गर्व महसूस कर सकती हैं क्योंकि उन्हें जनसंख्या असंतुलन के कारण विकसित तथाकथित अल्पसंख्यक वोट बैंक के एकजुट होने पर भरोसा है।

बता दें कि इससे पहले आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत भी इस तरह की चिंता जाहिर कर चुके हैं। मोहन बागवत ने ने 2022 में विजयादशमी के अवसर पर अपने भाषण में कहा था, "एक व्यापक जनसंख्या नियंत्रण नीति होनी चाहिए , जो सभी पर समान रूप से लागू हो और एक बार इसे लागू कर दिया जाए, तो किसी को भी कोई रियायत नहीं मिलनी चाहिए।" "जब 50 साल पहले (जनसंख्या) असंतुलन हुआ था, तो हमें गंभीर परिणाम भुगतने पड़े थे। यह सिर्फ हमारे साथ ही नहीं हुआ है। आज के समय में, पूर्वी तिमोर, दक्षिण सूडान और कोसोवो जैसे नए देश बने हैं। इसलिए, जब जनसंख्या असंतुलन होता है, तो नए देश बनते हैं। देश विभाजित होते हैं।"

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Jul 10 2024, 16:48

BJP छोड़ दो वरना हम दुनिया से उठा देंगे’, चंडीगढ़ में भाजपा नेताओं को मिला धमकी भरा पत्र, पुलिस को दी शिकायत

 चंडीगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के 4 बड़े नेताओं को जान से मारने की धमकी मिली है। ये 4 नेता पंजाब से है तथा सिख हैं। हत्या की धमकी की चिट्ठी चंडीगढ़ में स्थित भाजपा कार्यालय में भेजी गई है, इसके साथ ही कुछ ज्वलनशील पदार्थ भी मिले हैं। चिट्ठी में भाजपा नेताओं को चेतावनी दी गई है कि वे भाजपा छोड़ दें या फिर दुनिया छोड़ दें। चिट्ठी में खालिस्तान एवं पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लिखे गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी के जिन नेताओं को धमकी मिली है, उनमें भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा, भारतीय जनता पार्टी सिख समन्वय समिति व राष्ट्रीय रेलवे कमेटी के सदस्य तेजिंदर सिंह सराँ एवं बीजेपी महासचिव परमिंदर बराड़ सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त इसमें भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन महासचिव श्रीनिवासुलु का भी नाम है। 

धमकी भरा पत्र मिलने के पश्चात् भारतीय जनता पार्टी नेताओं ने इस बारे में चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत दी है। तत्पश्चात, पुलिस ने पत्र में मिली सामग्री को जाँच के लिए भेज दिया है। तेजिंदर सिंह सरां ने कहा वो इस मामले में पंजाब तथा चंडीगढ़ के डीजीपी से मिलेंगे। भारतीय जनता पार्टी नेता​ परमिंदर सिंह बराड़ एवं तेजिंदर सराँ को लिखा गया है कि हमने पहले भी सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से आपको चेतावनी दी थी कि आप लोगों ने अपने सिर पगड़ी में बाँध रखी हैं। आप भारतीय जनता पार्टी एवं RSS के साथ मिलकर सिखों और पंजाब के लोगों को धोखा दे रहे हैं। आप RSS के साथ सिख मामलों में दखल दे रहे हैं, हमने आपको पहले भी चेतावनी दी थी। आप या तो भारतीय जनता पार्टी छोड़ दें या हम आपको इस दुनिया से उठा देंगे।

चिट्ठी में लिखा है, “आपने भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर किसान आंदोलन को तोड़ने का काम किया। आप सिख धर्म के गद्दार हैं। आप भाजपा-RSS की सहायता से पंजाब के लोगों को गुमराह कर रहे हैं एवं लोगों को भारतीय जनता पार्टी में सम्मिलित होने के लिए कहने की योजना बना रहे हैं। आप सिखों एवं मुसलमानों के रिश्ते खराब करने का काम कर रहे हैं, भारतीय जनता पार्टी एवं RSS आपका उपयोग करने के बाद आपको बाहर निकाल देंगे। कई लोग सिखों एवं पंजाब को बर्बाद करने आए और भगा दिए गए। न तो सिख खत्म हो पाए और न ही पंजाब। तुमने पंजाब को बर्बाद कर दिया है। जिसे हम अब साफ कर देंगे और बहुत जल्द हम तुमसे मिलेंगे।” चिट्ठी में लिखा गया है कि चंडीगढ़ में बैठकर तुम हमारे खिलाफ साजिश कर रहे हो तथा हम जल्द ही इसका बदला लेंगे। मनजिंदर सिरसा भी RSS की भाषा बोलता है, हम उसे भी सबक सिखाएँगे। मनजिंदर सिरसा ने दिल्ली एसजीपीसी को भारतीय जनता पार्टी RSS को सौंप दिया। हम उसे कभी नहीं छोड़ेंगे। हम जल्द ही दिल्ली डीएसजीएमसी के गुरुद्वारों को भारतीय जनता पार्टी से मुक्त कराएँगे। तुम जैसे कई गद्दारों ने भारतीय जनता पार्टी सरकार के साथ मिलकर कनाडा पाकिस्तान एवं भारत में हमारे भाइयों को मारा है और हम इसका बदला लेंगे।

चिट्ठी में लिखा गया, “हम बीजेपी प्रदेश संगठन महामंत्री श्रीनिवासुलू को भी चेतावनी देते हैं कि वह शीघ्र ही पंजाब छोड़ दें क्योंकि हमारी उनसे कोई दुश्मनी नहीं है किन्तु हम सिखों के किसी भी गद्दार को नहीं छोड़ेंगे। खालिस्तान जिंदाबाद है और रहेगा।” पत्र के अंत में खालिस्तान जिंदाबाद, पाकिस्तान जिंदाबाद खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स, हरदीप निज्जर जिंदाबाद, अवतार सिंह खंडा जिंदाबाद, परमजीत सिंह पंजवड जिंदाबाद, मौलाना रहीम उल्ला तारिक जिंदाबाद, पीर बशीर अहमद जिंदाबाद, मौलाना जीआर रहमान जिंदाबाद लिखा गया है।

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Jul 08 2024, 16:10

राहुल गांधी के बचाव में उतरे ज्योतिर्लिंग मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, बोले- इन लोगों को दंड मिलना चाहिए...

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा अपने भाषण विवाद खड़ा करने के कुछ दिनों बाद, ज्योतिर्लिंग मठ के 46वें शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रविवार को कांग्रेस नेता की टिप्पणियों का समर्थन किया है। दरअसल, संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि, जो लोग हिंसा करते हैं, वही पूरे समय हिंसा, हिंसा, नफरत, असत्य की बातें करते हैं। 

इसका जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि राहुल गांधी ने "पूरे हिंदू समुदाय को हिंसक" कहा है, ये बहुत गंभीर बात है। अब विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राहुल गांधी का भाषण हिंदू धर्म के खिलाफ नहीं था। उन्होंने कहा कि, हमने राहुल गांधी का पूरा भाषण सुना। वह साफ तौर पर कह रहे हैं कि हिंदू धर्म में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। शंकराचार्य ने कहा कि गांधीजी के बयान का केवल एक हिस्सा फैलाना सही नहीं है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को दंडित किया जाना चाहिए।

बता दें कि, राहुल की टिप्पणी से लोकसभा में हंगामा मच गया था, जिसके कारण स्पीकर ने उनके भाषण के कुछ हिस्सों को रिकॉर्ड से हटा दिया था। राहुल गांधी सत्र शुरू होने वाले दिन से ही संसद में NEET पर चर्चा की मांग कर उन्हें थे, उन्हें लोकसभा स्पीकर ने कहा भी था कि आपको मौका मिलेगा, पूरी डिटेल में बोलिएगा। पहले राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव हो जाने दीजिए, उसी दौरान आप NEET पर भी बोल सकते हैं। हालाँकि, इसको लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया था और 2 दिनों तक धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो पाई थी / फिर जब राहुल गांधी के बोलने का अवसर आया, तो वे भगवान शिव, ईसा मसीह, श्री गुरु नानक और इस्लाम में दुआ में हाथ उठाती तस्वीर लेकर संसद में पहुँच गए। NEET पर तो उन्होंने कम बोला, लेकिन विवाद मचाने वाली सामग्री ज्यादा बोल दी। 

ऐसा नहीं है कि, केवल हिन्दू हिंसक वाले बयान पर ही कोई विवाद हुआ हो, उस पर तो हिन्दू धर्मगुरु शंकराचार्य ने राहुल गांधी को क्लीन चिट भी दे दी है। किन्तु इस्लाम और सिख धर्म में अभय मुद्रा बताने वाले बयान पर भी राहुल गांधी की निंदा हुई है। इस्लाम और सिख धर्म के धर्माचार्यों ने कहा है कि, राहुल को बिना ज्ञान के नहीं बोलना चाहिए, हमारे धर्म में कोई अभय मुद्रा नहीं है। ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल के चेयरमैन सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने कहा है कि संसद में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि इस्लाम में ऐसा कुछ नहीं है, यहाँ मूर्ति पूजा नहीं होती है और न ही किसी तरह की मुद्रा होती है। इस्लाम में मुद्रा हराम है। वहीं, शीर्ष सिख संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) ने भी कहा कि, पवित्र गुरबानी और गुरुओं की शिक्षाओं को पूर्ण ज्ञान के बिना राजनीतिक बहस का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। गुरु साहिब ने ऐसी किसी मुद्रा या आसन को मान्यता नहीं दी है। 

इस्लाम और सिख धर्म के गुरुओं ने तो राहुल गांधी को फटकार लगा दी, लेकिन शंकराचार्य का कहना है कि, राहुल के बयान में हिन्दू विरोधी कुछ भी नहीं। ये वही शंकराचार्य हैं, जिन्होंने राम मंदिर के उद्घाटन पर भी सवाल उठाए थे। दरअसल, राहुल गांधी ने कहा था कि, ''जो लोग खुद को हिंदू कहते हैं, वे चौबीसों घंटे नफरत, हिंसा और असत्य में लिप्त रहते हैं।'' जिसके बाद राहुल गांधी ने फ़ौरन अपना बयान बदलते हुए कहा था कि, वे भाजपा-RSS कि बात कर रहे हैं, जो अपने आप को हिन्दू कहते हैं। हालाँकि, इससे पहले भी राहुल गांधी कई हिन्दू विरोधी बयान दे चुके हैं। जैसे एक बयान में उन्होंने कहा था कि, ''जो लोग मंदिर जाते हैं, वही बाहर आकर लड़की छेड़ते हैं।'' अब मंदिर केवल भाजपा या RSS के हिन्दू तो जाते नहीं। फिर एक बयान में उन्होंने कहा था कि, ''हमें इन हिन्दुत्ववादियों को एक बार फिर देश से बाहर निकालना है।'' अब कांग्रेस की साथी शिवसेना (उद्धव गुट) भी कहती है कि हमारा हिंदुत्व असली है, तो राहुल गांधी किन हिन्दुत्ववादियों की बात कर रहे थे ?

एक बार राहुल गांधी ने हिन्दू-हिंदुत्व को अलग अलग बता दिया था, एक बार ये भी कहा था कि, मैं किसी भी तरह के हिंदुत्व में यकीन नहीं करता। उनकी ही साथी पार्टी DMK के नेता सनातन के समूल नाश की बातें बार बार दोहरा रहे थे, कुछ कांग्रेस नेताओं ने भी उदयनिधि स्टालिन का समर्थन किया था, जिस पर राहुल मौन रहे थे। तो क्या सारे सनातन धर्म वाले भी भाजपा-RSS के लोग हैं ? आज राहुल गांधी ने इस्लाम और सिख समुदाय को लेकर एक भ्रामक बयान दिया, जिसके बाद उन्हें इन दोनों समुदायों से फटकार मिल गई, अब उम्मीद है कि वे इन दोनों समुदायों पर सोच समझकर बोलेंगे। हाँ, हिन्दुओं पर वे बोल सकते हैं, बार-बार लगातार, क्योंकि, भारत में हिन्दू नहीं रहते, यहाँ रहते हैं, यादव, जाट, दलित, ठाकुर, ब्राह्मण, कुर्मी, आदिवासी, बनिए और भी बहुत सारे लोग, लेकिन हिन्दू नहीं। और फिर बचे-कूचे अगर कुछ लोग विरोध करें भी, तो उन्हें समझाने के लिए शंकराचार्य तो हैं ही।

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Jul 01 2024, 16:40

लोकसभा में भाषण के दौरान राहुल गांधी ने कर दी ऐसी हरकत, स्पीकर ने दिखा दी नियम पुस्तिका, पक्ष विपक्ष दोनों ओर से हुआ जमकर हंगामा

संसद सत्र के चलते सोमवार का दिन बहुत हंगामे भरा रहा। दोपहर के वक़्त जैसे ही लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बोलना आरम्भ किया हंगामे की शुरुआत भी हो गई। अपने भाषण के चलते राहुल गांधी ने बोलते हुए भगवान शंकर की तस्वीर लहराई। इस के चलते स्पीकर ने उन्हें नियम पुस्तिका दिखा दी। राहुल ने कहा, 'आज मैं अपने भाषण की शुरुआत अपने भाजपा और RSS के दोस्तों को हमारे आइडिया के बारे में बताने से कर रहा हूं, जिसका उपयोग हम संविधान की रक्षा करने के लिए करते हैं।' 

राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर भी सीधे हमले किए। उन्होंने कहा कि मैं बायोलॉजिकल हूं। लेकिन पीएम बायोलॉजिकल नहीं हैं। राहुल गांधी जब अपनी स्पीच दे रहे थे, तब स्पीकर ने किसी बात पर उन्हें टोका। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने शिवजी की फोटो दिखा दी तथा आप गुस्सा हो गए। अपने भाषण में राहुल गांधी ने कहा, 'हिंदुस्तान ने कभी किसी पर हमला नहीं किया। इसकी वजह है। हिंदुस्तान अहिंसा का देश है, यह डरता नहीं है। हमारे महापुरुषों ने यह संदेश दिया- डरो मत, डराओ मत। शिवजी बोलते हैं- डरो मत, डराओ मत और त्रिशूल को जमीन में गाड़ देते हैं। दूसरी तरफ जो लोग अपने आपको हिंदू बोलते हैं वो 24 घंटे हिंसा-हिंसा-हिंसा एवं नफरत-नफरत-नफरत करते हैं। आप हिंदू हो ही नहीं। सनातन धर्म में स्पष्ट लिखा है, सच का साथ देना चाहिए।' 

राहुल गांधी ने भगवान शिव को अपने लिए प्रेरणा बताते हुए कहा कि उनसे विपरीत हालातों में संघर्ष की प्रेरणा मिली। उनके बाएं हाथ में त्रिशूल का मतलब अहिंसा है। हमने सच की रक्षा की है बिना किसी हिंसा के। भाजपा को निशाने पर लेते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उनके लिए सिर्फ सत्ता मायने रखती है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन पर फर्जी मुकदमे लगा दिए गए हैं। राहुल ने कहा, 'ED ने मुझसे पूछताछ की, अधिकारी भी हैरान थे। INDIA ब्लॉक के नेताओं को जेल में रखा गया। OBC -एससी-एसटी की बात करने वालों पर मुकदमे किए जा रहे हैं।'

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Jun 21 2024, 15:23

Muslims protesting in Chicago USA, not to buy groceries from Hindu stores which is run by Patels. Because they are funding to RSS.
Muslims protesting in Chicago USA, not to buy groceries from Hindu stores which is run by Patels. Because they are funding to RSS.

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Jun 08 2024, 15:48

दुनिया के 75 देशों ने दी पीएम मोदी को जीत की बधाई, पड़ोसी ने क्यों नहीं ! PAK ने दिया हैरान करने वाला जवाब

पाकिस्तान ने आज शनिवार को कहा कि वह भारत समेत अपने सभी पड़ोसियों के साथ सौहार्दपूर्ण और "सहकारी संबंध" चाहता है और बातचीत के ज़रिए विवादों को सुलझाना चाहता है। विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज ज़हरा बलूच की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेने से एक दिन पहले आई है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में NDA गठबंधन ने लोकसभा चुनावों में 293 सीटें हासिल कीं और रिकॉर्ड तीसरी बार सरकार बनाने के लिए तैयार है। यह पूछने पर कि क्या पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री मोदी को चुनाव जीतने पर बधाई दी है, बलूच ने कहा कि अपने नेतृत्व के बारे में निर्णय लेना भारतीय नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि, "हमें उनकी चुनावी प्रक्रिया पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है।" उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि नई सरकार ने अभी तक औपचारिक रूप से शपथ नहीं ली है, इसलिए भारतीय प्रधानमंत्री को बधाई देने के बारे में बात करना "जल्दबाजी" होगी। भारत के साथ संबंधों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बलोच ने दावा किया कि पाकिस्तान ने हमेशा अपने पड़ोसी के साथ सभी विवादों को रचनात्मक बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि, "पाकिस्तान ने हमेशा भारत सहित अपने सभी पड़ोसियों के साथ सहयोगात्मक संबंध चाहा है। हमने जम्मू-कश्मीर के मुख्य विवाद सहित सभी लंबित मुद्दों को हल करने के लिए लगातार रचनात्मक वार्ता और सहभागिता की वकालत की है।" हालाँकि, मौजूदा भारत सरकार ने शुरू से कहा है कि वह पाकिस्तान के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध चाहता है, तथा इस बात पर जोर दिया है कि इस प्रकार के संबंध के लिए आतंक और शत्रुता से मुक्त वातावरण बनाने की जिम्मेदारी इस्लामाबाद पर है। इस वर्ष की शुरुआत में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत ने "पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे कभी बंद नहीं किए" लेकिन आतंकवाद का मुद्दा "बातचीत के केंद्र में निष्पक्ष और स्पष्ट होना चाहिए"। उन्होंने कहा था कि, "हमने पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए अपने दरवाजे कभी बंद नहीं किए हैं। सवाल यह है कि किस बारे में बात की जाए, अगर किसी देश के पास इतने सारे आतंकवादी शिविर हैं, तो यह बातचीत का केंद्रीय विषय होना चाहिए।" बता दें कि, लोकसभा चुनावों में भाजपा की कम सीटें आने पर और कांग्रेस का बेहतर प्रदर्शन रहने पर पाकिस्तान के कई नेताओं ने ख़ुशी जताई है। पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा हैं कि, ''सांप्रदायिक कट्टरता और भाजपा के प्रतिगामी “हिंदू राष्ट्र” को अस्वीकार करने के लिए भारत के लोग बहुत तारीफ के पात्र हैं।'' वहीं, पाकिस्तान की पिछली इमरान खान सरकार में सूचना मंत्री रहे फवाद चौधरी भी भारत के चुनावों पर लगातार बयान दे रहे थे। वे तो खुले आम कांग्रेस नेता राहुल गांधी का समर्थन करते हुए कह चुके थे कि, किसी भी तरह मोदी सरकार को हटाना जरूरी है। वे राहुल गांधी के वीडियो और कांग्रेस के विज्ञापन भी अपने हैंडल से शेयर कर चुके हैं। नतीजों पर उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था कि, ''चूंकि भारत के चुनाव पर मेरी हर भविष्यवाणी लगभग सही साबित हुई, इसलिए मैं यह कहने का साहस करता हूं कि मोदी निश्चित रूप से प्रधानमंत्री बनेंगे, लेकिन उनकी सरकार के कार्यकाल पूरा करने की संभावना लगभग शून्य है, यदि INDIA गठबंधन अपने पत्ते ठीक से खेलता है तो भारत में मध्यावधि चुनाव होंगे।'' आखिर INDIA अलायन्स की जीत क्यों चाहता है पाकिस्तान ? दरअसल, इसके पीछे कुछ वैचारिक समानताएं हैं। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने का विरोध पाकिस्तान भी करता है और कांग्रेस भी। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह एक बयान में खुलेआम कह चुके हैं कि, पार्टी सत्ता में आई तो 370 वापस लागू करेंगे। ये अनुच्छेद पाकिस्तान के लिए काफी फायदेमंद था। इसके जरिए कोई भी पाकिस्तानी कश्मीर की लड़की से शादी करके भारतीय कश्मीर का नागरिक बन जाता था, जबकि कोई भी दूसरे राज्य का भारतीय वहां जमीन नहीं खरीद सकता था। इसकी मदद से पाकिस्तान को आतंकवाद फैलाने में बहुत आसानी होती थी। कांग्रेस इसे हटाने का विरोध इसलिए करती है, क्योंकि भारत के मुस्लिम इसका विरोध करते हैं, जो कांग्रेस का मुख्य वोटबैंक है, ऐसे में पार्टी उसके पीछे खड़ी हो जाती है। इसके अलावा अयोध्या मामले पर भी पाकिस्तान और कांग्रेस का एक जैसा रुख है, दोनों उस स्थान पर राम मंदिर बनने के खिलाफ थे, कांग्रेस तो राम को सुप्रीम कोर्ट में काल्पनिक भी बता चुकी थी, ताकि ये सिद्ध हो जाए की जब राम ही काल्पनिक हैं, तो उनका जन्मस्थान कैसा और मंदिर कैसा ? ये भी गौर करने वाली बात है कि, नेहरू से लेकर इंदिरा, राहुल तक नेहरू-गांधी परिवार के कई नेता अफगानिस्तान में मौजूद 'बाबर' की कब्र पर जाकर आ चुके हैं, लेकिन इस परिवार का कोई भी सदस्य आज तक राम मंदिर नहीं गया है, निमंत्रण मिलने के बाद भी। पाकिस्तान भी चाहता था कि, उस स्थान पर राम मंदिर न बने और पूर्व कांग्रेसी पीएम नरसिम्हा राव ने उसी स्थान पर वापस बाबरी मस्जिद बनवाने का खुलेआम वादा किया था। यही नहीं, जब पाकिस्तान ने 26/11 के मुंबई आतंकी हमला किया था, जिसमे 250 से अधिक लोग मारे गए थे, इसके बाद भारतीय सेना ने कांग्रेस सरकार (मनमोहन सरकार) के सामने सर्जिकल स्ट्राइक करने जैसे हमले की अनुमति मांगी थी, लेकिन सरकार ने इजाजत नहीं दी। उल्टा कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने जांच से पहले ही 26/11 RSS की साजिश नाम से किताब लॉन्च कर दी, और हिन्दू आतंकवाद शब्द फैलाया जाने लगा। जबकि, इस हमले में एकमात्र जिन्दा पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब ने कबूला था कि उसे पाकिस्तान ने 'जिहाद' करने भेजा था। यही नहीं, सारे पाकिस्तानी आतंकियों के पास हिन्दू नाम वाले ID कार्ड भी थे, यानी पाकिस्तान भी इस हमले का दोष भारत के ही हिन्दुओं पर मढ़ने की साजिश में था, जिसे कांग्रेस की किताब और हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी ने और हवा दे दी। इसके उलट मोदी सरकार ने उरी और पुलवामा हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया, तो इस सरकार के खिलाफ तो पाकिस्तान को होना ही था। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने हाल ही में बयान दिया था कि, भारत को पाकिस्तान की इज्जत करनी चाहिए, क्योंकि उसके पास परमाणु बम है। भारत को अपनी सैन्य ताकत नहीं बढ़ानी चाहिए, क्योंकि इससे पाकिस्तान भड़ककर परमाणु मार सकता है। जबकि, मोदी सरकार का रुख शुरू से यही रहा है कि, जब तक पड़ोसी मुल्क आतंकवाद बंद नहीं करता, तब तक उसके साथ बातचीत शुरू नहीं की जा सकती। इसके अलावा पाकिस्तान भी चाहता है कि, भारत में रह रहे मुस्लिमों को पर्सनल लॉ के हिसाब से चलने दिया जाए, कांग्रेस इसका वादा अपने घोषणापत्र में कर चुकी है, जबकि भाजपा एक देश एक कानून (UCC) की वकालत करती है। इसके अलावा भी कई चीज़ें हैं, जिसके लिए पाकिस्तान केंद्र में मोदी सरकार को हटाने के पक्ष में है और INDIA अलायन्स का समर्थन कर रहा है।

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Jun 08 2024, 15:46

दुनिया के 75 देशों ने दी पीएम मोदी को जीत की बधाई, पड़ोसी ने क्यों नहीं ! PAK ने दिया हैरान करने वाला जवाब

पाकिस्तान ने आज शनिवार को कहा कि वह भारत समेत अपने सभी पड़ोसियों के साथ सौहार्दपूर्ण और "सहकारी संबंध" चाहता है और बातचीत के ज़रिए विवादों को सुलझाना चाहता है। विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज ज़हरा बलूच की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेने से एक दिन पहले आई है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में NDA गठबंधन ने लोकसभा चुनावों में 293 सीटें हासिल कीं और रिकॉर्ड तीसरी बार सरकार बनाने के लिए तैयार है।

यह पूछने पर कि क्या पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री मोदी को चुनाव जीतने पर बधाई दी है, बलूच ने कहा कि अपने नेतृत्व के बारे में निर्णय लेना भारतीय नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि, "हमें उनकी चुनावी प्रक्रिया पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है।" उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि नई सरकार ने अभी तक औपचारिक रूप से शपथ नहीं ली है, इसलिए भारतीय प्रधानमंत्री को बधाई देने के बारे में बात करना "जल्दबाजी" होगी। भारत के साथ संबंधों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बलोच ने दावा किया कि पाकिस्तान ने हमेशा अपने पड़ोसी के साथ सभी विवादों को रचनात्मक बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास किया है।

उन्होंने कहा कि, "पाकिस्तान ने हमेशा भारत सहित अपने सभी पड़ोसियों के साथ सहयोगात्मक संबंध चाहा है। हमने जम्मू-कश्मीर के मुख्य विवाद सहित सभी लंबित मुद्दों को हल करने के लिए लगातार रचनात्मक वार्ता और सहभागिता की वकालत की है।" हालाँकि, मौजूदा भारत सरकार ने शुरू से कहा है कि वह पाकिस्तान के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध चाहता है, तथा इस बात पर जोर दिया है कि इस प्रकार के संबंध के लिए आतंक और शत्रुता से मुक्त वातावरण बनाने की जिम्मेदारी इस्लामाबाद पर है। 

इस वर्ष की शुरुआत में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत ने "पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे कभी बंद नहीं किए" लेकिन आतंकवाद का मुद्दा "बातचीत के केंद्र में निष्पक्ष और स्पष्ट होना चाहिए"। उन्होंने कहा था कि, "हमने पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए अपने दरवाजे कभी बंद नहीं किए हैं। सवाल यह है कि किस बारे में बात की जाए, अगर किसी देश के पास इतने सारे आतंकवादी शिविर हैं, तो यह बातचीत का केंद्रीय विषय होना चाहिए।"

बता दें कि, लोकसभा चुनावों में भाजपा की कम सीटें आने पर और कांग्रेस का बेहतर प्रदर्शन रहने पर पाकिस्तान के कई नेताओं ने ख़ुशी जताई है। पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा हैं कि, ''सांप्रदायिक कट्टरता और भाजपा के प्रतिगामी “हिंदू राष्ट्र” को अस्वीकार करने के लिए भारत के लोग बहुत तारीफ के पात्र हैं।'' वहीं, पाकिस्तान की पिछली इमरान खान सरकार में सूचना मंत्री रहे फवाद चौधरी भी भारत के चुनावों पर लगातार बयान दे रहे थे। वे तो खुले आम कांग्रेस नेता राहुल गांधी का समर्थन करते हुए कह चुके थे कि, किसी भी तरह मोदी सरकार को हटाना जरूरी है। वे राहुल गांधी के वीडियो और कांग्रेस के विज्ञापन भी अपने हैंडल से शेयर कर चुके हैं। नतीजों पर उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था कि, ''चूंकि भारत के चुनाव पर मेरी हर भविष्यवाणी लगभग सही साबित हुई, इसलिए मैं यह कहने का साहस करता हूं कि मोदी निश्चित रूप से प्रधानमंत्री बनेंगे, लेकिन उनकी सरकार के कार्यकाल पूरा करने की संभावना लगभग शून्य है, यदि INDIA गठबंधन अपने पत्ते ठीक से खेलता है तो भारत में मध्यावधि चुनाव होंगे।''

आखिर INDIA अलायन्स की जीत क्यों चाहता है पाकिस्तान ?

दरअसल, इसके पीछे कुछ वैचारिक समानताएं हैं। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने का विरोध पाकिस्तान भी करता है और कांग्रेस भी। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह एक बयान में खुलेआम कह चुके हैं कि, पार्टी सत्ता में आई तो 370 वापस लागू करेंगे। ये अनुच्छेद पाकिस्तान के लिए काफी फायदेमंद था। इसके जरिए कोई भी पाकिस्तानी कश्मीर की लड़की से शादी करके भारतीय कश्मीर का नागरिक बन जाता था, जबकि कोई भी दूसरे राज्य का भारतीय वहां जमीन नहीं खरीद सकता था। इसकी मदद से पाकिस्तान को आतंकवाद फैलाने में बहुत आसानी होती थी। कांग्रेस इसे हटाने का विरोध इसलिए करती है, क्योंकि भारत के मुस्लिम इसका विरोध करते हैं, जो कांग्रेस का मुख्य वोटबैंक है, ऐसे में पार्टी उसके पीछे खड़ी हो जाती है। इसके अलावा अयोध्या मामले पर भी पाकिस्तान और कांग्रेस का एक जैसा रुख है, दोनों उस स्थान पर राम मंदिर बनने के खिलाफ थे, कांग्रेस तो राम को सुप्रीम कोर्ट में काल्पनिक भी बता चुकी थी, ताकि ये सिद्ध हो जाए की जब राम ही काल्पनिक हैं, तो उनका जन्मस्थान कैसा और मंदिर कैसा ? 

ये भी गौर करने वाली बात है कि, नेहरू से लेकर इंदिरा, राहुल तक नेहरू-गांधी परिवार के कई नेता अफगानिस्तान में मौजूद 'बाबर' की कब्र पर जाकर आ चुके हैं, लेकिन इस परिवार का कोई भी सदस्य आज तक राम मंदिर नहीं गया है, निमंत्रण मिलने के बाद भी। पाकिस्तान भी चाहता था कि, उस स्थान पर राम मंदिर न बने और पूर्व कांग्रेसी पीएम नरसिम्हा राव ने उसी स्थान पर वापस बाबरी मस्जिद बनवाने का खुलेआम वादा किया था। यही नहीं, जब पाकिस्तान ने 26/11 के मुंबई आतंकी हमला किया था, जिसमे 250 से अधिक लोग मारे गए थे, इसके बाद भारतीय सेना ने कांग्रेस सरकार (मनमोहन सरकार) के सामने सर्जिकल स्ट्राइक करने जैसे हमले की अनुमति मांगी थी, लेकिन सरकार ने इजाजत नहीं दी। उल्टा कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने जांच से पहले ही 26/11 RSS की साजिश नाम से किताब लॉन्च कर दी, और हिन्दू आतंकवाद शब्द फैलाया जाने लगा। जबकि, इस हमले में एकमात्र जिन्दा पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब ने कबूला था कि उसे पाकिस्तान ने 'जिहाद' करने भेजा था। यही नहीं, सारे पाकिस्तानी आतंकियों के पास हिन्दू नाम वाले ID कार्ड भी थे, यानी पाकिस्तान भी इस हमले का दोष भारत के ही हिन्दुओं पर मढ़ने की साजिश में था, जिसे कांग्रेस की किताब और हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी ने और हवा दे दी। इसके उलट मोदी सरकार ने उरी और पुलवामा हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया, तो इस सरकार के खिलाफ तो पाकिस्तान को होना ही था।   

कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने हाल ही में बयान दिया था कि, भारत को पाकिस्तान की इज्जत करनी चाहिए, क्योंकि उसके पास परमाणु बम है। भारत को अपनी सैन्य ताकत नहीं बढ़ानी चाहिए, क्योंकि इससे पाकिस्तान भड़ककर परमाणु मार सकता है। जबकि, मोदी सरकार का रुख शुरू से यही रहा है कि, जब तक पड़ोसी मुल्क आतंकवाद बंद नहीं करता, तब तक उसके साथ बातचीत शुरू नहीं की जा सकती। इसके अलावा पाकिस्तान भी चाहता है कि, भारत में रह रहे मुस्लिमों को पर्सनल लॉ के हिसाब से चलने दिया जाए, कांग्रेस इसका वादा अपने घोषणापत्र में कर चुकी है, जबकि भाजपा एक देश एक कानून (UCC) की वकालत करती है। इसके अलावा भी कई चीज़ें हैं, जिसके लिए पाकिस्तान केंद्र में मोदी सरकार को हटाने के पक्ष में है और INDIA अलायन्स का समर्थन कर रहा है।

నిజంనిప్పులాంటిది

May 31 2024, 12:56

జయలలితను 'హిందుత్వ నాయకురాలు' అని అన్నామలై; శశికళ, ఏఐఏడీఎంకే నిప్పులు చెరిగారు: 'ఆమెకు దేవుడిపై నమ్మకం ఉంది, మత విశ్వాసాలు లేవు'

1992లో జయలలిత కరసేవ అనేది తప్పు పదం కాదని అన్నారు.

"బాబ్రీ కూల్చివేత తర్వాత 3 రాష్ట్రాల బిజెపి ప్రభుత్వాల తొలగింపును ఆమె వ్యతిరేకించారు"

"1993లో, ఆమె రామమందిర నిర్మాణానికి అనుకూలంగా సంతకాల ప్రచారాన్ని నిర్వహించింది"

"భారతదేశంలో శ్రీరాముని ఆలయాన్ని నిర్మించలేమా, పాకిస్తాన్‌లో నిర్మించడం సాధ్యమేనా" అని కూడా ఆమె ప్రశ్నించారు.

"ఆమె యూనిఫాం సివిల్ కోడ్‌కు మొగ్గు చూపారు. రామసేతును జాతీయ స్మారక చిహ్నంగా ప్రకటించడానికి కూడా ఆమె నిలబడింది"

"1993లో b0mb పేలుడు కారణంగా చెన్నైలోని RSS ప్రధాన కార్యాలయం చదును చేయబడినప్పుడు, ఆమె దానిని ప్రభుత్వ నిధుల నుండి నిర్మించడానికి ముందుకొచ్చింది"

"ఆమె కఠినమైన మతమార్పిడి నిరోధక చట్టాన్ని రూపొందించింది మరియు వేదపాటశాలను కూడా ఏర్పాటు చేసింది"

"ఈరోజు EPS తాను కాళ్ళ నొప్పి కారణంగా రామమందిరాన్ని సందర్శించలేనని చెబుతున్నాడు. జయలలిత & హిందూత్వపై బహిరంగ చర్చకు ADMK నాయకులను నేను ఆహ్వానిస్తున్నాను"

"జయలలిత పూర్వ యుగంలో, రాష్ట్రంలోని హిందూ ఓటర్లు జయలలిత తన హిందూ గుర్తింపును బహిరంగంగా ప్రదర్శించినందున బిజెపి కంటే జయలలితను ఎన్నుకున్నారు" అన్నామలై

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3 hours ago

भोपाल में होगी आरएसएस की समन्वय बैठक, भाजपा के वरिष्ठ नेता भी होंगे शामिल

 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को RSS की समन्वय बैठक होने जा रही है. इस बैठक में RSS एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता सम्मिलित होंगे. यह मध्य प्रदेश में नियमित रूप से होने वाली बैठक है. यूपी में सत्ता एवं संगठन के बीच मचे घमासान की खबरों के बीच भोपाल में आज RSS एवं भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की बैठक रखी गई है. इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश एवं क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल सम्मिलित होंगे. 

वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा एवं प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा भी बैठक में भाग लेंगे. जबलपुर में इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव के चलते मुख्यमंत्री मोहन यादव इसमें सम्मिलित नहीं होंगे मगर शाम को जबलपुर से वापस आने पर वह सम्मिलित हो सकते हैं. बैठक में भारतीय मजदूर संघ के 70वें स्थापना दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम की तैयारियों पर भी चर्चा होगी. इससे पहले लोकसभा चुनाव 2024 में निराशाजनक प्रदर्शन की समीक्षा सहित तमाम मुद्दों को लेकर RSS एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बड़े नेताओं के बीच भी बैठक होनी थी. मगर बैठक से एक दिन पहले ही इसे स्थगित कर दिया गया. यह बैठक शनिवार एवं रविवार को प्रस्तावित थी. 

हालांकि, इस बैठक के बारे में कोई औपचारिक खबर नहीं दी गई थी. मगर बताया जा रहा था कि ये बैठक RSS के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार की उपस्थिति में होनी थी. जानकारी के मुताबिक, अरुण कुमार के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, यूपी भाजपा अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी एवं संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की बैठक होनी थी. हालांकि, ये बैठक क्यों स्थगित की गई इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.