मायावती की अध्यक्षता में बसपा की ऑल इंडिया बैठक खत्म, संगठन और बहुजन मिशन पर जोर

- वरिष्ठ नेताओं के साथ पार्टी कार्यों की समीक्षा, पदाधिकारियों को दिए वार्षिक कार्यक्रमों के लिए दिशा-निर्देश

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय स्तर की ऑल इंडिया बैठक बसपा सुप्रीमो मायावती की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा, प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। स्वर्गीय बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के पुत्र प्रिंस युकेश सिंह भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक में मायावती ने पार्टी और बहुजन आंदोलन से जुड़े पिछले कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने संगठन में सामने आई कमियों को दूर करने और आगामी कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। पार्टी के छोटे-बड़े सभी पदाधिकारियों को वार्षिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक कार्यों के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पूरी गंभीरता और ईमानदारी से पालन करने की हिदायत दी गई।

- बहुजन समाज का हित और अस्मिता सर्वोपरि: मायावती
मायावती ने कहा कि बहुजन समाज का हित, कल्याण और अस्मिता उनके लिए सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि मान्यवर कांशीराम के त्याग, तपस्या और समर्पण से जिस बहुजन मिशन को आगे बढ़ाया गया, उसी भावना के साथ पार्टी को अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना है।उन्होंने कहा कि शोषित और वंचित वर्ग को शासक वर्ग के रूप में स्थापित करना बसपा का मूल मिशन है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सत्ता में भागीदारी को भी उन्होंने जरूरी बताया।

- RSS को लेकर मायावती ने उठाए सवाल
बैठक में मायावती ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए बयानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है और इसी वजह से संगठन की विश्वसनीयता को लेकर लोगों में सवाल बने हुए हैं। मायावती ने कहा कि आरएसएस को बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी और समतामूलक संविधान की भावना के अनुरूप पूरी ईमानदारी से कार्य करना चाहिए।

- देश-दुनिया के मुद्दों पर कार्यकर्ताओं का ध्यान खींचा
बैठक के दौरान मायावती ने देश और दुनिया के मौजूदा ज्वलंत मुद्दों पर भी पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने संगठन को मजबूत करने और बहुजन मिशन को आगे बढ़ाने के लिए कार्यकर्ताओं से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
मदद का हाथ बढ़ाना भारत की परंपरा और उसके ‘डीएनए’ का हिस्सा, कनाडा में बोले मोहन भागवत

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत विदेश प्रवास पर हैं। मोहन भागवत अमेरिका के बाद अब कनाडा पहुंचे हैं। कनाडा के टोरंटो पहुंचे भागवत ने ‘हिंदू विश्व बंधु-एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम को संबोधित किया।

भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सदियों पुरानी अवधारणा पर जोर

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु–एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम में भारत की सभ्यतागत सोच और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सदियों पुरानी अवधारणा पर जोर दिया। भारत को सुपरपावर कहा जा सकता है, लेकिन भारत कभी महाशक्ति बनने के लिए दुनिया में नहीं निकला। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया की सेवा की और अपने चरित्र के कारण ‘विश्वगुरु’ बना। आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा कि खुले विचारों वाले और ज्ञान से संपन्न लोग ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को स्वीकार करते हैं, जिसका अर्थ है कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है।

हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है-भागवत

भागवत ने कहा कि दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है। दुनिया की सेवा से भारत को पहचान मिली। जब भी दुनिया में कहीं भारत से मदद मांगी गई, भारत ने कभी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर मदद के लिए हाथ बढ़ाना भारत की परंपरा और उसके ‘डीएनए’ का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण यह कहा जाता है कि ‘अगर हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है।’

भागवत ने बताई हिंदू सोच से जुड़ी फिलॉसफी

संघ संचालक ने कहा, हमारे पूर्वजों ने मैक्सिको से साइबेरिया तक यात्रा की लेकिन उन्होंने किसी देश पर कब्जा नहीं किया। उन्होंने ज्ञान, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद और सभ्यता के मूल्य सिखाए और दुनिया का दिल जीता। भागवत ने कहा कि हिंदू शब्द को किसी खास भाषा, पूजा के तरीके या जीवनशैली तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंदू सोच से जुड़ी फिलॉसफी विविधता को अपनाने और छिपी हुई एकता को पहचानने पर आधारित है। हिंदू सभी का सम्मान करते हैं और सभी को दिल से अपनाते हैं।

भारत ने सबको शरण दिया

मोहन भागवत ने कहा कि मुसलमानों, ईसाइयों, यहूदियों और पारसियों को ऐतिहासिक रूप से भारत में बिना किसी उत्पीड़न के डर के पनाह मिली है। दुनिया में कहीं भी अगर किसी पर जुल्म हुआ तो उसे भारत में ही जगह मिली।

सुल्तानपुर में गरजे AAP सांसद संजय सिंह - स्कूल दिखाने पर FIR,24 करोड़ नौकरी का जुमला, और 'अनपढ़ रहेगा इंडिया तभी तो अंधभक्त बनेगा इंडिया'*
सुल्तानपुर,आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और आप नेता संजय सिंह आज अपने गृह जनपद सुल्तानपुर दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने योगी-मोदी सरकार पर चार बड़े मुद्दों पर तीखा हमला बोला। स्कूलों की बदहाली दिखाने पर FIR पर - संजय सिंह ने कहा कि AAP ने 'स्कूल ठीक करो' अभियान चलाया है। स्कूलों में दारू की पन्नी, नमक-रोटी, जर्जर बिल्डिंग, कीचड़ भरे रास्ते हैं। ये मुद्दा उठाने पर अभिनंदन करना चाहिए था, लेकिन सरकार FIR करा रही है। "FIR से डरा नहीं सकते, जितनी FIR करोगे उतना वीडियो वायरल होगा और उतनी ही सरकार की बदनामी होगी।"* उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के बाद सरकार को *604 करोड़ रुपये स्कूलों के लिए रिलीज करने पड़े हैं, जिसमें 302 करोड़ की पहली किश्त जारी भी हो चुकी है। JPNIC निजीकरण और फ्री बस यात्रा पर-JPNIC को अखिलेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बताते हुए कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से बनी बिल्डिंग को योगी सरकार ने 10 साल राजनीतिक द्वेष में सड़ने दिया और अब बेचने जा रही है,ये ठीक नहीं है। वहीं 60 साल से ऊपर की महिलाओं को फ्री बस यात्रा पर कहा* "दिल्ली में जब AAP ने सभी महिलाओं के लिए फ्री बस की तो यही लोग कहते थे खजाना खाली हो जाएगा। अच्छी बात है योजना लाए, लेकिन 60+ का क्राइटेरिया क्यों? सभी महिलाओं के लिए फ्री करो। 1 लाख नौकरी और पेपर लीक पर- यूपी सरकार के 1 लाख नियुक्ति के दावे को जुमला बताया। कहा कि 2.15 लाख शिक्षक भर्ती का ऑफिशियल ट्वीट आज तक पूरा नहीं हुआ। मोदी जी ने कहा था हर साल 2 करोड़ नौकरी देंगे, 12 साल में 24 करोड़ नौकरियां मिल जानी चाहिए थीं, फिर बेरोजगारी क्यों है? * आज पटना, लखनऊ, प्रयागराज, दिल्ली हर जगह युवाओं पर लाठी चल रही है।* पेपर लीक, कोई नया विश्वविद्यालय नहीं, सिर्फ नफरत की राजनीति। RSS-BJP का जयन्त चौधरी के बाद युवाओं से संवाद का कार्यक्रम फ्लॉप होगा। पंजाब vs गुजरात स्कूल मॉडल -सबसे बड़ा बयान- केजरीवाल की चुनौती को दोहराते हुए कहा -" मोदी जी और पूरी BJP हिम्मत है तो गुजरात के 1000 अच्छे स्कूल दिखा दे, हम पंजाब के साढ़े 4 साल में बने स्कूल दिखा देंगे।"* "BJP का शिक्षा मॉडल है - अनपढ़ रहेगा इंडिया तभी तो अंधभक्त बनेगा इंडिया, और AAP का मॉडल है - शिक्षित विकसित राष्ट्र।"* पीएम मोदी पर पाखंड का आरोप लगाते हुए कहा कि 14 अगस्त को पाकिस्तान के पीएम को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हैं और दूसरी तरफ देश में विभाजन विभीषिका दिवस मनवाते हैं। एथेनॉल पर कहा - पेट्रोल सस्ता नहीं हुआ, इंजन खराब हुए, माइलेज कम हुई, 25 लाख टन चीनी लायक गन्ना एथेनॉल में खपा दिया जिससे चीनी महंगी हुई। नेपाल बाढ़ त्रासदी पर 400 मौतों पर दुख जताया और भारत सरकार से और मदद भेजने की अपील की।
अमेरिका पहुंचे आरएसएस चीफ, जोहरान ममदानी ने किया मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत अभी अमेरिका दौरे पर हैं। मोहन भागवत मंगलवार को अमेरिका पहुंचे। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में उनका एक बड़ा कार्यक्रम होना है। मगर उस कार्यक्रम का अमेरिका में विरोध हो रहा है। अब अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने मोहन भागवत के मैडिसन स्क्वायर गार्डन कार्यक्रम का विरोध किया है।

न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने शहर के मैडिसन स्क्वायर में होने वाले एसएसएस प्रमुख के कार्यक्रम का विरोध किया है। ममदानी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "मैं रैली का समर्थन नहीं करता, लेकिन मुझे नहीं पता कि क्या शहर के पास किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार है।" ममदानी ने ये बात RSS के मैडिसन स्वाक्यर गार्डन में होने वाले कार्यक्रम और उसके खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कही। उनसे पूछा गया कि क्या यह कार्यक्रम रद्द किया जाना चाहिए।

भारत के बारे में क्या बोले ममदानी ?

न्यूयॉर्क के पहले भारतीय-अमेरिकी मेयर ममदानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी भारतीय मूल की पृष्ठभूमि के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, "मैं यहाँ हमारे शहर के इतिहास के पहले भारतीय-अमेरिकी मेयर के तौर पर भी खड़ा हूं। मेरी मां का परिवार अभी भी भारत में है। मेरे परिवार ने मुझे भारत की जो छवि दिखाई और जिसे देखते हुए मैं बड़ा हुआ, वह एक विविधतापूर्ण समाज की थी- एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य जो भारत के हर व्यक्ति के अपनेपन में विश्वास रखता था।"

आंदोलन को लेकर जताई आपत्ति

ममदानी ने आगे कहा, "सच कहूं तो किसी भी देश के लिए ऐसे आंदोलन का उभरना बेहद चिंताजनक है, जिसकी सोच समाज के कुछ लोगों को अलग रखने या बाहर करने वाली दृष्टि पर आधारित हो। यही कारण है कि मैं इसका गहरा विरोध करता हूं। यह विरोध सिर्फ एक भारतीय-अमेरिकी होने के नाते नहीं है, बल्कि एक ऐसे शहर के मेयर के रूप में भी है, जो इस बात पर गहरा विश्वास करता है कि हर व्यक्ति का समान रूप से स्थान है, चाहे उसका रंग, विचारधारा, धर्म, आस्था या मूल स्थान कुछ भी हो।"

यूएससीआईआरएफ ने की आरएसएस को बैन करने की मांग

इस दौरे से पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी यूएससीआईआरएफ ने आरएस नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय संपर्क से बचने की सिफारिश की थी। यूएससीआईआरएफ कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि आरएसएस नेताओं को, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों, हाई-लेवल मीटिंग या राजनयिक सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बजाय, अमेरिकी सरकार (USG) को उन आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए, जो फ्रीडम ऑफ रिलिजन ऑर बिलीफ यानी धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं।

न्यूयॉर्क में 29 अगस्त को बड़ा कार्यक्रम

बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान के तहत अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन का दौरा है। भागवत आरएसएस के 100 साल पूरे होने के मौके पर वैश्विक संपर्क कार्यक्रम के तहत मंगलवार को अमेरिका पहुंचे। न्यूयॉर्क में वह 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित "यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशन" कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करेंगे। आयोजकों के अनुसार इस कार्यक्रम में करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

अमेरिका में आरएसएस पर बैन की मांग, 29 अगस्त को भागवत के न्यूयॉर्क दौरे से पहले USCIRF सख्त

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अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी USCIRF ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। आयोग ने अमेरिकी सरकार से आरएसएस नेताओं को राजनयिक सम्मान नहीं देने और उनके साथ उच्चस्तरीय बैठकें नहीं करने को कहा है। यह मांग आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के इसी महीने वाले होने वाले अमेरिका दौरे से कुछ दिन पहले उठी है।

आरएसएस नेताओं से दूरी बनाने की मांग

USCIRF के पाकिस्तानी मूल के अध्यक्ष आसिफ महमूद ने आरएसएस को एक ऐसा मुख्य संगठन बताया जिसके सहयोगी संगठनों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। महमूद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आरएसएस के सदस्य हैं। USCIRF के कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि आरएसएस नेताओं के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें या राजनयिक शिष्टाचार का सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों।

आरएसएस पर अल्पसंख्यकों पर हमले के आरोप- आसिफ महमूद

यूएससीआईआरएफ के चेयरमैन आसिफ महमूद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आरएसएस के सदस्य हैं। उन्होंने आरएसएस को एक 'अंब्रेला ऑर्गनाइजेशन' यानी ऐसा मुख्य संगठन बताया, जिसके सहयोगी संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले करने के आरोप लगते रहे हैं। जिसमें ईसाई और मुस्लिम शामिल हैं। अब आरएसएस नेता मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा की योजना है।

आरएसएस पर बैन की मांग

जीन मिल्स ने आगे कहा कि इसके बजाय अमेरिकी सरकार को उन आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए जो धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं। USCIRF के अलावा मानवाधिकार समूह हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स ने भी भागवत के दौरे का विरोध किया है। संगठन ने कहा कि इसे मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ RSS नेटवर्क की हिंसा से अलग नहीं किया जा सकता।

भागवत के अमेरिका दौरे से से पहले उठी मांग

महमूद का यह बयान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे से कुछ दिन पहले आया है। भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाएंगे। भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) के ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस’ कार्यक्रम में शामिल होंगे।

100 से ज्यादा संगठनों ने भागवत के दौरे का समर्थन किया

कनाडा के 100 से ज्यादा संगठनों ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित दौरे का समर्थन किया है। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और मंत्रियों को पत्र लिखकर भागवत को रोकने की मांगों को खारिज करने की अपील की। संगठनों ने कहा कि किसी व्यक्ति पर कार्रवाई से पहले स्वतंत्र और विश्वसनीय सबूतों के साथ कानून और उचित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।

मायावती की अध्यक्षता में बसपा की ऑल इंडिया बैठक खत्म, संगठन और बहुजन मिशन पर जोर

- वरिष्ठ नेताओं के साथ पार्टी कार्यों की समीक्षा, पदाधिकारियों को दिए वार्षिक कार्यक्रमों के लिए दिशा-निर्देश

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय स्तर की ऑल इंडिया बैठक बसपा सुप्रीमो मायावती की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा, प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। स्वर्गीय बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के पुत्र प्रिंस युकेश सिंह भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक में मायावती ने पार्टी और बहुजन आंदोलन से जुड़े पिछले कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने संगठन में सामने आई कमियों को दूर करने और आगामी कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। पार्टी के छोटे-बड़े सभी पदाधिकारियों को वार्षिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक कार्यों के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पूरी गंभीरता और ईमानदारी से पालन करने की हिदायत दी गई।

- बहुजन समाज का हित और अस्मिता सर्वोपरि: मायावती
मायावती ने कहा कि बहुजन समाज का हित, कल्याण और अस्मिता उनके लिए सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि मान्यवर कांशीराम के त्याग, तपस्या और समर्पण से जिस बहुजन मिशन को आगे बढ़ाया गया, उसी भावना के साथ पार्टी को अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना है।उन्होंने कहा कि शोषित और वंचित वर्ग को शासक वर्ग के रूप में स्थापित करना बसपा का मूल मिशन है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सत्ता में भागीदारी को भी उन्होंने जरूरी बताया।

- RSS को लेकर मायावती ने उठाए सवाल
बैठक में मायावती ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए बयानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है और इसी वजह से संगठन की विश्वसनीयता को लेकर लोगों में सवाल बने हुए हैं। मायावती ने कहा कि आरएसएस को बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी और समतामूलक संविधान की भावना के अनुरूप पूरी ईमानदारी से कार्य करना चाहिए।

- देश-दुनिया के मुद्दों पर कार्यकर्ताओं का ध्यान खींचा
बैठक के दौरान मायावती ने देश और दुनिया के मौजूदा ज्वलंत मुद्दों पर भी पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने संगठन को मजबूत करने और बहुजन मिशन को आगे बढ़ाने के लिए कार्यकर्ताओं से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
मदद का हाथ बढ़ाना भारत की परंपरा और उसके ‘डीएनए’ का हिस्सा, कनाडा में बोले मोहन भागवत

#rashtriyaswayamsevaksanghrsschiefmohanbhagwatincanadaspeakson_hindu

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत विदेश प्रवास पर हैं। मोहन भागवत अमेरिका के बाद अब कनाडा पहुंचे हैं। कनाडा के टोरंटो पहुंचे भागवत ने ‘हिंदू विश्व बंधु-एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम को संबोधित किया।

भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सदियों पुरानी अवधारणा पर जोर

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु–एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम में भारत की सभ्यतागत सोच और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सदियों पुरानी अवधारणा पर जोर दिया। भारत को सुपरपावर कहा जा सकता है, लेकिन भारत कभी महाशक्ति बनने के लिए दुनिया में नहीं निकला। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया की सेवा की और अपने चरित्र के कारण ‘विश्वगुरु’ बना। आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा कि खुले विचारों वाले और ज्ञान से संपन्न लोग ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को स्वीकार करते हैं, जिसका अर्थ है कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है।

हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है-भागवत

भागवत ने कहा कि दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है। दुनिया की सेवा से भारत को पहचान मिली। जब भी दुनिया में कहीं भारत से मदद मांगी गई, भारत ने कभी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर मदद के लिए हाथ बढ़ाना भारत की परंपरा और उसके ‘डीएनए’ का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण यह कहा जाता है कि ‘अगर हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है।’

भागवत ने बताई हिंदू सोच से जुड़ी फिलॉसफी

संघ संचालक ने कहा, हमारे पूर्वजों ने मैक्सिको से साइबेरिया तक यात्रा की लेकिन उन्होंने किसी देश पर कब्जा नहीं किया। उन्होंने ज्ञान, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद और सभ्यता के मूल्य सिखाए और दुनिया का दिल जीता। भागवत ने कहा कि हिंदू शब्द को किसी खास भाषा, पूजा के तरीके या जीवनशैली तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंदू सोच से जुड़ी फिलॉसफी विविधता को अपनाने और छिपी हुई एकता को पहचानने पर आधारित है। हिंदू सभी का सम्मान करते हैं और सभी को दिल से अपनाते हैं।

भारत ने सबको शरण दिया

मोहन भागवत ने कहा कि मुसलमानों, ईसाइयों, यहूदियों और पारसियों को ऐतिहासिक रूप से भारत में बिना किसी उत्पीड़न के डर के पनाह मिली है। दुनिया में कहीं भी अगर किसी पर जुल्म हुआ तो उसे भारत में ही जगह मिली।

सुल्तानपुर में गरजे AAP सांसद संजय सिंह - स्कूल दिखाने पर FIR,24 करोड़ नौकरी का जुमला, और 'अनपढ़ रहेगा इंडिया तभी तो अंधभक्त बनेगा इंडिया'*
सुल्तानपुर,आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और आप नेता संजय सिंह आज अपने गृह जनपद सुल्तानपुर दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने योगी-मोदी सरकार पर चार बड़े मुद्दों पर तीखा हमला बोला। स्कूलों की बदहाली दिखाने पर FIR पर - संजय सिंह ने कहा कि AAP ने 'स्कूल ठीक करो' अभियान चलाया है। स्कूलों में दारू की पन्नी, नमक-रोटी, जर्जर बिल्डिंग, कीचड़ भरे रास्ते हैं। ये मुद्दा उठाने पर अभिनंदन करना चाहिए था, लेकिन सरकार FIR करा रही है। "FIR से डरा नहीं सकते, जितनी FIR करोगे उतना वीडियो वायरल होगा और उतनी ही सरकार की बदनामी होगी।"* उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के बाद सरकार को *604 करोड़ रुपये स्कूलों के लिए रिलीज करने पड़े हैं, जिसमें 302 करोड़ की पहली किश्त जारी भी हो चुकी है। JPNIC निजीकरण और फ्री बस यात्रा पर-JPNIC को अखिलेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बताते हुए कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से बनी बिल्डिंग को योगी सरकार ने 10 साल राजनीतिक द्वेष में सड़ने दिया और अब बेचने जा रही है,ये ठीक नहीं है। वहीं 60 साल से ऊपर की महिलाओं को फ्री बस यात्रा पर कहा* "दिल्ली में जब AAP ने सभी महिलाओं के लिए फ्री बस की तो यही लोग कहते थे खजाना खाली हो जाएगा। अच्छी बात है योजना लाए, लेकिन 60+ का क्राइटेरिया क्यों? सभी महिलाओं के लिए फ्री करो। 1 लाख नौकरी और पेपर लीक पर- यूपी सरकार के 1 लाख नियुक्ति के दावे को जुमला बताया। कहा कि 2.15 लाख शिक्षक भर्ती का ऑफिशियल ट्वीट आज तक पूरा नहीं हुआ। मोदी जी ने कहा था हर साल 2 करोड़ नौकरी देंगे, 12 साल में 24 करोड़ नौकरियां मिल जानी चाहिए थीं, फिर बेरोजगारी क्यों है? * आज पटना, लखनऊ, प्रयागराज, दिल्ली हर जगह युवाओं पर लाठी चल रही है।* पेपर लीक, कोई नया विश्वविद्यालय नहीं, सिर्फ नफरत की राजनीति। RSS-BJP का जयन्त चौधरी के बाद युवाओं से संवाद का कार्यक्रम फ्लॉप होगा। पंजाब vs गुजरात स्कूल मॉडल -सबसे बड़ा बयान- केजरीवाल की चुनौती को दोहराते हुए कहा -" मोदी जी और पूरी BJP हिम्मत है तो गुजरात के 1000 अच्छे स्कूल दिखा दे, हम पंजाब के साढ़े 4 साल में बने स्कूल दिखा देंगे।"* "BJP का शिक्षा मॉडल है - अनपढ़ रहेगा इंडिया तभी तो अंधभक्त बनेगा इंडिया, और AAP का मॉडल है - शिक्षित विकसित राष्ट्र।"* पीएम मोदी पर पाखंड का आरोप लगाते हुए कहा कि 14 अगस्त को पाकिस्तान के पीएम को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हैं और दूसरी तरफ देश में विभाजन विभीषिका दिवस मनवाते हैं। एथेनॉल पर कहा - पेट्रोल सस्ता नहीं हुआ, इंजन खराब हुए, माइलेज कम हुई, 25 लाख टन चीनी लायक गन्ना एथेनॉल में खपा दिया जिससे चीनी महंगी हुई। नेपाल बाढ़ त्रासदी पर 400 मौतों पर दुख जताया और भारत सरकार से और मदद भेजने की अपील की।
अमेरिका पहुंचे आरएसएस चीफ, जोहरान ममदानी ने किया मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत अभी अमेरिका दौरे पर हैं। मोहन भागवत मंगलवार को अमेरिका पहुंचे। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में उनका एक बड़ा कार्यक्रम होना है। मगर उस कार्यक्रम का अमेरिका में विरोध हो रहा है। अब अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने मोहन भागवत के मैडिसन स्क्वायर गार्डन कार्यक्रम का विरोध किया है।

न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने शहर के मैडिसन स्क्वायर में होने वाले एसएसएस प्रमुख के कार्यक्रम का विरोध किया है। ममदानी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "मैं रैली का समर्थन नहीं करता, लेकिन मुझे नहीं पता कि क्या शहर के पास किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार है।" ममदानी ने ये बात RSS के मैडिसन स्वाक्यर गार्डन में होने वाले कार्यक्रम और उसके खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कही। उनसे पूछा गया कि क्या यह कार्यक्रम रद्द किया जाना चाहिए।

भारत के बारे में क्या बोले ममदानी ?

न्यूयॉर्क के पहले भारतीय-अमेरिकी मेयर ममदानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी भारतीय मूल की पृष्ठभूमि के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, "मैं यहाँ हमारे शहर के इतिहास के पहले भारतीय-अमेरिकी मेयर के तौर पर भी खड़ा हूं। मेरी मां का परिवार अभी भी भारत में है। मेरे परिवार ने मुझे भारत की जो छवि दिखाई और जिसे देखते हुए मैं बड़ा हुआ, वह एक विविधतापूर्ण समाज की थी- एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य जो भारत के हर व्यक्ति के अपनेपन में विश्वास रखता था।"

आंदोलन को लेकर जताई आपत्ति

ममदानी ने आगे कहा, "सच कहूं तो किसी भी देश के लिए ऐसे आंदोलन का उभरना बेहद चिंताजनक है, जिसकी सोच समाज के कुछ लोगों को अलग रखने या बाहर करने वाली दृष्टि पर आधारित हो। यही कारण है कि मैं इसका गहरा विरोध करता हूं। यह विरोध सिर्फ एक भारतीय-अमेरिकी होने के नाते नहीं है, बल्कि एक ऐसे शहर के मेयर के रूप में भी है, जो इस बात पर गहरा विश्वास करता है कि हर व्यक्ति का समान रूप से स्थान है, चाहे उसका रंग, विचारधारा, धर्म, आस्था या मूल स्थान कुछ भी हो।"

यूएससीआईआरएफ ने की आरएसएस को बैन करने की मांग

इस दौरे से पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी यूएससीआईआरएफ ने आरएस नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय संपर्क से बचने की सिफारिश की थी। यूएससीआईआरएफ कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि आरएसएस नेताओं को, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों, हाई-लेवल मीटिंग या राजनयिक सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बजाय, अमेरिकी सरकार (USG) को उन आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए, जो फ्रीडम ऑफ रिलिजन ऑर बिलीफ यानी धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं।

न्यूयॉर्क में 29 अगस्त को बड़ा कार्यक्रम

बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान के तहत अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन का दौरा है। भागवत आरएसएस के 100 साल पूरे होने के मौके पर वैश्विक संपर्क कार्यक्रम के तहत मंगलवार को अमेरिका पहुंचे। न्यूयॉर्क में वह 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित "यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशन" कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करेंगे। आयोजकों के अनुसार इस कार्यक्रम में करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

अमेरिका में आरएसएस पर बैन की मांग, 29 अगस्त को भागवत के न्यूयॉर्क दौरे से पहले USCIRF सख्त

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अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी USCIRF ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। आयोग ने अमेरिकी सरकार से आरएसएस नेताओं को राजनयिक सम्मान नहीं देने और उनके साथ उच्चस्तरीय बैठकें नहीं करने को कहा है। यह मांग आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के इसी महीने वाले होने वाले अमेरिका दौरे से कुछ दिन पहले उठी है।

आरएसएस नेताओं से दूरी बनाने की मांग

USCIRF के पाकिस्तानी मूल के अध्यक्ष आसिफ महमूद ने आरएसएस को एक ऐसा मुख्य संगठन बताया जिसके सहयोगी संगठनों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। महमूद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आरएसएस के सदस्य हैं। USCIRF के कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि आरएसएस नेताओं के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें या राजनयिक शिष्टाचार का सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों।

आरएसएस पर अल्पसंख्यकों पर हमले के आरोप- आसिफ महमूद

यूएससीआईआरएफ के चेयरमैन आसिफ महमूद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आरएसएस के सदस्य हैं। उन्होंने आरएसएस को एक 'अंब्रेला ऑर्गनाइजेशन' यानी ऐसा मुख्य संगठन बताया, जिसके सहयोगी संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले करने के आरोप लगते रहे हैं। जिसमें ईसाई और मुस्लिम शामिल हैं। अब आरएसएस नेता मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा की योजना है।

आरएसएस पर बैन की मांग

जीन मिल्स ने आगे कहा कि इसके बजाय अमेरिकी सरकार को उन आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए जो धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं। USCIRF के अलावा मानवाधिकार समूह हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स ने भी भागवत के दौरे का विरोध किया है। संगठन ने कहा कि इसे मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ RSS नेटवर्क की हिंसा से अलग नहीं किया जा सकता।

भागवत के अमेरिका दौरे से से पहले उठी मांग

महमूद का यह बयान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे से कुछ दिन पहले आया है। भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाएंगे। भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) के ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस’ कार्यक्रम में शामिल होंगे।

100 से ज्यादा संगठनों ने भागवत के दौरे का समर्थन किया

कनाडा के 100 से ज्यादा संगठनों ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित दौरे का समर्थन किया है। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और मंत्रियों को पत्र लिखकर भागवत को रोकने की मांगों को खारिज करने की अपील की। संगठनों ने कहा कि किसी व्यक्ति पर कार्रवाई से पहले स्वतंत्र और विश्वसनीय सबूतों के साथ कानून और उचित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।