भारत ने पाकिस्तान में छिपे 23 दुश्मनों को घोषित किया आतंकी, सूची में शामिल हैं ये प्रमुख नाम

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आतंकवाद के खिलाफ भारत सरकार ने एक बड़ा एक्शन लिया है। गृह मंत्रालय ने पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 23 दहशतगर्तों को आतंकवादी घोषित किया है। गृह मंत्रालय ने एक गजट नोटिफिकेशन के जरिए इन 23 नामों की लिस्ट जारी की है।

जैश और लश्कर के 23 दहशतगर्द आतंकवादी घोषित

भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने एक गजट अधिसूचना जारी करते हुए पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े 23 दहशतगर्तों को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (UAPA) के तहत आतंकवादी घोषित किया है। इन सभी 23 नामों को UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल किया गया है और वर्तमान में ये सभी पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में रह रहे हैं।

सूची में शामिल हैं ये प्रमुख आतंकी

सूची में मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान और हाफिज अब्दुल शकूर जैसे नाम शामिल हैं, जो 2016 और 2022 में सुरक्षा बलों पर हुए हमले से जुड़े बताए हैं। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े अब्दुल रऊफ और हाफिज खालिद वलीद को हाफिज सईद के करीबी सहयोगी के रूप में बताया गया है। चौंकाने वाला नाम मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ उस्ताद उर्फ जाकिर का है। उसका स्थायी पता बेंगलुरु का है, जबकि वह रावलपिंडी में रह रहा है।

भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप

गृह मंत्रालय के अनुसार सूची में शामिल सभी 23 लोग जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद-दावा, द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF), अल-कायदा और ISIS से जुड़े नेटवर्क के जरिए भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। इन पर आतंकियों को ट्रेनिंग देने, लॉन्चिंग पैड चलाने, फंडिंग जुटाने, हथियार उपलब्ध कराने, ड्रोन के जरिए हथियार भेजने और जम्मू-कश्मीर सहित भारत के विभिन्न हिस्सों में आतंकी साजिशों को अंजाम देने का आरोप है। सरकार का कहना है कि इन गतिविधियों के पर्याप्त इनपुट और जांच के आधार पर इन्हें UAPA के तहत व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किया गया है।

UN में भारत ने फिर पाकिस्‍तान को लताड़ा, कश्मीर के जिक्र पर सीखा दिया सबक

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एरिया फॉर्मूला बैठक में भारत ने पाकिस्तान को फिर कड़ा जवाब दिया है। भारत ने जम्मू-कश्मीर पर की गई पाकिस्तान की टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और यह भारत का आंतरिक मामला है।

जम्मू-कश्मीर पर पाक की टिप्पणी को बताया गैर जरूरी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चीन और पाकिस्तान की ओर से आयोजित एरिया फॉर्मूला बैठक के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया। भारतीय राजदूत ने हरीश पर्वतनेनी कहा, "यह हैरानी की बात है कि सह अध्यक्ष होने के बावजूद पाकिस्तान ने एरिया फॉर्मूला बैठक का राजनीतिक करण किया और भारत के जम्मू-कश्मीर इलाके पर गैर जरूरी टिप्पणियां कीं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि "केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का मामला पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। यह हमेशा से ऐसा ही रहा है, अभी भी है और आगे भी ऐसा ही रहेगा।"

यूएन को भी दिखाया आईना

भारत ने इस मौके पर सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों और मध्यस्थता तंत्रों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए। पी. हरीश ने कहा कि समय के साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां बदलती हैं, ऐसे में सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और मध्यस्थता ढांचों की भी समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्‍टर-6 के तहत बनाए गए मध्यस्थता तंत्र स्थायी नहीं माने जा सकते और बदलते वैश्विक परिदृश्य में उनकी उपयोगिता का आकलन जरूरी है।

संयुक्त राष्ट्र की चौखट पर पहुंचा पाकिस्तान, सिंधु जल समझौते के निलंबन UNSC के सामने लगाई गुहार

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सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का दरवाजा खटखटाया है। पाकिस्तान ने भारत पर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया है। पाकिस्तान चाहता है कि UNSC इस मामले में दखल दे और भारत को रोके।

इशार डार ने सुरक्षा परिषद को लिखा पत्र

पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशार डार ने सुरक्षा परिषद को एक पत्र लिखा है। इसमें भारत से आने वाली नदियों के बहाव को बदलने की भारत की कोशिशों पर ध्यान देने की अपील की गई है। डार ने चिनाब नदी पर बन रही भारत की दो परियोजनाओं को जिक्र किया है और इसे पाकिस्तान की जल, खाद्य और आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

भारत पर जल प्रवाह बदलने की कोशिश का आरोप

पाकिस्तान का आरोप है कि भारत चिनाब नदी प्रणाली से जुड़ी दो परियोजनाओं के जरिए पश्चिमी नदियों के जल प्रवाह और उपयोग के स्थापित ढांचे को बदलने की कोशिश कर रहा है। इस्लामाबाद का कहना है कि ऐसी गतिविधियां सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं और इनसे क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

भारत को जवाबदेह ठहराने की अपील

पाकिस्तानी राजदूत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सुरक्षा परिषद से इस मामले का संज्ञान लेने और भारत को कथित उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की गई है। साथ ही उन्होंने दक्षिण एशिया की स्थिति और जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया।

बता दें कि अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सख्त कदम उठाते हुए पाकिस्तान के साथ 65 साल से चली आ रही सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। इसके बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है।

सत्यांजल पांडे होंगे इस्लामाबाद में भारत के अगले कार्यवाहक उच्चायुक्त, जानें क्यों अहम है ये नियुक्ति?

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भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते बेहद तल्ख बने हुए हैं। इस बीच सरकार ने वरिष्ठ राजनयिक डॉ. सत्यांजल पांडेय को पाकिस्तान में भारत के दूतावास का प्रभारी नियुक्त किया है. डिप्‍लोमेटिक सूत्रों के अनुसर पाकिस्तान ने उनकी नियुक्ति को स्वीकार कर लिया है और वे अगले कुछ सप्ताह में इस्लामाबाद पहुंचकर नई जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।

दक्षिण एशिया के मामलों की अच्छी समझ वाले अधिकारी

सत्याजंल फिलहाल श्रीलंका में भारत के उप उच्चायुक्त हैं। विदेश सेवा में लंबे अनुभव वाले डॉ. पांडेय को दक्षिण एशिया के मामलों की अच्छी समझ रखने वाले अधिकारियों में गिना जाता है। उन्होंने अपने राजनयिक करियर के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं और पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत बनाने में योगदान दिया है।

पाकिस्तान में उनकी नई भूमिका क्यों अहम?

जानकारों का मानना है कि श्रीलंका में उनकी तैनाती के दौरान उन्हें दक्षिण एशियाई राजनीतिक और रणनीतिक परिस्थितियों को करीब से समझने का अवसर मिला। यही अनुभव पाकिस्तान में उनकी नई भूमिका में भी उपयोगी साबित हो सकता है

गीतिका श्रीवास्तव की जगह लेंगे पांडे

सत्याजंल पांडे इस्लामाबाद में गीतिका श्रीवास्तव की जगह लेंगे, जिन्हें अगस्त 2023 में इस पद पर नियुक्त किया गया था। गीतिका ने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है।

पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक, 13 लोगों की हुई मौत

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पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान में घातक हमले किए हैं। दोनों देशों की सीमा के पास अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हमलों में कम से कम 13 लोग मारे गए हैं। इन हमलों में जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें ज्यादातर बच्चे शामिल हैं।

हमलों में 11 बच्चों की मौत

अफगानिस्तान सरकार के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखकर जानकारी दी है कि पाकिस्तानी सेना ने कल रात एक बार फिर अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया और कुनार, खोस्त तथा पकतिका प्रांतों में आम नागरिकों के घरों पर बमबारी की। इन हमलों में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई।

अफगानिस्तान ने कहा- नागरिकों को निशाना बनाने वाली कार्रवाई

खोस्त प्रांत के एक अधिकारी ने बताया कि स्पेरा जिले में एक घर पर हुए हमले में 9 लोग मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए। पक्तिका प्रांत में एक अलग हमले में 3 लोगों की मौत हुई। अफगानिस्तान के इन आरोपों पर पाकिस्तान की सेना ने अभी तक इन हमलों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

पाकिस्तानी हमले की निंदा

तालिबान सरकार ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे नागरिकों को निशाना बनाने वाली कार्रवाई बताया है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन हमलों को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या पुष्टि नहीं की गई है। पाकिस्तान का कहना है कि 'पाकिस्तानी तालिबान' (TTP) के आतंकवादी अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में बड़े आत्मघाती और आतंकी हमले कर रहे हैं। पाकिस्तान लंबे समय से अफगान तालिबान से इन आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है जिसे काबुल खारिज करता रहा है।

पिछले कई महीनों से सीमा पर तनाव

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले कई महीनों से सीमा पर तनाव बना हुआ है। फरवरी के अंत से दोनों देशों के बीच लगातार संघर्ष और जवाबी कार्रवाइयां हो रही हैं, जिनमें सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल के पहले तीन महीनों में अफगानिस्तान में हुए संघर्ष में 372 आम नागरिक मारे गए और 397 घायल हुए थे।

अब्राहम' समझौते पर पाकिस्तान ने ट्रंप की अपील ठुकराई, शहबाज के रक्षामंत्री ने दिखाई आंख

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पाकिस्तान ने अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने और इजरायल को औपचारिक मान्यता देने के अमेरिकी दबाव को पूरी तरह ठुकरा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुस्लिम देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की मांग की थी। जिसके बाद पाकिस्तान ने अब्राहम समझौते में शामिल होने से इनकार कर दिया। रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कहा कि इस्लामाबाद किसी भी ऐसे समझौते का समर्थन नहीं करेगा जो देश की मौलिक विचारधाराओं के खिलाफ हो।

ट्रंप की मांग पाक को किसी भी हाल में मंजूर नहीं

दरअसल, सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत मुस्लिम बहुल देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने और इजराइल को औपचारिक रूप से मान्यता देने की मांग की थी। जिसके बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने समा टीवी के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि हम इजरायल के साथ जाने का विकल्प नहीं चुन सकते हैं। यह अपनी मूल विचारधारा से समझौता करने जैसा होगा, जो किसी भी हाल में मंजूर नहीं है।

ख्वाजा आसिफ बोले- एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं

आसिफ ने कहा कि इजरायल को लेकर पाकिस्तान का बीते करीब आठ दशक से एक मजबूत रुख रहा है, जिसे छोड़कर वह 'अब्राहम समझौते' में शामिल नहीं हो सकता। आप उन लोगों (इजरायलियों) के साथ कैसे बैठ सकते हैं, जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता है। बता दें कि पाकिस्तान ने अपने 78 साल के इतिहास में कभी-भी इजरायल को मान्यता नहीं दी है।

डोनाल्ड ट्रंप क्या चाहते हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की और कतर जैसे देशों को ईरान समझौते का हिस्सा बनने के लिए अब्राहम अकॉर्ड्स पर दस्तखत करने को कहा है। ट्रंप ने मुस्लिम देशों के नेताओं से कहा कि ईरान में शांति के लिए उनको अब्राहम एकॉर्ड या अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करना चाहिए। उनको इजरायल से रिश्ते कायम करने चाहिए।

क्या है अब्राहम समझौता?

अब्राहम एकॉर्ड या अब्राहम समझौता अमेरिका की मध्यस्थता से 2020 में शुरू किया गया था। यह इजरायल और अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को सामान्य बनाने के लिए शुरू किया गया था। यह एक ऐसी दुविधा है जिससे ज्यादातर मुस्लिम देश दूर ही रहना चाहते हैं। कई मुस्लिम देशों की मुसीबत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि ट्रंप ने कहा है कि अगर इस पहल का समर्थन नहीं किया गया तो अमेरिका के साथ संबंधों पर असर पड़ सकता है। अब्राहम समझौते पर सबसे पहले 15 सितंबर, 2020 को इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल-बहरीन के बीच हस्ताक्षर हुए थे। बाद में इस ढांचे का विस्तार करके इसमें मोरक्को और सूडान को भी शामिल किया गया। 2025 में औपचारिक रूप से इस समूह में कज़ाकिस्तान भी शामिल हुआ।

पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान को सत्ता से हटाने में अमेरिका का हाथ? सामने आ गई सीक्रेट फाइल

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इमरान खान को सत्ता से हटाने को लेकर विदेशी साजिश वाले आरोप फिर से चर्चा में हैं। पाकिस्तान की राजनीति में सालों से चर्चा में रहा एक खुफिया मैसेज यानी “साइफर” अब फिर सुर्खियों में है। अब इस कथित सीक्रेट दस्तावेज की तस्वीरें सामने आई हैं। इससे पता चला है कि इमरान खान के वो दावे सौ फीसदी सही थे जिसमें उन्होंने साइफर का हवाला देते हुए अमेरिका पर अपनी सरकार को गिराने का आरोप लगाया था।

इमरान खान के अविश्वास प्रस्ताव में हारने से ठीक पहले हुई थी बैठक

'ड्रॉप साइट' नाम की वेबसाइट ने 'साइफर' नाम का सीक्रेट डॉक्यूमेंट लीक किया है। यह वही सीक्रेट राजनयिक दस्तावेज है, जिसे लेकर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार विदेशी साजिश का आरोप लगाते रहे थे। इस दस्तावेज को 'केबल I-0678' के रूप में पहचाना गया है। इसमें पाकिस्तान के तत्कालीन वाशिंगटन स्थित राजदूत और अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डोनाल्ड लू के बीच हुई एक बैठक का ब्योरा दर्ज है। यह बैठक अप्रैल 2022 में इमरान खान के अविश्वास प्रस्ताव में हारने से ठीक पहले हुई थी।

इमरान खान के जाने के बाद शहबाज बने पाक पीएम

दस्तावेज में कहा गया कि सत्ता परिवर्तन होने पर अमेरिका और यूरोप के साथ पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार संभव होगा। इसमें संकेत दिया गया कि इमरान खान के पद पर बने रहने की स्थिति में पाकिस्तान को कूटनीतिक अलगाव का सामना करना पड़ सकता है। जो बाइडेन उस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति हुआ करते थे। इमरान खान के जाने के बाद शहबाज शरीफ देश के प्रधानमंत्री बने थे।

पाकिस्तान और अमेरिका से संबंध सुधारे

ड्रॉप साइट ने दस्तावेजों के हवाले से बताया है कि इमरान खान की सरकार गिरने के बाद पिछले पांच सालों में अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को एक नया रूप दिया गया और वॉशिंगटन और इस्लामाबाद को आपसी शक-शुबहे के माहौल से निकालकर एक-दूसरे के करीब ला दिया।

इमरान खान बार-बार किया था ये दावा

इमरान खान ने अपनी सत्ता जाने से पहले और संसद में सरकार गिरने के बाद बार-बार यह दावा किया था कि अमेरिका ने उनकी स्वतंत्र विदेश नीति और रूस और चीन के खिलाफ उसके साथ पूरी तरह से न जुड़ने के कारण उन्हें सत्ता से हटाने के लिए पर्दे के पीछे से काम किया। इमरान खान ने पाकिस्तान की वंशवादी राजनीतिक पार्टियों जैसे पाकिस्तान मुस्लिम लीग-N और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी पर भी आरोप लगाया कि वे उनकी सरकार को गिराने के लिए विदेशी ताकतों के साथ मिलकर काम कर रही थीं।

इमरान खान सरकार और अमेरिका के बीच तनाव के कारण

रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान सरकार और अमेरिका के बीच तनाव कई मुद्दों पर बढ़ाः-

1. अफगानिस्तान मुद्दा: अमेरिका चाहता था कि पाकिस्तान अपनी जमीन ड्रोन ऑपरेशन के लिए दे, लेकिन इमरान खान ने साफ इनकार कर दिया था।

2. रूस यात्रा: फरवरी 2022 में इमरान खान रूस पहुंचे और उसी दिन यूक्रेन पर हमला शुरू हुआ। इस मुलाकात ने अमेरिका को नाराज कर दिया। दस्तावेज में यह भी कहा गया कि रूस यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों में ‘दरार’ डाल दी थी।

3. यूएन वोटिंग: पाकिस्तान ने रूस के खिलाफ प्रस्ताव पर वोटिंग से दूरी बनाई, जिससे पश्चिमी देशों की नाराजगी और बढ़ गई।

यूएस-ईरान शांति वार्ताःडील के लिए ट्रंप खुद पहुंच सकते हैं पाकिस्तान

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अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है। इस बीच खबर आ रही है कि डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान के साथ इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता में समझौता होने की स्थिति में खुद भी शामिल हो सकते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे राउंड की युद्धविराम वार्ता होने की उम्मीद अब काफी बढ़ गई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चर्चा में शामिल एक पाकिस्तानी सूत्र के हवाल से कहा है कि बातचीत के फिर से शुरू करने की दिशा में प्रगति हो रही है। उन्होंने ये भी संकेत दिया है कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता हो जाता है तो या तो खुद डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान आ सकते हैं या फिर ऑनलाइन माध्यम से इसमें शामिल हो सकते हैं।

ट्रंप ने दी बम बरसाने की धमकी

ये खबर ऐसे वक्त में आई है, जब ईरान-अमेरिका वार्ता में लगातार गतिरोध चल रहा है। इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और उन्होंने दावा किया है कि ईरान को समझौता करना ही होगा। उन्होंने अपनी ताजा धमकी में कहा कि अगर ईरान समझौता नहीं करेगा, तो बम बरसेंगे। हालांकि इसके बाद भी ईरान ने अड़ियल रवैया जारी रखा है।

पाकिस्तान के लिए अब तक नहीं रवाना हुआ ईरानी प्रतिनिधिमंडल

ईरान की सरकारी टेलीविजन रिपोर्ट के अनुसार अभी तक कोई भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता में भाग लेने के लिए रवाना नहीं हुआ है। यह वार्ता अमेरिका के साथ संभावित शांति वार्ता से जुड़ी बताई जा रही है, जिसे लेकर क्षेत्रीय स्तर पर काफी चर्चा बनी हुई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ओर से फिलहाल किसी भी डेलीगेशन के पाकिस्तान जाने की पुष्टि नहीं की गई है, जिससे इस बैठक को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

इन मामलों पर विवाद बरकरार

-ईरान का परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करे, जबकि तेहरान का कहना है कि किसी भी प्रतिबंध की समयसीमा सीमित होनी चाहिए।

-यूरेनियम भंडार: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान के लगभग 400 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम पर नियंत्रण चाहता है, लेकिन ईरान ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।

-स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: ईरान का कहना है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर प्रतिबंध तब तक जारी रखेगा जब तक अमेरिका अपने प्रतिबंध नहीं हटाता, जबकि अमेरिका का रुख सख्त बना हुआ है।

-जमे हुए आर्थिक संपत्ति: ईरान करीब 20 अरब डॉलर की फ्रीज़्ड संपत्तियों को जारी करने और प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है।

-युद्ध क्षतिपूर्ति: तेहरान ने अमेरिका और इस्राइल के हमलों से हुए नुकसान के बदले लगभग 270 अरब डॉलर के मुआवजे की भी मांग उठाई है।

पाक रक्षा मंत्री पर भड़के नेतन्याहू, ऐसा लगाई लताड़ की डिलीट किया पोस्ट, इजरायल को बताया था 'कैंसर'

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच पाकिस्तान और इजरायल भिड़ते दिख रहे है। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से ठीक पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक ऐसा बयान दिया जिसके बाद पूरा मामल और गर्म हो गया है।

लेबनान में निर्दोष लोगों की हत्या का आरोप

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर इजरायल को ‘मानवता के लिए अभिशाप’ और ‘कैंसर’ बताया। साथ ही लेबनान में हो रही सैन्य कार्रवाई को ‘नरसंहार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जब इस्लामाबाद में शांति वार्ता की तैयारी चल रही है, उसी समय लेबनान में निर्दोष लोगों की हत्या हो रही है। आसिफ ने आरोप लगाया कि पहले गाजा, फिर ईरान और अब लेबनान में खूनखराबा जारी है।

ख्वाजा आसिफ के जहरीले बयान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को अभिशाप बताते हुए कहा, "जिन लोगों ने कैंसर जैसा देश बनाया है, वे उम्मीद करते हैं कि वो नर्क की आग में जलें।' हालांकि, बाद में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने इजरायल के खिलाफ दिए गए कैंसर वाले बयान समेत उन्हें नर्क में जला देने वाले ट्वीट को डिलीट कर दिया है।

ख्वाजा आसिफ के बयान पर क्या बोले नेतन्याहू ?

इस बयान के बाद इजरायल ने तुरंत कड़ी प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का बयान ‘अत्यंत आपत्तिजनक’ है और किसी भी सरकार के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता, खासकर उस देश के लिए जो खुद को शांति का मध्यस्थ बता रहा है। इसमें कहा गया कि इजरायल के विनाश की मांग घोर आपत्तिजनक है।

इजरायली विदेश मंत्री का पलटवार

इजरायल के विदेश मंत्री गिडियन सार ने भी पाकिस्तान की आलोचना की। उन्होंने कहा, शांति की मध्यस्थता का दावा करने वाली सरकार की ओर से इन खुले तौर पर यहूदी-विरोधी और भड़काऊ आरोपों को बहुत गंभीरता से लेता है। यहूदी राष्ट्र को कैंसर कहना असल में उसे खत्म करने का ही आह्वान करना है। उन्होंने आगे कहा, इजरायल उन आतंकवादियों से अपनी रक्षा करेगा जिन्होंने उसे तबाह करने की कसम खाई है।

ईरान-अमेरिका सीजफायर में पाकिस्तान मध्यस्थ या मोहरा? जानें क्यों उठ रहे सवाल

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अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर हो गया है। इसमें पाकिस्तान की अहम भूमिका सामने आई है, जिसे खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है। लेकिन पाकिस्तान यहां भी अपनी नापाक हरकत से बाज नहीं आया है। ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर को लेकर पाकिस्तान खुद को शांति दूत के रूप में पेश कर रहा है। शांति वार्ता की मेजबानी कर वह अपनी छाती ठोक रहा है। लेकिन, सच्चाई कुछ अलग है।

पाक मात्र एक मैसेंजर

ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक असल में व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान को दबाव डालकर इस्तेमाल किया। इस्लामाबाद कोई न्यूट्रल ब्रोकर नहीं था। वह सिर्फ अमेरिका का सुविधाजनक मैसेंजर बनकर रह गया। रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका ने पाकिस्तान पर जोर डाला कि वह वाशिंगटन का प्रस्ताव तेहरान तक पहुंचाए। पाकिस्तान को सक्रिय भूमिका नहीं दी गई, बल्कि सिर्फ एक चैनल बनाया गया।

यूएस ने पाकिस्तान को ही क्यों चुना?

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका को लगा कि ईरान मुस्लिम पड़ोसी देश के जरिए आने वाले ऑफर को ज्यादा आसानी से मान लेगा। यही वजह थी कि पाकिस्तान को चुना गया।

इजरायल के राजदूत ने भी उठाया सवाल

अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर पर पाकिस्तान खुद की अपनी पीठ थपथपा रहा है। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने भी उसकी मध्यस्थ की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। इजरायली राजदूत रूवेन ने अमेरिका-ईरान के बीच चल रही सीजफायर की बातचीत में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर संदेह जताया है। उन्होने कहा, इजरायल इस्लामाबाद को एक "विश्वसनीय पक्ष" के रूप में नहीं देखता है। रूवेन अजार ने कहा, 'हम पाकिस्तान को एक भरोसेमंद पक्ष के रूप में नहीं देखते हैं. मुझे लगता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने निजी कारणों से पाकिस्तान की मध्यस्थता का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है।

किसके इशारों पर नाच रहा पाक?

वहीं, 'फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज' (FDD) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और अमेरिकी ट्रेजरी के पूर्व एनालिस्ट जोनाथन श्नाइजर ने पाकिस्तान की इस भूमिका पर गंभीर संदेह जताते हुए पूछा है कि क्या पाकिस्तान वाकई शांति चाहता है या वह सिर्फ चीन के इशारों पर नाच रहा है? जोनाथन श्नाइजर का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति उसे स्वतंत्र फैसले लेने की अनुमति नहीं देती है। पाकिस्तान, चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) और 'डेब्ट-ट्रैप डिप्लोमेसी' में बुरी तरह फंसा हुआ है। श्नाइजर ने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान अमेरिका के साथ नए गठबंधन बनाकर अपनी स्थिति सुधारना चाहता है या वह केवल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के 'माउथपीस' के तौर पर काम कर रहा है।

भारत ने पाकिस्तान में छिपे 23 दुश्मनों को घोषित किया आतंकी, सूची में शामिल हैं ये प्रमुख नाम

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आतंकवाद के खिलाफ भारत सरकार ने एक बड़ा एक्शन लिया है। गृह मंत्रालय ने पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 23 दहशतगर्तों को आतंकवादी घोषित किया है। गृह मंत्रालय ने एक गजट नोटिफिकेशन के जरिए इन 23 नामों की लिस्ट जारी की है।

जैश और लश्कर के 23 दहशतगर्द आतंकवादी घोषित

भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने एक गजट अधिसूचना जारी करते हुए पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े 23 दहशतगर्तों को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (UAPA) के तहत आतंकवादी घोषित किया है। इन सभी 23 नामों को UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल किया गया है और वर्तमान में ये सभी पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में रह रहे हैं।

सूची में शामिल हैं ये प्रमुख आतंकी

सूची में मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक, मुफ्ती मोहम्मद असगर खान और हाफिज अब्दुल शकूर जैसे नाम शामिल हैं, जो 2016 और 2022 में सुरक्षा बलों पर हुए हमले से जुड़े बताए हैं। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े अब्दुल रऊफ और हाफिज खालिद वलीद को हाफिज सईद के करीबी सहयोगी के रूप में बताया गया है। चौंकाने वाला नाम मोहम्मद शहीद फैसल उर्फ उस्ताद उर्फ जाकिर का है। उसका स्थायी पता बेंगलुरु का है, जबकि वह रावलपिंडी में रह रहा है।

भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप

गृह मंत्रालय के अनुसार सूची में शामिल सभी 23 लोग जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद-दावा, द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF), अल-कायदा और ISIS से जुड़े नेटवर्क के जरिए भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। इन पर आतंकियों को ट्रेनिंग देने, लॉन्चिंग पैड चलाने, फंडिंग जुटाने, हथियार उपलब्ध कराने, ड्रोन के जरिए हथियार भेजने और जम्मू-कश्मीर सहित भारत के विभिन्न हिस्सों में आतंकी साजिशों को अंजाम देने का आरोप है। सरकार का कहना है कि इन गतिविधियों के पर्याप्त इनपुट और जांच के आधार पर इन्हें UAPA के तहत व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किया गया है।

UN में भारत ने फिर पाकिस्‍तान को लताड़ा, कश्मीर के जिक्र पर सीखा दिया सबक

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एरिया फॉर्मूला बैठक में भारत ने पाकिस्तान को फिर कड़ा जवाब दिया है। भारत ने जम्मू-कश्मीर पर की गई पाकिस्तान की टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और यह भारत का आंतरिक मामला है।

जम्मू-कश्मीर पर पाक की टिप्पणी को बताया गैर जरूरी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चीन और पाकिस्तान की ओर से आयोजित एरिया फॉर्मूला बैठक के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया। भारतीय राजदूत ने हरीश पर्वतनेनी कहा, "यह हैरानी की बात है कि सह अध्यक्ष होने के बावजूद पाकिस्तान ने एरिया फॉर्मूला बैठक का राजनीतिक करण किया और भारत के जम्मू-कश्मीर इलाके पर गैर जरूरी टिप्पणियां कीं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि "केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का मामला पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। यह हमेशा से ऐसा ही रहा है, अभी भी है और आगे भी ऐसा ही रहेगा।"

यूएन को भी दिखाया आईना

भारत ने इस मौके पर सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों और मध्यस्थता तंत्रों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए। पी. हरीश ने कहा कि समय के साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां बदलती हैं, ऐसे में सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और मध्यस्थता ढांचों की भी समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्‍टर-6 के तहत बनाए गए मध्यस्थता तंत्र स्थायी नहीं माने जा सकते और बदलते वैश्विक परिदृश्य में उनकी उपयोगिता का आकलन जरूरी है।

संयुक्त राष्ट्र की चौखट पर पहुंचा पाकिस्तान, सिंधु जल समझौते के निलंबन UNSC के सामने लगाई गुहार

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सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का दरवाजा खटखटाया है। पाकिस्तान ने भारत पर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया है। पाकिस्तान चाहता है कि UNSC इस मामले में दखल दे और भारत को रोके।

इशार डार ने सुरक्षा परिषद को लिखा पत्र

पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशार डार ने सुरक्षा परिषद को एक पत्र लिखा है। इसमें भारत से आने वाली नदियों के बहाव को बदलने की भारत की कोशिशों पर ध्यान देने की अपील की गई है। डार ने चिनाब नदी पर बन रही भारत की दो परियोजनाओं को जिक्र किया है और इसे पाकिस्तान की जल, खाद्य और आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

भारत पर जल प्रवाह बदलने की कोशिश का आरोप

पाकिस्तान का आरोप है कि भारत चिनाब नदी प्रणाली से जुड़ी दो परियोजनाओं के जरिए पश्चिमी नदियों के जल प्रवाह और उपयोग के स्थापित ढांचे को बदलने की कोशिश कर रहा है। इस्लामाबाद का कहना है कि ऐसी गतिविधियां सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं और इनसे क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

भारत को जवाबदेह ठहराने की अपील

पाकिस्तानी राजदूत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सुरक्षा परिषद से इस मामले का संज्ञान लेने और भारत को कथित उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की गई है। साथ ही उन्होंने दक्षिण एशिया की स्थिति और जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया।

बता दें कि अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सख्त कदम उठाते हुए पाकिस्तान के साथ 65 साल से चली आ रही सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। इसके बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है।

सत्यांजल पांडे होंगे इस्लामाबाद में भारत के अगले कार्यवाहक उच्चायुक्त, जानें क्यों अहम है ये नियुक्ति?

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भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते बेहद तल्ख बने हुए हैं। इस बीच सरकार ने वरिष्ठ राजनयिक डॉ. सत्यांजल पांडेय को पाकिस्तान में भारत के दूतावास का प्रभारी नियुक्त किया है. डिप्‍लोमेटिक सूत्रों के अनुसर पाकिस्तान ने उनकी नियुक्ति को स्वीकार कर लिया है और वे अगले कुछ सप्ताह में इस्लामाबाद पहुंचकर नई जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।

दक्षिण एशिया के मामलों की अच्छी समझ वाले अधिकारी

सत्याजंल फिलहाल श्रीलंका में भारत के उप उच्चायुक्त हैं। विदेश सेवा में लंबे अनुभव वाले डॉ. पांडेय को दक्षिण एशिया के मामलों की अच्छी समझ रखने वाले अधिकारियों में गिना जाता है। उन्होंने अपने राजनयिक करियर के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं और पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत बनाने में योगदान दिया है।

पाकिस्तान में उनकी नई भूमिका क्यों अहम?

जानकारों का मानना है कि श्रीलंका में उनकी तैनाती के दौरान उन्हें दक्षिण एशियाई राजनीतिक और रणनीतिक परिस्थितियों को करीब से समझने का अवसर मिला। यही अनुभव पाकिस्तान में उनकी नई भूमिका में भी उपयोगी साबित हो सकता है

गीतिका श्रीवास्तव की जगह लेंगे पांडे

सत्याजंल पांडे इस्लामाबाद में गीतिका श्रीवास्तव की जगह लेंगे, जिन्हें अगस्त 2023 में इस पद पर नियुक्त किया गया था। गीतिका ने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है।

पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक, 13 लोगों की हुई मौत

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पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान में घातक हमले किए हैं। दोनों देशों की सीमा के पास अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हमलों में कम से कम 13 लोग मारे गए हैं। इन हमलों में जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें ज्यादातर बच्चे शामिल हैं।

हमलों में 11 बच्चों की मौत

अफगानिस्तान सरकार के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखकर जानकारी दी है कि पाकिस्तानी सेना ने कल रात एक बार फिर अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया और कुनार, खोस्त तथा पकतिका प्रांतों में आम नागरिकों के घरों पर बमबारी की। इन हमलों में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई।

अफगानिस्तान ने कहा- नागरिकों को निशाना बनाने वाली कार्रवाई

खोस्त प्रांत के एक अधिकारी ने बताया कि स्पेरा जिले में एक घर पर हुए हमले में 9 लोग मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए। पक्तिका प्रांत में एक अलग हमले में 3 लोगों की मौत हुई। अफगानिस्तान के इन आरोपों पर पाकिस्तान की सेना ने अभी तक इन हमलों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

पाकिस्तानी हमले की निंदा

तालिबान सरकार ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे नागरिकों को निशाना बनाने वाली कार्रवाई बताया है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन हमलों को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या पुष्टि नहीं की गई है। पाकिस्तान का कहना है कि 'पाकिस्तानी तालिबान' (TTP) के आतंकवादी अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में बड़े आत्मघाती और आतंकी हमले कर रहे हैं। पाकिस्तान लंबे समय से अफगान तालिबान से इन आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है जिसे काबुल खारिज करता रहा है।

पिछले कई महीनों से सीमा पर तनाव

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले कई महीनों से सीमा पर तनाव बना हुआ है। फरवरी के अंत से दोनों देशों के बीच लगातार संघर्ष और जवाबी कार्रवाइयां हो रही हैं, जिनमें सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल के पहले तीन महीनों में अफगानिस्तान में हुए संघर्ष में 372 आम नागरिक मारे गए और 397 घायल हुए थे।

अब्राहम' समझौते पर पाकिस्तान ने ट्रंप की अपील ठुकराई, शहबाज के रक्षामंत्री ने दिखाई आंख

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पाकिस्तान ने अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने और इजरायल को औपचारिक मान्यता देने के अमेरिकी दबाव को पूरी तरह ठुकरा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुस्लिम देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की मांग की थी। जिसके बाद पाकिस्तान ने अब्राहम समझौते में शामिल होने से इनकार कर दिया। रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कहा कि इस्लामाबाद किसी भी ऐसे समझौते का समर्थन नहीं करेगा जो देश की मौलिक विचारधाराओं के खिलाफ हो।

ट्रंप की मांग पाक को किसी भी हाल में मंजूर नहीं

दरअसल, सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत मुस्लिम बहुल देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने और इजराइल को औपचारिक रूप से मान्यता देने की मांग की थी। जिसके बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने समा टीवी के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि हम इजरायल के साथ जाने का विकल्प नहीं चुन सकते हैं। यह अपनी मूल विचारधारा से समझौता करने जैसा होगा, जो किसी भी हाल में मंजूर नहीं है।

ख्वाजा आसिफ बोले- एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं

आसिफ ने कहा कि इजरायल को लेकर पाकिस्तान का बीते करीब आठ दशक से एक मजबूत रुख रहा है, जिसे छोड़कर वह 'अब्राहम समझौते' में शामिल नहीं हो सकता। आप उन लोगों (इजरायलियों) के साथ कैसे बैठ सकते हैं, जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता है। बता दें कि पाकिस्तान ने अपने 78 साल के इतिहास में कभी-भी इजरायल को मान्यता नहीं दी है।

डोनाल्ड ट्रंप क्या चाहते हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की और कतर जैसे देशों को ईरान समझौते का हिस्सा बनने के लिए अब्राहम अकॉर्ड्स पर दस्तखत करने को कहा है। ट्रंप ने मुस्लिम देशों के नेताओं से कहा कि ईरान में शांति के लिए उनको अब्राहम एकॉर्ड या अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करना चाहिए। उनको इजरायल से रिश्ते कायम करने चाहिए।

क्या है अब्राहम समझौता?

अब्राहम एकॉर्ड या अब्राहम समझौता अमेरिका की मध्यस्थता से 2020 में शुरू किया गया था। यह इजरायल और अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को सामान्य बनाने के लिए शुरू किया गया था। यह एक ऐसी दुविधा है जिससे ज्यादातर मुस्लिम देश दूर ही रहना चाहते हैं। कई मुस्लिम देशों की मुसीबत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि ट्रंप ने कहा है कि अगर इस पहल का समर्थन नहीं किया गया तो अमेरिका के साथ संबंधों पर असर पड़ सकता है। अब्राहम समझौते पर सबसे पहले 15 सितंबर, 2020 को इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल-बहरीन के बीच हस्ताक्षर हुए थे। बाद में इस ढांचे का विस्तार करके इसमें मोरक्को और सूडान को भी शामिल किया गया। 2025 में औपचारिक रूप से इस समूह में कज़ाकिस्तान भी शामिल हुआ।

पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान को सत्ता से हटाने में अमेरिका का हाथ? सामने आ गई सीक्रेट फाइल

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इमरान खान को सत्ता से हटाने को लेकर विदेशी साजिश वाले आरोप फिर से चर्चा में हैं। पाकिस्तान की राजनीति में सालों से चर्चा में रहा एक खुफिया मैसेज यानी “साइफर” अब फिर सुर्खियों में है। अब इस कथित सीक्रेट दस्तावेज की तस्वीरें सामने आई हैं। इससे पता चला है कि इमरान खान के वो दावे सौ फीसदी सही थे जिसमें उन्होंने साइफर का हवाला देते हुए अमेरिका पर अपनी सरकार को गिराने का आरोप लगाया था।

इमरान खान के अविश्वास प्रस्ताव में हारने से ठीक पहले हुई थी बैठक

'ड्रॉप साइट' नाम की वेबसाइट ने 'साइफर' नाम का सीक्रेट डॉक्यूमेंट लीक किया है। यह वही सीक्रेट राजनयिक दस्तावेज है, जिसे लेकर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार विदेशी साजिश का आरोप लगाते रहे थे। इस दस्तावेज को 'केबल I-0678' के रूप में पहचाना गया है। इसमें पाकिस्तान के तत्कालीन वाशिंगटन स्थित राजदूत और अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डोनाल्ड लू के बीच हुई एक बैठक का ब्योरा दर्ज है। यह बैठक अप्रैल 2022 में इमरान खान के अविश्वास प्रस्ताव में हारने से ठीक पहले हुई थी।

इमरान खान के जाने के बाद शहबाज बने पाक पीएम

दस्तावेज में कहा गया कि सत्ता परिवर्तन होने पर अमेरिका और यूरोप के साथ पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार संभव होगा। इसमें संकेत दिया गया कि इमरान खान के पद पर बने रहने की स्थिति में पाकिस्तान को कूटनीतिक अलगाव का सामना करना पड़ सकता है। जो बाइडेन उस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति हुआ करते थे। इमरान खान के जाने के बाद शहबाज शरीफ देश के प्रधानमंत्री बने थे।

पाकिस्तान और अमेरिका से संबंध सुधारे

ड्रॉप साइट ने दस्तावेजों के हवाले से बताया है कि इमरान खान की सरकार गिरने के बाद पिछले पांच सालों में अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को एक नया रूप दिया गया और वॉशिंगटन और इस्लामाबाद को आपसी शक-शुबहे के माहौल से निकालकर एक-दूसरे के करीब ला दिया।

इमरान खान बार-बार किया था ये दावा

इमरान खान ने अपनी सत्ता जाने से पहले और संसद में सरकार गिरने के बाद बार-बार यह दावा किया था कि अमेरिका ने उनकी स्वतंत्र विदेश नीति और रूस और चीन के खिलाफ उसके साथ पूरी तरह से न जुड़ने के कारण उन्हें सत्ता से हटाने के लिए पर्दे के पीछे से काम किया। इमरान खान ने पाकिस्तान की वंशवादी राजनीतिक पार्टियों जैसे पाकिस्तान मुस्लिम लीग-N और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी पर भी आरोप लगाया कि वे उनकी सरकार को गिराने के लिए विदेशी ताकतों के साथ मिलकर काम कर रही थीं।

इमरान खान सरकार और अमेरिका के बीच तनाव के कारण

रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान सरकार और अमेरिका के बीच तनाव कई मुद्दों पर बढ़ाः-

1. अफगानिस्तान मुद्दा: अमेरिका चाहता था कि पाकिस्तान अपनी जमीन ड्रोन ऑपरेशन के लिए दे, लेकिन इमरान खान ने साफ इनकार कर दिया था।

2. रूस यात्रा: फरवरी 2022 में इमरान खान रूस पहुंचे और उसी दिन यूक्रेन पर हमला शुरू हुआ। इस मुलाकात ने अमेरिका को नाराज कर दिया। दस्तावेज में यह भी कहा गया कि रूस यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों में ‘दरार’ डाल दी थी।

3. यूएन वोटिंग: पाकिस्तान ने रूस के खिलाफ प्रस्ताव पर वोटिंग से दूरी बनाई, जिससे पश्चिमी देशों की नाराजगी और बढ़ गई।

यूएस-ईरान शांति वार्ताःडील के लिए ट्रंप खुद पहुंच सकते हैं पाकिस्तान

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अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही है। इस बीच खबर आ रही है कि डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान के साथ इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता में समझौता होने की स्थिति में खुद भी शामिल हो सकते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे राउंड की युद्धविराम वार्ता होने की उम्मीद अब काफी बढ़ गई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चर्चा में शामिल एक पाकिस्तानी सूत्र के हवाल से कहा है कि बातचीत के फिर से शुरू करने की दिशा में प्रगति हो रही है। उन्होंने ये भी संकेत दिया है कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता हो जाता है तो या तो खुद डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान आ सकते हैं या फिर ऑनलाइन माध्यम से इसमें शामिल हो सकते हैं।

ट्रंप ने दी बम बरसाने की धमकी

ये खबर ऐसे वक्त में आई है, जब ईरान-अमेरिका वार्ता में लगातार गतिरोध चल रहा है। इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और उन्होंने दावा किया है कि ईरान को समझौता करना ही होगा। उन्होंने अपनी ताजा धमकी में कहा कि अगर ईरान समझौता नहीं करेगा, तो बम बरसेंगे। हालांकि इसके बाद भी ईरान ने अड़ियल रवैया जारी रखा है।

पाकिस्तान के लिए अब तक नहीं रवाना हुआ ईरानी प्रतिनिधिमंडल

ईरान की सरकारी टेलीविजन रिपोर्ट के अनुसार अभी तक कोई भी ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता में भाग लेने के लिए रवाना नहीं हुआ है। यह वार्ता अमेरिका के साथ संभावित शांति वार्ता से जुड़ी बताई जा रही है, जिसे लेकर क्षेत्रीय स्तर पर काफी चर्चा बनी हुई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ओर से फिलहाल किसी भी डेलीगेशन के पाकिस्तान जाने की पुष्टि नहीं की गई है, जिससे इस बैठक को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

इन मामलों पर विवाद बरकरार

-ईरान का परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करे, जबकि तेहरान का कहना है कि किसी भी प्रतिबंध की समयसीमा सीमित होनी चाहिए।

-यूरेनियम भंडार: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान के लगभग 400 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम पर नियंत्रण चाहता है, लेकिन ईरान ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।

-स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: ईरान का कहना है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर प्रतिबंध तब तक जारी रखेगा जब तक अमेरिका अपने प्रतिबंध नहीं हटाता, जबकि अमेरिका का रुख सख्त बना हुआ है।

-जमे हुए आर्थिक संपत्ति: ईरान करीब 20 अरब डॉलर की फ्रीज़्ड संपत्तियों को जारी करने और प्रतिबंधों में राहत की मांग कर रहा है।

-युद्ध क्षतिपूर्ति: तेहरान ने अमेरिका और इस्राइल के हमलों से हुए नुकसान के बदले लगभग 270 अरब डॉलर के मुआवजे की भी मांग उठाई है।

पाक रक्षा मंत्री पर भड़के नेतन्याहू, ऐसा लगाई लताड़ की डिलीट किया पोस्ट, इजरायल को बताया था 'कैंसर'

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मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच पाकिस्तान और इजरायल भिड़ते दिख रहे है। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से ठीक पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक ऐसा बयान दिया जिसके बाद पूरा मामल और गर्म हो गया है।

लेबनान में निर्दोष लोगों की हत्या का आरोप

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर इजरायल को ‘मानवता के लिए अभिशाप’ और ‘कैंसर’ बताया। साथ ही लेबनान में हो रही सैन्य कार्रवाई को ‘नरसंहार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जब इस्लामाबाद में शांति वार्ता की तैयारी चल रही है, उसी समय लेबनान में निर्दोष लोगों की हत्या हो रही है। आसिफ ने आरोप लगाया कि पहले गाजा, फिर ईरान और अब लेबनान में खूनखराबा जारी है।

ख्वाजा आसिफ के जहरीले बयान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को अभिशाप बताते हुए कहा, "जिन लोगों ने कैंसर जैसा देश बनाया है, वे उम्मीद करते हैं कि वो नर्क की आग में जलें।' हालांकि, बाद में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने इजरायल के खिलाफ दिए गए कैंसर वाले बयान समेत उन्हें नर्क में जला देने वाले ट्वीट को डिलीट कर दिया है।

ख्वाजा आसिफ के बयान पर क्या बोले नेतन्याहू ?

इस बयान के बाद इजरायल ने तुरंत कड़ी प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का बयान ‘अत्यंत आपत्तिजनक’ है और किसी भी सरकार के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता, खासकर उस देश के लिए जो खुद को शांति का मध्यस्थ बता रहा है। इसमें कहा गया कि इजरायल के विनाश की मांग घोर आपत्तिजनक है।

इजरायली विदेश मंत्री का पलटवार

इजरायल के विदेश मंत्री गिडियन सार ने भी पाकिस्तान की आलोचना की। उन्होंने कहा, शांति की मध्यस्थता का दावा करने वाली सरकार की ओर से इन खुले तौर पर यहूदी-विरोधी और भड़काऊ आरोपों को बहुत गंभीरता से लेता है। यहूदी राष्ट्र को कैंसर कहना असल में उसे खत्म करने का ही आह्वान करना है। उन्होंने आगे कहा, इजरायल उन आतंकवादियों से अपनी रक्षा करेगा जिन्होंने उसे तबाह करने की कसम खाई है।

ईरान-अमेरिका सीजफायर में पाकिस्तान मध्यस्थ या मोहरा? जानें क्यों उठ रहे सवाल

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अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर हो गया है। इसमें पाकिस्तान की अहम भूमिका सामने आई है, जिसे खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है। लेकिन पाकिस्तान यहां भी अपनी नापाक हरकत से बाज नहीं आया है। ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर को लेकर पाकिस्तान खुद को शांति दूत के रूप में पेश कर रहा है। शांति वार्ता की मेजबानी कर वह अपनी छाती ठोक रहा है। लेकिन, सच्चाई कुछ अलग है।

पाक मात्र एक मैसेंजर

ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक असल में व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान को दबाव डालकर इस्तेमाल किया। इस्लामाबाद कोई न्यूट्रल ब्रोकर नहीं था। वह सिर्फ अमेरिका का सुविधाजनक मैसेंजर बनकर रह गया। रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका ने पाकिस्तान पर जोर डाला कि वह वाशिंगटन का प्रस्ताव तेहरान तक पहुंचाए। पाकिस्तान को सक्रिय भूमिका नहीं दी गई, बल्कि सिर्फ एक चैनल बनाया गया।

यूएस ने पाकिस्तान को ही क्यों चुना?

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका को लगा कि ईरान मुस्लिम पड़ोसी देश के जरिए आने वाले ऑफर को ज्यादा आसानी से मान लेगा। यही वजह थी कि पाकिस्तान को चुना गया।

इजरायल के राजदूत ने भी उठाया सवाल

अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर पर पाकिस्तान खुद की अपनी पीठ थपथपा रहा है। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने भी उसकी मध्यस्थ की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। इजरायली राजदूत रूवेन ने अमेरिका-ईरान के बीच चल रही सीजफायर की बातचीत में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर संदेह जताया है। उन्होने कहा, इजरायल इस्लामाबाद को एक "विश्वसनीय पक्ष" के रूप में नहीं देखता है। रूवेन अजार ने कहा, 'हम पाकिस्तान को एक भरोसेमंद पक्ष के रूप में नहीं देखते हैं. मुझे लगता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने निजी कारणों से पाकिस्तान की मध्यस्थता का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है।

किसके इशारों पर नाच रहा पाक?

वहीं, 'फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज' (FDD) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और अमेरिकी ट्रेजरी के पूर्व एनालिस्ट जोनाथन श्नाइजर ने पाकिस्तान की इस भूमिका पर गंभीर संदेह जताते हुए पूछा है कि क्या पाकिस्तान वाकई शांति चाहता है या वह सिर्फ चीन के इशारों पर नाच रहा है? जोनाथन श्नाइजर का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति उसे स्वतंत्र फैसले लेने की अनुमति नहीं देती है। पाकिस्तान, चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) और 'डेब्ट-ट्रैप डिप्लोमेसी' में बुरी तरह फंसा हुआ है। श्नाइजर ने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान अमेरिका के साथ नए गठबंधन बनाकर अपनी स्थिति सुधारना चाहता है या वह केवल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के 'माउथपीस' के तौर पर काम कर रहा है।