लोकसभा स्पीकर के बाद अब सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी, एकजुट हुआ विपक्ष

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लोक सभा अध्‍यक्ष के बाद विपक्षी दल देश के मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एकजुट होते दिख रहे हैं। संभावना है कि तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट विपक्ष गुरुवार को सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देगा। मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सांसदों ने हस्‍ताक्षर भी कर दिया है। उनकी तैयारी संसद के दोनों हाउस के सचिवालयों में नो‍टिस जमा करने की है।

हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव लाने वाले नोटिस को गुरुवार यानी आज संसद से दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में सौंपा जा सकता है। प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस पर जरूरी हस्ताक्षर की प्रक्रिया बुधवार को पूरी कर ली गई। बुधवार रात तक लोकसभा के लिए करीब 120 और राज्यसभा के लिए लगभग 60 सांसदों के साइन हो चुके थे। नियम के अनुसार लोकसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के नोटिस के लिए कम से कम 100 सांसदों के साइन जरूरी हैं।

सीईसी के खिलाफ टीएमसी को मिला कांग्रेस-सपा का साथ

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस मुहिम पर बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में हुई बैठक में सहमति बनी। बैठक में राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तृणमूल के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद नोटिस देने के लिए जरूरी सांसदों के हस्ताक्षर कराए गए। इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियों के साथ-साथ गठबंधन से बाहर आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी हस्ताक्षर किये हैं।

क्या है मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया?

कानून के मुताबिक, सीईसी को हटाने के लिए वही प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनुशंसा के बिना अन्य निर्वाचन आयुक्तों को पद से नहीं हटाया जा सकता। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के अनुसार, किसी भी सदन में, जज को पद से हटाने का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाने के बाद, (लोकसभा) अध्यक्ष या (राज्यसभा) सभापति, जैसा भी मामला हो, तीन सदस्यीय समिति का गठन करेंगे। जो उन आधारों की जांच करेगी, जिन पर पद से उन्हें हटाने की मांग की गई है। समिति में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) या शीर्ष न्यायालय के जज, 25 उच्च न्यायालयों में से किसी एक के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित न्यायविद होते हैं। नियम के अनुसार, समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद, इसे सदन में पेश किया जाएगा और पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हो जाएगी। हालांकि, सीईसी को अपना बचाव करने का अधिकार होता है।

फतेहपुर में बंद कमरे में मां-बेटे और देवर की रहस्यमयी मौत, सुसाइड नोट मिलने से कर्ज का एंगल आया सामने
फतेहपुर। फतेहपुर जिले के Lucknow Bypass Road स्थित एक मकान में मां-बेटे और देवर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में सनसनी फैल गई। घटना Sadar Kotwali क्षेत्र की है, जहां सुशील श्रीवास्तव के मकान में रहने वाले परिवार के तीन सदस्यों के शव बंद कमरे में मिले। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।जानकारी के मुताबिक कमरे में मां और बेटे के शव खून से लथपथ हालत में मिले, जबकि कुछ दूरी पर महिला का देवर गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़ा था। उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी भी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई।

व्यापार में घाटे के कारण उस पर करीब 50 लाख का कर्ज हो गया था

बताया जा रहा है कि परिवार मूल रूप से मुराइनटोला का रहने वाला था और कुछ साल पहले ही लखनऊ बाईपास क्षेत्र में मकान बनाकर रहने लगा था। परिवार का इकलौता बेटा अमर श्रीवास्तव सरल स्वभाव का था और कई अखबारों की एजेंसी का काम कर चुका था। हालांकि व्यापार में घाटे के कारण उस पर करीब 50 लाख रुपये का कर्ज हो गया था। कर्ज के दबाव में उसका घर भी बिक गया था और लंबे समय तक परिवार कर्जदारों से बचने के लिए छिपकर रह रहा था।

पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला

परिजनों के अनुसार अमर हाल के दिनों में लोगों से रुपये उधार मांग रहा था। उसने घटना से एक दिन पहले अपने एक दोस्त से 10 हजार रुपये उधार लिए थे और होली के आसपास अपने बहनोई से भी 10 हजार रुपये लिए थे। अमर के बहनोई ने तीनों की मौत को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है।पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें तीन लोगों के नाम का जिक्र करते हुए आर्थिक तंगी और कर्ज से परेशान होने की बात लिखी गई है। सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस उन लोगों की तलाश में जुट गई है। एसओजी और इंटेलिजेंस विंग की टीम भी मामले की जांच कर रही है।मौके से चाय के झूठे गिलास और ब्लेड का पैकेट भी बरामद हुआ है।

तीनों ने पहले चाय में सल्फास मिलाकर पीया

आशंका जताई जा रही है कि तीनों ने पहले चाय में सल्फास मिलाकर पीया और बाद में तड़पने पर ब्लेड से खुद पर वार किया। हालांकि यह भी संभावना जताई जा रही है कि तीनों के बीच आपसी विवाद के बाद हमला हुआ हो, जिसमें देवर ने मां-बेटे की हत्या कर खुद की जान ले ली हो।फिलहाल पुलिस दो पहलुओं—हत्या और सामूहिक आत्महत्या—दोनों को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मौत जहर से हुई या ब्लेड से हुए हमले से। सुसाइड नोट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।
रिश्वत आरोप में निलंबित IAS अभिषेक प्रकाश की होगी बहाली, 14 मार्च के बाद से प्रभावी मानी जाएगी
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने निलंबित आईएएस अधिकारी Abhishek Prakash को बहाल करने का निर्णय लिया है। शासन के सूत्रों के मुताबिक उनकी बहाली 14 मार्च के बाद से प्रभावी मानी जाएगी। हालांकि नियुक्ति विभाग की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

2006 बैच के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश इससे पहले निवेश प्रोत्साहन एजेंसी Invest UP के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर तैनात थे। उन पर एक सोलर कंपनी से प्रोजेक्ट मंजूरी के बदले रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगे थे। इन आरोपों के बाद प्रदेश सरकार ने 20 मार्च 2025 को उन्हें निलंबित कर दिया था।

इस मामले में फरवरी 2026 में Lucknow Bench of Allahabad High Court ने सुनवाई करते हुए साक्ष्य के अभाव में उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट को निरस्त कर दिया था। अदालत के इस फैसले के बाद उनकी बहाली का रास्ता साफ हो गया।

शासन के सूत्रों के अनुसार निलंबन की अवधि एक वर्ष पूरी होने से पहले इस मामले में रिपोर्ट केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय को भेजी जानी है। इसी प्रक्रिया के तहत उनकी बहाली को 14 मार्च के बाद प्रभावी माना जाएगा।

हालांकि, बहाली के बाद उन्हें किस विभाग या जिम्मेदारी पर तैनात किया जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है। शासन स्तर पर इस संबंध में विचार-विमर्श जारी है।
31 वर्षीय मरीज को सुप्रीम कोर्ट से निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति, 13 साल से कोमा में है युवक

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सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को अपने एक फैसले के तहत 31 साल के आदमी को पैसिव यूथेनेशिया की इजाजत दे दी, जो करीब 13 साल से कोमा में है। सुप्रीम कोर्ट ने 31 साल के हरीण राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु यानी पैसिव यूथेनेशिया की इजाजत दी है।

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा की जीवनरक्षक प्रणाली यानी आर्टिफिशियल लाइफ सपोर्ट हटाने की अनुमति दी। यह व्यक्ति 13 वर्ष पहले एक इमारत से गिरने के बाद से स्थायी और अपरिवर्तनीय विजिटेटिव अवस्था में था। अदालत ने यह आदेश उसके पिता द्वारा दायर एक मिसलेनियस आवेदन पर दिया, जिसमें उन्होंने अपने बेटे से सभी जीवनरक्षक उपचार हटाने की अनुमति मांगी थी।

‘ईश्वर नहीं पूछता कि कौन जीना चाहता है’

इच्छामृत्यु की मांग वाली याचिका पर जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा, “ईश्वर किसी मनुष्य से यह नहीं पूछता कि वह जीवन को स्वीकार करता है या नहीं, जीवन उसे लेना ही पड़ता है, ये Henry David Thoreau के शब्द हैं, जिनका विशेष महत्व तब उभरकर सामने आता है जब अदालतों के समक्ष यह सवाल आता है कि क्या किसी व्यक्ति को मरने का विकल्प चुनने का अधिकार है। इसी संदर्भ में विलियम शेक्सपीयर का प्रसिद्ध कथन ‘To be, or not to be ‘ यानी ‘जीना या न जीना’ भी इस दार्शनिक और विधिक विमर्श को गहराई प्रदान करता है।”

पिछले 13 वर्षों में स्थिति में कोई सुधार नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “हरीश राणा, जो वर्तमान में 32 वर्ष के हैं, कभी एक उज्ज्वल और प्रतिभाशाली युवा थे। वे अपने पेइंग गेस्ट आवास की चौथी मंजिल से गिरने के बाद एक दुखद दुर्घटना का शिकार हो गए। इस दुर्घटना में उनके मस्तिष्क को गंभीर चोट लगी, जिससे वे स्थायी विजिटेटिव अवस्था (PVS) और 100% क्वाड्रिप्लेजिया (चारों अंगों का लकवा) की स्थिति में चले गए… पिछले 13 वर्षों में उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।”

‘मरीज को दी जा रही CAN को बंद कर देना चाहिए’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा “वह केवल क्लिनिकली एडमिनिस्टरड न्यूट्रिशन (CAN) के सहारे जीवित थे, जो सर्जरी द्वारा लगाए गए PEG ट्यूब के माध्यम से दिया जा रहा था। अदालत ने कहा कि CAN भी एक चिकित्सीय उपचार है और इसे प्राथमिक और द्वितीयक मेडिकल बोर्ड के सर्वोत्तम निर्णय के आधार पर बंद किया जा सकता है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि “उपचार जारी रखने से केवल उनकी जैविक जीवन प्रक्रिया ही बढ़ रही थी, लेकिन किसी भी प्रकार का चिकित्सीय सुधार नहीं हो रहा था। अदालत ने पाया कि कि मरीज के माता-पिता, प्राथमिक मेडिकल बोर्ड और दूसरी मेडिकल बोर्ड सभी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि मरीज को दी जा रही CAN को बंद कर देना चाहिए, क्योंकि यह मरीज के सर्वोत्तम हित में नहीं है।”

Most Meta Ads campaigns fail before they even start.

Not because of budget… but because people jump straight into launching without a clear system.

After running and scaling lakhs in ad spend, here’s the exact 4-Zone framework I follow every single time:

1️. Strategy Zone → Define objectives, study competitors, map the funnel, align offer + audience. No guesswork.

2️. Creative Zone → Build scroll-stopping hooks, clean visuals, sync message + design. Thumb-stop rate is king here.

3️. Launch Zone → Set proper campaign structure (testing vs scaling), choose bidding, launch controlled budget while the algorithm learns.

4️. Optimization Zone → Monitor daily, pause underperformers, scale winners, feed learnings back into strategy.

स्पीकर के खिलाफ मजबूरी में लाना पड़ा प्रस्ताव, लेकिन हमारा धर्म संसद की मर्यादा बचाना, अविश्वास प्रस्ताव पर बोले गौरव गोगोई

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विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक संकल्प मंगलवार को सदन में पेश किया। इस पर चर्चा के दौरान सदन में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने अपनी बात रखी। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अपने भाषण के दौरान सरकार पर बड़े आरोप लगाए। गौरव ने कहा कि स्पीकर को निष्पक्ष होना चाहिए। उसके लिए कोई पक्ष या विपक्ष नहीं हो। लेकिन स्पीकर निष्पक्ष नहीं है।

माइक भी अस्त्र बन गया है-गोगोई

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा कि सदन के अंदर पहले भी तीन बार अविश्वास प्रस्ताव आया है। जब यह हुआ तब डिप्टी स्पीकर चेयर पर थे। आज विपक्ष के 200 सांसद होने के बावजूद यहां डिप्टी स्पीकर नहीं है। देश को पता चलना चाहिए कि सदन कैसे चल रहा है। माइक भी अस्त्र बन गया है। यह सुविधा के अनुसार सत्ता पक्ष को दिया जाता है। जबकि विपक्ष के नेता को बोलने ही नहीं दिया जाता। संसद के नियमों का उल्लंघन हो रहा है।

स्पीकर पर यह निजी हमला नहीं-गोगोई

गोगोई ने कहा, यह रेजोलयूशन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। हमें खुशी नहीं है कि हम इसे लाए। क्योंकि ओम बिरला का हर किसी के साथ निजी तौर पर बहुत अच्छा है। लेकिन हम मजबूर हैं कि हमें यह प्रस्ताव लाना पड़ रहा है। लेकिन हमारा धर्म है संसद की मर्यादा को बचाना। क्योंकि हर सदस्य का कर्तव्य है कि संसद की गरिमा मर्यादा कानून को बचाए। यह निजी हमला नहीं है। देश के लोगों का विश्वास लोकतंत्र में कायम रहे इसलिए हम अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं।

गोगोई ने कहा-आज देश का नेतृत्व कमजोर है

कांग्रेस नेता ने कहा, फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जब नेता प्रतिपक्ष बोलने के लिए खड़े हुए तब 20 बार व्यवधान पैदा किया गया। यह सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि वह कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाना चाहते थे। उन्होंने कहा, जब भारत की सीमा पर पड़ोसी देश के टैंक आ रहे थे तो सेना राजनीतिक नेतृत्व की तरफ देखा रही थी, लेकिन उस समय देश के मुखिया कहते हैं कि जो उचित लगे वो कर लो। उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश का नेतृत्व कमजोर है।

शरद पवार, अठावले और सिंघवी समेत 26 नेता निर्विरोध पहुंचे राज्यसभा, अब 11 सीटों पर मुकाबला

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दस राज्यों की 37 सीटों के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव में सात राज्यों के 26 उम्मीदवार बिना मुकाबले के ही निर्वाचित हो गए हैं। इनमें एनसीपी (शरद) प्रमुख शरद पवार, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। अबबिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर मुकाबला होना तय है। इन राज्यों में अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में होने के कारण चुनाव कराया जाएगा।

इन राज्यों में उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए

महाराष्ट्र (7)

• शरद पवार (एनसीपी)

• रामदास आठवले (आरपीआई-आठवले)

• विनोद तावड़े (बीजेपी)

• रामराव वडुकुटे (बीजेपी)

• माया इवनाते (बीजेपी)

• ज्योति वाघमारे (शिवसेना -शिंदे)

• पार्थ पवार (एनसीपी)

तमिलनाडु (6)

• तिरुची शिवा (डीएमके)

• जे कॉन्स्टेंटाइन रविंद्रन (डीएमके)

• एम थंबीदुरई (एआईएडीएमके)

• अंबुमणि रामदास (पीएमके)

• एम क्रिस्टोफर तिलक (कांग्रेस)

• एल के सुदीश (डीएमडीके)

पश्चिम बंगाल (5)

• राहुल सिन्हा (बीजेपी)

• बाबुल सुप्रियो (टीएमसी)

• पूर्व डीजीपी राजीव कुमार (टीएमसी)

• सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी (टीएमसी)

• कोएल मलिक (टीएमसी)

असम (3)

• जोगेन मोहन (भाजपा)

• तेरोस गोवाला (भाजपा)

• प्रमोद बोरो (यूपीपीएल)

तेलंगाना (2)

• अभिषेक मनु सिंघवी (कांग्रेस)

• वेम नरेंद्र रेड्डी (कांग्रेस)

छत्तीसगढ़ (2)

• लक्ष्मी वर्मा (भाजपा)

• फूलो देवी नेताम (कांग्रेस)

हिमाचल प्रदेश (1)

• अनुराग शर्मा (कांग्रेस)

किन राज्यों की कितनी सीटों पर होगा चुनाव?

37 में से 26 निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद अब 11 सीटों पर चुनाव होगा। इन सीटों पर 14 प्रत्याशी मैदान में हैं। बिहार की 5, ओडिशा की 4 और हरियाणा की 2 सीटों पर वोटिंग होगी। इन सीटों पर 16 मार्च को मतदान किया जाएगा।

सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की पांच सीटों की

बाकी बचे सीटों में सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की पांच सीटों की हैं। दरअसल बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन चुनावों में राज्यसभा के लिए चुने जाने की संभावना है। बिहार की पांच सीटों पर 6 उम्मीदवार मैदान में हैं। पांचवीं सीट पर आरएलएम अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और आरजेडी के एडी सिंह के बीच टक्कर होगी। वहीं बिहार विधानसभा में विधायकों के गणित के हिसाब से सीएम नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना तय है। वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का राज्यसभा जाना भी सुनिश्चित है। इसके अलावा जेडीयू के रामनाथ ठाकुर और बीजेपी के शिवेश कुमार का भी राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है।

शराब घोटाला केस में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

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दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से जवाब मांगा है। सीबीआई की याचिका पर ये जवाब मांगा गया है। हाई कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया समेत 23 अन्य लोगों को अधीनस्थ अदालत की ओर से आरोप मुक्त किये जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सोमवार को आरोपियों से उनका पक्ष बताने को कहा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखी दलीलें

दिल्ली शराब घोटाला केस की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने हुई। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने राउज एवेन्यू कोर्ट को इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की सुनवाई तब तक टालने का भी निर्देश दिया, जब तक कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर फैसला नहीं कर लिया जाता।

सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने क्या तर्क दिया?

इस दौरान सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें रखीं। मेहता ने तर्क दिया कि आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और सिसोदिया को आरोप मुक्त करने का निचली अदालत का आदेश अनुचित था और आपराधिक कानून को ही उलट देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब नीति का मामला सबसे बड़े घोटालों में से एक था और भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण था। मेहता ने दावा किया कि निचली अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य के पक्ष में बिना सुनवाई के आरोप मुक्त करने का आदेश सुना दिया।

16 मार्च को अगली सुनवाई

वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप मुक्त किये जाने के विरूद्ध सीबीआई की याचिका पर सोमवार को आरोपियों से उनका पक्ष बताने को कहा। याचिका पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 16 मार्च तय की।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोपियों को किया था बरी

बता दें कि राउज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को आबकारी नीति मामले में 23 अन्य लोगों के साथ बरी कर दिया था। केजरीवाल और सिसोदिया को महीनों जेल में रहने के बाद बरी कर दिया गया था। कोर्ट से बरी होने पर आम आदमी पार्टी और इंडिया गठबंधन ने बीजेपी पर राजनीतिक लाभ के लिए केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। अरविंद केजरीवाल का आरोप था कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए बीजेपी ने उनके खिलाफ साजिश रची थी। सीबीआई ने राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

Women in Technology: HIC Global Solutions Celebrates Its Team on International Women’s Day

The technology industry continues to evolve rapidly, and women professionals are playing an increasingly important role in shaping its future. Recognizing this contribution, HIC Global Solutions celebrated International Women’s Day 2026 by dedicating the day to appreciating the women who drive the company’s innovation and growth.

The company temporarily paused regular work operations to organize a special outing and appreciation initiative for its women employees. The event aimed to create a meaningful moment of recognition while allowing team members to relax and celebrate together.

A Unique Approach to Corporate Celebrations

Rather than hosting a traditional office event, HIC Global Solutions organized a movie outing for its women employees. The initiative gave participants an opportunity to step away from deadlines and enjoy time with colleagues in a more relaxed environment.

Along with the outing, employees received personalized appreciation notes, flowers, chocolates, and internal recognition messages celebrating their contributions to the organization.

These thoughtful gestures reflected the company’s commitment to creating a supportive workplace culture.

Women Powering the Company’s Growth

Women professionals at HIC Global Solutions contribute across key areas that are essential for delivering technology solutions to clients.

Their work includes responsibilities such as:

Developing software applications

Designing system architectures

Managing client relationships

Leading project delivery

Supporting operational processes

This diverse involvement demonstrates how women play a central role in shaping the company’s success.

Leadership Appreciation

CEO and Co-founder Piyush Singhal highlighted the importance of acknowledging the women who help keep projects running smoothly and contribute innovative ideas.

He noted that many successful solutions delivered by the company are the result of collaboration, leadership, and problem-solving efforts from women across teams.

Taking time to celebrate these contributions reinforces the organization’s culture of respect and recognition.

Employee Feedback

Women employees who participated in the celebration described it as a refreshing break from their daily responsibilities.

The initiative helped strengthen team connections and provided an opportunity for colleagues to celebrate their shared achievements.

For many employees, being appreciated for their ongoing contributions—not just on Women’s Day—made the experience especially meaningful.

Building a More Inclusive Technology Industry

HIC Global Solutions continues to emphasize the importance of diversity and inclusion within its workforce.

The company is committed to creating opportunities that support women professionals through:

Training and skill development

Leadership mentoring

Fair promotion pathways

Inclusive hiring practices

These initiatives aim to increase representation of women in technology and leadership roles within the organization.

Looking Ahead

As technology companies grow and expand globally, building inclusive workplaces becomes increasingly important. By celebrating its women employees and investing in their professional growth, HIC Global Solutions demonstrates how organizations can support talent while strengthening their culture.

The company’s Women’s Day initiative highlights a simple but powerful message: organizations thrive when the people behind their innovation feel valued and supported.

About HIC Global Solutions

HIC Global Solutions is a Salesforce consulting and development firm that delivers enterprise technology solutions, digital transformation strategies, and managed services.

The company also develops AppExchange solutions including Docs Made Easy, Sign Made Easy, and QB Sync Made Easy, helping businesses streamline document management, e-signature processes, and accounting integrations.

बलिया: TET अनिवार्यता के खिलाफ(JTFI) शिक्षक संगठनों की एकजुट हुंकार, 9-15 मार्च तक पोस्टकार्ड-ईमेल अभियान का ऐलान
संजीव सिंह बलिया, 8 मार्च 2026: अखिल भारतीय शिक्षक महासंघ (JTFI) के तत्वावधान में विशिष्ट बीटीसी के संरक्षक भैया अरुण सिंह के नेतृत्व में जनपद बलिया में TET अनिवार्यता के विरोध में घटक संगठनों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में प्रमुख शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर एकजुट होकर आगामी कार्यक्रमों को सफल बनाने का संकल्प लिया।बैठक के प्रमुख बिंदु:प्राथमिक शिक्षक संघ (अजय सिंह, अध्यक्ष), अटेवा (समीर कुमार पांडेय, जिला संयोजक), विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन (घनश्याम चौबे, अध्यक्ष), राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (राजेश सिंह, जिला संयोजक), TSCT (सतीश सिंह, अध्यक्ष), प्राथमिक शिक्षक संघ 1160 (सतेंद्र राय, अध्यक्ष), माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट (लाल साहब यादव), शिक्षा मित्र संघ (पंकज सिंह, अध्यक्ष), प्रा शि संघ पंजीकृत 1160 (निर्भय नारायण सिंह), एसटी/एससी बेसिक संघ (अंजनी कुमार मुकुल, अध्यक्ष) समेत अन्य संगठनों ने भागीदारी की।उपस्थित पदाधिकारियों ने नियुक्ति के समय मानकों पर खरे उतरे शिक्षकों के भविष्य को 'अंधेरे में धकेलने' के खिलाफ आवाज बुलंद की।9 से 15 मार्च तक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष को पोस्टकार्ड, ईमेल और ट्विटर अभियान चलाने पर जोर दिया गया।अन्य संगठनों से एकजुटता का आह्वान किया गया।उपस्थित प्रमुख प्रतिनिधि: विनय राय (वरिष्ठ उपाध्यक्ष), गोपाल जी पाठक, इरफान अहमद (जिला उपाध्यक्ष), नित्यानंद पांडेय (कोषाध्यक्ष), अनिल सिंह (ब्लॉक अध्यक्ष, चिलकहर), राजेश सिंह (अध्यक्ष, बांसडीह), धर्मेंद्र जी आदि।शिक्षक एकता जिंदाबाद! लड़ेंगे और जीतेंगे। #NoTetBeforeRteActसंजीव कुमार सिंह (जिला मीडिया प्रभारी, JTFI, अटेवा)
लोकसभा स्पीकर के बाद अब सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी, एकजुट हुआ विपक्ष

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लोक सभा अध्‍यक्ष के बाद विपक्षी दल देश के मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एकजुट होते दिख रहे हैं। संभावना है कि तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट विपक्ष गुरुवार को सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देगा। मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सांसदों ने हस्‍ताक्षर भी कर दिया है। उनकी तैयारी संसद के दोनों हाउस के सचिवालयों में नो‍टिस जमा करने की है।

हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव लाने वाले नोटिस को गुरुवार यानी आज संसद से दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में सौंपा जा सकता है। प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस पर जरूरी हस्ताक्षर की प्रक्रिया बुधवार को पूरी कर ली गई। बुधवार रात तक लोकसभा के लिए करीब 120 और राज्यसभा के लिए लगभग 60 सांसदों के साइन हो चुके थे। नियम के अनुसार लोकसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के नोटिस के लिए कम से कम 100 सांसदों के साइन जरूरी हैं।

सीईसी के खिलाफ टीएमसी को मिला कांग्रेस-सपा का साथ

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस मुहिम पर बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में हुई बैठक में सहमति बनी। बैठक में राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तृणमूल के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद नोटिस देने के लिए जरूरी सांसदों के हस्ताक्षर कराए गए। इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियों के साथ-साथ गठबंधन से बाहर आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी हस्ताक्षर किये हैं।

क्या है मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया?

कानून के मुताबिक, सीईसी को हटाने के लिए वही प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनुशंसा के बिना अन्य निर्वाचन आयुक्तों को पद से नहीं हटाया जा सकता। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के अनुसार, किसी भी सदन में, जज को पद से हटाने का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाने के बाद, (लोकसभा) अध्यक्ष या (राज्यसभा) सभापति, जैसा भी मामला हो, तीन सदस्यीय समिति का गठन करेंगे। जो उन आधारों की जांच करेगी, जिन पर पद से उन्हें हटाने की मांग की गई है। समिति में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) या शीर्ष न्यायालय के जज, 25 उच्च न्यायालयों में से किसी एक के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित न्यायविद होते हैं। नियम के अनुसार, समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद, इसे सदन में पेश किया जाएगा और पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हो जाएगी। हालांकि, सीईसी को अपना बचाव करने का अधिकार होता है।

फतेहपुर में बंद कमरे में मां-बेटे और देवर की रहस्यमयी मौत, सुसाइड नोट मिलने से कर्ज का एंगल आया सामने
फतेहपुर। फतेहपुर जिले के Lucknow Bypass Road स्थित एक मकान में मां-बेटे और देवर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में सनसनी फैल गई। घटना Sadar Kotwali क्षेत्र की है, जहां सुशील श्रीवास्तव के मकान में रहने वाले परिवार के तीन सदस्यों के शव बंद कमरे में मिले। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।जानकारी के मुताबिक कमरे में मां और बेटे के शव खून से लथपथ हालत में मिले, जबकि कुछ दूरी पर महिला का देवर गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़ा था। उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी भी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई।

व्यापार में घाटे के कारण उस पर करीब 50 लाख का कर्ज हो गया था

बताया जा रहा है कि परिवार मूल रूप से मुराइनटोला का रहने वाला था और कुछ साल पहले ही लखनऊ बाईपास क्षेत्र में मकान बनाकर रहने लगा था। परिवार का इकलौता बेटा अमर श्रीवास्तव सरल स्वभाव का था और कई अखबारों की एजेंसी का काम कर चुका था। हालांकि व्यापार में घाटे के कारण उस पर करीब 50 लाख रुपये का कर्ज हो गया था। कर्ज के दबाव में उसका घर भी बिक गया था और लंबे समय तक परिवार कर्जदारों से बचने के लिए छिपकर रह रहा था।

पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला

परिजनों के अनुसार अमर हाल के दिनों में लोगों से रुपये उधार मांग रहा था। उसने घटना से एक दिन पहले अपने एक दोस्त से 10 हजार रुपये उधार लिए थे और होली के आसपास अपने बहनोई से भी 10 हजार रुपये लिए थे। अमर के बहनोई ने तीनों की मौत को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है।पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें तीन लोगों के नाम का जिक्र करते हुए आर्थिक तंगी और कर्ज से परेशान होने की बात लिखी गई है। सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस उन लोगों की तलाश में जुट गई है। एसओजी और इंटेलिजेंस विंग की टीम भी मामले की जांच कर रही है।मौके से चाय के झूठे गिलास और ब्लेड का पैकेट भी बरामद हुआ है।

तीनों ने पहले चाय में सल्फास मिलाकर पीया

आशंका जताई जा रही है कि तीनों ने पहले चाय में सल्फास मिलाकर पीया और बाद में तड़पने पर ब्लेड से खुद पर वार किया। हालांकि यह भी संभावना जताई जा रही है कि तीनों के बीच आपसी विवाद के बाद हमला हुआ हो, जिसमें देवर ने मां-बेटे की हत्या कर खुद की जान ले ली हो।फिलहाल पुलिस दो पहलुओं—हत्या और सामूहिक आत्महत्या—दोनों को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मौत जहर से हुई या ब्लेड से हुए हमले से। सुसाइड नोट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।
रिश्वत आरोप में निलंबित IAS अभिषेक प्रकाश की होगी बहाली, 14 मार्च के बाद से प्रभावी मानी जाएगी
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने निलंबित आईएएस अधिकारी Abhishek Prakash को बहाल करने का निर्णय लिया है। शासन के सूत्रों के मुताबिक उनकी बहाली 14 मार्च के बाद से प्रभावी मानी जाएगी। हालांकि नियुक्ति विभाग की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

2006 बैच के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश इससे पहले निवेश प्रोत्साहन एजेंसी Invest UP के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर तैनात थे। उन पर एक सोलर कंपनी से प्रोजेक्ट मंजूरी के बदले रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगे थे। इन आरोपों के बाद प्रदेश सरकार ने 20 मार्च 2025 को उन्हें निलंबित कर दिया था।

इस मामले में फरवरी 2026 में Lucknow Bench of Allahabad High Court ने सुनवाई करते हुए साक्ष्य के अभाव में उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट को निरस्त कर दिया था। अदालत के इस फैसले के बाद उनकी बहाली का रास्ता साफ हो गया।

शासन के सूत्रों के अनुसार निलंबन की अवधि एक वर्ष पूरी होने से पहले इस मामले में रिपोर्ट केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय को भेजी जानी है। इसी प्रक्रिया के तहत उनकी बहाली को 14 मार्च के बाद प्रभावी माना जाएगा।

हालांकि, बहाली के बाद उन्हें किस विभाग या जिम्मेदारी पर तैनात किया जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय अभी लिया जाना बाकी है। शासन स्तर पर इस संबंध में विचार-विमर्श जारी है।
31 वर्षीय मरीज को सुप्रीम कोर्ट से निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति, 13 साल से कोमा में है युवक

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सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को अपने एक फैसले के तहत 31 साल के आदमी को पैसिव यूथेनेशिया की इजाजत दे दी, जो करीब 13 साल से कोमा में है। सुप्रीम कोर्ट ने 31 साल के हरीण राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु यानी पैसिव यूथेनेशिया की इजाजत दी है।

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा की जीवनरक्षक प्रणाली यानी आर्टिफिशियल लाइफ सपोर्ट हटाने की अनुमति दी। यह व्यक्ति 13 वर्ष पहले एक इमारत से गिरने के बाद से स्थायी और अपरिवर्तनीय विजिटेटिव अवस्था में था। अदालत ने यह आदेश उसके पिता द्वारा दायर एक मिसलेनियस आवेदन पर दिया, जिसमें उन्होंने अपने बेटे से सभी जीवनरक्षक उपचार हटाने की अनुमति मांगी थी।

‘ईश्वर नहीं पूछता कि कौन जीना चाहता है’

इच्छामृत्यु की मांग वाली याचिका पर जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा, “ईश्वर किसी मनुष्य से यह नहीं पूछता कि वह जीवन को स्वीकार करता है या नहीं, जीवन उसे लेना ही पड़ता है, ये Henry David Thoreau के शब्द हैं, जिनका विशेष महत्व तब उभरकर सामने आता है जब अदालतों के समक्ष यह सवाल आता है कि क्या किसी व्यक्ति को मरने का विकल्प चुनने का अधिकार है। इसी संदर्भ में विलियम शेक्सपीयर का प्रसिद्ध कथन ‘To be, or not to be ‘ यानी ‘जीना या न जीना’ भी इस दार्शनिक और विधिक विमर्श को गहराई प्रदान करता है।”

पिछले 13 वर्षों में स्थिति में कोई सुधार नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “हरीश राणा, जो वर्तमान में 32 वर्ष के हैं, कभी एक उज्ज्वल और प्रतिभाशाली युवा थे। वे अपने पेइंग गेस्ट आवास की चौथी मंजिल से गिरने के बाद एक दुखद दुर्घटना का शिकार हो गए। इस दुर्घटना में उनके मस्तिष्क को गंभीर चोट लगी, जिससे वे स्थायी विजिटेटिव अवस्था (PVS) और 100% क्वाड्रिप्लेजिया (चारों अंगों का लकवा) की स्थिति में चले गए… पिछले 13 वर्षों में उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।”

‘मरीज को दी जा रही CAN को बंद कर देना चाहिए’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा “वह केवल क्लिनिकली एडमिनिस्टरड न्यूट्रिशन (CAN) के सहारे जीवित थे, जो सर्जरी द्वारा लगाए गए PEG ट्यूब के माध्यम से दिया जा रहा था। अदालत ने कहा कि CAN भी एक चिकित्सीय उपचार है और इसे प्राथमिक और द्वितीयक मेडिकल बोर्ड के सर्वोत्तम निर्णय के आधार पर बंद किया जा सकता है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि “उपचार जारी रखने से केवल उनकी जैविक जीवन प्रक्रिया ही बढ़ रही थी, लेकिन किसी भी प्रकार का चिकित्सीय सुधार नहीं हो रहा था। अदालत ने पाया कि कि मरीज के माता-पिता, प्राथमिक मेडिकल बोर्ड और दूसरी मेडिकल बोर्ड सभी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि मरीज को दी जा रही CAN को बंद कर देना चाहिए, क्योंकि यह मरीज के सर्वोत्तम हित में नहीं है।”

Most Meta Ads campaigns fail before they even start.

Not because of budget… but because people jump straight into launching without a clear system.

After running and scaling lakhs in ad spend, here’s the exact 4-Zone framework I follow every single time:

1️. Strategy Zone → Define objectives, study competitors, map the funnel, align offer + audience. No guesswork.

2️. Creative Zone → Build scroll-stopping hooks, clean visuals, sync message + design. Thumb-stop rate is king here.

3️. Launch Zone → Set proper campaign structure (testing vs scaling), choose bidding, launch controlled budget while the algorithm learns.

4️. Optimization Zone → Monitor daily, pause underperformers, scale winners, feed learnings back into strategy.

स्पीकर के खिलाफ मजबूरी में लाना पड़ा प्रस्ताव, लेकिन हमारा धर्म संसद की मर्यादा बचाना, अविश्वास प्रस्ताव पर बोले गौरव गोगोई

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विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक संकल्प मंगलवार को सदन में पेश किया। इस पर चर्चा के दौरान सदन में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने अपनी बात रखी। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अपने भाषण के दौरान सरकार पर बड़े आरोप लगाए। गौरव ने कहा कि स्पीकर को निष्पक्ष होना चाहिए। उसके लिए कोई पक्ष या विपक्ष नहीं हो। लेकिन स्पीकर निष्पक्ष नहीं है।

माइक भी अस्त्र बन गया है-गोगोई

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा कि सदन के अंदर पहले भी तीन बार अविश्वास प्रस्ताव आया है। जब यह हुआ तब डिप्टी स्पीकर चेयर पर थे। आज विपक्ष के 200 सांसद होने के बावजूद यहां डिप्टी स्पीकर नहीं है। देश को पता चलना चाहिए कि सदन कैसे चल रहा है। माइक भी अस्त्र बन गया है। यह सुविधा के अनुसार सत्ता पक्ष को दिया जाता है। जबकि विपक्ष के नेता को बोलने ही नहीं दिया जाता। संसद के नियमों का उल्लंघन हो रहा है।

स्पीकर पर यह निजी हमला नहीं-गोगोई

गोगोई ने कहा, यह रेजोलयूशन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। हमें खुशी नहीं है कि हम इसे लाए। क्योंकि ओम बिरला का हर किसी के साथ निजी तौर पर बहुत अच्छा है। लेकिन हम मजबूर हैं कि हमें यह प्रस्ताव लाना पड़ रहा है। लेकिन हमारा धर्म है संसद की मर्यादा को बचाना। क्योंकि हर सदस्य का कर्तव्य है कि संसद की गरिमा मर्यादा कानून को बचाए। यह निजी हमला नहीं है। देश के लोगों का विश्वास लोकतंत्र में कायम रहे इसलिए हम अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं।

गोगोई ने कहा-आज देश का नेतृत्व कमजोर है

कांग्रेस नेता ने कहा, फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जब नेता प्रतिपक्ष बोलने के लिए खड़े हुए तब 20 बार व्यवधान पैदा किया गया। यह सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि वह कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाना चाहते थे। उन्होंने कहा, जब भारत की सीमा पर पड़ोसी देश के टैंक आ रहे थे तो सेना राजनीतिक नेतृत्व की तरफ देखा रही थी, लेकिन उस समय देश के मुखिया कहते हैं कि जो उचित लगे वो कर लो। उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश का नेतृत्व कमजोर है।

शरद पवार, अठावले और सिंघवी समेत 26 नेता निर्विरोध पहुंचे राज्यसभा, अब 11 सीटों पर मुकाबला

#ncpchiefsharadpawarathawaleand26otherleaderselectedunopposedrajyasabha

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दस राज्यों की 37 सीटों के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव में सात राज्यों के 26 उम्मीदवार बिना मुकाबले के ही निर्वाचित हो गए हैं। इनमें एनसीपी (शरद) प्रमुख शरद पवार, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। अबबिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर मुकाबला होना तय है। इन राज्यों में अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में होने के कारण चुनाव कराया जाएगा।

इन राज्यों में उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए

महाराष्ट्र (7)

• शरद पवार (एनसीपी)

• रामदास आठवले (आरपीआई-आठवले)

• विनोद तावड़े (बीजेपी)

• रामराव वडुकुटे (बीजेपी)

• माया इवनाते (बीजेपी)

• ज्योति वाघमारे (शिवसेना -शिंदे)

• पार्थ पवार (एनसीपी)

तमिलनाडु (6)

• तिरुची शिवा (डीएमके)

• जे कॉन्स्टेंटाइन रविंद्रन (डीएमके)

• एम थंबीदुरई (एआईएडीएमके)

• अंबुमणि रामदास (पीएमके)

• एम क्रिस्टोफर तिलक (कांग्रेस)

• एल के सुदीश (डीएमडीके)

पश्चिम बंगाल (5)

• राहुल सिन्हा (बीजेपी)

• बाबुल सुप्रियो (टीएमसी)

• पूर्व डीजीपी राजीव कुमार (टीएमसी)

• सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी (टीएमसी)

• कोएल मलिक (टीएमसी)

असम (3)

• जोगेन मोहन (भाजपा)

• तेरोस गोवाला (भाजपा)

• प्रमोद बोरो (यूपीपीएल)

तेलंगाना (2)

• अभिषेक मनु सिंघवी (कांग्रेस)

• वेम नरेंद्र रेड्डी (कांग्रेस)

छत्तीसगढ़ (2)

• लक्ष्मी वर्मा (भाजपा)

• फूलो देवी नेताम (कांग्रेस)

हिमाचल प्रदेश (1)

• अनुराग शर्मा (कांग्रेस)

किन राज्यों की कितनी सीटों पर होगा चुनाव?

37 में से 26 निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद अब 11 सीटों पर चुनाव होगा। इन सीटों पर 14 प्रत्याशी मैदान में हैं। बिहार की 5, ओडिशा की 4 और हरियाणा की 2 सीटों पर वोटिंग होगी। इन सीटों पर 16 मार्च को मतदान किया जाएगा।

सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की पांच सीटों की

बाकी बचे सीटों में सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की पांच सीटों की हैं। दरअसल बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन चुनावों में राज्यसभा के लिए चुने जाने की संभावना है। बिहार की पांच सीटों पर 6 उम्मीदवार मैदान में हैं। पांचवीं सीट पर आरएलएम अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और आरजेडी के एडी सिंह के बीच टक्कर होगी। वहीं बिहार विधानसभा में विधायकों के गणित के हिसाब से सीएम नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना तय है। वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का राज्यसभा जाना भी सुनिश्चित है। इसके अलावा जेडीयू के रामनाथ ठाकुर और बीजेपी के शिवेश कुमार का भी राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है।

शराब घोटाला केस में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

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दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से जवाब मांगा है। सीबीआई की याचिका पर ये जवाब मांगा गया है। हाई कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया समेत 23 अन्य लोगों को अधीनस्थ अदालत की ओर से आरोप मुक्त किये जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सोमवार को आरोपियों से उनका पक्ष बताने को कहा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखी दलीलें

दिल्ली शराब घोटाला केस की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच के सामने हुई। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने राउज एवेन्यू कोर्ट को इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की सुनवाई तब तक टालने का भी निर्देश दिया, जब तक कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर फैसला नहीं कर लिया जाता।

सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने क्या तर्क दिया?

इस दौरान सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें रखीं। मेहता ने तर्क दिया कि आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और सिसोदिया को आरोप मुक्त करने का निचली अदालत का आदेश अनुचित था और आपराधिक कानून को ही उलट देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब नीति का मामला सबसे बड़े घोटालों में से एक था और भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण था। मेहता ने दावा किया कि निचली अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य के पक्ष में बिना सुनवाई के आरोप मुक्त करने का आदेश सुना दिया।

16 मार्च को अगली सुनवाई

वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप मुक्त किये जाने के विरूद्ध सीबीआई की याचिका पर सोमवार को आरोपियों से उनका पक्ष बताने को कहा। याचिका पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 16 मार्च तय की।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोपियों को किया था बरी

बता दें कि राउज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को आबकारी नीति मामले में 23 अन्य लोगों के साथ बरी कर दिया था। केजरीवाल और सिसोदिया को महीनों जेल में रहने के बाद बरी कर दिया गया था। कोर्ट से बरी होने पर आम आदमी पार्टी और इंडिया गठबंधन ने बीजेपी पर राजनीतिक लाभ के लिए केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। अरविंद केजरीवाल का आरोप था कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए बीजेपी ने उनके खिलाफ साजिश रची थी। सीबीआई ने राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

Women in Technology: HIC Global Solutions Celebrates Its Team on International Women’s Day

The technology industry continues to evolve rapidly, and women professionals are playing an increasingly important role in shaping its future. Recognizing this contribution, HIC Global Solutions celebrated International Women’s Day 2026 by dedicating the day to appreciating the women who drive the company’s innovation and growth.

The company temporarily paused regular work operations to organize a special outing and appreciation initiative for its women employees. The event aimed to create a meaningful moment of recognition while allowing team members to relax and celebrate together.

A Unique Approach to Corporate Celebrations

Rather than hosting a traditional office event, HIC Global Solutions organized a movie outing for its women employees. The initiative gave participants an opportunity to step away from deadlines and enjoy time with colleagues in a more relaxed environment.

Along with the outing, employees received personalized appreciation notes, flowers, chocolates, and internal recognition messages celebrating their contributions to the organization.

These thoughtful gestures reflected the company’s commitment to creating a supportive workplace culture.

Women Powering the Company’s Growth

Women professionals at HIC Global Solutions contribute across key areas that are essential for delivering technology solutions to clients.

Their work includes responsibilities such as:

Developing software applications

Designing system architectures

Managing client relationships

Leading project delivery

Supporting operational processes

This diverse involvement demonstrates how women play a central role in shaping the company’s success.

Leadership Appreciation

CEO and Co-founder Piyush Singhal highlighted the importance of acknowledging the women who help keep projects running smoothly and contribute innovative ideas.

He noted that many successful solutions delivered by the company are the result of collaboration, leadership, and problem-solving efforts from women across teams.

Taking time to celebrate these contributions reinforces the organization’s culture of respect and recognition.

Employee Feedback

Women employees who participated in the celebration described it as a refreshing break from their daily responsibilities.

The initiative helped strengthen team connections and provided an opportunity for colleagues to celebrate their shared achievements.

For many employees, being appreciated for their ongoing contributions—not just on Women’s Day—made the experience especially meaningful.

Building a More Inclusive Technology Industry

HIC Global Solutions continues to emphasize the importance of diversity and inclusion within its workforce.

The company is committed to creating opportunities that support women professionals through:

Training and skill development

Leadership mentoring

Fair promotion pathways

Inclusive hiring practices

These initiatives aim to increase representation of women in technology and leadership roles within the organization.

Looking Ahead

As technology companies grow and expand globally, building inclusive workplaces becomes increasingly important. By celebrating its women employees and investing in their professional growth, HIC Global Solutions demonstrates how organizations can support talent while strengthening their culture.

The company’s Women’s Day initiative highlights a simple but powerful message: organizations thrive when the people behind their innovation feel valued and supported.

About HIC Global Solutions

HIC Global Solutions is a Salesforce consulting and development firm that delivers enterprise technology solutions, digital transformation strategies, and managed services.

The company also develops AppExchange solutions including Docs Made Easy, Sign Made Easy, and QB Sync Made Easy, helping businesses streamline document management, e-signature processes, and accounting integrations.

बलिया: TET अनिवार्यता के खिलाफ(JTFI) शिक्षक संगठनों की एकजुट हुंकार, 9-15 मार्च तक पोस्टकार्ड-ईमेल अभियान का ऐलान
संजीव सिंह बलिया, 8 मार्च 2026: अखिल भारतीय शिक्षक महासंघ (JTFI) के तत्वावधान में विशिष्ट बीटीसी के संरक्षक भैया अरुण सिंह के नेतृत्व में जनपद बलिया में TET अनिवार्यता के विरोध में घटक संगठनों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में प्रमुख शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर एकजुट होकर आगामी कार्यक्रमों को सफल बनाने का संकल्प लिया।बैठक के प्रमुख बिंदु:प्राथमिक शिक्षक संघ (अजय सिंह, अध्यक्ष), अटेवा (समीर कुमार पांडेय, जिला संयोजक), विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन (घनश्याम चौबे, अध्यक्ष), राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (राजेश सिंह, जिला संयोजक), TSCT (सतीश सिंह, अध्यक्ष), प्राथमिक शिक्षक संघ 1160 (सतेंद्र राय, अध्यक्ष), माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट (लाल साहब यादव), शिक्षा मित्र संघ (पंकज सिंह, अध्यक्ष), प्रा शि संघ पंजीकृत 1160 (निर्भय नारायण सिंह), एसटी/एससी बेसिक संघ (अंजनी कुमार मुकुल, अध्यक्ष) समेत अन्य संगठनों ने भागीदारी की।उपस्थित पदाधिकारियों ने नियुक्ति के समय मानकों पर खरे उतरे शिक्षकों के भविष्य को 'अंधेरे में धकेलने' के खिलाफ आवाज बुलंद की।9 से 15 मार्च तक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष को पोस्टकार्ड, ईमेल और ट्विटर अभियान चलाने पर जोर दिया गया।अन्य संगठनों से एकजुटता का आह्वान किया गया।उपस्थित प्रमुख प्रतिनिधि: विनय राय (वरिष्ठ उपाध्यक्ष), गोपाल जी पाठक, इरफान अहमद (जिला उपाध्यक्ष), नित्यानंद पांडेय (कोषाध्यक्ष), अनिल सिंह (ब्लॉक अध्यक्ष, चिलकहर), राजेश सिंह (अध्यक्ष, बांसडीह), धर्मेंद्र जी आदि।शिक्षक एकता जिंदाबाद! लड़ेंगे और जीतेंगे। #NoTetBeforeRteActसंजीव कुमार सिंह (जिला मीडिया प्रभारी, JTFI, अटेवा)