नेपाल में दूतावास खोलने वाला है तुर्की, पूर्व RAW एजेंट लक्की बिष्ट ने भारत को लेकर किया सतर्क

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तुर्की नेपाल में दूतावास खोलने जा रहा है। पूर्व NSG कमांडो और सोशल मीडिया पर सक्रिय लकी बिष्ट ने नेपाल में संभावित तुर्की दूतावास को लेकर गंभीर दावे किए हैं। उन्होंने इसे भारत की सुरक्षा को लेकर खतरा बताया है। उन्होंने इसे केवल कूटनीतिक कदम न मानकर इसके पीछे “छुपे हुए एजेंडे” की आशंका जताई है।

किस बड़े खेल की बात कर रहे बिष्ट?

पूर्व RAW एजेंट लक्की बिष्ट ने अपने अधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया है। बिष्ट का मानना है कि नेपाल के अंदर एंबेसी के आड़ में बहुत बड़ा खेल शुरू होने वाला है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा है, “नेपाल के अंदर एंबेसी के आड़ में बहुत बड़ा खेल शुरू होने वाला है। अगर तुर्की की एंबेसी नेपाल में खुलती है, तो यह सिर्फ कूटनीति नहीं होगी यह धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने का दरवाजा होगा।

नेपाल में तुर्की के दूतावास से किस बात का डर

इतिहास गवाह है कि तुर्की ने उन संगठनों को समर्थन दिया है जो समाज में विभाजन और हिंसा फैलाते हैं। तुर्की ने ही इस्माइल हानिया को वीआईपी पासपोर्ट दिए, जब ISIS अपने चरम पर था तुर्की ने जिहादी रास्ते खोले और सीरिया को बर्बाद करने में भी इसकी भूमिका रही है। अगर आज नेपाल में यह तुर्की एंबेसी खुलती है, तो इसके पीछे छुपे एजेंडे को समझना जरूरी है यह सीधा हमला होगा नेपाल की पहचान, उसकी संस्कृति और उसके अस्तित्व पर।”

नेपाल में बालेन शाह के शपथ लेते ही पूर्व पीएम केपी ओली गिरफ्तार, प्रधानमंत्री बनते ही एक्शन

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नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पिछले साल हुए घातक जेन-जी विरोध प्रदर्शनों में कथित भूमिका के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई नए प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह के पद की शपथ लेने के 24 घंटे की गई है।

ओली के साथ पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक भी गिरफ्तार

ओली को शनिवार सुबह भक्तपुर के गुंडू स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया। ओली के साथ उनके पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया है। वहीं, लेखक को सुबह करीब 5 बजे भक्तपुर के सूर्यविनायक स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया। काठमांडू वैली पुलिस के अनुसार, दोनों को सुबह गिरफ्तार किया गया और अब आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

ओली को हो सकती है 10 साल तक की सजा

ये गिरफ्तारियां पिछले साल जेन-जी विरोध प्रदर्शन मामले में गृह मंत्रालय की दर्ज कराई एक औपचारिक शिकायत के बाद हुई हैं। शिकायत के चलते जांच शुरू हुई और गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए। उन पर ऐसी धाराओं के तहत आरोप लगाए जाने की संभावना है, जिनमें अधिकतम 10 साल तक सजा हो सकती है।

सरकार ने कहा- कार्रवाई बदले की भावना से नहीं

ओली और लेखक की गिरफ्तारी बालेन शाह के नेपाल का प्रधानमंत्री बनने के 24 घंटे के भीतर हुई हैं। शुक्रवार को ही बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। एक दिन बाद ही यह एक्शन हो गया है। सरकार ने साफ किया है कि यह कार्रवाई किसी बदले की भावना से नहीं, बल्कि कानून के तहत की जा रही है। दरअसल, बालेन शाह के सत्ता में आने से पहले ही उनके खिलाफ एक्शन की सिफारिश की गई थी।

क्या था जेन-जी विरोध प्रदर्शन?

पिछले साल सितंबर में नेपाल में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शन हुए थे, जिन्हें जेन-जी विरोध प्रदर्शन कहा गया। ये प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गए और दो दिनों के भीतर 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इस हिंसा के बाद ओली सरकार पर गंभीर सवाल उठे और आखिरकार उनकी सरकार गिर गई। इन घटनाओं ने देश की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया।

क्या कोरोना की तरह देश में लगेगा लॉकडाउन? मोदी सरकार ने दूर की आशंकाएं, कहा- पैनिक होने की जरूरत नहीं

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पश्चिम एशिया में संकट के चलते दुनियाभर में तेल को लेकर हाहाकार मच गया है। भारत में भी इसका असर देखा जा रहा है। ईरान जंग के बीच भारत में लॉकडाउन की अफवाहें तेजी से फैल रही हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से ऐसी खबरें फैल रही हैं। जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या देश में कोविड जैसी स्थिति फिर से आ गई है? क्या देश में लॉकडाउन लगने वाला है?

लॉकडाउन की अफवाहों को खारिज किया

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने इस तरफ की अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को साफ किया कि देशव्यापी लॉकडाउन की अफवाहें पूरी तरह से झूठी हैं। सरकार के सामने फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति की स्थिति नियंत्रण में है। देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कमी नहीं है। वहीं, खुदरा दुकानों के पास पर्याप्त स्टॉक है। वे बिना किसी रुकावट के ईंधन वितरित कर रहे हैं।

तेल की कीमतों को लेकर हरदीप पुरी का पोस्ट

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने तेल की कीमतें बढ़ने को लेकर एक्स पर पोस्ट कर जानकारी देते हुए बताया कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं। इस कारण दुनियाभर में उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में कीमतों में लगभग 30%-50% की वृद्धि हुई है, उत्तरी अमेरिकी देशों में 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीकी देशों में 50% की वृद्धि हुई है।

अपने वित्त पर बोझ उठाने का फैसला किया-पुरी

हरदीप पुरी ने बताया कि मोदी सरकार के पास दो विकल्प थे या तो अन्य सभी देशों की तरह भारत के नागरिकों के लिए कीमतों में भारी वृद्धि करें या फिर अपने वित्त पर बोझ उठाएं ताकि भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से सुरक्षित रहें। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से पिछले 4 वर्षों से अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को निभाते हुए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बार फिर वित्तीय स्थिति को लेकर बोझ उठाने का फैसला किया है।

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटी, तेल कंपनियों को बड़ी राहत

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मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण भारत में डीजल और पेट्रोल की दिक्कत शुरू हो गई है। साथ ही कच्चे तेल की कीमत भी प्रति बैरल 100 डॉलर से ज्यादा है। इस बीच सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने का बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी कम की है।

पेट्रोल-डीजल के दामों को स्थिर रखने का फैसला

केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटा दी है। यह पेट्रोल पर पहले 13 रुपए थी जो अब 3 रुपए हो गई है, वहीं डीजल पर 10 रुपए थी जो अब जीरो हो गई है। दरअसल, इजराइल-ईरान जंग से पहले यह कच्चे तेल की कीमत करीब 73 डॉलर प्रति बैरल थी जो अब 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हो गई है। इससे तेल कंपनियों घाटा हो रहा था। वे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा सकती थीं। इससे आम आदमी पर बोझ बढ़ता। ऐसे में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर पेट्रोल-डीजल के दामों को स्थिर रखा है।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नीचे आना शुरू हुई हैं। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ गई थीं। हालांकि, शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में कीमतों में थोड़ी गिरावट देखी गई। इसकी वजह यह है कि अमेरिका ने ईरान के एनर्जी प्लांट्स पर हमले 10 दिनों के लिए रोकने का ऐलान किया है। रॉयटर्स के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.8% गिरकर 107.11 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.88% गिरकर 93.65 डॉलर प्रति बैरल हो गया। इससे एक दिन पहले दोनों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई थी।

क्या पेट्रोल-डीजल के दाम कम हो जाएंगे?

सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने के बाद अब बड़ा सवाल है कि क्या पेट्रोल-डीजल के दाम कम हो जाएंगे? इसका जवाब ना होगा। दरअसल, भले ही सरकार ने टैक्स कम किया है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के रिटेल रेट सीधे सरकार तय नहीं करती। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल कंपनियां कच्चे तेल की कीमत और अपने मुनाफे के आधार पर रेट तय करती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियां इस छूट का इस्तेमाल अपने पिछले घाटे की भरपाई के लिए करेगी।

पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों संग बैठक आज, पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा में शामिल नहीं होंगे 5 राज्यों के सीएम

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पश्चिम एशिया में जंग जारी है। ईरान-अमेरिका और इजराइल के बीच जारी युद्द का पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर असर हो रहा है। भारत में भी पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर दिख रहा है। ऐसे में पश्चिम एशिया के हालातों से कैसे निपटा जाए, इसके लिए मोदी सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। मिडिल ईस्ट के हालात पर सरकार ने कल यानी गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। अब आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हाई लेवल मीटिंग करेंगे।

पश्चिम एशिया संघर्ष पर मंथन

आज शाम 6.30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीएम मोदी मुख्यमंत्रियो के साथ बातचीत करेंगे। बैठक में प्रधानमंत्री पश्चिम एशिया संघर्ष पर मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत करेंगे, ताकि राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की जा सके। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ प्रयासों में तालमेल सुनिश्चित करना होगा।

पांच राज्यों के मुख्यमंत्री बैठक में नहीं होंगे शामिल

इस मीटिंग के लिए पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों को शामिल नहीं किया गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पीएम मोदी की बैठक में शामिल नहीं होंगे। दरअसल, जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, वहां के मुख्यमंत्री बैठक में शामिल नहीं होंगे। आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के चलते इस बातचीत में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री शामिल नहीं होंगे। हालांकि, कैबिनेट सचिवालय इन राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ अलग से मीटिंग करेगा।

मिडिल ईस्ट पर पीएम मोदी लगातार सक्रिय

मिडिल ईस्ट के संकट को देखते हुए पीएम मोदी लगातार सक्रिय हैं और पश्चिम एशिया के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं। इस मुद्दे पर उन्होंने संसद के दोनों सदनों को भी संबोधित किया। पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा था कि पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के हालात ने भारत के सामने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं जो आर्थिक सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय सुरक्षा से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा, यह आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज में संदेश दुनिया में जाए।

जंग जारी रही, तो गंभीर दुष्परिणाम तय', मिडिल ईस्ट जंग पर राज्यसभा में बोले पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री मोदी ने आज पश्चिम एशिया संकट को लेकर राज्यसभा में जानकारी दी। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर राज्यसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हालात भारत के लिए भी चिंताजनक हैं और व्यापार के रास्ते प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि हमें सावधान, सतर्क और तैयार रहना है।

भारत के लिए भी चिंताजनक स्थिति-पीएम मोदी

पीएम मोदी पश्चिम एशिया संकट पर राज्यसभा में बोलते हुए कहा कि इस युद्ध ने पूरी दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। भारत के लिए भी यह एक चिंताजनक स्थिति है। व्यापारिक रास्ते प्रभावित हुए हैं इसलिए सप्लाई प्रभावित हुई है। लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं, और उनके जीवन और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी भारत के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है।

3,75,000 से ज्यादा भारतीय सुरक्षित भारत लौटे- पीएम मोदी

राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'संकट की इस स्थिति में दुनिया भर में भारतीयों की सुरक्षा हमारे लिए सबसे जरूरी है। अब तक 3,75,000 से ज़्यादा भारतीय सुरक्षित भारत लौट आए हैं। अकेले ईरान से 1000 से ज्यादा भारतीय लौटे हैं, इनमें से 700 से ज़्यादा मेडिकल स्टूडेंट हैं। संकट की इस घड़ी में, हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। सभी देशों ने वहां भारतीयों की सुरक्षा का भरोसा दिया है। हालांकि, यह दुख की बात है कि हमलों में कुछ भारतीयों की मौत हो गई और कुछ दूसरे घायल हो गए। प्रभावित परिवारों को हर जरूरी मदद दी जा रही है।'

जंग जारी रही तो होंगे गंभीर दुष्परिणाम- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने संवाद का रास्ता सुझाया है। युद्ध से जिस तरह की परिस्थितियां बनी हैं, अगर यह जंग जारी रही तो गंभीर दुष्परिणाम होंगे। हम रणनीति के साथ काम कर रहे हैं कि भारत पर इसके कम से कम दुष्परिणाम हों। पश्चिम एशिया में जंग की वजह से जितना नुकसान हो चुका है, उससे रिकवर करने में भी दुनिया को काफी समय लगेगा।

राज्यों की भूमिका भी इस संकट में अहम-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, यह राज्यों का सदन है और यह संकट आने वाले समय में हमारी बड़ी परीक्षा लेने वाला है। राज्यों की भूमिका भी इस संकट में अहम होने वाली है। पीएम गरीब कल्याण योजना का लाभ गरीबों को समय पर मिलता रहे, यह प्रयास करना होगा। राज्यों को प्रवासी मजदूरों की समस्याओं पर भी ध्यान देना होगा। कालाबाजारी, जमाखोरी की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। जरूरी चीजों की सप्लाई सुनिश्चित करना राज्यों की प्राथमिकता होनी चाहिए।

हमें तेजी से रिफॉर्म करने होंगे-पीएम मोदी

संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, भारत की तेज ग्रोथ बनाए रखना हम सभी का दायित्व है। हमें तेजी से रिफॉर्म करने होंगे। ये टीम इंडिया की भी बड़ी परीक्षा है। कोविड काल में हमने नया मॉडल सामने रखा था। हमें उसी भावना के साथ आगे भी काम करना होगा। सभी राज्य सरकारों और केंद्र के प्रयासों से देश इस गंभीर संकट का प्रभावी तरीके से सामना कर पाएगा।

पश्चिम एशिया संकट पर भारत सरकार की नजर, पीएम मोदी आज लोकसभा में देंगे भाषण

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-यूएस जंग के बीच भारत की चिंता भी बढ़ती जा रही है। इसी अहम मुद्दे पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में बयान दे सकते हैं। जहां वह मौजूदा हालात, भारत की ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक बाजार पर असर और क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार का रुख साफ करे सकते हैं।

इन मुद्दों पर बोल सकते हैं पीएम मोदी

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संबोधन में मौजूदा वैश्विक हालात, भारत की स्ट्रैटेजी और अपनी सरकार के रुख को स्पष्ट कर सकते हैं। इससे पहले भी सरकार ने इशारा किया था कि मिडिल संकट को लेकर सतर्क है और हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। बीते रविवार को पीएम मोदी के साथ मंत्रियों की हुई हाई लेवल बैठक में इस बात पर चर्चा की गई।

जंग से पैदा हुए हालात की समीक्षा

ईरान की इजरायल और अमेरिका के खिलाफ जारी जंग से पैदा हुए हालात पर पीएम मोदी ने रविवार शाम सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति के साथ उच्च स्तरीय बैठक की थी। इस बैठक पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की समीक्षा करने और प्रस्तावित राहत उपायों पर चर्चा की गई। इस दौरान कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति और अब तक उठाए गए और भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों की तरफ किए जा रहे उपायों पर एक खास प्रेजेंटेशन दिया।

जंग के प्रभाव और उससे निपटने के उपायों पर चर्चा

कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, एमएसएमई, निर्यातक, शिपिंग, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला और सभी प्रभावित क्षेत्रों जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ने वाले अपेक्षित प्रभाव और उससे निपटने के लिए उठाए गए उपायों पर चर्चा की गई। देश के समग्र वृहद-आर्थिक परिदृश्य और आगे उठाए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की गई। विषय में लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खाद के वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा की गई। यह भी तय किया गया कि सभी पावर प्लांट में कोयले के स्टॉक की पर्याप्त सप्लाई से भारत में बिजली की कोई कमी नहीं होगी।

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच गहराया LPG का संकट, देशभर से सिलेंडर सप्‍लाई प्रभावित

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अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की जंग का असर भारत के करोड़ों लोगों पर पड़ता दिख रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब भारत में एलपीजी और गैस सप्लाई पर भी दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया में जारी इस युद्ध के बीच उत्तर प्रदेश, बिहार से लेकर तेलंगाना और तमिलनाडु तक लाखों लोग एलपीजी सिलेंडर की किल्लत से जूझ रहे हैं।

कई राज्यों में एलपीजी की किल्लत

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के कारण राजधानी दिल्ली, यूपी और हरियाणा सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में एलपीजी की किल्लत होने लगी है। गैस सिलेंडर भरवाने को लेकर मारामारी शुरू हो गई है। लखनऊ समेत कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

गैस सिलेंडर भरवाकर जमा करने लगे लोग

कई जगह घरेलू आपूर्ति तो अभी सामान्य है, लेकिन वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों को लेकर परेशानी बढ़ रही है। यह स्थिति इसलिए भी है कि लोग आशंका में पहले से ही गैस सिलेंडर भरवाकर जमा करने लगे हैं। व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति सीमित होने से दिल्ली में 50 हजार से अधिक रेस्तरां, पब, बार और होटलों के संचालन में दिक्कतें आने लगी हैं।

गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को लेकर अधिसूचना

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण भारत की एक-तिहाई गैस आपूर्ति बाधित होने के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक गजट अधिसूचना जारी कर गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को मिलने वाली गैस प्रमुख उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र के लिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक गैस के आवंटन में बदलाव किया है। इसके तहत एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पाइप से मिलने वाली रसोई गैस (पीएनजी) को अन्य सभी क्षेत्रों पर प्राथमिकता दी जाएगी।

गैस की परेशानी से रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को करोड़ों का नुकसान

देश में एलपीजी की किल्लत के कारण रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को जबरदस्त नुकसान हो रहा है। कई रेस्टोरेंट अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष और रेस्टोरेंट कारोबारी जोरावर कालरा ने कहा कि अगर एलपीजी सिलेंडरआपूर्ति में कमी जारी रही तो रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को रोजाना 1200 से 1300 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।

भारत में एलपीजी की कितनी खपत?

बता दें कि भारत एलपीजी का बड़ा उपभोक्ता है। देश में हर साल लगभग 31.2 मिलियन टन (करीब 3.13 करोड़ टन) एलपीजी की खपत होती है। इसमें से लगभग 60 प्रतिशत गैस का आयात किया जाता है, जबकि करीब 40 प्रतिशत यानी लगभग 12.4 मिलियन टन एलपीजी का उत्पादन देश में ही किया जाता है। घरेलू उपयोग में 14 किलोग्राम वाले सिलेंडर की हिस्सेदारी लगभग 87 प्रतिशत है, जबकि कमर्शियल सेक्टर में 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की हिस्सेदारी करीब 13 प्रतिशत है।

किन देशों से आता है एलपीजी?

भारत की एलपीजी आपूर्ति का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। कुल आयात में लगभग 80 प्रतिशत गैस इसी क्षेत्र से मिलती है। यूएई से लगभग 26 प्रतिशत, कतर से 22 प्रतिशत और सउदी अबर से करीब 22 प्रतिशत एलपीजी आती है, जबकि बाकी 33 प्रतिशत अन्य देशों से आयात की जाती है। भारत में कितने उपभोक्ता मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 33.08 करोड़ सक्रिय एलपीजी उपभोक्ता हैं।

ईरान युद्ध की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित

ईरान युद्ध की वजह से भारत में पेट्रोलियम पदार्थों का सप्लाई चेन प्रभावित हो रहा है। केंद्र सरकार घरेलू गैस और ईंधन की सप्लाई चेन बरकरार रखने के लिए कई तरह के सकारात्मक और सख्त कदम उठा रही है। आम जनता पर इसका सीधा असर न पड़े इसके लिए वह आवश्यत वस्तु अधिनियन (ईसीए) भी लागू कर चुकी है। फिर भी एलएनजी और एलपीजी की किल्लत से देश में ऑद्योगिक क्षेत्र प्रभावित होने लगे हैं।

क्या होता है ESMA, देशभर में किया गया लागू, मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच सरकार का बड़ा फैसला

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ईरान-इजरायल जंग की वजह से मिडिल ईस्ट में पैदा हुए हालातों का असर भारत में तेल-गैस आपूर्ति पर पड़ रहा है। केंद्र सरकार ने एलपीजी सिलिंडर की जमाखोरी रोकने और घरेलू गैस संकट को टालने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा) लागू किया है। इस कदम का उद्देश्य घरेलू उपयोग के लिए गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना और काले बाजारी गतिविधियों पर रोक लगाना है।

कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार की सख्त

मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात और ईंधन सप्लाई में दिक्कतों को देखते हुए सरकार ने एलपीजी गैस को लेकर बड़े फैसले किए हैं। सरकार ने घरेलू एलपीजी सप्लाई को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी है। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए नया नियम लगाया गया है। केंद्र सरकार ने सोमवार को एक अहम फैसला लेते हुए लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस की बिना किसी रुकावट के आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी वस्तु अधिनियम की शक्तियों का उपयोग किया है।

क्या होता है ESMA ?

आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ईएसएमए) एक एक्ट है, जिसे कुछ सेवाओं की डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। ये सेवाएं लोगों के सामान्य जीवन से जुड़ी हैं और इनके प्रभावित होने का सीधा असर आम जनता को पड़ता है। इसमें सार्वजनिक परिवहन (बस सेवाएं), स्वास्थ्य सेवाएं (डॉक्टर और अस्पताल) जैसी सेवाएं शामिल हैं।

क्या है फैसले की पीछे की वजह

सरकार ने देशभर में ESMA लगाने का फैसला अचानक नहीं लिया है। जिस तरह से ईरान पर इजराइल र अमेरिका ने हमला किया है और दोनों पक्षों के बीच सैन्य संघर्ष को 10 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। इसका असर दुनियाभर के देशों में दिख रहा है। वैश्विक अस्थिरता के समय में दुनिया में बढ़ती प्राकृतिक गैस की कीमतों के बीच केंद्र सरकार लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। इसमें एलपीजी सिलेंडर बुकिंग की अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया। इसकी वजह जमाखोरी को रोकना है। इसी के बाद देशभर में ESMA का फैसला लिया गया।

At Sahityam (National Literature Festival,Chandigarh)2026, Anish Kanjilal Explores the Convergence of Literature, Leadership and Change

3rd February, Mohali:

“It is said that books do not merely narrate stories; they create stories within us.” With this resonant observation, author and speaker Anish Kanjilal inaugurated an atmosphere of reflection and intellectual vigor at Sahityam 2026, hosted by CGC University, Mohali. Widely regarded as one of India’s largest literature festivals, Sahityam emerged as a dynamic confluence of ideas, scholarship, and the enduring influence of the written word.

The university campus, transformed into a vibrant literary arena, welcomed thousands of books and an equally enthusiastic gathering of readers, scholars, and students. Day One unfolded as a compelling exchange between celebrated voices and inquisitive young minds, united by a shared curiosity about literature’s role in shaping contemporary thought.

A Confluence of Distinguished Voices

The opening day featured an eclectic panel of distinguished personalities, including author and speaker Anish Kanjilal, actress Pankhuri Gidwani, journalist Navjot Randhawa, and Olympian Ashish Kumar Chaudhary. The discussions traversed an expansive intellectual terrain—literature, leadership, language, and the evolving aspirations of Generation Z.

Reflecting on his session, Kanjilal observed that the dialogue flowed organically “from literature to leadership,” underscoring a central premise: books are not confined to shelves; they shape ideologies, movements, and nations.

Language in the Age of Gen Z

One of the most engaging moments emerged during a light-hearted yet perceptive exchange on linguistic evolution. Addressing a predominantly Gen Z audience, Kanjilal humorously juxtaposed traditional expressions such as “alright” and “okay” with today’s minimalist “K.”

Beneath the humor lay a deeper philosophical reflection. Language, he asserted, is in perpetual evolution. “Change is the greatest constant,” he remarked, describing language not as a static construct but as an ongoing progression.

Drawing from both philosophy and science, he invoked the concept of “progression” articulated by Swami Vivekananda, and alluded to notions resembling “time bending” long before they entered mainstream scientific discourse. His larger argument was unmistakable: literature, philosophy, and science do not exist in isolation; they intersect and inform one another in profound ways.

The Transformative Power of Words

Kanjilal reminded the audience that language has repeatedly altered the course of history. Citing Winston Churchill, who famously “mobilised the English language and sent it into battle,” he highlighted how Churchill’s wartime speeches during World War II rekindled national resolve at a moment of existential crisis.

Language, therefore, is not passive expression; it is an instrument of resilience and transformation.

At the same time, he encouraged students to preserve the dignity and richness of language even amid its evolution. A robust vocabulary, he argued, fosters confidence and clarity of thought. Words imbued with nuance—such as “bewitching”—or idiomatic expressions like “boil down to” enhance not merely communication but cognition itself.

Literature as the Architect of Leadership

The discourse expanded beyond language to examine literature’s profound influence on leadership and social transformation.

Kanjilal referenced Leo Tolstoy to illustrate how storytelling carries deep moral and philosophical resonance. Tolstoy’s reflections on greed, morality, and human responsibility profoundly influenced Mahatma Gandhi, particularly in shaping his philosophy of non-violence and Satyagraha. Gandhi’s intellectual formation was further enriched by thinkers such as John Ruskin—clear testimony to how books quietly shape world-altering leaders.

The conversation then turned to political philosophy. Karl Marx’s intellectual journey—from philosophical inquiry to political economy following the “theft of wood” debates of 1842—culminated in seminal works such as The Communist Manifesto and Das Kapital. Regardless of ideological alignment, Kanjilal noted, the global impact of Marx’s writings is indisputable. They reshaped geopolitics, influenced revolutions, and contributed significantly to the balance of power in the modern world.

“Imagine a world without communism,” he reflected—not as advocacy, but as recognition of literature’s far-reaching consequences.

From Tolstoy to Marx, from Gandhi to global superpowers, the underlying message was unequivocal: ideas inscribed in books possess the power to transform societies.

The Contemporary Challenge of Teaching and Oratory

The festival also addressed the challenges confronting educators and public speakers in an era marked by shrinking attention spans and digital distractions. Teaching and effective oratory, participants acknowledged, demand renewed adaptability. Yet the remedy, Kanjilal suggested, remains timeless: reading.

A disciplined reading habit cultivates depth, patience, and intellectual rigor. Confidence, he emphasised, is born of knowledge. A well-read mind, he asserted, can command silence even in a restless crowd.

He encapsulated his message in a single imperative: “Read”—perhaps, he suggested, the most powerful word in the English language.

A Call to Intellectual Commitment

Concluding the day’s deliberations, Kanjilal invoked a Scottish proverb: “Many a mickle makes a muckle,” underscoring that incremental intellectual efforts accumulate into transformative change. Literature, he reiterated, intertwines with politics, economics, science, and leadership in ways both subtle and monumental.

In an age defined by rapid linguistic, technological, and ideological evolution, Sahityam 2026 stands as a reminder that books remain humanity’s most steadfast companions. They challenge, refine, and prepare us—often quietly—for leadership and responsibility.

At CGC University, Mohali, Sahityam is not merely a festival. It is a reaffirmation that stories do not conclude on the final page—they begin within us.

नेपाल में दूतावास खोलने वाला है तुर्की, पूर्व RAW एजेंट लक्की बिष्ट ने भारत को लेकर किया सतर्क

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तुर्की नेपाल में दूतावास खोलने जा रहा है। पूर्व NSG कमांडो और सोशल मीडिया पर सक्रिय लकी बिष्ट ने नेपाल में संभावित तुर्की दूतावास को लेकर गंभीर दावे किए हैं। उन्होंने इसे भारत की सुरक्षा को लेकर खतरा बताया है। उन्होंने इसे केवल कूटनीतिक कदम न मानकर इसके पीछे “छुपे हुए एजेंडे” की आशंका जताई है।

किस बड़े खेल की बात कर रहे बिष्ट?

पूर्व RAW एजेंट लक्की बिष्ट ने अपने अधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया है। बिष्ट का मानना है कि नेपाल के अंदर एंबेसी के आड़ में बहुत बड़ा खेल शुरू होने वाला है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा है, “नेपाल के अंदर एंबेसी के आड़ में बहुत बड़ा खेल शुरू होने वाला है। अगर तुर्की की एंबेसी नेपाल में खुलती है, तो यह सिर्फ कूटनीति नहीं होगी यह धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने का दरवाजा होगा।

नेपाल में तुर्की के दूतावास से किस बात का डर

इतिहास गवाह है कि तुर्की ने उन संगठनों को समर्थन दिया है जो समाज में विभाजन और हिंसा फैलाते हैं। तुर्की ने ही इस्माइल हानिया को वीआईपी पासपोर्ट दिए, जब ISIS अपने चरम पर था तुर्की ने जिहादी रास्ते खोले और सीरिया को बर्बाद करने में भी इसकी भूमिका रही है। अगर आज नेपाल में यह तुर्की एंबेसी खुलती है, तो इसके पीछे छुपे एजेंडे को समझना जरूरी है यह सीधा हमला होगा नेपाल की पहचान, उसकी संस्कृति और उसके अस्तित्व पर।”

नेपाल में बालेन शाह के शपथ लेते ही पूर्व पीएम केपी ओली गिरफ्तार, प्रधानमंत्री बनते ही एक्शन

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नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पिछले साल हुए घातक जेन-जी विरोध प्रदर्शनों में कथित भूमिका के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई नए प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह के पद की शपथ लेने के 24 घंटे की गई है।

ओली के साथ पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक भी गिरफ्तार

ओली को शनिवार सुबह भक्तपुर के गुंडू स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया। ओली के साथ उनके पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया है। वहीं, लेखक को सुबह करीब 5 बजे भक्तपुर के सूर्यविनायक स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया। काठमांडू वैली पुलिस के अनुसार, दोनों को सुबह गिरफ्तार किया गया और अब आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

ओली को हो सकती है 10 साल तक की सजा

ये गिरफ्तारियां पिछले साल जेन-जी विरोध प्रदर्शन मामले में गृह मंत्रालय की दर्ज कराई एक औपचारिक शिकायत के बाद हुई हैं। शिकायत के चलते जांच शुरू हुई और गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए। उन पर ऐसी धाराओं के तहत आरोप लगाए जाने की संभावना है, जिनमें अधिकतम 10 साल तक सजा हो सकती है।

सरकार ने कहा- कार्रवाई बदले की भावना से नहीं

ओली और लेखक की गिरफ्तारी बालेन शाह के नेपाल का प्रधानमंत्री बनने के 24 घंटे के भीतर हुई हैं। शुक्रवार को ही बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। एक दिन बाद ही यह एक्शन हो गया है। सरकार ने साफ किया है कि यह कार्रवाई किसी बदले की भावना से नहीं, बल्कि कानून के तहत की जा रही है। दरअसल, बालेन शाह के सत्ता में आने से पहले ही उनके खिलाफ एक्शन की सिफारिश की गई थी।

क्या था जेन-जी विरोध प्रदर्शन?

पिछले साल सितंबर में नेपाल में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शन हुए थे, जिन्हें जेन-जी विरोध प्रदर्शन कहा गया। ये प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गए और दो दिनों के भीतर 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इस हिंसा के बाद ओली सरकार पर गंभीर सवाल उठे और आखिरकार उनकी सरकार गिर गई। इन घटनाओं ने देश की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया।

क्या कोरोना की तरह देश में लगेगा लॉकडाउन? मोदी सरकार ने दूर की आशंकाएं, कहा- पैनिक होने की जरूरत नहीं

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पश्चिम एशिया में संकट के चलते दुनियाभर में तेल को लेकर हाहाकार मच गया है। भारत में भी इसका असर देखा जा रहा है। ईरान जंग के बीच भारत में लॉकडाउन की अफवाहें तेजी से फैल रही हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से ऐसी खबरें फैल रही हैं। जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या देश में कोविड जैसी स्थिति फिर से आ गई है? क्या देश में लॉकडाउन लगने वाला है?

लॉकडाउन की अफवाहों को खारिज किया

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने इस तरफ की अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को साफ किया कि देशव्यापी लॉकडाउन की अफवाहें पूरी तरह से झूठी हैं। सरकार के सामने फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति की स्थिति नियंत्रण में है। देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कमी नहीं है। वहीं, खुदरा दुकानों के पास पर्याप्त स्टॉक है। वे बिना किसी रुकावट के ईंधन वितरित कर रहे हैं।

तेल की कीमतों को लेकर हरदीप पुरी का पोस्ट

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने तेल की कीमतें बढ़ने को लेकर एक्स पर पोस्ट कर जानकारी देते हुए बताया कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं। इस कारण दुनियाभर में उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में कीमतों में लगभग 30%-50% की वृद्धि हुई है, उत्तरी अमेरिकी देशों में 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीकी देशों में 50% की वृद्धि हुई है।

अपने वित्त पर बोझ उठाने का फैसला किया-पुरी

हरदीप पुरी ने बताया कि मोदी सरकार के पास दो विकल्प थे या तो अन्य सभी देशों की तरह भारत के नागरिकों के लिए कीमतों में भारी वृद्धि करें या फिर अपने वित्त पर बोझ उठाएं ताकि भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से सुरक्षित रहें। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से पिछले 4 वर्षों से अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को निभाते हुए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बार फिर वित्तीय स्थिति को लेकर बोझ उठाने का फैसला किया है।

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटी, तेल कंपनियों को बड़ी राहत

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मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण भारत में डीजल और पेट्रोल की दिक्कत शुरू हो गई है। साथ ही कच्चे तेल की कीमत भी प्रति बैरल 100 डॉलर से ज्यादा है। इस बीच सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने का बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी कम की है।

पेट्रोल-डीजल के दामों को स्थिर रखने का फैसला

केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटा दी है। यह पेट्रोल पर पहले 13 रुपए थी जो अब 3 रुपए हो गई है, वहीं डीजल पर 10 रुपए थी जो अब जीरो हो गई है। दरअसल, इजराइल-ईरान जंग से पहले यह कच्चे तेल की कीमत करीब 73 डॉलर प्रति बैरल थी जो अब 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हो गई है। इससे तेल कंपनियों घाटा हो रहा था। वे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा सकती थीं। इससे आम आदमी पर बोझ बढ़ता। ऐसे में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर पेट्रोल-डीजल के दामों को स्थिर रखा है।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नीचे आना शुरू हुई हैं। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ गई थीं। हालांकि, शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में कीमतों में थोड़ी गिरावट देखी गई। इसकी वजह यह है कि अमेरिका ने ईरान के एनर्जी प्लांट्स पर हमले 10 दिनों के लिए रोकने का ऐलान किया है। रॉयटर्स के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.8% गिरकर 107.11 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.88% गिरकर 93.65 डॉलर प्रति बैरल हो गया। इससे एक दिन पहले दोनों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई थी।

क्या पेट्रोल-डीजल के दाम कम हो जाएंगे?

सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने के बाद अब बड़ा सवाल है कि क्या पेट्रोल-डीजल के दाम कम हो जाएंगे? इसका जवाब ना होगा। दरअसल, भले ही सरकार ने टैक्स कम किया है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के रिटेल रेट सीधे सरकार तय नहीं करती। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल कंपनियां कच्चे तेल की कीमत और अपने मुनाफे के आधार पर रेट तय करती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियां इस छूट का इस्तेमाल अपने पिछले घाटे की भरपाई के लिए करेगी।

पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों संग बैठक आज, पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा में शामिल नहीं होंगे 5 राज्यों के सीएम

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पश्चिम एशिया में जंग जारी है। ईरान-अमेरिका और इजराइल के बीच जारी युद्द का पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर असर हो रहा है। भारत में भी पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर दिख रहा है। ऐसे में पश्चिम एशिया के हालातों से कैसे निपटा जाए, इसके लिए मोदी सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। मिडिल ईस्ट के हालात पर सरकार ने कल यानी गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। अब आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हाई लेवल मीटिंग करेंगे।

पश्चिम एशिया संघर्ष पर मंथन

आज शाम 6.30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीएम मोदी मुख्यमंत्रियो के साथ बातचीत करेंगे। बैठक में प्रधानमंत्री पश्चिम एशिया संघर्ष पर मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत करेंगे, ताकि राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की जा सके। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ प्रयासों में तालमेल सुनिश्चित करना होगा।

पांच राज्यों के मुख्यमंत्री बैठक में नहीं होंगे शामिल

इस मीटिंग के लिए पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों को शामिल नहीं किया गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पीएम मोदी की बैठक में शामिल नहीं होंगे। दरअसल, जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, वहां के मुख्यमंत्री बैठक में शामिल नहीं होंगे। आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के चलते इस बातचीत में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री शामिल नहीं होंगे। हालांकि, कैबिनेट सचिवालय इन राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ अलग से मीटिंग करेगा।

मिडिल ईस्ट पर पीएम मोदी लगातार सक्रिय

मिडिल ईस्ट के संकट को देखते हुए पीएम मोदी लगातार सक्रिय हैं और पश्चिम एशिया के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं। इस मुद्दे पर उन्होंने संसद के दोनों सदनों को भी संबोधित किया। पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा था कि पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के हालात ने भारत के सामने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं जो आर्थिक सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय सुरक्षा से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा, यह आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज में संदेश दुनिया में जाए।

जंग जारी रही, तो गंभीर दुष्परिणाम तय', मिडिल ईस्ट जंग पर राज्यसभा में बोले पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री मोदी ने आज पश्चिम एशिया संकट को लेकर राज्यसभा में जानकारी दी। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर राज्यसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हालात भारत के लिए भी चिंताजनक हैं और व्यापार के रास्ते प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि हमें सावधान, सतर्क और तैयार रहना है।

भारत के लिए भी चिंताजनक स्थिति-पीएम मोदी

पीएम मोदी पश्चिम एशिया संकट पर राज्यसभा में बोलते हुए कहा कि इस युद्ध ने पूरी दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। भारत के लिए भी यह एक चिंताजनक स्थिति है। व्यापारिक रास्ते प्रभावित हुए हैं इसलिए सप्लाई प्रभावित हुई है। लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं, और उनके जीवन और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी भारत के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है।

3,75,000 से ज्यादा भारतीय सुरक्षित भारत लौटे- पीएम मोदी

राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'संकट की इस स्थिति में दुनिया भर में भारतीयों की सुरक्षा हमारे लिए सबसे जरूरी है। अब तक 3,75,000 से ज़्यादा भारतीय सुरक्षित भारत लौट आए हैं। अकेले ईरान से 1000 से ज्यादा भारतीय लौटे हैं, इनमें से 700 से ज़्यादा मेडिकल स्टूडेंट हैं। संकट की इस घड़ी में, हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। सभी देशों ने वहां भारतीयों की सुरक्षा का भरोसा दिया है। हालांकि, यह दुख की बात है कि हमलों में कुछ भारतीयों की मौत हो गई और कुछ दूसरे घायल हो गए। प्रभावित परिवारों को हर जरूरी मदद दी जा रही है।'

जंग जारी रही तो होंगे गंभीर दुष्परिणाम- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने संवाद का रास्ता सुझाया है। युद्ध से जिस तरह की परिस्थितियां बनी हैं, अगर यह जंग जारी रही तो गंभीर दुष्परिणाम होंगे। हम रणनीति के साथ काम कर रहे हैं कि भारत पर इसके कम से कम दुष्परिणाम हों। पश्चिम एशिया में जंग की वजह से जितना नुकसान हो चुका है, उससे रिकवर करने में भी दुनिया को काफी समय लगेगा।

राज्यों की भूमिका भी इस संकट में अहम-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, यह राज्यों का सदन है और यह संकट आने वाले समय में हमारी बड़ी परीक्षा लेने वाला है। राज्यों की भूमिका भी इस संकट में अहम होने वाली है। पीएम गरीब कल्याण योजना का लाभ गरीबों को समय पर मिलता रहे, यह प्रयास करना होगा। राज्यों को प्रवासी मजदूरों की समस्याओं पर भी ध्यान देना होगा। कालाबाजारी, जमाखोरी की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। जरूरी चीजों की सप्लाई सुनिश्चित करना राज्यों की प्राथमिकता होनी चाहिए।

हमें तेजी से रिफॉर्म करने होंगे-पीएम मोदी

संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, भारत की तेज ग्रोथ बनाए रखना हम सभी का दायित्व है। हमें तेजी से रिफॉर्म करने होंगे। ये टीम इंडिया की भी बड़ी परीक्षा है। कोविड काल में हमने नया मॉडल सामने रखा था। हमें उसी भावना के साथ आगे भी काम करना होगा। सभी राज्य सरकारों और केंद्र के प्रयासों से देश इस गंभीर संकट का प्रभावी तरीके से सामना कर पाएगा।

पश्चिम एशिया संकट पर भारत सरकार की नजर, पीएम मोदी आज लोकसभा में देंगे भाषण

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-यूएस जंग के बीच भारत की चिंता भी बढ़ती जा रही है। इसी अहम मुद्दे पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में बयान दे सकते हैं। जहां वह मौजूदा हालात, भारत की ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक बाजार पर असर और क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार का रुख साफ करे सकते हैं।

इन मुद्दों पर बोल सकते हैं पीएम मोदी

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संबोधन में मौजूदा वैश्विक हालात, भारत की स्ट्रैटेजी और अपनी सरकार के रुख को स्पष्ट कर सकते हैं। इससे पहले भी सरकार ने इशारा किया था कि मिडिल संकट को लेकर सतर्क है और हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। बीते रविवार को पीएम मोदी के साथ मंत्रियों की हुई हाई लेवल बैठक में इस बात पर चर्चा की गई।

जंग से पैदा हुए हालात की समीक्षा

ईरान की इजरायल और अमेरिका के खिलाफ जारी जंग से पैदा हुए हालात पर पीएम मोदी ने रविवार शाम सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति के साथ उच्च स्तरीय बैठक की थी। इस बैठक पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की समीक्षा करने और प्रस्तावित राहत उपायों पर चर्चा की गई। इस दौरान कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति और अब तक उठाए गए और भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों की तरफ किए जा रहे उपायों पर एक खास प्रेजेंटेशन दिया।

जंग के प्रभाव और उससे निपटने के उपायों पर चर्चा

कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, एमएसएमई, निर्यातक, शिपिंग, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला और सभी प्रभावित क्षेत्रों जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ने वाले अपेक्षित प्रभाव और उससे निपटने के लिए उठाए गए उपायों पर चर्चा की गई। देश के समग्र वृहद-आर्थिक परिदृश्य और आगे उठाए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की गई। विषय में लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खाद के वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा की गई। यह भी तय किया गया कि सभी पावर प्लांट में कोयले के स्टॉक की पर्याप्त सप्लाई से भारत में बिजली की कोई कमी नहीं होगी।

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच गहराया LPG का संकट, देशभर से सिलेंडर सप्‍लाई प्रभावित

#lpggascrisishitstakenamidmiddleeast_tensions

अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की जंग का असर भारत के करोड़ों लोगों पर पड़ता दिख रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब भारत में एलपीजी और गैस सप्लाई पर भी दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया में जारी इस युद्ध के बीच उत्तर प्रदेश, बिहार से लेकर तेलंगाना और तमिलनाडु तक लाखों लोग एलपीजी सिलेंडर की किल्लत से जूझ रहे हैं।

कई राज्यों में एलपीजी की किल्लत

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के कारण राजधानी दिल्ली, यूपी और हरियाणा सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में एलपीजी की किल्लत होने लगी है। गैस सिलेंडर भरवाने को लेकर मारामारी शुरू हो गई है। लखनऊ समेत कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

गैस सिलेंडर भरवाकर जमा करने लगे लोग

कई जगह घरेलू आपूर्ति तो अभी सामान्य है, लेकिन वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों को लेकर परेशानी बढ़ रही है। यह स्थिति इसलिए भी है कि लोग आशंका में पहले से ही गैस सिलेंडर भरवाकर जमा करने लगे हैं। व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति सीमित होने से दिल्ली में 50 हजार से अधिक रेस्तरां, पब, बार और होटलों के संचालन में दिक्कतें आने लगी हैं।

गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को लेकर अधिसूचना

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण भारत की एक-तिहाई गैस आपूर्ति बाधित होने के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक गजट अधिसूचना जारी कर गैर-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को मिलने वाली गैस प्रमुख उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र के लिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक गैस के आवंटन में बदलाव किया है। इसके तहत एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पाइप से मिलने वाली रसोई गैस (पीएनजी) को अन्य सभी क्षेत्रों पर प्राथमिकता दी जाएगी।

गैस की परेशानी से रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को करोड़ों का नुकसान

देश में एलपीजी की किल्लत के कारण रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को जबरदस्त नुकसान हो रहा है। कई रेस्टोरेंट अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष और रेस्टोरेंट कारोबारी जोरावर कालरा ने कहा कि अगर एलपीजी सिलेंडरआपूर्ति में कमी जारी रही तो रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को रोजाना 1200 से 1300 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।

भारत में एलपीजी की कितनी खपत?

बता दें कि भारत एलपीजी का बड़ा उपभोक्ता है। देश में हर साल लगभग 31.2 मिलियन टन (करीब 3.13 करोड़ टन) एलपीजी की खपत होती है। इसमें से लगभग 60 प्रतिशत गैस का आयात किया जाता है, जबकि करीब 40 प्रतिशत यानी लगभग 12.4 मिलियन टन एलपीजी का उत्पादन देश में ही किया जाता है। घरेलू उपयोग में 14 किलोग्राम वाले सिलेंडर की हिस्सेदारी लगभग 87 प्रतिशत है, जबकि कमर्शियल सेक्टर में 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की हिस्सेदारी करीब 13 प्रतिशत है।

किन देशों से आता है एलपीजी?

भारत की एलपीजी आपूर्ति का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। कुल आयात में लगभग 80 प्रतिशत गैस इसी क्षेत्र से मिलती है। यूएई से लगभग 26 प्रतिशत, कतर से 22 प्रतिशत और सउदी अबर से करीब 22 प्रतिशत एलपीजी आती है, जबकि बाकी 33 प्रतिशत अन्य देशों से आयात की जाती है। भारत में कितने उपभोक्ता मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 33.08 करोड़ सक्रिय एलपीजी उपभोक्ता हैं।

ईरान युद्ध की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित

ईरान युद्ध की वजह से भारत में पेट्रोलियम पदार्थों का सप्लाई चेन प्रभावित हो रहा है। केंद्र सरकार घरेलू गैस और ईंधन की सप्लाई चेन बरकरार रखने के लिए कई तरह के सकारात्मक और सख्त कदम उठा रही है। आम जनता पर इसका सीधा असर न पड़े इसके लिए वह आवश्यत वस्तु अधिनियन (ईसीए) भी लागू कर चुकी है। फिर भी एलएनजी और एलपीजी की किल्लत से देश में ऑद्योगिक क्षेत्र प्रभावित होने लगे हैं।

क्या होता है ESMA, देशभर में किया गया लागू, मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच सरकार का बड़ा फैसला

#esmaimplementednationwidelpgcrisis

ईरान-इजरायल जंग की वजह से मिडिल ईस्ट में पैदा हुए हालातों का असर भारत में तेल-गैस आपूर्ति पर पड़ रहा है। केंद्र सरकार ने एलपीजी सिलिंडर की जमाखोरी रोकने और घरेलू गैस संकट को टालने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा) लागू किया है। इस कदम का उद्देश्य घरेलू उपयोग के लिए गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना और काले बाजारी गतिविधियों पर रोक लगाना है।

कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार की सख्त

मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात और ईंधन सप्लाई में दिक्कतों को देखते हुए सरकार ने एलपीजी गैस को लेकर बड़े फैसले किए हैं। सरकार ने घरेलू एलपीजी सप्लाई को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी है। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए नया नियम लगाया गया है। केंद्र सरकार ने सोमवार को एक अहम फैसला लेते हुए लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस की बिना किसी रुकावट के आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी वस्तु अधिनियम की शक्तियों का उपयोग किया है।

क्या होता है ESMA ?

आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ईएसएमए) एक एक्ट है, जिसे कुछ सेवाओं की डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। ये सेवाएं लोगों के सामान्य जीवन से जुड़ी हैं और इनके प्रभावित होने का सीधा असर आम जनता को पड़ता है। इसमें सार्वजनिक परिवहन (बस सेवाएं), स्वास्थ्य सेवाएं (डॉक्टर और अस्पताल) जैसी सेवाएं शामिल हैं।

क्या है फैसले की पीछे की वजह

सरकार ने देशभर में ESMA लगाने का फैसला अचानक नहीं लिया है। जिस तरह से ईरान पर इजराइल र अमेरिका ने हमला किया है और दोनों पक्षों के बीच सैन्य संघर्ष को 10 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। इसका असर दुनियाभर के देशों में दिख रहा है। वैश्विक अस्थिरता के समय में दुनिया में बढ़ती प्राकृतिक गैस की कीमतों के बीच केंद्र सरकार लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। इसमें एलपीजी सिलेंडर बुकिंग की अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया। इसकी वजह जमाखोरी को रोकना है। इसी के बाद देशभर में ESMA का फैसला लिया गया।

At Sahityam (National Literature Festival,Chandigarh)2026, Anish Kanjilal Explores the Convergence of Literature, Leadership and Change

3rd February, Mohali:

“It is said that books do not merely narrate stories; they create stories within us.” With this resonant observation, author and speaker Anish Kanjilal inaugurated an atmosphere of reflection and intellectual vigor at Sahityam 2026, hosted by CGC University, Mohali. Widely regarded as one of India’s largest literature festivals, Sahityam emerged as a dynamic confluence of ideas, scholarship, and the enduring influence of the written word.

The university campus, transformed into a vibrant literary arena, welcomed thousands of books and an equally enthusiastic gathering of readers, scholars, and students. Day One unfolded as a compelling exchange between celebrated voices and inquisitive young minds, united by a shared curiosity about literature’s role in shaping contemporary thought.

A Confluence of Distinguished Voices

The opening day featured an eclectic panel of distinguished personalities, including author and speaker Anish Kanjilal, actress Pankhuri Gidwani, journalist Navjot Randhawa, and Olympian Ashish Kumar Chaudhary. The discussions traversed an expansive intellectual terrain—literature, leadership, language, and the evolving aspirations of Generation Z.

Reflecting on his session, Kanjilal observed that the dialogue flowed organically “from literature to leadership,” underscoring a central premise: books are not confined to shelves; they shape ideologies, movements, and nations.

Language in the Age of Gen Z

One of the most engaging moments emerged during a light-hearted yet perceptive exchange on linguistic evolution. Addressing a predominantly Gen Z audience, Kanjilal humorously juxtaposed traditional expressions such as “alright” and “okay” with today’s minimalist “K.”

Beneath the humor lay a deeper philosophical reflection. Language, he asserted, is in perpetual evolution. “Change is the greatest constant,” he remarked, describing language not as a static construct but as an ongoing progression.

Drawing from both philosophy and science, he invoked the concept of “progression” articulated by Swami Vivekananda, and alluded to notions resembling “time bending” long before they entered mainstream scientific discourse. His larger argument was unmistakable: literature, philosophy, and science do not exist in isolation; they intersect and inform one another in profound ways.

The Transformative Power of Words

Kanjilal reminded the audience that language has repeatedly altered the course of history. Citing Winston Churchill, who famously “mobilised the English language and sent it into battle,” he highlighted how Churchill’s wartime speeches during World War II rekindled national resolve at a moment of existential crisis.

Language, therefore, is not passive expression; it is an instrument of resilience and transformation.

At the same time, he encouraged students to preserve the dignity and richness of language even amid its evolution. A robust vocabulary, he argued, fosters confidence and clarity of thought. Words imbued with nuance—such as “bewitching”—or idiomatic expressions like “boil down to” enhance not merely communication but cognition itself.

Literature as the Architect of Leadership

The discourse expanded beyond language to examine literature’s profound influence on leadership and social transformation.

Kanjilal referenced Leo Tolstoy to illustrate how storytelling carries deep moral and philosophical resonance. Tolstoy’s reflections on greed, morality, and human responsibility profoundly influenced Mahatma Gandhi, particularly in shaping his philosophy of non-violence and Satyagraha. Gandhi’s intellectual formation was further enriched by thinkers such as John Ruskin—clear testimony to how books quietly shape world-altering leaders.

The conversation then turned to political philosophy. Karl Marx’s intellectual journey—from philosophical inquiry to political economy following the “theft of wood” debates of 1842—culminated in seminal works such as The Communist Manifesto and Das Kapital. Regardless of ideological alignment, Kanjilal noted, the global impact of Marx’s writings is indisputable. They reshaped geopolitics, influenced revolutions, and contributed significantly to the balance of power in the modern world.

“Imagine a world without communism,” he reflected—not as advocacy, but as recognition of literature’s far-reaching consequences.

From Tolstoy to Marx, from Gandhi to global superpowers, the underlying message was unequivocal: ideas inscribed in books possess the power to transform societies.

The Contemporary Challenge of Teaching and Oratory

The festival also addressed the challenges confronting educators and public speakers in an era marked by shrinking attention spans and digital distractions. Teaching and effective oratory, participants acknowledged, demand renewed adaptability. Yet the remedy, Kanjilal suggested, remains timeless: reading.

A disciplined reading habit cultivates depth, patience, and intellectual rigor. Confidence, he emphasised, is born of knowledge. A well-read mind, he asserted, can command silence even in a restless crowd.

He encapsulated his message in a single imperative: “Read”—perhaps, he suggested, the most powerful word in the English language.

A Call to Intellectual Commitment

Concluding the day’s deliberations, Kanjilal invoked a Scottish proverb: “Many a mickle makes a muckle,” underscoring that incremental intellectual efforts accumulate into transformative change. Literature, he reiterated, intertwines with politics, economics, science, and leadership in ways both subtle and monumental.

In an age defined by rapid linguistic, technological, and ideological evolution, Sahityam 2026 stands as a reminder that books remain humanity’s most steadfast companions. They challenge, refine, and prepare us—often quietly—for leadership and responsibility.

At CGC University, Mohali, Sahityam is not merely a festival. It is a reaffirmation that stories do not conclude on the final page—they begin within us.