Rajesh Babu K Soornaad’s ‘INI’ Raises a Powerful Voice Against Drugs and Child Exploitation in Malayalam Cinema

At a time when Kerala and the rest of India are witnessing increasing concern over drug abuse among school-going children, the upcoming Malayalam film “INI - The Unknown Tomorrow”, spearheaded by producer and music composer Rajesh Babu K Soornaad, arrives as a timely and socially conscious cinematic intervention. More than just a film, INI- The Unknown Tomorrow positions itself as an organic social movement that urges families, educators, and society to confront uncomfortable realities surrounding adolescence, addiction, and child exploitation.

The film tells its story through the eyes of a 13-year-old girl, making its message deeply personal and emotionally resonant. In an era where children are exposed to negative influences at a very young age, INI - The Unknown Tomorrow asks a simple yet disturbing question: Where are today’s children heading, and what kind of future are we preparing for them?

A Story Rooted in Reality

At the heart of INI is Shivada, a young adolescent portrayed with remarkable maturity by child actor Devananda Parveen. Her performance captures the fragile emotional world of a child standing at the crossroads of innocence and harsh reality. Through Shivada’s journey, the film explores how teenage curiosity, peer pressure, and emotional vulnerability can slowly push children towards addiction and exploitation.

Rather than sensationalising drug abuse, INI- The Unknown Tomorrow presents its consequences with honesty and restraint. The narrative highlights how seemingly harmless influences within schools and social circles can turn into life-altering traps. By doing so, the film reflects the silent struggles of countless children whose voices often go unheard.

Rajesh Babu K Soornaad’s Strong Social Commitment

Producer Rajesh Babu K Soornaad, who also serves as the film’s music composer, plays a crucial role in shaping the soul of IN- The Unknown TomorrowI. His involvement goes beyond production, reflecting a deep personal commitment to using cinema as a tool for social awareness. The music composed by Rajesh Babu K Soornaad subtly enhances the emotional depth of the film without overpowering its sensitive subject matter.

Complementing this is the impactful background score by Rev. Dr. Fr. Joy Mathew, which adds intensity to crucial moments, while Biju Mookkunnur also contributes significantly to the film’s musical elements.

Honest Direction and Powerful Performances

Directed by Anil Kaarakkulam, INI- The Unknown Tomorrow adopts a direct and unfiltered storytelling style. The director does not shy away from showing uncomfortable truths—be it the silent negligence of adults, the pressures within school environments, or the fragile mental state of adolescents. The film carefully avoids glorifying substance abuse, instead focusing on its devastating impact on young lives.

Adding further strength to the narrative is actor Shanoop, who has been steadily gaining recognition in Malayalam cinema. His significant role adds emotional weight and depth, reinforcing the film’s strong social relevance.

### Strong Technical Backbone

INI - The Unknown Tomorrow is produced by Rajesh K Babu Sooranad and Sibin Davis under the banners Voks Studios and Aniva Creations. The film is supported by a dedicated and experienced technical team. Shobin C Johnny’s cinematography brings realism and authenticity to the visuals, capturing both the innocence of childhood and the darkness that slowly creeps in.

The film’s editing is handled by Jijo Babu K, ensuring a tight and emotionally engaging narrative flow. Nilambur Sunny serves as the Production Controller, Shanoop* as Project Designer, and Jayaraman Poopathy manages makeup, contributing to the film’s realistic portrayal of its characters.

A Mirror to Today’s Society

Beyond its cinematic value, INI stands as a mirror to society. School life is often described as the most beautiful phase of one’s life—a time filled with dreams, friendships, and hope. But INI dares to ask whether this is still true for today’s children. Are they truly safe? Are we, as a society, doing enough to protect them from harmful influences?

The film does not offer easy solutions. Instead, it urges parents, teachers, policymakers, and the community at large to introspect and take responsibility. Through Shivada’s story, INI reminds viewers that childhood, once lost, can never be reclaimed.

With its strong message, honest storytelling, and committed vision led by Rajesh Babu K Soornaad, INI promises to be more than just another Malayalam film—it aims to spark conversations, awareness, and action against drug abuse and child exploitation in contemporary Ind

सोमनाथ, 1026 से 2026: ग्लानि से गौरव तक के हजार वर्ष ✍️डॉ. विद्यासागर उपाध्याय संजीव सिंह बलिया!समय गवाह है कि तलवारों की धार से
संजीव सिंह बलिया!समय गवाह है कि तलवारों की धार से मंदिरों की दीवारें तो गिराई जा सकती हैं, लेकिन राष्ट्र की चेतना को कभी कुचला नहीं जा सकता। 1026 में सोमनाथ के खंडहरों पर खड़ा होकर महमूद जिस जीत का अट्टहास कर रहा था, 2026 के कालखंड ने उसे इतिहास की धूल में मिला दिया है। आज सोमनाथ का स्वर्ण-शिखर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि इस सत्य की उद्घोषणा है कि—अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, सूर्य का उदय अटल है। अफगानिस्तान की उन अभेद्य और धूसर पर्वत कंदराओं के मध्य स्थित गजनी की गोद में, सन् 971 ईस्वी में महमूद का प्रादुर्भाव हुआ। नियति ने उसके अंतस में पिता सुबुक्तगीन से विरासत में मिली साम्राज्यवादी पिपासा और मजहबी कट्टरता के हलाहल का सम्मिश्रण कर दिया था। सिंहासनारूढ़ होते ही उसकी महत्वाकांक्षी दृष्टि ने मध्य एशिया के क्षितिज पर स्वयं को एक अप्रतिम सुल्तान के रूप में स्थापित करने का स्वप्न बुना। किंतु इस महात्वाकांक्षा के स्वर्ण-महल को निर्मित करने हेतु जिस अपार वैभव की आधारशिला चाहिए थी, उसकी प्राप्ति हेतु उसने एक विनाशकारी मार्ग चुना। उस युग का आर्यावर्त अपनी समृद्धि की पराकाष्ठा पर था—एक ऐसी 'स्वर्णमयी चिड़िया', जिसके देवालयों के शिखर सूर्य की रश्मियों से स्पर्धा करते थे और जिनकी अंतहीन मणियाँ विश्व को चकाचौंध करने हेतु पर्याप्त थीं। भारत के इसी अतुलनीय और अलौकिक वैभव ने महमूद की लुटेरी वृत्ति को एक हिंसक शिकारी की भाँति उकसाया। उसने आर्यावर्त की पवित्र धरा को लहूलुहान करने का एक वीभत्स संकल्प लिया। सन् 1000 से 1027 ईस्वी का वह कालखंड गवाह है, जब उसने भारत के हृदय पर एक-दो नहीं, अपितु सत्रह बार भीषण प्रहार किए। ये आक्रमण मात्र भौगोलिक विजय की लालसा नहीं थे, अपितु सभ्यता और संस्कृति पर बर्बरता का वह नंगा नाच था, जिसने इतिहास के पन्नों को सदा के लिए रक्तरंजित कर दिया। जब महमूद की बर्बर सेना ने कृष्ण की पावन क्रीड़ास्थली मथुरा की परिधि में प्रवेश किया, तो वहां की स्थापत्य कला की दिव्यता देख वह पाषाण-हृदय लुटेरा भी एक क्षण के लिए स्तब्ध रह गया। यमुना के तट पर स्थित वे गगनचुंबी देवालय और उनमें जड़ित नीलमणि एवं हीरक खंड उसे स्वर्ग की साक्षात उपस्थिति जान पड़े। स्वयं महमूद ने इस नगर की उपमा देते हुए स्वीकार किया था— 'यदि कोई इस सदृश नगर का निर्माण करना चाहे, तो उसे एक लाख स्वर्ण दीनार व्यय करने होंगे और इसमें दो शताब्दी का समय लगेगा।' किंतु, उसकी मजहबी कट्टरता ने शीघ्र ही इस सराहना को विनाशकारी उन्माद में बदल दिया। मथुरा की वे गलियां, जहाँ कभी दिव्य वेणु-नाद गूंजता था, वहां अब केवल तलवारों की पैशाचिक खनक और निहत्थे नागरिकों का कारुणिक क्रंदन शेष था। महमूद के आदेश पर उन कलात्मक विग्रहों को हथौड़ों से खंडित किया गया, जिनके दर्शन मात्र से भक्त कृतार्थ हो जाते थे। समकालीन इतिहासकार अल-उतबी लिखता है कि— 'सुल्तान ने आदेश दिया कि सभी मंदिरों को जला दिया जाए और उन्हें भूमिसात कर दिया जाए।' मंदिरों के वे गर्भगृह, जो कभी चंदन और पारिजात की सुगंध से महकते थे, अब निर्दोष ब्राह्मणों और रक्षार्थ खड़े योद्धाओं के तप्त रक्त की गंध से भर गए। उस मुख्य भव्य मंदिर को, जिसकी सुंदरता का गुणगान सुल्तान ने स्वयं किया था, निर्दयतापूर्वक अग्नि के हवाले कर दिया गया। स्वर्णमयी प्रतिमाओं को गलियों में घसीटा गया और उनकी आँखों में जड़े बहुमूल्य रत्नों को क्रूरता से उखाड़ लिया गया। वह पावन नगरी, जो सहस्रों वर्षों से भारतीय संस्कृति का प्रखर दीप-स्तंभ थी, कुछ ही प्रहरों में धुएं और भस्म के ढेर में परिवर्तित कर दी गई। अल-उतबी के अनुसार, उस दिन पाँच हजार स्वर्ण की मूर्तियाँ और अनगिनत स्वर्ण-मुद्राएं लूट ली गईं। यमुना का जल, जो कभी नील वर्ण का था, उस दिन अपने पुत्रों के रक्त से लाल होकर बह रहा था। मथुरा का वह ध्वंस मात्र एक नगर की लूट नहीं थी, बल्कि एक जीवंत सभ्यता के हृदय पर किया गया सबसे वीभत्स और अमिट आघात था। सन् 1026 की वह शीतल प्रभात, जब अरब सागर की लहरें सोमनाथ के चरणों को पखार रही थीं, क्षितिज पर महमूद की बर्बर सेना के धूल के बादल मँडराने लगे। मंदिर की प्राचीर पर खड़े योद्धाओं ने जब शत्रु की विशाल वाहिनी को देखा, तो उनके मुख से केवल एक ही उद्घोष निकला— 'हर-हर महादेव!'। वह युद्ध मात्र दो सेनाओं का संघर्ष नहीं था, वह आततायी की राक्षसी प्रवृत्ति और भक्त की अडिग आस्था के मध्य एक धर्मयुद्ध था। गुजरात के दुर्गम पथों से होता हुआ जब महमूद मंदिर के सिंहद्वार तक पहुँचा, तो उसे उस प्रतिरोध का सामना करना पड़ा जिसकी उसने कल्पना भी न की थी। राजा भीमदेव प्रथम और उनके नेतृत्व में एकत्र हुए राजपूत योद्धाओं ने शौर्य की वह पराकाष्ठा दिखाई, जिसे देख शत्रु के दांत खट्टे हो गए। इतिहास साक्षी है कि मंदिर की रक्षा हेतु पचास सहस्र से अधिक निहत्थे ब्राह्मणों, संन्यासियों और वीर योद्धाओं ने स्वयं को वेदी पर अर्पित कर दिया। मंदिर के प्रांगण में रक्त की सरिता प्रवाहित होने लगी, किंतु एक भी शीश श्रद्धा के पथ से विचलित नहीं हुआ। सोमनाथ की अभेद्य प्रतीत होने वाली प्राचीरें केवल महमूद गजनवी के बाहरी प्रहारों से नहीं, बल्कि आंतरिक विश्वासघात और रणनीतिक क्षरण के आत्मघाती प्रहारों से ढह गई थीं, जिसका विवरण अल-बिरूनी और समकालीन इतिहासकारों ने अत्यंत पैनी दृष्टि से किया है। इस पतन की पटकथा में पहला प्रहार 'रणनीतिक चूक' के रूप में हुआ, जहाँ मंदिर के प्रबंधकों और पुजारियों के भीतर घर कर गई इस अव्यवहारिक और अति-धार्मिक धारणा ने कि देवता स्वयं प्रकट होकर म्लेच्छों का संहार करेंगे, वास्तविक सैन्य मोर्चाबंदी और सुरक्षा तैयारियों को पूरी तरह कुंद कर दिया। इसके समानांतर, 'राजनीतिक भूल' ने राष्ट्र की रीढ़ तोड़ दी, जब उत्तर भारत के शक्तिशाली राजा आपसी द्वेष और संकीर्ण अहम् के कारण राजा भीमदेव प्रथम के आह्वान पर एकजुट नहीं हुए, जिससे महमूद को वह खंडित प्रतिरोध मिला जिसने उसकी राह आसान कर दी। किंतु सबसे मर्मभेदी सत्य वह 'पेशेवर विश्वासघात' था, जिसके तहत महमूद की सेना में 'तिलक' जैसे उच्चपदस्थ हिंदू सेनापति और 'सालार-ए-हिंदुवान' जैसी पेशेवर हिंदू सैनिक टुकड़ियाँ शामिल थीं; ये भारतीय गद्दार भाड़े के सैनिक अपनी ही साझी विरासत और पवित्र देवालय के विरुद्ध मात्र वेतन और लूट के माल के लोभ में तलवारें भांज रहे थे, जो इस ऐतिहासिक त्रासदी को विश्वासघात की एक ऐसी पराकाष्ठा बना देता है जहाँ अपनों के ही हाथों अपनों का ही सर्वस्व विनष्ट हो गया। अंततः, संख्याबल और विश्वासघात की कतरनी ने वीरता के उस कवच को भेद दिया। काज़विनी लिखते हैं, "इस लड़ाई में 50 हज़ार से अधिक स्थानीय लोग मारे गए। इसके बाद महमूद ने मंदिर में प्रवेश किया। पूरा मंदिर लकड़ी के 56 खंभों पर टिका हुआ था, लेकिन स्थापत्य कला का सबसे बड़ा आश्चर्य था मंदिर की मुख्य मूर्ति जो कि बिना किसी सहारे के हवा में लटकी हुई थी। महमूद ने मूर्ति को आश्चर्य से देखा।" अल-बरूनी ने भी मंदिर का वर्णन करते हुए लिखा, "मंदिर के मुख्य भगवान शिव थे। ज़मीन से दो मीटर की ऊँचाई पर पत्थर का शिव लिंग रखा हुआ था.। उसके बग़ल में सोने और चाँदी से बनी कुछ और मूर्तियाँ थीं." महमूद जब गर्भगृह में प्रविष्ट हुआ, तो उसकी आँखों में दानवीय लोलुपता थी। वह दृश्य अत्यंत वीभत्स और हृदयविदारक था—जिस ज्योतिर्लिंग की पूजा युगों से देवता और गंधर्व करते आए थे, उस पर महमूद ने अपनी गदा से प्रहार किया। अल-बिरूनी के साक्ष्य बताते हैं कि लिंग के खंडित होते ही उसके भीतर छिपे बहुमूल्य रत्न बिखर गए। लूट का वह दृश्य मानवीय कल्पना से परे था। मंदिर के स्वर्णद्वार उखाड़ लिए गए, नीलमणि से जड़ित झूमर काट दिए गए और खंभों में जड़े हीरों को बर्बरता से कुरेदा गया। उसने चालीस मन वज़न की सोने की ज़ंजीर, जिससे महाघंट लटकता था तोड़ डाली। किवाड़ों, चौखटों और छत से चाँदी के पत्तर छुड़ा लिए। फिर भी उसे संतोष नहीं हुआ, और उसने गुप्त कोष की तलाश में पूरे गर्भगृह को खुदवा डाला. इतिहासकार सिराज ने 'तबाकत-ए-नासिरी' में लिखा, "महमूद सोमनाथ की मूर्तियों को अपने साथ ग़ज़नी ले गया जहाँ उसे तोड़ कर चार हिस्सों में बाँटा गया। उसका एक हिस्सा जुमे को होने वाली नमाज़ की जगह पर लगाया गया, दूसरा हिस्सा शाही महल के प्रवेश द्वार पर लगाया गया. तीसरे हिस्से को उसने मक्का और चौथे हिस्से को मदीना भिजवा दिया." अल-बिरूनी ने लिखा, "महमूद के हमलों ने भारत में आर्थिक तबाही मचा दी. शुरू के हमलों का मुख्य उद्देश्य मवेशियों को लूटना होता था. बाद में इन हमलों का उद्देश्य शहरी ख़ज़ाने को लूटना और युद्ध बंदी बनाना हो गया ताकि उन्हें ग़ुलामों की तरह बेचा या सेना में भर्ती किया जा सके." अल-उतबी अपनी पुस्तक 'तारीख-ए-यामिनी' में उस वीभत्सता का प्रमाण देते हुए लिखता है कि सोमनाथ, मथुरा और कन्नौज के अभियानों के बाद महमूद लगभग एक लाख भारतीय बंदियों को जंजीरों में जकड़कर गजनी ले गया था। बंदियों की संख्या इतनी अधिक थी कि गजनी के बाजारों में 'गुलामों' की भरमार हो गई और माँग से अधिक आपूर्ति के कारण उनकी कीमत गिरकर मात्र कुछ दिरहम रह गई। यह केवल आर्थिक आँकड़ा नहीं, बल्कि एक सभ्यता के अपमान की पराकाष्ठा थी। अफगानिस्तान के गजनी शहर के बाहर स्थित वह विशाल चौक और वहाँ बना वह पत्थर का चबूतरा आज भी उस बर्बरता का मूक गवाह है, जहाँ भारत की मर्यादा को कौड़ियों के भाव तौला गया था। इतिहास की सबसे खौफ़नाक और हृदयविदारक गूँज ''दुख्तरे हिन्दोस्तान.. नीलामे दो दीनार'' (अर्थात् हिंदुस्तान की बेटियाँ, दो दीनार में नीलाम) उसी चौक से उठी थी। वह चबूतरा साक्ष्य है उस दारुण कालखंड का, जब आर्यावर्त के अबलाओं को पशुओं की भाँति सार्वजनिक रूप से खड़ा किया गया और मात्र दो दीनार के तुच्छ मूल्य पर उनकी बोलियाँ लगाई गईं। यह कृत्य केवल एक आर्थिक विनिमय नहीं, बल्कि एक महान प्राचीन सभ्यता को मानसिक और सांस्कृतिक रूप से कुचलने का सुनियोजित प्रयास था। वह चीत्कार आज भी भारतीय इतिहास की सबसे भयावह चेतावनी बनकर गूँजती है कि जब-जब राष्ट्र अपनी आंतरिक एकता और सामरिक शक्ति को खोता है, तब-तब उसकी संतानों को ऐसी अमानवीय और रूह कँपा देने वाली नियति का सामना करना पड़ता है। अल-बिरूनी ने अपनी कालजयी कृति 'किताब-उल-हिंद' में सोमनाथ के ध्वंस और उसके दूरगामी सामाजिक प्रभावों का अत्यंत सूक्ष्म एवं हृदयविदारक चित्रण करते हुए लिखा है कि महमूद के भीषण प्रहारों ने भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि को समूल नष्ट कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप यहाँ का सुसंस्कृत हिंदू समाज भय और असुरक्षा के कारण 'धूल के कणों' की भाँति दिशा-हीन होकर बिखर गया। वह आगे अत्यंत स्पष्टता से स्वीकार करता है कि महमूद की इन पैशाचिक क्रूरताओं और देवालयों के अपमान ने भारतीय जनमानस के अंतस में विदेशी आक्रांताओं के प्रति एक ऐसी अमिट और 'अगाध घृणा' को जन्म दे दिया, जिसे शब्दों की परिधि में बांधना असंभव है, और इसी विद्वेष ने आगे चलकर दोनों संस्कृतियों के मध्य एक कभी न भरने वाली खाई का निर्माण कर दिया। वह ध्वंस केवल पत्थरों का गिरना नहीं था, बल्कि भारत की आत्मा पर हुआ वह आघात था जिसकी गूँज आज एक सहस्राब्दी बाद भी इतिहास के गलियारों में सुनाई देती है। जिस महमूद ने हज़ारों हँसते-खेलते परिवारों को उजाड़ा, देव-प्रतिमाओं को पैरों तले रौंदा और आर्यावर्त की पवित्र धरा को निर्दोषों के रक्त से सिंचित किया, नियति ने उसके लिए एक ऐसा अंत चुना जो किसी भी नरक की कल्पना से अधिक भयावह था। सन् 1030 ईस्वी के आते-आते वह महाबली सुल्तान, जिसका नाम सुनकर कभी सीमाएँ कांपती थीं, स्वयं अपनी ही काया के भीतर कैद होकर रह गया। वह शरीर, जिसने कभी युद्ध की प्रत्यंचा चढ़ाई थी, अब तपेदिक (टीबी) और पक्षाघात (Paralysis) की अग्नि में तिल-तिल कर जल रहा था। प्रसिद्ध ब्रिटिश इतिहासकार स्टेनली लेनपूल ने अपनी चर्चित कृति 'मिडीवल इंडिया' (Medieval India) में महमूद के अंतिम क्षणों की वह मर्मस्पर्शी और दुःखद झाँकी प्रस्तुत की है, जो 'बुरा काम का बुरा नतीजा' का जीवंत साक्ष्य है। लेनपूल लिखते हैं कि मृत्यु से मात्र दो दिन पूर्व, जब सुल्तान को यह आभास हुआ कि 'मलकुल-मौत' (मौत का फरिश्ता) उसके प्राण हरने हेतु द्वार पर आ खड़ा है, तब उसने एक अत्यंत विचित्र और हृदयविदारक आज्ञा दी। उसने आदेश दिया कि मथुरा, कन्नौज और सोमनाथ के पवित्र मंदिरों से लूटा गया वह समस्त स्वर्ण, मणिक्य और हीरकों का अथाह भंडार उसके शयनकक्ष के सम्मुख बिछा दिया जाए। लेनपूल के अनुसार, जब वह सारा वैभव उसकी आँखों के सामने चमक रहा था, तब वह विजेता का गर्व करने के बजाय एक निरीह अपराधी की भाँति फूट-फूट कर रोने लगा। वह दृश्य चीख-चीख कर कह रहा था कि जिस रक्त-रंजित दौलत के लिए उसने मानवता का संहार किया, वही दौलत उसे कब्र के उस सन्नाटे और ईश्वर के न्याय से बचाने में लेशमात्र भी सहायक नहीं थी। इतिहासकार अल-उतबी के संकेतों और बाद के वृत्तांतों के अनुसार, जब वह अथाह स्वर्ण-राशि उसके सामने सूर्य की भांति चमक रही थी, तब महमूद विजेता की मुस्कान नहीं, बल्कि एक पराजित अपराधी की चीखें मार रहा था। वह बिस्तर पर पड़ा-पड़ा अपनी आँखों से उन रत्नों को देख रहा था और फूट-फूट कर रो रहा था। वह रो रहा था क्योंकि वह जान चुका था कि—जिस संपत्ति के लिए उसने हज़ारों माँओं की गोद सूनी की, हज़ारों सुहागिनों का सिंदूर पोंछा और पवित्र मंदिरों को अपवित्र किया, वह दौलत उसे मौत के दर्द से एक क्षण की भी मुक्ति नहीं दिला सकती थी। इतिहासकार अबुल फजल बैहाकी ने अपनी प्रसिद्ध कृति 'तारीख-ए-बैहाकी' में महमूद गजनवी के जीवन के अंतिम कालखंड का अत्यंत मार्मिक और वीभत्स विवरण प्रस्तुत करते हुए लिखा है कि अपने अंतिम दिनों में सुल्तान शारीरिक व्याधियों और मानसिक संताप के कारण अत्यंत एकाकी, हताश और चिड़चिड़ा हो गया था। बैहाकी, जो उस समय के राजकीय घटनाक्रमों का सूक्ष्म दृष्टा था, उल्लेख करता है कि वह क्रूर विजेता रातों की नींद खो चुका था और अक्सर एकांत कक्ष में अपनी लूटी हुई धन-संपदा तथा बेशकीमती रत्नों के ढेरों को निहारते हुए स्वयं से ही बड़बड़ाता था। उस समय उसकी आँखों में जीत का गर्व नहीं, बल्कि एक गहरी रिक्तता और बेबसी झलकती थी। 'तारीख-ए-बैहाकी' के ये पन्ने उस अहंकारी सत्ता के पतन का साक्षात प्रमाण हैं, जहाँ महमूद को अपनी ढलती सांसों के साथ यह कटु बोध हो रहा था कि जिस वैभव हेतु उसने रक्तपात का तांडव रचा, वह उसकी आत्मा को शांति देने और मृत्यु के पाश से मुक्त कराने में सर्वथा असमर्थ था। उसकी पीड़ा इतनी असहनीय थी कि वह हमेशा कराहता रहता था, लेकिन उसका साथ देने वाला कोई न था। वह एकाकीपन का दंश झेल रहा था। वह धन जिसे उसने अपना खुदा माना था, वही उसकी आँखों के सामने एक मौन बोझ बन गया था। इतिहासकारों के अनुसार, उसने उन रत्नों को अंतिम विदा देते हुए कहा था— 'हाय! यह सब यहीं रह जाएगा और मैं अपने साथ केवल अपने कुकर्मों का बोझ लेकर जा रहा हूँ।' अंततः, 30 अप्रैल 1030 को, वह अत्यंत अपमानजनक और कष्टप्रद स्थिति में मृत्यु को प्राप्त हुआ। महमूद गजनवी की कब्र अफ़ग़ानिस्तान के ग़ज़नी शहर के पास रौज़ा गाँव में खोदी गई, जिसे फ़िरोज़ी बाग़ के नाम से भी जाना जाता था,उसका अंत चीख-चीख कर कह रहा था कि प्रकृति का न्याय भले ही देर से आए, परंतु वह निष्पक्ष और अत्यंत कठोर होता है। जो वैभव रक्त की नींव पर खड़ा होता है, उसका अंत अंततः राख और आँसुओं के सागर में ही होता है। इतिहास का चक्र अनवरत घूमता है और समय हर अन्याय का हिसाब चुकता करता है। महमूद गजनवी का वह क्रूर अट्टहास, जिसने 1026 में सोमनाथ की दीवारों को हिला दिया था, आज 2026 की गूँज में विलीन हो चुका है। महमूद ने सोचा था कि वह मूर्तियों को तोड़कर एक संस्कृति का अंत कर देगा, किंतु वह भूल गया था कि भारत की आत्मा पत्थरों में नहीं, उसके जन-मानस की अटूट श्रद्धा में बसती है। आज वर्ष 2026 में, महमूद के उस आक्रमण के एक हजार वर्ष पूर्ण होने पर, दृश्य पूरी तरह बदल चुका है। जहाँ गजनी आज अपने ही कर्मों के मलबे के नीचे दरिद्रता और अशांति की धूल फांक रहा है, वहीं भारत विश्वपटल पर एक अजेय आर्थिक और सामरिक महाशक्ति के रूप में उभर चुका है। सरदार वल्लभभाई पटेल के उस कालजयी संकल्प से निर्मित आज का सोमनाथ मंदिर केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान का पुनर्जन्म है। समुद्र की लहरें आज भी सोमनाथ के चरणों को पखारती हैं, लेकिन अब उनमें पराजय का क्रंदन नहीं, बल्कि 'नए भारत' की विजय का गर्जन है। वह स्वर्ण-शिखर, जिसे महमूद ने कभी लूटा था, आज पहले से कहीं अधिक भव्यता के साथ सूर्य की किरणों को परावर्तित कर रहा है। सोमनाथ की यह गाथा हमें स्मरण कराती है कि सभ्यताएं शस्त्रों से नहीं, संस्कारों और धैर्य से जीवित रहती हैं। आतातायी आते हैं और धूल में मिल जाते हैं, लेकिन जो संस्कृति 'सत्य' और 'शिव' पर आधारित है, वह सदैव अजेय रहती है। आज का सशक्त भारत अपनी विरासत का रक्षक भी है और भविष्य का निर्माता भी। 'सोमनाथ 1026 से 2026' की यह यात्रा साक्ष्य है कि सत्य को प्रताड़ित किया जा सकता है, पराजित नहीं। गजनी का पतन और सोमनाथ का यह गौरवशाली उत्थान ही नियति का अंतिम और पूर्ण न्याय है।
डोनाल्ड ट्रंप की नई धमकी, बोले-रूसी तेल छोड़ो वरना…पीएम मोदी को लेकर कही बड़ी बात

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की है। ट्रंप की ओर से सोमवार को की गई सख्त टिप्पणी में कहा गया है कि अगर रूसी तेल खरीद के मुद्दे पर दिल्ली का रुख हमारे साथ मेल नहीं खाता है तो भारतीय आयात पर टैरिफ बढ़ाया सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका भारत पर टैरिफ बढ़ा सकता है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘अगर भारत रूस के तेल के मुद्दे पर सहयोग नहीं करता है, तो हम उस पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं।’

पहले की पीएम मोदी की तारीफ

व्हाइट हाउस की तरफ से जारी ऑडियो संदेश में ट्रंप ने अपने विशेष सैन्य विमान- एयरफोर्स वन में मीडिया कर्मियों के साथ संवाद के दौरान पीएम मोदी पर टिप्पणियां कीं। उन्होंने भारत में रूसी तेल आयात से जुड़े एक सवाल के संदर्भ में कहा, 'वे मूल रूप से मुझे खुश करना चाहते थे...प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। वे नेक इंसान हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं हूं। मुझे खुश करना उनके लिए महत्वपूर्ण था। वे (भारत-रूस) व्यापार करते हैं, उन्हें यह बात भलीभांति पता थी कि अमेरिका उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत ने रूस से तेल की खरीद में काफी हद तक कटौती की है।’

ट्रेड डील पर बातचीत के बीच बड़ा बयान

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ बढ़ाने का यह बयान भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड बातचीत के बीच आया है। कुछ समय पहले ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा और अब वह तेल नहीं खरीद रहे हैं। हालांकि भारत ने इस दावे को खारिज किया था। अब उन्होंने कहा है कि भारत ने रूस से तेल खरीद जारी रखी है और हम टैरिफ बढ़ाएंगे।

पहले भी लगा चुके हैं भारी टैरिफ

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने भारत के खिलाफ टैरिफ लगाने की बात कही है। ट्रंप प्रशासन पहले ही भारतीय सामानों पर कुल 50% तक टैरिफ लगा चुका है। ट्रंप के मुताबिक, इसमें से 25% टैरिफ तो केवल इसलिए लगाया गया है ताकि भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की सजा दी जा सके। इस भारी-भरकम टैक्स का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के डेटा के मुताबिक, मई से सितंबर 2025 के बीच भारत का अमेरिका को होने वाला एक्सपोर्ट लगभग 37.5% तक गिर गया है। जो निर्यात पहले 8.8 अरब डॉलर का हुआ करता था, वह घटकर केवल 5.5 अरब डॉलर रह गया है।

बातचीत से हो समाधान', वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई को लेकर बोला भारत

#indiareactsonvenezuelaus_tension

वेनेजुएला पर हमले के बाद अमेरिका ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, इस हमले के बाद अब भारतीय विदेश मंत्रालय का भी जवाब आ गया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा और भलाई का समर्थन करता है और सभी पक्षों से अपील करता है कि वे बातचीत के जरिए मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान निकालें, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।

क्या कहा भारतीय विदेश मंत्रालय ने

विदेश मंत्रालय ने कहा कि वेनेजुएला में हाल के घटनाक्रम बेहद चिंताजनक हैं। हम स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। भारत वेनेजुएला के लोगों की भलाई और सुरक्षा के प्रति अपना समर्थन दोहराता है। हम सभी संबंधित पक्षों से क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए संवाद के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान निकालने का आह्वान करते हैं। काराकस स्थित भारतीय दूतावास के साथ भारतीय समुदाय के सदस्यों के संपर्क में है और हर संभव सहायता प्रदान करना जारी रखेगा।

वेनेजुएला को लेकर भारत की ट्रैवल एडवाइजरी

इससे पहले भारत ने शनिवार रात अपने नागरिकों को वेनेजुएला की स्थिति को देखते हुए वहां गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी थी। मंत्रालय ने यह परामर्श वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका द्वारा पकड़े जाने से जुड़े घटनाक्रम के मद्देनजर जारी किया था। विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला में मौजूद सभी भारतीयों से भी अत्यधिक सावधानी बरतने और अपनी आवाजाही सीमित रखने को कहा है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम को देखते हुए भारतीय नागरिकों को वहां सभी गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सख्ती से सलाह दी जाती है। बयान में कहा गया, जो भारतीय किसी भी कारण से वेनेजुएला में हैं, उन्हें अत्यधिक सतर्क रहने, अपनी गतिविधियां सीमित रखने और काराकास स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने की सलाह दी जाती है।

अमेरिकी हिरासत में मादुरो और उनकी पत्नी

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलीया फ्लोरेस इस समय अमेरिकी हिरासत में हैं। उन्हें 3 जनवरी को कराकास में की गई एक अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद पकड़ा गया था। इस ऑपरेशन की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी. जानकारी के मुताबिक मादुरो और उनकी पत्नी को न्यूयॉर्क के न्यूबर्ग स्थित स्टुअर्ट एयर नेशनल गार्ड बेस लाया गया। फिलहाल दोनों को ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है और अगले सप्ताह मैनहैटन की एक फेडरल अदालत में पेश किए जाने की संभावना है। मादुरो पर अमेरिका में साल 2020 में नार्को-आतंकवाद से जुड़े आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों में तथाकथित कार्टेल दे लॉस सोल्स का नेतृत्व करना, एफएआरसी के साथ मिलकर कोकीन की तस्करी करना और हथियारों से जुड़े अपराध शामिल हैं।

रांची में जजों का 'स्लैम': अखिल भारतीय न्यायाधीश बैडमिंटन टूर्नामेंट का भव्य आगाज, 9 राज्यों के 31 जज दिखा रहे खेल कौशल।

रांची: झारखंड उच्च न्यायालय के तत्वावधान में आयोजित 2nd All India Judges Badminton Tournament 2026 का आज राजधानी रांची के खेलगांव में विधिवत शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि झारखंड उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री तरलोक सिंह चौहान ने न्यायमूर्ति श्री रोंगोन मुखोपाध्याय, न्यायमूर्ति श्रीमती अनुभा रावत चौधरी और भारतीय महिला हॉकी टीम की स्टार खिलाड़ी निक्की प्रधान के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर प्रतियोगिता का उद्घाटन किया।

स्वास्थ्य और अनुशासन का संदेश उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने खेलों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेल न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं, बल्कि यह अनुशासन और टीम भावना को भी मजबूती प्रदान करते हैं। ऐसे आयोजन न्यायपालिका के सदस्यों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और सकारात्मक ऊर्जा के साथ कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।

9 राज्यों के माननीय न्यायाधीश ले रहे हिस्सा 03 और 04 जनवरी को चलने वाली इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में झारखंड सहित इलाहाबाद, मद्रास, तेलंगाना, बॉम्बे, ओडिशा, राजस्थान, केरल और कर्नाटक उच्च न्यायालयों के कुल 31 माननीय न्यायाधीश अपने खेल कौशल का प्रदर्शन कर रहे हैं। मुकाबले चार श्रेणियों— मेन सिंगल्स, मेन डबल्स, वूमेन सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स में खेले जा रहे हैं।

प्रशासनिक व्यवस्था की सराहना: उपायुक्त सम्मानित ठाकुर विश्वनाथ शहदेव इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट के लिए जिला प्रशासन द्वारा किए गए सुरक्षा, चिकित्सा और बुनियादी सुविधाओं के प्रबंधन की सराहना की गई। बेहतर समन्वय और कुशल प्रशासनिक व्यवस्था के लिए न्यायमूर्ति श्री रोंगोन मुखोपाध्याय ने उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री को सम्मानित किया।

खेलगांव में अंतरराष्ट्रीय मानक की सुविधाएं टूर्नामेंट के सफल संचालन के लिए खेलगांव परिसर में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बैडमिंटन कोर्ट और खिलाड़ियों के लिए विशेष विश्राम स्थल तैयार किए गए हैं।

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की सर्वे ने राहुल को दिखाया आईना, बीजेपी को भी मिल गया मौका

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कर्नाटक सरकार की एक एजेंसी की स्टडी में दावा किया गया है कि राज्य के 91% लोग मानते हैं कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराए जाते हैं और ईवीएम सटीक नतीजे देती हैं। यह रिपोर्ट कर्नाटक मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन अथॉरिटी ने प्रकाशित की है। यह सर्वे ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भाजपा पर कई राज्यों में ‘वोट चोरी’ का लगातार आरोप लगा रहे हैं। वे कर्नाटक के कलबुर्गी में भी वोट चोरी का दावा कर चुके हैं।

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने ईवीएम पर एक सर्वे पब्लिश कराया है। इस सर्वे में पता चला कि अधिकतर नागरिकों का मानना है कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं, जबकि ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर लोगों का भरोसा बढ़ा है। सर्वे में करीब 91 फीसदी लोगों ने ईवीएम पर अपना भरोसा दिखाया है।

सर्वे में क्या ?

डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सर्वे मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अंबुकुमार ने करवाया था। इसमें बेंगलुरु, बेलगावी, कालाबुरागी और मैसूरु के प्रशासनिक डिवीजनों में 102 विधानसभा क्षेत्रों के 5100 लोगों को शामिल किया गया था। योजना, कार्यक्रम निगरानी और सांख्यिकी विभाग के तहत कर्नाटक निगरानी और मूल्यांकन प्राधिकरण द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में पता चला कि सभी डिवीजनों में 91.31 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराए जाते हैं, जिनमें से 6.76 प्रतिशत ने तटस्थ राय व्यक्त की।

अब राहुल गांधी का “वोट चोरी” के नरेटिव का क्या?

कर्नाटक सरकार के सर्वे के नतीजे कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ हैं। कारण कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा के खिलाफ खिलाफ वोट चोरी कैंपेन की शुरुआत की थी। राहुल गांधी ने दावा किया था कि ईवीएम से वोट चोरी होती है और बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने चाहिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने ईवीएम पर कथित भरोसे की कमीके कारण स्थानीय निकाय चुनावों के लिए बैलेट पेपर वापस लाने का फैसला किया है।

बीजेपी ने बोला हमला

इधर, कर्नाटक सरकार द्वारा सर्वे को प्रकाशित करने के बाद बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सर्वे रिपोर्ट रिपोर्ट का हवाला देते हुए शुक्रवार दावा किया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को हर बार चुनाव हारने के बाद ईवीएम या चुनाव आयोग को दोष देने पर 'हकीकत का सामना' करना पड़ता है। पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी चुनाव हारने के बाद ईवीएम और चुनाव आयोग को दोष देते हैं।

कनाडा के वैंकूवर में एयर इंडिया का पायलट गिरफ्तार, प्लेन उड़ाने से पहले पी थी शराब

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कनाडा के वैंकूवर एयरपोर्ट पर एअर इंडिया के एक पायलट को नशे की हालत में हिरासत में लिया गया। 23 दिसंबर, 2025 को वैंकूवर-दिल्ली (वियना होते हुए) उड़ान भरने वाले एयर इंडिया के एक पायलट को जश्न मनाना भारी पड़ गया। पायलट को मुंह से शराब की गंध आने के बाद हिरासत में लिया गया। 

उड़ान से पहले ही उतार दिया गया

23 दिसंबर 2025 को वैंकूवर एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान कनाडाई अधिकारियों को कॉकपिट क्रू के एक सदस्य की ड्यूटी फिटनेस को लेकर संदेह हुआ। अधिकारियों का कहना है कि पायलट से शराब जैसी गंध महसूस हुई, जिसके बाद नियमों के तहत उसे उड़ान से पहले ही उतार दिया गया और आगे की पूछताछ के लिए ले जाया गया।

एअर इंडिया ने अपनाया कड़ा रुख

इस मामले में एअर इंडिया ने कड़ा रुख अपनाया है। पायलट को कुछ दिनों बाद दिल्ली लाया गया और उससे पूछताछ की जा रही है। एयर इंडिया ने दोहराया कि कंपनी नियमों के उल्लंघन पर जीरो टोलरेंस की नीति पर चलता है और जांच में यदि किसी भी तरह के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो कंपनी नियम के अनुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

डीजीसीए कर रहा जांच

इस मामले की जानकारी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को दी गई है, जो इसकी जांच कर रहा है। एअर इंडिया सूत्रों के मुताबिक वो इस मामले में कनाडाई अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। जांच पूरी होने तक संबंधित पायलट को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है।

भारत-पाकिस्तान युद्ध पर अमेरिका के बाद चीन का बड़ा दावा, कहा-हमने संघर्ष रुकवाया

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद अब चीन ने दावा है कि भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम में उसने अहम भूमिका निभाई है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को बीजिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हालात और चीन के विदेश संबंधों पर एक संगोष्ठी में कहा कि इस साल चीन ने कई संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में मध्यस्थता की है। हालांकि, भारत ने चीन के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को दावा किया कि इस साल भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव उन गरमागरम मुद्दों में शामिल था, जिनमें चीन ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। विदेश मंत्रालय ने 13 मई को प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि समझौते की तारीख, समय और शब्दावली दोनों देशों के डीजीएमओ ने 10 मई 2025 को फोन पर हुई बातचीत के दौरान तय की, जो 15:35 बजे शुरू हुई थी।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे अस्थिर दौर- वांग

बीजिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हालात और चीन के विदेश संबंधों पर संगोष्ठी में वांग ने कहा, इस साल, द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से किसी भी समय की तुलना में स्थानीय युद्ध और सीमा पार संघर्ष अधिक बार भड़के। भू-राजनीतिक उथल-पुथल लगातार फैलती जा रही है। उन्होंने कहा, स्थायी शांति स्थापित करने के लिए, हमने एक वस्तुनिष्ठ और तर्कसंगत रुख अपनाया है, और लक्षणों और मूल कारणों दोनों को संबोधित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।

इन तनावों की मध्यस्थता का दावा

चीनी विदेश मंत्री ने आगे कहा कि 'टकराव वाले मुद्दों को सुलझाने के लिए इसी चीनी नजरिए को अपनाते हुए हमने उत्तरी म्यांमार, ईरान के परमाणु मुद्दे, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फिलिस्तीन और इजरायल के बीच मुद्दों और कंबोडिया और थाईलैंड के बीच हालिया संघर्ष में मध्यस्थता की।

भारत ने लगातार मध्यस्थता के दावों को खारिज किया

भारत ने लगातार मध्यस्थता के दावों को खारिज किया है और कहा है कि 88 घंटे तक चला सैन्य टकराव किसी तीसरे पक्ष के दखल के बिना सीधे दोनों देशों के मिलिट्री कम्युनिकेशन के जरिए सुलझाया गया था। 13 मई को एक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय ने बाहरी मध्यस्थता के दावों को खारिज कर दिया था। नई दिल्ली ने बार-बार कहा है कि भारत और पाकिस्तान के मामलों में किसी तीसरे पक्ष के दखल की कोई गुंजाइश नहीं है।

उत्तर भारत में ठंड का “टॉर्चर”, नए साल का मजा किरकिरा, 5 राज्यों में बारिश का अलर्ट

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नए साल का जश्न मनाने की तैयारी कर रहे लोगों का मजा मौसम विभाग चेतावनी से किरकिरा हो गया है। देश में नए साल का आगमन होने वाला है लेकिन मौसम विभाग ने एक बुरी खबर दी है। दरअसल, नए साल के एक दिन पहले से ही देश के उत्तरी और दक्षिणी भागों में मौसम बिगड़ने वाला है। इस दौरान बारिश के बाद कई राज्यों में अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री की गिरावट देखने को मिलेगी।

और बढ़ने वाला है सर्दी का सितम

उत्तर, मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत समेत देश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड, घने कोहरे और शीत लहर ने अपना डेरा जमा लिया है। मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार, उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। अगले कुछ दिनों तक राहत के कोई आसार नहीं हैं, बल्कि सर्दी का सितम और बढ़ने वाला है।

कोहरे को लेकर अलर्ट जारी

मौसम विभाग ने 31 दिसंबर और एक जनवरी के लिए मौसम का जो पूर्वानुमान जताया है उसके हिसाब से ये दोनों दिन कड़ाके की ठंड और घना कोहरा पड़ेगा। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में 5 जनवरी 2026 तक घने कोहरे की चादर लिपटी रहेगी। दिल्ली वालों के लिए भी 31 दिसंबर तक घने कोहरे का अलर्ट है। इसके अलावा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में भी 3-4 जनवरी तक कोहरे का जबरदस्त प्रकोप देखने को मिलेगा।

उत्तर भारत के 5 राज्यों में बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के मुताबिक 31 दिसंबर की शाम से उत्तर भारत के 5 राज्यों में मौसम बिगड़ने वाला है। दिल्ली, हिमाचल, उत्तराखंड, कश्मीर और हरियाणा के लिए बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इन राज्यों में बारिश के बाद तापमान में भी 3 से 4 डिग्री की कमी आ सकती है, जिससे ठंड बढ़ जाएगी। लोगों को इस दौरान सावधान रहने की जरूरत है।

राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में 31 दिसंबर को लगेगा अप्रेंटिस मेला
देवरिया, 26 दिसंबर , M N पाण्डेय। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, देवरिया में आगामी 31 दिसंबर 2025 को अप्रेंटिस मेला आयोजित किया जाएगा। यह मेला प्रातः 10:30 बजे से संस्थान परिसर में संपन्न होगा।

नोडल प्रधानाचार्य द्वारा जारी सूचना के अनुसार, इस अप्रेंटिस मेले में क्लासिक मोटर्स इंजीनियरिंग एरिया, देवरिया द्वारा अप्रेंटिस के लिए चयन प्रक्रिया की जाएगी। मेले में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों के लिए इलेक्ट्रिशियन, डीजल मैकेनिक एवं मैकेनिक मोटर व्हीकल ट्रेड में तकनीकी योग्यता होना आवश्यक है।
अभ्यर्थियों की आयु सीमा 18 से 30 वर्ष निर्धारित की गई है। चयन प्रक्रिया में सम्मिलित होने हेतु अभ्यर्थियों को अपने समस्त शैक्षिक प्रमाण पत्रों की मूल प्रति व छायाप्रति, बायोडाटा, आधार कार्ड, पैन कार्ड एवं चार पासपोर्ट साइज फोटो साथ लाना अनिवार्य होगा।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन अभ्यर्थियों को अप्रेंटिस मेले में सम्मिलित होना है, उनका Apprenticeship India पोर्टल (www.apprenticeshipindia.gov.in) पर पंजीकरण होना अनिवार्य है। पंजीकरण की एक प्रति मेले के दौरान प्रस्तुत करनी होगी।
संस्थान प्रशासन ने पात्र एवं इच्छुक अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि एवं समय पर उपस्थित होकर इस अवसर का लाभ उठाएं।
Rajesh Babu K Soornaad’s ‘INI’ Raises a Powerful Voice Against Drugs and Child Exploitation in Malayalam Cinema

At a time when Kerala and the rest of India are witnessing increasing concern over drug abuse among school-going children, the upcoming Malayalam film “INI - The Unknown Tomorrow”, spearheaded by producer and music composer Rajesh Babu K Soornaad, arrives as a timely and socially conscious cinematic intervention. More than just a film, INI- The Unknown Tomorrow positions itself as an organic social movement that urges families, educators, and society to confront uncomfortable realities surrounding adolescence, addiction, and child exploitation.

The film tells its story through the eyes of a 13-year-old girl, making its message deeply personal and emotionally resonant. In an era where children are exposed to negative influences at a very young age, INI - The Unknown Tomorrow asks a simple yet disturbing question: Where are today’s children heading, and what kind of future are we preparing for them?

A Story Rooted in Reality

At the heart of INI is Shivada, a young adolescent portrayed with remarkable maturity by child actor Devananda Parveen. Her performance captures the fragile emotional world of a child standing at the crossroads of innocence and harsh reality. Through Shivada’s journey, the film explores how teenage curiosity, peer pressure, and emotional vulnerability can slowly push children towards addiction and exploitation.

Rather than sensationalising drug abuse, INI- The Unknown Tomorrow presents its consequences with honesty and restraint. The narrative highlights how seemingly harmless influences within schools and social circles can turn into life-altering traps. By doing so, the film reflects the silent struggles of countless children whose voices often go unheard.

Rajesh Babu K Soornaad’s Strong Social Commitment

Producer Rajesh Babu K Soornaad, who also serves as the film’s music composer, plays a crucial role in shaping the soul of IN- The Unknown TomorrowI. His involvement goes beyond production, reflecting a deep personal commitment to using cinema as a tool for social awareness. The music composed by Rajesh Babu K Soornaad subtly enhances the emotional depth of the film without overpowering its sensitive subject matter.

Complementing this is the impactful background score by Rev. Dr. Fr. Joy Mathew, which adds intensity to crucial moments, while Biju Mookkunnur also contributes significantly to the film’s musical elements.

Honest Direction and Powerful Performances

Directed by Anil Kaarakkulam, INI- The Unknown Tomorrow adopts a direct and unfiltered storytelling style. The director does not shy away from showing uncomfortable truths—be it the silent negligence of adults, the pressures within school environments, or the fragile mental state of adolescents. The film carefully avoids glorifying substance abuse, instead focusing on its devastating impact on young lives.

Adding further strength to the narrative is actor Shanoop, who has been steadily gaining recognition in Malayalam cinema. His significant role adds emotional weight and depth, reinforcing the film’s strong social relevance.

### Strong Technical Backbone

INI - The Unknown Tomorrow is produced by Rajesh K Babu Sooranad and Sibin Davis under the banners Voks Studios and Aniva Creations. The film is supported by a dedicated and experienced technical team. Shobin C Johnny’s cinematography brings realism and authenticity to the visuals, capturing both the innocence of childhood and the darkness that slowly creeps in.

The film’s editing is handled by Jijo Babu K, ensuring a tight and emotionally engaging narrative flow. Nilambur Sunny serves as the Production Controller, Shanoop* as Project Designer, and Jayaraman Poopathy manages makeup, contributing to the film’s realistic portrayal of its characters.

A Mirror to Today’s Society

Beyond its cinematic value, INI stands as a mirror to society. School life is often described as the most beautiful phase of one’s life—a time filled with dreams, friendships, and hope. But INI dares to ask whether this is still true for today’s children. Are they truly safe? Are we, as a society, doing enough to protect them from harmful influences?

The film does not offer easy solutions. Instead, it urges parents, teachers, policymakers, and the community at large to introspect and take responsibility. Through Shivada’s story, INI reminds viewers that childhood, once lost, can never be reclaimed.

With its strong message, honest storytelling, and committed vision led by Rajesh Babu K Soornaad, INI promises to be more than just another Malayalam film—it aims to spark conversations, awareness, and action against drug abuse and child exploitation in contemporary Ind

सोमनाथ, 1026 से 2026: ग्लानि से गौरव तक के हजार वर्ष ✍️डॉ. विद्यासागर उपाध्याय संजीव सिंह बलिया!समय गवाह है कि तलवारों की धार से
संजीव सिंह बलिया!समय गवाह है कि तलवारों की धार से मंदिरों की दीवारें तो गिराई जा सकती हैं, लेकिन राष्ट्र की चेतना को कभी कुचला नहीं जा सकता। 1026 में सोमनाथ के खंडहरों पर खड़ा होकर महमूद जिस जीत का अट्टहास कर रहा था, 2026 के कालखंड ने उसे इतिहास की धूल में मिला दिया है। आज सोमनाथ का स्वर्ण-शिखर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि इस सत्य की उद्घोषणा है कि—अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, सूर्य का उदय अटल है। अफगानिस्तान की उन अभेद्य और धूसर पर्वत कंदराओं के मध्य स्थित गजनी की गोद में, सन् 971 ईस्वी में महमूद का प्रादुर्भाव हुआ। नियति ने उसके अंतस में पिता सुबुक्तगीन से विरासत में मिली साम्राज्यवादी पिपासा और मजहबी कट्टरता के हलाहल का सम्मिश्रण कर दिया था। सिंहासनारूढ़ होते ही उसकी महत्वाकांक्षी दृष्टि ने मध्य एशिया के क्षितिज पर स्वयं को एक अप्रतिम सुल्तान के रूप में स्थापित करने का स्वप्न बुना। किंतु इस महात्वाकांक्षा के स्वर्ण-महल को निर्मित करने हेतु जिस अपार वैभव की आधारशिला चाहिए थी, उसकी प्राप्ति हेतु उसने एक विनाशकारी मार्ग चुना। उस युग का आर्यावर्त अपनी समृद्धि की पराकाष्ठा पर था—एक ऐसी 'स्वर्णमयी चिड़िया', जिसके देवालयों के शिखर सूर्य की रश्मियों से स्पर्धा करते थे और जिनकी अंतहीन मणियाँ विश्व को चकाचौंध करने हेतु पर्याप्त थीं। भारत के इसी अतुलनीय और अलौकिक वैभव ने महमूद की लुटेरी वृत्ति को एक हिंसक शिकारी की भाँति उकसाया। उसने आर्यावर्त की पवित्र धरा को लहूलुहान करने का एक वीभत्स संकल्प लिया। सन् 1000 से 1027 ईस्वी का वह कालखंड गवाह है, जब उसने भारत के हृदय पर एक-दो नहीं, अपितु सत्रह बार भीषण प्रहार किए। ये आक्रमण मात्र भौगोलिक विजय की लालसा नहीं थे, अपितु सभ्यता और संस्कृति पर बर्बरता का वह नंगा नाच था, जिसने इतिहास के पन्नों को सदा के लिए रक्तरंजित कर दिया। जब महमूद की बर्बर सेना ने कृष्ण की पावन क्रीड़ास्थली मथुरा की परिधि में प्रवेश किया, तो वहां की स्थापत्य कला की दिव्यता देख वह पाषाण-हृदय लुटेरा भी एक क्षण के लिए स्तब्ध रह गया। यमुना के तट पर स्थित वे गगनचुंबी देवालय और उनमें जड़ित नीलमणि एवं हीरक खंड उसे स्वर्ग की साक्षात उपस्थिति जान पड़े। स्वयं महमूद ने इस नगर की उपमा देते हुए स्वीकार किया था— 'यदि कोई इस सदृश नगर का निर्माण करना चाहे, तो उसे एक लाख स्वर्ण दीनार व्यय करने होंगे और इसमें दो शताब्दी का समय लगेगा।' किंतु, उसकी मजहबी कट्टरता ने शीघ्र ही इस सराहना को विनाशकारी उन्माद में बदल दिया। मथुरा की वे गलियां, जहाँ कभी दिव्य वेणु-नाद गूंजता था, वहां अब केवल तलवारों की पैशाचिक खनक और निहत्थे नागरिकों का कारुणिक क्रंदन शेष था। महमूद के आदेश पर उन कलात्मक विग्रहों को हथौड़ों से खंडित किया गया, जिनके दर्शन मात्र से भक्त कृतार्थ हो जाते थे। समकालीन इतिहासकार अल-उतबी लिखता है कि— 'सुल्तान ने आदेश दिया कि सभी मंदिरों को जला दिया जाए और उन्हें भूमिसात कर दिया जाए।' मंदिरों के वे गर्भगृह, जो कभी चंदन और पारिजात की सुगंध से महकते थे, अब निर्दोष ब्राह्मणों और रक्षार्थ खड़े योद्धाओं के तप्त रक्त की गंध से भर गए। उस मुख्य भव्य मंदिर को, जिसकी सुंदरता का गुणगान सुल्तान ने स्वयं किया था, निर्दयतापूर्वक अग्नि के हवाले कर दिया गया। स्वर्णमयी प्रतिमाओं को गलियों में घसीटा गया और उनकी आँखों में जड़े बहुमूल्य रत्नों को क्रूरता से उखाड़ लिया गया। वह पावन नगरी, जो सहस्रों वर्षों से भारतीय संस्कृति का प्रखर दीप-स्तंभ थी, कुछ ही प्रहरों में धुएं और भस्म के ढेर में परिवर्तित कर दी गई। अल-उतबी के अनुसार, उस दिन पाँच हजार स्वर्ण की मूर्तियाँ और अनगिनत स्वर्ण-मुद्राएं लूट ली गईं। यमुना का जल, जो कभी नील वर्ण का था, उस दिन अपने पुत्रों के रक्त से लाल होकर बह रहा था। मथुरा का वह ध्वंस मात्र एक नगर की लूट नहीं थी, बल्कि एक जीवंत सभ्यता के हृदय पर किया गया सबसे वीभत्स और अमिट आघात था। सन् 1026 की वह शीतल प्रभात, जब अरब सागर की लहरें सोमनाथ के चरणों को पखार रही थीं, क्षितिज पर महमूद की बर्बर सेना के धूल के बादल मँडराने लगे। मंदिर की प्राचीर पर खड़े योद्धाओं ने जब शत्रु की विशाल वाहिनी को देखा, तो उनके मुख से केवल एक ही उद्घोष निकला— 'हर-हर महादेव!'। वह युद्ध मात्र दो सेनाओं का संघर्ष नहीं था, वह आततायी की राक्षसी प्रवृत्ति और भक्त की अडिग आस्था के मध्य एक धर्मयुद्ध था। गुजरात के दुर्गम पथों से होता हुआ जब महमूद मंदिर के सिंहद्वार तक पहुँचा, तो उसे उस प्रतिरोध का सामना करना पड़ा जिसकी उसने कल्पना भी न की थी। राजा भीमदेव प्रथम और उनके नेतृत्व में एकत्र हुए राजपूत योद्धाओं ने शौर्य की वह पराकाष्ठा दिखाई, जिसे देख शत्रु के दांत खट्टे हो गए। इतिहास साक्षी है कि मंदिर की रक्षा हेतु पचास सहस्र से अधिक निहत्थे ब्राह्मणों, संन्यासियों और वीर योद्धाओं ने स्वयं को वेदी पर अर्पित कर दिया। मंदिर के प्रांगण में रक्त की सरिता प्रवाहित होने लगी, किंतु एक भी शीश श्रद्धा के पथ से विचलित नहीं हुआ। सोमनाथ की अभेद्य प्रतीत होने वाली प्राचीरें केवल महमूद गजनवी के बाहरी प्रहारों से नहीं, बल्कि आंतरिक विश्वासघात और रणनीतिक क्षरण के आत्मघाती प्रहारों से ढह गई थीं, जिसका विवरण अल-बिरूनी और समकालीन इतिहासकारों ने अत्यंत पैनी दृष्टि से किया है। इस पतन की पटकथा में पहला प्रहार 'रणनीतिक चूक' के रूप में हुआ, जहाँ मंदिर के प्रबंधकों और पुजारियों के भीतर घर कर गई इस अव्यवहारिक और अति-धार्मिक धारणा ने कि देवता स्वयं प्रकट होकर म्लेच्छों का संहार करेंगे, वास्तविक सैन्य मोर्चाबंदी और सुरक्षा तैयारियों को पूरी तरह कुंद कर दिया। इसके समानांतर, 'राजनीतिक भूल' ने राष्ट्र की रीढ़ तोड़ दी, जब उत्तर भारत के शक्तिशाली राजा आपसी द्वेष और संकीर्ण अहम् के कारण राजा भीमदेव प्रथम के आह्वान पर एकजुट नहीं हुए, जिससे महमूद को वह खंडित प्रतिरोध मिला जिसने उसकी राह आसान कर दी। किंतु सबसे मर्मभेदी सत्य वह 'पेशेवर विश्वासघात' था, जिसके तहत महमूद की सेना में 'तिलक' जैसे उच्चपदस्थ हिंदू सेनापति और 'सालार-ए-हिंदुवान' जैसी पेशेवर हिंदू सैनिक टुकड़ियाँ शामिल थीं; ये भारतीय गद्दार भाड़े के सैनिक अपनी ही साझी विरासत और पवित्र देवालय के विरुद्ध मात्र वेतन और लूट के माल के लोभ में तलवारें भांज रहे थे, जो इस ऐतिहासिक त्रासदी को विश्वासघात की एक ऐसी पराकाष्ठा बना देता है जहाँ अपनों के ही हाथों अपनों का ही सर्वस्व विनष्ट हो गया। अंततः, संख्याबल और विश्वासघात की कतरनी ने वीरता के उस कवच को भेद दिया। काज़विनी लिखते हैं, "इस लड़ाई में 50 हज़ार से अधिक स्थानीय लोग मारे गए। इसके बाद महमूद ने मंदिर में प्रवेश किया। पूरा मंदिर लकड़ी के 56 खंभों पर टिका हुआ था, लेकिन स्थापत्य कला का सबसे बड़ा आश्चर्य था मंदिर की मुख्य मूर्ति जो कि बिना किसी सहारे के हवा में लटकी हुई थी। महमूद ने मूर्ति को आश्चर्य से देखा।" अल-बरूनी ने भी मंदिर का वर्णन करते हुए लिखा, "मंदिर के मुख्य भगवान शिव थे। ज़मीन से दो मीटर की ऊँचाई पर पत्थर का शिव लिंग रखा हुआ था.। उसके बग़ल में सोने और चाँदी से बनी कुछ और मूर्तियाँ थीं." महमूद जब गर्भगृह में प्रविष्ट हुआ, तो उसकी आँखों में दानवीय लोलुपता थी। वह दृश्य अत्यंत वीभत्स और हृदयविदारक था—जिस ज्योतिर्लिंग की पूजा युगों से देवता और गंधर्व करते आए थे, उस पर महमूद ने अपनी गदा से प्रहार किया। अल-बिरूनी के साक्ष्य बताते हैं कि लिंग के खंडित होते ही उसके भीतर छिपे बहुमूल्य रत्न बिखर गए। लूट का वह दृश्य मानवीय कल्पना से परे था। मंदिर के स्वर्णद्वार उखाड़ लिए गए, नीलमणि से जड़ित झूमर काट दिए गए और खंभों में जड़े हीरों को बर्बरता से कुरेदा गया। उसने चालीस मन वज़न की सोने की ज़ंजीर, जिससे महाघंट लटकता था तोड़ डाली। किवाड़ों, चौखटों और छत से चाँदी के पत्तर छुड़ा लिए। फिर भी उसे संतोष नहीं हुआ, और उसने गुप्त कोष की तलाश में पूरे गर्भगृह को खुदवा डाला. इतिहासकार सिराज ने 'तबाकत-ए-नासिरी' में लिखा, "महमूद सोमनाथ की मूर्तियों को अपने साथ ग़ज़नी ले गया जहाँ उसे तोड़ कर चार हिस्सों में बाँटा गया। उसका एक हिस्सा जुमे को होने वाली नमाज़ की जगह पर लगाया गया, दूसरा हिस्सा शाही महल के प्रवेश द्वार पर लगाया गया. तीसरे हिस्से को उसने मक्का और चौथे हिस्से को मदीना भिजवा दिया." अल-बिरूनी ने लिखा, "महमूद के हमलों ने भारत में आर्थिक तबाही मचा दी. शुरू के हमलों का मुख्य उद्देश्य मवेशियों को लूटना होता था. बाद में इन हमलों का उद्देश्य शहरी ख़ज़ाने को लूटना और युद्ध बंदी बनाना हो गया ताकि उन्हें ग़ुलामों की तरह बेचा या सेना में भर्ती किया जा सके." अल-उतबी अपनी पुस्तक 'तारीख-ए-यामिनी' में उस वीभत्सता का प्रमाण देते हुए लिखता है कि सोमनाथ, मथुरा और कन्नौज के अभियानों के बाद महमूद लगभग एक लाख भारतीय बंदियों को जंजीरों में जकड़कर गजनी ले गया था। बंदियों की संख्या इतनी अधिक थी कि गजनी के बाजारों में 'गुलामों' की भरमार हो गई और माँग से अधिक आपूर्ति के कारण उनकी कीमत गिरकर मात्र कुछ दिरहम रह गई। यह केवल आर्थिक आँकड़ा नहीं, बल्कि एक सभ्यता के अपमान की पराकाष्ठा थी। अफगानिस्तान के गजनी शहर के बाहर स्थित वह विशाल चौक और वहाँ बना वह पत्थर का चबूतरा आज भी उस बर्बरता का मूक गवाह है, जहाँ भारत की मर्यादा को कौड़ियों के भाव तौला गया था। इतिहास की सबसे खौफ़नाक और हृदयविदारक गूँज ''दुख्तरे हिन्दोस्तान.. नीलामे दो दीनार'' (अर्थात् हिंदुस्तान की बेटियाँ, दो दीनार में नीलाम) उसी चौक से उठी थी। वह चबूतरा साक्ष्य है उस दारुण कालखंड का, जब आर्यावर्त के अबलाओं को पशुओं की भाँति सार्वजनिक रूप से खड़ा किया गया और मात्र दो दीनार के तुच्छ मूल्य पर उनकी बोलियाँ लगाई गईं। यह कृत्य केवल एक आर्थिक विनिमय नहीं, बल्कि एक महान प्राचीन सभ्यता को मानसिक और सांस्कृतिक रूप से कुचलने का सुनियोजित प्रयास था। वह चीत्कार आज भी भारतीय इतिहास की सबसे भयावह चेतावनी बनकर गूँजती है कि जब-जब राष्ट्र अपनी आंतरिक एकता और सामरिक शक्ति को खोता है, तब-तब उसकी संतानों को ऐसी अमानवीय और रूह कँपा देने वाली नियति का सामना करना पड़ता है। अल-बिरूनी ने अपनी कालजयी कृति 'किताब-उल-हिंद' में सोमनाथ के ध्वंस और उसके दूरगामी सामाजिक प्रभावों का अत्यंत सूक्ष्म एवं हृदयविदारक चित्रण करते हुए लिखा है कि महमूद के भीषण प्रहारों ने भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि को समूल नष्ट कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप यहाँ का सुसंस्कृत हिंदू समाज भय और असुरक्षा के कारण 'धूल के कणों' की भाँति दिशा-हीन होकर बिखर गया। वह आगे अत्यंत स्पष्टता से स्वीकार करता है कि महमूद की इन पैशाचिक क्रूरताओं और देवालयों के अपमान ने भारतीय जनमानस के अंतस में विदेशी आक्रांताओं के प्रति एक ऐसी अमिट और 'अगाध घृणा' को जन्म दे दिया, जिसे शब्दों की परिधि में बांधना असंभव है, और इसी विद्वेष ने आगे चलकर दोनों संस्कृतियों के मध्य एक कभी न भरने वाली खाई का निर्माण कर दिया। वह ध्वंस केवल पत्थरों का गिरना नहीं था, बल्कि भारत की आत्मा पर हुआ वह आघात था जिसकी गूँज आज एक सहस्राब्दी बाद भी इतिहास के गलियारों में सुनाई देती है। जिस महमूद ने हज़ारों हँसते-खेलते परिवारों को उजाड़ा, देव-प्रतिमाओं को पैरों तले रौंदा और आर्यावर्त की पवित्र धरा को निर्दोषों के रक्त से सिंचित किया, नियति ने उसके लिए एक ऐसा अंत चुना जो किसी भी नरक की कल्पना से अधिक भयावह था। सन् 1030 ईस्वी के आते-आते वह महाबली सुल्तान, जिसका नाम सुनकर कभी सीमाएँ कांपती थीं, स्वयं अपनी ही काया के भीतर कैद होकर रह गया। वह शरीर, जिसने कभी युद्ध की प्रत्यंचा चढ़ाई थी, अब तपेदिक (टीबी) और पक्षाघात (Paralysis) की अग्नि में तिल-तिल कर जल रहा था। प्रसिद्ध ब्रिटिश इतिहासकार स्टेनली लेनपूल ने अपनी चर्चित कृति 'मिडीवल इंडिया' (Medieval India) में महमूद के अंतिम क्षणों की वह मर्मस्पर्शी और दुःखद झाँकी प्रस्तुत की है, जो 'बुरा काम का बुरा नतीजा' का जीवंत साक्ष्य है। लेनपूल लिखते हैं कि मृत्यु से मात्र दो दिन पूर्व, जब सुल्तान को यह आभास हुआ कि 'मलकुल-मौत' (मौत का फरिश्ता) उसके प्राण हरने हेतु द्वार पर आ खड़ा है, तब उसने एक अत्यंत विचित्र और हृदयविदारक आज्ञा दी। उसने आदेश दिया कि मथुरा, कन्नौज और सोमनाथ के पवित्र मंदिरों से लूटा गया वह समस्त स्वर्ण, मणिक्य और हीरकों का अथाह भंडार उसके शयनकक्ष के सम्मुख बिछा दिया जाए। लेनपूल के अनुसार, जब वह सारा वैभव उसकी आँखों के सामने चमक रहा था, तब वह विजेता का गर्व करने के बजाय एक निरीह अपराधी की भाँति फूट-फूट कर रोने लगा। वह दृश्य चीख-चीख कर कह रहा था कि जिस रक्त-रंजित दौलत के लिए उसने मानवता का संहार किया, वही दौलत उसे कब्र के उस सन्नाटे और ईश्वर के न्याय से बचाने में लेशमात्र भी सहायक नहीं थी। इतिहासकार अल-उतबी के संकेतों और बाद के वृत्तांतों के अनुसार, जब वह अथाह स्वर्ण-राशि उसके सामने सूर्य की भांति चमक रही थी, तब महमूद विजेता की मुस्कान नहीं, बल्कि एक पराजित अपराधी की चीखें मार रहा था। वह बिस्तर पर पड़ा-पड़ा अपनी आँखों से उन रत्नों को देख रहा था और फूट-फूट कर रो रहा था। वह रो रहा था क्योंकि वह जान चुका था कि—जिस संपत्ति के लिए उसने हज़ारों माँओं की गोद सूनी की, हज़ारों सुहागिनों का सिंदूर पोंछा और पवित्र मंदिरों को अपवित्र किया, वह दौलत उसे मौत के दर्द से एक क्षण की भी मुक्ति नहीं दिला सकती थी। इतिहासकार अबुल फजल बैहाकी ने अपनी प्रसिद्ध कृति 'तारीख-ए-बैहाकी' में महमूद गजनवी के जीवन के अंतिम कालखंड का अत्यंत मार्मिक और वीभत्स विवरण प्रस्तुत करते हुए लिखा है कि अपने अंतिम दिनों में सुल्तान शारीरिक व्याधियों और मानसिक संताप के कारण अत्यंत एकाकी, हताश और चिड़चिड़ा हो गया था। बैहाकी, जो उस समय के राजकीय घटनाक्रमों का सूक्ष्म दृष्टा था, उल्लेख करता है कि वह क्रूर विजेता रातों की नींद खो चुका था और अक्सर एकांत कक्ष में अपनी लूटी हुई धन-संपदा तथा बेशकीमती रत्नों के ढेरों को निहारते हुए स्वयं से ही बड़बड़ाता था। उस समय उसकी आँखों में जीत का गर्व नहीं, बल्कि एक गहरी रिक्तता और बेबसी झलकती थी। 'तारीख-ए-बैहाकी' के ये पन्ने उस अहंकारी सत्ता के पतन का साक्षात प्रमाण हैं, जहाँ महमूद को अपनी ढलती सांसों के साथ यह कटु बोध हो रहा था कि जिस वैभव हेतु उसने रक्तपात का तांडव रचा, वह उसकी आत्मा को शांति देने और मृत्यु के पाश से मुक्त कराने में सर्वथा असमर्थ था। उसकी पीड़ा इतनी असहनीय थी कि वह हमेशा कराहता रहता था, लेकिन उसका साथ देने वाला कोई न था। वह एकाकीपन का दंश झेल रहा था। वह धन जिसे उसने अपना खुदा माना था, वही उसकी आँखों के सामने एक मौन बोझ बन गया था। इतिहासकारों के अनुसार, उसने उन रत्नों को अंतिम विदा देते हुए कहा था— 'हाय! यह सब यहीं रह जाएगा और मैं अपने साथ केवल अपने कुकर्मों का बोझ लेकर जा रहा हूँ।' अंततः, 30 अप्रैल 1030 को, वह अत्यंत अपमानजनक और कष्टप्रद स्थिति में मृत्यु को प्राप्त हुआ। महमूद गजनवी की कब्र अफ़ग़ानिस्तान के ग़ज़नी शहर के पास रौज़ा गाँव में खोदी गई, जिसे फ़िरोज़ी बाग़ के नाम से भी जाना जाता था,उसका अंत चीख-चीख कर कह रहा था कि प्रकृति का न्याय भले ही देर से आए, परंतु वह निष्पक्ष और अत्यंत कठोर होता है। जो वैभव रक्त की नींव पर खड़ा होता है, उसका अंत अंततः राख और आँसुओं के सागर में ही होता है। इतिहास का चक्र अनवरत घूमता है और समय हर अन्याय का हिसाब चुकता करता है। महमूद गजनवी का वह क्रूर अट्टहास, जिसने 1026 में सोमनाथ की दीवारों को हिला दिया था, आज 2026 की गूँज में विलीन हो चुका है। महमूद ने सोचा था कि वह मूर्तियों को तोड़कर एक संस्कृति का अंत कर देगा, किंतु वह भूल गया था कि भारत की आत्मा पत्थरों में नहीं, उसके जन-मानस की अटूट श्रद्धा में बसती है। आज वर्ष 2026 में, महमूद के उस आक्रमण के एक हजार वर्ष पूर्ण होने पर, दृश्य पूरी तरह बदल चुका है। जहाँ गजनी आज अपने ही कर्मों के मलबे के नीचे दरिद्रता और अशांति की धूल फांक रहा है, वहीं भारत विश्वपटल पर एक अजेय आर्थिक और सामरिक महाशक्ति के रूप में उभर चुका है। सरदार वल्लभभाई पटेल के उस कालजयी संकल्प से निर्मित आज का सोमनाथ मंदिर केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान का पुनर्जन्म है। समुद्र की लहरें आज भी सोमनाथ के चरणों को पखारती हैं, लेकिन अब उनमें पराजय का क्रंदन नहीं, बल्कि 'नए भारत' की विजय का गर्जन है। वह स्वर्ण-शिखर, जिसे महमूद ने कभी लूटा था, आज पहले से कहीं अधिक भव्यता के साथ सूर्य की किरणों को परावर्तित कर रहा है। सोमनाथ की यह गाथा हमें स्मरण कराती है कि सभ्यताएं शस्त्रों से नहीं, संस्कारों और धैर्य से जीवित रहती हैं। आतातायी आते हैं और धूल में मिल जाते हैं, लेकिन जो संस्कृति 'सत्य' और 'शिव' पर आधारित है, वह सदैव अजेय रहती है। आज का सशक्त भारत अपनी विरासत का रक्षक भी है और भविष्य का निर्माता भी। 'सोमनाथ 1026 से 2026' की यह यात्रा साक्ष्य है कि सत्य को प्रताड़ित किया जा सकता है, पराजित नहीं। गजनी का पतन और सोमनाथ का यह गौरवशाली उत्थान ही नियति का अंतिम और पूर्ण न्याय है।
डोनाल्ड ट्रंप की नई धमकी, बोले-रूसी तेल छोड़ो वरना…पीएम मोदी को लेकर कही बड़ी बात

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की है। ट्रंप की ओर से सोमवार को की गई सख्त टिप्पणी में कहा गया है कि अगर रूसी तेल खरीद के मुद्दे पर दिल्ली का रुख हमारे साथ मेल नहीं खाता है तो भारतीय आयात पर टैरिफ बढ़ाया सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका भारत पर टैरिफ बढ़ा सकता है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘अगर भारत रूस के तेल के मुद्दे पर सहयोग नहीं करता है, तो हम उस पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं।’

पहले की पीएम मोदी की तारीफ

व्हाइट हाउस की तरफ से जारी ऑडियो संदेश में ट्रंप ने अपने विशेष सैन्य विमान- एयरफोर्स वन में मीडिया कर्मियों के साथ संवाद के दौरान पीएम मोदी पर टिप्पणियां कीं। उन्होंने भारत में रूसी तेल आयात से जुड़े एक सवाल के संदर्भ में कहा, 'वे मूल रूप से मुझे खुश करना चाहते थे...प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। वे नेक इंसान हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं हूं। मुझे खुश करना उनके लिए महत्वपूर्ण था। वे (भारत-रूस) व्यापार करते हैं, उन्हें यह बात भलीभांति पता थी कि अमेरिका उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत ने रूस से तेल की खरीद में काफी हद तक कटौती की है।’

ट्रेड डील पर बातचीत के बीच बड़ा बयान

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ बढ़ाने का यह बयान भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड बातचीत के बीच आया है। कुछ समय पहले ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा और अब वह तेल नहीं खरीद रहे हैं। हालांकि भारत ने इस दावे को खारिज किया था। अब उन्होंने कहा है कि भारत ने रूस से तेल खरीद जारी रखी है और हम टैरिफ बढ़ाएंगे।

पहले भी लगा चुके हैं भारी टैरिफ

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने भारत के खिलाफ टैरिफ लगाने की बात कही है। ट्रंप प्रशासन पहले ही भारतीय सामानों पर कुल 50% तक टैरिफ लगा चुका है। ट्रंप के मुताबिक, इसमें से 25% टैरिफ तो केवल इसलिए लगाया गया है ताकि भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की सजा दी जा सके। इस भारी-भरकम टैक्स का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के डेटा के मुताबिक, मई से सितंबर 2025 के बीच भारत का अमेरिका को होने वाला एक्सपोर्ट लगभग 37.5% तक गिर गया है। जो निर्यात पहले 8.8 अरब डॉलर का हुआ करता था, वह घटकर केवल 5.5 अरब डॉलर रह गया है।

बातचीत से हो समाधान', वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई को लेकर बोला भारत

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वेनेजुएला पर हमले के बाद अमेरिका ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, इस हमले के बाद अब भारतीय विदेश मंत्रालय का भी जवाब आ गया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा और भलाई का समर्थन करता है और सभी पक्षों से अपील करता है कि वे बातचीत के जरिए मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान निकालें, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।

क्या कहा भारतीय विदेश मंत्रालय ने

विदेश मंत्रालय ने कहा कि वेनेजुएला में हाल के घटनाक्रम बेहद चिंताजनक हैं। हम स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। भारत वेनेजुएला के लोगों की भलाई और सुरक्षा के प्रति अपना समर्थन दोहराता है। हम सभी संबंधित पक्षों से क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए संवाद के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान निकालने का आह्वान करते हैं। काराकस स्थित भारतीय दूतावास के साथ भारतीय समुदाय के सदस्यों के संपर्क में है और हर संभव सहायता प्रदान करना जारी रखेगा।

वेनेजुएला को लेकर भारत की ट्रैवल एडवाइजरी

इससे पहले भारत ने शनिवार रात अपने नागरिकों को वेनेजुएला की स्थिति को देखते हुए वहां गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी थी। मंत्रालय ने यह परामर्श वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका द्वारा पकड़े जाने से जुड़े घटनाक्रम के मद्देनजर जारी किया था। विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला में मौजूद सभी भारतीयों से भी अत्यधिक सावधानी बरतने और अपनी आवाजाही सीमित रखने को कहा है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम को देखते हुए भारतीय नागरिकों को वहां सभी गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सख्ती से सलाह दी जाती है। बयान में कहा गया, जो भारतीय किसी भी कारण से वेनेजुएला में हैं, उन्हें अत्यधिक सतर्क रहने, अपनी गतिविधियां सीमित रखने और काराकास स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने की सलाह दी जाती है।

अमेरिकी हिरासत में मादुरो और उनकी पत्नी

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलीया फ्लोरेस इस समय अमेरिकी हिरासत में हैं। उन्हें 3 जनवरी को कराकास में की गई एक अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद पकड़ा गया था। इस ऑपरेशन की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी. जानकारी के मुताबिक मादुरो और उनकी पत्नी को न्यूयॉर्क के न्यूबर्ग स्थित स्टुअर्ट एयर नेशनल गार्ड बेस लाया गया। फिलहाल दोनों को ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है और अगले सप्ताह मैनहैटन की एक फेडरल अदालत में पेश किए जाने की संभावना है। मादुरो पर अमेरिका में साल 2020 में नार्को-आतंकवाद से जुड़े आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों में तथाकथित कार्टेल दे लॉस सोल्स का नेतृत्व करना, एफएआरसी के साथ मिलकर कोकीन की तस्करी करना और हथियारों से जुड़े अपराध शामिल हैं।

रांची में जजों का 'स्लैम': अखिल भारतीय न्यायाधीश बैडमिंटन टूर्नामेंट का भव्य आगाज, 9 राज्यों के 31 जज दिखा रहे खेल कौशल।

रांची: झारखंड उच्च न्यायालय के तत्वावधान में आयोजित 2nd All India Judges Badminton Tournament 2026 का आज राजधानी रांची के खेलगांव में विधिवत शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि झारखंड उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री तरलोक सिंह चौहान ने न्यायमूर्ति श्री रोंगोन मुखोपाध्याय, न्यायमूर्ति श्रीमती अनुभा रावत चौधरी और भारतीय महिला हॉकी टीम की स्टार खिलाड़ी निक्की प्रधान के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर प्रतियोगिता का उद्घाटन किया।

स्वास्थ्य और अनुशासन का संदेश उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने खेलों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेल न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं, बल्कि यह अनुशासन और टीम भावना को भी मजबूती प्रदान करते हैं। ऐसे आयोजन न्यायपालिका के सदस्यों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और सकारात्मक ऊर्जा के साथ कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।

9 राज्यों के माननीय न्यायाधीश ले रहे हिस्सा 03 और 04 जनवरी को चलने वाली इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में झारखंड सहित इलाहाबाद, मद्रास, तेलंगाना, बॉम्बे, ओडिशा, राजस्थान, केरल और कर्नाटक उच्च न्यायालयों के कुल 31 माननीय न्यायाधीश अपने खेल कौशल का प्रदर्शन कर रहे हैं। मुकाबले चार श्रेणियों— मेन सिंगल्स, मेन डबल्स, वूमेन सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स में खेले जा रहे हैं।

प्रशासनिक व्यवस्था की सराहना: उपायुक्त सम्मानित ठाकुर विश्वनाथ शहदेव इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट के लिए जिला प्रशासन द्वारा किए गए सुरक्षा, चिकित्सा और बुनियादी सुविधाओं के प्रबंधन की सराहना की गई। बेहतर समन्वय और कुशल प्रशासनिक व्यवस्था के लिए न्यायमूर्ति श्री रोंगोन मुखोपाध्याय ने उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री को सम्मानित किया।

खेलगांव में अंतरराष्ट्रीय मानक की सुविधाएं टूर्नामेंट के सफल संचालन के लिए खेलगांव परिसर में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बैडमिंटन कोर्ट और खिलाड़ियों के लिए विशेष विश्राम स्थल तैयार किए गए हैं।

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की सर्वे ने राहुल को दिखाया आईना, बीजेपी को भी मिल गया मौका

#karnatakagovernmentstudyclaims91percentvotersbelieveelectionsinindia

कर्नाटक सरकार की एक एजेंसी की स्टडी में दावा किया गया है कि राज्य के 91% लोग मानते हैं कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराए जाते हैं और ईवीएम सटीक नतीजे देती हैं। यह रिपोर्ट कर्नाटक मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन अथॉरिटी ने प्रकाशित की है। यह सर्वे ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भाजपा पर कई राज्यों में ‘वोट चोरी’ का लगातार आरोप लगा रहे हैं। वे कर्नाटक के कलबुर्गी में भी वोट चोरी का दावा कर चुके हैं।

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने ईवीएम पर एक सर्वे पब्लिश कराया है। इस सर्वे में पता चला कि अधिकतर नागरिकों का मानना है कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं, जबकि ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर लोगों का भरोसा बढ़ा है। सर्वे में करीब 91 फीसदी लोगों ने ईवीएम पर अपना भरोसा दिखाया है।

सर्वे में क्या ?

डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सर्वे मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अंबुकुमार ने करवाया था। इसमें बेंगलुरु, बेलगावी, कालाबुरागी और मैसूरु के प्रशासनिक डिवीजनों में 102 विधानसभा क्षेत्रों के 5100 लोगों को शामिल किया गया था। योजना, कार्यक्रम निगरानी और सांख्यिकी विभाग के तहत कर्नाटक निगरानी और मूल्यांकन प्राधिकरण द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में पता चला कि सभी डिवीजनों में 91.31 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराए जाते हैं, जिनमें से 6.76 प्रतिशत ने तटस्थ राय व्यक्त की।

अब राहुल गांधी का “वोट चोरी” के नरेटिव का क्या?

कर्नाटक सरकार के सर्वे के नतीजे कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ हैं। कारण कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा के खिलाफ खिलाफ वोट चोरी कैंपेन की शुरुआत की थी। राहुल गांधी ने दावा किया था कि ईवीएम से वोट चोरी होती है और बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने चाहिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने ईवीएम पर कथित भरोसे की कमीके कारण स्थानीय निकाय चुनावों के लिए बैलेट पेपर वापस लाने का फैसला किया है।

बीजेपी ने बोला हमला

इधर, कर्नाटक सरकार द्वारा सर्वे को प्रकाशित करने के बाद बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सर्वे रिपोर्ट रिपोर्ट का हवाला देते हुए शुक्रवार दावा किया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को हर बार चुनाव हारने के बाद ईवीएम या चुनाव आयोग को दोष देने पर 'हकीकत का सामना' करना पड़ता है। पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी चुनाव हारने के बाद ईवीएम और चुनाव आयोग को दोष देते हैं।

कनाडा के वैंकूवर में एयर इंडिया का पायलट गिरफ्तार, प्लेन उड़ाने से पहले पी थी शराब

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कनाडा के वैंकूवर एयरपोर्ट पर एअर इंडिया के एक पायलट को नशे की हालत में हिरासत में लिया गया। 23 दिसंबर, 2025 को वैंकूवर-दिल्ली (वियना होते हुए) उड़ान भरने वाले एयर इंडिया के एक पायलट को जश्न मनाना भारी पड़ गया। पायलट को मुंह से शराब की गंध आने के बाद हिरासत में लिया गया। 

उड़ान से पहले ही उतार दिया गया

23 दिसंबर 2025 को वैंकूवर एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान कनाडाई अधिकारियों को कॉकपिट क्रू के एक सदस्य की ड्यूटी फिटनेस को लेकर संदेह हुआ। अधिकारियों का कहना है कि पायलट से शराब जैसी गंध महसूस हुई, जिसके बाद नियमों के तहत उसे उड़ान से पहले ही उतार दिया गया और आगे की पूछताछ के लिए ले जाया गया।

एअर इंडिया ने अपनाया कड़ा रुख

इस मामले में एअर इंडिया ने कड़ा रुख अपनाया है। पायलट को कुछ दिनों बाद दिल्ली लाया गया और उससे पूछताछ की जा रही है। एयर इंडिया ने दोहराया कि कंपनी नियमों के उल्लंघन पर जीरो टोलरेंस की नीति पर चलता है और जांच में यदि किसी भी तरह के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो कंपनी नियम के अनुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

डीजीसीए कर रहा जांच

इस मामले की जानकारी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को दी गई है, जो इसकी जांच कर रहा है। एअर इंडिया सूत्रों के मुताबिक वो इस मामले में कनाडाई अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। जांच पूरी होने तक संबंधित पायलट को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है।

भारत-पाकिस्तान युद्ध पर अमेरिका के बाद चीन का बड़ा दावा, कहा-हमने संघर्ष रुकवाया

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद अब चीन ने दावा है कि भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम में उसने अहम भूमिका निभाई है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को बीजिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हालात और चीन के विदेश संबंधों पर एक संगोष्ठी में कहा कि इस साल चीन ने कई संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में मध्यस्थता की है। हालांकि, भारत ने चीन के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को दावा किया कि इस साल भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव उन गरमागरम मुद्दों में शामिल था, जिनमें चीन ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। विदेश मंत्रालय ने 13 मई को प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि समझौते की तारीख, समय और शब्दावली दोनों देशों के डीजीएमओ ने 10 मई 2025 को फोन पर हुई बातचीत के दौरान तय की, जो 15:35 बजे शुरू हुई थी।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे अस्थिर दौर- वांग

बीजिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हालात और चीन के विदेश संबंधों पर संगोष्ठी में वांग ने कहा, इस साल, द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से किसी भी समय की तुलना में स्थानीय युद्ध और सीमा पार संघर्ष अधिक बार भड़के। भू-राजनीतिक उथल-पुथल लगातार फैलती जा रही है। उन्होंने कहा, स्थायी शांति स्थापित करने के लिए, हमने एक वस्तुनिष्ठ और तर्कसंगत रुख अपनाया है, और लक्षणों और मूल कारणों दोनों को संबोधित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।

इन तनावों की मध्यस्थता का दावा

चीनी विदेश मंत्री ने आगे कहा कि 'टकराव वाले मुद्दों को सुलझाने के लिए इसी चीनी नजरिए को अपनाते हुए हमने उत्तरी म्यांमार, ईरान के परमाणु मुद्दे, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फिलिस्तीन और इजरायल के बीच मुद्दों और कंबोडिया और थाईलैंड के बीच हालिया संघर्ष में मध्यस्थता की।

भारत ने लगातार मध्यस्थता के दावों को खारिज किया

भारत ने लगातार मध्यस्थता के दावों को खारिज किया है और कहा है कि 88 घंटे तक चला सैन्य टकराव किसी तीसरे पक्ष के दखल के बिना सीधे दोनों देशों के मिलिट्री कम्युनिकेशन के जरिए सुलझाया गया था। 13 मई को एक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय ने बाहरी मध्यस्थता के दावों को खारिज कर दिया था। नई दिल्ली ने बार-बार कहा है कि भारत और पाकिस्तान के मामलों में किसी तीसरे पक्ष के दखल की कोई गुंजाइश नहीं है।

उत्तर भारत में ठंड का “टॉर्चर”, नए साल का मजा किरकिरा, 5 राज्यों में बारिश का अलर्ट

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नए साल का जश्न मनाने की तैयारी कर रहे लोगों का मजा मौसम विभाग चेतावनी से किरकिरा हो गया है। देश में नए साल का आगमन होने वाला है लेकिन मौसम विभाग ने एक बुरी खबर दी है। दरअसल, नए साल के एक दिन पहले से ही देश के उत्तरी और दक्षिणी भागों में मौसम बिगड़ने वाला है। इस दौरान बारिश के बाद कई राज्यों में अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री की गिरावट देखने को मिलेगी।

और बढ़ने वाला है सर्दी का सितम

उत्तर, मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत समेत देश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड, घने कोहरे और शीत लहर ने अपना डेरा जमा लिया है। मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार, उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। अगले कुछ दिनों तक राहत के कोई आसार नहीं हैं, बल्कि सर्दी का सितम और बढ़ने वाला है।

कोहरे को लेकर अलर्ट जारी

मौसम विभाग ने 31 दिसंबर और एक जनवरी के लिए मौसम का जो पूर्वानुमान जताया है उसके हिसाब से ये दोनों दिन कड़ाके की ठंड और घना कोहरा पड़ेगा। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में 5 जनवरी 2026 तक घने कोहरे की चादर लिपटी रहेगी। दिल्ली वालों के लिए भी 31 दिसंबर तक घने कोहरे का अलर्ट है। इसके अलावा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में भी 3-4 जनवरी तक कोहरे का जबरदस्त प्रकोप देखने को मिलेगा।

उत्तर भारत के 5 राज्यों में बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के मुताबिक 31 दिसंबर की शाम से उत्तर भारत के 5 राज्यों में मौसम बिगड़ने वाला है। दिल्ली, हिमाचल, उत्तराखंड, कश्मीर और हरियाणा के लिए बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इन राज्यों में बारिश के बाद तापमान में भी 3 से 4 डिग्री की कमी आ सकती है, जिससे ठंड बढ़ जाएगी। लोगों को इस दौरान सावधान रहने की जरूरत है।

राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में 31 दिसंबर को लगेगा अप्रेंटिस मेला
देवरिया, 26 दिसंबर , M N पाण्डेय। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, देवरिया में आगामी 31 दिसंबर 2025 को अप्रेंटिस मेला आयोजित किया जाएगा। यह मेला प्रातः 10:30 बजे से संस्थान परिसर में संपन्न होगा।

नोडल प्रधानाचार्य द्वारा जारी सूचना के अनुसार, इस अप्रेंटिस मेले में क्लासिक मोटर्स इंजीनियरिंग एरिया, देवरिया द्वारा अप्रेंटिस के लिए चयन प्रक्रिया की जाएगी। मेले में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों के लिए इलेक्ट्रिशियन, डीजल मैकेनिक एवं मैकेनिक मोटर व्हीकल ट्रेड में तकनीकी योग्यता होना आवश्यक है।
अभ्यर्थियों की आयु सीमा 18 से 30 वर्ष निर्धारित की गई है। चयन प्रक्रिया में सम्मिलित होने हेतु अभ्यर्थियों को अपने समस्त शैक्षिक प्रमाण पत्रों की मूल प्रति व छायाप्रति, बायोडाटा, आधार कार्ड, पैन कार्ड एवं चार पासपोर्ट साइज फोटो साथ लाना अनिवार्य होगा।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन अभ्यर्थियों को अप्रेंटिस मेले में सम्मिलित होना है, उनका Apprenticeship India पोर्टल (www.apprenticeshipindia.gov.in) पर पंजीकरण होना अनिवार्य है। पंजीकरण की एक प्रति मेले के दौरान प्रस्तुत करनी होगी।
संस्थान प्रशासन ने पात्र एवं इच्छुक अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि एवं समय पर उपस्थित होकर इस अवसर का लाभ उठाएं।