दिग्गज शूटर जसपाल राणा का निधन, 49 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, खेल जगत में शोक

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मशहूर भारतीय निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का शुक्रवार को निधन हो गया। बताया जा रहा है कि जर्मनी से लौटने के बाद अचानक ही उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। राणा एशियाई खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता हैं और ओलंपिक में दो बार पदक जीत चुकीं स्टार निशानेबाज मनु भाकर के कोच रह चुके हैं।

सिर्फ 49 साल की उम्र में निधन

जसपाल राणा का निधन दिल्ली के मैक्स अस्पताल में हुआ। हाल ही में इस दिग्गज शूटर की सर्जरी भी हुई थी बड़ी बात यह है कि जशपाल की उम्र अभी सिर्फ 49 साल ही थी और वे आमतौर पर काफी फिट भी थे। हालांकि, अब उनके अचानक निधन की खबर ने खेल जगत को हिलाकर रख दिया है।

फ्लाइट में बिगड़ी थी तबीयत

जानकारी के मुताबिक म्यूनिख में हुए आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारत लौटते समय उनकी तबीयत बिगड़ी थी। म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय निशानेबाजी टीम वापस घर लट रही थी तभी टीम के हाई-परफॉर्मेंस कोच और दिग्गज पूर्व निशानेबाज जसपाल राणा की तबीयत अचानक बिगड़ गई।

दिल्ली पहुंचते ही अस्पताल में कराया गया भर्ती

भारतीय दल के साथ स्वदेश लौटते समय उड़ान के दौरान ही उन्हें अस्वस्थता महसूस हुई। जिसके तुरंत बाद उन्हें दिल्ली के अस्पताल ले जाया गया। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहीं पर उनका इलाज चल रहा था।

शूटिंग में शानदार करियर

उनकी मौत भारतीय शूटिंग के लिए बड़ा झटका है। जसपाल राणा ने इस खेल को तीन दशक से भी ज्यादा समय तक बतौर खिलाड़ी और कोच समर्पित किया। भारत के सबसे सफल पिस्टल शूटर्स में से एक जसपाल राणा ने 1990 के दशक में अपनी पहचान बनाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबदबा कायम किया। उन्होंने एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन चैंपियनशिप में कई मेडल जीते और देश के सबसे सफल शूटर्स में शुमार हुए।

द्रोणाचार्य पुरस्कार से थे सम्मानित

शूटिंग रेंज पर उनकी उपलब्धियों ने उन्हें काफी पहचान दिलाई और युवा शूटर्स की एक पीढ़ी को इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित किया। खेल और शूटर्स की अगली पीढ़ी को तैयार करने में उनके बड़े योगदान के लिए सरकार ने उन्हें 2020 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया। राणा ने एक चैंपियन खिलाड़ी और कोच, दोनों ही रूपों में तीन दशकों से ज्यादा समय तक अपना योगदान दिया।

केरल में ईडी की टीम पर हमला, पूर्व सीएम पी विजयन के समर्थकों ने अफसरों को घेरा, गाड़ियों में तोड़फोड़

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केरल में राजनीतिक भूचाल आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम बुधवार सुबह-सुबह केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के ठिकानों पर धावा बोला। तिरुवनंतपुरम से लेकर कन्नूर तक हुई इस अचानक छापेमारी से राज्य में हड़कंप मच गया। इसी क्रम में कन्नूर में छापेमारी का विरोध करते हुए विजयन के समर्थकों ने जमकर बवाल किया। विजयन के समर्थकों ने ईडी अधिकारियों को घेर लिया। और जांच अधिकारियों की गाड़ियों पर जमकर पथराव किया।

ईडी अधिकारियों की गाड़ी पर हमला

तिरुवनंतपुरम में पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा नेता प्रतिपक्ष पिनाराई विजयन के आवास के बाहर उस वक्त भारी हंगामा मच गया, जब सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने ईडी अधिकारियों की गाड़ी पर हमला कर दिया। ये कार्यकर्ता केंद्रीय एजेंसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। सैकड़ों की संख्या में आए समर्थकों ने ईडी की गाड़ियों पर पत्थर फेंके हैं। सीपीएम के समर्थकों ने ईडी की टीम की गाड़ियों को तोड़ने की कोशिश की।

ईडी के तीन वाहनों को नुकसान पहुंचाया

जानकारी के मुताबिक ईडी अधिकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास पर छापा पूरा कर लिया था और जब वे वहां से निकल रहे थे, तो पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके वाहनों को रोक दिया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। आरोप है कि काफिला निकलने से पहले सीपीआई (एम) के कार्यकर्ताओं ने ईडी के तीन वाहनों को नुकसान पहुंचाया और उन पर पत्थर फेंके। इस बीच जैसे-तैसे ईडी के अधिकारी केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीआई (एम) नेता पिनाराई विजयन के आवास से रवाना हुए।

विजयन की बेटी से जुड़ा है मामला

ईडी की इस बड़ी कार्रवाई के केंद्र में पूर्व सीएम पिनाराई विजयन की बेटी टी. वीणा हैं। यह पूरा विवाद टी. वीणा की पूर्व आईटी कंपनी ‘एक्सालॉजिक’ और एक निजी खनन कंपनी कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड से जुड़ा है। आरोप है कि 2017 से 2021 के बीच, वीणा की कंपनी को बिना कोई वास्तविक आईटी सर्विस दिए ही, सीएमआरएल की तरफ से हर महीने भारी-भरकम ‘रिटेनर फीस’ का भुगतान किया गया। ईडी इसी कथित ‘पॉलिटिकल पे-ऑफ’ और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से मामले की गहराई से जांच कर रही है।

केरल में ईडी का बड़ा एक्शन, पूर्व सीएम विजयन के ठिकानों पर रेड, जानें क्या है पूरा मामला

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केरल में सत्ता हाथ से निकलते ही पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर प्रवर्तन निदेशालय का शिकंजा कस गया है। ईडी ने कोचिन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) घोटाले के मामले में बुधवार को बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने केरल में बड़े पैमाने पर छापेमारी शुरू कर दी है। जांच एजेंसी की टीमों ने 10 ठिकानों पर सर्च अभियान चलाया है, जिसमें मौजूदा विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनारई विजयन के आवास भी शामिल हैं।

सत्ता से बेदखल होने के बाद ईटी का शिकंजा

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री पिनरई विजयन से जुड़े ठिकानों समेत 10 जगहों पर छापेमारी की है। यह मामला सिर्फ एक कारोबारी लेनदेन तक सीमित नहीं दिख रहा बल्कि इसमें सत्ता, कॉरपोरेट और कथित वित्तीय गड़बड़ियों का बड़ा नेटवर्क सामने आने की आशंका जताई जा रही है। पिछले कुछ महीनों से विजयन परिवार पर विपक्ष लगातार हमलावर था। सरकार से बेदखल होने के बाद और अब ED की एंट्री ने इस पूरे विवाद को और ज्यादा गंभीर बना दिया है।

विवाद के केंद्र में विजयन की बेटी की कंपनी

ईडी पहले ही विजयन की बेटी टी वीना का बयान दर्ज कर चुकी है। वीना की आईटी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशन इस पूरे विवाद के केंद्र में है। आरोप है कि कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) नाम की एक प्राइवेट कंपनी ने साल 2018 से 2019 के बीच तत्कालीन सीएम विजयन की बेटी वीणा की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को 1.72 करोड़ रुपये का गैर-कानूनी पेमेंट किया, जबकि आईटी फर्म ने कंपनी को कोई सर्विस नहीं दी थी। ईडी की ये छापेमारी केरल हाई कोर्ट द्वारा मंगलवार को सीएमआरएल की उस याचिका को खारिज करने के बाद हुई, जिसमें इस मामले में ईडी की कार्रवाई को रद्द करने की मांग की गई थी।

हाईकोर्ट के फैसले के एक दिन बाद कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 6 बजे ईडी की समन्वित कार्रवाई शुरू हुई। यह छापेमारी केरल हाईकोर्ट के उस फैसले के एक दिन बाद हुई, जिसमें अदालत ने ईडी को सीएमआरएल और एक्सालॉजिक के बीच कथित वित्तीय लेनदेन की जांच जारी रखने की अनुमति दी थी। एजेंसी ने केरल में एक साथ 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इनमें तिरुवनंतपुरम के बेकरी जंक्शन के पास स्थित विजयन का किराए का आवास भी शामिल था, जहां टी वीना भी रहती हैं। इसके अलावा CMRL के दफ्तरों और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े परिसरों पर भी छापेमारी की गई। CMRL के प्रबंध निदेशक ससिधरन कार्था से जुड़े ठिकाने भी जांच के दायरे में रहे।

Rajesh Mohandas Explains the “AI Complexity Gap” Facing Modern Enterprises

Rajesh Mohandas is emerging as a powerful voice at the intersection of law, technology, governance, and artificial intelligence — a convergence that is becoming essential as AI rapidly reshapes business, regulation, and society.

With over 24 years of global experience, including his role as former Vice President at Thomson Reuters, he brings deep expertise in enterprise transformation, governance, risk management, and digital innovation. What sets him apart is his rare dual identity as both a technologist and a legal professional, allowing him to approach AI not just as technology, but as a complex challenge involving compliance, cybersecurity, ethics, and accountability.

As organizations race to adopt AI while facing rising regulatory pressure and operational uncertainty, Rajesh works closely with enterprises to build governance-led, responsible AI systems. His approach focuses on creating scalable, explainable, and legally defensible AI frameworks that balance innovation with risk control.

He is actively contributing to next-generation AI thinking beyond traditional models, working on governance frameworks around emerging systems like LBMs, LAMs, World Models, and hybrid architectures. His work helps organizations bridge what he describes as the “AI Complexity Gap” — where adoption outpaces governance, security, and control.

Rajesh also highlights the growing risks in the AI era, including deepfake fraud, synthetic identities, cyber threats, data privacy issues, algorithmic bias, and regulatory exposure. His governance-first frameworks are designed to help enterprises proactively mitigate these risks before they turn into compliance failures or reputational damage.

In today’s evolving AI economy, Rajesh represents a new category of leadership — the “lawyer-technologist” — combining legal strategy with technology execution. This role is becoming critical for organizations navigating AI regulations, data governance pressures, and cybersecurity challenges at the boardroom level.

Beyond the corporate world, he is the visionary behind Nyaya Darpan Foundation, an initiative focused on AI-led awareness, human rights, and access to justice. Through this, he collaborates with Sonia & Partners Law Firm to support legal awareness, pro bono services, and social impact initiatives.

Nyaya Darpan Foundation: "nyayadarpan.com"

Sonia & Partners Law Firm: "lawyersonia.com"

LinkedIn: "linkedin.com"

As AI continues to redefine industries and institutions, Rajesh Mohandas is positioning himself as a governance-focused thought leader shaping responsible and sustainable AI adoption.

Because in the end, success will not depend on who adopts AI the fastest — but on who governs it the wisest.

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नेपाल में दूतावास खोलने वाला है तुर्की, पूर्व RAW एजेंट लक्की बिष्ट ने भारत को लेकर किया सतर्क

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तुर्की नेपाल में दूतावास खोलने जा रहा है। पूर्व NSG कमांडो और सोशल मीडिया पर सक्रिय लकी बिष्ट ने नेपाल में संभावित तुर्की दूतावास को लेकर गंभीर दावे किए हैं। उन्होंने इसे भारत की सुरक्षा को लेकर खतरा बताया है। उन्होंने इसे केवल कूटनीतिक कदम न मानकर इसके पीछे “छुपे हुए एजेंडे” की आशंका जताई है।

किस बड़े खेल की बात कर रहे बिष्ट?

पूर्व RAW एजेंट लक्की बिष्ट ने अपने अधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया है। बिष्ट का मानना है कि नेपाल के अंदर एंबेसी के आड़ में बहुत बड़ा खेल शुरू होने वाला है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा है, “नेपाल के अंदर एंबेसी के आड़ में बहुत बड़ा खेल शुरू होने वाला है। अगर तुर्की की एंबेसी नेपाल में खुलती है, तो यह सिर्फ कूटनीति नहीं होगी यह धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने का दरवाजा होगा।

नेपाल में तुर्की के दूतावास से किस बात का डर

इतिहास गवाह है कि तुर्की ने उन संगठनों को समर्थन दिया है जो समाज में विभाजन और हिंसा फैलाते हैं। तुर्की ने ही इस्माइल हानिया को वीआईपी पासपोर्ट दिए, जब ISIS अपने चरम पर था तुर्की ने जिहादी रास्ते खोले और सीरिया को बर्बाद करने में भी इसकी भूमिका रही है। अगर आज नेपाल में यह तुर्की एंबेसी खुलती है, तो इसके पीछे छुपे एजेंडे को समझना जरूरी है यह सीधा हमला होगा नेपाल की पहचान, उसकी संस्कृति और उसके अस्तित्व पर।”

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पोते की मौत, दोस्तों के साथ कुल्लू गए थे वीर सोरेन

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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पोते वीर सोरेन की मौत की खबर सामने आई है। यह घटना हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में हुई। सूचना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, उनके बेटे बाबूलाल सोरेन सहित उनके अन्य परिवारिक सदस्य शिमला के लिए रवाना हो गए हैं। स्थानीय पुलिस ने शव को कब्जे में लिया है।

तबीयत अचानक बिगड़ी

जानकारी के मताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पोते वीर सोरेन अपने दोस्तों के साथ कुल्लू मनाली घूमने गए थे। बताया जा रहा है कि बर्फ में खेलने और ठंड में समय बिताने के बाद वे अपने होटल लौटे थे। बताया जा रहा है कि होटल पहुंचने के कुछ ही समय बाद वीर सोरेन की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए। उनके दोस्तों ने तुरंत उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिलहाल मौत का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हुआ है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

प्रारंभिक तौर पर मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है, जिससे घटना को संदिग्ध माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

झारखंड में शोक की लहर

चंपई सोरेन झारखंड की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा रहे हैं और वह प्रदेश के पूर्व मुख्य्मंत्री रह चुके हैं। ऐसे में उनके पोते की असमय मृत्यु की खबर से राजनीतिक जगत में भी संवेदना व्यक्त की जा रही है।

पूर्व रेलवे मंत्री और सीएम ममता के करीबी मुकुल रॉय का निधन, कहे जाते थे बंगाल के चाणक्य

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पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन हो गया है। मुकुल रॉय बीमार थे और उनका कोलकाता के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय ने अपने पिता के निधन की पुष्टि की है।

बेटे शुभ्रांशु रॉय ने बताया कि मुकुल रॉय ने रविवार रात करीब 1:30 बजे कोलकाता के अपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली। अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी। बताया जा रहा है कि मुकुल रॉय लंबे समय से कई तरह की बीमारियों की वजह से जूझ रहे थे।

कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से थे ग्रसित

मुकुल रॉय पिछले कुछ सालों से बीमार चल रहे थे। बेटे शुभ्रांशु ने कहा, वह कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। वे पार्किंसंस रोग और डिमेंशिया से पीड़ित थे। ब्रेन में हाइड्रोसेफलस की समस्या के कारण ब्रेन सर्जरी भी हुई थी। 2024 में भी कई बार अस्पताल में भर्ती हुए, जिसमें सिर में चोट और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं शामिल थीं। हाल ही में अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत क्रिटिकल बताई गई थी।

तृणमूल कांग्रेस का प्रमुख चेहरा

1998 में गठित टीएमसी के शुरुआती दौर से जुड़े रॉय को कभी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी सहयोगी माना जाता था। ममता बनर्जी की तरह ही उन्होंने भी अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बंगाल में यूथ कांग्रेस से की थी। तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद रॉय ने पार्टी संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया। समय के साथ वे दिल्ली की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे।

मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर

वर्ष 2006 में वह राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और 2009 से 2012 तक सदन में पार्टी के नेता रहे। यूपीए-2 सरकार के दौरान उन्होंने पहले शिपिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में काम किया और बाद में मार्च 2012 में पार्टी सहयोगी दिनेश त्रिवेदी की जगह रेल मंत्री का पद संभाला। हालांकि, मुकुल रॉय के टीएमसी के साथ रिश्ते बिगड़ गए। खासकर शारदा चिटफंड घोटाले जैसे मुद्दों के बाद वह टीएमसी से दूर हो गए। फरवरी 2015 में पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव पद से हटा दिया। सितंबर 2017 में मुकुल रॉय ने टीएमसी से इस्तीफा दे दिया।

2017 में बीजेपी का दामन थामा

नवंबर 2017 में रॉय बीजेपी में शामिल हो गए थे। रॉय ने जमीनी स्तर पर काम करके बीजेपी को राज्य में बेस बनाने में मदद की। उन्हें 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी की 18 सीटें जीतने का क्रेडिट दिया जाता है। उन्होंने बीजेपी को टीएमसी के कई बड़े नेताओं को अपने पाले में लाने में मदद की और 2021 के विधानसभा चुनावों में कृष्णानगर उत्तर से बीजेपी विधायक चुने गए। लेकिन जल्द ही, उन्होंने बीजेपी से दूरी बना ली। जून 2021 में वो तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। हालांकि, टीएमसी में वापस आने पर वह कद और समझ दोनों में पहले जैसे कभी नहीं रहे।

गावस्कर, कपिल देव समेत 14 पूर्व कप्तानों ने पाक सरकार को लिखी चिट्ठी, इमरान खान से जुड़ा है मामला

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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की खराब सेहत को लेकर 6 देशों के 14 पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कप्तानों ने पाकिस्तान सरकार को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अपील की है कि 73 साल के इमरान को जेल में उचित इलाज दिया जाए।

इमरान खान के समर्थन में आए पूर्व क्रिकेटर

पूर्व क्रिकेटर और पाकिस्तन के प्रधानमंत्री रह चुके इमरान खान की जेल में सेहत बिगड़ने की खबरों के बीच अब दुनिया भर के क्रिकेटर साथ आए हैं। अब दुनिया भर के पूर्व क्रिकेटरों ने मिलकर एक साथ जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री और 1992 वर्ल्ड कप जीतने वाले कप्तान, इमरान खान के साथ "सही और इंसानी बर्ताव" की मांग कर रहा है।

इन पूर्व क्रिकेटर के साइन

रिपोर्ट के मुताबिक इस इस चिट्ठी पर बेलिंडा क्लार्क, ग्रेग चैपल, माइकल एथरटन, सुनील गावस्कर, कपिल देव, नासिर हुसैन, इयान चैपल, माइकल ब्रियरली, एलन बॉर्डर, डेविड गावर, किम ह्यूजेस, क्लाइव लॉयड, स्टीव वॉ और जॉन राइट ने साइन किए हैं

पूर्व कप्तानों ने चिट्ठी में क्या लिखा?

पूर्व कप्तानों द्वारा पाकिस्तान सरकार को लिखी इस चिट्ठी में लिखा गया है, "इमरान खान की खेल में दिए गए योगदान की पूरी दुनिया में तारीफ होती है। कप्तान के तौर पर उन्होंने 1992 में पाकिस्तान को वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक जीत दिलाई। ये जीत स्किल, स्पोर्ट्समैनशिप, मजबूत लीडरशिप से आई थी, जिसने दुनिया की नई पीढ़ी को इंस्पायर किया। हमनें उनके साथ मैदान शेयर किया, उनसे सीखा। वह क्रिकेट के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर्स में से एक हैं, जिनका सभी सम्मान करते हैं। क्रिकेट के आलावा उन्होंने प्रधानमंत्री बनकर भी पाकिस्तान की सेवा की, और मुश्किल समय में पाकिस्तान को संभाला।"

जेल में इमरान खान की बिगड़ती तबियत को लेकर चिट्ठी में लिखा गया, "उनकी सेहत से जुड़ी रिपोर्ट्स, उनकी आंखों की रौशनी का कम होने की खबर ने, हमें चिंता में डाल दिया है।" चिट्ठी में पूर्व कप्तानों ने लिखा कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और ग्लोबल स्पोर्ट्स आइकॉन के साथ जेल में अच्छे से पेश आना चाहिए।

800 से ज्यादा दिनों से जेल में

बता दें कि इमरान को जेल में 800 दिनों से ज्यादा का समय हो गया है। उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही है, जिससे जेल में उनके साथ हो रहे बर्ताव को लेकर सवाल और चिंताएं होने लगी है। इमरान खान की बहन अलीमा खानम ने जेल में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री के साथ हो रहे बर्ताव और उनकी बिगड़ती सेहत के खिलाफ आवाज उठाई थी।

इमरान की एक आंख की 85% रोशनी खत्म

बताया जा रहा है कि इमरान खान की एक आंख की करीब 85% रोशनी चली गई है। यह खुलासा पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई जांच में हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नियुक्त वकील सलमान सफदर ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि इमरान खान जेल प्रशासन से कई महीनों आंखों में धुंधलापन होने की शिकायत कर रहे थे। अक्टूबर 2025 तक उनकी नजर सामान्य थी, लेकिन बाद में दाईं आंख की रोशनी अचानक चली गई। जांच के दौरान पिम्स अस्पताल के एक आई एक्सपर्ट को बुलाया गया था। डॉक्टरों ने पाया कि उनकी आंख में खून का थक्का जम गया था, जिससे गंभीर नुकसान हुआ। इलाज और इंजेक्शन देने के बाद भी उनकी दाईं आंख में अब सिर्फ लगभग 15% रोशनी बची है। वहीं इमरान का कहना है उन्हें निजी डॉक्टर से इलाज कराने की इजाजत नहीं दी गई है।

दिग्गज शूटर जसपाल राणा का निधन, 49 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, खेल जगत में शोक

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दिल्ली पहुंचते ही अस्पताल में कराया गया भर्ती

भारतीय दल के साथ स्वदेश लौटते समय उड़ान के दौरान ही उन्हें अस्वस्थता महसूस हुई। जिसके तुरंत बाद उन्हें दिल्ली के अस्पताल ले जाया गया। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहीं पर उनका इलाज चल रहा था।

शूटिंग में शानदार करियर

उनकी मौत भारतीय शूटिंग के लिए बड़ा झटका है। जसपाल राणा ने इस खेल को तीन दशक से भी ज्यादा समय तक बतौर खिलाड़ी और कोच समर्पित किया। भारत के सबसे सफल पिस्टल शूटर्स में से एक जसपाल राणा ने 1990 के दशक में अपनी पहचान बनाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबदबा कायम किया। उन्होंने एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन चैंपियनशिप में कई मेडल जीते और देश के सबसे सफल शूटर्स में शुमार हुए।

द्रोणाचार्य पुरस्कार से थे सम्मानित

शूटिंग रेंज पर उनकी उपलब्धियों ने उन्हें काफी पहचान दिलाई और युवा शूटर्स की एक पीढ़ी को इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित किया। खेल और शूटर्स की अगली पीढ़ी को तैयार करने में उनके बड़े योगदान के लिए सरकार ने उन्हें 2020 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया। राणा ने एक चैंपियन खिलाड़ी और कोच, दोनों ही रूपों में तीन दशकों से ज्यादा समय तक अपना योगदान दिया।

केरल में ईडी की टीम पर हमला, पूर्व सीएम पी विजयन के समर्थकों ने अफसरों को घेरा, गाड़ियों में तोड़फोड़

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केरल में राजनीतिक भूचाल आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम बुधवार सुबह-सुबह केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के ठिकानों पर धावा बोला। तिरुवनंतपुरम से लेकर कन्नूर तक हुई इस अचानक छापेमारी से राज्य में हड़कंप मच गया। इसी क्रम में कन्नूर में छापेमारी का विरोध करते हुए विजयन के समर्थकों ने जमकर बवाल किया। विजयन के समर्थकों ने ईडी अधिकारियों को घेर लिया। और जांच अधिकारियों की गाड़ियों पर जमकर पथराव किया।

ईडी अधिकारियों की गाड़ी पर हमला

तिरुवनंतपुरम में पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा नेता प्रतिपक्ष पिनाराई विजयन के आवास के बाहर उस वक्त भारी हंगामा मच गया, जब सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने ईडी अधिकारियों की गाड़ी पर हमला कर दिया। ये कार्यकर्ता केंद्रीय एजेंसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। सैकड़ों की संख्या में आए समर्थकों ने ईडी की गाड़ियों पर पत्थर फेंके हैं। सीपीएम के समर्थकों ने ईडी की टीम की गाड़ियों को तोड़ने की कोशिश की।

ईडी के तीन वाहनों को नुकसान पहुंचाया

जानकारी के मुताबिक ईडी अधिकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास पर छापा पूरा कर लिया था और जब वे वहां से निकल रहे थे, तो पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके वाहनों को रोक दिया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। आरोप है कि काफिला निकलने से पहले सीपीआई (एम) के कार्यकर्ताओं ने ईडी के तीन वाहनों को नुकसान पहुंचाया और उन पर पत्थर फेंके। इस बीच जैसे-तैसे ईडी के अधिकारी केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीआई (एम) नेता पिनाराई विजयन के आवास से रवाना हुए।

विजयन की बेटी से जुड़ा है मामला

ईडी की इस बड़ी कार्रवाई के केंद्र में पूर्व सीएम पिनाराई विजयन की बेटी टी. वीणा हैं। यह पूरा विवाद टी. वीणा की पूर्व आईटी कंपनी ‘एक्सालॉजिक’ और एक निजी खनन कंपनी कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड से जुड़ा है। आरोप है कि 2017 से 2021 के बीच, वीणा की कंपनी को बिना कोई वास्तविक आईटी सर्विस दिए ही, सीएमआरएल की तरफ से हर महीने भारी-भरकम ‘रिटेनर फीस’ का भुगतान किया गया। ईडी इसी कथित ‘पॉलिटिकल पे-ऑफ’ और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से मामले की गहराई से जांच कर रही है।

केरल में ईडी का बड़ा एक्शन, पूर्व सीएम विजयन के ठिकानों पर रेड, जानें क्या है पूरा मामला

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केरल में सत्ता हाथ से निकलते ही पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर प्रवर्तन निदेशालय का शिकंजा कस गया है। ईडी ने कोचिन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) घोटाले के मामले में बुधवार को बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने केरल में बड़े पैमाने पर छापेमारी शुरू कर दी है। जांच एजेंसी की टीमों ने 10 ठिकानों पर सर्च अभियान चलाया है, जिसमें मौजूदा विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनारई विजयन के आवास भी शामिल हैं।

सत्ता से बेदखल होने के बाद ईटी का शिकंजा

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री पिनरई विजयन से जुड़े ठिकानों समेत 10 जगहों पर छापेमारी की है। यह मामला सिर्फ एक कारोबारी लेनदेन तक सीमित नहीं दिख रहा बल्कि इसमें सत्ता, कॉरपोरेट और कथित वित्तीय गड़बड़ियों का बड़ा नेटवर्क सामने आने की आशंका जताई जा रही है। पिछले कुछ महीनों से विजयन परिवार पर विपक्ष लगातार हमलावर था। सरकार से बेदखल होने के बाद और अब ED की एंट्री ने इस पूरे विवाद को और ज्यादा गंभीर बना दिया है।

विवाद के केंद्र में विजयन की बेटी की कंपनी

ईडी पहले ही विजयन की बेटी टी वीना का बयान दर्ज कर चुकी है। वीना की आईटी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशन इस पूरे विवाद के केंद्र में है। आरोप है कि कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) नाम की एक प्राइवेट कंपनी ने साल 2018 से 2019 के बीच तत्कालीन सीएम विजयन की बेटी वीणा की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को 1.72 करोड़ रुपये का गैर-कानूनी पेमेंट किया, जबकि आईटी फर्म ने कंपनी को कोई सर्विस नहीं दी थी। ईडी की ये छापेमारी केरल हाई कोर्ट द्वारा मंगलवार को सीएमआरएल की उस याचिका को खारिज करने के बाद हुई, जिसमें इस मामले में ईडी की कार्रवाई को रद्द करने की मांग की गई थी।

हाईकोर्ट के फैसले के एक दिन बाद कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 6 बजे ईडी की समन्वित कार्रवाई शुरू हुई। यह छापेमारी केरल हाईकोर्ट के उस फैसले के एक दिन बाद हुई, जिसमें अदालत ने ईडी को सीएमआरएल और एक्सालॉजिक के बीच कथित वित्तीय लेनदेन की जांच जारी रखने की अनुमति दी थी। एजेंसी ने केरल में एक साथ 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इनमें तिरुवनंतपुरम के बेकरी जंक्शन के पास स्थित विजयन का किराए का आवास भी शामिल था, जहां टी वीना भी रहती हैं। इसके अलावा CMRL के दफ्तरों और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े परिसरों पर भी छापेमारी की गई। CMRL के प्रबंध निदेशक ससिधरन कार्था से जुड़े ठिकाने भी जांच के दायरे में रहे।

Rajesh Mohandas Explains the “AI Complexity Gap” Facing Modern Enterprises

Rajesh Mohandas is emerging as a powerful voice at the intersection of law, technology, governance, and artificial intelligence — a convergence that is becoming essential as AI rapidly reshapes business, regulation, and society.

With over 24 years of global experience, including his role as former Vice President at Thomson Reuters, he brings deep expertise in enterprise transformation, governance, risk management, and digital innovation. What sets him apart is his rare dual identity as both a technologist and a legal professional, allowing him to approach AI not just as technology, but as a complex challenge involving compliance, cybersecurity, ethics, and accountability.

As organizations race to adopt AI while facing rising regulatory pressure and operational uncertainty, Rajesh works closely with enterprises to build governance-led, responsible AI systems. His approach focuses on creating scalable, explainable, and legally defensible AI frameworks that balance innovation with risk control.

He is actively contributing to next-generation AI thinking beyond traditional models, working on governance frameworks around emerging systems like LBMs, LAMs, World Models, and hybrid architectures. His work helps organizations bridge what he describes as the “AI Complexity Gap” — where adoption outpaces governance, security, and control.

Rajesh also highlights the growing risks in the AI era, including deepfake fraud, synthetic identities, cyber threats, data privacy issues, algorithmic bias, and regulatory exposure. His governance-first frameworks are designed to help enterprises proactively mitigate these risks before they turn into compliance failures or reputational damage.

In today’s evolving AI economy, Rajesh represents a new category of leadership — the “lawyer-technologist” — combining legal strategy with technology execution. This role is becoming critical for organizations navigating AI regulations, data governance pressures, and cybersecurity challenges at the boardroom level.

Beyond the corporate world, he is the visionary behind Nyaya Darpan Foundation, an initiative focused on AI-led awareness, human rights, and access to justice. Through this, he collaborates with Sonia & Partners Law Firm to support legal awareness, pro bono services, and social impact initiatives.

Nyaya Darpan Foundation: "nyayadarpan.com"

Sonia & Partners Law Firm: "lawyersonia.com"

LinkedIn: "linkedin.com"

As AI continues to redefine industries and institutions, Rajesh Mohandas is positioning himself as a governance-focused thought leader shaping responsible and sustainable AI adoption.

Because in the end, success will not depend on who adopts AI the fastest — but on who governs it the wisest.

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नेपाल में दूतावास खोलने वाला है तुर्की, पूर्व RAW एजेंट लक्की बिष्ट ने भारत को लेकर किया सतर्क

#formernsgcommandoluckybishtonpossibleturkishembassyinnepal

तुर्की नेपाल में दूतावास खोलने जा रहा है। पूर्व NSG कमांडो और सोशल मीडिया पर सक्रिय लकी बिष्ट ने नेपाल में संभावित तुर्की दूतावास को लेकर गंभीर दावे किए हैं। उन्होंने इसे भारत की सुरक्षा को लेकर खतरा बताया है। उन्होंने इसे केवल कूटनीतिक कदम न मानकर इसके पीछे “छुपे हुए एजेंडे” की आशंका जताई है।

किस बड़े खेल की बात कर रहे बिष्ट?

पूर्व RAW एजेंट लक्की बिष्ट ने अपने अधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया है। बिष्ट का मानना है कि नेपाल के अंदर एंबेसी के आड़ में बहुत बड़ा खेल शुरू होने वाला है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा है, “नेपाल के अंदर एंबेसी के आड़ में बहुत बड़ा खेल शुरू होने वाला है। अगर तुर्की की एंबेसी नेपाल में खुलती है, तो यह सिर्फ कूटनीति नहीं होगी यह धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने का दरवाजा होगा।

नेपाल में तुर्की के दूतावास से किस बात का डर

इतिहास गवाह है कि तुर्की ने उन संगठनों को समर्थन दिया है जो समाज में विभाजन और हिंसा फैलाते हैं। तुर्की ने ही इस्माइल हानिया को वीआईपी पासपोर्ट दिए, जब ISIS अपने चरम पर था तुर्की ने जिहादी रास्ते खोले और सीरिया को बर्बाद करने में भी इसकी भूमिका रही है। अगर आज नेपाल में यह तुर्की एंबेसी खुलती है, तो इसके पीछे छुपे एजेंडे को समझना जरूरी है यह सीधा हमला होगा नेपाल की पहचान, उसकी संस्कृति और उसके अस्तित्व पर।”

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पोते की मौत, दोस्तों के साथ कुल्लू गए थे वीर सोरेन

#jharkhandformerchiefministerchampaisorengrandsondiesin_kullu

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पोते वीर सोरेन की मौत की खबर सामने आई है। यह घटना हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में हुई। सूचना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, उनके बेटे बाबूलाल सोरेन सहित उनके अन्य परिवारिक सदस्य शिमला के लिए रवाना हो गए हैं। स्थानीय पुलिस ने शव को कब्जे में लिया है।

तबीयत अचानक बिगड़ी

जानकारी के मताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पोते वीर सोरेन अपने दोस्तों के साथ कुल्लू मनाली घूमने गए थे। बताया जा रहा है कि बर्फ में खेलने और ठंड में समय बिताने के बाद वे अपने होटल लौटे थे। बताया जा रहा है कि होटल पहुंचने के कुछ ही समय बाद वीर सोरेन की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए। उनके दोस्तों ने तुरंत उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिलहाल मौत का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हुआ है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

प्रारंभिक तौर पर मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है, जिससे घटना को संदिग्ध माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

झारखंड में शोक की लहर

चंपई सोरेन झारखंड की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा रहे हैं और वह प्रदेश के पूर्व मुख्य्मंत्री रह चुके हैं। ऐसे में उनके पोते की असमय मृत्यु की खबर से राजनीतिक जगत में भी संवेदना व्यक्त की जा रही है।

पूर्व रेलवे मंत्री और सीएम ममता के करीबी मुकुल रॉय का निधन, कहे जाते थे बंगाल के चाणक्य

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पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन हो गया है। मुकुल रॉय बीमार थे और उनका कोलकाता के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय ने अपने पिता के निधन की पुष्टि की है।

बेटे शुभ्रांशु रॉय ने बताया कि मुकुल रॉय ने रविवार रात करीब 1:30 बजे कोलकाता के अपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली। अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी। बताया जा रहा है कि मुकुल रॉय लंबे समय से कई तरह की बीमारियों की वजह से जूझ रहे थे।

कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से थे ग्रसित

मुकुल रॉय पिछले कुछ सालों से बीमार चल रहे थे। बेटे शुभ्रांशु ने कहा, वह कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। वे पार्किंसंस रोग और डिमेंशिया से पीड़ित थे। ब्रेन में हाइड्रोसेफलस की समस्या के कारण ब्रेन सर्जरी भी हुई थी। 2024 में भी कई बार अस्पताल में भर्ती हुए, जिसमें सिर में चोट और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं शामिल थीं। हाल ही में अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत क्रिटिकल बताई गई थी।

तृणमूल कांग्रेस का प्रमुख चेहरा

1998 में गठित टीएमसी के शुरुआती दौर से जुड़े रॉय को कभी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी सहयोगी माना जाता था। ममता बनर्जी की तरह ही उन्होंने भी अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बंगाल में यूथ कांग्रेस से की थी। तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद रॉय ने पार्टी संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया। समय के साथ वे दिल्ली की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे।

मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर

वर्ष 2006 में वह राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और 2009 से 2012 तक सदन में पार्टी के नेता रहे। यूपीए-2 सरकार के दौरान उन्होंने पहले शिपिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में काम किया और बाद में मार्च 2012 में पार्टी सहयोगी दिनेश त्रिवेदी की जगह रेल मंत्री का पद संभाला। हालांकि, मुकुल रॉय के टीएमसी के साथ रिश्ते बिगड़ गए। खासकर शारदा चिटफंड घोटाले जैसे मुद्दों के बाद वह टीएमसी से दूर हो गए। फरवरी 2015 में पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव पद से हटा दिया। सितंबर 2017 में मुकुल रॉय ने टीएमसी से इस्तीफा दे दिया।

2017 में बीजेपी का दामन थामा

नवंबर 2017 में रॉय बीजेपी में शामिल हो गए थे। रॉय ने जमीनी स्तर पर काम करके बीजेपी को राज्य में बेस बनाने में मदद की। उन्हें 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी की 18 सीटें जीतने का क्रेडिट दिया जाता है। उन्होंने बीजेपी को टीएमसी के कई बड़े नेताओं को अपने पाले में लाने में मदद की और 2021 के विधानसभा चुनावों में कृष्णानगर उत्तर से बीजेपी विधायक चुने गए। लेकिन जल्द ही, उन्होंने बीजेपी से दूरी बना ली। जून 2021 में वो तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। हालांकि, टीएमसी में वापस आने पर वह कद और समझ दोनों में पहले जैसे कभी नहीं रहे।

गावस्कर, कपिल देव समेत 14 पूर्व कप्तानों ने पाक सरकार को लिखी चिट्ठी, इमरान खान से जुड़ा है मामला

#formercaptainsincludinggavaskarkapilwritestopakgovtforimran_khan

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की खराब सेहत को लेकर 6 देशों के 14 पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कप्तानों ने पाकिस्तान सरकार को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अपील की है कि 73 साल के इमरान को जेल में उचित इलाज दिया जाए।

इमरान खान के समर्थन में आए पूर्व क्रिकेटर

पूर्व क्रिकेटर और पाकिस्तन के प्रधानमंत्री रह चुके इमरान खान की जेल में सेहत बिगड़ने की खबरों के बीच अब दुनिया भर के क्रिकेटर साथ आए हैं। अब दुनिया भर के पूर्व क्रिकेटरों ने मिलकर एक साथ जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री और 1992 वर्ल्ड कप जीतने वाले कप्तान, इमरान खान के साथ "सही और इंसानी बर्ताव" की मांग कर रहा है।

इन पूर्व क्रिकेटर के साइन

रिपोर्ट के मुताबिक इस इस चिट्ठी पर बेलिंडा क्लार्क, ग्रेग चैपल, माइकल एथरटन, सुनील गावस्कर, कपिल देव, नासिर हुसैन, इयान चैपल, माइकल ब्रियरली, एलन बॉर्डर, डेविड गावर, किम ह्यूजेस, क्लाइव लॉयड, स्टीव वॉ और जॉन राइट ने साइन किए हैं

पूर्व कप्तानों ने चिट्ठी में क्या लिखा?

पूर्व कप्तानों द्वारा पाकिस्तान सरकार को लिखी इस चिट्ठी में लिखा गया है, "इमरान खान की खेल में दिए गए योगदान की पूरी दुनिया में तारीफ होती है। कप्तान के तौर पर उन्होंने 1992 में पाकिस्तान को वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक जीत दिलाई। ये जीत स्किल, स्पोर्ट्समैनशिप, मजबूत लीडरशिप से आई थी, जिसने दुनिया की नई पीढ़ी को इंस्पायर किया। हमनें उनके साथ मैदान शेयर किया, उनसे सीखा। वह क्रिकेट के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर्स में से एक हैं, जिनका सभी सम्मान करते हैं। क्रिकेट के आलावा उन्होंने प्रधानमंत्री बनकर भी पाकिस्तान की सेवा की, और मुश्किल समय में पाकिस्तान को संभाला।"

जेल में इमरान खान की बिगड़ती तबियत को लेकर चिट्ठी में लिखा गया, "उनकी सेहत से जुड़ी रिपोर्ट्स, उनकी आंखों की रौशनी का कम होने की खबर ने, हमें चिंता में डाल दिया है।" चिट्ठी में पूर्व कप्तानों ने लिखा कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और ग्लोबल स्पोर्ट्स आइकॉन के साथ जेल में अच्छे से पेश आना चाहिए।

800 से ज्यादा दिनों से जेल में

बता दें कि इमरान को जेल में 800 दिनों से ज्यादा का समय हो गया है। उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही है, जिससे जेल में उनके साथ हो रहे बर्ताव को लेकर सवाल और चिंताएं होने लगी है। इमरान खान की बहन अलीमा खानम ने जेल में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री के साथ हो रहे बर्ताव और उनकी बिगड़ती सेहत के खिलाफ आवाज उठाई थी।

इमरान की एक आंख की 85% रोशनी खत्म

बताया जा रहा है कि इमरान खान की एक आंख की करीब 85% रोशनी चली गई है। यह खुलासा पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई जांच में हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नियुक्त वकील सलमान सफदर ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि इमरान खान जेल प्रशासन से कई महीनों आंखों में धुंधलापन होने की शिकायत कर रहे थे। अक्टूबर 2025 तक उनकी नजर सामान्य थी, लेकिन बाद में दाईं आंख की रोशनी अचानक चली गई। जांच के दौरान पिम्स अस्पताल के एक आई एक्सपर्ट को बुलाया गया था। डॉक्टरों ने पाया कि उनकी आंख में खून का थक्का जम गया था, जिससे गंभीर नुकसान हुआ। इलाज और इंजेक्शन देने के बाद भी उनकी दाईं आंख में अब सिर्फ लगभग 15% रोशनी बची है। वहीं इमरान का कहना है उन्हें निजी डॉक्टर से इलाज कराने की इजाजत नहीं दी गई है।