पीएम मोदी दिसंबर में जाएंगे कनाडा, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने किया तारीखों का ऐलान

#pmnarendramodiwillvisitcanadaondecember11_and12

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11-12 दिसंबर को कनाडा का दौरा करेंगे। ओटावा में भारतीय उच्चायोग ने शुक्रवार को इसका ऐलान किया। बता दें कि अभी कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद भारत की यात्रा पर हैं। इसी बीच पीएम मोदी का कनाडा दौरा भी तय हो गया है। ये दौरा दोनों देशों के रिश्ते को लेकर अहम माना जा रहा है। दरअसल, 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। अब आपसी सहयोग बढ़ाने और रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिशों के बीच मोदी का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है।

पीएम मोदी और मार्क कार्नी के बीच फोन पर हुई बात

यह घोषणा प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई टेलीफोन पर बातचीत के बाद की गई है। ओटावा स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11-12 दिसंबर, 2026 को कनाडा का दौरा करेंगे।' पोस्ट में आगे कहा गया है, 'प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ हाल ही में हुई बातचीत में दोनों नेताओं ने संबंधों में सकारात्मक गति को आगे बढ़ाने और व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों में ठोस परिणाम प्राप्त करने की दिशा में काम करने पर सहमति व्यक्त की।'

क्यों अहम है पीएम मोदी का कनाडा यात्रा

भारत और कनाडा के बीच रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिशों के बीच यह दौरा अहम माना जा रहा है। भारत और कनाडा के रिश्तों में 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद तनाव बढ़ गया था। तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय एजेंटों की कथित भूमिका को लेकर आरोप लगाए थे, जिन्हें भारत ने खारिज किया था। दोनों देशों ने एक-दूसरे के छह-छह राजनयिकों को निष्कासित भी किया था। हालांकि, मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद रिश्तों में सुधार और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। दोनों देश इस साल के अंत तक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर सालाना 70 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

मदद का हाथ बढ़ाना भारत की परंपरा और उसके ‘डीएनए’ का हिस्सा, कनाडा में बोले मोहन भागवत

#rashtriyaswayamsevaksanghrsschiefmohanbhagwatincanadaspeakson_hindu

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत विदेश प्रवास पर हैं। मोहन भागवत अमेरिका के बाद अब कनाडा पहुंचे हैं। कनाडा के टोरंटो पहुंचे भागवत ने ‘हिंदू विश्व बंधु-एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम को संबोधित किया।

भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सदियों पुरानी अवधारणा पर जोर

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु–एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम में भारत की सभ्यतागत सोच और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सदियों पुरानी अवधारणा पर जोर दिया। भारत को सुपरपावर कहा जा सकता है, लेकिन भारत कभी महाशक्ति बनने के लिए दुनिया में नहीं निकला। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया की सेवा की और अपने चरित्र के कारण ‘विश्वगुरु’ बना। आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा कि खुले विचारों वाले और ज्ञान से संपन्न लोग ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को स्वीकार करते हैं, जिसका अर्थ है कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है।

हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है-भागवत

भागवत ने कहा कि दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है। दुनिया की सेवा से भारत को पहचान मिली। जब भी दुनिया में कहीं भारत से मदद मांगी गई, भारत ने कभी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर मदद के लिए हाथ बढ़ाना भारत की परंपरा और उसके ‘डीएनए’ का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण यह कहा जाता है कि ‘अगर हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है।’

भागवत ने बताई हिंदू सोच से जुड़ी फिलॉसफी

संघ संचालक ने कहा, हमारे पूर्वजों ने मैक्सिको से साइबेरिया तक यात्रा की लेकिन उन्होंने किसी देश पर कब्जा नहीं किया। उन्होंने ज्ञान, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद और सभ्यता के मूल्य सिखाए और दुनिया का दिल जीता। भागवत ने कहा कि हिंदू शब्द को किसी खास भाषा, पूजा के तरीके या जीवनशैली तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंदू सोच से जुड़ी फिलॉसफी विविधता को अपनाने और छिपी हुई एकता को पहचानने पर आधारित है। हिंदू सभी का सम्मान करते हैं और सभी को दिल से अपनाते हैं।

भारत ने सबको शरण दिया

मोहन भागवत ने कहा कि मुसलमानों, ईसाइयों, यहूदियों और पारसियों को ऐतिहासिक रूप से भारत में बिना किसी उत्पीड़न के डर के पनाह मिली है। दुनिया में कहीं भी अगर किसी पर जुल्म हुआ तो उसे भारत में ही जगह मिली।

पीएम मोदी दिसंबर में जाएंगे कनाडा, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने किया तारीखों का ऐलान

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11-12 दिसंबर को कनाडा का दौरा करेंगे। ओटावा में भारतीय उच्चायोग ने शुक्रवार को इसका ऐलान किया। बता दें कि अभी कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद भारत की यात्रा पर हैं। इसी बीच पीएम मोदी का कनाडा दौरा भी तय हो गया है। ये दौरा दोनों देशों के रिश्ते को लेकर अहम माना जा रहा है। दरअसल, 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। अब आपसी सहयोग बढ़ाने और रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिशों के बीच मोदी का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है।

पीएम मोदी और मार्क कार्नी के बीच फोन पर हुई बात

यह घोषणा प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई टेलीफोन पर बातचीत के बाद की गई है। ओटावा स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11-12 दिसंबर, 2026 को कनाडा का दौरा करेंगे।' पोस्ट में आगे कहा गया है, 'प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ हाल ही में हुई बातचीत में दोनों नेताओं ने संबंधों में सकारात्मक गति को आगे बढ़ाने और व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों में ठोस परिणाम प्राप्त करने की दिशा में काम करने पर सहमति व्यक्त की।'

क्यों अहम है पीएम मोदी का कनाडा यात्रा

भारत और कनाडा के बीच रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिशों के बीच यह दौरा अहम माना जा रहा है। भारत और कनाडा के रिश्तों में 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद तनाव बढ़ गया था। तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय एजेंटों की कथित भूमिका को लेकर आरोप लगाए थे, जिन्हें भारत ने खारिज किया था। दोनों देशों ने एक-दूसरे के छह-छह राजनयिकों को निष्कासित भी किया था। हालांकि, मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद रिश्तों में सुधार और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। दोनों देश इस साल के अंत तक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर सालाना 70 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

मदद का हाथ बढ़ाना भारत की परंपरा और उसके ‘डीएनए’ का हिस्सा, कनाडा में बोले मोहन भागवत

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत विदेश प्रवास पर हैं। मोहन भागवत अमेरिका के बाद अब कनाडा पहुंचे हैं। कनाडा के टोरंटो पहुंचे भागवत ने ‘हिंदू विश्व बंधु-एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम को संबोधित किया।

भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सदियों पुरानी अवधारणा पर जोर

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु–एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम में भारत की सभ्यतागत सोच और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सदियों पुरानी अवधारणा पर जोर दिया। भारत को सुपरपावर कहा जा सकता है, लेकिन भारत कभी महाशक्ति बनने के लिए दुनिया में नहीं निकला। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया की सेवा की और अपने चरित्र के कारण ‘विश्वगुरु’ बना। आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा कि खुले विचारों वाले और ज्ञान से संपन्न लोग ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को स्वीकार करते हैं, जिसका अर्थ है कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है।

हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है-भागवत

भागवत ने कहा कि दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है। दुनिया की सेवा से भारत को पहचान मिली। जब भी दुनिया में कहीं भारत से मदद मांगी गई, भारत ने कभी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर मदद के लिए हाथ बढ़ाना भारत की परंपरा और उसके ‘डीएनए’ का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण यह कहा जाता है कि ‘अगर हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है।’

भागवत ने बताई हिंदू सोच से जुड़ी फिलॉसफी

संघ संचालक ने कहा, हमारे पूर्वजों ने मैक्सिको से साइबेरिया तक यात्रा की लेकिन उन्होंने किसी देश पर कब्जा नहीं किया। उन्होंने ज्ञान, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद और सभ्यता के मूल्य सिखाए और दुनिया का दिल जीता। भागवत ने कहा कि हिंदू शब्द को किसी खास भाषा, पूजा के तरीके या जीवनशैली तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंदू सोच से जुड़ी फिलॉसफी विविधता को अपनाने और छिपी हुई एकता को पहचानने पर आधारित है। हिंदू सभी का सम्मान करते हैं और सभी को दिल से अपनाते हैं।

भारत ने सबको शरण दिया

मोहन भागवत ने कहा कि मुसलमानों, ईसाइयों, यहूदियों और पारसियों को ऐतिहासिक रूप से भारत में बिना किसी उत्पीड़न के डर के पनाह मिली है। दुनिया में कहीं भी अगर किसी पर जुल्म हुआ तो उसे भारत में ही जगह मिली।