बीजेपी ने अमित मालवीय को IT सेल से क्यों हटाया, क्या जेन-ज़ी प्रोटेस्ट का है असर?

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बारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नई टीम का एलान किया। इस टीम में बहुत भारी फेरबदल किया गया है। 65 लोगों की बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 53 नए चेहरों को शामिल किया है। लेकिन, सबसे ज्यादा चर्चा है तो बीजेपी आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय की छुट्टी का।

11 सालों तक संभाली बीजेपी आईटी सेल की जिम्मेदारी

बीजेपी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का एलान करते हुए पार्टी के आईटी और सोशल मीडिया विभाग में बड़ा बदलाव किया है। करीब 11 साल तक इस ज़िम्मेदारी को संभालने वाले अमित मालवीय को अब इस पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह छत्तीसगढ़ से आने वाले दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। बीजेपी ने अमित मालवीय को हटाने की कोई वजह सार्वजनिक तौर पर नहीं बताई है। पार्टी की ओर से इसे संगठन में बदलाव के तौर पर ही पेश किया गया है। हालांकि, सवाल करने वाले तो सवाल करेंगे ही।

क्या जेन-ज़ी प्रोटेस्ट का असर पड़ा?

मालवीय को हटाए जाने की टाइमिंग पर खास ध्यान दिया जा रहा है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब हाल में हुए छात्र और युवा प्रदर्शनों में सोशल मीडिया की भूमिका काफी अहम रही। जानकारों की माने तो हाल ही में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान बीजेपी युवाओं से जुड़ने में नाकाम रही। बीजेपी के इस बदलाव को हालिया युवा प्रदर्शनों के बाद पार्टी की डिजिटल रणनीति में बदलाव से जोड़कर देखा है।

कभी सोशल मीडिया पर थी बीजेपी की पकड़

जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में हुए स्टूडेंट और जेन जी प्रोटेस्ट के दौरान सोशल मीडिया मुख्य रूप से प्रदर्शनकारियों के लिए एकजुट होने का बड़ा माध्यम बन गया। उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल रैप, गानों और वीडियो के जरिए पीएम मोदी और उनकी सरकार का मजाक उड़ाने के लिए किया। दिलचस्प बात यह है कि इन्हीं प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बीजेपी लंबे समय से अपने समर्थकों तक पहुंचने और अपने राजनीतिक संदेश को आकार देने के लिए करती रही है। लेकिन इस बार बीजेपी से चूक हो गई। जिसकी बहुत बड़ी कीमत धर्मेद्र प्रधान का इस्तीफा माना जा सकता है।

कहां चूक गई बीजेपी?

सक्रॉल के एक लेख के मुताबिक बीजेपी ने पिछले डेढ़ दशक में एक्स (पहले ट्विटर), फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे टैक्स्ट-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म्स पर जिस तरह का मज़बूत डिजिटल नेटवर्क बनाया था, वही रणनीति इंस्टाग्राम और खासकर रील्स की दुनिया में उतना असर नहीं छोड़ पाई। लेख के मुताबिक जेन-ज़ी का सोशल मीडिया इस्तेमाल और राजनीतिक संवाद करने का तरीका पुरानी पीढ़ियों से काफी अलग है। लेख कहता है कि जेन-ज़ी का का मुख्य प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम है, जबकि एक्स, और फ़ेसबुक को युवा अपेक्षाकृत उम्रदराज़ लोगों के प्लेटफॉर्म के तौर पर देखते हैं। जेन-ज़ी आंदोलन में इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका काफी अहम रही थी।

जेन ज़ी आंदोलन से सीख

जानकारों का मानना है कि अमित मालवीय को हटाया जाना सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला नहीं है, बल्कि यह बीजेपी की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। सीजेपी के आंदोलन से सीख लेते हुए बीजेपी युवाओं को साधने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया की रणनीति बदल रही है। जेन ज़ी आंदोलन से सीख लेकर नए प्लेटफॉर्म और नए चेहरों पर फोकस कर रही है।

मिशन 2027 के लिए बीजेपी ने चला दांव, तीन राज्यों के प्रभारियों का एलान, विनोद तावड़े को यूपी की कमान

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भारतीय जनता पार्टी का चुनावी मिशन मोड में आ गई है। भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए तीन राज्यों में अपने प्रभारी नियुक्त किए हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के लिए नए राज्य प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं।

विनोद तावड़े यूपी के प्रभारी नियुक्त

बीजेपी की तरफ से जारी सूची के मुताबिक विनोद तावड़े को यूपी का प्रभारी नियुक्त किया गया है जबकि जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। पार्टी महासचिव और राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की कमान संभालेंगे। महाराष्ट्र राजनीति के दिग्गज नेता विनोद तावड़े माहिर रणनीतिकार माने जाते हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए सबसे अहम राज्यों में से एक उत्तर प्रदेश की कमान तावड़े के हाथों में दी गई है।

2027 चुनाव के लिए तावड़े की नियुक्ति काफी अहम

लोकसभा में सबसे ज्यादा सीटें होने के कारण यहां पार्टी का प्रदर्शन राष्ट्रीय राजनीति पर भी सीधा असर डालता है। विनोद तावड़े के सामने राज्य संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने की चुनौती होगी। उन्हें प्रदेश में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय की अहम जिम्मेदारी निभानी होगी। हालांकि, उनका ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है। विनोद तावड़े बिहार में अपना लोहा मनवा चुके हैं। 2027 में होने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए उनकी यह नियुक्ति काफी अहम हो जाती है।

सतीश पूनिया को पंजाब की कमान

पंजाब में भी अगले साल विधानसभा चुनाव है। पंजाब में भाजपा अपनी स्थिति मजबूत करने के इरादे से ही सतीश पूनिया पर अपना भरोसा जताया है। बीजेपी ने राजस्थान के सीनियर नेता सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया है। सतीश पूनिया के सियासी अनुभव का इस्तेमाल पार्टी पंजाब में संगठन को मजबूत करने के लिए कर सकती है। उनके सामने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, संगठन का विस्तार करने और राज्य में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने की चुनौती होगी।

तरुण चुघ को गुजरात का प्रभार

गुजरात में भी पंजाब और यूपी की तरह अगले साल चुनाव है। बीजेपी ने तरुण चुघ को गुजरात का नया प्रभारी बनाया है। गुजरात लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा है। बीजेपी के गढ़ माने जाने वाले गुजरात राज्य का प्रभारी बनाकर पार्टी ने उन पर बड़ा संगठनात्मक भरोसा जताया है। ऐसे में पार्टी संगठन को और मजबूत बनाए रखना और सरकार तथा संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना प्रभारी के लिए अहम जिम्मेदारी होगी।

एक दिन पहले हुआ नितिन नवीन की नई टीम का एलान

इससे पहले भाजपा अध्यक्ष ने सोमवार को पार्टी के नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों के नामों का एलान किया था। पार्टी की ओर से जारी सूची के मुताबिक, नई टीम में कई वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी गई। नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू हुईं। नई टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया समेत 13 नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। वहीं, स्मृति ईरानी और विनोद तावड़े को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम का ऐलान, स्मृति ईरानी बनीं महासचिव

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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम का ऐलान कर दिया गया है। नई टीम में 13 उपाध्यक्ष और 8 महासचिव हैं। जिसमें अनुभवी नेताओं और युवा चेहरों का मिश्रण है। वसुंधरा राजे, राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। एक बड़ी बात यह है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की पार्टी के मुख्य संगठनात्मक ढांचे में वापसी हुई है।

वसुंधरा राजे समेत 13 नेता बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

भाजपा की ओर से जारी सूची के अनुसार, वसुंधरा राजे सिंधिया, तीरथ सिंह रावत, राम माधव, बैजयंत जय पांडा, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी, डॉ. भारती प्रवीण पवार, सरदार मनप्रीत सिंह बादल, लाल सिंह आर्य, प्रो. एम. नागराजा, प्रो. तारिक मंसूर और डॉ. मधुचंद्र कर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। इस सूची में अलग-अलग राज्यों के नेताओं को जगह दी गई है, जिससे संगठन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का भी ध्यान रखा गया है।

महिला नेताओं की भागीदारी बढ़ी

नई राष्ट्रीय टीम में महिला नेताओं की भी अच्छी भागीदारी दिखाई देती है। नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम में 12 महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई है। इनमें वसुंधरा राजे, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन दोशी, डॉ. भारती पवार और डॉ. मधुचंद्र कर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं स्मृति ईरानी, कविता पाटीदार, फांग्नोन कोन्यक और संगीता यादव राष्ट्रीय मंत्री बनी हैं। इसके अलावा रूप कुमारी चौधरी को महिला मोर्चा अध्यक्ष और प्रीति गांधी को सोशल मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी मिली है। सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व उत्तर प्रदेश की 3 महिलाओं का है, जबकि महाराष्ट्र की 2 और बाकी राज्यों की 1-1 महिला हैं।

नितिन नवीन ने संगठन के सभी पदाधिकारियों को दी बधाई

बीजेपी की नई टीम का ऐलान करने के तुरंत बाद नितिन नवीन ने संगठन के सभी पदाधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “अनुभव और ऊर्जा से समृद्ध यह टीम आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संगठन को नई गति प्रदान करेगी। मुझे पूर्ण विश्वास है कि टीम के सभी सदस्य, कार्यकर्ता भाव से संगठन को और अधिक सशक्त बनाते हुए ‘विकसित भारत’ के संकल्प और राष्ट्रसेवा के ध्येय को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। ”

भाजपा के आईटे सेल हेड अमित मालवीय को हटा दिया गया है। उनकी जगह दीपक महस्के को नया आईटी सेल हेड बनाया गया है।

पीएम मोदी के खिलाफ राहुल के बयान पर भड़की भाजपा, निशिकांत दुबे ने इंदिरा गांधी की तस्वीर शेयर कर पूछा सवाल

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बीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। साथ ही उन पर ‘अभद्र और अशोभनीय’ भाषा का इस्तेमाल करने व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा को कम करने का आरोप लगाया।

पीएम मोदी के विदेशी नेताओं को गले लगाने पर राहुल का बयान

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने रचनात्मक कांग्रेस सम्मेलन में विदेशी नेताओं को गले लगाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की। उन्होंने दावा किया कि यह नीति सिर्फ नेताओं को गले लगाने तक ही सीमित है। इसी दौरान कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने मेलोनी का जिक्र किया तो राहुल गांधी हंस पड़े। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बीजेपी-आरएसएस को 'जोकरों का झुंड' भी कहा, जिन्हें भारत की कोई समझ नहीं है।

बांसुरी स्वराज ने बताया-एक फेल स्टैंड-अप कॉमेडियन

बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'राहुल गांधी ने जिस तरह की असभ्य, भद्दी और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं, उससे वे विपक्ष के नेता कम और एक फेल स्टैंड-अप कॉमेडियन ज्यादा लग रहे थे। वे हल्की और छिछोरी बातें कर रहे थे।'

इंदिरा गांधी के क्यूबा यात्रा की तस्वीर पर उठाया सवाल

वहीं, बीजेपी के झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर क्यूबा यात्रा के दौरान इंदिरा गांधी का एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में इंदिरा गांधी से क्यूबा के राष्ट्रपति फिडेल कास्त्रो गले मिल रहे हैं। निशिकांत दुबे ने इस वीडियो-फोटो को शेयर करते हुए पूछा कि राहुल गांधी आप बताएं इसे गले पड़ने को जठराग्नि कहते हैं कि कामाग्नि?

राहुल गांधी को बड़े होने की नसीहत

वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राहुल गांधी को बड़े होने की नसीहत दी। जोशी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "राहुल गांधी, आप कब बड़े होंगे। भारत को चलाने के लिए परिपक्व नेतृत्व की जरूरत होती है न कि नौसिखिया ड्रामेबाजी की। लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को 'जोकर और मसखरे' कहना साबित करता है कि आप अपनी समझ से बाहर की बातें कर रहे हैं।

रांची में 19वें दिन भी डटे छात्र, आधी रात को स्टेडियम पहुंचा पुलिस-प्रशासन, बढ़ी हलचल

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झारखंड की राजधानी रांची में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा धांधली को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। छात्र लगातार 19वें दिन भी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे हुए हैं। इस बीच मंगलवार की देर रात अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को लेकर तनाव की स्थिति बन गई। एक तरफ प्रशासन रात के अंधेरे में प्रदर्शनकारी छात्रों के पास पहुंचा तो दूसरी तरफ कई भाजपा नेता भी धरना स्थल पर पहुंच गए।

क्या अभ्यर्थियों के नाम और पते दर्ज किए गए?

बताया जा रहा है कि मंगलवार देर रात करीब एक बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरनास्थल पर अचानक रांची के उपायुक्त (डीसी) मंजूनाथ भजंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राकेश रंजन पहुंचे। छात्रों का आरोप था कि देर रात रांची पुलिस ने स्टेडियम पहुंचकर अभ्यर्थियों के नाम और पते दर्ज किए, हालांकि कोतवाली पुलिस ने नाम-पता दर्ज करने की बात से इनकार किया है।

प्रशासन ने मांगा ठोस साक्ष्य और आधार

देर रात स्टेडियम पहुंचे डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने धरना दे रहे अभ्यर्थियों से बातचीत करते हुए कहा कि अगर वे जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द कराना चाहते हैं, तो इसके लिए उन्हें प्रशासन के सामने ठोस आधार और साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। उन्होंने छात्रों को अपने वकीलों के साथ आकर प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने का सुझाव दिया।

भाजपा के प्रतिनिधि भी पहुंचे धरनास्थल

शीर्ष अधिकारियों के देर रात पहुंचने से वहां अफरातफरी मच गई। प्रशासनिक अधिकारियों के अचानक धरनास्थल पहुंचने की खबर मिलते ही विपक्षी दल भाजपा के प्रतिनिधि भी वहां सक्रिय हो गए। अधिकारियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही भाजपा के पूर्व मंत्री अमर बाउरी, धनबाद विधायक राज सिन्हा और पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही सहित कई नेता छात्रों के समर्थन में धरनास्थल पहुंचे।

भाजपा का पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने कहा कि छात्रों के समर्थन में सूचना मिलते ही वे धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी का यह आंदोलन अब केवल झारखंड का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश से जुड़ा विषय बन गया है। उनके मुताबिक बड़ी संख्या में युवाओं की उम्मीदें और भावनाएं इस प्रदर्शन से जुड़ी हैं। उन्होंने प्रशासन से तय सीमाओं में रहकर कार्रवाई करने की अपील की और आरोप लगाया कि अंधेरे में छात्रों को डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा छात्रों के साथ खड़े हैं।

देवेंद्रनाथ महतो अस्पताल में भर्ती

10 अगस्त को विधानसभा घेराव मार्च में शामिल होने के बाद देवेंद्रनाथ महतो की तबीयत बिगड़ गई थी। जिसके बाद वह रांची के सदर अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी भूख हड़ताल का 11वां दिन बताया जा रहा है। इसी बीच छात्रों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मौन मार्च भी निकाला।

देहरादून में बीजेपी नेता की हत्या के बाद बवाल, भीड़ ने आरोपी के घर में लगाई आग, इलाके में तनाव

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उत्तराखंड के देहरादून बीजेपी के एक नेता की हत्या के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। विकासनगर क्षेत्र के बैरागीवाला में हुई घटना से आक्रोशित लोगों की भीड़ ने कथित तौर पर आरोपी के घर को आग के हवाले कर दिया, जिसके बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया है।

भीड़ ने आरोपी के घर में लगाई आग

देर रात भाजपा के ओबीसी मोर्चा के मीडिया प्रभारी विनोद की पीट कर हत्या के बाद गांव में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। आरोपी के घर को जेसीबी से तोड़ने की मांग करते हुए बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता और स्थानीय लोग गांव में एकत्र हो गए। भीड़ ने आरोपी के घर में आग लगा दी है।

क्या है मामला

जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात सहसपुर में पुरानी रंजिश के चलते पूर्व प्रधान इस्पाक के भतीजे और अन्य लोगों ने मिलकर विनोद उसके भाई अशोक व राजेश पर हथियारों से हमला कर दिया था। विनोद और उसके परिवार ने पूर्व प्रधान इस्पाक के कार्यकाल की सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत कई जानकारी मांगी थी। उन्होंने प्रधान के कार्यकाल में ग्राम समाज की भूमि और अन्य मामलों में शिकायत भी दर्ज करवाई थी।

सरकारी ट्यूबवेल के पानी को लेकर बढ़ा विवाद

इससे दोनों पक्षों में रंजिश पैदा हो गई थी। दोनों परिवारों में अक्सर झगड़े होते रहते थे। शनिवार को विनोद और उनके भाई सरकारी ट्यूबवेल से अपने खेत में पानी डाल रहे थे। बगल का खेत पूर्व प्रधान इस्पाक के भतीजे इम्तियाज का था। इम्तियाज के आपत्ति जताने पर दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया। इस दौरान अमन, यूनुस, अनीस और रज्जाक आदि भी मौके पर आ गए। फिर दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। आरोप है कि इम्तियाज और उसके साथियों ने विनोद, अशोक और राजेश पर भारी और धारदार हथियारों से हमला बोल दिया। रज्जाक ने विनोद के सिर पर हथौड़े से तीन वार किए। अन्य दोनों भाइयों को भी जमकर पीटा। घायल अवस्था में तीनों भाइयों को हरबर्टपुर स्थित लेहमन अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में उपचार के दौरान विनोद की मौत हो गई।

बंगाल में होगा महाराष्ट्र जैसा ‘खेला’! उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसा ना हो जाए ममता बनर्जी का हाल

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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार और सत्ता हाथ से जाने के बाद ममता बनर्जी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। पार्टी के अंदर काफी उथल-पुथल मची हुई है। कुछ नेता खुले तौर पर बगावत पर उतर आए हैं। हालात ऐसे बनते नजर आ रहे हैं, जैसे तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंट जाएगी।

बागी नेताओं की सीक्रेट मीटिंग

विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष, बागी नेताओं की सक्रियता और कुछ विधायकों की सीक्रेट बैठकों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं ने हाल के दिनों में कोलकाता के विधायक हॉस्टल में कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में टीएमसी के भविष्य, संगठनात्मक बदलाव और कथित तौर पर एक नए राजनीतिक विकल्प पर चर्चा होने की बात कही जा रही है।

50 से ज़्यादा विधायकों की बैठक

टीएमसी 80 विधायकों में से 50 से ज़्यादा विधायकों ने होटल गेटवे में बागी और पार्टी से निकाले गए नेताओं ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा से मुलाकात की। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा दोनों वे विधायक हैं जिन पर ममता बनर्जी ने कार्रवाई की है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है।

टीएमसी की मीटिंग में पहुंचे सिर्फ 20 विधायक

वहीं, दूसरी तरफ रविवार को ममता बनर्जी की ओर से बुलाई गई बैठक में करीब 60 विधायक नदारद रहे। रविवार को, पीशी-भाईपो की बुलाई गई एक बैठक में केवल 20 विधायक ही शामिल हुए। विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 TMC पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। कई नेता BJP के साथ बातचीत कर रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी को लेकर नाराजगी

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद से TMC के अंदर नाराजगी और फूट दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि नेताओं का गुस्सा पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर है। चुनाव के बाद हुई समीक्षा बैठक में कम से कम तीन चुने हुए विधायकों ने खुलकर पार्टी नेतृत्व का विरोध किया। उन्होंने चुनाव में मिली करारी हार के लिए अभिषेक बनर्जी की पसंद को जबरदस्ती थोपे जाने को जिम्मेदार ठहराया।

खुलकर उठे विरोध के स्वर

कुछ नेता खुले तौर पर पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं कि 15 साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी जमीनी हकीकत से कट गई है। सिंडिकेट और 'कट-मनी' (कमीशन) की आदी हो गई है, और हिंसक रूप से अहंकारी हो गई है। वे जवाबदेही और आत्म-मंथन की मांग कर रहे हैं, जिसका ममता बनर्जी ने जिद के साथ विरोध किया है।

ऋतब्रत और संदीपन ने ममता के खिलाफ खोला मोर्चा

दावा किया जा रहा है कि ऋतब्रत और संदीपन के नेतृत्व में एक नई तृणमूल बन सकती है। पार्टी से निकाले जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि वह टीएमसी में कथित भ्रष्टाचार के बारे में सरकार को पत्र लिखेंगे। ऋतब्रत ने कहा कि उनके पास कई ऐसी जानकारियां हैं जिन्हें वह सार्वजनिक कर सकते हैं।

बीजेपी ने अमित मालवीय को IT सेल से क्यों हटाया, क्या जेन-ज़ी प्रोटेस्ट का है असर?

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बारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नई टीम का एलान किया। इस टीम में बहुत भारी फेरबदल किया गया है। 65 लोगों की बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 53 नए चेहरों को शामिल किया है। लेकिन, सबसे ज्यादा चर्चा है तो बीजेपी आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय की छुट्टी का।

11 सालों तक संभाली बीजेपी आईटी सेल की जिम्मेदारी

बीजेपी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का एलान करते हुए पार्टी के आईटी और सोशल मीडिया विभाग में बड़ा बदलाव किया है। करीब 11 साल तक इस ज़िम्मेदारी को संभालने वाले अमित मालवीय को अब इस पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह छत्तीसगढ़ से आने वाले दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। बीजेपी ने अमित मालवीय को हटाने की कोई वजह सार्वजनिक तौर पर नहीं बताई है। पार्टी की ओर से इसे संगठन में बदलाव के तौर पर ही पेश किया गया है। हालांकि, सवाल करने वाले तो सवाल करेंगे ही।

क्या जेन-ज़ी प्रोटेस्ट का असर पड़ा?

मालवीय को हटाए जाने की टाइमिंग पर खास ध्यान दिया जा रहा है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब हाल में हुए छात्र और युवा प्रदर्शनों में सोशल मीडिया की भूमिका काफी अहम रही। जानकारों की माने तो हाल ही में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान बीजेपी युवाओं से जुड़ने में नाकाम रही। बीजेपी के इस बदलाव को हालिया युवा प्रदर्शनों के बाद पार्टी की डिजिटल रणनीति में बदलाव से जोड़कर देखा है।

कभी सोशल मीडिया पर थी बीजेपी की पकड़

जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में हुए स्टूडेंट और जेन जी प्रोटेस्ट के दौरान सोशल मीडिया मुख्य रूप से प्रदर्शनकारियों के लिए एकजुट होने का बड़ा माध्यम बन गया। उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल रैप, गानों और वीडियो के जरिए पीएम मोदी और उनकी सरकार का मजाक उड़ाने के लिए किया। दिलचस्प बात यह है कि इन्हीं प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बीजेपी लंबे समय से अपने समर्थकों तक पहुंचने और अपने राजनीतिक संदेश को आकार देने के लिए करती रही है। लेकिन इस बार बीजेपी से चूक हो गई। जिसकी बहुत बड़ी कीमत धर्मेद्र प्रधान का इस्तीफा माना जा सकता है।

कहां चूक गई बीजेपी?

सक्रॉल के एक लेख के मुताबिक बीजेपी ने पिछले डेढ़ दशक में एक्स (पहले ट्विटर), फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे टैक्स्ट-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म्स पर जिस तरह का मज़बूत डिजिटल नेटवर्क बनाया था, वही रणनीति इंस्टाग्राम और खासकर रील्स की दुनिया में उतना असर नहीं छोड़ पाई। लेख के मुताबिक जेन-ज़ी का सोशल मीडिया इस्तेमाल और राजनीतिक संवाद करने का तरीका पुरानी पीढ़ियों से काफी अलग है। लेख कहता है कि जेन-ज़ी का का मुख्य प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम है, जबकि एक्स, और फ़ेसबुक को युवा अपेक्षाकृत उम्रदराज़ लोगों के प्लेटफॉर्म के तौर पर देखते हैं। जेन-ज़ी आंदोलन में इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका काफी अहम रही थी।

जेन ज़ी आंदोलन से सीख

जानकारों का मानना है कि अमित मालवीय को हटाया जाना सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला नहीं है, बल्कि यह बीजेपी की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। सीजेपी के आंदोलन से सीख लेते हुए बीजेपी युवाओं को साधने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया की रणनीति बदल रही है। जेन ज़ी आंदोलन से सीख लेकर नए प्लेटफॉर्म और नए चेहरों पर फोकस कर रही है।

मिशन 2027 के लिए बीजेपी ने चला दांव, तीन राज्यों के प्रभारियों का एलान, विनोद तावड़े को यूपी की कमान

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भारतीय जनता पार्टी का चुनावी मिशन मोड में आ गई है। भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए तीन राज्यों में अपने प्रभारी नियुक्त किए हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के लिए नए राज्य प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं।

विनोद तावड़े यूपी के प्रभारी नियुक्त

बीजेपी की तरफ से जारी सूची के मुताबिक विनोद तावड़े को यूपी का प्रभारी नियुक्त किया गया है जबकि जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। पार्टी महासचिव और राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की कमान संभालेंगे। महाराष्ट्र राजनीति के दिग्गज नेता विनोद तावड़े माहिर रणनीतिकार माने जाते हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए सबसे अहम राज्यों में से एक उत्तर प्रदेश की कमान तावड़े के हाथों में दी गई है।

2027 चुनाव के लिए तावड़े की नियुक्ति काफी अहम

लोकसभा में सबसे ज्यादा सीटें होने के कारण यहां पार्टी का प्रदर्शन राष्ट्रीय राजनीति पर भी सीधा असर डालता है। विनोद तावड़े के सामने राज्य संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने की चुनौती होगी। उन्हें प्रदेश में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय की अहम जिम्मेदारी निभानी होगी। हालांकि, उनका ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है। विनोद तावड़े बिहार में अपना लोहा मनवा चुके हैं। 2027 में होने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए उनकी यह नियुक्ति काफी अहम हो जाती है।

सतीश पूनिया को पंजाब की कमान

पंजाब में भी अगले साल विधानसभा चुनाव है। पंजाब में भाजपा अपनी स्थिति मजबूत करने के इरादे से ही सतीश पूनिया पर अपना भरोसा जताया है। बीजेपी ने राजस्थान के सीनियर नेता सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया है। सतीश पूनिया के सियासी अनुभव का इस्तेमाल पार्टी पंजाब में संगठन को मजबूत करने के लिए कर सकती है। उनके सामने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, संगठन का विस्तार करने और राज्य में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने की चुनौती होगी।

तरुण चुघ को गुजरात का प्रभार

गुजरात में भी पंजाब और यूपी की तरह अगले साल चुनाव है। बीजेपी ने तरुण चुघ को गुजरात का नया प्रभारी बनाया है। गुजरात लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा है। बीजेपी के गढ़ माने जाने वाले गुजरात राज्य का प्रभारी बनाकर पार्टी ने उन पर बड़ा संगठनात्मक भरोसा जताया है। ऐसे में पार्टी संगठन को और मजबूत बनाए रखना और सरकार तथा संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना प्रभारी के लिए अहम जिम्मेदारी होगी।

एक दिन पहले हुआ नितिन नवीन की नई टीम का एलान

इससे पहले भाजपा अध्यक्ष ने सोमवार को पार्टी के नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों के नामों का एलान किया था। पार्टी की ओर से जारी सूची के मुताबिक, नई टीम में कई वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी गई। नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू हुईं। नई टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया समेत 13 नेताओं को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। वहीं, स्मृति ईरानी और विनोद तावड़े को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम का ऐलान, स्मृति ईरानी बनीं महासचिव

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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम का ऐलान कर दिया गया है। नई टीम में 13 उपाध्यक्ष और 8 महासचिव हैं। जिसमें अनुभवी नेताओं और युवा चेहरों का मिश्रण है। वसुंधरा राजे, राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। एक बड़ी बात यह है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की पार्टी के मुख्य संगठनात्मक ढांचे में वापसी हुई है।

वसुंधरा राजे समेत 13 नेता बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

भाजपा की ओर से जारी सूची के अनुसार, वसुंधरा राजे सिंधिया, तीरथ सिंह रावत, राम माधव, बैजयंत जय पांडा, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी, डॉ. भारती प्रवीण पवार, सरदार मनप्रीत सिंह बादल, लाल सिंह आर्य, प्रो. एम. नागराजा, प्रो. तारिक मंसूर और डॉ. मधुचंद्र कर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। इस सूची में अलग-अलग राज्यों के नेताओं को जगह दी गई है, जिससे संगठन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का भी ध्यान रखा गया है।

महिला नेताओं की भागीदारी बढ़ी

नई राष्ट्रीय टीम में महिला नेताओं की भी अच्छी भागीदारी दिखाई देती है। नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम में 12 महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई है। इनमें वसुंधरा राजे, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन दोशी, डॉ. भारती पवार और डॉ. मधुचंद्र कर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं स्मृति ईरानी, कविता पाटीदार, फांग्नोन कोन्यक और संगीता यादव राष्ट्रीय मंत्री बनी हैं। इसके अलावा रूप कुमारी चौधरी को महिला मोर्चा अध्यक्ष और प्रीति गांधी को सोशल मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी मिली है। सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व उत्तर प्रदेश की 3 महिलाओं का है, जबकि महाराष्ट्र की 2 और बाकी राज्यों की 1-1 महिला हैं।

नितिन नवीन ने संगठन के सभी पदाधिकारियों को दी बधाई

बीजेपी की नई टीम का ऐलान करने के तुरंत बाद नितिन नवीन ने संगठन के सभी पदाधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “अनुभव और ऊर्जा से समृद्ध यह टीम आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संगठन को नई गति प्रदान करेगी। मुझे पूर्ण विश्वास है कि टीम के सभी सदस्य, कार्यकर्ता भाव से संगठन को और अधिक सशक्त बनाते हुए ‘विकसित भारत’ के संकल्प और राष्ट्रसेवा के ध्येय को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। ”

भाजपा के आईटे सेल हेड अमित मालवीय को हटा दिया गया है। उनकी जगह दीपक महस्के को नया आईटी सेल हेड बनाया गया है।

पीएम मोदी के खिलाफ राहुल के बयान पर भड़की भाजपा, निशिकांत दुबे ने इंदिरा गांधी की तस्वीर शेयर कर पूछा सवाल

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बीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। साथ ही उन पर ‘अभद्र और अशोभनीय’ भाषा का इस्तेमाल करने व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा को कम करने का आरोप लगाया।

पीएम मोदी के विदेशी नेताओं को गले लगाने पर राहुल का बयान

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने रचनात्मक कांग्रेस सम्मेलन में विदेशी नेताओं को गले लगाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की। उन्होंने दावा किया कि यह नीति सिर्फ नेताओं को गले लगाने तक ही सीमित है। इसी दौरान कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने मेलोनी का जिक्र किया तो राहुल गांधी हंस पड़े। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बीजेपी-आरएसएस को 'जोकरों का झुंड' भी कहा, जिन्हें भारत की कोई समझ नहीं है।

बांसुरी स्वराज ने बताया-एक फेल स्टैंड-अप कॉमेडियन

बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'राहुल गांधी ने जिस तरह की असभ्य, भद्दी और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं, उससे वे विपक्ष के नेता कम और एक फेल स्टैंड-अप कॉमेडियन ज्यादा लग रहे थे। वे हल्की और छिछोरी बातें कर रहे थे।'

इंदिरा गांधी के क्यूबा यात्रा की तस्वीर पर उठाया सवाल

वहीं, बीजेपी के झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर क्यूबा यात्रा के दौरान इंदिरा गांधी का एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में इंदिरा गांधी से क्यूबा के राष्ट्रपति फिडेल कास्त्रो गले मिल रहे हैं। निशिकांत दुबे ने इस वीडियो-फोटो को शेयर करते हुए पूछा कि राहुल गांधी आप बताएं इसे गले पड़ने को जठराग्नि कहते हैं कि कामाग्नि?

राहुल गांधी को बड़े होने की नसीहत

वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राहुल गांधी को बड़े होने की नसीहत दी। जोशी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "राहुल गांधी, आप कब बड़े होंगे। भारत को चलाने के लिए परिपक्व नेतृत्व की जरूरत होती है न कि नौसिखिया ड्रामेबाजी की। लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को 'जोकर और मसखरे' कहना साबित करता है कि आप अपनी समझ से बाहर की बातें कर रहे हैं।

रांची में 19वें दिन भी डटे छात्र, आधी रात को स्टेडियम पहुंचा पुलिस-प्रशासन, बढ़ी हलचल

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झारखंड की राजधानी रांची में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा धांधली को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। छात्र लगातार 19वें दिन भी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे हुए हैं। इस बीच मंगलवार की देर रात अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को लेकर तनाव की स्थिति बन गई। एक तरफ प्रशासन रात के अंधेरे में प्रदर्शनकारी छात्रों के पास पहुंचा तो दूसरी तरफ कई भाजपा नेता भी धरना स्थल पर पहुंच गए।

क्या अभ्यर्थियों के नाम और पते दर्ज किए गए?

बताया जा रहा है कि मंगलवार देर रात करीब एक बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरनास्थल पर अचानक रांची के उपायुक्त (डीसी) मंजूनाथ भजंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राकेश रंजन पहुंचे। छात्रों का आरोप था कि देर रात रांची पुलिस ने स्टेडियम पहुंचकर अभ्यर्थियों के नाम और पते दर्ज किए, हालांकि कोतवाली पुलिस ने नाम-पता दर्ज करने की बात से इनकार किया है।

प्रशासन ने मांगा ठोस साक्ष्य और आधार

देर रात स्टेडियम पहुंचे डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने धरना दे रहे अभ्यर्थियों से बातचीत करते हुए कहा कि अगर वे जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द कराना चाहते हैं, तो इसके लिए उन्हें प्रशासन के सामने ठोस आधार और साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। उन्होंने छात्रों को अपने वकीलों के साथ आकर प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने का सुझाव दिया।

भाजपा के प्रतिनिधि भी पहुंचे धरनास्थल

शीर्ष अधिकारियों के देर रात पहुंचने से वहां अफरातफरी मच गई। प्रशासनिक अधिकारियों के अचानक धरनास्थल पहुंचने की खबर मिलते ही विपक्षी दल भाजपा के प्रतिनिधि भी वहां सक्रिय हो गए। अधिकारियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही भाजपा के पूर्व मंत्री अमर बाउरी, धनबाद विधायक राज सिन्हा और पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही सहित कई नेता छात्रों के समर्थन में धरनास्थल पहुंचे।

भाजपा का पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने कहा कि छात्रों के समर्थन में सूचना मिलते ही वे धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी का यह आंदोलन अब केवल झारखंड का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश से जुड़ा विषय बन गया है। उनके मुताबिक बड़ी संख्या में युवाओं की उम्मीदें और भावनाएं इस प्रदर्शन से जुड़ी हैं। उन्होंने प्रशासन से तय सीमाओं में रहकर कार्रवाई करने की अपील की और आरोप लगाया कि अंधेरे में छात्रों को डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा छात्रों के साथ खड़े हैं।

देवेंद्रनाथ महतो अस्पताल में भर्ती

10 अगस्त को विधानसभा घेराव मार्च में शामिल होने के बाद देवेंद्रनाथ महतो की तबीयत बिगड़ गई थी। जिसके बाद वह रांची के सदर अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी भूख हड़ताल का 11वां दिन बताया जा रहा है। इसी बीच छात्रों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मौन मार्च भी निकाला।

देहरादून में बीजेपी नेता की हत्या के बाद बवाल, भीड़ ने आरोपी के घर में लगाई आग, इलाके में तनाव

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उत्तराखंड के देहरादून बीजेपी के एक नेता की हत्या के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। विकासनगर क्षेत्र के बैरागीवाला में हुई घटना से आक्रोशित लोगों की भीड़ ने कथित तौर पर आरोपी के घर को आग के हवाले कर दिया, जिसके बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया है।

भीड़ ने आरोपी के घर में लगाई आग

देर रात भाजपा के ओबीसी मोर्चा के मीडिया प्रभारी विनोद की पीट कर हत्या के बाद गांव में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। आरोपी के घर को जेसीबी से तोड़ने की मांग करते हुए बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता और स्थानीय लोग गांव में एकत्र हो गए। भीड़ ने आरोपी के घर में आग लगा दी है।

क्या है मामला

जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात सहसपुर में पुरानी रंजिश के चलते पूर्व प्रधान इस्पाक के भतीजे और अन्य लोगों ने मिलकर विनोद उसके भाई अशोक व राजेश पर हथियारों से हमला कर दिया था। विनोद और उसके परिवार ने पूर्व प्रधान इस्पाक के कार्यकाल की सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत कई जानकारी मांगी थी। उन्होंने प्रधान के कार्यकाल में ग्राम समाज की भूमि और अन्य मामलों में शिकायत भी दर्ज करवाई थी।

सरकारी ट्यूबवेल के पानी को लेकर बढ़ा विवाद

इससे दोनों पक्षों में रंजिश पैदा हो गई थी। दोनों परिवारों में अक्सर झगड़े होते रहते थे। शनिवार को विनोद और उनके भाई सरकारी ट्यूबवेल से अपने खेत में पानी डाल रहे थे। बगल का खेत पूर्व प्रधान इस्पाक के भतीजे इम्तियाज का था। इम्तियाज के आपत्ति जताने पर दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया। इस दौरान अमन, यूनुस, अनीस और रज्जाक आदि भी मौके पर आ गए। फिर दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। आरोप है कि इम्तियाज और उसके साथियों ने विनोद, अशोक और राजेश पर भारी और धारदार हथियारों से हमला बोल दिया। रज्जाक ने विनोद के सिर पर हथौड़े से तीन वार किए। अन्य दोनों भाइयों को भी जमकर पीटा। घायल अवस्था में तीनों भाइयों को हरबर्टपुर स्थित लेहमन अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में उपचार के दौरान विनोद की मौत हो गई।

बंगाल में होगा महाराष्ट्र जैसा ‘खेला’! उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसा ना हो जाए ममता बनर्जी का हाल

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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार और सत्ता हाथ से जाने के बाद ममता बनर्जी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। पार्टी के अंदर काफी उथल-पुथल मची हुई है। कुछ नेता खुले तौर पर बगावत पर उतर आए हैं। हालात ऐसे बनते नजर आ रहे हैं, जैसे तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंट जाएगी।

बागी नेताओं की सीक्रेट मीटिंग

विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष, बागी नेताओं की सक्रियता और कुछ विधायकों की सीक्रेट बैठकों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं ने हाल के दिनों में कोलकाता के विधायक हॉस्टल में कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में टीएमसी के भविष्य, संगठनात्मक बदलाव और कथित तौर पर एक नए राजनीतिक विकल्प पर चर्चा होने की बात कही जा रही है।

50 से ज़्यादा विधायकों की बैठक

टीएमसी 80 विधायकों में से 50 से ज़्यादा विधायकों ने होटल गेटवे में बागी और पार्टी से निकाले गए नेताओं ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा से मुलाकात की। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा दोनों वे विधायक हैं जिन पर ममता बनर्जी ने कार्रवाई की है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है।

टीएमसी की मीटिंग में पहुंचे सिर्फ 20 विधायक

वहीं, दूसरी तरफ रविवार को ममता बनर्जी की ओर से बुलाई गई बैठक में करीब 60 विधायक नदारद रहे। रविवार को, पीशी-भाईपो की बुलाई गई एक बैठक में केवल 20 विधायक ही शामिल हुए। विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 TMC पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। कई नेता BJP के साथ बातचीत कर रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी को लेकर नाराजगी

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद से TMC के अंदर नाराजगी और फूट दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि नेताओं का गुस्सा पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर है। चुनाव के बाद हुई समीक्षा बैठक में कम से कम तीन चुने हुए विधायकों ने खुलकर पार्टी नेतृत्व का विरोध किया। उन्होंने चुनाव में मिली करारी हार के लिए अभिषेक बनर्जी की पसंद को जबरदस्ती थोपे जाने को जिम्मेदार ठहराया।

खुलकर उठे विरोध के स्वर

कुछ नेता खुले तौर पर पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं कि 15 साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी जमीनी हकीकत से कट गई है। सिंडिकेट और 'कट-मनी' (कमीशन) की आदी हो गई है, और हिंसक रूप से अहंकारी हो गई है। वे जवाबदेही और आत्म-मंथन की मांग कर रहे हैं, जिसका ममता बनर्जी ने जिद के साथ विरोध किया है।

ऋतब्रत और संदीपन ने ममता के खिलाफ खोला मोर्चा

दावा किया जा रहा है कि ऋतब्रत और संदीपन के नेतृत्व में एक नई तृणमूल बन सकती है। पार्टी से निकाले जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि वह टीएमसी में कथित भ्रष्टाचार के बारे में सरकार को पत्र लिखेंगे। ऋतब्रत ने कहा कि उनके पास कई ऐसी जानकारियां हैं जिन्हें वह सार्वजनिक कर सकते हैं।