रांची में 19वें दिन भी डटे छात्र, आधी रात को स्टेडियम पहुंचा पुलिस-प्रशासन, बढ़ी हलचल

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झारखंड की राजधानी रांची में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा धांधली को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। छात्र लगातार 19वें दिन भी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे हुए हैं। इस बीच मंगलवार की देर रात अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को लेकर तनाव की स्थिति बन गई। एक तरफ प्रशासन रात के अंधेरे में प्रदर्शनकारी छात्रों के पास पहुंचा तो दूसरी तरफ कई भाजपा नेता भी धरना स्थल पर पहुंच गए।

क्या अभ्यर्थियों के नाम और पते दर्ज किए गए?

बताया जा रहा है कि मंगलवार देर रात करीब एक बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरनास्थल पर अचानक रांची के उपायुक्त (डीसी) मंजूनाथ भजंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राकेश रंजन पहुंचे। छात्रों का आरोप था कि देर रात रांची पुलिस ने स्टेडियम पहुंचकर अभ्यर्थियों के नाम और पते दर्ज किए, हालांकि कोतवाली पुलिस ने नाम-पता दर्ज करने की बात से इनकार किया है।

प्रशासन ने मांगा ठोस साक्ष्य और आधार

देर रात स्टेडियम पहुंचे डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने धरना दे रहे अभ्यर्थियों से बातचीत करते हुए कहा कि अगर वे जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द कराना चाहते हैं, तो इसके लिए उन्हें प्रशासन के सामने ठोस आधार और साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। उन्होंने छात्रों को अपने वकीलों के साथ आकर प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने का सुझाव दिया।

भाजपा के प्रतिनिधि भी पहुंचे धरनास्थल

शीर्ष अधिकारियों के देर रात पहुंचने से वहां अफरातफरी मच गई। प्रशासनिक अधिकारियों के अचानक धरनास्थल पहुंचने की खबर मिलते ही विपक्षी दल भाजपा के प्रतिनिधि भी वहां सक्रिय हो गए। अधिकारियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही भाजपा के पूर्व मंत्री अमर बाउरी, धनबाद विधायक राज सिन्हा और पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही सहित कई नेता छात्रों के समर्थन में धरनास्थल पहुंचे।

भाजपा का पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने कहा कि छात्रों के समर्थन में सूचना मिलते ही वे धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी का यह आंदोलन अब केवल झारखंड का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश से जुड़ा विषय बन गया है। उनके मुताबिक बड़ी संख्या में युवाओं की उम्मीदें और भावनाएं इस प्रदर्शन से जुड़ी हैं। उन्होंने प्रशासन से तय सीमाओं में रहकर कार्रवाई करने की अपील की और आरोप लगाया कि अंधेरे में छात्रों को डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा छात्रों के साथ खड़े हैं।

देवेंद्रनाथ महतो अस्पताल में भर्ती

10 अगस्त को विधानसभा घेराव मार्च में शामिल होने के बाद देवेंद्रनाथ महतो की तबीयत बिगड़ गई थी। जिसके बाद वह रांची के सदर अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी भूख हड़ताल का 11वां दिन बताया जा रहा है। इसी बीच छात्रों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मौन मार्च भी निकाला।

देहरादून में बीजेपी नेता की हत्या के बाद बवाल, भीड़ ने आरोपी के घर में लगाई आग, इलाके में तनाव

#dehradunclasheruptsbetweentwogroupsafterbjpleader_murder

उत्तराखंड के देहरादून बीजेपी के एक नेता की हत्या के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। विकासनगर क्षेत्र के बैरागीवाला में हुई घटना से आक्रोशित लोगों की भीड़ ने कथित तौर पर आरोपी के घर को आग के हवाले कर दिया, जिसके बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया है।

भीड़ ने आरोपी के घर में लगाई आग

देर रात भाजपा के ओबीसी मोर्चा के मीडिया प्रभारी विनोद की पीट कर हत्या के बाद गांव में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। आरोपी के घर को जेसीबी से तोड़ने की मांग करते हुए बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता और स्थानीय लोग गांव में एकत्र हो गए। भीड़ ने आरोपी के घर में आग लगा दी है।

क्या है मामला

जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात सहसपुर में पुरानी रंजिश के चलते पूर्व प्रधान इस्पाक के भतीजे और अन्य लोगों ने मिलकर विनोद उसके भाई अशोक व राजेश पर हथियारों से हमला कर दिया था। विनोद और उसके परिवार ने पूर्व प्रधान इस्पाक के कार्यकाल की सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत कई जानकारी मांगी थी। उन्होंने प्रधान के कार्यकाल में ग्राम समाज की भूमि और अन्य मामलों में शिकायत भी दर्ज करवाई थी।

सरकारी ट्यूबवेल के पानी को लेकर बढ़ा विवाद

इससे दोनों पक्षों में रंजिश पैदा हो गई थी। दोनों परिवारों में अक्सर झगड़े होते रहते थे। शनिवार को विनोद और उनके भाई सरकारी ट्यूबवेल से अपने खेत में पानी डाल रहे थे। बगल का खेत पूर्व प्रधान इस्पाक के भतीजे इम्तियाज का था। इम्तियाज के आपत्ति जताने पर दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया। इस दौरान अमन, यूनुस, अनीस और रज्जाक आदि भी मौके पर आ गए। फिर दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। आरोप है कि इम्तियाज और उसके साथियों ने विनोद, अशोक और राजेश पर भारी और धारदार हथियारों से हमला बोल दिया। रज्जाक ने विनोद के सिर पर हथौड़े से तीन वार किए। अन्य दोनों भाइयों को भी जमकर पीटा। घायल अवस्था में तीनों भाइयों को हरबर्टपुर स्थित लेहमन अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में उपचार के दौरान विनोद की मौत हो गई।

बंगाल में होगा महाराष्ट्र जैसा ‘खेला’! उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसा ना हो जाए ममता बनर्जी का हाल

#mamatabanerjeetmccrisis50mlasmayquitparty

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार और सत्ता हाथ से जाने के बाद ममता बनर्जी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। पार्टी के अंदर काफी उथल-पुथल मची हुई है। कुछ नेता खुले तौर पर बगावत पर उतर आए हैं। हालात ऐसे बनते नजर आ रहे हैं, जैसे तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंट जाएगी।

बागी नेताओं की सीक्रेट मीटिंग

विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष, बागी नेताओं की सक्रियता और कुछ विधायकों की सीक्रेट बैठकों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं ने हाल के दिनों में कोलकाता के विधायक हॉस्टल में कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में टीएमसी के भविष्य, संगठनात्मक बदलाव और कथित तौर पर एक नए राजनीतिक विकल्प पर चर्चा होने की बात कही जा रही है।

50 से ज़्यादा विधायकों की बैठक

टीएमसी 80 विधायकों में से 50 से ज़्यादा विधायकों ने होटल गेटवे में बागी और पार्टी से निकाले गए नेताओं ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा से मुलाकात की। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा दोनों वे विधायक हैं जिन पर ममता बनर्जी ने कार्रवाई की है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है।

टीएमसी की मीटिंग में पहुंचे सिर्फ 20 विधायक

वहीं, दूसरी तरफ रविवार को ममता बनर्जी की ओर से बुलाई गई बैठक में करीब 60 विधायक नदारद रहे। रविवार को, पीशी-भाईपो की बुलाई गई एक बैठक में केवल 20 विधायक ही शामिल हुए। विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 TMC पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। कई नेता BJP के साथ बातचीत कर रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी को लेकर नाराजगी

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद से TMC के अंदर नाराजगी और फूट दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि नेताओं का गुस्सा पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर है। चुनाव के बाद हुई समीक्षा बैठक में कम से कम तीन चुने हुए विधायकों ने खुलकर पार्टी नेतृत्व का विरोध किया। उन्होंने चुनाव में मिली करारी हार के लिए अभिषेक बनर्जी की पसंद को जबरदस्ती थोपे जाने को जिम्मेदार ठहराया।

खुलकर उठे विरोध के स्वर

कुछ नेता खुले तौर पर पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं कि 15 साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी जमीनी हकीकत से कट गई है। सिंडिकेट और 'कट-मनी' (कमीशन) की आदी हो गई है, और हिंसक रूप से अहंकारी हो गई है। वे जवाबदेही और आत्म-मंथन की मांग कर रहे हैं, जिसका ममता बनर्जी ने जिद के साथ विरोध किया है।

ऋतब्रत और संदीपन ने ममता के खिलाफ खोला मोर्चा

दावा किया जा रहा है कि ऋतब्रत और संदीपन के नेतृत्व में एक नई तृणमूल बन सकती है। पार्टी से निकाले जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि वह टीएमसी में कथित भ्रष्टाचार के बारे में सरकार को पत्र लिखेंगे। ऋतब्रत ने कहा कि उनके पास कई ऐसी जानकारियां हैं जिन्हें वह सार्वजनिक कर सकते हैं।

रांची में 19वें दिन भी डटे छात्र, आधी रात को स्टेडियम पहुंचा पुलिस-प्रशासन, बढ़ी हलचल

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झारखंड की राजधानी रांची में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा धांधली को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। छात्र लगातार 19वें दिन भी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे हुए हैं। इस बीच मंगलवार की देर रात अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को लेकर तनाव की स्थिति बन गई। एक तरफ प्रशासन रात के अंधेरे में प्रदर्शनकारी छात्रों के पास पहुंचा तो दूसरी तरफ कई भाजपा नेता भी धरना स्थल पर पहुंच गए।

क्या अभ्यर्थियों के नाम और पते दर्ज किए गए?

बताया जा रहा है कि मंगलवार देर रात करीब एक बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरनास्थल पर अचानक रांची के उपायुक्त (डीसी) मंजूनाथ भजंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राकेश रंजन पहुंचे। छात्रों का आरोप था कि देर रात रांची पुलिस ने स्टेडियम पहुंचकर अभ्यर्थियों के नाम और पते दर्ज किए, हालांकि कोतवाली पुलिस ने नाम-पता दर्ज करने की बात से इनकार किया है।

प्रशासन ने मांगा ठोस साक्ष्य और आधार

देर रात स्टेडियम पहुंचे डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने धरना दे रहे अभ्यर्थियों से बातचीत करते हुए कहा कि अगर वे जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द कराना चाहते हैं, तो इसके लिए उन्हें प्रशासन के सामने ठोस आधार और साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। उन्होंने छात्रों को अपने वकीलों के साथ आकर प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने का सुझाव दिया।

भाजपा के प्रतिनिधि भी पहुंचे धरनास्थल

शीर्ष अधिकारियों के देर रात पहुंचने से वहां अफरातफरी मच गई। प्रशासनिक अधिकारियों के अचानक धरनास्थल पहुंचने की खबर मिलते ही विपक्षी दल भाजपा के प्रतिनिधि भी वहां सक्रिय हो गए। अधिकारियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही भाजपा के पूर्व मंत्री अमर बाउरी, धनबाद विधायक राज सिन्हा और पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही सहित कई नेता छात्रों के समर्थन में धरनास्थल पहुंचे।

भाजपा का पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने कहा कि छात्रों के समर्थन में सूचना मिलते ही वे धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी का यह आंदोलन अब केवल झारखंड का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश से जुड़ा विषय बन गया है। उनके मुताबिक बड़ी संख्या में युवाओं की उम्मीदें और भावनाएं इस प्रदर्शन से जुड़ी हैं। उन्होंने प्रशासन से तय सीमाओं में रहकर कार्रवाई करने की अपील की और आरोप लगाया कि अंधेरे में छात्रों को डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा छात्रों के साथ खड़े हैं।

देवेंद्रनाथ महतो अस्पताल में भर्ती

10 अगस्त को विधानसभा घेराव मार्च में शामिल होने के बाद देवेंद्रनाथ महतो की तबीयत बिगड़ गई थी। जिसके बाद वह रांची के सदर अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी भूख हड़ताल का 11वां दिन बताया जा रहा है। इसी बीच छात्रों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मौन मार्च भी निकाला।

देहरादून में बीजेपी नेता की हत्या के बाद बवाल, भीड़ ने आरोपी के घर में लगाई आग, इलाके में तनाव

#dehradunclasheruptsbetweentwogroupsafterbjpleader_murder

उत्तराखंड के देहरादून बीजेपी के एक नेता की हत्या के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। विकासनगर क्षेत्र के बैरागीवाला में हुई घटना से आक्रोशित लोगों की भीड़ ने कथित तौर पर आरोपी के घर को आग के हवाले कर दिया, जिसके बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया है।

भीड़ ने आरोपी के घर में लगाई आग

देर रात भाजपा के ओबीसी मोर्चा के मीडिया प्रभारी विनोद की पीट कर हत्या के बाद गांव में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। आरोपी के घर को जेसीबी से तोड़ने की मांग करते हुए बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता और स्थानीय लोग गांव में एकत्र हो गए। भीड़ ने आरोपी के घर में आग लगा दी है।

क्या है मामला

जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात सहसपुर में पुरानी रंजिश के चलते पूर्व प्रधान इस्पाक के भतीजे और अन्य लोगों ने मिलकर विनोद उसके भाई अशोक व राजेश पर हथियारों से हमला कर दिया था। विनोद और उसके परिवार ने पूर्व प्रधान इस्पाक के कार्यकाल की सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत कई जानकारी मांगी थी। उन्होंने प्रधान के कार्यकाल में ग्राम समाज की भूमि और अन्य मामलों में शिकायत भी दर्ज करवाई थी।

सरकारी ट्यूबवेल के पानी को लेकर बढ़ा विवाद

इससे दोनों पक्षों में रंजिश पैदा हो गई थी। दोनों परिवारों में अक्सर झगड़े होते रहते थे। शनिवार को विनोद और उनके भाई सरकारी ट्यूबवेल से अपने खेत में पानी डाल रहे थे। बगल का खेत पूर्व प्रधान इस्पाक के भतीजे इम्तियाज का था। इम्तियाज के आपत्ति जताने पर दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया। इस दौरान अमन, यूनुस, अनीस और रज्जाक आदि भी मौके पर आ गए। फिर दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। आरोप है कि इम्तियाज और उसके साथियों ने विनोद, अशोक और राजेश पर भारी और धारदार हथियारों से हमला बोल दिया। रज्जाक ने विनोद के सिर पर हथौड़े से तीन वार किए। अन्य दोनों भाइयों को भी जमकर पीटा। घायल अवस्था में तीनों भाइयों को हरबर्टपुर स्थित लेहमन अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में उपचार के दौरान विनोद की मौत हो गई।

बंगाल में होगा महाराष्ट्र जैसा ‘खेला’! उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसा ना हो जाए ममता बनर्जी का हाल

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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार और सत्ता हाथ से जाने के बाद ममता बनर्जी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। पार्टी के अंदर काफी उथल-पुथल मची हुई है। कुछ नेता खुले तौर पर बगावत पर उतर आए हैं। हालात ऐसे बनते नजर आ रहे हैं, जैसे तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंट जाएगी।

बागी नेताओं की सीक्रेट मीटिंग

विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष, बागी नेताओं की सक्रियता और कुछ विधायकों की सीक्रेट बैठकों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं ने हाल के दिनों में कोलकाता के विधायक हॉस्टल में कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में टीएमसी के भविष्य, संगठनात्मक बदलाव और कथित तौर पर एक नए राजनीतिक विकल्प पर चर्चा होने की बात कही जा रही है।

50 से ज़्यादा विधायकों की बैठक

टीएमसी 80 विधायकों में से 50 से ज़्यादा विधायकों ने होटल गेटवे में बागी और पार्टी से निकाले गए नेताओं ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा से मुलाकात की। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा दोनों वे विधायक हैं जिन पर ममता बनर्जी ने कार्रवाई की है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है।

टीएमसी की मीटिंग में पहुंचे सिर्फ 20 विधायक

वहीं, दूसरी तरफ रविवार को ममता बनर्जी की ओर से बुलाई गई बैठक में करीब 60 विधायक नदारद रहे। रविवार को, पीशी-भाईपो की बुलाई गई एक बैठक में केवल 20 विधायक ही शामिल हुए। विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 TMC पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। कई नेता BJP के साथ बातचीत कर रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी को लेकर नाराजगी

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद से TMC के अंदर नाराजगी और फूट दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि नेताओं का गुस्सा पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर है। चुनाव के बाद हुई समीक्षा बैठक में कम से कम तीन चुने हुए विधायकों ने खुलकर पार्टी नेतृत्व का विरोध किया। उन्होंने चुनाव में मिली करारी हार के लिए अभिषेक बनर्जी की पसंद को जबरदस्ती थोपे जाने को जिम्मेदार ठहराया।

खुलकर उठे विरोध के स्वर

कुछ नेता खुले तौर पर पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं कि 15 साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी जमीनी हकीकत से कट गई है। सिंडिकेट और 'कट-मनी' (कमीशन) की आदी हो गई है, और हिंसक रूप से अहंकारी हो गई है। वे जवाबदेही और आत्म-मंथन की मांग कर रहे हैं, जिसका ममता बनर्जी ने जिद के साथ विरोध किया है।

ऋतब्रत और संदीपन ने ममता के खिलाफ खोला मोर्चा

दावा किया जा रहा है कि ऋतब्रत और संदीपन के नेतृत्व में एक नई तृणमूल बन सकती है। पार्टी से निकाले जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि वह टीएमसी में कथित भ्रष्टाचार के बारे में सरकार को पत्र लिखेंगे। ऋतब्रत ने कहा कि उनके पास कई ऐसी जानकारियां हैं जिन्हें वह सार्वजनिक कर सकते हैं।