राजाओं की शिकारगाह से विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व तक, बांधवगढ़ की बेमिसाल संरक्षण यात्रा

जहां जंगलों की गूंजती दहाड़ आज सफल वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति संतुलन की मिसाल बन चुकी है

लेखक - पत्रकार सय्यद असीम अली

भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में शामिल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व आज केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध जैव विविधता, ऐतिहासिक विरासत और सफल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के कारण भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। घने जंगलों, प्राचीन पहाड़ियों, दुर्लभ वन्यजीवों और प्राकृतिक जल स्रोतों से भरपूर बांधवगढ़ आज प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों की पहली पसंद बन चुका है।

महाराजाओं की शिकारगाह से संरक्षण क्षेत्र तक का सफर

कभी बांधवगढ़ का जंगल Maharajas of Rewa की निजी शिकारगाह हुआ करता था। यहां राजघराने द्वारा शिकार अभियानों का आयोजन किया जाता था। इसी धरती ने दुनिया को प्रसिद्ध सफेद बाघ “Mohan” दिया, जिसे वर्ष 1951 में रीवा रियासत के महाराजा मार्तंड सिंह ने खोजा था। मोहन को विश्व के सभी सफेद बाघों का मूल माना जाता है।

समय के साथ अत्यधिक शिकार और मानवीय हस्तक्षेप के कारण जंगलों में वन्यजीवों की संख्या तेजी से घटने लगी। इसके बाद वन विभाग और सरकार ने संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। पहले इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया और बाद में वर्ष 1993 में बांधवगढ़ को आधिकारिक रूप से टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला।

आज वन विभाग की सतत निगरानी, गश्त और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण यहां वन्यजीव सुरक्षित वातावरण में विकसित हो रहे हैं। स्थानीय निवासी भी संरक्षण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे बांधवगढ़ वन्यजीव संरक्षण का सफल मॉडल बन चुका है।

582 एकड़ में फैले 12 प्राचीन तालाब: बांधवगढ़ की अनोखी प्राकृतिक धरोहर

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व की पहचान केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि इसकी ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों के लिए भी की जाती है। बांधवगढ़ में लगभग 582 एकड़ क्षेत्र में फैले 12 प्राचीन तालाब आज भी इस जंगल की जीवनरेखा माने जाते हैं। माना जाता है कि इन तालाबों का निर्माण प्राचीन काल में जल संरक्षण और वन्यजीवों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया था।

ये तालाब आज भी जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गर्मियों के मौसम में जब जंगल के कई छोटे जल स्रोत सूख जाते हैं, तब यही प्राचीन तालाब बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, जंगली सूअर और अनेक पक्षियों के लिए प्रमुख जल स्रोत बन जाते हैं। वन्यजीवों की गतिविधियां अक्सर इन तालाबों के आसपास देखी जाती हैं, जिससे यह क्षेत्र सफारी के दौरान भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

इन तालाबों के आसपास फैले घने साल और सागौन के जंगल बांधवगढ़ की सुंदरता को और अधिक अद्भुत बनाते हैं। यहां की पहाड़ियां, प्राचीन गुफाएं, शिलालेख और ऐतिहासिक अवशेष इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत करते हैं।

प्रकृति, इतिहास और वन्यजीवन का ऐसा अनोखा संगम बांधवगढ़ को देश के सबसे विशेष टाइगर रिजर्वों में शामिल करता है। यहां आने वाला हर पर्यटक इन प्राचीन तालाबों और प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठता है।

गौरों की शानदार वापसी: बांधवगढ़ में वन्यजीव पुनर्स्थापन की सफल कहानी

बांधवगढ़ में गौरों की वापसी भारत के सबसे सफल वन्यजीव पुनर्स्थापन अभियानों में गिनी जाती है। एक समय अत्यधिक शिकार और प्राकृतिक आवासों में बदलाव के कारण गौर यहां लगभग विलुप्त हो चुके थे, जिससे जंगल के पारिस्थितिक संतुलन पर भी असर पड़ा था।

स्थिति को देखते हुए मध्यप्रदेश वन विभाग ने वर्ष 2012 में गौर पुनर्स्थापन परियोजना शुरू की। कान्हा और बाद में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से चरणबद्ध तरीके से गौरों को बांधवगढ़ लाया गया। वर्ष 2026 में तीसरे चरण के तहत 27 गौरों का सफल ट्रांसलोकेशन किया गया, जिसका उद्देश्य उनकी आनुवंशिक विविधता को मजबूत करना था।

वन विभाग ने गौरों के लिए सुरक्षित घासभूमि, जल स्रोत और अनुकूल वातावरण विकसित किया। धीरे-धीरे गौरों ने जंगल को अपना नया आवास बना लिया और उनकी संख्या बढ़ने लगी।

वर्तमान में बांधवगढ़ में गौरों की संख्या लगभग 160 तक पहुंच चुकी है, जिनमें कई खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गौरों की वापसी ने जंगल के पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

एशियाई हाथियों की दस्तक से बदलता बांधवगढ़ का जंगल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व लंबे समय से बाघों की धरती के रूप में प्रसिद्ध रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां एशियाई जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी ने जंगल के पारिस्थितिक तंत्र में बड़ा बदलाव लाया है। वर्ष 2017-18 से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जंगलों से हाथियों के झुंड स्वाभाविक रूप से बांधवगढ़ पहुंचने लगे। खास बात यह है कि इन्हें यहां बसाने के लिए किसी प्रकार का ट्रांसलोकेशन नहीं किया गया, बल्कि उन्होंने स्वयं इस क्षेत्र को अपना नया आवास बनाया।

वन विभाग के अनुसार वर्तमान में बांधवगढ़ और आसपास के वन क्षेत्रों में लगभग 80 से 90 जंगली हाथी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी जंगल के प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जंगल में नए रास्ते और घासभूमियां विकसित करते हैं, जिससे हिरण, सांभर, चीतल और बारहसिंगा जैसे शाकाहारी वन्यजीवों को लाभ मिलता है। साथ ही बीजों के प्रसार से जंगल का प्राकृतिक पुनर्जनन भी तेजी से होता है।

वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में बांधवगढ़ बाघों के साथ-साथ एशियाई हाथियों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में भी नई पहचान बना सकता है।

मगधी रेंज में बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र: विलुप्ति से वापसी की प्रेरणादायक पहल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के मगधी रेंज में विकसित लगभग 75 हेक्टेयर का बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह इन्क्लोजर विशेष रूप से संकटग्रस्त बारहसिंगा प्रजाति के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षित प्रजनन के लिए तैयार किया गया है।

एक समय मध्य भारत में बारहसिंगा बड़ी संख्या में पाए जाते थे, लेकिन शिकार, आवास की कमी और पर्यावरणीय बदलावों के कारण इनकी संख्या तेजी से घट गई। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने मगधी रेंज में इनके लिए यह विशेष संरक्षण क्षेत्र विकसित किया, क्योंकि यहां का घासभूमि और जल स्रोत इनके लिए अनुकूल हैं।

यहां प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खुली घासभूमि, जल स्रोत और सुरक्षित प्रजनन क्षेत्र विकसित किए गए हैं। वन विभाग द्वारा नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे इनके संरक्षण को मजबूती मिल रही है।

परियोजना के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं—बारहसिंगों की संख्या में वृद्धि हो रही है और उनका व्यवहार भी प्राकृतिक होता जा रहा है। यह पहल साबित करती है कि सही योजना से संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाया जा सकता है।

यह संरक्षण क्षेत्र न केवल एक प्रजाति के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज यह पहल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की एक नई पहचान बन चुकी है और अन्य अभयारण्यों के लिए प्रेरणास्रोत है।

बांधवगढ़ की दहाड़: एक सफारी में 9 बाघों ने बनाया नया रोमांच

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व का ताला जोन हमेशा से बाघों की शानदार गतिविधियों और रोमांचक सफारी अनुभवों के लिए प्रसिद्ध रहा है। लेकिन एक ही सफारी में 9 बाघों का दिखाई देना अपने आप में एक ऐतिहासिक और बेहद दुर्लभ घटना मानी गई। जंगल के शांत वातावरण में अलग-अलग स्थानों पर बाघों की मौजूदगी ने पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को रोमांच से भर दिया।

वन विभाग के अनुसार सामान्यतः किसी सफारी में एक या दो बाघों का दिखाई देना बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन एक साथ 9 बाघों का दिखाई देना बांधवगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, सुरक्षित वन क्षेत्र और सफल संरक्षण प्रयासों को दर्शाता है। यही कारण है कि अन्य टाइगर रिजर्वों की तुलना में भी बांधवगढ़ को “शेरों का गढ़” कहा जाता है। यह अनुभव पर्यटकों के लिए जीवनभर याद रहने वाला पल बन गया।

पिछली गणना के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगभग 220 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। लगातार बेहतर संरक्षण, सुरक्षित आवास, पर्याप्त शिकार आधार और वन विभाग की सतत निगरानी के कारण यहां बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली गणनाओं में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है।

बजरंग: बांधवगढ़ की पहचान और जंगल का सबसे चर्चित बाघ

बांधवगढ़ का नाम आते ही जिस बाघ की सबसे पहले चर्चा होती है, वह है प्रसिद्ध टाइगर “बजरंग”। अपनी विशाल कद-काठी, दमदार चाल और प्रभावशाली मौजूदगी के कारण बजरंग केवल एक बाघ नहीं, बल्कि बांधवगढ़ की पहचान बन चुका है। देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच भी उसकी अलग पहचान है।

कहा जाता है कि अगर बांधवगढ़ की चर्चा हो और बजरंग का नाम न आए, तो कहानी अधूरी सी लगती है। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक हर कोई उसकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित रहता है। सफारी पर आने वाले पर्यटक घंटों जंगल की पगडंडियों पर इस उम्मीद में इंतज़ार करते हैं कि शायद आज बजरंग का दीदार हो जाए। उसकी मौजूदगी भर से जंगल का रोमांच कई गुना बढ़ जाता है।

बजरंग ने न केवल पर्यटकों को आकर्षित किया है, बल्कि बांधवगढ़ को विश्वभर में नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसकी लोकप्रियता इस बात का प्रतीक है कि बांधवगढ़ आज भी भारत के सबसे समृद्ध और रोमांचक टाइगर रिजर्वों में शामिल है।

जंगल का ‘पुजारी’ अब प्रकृति की गोद में विलीन

बांधवगढ़ के चर्चित नर बाघ “पुजारी ” की मौत ने वन्यजीव प्रेमियों को गहरा दुख पहुंचाया। डी-1 टाइगर के साथ संघर्ष में पुजारी की मृत्यु हो गई, जिसने पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और वन विभाग के कर्मचारियों को भावुक कर दिया।

पुजारी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों और पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय था। वह अक्सर कैमरों के सामने शानदार अंदाज में दिखाई देता था। स्थानीय लोगों ने उसका नाम “पुजारी” इसलिए रखा था क्योंकि सुबह के समय वह ऐसी मुद्रा में दिखाई देता था, मानो सूर्य को प्रणाम कर रहा हो।

पुजारी की मृत्यु के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की गहरी भावनाएं देखने को मिलीं। वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफरों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने भावुक पोस्ट साझा कर पुजारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने उसके साथ बिताए सफारी के यादगार पलों और तस्वीरों को साझा करते हुए उसे बांधवगढ़ के सबसे खास और लोकप्रिय बाघों में से एक बताया।

सोशल मीडिया पर उमड़ी यह संवेदनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि पुजारी केवल एक बाघ नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ एक जीवंत प्रतीक बन चुका था।

उसकी मौत के बाद लोगों ने जिस तरह भावुक होकर श्रद्धांजलि दी, उससे यह स्पष्ट हो गया कि बांधवगढ़ में वन्यजीवों और इंसानों के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन चुका है।

संरक्षण और प्रकृति का जीवंत उदाहरण

आज बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व केवल एक टाइगर रिजर्व नहीं, बल्कि सफल वन्यजीव संरक्षण, समृद्ध जैव विविधता और मानव-प्रकृति संबंध का जीवंत उदाहरण बन चुका है। वन विभाग, स्थानीय समुदाय और संरक्षण विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों ने बांधवगढ़ को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

घने जंगलों में गूंजती बाघों की दहाड़, हाथियों की आवाजाही, गौरों के विशाल झुंड और प्राचीन पहाड़ियों के बीच बसे तालाब आज भी यह संदेश देते हैं कि यदि संरक्षण के प्रयास निरंतर और ईमानदारी से किए जाएं, तो प्रकृति स्वयं को फिर से जीवंत कर सकती है।बांधवगढ़ में गांव वालों और वन विभाग के बीच बेहतर संवाद और समन्वय वन्यजीव संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है। दोनों के बीच तालमेल बना रहना ही जंगल, वन्यजीव और मानव के बीच संतुलन बनाए रखने की अहम कुंजी माना जाता है।

कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने किया पद्म भूषण पंकज उधास चौक और भित्तिचित्र स्मारक का उद्घाटन

मुंबई। ग़ज़ल गायक पद्मभूषण पंकज उधास की 75वीं जयंती के अवसर पर रविवार को पेडर रोड स्थित स्टर्लिंग अपार्टमेंट के सामने वाले चौक का आधिकारिक रूप से “पद्मभूषण पंकज उधास चौक” नामकरण किया गया। साथ ही कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा के हाथो  इस चौक पर स्थापित पंकज उधास के भित्तिचित्र स्मारक (म्युरल) का उद्घाटन भी किया गया। इस अवसर पर उधास परिवार, वरिष्ठ गायक-संगीतकार तथा बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक उपस्थित थे।
इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक हरिहरन,सोनू निगम, पापोन  तथा संगीतकार-गायक सलीम मर्चंट  के साथ समाजसेविका श्रीमती मंजू जी  लोढ़ा भी उपस्थित थीं।बइस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने कहा, “पेडर रोड क्षेत्र में पंकज उधास का लंबे समय तक निवास रहा। उनके परिवार की इच्छा थी कि इस परिसर में उनकी स्मृति में कोई स्थायी स्मारक बनाया जाए। इसके लिए मैंने और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रयास शुरू किए थे। आदरणीय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी दी। उनके मार्गदर्शन और मुंबई महानगरपालिका के सहयोग से यह भित्तिचित्र स्मारक तैयार किया गया है। यह चौक अब संगीत और ग़ज़ल प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। स्मारक में पंकज उधास के अमर गीतों के लिए क्यूआर कोड भी दिया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक उनकी ग़ज़लों का आनंद ले सकेंगे।”
कार्यक्रम में पढ़कर सुनाए गए संदेश में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “पंकज उधास की मधुर और संवेदनशील आवाज़ ने भारतीय संगीत को समृद्ध किया और ग़ज़ल गायकी को वैश्विक पहचान दिलाई। ‘चिट्ठी आई है’ जैसे उनके गीत आज भी पीढ़ियों के दिलों में जीवित हैं।”
गायक हरिहरन ने भी पंकज उधास को याद करते हुए कहा, “पंकजजी ने ग़ज़ल को आम लोगों तक पहुँचाया। उनकी कई ग़ज़लें आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं।”
गायक पापोन ने पंकज उधास के सरल स्वभाव को याद करते हुए कहा, “मैं उनसे उम्र में बहुत छोटा था, फिर भी वे मुझे हमेशा आदरपूर्वक ‘आप’ कहकर संबोधित करते थे।” संगीतकार हृदयनाथ मंगेशकर के पुत्र आदिनाथ मंगेशकर ने उधास और मंगेशकर परिवार के दशकों पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा, “मेरा पहला फोटो लता मंगेशकर जी  की गोद में है और उसमें पंकजजी भी मौजूद हैं। हमारे घर का गणेशोत्सव उनकी उपस्थिति के बिना अधूरा माना जाता था।”
गायक सोनू निगम ने भी अपने बचपन की यादें साझा करते हुए कहा, “मेरी माँ हमेशा पंकज उधास के गीत सुना करती थीं। बाल कलाकार रहते हुए मैंने उनकी ग़ज़लों के शब्द और धुन दोनों याद कर लिए थे।”
चार दशकों से अधिक लंबे करियर में पंकज उधास ने 50 से अधिक एल्बम और 1,000 से ज्यादा गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। संगीत क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2006 में पद्मश्री और वर्ष 2025 में पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया था।
पंकज उधास की यादों से पेडर रोड क्षेत्र भावुक माहौल में डूबा हुआ था। उन्होंने भारतीय ग़ज़ल को सात समंदर पार तक पहुँचाया और उनके प्रशंसक केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बड़ी संख्या में हैं। समाजसेविका मंजू लोढ़ा ने कहा कि इस क्षेत्र में ऐसे महान गायक का स्मारक और चौक होना गर्व की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आवाज़ की कोमलता और विरह की भावना आने वाली कई पीढ़ियों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजती रहेगी।
नवीन गल्ला मंडी में एसडीम सदर की छापेमारी, सरकारी बोरों में भरा सैकड़ों क्विंटल गेहूं बरामद .
रितेश मिश्रा
हरदोई: शहर की नवीन गल्ला मंडी में एसडीएम सदर मयंक कुंडू की छापेमारी से हड़कंप मच गया। प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान सरकारी बोरों में भरा सैकड़ों क्विंटल गेहूं बरामद किया गया। कई बोरियों पर पीसीएफ की मोहर और वर्ष 2026-27 का चिन्ह भी मिला, जिससे पूरे मामले में अनियमितता और अवैध कारोबार की आशंका जताई जा रही है।
बताया गया कि मंडी सचिव कार्यालय के पास स्थित एक दुकान और आसपास के क्षेत्र में छापेमारी की गई। इस दौरान करीब 450 से 500 गेहूं से भरे बोरे कब्जे में लिए गए। मौके पर बड़ी संख्या में सरकारी संस्थाओं की मोहर लगी बोरियां मिलने के बाद व्यापारियों और कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।
प्रशासन को शिकायत मिली थी कि कुछ निजी लोग सरकारी बोरों का इस्तेमाल कर गेहूं की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। शिकायत के आधार पर एसडीएम सदर स्वयं जांच के लिए मंडी पहुंचे। जांच के दौरान भारी मात्रा में गेहूं से भरे सरकारी बोरे पाए गए। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि सरकारी बोरों का उपयोग कर गेहूं को अवैध तरीके से इधर-उधर बेचा जा रहा था। फिलहाल प्रशासन मामले की गहन जांच में जुटा हुआ है और बरामद बोरों व गेहूं के स्रोत की पड़ताल की जा रही।
अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज के विरोध में अधिवक्ताओं ने किया जोरदार प्रदर्शन

घायल वकीलों को मुआवजा और दोषियों पर कार्यवाही के लिए मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन एसडीएम को सौपा

रितेश मिश्रा
शाहाबाद हरदोई।लखनऊ में अधिवक्ताओं के चेंबर पर बुलडोजर चलाए जाने और वकीलों पर किए गए लाठीचार्ज की घटना से  आक्रोशित तहसील के अधिवक्ताओं ने सोमवार को तहसील परिसर में पुलिस और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।
पैदल मार्च निकाल जताया विरोध
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विमलेश लोधी और महामंत्री के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता कार्य बहिष्कार करते हुए लामबंद हो गए। आक्रोशित अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में पैदल मार्च निकाला और 'पुलिस-प्रशासन मुर्दाबाद' तथा 'अधिवक्ता एकता जिंदाबाद' के नारे लगाए। वकीलों का कहना था कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और न्याय के रक्षकों पर इस तरह की दमनकारी कार्रवाई को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लखनऊ में बिना विधिक प्रक्रिया के अधिवक्ताओं के चेंबरों को बुलडोजर से ढहा दिया गया। जब वकीलों ने इसका शांतिपूर्ण विरोध करना चाहा, तो उन पर बर्बरतापूर्वक लाठियां बरसाई गईं, जिसमें कई अधिवक्ता गंभीर रूप से घायल हुए हैं।अधिवक्ताओं ने लाठीचार्ज का आदेश देने वाले और कानून हाथ में लेने वाले दोषी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
      प्रदर्शन के बाद बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि घायल अधिवक्ताओं को उचित मुआवजा दिया जाए, ढहाए गए चेंबरों का पुनर्निर्माण कराया जाए और प्रदेश में 'अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट' को लागू किया जाए ताकि भविष्य में वकीलों के सम्मान और सुरक्षा से कोई खिलवाड़ न हो सके।
मेले में खरीददारी करने गए युवक की बाइक चोरी
रितेश मिश्रा
शाहाबाद हरदोई।कोतवाली छेत्र के ग्राम लोनी में लगे मेले में खरीददारी करने गए युवक की बाइक अज्ञात चोर लेकर चम्पत हो गया।पीड़ित की लिखित तहरीर के आधार पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर बाइक की तलाश शुरू कर दी है। मझिला थाना के ग्राम चठिया निवासी श्यामू पुत्र प्रमोद यादव के अनुसार वह 16 मई को ग्राम लोनी में मेला देखने गया था। मेले के बाहर अपनी बाइक संख्या यूपी 34बीएच 4627 ख़डी कर कुछ सामान खरीदने लगा वापस आने पर उसकी बाइक कोई अज्ञात चोर चोरी कर ले गया। पीड़ित की लिखित तहरीर के आधार पर पुलिस ने अज्ञात चोर के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर बाइक की तलाश शुरू कर दी है।
गर्म हवा व लू से बचाव के लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जारी की एडवाइजरी

लू से बचने के लिए सुरक्षात्मक उपायों को अपनाएं जनसामान्य

रितेश मिश्रा
हरदोई जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा लगातार बढ़ रही गर्मी, गर्म हवा व लू के प्रकोप से बचाव के उपाय बताए गए हैं। जिलाधिकारी अनुनय झा के निर्देशन में एडवाइजरी जारी की गई है।
   अपर जिलाधिकारी(वि ०/रा०)/प्रभारी अधिकारी दैवीय आपदा ने बताया कि मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान दिनांक 18.05.2026 के अनुसार दिनांक 20,21 और 22.05.2026 को उष्ण लहर लू चलने की अधिक संभावना और आगामी दिनों में मौसम शुष्क रहने और  तापमान में वृद्धि रहने की भी संभावना है। ऐसे में लोगों को हीटवेब से बचाव के लिए आवश्यक तैयारियां कर ली जाएं। उन्होंने हीटवेब से बचाव को लेकर जनसामान्य के बीच जागरूता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि जब वातावरण का तापमाप 37 डिग्री सेल्सियस से 3-4 डिग्री अधिक पहुंच जाता है तो उसे हीटवेब या लू कहते हैं।
आपदा विशेषज्ञ ज्ञान दीप शर्मा ने बचाव के तरीके बताते हुए कहा कि गर्म हवाओं से बचने के लिए खिड़की को रिफ्लेक्टर जैसे एलुमिनियम पन्नी, गत्ते इत्यादि से ढककर रखें, ताकि बाहर की गर्मी को अन्दर आने से रोका जा सके। उन खिड़कियों व दरवाजों पर, जिनसे दोपहर के समय गर्म हवाएं आतीं हैं, काले परदे लगाकर रखना चाहिए। स्थानीय मौसम के पूर्वानुमान को सुनें और आगामी तापमान में होने वाले परिवर्तन के प्रति सजग रहें। आपात स्थिति से निपटने के लिए प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण लें। बच्चों तथा पालतू जानवरों को कभी भी बन्द वाहन में अकेला न छोड़ें। जहां तक सम्भव हो घर में ही रहें तथा सूर्य के ताप से बचें। सूर्य के ताप से बचने के लिए जहां तक संभव हो घर की निचली मंजिल पर रहें। संतुलित, हल्का व नियमित भोजन करें। मादक पेय पदार्थों का सेवन न करें। घर से बाहर अपने शरीर व सिर को कपड़े या टोपी से ढककर रखें।
उन्होंने बचाव के बारे में बताते हुए कहा कि धूप में खड़े वाहनों में बच्चों या पालतू जानवरों को न छोड़ें। खाना बनाते समय घर के खिड़की दरवाजे आदि खुले रखें जिससे हवा का आना जाना बना रहे। नशीले पदार्थों, शराब अथवा अल्कोहल से बचें। उच्च प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करें तथा बासी भोजन कतई न इस्तेमाल करें इसके साथ ही संतुलित व हल्का आहार लें। दोपहर के समय यदि बहुत आवश्यक हो तभी घर से धूप में बाहर निकलें अन्यथा धूप में जाने से बचें और यदि जाना ही पड़े तो सिर को जरूर ढकें। घर में पेय पदार्थ जैसे लस्सी, छांछ, मट्ठा, बेल का शर्बत, नमक चीनी का घोल, नीबू पानी या आम का पना इत्यादि का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि अभी आगे गर्मी का प्रकोप और बढ़ेगा इसलिए गर्मी से बचाव के लिए विभिन्न उपायों को अपनाना चाहिए।

कब लगती है लू

गर्मी में शरीर के द्रव्य बाॅडी फ्ल्यूड सूखने लगते हैं। शरीर में पानी, नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। शराब की लत, हृदय रोग, पुानरी बीमारी, मोटापा, पार्किंसस रोग, अधिक उम्र, अनियंत्रित मधुमेह वाले व्यक्तियों को लू से विशेष बचाव करने की जरूरत है। इसके अलावा डाॅययूरेटिक, एंटीस्टिमिनक, मानसिक रोग की औषधि का उपयोग करने वाले व्यक्ति भी लू से सवाधान रहें।
लू के लक्षण
गर्म, लाल, शुष्क त्वचा का होना, पसीना न आना, तेज पल्स होना, उल्टे श्वास गति में  तेजी,व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति, सिरदर्द, मिचली, थकान और कमजोरी का होना या चक्कर आना, मूत्र न होना  अथवा इसमें कमी आदि मुख्य लक्षण हैं। इन लक्षणों के चलते मनुष्यों के शरीर के उच्च तापमान से आंतरिक अंगों, विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है। इससे शरीर में उच्च रक्तचाप उत्पन्न हो जाता है।
হাড়োয়ায় তৃণমূল কার্যালয়ে তাণ্ডব, আইএসএফের বিরুদ্ধে ভাঙচুরের অভিযোগে চড়ল রাজনৈতিক পারদ
বসিরহাট : হাড়োয়ার অটো স্ট্যান্ড এলাকায় রবিবার রাতে তৃণমূল কংগ্রেসের দলীয় কার্যালয়ে ভাঙচুরের ঘটনাকে কেন্দ্র করে সোমবার সকাল থেকেই থমথমে পরিস্থিতি তৈরি হয়েছে। বসিরহাটের হাড়োয়া থানার সোনাপুকুর-শংকরপুর অঞ্চল তৃণমূল কংগ্রেসের কার্যালয়ের এই ঘটনায় নতুন করে রাজনৈতিক উত্তেজনা ছড়িয়েছে। তৃণমূলের অভিযোগ, পরিকল্পিতভাবে আইএসএফ কর্মী-সমর্থকেরা গভীর রাতে দলীয় কার্যালয়ে হামলা চালিয়ে ব্যাপক ভাঙচুর করে। স্থানীয় সূত্রে জানা গিয়েছে, রাতের অন্ধকারে দলীয় কার্যালয়ের বাইরে লাগানো একাধিক ব্যানার ও ফ্লেক্স ছিঁড়ে ফেলা হয়। প্রাক্তন মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়ের ছবি থাকা ব্যানারও নষ্ট করা হয়েছে বলে অভিযোগ। শুধু বাইরের অংশ নয়, কার্যালয়ের ভিতরে ঢুকে চেয়ার, টেবিল, এসি মেশিন সহ একাধিক আসবাবপত্র ও সামগ্রী ভাঙচুর করা হয়। অভিযোগ, ঘটনার পর হামলাকারীরা কার্যালয়ে তালা মেরে এলাকা ছেড়ে চলে যায়।
সোমবার সকালে ঘটনাস্থলে পৌঁছে তৃণমূল নেতৃত্ব ও কর্মীরা ক্ষয়ক্ষতির চিত্র দেখে ক্ষোভ উগরে দেন। তৃণমূলের হাড়োয়া ব্লক ২ সভাপতি ফরিদ জমাদারের বক্তব্য, রাজনৈতিকভাবে হাড়োয়া এলাকায় নিজেদের জমি শক্ত করতে না পেরে আইএসএফ ভয় ও সন্ত্রাসের রাজনীতি করছে। ভোট-পরবর্তী সময়ে এলাকায় অশান্তি তৈরির উদ্দেশ্যেই এই হামলা বলে দাবি তৃণমূলের। তৃণমূলের পক্ষ থেকে স্পষ্ট জানানো হয়েছে, এই ঘটনায় বিজেপির কোনও ভূমিকা নেই এবং সম্পূর্ণভাবে আইএসএফ এই ভাঙচুরের সঙ্গে যুক্ত। তৃণমূল নেতৃত্বের দাবি, এলাকায় মানুষের সমর্থন হারিয়ে আইএসএফ এখন রাজনৈতিক অস্তিত্ব টিকিয়ে রাখতে উস্কানিমূলক কর্মকাণ্ডে নেমেছে।
অন্যদিকে আইএসএফের অভিযোগ, সংশ্লিষ্ট দলীয় কার্যালয়টি পিডব্লিউডির জমিতে অবৈধভাবে তৈরি করা হয়েছে। তাদের দাবি, রাজনৈতিক প্রভাব খাটিয়ে সরকারি জমি দখল করে এই কার্যালয় গড়ে তোলা হয়েছে এবং সেখান থেকে বিভিন্ন বেআইনি কর্মকাণ্ড পরিচালিত হত। যদিও তৃণমূল নেতৃত্ব পাল্টা দাবি করেছে, প্রশাসনিক বিষয়কে সামনে এনে রাজনৈতিক প্রতিহিংসা চরিতার্থ করতেই আইএসএফ এই ধরনের নাশকতা চালিয়েছে। ঘটনার পর সোমবার সকাল থেকেই হাড়োয়া অটো স্ট্যান্ড এলাকায় চাপা উত্তেজনা ছিল। এই ঘটনাকে কেন্দ্র করে হাড়োয়ায় ফের রাজনৈতিক সংঘাতের আবহ তৈরি হয়েছে। তৃণমূলের অভিযোগ, আইএসএফের নেতা-কর্মীরা সংগঠনের জোরে এগিয়ে চলা দলকে আটকাতেই অশান্তির পথ বেছে নিচ্ছে।
पुलिस मुठभेड़ में शामिल फरार पशु तस्कर गिरफ्तार: सुरियावां पुलिस ने गौ तस्करी मामले में वांछित को पकड़ा
नितेश श्रीवास्तव

भदोही। भदोही पुलिस ने गौ तस्करी के एक फरार वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी सुरियावां थाना क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग के दौरान मुखबिर की सूचना पर हुई। गिरफ्तार अभियुक्त राजकुमार सरोज उर्फ बड़कू एक पुलिस मुठभेड़ में भी शामिल था।
पुलिस अधीक्षक भदोही अभिनव त्यागी के निर्देश पर जनपद में पशु तस्करी पर पूर्ण विराम लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल के पर्यवेक्षण में जनपदीय पुलिस पशु तस्करों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई कर रही है। दिनांक 01 मार्च 2026 को शाम 6 बजे, सुरियावां पुलिस टीम ने गौ तस्करी में लिप्त अभियुक्तों के मोबाइल नंबर प्राप्त किए। सर्विलांस की सहायता से उनकी लोकेशन ट्रेस की गई, जिसके बाद औचक दबिश देकर अभियुक्त को पकड़ा गया।
गिरफ्तार अभियुक्त राजकुमार सरोज उर्फ बड़कू पुत्र किशोरी लाल सरोज, निवासी अमिलहरा, थाना सुरियावां, जनपद भदोही, उम्र लगभग 55 वर्ष है। वह थाना सुरियावां में पंजीकृत मु0अ0स0 57/2026 धारा 3/5A/8 उ0प्र0 गोवध निवारण अधि०, 109 (1) बीएनएस और 3/25/27 आर्म्स एक्ट से संबंधित मामले में वांछित था। उसे एकौनी मोड़, दुर्गागंज रोड से सोमवार को गिरफ्तार किया गया। इस गिरफ्तारी को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक कमलेश कुमार, उपनिरीक्षक सुरेश यादव, उपनिरीक्षक मो० शकील अहमद और कांस्टेबल राहुल कुमार शामिल थे।
मंडी में भीषण आग से आधा दर्जन दुकानों का सामान जलकर राख, लाखों का नुकसान

फर्रुखाबाद l  नवीन मंडी समिति में रविवार को देर रात भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग की चपेट में आने से बारदाना व अन्य सामान सहित करीब आधा दर्जन दुकानें जलकर खाक हो गईं। आग से व्यापारियों को लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग इतनी विकराल थी कि दुकानों में लगी सीमेंट की टीन तक गर्म होकर पिघलने लगी। दुकानों में रखा बारदाना, प्लास्टिक की क्रेट और लकड़ी की पेटियां आग के तेजी से फैलने से जलकर राख हो गई l घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंच गईं।
प्रशासन ने करीब ढाई घंटे मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। मौके पर एसडीएम, सीओ और इंस्पेक्टर पुलिस बल के साथ देर रात तक मौजूद रहे। आग की गंभीरता को देखते हुए मंडी परिसर में पहले से मौजूद फायर ब्रिगेड वाहन सहित अलीगंज आसपास क्षेत्रों से भी चार से पांच दमकल गाड़ियां बुलानी पड़ीं।
घटना के दौरान मंडी परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई। व्यापार मंडल के कई पदाधिकारी और सैकड़ों व्यापारी मौके पर पहुंच गए ,प्रांतीय मंत्री, जिलाध्यक्ष अग्निहोत्री, जिला मंत्री नीरज राठौर, संजय गुप्ता, नगर अध्यक्ष अमित सेठ, रामू पंडित, ओम कालेश्वर पाठक, शफीक भाई, मोहम्मद रफी और पप्पू भाई समेत अनेक लोग मौजूद रहे। आग से प्रभावित दुकानों में भाई मियां, सानू खां, इफ्तिखार खां, इकदार मियां सहित दो अन्य व्यापारियों की दुकानें शामिल हैं। प्रशासन नुकसान का आकलन करा रहा है।
पुलिस आयुक्त जोगेन्द्र कुमार के निर्देशन में पुलिस उपायुक्त यमुनानगर द्वारा अवैध कार्यों में संलिप्तता पाये जाने के दृष्टिगत थाना प्रभारी घूरपुर

विश्वनाथ प्रताप सिंह



प्रयागराज,आवेदक शिकायतकर्ता कमलेश विश्वकर्मा निवासी ग्राम सेन्धूवार थाना घूरपुर के शिकायती प्रार्थना पत्र अंतर्गत थाना घूरपुर पर नियुक्त प्रभारी निरीक्षक  दिनेश सिंह द्वारा गलत तरीके से एक पक्षीय कार्यवाही करते हुए एक पक्ष का अनुचित पक्ष लेते हुए तीन लोगों को थाने में लाया गया और अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। पूर्व में भी समय-समय पर थाना प्रभारियों को अकारण बिना अपराध के किसी को थाने पर नहीं लाने हेतु स्पष्ट आदेश दिए गए हैंl उक्त सम्बन्ध में जांच सहायक पुलिस आयुक्त बारा वेद व्यास मिश्र द्वारा की गई। जांचोपरांत थाना प्रभारी घूरपुर को निलम्बित करते हुए विभागीय जांच कार्यवाही आसन्न की गई है।
राजाओं की शिकारगाह से विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व तक, बांधवगढ़ की बेमिसाल संरक्षण यात्रा

जहां जंगलों की गूंजती दहाड़ आज सफल वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति संतुलन की मिसाल बन चुकी है

लेखक - पत्रकार सय्यद असीम अली

भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में शामिल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व आज केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध जैव विविधता, ऐतिहासिक विरासत और सफल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के कारण भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। घने जंगलों, प्राचीन पहाड़ियों, दुर्लभ वन्यजीवों और प्राकृतिक जल स्रोतों से भरपूर बांधवगढ़ आज प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों की पहली पसंद बन चुका है।

महाराजाओं की शिकारगाह से संरक्षण क्षेत्र तक का सफर

कभी बांधवगढ़ का जंगल Maharajas of Rewa की निजी शिकारगाह हुआ करता था। यहां राजघराने द्वारा शिकार अभियानों का आयोजन किया जाता था। इसी धरती ने दुनिया को प्रसिद्ध सफेद बाघ “Mohan” दिया, जिसे वर्ष 1951 में रीवा रियासत के महाराजा मार्तंड सिंह ने खोजा था। मोहन को विश्व के सभी सफेद बाघों का मूल माना जाता है।

समय के साथ अत्यधिक शिकार और मानवीय हस्तक्षेप के कारण जंगलों में वन्यजीवों की संख्या तेजी से घटने लगी। इसके बाद वन विभाग और सरकार ने संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। पहले इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया और बाद में वर्ष 1993 में बांधवगढ़ को आधिकारिक रूप से टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला।

आज वन विभाग की सतत निगरानी, गश्त और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण यहां वन्यजीव सुरक्षित वातावरण में विकसित हो रहे हैं। स्थानीय निवासी भी संरक्षण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे बांधवगढ़ वन्यजीव संरक्षण का सफल मॉडल बन चुका है।

582 एकड़ में फैले 12 प्राचीन तालाब: बांधवगढ़ की अनोखी प्राकृतिक धरोहर

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व की पहचान केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि इसकी ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों के लिए भी की जाती है। बांधवगढ़ में लगभग 582 एकड़ क्षेत्र में फैले 12 प्राचीन तालाब आज भी इस जंगल की जीवनरेखा माने जाते हैं। माना जाता है कि इन तालाबों का निर्माण प्राचीन काल में जल संरक्षण और वन्यजीवों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया था।

ये तालाब आज भी जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गर्मियों के मौसम में जब जंगल के कई छोटे जल स्रोत सूख जाते हैं, तब यही प्राचीन तालाब बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, जंगली सूअर और अनेक पक्षियों के लिए प्रमुख जल स्रोत बन जाते हैं। वन्यजीवों की गतिविधियां अक्सर इन तालाबों के आसपास देखी जाती हैं, जिससे यह क्षेत्र सफारी के दौरान भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

इन तालाबों के आसपास फैले घने साल और सागौन के जंगल बांधवगढ़ की सुंदरता को और अधिक अद्भुत बनाते हैं। यहां की पहाड़ियां, प्राचीन गुफाएं, शिलालेख और ऐतिहासिक अवशेष इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत करते हैं।

प्रकृति, इतिहास और वन्यजीवन का ऐसा अनोखा संगम बांधवगढ़ को देश के सबसे विशेष टाइगर रिजर्वों में शामिल करता है। यहां आने वाला हर पर्यटक इन प्राचीन तालाबों और प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठता है।

गौरों की शानदार वापसी: बांधवगढ़ में वन्यजीव पुनर्स्थापन की सफल कहानी

बांधवगढ़ में गौरों की वापसी भारत के सबसे सफल वन्यजीव पुनर्स्थापन अभियानों में गिनी जाती है। एक समय अत्यधिक शिकार और प्राकृतिक आवासों में बदलाव के कारण गौर यहां लगभग विलुप्त हो चुके थे, जिससे जंगल के पारिस्थितिक संतुलन पर भी असर पड़ा था।

स्थिति को देखते हुए मध्यप्रदेश वन विभाग ने वर्ष 2012 में गौर पुनर्स्थापन परियोजना शुरू की। कान्हा और बाद में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से चरणबद्ध तरीके से गौरों को बांधवगढ़ लाया गया। वर्ष 2026 में तीसरे चरण के तहत 27 गौरों का सफल ट्रांसलोकेशन किया गया, जिसका उद्देश्य उनकी आनुवंशिक विविधता को मजबूत करना था।

वन विभाग ने गौरों के लिए सुरक्षित घासभूमि, जल स्रोत और अनुकूल वातावरण विकसित किया। धीरे-धीरे गौरों ने जंगल को अपना नया आवास बना लिया और उनकी संख्या बढ़ने लगी।

वर्तमान में बांधवगढ़ में गौरों की संख्या लगभग 160 तक पहुंच चुकी है, जिनमें कई खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गौरों की वापसी ने जंगल के पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

एशियाई हाथियों की दस्तक से बदलता बांधवगढ़ का जंगल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व लंबे समय से बाघों की धरती के रूप में प्रसिद्ध रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां एशियाई जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी ने जंगल के पारिस्थितिक तंत्र में बड़ा बदलाव लाया है। वर्ष 2017-18 से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जंगलों से हाथियों के झुंड स्वाभाविक रूप से बांधवगढ़ पहुंचने लगे। खास बात यह है कि इन्हें यहां बसाने के लिए किसी प्रकार का ट्रांसलोकेशन नहीं किया गया, बल्कि उन्होंने स्वयं इस क्षेत्र को अपना नया आवास बनाया।

वन विभाग के अनुसार वर्तमान में बांधवगढ़ और आसपास के वन क्षेत्रों में लगभग 80 से 90 जंगली हाथी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी जंगल के प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जंगल में नए रास्ते और घासभूमियां विकसित करते हैं, जिससे हिरण, सांभर, चीतल और बारहसिंगा जैसे शाकाहारी वन्यजीवों को लाभ मिलता है। साथ ही बीजों के प्रसार से जंगल का प्राकृतिक पुनर्जनन भी तेजी से होता है।

वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में बांधवगढ़ बाघों के साथ-साथ एशियाई हाथियों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में भी नई पहचान बना सकता है।

मगधी रेंज में बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र: विलुप्ति से वापसी की प्रेरणादायक पहल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के मगधी रेंज में विकसित लगभग 75 हेक्टेयर का बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह इन्क्लोजर विशेष रूप से संकटग्रस्त बारहसिंगा प्रजाति के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षित प्रजनन के लिए तैयार किया गया है।

एक समय मध्य भारत में बारहसिंगा बड़ी संख्या में पाए जाते थे, लेकिन शिकार, आवास की कमी और पर्यावरणीय बदलावों के कारण इनकी संख्या तेजी से घट गई। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने मगधी रेंज में इनके लिए यह विशेष संरक्षण क्षेत्र विकसित किया, क्योंकि यहां का घासभूमि और जल स्रोत इनके लिए अनुकूल हैं।

यहां प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खुली घासभूमि, जल स्रोत और सुरक्षित प्रजनन क्षेत्र विकसित किए गए हैं। वन विभाग द्वारा नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे इनके संरक्षण को मजबूती मिल रही है।

परियोजना के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं—बारहसिंगों की संख्या में वृद्धि हो रही है और उनका व्यवहार भी प्राकृतिक होता जा रहा है। यह पहल साबित करती है कि सही योजना से संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाया जा सकता है।

यह संरक्षण क्षेत्र न केवल एक प्रजाति के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज यह पहल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की एक नई पहचान बन चुकी है और अन्य अभयारण्यों के लिए प्रेरणास्रोत है।

बांधवगढ़ की दहाड़: एक सफारी में 9 बाघों ने बनाया नया रोमांच

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व का ताला जोन हमेशा से बाघों की शानदार गतिविधियों और रोमांचक सफारी अनुभवों के लिए प्रसिद्ध रहा है। लेकिन एक ही सफारी में 9 बाघों का दिखाई देना अपने आप में एक ऐतिहासिक और बेहद दुर्लभ घटना मानी गई। जंगल के शांत वातावरण में अलग-अलग स्थानों पर बाघों की मौजूदगी ने पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को रोमांच से भर दिया।

वन विभाग के अनुसार सामान्यतः किसी सफारी में एक या दो बाघों का दिखाई देना बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन एक साथ 9 बाघों का दिखाई देना बांधवगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, सुरक्षित वन क्षेत्र और सफल संरक्षण प्रयासों को दर्शाता है। यही कारण है कि अन्य टाइगर रिजर्वों की तुलना में भी बांधवगढ़ को “शेरों का गढ़” कहा जाता है। यह अनुभव पर्यटकों के लिए जीवनभर याद रहने वाला पल बन गया।

पिछली गणना के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगभग 220 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। लगातार बेहतर संरक्षण, सुरक्षित आवास, पर्याप्त शिकार आधार और वन विभाग की सतत निगरानी के कारण यहां बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली गणनाओं में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है।

बजरंग: बांधवगढ़ की पहचान और जंगल का सबसे चर्चित बाघ

बांधवगढ़ का नाम आते ही जिस बाघ की सबसे पहले चर्चा होती है, वह है प्रसिद्ध टाइगर “बजरंग”। अपनी विशाल कद-काठी, दमदार चाल और प्रभावशाली मौजूदगी के कारण बजरंग केवल एक बाघ नहीं, बल्कि बांधवगढ़ की पहचान बन चुका है। देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच भी उसकी अलग पहचान है।

कहा जाता है कि अगर बांधवगढ़ की चर्चा हो और बजरंग का नाम न आए, तो कहानी अधूरी सी लगती है। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक हर कोई उसकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित रहता है। सफारी पर आने वाले पर्यटक घंटों जंगल की पगडंडियों पर इस उम्मीद में इंतज़ार करते हैं कि शायद आज बजरंग का दीदार हो जाए। उसकी मौजूदगी भर से जंगल का रोमांच कई गुना बढ़ जाता है।

बजरंग ने न केवल पर्यटकों को आकर्षित किया है, बल्कि बांधवगढ़ को विश्वभर में नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसकी लोकप्रियता इस बात का प्रतीक है कि बांधवगढ़ आज भी भारत के सबसे समृद्ध और रोमांचक टाइगर रिजर्वों में शामिल है।

जंगल का ‘पुजारी’ अब प्रकृति की गोद में विलीन

बांधवगढ़ के चर्चित नर बाघ “पुजारी ” की मौत ने वन्यजीव प्रेमियों को गहरा दुख पहुंचाया। डी-1 टाइगर के साथ संघर्ष में पुजारी की मृत्यु हो गई, जिसने पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और वन विभाग के कर्मचारियों को भावुक कर दिया।

पुजारी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों और पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय था। वह अक्सर कैमरों के सामने शानदार अंदाज में दिखाई देता था। स्थानीय लोगों ने उसका नाम “पुजारी” इसलिए रखा था क्योंकि सुबह के समय वह ऐसी मुद्रा में दिखाई देता था, मानो सूर्य को प्रणाम कर रहा हो।

पुजारी की मृत्यु के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की गहरी भावनाएं देखने को मिलीं। वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफरों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने भावुक पोस्ट साझा कर पुजारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने उसके साथ बिताए सफारी के यादगार पलों और तस्वीरों को साझा करते हुए उसे बांधवगढ़ के सबसे खास और लोकप्रिय बाघों में से एक बताया।

सोशल मीडिया पर उमड़ी यह संवेदनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि पुजारी केवल एक बाघ नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ एक जीवंत प्रतीक बन चुका था।

उसकी मौत के बाद लोगों ने जिस तरह भावुक होकर श्रद्धांजलि दी, उससे यह स्पष्ट हो गया कि बांधवगढ़ में वन्यजीवों और इंसानों के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन चुका है।

संरक्षण और प्रकृति का जीवंत उदाहरण

आज बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व केवल एक टाइगर रिजर्व नहीं, बल्कि सफल वन्यजीव संरक्षण, समृद्ध जैव विविधता और मानव-प्रकृति संबंध का जीवंत उदाहरण बन चुका है। वन विभाग, स्थानीय समुदाय और संरक्षण विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों ने बांधवगढ़ को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

घने जंगलों में गूंजती बाघों की दहाड़, हाथियों की आवाजाही, गौरों के विशाल झुंड और प्राचीन पहाड़ियों के बीच बसे तालाब आज भी यह संदेश देते हैं कि यदि संरक्षण के प्रयास निरंतर और ईमानदारी से किए जाएं, तो प्रकृति स्वयं को फिर से जीवंत कर सकती है।बांधवगढ़ में गांव वालों और वन विभाग के बीच बेहतर संवाद और समन्वय वन्यजीव संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है। दोनों के बीच तालमेल बना रहना ही जंगल, वन्यजीव और मानव के बीच संतुलन बनाए रखने की अहम कुंजी माना जाता है।

कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने किया पद्म भूषण पंकज उधास चौक और भित्तिचित्र स्मारक का उद्घाटन

मुंबई। ग़ज़ल गायक पद्मभूषण पंकज उधास की 75वीं जयंती के अवसर पर रविवार को पेडर रोड स्थित स्टर्लिंग अपार्टमेंट के सामने वाले चौक का आधिकारिक रूप से “पद्मभूषण पंकज उधास चौक” नामकरण किया गया। साथ ही कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा के हाथो  इस चौक पर स्थापित पंकज उधास के भित्तिचित्र स्मारक (म्युरल) का उद्घाटन भी किया गया। इस अवसर पर उधास परिवार, वरिष्ठ गायक-संगीतकार तथा बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक उपस्थित थे।
इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक हरिहरन,सोनू निगम, पापोन  तथा संगीतकार-गायक सलीम मर्चंट  के साथ समाजसेविका श्रीमती मंजू जी  लोढ़ा भी उपस्थित थीं।बइस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने कहा, “पेडर रोड क्षेत्र में पंकज उधास का लंबे समय तक निवास रहा। उनके परिवार की इच्छा थी कि इस परिसर में उनकी स्मृति में कोई स्थायी स्मारक बनाया जाए। इसके लिए मैंने और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रयास शुरू किए थे। आदरणीय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी दी। उनके मार्गदर्शन और मुंबई महानगरपालिका के सहयोग से यह भित्तिचित्र स्मारक तैयार किया गया है। यह चौक अब संगीत और ग़ज़ल प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। स्मारक में पंकज उधास के अमर गीतों के लिए क्यूआर कोड भी दिया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक उनकी ग़ज़लों का आनंद ले सकेंगे।”
कार्यक्रम में पढ़कर सुनाए गए संदेश में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “पंकज उधास की मधुर और संवेदनशील आवाज़ ने भारतीय संगीत को समृद्ध किया और ग़ज़ल गायकी को वैश्विक पहचान दिलाई। ‘चिट्ठी आई है’ जैसे उनके गीत आज भी पीढ़ियों के दिलों में जीवित हैं।”
गायक हरिहरन ने भी पंकज उधास को याद करते हुए कहा, “पंकजजी ने ग़ज़ल को आम लोगों तक पहुँचाया। उनकी कई ग़ज़लें आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं।”
गायक पापोन ने पंकज उधास के सरल स्वभाव को याद करते हुए कहा, “मैं उनसे उम्र में बहुत छोटा था, फिर भी वे मुझे हमेशा आदरपूर्वक ‘आप’ कहकर संबोधित करते थे।” संगीतकार हृदयनाथ मंगेशकर के पुत्र आदिनाथ मंगेशकर ने उधास और मंगेशकर परिवार के दशकों पुराने संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा, “मेरा पहला फोटो लता मंगेशकर जी  की गोद में है और उसमें पंकजजी भी मौजूद हैं। हमारे घर का गणेशोत्सव उनकी उपस्थिति के बिना अधूरा माना जाता था।”
गायक सोनू निगम ने भी अपने बचपन की यादें साझा करते हुए कहा, “मेरी माँ हमेशा पंकज उधास के गीत सुना करती थीं। बाल कलाकार रहते हुए मैंने उनकी ग़ज़लों के शब्द और धुन दोनों याद कर लिए थे।”
चार दशकों से अधिक लंबे करियर में पंकज उधास ने 50 से अधिक एल्बम और 1,000 से ज्यादा गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। संगीत क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2006 में पद्मश्री और वर्ष 2025 में पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया था।
पंकज उधास की यादों से पेडर रोड क्षेत्र भावुक माहौल में डूबा हुआ था। उन्होंने भारतीय ग़ज़ल को सात समंदर पार तक पहुँचाया और उनके प्रशंसक केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बड़ी संख्या में हैं। समाजसेविका मंजू लोढ़ा ने कहा कि इस क्षेत्र में ऐसे महान गायक का स्मारक और चौक होना गर्व की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी आवाज़ की कोमलता और विरह की भावना आने वाली कई पीढ़ियों तक संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजती रहेगी।
नवीन गल्ला मंडी में एसडीम सदर की छापेमारी, सरकारी बोरों में भरा सैकड़ों क्विंटल गेहूं बरामद .
रितेश मिश्रा
हरदोई: शहर की नवीन गल्ला मंडी में एसडीएम सदर मयंक कुंडू की छापेमारी से हड़कंप मच गया। प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान सरकारी बोरों में भरा सैकड़ों क्विंटल गेहूं बरामद किया गया। कई बोरियों पर पीसीएफ की मोहर और वर्ष 2026-27 का चिन्ह भी मिला, जिससे पूरे मामले में अनियमितता और अवैध कारोबार की आशंका जताई जा रही है।
बताया गया कि मंडी सचिव कार्यालय के पास स्थित एक दुकान और आसपास के क्षेत्र में छापेमारी की गई। इस दौरान करीब 450 से 500 गेहूं से भरे बोरे कब्जे में लिए गए। मौके पर बड़ी संख्या में सरकारी संस्थाओं की मोहर लगी बोरियां मिलने के बाद व्यापारियों और कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।
प्रशासन को शिकायत मिली थी कि कुछ निजी लोग सरकारी बोरों का इस्तेमाल कर गेहूं की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। शिकायत के आधार पर एसडीएम सदर स्वयं जांच के लिए मंडी पहुंचे। जांच के दौरान भारी मात्रा में गेहूं से भरे सरकारी बोरे पाए गए। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि सरकारी बोरों का उपयोग कर गेहूं को अवैध तरीके से इधर-उधर बेचा जा रहा था। फिलहाल प्रशासन मामले की गहन जांच में जुटा हुआ है और बरामद बोरों व गेहूं के स्रोत की पड़ताल की जा रही।
अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज के विरोध में अधिवक्ताओं ने किया जोरदार प्रदर्शन

घायल वकीलों को मुआवजा और दोषियों पर कार्यवाही के लिए मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन एसडीएम को सौपा

रितेश मिश्रा
शाहाबाद हरदोई।लखनऊ में अधिवक्ताओं के चेंबर पर बुलडोजर चलाए जाने और वकीलों पर किए गए लाठीचार्ज की घटना से  आक्रोशित तहसील के अधिवक्ताओं ने सोमवार को तहसील परिसर में पुलिस और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।
पैदल मार्च निकाल जताया विरोध
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विमलेश लोधी और महामंत्री के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता कार्य बहिष्कार करते हुए लामबंद हो गए। आक्रोशित अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में पैदल मार्च निकाला और 'पुलिस-प्रशासन मुर्दाबाद' तथा 'अधिवक्ता एकता जिंदाबाद' के नारे लगाए। वकीलों का कहना था कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और न्याय के रक्षकों पर इस तरह की दमनकारी कार्रवाई को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लखनऊ में बिना विधिक प्रक्रिया के अधिवक्ताओं के चेंबरों को बुलडोजर से ढहा दिया गया। जब वकीलों ने इसका शांतिपूर्ण विरोध करना चाहा, तो उन पर बर्बरतापूर्वक लाठियां बरसाई गईं, जिसमें कई अधिवक्ता गंभीर रूप से घायल हुए हैं।अधिवक्ताओं ने लाठीचार्ज का आदेश देने वाले और कानून हाथ में लेने वाले दोषी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
      प्रदर्शन के बाद बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि घायल अधिवक्ताओं को उचित मुआवजा दिया जाए, ढहाए गए चेंबरों का पुनर्निर्माण कराया जाए और प्रदेश में 'अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट' को लागू किया जाए ताकि भविष्य में वकीलों के सम्मान और सुरक्षा से कोई खिलवाड़ न हो सके।
मेले में खरीददारी करने गए युवक की बाइक चोरी
रितेश मिश्रा
शाहाबाद हरदोई।कोतवाली छेत्र के ग्राम लोनी में लगे मेले में खरीददारी करने गए युवक की बाइक अज्ञात चोर लेकर चम्पत हो गया।पीड़ित की लिखित तहरीर के आधार पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर बाइक की तलाश शुरू कर दी है। मझिला थाना के ग्राम चठिया निवासी श्यामू पुत्र प्रमोद यादव के अनुसार वह 16 मई को ग्राम लोनी में मेला देखने गया था। मेले के बाहर अपनी बाइक संख्या यूपी 34बीएच 4627 ख़डी कर कुछ सामान खरीदने लगा वापस आने पर उसकी बाइक कोई अज्ञात चोर चोरी कर ले गया। पीड़ित की लिखित तहरीर के आधार पर पुलिस ने अज्ञात चोर के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर बाइक की तलाश शुरू कर दी है।
गर्म हवा व लू से बचाव के लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जारी की एडवाइजरी

लू से बचने के लिए सुरक्षात्मक उपायों को अपनाएं जनसामान्य

रितेश मिश्रा
हरदोई जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा लगातार बढ़ रही गर्मी, गर्म हवा व लू के प्रकोप से बचाव के उपाय बताए गए हैं। जिलाधिकारी अनुनय झा के निर्देशन में एडवाइजरी जारी की गई है।
   अपर जिलाधिकारी(वि ०/रा०)/प्रभारी अधिकारी दैवीय आपदा ने बताया कि मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान दिनांक 18.05.2026 के अनुसार दिनांक 20,21 और 22.05.2026 को उष्ण लहर लू चलने की अधिक संभावना और आगामी दिनों में मौसम शुष्क रहने और  तापमान में वृद्धि रहने की भी संभावना है। ऐसे में लोगों को हीटवेब से बचाव के लिए आवश्यक तैयारियां कर ली जाएं। उन्होंने हीटवेब से बचाव को लेकर जनसामान्य के बीच जागरूता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि जब वातावरण का तापमाप 37 डिग्री सेल्सियस से 3-4 डिग्री अधिक पहुंच जाता है तो उसे हीटवेब या लू कहते हैं।
आपदा विशेषज्ञ ज्ञान दीप शर्मा ने बचाव के तरीके बताते हुए कहा कि गर्म हवाओं से बचने के लिए खिड़की को रिफ्लेक्टर जैसे एलुमिनियम पन्नी, गत्ते इत्यादि से ढककर रखें, ताकि बाहर की गर्मी को अन्दर आने से रोका जा सके। उन खिड़कियों व दरवाजों पर, जिनसे दोपहर के समय गर्म हवाएं आतीं हैं, काले परदे लगाकर रखना चाहिए। स्थानीय मौसम के पूर्वानुमान को सुनें और आगामी तापमान में होने वाले परिवर्तन के प्रति सजग रहें। आपात स्थिति से निपटने के लिए प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण लें। बच्चों तथा पालतू जानवरों को कभी भी बन्द वाहन में अकेला न छोड़ें। जहां तक सम्भव हो घर में ही रहें तथा सूर्य के ताप से बचें। सूर्य के ताप से बचने के लिए जहां तक संभव हो घर की निचली मंजिल पर रहें। संतुलित, हल्का व नियमित भोजन करें। मादक पेय पदार्थों का सेवन न करें। घर से बाहर अपने शरीर व सिर को कपड़े या टोपी से ढककर रखें।
उन्होंने बचाव के बारे में बताते हुए कहा कि धूप में खड़े वाहनों में बच्चों या पालतू जानवरों को न छोड़ें। खाना बनाते समय घर के खिड़की दरवाजे आदि खुले रखें जिससे हवा का आना जाना बना रहे। नशीले पदार्थों, शराब अथवा अल्कोहल से बचें। उच्च प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करें तथा बासी भोजन कतई न इस्तेमाल करें इसके साथ ही संतुलित व हल्का आहार लें। दोपहर के समय यदि बहुत आवश्यक हो तभी घर से धूप में बाहर निकलें अन्यथा धूप में जाने से बचें और यदि जाना ही पड़े तो सिर को जरूर ढकें। घर में पेय पदार्थ जैसे लस्सी, छांछ, मट्ठा, बेल का शर्बत, नमक चीनी का घोल, नीबू पानी या आम का पना इत्यादि का प्रयोग करें। उन्होंने बताया कि अभी आगे गर्मी का प्रकोप और बढ़ेगा इसलिए गर्मी से बचाव के लिए विभिन्न उपायों को अपनाना चाहिए।

कब लगती है लू

गर्मी में शरीर के द्रव्य बाॅडी फ्ल्यूड सूखने लगते हैं। शरीर में पानी, नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। शराब की लत, हृदय रोग, पुानरी बीमारी, मोटापा, पार्किंसस रोग, अधिक उम्र, अनियंत्रित मधुमेह वाले व्यक्तियों को लू से विशेष बचाव करने की जरूरत है। इसके अलावा डाॅययूरेटिक, एंटीस्टिमिनक, मानसिक रोग की औषधि का उपयोग करने वाले व्यक्ति भी लू से सवाधान रहें।
लू के लक्षण
गर्म, लाल, शुष्क त्वचा का होना, पसीना न आना, तेज पल्स होना, उल्टे श्वास गति में  तेजी,व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति, सिरदर्द, मिचली, थकान और कमजोरी का होना या चक्कर आना, मूत्र न होना  अथवा इसमें कमी आदि मुख्य लक्षण हैं। इन लक्षणों के चलते मनुष्यों के शरीर के उच्च तापमान से आंतरिक अंगों, विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है। इससे शरीर में उच्च रक्तचाप उत्पन्न हो जाता है।
হাড়োয়ায় তৃণমূল কার্যালয়ে তাণ্ডব, আইএসএফের বিরুদ্ধে ভাঙচুরের অভিযোগে চড়ল রাজনৈতিক পারদ
বসিরহাট : হাড়োয়ার অটো স্ট্যান্ড এলাকায় রবিবার রাতে তৃণমূল কংগ্রেসের দলীয় কার্যালয়ে ভাঙচুরের ঘটনাকে কেন্দ্র করে সোমবার সকাল থেকেই থমথমে পরিস্থিতি তৈরি হয়েছে। বসিরহাটের হাড়োয়া থানার সোনাপুকুর-শংকরপুর অঞ্চল তৃণমূল কংগ্রেসের কার্যালয়ের এই ঘটনায় নতুন করে রাজনৈতিক উত্তেজনা ছড়িয়েছে। তৃণমূলের অভিযোগ, পরিকল্পিতভাবে আইএসএফ কর্মী-সমর্থকেরা গভীর রাতে দলীয় কার্যালয়ে হামলা চালিয়ে ব্যাপক ভাঙচুর করে। স্থানীয় সূত্রে জানা গিয়েছে, রাতের অন্ধকারে দলীয় কার্যালয়ের বাইরে লাগানো একাধিক ব্যানার ও ফ্লেক্স ছিঁড়ে ফেলা হয়। প্রাক্তন মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়ের ছবি থাকা ব্যানারও নষ্ট করা হয়েছে বলে অভিযোগ। শুধু বাইরের অংশ নয়, কার্যালয়ের ভিতরে ঢুকে চেয়ার, টেবিল, এসি মেশিন সহ একাধিক আসবাবপত্র ও সামগ্রী ভাঙচুর করা হয়। অভিযোগ, ঘটনার পর হামলাকারীরা কার্যালয়ে তালা মেরে এলাকা ছেড়ে চলে যায়।
সোমবার সকালে ঘটনাস্থলে পৌঁছে তৃণমূল নেতৃত্ব ও কর্মীরা ক্ষয়ক্ষতির চিত্র দেখে ক্ষোভ উগরে দেন। তৃণমূলের হাড়োয়া ব্লক ২ সভাপতি ফরিদ জমাদারের বক্তব্য, রাজনৈতিকভাবে হাড়োয়া এলাকায় নিজেদের জমি শক্ত করতে না পেরে আইএসএফ ভয় ও সন্ত্রাসের রাজনীতি করছে। ভোট-পরবর্তী সময়ে এলাকায় অশান্তি তৈরির উদ্দেশ্যেই এই হামলা বলে দাবি তৃণমূলের। তৃণমূলের পক্ষ থেকে স্পষ্ট জানানো হয়েছে, এই ঘটনায় বিজেপির কোনও ভূমিকা নেই এবং সম্পূর্ণভাবে আইএসএফ এই ভাঙচুরের সঙ্গে যুক্ত। তৃণমূল নেতৃত্বের দাবি, এলাকায় মানুষের সমর্থন হারিয়ে আইএসএফ এখন রাজনৈতিক অস্তিত্ব টিকিয়ে রাখতে উস্কানিমূলক কর্মকাণ্ডে নেমেছে।
অন্যদিকে আইএসএফের অভিযোগ, সংশ্লিষ্ট দলীয় কার্যালয়টি পিডব্লিউডির জমিতে অবৈধভাবে তৈরি করা হয়েছে। তাদের দাবি, রাজনৈতিক প্রভাব খাটিয়ে সরকারি জমি দখল করে এই কার্যালয় গড়ে তোলা হয়েছে এবং সেখান থেকে বিভিন্ন বেআইনি কর্মকাণ্ড পরিচালিত হত। যদিও তৃণমূল নেতৃত্ব পাল্টা দাবি করেছে, প্রশাসনিক বিষয়কে সামনে এনে রাজনৈতিক প্রতিহিংসা চরিতার্থ করতেই আইএসএফ এই ধরনের নাশকতা চালিয়েছে। ঘটনার পর সোমবার সকাল থেকেই হাড়োয়া অটো স্ট্যান্ড এলাকায় চাপা উত্তেজনা ছিল। এই ঘটনাকে কেন্দ্র করে হাড়োয়ায় ফের রাজনৈতিক সংঘাতের আবহ তৈরি হয়েছে। তৃণমূলের অভিযোগ, আইএসএফের নেতা-কর্মীরা সংগঠনের জোরে এগিয়ে চলা দলকে আটকাতেই অশান্তির পথ বেছে নিচ্ছে।
पुलिस मुठभेड़ में शामिल फरार पशु तस्कर गिरफ्तार: सुरियावां पुलिस ने गौ तस्करी मामले में वांछित को पकड़ा
नितेश श्रीवास्तव

भदोही। भदोही पुलिस ने गौ तस्करी के एक फरार वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी सुरियावां थाना क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग के दौरान मुखबिर की सूचना पर हुई। गिरफ्तार अभियुक्त राजकुमार सरोज उर्फ बड़कू एक पुलिस मुठभेड़ में भी शामिल था।
पुलिस अधीक्षक भदोही अभिनव त्यागी के निर्देश पर जनपद में पशु तस्करी पर पूर्ण विराम लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल के पर्यवेक्षण में जनपदीय पुलिस पशु तस्करों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई कर रही है। दिनांक 01 मार्च 2026 को शाम 6 बजे, सुरियावां पुलिस टीम ने गौ तस्करी में लिप्त अभियुक्तों के मोबाइल नंबर प्राप्त किए। सर्विलांस की सहायता से उनकी लोकेशन ट्रेस की गई, जिसके बाद औचक दबिश देकर अभियुक्त को पकड़ा गया।
गिरफ्तार अभियुक्त राजकुमार सरोज उर्फ बड़कू पुत्र किशोरी लाल सरोज, निवासी अमिलहरा, थाना सुरियावां, जनपद भदोही, उम्र लगभग 55 वर्ष है। वह थाना सुरियावां में पंजीकृत मु0अ0स0 57/2026 धारा 3/5A/8 उ0प्र0 गोवध निवारण अधि०, 109 (1) बीएनएस और 3/25/27 आर्म्स एक्ट से संबंधित मामले में वांछित था। उसे एकौनी मोड़, दुर्गागंज रोड से सोमवार को गिरफ्तार किया गया। इस गिरफ्तारी को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक कमलेश कुमार, उपनिरीक्षक सुरेश यादव, उपनिरीक्षक मो० शकील अहमद और कांस्टेबल राहुल कुमार शामिल थे।
मंडी में भीषण आग से आधा दर्जन दुकानों का सामान जलकर राख, लाखों का नुकसान

फर्रुखाबाद l  नवीन मंडी समिति में रविवार को देर रात भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग की चपेट में आने से बारदाना व अन्य सामान सहित करीब आधा दर्जन दुकानें जलकर खाक हो गईं। आग से व्यापारियों को लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग इतनी विकराल थी कि दुकानों में लगी सीमेंट की टीन तक गर्म होकर पिघलने लगी। दुकानों में रखा बारदाना, प्लास्टिक की क्रेट और लकड़ी की पेटियां आग के तेजी से फैलने से जलकर राख हो गई l घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंच गईं।
प्रशासन ने करीब ढाई घंटे मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। मौके पर एसडीएम, सीओ और इंस्पेक्टर पुलिस बल के साथ देर रात तक मौजूद रहे। आग की गंभीरता को देखते हुए मंडी परिसर में पहले से मौजूद फायर ब्रिगेड वाहन सहित अलीगंज आसपास क्षेत्रों से भी चार से पांच दमकल गाड़ियां बुलानी पड़ीं।
घटना के दौरान मंडी परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई। व्यापार मंडल के कई पदाधिकारी और सैकड़ों व्यापारी मौके पर पहुंच गए ,प्रांतीय मंत्री, जिलाध्यक्ष अग्निहोत्री, जिला मंत्री नीरज राठौर, संजय गुप्ता, नगर अध्यक्ष अमित सेठ, रामू पंडित, ओम कालेश्वर पाठक, शफीक भाई, मोहम्मद रफी और पप्पू भाई समेत अनेक लोग मौजूद रहे। आग से प्रभावित दुकानों में भाई मियां, सानू खां, इफ्तिखार खां, इकदार मियां सहित दो अन्य व्यापारियों की दुकानें शामिल हैं। प्रशासन नुकसान का आकलन करा रहा है।
पुलिस आयुक्त जोगेन्द्र कुमार के निर्देशन में पुलिस उपायुक्त यमुनानगर द्वारा अवैध कार्यों में संलिप्तता पाये जाने के दृष्टिगत थाना प्रभारी घूरपुर

विश्वनाथ प्रताप सिंह



प्रयागराज,आवेदक शिकायतकर्ता कमलेश विश्वकर्मा निवासी ग्राम सेन्धूवार थाना घूरपुर के शिकायती प्रार्थना पत्र अंतर्गत थाना घूरपुर पर नियुक्त प्रभारी निरीक्षक  दिनेश सिंह द्वारा गलत तरीके से एक पक्षीय कार्यवाही करते हुए एक पक्ष का अनुचित पक्ष लेते हुए तीन लोगों को थाने में लाया गया और अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। पूर्व में भी समय-समय पर थाना प्रभारियों को अकारण बिना अपराध के किसी को थाने पर नहीं लाने हेतु स्पष्ट आदेश दिए गए हैंl उक्त सम्बन्ध में जांच सहायक पुलिस आयुक्त बारा वेद व्यास मिश्र द्वारा की गई। जांचोपरांत थाना प्रभारी घूरपुर को निलम्बित करते हुए विभागीय जांच कार्यवाही आसन्न की गई है।