महुगढ़ी के मुरलिया जंगल में पलाश पेड़ से लटकता मिला युवक का शव, परिजनों में कोहराम
ड्रमंड गंज मिर्जापुर
क्षेत्र के महुगढ़ी गांव के मुरलिया जंगल में शनिवार सुबह पलाश के पेड़ में संदिग्ध परिस्थितियों में युवक शव लटकता मिलने की सूचना पर ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। जंगल में मवेशियों को चराने गए चरवाहों ने युवक का पलाश के पेड़ से लटकता शव दिखाई देने पर ग्रामीणों को इसकी सूचना दी। सूचना पर सुबह 11 बजे के करीब जंगल में पहुंचे थानाध्यक्ष भारत सुमन एसआई विनोद सिंह, एसआई शिवाकांत पांडेय,पुनीत गुप्ता ने घटना की जांच करते हुए पेड़ पर लटकते शव को नीचे उतरवाया। युवक का शव पलाश के पेड़ पर जमीन से करीब दस फीट ऊपर नायलान की रस्सी से लटक रहा था। मृतक युवक की शिनाख्त पंचराज उर्फ निरहू निवासी अंतरी सिकटा के रूप में हुई।पलाश के पेड़ के नीचे पुलिस को एक बैग मिला जिसमें मृतक ने अपने कपड़े रखे थे।हलिया क्षेत्र के सिकटा ग्राम पंचायत के अंतरी गांव निवासी राजू वर्मा का 22 वर्षीय पुत्र पंचराज उर्फ निरहू शुक्रवार शाम को बाइक से अपने ननिहाल महुगढ़ी गांव आया था। जहां कुछ देर रूकने के बाद ननिहाल में अपनी बाइक खड़ी कर अपने मामा भगवादास से यह कहकर निकला कि आर्केस्ट्रा में काम करने जा रहे हैं। शनिवार सुबह ननिहाल से तीन किलोमीटर दूर मुरलिया पहाड़ के जंगल में पेड़ से लटकता शव मिलने की सूचना पर ननिहाल में मातम छा गया। युवक ने जंगल में पहुंचकर गले में फंदा लगाकर जान क्यों दी ननिहाल पक्ष के लोगों को कुछ समझ में नही आ रहा है। बेटे की मौत की खबर पाकर पिता राजू और मां अमरावती देवी रोते-बिलखते हुए महुगढ़ी गांव पहुंची। युवक पांच बहनों में सबसे बड़ा और अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था।  स्वजनों ने बताया कि मृतक अविवाहित था और आर्केस्ट्रा में नर्तक का कार्य करता था। वहीं महुगढ़ी गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर जंगल में फंदे से लटका शव मिलने पर तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं। थानाध्यक्ष भारत सुमन ने बताया कि ननिहाल में आए युवक ने जंगल में पेड़ से फंदा लगाकर आत्महत्या कर लिया है।प्रथम दृष्टया मामला आत्म हत्या का प्रतीत हो रहा है। युवक ने पलाश के पेड़ की डाली में नायलान की रस्सी से गले में फंदा लगाकर जान दे दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।घटना की बारीकी से जांच की जा रही है।

-दो माह पूर्व देवहट के हरदी जंगल में अधेड़ का पेड़ से लटकता हुआ मिला था शव

क्षेत्र के देवहट गांव के हरदी जंगल में बीते 1 फरवरी को देवहट गांव के खरका बस्ती निवासी दुलारमनि कोल का भी संदिग्ध परिस्थितियों में पलाश के पेड़ से लटकता शव मिला था। लेकिन आज तक इस घटना का पुलिस खुलासा नही कर सकी।
अवैध शराब के अड्डों पर छापामार कार्रवाई की गई, 80 किलो लहन किया नष्ट, शराब की बरामद
फर्रुखाबाद lआबकारी आयुक्त के आदेश और जिलाधिकारी डॉ० अंकुर लाठर के निर्देश पर जनपद में अवैध मदिरा के निर्माण, बिक्री के विरुद्ध सघन छापामार अभियान जारी रहेगा l इस दौरान जिला आबकारी अधिकारी जी० पी० गुप्ता के निर्देश पर छापामार अभियान के अंतर्गत आबकारी निरीक्षक क्षेत्र कुमार गौरव सिंह द्वारा अपनी टीम के साथ संदिग्ध ग्राम लकूला में सघन दबिश एवं छापेमारी की कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान अवैध मदिरा निर्माण से जुड़े संदिग्ध स्थानों एवं अड्डों की गहन तलाशी ली गई। मौके पर लगभग 80 किलोग्राम लहन (अवैध शराब बनाने हेतु प्रयुक्त कच्चा माल) को नष्ट किया गया तथा 18 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद की गई। इस संबंध में एक अभियोग पंजीकृत कर कार्रवाई की गई । इसके अतिरिक्त क्षेत्र में स्थित कबाड़ी की दुकानों पर भी सघन चेकिंग अभियान चलाया गया इस दौरान आबकारी दुकानों—बाग लकूला कम्पोजिट, बाग लकूला देशी, आवास विकास मॉडल शॉप एवं आवास विकास देशी का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान स्टॉक रजिस्टर, पीओएस मशीन के माध्यम से बिक्री, ऑनलाइन भुगतान प्रणाली तथा सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता का परीक्षण किया गया। साथ ही देशी मदिरा दुकानों की कैंटीन व्यवस्था की भी गहन जांच की गई। जनपद में अवैध मदिरा के विरुद्ध यह छापामार अभियान आगे भी निरंतर एवं प्रभावी रूप से जारी रहेगा तथा इसमें संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
समाधान दिवस में शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी ने लेखपाल और ग्राम पंचायत अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश

फर्रूखाबाद l  तहसील अमृतपुर में सम्पूर्ण समाधान दिवस का जिलाधिकारी  डॉक्टर अंकुर लाठर की अध्यक्षता में आयोजन किया गया। समाधान दिवस के दौरान जनसामान्य की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनके त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए।
इस दौरान विभिन्न विभागों से संबंधित 114 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें राजस्व विभाग की 48, पुलिस विभाग की 22, विद्युत विभाग की 03, विकास विभाग की 18, खाद्य एवं रसद विभाग की 05 तथा अन्य विभागों की 13 शिकायतें शामिल रहीं। मौके पर 02 शिकायतों का निस्तारण किया गया। जिलाधिकारी द्वारा प्राप्त शिकायतों में से 05 महत्वपूर्ण प्रकरणों पर उसी दिन सायं तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी ने कार्यों में लापरवाही बरतने पर कड़ा रुख अपनाते हुए लेखपाल उत्कर्ष दुबे एवं ग्राम विकास अधिकारी मानेंद्र सिंह को निलंबित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राप्त शिकायतों का निस्तारण शासन की मंशा के अनुरूप प्राथमिकता के आधार पर एवं निर्धारित समयसीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि समाधान दिवस का उद्देश्य जनता को त्वरित न्याय एवं राहत प्रदान करना है, इसलिए सभी अधिकारी इस कार्य को गंभीरता से लें।
उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता बनाए रखी जाए तथा शिकायतकर्ता को संतोषजनक समाधान उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा कर शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारी द्वारा सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान 03 लाभार्थियों को मौके पर ही आयुष्मान कार्ड बनवाकर वितरित किए गए।
इस मौके पर पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उप जिलाधिकारी अमृतपुर सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
RSF की प्रेस स्वतंत्रता रिपोर्ट: वैश्विक पैमाना या भारत की अधूरी तस्वीर?

डॉ. पंकज सोनी

Reporters Without Borders (RSF) की सालाना रिपोर्ट पर भरोसा करने से पहले एक बुनियादी सवाल है—यह बनती कैसे है? किसके संसाधनों से, किन स्रोतों के आधार पर और किस दृष्टिकोण के साथ? 140 करोड़ की आबादी, दर्जनों भाषाओं और सैकड़ों संस्कृतियों वाले भारत की प्रेस स्वतंत्रता क्या पेरिस में बैठकर तैयार प्रश्नावलियों से मापी जा सकती है?

हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पेरिस स्थित एक NGO Reporters Without Borders (RSF) अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी करता है। इस रिपोर्ट में भारत का स्थान प्रायः 150 के बाद ही दिखाई देता है। 2026 की रिपोर्ट में भारत 157वें स्थान पर है, जबकि 2025 में भी यही रैंक और 2024 में 159वां स्थान था।

रिपोर्ट आते ही देश का एक वर्ग चिंतित स्वर में कहता है—“लोकतंत्र खतरे में है”, “पत्रकारिता समाप्त हो रही है”, “प्रेस पर दबाव बढ़ गया है।” लेकिन इन प्रतिक्रियाओं के बीच एक मूल प्रश्न अक्सर अनदेखा रह जाता है—यह सूचकांक तैयार कैसे होता है? भारत इसमें लगातार पीछे क्यों रहता है?

दरअसल, RSF एक फ्रांसीसी गैर-सरकारी संगठन है, जिसकी फंडिंग के स्रोत पूरी तरह पारदर्शी नहीं माने जाते। यूरोपीय सरकारें और कुछ निजी फाउंडेशन इसे सहयोग देते हैं। इसका प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक मुख्यतः सर्वेक्षण, धारणाओं और सीमित केस स्टडी पर आधारित होता है। यह कोई पूर्णतः वैज्ञानिक या वस्तुनिष्ठ मापदंड नहीं, बल्कि चुनिंदा लोगों की राय का संकलन है, जिसमें पश्चिमी उदारवादी मूल्यों को पत्रकारिता का मानक मान लिया जाता है।

यहीं एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है—क्या इतने विशाल और विविध देश की मीडिया स्वतंत्रता का आकलन सीमित प्रश्नावलियों के आधार पर किया जा सकता है? भारत में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन यहाँ के संविधान, न्यायपालिका और नागरिक अधिकारों के संदर्भ में होना चाहिए, न कि केवल किसी बाहरी संस्था के आकलन से।

इस रिपोर्ट का एक बड़ा विरोधाभास यह भी है कि इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों को कई बार भारत से बेहतर स्थान दिया गया है। पाकिस्तान में पत्रकारों के लापता होने, मीडिया पर सैन्य दबाव और वरिष्ठ पत्रकार Arshad Sharif की हत्या जैसी घटनाएं व्यापक रूप से सामने आ चुकी हैं। वहीं बांग्लादेश में डिजिटल सुरक्षा कानून के तहत पत्रकारों पर कार्रवाई के मामले भी सामने आए हैं। ऐसे में यह तुलना स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े करती है।

वैश्विक स्तर पर भी मीडिया स्वतंत्रता की स्थिति जटिल है। अमेरिका में Julian Assange के खिलाफ लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई चली। पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने मीडिया को “एनिमी ऑफ द पीपल” तक कहा। रूस और चीन में मीडिया पर राज्य का प्रभाव जगजाहिर है। इसके बावजूद RSF रैंकिंग में इन देशों की स्थिति अपेक्षाकृत कम आलोचनात्मक दिखाई देती है, जिससे भू-राजनीतिक पूर्वाग्रह की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

International Federation of Journalists (IFJ) के अनुसार 2025 में दुनिया भर में 128 पत्रकारों की हत्या हुई, जिनमें अधिकांश मध्य-पूर्व और संघर्ष क्षेत्रों से थे। भारत में ऐसे मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, और हर घटना पर न्यायिक व प्रशासनिक प्रक्रिया सक्रिय होती है।

भारत की जमीनी तस्वीर देखें तो यहाँ 900 से अधिक सैटेलाइट चैनल, 17,000 से ज्यादा पंजीकृत समाचारपत्र और लाखों डिजिटल प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं। अनेक मीडिया संस्थान सरकार की खुलकर आलोचना करते हैं और निर्बाध रूप से कार्य कर रहे हैं। संसद, न्यायपालिका और सोशल मीडिया—तीनों स्तरों पर अभिव्यक्ति की विविधता स्पष्ट दिखाई देती है।

हालाँकि, भारतीय पत्रकारिता की एक चुनौती यह भी है कि बिना प्रशिक्षण या मान्यता के बड़ी संख्या में लोग मीडिया के नाम पर सक्रिय हो गए हैं। कुछ मामलों में यह स्थिति अव्यवस्था और अविश्वसनीयता को जन्म देती है, जो समग्र तस्वीर को प्रभावित करती है।

RSF की निष्पक्षता पर सवाल केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। The GuardianGlobal Times और अन्य संस्थानों द्वारा इसके वित्तीय स्रोतों व दृष्टिकोण पर प्रश्न उठाए गए हैं। यहाँ तक कि Encyclopaedia Britannica में भी कुछ संदर्भों में इसके संभावित पक्षपात का उल्लेख मिलता है।

स्पष्ट है कि RSF का सूचकांक एक उपयोगी संकेतक हो सकता है, लेकिन इसे अंतिम सत्य मानना उचित नहीं। उतना ही गलत इसे पूरी तरह खारिज कर देना भी होगा।

भारत जैसे विशाल और विविध लोकतंत्र में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन बहुआयामी दृष्टिकोण से ही संभव है—जहाँ वैश्विक सूचकांक, स्थानीय वास्तविकता और संस्थागत अनुभव, तीनों को संतुलित रूप से समझा जाए।

(लेखक जनसंपर्क विभाग भोपाल में सहायक मीडिया सलाहकार हैं और यह इनके व्यक्तिगत विचार हैं।)

प्रदेश सरकार फेल, जनता की जान से खिलवाड़”- जीतू पटवारी का हमला

- जहरीले पानी, हादसों और किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरा

- 7 मई को बड़वानी से मुरैना तक चक्का जाम करने का किया ऐलान

भोपाल, प्रतिनिधि। मध्यप्रदेश में विपक्ष ने एक बार फिर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में “जनता की जान से खिलवाड़” किया जा रहा है। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में पानी जैसी बुनियादी जरूरत भी सुरक्षित नहीं रह गई है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में जहरीले पानी के कारण 36 लोगों की मौत हुई, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं।

बरगी बांध की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां 9 लोगों की मौत हुई, लेकिन सरकार की ओर से संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मां-बेटे के शव निकाले जा रहे थे, उस समय मुख्यमंत्री अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त थे। परिवहन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पटवारी ने कहा कि नियमों की अनदेखी के कारण आदिवासी क्षेत्रों में लोग ट्रकों और बसों की छतों पर सफर करने को मजबूर हैं, जिससे हादसे बढ़ रहे हैं। इसे उन्होंने सरकार की नीतिगत विफलता बताया।

किसानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 2700 रुपये और धान का 3100 रुपये देने का वादा किया था, लेकिन किसानों को इससे कम कीमत मिल रही है। उन्होंने भावांतर योजना की राशि तुरंत किसानों के खातों में डालने की मांग की।

पटवारी ने 7 मई को बड़वानी से मुरैना तक चक्का जाम का ऐलान करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसानों के हित में होगा, भले ही इससे आमजन को असुविधा उठानी पड़े। न्याय व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है। इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह से मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने उनके काम की सराहना की है। पटवारी ने कहा कि वे प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर प्रदेश की स्थिति से अवगत कराएंगे।

संपूर्ण समाधान दिवस में आयुक्त सख्त, 3 दिन में निस्तारण के निर्देश; दोषी मिलने पर एफआईआर की चेतावनी

*कर्नलगंज तहसील पहुंचकर आयुक्त ने सुनी आमजनों की समस्याएं, अधिकारियों को दिए निस्तारण के निर्देश*


*8 मई को आयुक्त श्रावस्ती में करेंगी संध्या संवाद कार्यक्रम*


*गोण्डा 2 मई 2026*  -  कर्नलगंज तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान आयुक्त देवीपाटन मंडल दुर्गा शक्ति नागपाल ने जनसमस्याओं को सुना एवं उसके त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर जोर देते हुए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिकायतों के समाधान में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सम्पूर्ण समाधान दिवस में कर्नलगंज निवासिनी रेखा रानी ने आयुक्त को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उनके पति की सर्पदंश से मृत्यु के बाद उन्होंने राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना और विधवा पेंशन के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था, लेकिन अब तक लाभ नहीं मिला। साथ ही बताया कि लेखपाल द्वारा जानबूझकर योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है। इस पर आयुक्त ने तत्काल संज्ञान लेते हुए एसडीएम को निर्देश दिया कि तीन दिन के भीतर जांच कर पीड़िता को लाभ दिलाया जाए एवं दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज कराई जाए।

कटरा बाजार निवासी पंकज कुमार वर्मा ने घर के सामने लगे इंडिया मार्का हैंडपंप के लंबे समय से खराब होने की शिकायत की। इस पर आयुक्त ने बीडीओ कटरा बाजार को निर्देशित किया कि मामले की जांच कर तत्काल हैंडपंप चालू कराया जाए और रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

वहीं हलधरमऊ निवासी राजेश कुमार ने अपनी चार बीघा जमीन के अंश निर्धारण में गड़बड़ी की शिकायत की। उन्होंने बताया कि सभी बैनामा दस्तावेज देने के बावजूद हल्का लेखपाल द्वारा अब तक सही अंश निर्धारण नहीं किया गया है। इस पर आयुक्त ने एसडीएम को निर्देश दिया कि मामले की तुरंत जांच कराकर सही अंश निर्धारण सुनिश्चित किया जाए।

आयुक्त ने संपूर्ण समाधान दिवस से संबंधित रजिस्टर में दर्ज विवरण अधूरा पाए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने सम्बन्धित को निर्देशित किया कि सभी विवरण एक सप्ताह के भीतर रजिस्टर में अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए। साथ ही एसडीएम से कहा कि जो लेखपाल, सचिव या अन्य कोई अधिकारी अथवा कर्मचारी शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक देरी करें, उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।



*श्रावस्ती में 8 मई को ‘संध्या संवाद कार्यक्रम’, जनसुनवाई से लाभ वितरण तक आयोजन*

आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देशों के क्रम में 8 मई को जनपद श्रावस्ती में ‘संध्या संवाद कार्यक्रम’ आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत दिनभर आमजन की समस्याओं के समाधान, विकास कार्यों के निरीक्षण और योजनाओं के लाभ वितरण की व्यवस्था रहेगी। कार्यक्रम के अनुसार सुबह 10 से 12 बजे तक जनसुनवाई होगी, जबकि 12 से 1 बजे तक कर्मचारियों, पेंशनरों व वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं का निस्तारण किया जाएगा। दोपहर 2 से 4 बजे तक निर्माणाधीन एवं पूर्ण परियोजनाओं की गुणवत्ता जांच और स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। शाम 5 से 7 बजे तक चयनित ग्राम पंचायत में ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा। साथ ही शिविर लगाकर पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से संतृप्त कर प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे। आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पारदर्शिता के साथ समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
हर तीन महीने में यूनिट टेस्ट देना अनिवार्य पहला टेस्ट जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगा

*जुलाई में पहला टेस्ट ,9 वीं से 12 वीं तक लागू होगी न‌ई व्यवस्था*



रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने नए शैक्षिक सत्र से परीक्षा प्रणाली में अहम बदलाव किया है। अब कक्षा नौ से 12 तक के छात्रों के लिए साल भर मूल्यांकन की नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। विद्यार्थियों को केवल वार्षिक परीक्षा पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि हर तीन महीने में अनिवार्य रूप से यूनिट टेस्ट देना पड़ेगा। इसी क्रम में पहला यूनिट टेस्ट जुलाई के दूसरे सप्ताह में आयोजित किया जाएगा।नई व्यवस्था के तहत जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों में यह प्रणाली लागू होगी। यूनिट टेस्ट में बहुविकल्पीय प्रश्नों (एमसीक्यू) को विशेष प्राथमिकता दी गई है। ताकि विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता और त्वरित निर्णय लेने की योग्यता का आकलन किया जा सके। इसके साथ ही नियमित परीक्षा के माध्यम से छात्रों का समय-समय पर मूल्यांकन भी संभव हो सकेगा। जिला विद्यालय निरीक्षक अंशुमान ने बताया कि नई व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप तैयार करना है। स्कूलों को समयबद्ध तरीके से पाठ्यक्रम पूरा कराने और नए परीक्षा पैटर्न के अनुसार छात्रों को अभ्यास कराने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली से विद्यार्थियों पर परीक्षा का दबाव कम होगा, क्योंकि पूरे साल छोटे-छोटे चरणों में मूल्यांकन होगा। इससे अंतिम परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की संभावना भी बढ़ेगी।
कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी

नितेश श्रीवास्तव


भदोही। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में चयनित 45 आंगनबाड़ी सहायिकाएं कार्यभार ग्रहण करने नहीं आ रही हैं। करीब डेढ़ महीने बाद भी नियुक्ति पत्र न लेने पर विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। सभी को दूसरा नोटिस जारी कर उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। आगाह किया गया है कि कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखापढ़ी की जाएगी।जिले में कुल 1492 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। यहां ढाई हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं तैनात हैं। 60 साल से अधिक उम्र पूरी करने वाली 100 से ज्यादा सहायिकाएं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। केंद्रों के बेहतर संचालन के लिए दो महीने पूर्व 346 सहायिकाओं की नियुक्ति की गई। इनमें 45 सहायिकाएं परियोजना कार्यालय ही नहीं पहुंचीं। जिला कार्यक्रम अधिकारी दिनेश कुमार मिश्र ने बताया कि 45 आंगनवाड़ी सहायिकाओं ने अब तक या तो नियुक्ति पत्र प्राप्त नहीं किया है अथवा प्राप्त करने के बाद अपने पद पर कार्यभार ग्रहण नहीं की हैं। इस संबंध में संबंधित सहायिकाओं को नोटिस जारी किया गया है। एक सप्ताह में कार्यभार ग्रहण न करने पर उनके खिलाफ लिखापढ़ी की जाएगी। इनमें अभोली ब्लॉक में दो, औराई में पांच, भदोही में 13, ज्ञानपुर में तीन, डीघ में नौ, सुरियावां में छह सहायिकाएं शामिल हैं।
शासन के मंशानुरूप जनपद के सभी तहसीलों में आयोजित हुआ सम्पूर्ण समाधान दिवस
*संपूर्ण समाधान दिवस तहसील भदोही में जिलाधिकारी ने कुल 36 मामलों में तत्काल टीमों को स्थलीय मुआयना करा 07 का कराया त्वरित निस्तारण*

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। जन शिकायतो के त्वरित निस्तारण एवं कार्यवाही के दृष्टिगत जिलाधिकारी शैलेष कुमार के कुशल मार्गदर्शन में ‘‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’’ जनपद के सभी तहसीलों में आयोजित किया गया। तहसील भदोही में जिलाधिकारी शैलेष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी बाल गोविन्द शुक्ल, उप जिलाधिकारी अरुण गिरि, पुलिस क्षेत्राधिकारी, तहसील औराई में अपर जिलाधिकारी वि0 रा0 कुंवर वीरेन्द्र मौर्य, उप जिलाधिकारी श्याममणि त्रिपाठी, तहसील ज्ञानपुर में उप जिलाधिकारी भानसिंह, तहसीलदार एवं अन्य अधिकारियो द्वारा सम्पूर्ण समाधान दिवस में उपस्थित होकर फ़रियादियों की समस्याओ को गंभीरता से सुनकर निस्तारण किया गया।
            जिलाधिकारी ने अंतरविभागीय समन्वय स्थापित करते हुए प्रत्येक राजस्व व पुलिस टीम के लीडर के रूप में एक-एक जनपदीय अधिकारी को नामित करते हुए निर्देशन किया कि टीम लीडर तत्काल उसी दिन प्रकरण का स्थलीय मुआयना करते हुए निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
          जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने सभी जनपद स्तरीय अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि शिकायतों का निस्तारण करने हेतु शिकायतकर्ता से बात करें, मौके पर जाये, स्पष्ट रूप से आख्या लिखे, कागजी खानापूर्ति न करें। शिकायतों को पारदर्शी ढंग से गुणवत्तानुरूण निस्तारण कराये,अन्यथा सख्त कार्यवाही की जायेगी। तहसील भदोही सम्पूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी शैलेष कुमार द्वारा सुनवाई के दौरान दूर-दराज से आये फरियादियों के कुल 36 प्रार्थना पत्रों में से 07 मामलों में त्वरित संयुक्त टीम भेज कर निस्तारण किये गये, शेष प्रकरण में राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीम बनाते हुए समय-सीमा में समाधान करने का निर्देश दिया।
            सभी तहसीलों में जिलाधिकारी के निर्देश के क्रम मेें सुशासन आधारित लगायें गये विभिन्न कैम्पो-बाल विकास पुष्टाहार विभाग, आयुष्मान गोल्डेन कार्ड, परिवार नियोजन, समाज कल्याण विभाग द्वारा वृद्धावस्था पेंशन, महिला कल्याण विभाग द्वारा महिलाओं एवं बालिकाओं के उन्नयन हेतु विविध योजना मिशन शक्ति, राजस्व विभाग हेल्प डेस्क, जागरूकता हेतु लगाये गये।
           जिलाधिकारी ने तहसील भदोही के संपूर्ण समाधान दिवस में फरियादियों की शिकायतों को गंभीरता से सुनकर त्वरित निस्तारण करते हुए सुशासन को स्थापित किया, साथ ही आईजीआरएस में प्राप्त लोक शिकायतों का निस्तारण, ऑनलाईन ‘‘सर्विस डिलीवरी’’ की सेवाओं में वृद्धि किया गया। जिलाधिकारी ने फरियादियों की शिकायतों को गम्भीरता से सुनते हुए गुणवत्तापूर्ण व समयबद्ध समाधान करने का निर्देश दिया। कानूनगो व लेखपाल को निर्देशित किया कि जमीन सम्बन्धी मामले में पुलिस टीम के साथ समन्वय व सहयोग बनाते हुए निस्तारण सुनिश्चित कराये। उन्होंने उपस्थित सभी अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि कुछ ऐसे मामले होते है जो दो या तीन विभागों के मध्य संयुक्त रहता है। सम्पूर्ण समाधान दिवस एक ऐसा सुअवसर होता है जहा पर एक ही दिन, एक ही निश्चित समय पर सभी जनपदीय अधिकारी उपस्थित होते है। अर्न्तविभागीय समन्वय स्थापित करते हुयें ऐसे सभी मामलों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाय। उन्होने अधिकारियों को निर्देशित करते हुये कहा कि प्रदेश सरकार की मंशानुरूप जनता जनार्दन को अपने तहसील स्तर पर ही उनकी शिकायतों का निस्तारण करना सुनिश्चित किया जाएं। उन्होंने कहा कि संपूर्ण समाधान दिवस द्वारा शासन त्वरित व गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए प्रतिबद्ध है। तहसील दिवस में आए जनता की समस्याओं का पुलिस व राजस्व अधिकारी संयुक्त रूप से स्थलीय निरीक्षण करते हुए न्यायोचित निस्तारण कराना सुनिश्चित करें।
        जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी कार्यालयाध्यक्ष अपने विभाग स्तर पर ही शिकायतकर्ताओं को संतुष्टि के साथ शिकायत निस्तारण सुनिश्चित करें। यदि प्राथमिक स्तर पर ही विकास खण्ड कार्यालय, उप जिलाधिकारी कार्यालय व विभागाध्यक्ष द्वारा गुणवत्ता व संतुष्टिपरक समय-सीमा में शिकायतों का निस्तारण कर लिया जाय तो फरियादियों को जिलाधिकारी, मण्डलायुक्त व सीएम पोर्टल पर शिकायत करने की स्थिति ही नही आयेगी।
        जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने फार्मर रजिस्ट्री में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लेखपाल श्रीमती निधि शुक्ला, शकील अहमद, किशन गुप्ता, व कृषि विभाग के कर्मचारी सुरेश यादव को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि ऐसी लगन के साथ और भी कर्मचारी कार्य करें।
           तहसील औराई में उप जिलाधिकारी श्याममणि त्रिपाठी के समक्ष फरियादियों में कुल 32 में 05 का निस्तारण किया तथा तहसील ज्ञानपुर उप जिलाधिकारी भानसिंह के समक्ष कुल 24 में से 04 का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया और शेष शिकायतों को संबंधित विभागों को भेजकर निस्तारण करने का निर्देश दिया गया।
कमर्शियल सिलेंडर के दाम बताए जाने की मांग व्यापार मंडल ने की


बलरामपुर तुलसीपुर - महंगाई के इस दौर में कामर्शियल व पांच किग्रा वाले गैस सिलिंडरों में की गई बढोत्तरी पर पुनर्विचार करने की मांग उ.प्र.उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारियों ने की है।
  महामन्त्री रूप चन्द्र गुप्ता ने बताया कि कामर्शियल सिलिंडरों के दाम बढ़ने का सीधा असर होटल,रेस्टोरेंट,खोमचे व रेहड़ी पटरी पर खाने पीने की वस्तुएं बेचने वालों पर पड़ेगा। जिसके चलते उनकी लागत बढ़ जाएगी आय एवं ग्राहक भी प्रभावित होंगे।
अध्यक्ष श्याम बिहारी अग्रहरि ने कहा कि खान-पान का कारोबार करने वालों की चिंता बढ़ गई है ऐसे में छोटे व ठेले वालों का व्यापार बन्द होने के कगार पर है।ऐसे कारोबार करने वालों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार व पेट्रोलियम कम्पनियों को मूल्यों में बढोत्तरी पर पुनर्विचार करना चाहिए तथा पाँच किग्रा वाले छोटे सिलिंडरों सब्सिडी जारी रखी जाए या बढ़ाई जाए,कामर्शियल सिलिंडरों के दामों में कमी की जाए व छोटे व्यापारियों को कनेक्शन लेने पर छूट व अतिरिक्त सब्सिडी की सुविधा दी जाए।
महुगढ़ी के मुरलिया जंगल में पलाश पेड़ से लटकता मिला युवक का शव, परिजनों में कोहराम
ड्रमंड गंज मिर्जापुर
क्षेत्र के महुगढ़ी गांव के मुरलिया जंगल में शनिवार सुबह पलाश के पेड़ में संदिग्ध परिस्थितियों में युवक शव लटकता मिलने की सूचना पर ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। जंगल में मवेशियों को चराने गए चरवाहों ने युवक का पलाश के पेड़ से लटकता शव दिखाई देने पर ग्रामीणों को इसकी सूचना दी। सूचना पर सुबह 11 बजे के करीब जंगल में पहुंचे थानाध्यक्ष भारत सुमन एसआई विनोद सिंह, एसआई शिवाकांत पांडेय,पुनीत गुप्ता ने घटना की जांच करते हुए पेड़ पर लटकते शव को नीचे उतरवाया। युवक का शव पलाश के पेड़ पर जमीन से करीब दस फीट ऊपर नायलान की रस्सी से लटक रहा था। मृतक युवक की शिनाख्त पंचराज उर्फ निरहू निवासी अंतरी सिकटा के रूप में हुई।पलाश के पेड़ के नीचे पुलिस को एक बैग मिला जिसमें मृतक ने अपने कपड़े रखे थे।हलिया क्षेत्र के सिकटा ग्राम पंचायत के अंतरी गांव निवासी राजू वर्मा का 22 वर्षीय पुत्र पंचराज उर्फ निरहू शुक्रवार शाम को बाइक से अपने ननिहाल महुगढ़ी गांव आया था। जहां कुछ देर रूकने के बाद ननिहाल में अपनी बाइक खड़ी कर अपने मामा भगवादास से यह कहकर निकला कि आर्केस्ट्रा में काम करने जा रहे हैं। शनिवार सुबह ननिहाल से तीन किलोमीटर दूर मुरलिया पहाड़ के जंगल में पेड़ से लटकता शव मिलने की सूचना पर ननिहाल में मातम छा गया। युवक ने जंगल में पहुंचकर गले में फंदा लगाकर जान क्यों दी ननिहाल पक्ष के लोगों को कुछ समझ में नही आ रहा है। बेटे की मौत की खबर पाकर पिता राजू और मां अमरावती देवी रोते-बिलखते हुए महुगढ़ी गांव पहुंची। युवक पांच बहनों में सबसे बड़ा और अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था।  स्वजनों ने बताया कि मृतक अविवाहित था और आर्केस्ट्रा में नर्तक का कार्य करता था। वहीं महुगढ़ी गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर जंगल में फंदे से लटका शव मिलने पर तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं। थानाध्यक्ष भारत सुमन ने बताया कि ननिहाल में आए युवक ने जंगल में पेड़ से फंदा लगाकर आत्महत्या कर लिया है।प्रथम दृष्टया मामला आत्म हत्या का प्रतीत हो रहा है। युवक ने पलाश के पेड़ की डाली में नायलान की रस्सी से गले में फंदा लगाकर जान दे दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।घटना की बारीकी से जांच की जा रही है।

-दो माह पूर्व देवहट के हरदी जंगल में अधेड़ का पेड़ से लटकता हुआ मिला था शव

क्षेत्र के देवहट गांव के हरदी जंगल में बीते 1 फरवरी को देवहट गांव के खरका बस्ती निवासी दुलारमनि कोल का भी संदिग्ध परिस्थितियों में पलाश के पेड़ से लटकता शव मिला था। लेकिन आज तक इस घटना का पुलिस खुलासा नही कर सकी।
अवैध शराब के अड्डों पर छापामार कार्रवाई की गई, 80 किलो लहन किया नष्ट, शराब की बरामद
फर्रुखाबाद lआबकारी आयुक्त के आदेश और जिलाधिकारी डॉ० अंकुर लाठर के निर्देश पर जनपद में अवैध मदिरा के निर्माण, बिक्री के विरुद्ध सघन छापामार अभियान जारी रहेगा l इस दौरान जिला आबकारी अधिकारी जी० पी० गुप्ता के निर्देश पर छापामार अभियान के अंतर्गत आबकारी निरीक्षक क्षेत्र कुमार गौरव सिंह द्वारा अपनी टीम के साथ संदिग्ध ग्राम लकूला में सघन दबिश एवं छापेमारी की कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान अवैध मदिरा निर्माण से जुड़े संदिग्ध स्थानों एवं अड्डों की गहन तलाशी ली गई। मौके पर लगभग 80 किलोग्राम लहन (अवैध शराब बनाने हेतु प्रयुक्त कच्चा माल) को नष्ट किया गया तथा 18 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद की गई। इस संबंध में एक अभियोग पंजीकृत कर कार्रवाई की गई । इसके अतिरिक्त क्षेत्र में स्थित कबाड़ी की दुकानों पर भी सघन चेकिंग अभियान चलाया गया इस दौरान आबकारी दुकानों—बाग लकूला कम्पोजिट, बाग लकूला देशी, आवास विकास मॉडल शॉप एवं आवास विकास देशी का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान स्टॉक रजिस्टर, पीओएस मशीन के माध्यम से बिक्री, ऑनलाइन भुगतान प्रणाली तथा सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता का परीक्षण किया गया। साथ ही देशी मदिरा दुकानों की कैंटीन व्यवस्था की भी गहन जांच की गई। जनपद में अवैध मदिरा के विरुद्ध यह छापामार अभियान आगे भी निरंतर एवं प्रभावी रूप से जारी रहेगा तथा इसमें संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
समाधान दिवस में शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी ने लेखपाल और ग्राम पंचायत अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश

फर्रूखाबाद l  तहसील अमृतपुर में सम्पूर्ण समाधान दिवस का जिलाधिकारी  डॉक्टर अंकुर लाठर की अध्यक्षता में आयोजन किया गया। समाधान दिवस के दौरान जनसामान्य की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनके त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए।
इस दौरान विभिन्न विभागों से संबंधित 114 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें राजस्व विभाग की 48, पुलिस विभाग की 22, विद्युत विभाग की 03, विकास विभाग की 18, खाद्य एवं रसद विभाग की 05 तथा अन्य विभागों की 13 शिकायतें शामिल रहीं। मौके पर 02 शिकायतों का निस्तारण किया गया। जिलाधिकारी द्वारा प्राप्त शिकायतों में से 05 महत्वपूर्ण प्रकरणों पर उसी दिन सायं तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी ने कार्यों में लापरवाही बरतने पर कड़ा रुख अपनाते हुए लेखपाल उत्कर्ष दुबे एवं ग्राम विकास अधिकारी मानेंद्र सिंह को निलंबित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राप्त शिकायतों का निस्तारण शासन की मंशा के अनुरूप प्राथमिकता के आधार पर एवं निर्धारित समयसीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि समाधान दिवस का उद्देश्य जनता को त्वरित न्याय एवं राहत प्रदान करना है, इसलिए सभी अधिकारी इस कार्य को गंभीरता से लें।
उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता बनाए रखी जाए तथा शिकायतकर्ता को संतोषजनक समाधान उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा कर शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारी द्वारा सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान 03 लाभार्थियों को मौके पर ही आयुष्मान कार्ड बनवाकर वितरित किए गए।
इस मौके पर पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उप जिलाधिकारी अमृतपुर सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
RSF की प्रेस स्वतंत्रता रिपोर्ट: वैश्विक पैमाना या भारत की अधूरी तस्वीर?

डॉ. पंकज सोनी

Reporters Without Borders (RSF) की सालाना रिपोर्ट पर भरोसा करने से पहले एक बुनियादी सवाल है—यह बनती कैसे है? किसके संसाधनों से, किन स्रोतों के आधार पर और किस दृष्टिकोण के साथ? 140 करोड़ की आबादी, दर्जनों भाषाओं और सैकड़ों संस्कृतियों वाले भारत की प्रेस स्वतंत्रता क्या पेरिस में बैठकर तैयार प्रश्नावलियों से मापी जा सकती है?

हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पेरिस स्थित एक NGO Reporters Without Borders (RSF) अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी करता है। इस रिपोर्ट में भारत का स्थान प्रायः 150 के बाद ही दिखाई देता है। 2026 की रिपोर्ट में भारत 157वें स्थान पर है, जबकि 2025 में भी यही रैंक और 2024 में 159वां स्थान था।

रिपोर्ट आते ही देश का एक वर्ग चिंतित स्वर में कहता है—“लोकतंत्र खतरे में है”, “पत्रकारिता समाप्त हो रही है”, “प्रेस पर दबाव बढ़ गया है।” लेकिन इन प्रतिक्रियाओं के बीच एक मूल प्रश्न अक्सर अनदेखा रह जाता है—यह सूचकांक तैयार कैसे होता है? भारत इसमें लगातार पीछे क्यों रहता है?

दरअसल, RSF एक फ्रांसीसी गैर-सरकारी संगठन है, जिसकी फंडिंग के स्रोत पूरी तरह पारदर्शी नहीं माने जाते। यूरोपीय सरकारें और कुछ निजी फाउंडेशन इसे सहयोग देते हैं। इसका प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक मुख्यतः सर्वेक्षण, धारणाओं और सीमित केस स्टडी पर आधारित होता है। यह कोई पूर्णतः वैज्ञानिक या वस्तुनिष्ठ मापदंड नहीं, बल्कि चुनिंदा लोगों की राय का संकलन है, जिसमें पश्चिमी उदारवादी मूल्यों को पत्रकारिता का मानक मान लिया जाता है।

यहीं एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है—क्या इतने विशाल और विविध देश की मीडिया स्वतंत्रता का आकलन सीमित प्रश्नावलियों के आधार पर किया जा सकता है? भारत में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन यहाँ के संविधान, न्यायपालिका और नागरिक अधिकारों के संदर्भ में होना चाहिए, न कि केवल किसी बाहरी संस्था के आकलन से।

इस रिपोर्ट का एक बड़ा विरोधाभास यह भी है कि इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों को कई बार भारत से बेहतर स्थान दिया गया है। पाकिस्तान में पत्रकारों के लापता होने, मीडिया पर सैन्य दबाव और वरिष्ठ पत्रकार Arshad Sharif की हत्या जैसी घटनाएं व्यापक रूप से सामने आ चुकी हैं। वहीं बांग्लादेश में डिजिटल सुरक्षा कानून के तहत पत्रकारों पर कार्रवाई के मामले भी सामने आए हैं। ऐसे में यह तुलना स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े करती है।

वैश्विक स्तर पर भी मीडिया स्वतंत्रता की स्थिति जटिल है। अमेरिका में Julian Assange के खिलाफ लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई चली। पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने मीडिया को “एनिमी ऑफ द पीपल” तक कहा। रूस और चीन में मीडिया पर राज्य का प्रभाव जगजाहिर है। इसके बावजूद RSF रैंकिंग में इन देशों की स्थिति अपेक्षाकृत कम आलोचनात्मक दिखाई देती है, जिससे भू-राजनीतिक पूर्वाग्रह की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

International Federation of Journalists (IFJ) के अनुसार 2025 में दुनिया भर में 128 पत्रकारों की हत्या हुई, जिनमें अधिकांश मध्य-पूर्व और संघर्ष क्षेत्रों से थे। भारत में ऐसे मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, और हर घटना पर न्यायिक व प्रशासनिक प्रक्रिया सक्रिय होती है।

भारत की जमीनी तस्वीर देखें तो यहाँ 900 से अधिक सैटेलाइट चैनल, 17,000 से ज्यादा पंजीकृत समाचारपत्र और लाखों डिजिटल प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं। अनेक मीडिया संस्थान सरकार की खुलकर आलोचना करते हैं और निर्बाध रूप से कार्य कर रहे हैं। संसद, न्यायपालिका और सोशल मीडिया—तीनों स्तरों पर अभिव्यक्ति की विविधता स्पष्ट दिखाई देती है।

हालाँकि, भारतीय पत्रकारिता की एक चुनौती यह भी है कि बिना प्रशिक्षण या मान्यता के बड़ी संख्या में लोग मीडिया के नाम पर सक्रिय हो गए हैं। कुछ मामलों में यह स्थिति अव्यवस्था और अविश्वसनीयता को जन्म देती है, जो समग्र तस्वीर को प्रभावित करती है।

RSF की निष्पक्षता पर सवाल केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। The GuardianGlobal Times और अन्य संस्थानों द्वारा इसके वित्तीय स्रोतों व दृष्टिकोण पर प्रश्न उठाए गए हैं। यहाँ तक कि Encyclopaedia Britannica में भी कुछ संदर्भों में इसके संभावित पक्षपात का उल्लेख मिलता है।

स्पष्ट है कि RSF का सूचकांक एक उपयोगी संकेतक हो सकता है, लेकिन इसे अंतिम सत्य मानना उचित नहीं। उतना ही गलत इसे पूरी तरह खारिज कर देना भी होगा।

भारत जैसे विशाल और विविध लोकतंत्र में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन बहुआयामी दृष्टिकोण से ही संभव है—जहाँ वैश्विक सूचकांक, स्थानीय वास्तविकता और संस्थागत अनुभव, तीनों को संतुलित रूप से समझा जाए।

(लेखक जनसंपर्क विभाग भोपाल में सहायक मीडिया सलाहकार हैं और यह इनके व्यक्तिगत विचार हैं।)

प्रदेश सरकार फेल, जनता की जान से खिलवाड़”- जीतू पटवारी का हमला

- जहरीले पानी, हादसों और किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरा

- 7 मई को बड़वानी से मुरैना तक चक्का जाम करने का किया ऐलान

भोपाल, प्रतिनिधि। मध्यप्रदेश में विपक्ष ने एक बार फिर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में “जनता की जान से खिलवाड़” किया जा रहा है। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में पानी जैसी बुनियादी जरूरत भी सुरक्षित नहीं रह गई है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में जहरीले पानी के कारण 36 लोगों की मौत हुई, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं।

बरगी बांध की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां 9 लोगों की मौत हुई, लेकिन सरकार की ओर से संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मां-बेटे के शव निकाले जा रहे थे, उस समय मुख्यमंत्री अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त थे। परिवहन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पटवारी ने कहा कि नियमों की अनदेखी के कारण आदिवासी क्षेत्रों में लोग ट्रकों और बसों की छतों पर सफर करने को मजबूर हैं, जिससे हादसे बढ़ रहे हैं। इसे उन्होंने सरकार की नीतिगत विफलता बताया।

किसानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 2700 रुपये और धान का 3100 रुपये देने का वादा किया था, लेकिन किसानों को इससे कम कीमत मिल रही है। उन्होंने भावांतर योजना की राशि तुरंत किसानों के खातों में डालने की मांग की।

पटवारी ने 7 मई को बड़वानी से मुरैना तक चक्का जाम का ऐलान करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसानों के हित में होगा, भले ही इससे आमजन को असुविधा उठानी पड़े। न्याय व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है। इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह से मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने उनके काम की सराहना की है। पटवारी ने कहा कि वे प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर प्रदेश की स्थिति से अवगत कराएंगे।

संपूर्ण समाधान दिवस में आयुक्त सख्त, 3 दिन में निस्तारण के निर्देश; दोषी मिलने पर एफआईआर की चेतावनी

*कर्नलगंज तहसील पहुंचकर आयुक्त ने सुनी आमजनों की समस्याएं, अधिकारियों को दिए निस्तारण के निर्देश*


*8 मई को आयुक्त श्रावस्ती में करेंगी संध्या संवाद कार्यक्रम*


*गोण्डा 2 मई 2026*  -  कर्नलगंज तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान आयुक्त देवीपाटन मंडल दुर्गा शक्ति नागपाल ने जनसमस्याओं को सुना एवं उसके त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर जोर देते हुए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिकायतों के समाधान में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सम्पूर्ण समाधान दिवस में कर्नलगंज निवासिनी रेखा रानी ने आयुक्त को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उनके पति की सर्पदंश से मृत्यु के बाद उन्होंने राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना और विधवा पेंशन के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था, लेकिन अब तक लाभ नहीं मिला। साथ ही बताया कि लेखपाल द्वारा जानबूझकर योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है। इस पर आयुक्त ने तत्काल संज्ञान लेते हुए एसडीएम को निर्देश दिया कि तीन दिन के भीतर जांच कर पीड़िता को लाभ दिलाया जाए एवं दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज कराई जाए।

कटरा बाजार निवासी पंकज कुमार वर्मा ने घर के सामने लगे इंडिया मार्का हैंडपंप के लंबे समय से खराब होने की शिकायत की। इस पर आयुक्त ने बीडीओ कटरा बाजार को निर्देशित किया कि मामले की जांच कर तत्काल हैंडपंप चालू कराया जाए और रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

वहीं हलधरमऊ निवासी राजेश कुमार ने अपनी चार बीघा जमीन के अंश निर्धारण में गड़बड़ी की शिकायत की। उन्होंने बताया कि सभी बैनामा दस्तावेज देने के बावजूद हल्का लेखपाल द्वारा अब तक सही अंश निर्धारण नहीं किया गया है। इस पर आयुक्त ने एसडीएम को निर्देश दिया कि मामले की तुरंत जांच कराकर सही अंश निर्धारण सुनिश्चित किया जाए।

आयुक्त ने संपूर्ण समाधान दिवस से संबंधित रजिस्टर में दर्ज विवरण अधूरा पाए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने सम्बन्धित को निर्देशित किया कि सभी विवरण एक सप्ताह के भीतर रजिस्टर में अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए। साथ ही एसडीएम से कहा कि जो लेखपाल, सचिव या अन्य कोई अधिकारी अथवा कर्मचारी शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक देरी करें, उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।



*श्रावस्ती में 8 मई को ‘संध्या संवाद कार्यक्रम’, जनसुनवाई से लाभ वितरण तक आयोजन*

आयुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देशों के क्रम में 8 मई को जनपद श्रावस्ती में ‘संध्या संवाद कार्यक्रम’ आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत दिनभर आमजन की समस्याओं के समाधान, विकास कार्यों के निरीक्षण और योजनाओं के लाभ वितरण की व्यवस्था रहेगी। कार्यक्रम के अनुसार सुबह 10 से 12 बजे तक जनसुनवाई होगी, जबकि 12 से 1 बजे तक कर्मचारियों, पेंशनरों व वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं का निस्तारण किया जाएगा। दोपहर 2 से 4 बजे तक निर्माणाधीन एवं पूर्ण परियोजनाओं की गुणवत्ता जांच और स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। शाम 5 से 7 बजे तक चयनित ग्राम पंचायत में ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा। साथ ही शिविर लगाकर पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से संतृप्त कर प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे। आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पारदर्शिता के साथ समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
हर तीन महीने में यूनिट टेस्ट देना अनिवार्य पहला टेस्ट जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगा

*जुलाई में पहला टेस्ट ,9 वीं से 12 वीं तक लागू होगी न‌ई व्यवस्था*



रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने नए शैक्षिक सत्र से परीक्षा प्रणाली में अहम बदलाव किया है। अब कक्षा नौ से 12 तक के छात्रों के लिए साल भर मूल्यांकन की नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। विद्यार्थियों को केवल वार्षिक परीक्षा पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि हर तीन महीने में अनिवार्य रूप से यूनिट टेस्ट देना पड़ेगा। इसी क्रम में पहला यूनिट टेस्ट जुलाई के दूसरे सप्ताह में आयोजित किया जाएगा।नई व्यवस्था के तहत जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों में यह प्रणाली लागू होगी। यूनिट टेस्ट में बहुविकल्पीय प्रश्नों (एमसीक्यू) को विशेष प्राथमिकता दी गई है। ताकि विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता और त्वरित निर्णय लेने की योग्यता का आकलन किया जा सके। इसके साथ ही नियमित परीक्षा के माध्यम से छात्रों का समय-समय पर मूल्यांकन भी संभव हो सकेगा। जिला विद्यालय निरीक्षक अंशुमान ने बताया कि नई व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप तैयार करना है। स्कूलों को समयबद्ध तरीके से पाठ्यक्रम पूरा कराने और नए परीक्षा पैटर्न के अनुसार छात्रों को अभ्यास कराने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली से विद्यार्थियों पर परीक्षा का दबाव कम होगा, क्योंकि पूरे साल छोटे-छोटे चरणों में मूल्यांकन होगा। इससे अंतिम परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की संभावना भी बढ़ेगी।
कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी

नितेश श्रीवास्तव


भदोही। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में चयनित 45 आंगनबाड़ी सहायिकाएं कार्यभार ग्रहण करने नहीं आ रही हैं। करीब डेढ़ महीने बाद भी नियुक्ति पत्र न लेने पर विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। सभी को दूसरा नोटिस जारी कर उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। आगाह किया गया है कि कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखापढ़ी की जाएगी।जिले में कुल 1492 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। यहां ढाई हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं तैनात हैं। 60 साल से अधिक उम्र पूरी करने वाली 100 से ज्यादा सहायिकाएं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। केंद्रों के बेहतर संचालन के लिए दो महीने पूर्व 346 सहायिकाओं की नियुक्ति की गई। इनमें 45 सहायिकाएं परियोजना कार्यालय ही नहीं पहुंचीं। जिला कार्यक्रम अधिकारी दिनेश कुमार मिश्र ने बताया कि 45 आंगनवाड़ी सहायिकाओं ने अब तक या तो नियुक्ति पत्र प्राप्त नहीं किया है अथवा प्राप्त करने के बाद अपने पद पर कार्यभार ग्रहण नहीं की हैं। इस संबंध में संबंधित सहायिकाओं को नोटिस जारी किया गया है। एक सप्ताह में कार्यभार ग्रहण न करने पर उनके खिलाफ लिखापढ़ी की जाएगी। इनमें अभोली ब्लॉक में दो, औराई में पांच, भदोही में 13, ज्ञानपुर में तीन, डीघ में नौ, सुरियावां में छह सहायिकाएं शामिल हैं।
शासन के मंशानुरूप जनपद के सभी तहसीलों में आयोजित हुआ सम्पूर्ण समाधान दिवस
*संपूर्ण समाधान दिवस तहसील भदोही में जिलाधिकारी ने कुल 36 मामलों में तत्काल टीमों को स्थलीय मुआयना करा 07 का कराया त्वरित निस्तारण*

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। जन शिकायतो के त्वरित निस्तारण एवं कार्यवाही के दृष्टिगत जिलाधिकारी शैलेष कुमार के कुशल मार्गदर्शन में ‘‘सम्पूर्ण समाधान दिवस’’ जनपद के सभी तहसीलों में आयोजित किया गया। तहसील भदोही में जिलाधिकारी शैलेष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी बाल गोविन्द शुक्ल, उप जिलाधिकारी अरुण गिरि, पुलिस क्षेत्राधिकारी, तहसील औराई में अपर जिलाधिकारी वि0 रा0 कुंवर वीरेन्द्र मौर्य, उप जिलाधिकारी श्याममणि त्रिपाठी, तहसील ज्ञानपुर में उप जिलाधिकारी भानसिंह, तहसीलदार एवं अन्य अधिकारियो द्वारा सम्पूर्ण समाधान दिवस में उपस्थित होकर फ़रियादियों की समस्याओ को गंभीरता से सुनकर निस्तारण किया गया।
            जिलाधिकारी ने अंतरविभागीय समन्वय स्थापित करते हुए प्रत्येक राजस्व व पुलिस टीम के लीडर के रूप में एक-एक जनपदीय अधिकारी को नामित करते हुए निर्देशन किया कि टीम लीडर तत्काल उसी दिन प्रकरण का स्थलीय मुआयना करते हुए निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
          जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने सभी जनपद स्तरीय अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि शिकायतों का निस्तारण करने हेतु शिकायतकर्ता से बात करें, मौके पर जाये, स्पष्ट रूप से आख्या लिखे, कागजी खानापूर्ति न करें। शिकायतों को पारदर्शी ढंग से गुणवत्तानुरूण निस्तारण कराये,अन्यथा सख्त कार्यवाही की जायेगी। तहसील भदोही सम्पूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी शैलेष कुमार द्वारा सुनवाई के दौरान दूर-दराज से आये फरियादियों के कुल 36 प्रार्थना पत्रों में से 07 मामलों में त्वरित संयुक्त टीम भेज कर निस्तारण किये गये, शेष प्रकरण में राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीम बनाते हुए समय-सीमा में समाधान करने का निर्देश दिया।
            सभी तहसीलों में जिलाधिकारी के निर्देश के क्रम मेें सुशासन आधारित लगायें गये विभिन्न कैम्पो-बाल विकास पुष्टाहार विभाग, आयुष्मान गोल्डेन कार्ड, परिवार नियोजन, समाज कल्याण विभाग द्वारा वृद्धावस्था पेंशन, महिला कल्याण विभाग द्वारा महिलाओं एवं बालिकाओं के उन्नयन हेतु विविध योजना मिशन शक्ति, राजस्व विभाग हेल्प डेस्क, जागरूकता हेतु लगाये गये।
           जिलाधिकारी ने तहसील भदोही के संपूर्ण समाधान दिवस में फरियादियों की शिकायतों को गंभीरता से सुनकर त्वरित निस्तारण करते हुए सुशासन को स्थापित किया, साथ ही आईजीआरएस में प्राप्त लोक शिकायतों का निस्तारण, ऑनलाईन ‘‘सर्विस डिलीवरी’’ की सेवाओं में वृद्धि किया गया। जिलाधिकारी ने फरियादियों की शिकायतों को गम्भीरता से सुनते हुए गुणवत्तापूर्ण व समयबद्ध समाधान करने का निर्देश दिया। कानूनगो व लेखपाल को निर्देशित किया कि जमीन सम्बन्धी मामले में पुलिस टीम के साथ समन्वय व सहयोग बनाते हुए निस्तारण सुनिश्चित कराये। उन्होंने उपस्थित सभी अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि कुछ ऐसे मामले होते है जो दो या तीन विभागों के मध्य संयुक्त रहता है। सम्पूर्ण समाधान दिवस एक ऐसा सुअवसर होता है जहा पर एक ही दिन, एक ही निश्चित समय पर सभी जनपदीय अधिकारी उपस्थित होते है। अर्न्तविभागीय समन्वय स्थापित करते हुयें ऐसे सभी मामलों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाय। उन्होने अधिकारियों को निर्देशित करते हुये कहा कि प्रदेश सरकार की मंशानुरूप जनता जनार्दन को अपने तहसील स्तर पर ही उनकी शिकायतों का निस्तारण करना सुनिश्चित किया जाएं। उन्होंने कहा कि संपूर्ण समाधान दिवस द्वारा शासन त्वरित व गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए प्रतिबद्ध है। तहसील दिवस में आए जनता की समस्याओं का पुलिस व राजस्व अधिकारी संयुक्त रूप से स्थलीय निरीक्षण करते हुए न्यायोचित निस्तारण कराना सुनिश्चित करें।
        जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी कार्यालयाध्यक्ष अपने विभाग स्तर पर ही शिकायतकर्ताओं को संतुष्टि के साथ शिकायत निस्तारण सुनिश्चित करें। यदि प्राथमिक स्तर पर ही विकास खण्ड कार्यालय, उप जिलाधिकारी कार्यालय व विभागाध्यक्ष द्वारा गुणवत्ता व संतुष्टिपरक समय-सीमा में शिकायतों का निस्तारण कर लिया जाय तो फरियादियों को जिलाधिकारी, मण्डलायुक्त व सीएम पोर्टल पर शिकायत करने की स्थिति ही नही आयेगी।
        जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने फार्मर रजिस्ट्री में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लेखपाल श्रीमती निधि शुक्ला, शकील अहमद, किशन गुप्ता, व कृषि विभाग के कर्मचारी सुरेश यादव को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि ऐसी लगन के साथ और भी कर्मचारी कार्य करें।
           तहसील औराई में उप जिलाधिकारी श्याममणि त्रिपाठी के समक्ष फरियादियों में कुल 32 में 05 का निस्तारण किया तथा तहसील ज्ञानपुर उप जिलाधिकारी भानसिंह के समक्ष कुल 24 में से 04 का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया और शेष शिकायतों को संबंधित विभागों को भेजकर निस्तारण करने का निर्देश दिया गया।
कमर्शियल सिलेंडर के दाम बताए जाने की मांग व्यापार मंडल ने की


बलरामपुर तुलसीपुर - महंगाई के इस दौर में कामर्शियल व पांच किग्रा वाले गैस सिलिंडरों में की गई बढोत्तरी पर पुनर्विचार करने की मांग उ.प्र.उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारियों ने की है।
  महामन्त्री रूप चन्द्र गुप्ता ने बताया कि कामर्शियल सिलिंडरों के दाम बढ़ने का सीधा असर होटल,रेस्टोरेंट,खोमचे व रेहड़ी पटरी पर खाने पीने की वस्तुएं बेचने वालों पर पड़ेगा। जिसके चलते उनकी लागत बढ़ जाएगी आय एवं ग्राहक भी प्रभावित होंगे।
अध्यक्ष श्याम बिहारी अग्रहरि ने कहा कि खान-पान का कारोबार करने वालों की चिंता बढ़ गई है ऐसे में छोटे व ठेले वालों का व्यापार बन्द होने के कगार पर है।ऐसे कारोबार करने वालों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार व पेट्रोलियम कम्पनियों को मूल्यों में बढोत्तरी पर पुनर्विचार करना चाहिए तथा पाँच किग्रा वाले छोटे सिलिंडरों सब्सिडी जारी रखी जाए या बढ़ाई जाए,कामर्शियल सिलिंडरों के दामों में कमी की जाए व छोटे व्यापारियों को कनेक्शन लेने पर छूट व अतिरिक्त सब्सिडी की सुविधा दी जाए।