राजाओं की शिकारगाह से विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व तक, बांधवगढ़ की बेमिसाल संरक्षण यात्रा

जहां जंगलों की गूंजती दहाड़ आज सफल वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति संतुलन की मिसाल बन चुकी है

लेखक - पत्रकार सय्यद असीम अली

भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में शामिल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व आज केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध जैव विविधता, ऐतिहासिक विरासत और सफल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के कारण भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। घने जंगलों, प्राचीन पहाड़ियों, दुर्लभ वन्यजीवों और प्राकृतिक जल स्रोतों से भरपूर बांधवगढ़ आज प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों की पहली पसंद बन चुका है।

महाराजाओं की शिकारगाह से संरक्षण क्षेत्र तक का सफर

कभी बांधवगढ़ का जंगल Maharajas of Rewa की निजी शिकारगाह हुआ करता था। यहां राजघराने द्वारा शिकार अभियानों का आयोजन किया जाता था। इसी धरती ने दुनिया को प्रसिद्ध सफेद बाघ “Mohan” दिया, जिसे वर्ष 1951 में रीवा रियासत के महाराजा मार्तंड सिंह ने खोजा था। मोहन को विश्व के सभी सफेद बाघों का मूल माना जाता है।

समय के साथ अत्यधिक शिकार और मानवीय हस्तक्षेप के कारण जंगलों में वन्यजीवों की संख्या तेजी से घटने लगी। इसके बाद वन विभाग और सरकार ने संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। पहले इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया और बाद में वर्ष 1993 में बांधवगढ़ को आधिकारिक रूप से टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला।

आज वन विभाग की सतत निगरानी, गश्त और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण यहां वन्यजीव सुरक्षित वातावरण में विकसित हो रहे हैं। स्थानीय निवासी भी संरक्षण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे बांधवगढ़ वन्यजीव संरक्षण का सफल मॉडल बन चुका है।

582 एकड़ में फैले 12 प्राचीन तालाब: बांधवगढ़ की अनोखी प्राकृतिक धरोहर

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व की पहचान केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि इसकी ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों के लिए भी की जाती है। बांधवगढ़ में लगभग 582 एकड़ क्षेत्र में फैले 12 प्राचीन तालाब आज भी इस जंगल की जीवनरेखा माने जाते हैं। माना जाता है कि इन तालाबों का निर्माण प्राचीन काल में जल संरक्षण और वन्यजीवों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया था।

ये तालाब आज भी जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गर्मियों के मौसम में जब जंगल के कई छोटे जल स्रोत सूख जाते हैं, तब यही प्राचीन तालाब बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, जंगली सूअर और अनेक पक्षियों के लिए प्रमुख जल स्रोत बन जाते हैं। वन्यजीवों की गतिविधियां अक्सर इन तालाबों के आसपास देखी जाती हैं, जिससे यह क्षेत्र सफारी के दौरान भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

इन तालाबों के आसपास फैले घने साल और सागौन के जंगल बांधवगढ़ की सुंदरता को और अधिक अद्भुत बनाते हैं। यहां की पहाड़ियां, प्राचीन गुफाएं, शिलालेख और ऐतिहासिक अवशेष इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत करते हैं।

प्रकृति, इतिहास और वन्यजीवन का ऐसा अनोखा संगम बांधवगढ़ को देश के सबसे विशेष टाइगर रिजर्वों में शामिल करता है। यहां आने वाला हर पर्यटक इन प्राचीन तालाबों और प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठता है।

गौरों की शानदार वापसी: बांधवगढ़ में वन्यजीव पुनर्स्थापन की सफल कहानी

बांधवगढ़ में गौरों की वापसी भारत के सबसे सफल वन्यजीव पुनर्स्थापन अभियानों में गिनी जाती है। एक समय अत्यधिक शिकार और प्राकृतिक आवासों में बदलाव के कारण गौर यहां लगभग विलुप्त हो चुके थे, जिससे जंगल के पारिस्थितिक संतुलन पर भी असर पड़ा था।

स्थिति को देखते हुए मध्यप्रदेश वन विभाग ने वर्ष 2012 में गौर पुनर्स्थापन परियोजना शुरू की। कान्हा और बाद में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से चरणबद्ध तरीके से गौरों को बांधवगढ़ लाया गया। वर्ष 2026 में तीसरे चरण के तहत 27 गौरों का सफल ट्रांसलोकेशन किया गया, जिसका उद्देश्य उनकी आनुवंशिक विविधता को मजबूत करना था।

वन विभाग ने गौरों के लिए सुरक्षित घासभूमि, जल स्रोत और अनुकूल वातावरण विकसित किया। धीरे-धीरे गौरों ने जंगल को अपना नया आवास बना लिया और उनकी संख्या बढ़ने लगी।

वर्तमान में बांधवगढ़ में गौरों की संख्या लगभग 160 तक पहुंच चुकी है, जिनमें कई खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गौरों की वापसी ने जंगल के पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

एशियाई हाथियों की दस्तक से बदलता बांधवगढ़ का जंगल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व लंबे समय से बाघों की धरती के रूप में प्रसिद्ध रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां एशियाई जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी ने जंगल के पारिस्थितिक तंत्र में बड़ा बदलाव लाया है। वर्ष 2017-18 से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जंगलों से हाथियों के झुंड स्वाभाविक रूप से बांधवगढ़ पहुंचने लगे। खास बात यह है कि इन्हें यहां बसाने के लिए किसी प्रकार का ट्रांसलोकेशन नहीं किया गया, बल्कि उन्होंने स्वयं इस क्षेत्र को अपना नया आवास बनाया।

वन विभाग के अनुसार वर्तमान में बांधवगढ़ और आसपास के वन क्षेत्रों में लगभग 80 से 90 जंगली हाथी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी जंगल के प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जंगल में नए रास्ते और घासभूमियां विकसित करते हैं, जिससे हिरण, सांभर, चीतल और बारहसिंगा जैसे शाकाहारी वन्यजीवों को लाभ मिलता है। साथ ही बीजों के प्रसार से जंगल का प्राकृतिक पुनर्जनन भी तेजी से होता है।

वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में बांधवगढ़ बाघों के साथ-साथ एशियाई हाथियों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में भी नई पहचान बना सकता है।

मगधी रेंज में बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र: विलुप्ति से वापसी की प्रेरणादायक पहल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के मगधी रेंज में विकसित लगभग 75 हेक्टेयर का बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह इन्क्लोजर विशेष रूप से संकटग्रस्त बारहसिंगा प्रजाति के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षित प्रजनन के लिए तैयार किया गया है।

एक समय मध्य भारत में बारहसिंगा बड़ी संख्या में पाए जाते थे, लेकिन शिकार, आवास की कमी और पर्यावरणीय बदलावों के कारण इनकी संख्या तेजी से घट गई। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने मगधी रेंज में इनके लिए यह विशेष संरक्षण क्षेत्र विकसित किया, क्योंकि यहां का घासभूमि और जल स्रोत इनके लिए अनुकूल हैं।

यहां प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खुली घासभूमि, जल स्रोत और सुरक्षित प्रजनन क्षेत्र विकसित किए गए हैं। वन विभाग द्वारा नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे इनके संरक्षण को मजबूती मिल रही है।

परियोजना के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं—बारहसिंगों की संख्या में वृद्धि हो रही है और उनका व्यवहार भी प्राकृतिक होता जा रहा है। यह पहल साबित करती है कि सही योजना से संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाया जा सकता है।

यह संरक्षण क्षेत्र न केवल एक प्रजाति के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज यह पहल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की एक नई पहचान बन चुकी है और अन्य अभयारण्यों के लिए प्रेरणास्रोत है।

बांधवगढ़ की दहाड़: एक सफारी में 9 बाघों ने बनाया नया रोमांच

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व का ताला जोन हमेशा से बाघों की शानदार गतिविधियों और रोमांचक सफारी अनुभवों के लिए प्रसिद्ध रहा है। लेकिन एक ही सफारी में 9 बाघों का दिखाई देना अपने आप में एक ऐतिहासिक और बेहद दुर्लभ घटना मानी गई। जंगल के शांत वातावरण में अलग-अलग स्थानों पर बाघों की मौजूदगी ने पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को रोमांच से भर दिया।

वन विभाग के अनुसार सामान्यतः किसी सफारी में एक या दो बाघों का दिखाई देना बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन एक साथ 9 बाघों का दिखाई देना बांधवगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, सुरक्षित वन क्षेत्र और सफल संरक्षण प्रयासों को दर्शाता है। यही कारण है कि अन्य टाइगर रिजर्वों की तुलना में भी बांधवगढ़ को “शेरों का गढ़” कहा जाता है। यह अनुभव पर्यटकों के लिए जीवनभर याद रहने वाला पल बन गया।

पिछली गणना के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगभग 220 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। लगातार बेहतर संरक्षण, सुरक्षित आवास, पर्याप्त शिकार आधार और वन विभाग की सतत निगरानी के कारण यहां बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली गणनाओं में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है।

बजरंग: बांधवगढ़ की पहचान और जंगल का सबसे चर्चित बाघ

बांधवगढ़ का नाम आते ही जिस बाघ की सबसे पहले चर्चा होती है, वह है प्रसिद्ध टाइगर “बजरंग”। अपनी विशाल कद-काठी, दमदार चाल और प्रभावशाली मौजूदगी के कारण बजरंग केवल एक बाघ नहीं, बल्कि बांधवगढ़ की पहचान बन चुका है। देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच भी उसकी अलग पहचान है।

कहा जाता है कि अगर बांधवगढ़ की चर्चा हो और बजरंग का नाम न आए, तो कहानी अधूरी सी लगती है। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक हर कोई उसकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित रहता है। सफारी पर आने वाले पर्यटक घंटों जंगल की पगडंडियों पर इस उम्मीद में इंतज़ार करते हैं कि शायद आज बजरंग का दीदार हो जाए। उसकी मौजूदगी भर से जंगल का रोमांच कई गुना बढ़ जाता है।

बजरंग ने न केवल पर्यटकों को आकर्षित किया है, बल्कि बांधवगढ़ को विश्वभर में नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसकी लोकप्रियता इस बात का प्रतीक है कि बांधवगढ़ आज भी भारत के सबसे समृद्ध और रोमांचक टाइगर रिजर्वों में शामिल है।

जंगल का ‘पुजारी’ अब प्रकृति की गोद में विलीन

बांधवगढ़ के चर्चित नर बाघ “पुजारी ” की मौत ने वन्यजीव प्रेमियों को गहरा दुख पहुंचाया। डी-1 टाइगर के साथ संघर्ष में पुजारी की मृत्यु हो गई, जिसने पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और वन विभाग के कर्मचारियों को भावुक कर दिया।

पुजारी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों और पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय था। वह अक्सर कैमरों के सामने शानदार अंदाज में दिखाई देता था। स्थानीय लोगों ने उसका नाम “पुजारी” इसलिए रखा था क्योंकि सुबह के समय वह ऐसी मुद्रा में दिखाई देता था, मानो सूर्य को प्रणाम कर रहा हो।

पुजारी की मृत्यु के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की गहरी भावनाएं देखने को मिलीं। वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफरों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने भावुक पोस्ट साझा कर पुजारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने उसके साथ बिताए सफारी के यादगार पलों और तस्वीरों को साझा करते हुए उसे बांधवगढ़ के सबसे खास और लोकप्रिय बाघों में से एक बताया।

सोशल मीडिया पर उमड़ी यह संवेदनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि पुजारी केवल एक बाघ नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ एक जीवंत प्रतीक बन चुका था।

उसकी मौत के बाद लोगों ने जिस तरह भावुक होकर श्रद्धांजलि दी, उससे यह स्पष्ट हो गया कि बांधवगढ़ में वन्यजीवों और इंसानों के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन चुका है।

संरक्षण और प्रकृति का जीवंत उदाहरण

आज बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व केवल एक टाइगर रिजर्व नहीं, बल्कि सफल वन्यजीव संरक्षण, समृद्ध जैव विविधता और मानव-प्रकृति संबंध का जीवंत उदाहरण बन चुका है। वन विभाग, स्थानीय समुदाय और संरक्षण विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों ने बांधवगढ़ को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

घने जंगलों में गूंजती बाघों की दहाड़, हाथियों की आवाजाही, गौरों के विशाल झुंड और प्राचीन पहाड़ियों के बीच बसे तालाब आज भी यह संदेश देते हैं कि यदि संरक्षण के प्रयास निरंतर और ईमानदारी से किए जाएं, तो प्रकृति स्वयं को फिर से जीवंत कर सकती है।बांधवगढ़ में गांव वालों और वन विभाग के बीच बेहतर संवाद और समन्वय वन्यजीव संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है। दोनों के बीच तालमेल बना रहना ही जंगल, वन्यजीव और मानव के बीच संतुलन बनाए रखने की अहम कुंजी माना जाता है।

पुलिस आयुक्त जोगेन्द्र कुमार के निर्देशन में पुलिस उपायुक्त यमुनानगर द्वारा अवैध कार्यों में संलिप्तता पाये जाने के दृष्टिगत थाना प्रभारी घूरपुर

विश्वनाथ प्रताप सिंह



प्रयागराज,आवेदक शिकायतकर्ता कमलेश विश्वकर्मा निवासी ग्राम सेन्धूवार थाना घूरपुर के शिकायती प्रार्थना पत्र अंतर्गत थाना घूरपुर पर नियुक्त प्रभारी निरीक्षक  दिनेश सिंह द्वारा गलत तरीके से एक पक्षीय कार्यवाही करते हुए एक पक्ष का अनुचित पक्ष लेते हुए तीन लोगों को थाने में लाया गया और अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। पूर्व में भी समय-समय पर थाना प्रभारियों को अकारण बिना अपराध के किसी को थाने पर नहीं लाने हेतु स्पष्ट आदेश दिए गए हैंl उक्त सम्बन्ध में जांच सहायक पुलिस आयुक्त बारा वेद व्यास मिश्र द्वारा की गई। जांचोपरांत थाना प्रभारी घूरपुर को निलम्बित करते हुए विभागीय जांच कार्यवाही आसन्न की गई है।
उपायुक्त ने बाल सुधार गृह (संप्रेक्षण गृह) का किया औचक निरीक्षण

उपायुक्त हेमन्त सती ने आज 18 मई को बाल सुधार गृह (संप्रेक्षण गृह) का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, बच्चों की देखरेख एवं उपलब्ध सुविधाओं का गहन जायजा लिया।

निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की क्रियाशीलता की जांच की तथा उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने बाल कैदियों से मुलाकात एवं संवाद कर उनका हालचाल जाना।

उपायुक्त ने रसोईघर का निरीक्षण कर बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता की जांच की तथा साफ-सफाई एवं पोषण मानकों का विशेष ध्यान रखने का निर्देश दिया। इसके साथ ही बच्चों के छात्रावास का निरीक्षण कर व्यवस्था का आकलन किया और बच्चों को नियमित पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने पुस्तकालय का भी अवलोकन किया। मौके पर उपस्थित काउंसलर को निर्देश दिया कि बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाई कराएं तथा हिंदी भाषा में महापुरुषों की प्रेरणादायक कहानियों की पुस्तकें उपलब्ध कराकर उन्हें पढ़ने हेतु प्रोत्साहित करें। उन्होंने विशेष रूप से कक्षा दसवीं के बाल कैदियों को प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने के लिए कड़ी मेहनत करने का सुझाव दिया।

उपायुक्त ने बताया कि वर्तमान में बाल सुधार गृह में कुल 68 बच्चे आवासित हैं। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रतिनियुक्त जिला पुलिस बल को सख्त निर्देश दिया कि संप्रेक्षण गृह अधीक्षक की अनुमति के बिना किसी भी परिस्थिति में अवकाश पर न जाएं।

उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि बच्चों के समुचित विकास, शिक्षा एवं सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

हजारीबाग झील क्षेत्र में यातायात एवं भीड़ नियंत्रण को लेकर उपायुक्त का निरीक्षण

उपायुक्त हेमन्त सती ने आज 18 मई को हजारीबाग झील के निकट प्रतिदिन लगने वाली भीड़-भाड़ एवं यातायात व्यवस्था का निरीक्षण किया। इस दौरान नगर आयुक्त श्री ओम प्रकाश गुप्ता भी उपस्थित थे।

निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने पाया कि झील क्षेत्र में आने वाले आगंतुकों द्वारा यत्र-तत्र वाहनों की पार्किंग किए जाने से विशेषकर शाम के समय अत्यधिक जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस पर संज्ञान लेते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को झील के समीप उपलब्ध खाली स्थान को विकसित कर व्यवस्थित पार्किंग जोन के रूप में उपयोग में लाने का निर्देश दिया, ताकि यातायात व्यवस्था को सुगम बनाया जा सके।

इसके अतिरिक्त उपायुक्त ने झील के समीप सड़क किनारे अनियमित रूप से लगने वाली मछली दुकानों को चिन्हित कर उन्हें निर्धारित फेंसिंग क्षेत्र के भीतर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया, जिससे सड़क किनारे अव्यवस्था एवं जाम की समस्या को कम किया जा सके।

उपायुक्त ने कहा कि हजारीबाग झील क्षेत्र शहर का प्रमुख स्थल है,अतः यहां सुव्यवस्थित यातायात एवं साफ-सुथरा वातावरण सुनिश्चित होना चाहिए,उन्होंने नगर निगम को निर्देशित किया कि आवश्यक कार्रवाई शीघ्र पूर्ण करते हुए आमजन को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

नागेश्वर राव के नैक अध्यक्ष बनने से प्रयागराज का गौरव बढ़ा: प्रो.सत्यकाम

-इग्नू और राजर्षि टंडन सहित देश भर के शिक्षाविदों में खुशी की लहर

प्रयागराज। देश के प्रख्यात शिक्षाविद प्रो. नागेश्वर राव को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की कार्यकारी समिति नैक ईसी का चेयरमैन नियुक्त किए जाने पर देश भर के शिक्षाविदों में खुशी की लहर है। देश के शिक्षाविदों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि एक योग्य शिक्षाविद के हाथ में नैक की बागडोर आने से देश के शिक्षण संस्थानों का गुणवत्तापूर्ण विकास होगा। शिक्षा के विकास से ही भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का सपना साकार होगा।

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज के कुलपति एवं प्रो. नागेश्वर राव के साथ इग्नू में प्रतिकुलपति रहे प्रो. सत्यकाम ने प्रो. नागेश्वर राव को नैक ईसी का चेयरमैन नियुक्त किए जाने पर बधाई देते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठापूर्ण नियुक्ति से मुक्त विश्वविद्यालयों का गौरव बढ़ा है। ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रो. नागेश्वर राव के प्रयास अभतपूर्व हैं। उनके प्रयासों से ही मुक्त विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा पूरे देश में बढ़ी है। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से गोल्ड मेडलिस्ट रहे प्राे. राव कॉमर्स और बिजनेस मैनेजमेंट के विद्वान हैं। शिक्षण करियर में 48 साल का अनुभव रखने वाले प्रो. राव के कई शिष्य देश के प्रमुख संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं।

अपनी ऐतिहासिक शैक्षिक यात्रा के दौरान प्रो. राव इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जुलाई 1978 से फरवरी 1985 तक कॉमर्स और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में लेक्चरर रहे। इसके उपरांत बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में फरवरी 1985 से अक्टूबर 1990 तक फैकेल्टी आफ मैनेजमेंट स्टडीज में रीडर रहे। देश में सबसे कम उम्र में प्रोफेसर बनने का गौरव हासिल करने वाले प्रोफेसर राव विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में अक्टूबर 1990 से दिसम्बर 2013 तक पं. जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट आफ बिजनेस मैनेजमेंट में प्रोफेसर के पद में कार्यरत रहे। उन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थानों के प्रशासनिक पदों के प्रमुख का दायित्व ग्रहण किया। देश के कई राज्य और केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में उनका कार्यकाल महत्वपूर्ण उपलब्धियों से भरा रहा।

प्रो. राव सर्वप्रथम उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के कुलपति नियुक्त हुए। मुक्त विश्वविद्यालय में सबसे युवा कुलपति होने का उनका रिकॉर्ड अभी तक टूट नहीं पाया है। इसके उपरांत प्रो. राव को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के सम कुलपति और फिर कार्यवाहक कुलपति की कमान सौंपी गई। इसके उपरांत प्रो. राव उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी, नैनीताल के कुलपति के पद पर नियुक्त हुए। तदोपरांत राष्ट्रपति द्वारा इग्नू के पूर्णकालिक कुलपति नियुक्त किए गये। इग्नू के कुलपति के रूप में प्रो. राव ने काफी प्रतिष्ठा हासिल की। जिसके परिणाम स्वरूप भारत सरकार ने उनकी नेतृत्व क्षमता पर भरोसा करते हुए उन्हें राष्ट्रीय महत्व के संस्थान केंद्रीय हिंदी निदेशालय तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडी के निदेशक का अतिरिक्त पदभार भी सौंपा।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली को इनके कार्यकाल में नैक में ए डबल प्लस ग्रेड मिला। जो किसी भी मुक्त विश्वविद्यालय के लिए अभी तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है, इससे अन्य मुक्त विश्वविद्यालयों की राह आसान हुई। इग्नू के इतिहास की इस सबसे बड़ी उपलब्धि के लिए तत्कालीन शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सर्वाेच्च ग्रेड प्राप्त करने पर कुलपति प्रो. नागेश्वर राव को खुद बधाई दी थी। प्रो. राव के कार्यकाल में इग्नू 40 लाख से अधिक छात्रों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी ओपन यूनिवर्सिटी बनी रही।

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. प्रभात चन्द्र मिश्र में बताया कि शोध और प्रकाशन के क्षेत्र में प्रो. राव ने कई उपलब्धियां हासिल की। उन्होंने आठ लोकप्रिय पुस्तकें लिखीं। 37 पीएचडी छात्रों को गाइड किया तथा 180 रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए। प्रो. राव को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए, जिनमें प्रमुख रूप से ऑनरेरी फेलो, कॉमनवेल्थ ऑफ़ लर्निंग है। ओपन और डिस्टेंस लर्निंग में विश्वस्तरीय योगदान के लिए प्रो. राव को यह प्रतिष्ठित फेलोशिप मिली। राष्ट्रीय पुरस्कारों में उत्तर प्रदेश सरकार का सरस्वती सम्मान है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रो. राव को यह पुरस्कार प्रदान किया गया। मीडिया प्रभारी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा प्रो. नागेश्वर राव को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की कार्यकारी समिति नैक ईसी का चेयरमैन नियुक्त किए जाने पर देश भर से प्रो राव को बधाइयां मिल रही हैं। प्रयाग की धरती को अपनी कर्मभूमि मानने वाले प्रोफेसर राव की इस उपलब्धि पर प्रयागराज का गौरव बढ़ा है।
थाना छपिया पुलिस द्वारा जानलेवा हमला करने के 02 आरोपी अभियुक्तों को किया गया गिरफ्तार
गोण्डा। पुलिस अधीक्षक  विनीत जायसवाल द्वारा अपराध एवं अपराधियों के विरूद्ध चलाये जा रहे अभियान के क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी अजीत कुमार रजक के पर्यवेक्षण व क्षेत्राधिकारी मनकापुर श्री उदित नारायण पालीवाल के नेतृत्व में थाना छपिया पुलिस टीम द्वारा थाना स्थानीय पर पंजीकृत मु0अ0सं0-201/2026 धारा 131, 115(2), 351(3), 109(1), 191(2) बीएनएस तथा मु0अ0सं0- 203/2026 धारा 109(1), 352, 351(3), 191(2) बीएनएस से सम्बन्धित 02 आरोपी अभियुक्तों-01. विक्रान्त शुक्ला उर्फ दीपक शुक्ला, 02. विकास पाण्डेय को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया।

*घटना का संक्षिप्त विवरण-*
दिनांक16.05.2026 को थाना छपिया क्षेत्रान्तर्गत पुरानी रंजिश को लेकर दो अलग-अलग घटनाओं में विपक्षीगणों द्वारा वादियों के परिजनों पर जानलेवा हमला किया गया। प्रथम घटना में वादी सरजू प्रसाद पुत्र मोतीलाल निवासी बेलहरी बुजुर्ग के पुत्र युवराज को बनकटवा गाँव में विपक्षी विक्रान्त शुक्ला उर्फ दीपक शुक्ला, सदानन्द पाण्डेय, उत्कर्ष पाण्डेय, अभय तिवारी व दो अज्ञात व्यक्तियों द्वारा लाठी-डण्डा व राड से मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। वहीं दूसरी घटना में वादी सतीश सिंह पुत्र राजदेव सिंह निवासी सिसहनी के भाई भूपेन्द्र सिंह पर सुकरौली गाँव में दीपक शुक्ला उर्फ विक्रान्त शुक्ला, विकास पाण्डेय व दो अज्ञात व्यक्तियों द्वारा धारदार हथियार से हमला कर गंभीर चोटें पहुँचायी गयीं। दोनों घटनाओं में विपक्षीगणों द्वारा गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी गयी तथा स्थानीय लोगों के एकत्र होने पर मौके से फरार हो गये। वादीगण की लिखित तहरीर के आधार पर थाना छपिया में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया। जिसमें थाना छपिया पुलिस द्वारा आज दिनांक 18.05.2026 को घटना में संलिप्त 02 आरोपी अभियुक्तों-01. विक्रान्त शुक्ला उर्फ दीपक शुक्ला, 02. विकास पाण्डेय को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार अभियुक्तगणों के विरूद्ध थाना छपिया पुलिस द्वारा अग्रिम विधिक कार्यवाही कर माननीय न्यायालय रवाना किया गया।
नगर पालिका परिषद एवं विन्ध्य फाउंडेशन ट्रस्ट के तत्वाधान में लगाया गया स्वैच्छिक रक्तदान शिविर
प्रेस नोट

शिविर के अंतर्गत आठ रक्तदाताओ ने रक्तदान कर दिया जीवंत संदेश

पिता पुत्र की जोड़ी ने भी किया रक्तदान

मीरजापुर, 18 मई 2026 सोमवार
नगर पालिका परिषद मीरजापुर एवं विन्ध्य फाउंडेशन ट्रस्ट के तत्वाधान में लालडिग्गी स्थित नगर पालिका परिषद कार्यालय परिसर में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।
रक्तदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नगर पालिकाध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी के पहल पर आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर के अंतर्गत 16 लोगों ने रक्तदान के लिए पंजीयन कराया और स्वास्थ्य परीक्षण के पश्चात 8 रक्तदाताओ ने रक्तदान कर समाज को जीवंत संदेश दिया।
रक्तदान करने वालों में केशव लुंडिया, आनन्द कसेरा, रीतेश कुमार गुप्ता, श्रीकिशन कसेरा, प्रथम कसेरा, सतीश कुमार,  कृष्णा सोनी, आशीष कुमार सम्मिलित रहें।
विशेष बात ये रही कि कोतवाली वार्ड के सभासद पति श्रीकिशन कसेरा ने अपने पुत्र प्रथम कसेरा के साथ रक्तदान किया।
कार्यक्रम के दौरान नगर पालिका के तरफ से सभासद अलंकार जायसवाल, सभासद बाबा यादव सहित नगर पालिका के कर्मचारी उपस्थित रहे।
तो विन्ध्य फाउंडेशन ट्रस्ट के तरफ से अध्यक्ष कृष्णानंद हैहयवंशी, उपाध्यक्ष शिव कुमार शुक्ल, सचिव अभिषेक साहू, मीडिया प्रभारी विनय कुमार,  स्वतंत्र प्रभार  मोहित कसेरा और मेडिकल कॉलेज के ब्लड सेंटर की तरफ से डाॅ विनोद कन्नौजिया, काउंसलर माला सिंह, जनसंपर्क अधिकारी रामकुमार गुप्ता सहित अमित पटेल,  प्रवेश राजभर,  प्रदीप, मनीष, विनोद इत्यादि उपस्थित रहें।
कार्यक्रम के दौरान कृष्णानंद हैहयवंशी ने बताया कि विन्ध्य फाउंडेशन ट्रस्ट रक्तदान के क्षेत्र में पिछले आठ वर्षो से कार्य कर रही है और नगर पालिका परिषद मीरजापुर का हमें लगातार सहयोग मिल रहा है। उन्होनें नगर पालिकाध्यक्ष श्याम सुंदर कसरी का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि विगत 12 जनवरी को ऐतिहासिक घंटाघर में भी नगर पालिका के सहयोग से शिविर लगा था जहां ऐतिहासिक 83 यूनिट रक्तदान हुआ था तो आज यहां पर 8 यूनिट रक्तदान हुआ।
कार्यक्रम का संचालन कर रहें आनन्द कसेरा ने बताया कि आवश्यक कारणों से नगर पालिकाध्यक्ष जी को अचानक लखनऊ जाना पड़ा लेकिन उन्होनें पूर्व निर्धारित इस शिविर के लिए जाते समय हम सभी को दिशा-निर्देश दे दिया था।
विश्व हिंदू महासंघ की बैठक में मुख्यमंत्री के जन्मदिवस कार्यक्रमों की बनी रूपरेखा


उत्तर प्रदेश बलरामपुर। गोरक्ष पीठाधीश्वर के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में विश्वाहिन्दु महासंघ बलरामपुर इकाई के तत्वावधान में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक जिला कार्यालय विश्व हिंदू महासंघ, बलरामपुर में आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता जिला अध्यक्ष चौधरी विजय सिंह ने की।
बैठक में गोरक्षपीठाधीशवर के जन्मदिवस को सेवा एवं जनकल्याण दिवस के रूप में मनाने को लेकर विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई। इस दौरान भगवा ध्वज के साथ पीठाधीश्वर के 55वे जन्मदिवस के अवसर पर 55 दीपों को जलाकर महा आरती तथा ओम नमः शिवाय पाठ, योगी सरकार के उपलब्धियो पर प्रदर्शनी, स्वैच्छिक रक्तदान, गौसेवा , हिंदू स्वाभिमान सम्मेलन, वंदे मातरम चौक की साथ सज्जा, संत सम्मान शोभा यात्रा एवं प्रसाद वितरण,सामाजिक समरसता पौधरोपण, साधू सेवा गरीब  जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री वितरण, स्वास्थ्य शिविर रक्तदान तथा धार्मिक आयोजनों सहित कई कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई।
जिला अध्यक्ष चौधरी विजय सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जीवन समाज सेवा, राष्ट्रहित और हिंदुत्व की भावना को समर्पित है। उनके जन्मदिवस पर संगठन द्वारा जनहित से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरूक करने का कार्य किया जाएगा।
बैठक में संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं मे जिला मंत्री राधेश्याम कौशल, जिला उपाध्यक्ष विजय प्रताप सोनी, जिला मीडिया प्रभारी जय सिंह, जिला उपाध्यक्ष मिथिलेश गिरी, जिला अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ सुनीता तिवारी, वेद प्रकाश जायसवाल जिला कार्यालय प्रभारी संतोष कुमार दुबे सहित कई लोगों ने अपने-अपने विचार रखें  और कार्यक्रमों को सफल बनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर कई प्रमुख पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। उक्त साप्ताहिक कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रुद्र कुमार पाठक अधिवक्ता प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष, विशिष्ट अतिथि के रूप में ओम प्रकाश सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष विशिष्ट अतिथि भानु प्रताप सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष तथा विशिष्ट अतिथि प्रदेश अध्यक्ष सोशल मीडिया गंगा शर्मा कौशिक उपस्थित रहेंगे।
पांचवीं जिलास्तरीय योगासन चैंपियनशिप में बच्चों ने किया अद्भुत प्रदर्शन
मीरजापुर , डिस्ट्रिक्ट योगासन स्पोर्ट एसोसिएशन मीरजापुर की ओर में नगर के पांडेयपुर स्थित संस्कार पब्लिक स्कूल में पांचवीं जिलास्तरीय योगासन खेल प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ नगर विधायक रत्नाकर मिश्रा ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय योगासन खिलाड़ी राज लक्ष्मी साहिल ने शिव तांडव पर अद्भुत प्रस्तुति दी।
योगासन खेल संघ के अध्यक्ष डॉ अमन सिंह यादव ने प्रबंधक अनंत राज भंडारी ने मिलकर नगर विधायक को अंगवस्त्रम व मूमेंटो प्रदान कर उनका स्वागत
किया। इस अवसर पर नगर विधायक ने कहा कि योग कहा कि हमारी सनातन संस्कृति और सभ्यता का मूल धरोहर है , जिसे आज योगासन खेल के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने के लिए बच्चों के लिए एक नया अवसर है।
कार्यक्रम समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि राज्य मंत्री पिछड़ा वर्ग आयोग उत्तर प्रदेश सरकार सोहन लाल श्रीमाली जी ने बच्चों को पुरस्कृत करते हुए उन्हें मेडल मुमेटों के साथ प्रशस्तिपत्र प्रदान कर उन्हें आने वाले राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की ।
इस अवसर पर उन्होंने कहा की जिला स्तरीय योगासन खेल प्रतियोगिता में जनपद के बच्चों का अद्भुत प्रदर्शन देख कर मन प्रफुल्लित हुआ , और लगा कि सच में जनपद में भी योग में राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने वाली प्रतिभाएं मौजूद है , जो आने वाले समय में जनपद मीरजापुर का गौरव बढ़ाएंगे।
जिला स्तरीय प्रतियोगिता में 8 से 14 वर्ष में प्रतिभाग करने वाले विजेताओं बच्चों में आर्टिस्टिक सिंगल गर्ल सब जूनियर प्रतियोगिता में आकृति मौर्य प्रथम , आयुषी दुबे द्वितीय एवम् दृष्टि पाण्डेय तृतीय स्थान प्राप्त की। सब जूनियर ट्रेडिशनल गर्ल प्रतियोगिता में , प्रीति बिंद प्रथम अर्चिता सिंह द्वितीय , प्रियांशी पाण्डेय तृतीय स्थान पर रही।
सब जूनियर ट्रेडिशनल ब्वॉय प्रतियोगिता में , यश चौहान प्रथम , शिवाय गुप्ता द्वितीय तन्मय भारती तृतीय स्थान पर रही।
जूनियर 14 से 18 वर्ष ब्वॉय प्रतियोगिता में कृतवेश पाण्डेय प्रथम , हर्ष पाण्डेय द्वितीय , कृष्णम पाण्डेय तृतीय स्थान पर रहे। गर्ल प्रतियोगिता में पूनम बिंद प्रथम स्थान पर रही।
आर्टिस्टिक सिंगल सब जूनियर ब्वॉय संकल्प कुशवाहा प्रथम देवांश तिवारी द्वितीय स्थान पर रहे। सब जूनियर ब्वॉय
रिदमिक पेयर में मानस राय एवं शिवाय गुप्ता प्रथम स्थान , अद्विक एवं शिव श्याम द्वितीय स्थान , सब जूनियर रिदमिक पेयर गर्ल त्रिशिखा पाण्डेय एवं श्रीजा सिंह प्रथम स्थान , जियांशी शेखर एवं अर्चिता सिंह द्वितीय स्थान पर रहे।
सीनियर बॉयस ट्रेडिशनल इवेंट अश्वनी मौर्य प्रथम , सीनियर गर्ल ट्रेडिशनल इवेंट में राज लक्ष्मी प्रथम , आरती द्वितीय एवं विजय लक्ष्मी तृतीय स्थान पर रही।
शेष प्रतियोगिता लगातार चल रही है जिसका रिजल्ट आना शेष है। कार्यक्रम में राज्य मंत्री ने आए हुए डिस्ट्रिक्ट योगासन स्पोर्ट एसोसिएशन के साथ पदाधिकारियों को अंगवस्त्रम व प्रदान कर सम्मानित किया।
इस अवसर खेल संघ के अध्यक्ष डॉ अमन सिंह यादव ने पूरी टीम के साथ आए हुए अतिथियों का स्वागत सत्कार करते हुए सभी योगासन जजों खिलाडियों एवं सहयोगी स्कूल परिवार का आभार धन्यवाद् व्यक्त किया।
इस अवसर पर इस अवसर पर प्रधानाचार्या रितु भंडारी योग गुरु भोला नाथ संगीता व्यास रचना नीतू यादव रामधनी पाल भरत जी दिव्या श्रीवास्तव अवनीश उपाध्याय राहुल यादव प्रवीण मौर्य अनिल मौर्य आदि लोग उपस्थित रहे।
भीषण गर्मी एवं लू से बचाव को लेकर जिला प्रशासन सतर्क

नितेश श्रीवास्तव

भदोही । जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने बताया कि जनपद में लगातार बढ़ते तापमान एवं भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क एवं सक्रिय है। आमजन को लू (हीट स्ट्रोक) से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश एवं एडवाइजरी जारी की गई है। जिलाधिकारी ने बताया कि विगत दिनों से जनपद का तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है तथा आगामी दिनों में इसके 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। ऐसी स्थिति में लू लगने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
जिलाधिकारी ने बताया कि लू लगने की स्थिति में शरीर का अत्यधिक गर्म एवं लाल हो जाना, त्वचा का शुष्क होना, तेज नाड़ी चलना, सिरदर्द, चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, थकान तथा पसीना कम या बंद हो जाना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है।
उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें। यदि बाहर जाना अत्यंत आवश्यक हो तो हल्के रंग in के ढीले एवं सूती वस्त्र पहनें तथा सिर को टोपी, गमछा या छाते से ढककर रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं तथा शरीर में जल की कमी न होने दें। ओआरएस घोल, नमक-चीनी का घोल एवं अन्य तरल पदार्थों का सेवन लाभकारी रहेगा।
इसी क्रम में जिलाधिकारी ने आज सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय, सरपतहा के लू वार्ड का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) की अनुपस्थिति पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए वेतन रोकने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में तीन अस्पताल 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं 20 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर लू वार्ड बनाए गए हैं सभी केदो पर 24 घंटे डॉक्टरों की टीम भी लगाई गई है लू वार्ड की व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद के सभी कार्यालयों सार्वजनिक स्थलों एवं पशु पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था कराई गई है।
तत्पश्चात जिलाधिकारी द्वारा महाराजा चेतसिंह चिकित्सालय, ज्ञानपुर का भी आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान एनआरसी, डेंगू वार्ड एवं लू वार्ड की व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रूप से संचालित मिलीं। जिलाधिकारी ने अस्पताल में मरीजों के लिए शुद्ध पेयजल, आवश्यक दवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने भर्ती मरीजों से उनका हालचाल जाना तथा चिकित्सकों को निर्देशित करते हुए कहा कि सभी मरीजों को समयबद्ध, समुचित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उपचार व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जिलाधिकारी ने समस्त जनपदवासियों आम जनमानस से अपील की है कि गर्मी एवं लू के प्रभाव को देखते हुए आवश्यक सावधानियां बरतें, स्वयं को सुरक्षित रखें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
राजाओं की शिकारगाह से विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व तक, बांधवगढ़ की बेमिसाल संरक्षण यात्रा

जहां जंगलों की गूंजती दहाड़ आज सफल वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति संतुलन की मिसाल बन चुकी है

लेखक - पत्रकार सय्यद असीम अली

भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में शामिल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व आज केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध जैव विविधता, ऐतिहासिक विरासत और सफल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के कारण भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। घने जंगलों, प्राचीन पहाड़ियों, दुर्लभ वन्यजीवों और प्राकृतिक जल स्रोतों से भरपूर बांधवगढ़ आज प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों की पहली पसंद बन चुका है।

महाराजाओं की शिकारगाह से संरक्षण क्षेत्र तक का सफर

कभी बांधवगढ़ का जंगल Maharajas of Rewa की निजी शिकारगाह हुआ करता था। यहां राजघराने द्वारा शिकार अभियानों का आयोजन किया जाता था। इसी धरती ने दुनिया को प्रसिद्ध सफेद बाघ “Mohan” दिया, जिसे वर्ष 1951 में रीवा रियासत के महाराजा मार्तंड सिंह ने खोजा था। मोहन को विश्व के सभी सफेद बाघों का मूल माना जाता है।

समय के साथ अत्यधिक शिकार और मानवीय हस्तक्षेप के कारण जंगलों में वन्यजीवों की संख्या तेजी से घटने लगी। इसके बाद वन विभाग और सरकार ने संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। पहले इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया और बाद में वर्ष 1993 में बांधवगढ़ को आधिकारिक रूप से टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला।

आज वन विभाग की सतत निगरानी, गश्त और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण यहां वन्यजीव सुरक्षित वातावरण में विकसित हो रहे हैं। स्थानीय निवासी भी संरक्षण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे बांधवगढ़ वन्यजीव संरक्षण का सफल मॉडल बन चुका है।

582 एकड़ में फैले 12 प्राचीन तालाब: बांधवगढ़ की अनोखी प्राकृतिक धरोहर

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व की पहचान केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि इसकी ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों के लिए भी की जाती है। बांधवगढ़ में लगभग 582 एकड़ क्षेत्र में फैले 12 प्राचीन तालाब आज भी इस जंगल की जीवनरेखा माने जाते हैं। माना जाता है कि इन तालाबों का निर्माण प्राचीन काल में जल संरक्षण और वन्यजीवों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया था।

ये तालाब आज भी जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गर्मियों के मौसम में जब जंगल के कई छोटे जल स्रोत सूख जाते हैं, तब यही प्राचीन तालाब बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, जंगली सूअर और अनेक पक्षियों के लिए प्रमुख जल स्रोत बन जाते हैं। वन्यजीवों की गतिविधियां अक्सर इन तालाबों के आसपास देखी जाती हैं, जिससे यह क्षेत्र सफारी के दौरान भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

इन तालाबों के आसपास फैले घने साल और सागौन के जंगल बांधवगढ़ की सुंदरता को और अधिक अद्भुत बनाते हैं। यहां की पहाड़ियां, प्राचीन गुफाएं, शिलालेख और ऐतिहासिक अवशेष इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत करते हैं।

प्रकृति, इतिहास और वन्यजीवन का ऐसा अनोखा संगम बांधवगढ़ को देश के सबसे विशेष टाइगर रिजर्वों में शामिल करता है। यहां आने वाला हर पर्यटक इन प्राचीन तालाबों और प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठता है।

गौरों की शानदार वापसी: बांधवगढ़ में वन्यजीव पुनर्स्थापन की सफल कहानी

बांधवगढ़ में गौरों की वापसी भारत के सबसे सफल वन्यजीव पुनर्स्थापन अभियानों में गिनी जाती है। एक समय अत्यधिक शिकार और प्राकृतिक आवासों में बदलाव के कारण गौर यहां लगभग विलुप्त हो चुके थे, जिससे जंगल के पारिस्थितिक संतुलन पर भी असर पड़ा था।

स्थिति को देखते हुए मध्यप्रदेश वन विभाग ने वर्ष 2012 में गौर पुनर्स्थापन परियोजना शुरू की। कान्हा और बाद में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से चरणबद्ध तरीके से गौरों को बांधवगढ़ लाया गया। वर्ष 2026 में तीसरे चरण के तहत 27 गौरों का सफल ट्रांसलोकेशन किया गया, जिसका उद्देश्य उनकी आनुवंशिक विविधता को मजबूत करना था।

वन विभाग ने गौरों के लिए सुरक्षित घासभूमि, जल स्रोत और अनुकूल वातावरण विकसित किया। धीरे-धीरे गौरों ने जंगल को अपना नया आवास बना लिया और उनकी संख्या बढ़ने लगी।

वर्तमान में बांधवगढ़ में गौरों की संख्या लगभग 160 तक पहुंच चुकी है, जिनमें कई खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गौरों की वापसी ने जंगल के पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

एशियाई हाथियों की दस्तक से बदलता बांधवगढ़ का जंगल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व लंबे समय से बाघों की धरती के रूप में प्रसिद्ध रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां एशियाई जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी ने जंगल के पारिस्थितिक तंत्र में बड़ा बदलाव लाया है। वर्ष 2017-18 से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जंगलों से हाथियों के झुंड स्वाभाविक रूप से बांधवगढ़ पहुंचने लगे। खास बात यह है कि इन्हें यहां बसाने के लिए किसी प्रकार का ट्रांसलोकेशन नहीं किया गया, बल्कि उन्होंने स्वयं इस क्षेत्र को अपना नया आवास बनाया।

वन विभाग के अनुसार वर्तमान में बांधवगढ़ और आसपास के वन क्षेत्रों में लगभग 80 से 90 जंगली हाथी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी जंगल के प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जंगल में नए रास्ते और घासभूमियां विकसित करते हैं, जिससे हिरण, सांभर, चीतल और बारहसिंगा जैसे शाकाहारी वन्यजीवों को लाभ मिलता है। साथ ही बीजों के प्रसार से जंगल का प्राकृतिक पुनर्जनन भी तेजी से होता है।

वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में बांधवगढ़ बाघों के साथ-साथ एशियाई हाथियों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में भी नई पहचान बना सकता है।

मगधी रेंज में बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र: विलुप्ति से वापसी की प्रेरणादायक पहल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के मगधी रेंज में विकसित लगभग 75 हेक्टेयर का बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह इन्क्लोजर विशेष रूप से संकटग्रस्त बारहसिंगा प्रजाति के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षित प्रजनन के लिए तैयार किया गया है।

एक समय मध्य भारत में बारहसिंगा बड़ी संख्या में पाए जाते थे, लेकिन शिकार, आवास की कमी और पर्यावरणीय बदलावों के कारण इनकी संख्या तेजी से घट गई। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने मगधी रेंज में इनके लिए यह विशेष संरक्षण क्षेत्र विकसित किया, क्योंकि यहां का घासभूमि और जल स्रोत इनके लिए अनुकूल हैं।

यहां प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खुली घासभूमि, जल स्रोत और सुरक्षित प्रजनन क्षेत्र विकसित किए गए हैं। वन विभाग द्वारा नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे इनके संरक्षण को मजबूती मिल रही है।

परियोजना के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं—बारहसिंगों की संख्या में वृद्धि हो रही है और उनका व्यवहार भी प्राकृतिक होता जा रहा है। यह पहल साबित करती है कि सही योजना से संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाया जा सकता है।

यह संरक्षण क्षेत्र न केवल एक प्रजाति के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज यह पहल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की एक नई पहचान बन चुकी है और अन्य अभयारण्यों के लिए प्रेरणास्रोत है।

बांधवगढ़ की दहाड़: एक सफारी में 9 बाघों ने बनाया नया रोमांच

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व का ताला जोन हमेशा से बाघों की शानदार गतिविधियों और रोमांचक सफारी अनुभवों के लिए प्रसिद्ध रहा है। लेकिन एक ही सफारी में 9 बाघों का दिखाई देना अपने आप में एक ऐतिहासिक और बेहद दुर्लभ घटना मानी गई। जंगल के शांत वातावरण में अलग-अलग स्थानों पर बाघों की मौजूदगी ने पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को रोमांच से भर दिया।

वन विभाग के अनुसार सामान्यतः किसी सफारी में एक या दो बाघों का दिखाई देना बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन एक साथ 9 बाघों का दिखाई देना बांधवगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, सुरक्षित वन क्षेत्र और सफल संरक्षण प्रयासों को दर्शाता है। यही कारण है कि अन्य टाइगर रिजर्वों की तुलना में भी बांधवगढ़ को “शेरों का गढ़” कहा जाता है। यह अनुभव पर्यटकों के लिए जीवनभर याद रहने वाला पल बन गया।

पिछली गणना के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगभग 220 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। लगातार बेहतर संरक्षण, सुरक्षित आवास, पर्याप्त शिकार आधार और वन विभाग की सतत निगरानी के कारण यहां बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली गणनाओं में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है।

बजरंग: बांधवगढ़ की पहचान और जंगल का सबसे चर्चित बाघ

बांधवगढ़ का नाम आते ही जिस बाघ की सबसे पहले चर्चा होती है, वह है प्रसिद्ध टाइगर “बजरंग”। अपनी विशाल कद-काठी, दमदार चाल और प्रभावशाली मौजूदगी के कारण बजरंग केवल एक बाघ नहीं, बल्कि बांधवगढ़ की पहचान बन चुका है। देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच भी उसकी अलग पहचान है।

कहा जाता है कि अगर बांधवगढ़ की चर्चा हो और बजरंग का नाम न आए, तो कहानी अधूरी सी लगती है। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक हर कोई उसकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित रहता है। सफारी पर आने वाले पर्यटक घंटों जंगल की पगडंडियों पर इस उम्मीद में इंतज़ार करते हैं कि शायद आज बजरंग का दीदार हो जाए। उसकी मौजूदगी भर से जंगल का रोमांच कई गुना बढ़ जाता है।

बजरंग ने न केवल पर्यटकों को आकर्षित किया है, बल्कि बांधवगढ़ को विश्वभर में नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसकी लोकप्रियता इस बात का प्रतीक है कि बांधवगढ़ आज भी भारत के सबसे समृद्ध और रोमांचक टाइगर रिजर्वों में शामिल है।

जंगल का ‘पुजारी’ अब प्रकृति की गोद में विलीन

बांधवगढ़ के चर्चित नर बाघ “पुजारी ” की मौत ने वन्यजीव प्रेमियों को गहरा दुख पहुंचाया। डी-1 टाइगर के साथ संघर्ष में पुजारी की मृत्यु हो गई, जिसने पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और वन विभाग के कर्मचारियों को भावुक कर दिया।

पुजारी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों और पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय था। वह अक्सर कैमरों के सामने शानदार अंदाज में दिखाई देता था। स्थानीय लोगों ने उसका नाम “पुजारी” इसलिए रखा था क्योंकि सुबह के समय वह ऐसी मुद्रा में दिखाई देता था, मानो सूर्य को प्रणाम कर रहा हो।

पुजारी की मृत्यु के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की गहरी भावनाएं देखने को मिलीं। वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफरों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने भावुक पोस्ट साझा कर पुजारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने उसके साथ बिताए सफारी के यादगार पलों और तस्वीरों को साझा करते हुए उसे बांधवगढ़ के सबसे खास और लोकप्रिय बाघों में से एक बताया।

सोशल मीडिया पर उमड़ी यह संवेदनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि पुजारी केवल एक बाघ नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ एक जीवंत प्रतीक बन चुका था।

उसकी मौत के बाद लोगों ने जिस तरह भावुक होकर श्रद्धांजलि दी, उससे यह स्पष्ट हो गया कि बांधवगढ़ में वन्यजीवों और इंसानों के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन चुका है।

संरक्षण और प्रकृति का जीवंत उदाहरण

आज बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व केवल एक टाइगर रिजर्व नहीं, बल्कि सफल वन्यजीव संरक्षण, समृद्ध जैव विविधता और मानव-प्रकृति संबंध का जीवंत उदाहरण बन चुका है। वन विभाग, स्थानीय समुदाय और संरक्षण विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों ने बांधवगढ़ को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

घने जंगलों में गूंजती बाघों की दहाड़, हाथियों की आवाजाही, गौरों के विशाल झुंड और प्राचीन पहाड़ियों के बीच बसे तालाब आज भी यह संदेश देते हैं कि यदि संरक्षण के प्रयास निरंतर और ईमानदारी से किए जाएं, तो प्रकृति स्वयं को फिर से जीवंत कर सकती है।बांधवगढ़ में गांव वालों और वन विभाग के बीच बेहतर संवाद और समन्वय वन्यजीव संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है। दोनों के बीच तालमेल बना रहना ही जंगल, वन्यजीव और मानव के बीच संतुलन बनाए रखने की अहम कुंजी माना जाता है।

पुलिस आयुक्त जोगेन्द्र कुमार के निर्देशन में पुलिस उपायुक्त यमुनानगर द्वारा अवैध कार्यों में संलिप्तता पाये जाने के दृष्टिगत थाना प्रभारी घूरपुर

विश्वनाथ प्रताप सिंह



प्रयागराज,आवेदक शिकायतकर्ता कमलेश विश्वकर्मा निवासी ग्राम सेन्धूवार थाना घूरपुर के शिकायती प्रार्थना पत्र अंतर्गत थाना घूरपुर पर नियुक्त प्रभारी निरीक्षक  दिनेश सिंह द्वारा गलत तरीके से एक पक्षीय कार्यवाही करते हुए एक पक्ष का अनुचित पक्ष लेते हुए तीन लोगों को थाने में लाया गया और अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। पूर्व में भी समय-समय पर थाना प्रभारियों को अकारण बिना अपराध के किसी को थाने पर नहीं लाने हेतु स्पष्ट आदेश दिए गए हैंl उक्त सम्बन्ध में जांच सहायक पुलिस आयुक्त बारा वेद व्यास मिश्र द्वारा की गई। जांचोपरांत थाना प्रभारी घूरपुर को निलम्बित करते हुए विभागीय जांच कार्यवाही आसन्न की गई है।
उपायुक्त ने बाल सुधार गृह (संप्रेक्षण गृह) का किया औचक निरीक्षण

उपायुक्त हेमन्त सती ने आज 18 मई को बाल सुधार गृह (संप्रेक्षण गृह) का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, बच्चों की देखरेख एवं उपलब्ध सुविधाओं का गहन जायजा लिया।

निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की क्रियाशीलता की जांच की तथा उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने बाल कैदियों से मुलाकात एवं संवाद कर उनका हालचाल जाना।

उपायुक्त ने रसोईघर का निरीक्षण कर बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता की जांच की तथा साफ-सफाई एवं पोषण मानकों का विशेष ध्यान रखने का निर्देश दिया। इसके साथ ही बच्चों के छात्रावास का निरीक्षण कर व्यवस्था का आकलन किया और बच्चों को नियमित पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने पुस्तकालय का भी अवलोकन किया। मौके पर उपस्थित काउंसलर को निर्देश दिया कि बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाई कराएं तथा हिंदी भाषा में महापुरुषों की प्रेरणादायक कहानियों की पुस्तकें उपलब्ध कराकर उन्हें पढ़ने हेतु प्रोत्साहित करें। उन्होंने विशेष रूप से कक्षा दसवीं के बाल कैदियों को प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने के लिए कड़ी मेहनत करने का सुझाव दिया।

उपायुक्त ने बताया कि वर्तमान में बाल सुधार गृह में कुल 68 बच्चे आवासित हैं। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रतिनियुक्त जिला पुलिस बल को सख्त निर्देश दिया कि संप्रेक्षण गृह अधीक्षक की अनुमति के बिना किसी भी परिस्थिति में अवकाश पर न जाएं।

उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि बच्चों के समुचित विकास, शिक्षा एवं सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

हजारीबाग झील क्षेत्र में यातायात एवं भीड़ नियंत्रण को लेकर उपायुक्त का निरीक्षण

उपायुक्त हेमन्त सती ने आज 18 मई को हजारीबाग झील के निकट प्रतिदिन लगने वाली भीड़-भाड़ एवं यातायात व्यवस्था का निरीक्षण किया। इस दौरान नगर आयुक्त श्री ओम प्रकाश गुप्ता भी उपस्थित थे।

निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने पाया कि झील क्षेत्र में आने वाले आगंतुकों द्वारा यत्र-तत्र वाहनों की पार्किंग किए जाने से विशेषकर शाम के समय अत्यधिक जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस पर संज्ञान लेते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को झील के समीप उपलब्ध खाली स्थान को विकसित कर व्यवस्थित पार्किंग जोन के रूप में उपयोग में लाने का निर्देश दिया, ताकि यातायात व्यवस्था को सुगम बनाया जा सके।

इसके अतिरिक्त उपायुक्त ने झील के समीप सड़क किनारे अनियमित रूप से लगने वाली मछली दुकानों को चिन्हित कर उन्हें निर्धारित फेंसिंग क्षेत्र के भीतर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया, जिससे सड़क किनारे अव्यवस्था एवं जाम की समस्या को कम किया जा सके।

उपायुक्त ने कहा कि हजारीबाग झील क्षेत्र शहर का प्रमुख स्थल है,अतः यहां सुव्यवस्थित यातायात एवं साफ-सुथरा वातावरण सुनिश्चित होना चाहिए,उन्होंने नगर निगम को निर्देशित किया कि आवश्यक कार्रवाई शीघ्र पूर्ण करते हुए आमजन को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

नागेश्वर राव के नैक अध्यक्ष बनने से प्रयागराज का गौरव बढ़ा: प्रो.सत्यकाम

-इग्नू और राजर्षि टंडन सहित देश भर के शिक्षाविदों में खुशी की लहर

प्रयागराज। देश के प्रख्यात शिक्षाविद प्रो. नागेश्वर राव को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की कार्यकारी समिति नैक ईसी का चेयरमैन नियुक्त किए जाने पर देश भर के शिक्षाविदों में खुशी की लहर है। देश के शिक्षाविदों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि एक योग्य शिक्षाविद के हाथ में नैक की बागडोर आने से देश के शिक्षण संस्थानों का गुणवत्तापूर्ण विकास होगा। शिक्षा के विकास से ही भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का सपना साकार होगा।

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज के कुलपति एवं प्रो. नागेश्वर राव के साथ इग्नू में प्रतिकुलपति रहे प्रो. सत्यकाम ने प्रो. नागेश्वर राव को नैक ईसी का चेयरमैन नियुक्त किए जाने पर बधाई देते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठापूर्ण नियुक्ति से मुक्त विश्वविद्यालयों का गौरव बढ़ा है। ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रो. नागेश्वर राव के प्रयास अभतपूर्व हैं। उनके प्रयासों से ही मुक्त विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा पूरे देश में बढ़ी है। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से गोल्ड मेडलिस्ट रहे प्राे. राव कॉमर्स और बिजनेस मैनेजमेंट के विद्वान हैं। शिक्षण करियर में 48 साल का अनुभव रखने वाले प्रो. राव के कई शिष्य देश के प्रमुख संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं।

अपनी ऐतिहासिक शैक्षिक यात्रा के दौरान प्रो. राव इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जुलाई 1978 से फरवरी 1985 तक कॉमर्स और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में लेक्चरर रहे। इसके उपरांत बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में फरवरी 1985 से अक्टूबर 1990 तक फैकेल्टी आफ मैनेजमेंट स्टडीज में रीडर रहे। देश में सबसे कम उम्र में प्रोफेसर बनने का गौरव हासिल करने वाले प्रोफेसर राव विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में अक्टूबर 1990 से दिसम्बर 2013 तक पं. जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट आफ बिजनेस मैनेजमेंट में प्रोफेसर के पद में कार्यरत रहे। उन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थानों के प्रशासनिक पदों के प्रमुख का दायित्व ग्रहण किया। देश के कई राज्य और केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में उनका कार्यकाल महत्वपूर्ण उपलब्धियों से भरा रहा।

प्रो. राव सर्वप्रथम उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के कुलपति नियुक्त हुए। मुक्त विश्वविद्यालय में सबसे युवा कुलपति होने का उनका रिकॉर्ड अभी तक टूट नहीं पाया है। इसके उपरांत प्रो. राव को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के सम कुलपति और फिर कार्यवाहक कुलपति की कमान सौंपी गई। इसके उपरांत प्रो. राव उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी, नैनीताल के कुलपति के पद पर नियुक्त हुए। तदोपरांत राष्ट्रपति द्वारा इग्नू के पूर्णकालिक कुलपति नियुक्त किए गये। इग्नू के कुलपति के रूप में प्रो. राव ने काफी प्रतिष्ठा हासिल की। जिसके परिणाम स्वरूप भारत सरकार ने उनकी नेतृत्व क्षमता पर भरोसा करते हुए उन्हें राष्ट्रीय महत्व के संस्थान केंद्रीय हिंदी निदेशालय तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडी के निदेशक का अतिरिक्त पदभार भी सौंपा।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली को इनके कार्यकाल में नैक में ए डबल प्लस ग्रेड मिला। जो किसी भी मुक्त विश्वविद्यालय के लिए अभी तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है, इससे अन्य मुक्त विश्वविद्यालयों की राह आसान हुई। इग्नू के इतिहास की इस सबसे बड़ी उपलब्धि के लिए तत्कालीन शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सर्वाेच्च ग्रेड प्राप्त करने पर कुलपति प्रो. नागेश्वर राव को खुद बधाई दी थी। प्रो. राव के कार्यकाल में इग्नू 40 लाख से अधिक छात्रों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी ओपन यूनिवर्सिटी बनी रही।

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. प्रभात चन्द्र मिश्र में बताया कि शोध और प्रकाशन के क्षेत्र में प्रो. राव ने कई उपलब्धियां हासिल की। उन्होंने आठ लोकप्रिय पुस्तकें लिखीं। 37 पीएचडी छात्रों को गाइड किया तथा 180 रिसर्च पेपर प्रकाशित हुए। प्रो. राव को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए, जिनमें प्रमुख रूप से ऑनरेरी फेलो, कॉमनवेल्थ ऑफ़ लर्निंग है। ओपन और डिस्टेंस लर्निंग में विश्वस्तरीय योगदान के लिए प्रो. राव को यह प्रतिष्ठित फेलोशिप मिली। राष्ट्रीय पुरस्कारों में उत्तर प्रदेश सरकार का सरस्वती सम्मान है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रो. राव को यह पुरस्कार प्रदान किया गया। मीडिया प्रभारी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा प्रो. नागेश्वर राव को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की कार्यकारी समिति नैक ईसी का चेयरमैन नियुक्त किए जाने पर देश भर से प्रो राव को बधाइयां मिल रही हैं। प्रयाग की धरती को अपनी कर्मभूमि मानने वाले प्रोफेसर राव की इस उपलब्धि पर प्रयागराज का गौरव बढ़ा है।
थाना छपिया पुलिस द्वारा जानलेवा हमला करने के 02 आरोपी अभियुक्तों को किया गया गिरफ्तार
गोण्डा। पुलिस अधीक्षक  विनीत जायसवाल द्वारा अपराध एवं अपराधियों के विरूद्ध चलाये जा रहे अभियान के क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी अजीत कुमार रजक के पर्यवेक्षण व क्षेत्राधिकारी मनकापुर श्री उदित नारायण पालीवाल के नेतृत्व में थाना छपिया पुलिस टीम द्वारा थाना स्थानीय पर पंजीकृत मु0अ0सं0-201/2026 धारा 131, 115(2), 351(3), 109(1), 191(2) बीएनएस तथा मु0अ0सं0- 203/2026 धारा 109(1), 352, 351(3), 191(2) बीएनएस से सम्बन्धित 02 आरोपी अभियुक्तों-01. विक्रान्त शुक्ला उर्फ दीपक शुक्ला, 02. विकास पाण्डेय को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया।

*घटना का संक्षिप्त विवरण-*
दिनांक16.05.2026 को थाना छपिया क्षेत्रान्तर्गत पुरानी रंजिश को लेकर दो अलग-अलग घटनाओं में विपक्षीगणों द्वारा वादियों के परिजनों पर जानलेवा हमला किया गया। प्रथम घटना में वादी सरजू प्रसाद पुत्र मोतीलाल निवासी बेलहरी बुजुर्ग के पुत्र युवराज को बनकटवा गाँव में विपक्षी विक्रान्त शुक्ला उर्फ दीपक शुक्ला, सदानन्द पाण्डेय, उत्कर्ष पाण्डेय, अभय तिवारी व दो अज्ञात व्यक्तियों द्वारा लाठी-डण्डा व राड से मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। वहीं दूसरी घटना में वादी सतीश सिंह पुत्र राजदेव सिंह निवासी सिसहनी के भाई भूपेन्द्र सिंह पर सुकरौली गाँव में दीपक शुक्ला उर्फ विक्रान्त शुक्ला, विकास पाण्डेय व दो अज्ञात व्यक्तियों द्वारा धारदार हथियार से हमला कर गंभीर चोटें पहुँचायी गयीं। दोनों घटनाओं में विपक्षीगणों द्वारा गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी गयी तथा स्थानीय लोगों के एकत्र होने पर मौके से फरार हो गये। वादीगण की लिखित तहरीर के आधार पर थाना छपिया में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया। जिसमें थाना छपिया पुलिस द्वारा आज दिनांक 18.05.2026 को घटना में संलिप्त 02 आरोपी अभियुक्तों-01. विक्रान्त शुक्ला उर्फ दीपक शुक्ला, 02. विकास पाण्डेय को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार अभियुक्तगणों के विरूद्ध थाना छपिया पुलिस द्वारा अग्रिम विधिक कार्यवाही कर माननीय न्यायालय रवाना किया गया।
नगर पालिका परिषद एवं विन्ध्य फाउंडेशन ट्रस्ट के तत्वाधान में लगाया गया स्वैच्छिक रक्तदान शिविर
प्रेस नोट

शिविर के अंतर्गत आठ रक्तदाताओ ने रक्तदान कर दिया जीवंत संदेश

पिता पुत्र की जोड़ी ने भी किया रक्तदान

मीरजापुर, 18 मई 2026 सोमवार
नगर पालिका परिषद मीरजापुर एवं विन्ध्य फाउंडेशन ट्रस्ट के तत्वाधान में लालडिग्गी स्थित नगर पालिका परिषद कार्यालय परिसर में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।
रक्तदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नगर पालिकाध्यक्ष श्याम सुंदर केसरी के पहल पर आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर के अंतर्गत 16 लोगों ने रक्तदान के लिए पंजीयन कराया और स्वास्थ्य परीक्षण के पश्चात 8 रक्तदाताओ ने रक्तदान कर समाज को जीवंत संदेश दिया।
रक्तदान करने वालों में केशव लुंडिया, आनन्द कसेरा, रीतेश कुमार गुप्ता, श्रीकिशन कसेरा, प्रथम कसेरा, सतीश कुमार,  कृष्णा सोनी, आशीष कुमार सम्मिलित रहें।
विशेष बात ये रही कि कोतवाली वार्ड के सभासद पति श्रीकिशन कसेरा ने अपने पुत्र प्रथम कसेरा के साथ रक्तदान किया।
कार्यक्रम के दौरान नगर पालिका के तरफ से सभासद अलंकार जायसवाल, सभासद बाबा यादव सहित नगर पालिका के कर्मचारी उपस्थित रहे।
तो विन्ध्य फाउंडेशन ट्रस्ट के तरफ से अध्यक्ष कृष्णानंद हैहयवंशी, उपाध्यक्ष शिव कुमार शुक्ल, सचिव अभिषेक साहू, मीडिया प्रभारी विनय कुमार,  स्वतंत्र प्रभार  मोहित कसेरा और मेडिकल कॉलेज के ब्लड सेंटर की तरफ से डाॅ विनोद कन्नौजिया, काउंसलर माला सिंह, जनसंपर्क अधिकारी रामकुमार गुप्ता सहित अमित पटेल,  प्रवेश राजभर,  प्रदीप, मनीष, विनोद इत्यादि उपस्थित रहें।
कार्यक्रम के दौरान कृष्णानंद हैहयवंशी ने बताया कि विन्ध्य फाउंडेशन ट्रस्ट रक्तदान के क्षेत्र में पिछले आठ वर्षो से कार्य कर रही है और नगर पालिका परिषद मीरजापुर का हमें लगातार सहयोग मिल रहा है। उन्होनें नगर पालिकाध्यक्ष श्याम सुंदर कसरी का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि विगत 12 जनवरी को ऐतिहासिक घंटाघर में भी नगर पालिका के सहयोग से शिविर लगा था जहां ऐतिहासिक 83 यूनिट रक्तदान हुआ था तो आज यहां पर 8 यूनिट रक्तदान हुआ।
कार्यक्रम का संचालन कर रहें आनन्द कसेरा ने बताया कि आवश्यक कारणों से नगर पालिकाध्यक्ष जी को अचानक लखनऊ जाना पड़ा लेकिन उन्होनें पूर्व निर्धारित इस शिविर के लिए जाते समय हम सभी को दिशा-निर्देश दे दिया था।
विश्व हिंदू महासंघ की बैठक में मुख्यमंत्री के जन्मदिवस कार्यक्रमों की बनी रूपरेखा


उत्तर प्रदेश बलरामपुर। गोरक्ष पीठाधीश्वर के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में विश्वाहिन्दु महासंघ बलरामपुर इकाई के तत्वावधान में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक जिला कार्यालय विश्व हिंदू महासंघ, बलरामपुर में आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता जिला अध्यक्ष चौधरी विजय सिंह ने की।
बैठक में गोरक्षपीठाधीशवर के जन्मदिवस को सेवा एवं जनकल्याण दिवस के रूप में मनाने को लेकर विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई। इस दौरान भगवा ध्वज के साथ पीठाधीश्वर के 55वे जन्मदिवस के अवसर पर 55 दीपों को जलाकर महा आरती तथा ओम नमः शिवाय पाठ, योगी सरकार के उपलब्धियो पर प्रदर्शनी, स्वैच्छिक रक्तदान, गौसेवा , हिंदू स्वाभिमान सम्मेलन, वंदे मातरम चौक की साथ सज्जा, संत सम्मान शोभा यात्रा एवं प्रसाद वितरण,सामाजिक समरसता पौधरोपण, साधू सेवा गरीब  जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री वितरण, स्वास्थ्य शिविर रक्तदान तथा धार्मिक आयोजनों सहित कई कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई।
जिला अध्यक्ष चौधरी विजय सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जीवन समाज सेवा, राष्ट्रहित और हिंदुत्व की भावना को समर्पित है। उनके जन्मदिवस पर संगठन द्वारा जनहित से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरूक करने का कार्य किया जाएगा।
बैठक में संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं मे जिला मंत्री राधेश्याम कौशल, जिला उपाध्यक्ष विजय प्रताप सोनी, जिला मीडिया प्रभारी जय सिंह, जिला उपाध्यक्ष मिथिलेश गिरी, जिला अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ सुनीता तिवारी, वेद प्रकाश जायसवाल जिला कार्यालय प्रभारी संतोष कुमार दुबे सहित कई लोगों ने अपने-अपने विचार रखें  और कार्यक्रमों को सफल बनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर कई प्रमुख पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। उक्त साप्ताहिक कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रुद्र कुमार पाठक अधिवक्ता प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष, विशिष्ट अतिथि के रूप में ओम प्रकाश सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष विशिष्ट अतिथि भानु प्रताप सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष तथा विशिष्ट अतिथि प्रदेश अध्यक्ष सोशल मीडिया गंगा शर्मा कौशिक उपस्थित रहेंगे।
पांचवीं जिलास्तरीय योगासन चैंपियनशिप में बच्चों ने किया अद्भुत प्रदर्शन
मीरजापुर , डिस्ट्रिक्ट योगासन स्पोर्ट एसोसिएशन मीरजापुर की ओर में नगर के पांडेयपुर स्थित संस्कार पब्लिक स्कूल में पांचवीं जिलास्तरीय योगासन खेल प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ नगर विधायक रत्नाकर मिश्रा ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय योगासन खिलाड़ी राज लक्ष्मी साहिल ने शिव तांडव पर अद्भुत प्रस्तुति दी।
योगासन खेल संघ के अध्यक्ष डॉ अमन सिंह यादव ने प्रबंधक अनंत राज भंडारी ने मिलकर नगर विधायक को अंगवस्त्रम व मूमेंटो प्रदान कर उनका स्वागत
किया। इस अवसर पर नगर विधायक ने कहा कि योग कहा कि हमारी सनातन संस्कृति और सभ्यता का मूल धरोहर है , जिसे आज योगासन खेल के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने के लिए बच्चों के लिए एक नया अवसर है।
कार्यक्रम समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि राज्य मंत्री पिछड़ा वर्ग आयोग उत्तर प्रदेश सरकार सोहन लाल श्रीमाली जी ने बच्चों को पुरस्कृत करते हुए उन्हें मेडल मुमेटों के साथ प्रशस्तिपत्र प्रदान कर उन्हें आने वाले राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की ।
इस अवसर पर उन्होंने कहा की जिला स्तरीय योगासन खेल प्रतियोगिता में जनपद के बच्चों का अद्भुत प्रदर्शन देख कर मन प्रफुल्लित हुआ , और लगा कि सच में जनपद में भी योग में राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने वाली प्रतिभाएं मौजूद है , जो आने वाले समय में जनपद मीरजापुर का गौरव बढ़ाएंगे।
जिला स्तरीय प्रतियोगिता में 8 से 14 वर्ष में प्रतिभाग करने वाले विजेताओं बच्चों में आर्टिस्टिक सिंगल गर्ल सब जूनियर प्रतियोगिता में आकृति मौर्य प्रथम , आयुषी दुबे द्वितीय एवम् दृष्टि पाण्डेय तृतीय स्थान प्राप्त की। सब जूनियर ट्रेडिशनल गर्ल प्रतियोगिता में , प्रीति बिंद प्रथम अर्चिता सिंह द्वितीय , प्रियांशी पाण्डेय तृतीय स्थान पर रही।
सब जूनियर ट्रेडिशनल ब्वॉय प्रतियोगिता में , यश चौहान प्रथम , शिवाय गुप्ता द्वितीय तन्मय भारती तृतीय स्थान पर रही।
जूनियर 14 से 18 वर्ष ब्वॉय प्रतियोगिता में कृतवेश पाण्डेय प्रथम , हर्ष पाण्डेय द्वितीय , कृष्णम पाण्डेय तृतीय स्थान पर रहे। गर्ल प्रतियोगिता में पूनम बिंद प्रथम स्थान पर रही।
आर्टिस्टिक सिंगल सब जूनियर ब्वॉय संकल्प कुशवाहा प्रथम देवांश तिवारी द्वितीय स्थान पर रहे। सब जूनियर ब्वॉय
रिदमिक पेयर में मानस राय एवं शिवाय गुप्ता प्रथम स्थान , अद्विक एवं शिव श्याम द्वितीय स्थान , सब जूनियर रिदमिक पेयर गर्ल त्रिशिखा पाण्डेय एवं श्रीजा सिंह प्रथम स्थान , जियांशी शेखर एवं अर्चिता सिंह द्वितीय स्थान पर रहे।
सीनियर बॉयस ट्रेडिशनल इवेंट अश्वनी मौर्य प्रथम , सीनियर गर्ल ट्रेडिशनल इवेंट में राज लक्ष्मी प्रथम , आरती द्वितीय एवं विजय लक्ष्मी तृतीय स्थान पर रही।
शेष प्रतियोगिता लगातार चल रही है जिसका रिजल्ट आना शेष है। कार्यक्रम में राज्य मंत्री ने आए हुए डिस्ट्रिक्ट योगासन स्पोर्ट एसोसिएशन के साथ पदाधिकारियों को अंगवस्त्रम व प्रदान कर सम्मानित किया।
इस अवसर खेल संघ के अध्यक्ष डॉ अमन सिंह यादव ने पूरी टीम के साथ आए हुए अतिथियों का स्वागत सत्कार करते हुए सभी योगासन जजों खिलाडियों एवं सहयोगी स्कूल परिवार का आभार धन्यवाद् व्यक्त किया।
इस अवसर पर इस अवसर पर प्रधानाचार्या रितु भंडारी योग गुरु भोला नाथ संगीता व्यास रचना नीतू यादव रामधनी पाल भरत जी दिव्या श्रीवास्तव अवनीश उपाध्याय राहुल यादव प्रवीण मौर्य अनिल मौर्य आदि लोग उपस्थित रहे।
भीषण गर्मी एवं लू से बचाव को लेकर जिला प्रशासन सतर्क

नितेश श्रीवास्तव

भदोही । जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने बताया कि जनपद में लगातार बढ़ते तापमान एवं भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क एवं सक्रिय है। आमजन को लू (हीट स्ट्रोक) से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश एवं एडवाइजरी जारी की गई है। जिलाधिकारी ने बताया कि विगत दिनों से जनपद का तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है तथा आगामी दिनों में इसके 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। ऐसी स्थिति में लू लगने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
जिलाधिकारी ने बताया कि लू लगने की स्थिति में शरीर का अत्यधिक गर्म एवं लाल हो जाना, त्वचा का शुष्क होना, तेज नाड़ी चलना, सिरदर्द, चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, थकान तथा पसीना कम या बंद हो जाना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है।
उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें। यदि बाहर जाना अत्यंत आवश्यक हो तो हल्के रंग in के ढीले एवं सूती वस्त्र पहनें तथा सिर को टोपी, गमछा या छाते से ढककर रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं तथा शरीर में जल की कमी न होने दें। ओआरएस घोल, नमक-चीनी का घोल एवं अन्य तरल पदार्थों का सेवन लाभकारी रहेगा।
इसी क्रम में जिलाधिकारी ने आज सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय, सरपतहा के लू वार्ड का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) की अनुपस्थिति पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए वेतन रोकने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में तीन अस्पताल 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं 20 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर लू वार्ड बनाए गए हैं सभी केदो पर 24 घंटे डॉक्टरों की टीम भी लगाई गई है लू वार्ड की व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद के सभी कार्यालयों सार्वजनिक स्थलों एवं पशु पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था कराई गई है।
तत्पश्चात जिलाधिकारी द्वारा महाराजा चेतसिंह चिकित्सालय, ज्ञानपुर का भी आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान एनआरसी, डेंगू वार्ड एवं लू वार्ड की व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रूप से संचालित मिलीं। जिलाधिकारी ने अस्पताल में मरीजों के लिए शुद्ध पेयजल, आवश्यक दवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने भर्ती मरीजों से उनका हालचाल जाना तथा चिकित्सकों को निर्देशित करते हुए कहा कि सभी मरीजों को समयबद्ध, समुचित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उपचार व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जिलाधिकारी ने समस्त जनपदवासियों आम जनमानस से अपील की है कि गर्मी एवं लू के प्रभाव को देखते हुए आवश्यक सावधानियां बरतें, स्वयं को सुरक्षित रखें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।