योगी सरकार का खरीफ मिशन: 302.55 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य तय
* मक्का, दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर, किसानों को समय से मिलेगा बीज-उर्वरक
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ सीजन 2026-27 के लिए कृषि उत्पादन बढ़ाने का बड़ा रोडमैप तैयार किया है। राज्य स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी में वर्ष 2026-27 के दौरान खरीफ खाद्यान्न एवं तिलहन उत्पादन को 256.22 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 302.55 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स ऑडिटोरियम में आयोजित इस गोष्ठी में कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि अध्यक्षता कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार ने की। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों और बड़ी संख्या में किसानों ने सहभागिता की।
राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख ने कहा कि योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश आज कृषि उत्पादन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। उन्होंने मक्का, दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की।
वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि किसानों तक उन्नत बीज, आधुनिक कृषि यंत्र और वैज्ञानिक खेती की जानकारी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया।
कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों की समस्याओं का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही खरीफ सीजन से पहले बीज, उर्वरक और अन्य कृषि निवेश समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश में 110.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों का आच्छादन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए विभागीय समन्वय, तकनीकी मार्गदर्शन और संसाधनों की समयबद्ध उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान ‘ग्रो सेफ फूड’ अभियान के अंतर्गत कृषि रक्षा रसायनों के सीमित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष चार्ट का विमोचन भी किया गया। इसका उद्देश्य सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उत्पादन को प्रोत्साहित करना है।
तकनीकी सत्र में कृषि विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों ने मूंगफली, तिल, अरहर और मक्का की उन्नत प्रजातियों, रोग नियंत्रण, आधुनिक कृषि यंत्रों, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर किसानों को विस्तृत जानकारी दी। साथ ही जलवायु परिवर्तन से निपटने, संतुलित उर्वरक उपयोग, गौ आधारित कृषि, ढैचा खेती, धान की सीधी बुवाई और दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।
May 21 2026, 19:14
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