मार्केट बंद होने में दो कानून नहीं चलेगा, पुलिस को सख्‍ती से अंकुश लगाना आवश्‍यक : आलोक शर्मा


सांसद ने कहा - भोपाल वक्फ की जागीर नहीं

सांसद आलोक शर्मा ने पुलिस आयुक्त से की मुलाकात

भोपाल। सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल में मार्केट बंद होने के दो कानून प्रचलित है, जिस पर पुलिस को सख्ती से अंकुश लगाना चाहिए। उन्होंने कहा पुराने भोपाल शहर में रातभर दुकानें खुली रहती है, जहां पर आपराधिक गतिविधियों को बल मिलता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने रात सोने के लिए बनाई है। घर पर अब्बू, अम्मी इंतजार करते हैं कि बेटा आएगा और हमें दवाई देगा लेकिन बेटा तो रातभर बिरयानी की दुकान और मार्केट में ही बिताता है। ये चिंता आज कई परिवारों की है। युवा गलत रास्ता अपना लेते हैं। शनिवार को सांसद आलोक शर्मा ने भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार से मुलाकात कर उन्हें इस आशय का एक पत्र सौंपा है जिसमें भोपाल के सभी मार्केट एक समय पर बंद करने का आग्रह किया है। ज्ञात रहे सांसद शर्मा पूर्व में भी कई बार ये मुद्दा उठाते रहे हैं लेकिन पुलिस की सख्ती न होने के कारण आज भी व्यवस्था वैसी ही है। सांसद शर्मा ने पुलिस आयुक्त से मुलाकात के दौरान बताया कि अभी भोपाल शहर में दो कानून प्रचलित हैं, न्यू मार्केट, एमपी नगर, संत हिरदाराम नगर, बीएचईएल बरखेड़ा, इंद्रपुरी सोनागिरि, 6 नंबर मार्केट, 10 नंबर मार्केट, लखेरापुरा, सराफा चौक आदि रात में 10 बजे तक बंद हो जाते हैं। जबकि पुराने भोपाल शहर के मार्केट्स काजीकैंप, लक्ष्मी टॉकीज, बसस्टैंड, रेलवे स्टेशन, रॉयल मार्केट जीपीओ, इमामी गेट, राजू टी-स्टाल, जिंसी-जहांगीराबाद, सब्बन चौराहा, इतवारा, बुधवारा में दुकानें रातभर खुली रहती हैं जिससे आपराधिक गतिविधियों को बल मिलता है और शहर की कानून व्यवस्था बिगड़ती है। सांसद शर्मा को पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने शहर के सभी मार्केट्स एक समय पर बंद कराने की कार्यवाही सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया है।

* भोपाल वक्फ की जागीर नहीं

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल वक्फ की जागीर नहीं है। शहर में कहीं भी डेवलपमेंट के काम करने जाएं तो खड़े हो जाते हैं कि यह वक्फ की जमीन है। महापौर रहते जब हम पॉलिटेक्निक से भारत माता चौराहे तक स्मार्ट रोड बनाने गए तो रोड़ा अटकाया। बोले कि यह वक्फ की जमीन है जबकि आज वहां स्मार्ट रोड बन जाने के बाद मुसलमान भी उस रोड पर निकलता है, हिंदू भी उस पर रोड पर निकलता है, सभी वर्ग के लोग उस स्मार्ट रोड का उपयोग करते हैं। इसी प्रकार श्यामला हिल्स पर मानस भवन के पीछे की झुग्गियां का हटाने का मामला भी है। वहां पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सभी को आवास का पैसा जमा किया गया है। किसी को बेघर नहीं किया जाएगा लेकिन शहर के अंदर सरकारी जमीन पर किसी को भी अतिक्रमण करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। वक्फ के नाम पर किसी को भी अवैध कब्जा नहीं करने दिया जाएगा।

सहायक पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में पुलिस ने चलाया चेकिंग अभियान

रितेश मिश्रा
शाहाबाद हरदोई।सहायक पुलिस अधीक्षक/सीओ शाहाबाद के नेतृत्व में सुरक्षा की दृष्टि से शनिवार की शाम को आंझी रेलवे स्टेशन के निकट सघन चेकिंग अभियान चलाया गया।
         जनपद में अपराध और अपराधियों की रोकथाम के लिए सहायक पुलिस अधीक्षक/सीओ शाहाबाद आलोक राज नारायण के नेतृत्व में मझिला और शाहाबाद की संयुक्त पुलिस टीम ने रेलवे स्टेशन के निकट आलमनगर मोड़ पर सघन चेकिंग अभियान चलाया। सहायक पुलिस अधीक्षक श्री नारायण ने बताया पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा के निर्देश पर उनके सर्किल में जनमानस की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए जगह जगह सघन चेकिंग अभियान चलाया जाता है। चेकिंग अभियान चलाये जाने से अपराध और दुर्घटनाओं पर काफ़ी नियंत्रण पाया गया। चेकिंग के दौरान बाइक सवारों और चार पहिया वाहन चालकों को उनकी सुरक्षा के मद्देनजर हेलमेट और सीट बेल्ट बांध कर  चलाने के लिए जागरूक किया जाता है। चेकिंग के दौरान संदिग्ध चीजों को बरामद कर वाहन को सीज किया जा रहा है।इस अवसर पर शाहाबाद कोतवाल अरविन्द राय, मझिला थाना प्रभारी सतेंद्र कुमार सहित भारी पुलिस बल उपस्थित रहा।
6 मई को भव्य होगा रामनिवास रावत का कार्यभार ग्रहण समारोह

- वन विकास निगम के अध्यक्ष पद की संभालेंगे जिम्मेदारी, समारोह को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी तेज

भोपाल। आगामी 6 मई 2026 को प्रातः 10 बजे पूर्व मंत्री रामनिवास रावत मध्यप्रदेश वन विकास निगम के अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण करेंगे। इस अवसर पर वन भवन में आयोजित होने वाले समारोह को भव्य और ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

समारोह की रूपरेखा तय करने के लिए मप्र मीना समाज सेवा संगठन की बैठक प्रदेश संगठन महामंत्री एड. संतोष मीना की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में संगठन के पदाधिकारियों और समाज के वरिष्ठ जनों ने व्यापक चर्चा करते हुए कार्यक्रम को यादगार बनाने का संकल्प लिया।

बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष लीलेन्द्र सिंह मारण, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लखन सिंह मीना सहित समाजसेवी विमल सिंह मारण, ब्रजेश मीणा, हरभजन मीना, रामसेवक मीना, रामजीवन मीना, सुदेश मारण, जीवन मारण, जगदीश मारण, पर्वत सिंह मारण, सत्यम मीना और भैयालाल मारण सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि रामनिवास रावत के कार्यभार ग्रहण समारोह को भव्य स्वरूप दिया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग और गणमान्य नागरिक शामिल होंगे।

दोहरीघाट-ओड़िहार मेमू सेवा को मिली रफ्तार, ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के प्रयास रंग लाए

* स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा
* रेल सेवा से पूर्वांचल में बढ़ेगा विकास और रोजगार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा के सतत प्रयासों से दोहरीघाट से ओड़िहार के बीच प्रस्तावित मेमू ट्रेन सेवा को गति मिलती दिख रही है। क्षेत्रीय जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को प्राथमिकता देते हुए मंत्री ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई है।
मऊ जनपद के दौरे के दौरान मंत्री ए. के. शर्मा ने दोहरीघाट रेलवे स्टेशन का स्थलीय निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों के साथ व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रस्तावित मेमू सेवा क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी और आवागमन को अधिक सुगम, सुलभ और किफायती बनाएगी। उन्होंने बताया कि उनके प्रयासों और केंद्र सरकार के सहयोग से दोहरीघाट से कटिहार तक मेमू ट्रेन संचालन की घोषणा संभव हो सकी है।
मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए नरेंद्र मोदी और अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना पूर्वांचल के समग्र विकास को नई दिशा देगी।
उन्होंने कहा कि इस रेल सेवा के शुरू होने से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि व्यापार, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने मंत्री का जोरदार स्वागत किया और इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए आभार व्यक्त किया। क्षेत्र में नई रेल सेवा को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला है।
अवैध खनन करने पर डंपर पकड़ा 55 हज़ार जुर्माना, चालाक नहीं दिखा सका प्रपत्र
फर्रुखाबाद l जिलाधिकारी के निर्देश पर जनपद में अवैध खनन एवं अवैध परिवहन के विरुद्ध सख्त रुख अपनाते हुए निरंतर एवं प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन द्वारा इस संबंध में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है, जिसके अंतर्गत संबंधित विभागों को नियमित निगरानी एवं सघन अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
इस दौरान थाना नवाबगंज क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम गनीपुर जोगपुर में खनन अधिकारी द्वारा औचक छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान एक डम्पर, जो गिट्टी से लदा हुआ था, को रोककर उसकी सघन जांच की गई। जांच के दौरान वाहन चालक सोनू वैध प्रपत्र प्रस्तुत करने को कहा गया, किन्तु वह कोई भी वैध अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सका।
प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वाहन द्वारा गिट्टी को बिना वैध प्रपत्र के ले जा रहे थे जो खनन नियमों का उल्लंघन है। इस पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए संबंधित के विरुद्ध अवैध परिवहन के जुर्म में ऑनलाइन नोटिस निर्गत किया गया l साथ ही 55,780 रुपये का जुर्माना मौके पर ही वसूल किया गया।
जिलाधिकारी ने इस कार्रवाई को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनपद में अवैध खनन एवं खनिजों के अवैध परिवहन में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में बख्शा न जाए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ न केवल राजस्व की हानि हो रही हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी प्रभावित हो रहा हैं। इसलिए संबंधित विभाग पूरी सतर्कता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करें।
उन्होंने खनन विभाग, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जनपद के संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त एवं आकस्मिक छापेमारी की जाए तथा अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए। साथ ही, सभी प्रवर्तन कार्रवाइयों पर विशेष बल दिया जाए।
प्रशासन द्वारा आमजन से भी अपील की गई है कि यदि कहीं अवैध खनन अथवा खनिजों के अवैध परिवहन की जानकारी प्राप्त हो, तो तत्काल संबंधित विभाग अथवा स्थानीय प्रशासन को सूचित करें। नागरिकों के सहयोग से ही इस प्रकार की अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। प्रशासन कानून व्यवस्था एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है और इस दिशा में आगे भी कठोर कार्रवाई जाएगी।
RSF की प्रेस स्वतंत्रता रिपोर्ट: वैश्विक पैमाना या भारत की अधूरी तस्वीर?

डॉ. पंकज सोनी

Reporters Without Borders (RSF) की सालाना रिपोर्ट पर भरोसा करने से पहले एक बुनियादी सवाल है—यह बनती कैसे है? किसके संसाधनों से, किन स्रोतों के आधार पर और किस दृष्टिकोण के साथ? 140 करोड़ की आबादी, दर्जनों भाषाओं और सैकड़ों संस्कृतियों वाले भारत की प्रेस स्वतंत्रता क्या पेरिस में बैठकर तैयार प्रश्नावलियों से मापी जा सकती है?

हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पेरिस स्थित एक NGO Reporters Without Borders (RSF) अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी करता है। इस रिपोर्ट में भारत का स्थान प्रायः 150 के बाद ही दिखाई देता है। 2026 की रिपोर्ट में भारत 157वें स्थान पर है, जबकि 2025 में भी यही रैंक और 2024 में 159वां स्थान था।

रिपोर्ट आते ही देश का एक वर्ग चिंतित स्वर में कहता है—“लोकतंत्र खतरे में है”, “पत्रकारिता समाप्त हो रही है”, “प्रेस पर दबाव बढ़ गया है।” लेकिन इन प्रतिक्रियाओं के बीच एक मूल प्रश्न अक्सर अनदेखा रह जाता है—यह सूचकांक तैयार कैसे होता है? भारत इसमें लगातार पीछे क्यों रहता है?

दरअसल, RSF एक फ्रांसीसी गैर-सरकारी संगठन है, जिसकी फंडिंग के स्रोत पूरी तरह पारदर्शी नहीं माने जाते। यूरोपीय सरकारें और कुछ निजी फाउंडेशन इसे सहयोग देते हैं। इसका प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक मुख्यतः सर्वेक्षण, धारणाओं और सीमित केस स्टडी पर आधारित होता है। यह कोई पूर्णतः वैज्ञानिक या वस्तुनिष्ठ मापदंड नहीं, बल्कि चुनिंदा लोगों की राय का संकलन है, जिसमें पश्चिमी उदारवादी मूल्यों को पत्रकारिता का मानक मान लिया जाता है।

यहीं एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है—क्या इतने विशाल और विविध देश की मीडिया स्वतंत्रता का आकलन सीमित प्रश्नावलियों के आधार पर किया जा सकता है? भारत में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन यहाँ के संविधान, न्यायपालिका और नागरिक अधिकारों के संदर्भ में होना चाहिए, न कि केवल किसी बाहरी संस्था के आकलन से।

इस रिपोर्ट का एक बड़ा विरोधाभास यह भी है कि इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों को कई बार भारत से बेहतर स्थान दिया गया है। पाकिस्तान में पत्रकारों के लापता होने, मीडिया पर सैन्य दबाव और वरिष्ठ पत्रकार Arshad Sharif की हत्या जैसी घटनाएं व्यापक रूप से सामने आ चुकी हैं। वहीं बांग्लादेश में डिजिटल सुरक्षा कानून के तहत पत्रकारों पर कार्रवाई के मामले भी सामने आए हैं। ऐसे में यह तुलना स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े करती है।

वैश्विक स्तर पर भी मीडिया स्वतंत्रता की स्थिति जटिल है। अमेरिका में Julian Assange के खिलाफ लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई चली। पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने मीडिया को “एनिमी ऑफ द पीपल” तक कहा। रूस और चीन में मीडिया पर राज्य का प्रभाव जगजाहिर है। इसके बावजूद RSF रैंकिंग में इन देशों की स्थिति अपेक्षाकृत कम आलोचनात्मक दिखाई देती है, जिससे भू-राजनीतिक पूर्वाग्रह की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

International Federation of Journalists (IFJ) के अनुसार 2025 में दुनिया भर में 128 पत्रकारों की हत्या हुई, जिनमें अधिकांश मध्य-पूर्व और संघर्ष क्षेत्रों से थे। भारत में ऐसे मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, और हर घटना पर न्यायिक व प्रशासनिक प्रक्रिया सक्रिय होती है।

भारत की जमीनी तस्वीर देखें तो यहाँ 900 से अधिक सैटेलाइट चैनल, 17,000 से ज्यादा पंजीकृत समाचारपत्र और लाखों डिजिटल प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं। अनेक मीडिया संस्थान सरकार की खुलकर आलोचना करते हैं और निर्बाध रूप से कार्य कर रहे हैं। संसद, न्यायपालिका और सोशल मीडिया—तीनों स्तरों पर अभिव्यक्ति की विविधता स्पष्ट दिखाई देती है।

हालाँकि, भारतीय पत्रकारिता की एक चुनौती यह भी है कि बिना प्रशिक्षण या मान्यता के बड़ी संख्या में लोग मीडिया के नाम पर सक्रिय हो गए हैं। कुछ मामलों में यह स्थिति अव्यवस्था और अविश्वसनीयता को जन्म देती है, जो समग्र तस्वीर को प्रभावित करती है।

RSF की निष्पक्षता पर सवाल केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। The GuardianGlobal Times और अन्य संस्थानों द्वारा इसके वित्तीय स्रोतों व दृष्टिकोण पर प्रश्न उठाए गए हैं। यहाँ तक कि Encyclopaedia Britannica में भी कुछ संदर्भों में इसके संभावित पक्षपात का उल्लेख मिलता है।

स्पष्ट है कि RSF का सूचकांक एक उपयोगी संकेतक हो सकता है, लेकिन इसे अंतिम सत्य मानना उचित नहीं। उतना ही गलत इसे पूरी तरह खारिज कर देना भी होगा।

भारत जैसे विशाल और विविध लोकतंत्र में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन बहुआयामी दृष्टिकोण से ही संभव है—जहाँ वैश्विक सूचकांक, स्थानीय वास्तविकता और संस्थागत अनुभव, तीनों को संतुलित रूप से समझा जाए।

(लेखक जनसंपर्क विभाग भोपाल में सहायक मीडिया सलाहकार हैं और यह इनके व्यक्तिगत विचार हैं।)

हर तीन महीने में यूनिट टेस्ट देना अनिवार्य पहला टेस्ट जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगा

*जुलाई में पहला टेस्ट ,9 वीं से 12 वीं तक लागू होगी न‌ई व्यवस्था*



रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने नए शैक्षिक सत्र से परीक्षा प्रणाली में अहम बदलाव किया है। अब कक्षा नौ से 12 तक के छात्रों के लिए साल भर मूल्यांकन की नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। विद्यार्थियों को केवल वार्षिक परीक्षा पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि हर तीन महीने में अनिवार्य रूप से यूनिट टेस्ट देना पड़ेगा। इसी क्रम में पहला यूनिट टेस्ट जुलाई के दूसरे सप्ताह में आयोजित किया जाएगा।नई व्यवस्था के तहत जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों में यह प्रणाली लागू होगी। यूनिट टेस्ट में बहुविकल्पीय प्रश्नों (एमसीक्यू) को विशेष प्राथमिकता दी गई है। ताकि विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता और त्वरित निर्णय लेने की योग्यता का आकलन किया जा सके। इसके साथ ही नियमित परीक्षा के माध्यम से छात्रों का समय-समय पर मूल्यांकन भी संभव हो सकेगा। जिला विद्यालय निरीक्षक अंशुमान ने बताया कि नई व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप तैयार करना है। स्कूलों को समयबद्ध तरीके से पाठ्यक्रम पूरा कराने और नए परीक्षा पैटर्न के अनुसार छात्रों को अभ्यास कराने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली से विद्यार्थियों पर परीक्षा का दबाव कम होगा, क्योंकि पूरे साल छोटे-छोटे चरणों में मूल्यांकन होगा। इससे अंतिम परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की संभावना भी बढ़ेगी।
भ्रष्टाचार में फंसे लेखपाल को किया जाएगा निलंबित : डीएम


*महिला की शिकायत पर दो लोगों के खिलाफ पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी*


नितेश श्रीवास्तव


भदोही। भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे मैलोना के लेखपाल मुरली की मुश्किलें बढ़ गई हैं। महिला की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने के बाद अब उस पर विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है। पुलिस ने जहां मामले की विवेचना शुरू कर दी है, वहीं एक से दो दिन में निलंबन की कार्रवाई भी की जा सकती है। डीएम ने लेखपाल को निलंबित करने की बात कही है।
कलेक्ट्रेट परिसर में जन सुनवाई के दौरान मैलोना की महिला नीलम चौबे प्रार्थना पत्र लेकर पहुंचीं। उन्होंने हल्का लेखपाल मुरली पर 85 हजार रुपये लेने के बाद भी वरासत में नाम न दर्ज करने का आरोप लगाया। उन्होंने तहरीर में बताया कि उनके ससुर के निधन के बाद उनके पति का नाम कूटरचना कर नहीं चढ़ाया गया। इसके लिए रुपये भी दिए गए। जमीन पर उनके चाचा हरिश्चंद्र का ही नाम चढ़ाया गया।शिकायत के मद्देनजर डीएम के निर्देश पर पुलिस आरोपी लेखपाल को कोतवाली ज्ञानपुर ले गई। जहां देर शाम धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार समेत कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई। अब लेखपाल पर विभागीय कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। डीएम शैलेष कुमार ने बताया कि लेखपाल के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में एसडीएम को निर्देश दिया गया है। डीएम शैलेष कुमार का कहना है कि भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं होगा। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराकर जेल भेजा जाएगा। लेखपाल मुरली को निलंबित किया जाएगा।


भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं होगा। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराकर जेल भेजा जाएगा। लेखपाल मुरली को निलंबित किया जाएगा।

शैलेश कुमार डीएम भदोही
क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट? सरकार बता रही रणनीतिक और आर्थिक लाभ, राहुल ने कह डाला ‘सबसे बड़ा घोटाला’

#whatisgreatnicobarprojectrahulgandhicallsacrimeagainstnatureand_tribes

देश में इन दिनों भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार परियोजना राष्ट्रीय बहस के केंद्र में है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को प्राकृतिक और जनजातीय विरासत के ख़िलाफ सबसे बड़े घोटालों और सबसे गंभीर अपराधों में से एक बताया है। वहीं, केंद्र इसे देश की सुरक्षा और विकास के लिए जरूरी मान रहा है।

राहुल गांधी का ग्रेट निकोबार आईलैंड के जंगलों का दौरा

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर बहस, उस वक्त शुरू हुई, जब राहुल गांधी ने सरकार के इस प्रोजेक्ट की आलोचना करते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने ग्रेट निकोबार आईलैंड के जंगलों का दौरा करते हुए कहा कि वहां के पेड़ लोगों की "यादों से भी पुराने" है।

जंगलों की कटाई पर उठाया सवाल

कांग्रेस नेता ने अपने वीडियो संदेश में कहा, ''सरकार इसे एक 'प्रोजेक्ट' कहती है। लेकिन मैंने जो देखा, वह प्रोजेक्ट नहीं है। यहां लाखों पेड़ों को काटने के लिए उन्हें चिह्नित किया गया है। यह 160 वर्ग किलोमीटर में फैले वर्षावन को ख़त्म करने का फ़ैसला है। यह उन समुदायों की अनदेखी है, जिनके घर उनसे छीन लिए गए हैं।"

द्वीप का हर व्यक्ति इस परियोजना के ख़िलाफ-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा, ''इस द्वीप पर रहने वाला हर एक व्यक्ति इस परियोजना के ख़िलाफ है, लेकिन उनसे इस परियोजना के बारे में पूछा ही नहीं गया है। उन्हें यह भी नहीं पता कि उनकी जमीन के बदले उन्हें क्या मुआवजा मिलेगा। और अब मुझे समझ में आ रहा है कि सरकार मुझे यहां आने क्यों नहीं देना चाहती थी और मुझे यहां पहुंचने से रोकने के लिए सरकार ने इतना बड़ा प्रयास क्यों किया।" राहुल गांधी ने इसे "खुलेआम लूट" बताया और कहा कि द्वीप के निवासियों ने उनसे इस मुद्दे को संसद में उठाने के लिए कहा है।

क्या कह रही केन्द्र सरकार?

वहीं, केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय सुरक्षा, समुद्री रणनीति और आर्थिक विकास के लिहाज से बेहद अहम मान रही है। यह परियोजना अंडमान सागर और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की मौजूदगी मजबूत करेगी। इससे हिंद महासागर में समुद्री निगरानी और रक्षा क्षमता बढ़ेगी। सरकार इसे चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति के जवाब और भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का हिस्सा बता रही। सरकार का ये भी कहना है कि दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग मलक्का स्ट्रेट के पास बन रही इस परियोजना से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

क्या है ग्रेट निकोबार परियोजना?

ग्रेट निकोबार परियोजना भारत की एक महत्वाकांक्षी रणनीतिक और आर्थिक पहल है, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में देश की मौजूदगी को सशक्त करना है। इस परियोजना के तहत अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, पावर प्लांट और आधुनिक टाउनशिप विकसित किए जाने की योजना है। यह सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को ग्लोबल समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में एक अहम केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके जरिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, व्यापारिक क्षमता और सामरिक महत्व तीनों को एक साथ मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।

क्या है इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य?

इस परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार में एक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है। अभी तक देश को ट्रांसशिपमेंट के लिए कोलंबो और सिंगापुर जैसे विदेशी बंदरगाहों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ते हैं। ग्रेट निकोबार में विकसित होने वाला ट्रांसशिपमेंट हब इस निर्भरता को कम करेगा और भारत को क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में प्रमुख स्थान दिलाएगा। इसके साथ ही यह परियोजना व्यापारिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, निर्यात क्षमता सुधारने और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की आर्थिक व रणनीतिक पकड़ मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

आजमगढ़ : उत्कर्ष कोचिंग सेंटर अम्बारी का शानदार प्रदर्शन, मेधावियों का हुआ सम्मान, जिला टॉपर विवेक यादव बने लोगो के प्रेरणादायक
आजमगढ़ : यूपी बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर क्षेत्र का नाम रोशन करने वाले फूलपुर तहसील के अम्बारी स्थित उत्कर्ष कोचिंग सेंटर के छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में हाईस्कूल के जिला टॉपर एवं प्रदेश में आठवां स्थान प्राप्त करने वाले विवेक यादव को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। हाईस्कूल परीक्षा में विवेक यादव ने 96.5 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में टॉप करते हुए प्रदेश में 8 वां स्थान प्राप्त किया है जबकि अंशिका यादव ने 93.3, सत्यम यादव ने 89.5, आस्था यादव ने 88.3 तथा मंगल यादव ने 87.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सफलता का परचम लहराया। वहीं इंटरमीडिएट परीक्षा में अर्चिता यादव ने 87.4, शिवांगी यादव ने 85, गौरव प्रजापति ने 84.2 तथा अनुज ने 82 प्रतिशत अंक प्राप्त कर संस्था का गौरव बढ़ाया। इस अवसर पर कोचिंग सेंटर की प्रबंधक सुनीता यादव ने सभी मेधावी छात्र-छात्राओं को माल्यार्पण कर तथा मिष्ठान्न खिलाकर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण ही सफलता की कुंजी है। कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों एवं गणमान्य लोगों ने छात्रों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए अन्य विद्यार्थियों को भी उनसे प्रेरणा लेने की बात कही। इस दौरान भारद्वाज सिंह यादव, अरबिंद यादव, बृजेश यादव, अबुजर, बीरेंद्र यादव, इम्तियाज अहमद, बृजेंद्र यादव, मुक्तेश्वर पाण्डेय, राजेश यादव, सुजीत यादव समेत अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।

मार्केट बंद होने में दो कानून नहीं चलेगा, पुलिस को सख्‍ती से अंकुश लगाना आवश्‍यक : आलोक शर्मा


सांसद ने कहा - भोपाल वक्फ की जागीर नहीं

सांसद आलोक शर्मा ने पुलिस आयुक्त से की मुलाकात

भोपाल। सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल में मार्केट बंद होने के दो कानून प्रचलित है, जिस पर पुलिस को सख्ती से अंकुश लगाना चाहिए। उन्होंने कहा पुराने भोपाल शहर में रातभर दुकानें खुली रहती है, जहां पर आपराधिक गतिविधियों को बल मिलता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने रात सोने के लिए बनाई है। घर पर अब्बू, अम्मी इंतजार करते हैं कि बेटा आएगा और हमें दवाई देगा लेकिन बेटा तो रातभर बिरयानी की दुकान और मार्केट में ही बिताता है। ये चिंता आज कई परिवारों की है। युवा गलत रास्ता अपना लेते हैं। शनिवार को सांसद आलोक शर्मा ने भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार से मुलाकात कर उन्हें इस आशय का एक पत्र सौंपा है जिसमें भोपाल के सभी मार्केट एक समय पर बंद करने का आग्रह किया है। ज्ञात रहे सांसद शर्मा पूर्व में भी कई बार ये मुद्दा उठाते रहे हैं लेकिन पुलिस की सख्ती न होने के कारण आज भी व्यवस्था वैसी ही है। सांसद शर्मा ने पुलिस आयुक्त से मुलाकात के दौरान बताया कि अभी भोपाल शहर में दो कानून प्रचलित हैं, न्यू मार्केट, एमपी नगर, संत हिरदाराम नगर, बीएचईएल बरखेड़ा, इंद्रपुरी सोनागिरि, 6 नंबर मार्केट, 10 नंबर मार्केट, लखेरापुरा, सराफा चौक आदि रात में 10 बजे तक बंद हो जाते हैं। जबकि पुराने भोपाल शहर के मार्केट्स काजीकैंप, लक्ष्मी टॉकीज, बसस्टैंड, रेलवे स्टेशन, रॉयल मार्केट जीपीओ, इमामी गेट, राजू टी-स्टाल, जिंसी-जहांगीराबाद, सब्बन चौराहा, इतवारा, बुधवारा में दुकानें रातभर खुली रहती हैं जिससे आपराधिक गतिविधियों को बल मिलता है और शहर की कानून व्यवस्था बिगड़ती है। सांसद शर्मा को पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने शहर के सभी मार्केट्स एक समय पर बंद कराने की कार्यवाही सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया है।

* भोपाल वक्फ की जागीर नहीं

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल वक्फ की जागीर नहीं है। शहर में कहीं भी डेवलपमेंट के काम करने जाएं तो खड़े हो जाते हैं कि यह वक्फ की जमीन है। महापौर रहते जब हम पॉलिटेक्निक से भारत माता चौराहे तक स्मार्ट रोड बनाने गए तो रोड़ा अटकाया। बोले कि यह वक्फ की जमीन है जबकि आज वहां स्मार्ट रोड बन जाने के बाद मुसलमान भी उस रोड पर निकलता है, हिंदू भी उस पर रोड पर निकलता है, सभी वर्ग के लोग उस स्मार्ट रोड का उपयोग करते हैं। इसी प्रकार श्यामला हिल्स पर मानस भवन के पीछे की झुग्गियां का हटाने का मामला भी है। वहां पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सभी को आवास का पैसा जमा किया गया है। किसी को बेघर नहीं किया जाएगा लेकिन शहर के अंदर सरकारी जमीन पर किसी को भी अतिक्रमण करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। वक्फ के नाम पर किसी को भी अवैध कब्जा नहीं करने दिया जाएगा।

सहायक पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में पुलिस ने चलाया चेकिंग अभियान

रितेश मिश्रा
शाहाबाद हरदोई।सहायक पुलिस अधीक्षक/सीओ शाहाबाद के नेतृत्व में सुरक्षा की दृष्टि से शनिवार की शाम को आंझी रेलवे स्टेशन के निकट सघन चेकिंग अभियान चलाया गया।
         जनपद में अपराध और अपराधियों की रोकथाम के लिए सहायक पुलिस अधीक्षक/सीओ शाहाबाद आलोक राज नारायण के नेतृत्व में मझिला और शाहाबाद की संयुक्त पुलिस टीम ने रेलवे स्टेशन के निकट आलमनगर मोड़ पर सघन चेकिंग अभियान चलाया। सहायक पुलिस अधीक्षक श्री नारायण ने बताया पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा के निर्देश पर उनके सर्किल में जनमानस की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए जगह जगह सघन चेकिंग अभियान चलाया जाता है। चेकिंग अभियान चलाये जाने से अपराध और दुर्घटनाओं पर काफ़ी नियंत्रण पाया गया। चेकिंग के दौरान बाइक सवारों और चार पहिया वाहन चालकों को उनकी सुरक्षा के मद्देनजर हेलमेट और सीट बेल्ट बांध कर  चलाने के लिए जागरूक किया जाता है। चेकिंग के दौरान संदिग्ध चीजों को बरामद कर वाहन को सीज किया जा रहा है।इस अवसर पर शाहाबाद कोतवाल अरविन्द राय, मझिला थाना प्रभारी सतेंद्र कुमार सहित भारी पुलिस बल उपस्थित रहा।
6 मई को भव्य होगा रामनिवास रावत का कार्यभार ग्रहण समारोह

- वन विकास निगम के अध्यक्ष पद की संभालेंगे जिम्मेदारी, समारोह को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी तेज

भोपाल। आगामी 6 मई 2026 को प्रातः 10 बजे पूर्व मंत्री रामनिवास रावत मध्यप्रदेश वन विकास निगम के अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण करेंगे। इस अवसर पर वन भवन में आयोजित होने वाले समारोह को भव्य और ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

समारोह की रूपरेखा तय करने के लिए मप्र मीना समाज सेवा संगठन की बैठक प्रदेश संगठन महामंत्री एड. संतोष मीना की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में संगठन के पदाधिकारियों और समाज के वरिष्ठ जनों ने व्यापक चर्चा करते हुए कार्यक्रम को यादगार बनाने का संकल्प लिया।

बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष लीलेन्द्र सिंह मारण, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लखन सिंह मीना सहित समाजसेवी विमल सिंह मारण, ब्रजेश मीणा, हरभजन मीना, रामसेवक मीना, रामजीवन मीना, सुदेश मारण, जीवन मारण, जगदीश मारण, पर्वत सिंह मारण, सत्यम मीना और भैयालाल मारण सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि रामनिवास रावत के कार्यभार ग्रहण समारोह को भव्य स्वरूप दिया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग और गणमान्य नागरिक शामिल होंगे।

दोहरीघाट-ओड़िहार मेमू सेवा को मिली रफ्तार, ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के प्रयास रंग लाए

* स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा
* रेल सेवा से पूर्वांचल में बढ़ेगा विकास और रोजगार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा के सतत प्रयासों से दोहरीघाट से ओड़िहार के बीच प्रस्तावित मेमू ट्रेन सेवा को गति मिलती दिख रही है। क्षेत्रीय जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को प्राथमिकता देते हुए मंत्री ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई है।
मऊ जनपद के दौरे के दौरान मंत्री ए. के. शर्मा ने दोहरीघाट रेलवे स्टेशन का स्थलीय निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों के साथ व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रस्तावित मेमू सेवा क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी और आवागमन को अधिक सुगम, सुलभ और किफायती बनाएगी। उन्होंने बताया कि उनके प्रयासों और केंद्र सरकार के सहयोग से दोहरीघाट से कटिहार तक मेमू ट्रेन संचालन की घोषणा संभव हो सकी है।
मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए नरेंद्र मोदी और अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना पूर्वांचल के समग्र विकास को नई दिशा देगी।
उन्होंने कहा कि इस रेल सेवा के शुरू होने से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि व्यापार, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने मंत्री का जोरदार स्वागत किया और इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए आभार व्यक्त किया। क्षेत्र में नई रेल सेवा को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला है।
अवैध खनन करने पर डंपर पकड़ा 55 हज़ार जुर्माना, चालाक नहीं दिखा सका प्रपत्र
फर्रुखाबाद l जिलाधिकारी के निर्देश पर जनपद में अवैध खनन एवं अवैध परिवहन के विरुद्ध सख्त रुख अपनाते हुए निरंतर एवं प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन द्वारा इस संबंध में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है, जिसके अंतर्गत संबंधित विभागों को नियमित निगरानी एवं सघन अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
इस दौरान थाना नवाबगंज क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम गनीपुर जोगपुर में खनन अधिकारी द्वारा औचक छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान एक डम्पर, जो गिट्टी से लदा हुआ था, को रोककर उसकी सघन जांच की गई। जांच के दौरान वाहन चालक सोनू वैध प्रपत्र प्रस्तुत करने को कहा गया, किन्तु वह कोई भी वैध अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सका।
प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वाहन द्वारा गिट्टी को बिना वैध प्रपत्र के ले जा रहे थे जो खनन नियमों का उल्लंघन है। इस पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए संबंधित के विरुद्ध अवैध परिवहन के जुर्म में ऑनलाइन नोटिस निर्गत किया गया l साथ ही 55,780 रुपये का जुर्माना मौके पर ही वसूल किया गया।
जिलाधिकारी ने इस कार्रवाई को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनपद में अवैध खनन एवं खनिजों के अवैध परिवहन में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में बख्शा न जाए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ न केवल राजस्व की हानि हो रही हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी प्रभावित हो रहा हैं। इसलिए संबंधित विभाग पूरी सतर्कता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करें।
उन्होंने खनन विभाग, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जनपद के संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त एवं आकस्मिक छापेमारी की जाए तथा अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए। साथ ही, सभी प्रवर्तन कार्रवाइयों पर विशेष बल दिया जाए।
प्रशासन द्वारा आमजन से भी अपील की गई है कि यदि कहीं अवैध खनन अथवा खनिजों के अवैध परिवहन की जानकारी प्राप्त हो, तो तत्काल संबंधित विभाग अथवा स्थानीय प्रशासन को सूचित करें। नागरिकों के सहयोग से ही इस प्रकार की अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। प्रशासन कानून व्यवस्था एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है और इस दिशा में आगे भी कठोर कार्रवाई जाएगी।
RSF की प्रेस स्वतंत्रता रिपोर्ट: वैश्विक पैमाना या भारत की अधूरी तस्वीर?

डॉ. पंकज सोनी

Reporters Without Borders (RSF) की सालाना रिपोर्ट पर भरोसा करने से पहले एक बुनियादी सवाल है—यह बनती कैसे है? किसके संसाधनों से, किन स्रोतों के आधार पर और किस दृष्टिकोण के साथ? 140 करोड़ की आबादी, दर्जनों भाषाओं और सैकड़ों संस्कृतियों वाले भारत की प्रेस स्वतंत्रता क्या पेरिस में बैठकर तैयार प्रश्नावलियों से मापी जा सकती है?

हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पेरिस स्थित एक NGO Reporters Without Borders (RSF) अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी करता है। इस रिपोर्ट में भारत का स्थान प्रायः 150 के बाद ही दिखाई देता है। 2026 की रिपोर्ट में भारत 157वें स्थान पर है, जबकि 2025 में भी यही रैंक और 2024 में 159वां स्थान था।

रिपोर्ट आते ही देश का एक वर्ग चिंतित स्वर में कहता है—“लोकतंत्र खतरे में है”, “पत्रकारिता समाप्त हो रही है”, “प्रेस पर दबाव बढ़ गया है।” लेकिन इन प्रतिक्रियाओं के बीच एक मूल प्रश्न अक्सर अनदेखा रह जाता है—यह सूचकांक तैयार कैसे होता है? भारत इसमें लगातार पीछे क्यों रहता है?

दरअसल, RSF एक फ्रांसीसी गैर-सरकारी संगठन है, जिसकी फंडिंग के स्रोत पूरी तरह पारदर्शी नहीं माने जाते। यूरोपीय सरकारें और कुछ निजी फाउंडेशन इसे सहयोग देते हैं। इसका प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक मुख्यतः सर्वेक्षण, धारणाओं और सीमित केस स्टडी पर आधारित होता है। यह कोई पूर्णतः वैज्ञानिक या वस्तुनिष्ठ मापदंड नहीं, बल्कि चुनिंदा लोगों की राय का संकलन है, जिसमें पश्चिमी उदारवादी मूल्यों को पत्रकारिता का मानक मान लिया जाता है।

यहीं एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है—क्या इतने विशाल और विविध देश की मीडिया स्वतंत्रता का आकलन सीमित प्रश्नावलियों के आधार पर किया जा सकता है? भारत में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन यहाँ के संविधान, न्यायपालिका और नागरिक अधिकारों के संदर्भ में होना चाहिए, न कि केवल किसी बाहरी संस्था के आकलन से।

इस रिपोर्ट का एक बड़ा विरोधाभास यह भी है कि इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों को कई बार भारत से बेहतर स्थान दिया गया है। पाकिस्तान में पत्रकारों के लापता होने, मीडिया पर सैन्य दबाव और वरिष्ठ पत्रकार Arshad Sharif की हत्या जैसी घटनाएं व्यापक रूप से सामने आ चुकी हैं। वहीं बांग्लादेश में डिजिटल सुरक्षा कानून के तहत पत्रकारों पर कार्रवाई के मामले भी सामने आए हैं। ऐसे में यह तुलना स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े करती है।

वैश्विक स्तर पर भी मीडिया स्वतंत्रता की स्थिति जटिल है। अमेरिका में Julian Assange के खिलाफ लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई चली। पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने मीडिया को “एनिमी ऑफ द पीपल” तक कहा। रूस और चीन में मीडिया पर राज्य का प्रभाव जगजाहिर है। इसके बावजूद RSF रैंकिंग में इन देशों की स्थिति अपेक्षाकृत कम आलोचनात्मक दिखाई देती है, जिससे भू-राजनीतिक पूर्वाग्रह की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

International Federation of Journalists (IFJ) के अनुसार 2025 में दुनिया भर में 128 पत्रकारों की हत्या हुई, जिनमें अधिकांश मध्य-पूर्व और संघर्ष क्षेत्रों से थे। भारत में ऐसे मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, और हर घटना पर न्यायिक व प्रशासनिक प्रक्रिया सक्रिय होती है।

भारत की जमीनी तस्वीर देखें तो यहाँ 900 से अधिक सैटेलाइट चैनल, 17,000 से ज्यादा पंजीकृत समाचारपत्र और लाखों डिजिटल प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं। अनेक मीडिया संस्थान सरकार की खुलकर आलोचना करते हैं और निर्बाध रूप से कार्य कर रहे हैं। संसद, न्यायपालिका और सोशल मीडिया—तीनों स्तरों पर अभिव्यक्ति की विविधता स्पष्ट दिखाई देती है।

हालाँकि, भारतीय पत्रकारिता की एक चुनौती यह भी है कि बिना प्रशिक्षण या मान्यता के बड़ी संख्या में लोग मीडिया के नाम पर सक्रिय हो गए हैं। कुछ मामलों में यह स्थिति अव्यवस्था और अविश्वसनीयता को जन्म देती है, जो समग्र तस्वीर को प्रभावित करती है।

RSF की निष्पक्षता पर सवाल केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। The GuardianGlobal Times और अन्य संस्थानों द्वारा इसके वित्तीय स्रोतों व दृष्टिकोण पर प्रश्न उठाए गए हैं। यहाँ तक कि Encyclopaedia Britannica में भी कुछ संदर्भों में इसके संभावित पक्षपात का उल्लेख मिलता है।

स्पष्ट है कि RSF का सूचकांक एक उपयोगी संकेतक हो सकता है, लेकिन इसे अंतिम सत्य मानना उचित नहीं। उतना ही गलत इसे पूरी तरह खारिज कर देना भी होगा।

भारत जैसे विशाल और विविध लोकतंत्र में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन बहुआयामी दृष्टिकोण से ही संभव है—जहाँ वैश्विक सूचकांक, स्थानीय वास्तविकता और संस्थागत अनुभव, तीनों को संतुलित रूप से समझा जाए।

(लेखक जनसंपर्क विभाग भोपाल में सहायक मीडिया सलाहकार हैं और यह इनके व्यक्तिगत विचार हैं।)

हर तीन महीने में यूनिट टेस्ट देना अनिवार्य पहला टेस्ट जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगा

*जुलाई में पहला टेस्ट ,9 वीं से 12 वीं तक लागू होगी न‌ई व्यवस्था*



रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने नए शैक्षिक सत्र से परीक्षा प्रणाली में अहम बदलाव किया है। अब कक्षा नौ से 12 तक के छात्रों के लिए साल भर मूल्यांकन की नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। विद्यार्थियों को केवल वार्षिक परीक्षा पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि हर तीन महीने में अनिवार्य रूप से यूनिट टेस्ट देना पड़ेगा। इसी क्रम में पहला यूनिट टेस्ट जुलाई के दूसरे सप्ताह में आयोजित किया जाएगा।नई व्यवस्था के तहत जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों में यह प्रणाली लागू होगी। यूनिट टेस्ट में बहुविकल्पीय प्रश्नों (एमसीक्यू) को विशेष प्राथमिकता दी गई है। ताकि विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता और त्वरित निर्णय लेने की योग्यता का आकलन किया जा सके। इसके साथ ही नियमित परीक्षा के माध्यम से छात्रों का समय-समय पर मूल्यांकन भी संभव हो सकेगा। जिला विद्यालय निरीक्षक अंशुमान ने बताया कि नई व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप तैयार करना है। स्कूलों को समयबद्ध तरीके से पाठ्यक्रम पूरा कराने और नए परीक्षा पैटर्न के अनुसार छात्रों को अभ्यास कराने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली से विद्यार्थियों पर परीक्षा का दबाव कम होगा, क्योंकि पूरे साल छोटे-छोटे चरणों में मूल्यांकन होगा। इससे अंतिम परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की संभावना भी बढ़ेगी।
भ्रष्टाचार में फंसे लेखपाल को किया जाएगा निलंबित : डीएम


*महिला की शिकायत पर दो लोगों के खिलाफ पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी*


नितेश श्रीवास्तव


भदोही। भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे मैलोना के लेखपाल मुरली की मुश्किलें बढ़ गई हैं। महिला की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने के बाद अब उस पर विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है। पुलिस ने जहां मामले की विवेचना शुरू कर दी है, वहीं एक से दो दिन में निलंबन की कार्रवाई भी की जा सकती है। डीएम ने लेखपाल को निलंबित करने की बात कही है।
कलेक्ट्रेट परिसर में जन सुनवाई के दौरान मैलोना की महिला नीलम चौबे प्रार्थना पत्र लेकर पहुंचीं। उन्होंने हल्का लेखपाल मुरली पर 85 हजार रुपये लेने के बाद भी वरासत में नाम न दर्ज करने का आरोप लगाया। उन्होंने तहरीर में बताया कि उनके ससुर के निधन के बाद उनके पति का नाम कूटरचना कर नहीं चढ़ाया गया। इसके लिए रुपये भी दिए गए। जमीन पर उनके चाचा हरिश्चंद्र का ही नाम चढ़ाया गया।शिकायत के मद्देनजर डीएम के निर्देश पर पुलिस आरोपी लेखपाल को कोतवाली ज्ञानपुर ले गई। जहां देर शाम धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार समेत कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई। अब लेखपाल पर विभागीय कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। डीएम शैलेष कुमार ने बताया कि लेखपाल के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में एसडीएम को निर्देश दिया गया है। डीएम शैलेष कुमार का कहना है कि भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं होगा। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराकर जेल भेजा जाएगा। लेखपाल मुरली को निलंबित किया जाएगा।


भ्रष्टाचार से कोई समझौता नहीं होगा। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराकर जेल भेजा जाएगा। लेखपाल मुरली को निलंबित किया जाएगा।

शैलेश कुमार डीएम भदोही
क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट? सरकार बता रही रणनीतिक और आर्थिक लाभ, राहुल ने कह डाला ‘सबसे बड़ा घोटाला’

#whatisgreatnicobarprojectrahulgandhicallsacrimeagainstnatureand_tribes

देश में इन दिनों भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार परियोजना राष्ट्रीय बहस के केंद्र में है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को प्राकृतिक और जनजातीय विरासत के ख़िलाफ सबसे बड़े घोटालों और सबसे गंभीर अपराधों में से एक बताया है। वहीं, केंद्र इसे देश की सुरक्षा और विकास के लिए जरूरी मान रहा है।

राहुल गांधी का ग्रेट निकोबार आईलैंड के जंगलों का दौरा

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर बहस, उस वक्त शुरू हुई, जब राहुल गांधी ने सरकार के इस प्रोजेक्ट की आलोचना करते हुए एक वीडियो जारी किया। उन्होंने ग्रेट निकोबार आईलैंड के जंगलों का दौरा करते हुए कहा कि वहां के पेड़ लोगों की "यादों से भी पुराने" है।

जंगलों की कटाई पर उठाया सवाल

कांग्रेस नेता ने अपने वीडियो संदेश में कहा, ''सरकार इसे एक 'प्रोजेक्ट' कहती है। लेकिन मैंने जो देखा, वह प्रोजेक्ट नहीं है। यहां लाखों पेड़ों को काटने के लिए उन्हें चिह्नित किया गया है। यह 160 वर्ग किलोमीटर में फैले वर्षावन को ख़त्म करने का फ़ैसला है। यह उन समुदायों की अनदेखी है, जिनके घर उनसे छीन लिए गए हैं।"

द्वीप का हर व्यक्ति इस परियोजना के ख़िलाफ-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा, ''इस द्वीप पर रहने वाला हर एक व्यक्ति इस परियोजना के ख़िलाफ है, लेकिन उनसे इस परियोजना के बारे में पूछा ही नहीं गया है। उन्हें यह भी नहीं पता कि उनकी जमीन के बदले उन्हें क्या मुआवजा मिलेगा। और अब मुझे समझ में आ रहा है कि सरकार मुझे यहां आने क्यों नहीं देना चाहती थी और मुझे यहां पहुंचने से रोकने के लिए सरकार ने इतना बड़ा प्रयास क्यों किया।" राहुल गांधी ने इसे "खुलेआम लूट" बताया और कहा कि द्वीप के निवासियों ने उनसे इस मुद्दे को संसद में उठाने के लिए कहा है।

क्या कह रही केन्द्र सरकार?

वहीं, केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय सुरक्षा, समुद्री रणनीति और आर्थिक विकास के लिहाज से बेहद अहम मान रही है। यह परियोजना अंडमान सागर और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की मौजूदगी मजबूत करेगी। इससे हिंद महासागर में समुद्री निगरानी और रक्षा क्षमता बढ़ेगी। सरकार इसे चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति के जवाब और भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का हिस्सा बता रही। सरकार का ये भी कहना है कि दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग मलक्का स्ट्रेट के पास बन रही इस परियोजना से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

क्या है ग्रेट निकोबार परियोजना?

ग्रेट निकोबार परियोजना भारत की एक महत्वाकांक्षी रणनीतिक और आर्थिक पहल है, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में देश की मौजूदगी को सशक्त करना है। इस परियोजना के तहत अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, पावर प्लांट और आधुनिक टाउनशिप विकसित किए जाने की योजना है। यह सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को ग्लोबल समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में एक अहम केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके जरिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, व्यापारिक क्षमता और सामरिक महत्व तीनों को एक साथ मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।

क्या है इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य?

इस परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत को वैश्विक समुद्री व्यापार में एक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है। अभी तक देश को ट्रांसशिपमेंट के लिए कोलंबो और सिंगापुर जैसे विदेशी बंदरगाहों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ते हैं। ग्रेट निकोबार में विकसित होने वाला ट्रांसशिपमेंट हब इस निर्भरता को कम करेगा और भारत को क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में प्रमुख स्थान दिलाएगा। इसके साथ ही यह परियोजना व्यापारिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, निर्यात क्षमता सुधारने और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की आर्थिक व रणनीतिक पकड़ मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

आजमगढ़ : उत्कर्ष कोचिंग सेंटर अम्बारी का शानदार प्रदर्शन, मेधावियों का हुआ सम्मान, जिला टॉपर विवेक यादव बने लोगो के प्रेरणादायक
आजमगढ़ : यूपी बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर क्षेत्र का नाम रोशन करने वाले फूलपुर तहसील के अम्बारी स्थित उत्कर्ष कोचिंग सेंटर के छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में हाईस्कूल के जिला टॉपर एवं प्रदेश में आठवां स्थान प्राप्त करने वाले विवेक यादव को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। हाईस्कूल परीक्षा में विवेक यादव ने 96.5 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में टॉप करते हुए प्रदेश में 8 वां स्थान प्राप्त किया है जबकि अंशिका यादव ने 93.3, सत्यम यादव ने 89.5, आस्था यादव ने 88.3 तथा मंगल यादव ने 87.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सफलता का परचम लहराया। वहीं इंटरमीडिएट परीक्षा में अर्चिता यादव ने 87.4, शिवांगी यादव ने 85, गौरव प्रजापति ने 84.2 तथा अनुज ने 82 प्रतिशत अंक प्राप्त कर संस्था का गौरव बढ़ाया। इस अवसर पर कोचिंग सेंटर की प्रबंधक सुनीता यादव ने सभी मेधावी छात्र-छात्राओं को माल्यार्पण कर तथा मिष्ठान्न खिलाकर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण ही सफलता की कुंजी है। कार्यक्रम में मौजूद शिक्षकों एवं गणमान्य लोगों ने छात्रों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए अन्य विद्यार्थियों को भी उनसे प्रेरणा लेने की बात कही। इस दौरान भारद्वाज सिंह यादव, अरबिंद यादव, बृजेश यादव, अबुजर, बीरेंद्र यादव, इम्तियाज अहमद, बृजेंद्र यादव, मुक्तेश्वर पाण्डेय, राजेश यादव, सुजीत यादव समेत अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।