चुनाव आयोग का 'मिशन 2026': 1,444 केंद्रीय पर्यवेक्षकों को दी गई 'प्रकाश स्तंभ' बनने की जिम्मेदारी; निष्पक्ष चुनाव के लिए दिल्ली में दो दिवसीय ब्

नई दिल्ली, 05 फरवरी 2026: भारत निर्वाचन आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में आयोग ने आज नई दिल्ली स्थित IIIDEM में तैनात किए जाने वाले 1,444 केंद्रीय पर्यवेक्षकों के लिए दो दिवसीय विशेष ब्रीफिंग सत्र का आयोजन किया।
पर्यवेक्षकों की तैनाती का गणित
आयोग ने चुनावी शुचिता बनाए रखने के लिए तीन श्रेणियों में अधिकारियों को तैनात किया है:
714 सामान्य पर्यवेक्षक (General Observers)
233 पुलिस पर्यवेक्षक (Police Observers)
497 व्यय पर्यवेक्षक (Expenditure Observers)
मुख्य चुनाव आयुक्त का संबोधन: "आप आयोग के प्रकाश स्तंभ हैं"
मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने पर्यवेक्षकों को संबोधित करते हुए उन्हें निर्वाचन आयोग का 'प्रकाश स्तंभ' बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यवेक्षकों की उपस्थिति 824 निर्वाचन क्षेत्रों में पूरी चुनाव मशीनरी को ऊर्जावान बनाएगी और स्वतंत्र, निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करेगी।
चुनाव आयुक्तों के महत्वपूर्ण निर्देश
डॉ. एस.एस. संधू (चुनाव आयुक्त): उन्होंने कहा कि पर्यवेक्षक अधिकारियों के लिए 'मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक' की भूमिका निभाएं। उन्होंने मतदाताओं के लिए पर्यवेक्षकों की सुलभता और शिकायतों के त्वरित निवारण पर जोर दिया।
डॉ. विवेक जोशी (चुनाव आयुक्त): उन्होंने निर्देश दिया कि मतदाता सूचना पर्चियां (VIS) समय पर वितरित की जाएं ताकि मतदान के दिन मतदाताओं को कोई असुविधा न हो। उन्होंने आयोग के निर्देशों का 'अक्षरश:' पालन सुनिश्चित करने को कहा।
तकनीक और सुविधाओं पर जोर
सत्र के दौरान पर्यवेक्षकों को आधुनिक IT एप्लिकेशन्स, चुनावी प्लेटफार्मों और मीडिया प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। आयोग ने विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने को कहा:
AMFs (आश्वासित न्यूनतम सुविधाएं): मतदान केंद्रों पर मतदाताओं के लिए पानी, बिजली, शौचालय और रैंप जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना।
अनुच्छेद 324 का अनुपालन: संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत चुनावी प्रक्रिया के कुशल प्रबंधन की निगरानी।
मीडिया और शिकायत निवारण: राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध रहना और पक्षपात की किसी भी धारणा को समाप्त करना।
आयोग की 'आंख और कान'
केंद्रीय पर्यवेक्षकों को आयोग की 'आंख और कान' के रूप में संबोधित किया गया। उन्हें सीधे आयोग को इनपुट प्रदान करने और जमीनी स्तर पर चुनावी कानूनों का सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया है।
5 hours ago
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