रोटरी कार रैली का नगर पहुंचने पर  हुआ भव्य स्वागत


फर्रुखाबाद। शांति सदभावना और भाईचारे के संदेश को जनमानस तक पहुंचाने के उद्देश्य से रोटरी मंडल 3110 के मंडल अध्यक्ष रोटरी राजन विद्यार्थी के नेतृत्व में रोटरी डिस्ट्रिक्ट पीस रैली का आयोजन किया गया ,जो बरेली शहर से प्रारंभ होकर मंडल के विभिन्न शहरों में शांति और सद्भभावना का संदेश देते हुए फर्रुखाबाद पहुंची है। यह यात्रा 18 फरवरी 2026 को बरेली से प्रारंभ हुई थी वहां से पीलीभीत ,रुद्रपुर ,हल्द्वानी ,नैनीताल, काशीपुर,रामपुर ,बदायूं ,कासगंज ,मथुरा, आगरा, अलीगढ़, उन्नाव होकर फर्रुखाबाद पहुंची।

रोटरी मंडल अध्यक्ष रोटरी राजन विद्यार्थी  , डिस्ट्रिक्ट सेक्रेट्री रोटरी मोहन गुप्ता और रैली के अध्यक्ष रोटरी मनीष शर्मा आज फर्रुखाबाद बॉर्डर पर पहुंचे । जहां उनका फूल मालाओं और ढोल नगाड़ों से जोरदार स्वागत हुआ चौराहा ,भोलेपुर ,मेमोरियल हॉस्पिटल होते हुए डायमंड पैलेस होटल आवास विकास पहुंचे वहां पर सभी रोटरी सदस्यों की पत्नियों और बाकी सदस्यों ने रैली का ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत किया।

इस दौरान मीटिंग का आयोजन किया गया जिसके मुख्य अतिथि मनोज अग्रवाल  और नगर पालिका अध्यक्ष वत्सला अग्रवाल थे। नगर पालिका अध्यक्ष वत्सला अग्रवाल ने रोटरी क्लब के सभी सदस्यो का समाज मे बेहतर कार्य के लिए आभार व्यक्त किया और बताया की आजकल की ऐसी वेब सीरीज जो की अश्लीलता और अमर्यादित गालियां परोसती है उस पर रोटरी क्लब से कार्य कर फ़िल्म बोर्ड तक पहुंचाने का आवाहन किया। बाहर से आए रोटरी के पदाधिकारियो ने भी संबोधन किया ।

फर्रुखाबाद रोटरी क्लब के अध्यक्ष डॉ वी के गुप्ता ने सभी को धन्यवाद दिया और मण्डल अध्यक्ष राजन विद्यार्थी ने हर संभव मदद करने के लिए सहमति जताई। कार्यक्रम का संचालन की भूमिका रोटरी डॉक्टर प्रशांत श्रीवास्तव ने संभाली। फर्रुखाबाद रोटरी क्लब की रैली का आयोजन सचिव रोटरी दीपक खन्ना ने किया

सभी रोटेरियन परिवार  खासकर महिलाओं ने इस रैली में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया कार्यक्रम में डॉ वी के चौधरी, लकी गुप्ता,ऋतु गुप्ता, मोनिका खन्ना, नेहा श्रीवास्तव,डॉ सरोज वाला  सिंह,शिवानी माथुर इत्यादि रोटरी सदस्य उपस्थित रहे।
पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर की रिपोर्ट: रात की दुर्घटनाओं में शराब और बिना हेलमेट बड़ी वजह
लखनऊ। राजधानी स्थित एपेक्स ट्रॉमा सेंटर पीजीआई लखनऊ की एक अध्ययन रिपोर्ट में सामने आया है कि रात के समय होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में शराब पीकर वाहन चलाना और हेलमेट न पहनना बड़ी वजह बन रहे हैं। वर्ष 2018 से 2024 के बीच रात में भर्ती हुए घायलों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।डॉ. एके सिंह और डॉ. पीके मिश्रा द्वारा तैयार यह शोध रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल Cureus में प्रकाशित हुई है। अध्ययन में कुल 3,705 घायलों को शामिल किया गया। रिपोर्ट की प्रमुख बातें रात में लाए गए घायलों में से लगभग हर दूसरे व्यक्ति ने शराब पी रखी थी। केवल एक तिहाई दोपहिया सवारों ने हेलमेट पहना था। चार पहिया वाहन चालकों में सिर्फ 41% ने सीट बेल्ट लगाई थी। कुल मामलों में 67.3% सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े थे। इनमें से 84.7% दोपहिया वाहन दुर्घटनाएं थीं। 78.3% मरीज पुरुष थे, औसत आयु 37.5 वर्ष। 44.5% मामलों में सिर की चोट पाई गई। आईसीयू और मृत्यु दर अध्ययन में पाया गया कि 58.4% मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। 45.8% को मैकेनिकल वेंटिलेशन की जरूरत हुई। कुल मृत्यु दर 4% रही, जिनमें से 42.2% मौतें 24 घंटे के भीतर हुईं। बुजुर्गों में बाथरूम में गिरने की घटनाएं रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि काफी बुजुर्ग बाथरूम में फिसलकर घायल हो रहे हैं। इसकी बड़ी वजह चिकनी टाइल्स को बताया गया है, जिनकी फिसलन से गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ की राय ट्रॉमा सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. वैभव जायसवाल के अनुसार, दुर्घटनाओं में तेज रफ्तार, लापरवाही और जागरूकता की कमी बड़ी वजह है। बेहतर सड़कें और एक्सप्रेसवे यात्रा का समय तो कम कर रहे हैं, लेकिन सावधानी न बरतने पर हादसों का खतरा भी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने जगह-जगह ट्रॉमा सेंटर बनाने और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है।
अधिवक्ता हत्याकांड, मारपीट में भतीजे ने चढाया था लोगों पर ट्रैक्टर
*9 बीघा जमीन का विवाद, पीट पीट कर की हत्या

गोंडा।जिले के करनैलगंज कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत दत्त नगर गांव के सुदाई पुरवा में रविवार को हुए उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा हत्याकांड से जुड़ा एक लाइव वीडियो सामने आया है,यह वीडियो घटना से ठीक पहले का है जिसमें दिखाई दे रहा है कि खेत में जुताई के दौरान दोनों पक्षों में कहासुनी के बाद मारपीट शुरू हो जाती है।इस दौरान अधिवक्ता के भतीजे ने ट्रैक्टर से सबको कुचलने का प्रयास किया जिसमें दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए जबकि अधिवक्ता की मौत हो गई।वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दिया है,वहीं गांव में माहौल बिगड़ने की स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।सारा विवाद 9 बीघा जमीन को लेकर चल रहा था।चार मिनट के लाइव वीडियो में अधिवक्ता के भतीजे विश्वास मिश्रा को खेत की जुताई करते देखा जा सकता है।इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और गाली गलौज शुरू हो जाती है।मारपीट के दौरान अधिवक्ता खुद भी लाठी लेकर बचाव करते दिखाई दे रहे हैं।घटना के कुछ मिनट बाद पुलिस के भी पहुंचने का दावा किया जा रहा है,जिसके बाद दोनों पक्षों के लोग मौके से फरार हो जाते हैं।घटना में मृतक अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में प्रशासनिक अधिवक्ता रहे हैं तथा अवध बार एसोसिएशन के मंत्री भी रह चुके हैं।उनके दो बेटे हैं जिनमें बड़ा बेटा अभिषेक मिश्रा उच्च न्यायालय में अधिवक्ता है तो वहीं छोटा बेटा अनुराग मिश्रा घर पर रहकर खेती बाड़ी संभालता है।परिजनों के अनुसार, यह विवाद गांव के पूर्व प्रधान हरिशरण मिश्रा से 9 बीघा जमीन को लेकर चल रहा था और कोर्ट का फैसला सुभाष चंद्र मिश्रा के पक्ष में आया था,जिसकी प्रति लेकर वह घटना के एक दिन पहले करनैलगंज कोतवाली गए थे और पुलिस को सूचित किया था कि वह अगले दिन जमीन पर कब्जा लेने जाएंगे।मृतक अधिवक्ता के पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ है कि सुभाष चंद्र मिश्रा की मौत सिर में गंभीर चोट लगने से हुई,जबकि शरीर पर कुल आठ चोट के निशान मिले हैं।सुभाष चंद्र मिश्रा का पोस्टमार्टम दो डाक्टरों के पैनल द्वारा वीडियोग्राफी के साथ किया गया।रिपोर्ट में बताया गया कि सिर में चोट से खून जम गया था,जिसके कारण नसों ने काम करना बंद कर दिया और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।मामले में करनैलगंज कोतवाली पुलिस न भतीजे विश्वास मिश्रा की तहरीर पर चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है और दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है,इसके साथ ही अन्य की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात है।करनैलगंज कोतवाल नरेंद्र प्रताप राय के अनुसार दो वीडियो सामने आए हैं,जिसमें से एक में कोई विवाद स्पष्ट नहीं है जबकि दूसरे में विवाद और ट्रैक्टर चलाते एक व्यक्ति देखा जा सकता है।पुलिस वीडियो की सत्यता और घटनाक्रम की जांच कर रही है।इस घटना के बाद अधिवक्ताओं में अत्यधिक आक्रोश है।उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग किया है।मामले की जानकारी होने पर कटरा बाजार के भाजपा विधायक बावन सिंह भी मौके पर पहुंचे,जिसमें वह अधिवक्ताओं से हाईकोर्ट में आंदोलन करने की बात कहते दिखाई दे रहे हैं।हालांकि पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल के आश्वासन के बाद स्थिति कुछ शांत हुई।अनुराग के अनुसार रविवार को जैसे ही वे लोग खेत पर पहुंचे,आरोपियों ने हमला कर दिया।लाठी डंडों से पिटाई की गई और फायरिंग भी की गई।गोली उनके भाई के कान के पास से निकल गई।परिजनों ने आरोप लगाया कि घटना में 20 से 30 लोग शामिल थे।उन्होंने सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त सजा की मांग किया है।अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी राधेश्याम राय ने बताया कि अधिवक्ता के भतीजे विश्वास मिश्रा की शिकायत पर चार आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
शेरघाटी में आस्था का महासंगम, विराट हिंदू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब: भजन, प्रवचन और जयघोष से गूंजा गोला बाजार परिसर

गया: शेरघाटी शहर के तीन शिवाला, गोला बाजार में को आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन ने शहर को पूरी तरह भक्तिमय रंग में रंग दिया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। देखते ही देखते पूरा परिसर भगवा ध्वज, जयघोष और भक्ति गीतों से गूंज उठा। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने इसे ऐतिहासिक आयोजन का रूप दे दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंच पर रामाशीष सिंह, गोविंदा आचार्य, डॉ. तपेश्वर प्रसाद, कमल सिंह (जिला संघचालक) एवं डॉ. उदय प्रसाद सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। वक्ताओं ने अपने ओजस्वी संबोधन में हिंदू समाज की एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया।

वक्ताओं ने कहा कि जब समाज संगठित होता है तो परिवर्तन स्वतः संभव होता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़ें और संस्कृति व संस्कार को आगे बढ़ाएं। बीच-बीच में “भारत माता की जय” और “जय श्रीराम” के नारों से वातावरण ऊर्जावान बना रहा।

सम्मेलन की खास बात रही भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां। स्थानीय कलाकारों ने भक्ति गीतों से माहौल को भावविभोर कर दिया। श्रद्धालु भी तालियों और जयघोष के साथ पूरे जोश में नजर आए। धर्म प्रवचनों के दौरान कई लोग भावुक भी दिखे।

कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक उदय सिंह यादव सहित चंद्रभानु प्रसाद, ऋषभ जी, सत्यम जी, नौरंगी प्रसाद, विकास जी, राहुल आचार्य और अभिषेक जी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने आयोजन की भव्यता की सराहना की और इसे समाज को जोड़ने वाला कदम बताया।

श्रद्धालुओं के लिए भंडारा और प्रसाद वितरण की व्यापक व्यवस्था की गई थी। लंबी कतारों के बावजूद अनुशासन बना रहा। स्वयंसेवकों ने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित रखने में अहम भूमिका निभाई। सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए थे।

शाम ढलते-ढलते भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही थी। आयोजन समिति के सदस्यों के चेहरे पर सफलता की संतोष भरी मुस्कान साफ झलक रही थी। सम्मेलन शांतिपूर्ण, भव्य और अत्यंत सफल रहा। अंत में आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आगे भी होते रहेंगे, ताकि समाज में एकता और जागरूकता का संदेश फैलता रहे।

झारखंड में लोकतंत्र का महापर्व: 48 नगर निकायों में मतदान जारी, सुबह से ही बूथों पर लगी लंबी कतारें

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रांची: झारखंड के 48 नगर निकायों के लिए आज सुबह 7 बजे से मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हो गई है। राज्यभर के 1,042 वार्डों में फैले 4,307 मतदान केंद्रों पर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इस चुनाव में कुल 6,124 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनके भविष्य का फैसला 43.43 लाख मतदाता करेंगे।

राजधानी का माहौल:

रांची नगर निगम क्षेत्र में मेयर पद के 11 और पार्षद पद के 364 उम्मीदवारों के बीच रोचक मुकाबला है। मोरहाबादी, हरमू, डोरंडा और हिंदपीढ़ी जैसे इलाकों में सुबह से ही मतदाताओं का उत्साह चरम पर है। पहली बार वोट डालने आए युवाओं ने सड़क, नाली, पेयजल और स्वच्छता जैसे बुनियादी मुद्दों को प्राथमिकता दी है।

चुनाव आयोग की व्यवस्था:

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, शुरुआती दो घंटों में पूरे राज्य में औसतन 12% के करीब मतदान दर्ज किया गया है। सभी बूथों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और मतदान प्रक्रिया पूरी तरह से सुचारू रूप से चल रही है।

पाकुड़ 12.41%

मधुपुर 10.20%

देवघर 8.50%

रांची 7.28%

चिरकुंडा 7.24%

धनबाद 5.73%

बेल्थरारोड के लाल ने रोशन किया बलिया का मान, डॉ. अमरेंद्र गुप्ता का एम्स दिल्ली में चयन

संजीव सिंह बेल्थरा रोड (बलिया), 23 फरवरी 2026: क्षेत्र के पिपरौली बड़ा गांव के लिए गौरव का क्षण आ गया है। प्राथमिक विद्यालय चौकियां मोड़ के प्रधानाध्यापक विजय शंकर गुप्ता के सुपुत्र डॉ. अमरेंद्र गुप्ता का चयन देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में चिकित्सक पद के लिए हो गया है। इस उपलब्धि से पूरे बिल्थरा रोड क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।डॉ. अमरेंद्र गुप्ता ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पैतृक गांव के प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय, बलिया से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने के बाद कठिन परिश्रम से मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल कर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। लखनऊ के फातिमा हॉस्पिटल से एमडी करने के बाद अब एम्स दिल्ली में चयनित होकर उन्होंने ग्रामीण परिवेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चमकाया है।डॉ. अमरेंद्र ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और मित्रों को देते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प, सतत परिश्रम और सही मार्गदर्शन से कोई भी उच्च मुकाम हासिल कर सकता है।इस अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी सीयर सुनील चौबे, शिक्षक देवेंद्र वर्मा, कृष्णा नन्द सिंह, वीरेंद्र यादव, आशुतोष पाण्डेय, हरेकृष्णा पाण्डेय, अजित सिंह, नन्द लाल शर्मा सहित क्षेत्रीय गणमान्यजनोंने डॉ. अमरेंद्र एवं उनके परिजनों को बधाई दी। बिल्थरा रोड क्षेत्र में खुशी का माहौल व्याप्त है और सभी उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं
युवाओं के सपनों पर भारी पड़ रही सियासत.. रामगोविन्द अदालती आदेश के बाद भी समाधान नहीं। न्याय बनाम प्रशासनिक अवरोध
संजीव सिंह बलिया! उत्तर प्रदेश की शैक्षिक राजनीति और विधिक गलियारों में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की नियुक्तियों का प्रकरण एक मिसाल बन गया है। यह कहानी केवल एक अध्यादेश की नहीं, बल्कि हज़ारों बेरोजगारों के सपनों और न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका के बीच खिंचती रस्साकशी की है। 1. 2013-14 का ऐतिहासिक निर्णय तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में सन् 2013-14 में एक महत्वपूर्ण अध्यादेश लाया गया था। इसका उद्देश्य संस्कृत शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारना और महाविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी को दूर करना था। उक्त बाते पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा और बताया कि विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों की प्रबंध समितियों को रिक्त पदों पर चयन की शक्ति दी गई। इस विकेंद्रीकरण से प्रक्रिया में तेजी आई और कई उच्च शिक्षित युवाओं को रोजगार मिला, जिससे संस्कृत की पाठशालाओं में रौनक लौटी। 2016-17 में सत्ता परिवर्तन के साथ ही इन नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई। योगी सरकार के इस कदम ने न केवल नए रोजगारों पर ताला जड़ा, बल्कि कार्यरत शिक्षकों के भविष्य पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया। इसके बाद शुरू हुआ अदालती संघर्ष का वह लंबा सिलसिला, जिसमें सरकार को हर मोड़ पर विधिक हार का सामना करना पड़ा अभ्यर्थियों ने सरकार के रोक के फैसले को चुनौती दी और कोर्ट ने अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया। सरकार ने हार नहीं मानी और डबल बेंच में अपील की, लेकिन वहाँ भी न्याय की जीत हुई। अंततः मामला देश की सबसे बड़ी अदालत पहुँचा। 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार की याचिका को खारिज करते हुए नियुक्तियों के पक्ष में मुहर लगा दी। पूर्व नेता विरोधी दल ने कहा कि 'न्याय में देरी, न्याय न मिलने के बराबर' विडंबना यह है कि देश की सर्वोच्च अदालत से आदेश आने के बावजूद योगी सरकार ने शासन स्तर पर विभिन्न तकनीकी पेच फंसाकर इन नियुक्तियों और उनके लाभों को बाधित किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) की श्रेणी में आती है, बल्कि उन युवाओं के साथ भी अन्याय है जो अपनी योग्यता सिद्ध कर चुके हैं। संस्कृत को भारत की आत्मा कहा जाता है, लेकिन जब इसी भाषा के विद्वान और शिक्षक अपनी आजीविका के लिए दर-दर भटकते हैं, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि सरकारें अदालती आदेशों के बाद भी 'हथकंडे' अपनाकर नियुक्तियां रोकती हैं, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन है। योगी सरकार और प्रशासन को अब हठधर्मिता छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करना चाहिए ताकि संस्कृत शिक्षा का संरक्षण हो सके और युवाओं को उनका उचित हक मिल सके। (रामगोविन्द चौधरी) पूर्व नेता प्रतिपक्ष उoप्र
पूर्व रेलवे मंत्री और सीएम ममता के करीबी मुकुल रॉय का निधन, कहे जाते थे बंगाल के चाणक्य

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पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन हो गया है। मुकुल रॉय बीमार थे और उनका कोलकाता के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय ने अपने पिता के निधन की पुष्टि की है।

बेटे शुभ्रांशु रॉय ने बताया कि मुकुल रॉय ने रविवार रात करीब 1:30 बजे कोलकाता के अपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली। अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी। बताया जा रहा है कि मुकुल रॉय लंबे समय से कई तरह की बीमारियों की वजह से जूझ रहे थे।

कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से थे ग्रसित

मुकुल रॉय पिछले कुछ सालों से बीमार चल रहे थे। बेटे शुभ्रांशु ने कहा, वह कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। वे पार्किंसंस रोग और डिमेंशिया से पीड़ित थे। ब्रेन में हाइड्रोसेफलस की समस्या के कारण ब्रेन सर्जरी भी हुई थी। 2024 में भी कई बार अस्पताल में भर्ती हुए, जिसमें सिर में चोट और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं शामिल थीं। हाल ही में अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत क्रिटिकल बताई गई थी।

तृणमूल कांग्रेस का प्रमुख चेहरा

1998 में गठित टीएमसी के शुरुआती दौर से जुड़े रॉय को कभी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी सहयोगी माना जाता था। ममता बनर्जी की तरह ही उन्होंने भी अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बंगाल में यूथ कांग्रेस से की थी। तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद रॉय ने पार्टी संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया। समय के साथ वे दिल्ली की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे।

मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर

वर्ष 2006 में वह राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और 2009 से 2012 तक सदन में पार्टी के नेता रहे। यूपीए-2 सरकार के दौरान उन्होंने पहले शिपिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में काम किया और बाद में मार्च 2012 में पार्टी सहयोगी दिनेश त्रिवेदी की जगह रेल मंत्री का पद संभाला। हालांकि, मुकुल रॉय के टीएमसी के साथ रिश्ते बिगड़ गए। खासकर शारदा चिटफंड घोटाले जैसे मुद्दों के बाद वह टीएमसी से दूर हो गए। फरवरी 2015 में पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव पद से हटा दिया। सितंबर 2017 में मुकुल रॉय ने टीएमसी से इस्तीफा दे दिया।

2017 में बीजेपी का दामन थामा

नवंबर 2017 में रॉय बीजेपी में शामिल हो गए थे। रॉय ने जमीनी स्तर पर काम करके बीजेपी को राज्य में बेस बनाने में मदद की। उन्हें 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी की 18 सीटें जीतने का क्रेडिट दिया जाता है। उन्होंने बीजेपी को टीएमसी के कई बड़े नेताओं को अपने पाले में लाने में मदद की और 2021 के विधानसभा चुनावों में कृष्णानगर उत्तर से बीजेपी विधायक चुने गए। लेकिन जल्द ही, उन्होंने बीजेपी से दूरी बना ली। जून 2021 में वो तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। हालांकि, टीएमसी में वापस आने पर वह कद और समझ दोनों में पहले जैसे कभी नहीं रहे।

गया में STF टीम पर हमला, तीन जवान घायल, हथियार छीने गए, हत्या के एक मामले में वांछित कुख्यात आरोपी संजय मांझी को गिरफ्तार करने पहुंची थी एसटीएफ

गया: गया जिले में कुख्यात अपराधी की गिरफ्तारी के लिए गई स्पेशल टास्क फोर्स (STF) टीम पर ग्रामीणों की भीड़ ने हमला कर दिया। घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र के खिरियामा गांव की है, जहां रविवार देर रात पुलिस कार्रवाई के दौरान स्थिति अचानक हिंसक हो गई। हमले में तीन से अधिक STF जवान घायल हो गए, जबकि कुछ समय के लिए उनके हथियार भी छीन लिए गए थे। बाद में पुलिस दबिश के बाद हथियार बरामद कर लिए गए।

पुलिस के अनुसार STF टीम हत्या के एक मामले में वांछित कुख्यात आरोपी संजय मांझी को गिरफ्तार करने पहुंची थी। टीम आरोपी को पकड़ने ही वाली थी कि उसने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर आसपास के लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए और देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई। भीड़ ने पुलिस टीम पर पत्थरबाजी की और लाठी-डंडों से हमला कर दिया, जिससे कई जवान घायल हो गए। घायल जवानों को तुरंत इलाज के लिए मगध मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। 

घटना के बाद पूरे इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और हालात पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले में सात लोगों को हिरासत में लिया गया है और अन्य आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। प्रशासन ने कहा है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है, हालांकि पुलिस स्थिति को नियंत्रण में होने की बात कह रही है।

मुंबई वर्ल्ड कांग्रेस में चमके रांची के डॉ. अभिषेक रामाधीन: झारखंड से शामिल होने वाले रहे एकमात्र डॉक्टर

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रांची/मुंबई: रांची के सुप्रसिद्ध ईएनटी एवं स्लीप सर्जन डॉ. अभिषेक के. रामाधीन ने मुंबई में आयोजित 14वें वर्ल्ड कांग्रेस (ISSS–IASSACON 2026) में भाग लेकर राज्य का नाम रोशन किया है। 50 से अधिक देशों के विशेषज्ञों के बीच डॉ. रामाधीन इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में झारखंड के एकमात्र प्रतिनिधि रहे।

महत्वपूर्ण भागीदारी:

सम्मेलन का उद्घाटन पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ द्वारा किया गया। इस दौरान डॉ. रामाधीन ने विशेष सत्र "Understanding Endotypes and Phenotypes for Tailored Therapy" में बतौर फैकल्टी (Faculty) शामिल होकर आधुनिक उपचार पद्धतियों पर चर्चा की।

खर्राटों को न समझें सामान्य:

डॉ. रामाधीन ने खर्राटे को लेकर गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने बताया कि खर्राटा अक्सर स्लीप एपनिया का लक्षण होता है, जिसमें नींद में बार-बार सांस रुकती है। इसके खतरनाक प्रभाव निम्नलिखित हो सकते हैं:

अचानक मृत्यु (Sudden Death) का बढ़ता जोखिम।

याददाश्त की कमी और पुरुषों में शारीरिक कमजोरी।

बच्चों के दिमागी विकास और IQ स्तर में गिरावट।

डॉ. रामाधीन ने झारखंड में इस बीमारी के प्रति जागरूकता की कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि खर्राटों का समय पर इलाज कराकर भविष्य की गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

रोटरी कार रैली का नगर पहुंचने पर  हुआ भव्य स्वागत


फर्रुखाबाद। शांति सदभावना और भाईचारे के संदेश को जनमानस तक पहुंचाने के उद्देश्य से रोटरी मंडल 3110 के मंडल अध्यक्ष रोटरी राजन विद्यार्थी के नेतृत्व में रोटरी डिस्ट्रिक्ट पीस रैली का आयोजन किया गया ,जो बरेली शहर से प्रारंभ होकर मंडल के विभिन्न शहरों में शांति और सद्भभावना का संदेश देते हुए फर्रुखाबाद पहुंची है। यह यात्रा 18 फरवरी 2026 को बरेली से प्रारंभ हुई थी वहां से पीलीभीत ,रुद्रपुर ,हल्द्वानी ,नैनीताल, काशीपुर,रामपुर ,बदायूं ,कासगंज ,मथुरा, आगरा, अलीगढ़, उन्नाव होकर फर्रुखाबाद पहुंची।

रोटरी मंडल अध्यक्ष रोटरी राजन विद्यार्थी  , डिस्ट्रिक्ट सेक्रेट्री रोटरी मोहन गुप्ता और रैली के अध्यक्ष रोटरी मनीष शर्मा आज फर्रुखाबाद बॉर्डर पर पहुंचे । जहां उनका फूल मालाओं और ढोल नगाड़ों से जोरदार स्वागत हुआ चौराहा ,भोलेपुर ,मेमोरियल हॉस्पिटल होते हुए डायमंड पैलेस होटल आवास विकास पहुंचे वहां पर सभी रोटरी सदस्यों की पत्नियों और बाकी सदस्यों ने रैली का ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत किया।

इस दौरान मीटिंग का आयोजन किया गया जिसके मुख्य अतिथि मनोज अग्रवाल  और नगर पालिका अध्यक्ष वत्सला अग्रवाल थे। नगर पालिका अध्यक्ष वत्सला अग्रवाल ने रोटरी क्लब के सभी सदस्यो का समाज मे बेहतर कार्य के लिए आभार व्यक्त किया और बताया की आजकल की ऐसी वेब सीरीज जो की अश्लीलता और अमर्यादित गालियां परोसती है उस पर रोटरी क्लब से कार्य कर फ़िल्म बोर्ड तक पहुंचाने का आवाहन किया। बाहर से आए रोटरी के पदाधिकारियो ने भी संबोधन किया ।

फर्रुखाबाद रोटरी क्लब के अध्यक्ष डॉ वी के गुप्ता ने सभी को धन्यवाद दिया और मण्डल अध्यक्ष राजन विद्यार्थी ने हर संभव मदद करने के लिए सहमति जताई। कार्यक्रम का संचालन की भूमिका रोटरी डॉक्टर प्रशांत श्रीवास्तव ने संभाली। फर्रुखाबाद रोटरी क्लब की रैली का आयोजन सचिव रोटरी दीपक खन्ना ने किया

सभी रोटेरियन परिवार  खासकर महिलाओं ने इस रैली में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया कार्यक्रम में डॉ वी के चौधरी, लकी गुप्ता,ऋतु गुप्ता, मोनिका खन्ना, नेहा श्रीवास्तव,डॉ सरोज वाला  सिंह,शिवानी माथुर इत्यादि रोटरी सदस्य उपस्थित रहे।
पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर की रिपोर्ट: रात की दुर्घटनाओं में शराब और बिना हेलमेट बड़ी वजह
लखनऊ। राजधानी स्थित एपेक्स ट्रॉमा सेंटर पीजीआई लखनऊ की एक अध्ययन रिपोर्ट में सामने आया है कि रात के समय होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में शराब पीकर वाहन चलाना और हेलमेट न पहनना बड़ी वजह बन रहे हैं। वर्ष 2018 से 2024 के बीच रात में भर्ती हुए घायलों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।डॉ. एके सिंह और डॉ. पीके मिश्रा द्वारा तैयार यह शोध रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल Cureus में प्रकाशित हुई है। अध्ययन में कुल 3,705 घायलों को शामिल किया गया। रिपोर्ट की प्रमुख बातें रात में लाए गए घायलों में से लगभग हर दूसरे व्यक्ति ने शराब पी रखी थी। केवल एक तिहाई दोपहिया सवारों ने हेलमेट पहना था। चार पहिया वाहन चालकों में सिर्फ 41% ने सीट बेल्ट लगाई थी। कुल मामलों में 67.3% सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े थे। इनमें से 84.7% दोपहिया वाहन दुर्घटनाएं थीं। 78.3% मरीज पुरुष थे, औसत आयु 37.5 वर्ष। 44.5% मामलों में सिर की चोट पाई गई। आईसीयू और मृत्यु दर अध्ययन में पाया गया कि 58.4% मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। 45.8% को मैकेनिकल वेंटिलेशन की जरूरत हुई। कुल मृत्यु दर 4% रही, जिनमें से 42.2% मौतें 24 घंटे के भीतर हुईं। बुजुर्गों में बाथरूम में गिरने की घटनाएं रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि काफी बुजुर्ग बाथरूम में फिसलकर घायल हो रहे हैं। इसकी बड़ी वजह चिकनी टाइल्स को बताया गया है, जिनकी फिसलन से गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ की राय ट्रॉमा सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. वैभव जायसवाल के अनुसार, दुर्घटनाओं में तेज रफ्तार, लापरवाही और जागरूकता की कमी बड़ी वजह है। बेहतर सड़कें और एक्सप्रेसवे यात्रा का समय तो कम कर रहे हैं, लेकिन सावधानी न बरतने पर हादसों का खतरा भी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने जगह-जगह ट्रॉमा सेंटर बनाने और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है।
अधिवक्ता हत्याकांड, मारपीट में भतीजे ने चढाया था लोगों पर ट्रैक्टर
*9 बीघा जमीन का विवाद, पीट पीट कर की हत्या

गोंडा।जिले के करनैलगंज कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत दत्त नगर गांव के सुदाई पुरवा में रविवार को हुए उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा हत्याकांड से जुड़ा एक लाइव वीडियो सामने आया है,यह वीडियो घटना से ठीक पहले का है जिसमें दिखाई दे रहा है कि खेत में जुताई के दौरान दोनों पक्षों में कहासुनी के बाद मारपीट शुरू हो जाती है।इस दौरान अधिवक्ता के भतीजे ने ट्रैक्टर से सबको कुचलने का प्रयास किया जिसमें दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए जबकि अधिवक्ता की मौत हो गई।वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दिया है,वहीं गांव में माहौल बिगड़ने की स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।सारा विवाद 9 बीघा जमीन को लेकर चल रहा था।चार मिनट के लाइव वीडियो में अधिवक्ता के भतीजे विश्वास मिश्रा को खेत की जुताई करते देखा जा सकता है।इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और गाली गलौज शुरू हो जाती है।मारपीट के दौरान अधिवक्ता खुद भी लाठी लेकर बचाव करते दिखाई दे रहे हैं।घटना के कुछ मिनट बाद पुलिस के भी पहुंचने का दावा किया जा रहा है,जिसके बाद दोनों पक्षों के लोग मौके से फरार हो जाते हैं।घटना में मृतक अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में प्रशासनिक अधिवक्ता रहे हैं तथा अवध बार एसोसिएशन के मंत्री भी रह चुके हैं।उनके दो बेटे हैं जिनमें बड़ा बेटा अभिषेक मिश्रा उच्च न्यायालय में अधिवक्ता है तो वहीं छोटा बेटा अनुराग मिश्रा घर पर रहकर खेती बाड़ी संभालता है।परिजनों के अनुसार, यह विवाद गांव के पूर्व प्रधान हरिशरण मिश्रा से 9 बीघा जमीन को लेकर चल रहा था और कोर्ट का फैसला सुभाष चंद्र मिश्रा के पक्ष में आया था,जिसकी प्रति लेकर वह घटना के एक दिन पहले करनैलगंज कोतवाली गए थे और पुलिस को सूचित किया था कि वह अगले दिन जमीन पर कब्जा लेने जाएंगे।मृतक अधिवक्ता के पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ है कि सुभाष चंद्र मिश्रा की मौत सिर में गंभीर चोट लगने से हुई,जबकि शरीर पर कुल आठ चोट के निशान मिले हैं।सुभाष चंद्र मिश्रा का पोस्टमार्टम दो डाक्टरों के पैनल द्वारा वीडियोग्राफी के साथ किया गया।रिपोर्ट में बताया गया कि सिर में चोट से खून जम गया था,जिसके कारण नसों ने काम करना बंद कर दिया और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।मामले में करनैलगंज कोतवाली पुलिस न भतीजे विश्वास मिश्रा की तहरीर पर चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है और दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है,इसके साथ ही अन्य की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात है।करनैलगंज कोतवाल नरेंद्र प्रताप राय के अनुसार दो वीडियो सामने आए हैं,जिसमें से एक में कोई विवाद स्पष्ट नहीं है जबकि दूसरे में विवाद और ट्रैक्टर चलाते एक व्यक्ति देखा जा सकता है।पुलिस वीडियो की सत्यता और घटनाक्रम की जांच कर रही है।इस घटना के बाद अधिवक्ताओं में अत्यधिक आक्रोश है।उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग किया है।मामले की जानकारी होने पर कटरा बाजार के भाजपा विधायक बावन सिंह भी मौके पर पहुंचे,जिसमें वह अधिवक्ताओं से हाईकोर्ट में आंदोलन करने की बात कहते दिखाई दे रहे हैं।हालांकि पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल के आश्वासन के बाद स्थिति कुछ शांत हुई।अनुराग के अनुसार रविवार को जैसे ही वे लोग खेत पर पहुंचे,आरोपियों ने हमला कर दिया।लाठी डंडों से पिटाई की गई और फायरिंग भी की गई।गोली उनके भाई के कान के पास से निकल गई।परिजनों ने आरोप लगाया कि घटना में 20 से 30 लोग शामिल थे।उन्होंने सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त सजा की मांग किया है।अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी राधेश्याम राय ने बताया कि अधिवक्ता के भतीजे विश्वास मिश्रा की शिकायत पर चार आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
शेरघाटी में आस्था का महासंगम, विराट हिंदू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब: भजन, प्रवचन और जयघोष से गूंजा गोला बाजार परिसर

गया: शेरघाटी शहर के तीन शिवाला, गोला बाजार में को आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन ने शहर को पूरी तरह भक्तिमय रंग में रंग दिया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। देखते ही देखते पूरा परिसर भगवा ध्वज, जयघोष और भक्ति गीतों से गूंज उठा। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने इसे ऐतिहासिक आयोजन का रूप दे दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंच पर रामाशीष सिंह, गोविंदा आचार्य, डॉ. तपेश्वर प्रसाद, कमल सिंह (जिला संघचालक) एवं डॉ. उदय प्रसाद सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। वक्ताओं ने अपने ओजस्वी संबोधन में हिंदू समाज की एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया।

वक्ताओं ने कहा कि जब समाज संगठित होता है तो परिवर्तन स्वतः संभव होता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़ें और संस्कृति व संस्कार को आगे बढ़ाएं। बीच-बीच में “भारत माता की जय” और “जय श्रीराम” के नारों से वातावरण ऊर्जावान बना रहा।

सम्मेलन की खास बात रही भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां। स्थानीय कलाकारों ने भक्ति गीतों से माहौल को भावविभोर कर दिया। श्रद्धालु भी तालियों और जयघोष के साथ पूरे जोश में नजर आए। धर्म प्रवचनों के दौरान कई लोग भावुक भी दिखे।

कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक उदय सिंह यादव सहित चंद्रभानु प्रसाद, ऋषभ जी, सत्यम जी, नौरंगी प्रसाद, विकास जी, राहुल आचार्य और अभिषेक जी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने आयोजन की भव्यता की सराहना की और इसे समाज को जोड़ने वाला कदम बताया।

श्रद्धालुओं के लिए भंडारा और प्रसाद वितरण की व्यापक व्यवस्था की गई थी। लंबी कतारों के बावजूद अनुशासन बना रहा। स्वयंसेवकों ने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित रखने में अहम भूमिका निभाई। सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए थे।

शाम ढलते-ढलते भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही थी। आयोजन समिति के सदस्यों के चेहरे पर सफलता की संतोष भरी मुस्कान साफ झलक रही थी। सम्मेलन शांतिपूर्ण, भव्य और अत्यंत सफल रहा। अंत में आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आगे भी होते रहेंगे, ताकि समाज में एकता और जागरूकता का संदेश फैलता रहे।

झारखंड में लोकतंत्र का महापर्व: 48 नगर निकायों में मतदान जारी, सुबह से ही बूथों पर लगी लंबी कतारें

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रांची: झारखंड के 48 नगर निकायों के लिए आज सुबह 7 बजे से मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हो गई है। राज्यभर के 1,042 वार्डों में फैले 4,307 मतदान केंद्रों पर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इस चुनाव में कुल 6,124 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनके भविष्य का फैसला 43.43 लाख मतदाता करेंगे।

राजधानी का माहौल:

रांची नगर निगम क्षेत्र में मेयर पद के 11 और पार्षद पद के 364 उम्मीदवारों के बीच रोचक मुकाबला है। मोरहाबादी, हरमू, डोरंडा और हिंदपीढ़ी जैसे इलाकों में सुबह से ही मतदाताओं का उत्साह चरम पर है। पहली बार वोट डालने आए युवाओं ने सड़क, नाली, पेयजल और स्वच्छता जैसे बुनियादी मुद्दों को प्राथमिकता दी है।

चुनाव आयोग की व्यवस्था:

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, शुरुआती दो घंटों में पूरे राज्य में औसतन 12% के करीब मतदान दर्ज किया गया है। सभी बूथों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और मतदान प्रक्रिया पूरी तरह से सुचारू रूप से चल रही है।

पाकुड़ 12.41%

मधुपुर 10.20%

देवघर 8.50%

रांची 7.28%

चिरकुंडा 7.24%

धनबाद 5.73%

बेल्थरारोड के लाल ने रोशन किया बलिया का मान, डॉ. अमरेंद्र गुप्ता का एम्स दिल्ली में चयन

संजीव सिंह बेल्थरा रोड (बलिया), 23 फरवरी 2026: क्षेत्र के पिपरौली बड़ा गांव के लिए गौरव का क्षण आ गया है। प्राथमिक विद्यालय चौकियां मोड़ के प्रधानाध्यापक विजय शंकर गुप्ता के सुपुत्र डॉ. अमरेंद्र गुप्ता का चयन देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में चिकित्सक पद के लिए हो गया है। इस उपलब्धि से पूरे बिल्थरा रोड क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।डॉ. अमरेंद्र गुप्ता ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पैतृक गांव के प्राथमिक विद्यालय से प्राप्त की। इसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय, बलिया से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने के बाद कठिन परिश्रम से मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल कर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। लखनऊ के फातिमा हॉस्पिटल से एमडी करने के बाद अब एम्स दिल्ली में चयनित होकर उन्होंने ग्रामीण परिवेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चमकाया है।डॉ. अमरेंद्र ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और मित्रों को देते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प, सतत परिश्रम और सही मार्गदर्शन से कोई भी उच्च मुकाम हासिल कर सकता है।इस अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी सीयर सुनील चौबे, शिक्षक देवेंद्र वर्मा, कृष्णा नन्द सिंह, वीरेंद्र यादव, आशुतोष पाण्डेय, हरेकृष्णा पाण्डेय, अजित सिंह, नन्द लाल शर्मा सहित क्षेत्रीय गणमान्यजनोंने डॉ. अमरेंद्र एवं उनके परिजनों को बधाई दी। बिल्थरा रोड क्षेत्र में खुशी का माहौल व्याप्त है और सभी उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं
युवाओं के सपनों पर भारी पड़ रही सियासत.. रामगोविन्द अदालती आदेश के बाद भी समाधान नहीं। न्याय बनाम प्रशासनिक अवरोध
संजीव सिंह बलिया! उत्तर प्रदेश की शैक्षिक राजनीति और विधिक गलियारों में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय की नियुक्तियों का प्रकरण एक मिसाल बन गया है। यह कहानी केवल एक अध्यादेश की नहीं, बल्कि हज़ारों बेरोजगारों के सपनों और न्यायपालिका बनाम कार्यपालिका के बीच खिंचती रस्साकशी की है। 1. 2013-14 का ऐतिहासिक निर्णय तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में सन् 2013-14 में एक महत्वपूर्ण अध्यादेश लाया गया था। इसका उद्देश्य संस्कृत शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारना और महाविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी को दूर करना था। उक्त बाते पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा और बताया कि विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों की प्रबंध समितियों को रिक्त पदों पर चयन की शक्ति दी गई। इस विकेंद्रीकरण से प्रक्रिया में तेजी आई और कई उच्च शिक्षित युवाओं को रोजगार मिला, जिससे संस्कृत की पाठशालाओं में रौनक लौटी। 2016-17 में सत्ता परिवर्तन के साथ ही इन नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई। योगी सरकार के इस कदम ने न केवल नए रोजगारों पर ताला जड़ा, बल्कि कार्यरत शिक्षकों के भविष्य पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया। इसके बाद शुरू हुआ अदालती संघर्ष का वह लंबा सिलसिला, जिसमें सरकार को हर मोड़ पर विधिक हार का सामना करना पड़ा अभ्यर्थियों ने सरकार के रोक के फैसले को चुनौती दी और कोर्ट ने अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया। सरकार ने हार नहीं मानी और डबल बेंच में अपील की, लेकिन वहाँ भी न्याय की जीत हुई। अंततः मामला देश की सबसे बड़ी अदालत पहुँचा। 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार की याचिका को खारिज करते हुए नियुक्तियों के पक्ष में मुहर लगा दी। पूर्व नेता विरोधी दल ने कहा कि 'न्याय में देरी, न्याय न मिलने के बराबर' विडंबना यह है कि देश की सर्वोच्च अदालत से आदेश आने के बावजूद योगी सरकार ने शासन स्तर पर विभिन्न तकनीकी पेच फंसाकर इन नियुक्तियों और उनके लाभों को बाधित किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) की श्रेणी में आती है, बल्कि उन युवाओं के साथ भी अन्याय है जो अपनी योग्यता सिद्ध कर चुके हैं। संस्कृत को भारत की आत्मा कहा जाता है, लेकिन जब इसी भाषा के विद्वान और शिक्षक अपनी आजीविका के लिए दर-दर भटकते हैं, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि सरकारें अदालती आदेशों के बाद भी 'हथकंडे' अपनाकर नियुक्तियां रोकती हैं, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन है। योगी सरकार और प्रशासन को अब हठधर्मिता छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करना चाहिए ताकि संस्कृत शिक्षा का संरक्षण हो सके और युवाओं को उनका उचित हक मिल सके। (रामगोविन्द चौधरी) पूर्व नेता प्रतिपक्ष उoप्र
पूर्व रेलवे मंत्री और सीएम ममता के करीबी मुकुल रॉय का निधन, कहे जाते थे बंगाल के चाणक्य

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पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन हो गया है। मुकुल रॉय बीमार थे और उनका कोलकाता के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय ने अपने पिता के निधन की पुष्टि की है।

बेटे शुभ्रांशु रॉय ने बताया कि मुकुल रॉय ने रविवार रात करीब 1:30 बजे कोलकाता के अपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली। अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी। बताया जा रहा है कि मुकुल रॉय लंबे समय से कई तरह की बीमारियों की वजह से जूझ रहे थे।

कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से थे ग्रसित

मुकुल रॉय पिछले कुछ सालों से बीमार चल रहे थे। बेटे शुभ्रांशु ने कहा, वह कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। वे पार्किंसंस रोग और डिमेंशिया से पीड़ित थे। ब्रेन में हाइड्रोसेफलस की समस्या के कारण ब्रेन सर्जरी भी हुई थी। 2024 में भी कई बार अस्पताल में भर्ती हुए, जिसमें सिर में चोट और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं शामिल थीं। हाल ही में अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत क्रिटिकल बताई गई थी।

तृणमूल कांग्रेस का प्रमुख चेहरा

1998 में गठित टीएमसी के शुरुआती दौर से जुड़े रॉय को कभी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी सहयोगी माना जाता था। ममता बनर्जी की तरह ही उन्होंने भी अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बंगाल में यूथ कांग्रेस से की थी। तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद रॉय ने पार्टी संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया। समय के साथ वे दिल्ली की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे।

मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर

वर्ष 2006 में वह राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और 2009 से 2012 तक सदन में पार्टी के नेता रहे। यूपीए-2 सरकार के दौरान उन्होंने पहले शिपिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में काम किया और बाद में मार्च 2012 में पार्टी सहयोगी दिनेश त्रिवेदी की जगह रेल मंत्री का पद संभाला। हालांकि, मुकुल रॉय के टीएमसी के साथ रिश्ते बिगड़ गए। खासकर शारदा चिटफंड घोटाले जैसे मुद्दों के बाद वह टीएमसी से दूर हो गए। फरवरी 2015 में पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव पद से हटा दिया। सितंबर 2017 में मुकुल रॉय ने टीएमसी से इस्तीफा दे दिया।

2017 में बीजेपी का दामन थामा

नवंबर 2017 में रॉय बीजेपी में शामिल हो गए थे। रॉय ने जमीनी स्तर पर काम करके बीजेपी को राज्य में बेस बनाने में मदद की। उन्हें 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी की 18 सीटें जीतने का क्रेडिट दिया जाता है। उन्होंने बीजेपी को टीएमसी के कई बड़े नेताओं को अपने पाले में लाने में मदद की और 2021 के विधानसभा चुनावों में कृष्णानगर उत्तर से बीजेपी विधायक चुने गए। लेकिन जल्द ही, उन्होंने बीजेपी से दूरी बना ली। जून 2021 में वो तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। हालांकि, टीएमसी में वापस आने पर वह कद और समझ दोनों में पहले जैसे कभी नहीं रहे।

गया में STF टीम पर हमला, तीन जवान घायल, हथियार छीने गए, हत्या के एक मामले में वांछित कुख्यात आरोपी संजय मांझी को गिरफ्तार करने पहुंची थी एसटीएफ

गया: गया जिले में कुख्यात अपराधी की गिरफ्तारी के लिए गई स्पेशल टास्क फोर्स (STF) टीम पर ग्रामीणों की भीड़ ने हमला कर दिया। घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र के खिरियामा गांव की है, जहां रविवार देर रात पुलिस कार्रवाई के दौरान स्थिति अचानक हिंसक हो गई। हमले में तीन से अधिक STF जवान घायल हो गए, जबकि कुछ समय के लिए उनके हथियार भी छीन लिए गए थे। बाद में पुलिस दबिश के बाद हथियार बरामद कर लिए गए।

पुलिस के अनुसार STF टीम हत्या के एक मामले में वांछित कुख्यात आरोपी संजय मांझी को गिरफ्तार करने पहुंची थी। टीम आरोपी को पकड़ने ही वाली थी कि उसने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर आसपास के लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए और देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई। भीड़ ने पुलिस टीम पर पत्थरबाजी की और लाठी-डंडों से हमला कर दिया, जिससे कई जवान घायल हो गए। घायल जवानों को तुरंत इलाज के लिए मगध मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। 

घटना के बाद पूरे इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और हालात पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले में सात लोगों को हिरासत में लिया गया है और अन्य आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। प्रशासन ने कहा है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है, हालांकि पुलिस स्थिति को नियंत्रण में होने की बात कह रही है।

मुंबई वर्ल्ड कांग्रेस में चमके रांची के डॉ. अभिषेक रामाधीन: झारखंड से शामिल होने वाले रहे एकमात्र डॉक्टर

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रांची/मुंबई: रांची के सुप्रसिद्ध ईएनटी एवं स्लीप सर्जन डॉ. अभिषेक के. रामाधीन ने मुंबई में आयोजित 14वें वर्ल्ड कांग्रेस (ISSS–IASSACON 2026) में भाग लेकर राज्य का नाम रोशन किया है। 50 से अधिक देशों के विशेषज्ञों के बीच डॉ. रामाधीन इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में झारखंड के एकमात्र प्रतिनिधि रहे।

महत्वपूर्ण भागीदारी:

सम्मेलन का उद्घाटन पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ द्वारा किया गया। इस दौरान डॉ. रामाधीन ने विशेष सत्र "Understanding Endotypes and Phenotypes for Tailored Therapy" में बतौर फैकल्टी (Faculty) शामिल होकर आधुनिक उपचार पद्धतियों पर चर्चा की।

खर्राटों को न समझें सामान्य:

डॉ. रामाधीन ने खर्राटे को लेकर गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने बताया कि खर्राटा अक्सर स्लीप एपनिया का लक्षण होता है, जिसमें नींद में बार-बार सांस रुकती है। इसके खतरनाक प्रभाव निम्नलिखित हो सकते हैं:

अचानक मृत्यु (Sudden Death) का बढ़ता जोखिम।

याददाश्त की कमी और पुरुषों में शारीरिक कमजोरी।

बच्चों के दिमागी विकास और IQ स्तर में गिरावट।

डॉ. रामाधीन ने झारखंड में इस बीमारी के प्रति जागरूकता की कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि खर्राटों का समय पर इलाज कराकर भविष्य की गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।