पिछले पांच वर्ष में कितनी फीस बढ़ाई, प्रयागराज के निजी स्कूलों से मांगा गया रिकार्ड; 10 दिन में देना होगा आंकड़ा

विश्वनाथ प्रताप सिंह
प्रयागराज। शिक्षा का सत्र शुरू होने के साथ प्रत्येक वर्ष महंगी पढ़ाई का दर्द अभिभावकों को परेशान करता है। कहीं अधिक फीस की पीड़ा है तो कहीं हर साल बदली जाने वाली महंगी किताबों के रद्दी में जाने का दर्द। अभिभावकों के महंगी पढ़ाई के दर्द को दैनिक जागरण ने प्रमुखता से उठाया। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
10 दिनों में रिकार्ड जमा करने के निर्देश
जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में संगम सभागार में जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक हुई। साफ शब्दों में कहा गया कान्वेंट स्कूल मनमानी बंद करें। निर्देशों का पालन न करने वालों पर कार्रवाई की जाए। पिछले पांच वर्ष में कितनी फीस बढ़ी इसका रिकार्ड 10 दिनों में जमा कराने को कहा गया है।
स्कूल की वेबसाइट पर शुल्क का पूरा खाका है या नहीं?
डीएम ने कहा कि स्कूलों को नोटिस देकर पूछा जाएगा कि पहली के बाद अन्य कक्षाओं में एडमिशन फीस की वसूली क्यों हो रही है? वसूली गई फीस की तुलना में शिक्षक व अन्य कर्मियों के वेतन में कितनी बढ़ोतरी की गई। स्कूल की वेबसाइट पर शुल्क का पूरा खाका है या नहीं? स्कूल जिन दुकानों से पाठ्य सामग्री वितरित कराते हैं उन्हें सूचीबद्ध किया जाय। उनकी आय, जीएसटी का लेखा-जोखा और देय कर का विवरण जुटाते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
शिकायत सुनेंगे नोडल अधिकारी बनाए गए सिटी मजिस्ट्रेट
इन प्रकरणों पर शिकायत सुनने के लिए नोडल अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट विनोद कुमार सिंह को बनाया गया है। उनके साथ डीआइओएस रहेंगे। जो फीस, स्टेशनी या अन्य शिकायतों पर कार्रवाई करेंगे। अभिभावक अपनी बात ई-मेल, कार्यालय में पत्र के जरिए व फोन से बता सकते हैं। प्रकरणों की जांच के बाद गड़बड़ी मिलने पर एक से पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने के साथ मान्यता समाप्त करने की कार्रवाई होगी।
शुल्क के अलावा अभिभावकों से कोई धनराशि नहीं लें
जिला विद्यालय निरीक्षक पीएन सिंह ने बताया कि सभी वित्तविहीन विद्यालयों चाहे वे सीबीएसई, सीआईएससीई, यूपी के हों वे अपनी शुल्क संरचना वेबसाइट व सूचना पट पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करेंगे। शुल्क के अतिरिक्त अभिभावकों से कोई धनराशि नहीं ली जाएगी। शुल्क वृद्धि नवीनतम उपलब्ध उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और छात्रों से वसूल किए गए पांच प्रतिशत शुल्क से अधिक नहीं होगी।
डीएम बोले- विलंब शुल्क पर 500 का जुर्माना नहीं चलेगा
डीएम ने कहा, जो विद्यालय अभिभावकों के देर से शुल्क जमा करने पर 500 रुपये जुर्माना लगा रहे हैं, वह तुरंत बंद कर दें। प्रत्येक इंटर कालेज, डिग्री काॅलेज और शिक्षण संस्थाओं में काउंसलर हैं या नहीं इसकी जांच की जाएगी। इसके साथ उन सभी दुकानों के लाइसेंस जांचे जाएंगे जो स्कूल की ओर से चिह्नित कर वस्तुओं को बेच रहे हैं।
15 दिन बाद फिर बैठक, होगी समीक्षा
डीएम ने जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देशित किया कि, समस्त बोर्ड के निजी विद्यालयों को पत्र जारी कर तीन वर्ष की आडिट रिपोर्ट, पांच वर्ष के शुल्क का विवरण जमा कराएं। शिक्षकों, कर्मचारियों के वेतन विवरण व वार्षिक वेतन वृद्धि की सूचना एक सप्ताह के भीतर लें। 15 दिन बाद फिर समिति की बैठक होगी।
20 min ago
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