मकर संक्रांति पर्व पर प्रयागराज जंक्शन पर विशेष निगरानी एवं 19 विशेष गाड़ियो का संचालन।
संजय द्विवेदी प्रयागराज।मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर यात्रियों की सुरक्षा सुविधा एवं सुचारु रेल संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आज मण्डल रेल प्रबन्धक प्रयागराज रजनीश अग्रवाल अपर मण्डल रेल प्रबन्धक (सामान्य)प्रयागराज दीपक कुमार वरिष्ठ मण्डल वाणिज्य प्रबन्धक (कोचिंग) हरिमोहन एवं वरिष्ठ मण्डल सुरक्षा आयुक्त विजय प्रकाश पंडित द्वारा प्रयागराज जंक्शन स्थित सीसीटीवी कंट्रोल रूम से स्टेशन एवं रेल परिचालन की सतत निगरानी की गई।मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर आज दिनांक 15 जनवरी 2026 को 19.00 बजे तक प्रयागराज मण्डल द्वारा कुल 19 विशेष गाड़ियो का संचालन किया गया।इनमें रिंग रेल सेवा विस्तारित सेवा टाइम-टेबल स्पेशल गाड़ियां तथा यात्रियो की अतिरिक्त आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए चलाई गई अन्य विशेष गाड़ियां सम्मिलित रही।इसी क्रम में वरिष्ठ अधिकारियो द्वारा प्रयागराज जंक्शन के विभिन्न प्लेटफार्मो का भी निरीक्षण किया गया।निरीक्षण के दौरान स्टेशन परिसर प्लेटफार्म प्रवेश एवं निकास मार्ग कैटरिंग सुविधाएं तथा अन्य संवेदनशील स्थलो पर यात्रियों की आवाजाही एवं भीड़ प्रबन्धन की व्यवस्थाओ का गहन अवलोकन किया गया। अधिकारियों ने ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियो को निरन्तर सतर्कता बनाए रखने यात्रियो को समुचित मार्गदर्शन प्रदान करने तथा किसी भी आकस्मिक स्थिति से त्वरित एवं प्रभावी ढंग से निपटने के निर्देश दिए।रेल प्रशासन द्वारा मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर यात्रियो की सुविधा हेतु विशेष भीड़ प्रबन्धन एवं सुरक्षा सम्बन्धी व्यापक व्यवस्थाएं की गई है तथा आवश्यक यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है जिससे श्रद्धालुओ एवं यात्रियो को सुरक्षित सुगम एवं सुविधा जनक यात्रा का अनुभव प्राप्त हो सके।








सुलतानपुर,अघोर पीठ बाबा सत्यनाथ मठ अल्देमऊ नूरपुर में आयोजित तीन दिवसीय अवधूत देशना पर्व के समापन अवसर पर संगोष्ठी आयोजित की गई। मठ के पीठाधीश्वर अवधूत उग्र चण्डेश्वर कपाली बाबा के सानिध्य में समाज में अघोर परम्परा का योगदान विषयक इस संगोष्ठी में देश के विद्वानों ने अपने अपने विचार रखे । मुख्य अतिथि समाजसेवी हनुमान सिंह ने कहा कि जब समाज में कुरीतियां पनपती हैं तो अघोर परम्परा समाज को जागृत करती है।
विशिष्ट अतिथि पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य घनश्याम चौहान ने कहा कि अघोर पंथ समदर्शी है। समाजसेवा में इनके द्वारा विभिन्न कार्य किये जा रहे हैं। प्रमोद मिश्र मुन्ना ने कहा कि अघोर परम्परा का काम जातियों को समाप्त करना है । बांके बिहारी पाण्डेय ने कहा अगर हम आज नहीं चेते तो भविष्य संकट में होगा। विषय प्रवर्तन करते हुए सत्यनाथ विद्वत परिषद के मंत्री श्याम चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित व संरक्षित करने के लिए अघोर परम्परा अपनाना जरूरी है। यह परम्परा सामाजिक भेदभाव को समाप्त करती है। राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने कहा कि समाज में समन्वय और समरसता स्थापित करने में अघोर परम्परा ने अग्रणी भूमिका निभाई है।
अहंकार को समाप्त कर सामाजिक वर्जनाओं को तोड़कर और मृत्यु व जन्म के द्वैत से परे जाकर आत्म ज्ञान प्राप्त करना तथा समस्त सृष्टि की एकता को समझना ही अघोर परम्परा का लक्ष्य है। संत तुलसीदास पीजी कालेज के पूर्व प्राचार्य डॉ इन्दुशेखर उपाध्याय ने कहा कि अघोर परम्परा का पालन आवश्यक है।अगर हम आज नहीं चेते तो भविष्य संकट में होगा । नसीराबाद स्टेट रायबरेली के राय अभिषेक ने कहा नई पीढ़ी में सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता तभी आयेगी जब वे अघोर परम्परा से जुड़ेंगे। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ सुशील कुमार पाण्डेय साहित्येन्दु व संचालन मथुरा प्रसाद सिंह जटायु ने किया।

फर्रुखाबाद ।गायत्री प्रज्ञा पीठ मेरापुर में आयोजित नौ दिवसीय राम कथा में सप्तम दिवस की कथा में अंतराष्ट्रीय कथाकार आचार्य मनोज अवस्थी जी महाराज ने बड़े ही भाव पूर्ण वाणी में भरत चरित्र का वर्णन किया। चित्रकूट में भरत और श्री राम का मिलाप का संवाद सुनकर भक्त भाव विभोर हो गए। कथा में आचार्य ने कहा कि भरत जी को जब पता चला कि मेरी माता ने राम जी को बन भेज दिया है तो उनपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। भरत जी ने चित्रकूट जाने के लिए सबको तैयार किया और चित्रकूट में जाकर राम जी से मिले। भरत जी को देखकर राम जी के धनुष बाण गिर पड़े ।

संतकबीरनगर । पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन में क्रैक साइबर क्राइम अभियान के तहत साइबर अपराधों की रोकथाम एवं पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने के क्रम में साइबर क्राइम थाना द्वारा सतत प्रभावी कार्यवाही करते हुए साइबर ठगी के शिकार पीड़ित को सम्पूर्ण फ्राड का शत प्रतिशत 19986/ रुपये की धनराशि वापस कराई गयी ।





इचाक (हजारीबाग): इचाक प्रखंड स्थित छबेलवा वन अब केवल हरियाली का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण का एक सशक्त प्रतीक बनकर उभर रहा है। इसी कड़ी में, यहाँ एक भव्य 'चूड़ा-दही मिलन समारोह' का आगाज किया गया, जिसने आपसी भाईचारे की नई मिसाल पेश की है।
18 min ago
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