झारखंड में 'असम' की आंच: सरयू राय ने हेमंत सोरेन को दिया 'बिना शर्त' समर्थन का ऑफर, क्या कांग्रेस से नाता तोड़ेगी झामुमो?

रांचीः असम चुनाव ने झारखंड में सियासी तनाव बढ़ा दिया है. खासकर, झामुमो के असम चुनाव में ताल ठोकने के बाद. आलम यह है कि सत्ताधारी दल झामुमो और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग शुरु हो गई है.
झामुमो नेता सुप्रियो भट्टाचार्य कांग्रेस की तुलना विषैले सांप से कर चुके हैं. इसके जवाब में कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के. राजू ने अपनी ही सरकार को हर मोर्चे पर फेल करार देते हुए कई सवाल खड़े कर चुके हैं.
इस बीच जदयू विधायक सरयू राय ने एक बयान देकर झारखंड की राजनीति को नई हवा दे दी है. उन्होंने सुझाव दिया है कि झामुमो को कांग्रेस और भाजपा से अलग सरकार बना लेनी चाहिए. ऐसा होता है तो वे सरकार को बिना शर्त समर्थन देने को तैयार हैं. लिहाजा, हेमंत सोरेन को हिम्मत दिखानी चाहिए.
क्या है सरयू राय का फॉर्मूला और सुझाव
जदयू विधायक सरयू राय ने 3 अप्रैल को धनबाद में कहा है कि झामुमो के पास 34 विधायक हैं. अगर कांग्रेस को हटा दें तो झामुमो को राजद के 04 विधायकों और भाकपा माले के 02 विधायकों का समर्थन हासिल है. यह आंकड़ा 40 हो जाता है. 81 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरुरत है. अगर झामुमो ऐसा करता है तो वे खुद बिना शर्त सरकार को समर्थन देने को तैयार हैं.
जदयू विधायक ने कहा कि कांग्रेस ने असम चुनाव में झामुमो को हिस्सेदारी नहीं दी. बिहार चुनाव में भी ऐसा ही हुआ था. ऐसे में झामुमो को नये विकल्प पर विचार करना चाहिए. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हवा का रुख कब बदल जाए, यह कहना मुश्किल है. ऐसा नहीं होना चाहिए कि असम चुनाव के बाद सीएम फिर कांग्रेस नेताओं से मिलें और कह दें कि अब हमारी सारी गलतफहमी दूर हो गई है.
उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस प्रभारी के. राजू यह कह रहे हैं कि झारखंड के अफसर माइनिंग माफिया के दबाव में काम कर रहे हैं तो यह सीधे तौर पर हेमंत सोरेन पर हमला है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि असम में झामुमो के चुनाव लड़ने से भाजपा को टी-ट्राइब वोट का नुकसान होगा.
सरयू राय के सुझाव पर वरिष्ठ पत्रकार मधुकर का तर्क
वरिष्ठ पत्रकार मधुकर का मानना है कि भाजपा किसी न किसी रुप में झामुमो को कांग्रेस से अलग करना चाहती है. अगर कांग्रेस से हटकर झामुमो सरकार बनाती है तो चुनौतियां और बढ़ जाएंगी. क्योंकि ज्यादा लोगों को संतुष्ट करना होगा. लिहाजा, ऐसी सरकार को चलाना मुश्किल हो जाएगा.
इसलिए कांग्रेस के बगैर झामुमो को सरकार चलाना मुश्किल होगा. यह भी समझना चाहिए कि झामुमो और भाजपा का वोट बैंक अलग है. वहीं झामुमो और कांग्रेस का वोट बैंक एक है. इससे दोनों को फायदा होगा. आगे चलकर फिर सीबीआई और ईडी की इंट्री हो तो अलग बात होगी.
वरिष्ठ पत्रकार मधुकर के मुताबिक भाजपा हर हाल में सरकार के करीब जाना चाहती है. क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में हेमंत सोरेन बहुत मजबूत हुए हैं. हेमंत सोरेन को इस बात की अच्छी समझ होगी कि बिहार में नीतीश कुमार के साथ क्या हुआ. रही बात सुप्रियो और के. राजू के बयान की तो ऐसी बयानबाजी चलती रहती है.
बिहार में भाजपा और जदयू के बीच भी बयानबाजी होती थी लेकिन सरकार चलती रही. क्योंकि वहां विकल्प ही नहीं था. ऐसे में सरयू राय के ऑफर के बावजूद झामुमो इस लोभ में आएगा, ऐसा नहीं लगता. रही बात असम कि तो खाता खुलना या ना खुलना अलग मैटर है लेकिन वहां झामुमो की पैठ बनेगी. मधुकर के मुताबिक हालिया बयानबाजी के प्रेशर पॉलिटिक्स के रुप में देखना चाहिए और कुछ नहीं.
वरिष्ठ पत्रकार चंदन मिश्रा का आकलन
सरयू राय के सुझाव पर ईटीवी भारत की टीम ने वरिष्ठ पत्रकार चंदन मिश्रा का पक्ष लिया. उन्होंने दो टूक कहा कि क्या सरयू राय पार्टी लाइन से अलग होकर झामुमो सरकार को समर्थन दे सकते हैं. वे कौन होते हैं ऐसा कहने वाले. वे तो जदयू के विधायक हैं. वे फैसला नहीं ले सकते. क्या झारखंड जदयू अध्यक्ष खीरू महतो ऐसा कह रहे है. खास बात है कि कांग्रेस और झामुमो में संबंध विच्छेद तो हुआ नहीं है. फिर कहां से नई सरकार की बात आ रही है. यह अलग बात है कि कांग्रेस और झामुमो के बीच जुबानी जंग हुई है. यह भी देखना चाहिए कि इस मैटर पर टॉप लीडर कुछ नहीं बोल रहा है.
चंदन मिश्रा का कहना है कि राजद ने बिहार में झामुमो को सहयोग नहीं दिया था. फिर भी राजद यहां की सरकार में शामिल है. उस वक्त कहा गया था राजद के खिलाफ कार्रवाई होगी लेकिन हुआ कुछ नहीं. क्योंकि झामुमो का सामने मजबूरी थी. चंदन मिश्रा ने कहा कि क्या हेमंत बोल सकते हैं कि उनको कांग्रेस का समर्थन नहीं चाहिए. मुझे लगता है कि सिर्फ असम चुनाव तक दोनों पार्टियां एक दूसरे पर थोड़ी छिंटाकशी करेंगी. फिर सबकुछ शांत हो जाएगा. यह भी समझना होगा कि हेमंत सोरेन को हिमंता विस्वा से चिढ़ थी. क्योंकि झारखंड चुनाव में हिमंता सक्रिय थे. इसलिए हेमंत सोरेन अब असम में अपनी ताकत दिखा रहे हैं. अगर झामुमो को जीतने की चाहत होती तो कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ते.
कांग्रेस प्रभारी ने क्या आरोप लगाए
पिछले दिनों कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के. राजू ने कहा था कि राज्य के सरकारी स्कूलों में 70 हजार शिक्षकों के पद रिक्त हैं. सोनुआ में आदिवासी समाज के बच्चे सरकारी स्कूलों के बजाए प्राइवेट स्कूलों का रुख कर रहे हैं. सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था लचर हो गई है. माइनिंग लॉ की आड़ में लोगों पर अन्याय हो रहा है. अधिकारी मनमानी कर रहे हैं. कांग्रेस नेता का घर तोड़ दिया गया. कोल बियरिंग एक्ट के तहत जमीन अधिग्रहण का मुआवजा नहीं मिल रहा है. हर जिला में कांग्रेस कार्यकर्ता लोगों की समस्याओं से प्रशासन को अवगत करा रहे हैं. इस काम को कांग्रेस गंभीरता से आगे लेकर जाएगी.
झामुमो ने कांग्रेस को दिया था ये सुझाव
कांग्रेस प्रभारी द्वारा अपनी ही सरकार के खिलाफ बयानबाजी पर झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था कि गठबंधन में रहकर इस तरह के बयान से जनता के बीच गलत संदेश जाता है. इस गठबंधन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. उन्हें सीएम से मिलकर अपनी बात रखनी चाहिए. तब कांग्रेस ने कहा था कि कांग्रेस तो सिर्फ जमीन अधिग्रहण कानून, 2013 का सही तरीके से डीसी के स्तर पर पालन नहीं कराया जाता है तो कांग्रेस की जिम्मेदारी है कि आंदोलन कर इन बातों से सरकार को अवगत कराएं.
1 hour and 17 min ago
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