आंगनबाड़ी केंद्रों पर विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश
*जिलाधिकारी ने नगमालपुर आंगनबाड़ी केंद्र पर टीकाकरण सत्र का किया आकस्मिक निरीक्षण*

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने बुधवार को विकास खंड क्षेत्र अभोली के आंगनबाड़ी केंद्र नगमालपुर में संचालित टीकाकरण सत्र का आकस्मिक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान केंद्र पर एएनएम एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री उपस्थित मिलीं तथा टीकाकरण संबंधी अभिलेखों का अवलोकन किया गया।
           निरीक्षण के दौरान एएनएम एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री द्वारा जिलाधिकारी को अवगत कराया गया कि ग्राम पंचायत में सभी 16 गर्भवती महिलाओं का निर्धारित टीकाकरण पूर्ण कराया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 52 बच्चों का नियमित टीकाकरण भी संपन्न कराया गया है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत में एक बच्चा गंभीर रूप से अस्वस्थ है, जिसका उपचार चिकित्सकीय देखरेख में कराया जा रहा है।
           जिलाधिकारी ने टीकाकरण कार्य की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के शत-प्रतिशत टीकाकरण तथा नियमित स्वास्थ्य निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान केंद्र पर विद्युत व्यवस्था उपलब्ध न होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देशित किया कि जनपद के सभी विकास खंडों के बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) से दो दिवस के भीतर आंगनबाड़ी केंद्रों की विद्युत व्यवस्था संबंधी विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त कर प्रस्तुत की जाए।
            उन्होंने सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर शीघ्र विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए कहा कि केंद्रों का संचालन सुव्यवस्थित, स्वच्छ एवं बाल हितैषी वातावरण में सुनिश्चित किया जाए। साथ ही बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं की नियमित निगरानी करने तथा शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर बल दिया।
         जिलाधिकारी ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बाल एवं मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला हैं। अतः इनके संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चक, चिकित्सा अधीक्षक अभोली डॉक्टर शुभांकर श्रीवास्तव, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी अनिल सिंह, अपर संख्या अधिकारी नीरव सिंह एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
कन्नौज में पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा-2026 का डीएम-एसपी ने लिया जायजा

पंकज कुमार श्रीवास्यव


कन्नौज। पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा-2026 को सकुशल, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री एवं पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने परीक्षा के लिए स्थापित कंट्रोल रूम तथा विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कंट्रोल रूम में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों, संचार व्यवस्था, परीक्षा केंद्रों से प्राप्त होने वाली सूचनाओं की निगरानी प्रणाली तथा परीक्षा संचालन संबंधी तैयारियों का गहन अवलोकन किया। उन्होंने सुरक्षा एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए की गई व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने परीक्षा केंद्रों पर तैनात मजिस्ट्रेटों, पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि परीक्षा पूरी निष्पक्षता और शुचिता के साथ संपन्न कराई जाए। साथ ही परीक्षा केंद्रों की सतत निगरानी बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता, नकल, संदिग्ध गतिविधि या परीक्षा की गोपनीयता भंग करने के प्रयास की सूचना तत्काल उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
अधिकारियों ने अभ्यर्थियों के प्रवेश, पहचान सत्यापन, सुरक्षा जांच, यातायात प्रबंधन एवं कानून-व्यवस्था संबंधी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर भी जोर दिया, ताकि परीक्षा शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित वातावरण में संपन्न हो सके। इसके अलावा परीक्षा के दौरान पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती कर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

जनपद प्रशासन एवं पुलिस विभाग ने पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा-2026 को सकुशल, निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाने का दावा किया है।
देवघर-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद डीएवी भंडारकोला के छात्र आयुष संतोषी का विद्यालय में किया गया सम्मान।
देवघर: के गीता देवी डीएवी पब्लिक स्कूल भंडारकोला, देवघर के पूर्ववर्ती छात्र एवं वर्तमान में डीएवी यूनिवर्सिटी, जालंधर के छात्र आयुष संतोषी ने श्रीलंका में आयोजित साउथ एशियन चैंपियनशिप में गोल शॉट बॉल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर भारत का तिरंगा विश्व मंच पर लहरा दिया। इस प्रतियोगिता में भारत सहित बांग्लादेश, माल्दिव्स, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, श्रीलंका जैसे कुल सात देशों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ।यह जीत सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि पूरे देश के सम्मान की जीत रही। झारखंड के देवघर की मिट्टी से निकले और डीएवी के इस होनहार खिलाड़ी ने अपनी मेहनत, जुनून और जीत के जज़्बे से सन 2025 में पावरलिफ्टिंग (बेंच प्रेस) में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए 7 स्टेट गोल्ड मेडल अपने नाम किया था और 3 बार “बेस्ट लिफ्टर” का खिताब जीतकर अपनी बादशाहत कायम की थी। गौर करने वाली बात यह भी है कि झारखंड से यूथ टीम में केवल दो खिलाड़ियों का चयन हुआ था, जिनमें एक नाम आयुष संतोषी का भी शामिल था। इस चयन ने ही यह संकेत दे दिया था कि आयुष कुछ बड़ा करने वाला है और उसने उस भरोसे को सच साबित कर दिखाया। विद्यालय के प्राचार्य मोहम्मद मुस्तफा मजीद ने स्वर्ण पदक विजेता पूर्व छात्र को बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि डीएवी सदैव विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध रहा है और शिक्षा के साथ-साथ खेल एवं अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्टता प्राप्त करने हेतु विद्यार्थियों को निरंतर प्रेरित करता है। इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि छात्र की यह सफलता उसकी कठोर मेहनत, अनुशासन, समर्पण तथा खेल के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है। उसकी यह उपलब्धि विद्यालय के वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी और उन्हें अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु निरंतर प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। विद्यालय के सभी शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर पूर्ववर्ती छात्र तथा उसके अभिभावकों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई प्रेषित की है। विद्यालय परिवार को विश्वास है कि वह भविष्य में भी इसी प्रकार नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर देश का मान बढ़ाता रहेगा। इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनकी माँ कुमारी अलका सोनी और पिता अजय संतोषी का त्याग, संघर्ष और अटूट विश्वास सबसे बड़ी ताकत बना। आयुष के कोच राजेश रंजन, जो कि इस चैंपियनशिप के टीम इंडिया के भी कोच रहे,संजय सिंह और विद्यालय के खेल प्रशिक्षक सत्यवीर यादव और आशुतोष कुमार का मार्गदर्शन उनकी सफलता की मजबूत नींव रहा है। डीएवी जालंधर विश्वविद्यालय के एचओडी यशबीर सिंह ने उनकी उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि आयुष जैसे प्रतिभाशाली छात्र पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं। इसकी जानकारी मीडिया प्रभारी अभिषेक सूर्य ने दी।
पालघर संत हत्याकांड के दोषियों को कब मिलेगी सजा ? पीड़ित परिवारों ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
मुंबई । पालघर संत हत्याकांड में मारे गए संतों एवं चालक के परिजनों ने आज महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने, हत्याकांड के दोषियों को शीघ्र एवं कठोर सजा दिलाने तथा पालघर में दिवंगत संतों का स्मारक बनाने की मांग की। मुख्यमंत्री ने सभी मांगों को गंभीरता से सुनते हुए सकारात्मक आश्वासन दिया। समाजसेवी अरुण शुक्ल के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में चालक तेलगंडे की माता निर्मला तेलंगडे एवं उनके दो अबोध बच्चे, संत सुशील गिरि की बहन सपना मिश्रा तथा सहयोगी बृजेश पांडे शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष घटना से प्रभावित परिवारों की वर्तमान स्थिति और उनकी समस्याओं को विस्तार से रखा।
अरुण शुक्ल ने बताया कि परिजनों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पीड़ित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, मामले के सभी दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा दिलाई जाए तथा पालघर में दिवंगत संतों की स्मृति में एक भव्य स्मारक का निर्माण कराया जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इन सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार ब्रजमोहन पांडे एवं विधायक संजय उपाध्याय के सहयोग के लिए विशेष आभार व्यक्त किया गया। उल्लेखनीय है कि पालघर में संतों और उनके चालक की भीड़ द्वारा की गई हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। घटना के वर्षों बाद भी परिजन न्याय, सम्मान और पुनर्वास की मांग को लेकर प्रयासरत हैं तथा मुख्यमंत्री से हुई यह मुलाकात उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
निगरानी ने एक चौकीदार को 9000 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा, केस से नाम हटाने के नाम पर मांगे थे रुपए, एएसआई पर भी गिर सकती है गाज

गया: गया जिले के बेलागंज थाना क्षेत्र में निगरानी की टीम ने बुधवार को एक चौकीदार को 9000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार चौकीदार की पहचान मनीष कुमार के रूप में की गई है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इस घूसकांड के तार सीधे थाने के एक सहायक पुलिस अवर निरीक्षक (ASI) से जुड़े हुए हैं।

केस से नाम हटाने के एवज में मांगी थी घूस

निगरानी विभाग के डीएसपी समीर चंद्र झा ने मामले की

पुष्टि करते हुए बताया कि बेलागंज थाने में दर्ज कांड संख्या 689/23 एक जमीनी विवाद से जुड़ा हुआ है। इस मामले में परिवादी रविंद्र यादव ग्राम पनारी के बेटे का नाम केस से हटाने के एवज में 12,000 रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। इसमें से 3,000 पहले ही लिए जा चुके थे।

बाकी के 9,000 की रकम देने के लिए परिवादी ने इसकी लिखित शिकायत पटना निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से की थी। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने मामले का गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें घूस मांगे जाने का आरोप पूरी तरह सही पाया गया। आरोप की पुष्टि होने के बाद निगरानी की एक विशेष टीम ने बेलागंज थाना के समीप स्थित अस्पताल परिसर में जाल बिछाया। जैसे ही परिवादी रविंद्र यादव ने चौकीदार मनीष कुमार को केमिकल लगे 9,000 दिए। वैसे ही घात लगाए बैठी विजिलेंस की टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया। अचानक हुई इस छापेमारी से अस्पताल व थाना परिसर में अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। अनुसंधानकर्ता ASI अशोक कुमार के इशारे पर हो रहा था खेल निगरानी डीएसपी समीर चंद्र झा ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि पकड़ा गया चौकीदार मनीष कुमार तो महज एक मोहरा था।

दरअसल, इस जमीन विवाद मामले के अनुसंधानकर्ता बेलागंज थाने के एएसआई अशोक कुमार हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि एएसआई अशोक कुमार के कहने और उनके इशारे पर ही चौकीदार द्वारा पैसे का यह लेन-देन किया जा रहा था। डीएसपी समीर चंद झा जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि मामले के आईओ एएसआई अशोक कुमार के कहने पर ही चौकीदार पैसे ले रहा था। इस पूरे मामले में सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। आरोपी चौकीदार को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पटना ले जाया जा रहा है। इस मामले में संलिप्त और दोषियों को खिलाफ भी विधि सम्मत सख्त कार्रवाई की जाएगी.

सिपाही भर्ती परीक्षा का आज आखिरी दिन
*त्रिस्तरीय चेकिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद परीक्षार्थियों को प्रवेश

गोंडा।उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा जिले के 15 परीक्षा केंद्रों पर आज बुधवार को यूपी पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा का तीसरा और अंतिम दिन है।आज आखिरी दिन होने के कारण परीक्षा केंद्रों के बाहर परीक्षार्थियों की भारी भीड़ देखी जा रही है।परीक्षा देने के लिए परीक्षार्थी आजमगढ़, सुल्तानपुर, महराजगंज,सिद्धार्थनगर, बस्ती, बाराबंकी और अयोध्या सहित कई अन्य जिलों से गोंडा पहुंचे हैं।पुलिसकर्मी और परीक्षा ड्यूटी में लगे अधिकारी कर्मचारी एक एक कर परीक्षार्थीयों की सघन जाँच कर रहे हैं।प्रवेश से पहले परीक्षार्थीयों की त्रिस्तरीय चेकिंग की जा रही है।मेटल डिटेक्टर से परीक्षार्थीयों के पूरे शरीर की जांच की जा रही है,जिसमें कान व जूते भी शामिल हैं।सभी परिक्षार्थी परीक्षार्थीयों का बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य है।बिना बायोमेट्रिक पुष्टि के किसी भी परीक्षार्थी को केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है,जिन परीक्षार्थीयों का बायोमेट्रिक एक बार में नहीं हो पा रहा है,उन्हें दोबारा सत्यापन के बाद ही अंदर जाने दिया जा रहा है।परीक्षार्थी एक हाथ में पेन,प्रवेश पत्र और आधार कार्ड तथा दूसरे हाथ में जूते लेकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर रहे हैं।आज तीसरे दिन के पहली पाली में 15 परीक्षा केंद्रों पर कुल 6024 परीक्षार्थीयों को कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा देनी है।परीक्षार्थी रोडवेज बसों और ट्रेन के माध्यम से यहाँ पहुंचे हैं।जिला मुख्यालय पर बने जिला स्तरीय सीसीटीवी कंट्रोल रूम से सभी परीक्षा केंद्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है।इस परीक्षा के लिए 15 सेक्टर मजिस्ट्रेट,स्टेटिक मजिस्ट्रेट और 1000 से अधिक कक्ष निरीक्षक तैनात किए गए हैं।जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक द्वारा लगातार सभी परीक्षा केंद्रों पर नजर रखी जा रही है।पिछले दो दिन के अंदर जिले में कोई भी नकलची नहीं पकड़ा गया है।
नटवीर बाबा स्थान पर विशाल भंडारे का आयोजन, हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद .
विनोद गुप्ता
हरदोई: ज्येष्ठ (अधिक) मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि एवं मंगलवार के पावन अवसर पर बेनीगंज रेलवे क्रॉसिंग स्थित प्राचीन नटवीर बाबा स्थान पर समाजसेवी पुनीत मिश्रा के नेतृत्व में विशाल पूड़ी-सब्जी भंडारा एवं प्रसाद वितरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र सहित दूर-दराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ नैमिषारण्य स्थित नारदानंद आश्रम शांतिकुटी के प्रमुख श्री शाश्वतानंद  महाराज द्वारा पूजा-अर्चना एवं विधि-विधान के साथ कराया गया। इसके पश्चात भंडारे का वितरण प्रारंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर नैमिषारण्य हनुमानगढ़ी के महंत पवन दास महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि कलयुग में अन्नदान और भंडारा सबसे बड़ा पुण्य कार्य है तथा इससे समाज में सेवा, समर्पण और सद्भावना की भावना विकसित होती है।
कार्यक्रम में 84 कोसी परिक्रमा अध्यक्ष नारायण दास महाराज, वनगढ़ आश्रम महंत संतोष दास खाकी, प्रसिद्ध भजन गायक एवं कथावाचक सुरेश दास शास्त्री तथा अयोध्या धाम से पधारे सत्य सनातन धर्म प्रचारक दिवाकराचार्य जी महाराज ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। संतों एवं धर्माचार्यों ने नैमिषारण्य की महिमा, सनातन संस्कृति एवं धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान किए।
संत-महात्माओं की उपस्थिति से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा धार्मिक आयोजन में बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के विख्यात समाजसेवी राजवर्धन सिंह 'राजू', समाजवादी पार्टी के नेता छत्रपाल 'छत्तर', समाजसेवी विशाल गुप्ता (टड़ियावां), कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अंशू अवस्थी, वन क्षेत्राधिकारी कछौना विनय कुमार सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने पहुंचकर आयोजन की सराहना की और अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
नगर क्षेत्र से राजीव रंजन त्रिपाठी, शेष कुमार मिश्रा सहित अनेक सम्मानित नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं धर्मप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
भंडारे के सफल आयोजन पर समाजसेवी पुनीत मिश्रा ने सभी संत-महात्माओं, अतिथियों, सहयोगियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज सेवा और धर्म सेवा के ऐसे आयोजन आगे भी निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे।
प्राकृतिक हीरा, धरती माता के अमर प्रेम का अनमोल उपहार
– संजय जीवन लाल शाह

प्राकृतिक हीरा केवल एक रत्न नहीं, बल्कि प्रकृति की करोड़ों वर्षों की साधना का परिणाम और धरती माता के अमर प्रेम का जीवंत प्रतीक है। इसकी अनुपम चमक, दुर्लभता, शाश्वतता और अद्वितीय सौंदर्य ने इसे सदियों से प्रेम, विश्वास, समर्पण, शक्ति और वैभव का सर्वोच्च प्रतीक बनाया है। यही कारण है कि प्राकृतिक हीरा आज भी दुनिया भर में प्रेम की सबसे सुंदर और सबसे मूल्यवान अभिव्यक्ति माना जाता है। कहा जाता है कि कुछ उपहार समय के साथ पुराने हो जाते हैं, लेकिन प्राकृतिक हीरा ऐसा उपहार है जिसकी चमक समय के साथ और अधिक निखरती जाती है। जब कोई व्यक्ति अपनी प्रिय को प्राकृतिक हीरे का उपहार देता है, तो वह केवल एक आभूषण नहीं देता, बल्कि अपने अटूट प्रेम, सम्मान, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने का वचन सौंपता है। इसी कारण प्राकृतिक हीरे को दुनिया भर में “अल्टीमेट गिफ्ट ऑफ लव” की संज्ञा दी गई है। ‘डायमंड’ शब्द ग्रीक भाषा के शब्द ‘एडामस’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है—अजेय और अविनाशी। यह नाम हीरे के गुणों का सटीक परिचय देता है। प्रेम की तरह ही हीरा भी अटूट, अमर और समय की हर कसौटी पर खरा उतरने वाला माना जाता है। इतिहास साक्षी है कि इस अद्भुत रत्न को प्राप्त करने के लिए अनेक राजाओं और साम्राज्यों ने संघर्ष किए, युद्ध लड़े और इसे अपने गौरव का प्रतीक बनाया। भारत को प्राकृतिक हीरों की जन्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है। हजारों वर्ष पूर्व विश्व के प्रथम हीरे भारत की धरती से प्राप्त हुए थे। गोलकुंडा की खदानों से निकले हीरों ने विश्व को चमत्कृत कर दिया था। विश्वविख्यात कोहिनूर, होप डायमंड और अनेक ऐतिहासिक हीरे भारत की गौरवशाली विरासत का हिस्सा रहे हैं। जब दुनिया के अधिकांश देशों में हीरे के बारे में जानकारी भी नहीं थी, तब भारतीय राजघरानों की रानियां और राजकुमारियां हीरों से सुसज्जित मुकुट, हार, बाजूबंद, कंगन और अंगूठियां धारण करती थीं। निजाम, गायकवाड़, सिंधिया और अन्य भारतीय राजवंशों के खजाने प्राकृतिक हीरों की अद्वितीय संपदा के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध थे। भारतीय संस्कृति में हीरे को केवल संपत्ति नहीं, बल्कि सौभाग्य, समृद्धि और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना गया है।
विश्व की विभिन्न सभ्यताओं में भी प्राकृतिक हीरे को विशेष सम्मान प्राप्त हुआ है। यूनानियों का विश्वास था कि हीरे देवताओं के आंसुओं से बने हैं, जबकि प्राचीन रोमन उन्हें टूटते तारों के टुकड़े मानते थे। मध्यकालीन यूरोप में हीरे को साहस, सुरक्षा और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता था। इटली में इसे पति-पत्नी के मध्य प्रेम और सामंजस्य को सुदृढ़ करने वाला रत्न माना गया। सगाई की अंगूठी में हीरा जड़ने की परंपरा भी प्रेम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। वर्ष 1477 में ऑस्ट्रिया के आर्चड्यूक मैक्सिमिलियन ने मैरी ऑफ बरगंडी को हीरे की अंगूठी भेंट की थी। इसके बाद हीरे की अंगूठी प्रेम, प्रतिबद्धता और वैवाहिक बंधन का वैश्विक प्रतीक बन गई। आज भी विश्वभर में लाखों युगल अपने जीवन की नई शुरुआत प्राकृतिक हीरे की अंगूठी के साथ करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी प्राकृतिक हीरा प्रकृति का अद्भुत चमत्कार है। यह धरती की गहराइयों में लगभग 150 से 200 किलोमीटर नीचे, अत्यधिक तापमान और दबाव के बीच करोड़ों वर्षों में निर्मित होता है। प्रकृति की इस लंबी और अद्भुत प्रक्रिया के कारण प्रत्येक प्राकृतिक हीरा अद्वितीय होता है। कोई भी दो प्राकृतिक हीरे पूरी तरह समान नहीं होते। प्रत्येक हीरा अपनी अलग पहचान और विशिष्टता लिए होता है, मानो उस पर स्वयं प्रकृति के हस्ताक्षर अंकित हों।
प्राकृतिक हीरे की यात्रा भी उसकी चमक जितनी ही प्रेरणादायक होती है। धरती की गहराइयों से निकलकर वह खनिकों, कारीगरों, डिजाइनरों और ज्वेलरी विशेषज्ञों के कुशल हाथों से गुजरता है। अनगिनत घंटों की मेहनत और कलात्मकता के बाद वह एक शानदार आभूषण का रूप धारण करता है, जो किसी के जीवन की सबसे यादगार स्मृति बन जाता है। आज के आधुनिक युग में भी प्राकृतिक हीरा केवल फैशन का हिस्सा नहीं है, बल्कि भावनाओं, उपलब्धियों और जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी है। सगाई, विवाह, वर्षगांठ, सफलता, मातृत्व अथवा किसी विशेष उपलब्धि के अवसर पर दिया गया प्राकृतिक हीरा जीवनभर की यादों को संजोए रखता है। ज्वैल मेकर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय जीवनलाल शाह के अनुसार, “प्राकृतिक हीरा हमें यह संदेश देता है कि वास्तविक मूल्य समय, धैर्य, समर्पण और प्रकृति की अनमोल रचना में निहित होता है। करोड़ों वर्षों में निर्मित यह रत्न प्रेम, निष्ठा और स्थायित्व का जीवंत प्रतीक है।”
जब तक संसार में प्रेम, विश्वास, सौंदर्य और समर्पण का अस्तित्व रहेगा, तब तक प्राकृतिक हीरे की दिव्य चमक मानव हृदयों को आलोकित करती रहेगी। वास्तव में, प्राकृतिक हीरा केवल एक रत्न नहीं, बल्कि धरती माता द्वारा मानवता को दिया गया अमर प्रेम का अनमोल उपहार है—एक ऐसा उपहार जो पीढ़ियों तक रिश्तों, भावनाओं और स्मृतियों को जीवंत बनाए रखता है। यही कारण है कि प्राकृतिक हीरा सदैव प्रेम की सबसे सुंदर, सबसे शुद्ध और सबसे शाश्वत अभिव्यक्ति बना रहेगा।
पीजीआई युवती लापता मामला: धर्मांतरण और सीरिया ले जाने के दावों पर पुलिस का स्पष्टीकरण, जांच जारी
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र से एक युवती के लापता होने के मामले में सोशल मीडिया पर प्रसारित धर्मांतरण और युवती को सीरिया ले जाने के आरोपों को लेकर पुलिस ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष और गहनता से की जा रही है तथा अब तक की जांच में धर्मांतरण और सीरिया ले जाने संबंधी दावों की पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस द्वारा जारी बयान के अनुसार थाना पीजीआई में प्राप्त तहरीर के आधार पर 22 मई 2026 को मुकदमा अपराध संख्या 280/2026, धारा 87 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह मुकदमा युवती के लापता होने के संबंध में पंजीकृत किया गया है।

पुलिस ने बताया कि युवती की सकुशल बरामदगी और नामजद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए चार विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है। इसके अलावा जोन दक्षिणी की सर्विलांस टीम को भी जांच में लगाया गया है। पुलिस टीमें लगातार संभावित स्थानों पर दबिश दे रही हैं और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर युवती और आरोपी की तलाश में जुटी हैं।

मामले को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर यह दावा किया जा रहा था कि युवती का धर्मांतरण कराया गया है और उसे सीरिया ले जाया गया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि पीड़ित पक्ष द्वारा दी गई मूल तहरीर में धर्मांतरण संबंधी किसी भी आरोप का उल्लेख नहीं किया गया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार सोशल मीडिया पर प्रसारित धर्मांतरण संबंधी दावों की भी जांच की जा रही है, लेकिन अब तक की विवेचना में ऐसे किसी आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। इसी तरह युवती को सीरिया ले जाने की बात भी जांच में सही नहीं पाई गई है।

जांच के दौरान पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि लापता युवती हिंदू धर्म से संबंधित है, जबकि नामजद आरोपी मुस्लिम समुदाय से जुड़ा है। साथ ही यह तथ्य भी सामने आया है कि दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे और उनके बीच पूर्व से बातचीत होती थी। पुलिस इस पहलू को भी जांच का हिस्सा बनाकर तथ्यों का सत्यापन कर रही है।

पुलिस का कहना है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। जांच अभी जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें तथा किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में जो भी तथ्य जांच के दौरान सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता युवती की सकुशल बरामदगी और नामजद आरोपी की गिरफ्तारी है। इसके लिए पुलिस और सर्विलांस टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं तथा मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।
मानवता की मिसाल बनी महिगवां पुलिस, भटके हुए युवक को सकुशल परिजनों से मिलाया
लखनऊ। पुलिस की संवेदनशीलता और जनसेवा का एक सराहनीय उदाहरण महिगवां थाना क्षेत्र में देखने को मिला, जहां रात्रि गश्त के दौरान भटके हुए एक मंदबुद्धि युवक को पुलिस ने सुरक्षित संरक्षण में लेकर उसके परिजनों से मिलाया। पुलिस की तत्परता और मानवीय व्यवहार के चलते चिंतित परिवार को बड़ी राहत मिली।

जानकारी के अनुसार 8/9 जून 2026 की रात थाना महिगवां पुलिस टीम क्षेत्र में गश्त और भ्रमण पर थी। इसी दौरान पुलिसकर्मियों की नजर एक युवक पर पड़ी, जो संदिग्ध अवस्था में इधर-उधर भटकता हुआ दिखाई दिया। पुलिस टीम ने उसे रोककर पूछताछ की तो उसने अपना नाम आशीष शर्मा पुत्र वीरपाल शर्मा, निवासी वेली सिटी, इज्जतनगर, जनपद बरेली बताया।

पूछताछ के दौरान युवक का व्यवहार सामान्य नहीं लगा और वह अपने परिजनों के बारे में स्पष्ट जानकारी देने में असमर्थ था। बातचीत में उसने बताया कि वह उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा देने के लिए 7 जून को लखनऊ आया था, लेकिन रास्ता भटक जाने के कारण घर वापस नहीं जा सका।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महिगवां पुलिस ने युवक को अपने संरक्षण में लिया और उसे भोजन एवं जलपान उपलब्ध कराया। इसके बाद उसे सुरक्षित रूप से थाने लाया गया, जहां उससे शांतिपूर्वक और विस्तार से पूछताछ की गई।

पूछताछ के दौरान युवक ने अपने मामा कृष्ण पाल शर्मा का नाम और एक मोबाइल नंबर बताया। पुलिस ने तत्काल उस नंबर पर संपर्क किया। बातचीत के दौरान युवक के पिता वीरपाल शर्मा ने पुष्टि की कि आशीष उनका पुत्र है, जो उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा देने लखनऊ गया था और वापस घर नहीं लौटा था। परिवार पिछले कई दिनों से उसकी तलाश कर रहा था और काफी चिंतित था।

महिगवां पुलिस ने युवक के पिता को जानकारी दी कि उनका बेटा पूरी तरह सुरक्षित है और थाना महिगवां में मौजूद है। सूचना मिलते ही परिजन थाने पहुंचे। आवश्यक कानूनी और औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने आशीष शर्मा को सकुशल उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया।

अपने बेटे को सुरक्षित पाकर परिजनों की आंखें नम हो गईं और उन्होंने महिगवां पुलिस की तत्परता, संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार के लिए आभार व्यक्त किया।

इस सराहनीय कार्यवाही में थाना महिगवां के थानाध्यक्ष राधे श्याम मौर्य, उपनिरीक्षक सतीश सिंह, उपनिरीक्षक अमित सिंह, कांस्टेबल लाल बहादुर और अरविंद कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

महिगवां पुलिस की यह पहल न केवल कानून-व्यवस्था के प्रति उसकी जिम्मेदारी को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि पुलिस समाज में जरूरतमंद लोगों के लिए एक भरोसेमंद सहारा बनकर खड़ी है। मानवता और जनसेवा का यह उदाहरण लोगों के बीच पुलिस की सकारात्मक छवि को और मजबूत करता है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश
*जिलाधिकारी ने नगमालपुर आंगनबाड़ी केंद्र पर टीकाकरण सत्र का किया आकस्मिक निरीक्षण*

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने बुधवार को विकास खंड क्षेत्र अभोली के आंगनबाड़ी केंद्र नगमालपुर में संचालित टीकाकरण सत्र का आकस्मिक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान केंद्र पर एएनएम एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री उपस्थित मिलीं तथा टीकाकरण संबंधी अभिलेखों का अवलोकन किया गया।
           निरीक्षण के दौरान एएनएम एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री द्वारा जिलाधिकारी को अवगत कराया गया कि ग्राम पंचायत में सभी 16 गर्भवती महिलाओं का निर्धारित टीकाकरण पूर्ण कराया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 52 बच्चों का नियमित टीकाकरण भी संपन्न कराया गया है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत में एक बच्चा गंभीर रूप से अस्वस्थ है, जिसका उपचार चिकित्सकीय देखरेख में कराया जा रहा है।
           जिलाधिकारी ने टीकाकरण कार्य की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के शत-प्रतिशत टीकाकरण तथा नियमित स्वास्थ्य निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान केंद्र पर विद्युत व्यवस्था उपलब्ध न होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देशित किया कि जनपद के सभी विकास खंडों के बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) से दो दिवस के भीतर आंगनबाड़ी केंद्रों की विद्युत व्यवस्था संबंधी विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त कर प्रस्तुत की जाए।
            उन्होंने सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर शीघ्र विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए कहा कि केंद्रों का संचालन सुव्यवस्थित, स्वच्छ एवं बाल हितैषी वातावरण में सुनिश्चित किया जाए। साथ ही बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं की नियमित निगरानी करने तथा शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर बल दिया।
         जिलाधिकारी ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बाल एवं मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला हैं। अतः इनके संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चक, चिकित्सा अधीक्षक अभोली डॉक्टर शुभांकर श्रीवास्तव, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी अनिल सिंह, अपर संख्या अधिकारी नीरव सिंह एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
कन्नौज में पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा-2026 का डीएम-एसपी ने लिया जायजा

पंकज कुमार श्रीवास्यव


कन्नौज। पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा-2026 को सकुशल, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री एवं पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने परीक्षा के लिए स्थापित कंट्रोल रूम तथा विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कंट्रोल रूम में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों, संचार व्यवस्था, परीक्षा केंद्रों से प्राप्त होने वाली सूचनाओं की निगरानी प्रणाली तथा परीक्षा संचालन संबंधी तैयारियों का गहन अवलोकन किया। उन्होंने सुरक्षा एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए की गई व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने परीक्षा केंद्रों पर तैनात मजिस्ट्रेटों, पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि परीक्षा पूरी निष्पक्षता और शुचिता के साथ संपन्न कराई जाए। साथ ही परीक्षा केंद्रों की सतत निगरानी बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता, नकल, संदिग्ध गतिविधि या परीक्षा की गोपनीयता भंग करने के प्रयास की सूचना तत्काल उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
अधिकारियों ने अभ्यर्थियों के प्रवेश, पहचान सत्यापन, सुरक्षा जांच, यातायात प्रबंधन एवं कानून-व्यवस्था संबंधी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर भी जोर दिया, ताकि परीक्षा शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित वातावरण में संपन्न हो सके। इसके अलावा परीक्षा के दौरान पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती कर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

जनपद प्रशासन एवं पुलिस विभाग ने पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा-2026 को सकुशल, निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाने का दावा किया है।
देवघर-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद डीएवी भंडारकोला के छात्र आयुष संतोषी का विद्यालय में किया गया सम्मान।
देवघर: के गीता देवी डीएवी पब्लिक स्कूल भंडारकोला, देवघर के पूर्ववर्ती छात्र एवं वर्तमान में डीएवी यूनिवर्सिटी, जालंधर के छात्र आयुष संतोषी ने श्रीलंका में आयोजित साउथ एशियन चैंपियनशिप में गोल शॉट बॉल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर भारत का तिरंगा विश्व मंच पर लहरा दिया। इस प्रतियोगिता में भारत सहित बांग्लादेश, माल्दिव्स, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, श्रीलंका जैसे कुल सात देशों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ।यह जीत सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि पूरे देश के सम्मान की जीत रही। झारखंड के देवघर की मिट्टी से निकले और डीएवी के इस होनहार खिलाड़ी ने अपनी मेहनत, जुनून और जीत के जज़्बे से सन 2025 में पावरलिफ्टिंग (बेंच प्रेस) में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए 7 स्टेट गोल्ड मेडल अपने नाम किया था और 3 बार “बेस्ट लिफ्टर” का खिताब जीतकर अपनी बादशाहत कायम की थी। गौर करने वाली बात यह भी है कि झारखंड से यूथ टीम में केवल दो खिलाड़ियों का चयन हुआ था, जिनमें एक नाम आयुष संतोषी का भी शामिल था। इस चयन ने ही यह संकेत दे दिया था कि आयुष कुछ बड़ा करने वाला है और उसने उस भरोसे को सच साबित कर दिखाया। विद्यालय के प्राचार्य मोहम्मद मुस्तफा मजीद ने स्वर्ण पदक विजेता पूर्व छात्र को बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि डीएवी सदैव विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध रहा है और शिक्षा के साथ-साथ खेल एवं अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्टता प्राप्त करने हेतु विद्यार्थियों को निरंतर प्रेरित करता है। इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि छात्र की यह सफलता उसकी कठोर मेहनत, अनुशासन, समर्पण तथा खेल के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है। उसकी यह उपलब्धि विद्यालय के वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी और उन्हें अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु निरंतर प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करेगी। विद्यालय के सभी शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर पूर्ववर्ती छात्र तथा उसके अभिभावकों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई प्रेषित की है। विद्यालय परिवार को विश्वास है कि वह भविष्य में भी इसी प्रकार नई ऊँचाइयों को प्राप्त कर देश का मान बढ़ाता रहेगा। इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनकी माँ कुमारी अलका सोनी और पिता अजय संतोषी का त्याग, संघर्ष और अटूट विश्वास सबसे बड़ी ताकत बना। आयुष के कोच राजेश रंजन, जो कि इस चैंपियनशिप के टीम इंडिया के भी कोच रहे,संजय सिंह और विद्यालय के खेल प्रशिक्षक सत्यवीर यादव और आशुतोष कुमार का मार्गदर्शन उनकी सफलता की मजबूत नींव रहा है। डीएवी जालंधर विश्वविद्यालय के एचओडी यशबीर सिंह ने उनकी उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि आयुष जैसे प्रतिभाशाली छात्र पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं। इसकी जानकारी मीडिया प्रभारी अभिषेक सूर्य ने दी।
पालघर संत हत्याकांड के दोषियों को कब मिलेगी सजा ? पीड़ित परिवारों ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
मुंबई । पालघर संत हत्याकांड में मारे गए संतों एवं चालक के परिजनों ने आज महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने, हत्याकांड के दोषियों को शीघ्र एवं कठोर सजा दिलाने तथा पालघर में दिवंगत संतों का स्मारक बनाने की मांग की। मुख्यमंत्री ने सभी मांगों को गंभीरता से सुनते हुए सकारात्मक आश्वासन दिया। समाजसेवी अरुण शुक्ल के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में चालक तेलगंडे की माता निर्मला तेलंगडे एवं उनके दो अबोध बच्चे, संत सुशील गिरि की बहन सपना मिश्रा तथा सहयोगी बृजेश पांडे शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष घटना से प्रभावित परिवारों की वर्तमान स्थिति और उनकी समस्याओं को विस्तार से रखा।
अरुण शुक्ल ने बताया कि परिजनों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पीड़ित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, मामले के सभी दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा दिलाई जाए तथा पालघर में दिवंगत संतों की स्मृति में एक भव्य स्मारक का निर्माण कराया जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इन सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार ब्रजमोहन पांडे एवं विधायक संजय उपाध्याय के सहयोग के लिए विशेष आभार व्यक्त किया गया। उल्लेखनीय है कि पालघर में संतों और उनके चालक की भीड़ द्वारा की गई हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। घटना के वर्षों बाद भी परिजन न्याय, सम्मान और पुनर्वास की मांग को लेकर प्रयासरत हैं तथा मुख्यमंत्री से हुई यह मुलाकात उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
निगरानी ने एक चौकीदार को 9000 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा, केस से नाम हटाने के नाम पर मांगे थे रुपए, एएसआई पर भी गिर सकती है गाज

गया: गया जिले के बेलागंज थाना क्षेत्र में निगरानी की टीम ने बुधवार को एक चौकीदार को 9000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार चौकीदार की पहचान मनीष कुमार के रूप में की गई है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इस घूसकांड के तार सीधे थाने के एक सहायक पुलिस अवर निरीक्षक (ASI) से जुड़े हुए हैं।

केस से नाम हटाने के एवज में मांगी थी घूस

निगरानी विभाग के डीएसपी समीर चंद्र झा ने मामले की

पुष्टि करते हुए बताया कि बेलागंज थाने में दर्ज कांड संख्या 689/23 एक जमीनी विवाद से जुड़ा हुआ है। इस मामले में परिवादी रविंद्र यादव ग्राम पनारी के बेटे का नाम केस से हटाने के एवज में 12,000 रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। इसमें से 3,000 पहले ही लिए जा चुके थे।

बाकी के 9,000 की रकम देने के लिए परिवादी ने इसकी लिखित शिकायत पटना निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से की थी। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने मामले का गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें घूस मांगे जाने का आरोप पूरी तरह सही पाया गया। आरोप की पुष्टि होने के बाद निगरानी की एक विशेष टीम ने बेलागंज थाना के समीप स्थित अस्पताल परिसर में जाल बिछाया। जैसे ही परिवादी रविंद्र यादव ने चौकीदार मनीष कुमार को केमिकल लगे 9,000 दिए। वैसे ही घात लगाए बैठी विजिलेंस की टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया। अचानक हुई इस छापेमारी से अस्पताल व थाना परिसर में अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। अनुसंधानकर्ता ASI अशोक कुमार के इशारे पर हो रहा था खेल निगरानी डीएसपी समीर चंद्र झा ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि पकड़ा गया चौकीदार मनीष कुमार तो महज एक मोहरा था।

दरअसल, इस जमीन विवाद मामले के अनुसंधानकर्ता बेलागंज थाने के एएसआई अशोक कुमार हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि एएसआई अशोक कुमार के कहने और उनके इशारे पर ही चौकीदार द्वारा पैसे का यह लेन-देन किया जा रहा था। डीएसपी समीर चंद झा जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि मामले के आईओ एएसआई अशोक कुमार के कहने पर ही चौकीदार पैसे ले रहा था। इस पूरे मामले में सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। आरोपी चौकीदार को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पटना ले जाया जा रहा है। इस मामले में संलिप्त और दोषियों को खिलाफ भी विधि सम्मत सख्त कार्रवाई की जाएगी.

सिपाही भर्ती परीक्षा का आज आखिरी दिन
*त्रिस्तरीय चेकिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद परीक्षार्थियों को प्रवेश

गोंडा।उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा जिले के 15 परीक्षा केंद्रों पर आज बुधवार को यूपी पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा का तीसरा और अंतिम दिन है।आज आखिरी दिन होने के कारण परीक्षा केंद्रों के बाहर परीक्षार्थियों की भारी भीड़ देखी जा रही है।परीक्षा देने के लिए परीक्षार्थी आजमगढ़, सुल्तानपुर, महराजगंज,सिद्धार्थनगर, बस्ती, बाराबंकी और अयोध्या सहित कई अन्य जिलों से गोंडा पहुंचे हैं।पुलिसकर्मी और परीक्षा ड्यूटी में लगे अधिकारी कर्मचारी एक एक कर परीक्षार्थीयों की सघन जाँच कर रहे हैं।प्रवेश से पहले परीक्षार्थीयों की त्रिस्तरीय चेकिंग की जा रही है।मेटल डिटेक्टर से परीक्षार्थीयों के पूरे शरीर की जांच की जा रही है,जिसमें कान व जूते भी शामिल हैं।सभी परिक्षार्थी परीक्षार्थीयों का बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य है।बिना बायोमेट्रिक पुष्टि के किसी भी परीक्षार्थी को केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है,जिन परीक्षार्थीयों का बायोमेट्रिक एक बार में नहीं हो पा रहा है,उन्हें दोबारा सत्यापन के बाद ही अंदर जाने दिया जा रहा है।परीक्षार्थी एक हाथ में पेन,प्रवेश पत्र और आधार कार्ड तथा दूसरे हाथ में जूते लेकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर रहे हैं।आज तीसरे दिन के पहली पाली में 15 परीक्षा केंद्रों पर कुल 6024 परीक्षार्थीयों को कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा देनी है।परीक्षार्थी रोडवेज बसों और ट्रेन के माध्यम से यहाँ पहुंचे हैं।जिला मुख्यालय पर बने जिला स्तरीय सीसीटीवी कंट्रोल रूम से सभी परीक्षा केंद्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है।इस परीक्षा के लिए 15 सेक्टर मजिस्ट्रेट,स्टेटिक मजिस्ट्रेट और 1000 से अधिक कक्ष निरीक्षक तैनात किए गए हैं।जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक द्वारा लगातार सभी परीक्षा केंद्रों पर नजर रखी जा रही है।पिछले दो दिन के अंदर जिले में कोई भी नकलची नहीं पकड़ा गया है।
नटवीर बाबा स्थान पर विशाल भंडारे का आयोजन, हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद .
विनोद गुप्ता
हरदोई: ज्येष्ठ (अधिक) मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि एवं मंगलवार के पावन अवसर पर बेनीगंज रेलवे क्रॉसिंग स्थित प्राचीन नटवीर बाबा स्थान पर समाजसेवी पुनीत मिश्रा के नेतृत्व में विशाल पूड़ी-सब्जी भंडारा एवं प्रसाद वितरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र सहित दूर-दराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ नैमिषारण्य स्थित नारदानंद आश्रम शांतिकुटी के प्रमुख श्री शाश्वतानंद  महाराज द्वारा पूजा-अर्चना एवं विधि-विधान के साथ कराया गया। इसके पश्चात भंडारे का वितरण प्रारंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर नैमिषारण्य हनुमानगढ़ी के महंत पवन दास महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि कलयुग में अन्नदान और भंडारा सबसे बड़ा पुण्य कार्य है तथा इससे समाज में सेवा, समर्पण और सद्भावना की भावना विकसित होती है।
कार्यक्रम में 84 कोसी परिक्रमा अध्यक्ष नारायण दास महाराज, वनगढ़ आश्रम महंत संतोष दास खाकी, प्रसिद्ध भजन गायक एवं कथावाचक सुरेश दास शास्त्री तथा अयोध्या धाम से पधारे सत्य सनातन धर्म प्रचारक दिवाकराचार्य जी महाराज ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। संतों एवं धर्माचार्यों ने नैमिषारण्य की महिमा, सनातन संस्कृति एवं धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान किए।
संत-महात्माओं की उपस्थिति से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा धार्मिक आयोजन में बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के विख्यात समाजसेवी राजवर्धन सिंह 'राजू', समाजवादी पार्टी के नेता छत्रपाल 'छत्तर', समाजसेवी विशाल गुप्ता (टड़ियावां), कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अंशू अवस्थी, वन क्षेत्राधिकारी कछौना विनय कुमार सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने पहुंचकर आयोजन की सराहना की और अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
नगर क्षेत्र से राजीव रंजन त्रिपाठी, शेष कुमार मिश्रा सहित अनेक सम्मानित नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं धर्मप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
भंडारे के सफल आयोजन पर समाजसेवी पुनीत मिश्रा ने सभी संत-महात्माओं, अतिथियों, सहयोगियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज सेवा और धर्म सेवा के ऐसे आयोजन आगे भी निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे।
प्राकृतिक हीरा, धरती माता के अमर प्रेम का अनमोल उपहार
– संजय जीवन लाल शाह

प्राकृतिक हीरा केवल एक रत्न नहीं, बल्कि प्रकृति की करोड़ों वर्षों की साधना का परिणाम और धरती माता के अमर प्रेम का जीवंत प्रतीक है। इसकी अनुपम चमक, दुर्लभता, शाश्वतता और अद्वितीय सौंदर्य ने इसे सदियों से प्रेम, विश्वास, समर्पण, शक्ति और वैभव का सर्वोच्च प्रतीक बनाया है। यही कारण है कि प्राकृतिक हीरा आज भी दुनिया भर में प्रेम की सबसे सुंदर और सबसे मूल्यवान अभिव्यक्ति माना जाता है। कहा जाता है कि कुछ उपहार समय के साथ पुराने हो जाते हैं, लेकिन प्राकृतिक हीरा ऐसा उपहार है जिसकी चमक समय के साथ और अधिक निखरती जाती है। जब कोई व्यक्ति अपनी प्रिय को प्राकृतिक हीरे का उपहार देता है, तो वह केवल एक आभूषण नहीं देता, बल्कि अपने अटूट प्रेम, सम्मान, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने का वचन सौंपता है। इसी कारण प्राकृतिक हीरे को दुनिया भर में “अल्टीमेट गिफ्ट ऑफ लव” की संज्ञा दी गई है। ‘डायमंड’ शब्द ग्रीक भाषा के शब्द ‘एडामस’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है—अजेय और अविनाशी। यह नाम हीरे के गुणों का सटीक परिचय देता है। प्रेम की तरह ही हीरा भी अटूट, अमर और समय की हर कसौटी पर खरा उतरने वाला माना जाता है। इतिहास साक्षी है कि इस अद्भुत रत्न को प्राप्त करने के लिए अनेक राजाओं और साम्राज्यों ने संघर्ष किए, युद्ध लड़े और इसे अपने गौरव का प्रतीक बनाया। भारत को प्राकृतिक हीरों की जन्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है। हजारों वर्ष पूर्व विश्व के प्रथम हीरे भारत की धरती से प्राप्त हुए थे। गोलकुंडा की खदानों से निकले हीरों ने विश्व को चमत्कृत कर दिया था। विश्वविख्यात कोहिनूर, होप डायमंड और अनेक ऐतिहासिक हीरे भारत की गौरवशाली विरासत का हिस्सा रहे हैं। जब दुनिया के अधिकांश देशों में हीरे के बारे में जानकारी भी नहीं थी, तब भारतीय राजघरानों की रानियां और राजकुमारियां हीरों से सुसज्जित मुकुट, हार, बाजूबंद, कंगन और अंगूठियां धारण करती थीं। निजाम, गायकवाड़, सिंधिया और अन्य भारतीय राजवंशों के खजाने प्राकृतिक हीरों की अद्वितीय संपदा के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध थे। भारतीय संस्कृति में हीरे को केवल संपत्ति नहीं, बल्कि सौभाग्य, समृद्धि और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना गया है।
विश्व की विभिन्न सभ्यताओं में भी प्राकृतिक हीरे को विशेष सम्मान प्राप्त हुआ है। यूनानियों का विश्वास था कि हीरे देवताओं के आंसुओं से बने हैं, जबकि प्राचीन रोमन उन्हें टूटते तारों के टुकड़े मानते थे। मध्यकालीन यूरोप में हीरे को साहस, सुरक्षा और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता था। इटली में इसे पति-पत्नी के मध्य प्रेम और सामंजस्य को सुदृढ़ करने वाला रत्न माना गया। सगाई की अंगूठी में हीरा जड़ने की परंपरा भी प्रेम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। वर्ष 1477 में ऑस्ट्रिया के आर्चड्यूक मैक्सिमिलियन ने मैरी ऑफ बरगंडी को हीरे की अंगूठी भेंट की थी। इसके बाद हीरे की अंगूठी प्रेम, प्रतिबद्धता और वैवाहिक बंधन का वैश्विक प्रतीक बन गई। आज भी विश्वभर में लाखों युगल अपने जीवन की नई शुरुआत प्राकृतिक हीरे की अंगूठी के साथ करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी प्राकृतिक हीरा प्रकृति का अद्भुत चमत्कार है। यह धरती की गहराइयों में लगभग 150 से 200 किलोमीटर नीचे, अत्यधिक तापमान और दबाव के बीच करोड़ों वर्षों में निर्मित होता है। प्रकृति की इस लंबी और अद्भुत प्रक्रिया के कारण प्रत्येक प्राकृतिक हीरा अद्वितीय होता है। कोई भी दो प्राकृतिक हीरे पूरी तरह समान नहीं होते। प्रत्येक हीरा अपनी अलग पहचान और विशिष्टता लिए होता है, मानो उस पर स्वयं प्रकृति के हस्ताक्षर अंकित हों।
प्राकृतिक हीरे की यात्रा भी उसकी चमक जितनी ही प्रेरणादायक होती है। धरती की गहराइयों से निकलकर वह खनिकों, कारीगरों, डिजाइनरों और ज्वेलरी विशेषज्ञों के कुशल हाथों से गुजरता है। अनगिनत घंटों की मेहनत और कलात्मकता के बाद वह एक शानदार आभूषण का रूप धारण करता है, जो किसी के जीवन की सबसे यादगार स्मृति बन जाता है। आज के आधुनिक युग में भी प्राकृतिक हीरा केवल फैशन का हिस्सा नहीं है, बल्कि भावनाओं, उपलब्धियों और जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी है। सगाई, विवाह, वर्षगांठ, सफलता, मातृत्व अथवा किसी विशेष उपलब्धि के अवसर पर दिया गया प्राकृतिक हीरा जीवनभर की यादों को संजोए रखता है। ज्वैल मेकर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय जीवनलाल शाह के अनुसार, “प्राकृतिक हीरा हमें यह संदेश देता है कि वास्तविक मूल्य समय, धैर्य, समर्पण और प्रकृति की अनमोल रचना में निहित होता है। करोड़ों वर्षों में निर्मित यह रत्न प्रेम, निष्ठा और स्थायित्व का जीवंत प्रतीक है।”
जब तक संसार में प्रेम, विश्वास, सौंदर्य और समर्पण का अस्तित्व रहेगा, तब तक प्राकृतिक हीरे की दिव्य चमक मानव हृदयों को आलोकित करती रहेगी। वास्तव में, प्राकृतिक हीरा केवल एक रत्न नहीं, बल्कि धरती माता द्वारा मानवता को दिया गया अमर प्रेम का अनमोल उपहार है—एक ऐसा उपहार जो पीढ़ियों तक रिश्तों, भावनाओं और स्मृतियों को जीवंत बनाए रखता है। यही कारण है कि प्राकृतिक हीरा सदैव प्रेम की सबसे सुंदर, सबसे शुद्ध और सबसे शाश्वत अभिव्यक्ति बना रहेगा।
पीजीआई युवती लापता मामला: धर्मांतरण और सीरिया ले जाने के दावों पर पुलिस का स्पष्टीकरण, जांच जारी
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र से एक युवती के लापता होने के मामले में सोशल मीडिया पर प्रसारित धर्मांतरण और युवती को सीरिया ले जाने के आरोपों को लेकर पुलिस ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष और गहनता से की जा रही है तथा अब तक की जांच में धर्मांतरण और सीरिया ले जाने संबंधी दावों की पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस द्वारा जारी बयान के अनुसार थाना पीजीआई में प्राप्त तहरीर के आधार पर 22 मई 2026 को मुकदमा अपराध संख्या 280/2026, धारा 87 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह मुकदमा युवती के लापता होने के संबंध में पंजीकृत किया गया है।

पुलिस ने बताया कि युवती की सकुशल बरामदगी और नामजद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए चार विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है। इसके अलावा जोन दक्षिणी की सर्विलांस टीम को भी जांच में लगाया गया है। पुलिस टीमें लगातार संभावित स्थानों पर दबिश दे रही हैं और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर युवती और आरोपी की तलाश में जुटी हैं।

मामले को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर यह दावा किया जा रहा था कि युवती का धर्मांतरण कराया गया है और उसे सीरिया ले जाया गया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि पीड़ित पक्ष द्वारा दी गई मूल तहरीर में धर्मांतरण संबंधी किसी भी आरोप का उल्लेख नहीं किया गया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार सोशल मीडिया पर प्रसारित धर्मांतरण संबंधी दावों की भी जांच की जा रही है, लेकिन अब तक की विवेचना में ऐसे किसी आरोप की पुष्टि नहीं हुई है। इसी तरह युवती को सीरिया ले जाने की बात भी जांच में सही नहीं पाई गई है।

जांच के दौरान पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि लापता युवती हिंदू धर्म से संबंधित है, जबकि नामजद आरोपी मुस्लिम समुदाय से जुड़ा है। साथ ही यह तथ्य भी सामने आया है कि दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे और उनके बीच पूर्व से बातचीत होती थी। पुलिस इस पहलू को भी जांच का हिस्सा बनाकर तथ्यों का सत्यापन कर रही है।

पुलिस का कहना है कि मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। जांच अभी जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें तथा किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में जो भी तथ्य जांच के दौरान सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता युवती की सकुशल बरामदगी और नामजद आरोपी की गिरफ्तारी है। इसके लिए पुलिस और सर्विलांस टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं तथा मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।
मानवता की मिसाल बनी महिगवां पुलिस, भटके हुए युवक को सकुशल परिजनों से मिलाया
लखनऊ। पुलिस की संवेदनशीलता और जनसेवा का एक सराहनीय उदाहरण महिगवां थाना क्षेत्र में देखने को मिला, जहां रात्रि गश्त के दौरान भटके हुए एक मंदबुद्धि युवक को पुलिस ने सुरक्षित संरक्षण में लेकर उसके परिजनों से मिलाया। पुलिस की तत्परता और मानवीय व्यवहार के चलते चिंतित परिवार को बड़ी राहत मिली।

जानकारी के अनुसार 8/9 जून 2026 की रात थाना महिगवां पुलिस टीम क्षेत्र में गश्त और भ्रमण पर थी। इसी दौरान पुलिसकर्मियों की नजर एक युवक पर पड़ी, जो संदिग्ध अवस्था में इधर-उधर भटकता हुआ दिखाई दिया। पुलिस टीम ने उसे रोककर पूछताछ की तो उसने अपना नाम आशीष शर्मा पुत्र वीरपाल शर्मा, निवासी वेली सिटी, इज्जतनगर, जनपद बरेली बताया।

पूछताछ के दौरान युवक का व्यवहार सामान्य नहीं लगा और वह अपने परिजनों के बारे में स्पष्ट जानकारी देने में असमर्थ था। बातचीत में उसने बताया कि वह उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा देने के लिए 7 जून को लखनऊ आया था, लेकिन रास्ता भटक जाने के कारण घर वापस नहीं जा सका।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महिगवां पुलिस ने युवक को अपने संरक्षण में लिया और उसे भोजन एवं जलपान उपलब्ध कराया। इसके बाद उसे सुरक्षित रूप से थाने लाया गया, जहां उससे शांतिपूर्वक और विस्तार से पूछताछ की गई।

पूछताछ के दौरान युवक ने अपने मामा कृष्ण पाल शर्मा का नाम और एक मोबाइल नंबर बताया। पुलिस ने तत्काल उस नंबर पर संपर्क किया। बातचीत के दौरान युवक के पिता वीरपाल शर्मा ने पुष्टि की कि आशीष उनका पुत्र है, जो उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा देने लखनऊ गया था और वापस घर नहीं लौटा था। परिवार पिछले कई दिनों से उसकी तलाश कर रहा था और काफी चिंतित था।

महिगवां पुलिस ने युवक के पिता को जानकारी दी कि उनका बेटा पूरी तरह सुरक्षित है और थाना महिगवां में मौजूद है। सूचना मिलते ही परिजन थाने पहुंचे। आवश्यक कानूनी और औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने आशीष शर्मा को सकुशल उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया।

अपने बेटे को सुरक्षित पाकर परिजनों की आंखें नम हो गईं और उन्होंने महिगवां पुलिस की तत्परता, संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार के लिए आभार व्यक्त किया।

इस सराहनीय कार्यवाही में थाना महिगवां के थानाध्यक्ष राधे श्याम मौर्य, उपनिरीक्षक सतीश सिंह, उपनिरीक्षक अमित सिंह, कांस्टेबल लाल बहादुर और अरविंद कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

महिगवां पुलिस की यह पहल न केवल कानून-व्यवस्था के प्रति उसकी जिम्मेदारी को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि पुलिस समाज में जरूरतमंद लोगों के लिए एक भरोसेमंद सहारा बनकर खड़ी है। मानवता और जनसेवा का यह उदाहरण लोगों के बीच पुलिस की सकारात्मक छवि को और मजबूत करता है।