लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी कांग्रेस, 125 सांसदों ने किए हस्ताक्षर

संसद के बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी को बोलने न देने के मुद्दे पर हंगामा जारी है। इस बीच कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। इस प्रस्ताव पर अब तक इंडिया गठबंधन के 125 सांसदों ने अपने सिग्नेचर किए हैं।
ओम बिरला को लोकसभा स्पीकर के पद से हटाने की तैयारी को लेकर विपक्ष का सबसे बड़ा दावा है कि संसद की बहसों के दौरान विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया जा रहा है। साथ ही, विपक्षी सांसदों के निलंबन और सत्ता पक्ष के सांसदों के खिलाफ कार्रवाई न होने को लेकर भी नाराजगी है। इसी सिलसिले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दफ्तर में हुई बैठक में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला लिया गया।
कांग्रेस, सपा और डीएमके सांसदों ने किए हस्ताक्षर
सामाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। जानकारी है कि विपक्षी नेता आज संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) के तहत यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस लोकसभा सचिवालय को सौंपेंगे।
अविश्वास प्रस्ताव पर टीएमसी नहीं साथ
इस बीच यह भी साफ हो गया है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) फिलहाल लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में नहीं है। सूत्रों के अनुसार, टीएमसी इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच और चर्चा चाहती है और वह अविश्वास प्रस्ताव पर साइन नहीं करेगी। ऐसे में विपक्ष की एकजुटता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
क्या कहता है संविधान का अनुच्छेद 94?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94(c) के तहत लोकसभा अध्यक्ष को उनके पद से हटाया जा सकता है। इसके लिए किसी भी लोकसभा सदस्य को महासचिव को एक लिखित नोटिस देना होता है। इस नोटिस में स्पीकर को पद से हटाने के इरादे का स्पष्ट जिक्र होना चाहिए। लोकसभा स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाने से पहले कम से कम 14 दिनों का पूर्व नोटिस देना जरूरी होता है। यह समय इसलिए दिया जाता है ताकि सदन और स्पीकर इस पर चर्चा के लिए तैयार हो सकें।
क्या है अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया?
विपक्ष के नोटिस के 14 दिन पूरे होने पर लोकसभास्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सदन में रखा जाता है। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्पीकर सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते लेकिन वे सदन में मौजूद रह सकते हैं और बोल सकते हैं। वहीं, यदि सदन के उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का बहुमत इसके पक्ष में वोट करता है, तो स्पीकर को पद छोड़ना पड़ता है।
3 hours ago
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