महिला आरक्षण पर झारखंड में सियासत तेज: विशेष सत्र बुलाने के लिए मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र।

जैसा कि आपको विदित है कि केन्द्र सरकार द्वारा विगत 16 से 18 अप्रैल, 2026 तक सदन के 3 दिनों का विशेष सत्र आहूत कर देश की आधी आबादी के सशक्तिकरण हेतु 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल' प्रस्तुत किया गया। दुर्भाग्यवश, विपक्ष के साथियों का अपेक्षित सहयोग न मिल पाने के कारण सदन में यह 'बिल' पारित नहीं हो पाया। इस बिल के पारित हो जाने से जहां पूरे देश की आधी आबादी को 2029 से ही प्रतिनिधित्व का ऐतिहासिक अवसर मिलता, वहीं झारखंड प्रदेश में भी 14 लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 21 हो जाती, जिसमें 7 लोकसभा क्षेत्रों में महिला जनप्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। इसी प्रकार विधानसभा सीटों की संख्या 81 से बढ़कर 121 हो जाती, जिसमें 41 विधानसभा क्षेत्रों में महिला जनप्रतिनिधित्व को अवसर मिल पाता।

झारखंड की संस्कृति एवं झारखंडी इतिहास में सदैव महिलाओं को प्रतिनिधित्व सहित सभी प्रकार की निर्णय प्रक्रिया, चाहे वह सामाजिक हो या राजनैतिक में महत्वपूर्ण स्थान और सम्मान दिया है। वीरांगना फूलो-झानो की इस धरती पर निवासरत झारखंड की बहनों की यह आशा है कि मा. मुख्यमंत्री जी, आप स्वयं महिला सशक्तिकरण के सशक्त पैरोकार रहे हैं। अतः इस झारखंड की भूमि पर इतिहास रचने का कार्य करें एवं मा. राज्यपाल की अनुमति से झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र आहूत कराकर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल' को पारित कर केन्द्र सरकार से पुनः इसे सदन में पारित कराने का आग्रह करें। आपके इस ऐतिहासिक कदम से झारखंड की आधी आबादी के लिए बहुप्रतिक्षित न्याय का मार्ग प्रशस्त संभव हो सकेगा।

आशा है कि आप दलगत भावना से ऊपर उठकर इस महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकार के विषय पर गंभीरता से निर्णय लेने का कष्ट करेंगे।

इतने गंभीर विषय के लिए मुख्यमंत्री द्वारा समय नहीं देना दुर्भाग्यपूर्ण : बाबूलाल मरांडी*

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे गंभीर विषय पर वार्तालाप के लिए पार्टी द्वारा हेमंत सोरेन से मिलने के लिए लगातार समय मांगे जाने के बावजूद मुख्यमंत्री द्वारा समय नहीं देने के मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष सत्र बुलाने और इस आशय का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने के लिए उनसे आग्रह करना चाहती थी, बावजूद समय नहीं दिया गया। श्री मरांडी प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बोल रहे थे।

श्री मरांडी ने कहा कि पार्टी के महामंत्री अमर कुमार बाउरी द्वारा 30 अप्रैल से ही मुख्यमंत्री से मिलने का समय लेने का प्रयास किया जा रहा है। प्रयास था कि तीन मई का कोई समय मिल जाए परंतु बड़ा दुर्भाग्य है कि लगातार समय मांगने के बाद भी समय नहीं मिल पाया और ना ही उधर से कोई स्पष्ट उत्तर दिया गया। जबकि पार्टी ने विषय वस्तु पूछने पर भी स्पष्ट रूप से विषय वस्तु के संबंध में स्पष्ट रूप से बता दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री ने समय देना मुनासिब नहीं समझा। इसलिए तय किया गया कि सीएम के पास अगर समय नहीं है उनको एक पत्र लिखकर ही उन्हें सारी बातों से अवगत करा दिया जाए। इसलिए इस विषय पर उन्हें पत्र लिखा गया है।

श्री मरांडी ने कहा कि 16, 17, 18 अप्रैल को भारत सरकार द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सदन में लाया गया था। इससे देश की आधी आबादी काफी प्रसन्न हुई कि लोकसभा और विधानसभा में 33% सीटें उनके लिए आरक्षित होगी। केवल 33% सीट ही रिजर्व नहीं होती बल्कि लोकसभा विधानसभा की सीटें भी उसी अनुपात में बढ़ती। झारखंड के संदर्भ में देखा जाए तो यहां 14 लोकसभा की सीटें बढ़कर 21 हो जाती। जिसमें 7 महिलाओं के लिए रिजर्व होती। इसी प्रकार विधानसभा की सीटें 81 से बढ़कर 121 हो जाती। जिसमें 41 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होती। झारखंड की लगभग सभी सरकारों द्वारा भारत सरकार को संकल्प भेजा गया था कि झारखंड में विधानसभा की सीटें बढ़नी चाहिए। आज सीटें बढ़ती तो और लोगों को भी अवसर मिलता।

श्री मरांडी ने कहा कि उम्मीद थी कि हेमंत सोरेन इन चीजों को समझेंगे और इस बिल का वह समर्थन करेंगे लेकिन उन्होंने इसके विरोध में मतदान किया। इसलिए पार्टी ने तय किया था कि मुख्यमंत्री से मिलकर उनसे पार्टी आग्रह करेगी कि इस मुद्दे पर राज्यपाल की सहमति से एक विशेष सत्र बुलाएं और इस आशय का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजें ताकि फिर से भारत सरकार इस बिल को ला सके। इससे महिलाओं को ही नहीं बल्कि और लोगों को भी उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। प्रेस वार्ता के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री को पार्टी द्वारा लिखे पत्र को भी साझा किया।

इस दौरान प्रेस वार्ता में प्रदेश मीडिया सह प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह एवं प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज भी मौजूद रहे।

*रांची: महाअधिवक्ता राजीव रंजन मिश्रा ने जनगणना-2027 के लिए स्व-गणना पूरी की

श्री राजीव रंजन मिश्रा, महाअधिवक्ता, झारखंड उच्च न्यायालय ने जनगणना-2027 के तहत रविवार को स्व-गणना (self Enumeration) की प्रक्रिया पूरी की।

इस अवसर पर श्री प्रभात कुमार, निदेशक , जनगणना कार्य निदेशालय झारखण्ड, श्री सुशांत गौरव, नगर आयुक्त नगर निगम रांची, डॉ० सत्येन्द्र कुमार गुप्ता संयुक्त निदेशक, श्री शेषनाथ बैठा जिला सांख्यिकी अधिकारी, रांची, श्री ज्ञानचंद्र महतो सहायक निदेशक आदि उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने जनगणना-2027 के लिए स्व-गणना पूरी की, नागरिकों से सक्रिय भागीदारी की अपील

मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार ने जनगणना-2027 के तहत स्व-गणना (self Enumeration) की प्रक्रिया पूरी की। इस अभियान के तहत 01 मई से 15मई तक स्व-गणना कार्य प्रारंभ हो चुका है। इसी क्रम में रविवार को मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार ने स्व-गणना की प्रक्रिया पूरी की।

15 मई के पश्चात मकान सूचीकरण एवं मकान गणना कार्य दिनांक 16 मई से 14 जून 2026 तक पूरे राज्य में किया जाएगा। इस गहन जनगणना अभियान के दौरान घर-घर जाकर प्रगणक से संबद्ध कर्मी डेटा संग्रह करेंगे। सभी जिलों में इस कार्य के लिए प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई है।

इस मौके पर श्री प्रभात कुमार, निदेशक , जनगणना कार्य निदेशालय झारखण्ड, श्री सुशांत गौरव, नगर आयुक्त नगर निगम रांची, डॉ० सत्येन्द्र कुमार गुप्ता संयुक्त निदेशक, श्री शेषनाथ बैठा जिला सांख्यिकी अधिकारी, रांची, श्री ज्ञानचंद्र महतो सहायक निदेशक आदि उपस्थित रहे।

अदब की महफिल, शब्दों के आईने में दिखा 'हमारा समाज' और ‘अर्थबोध'

भायंदर। मीरा रोड (पूर्व) स्थित विरंगुला केंद्र में आयोजित एक भव्य समारोह में कवयित्री एवं लेखिका रीता दास राम की दो नई कृतियों—काव्य संग्रह 'अर्थबोध के सान्निध्य में' और लेख संग्रह 'हमारा समाज और हम' (वैभव प्रकाशन)—का लोकार्पण संपन्न हुआ। जनवादी लेखक संघ, 'अनभै' पत्रिका और स्वर संगम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य जगत की दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की।कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि, आलोचक एवं चिंतक विजय कुमार ने की। उन्होंने लेखिका की रचनात्मक यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि रीता दास की संवेदना का दायरा अत्यंत विस्तृत है। उन्होंने मोहन राकेश के नाटक का संदर्भ देते हुए मार्मिक टिप्पणी की कि एक पुरुष शायद ही कभी स्त्री के मन के उस 'तहखाने' और उसकी पीड़ा को पूरी तरह समझ पाए, जिसे रीता दास ने अपनी कविताओं में अभिव्यक्त किया है।कार्यक्रम का कुशल संचालन कवि रमन मिश्र ने किया, जिनकी प्रस्तुति और विद्वानों के विचारों को सूत्रबद्ध करने की शैली अंत तक श्रोताओं को बांधे रही।काव्य संग्रह 'अर्थबोध के सान्निध्य में' पर बोलते हुए वरिष्ठ कवि हूबनाथ पांडेय ने बताया कि रीता की कविताएं 'देह से उठकर समाज की ओर' बढ़ती हैं और वे एक स्त्री होकर 'मनुष्य की तरह' कविता लिखती हैं। प्रशांत जैन ने शीर्षक की सार्थकता और मुखपृष्ठ की विशिष्टता पर प्रकाश डाला, वहीं संध्या यादव ने कविताओं में मौजूद ज्वलंत सामाजिक चिंताओं को रेखांकित किया। लेख संग्रह 'हमारा समाज और हम' पर अनिल गौड़ की समीक्षा (जिसका पाठ राकेश शर्मा ने किया) के अनुसार, ये लेख समाज की जटिलताओं को परत-दर-परत खोलते हैं। अवधेश राय ने इन लेखों को वर्जनाओं और शोषण के खिलाफ एक 'दस्तावेज़' करार दिया।वरिष्ठ कवि विनोद दास और अनूप सेठी ने कविताओं के सौंदर्य बोध और उसमें छिपे द्वंद्वात्मक रिश्तों की सराहना की। हृदयेश मयंक ने लेखिका की बहुआयामी रचनात्मकता को सराहा, जबकि शैलेश सिंह ने उन्हें अन्याय के विरुद्ध सजगता से खड़ी होने वाली रचनाकार बताया। अभिलाष अवस्थी ने भी लेखिका के रचना-प्रयासों पर अपना दृष्टिकोण साझा किया। समारोह के अंत में राजीव रोहित ने सभी अतिथियों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विनोद गुप्ता शलभ, मुख्तार खान, दिनेश शाकुल, अजय रोहिल्ला, आभा बोधिसत्व, इरफ़ान ख़ान, श्री भौमिक, अशोक विद्यार्थी, आमना आज़मी, सोनी सिंह, सर्वेश यादव, प्रमोद यादव, अल्ताफ़ खान, विनीता दास, रहमान अब्बास, पुष्पा चौधरी सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और लेखिका के परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
यह आयोजन न केवल पुस्तकों के लोकार्पण का माध्यम बना, बल्कि स्त्री विमर्श और सामाजिक यथार्थ पर एक गंभीर संवाद का गवाह भी रहा।
5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे कल, कहां किसकी बन रही सरकार?

#vidhansabhachunavresult2026

देश के चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे की तस्वीर 4 मई को साफ होगी। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को सामने आएंगे। ऐसे में पूरा देश ये जानने में उत्सुक है कि इन राज्यों में जनता का आशीर्वाद किस पार्टी को मिलेगा और किसे हार का सामना करना पड़ेगा।

किस राज्य में कितना मतदान

पश्चिम बंगाल में 92.47 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ। पहले चरण में 93.19 फीसदी मतदान हुआ जबकि दूसरे चरण में 91.66 फीसदी वोटिंग हुई।

असम में इस बार 85.89 फीसदी से ज्यादा मतदान

तमिलनाडु में 85 फीसदी से ज्यादा मतदान

केरल में 78.27 फीसदी से ज्यादा मतदान

पुडुचेरी में 89.87 फीसदी वोटिंग

कहां कितनी सीटें, बहुमत का आंकड़ा क्या?

बंगाल- 294, बहुमत का आंकड़ा- 148

असम- 126, बहुमत का आंकड़ा- 64

तमिलनाडु-234, बहुमत का आंकड़ा- 118

केरल- 140, बहुमत का आंकड़ा- 71

पुडुचेरी-30, बहुमत का आंकड़ा- 16

क्या कह रहे एग्जिट पोल के सर्वे

पांच राज्यों के चुनाव में अगर किसी राज्य के चुनावी नतीजों पर सबकी नजरें हैं तो वो है, पश्चिम बंगाल। यहां ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर है। एग्जिट पोल के सर्वे के मुताबिक, बंगाल में भी पहली बार बीजेपी सरकार बनाती दिख रही है। असम में बीजेपी सत्ता की हैट्रिक लगाती नजर आ रही है।इसके अलावा केरल में लेफ्ट का पत्ता साफ होने वाला है। तमिलनाडु में TVK यानी विजय की पार्टी की जीत होती दिख रही है।

वल्लभ भवन में ‘अल्पविराम’ कार्यक्रम, पुलिस कर्मियों को आंतरिक आनंद का दिया गया प्रशिक्षण

भोपाल। भोपाल स्थित मंत्रालय वल्लभ भवन में आनंद विभाग, मध्य प्रदेश शासन द्वारा ‘अल्पविराम’ (स्वयं की स्वयं से बात) विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वल्लभ भवन, सतपुड़ा एवं विंध्याचल भवन में कार्यरत पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को निजी जीवन और कार्यस्थल पर आनंद के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही, जीवन में आंतरिक आनंद की भूमिका और मानसिक संतुलन बनाए रखने के उपायों पर भी प्रकाश डाला गया।

इस अवसर पर मंत्रालय के रजिस्ट्रार मनोज श्रीवास्तव, सहायक पुलिस आयुक्त (सुरक्षा) अविनाश शर्मा, आनंद विभाग की मास्टर ट्रेनर श्रीमती अंजना श्रीवास्तव सहित मुकेश, अजीत और समन्वयक के रूप में आनंद विभाग के मनु दीक्षित उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए इसे उपयोगी और प्रेरणादायक बताया।

“करणी सेना का बड़ा एक्शन: भोपाल जिला अध्यक्ष आशु सिंह बर्खास्त, नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के आरोप”

भोपाल: करणी सेना से जुड़े एक बड़े विवाद में संगठन ने सख्त कदम उठाते हुए भोपाल के जिला अध्यक्ष पद से आशु सिंह को हटा दिया है। यह कार्रवाई गंभीर धोखाधड़ी के आरोपों के बाद की गई है, जिनमें उन पर संगठन के सदस्यों और आम लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने का आरोप है।

जानकारी के अनुसार, आशु सिंह पहले भी एक बड़े मामले में आरोपित रह चुके हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने दतिया मेडिकल कॉलेज में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर करीब 300 लोगों से पैसे वसूले थे। इस मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई हुई थी और उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।

बताया जा रहा है कि जेल से बाहर आने के बाद आशु सिंह ने कथित रूप से गलत तरीके से करणी सेना में  प्रवेश किया और संगठन के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर धोखाधड़ी करना शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने खुद को प्रभावशाली पदाधिकारी बताकर कई सदस्यों और अन्य लोगों से रकम ली।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत ने सख्त रुख अपनाते हुए आधिकारिक पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि आशु सिंह का संगठन से अब कोई संबंध नहीं है और उन्हें तत्काल प्रभाव से सभी पदों से निष्कासित कर दिया गया है।

संगठन ने अपने बयान में कहा है कि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या गलत गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे नौकरी दिलाने के नाम पर किए जाने वाले ऐसे दावों से सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।

यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि बेरोजगारी और कठिन समय का फायदा उठाकर कुछ लोग धोखाधड़ी करने से नहीं चूकते, ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

“करणी सेना का बड़ा एक्शन: भोपाल जिला अध्यक्ष आशु सिंह बर्खास्त, नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के आरोप”

भोपाल: करणी सेना से जुड़े एक बड़े विवाद में संगठन ने सख्त कदम उठाते हुए भोपाल के जिला अध्यक्ष पद से आशु सिंह को हटा दिया है। यह कार्रवाई गंभीर धोखाधड़ी के आरोपों के बाद की गई है, जिनमें उन पर संगठन के सदस्यों और आम लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने का आरोप है।

जानकारी के अनुसार, आशु सिंह पहले भी एक बड़े मामले में आरोपित रह चुके हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने दतिया मेडिकल कॉलेज में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर करीब 300 लोगों से पैसे वसूले थे। इस मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई हुई थी और उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।

बताया जा रहा है कि जेल से बाहर आने के बाद आशु सिंह ने कथित रूप से गलत तरीके से करणी सेना में प्रवेश किया और संगठन के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर धोखाधड़ी करना शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने खुद को प्रभावशाली पदाधिकारी बताकर कई सदस्यों और अन्य लोगों से रकम ली।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत ने सख्त रुख अपनाते हुए आधिकारिक पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि आशु सिंह का संगठन से अब कोई संबंध नहीं है और उन्हें तत्काल प्रभाव से सभी पदों से निष्कासित कर दिया गया है।

संगठन ने अपने बयान में कहा है कि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या गलत गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे नौकरी दिलाने के नाम पर किए जाने वाले ऐसे दावों से सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।

यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि बेरोजगारी और कठिन समय का फायदा उठाकर कुछ लोग धोखाधड़ी करने से नहीं चूकते, ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

श्रीयज्ञ सैनी वैश्य हलवाई समाज का दहेज मुक्त सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन 4 व 5 मई को
सामाजिक समरसता एवं एकता का संदेश देगा कार्यक्रम
फोटो अत्यावश्यक

रितेश मिश्रा
हरदोई।श्री यज्ञसेनी वैश्य (हलवाई) समाज जन कल्याण समिति के तत्वावधान में दहेज प्रथा के खिलाफ एक सराहनीय पहल करते हुए दहेज रहित आदर्श सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन 4 मई 2026 सोमवार से 5 मई 2026,मंगलवार को तक आयोजित होगा।
समारोह का आयोजन आरआर इंटर कॉलेज, नघेटा रोड, हरदोई में किया जाएगा, जब कि इसका कार्यालय डी-286 आवास विकास कॉलोनी (बेलाताली के सामने), हरदोई में स्थापित किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में दहेज प्रथा जैसी कुप्रथा को समाप्त करना तथा सरल और सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा देना है।
समिति के वरिष्ठ संरक्षक नरेश चन्द्र ‘नन्हे’ एवं संयोजक मंडल के सदस्य कृपा शंकर गुप्ता, राम सेवक आर्य, रतन बाबू गुप्ता, राजेश गुप्ता,मुकेश गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि यह आयोजन समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए विशेष रूप से सहायक सिद्ध होगा।
समिति के स्थायी सदस्यों में अनिल गुप्ता उपाध्यक्ष, विजय गुप्ता वरिष्ठ सलाहकार,रूपेश गुप्ता संप्रेक्षक, राजेंद्र कुमार आर्य बबलू उपाध्यक्ष,दिलीप कुमार गुप्ता उपाध्यक्ष, सर्वेश गुप्ता सह मंत्री,अमित कुमार गुप्ता "शीलू"  सह कोषाध्यक्ष,अभिनेष कुमार गुप्ता उपाध्यक्ष,नीरज कुमार गुप्ता व्यवस्था मंत्री, अरुणेश गुप्ता राजा भैया व्यवस्था मंत्री,
विमल कुमार गुप्ता व्यवस्था मंत्री, विश्वास कुमार गुप्ता प्रचार मंत्री, मुकेश कुमार गुप्ता व्यवस्था मंत्री,मनोज कुमार गुप्ता प्रचार मंत्री, अनूप कुमार गुप्ता व्यवस्था मंत्री सहित कई समाजसेवी सक्रिय रूप से कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे हैं।
वहीं महिला मंडल की ओर से सुमन गुप्ता उपाध्यक्ष, रेखा गुप्ता कोष सहयोगी, प्रीति गुप्ता मंच संचालिका, बीनू गुप्ता मंत्री एवं ज्योति गुप्ता सह मंत्री, आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
समिति के अध्यक्ष विमलेश कुमार गुप्ता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संदीप गुप्ता, कोषाध्यक्ष नीरज गुप्ता एवं महामंत्री अमित कुमार गुप्ता ने समाज के सभी वर्गों से इस आयोजन में सहयोग एवं सहभागिता की अपील की है।
इस सामूहिक विवाह समारोह के माध्यम से आयोजकों का लक्ष्य न केवल दहेज प्रथा को समाप्त करने का है, बल्कि समाज में आपसी सहयोग, समानता और सादगीपूर्ण जीवन मूल्यों को भी बढ़ावा देना है।
महिला आरक्षण पर झारखंड में सियासत तेज: विशेष सत्र बुलाने के लिए मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र।

जैसा कि आपको विदित है कि केन्द्र सरकार द्वारा विगत 16 से 18 अप्रैल, 2026 तक सदन के 3 दिनों का विशेष सत्र आहूत कर देश की आधी आबादी के सशक्तिकरण हेतु 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल' प्रस्तुत किया गया। दुर्भाग्यवश, विपक्ष के साथियों का अपेक्षित सहयोग न मिल पाने के कारण सदन में यह 'बिल' पारित नहीं हो पाया। इस बिल के पारित हो जाने से जहां पूरे देश की आधी आबादी को 2029 से ही प्रतिनिधित्व का ऐतिहासिक अवसर मिलता, वहीं झारखंड प्रदेश में भी 14 लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 21 हो जाती, जिसमें 7 लोकसभा क्षेत्रों में महिला जनप्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। इसी प्रकार विधानसभा सीटों की संख्या 81 से बढ़कर 121 हो जाती, जिसमें 41 विधानसभा क्षेत्रों में महिला जनप्रतिनिधित्व को अवसर मिल पाता।

झारखंड की संस्कृति एवं झारखंडी इतिहास में सदैव महिलाओं को प्रतिनिधित्व सहित सभी प्रकार की निर्णय प्रक्रिया, चाहे वह सामाजिक हो या राजनैतिक में महत्वपूर्ण स्थान और सम्मान दिया है। वीरांगना फूलो-झानो की इस धरती पर निवासरत झारखंड की बहनों की यह आशा है कि मा. मुख्यमंत्री जी, आप स्वयं महिला सशक्तिकरण के सशक्त पैरोकार रहे हैं। अतः इस झारखंड की भूमि पर इतिहास रचने का कार्य करें एवं मा. राज्यपाल की अनुमति से झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र आहूत कराकर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल' को पारित कर केन्द्र सरकार से पुनः इसे सदन में पारित कराने का आग्रह करें। आपके इस ऐतिहासिक कदम से झारखंड की आधी आबादी के लिए बहुप्रतिक्षित न्याय का मार्ग प्रशस्त संभव हो सकेगा।

आशा है कि आप दलगत भावना से ऊपर उठकर इस महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकार के विषय पर गंभीरता से निर्णय लेने का कष्ट करेंगे।

इतने गंभीर विषय के लिए मुख्यमंत्री द्वारा समय नहीं देना दुर्भाग्यपूर्ण : बाबूलाल मरांडी*

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे गंभीर विषय पर वार्तालाप के लिए पार्टी द्वारा हेमंत सोरेन से मिलने के लिए लगातार समय मांगे जाने के बावजूद मुख्यमंत्री द्वारा समय नहीं देने के मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष सत्र बुलाने और इस आशय का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने के लिए उनसे आग्रह करना चाहती थी, बावजूद समय नहीं दिया गया। श्री मरांडी प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बोल रहे थे।

श्री मरांडी ने कहा कि पार्टी के महामंत्री अमर कुमार बाउरी द्वारा 30 अप्रैल से ही मुख्यमंत्री से मिलने का समय लेने का प्रयास किया जा रहा है। प्रयास था कि तीन मई का कोई समय मिल जाए परंतु बड़ा दुर्भाग्य है कि लगातार समय मांगने के बाद भी समय नहीं मिल पाया और ना ही उधर से कोई स्पष्ट उत्तर दिया गया। जबकि पार्टी ने विषय वस्तु पूछने पर भी स्पष्ट रूप से विषय वस्तु के संबंध में स्पष्ट रूप से बता दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री ने समय देना मुनासिब नहीं समझा। इसलिए तय किया गया कि सीएम के पास अगर समय नहीं है उनको एक पत्र लिखकर ही उन्हें सारी बातों से अवगत करा दिया जाए। इसलिए इस विषय पर उन्हें पत्र लिखा गया है।

श्री मरांडी ने कहा कि 16, 17, 18 अप्रैल को भारत सरकार द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सदन में लाया गया था। इससे देश की आधी आबादी काफी प्रसन्न हुई कि लोकसभा और विधानसभा में 33% सीटें उनके लिए आरक्षित होगी। केवल 33% सीट ही रिजर्व नहीं होती बल्कि लोकसभा विधानसभा की सीटें भी उसी अनुपात में बढ़ती। झारखंड के संदर्भ में देखा जाए तो यहां 14 लोकसभा की सीटें बढ़कर 21 हो जाती। जिसमें 7 महिलाओं के लिए रिजर्व होती। इसी प्रकार विधानसभा की सीटें 81 से बढ़कर 121 हो जाती। जिसमें 41 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होती। झारखंड की लगभग सभी सरकारों द्वारा भारत सरकार को संकल्प भेजा गया था कि झारखंड में विधानसभा की सीटें बढ़नी चाहिए। आज सीटें बढ़ती तो और लोगों को भी अवसर मिलता।

श्री मरांडी ने कहा कि उम्मीद थी कि हेमंत सोरेन इन चीजों को समझेंगे और इस बिल का वह समर्थन करेंगे लेकिन उन्होंने इसके विरोध में मतदान किया। इसलिए पार्टी ने तय किया था कि मुख्यमंत्री से मिलकर उनसे पार्टी आग्रह करेगी कि इस मुद्दे पर राज्यपाल की सहमति से एक विशेष सत्र बुलाएं और इस आशय का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजें ताकि फिर से भारत सरकार इस बिल को ला सके। इससे महिलाओं को ही नहीं बल्कि और लोगों को भी उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। प्रेस वार्ता के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री को पार्टी द्वारा लिखे पत्र को भी साझा किया।

इस दौरान प्रेस वार्ता में प्रदेश मीडिया सह प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह एवं प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज भी मौजूद रहे।

*रांची: महाअधिवक्ता राजीव रंजन मिश्रा ने जनगणना-2027 के लिए स्व-गणना पूरी की

श्री राजीव रंजन मिश्रा, महाअधिवक्ता, झारखंड उच्च न्यायालय ने जनगणना-2027 के तहत रविवार को स्व-गणना (self Enumeration) की प्रक्रिया पूरी की।

इस अवसर पर श्री प्रभात कुमार, निदेशक , जनगणना कार्य निदेशालय झारखण्ड, श्री सुशांत गौरव, नगर आयुक्त नगर निगम रांची, डॉ० सत्येन्द्र कुमार गुप्ता संयुक्त निदेशक, श्री शेषनाथ बैठा जिला सांख्यिकी अधिकारी, रांची, श्री ज्ञानचंद्र महतो सहायक निदेशक आदि उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने जनगणना-2027 के लिए स्व-गणना पूरी की, नागरिकों से सक्रिय भागीदारी की अपील

मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार ने जनगणना-2027 के तहत स्व-गणना (self Enumeration) की प्रक्रिया पूरी की। इस अभियान के तहत 01 मई से 15मई तक स्व-गणना कार्य प्रारंभ हो चुका है। इसी क्रम में रविवार को मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार ने स्व-गणना की प्रक्रिया पूरी की।

15 मई के पश्चात मकान सूचीकरण एवं मकान गणना कार्य दिनांक 16 मई से 14 जून 2026 तक पूरे राज्य में किया जाएगा। इस गहन जनगणना अभियान के दौरान घर-घर जाकर प्रगणक से संबद्ध कर्मी डेटा संग्रह करेंगे। सभी जिलों में इस कार्य के लिए प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई है।

इस मौके पर श्री प्रभात कुमार, निदेशक , जनगणना कार्य निदेशालय झारखण्ड, श्री सुशांत गौरव, नगर आयुक्त नगर निगम रांची, डॉ० सत्येन्द्र कुमार गुप्ता संयुक्त निदेशक, श्री शेषनाथ बैठा जिला सांख्यिकी अधिकारी, रांची, श्री ज्ञानचंद्र महतो सहायक निदेशक आदि उपस्थित रहे।

अदब की महफिल, शब्दों के आईने में दिखा 'हमारा समाज' और ‘अर्थबोध'

भायंदर। मीरा रोड (पूर्व) स्थित विरंगुला केंद्र में आयोजित एक भव्य समारोह में कवयित्री एवं लेखिका रीता दास राम की दो नई कृतियों—काव्य संग्रह 'अर्थबोध के सान्निध्य में' और लेख संग्रह 'हमारा समाज और हम' (वैभव प्रकाशन)—का लोकार्पण संपन्न हुआ। जनवादी लेखक संघ, 'अनभै' पत्रिका और स्वर संगम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य जगत की दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की।कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि, आलोचक एवं चिंतक विजय कुमार ने की। उन्होंने लेखिका की रचनात्मक यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि रीता दास की संवेदना का दायरा अत्यंत विस्तृत है। उन्होंने मोहन राकेश के नाटक का संदर्भ देते हुए मार्मिक टिप्पणी की कि एक पुरुष शायद ही कभी स्त्री के मन के उस 'तहखाने' और उसकी पीड़ा को पूरी तरह समझ पाए, जिसे रीता दास ने अपनी कविताओं में अभिव्यक्त किया है।कार्यक्रम का कुशल संचालन कवि रमन मिश्र ने किया, जिनकी प्रस्तुति और विद्वानों के विचारों को सूत्रबद्ध करने की शैली अंत तक श्रोताओं को बांधे रही।काव्य संग्रह 'अर्थबोध के सान्निध्य में' पर बोलते हुए वरिष्ठ कवि हूबनाथ पांडेय ने बताया कि रीता की कविताएं 'देह से उठकर समाज की ओर' बढ़ती हैं और वे एक स्त्री होकर 'मनुष्य की तरह' कविता लिखती हैं। प्रशांत जैन ने शीर्षक की सार्थकता और मुखपृष्ठ की विशिष्टता पर प्रकाश डाला, वहीं संध्या यादव ने कविताओं में मौजूद ज्वलंत सामाजिक चिंताओं को रेखांकित किया। लेख संग्रह 'हमारा समाज और हम' पर अनिल गौड़ की समीक्षा (जिसका पाठ राकेश शर्मा ने किया) के अनुसार, ये लेख समाज की जटिलताओं को परत-दर-परत खोलते हैं। अवधेश राय ने इन लेखों को वर्जनाओं और शोषण के खिलाफ एक 'दस्तावेज़' करार दिया।वरिष्ठ कवि विनोद दास और अनूप सेठी ने कविताओं के सौंदर्य बोध और उसमें छिपे द्वंद्वात्मक रिश्तों की सराहना की। हृदयेश मयंक ने लेखिका की बहुआयामी रचनात्मकता को सराहा, जबकि शैलेश सिंह ने उन्हें अन्याय के विरुद्ध सजगता से खड़ी होने वाली रचनाकार बताया। अभिलाष अवस्थी ने भी लेखिका के रचना-प्रयासों पर अपना दृष्टिकोण साझा किया। समारोह के अंत में राजीव रोहित ने सभी अतिथियों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विनोद गुप्ता शलभ, मुख्तार खान, दिनेश शाकुल, अजय रोहिल्ला, आभा बोधिसत्व, इरफ़ान ख़ान, श्री भौमिक, अशोक विद्यार्थी, आमना आज़मी, सोनी सिंह, सर्वेश यादव, प्रमोद यादव, अल्ताफ़ खान, विनीता दास, रहमान अब्बास, पुष्पा चौधरी सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और लेखिका के परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
यह आयोजन न केवल पुस्तकों के लोकार्पण का माध्यम बना, बल्कि स्त्री विमर्श और सामाजिक यथार्थ पर एक गंभीर संवाद का गवाह भी रहा।
5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे कल, कहां किसकी बन रही सरकार?

#vidhansabhachunavresult2026

देश के चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे की तस्वीर 4 मई को साफ होगी। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को सामने आएंगे। ऐसे में पूरा देश ये जानने में उत्सुक है कि इन राज्यों में जनता का आशीर्वाद किस पार्टी को मिलेगा और किसे हार का सामना करना पड़ेगा।

किस राज्य में कितना मतदान

पश्चिम बंगाल में 92.47 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ। पहले चरण में 93.19 फीसदी मतदान हुआ जबकि दूसरे चरण में 91.66 फीसदी वोटिंग हुई।

असम में इस बार 85.89 फीसदी से ज्यादा मतदान

तमिलनाडु में 85 फीसदी से ज्यादा मतदान

केरल में 78.27 फीसदी से ज्यादा मतदान

पुडुचेरी में 89.87 फीसदी वोटिंग

कहां कितनी सीटें, बहुमत का आंकड़ा क्या?

बंगाल- 294, बहुमत का आंकड़ा- 148

असम- 126, बहुमत का आंकड़ा- 64

तमिलनाडु-234, बहुमत का आंकड़ा- 118

केरल- 140, बहुमत का आंकड़ा- 71

पुडुचेरी-30, बहुमत का आंकड़ा- 16

क्या कह रहे एग्जिट पोल के सर्वे

पांच राज्यों के चुनाव में अगर किसी राज्य के चुनावी नतीजों पर सबकी नजरें हैं तो वो है, पश्चिम बंगाल। यहां ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर है। एग्जिट पोल के सर्वे के मुताबिक, बंगाल में भी पहली बार बीजेपी सरकार बनाती दिख रही है। असम में बीजेपी सत्ता की हैट्रिक लगाती नजर आ रही है।इसके अलावा केरल में लेफ्ट का पत्ता साफ होने वाला है। तमिलनाडु में TVK यानी विजय की पार्टी की जीत होती दिख रही है।

वल्लभ भवन में ‘अल्पविराम’ कार्यक्रम, पुलिस कर्मियों को आंतरिक आनंद का दिया गया प्रशिक्षण

भोपाल। भोपाल स्थित मंत्रालय वल्लभ भवन में आनंद विभाग, मध्य प्रदेश शासन द्वारा ‘अल्पविराम’ (स्वयं की स्वयं से बात) विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वल्लभ भवन, सतपुड़ा एवं विंध्याचल भवन में कार्यरत पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को निजी जीवन और कार्यस्थल पर आनंद के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही, जीवन में आंतरिक आनंद की भूमिका और मानसिक संतुलन बनाए रखने के उपायों पर भी प्रकाश डाला गया।

इस अवसर पर मंत्रालय के रजिस्ट्रार मनोज श्रीवास्तव, सहायक पुलिस आयुक्त (सुरक्षा) अविनाश शर्मा, आनंद विभाग की मास्टर ट्रेनर श्रीमती अंजना श्रीवास्तव सहित मुकेश, अजीत और समन्वयक के रूप में आनंद विभाग के मनु दीक्षित उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए इसे उपयोगी और प्रेरणादायक बताया।

“करणी सेना का बड़ा एक्शन: भोपाल जिला अध्यक्ष आशु सिंह बर्खास्त, नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के आरोप”

भोपाल: करणी सेना से जुड़े एक बड़े विवाद में संगठन ने सख्त कदम उठाते हुए भोपाल के जिला अध्यक्ष पद से आशु सिंह को हटा दिया है। यह कार्रवाई गंभीर धोखाधड़ी के आरोपों के बाद की गई है, जिनमें उन पर संगठन के सदस्यों और आम लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने का आरोप है।

जानकारी के अनुसार, आशु सिंह पहले भी एक बड़े मामले में आरोपित रह चुके हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने दतिया मेडिकल कॉलेज में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर करीब 300 लोगों से पैसे वसूले थे। इस मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई हुई थी और उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।

बताया जा रहा है कि जेल से बाहर आने के बाद आशु सिंह ने कथित रूप से गलत तरीके से करणी सेना में  प्रवेश किया और संगठन के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर धोखाधड़ी करना शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने खुद को प्रभावशाली पदाधिकारी बताकर कई सदस्यों और अन्य लोगों से रकम ली।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत ने सख्त रुख अपनाते हुए आधिकारिक पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि आशु सिंह का संगठन से अब कोई संबंध नहीं है और उन्हें तत्काल प्रभाव से सभी पदों से निष्कासित कर दिया गया है।

संगठन ने अपने बयान में कहा है कि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या गलत गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे नौकरी दिलाने के नाम पर किए जाने वाले ऐसे दावों से सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।

यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि बेरोजगारी और कठिन समय का फायदा उठाकर कुछ लोग धोखाधड़ी करने से नहीं चूकते, ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

“करणी सेना का बड़ा एक्शन: भोपाल जिला अध्यक्ष आशु सिंह बर्खास्त, नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के आरोप”

भोपाल: करणी सेना से जुड़े एक बड़े विवाद में संगठन ने सख्त कदम उठाते हुए भोपाल के जिला अध्यक्ष पद से आशु सिंह को हटा दिया है। यह कार्रवाई गंभीर धोखाधड़ी के आरोपों के बाद की गई है, जिनमें उन पर संगठन के सदस्यों और आम लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने का आरोप है।

जानकारी के अनुसार, आशु सिंह पहले भी एक बड़े मामले में आरोपित रह चुके हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने दतिया मेडिकल कॉलेज में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर करीब 300 लोगों से पैसे वसूले थे। इस मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई हुई थी और उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।

बताया जा रहा है कि जेल से बाहर आने के बाद आशु सिंह ने कथित रूप से गलत तरीके से करणी सेना में प्रवेश किया और संगठन के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर धोखाधड़ी करना शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने खुद को प्रभावशाली पदाधिकारी बताकर कई सदस्यों और अन्य लोगों से रकम ली।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत ने सख्त रुख अपनाते हुए आधिकारिक पत्र जारी किया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि आशु सिंह का संगठन से अब कोई संबंध नहीं है और उन्हें तत्काल प्रभाव से सभी पदों से निष्कासित कर दिया गया है।

संगठन ने अपने बयान में कहा है कि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या गलत गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे नौकरी दिलाने के नाम पर किए जाने वाले ऐसे दावों से सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।

यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि बेरोजगारी और कठिन समय का फायदा उठाकर कुछ लोग धोखाधड़ी करने से नहीं चूकते, ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

श्रीयज्ञ सैनी वैश्य हलवाई समाज का दहेज मुक्त सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन 4 व 5 मई को
सामाजिक समरसता एवं एकता का संदेश देगा कार्यक्रम
फोटो अत्यावश्यक

रितेश मिश्रा
हरदोई।श्री यज्ञसेनी वैश्य (हलवाई) समाज जन कल्याण समिति के तत्वावधान में दहेज प्रथा के खिलाफ एक सराहनीय पहल करते हुए दहेज रहित आदर्श सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन 4 मई 2026 सोमवार से 5 मई 2026,मंगलवार को तक आयोजित होगा।
समारोह का आयोजन आरआर इंटर कॉलेज, नघेटा रोड, हरदोई में किया जाएगा, जब कि इसका कार्यालय डी-286 आवास विकास कॉलोनी (बेलाताली के सामने), हरदोई में स्थापित किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में दहेज प्रथा जैसी कुप्रथा को समाप्त करना तथा सरल और सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा देना है।
समिति के वरिष्ठ संरक्षक नरेश चन्द्र ‘नन्हे’ एवं संयोजक मंडल के सदस्य कृपा शंकर गुप्ता, राम सेवक आर्य, रतन बाबू गुप्ता, राजेश गुप्ता,मुकेश गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि यह आयोजन समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए विशेष रूप से सहायक सिद्ध होगा।
समिति के स्थायी सदस्यों में अनिल गुप्ता उपाध्यक्ष, विजय गुप्ता वरिष्ठ सलाहकार,रूपेश गुप्ता संप्रेक्षक, राजेंद्र कुमार आर्य बबलू उपाध्यक्ष,दिलीप कुमार गुप्ता उपाध्यक्ष, सर्वेश गुप्ता सह मंत्री,अमित कुमार गुप्ता "शीलू"  सह कोषाध्यक्ष,अभिनेष कुमार गुप्ता उपाध्यक्ष,नीरज कुमार गुप्ता व्यवस्था मंत्री, अरुणेश गुप्ता राजा भैया व्यवस्था मंत्री,
विमल कुमार गुप्ता व्यवस्था मंत्री, विश्वास कुमार गुप्ता प्रचार मंत्री, मुकेश कुमार गुप्ता व्यवस्था मंत्री,मनोज कुमार गुप्ता प्रचार मंत्री, अनूप कुमार गुप्ता व्यवस्था मंत्री सहित कई समाजसेवी सक्रिय रूप से कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे हैं।
वहीं महिला मंडल की ओर से सुमन गुप्ता उपाध्यक्ष, रेखा गुप्ता कोष सहयोगी, प्रीति गुप्ता मंच संचालिका, बीनू गुप्ता मंत्री एवं ज्योति गुप्ता सह मंत्री, आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
समिति के अध्यक्ष विमलेश कुमार गुप्ता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संदीप गुप्ता, कोषाध्यक्ष नीरज गुप्ता एवं महामंत्री अमित कुमार गुप्ता ने समाज के सभी वर्गों से इस आयोजन में सहयोग एवं सहभागिता की अपील की है।
इस सामूहिक विवाह समारोह के माध्यम से आयोजकों का लक्ष्य न केवल दहेज प्रथा को समाप्त करने का है, बल्कि समाज में आपसी सहयोग, समानता और सादगीपूर्ण जीवन मूल्यों को भी बढ़ावा देना है।