देवघर-अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का उद्देश्य महिलाओं की आवाज को मजबूत करना : श्वेता शर्मा
देवघर:
हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। आज स्थानीय विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के बैनर तले सिद्धिविनायक बैंक्वेट हॉल में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका श्वेता शर्मा, फूड क्राफ्ट इंस्टिट्यूट की व्याख्याता डॉ. श्वेता लिंगवाल, मातृ मंदिर बालिका उच्च विद्यालय की पूर्व प्रधानाध्यापिका शोभना सिंह, वार्ड पार्षद सोनी केशरी, चाँदनी चौधरी, वेक्सो इंडिया के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव, संरक्षक प्रो. रामनंदन सिंह, देवघर चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रवि कुमार केशरी, संत माइकल एंग्लो विद्यालय के निदेशक डॉ. जय चंद्र राज व अन्य के करकमलों से 26 बालिका एवं महिलाओं को सम्मानित किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार केशरवानी समाज द्वारा झांकी में माँ सरस्वती की भूमिका में संत फ्रांसिस स्कूल की साक्षी केशरी, सीता की भूमिका में देवसंघ नेशनल स्कूल की शगुन कुमारी केशरी, माँ लक्ष्मी की भूमिका में काजल केशरी, रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका में सनराइज द्वारिका ऐकाडमी की सोनम केशरी, निबंध लेखन में दीनबंधु उच्च विद्यालय की शिवानी झा, रॉक एंड रोल डांस ऐकाडमी की शांभवी केशरी, करों निवासी धाविका मनाली सिंह, देवघर संत फ्रांसिस स्कूल की वाणी प्रिया, एकलव्य पब्लिक स्कूल की निदेशिका रेखा कुमारी, मिथिला पेंटिंग विशेषज्ञ खुशबू सिंह, कृष्णापुरी निवासी समाजसेवी प्रियांशु प्रिया, दशरथ प्रसाद सिंह इंटरनेशनल स्कूल की प्रभारी प्राचार्या साक्षी सिंह, कास्टर्स टाउन निवासी समाजसेवी डॉ. रूपा कुमारी, अतिथिवृंद श्वेता द्वय, शोभना सिंह, दीनबंधु उच्च विद्यालय की मनीषा घोष, वार्ड सोनी केशरी, चाँदनी चौधरी एवं अन्य को मोमेंटो, डायरी, कलम देकर सम्मानित किया गया।
मौके पर श्वेता शर्मा ने कहा- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की थीम दान से लाभ है, जो सहयोग, समानता और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित है। इसका मुख्य संदेश है कि जब हम महिलाओं को समान अवसर, शिक्षा और संसाधन प्रदान करते हैं, तो उससे केवल उनका ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और मानवता का विकास होता है, जिससे सभी को लाभ मिलता है। श्वेता लिंगवाल ने कहा-दान से लाभ थीम बताती है कि महिलाओं के उत्थान में योगदान देने से वे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से स्वतंत्र बनती हैं, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव आता है।
जब महिलाएं शिक्षित और सक्षम होती हैं, तो वे परिवार और देश की प्रगति में सक्रिय भागीदारी निभाती हैं। शोभना सिंह ने कहा- इस वर्ष का थीम कौशल, समय और ज्ञान को साझा करने के माध्यम से, उदारता के साथ महिलाओं को आगे बढ़ाने पर जोर देती है। वार्ड पार्षद सोनी केशरी ने कहा- अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का उद्देश्य महिलाओं की आवाज को मजबूत करना, समाज में फैले भेदभाव और रूढ़िवादिता को चुनौती देकर ऐसा बदलाव लाना है जिससे महिलाओं को हर क्षेत्र में बराबरी और सम्मान मिले। रवि केशरी ने कहा- महिला दिवस की शुरुआत किसी एक दिन की घटना नहीं, बल्कि कई दशकों के संघर्ष का परिणाम है।
डॉ. प्रदीप ने कहा- 1908 में न्यूयॉर्क शहर में लगभग 15,000 महिलाओं ने काम के घंटे कम करने, बेहतर वेतन और वोट देने के अधिकार के लिए विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद 1910 में क्लारा जेटकिन ने कोपेनहेगन में एक सम्मेलन के दौरान 'अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस' मनाने का विचार पेश किया। जिसके बाद 1911 में पहली बार ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में इसे मनाया गया। इसके बाद 8 मार्च 1917 को रूस की महिलाओं ने रोटी और शांति की मांग को लेकर ऐतिहासिक हड़ताल की, जिससे वहां की सरकार को महिलाओं को वोट देने का अधिकार देना पड़ा। इसी वजह से ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 8 मार्च को महिला दिवस के रूप में चुना गया। 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने इसे आधिकारिक तौर पर मान्यता दी और तभी से यह वैश्विक स्तर पर यह हर साल 8 मार्च को मनाया जाने लगा।
4 hours ago
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