अपने गीतों के माध्यम से लोगों के दिलों में आज भी बसी हुई है आशा भोसले: सलिल पांडेय
*आशा भोसले के गीतों की आज भी बनी हुई है प्रासंगिकता : महंत योगानंद गिरि
*साहित्यकारों, पत्रकारों एवं प्रबुद्ध जनों के विचार संगोष्ठी में याद करते हुए दी गई श्रद्धांजलि
मीरजापुर। लोक संस्कृति संरक्षण केंद्र के तत्वावधान में प्रख्यात गायिका आशा भोंसले के निधन पश्चात विशुंदरपुर स्थित ट्रांजिस्टर हाल (सरकारी आवास कालोनी) में
विचार गोष्ठी आयोजित किया गया। जिसमें उनके द्वारा गाए गए प्रमुख गीतों को गाते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार सलिल पांडेय जी ने बीते हुए दौर के कलाकारों के प्रसंग पर चर्चा करते हुए उस दौर के गीतों जिनकी आज भी प्रासंगिकता बनी हुई है पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा तमाम उतार चढ़ाव और दो अर्थी गीतों के बाद भी आशा भोसले ने कभी भी अपने मूल मार्गं से भटकने का काम नहीं किया उनके गीत केवल गीत और संगीत ही नहीं थे बल्कि समाज को दशा और दिशा प्रदान करते हुए लोगों का स्वस्थ मनोरंजन करते हुए गीत संगीत के जरिए लोगों को सकुन भी प्रदान करने वाले होते थे। यही कारण रहा है कि उनके द्वारा गाए गए गीतों को आज भी लोग गुनगुनाने से पीछे नहीं हैं। पत्रकार राजेन्द्र तिवारी एवं संतोष श्रीवास्तव ने आशा भोसले के जीवन वृत्त पर प्रकाश डाला। महंत योगानंद गिरि जी महाराज ने कहा आशा भोसले ने अपने गीतों को संघर्ष से संग्रहित किया तथा समाज में मानविय, निस्काम भाव से उसे समर्पित किया। जो आज भी उन्हें जीवन्त बनाए हुए है। पूर्व कर्मचारी नेता एवं वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र तिवारी उर्फ लल्लू तिवारी ने कहा
हिंदुस्तान ही नहीं पूरे विश्व में हज़ारों समृद्ध शाली गीतों के जरिए करोड़ों लोगों के दिलों में राज करने वाली आशा भोसले सदैव जीवंत रहेंगी। उनके गीत जबतक बजते रहेंगे तबतक वह लोगों के दिलों में धड़कती रहेगी और अनंतकाल तक जीवित रहेगी।
अन्तर्राष्ट्रीय लोकगीत कजली गायिका
उषा गुप्ता ज़ी आशा भोसले की याद को जीवंत करते हुए ".. दुनियां ने हमको दिया क्या...! दम मारों दम मिट जाये सारे गम हरे कृष्णा हरे राम...!
लेके डोली पियां द्वार पे आ गये
मेरे अरमां, अरमां ही रह गये...! सुनाकर लोगों को झकझोर दिया। इसी कड़ी में लोक गायक एवं अधिवक्ता शिवलाल गुप्ता ने सुनाया ...एक रोज छोड़कर के संसार जाना होगा, परिवार को तो केवल मातम मनाना होगा। बिछुड़ेगें अपने साथी मइत्त जिस दिन उडेगी घर से...! मिट्टी की तेरी काया मिट्टी में ही मिलेगी, केवल कफन के पाट में गंगा नहाना होगा...!
इस मौके पर मुख्य रूप से विख्यात बूढ़ेनाथ मंदिर के महंत योगानंद गिरि जी महाराज, वरिष्ठ साहित्यकार सलिल पांडेय, राजेन्द्र तिवारी, संतोष श्रीवास्तव, राकेश द्विवेदी, शिवशंकर उपाध्याय, नितिन अवस्थी, संतोष देव गिरि, राजनराज शर्मा, अजय गुप्ता, संदर्भ पांडेय, शिवभोला सिंह, विकास तिवारी, विष्णु पांडेय, जिला सूचना अधिकारी ओमप्रकाश उपाध्याय, अन्तर्राष्ट्रीय लोकगीत गायिका उषा गुप्ता, विरेन्द्र गुप्ता सहित तमाम लोग उपस्थित रहे। अंत में दो मिनट का मौन रख, गोष्ठी का समापन किया गया। जिला सूचना अधिकारी ओमप्रकाश उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए गोष्ठी का समापन किया।
12 sec ago
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