शेरघाटी नगर परिषद में करोड़ों के घोटाले का आरोप: पूर्व मुख्य पार्षद प्रतिनिधि विनय कुमार ने कहा- फर्जी कंस्ट्रक्शन के नाम पर धन की निकासी की
कार्रवाई के लिए सरकार को लिखा पत्र

गया: गया जिले के शेरघाटी नगर परिषद क्षेत्र में कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने आने से स्थानीय प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। नगर परिषद शेरघाटी के पूर्व मुख्य पार्षद प्रतिनिधि विनय कुमार ने प्रेस वार्ता आयोजित कर कार्यपालक पदाधिकारी रिचा प्रियदर्शनी पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि नगर परिषद में विभिन्न विकास योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है, जिसके उनके पास ठोस सबूत मौजूद हैं।
विनय कुमार के अनुसार, फाउंटेन निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना में लागत को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया और गुणवत्ता से समझौता किया गया। इसके अलावा, नेशनल हाईवे पर पेंटिंग कार्य में भी निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया, फिर भी भारी राशि खर्च कर दी गई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई योजनाओं के तहत फर्जी कंस्ट्रक्शन के नाम पर धन निकासी की गई है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि जिन कंपनियों को काम दिया गया, उनके पास वैध दस्तावेज जैसे पैन कार्ड, जीएसटी नंबर या अन्य आवश्यक कागजात तक नहीं थे। इसके बावजूद उन्हें टेंडर प्रक्रिया के जरिए कार्य आवंटित किया गया, जो नियमों के विरुद्ध है।
वाटर एटीएम परियोजना को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। विनय कुमार ने कहा कि जिन स्थानों पर आम जनता की सुविधा के लिए वाटर एटीएम लगाए जाने थे, वहां इन्हें नहीं लगाया गया। इसके बजाय अन्य क्षेत्रों में स्थापित कर दिया गया, जिससे लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। साथ ही, एलईडी डिस्प्ले और आउटडोर फाउंडेशन से जुड़े कार्यों में भी अनियमितता का आरोप लगाया गया है।
उन्होंने हितों के टकराव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिस फर्म को आउटडोर फाउंडेशन का कार्य दिया गया, वह नगर परिषद में कार्यरत एक जूनियर इंजीनियर के पिता के नाम पर रजिस्टर्ड है। यह सीधा-सीधा नियमों का उल्लंघन है और निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। विनय कुमार ने यह भी दावा किया कि संबंधित कार्यपालक पदाधिकारी अपने पिछले कार्यकाल में भी इसी तरह के आरोपों में घिरी रही हैं।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि समय रहते जांच नहीं कराई गई, तो महत्वपूर्ण दस्तावेजों में हेरफेर किया जा सकता है। इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को लिखित शिकायत सौंपते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही, दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने की भी अपील की है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और जांच के बाद सच्चाई क्या निकलकर सामने आती है।
वही, इस संबंध में कार्यपालक पदाधिकारी रिचा प्रियदर्शनी ने कहा कि 6 माह के करीब चुनाव होना है, इसलिए यह सब राजनीतिक कारणों से आरोप लगाए जा रहे हैं, उन्होंने कहा कि सभी आरोप मनगढ़ंत और तथ्यहीन है.
38 min ago
- Whatsapp
- Facebook
- Linkedin
- Google Plus
1