बिलग्राम तहसील प्रशासन के कारनामे, मेड़बंदी कराई, कब्जा दिलाया, फिर बदल गई रिपोर्ट
*गाटा संख्या 75 मे 0.0918 हेक्टेयर भूमि घाटे की पैमाइश पर पारित हुआ था थाकबंदी आदेश*

*मेड़ तोड़े जाने की पुष्टि के बाद भी कार्रवाई नहीं बाद की रिपोर्ट ने खड़े किए नए प्रश्न*

रितेश मिश्रा
हरदोई। उत्तर प्रदेश सरकार जहां प्रशासन में पारदर्शिता और "जीरो टॉलरेंस" नीति को सुशासन का आधार बताती है, वहीं हरदोई जिले की बिलग्राम तहसील का एक भूमि विवाद राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक ही प्रकरण में पहले पैमाइश, फिर थाकबंदी आदेश, उसके अनुपालन में मेड़बंदी और कब्जा दिलाने की कार्रवाई, और बाद में उसी मामले में विपरीत रिपोर्ट—पूरा घटनाक्रम ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।बिलग्राम तहसील के ग्राम श्यामपुर में गाटा संख्या 75 से जुड़े इस मामले में न्यायालय के आदेश से लेकर प्रशासनिक कार्रवाई तक की कहानी कई मोड़ों से गुजरती है। हर मोड़ पर एक नया सवाल खड़ा होता है और हर सवाल का जवाब अभी भी फाइलों के पन्नों में तलाशा जा रहा है।ग्राम श्यामपुर निवासी दिवाकर मिश्रा पुत्र प्रेमचंद्र ने गाटा संख्या 75 की भूमि के संबंध में उपजिलाधिकारी बिलग्राम के न्यायालय में थाकबदी वाद प्रस्तुत किया था। न्यायालय के निर्देश पर क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक ने मौके पर पैमाइश कर नक्शा नजरी एवं थाकबंदी आख्या तैयार की।
पैमाइश में सामने आया 0.0918 हेक्टेयर भूमि का घाटा
राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 75 का क्षेत्रफल 0.2710 हेक्टेयर दर्ज था, जबकि मौके पर हुई पैमाइश में उसका वास्तविक क्षेत्रफल मात्र 0.1792 हेक्टेयर पाया गया। इस प्रकार गाटा संख्या 75 में कुल 0.0918 हेक्टेयर भूमि का घाटा दर्ज हुआ।
इतना ही नहीं, आसपास के कई गाटों में क्षेत्रफल की बढ़त भी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार—
गाटा संख्या 55 में 0.0635 हेक्टेयर बढ़त
गाटा संख्या 74 में 0.0376 हेक्टेयर बढ़त
गाटा संख्या 76 में 0.0278 हेक्टेयर बढ़त
गाटा संख्या 77 में 0.0283 हेक्टेयर बढ़त
गाटा संख्या 72 एवं 73 में भी क्षेत्रफल का अंतर दर्ज किया गया
पड़ोसी गाटों की पैमाइश के आधार पर तैयार आख्या न्यायालय में प्रस्तुत की गई। प्रभावित पक्षों को समन और समाचार पत्र के माध्यम से सूचना दी गई, लेकिन किसी भी पक्ष ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। इसके बाद एसडीएम न्यायालय ने 28 मई 2025 को प्रस्तुत आख्या को स्वीकार करते हुए थाकबंदी आदेश पारित कर दिया।
आदेश मिला, लेकिन अनुपालन में हुई देरी

दिवाकर मिश्रा का आरोप है कि न्यायालय का आदेश पारित होने के बावजूद लंबे समय तक उसका अनुपालन नहीं कराया गया। न्यायालय का आदेश अभिलेखों में दर्ज रहा, लेकिन जमीन पर उसकी तस्वीर दिखाई नहीं दी।आखिरकार 11 मार्च 2026 को दिवाकर मिश्रा ने जिलाधिकारी हरदोई को शिकायत देकर थाकबंदी आदेश का अनुपालन कराने की मांग कीजिलाधिकारी के निर्देश के बाद एसडीएम बिलग्राम ने राजस्व निरीक्षक और लेखपाल को मौके पर भेजा। इसके बाद मेड़बंदी कराई गई और दिवाकर मिश्रा को भूमि पर कब्जा दिलाया गया।

कब्जे के बाद फिर शुरू हुआ विवाद

दिवाकर मिश्रा का आरोप है कि कब्जा मिलने के बाद रामलखन त्रिपाठी पुत्र श्याममोहन तथा उमाकांत शुक्ल निवासी बालामऊ चार-पांच अन्य व्यक्तियों के साथ मौके पर पहुंचे और बनाई गई मेड़ को तोड़ दिया। आरोप है कि भूमि को पुनः अपने खेत में मिला लिया गया तथा विरोध करने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई।
इस संबंध में दिवाकर मिश्रा नेआईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत संख्या20015536022250 दर्ज कराई।

पहली रिपोर्ट में मेड़ तोड़ने की पुष्टि

शिकायत की जांच में क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक ने 19 मई 2026 को प्रस्तुत अपनी आख्या में मेड़ तोड़े जाने का उल्लेख किया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि थाकबंदी आदेश के अनुरूप की गई मेड़बंदी को नहीं माना गया और मौके की स्थिति बदल दी गई।
रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की उम्मीद जगी, लेकिन दिवाकर मिश्रा का आरोप है कि इसके बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

दूसरी शिकायत और बदल गई पूरी तस्वीर

इसके बाद दिवाकर मिश्रा ने पुनः आईजीआरएस शिकायत संख्या 20015526024152 दर्ज कराई। इस बार जांच में प्रस्तुत रिपोर्ट ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।
आरोप है कि उसी राजस्व निरीक्षक ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा कि आवेदक का भू-चित्र छोटा बना हुआ है, इसलिए उसे पूरी भूमि नहीं दी जा सकती। रिपोर्ट में विपक्षी पक्ष के प्रत्यावेदन का भी उल्लेख किया गया। बाद में एसडीएम बिलग्राम स्तर से भी इसी आधार पर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई।

सवालों के घेरे में पूरा घटनाक्रम

यहीं से कई प्रश्न जन्म लेते हैं। यदि भू-चित्र छोटा था तो उसी पैमाइश रिपोर्ट के आधार पर थाकबंदी आदेश कैसे पारित हुआ? यदि आदेश सही नहीं था तो प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर मेड़बंदी कर कब्जा क्यों दिलाया? और यदि कब्जा दिलाना सही था तो बाद में अधिकारियों की रिपोर्ट का आधार क्या था?
जब पहली रिपोर्ट में मेड़ तोड़े जाने की पुष्टि हो चुकी थी, तब संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि दूसरी रिपोर्ट सही है तो पहली रिपोर्ट तथा उसके आधार पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई को किस नजर से देखा जाए?
यही वे प्रश्न हैं जो आज ग्राम श्यामपुर से लेकर तहसील मुख्यालय तक चर्चा का विषय बने हुए हैं।
जांच की मांग तेज
दिवाकर मिश्रा ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि न्यायालय के आदेश, पैमाइश रिपोर्ट, नक्शा नजरी, आईजीआरएस शिकायतों और बाद में प्रस्तुतविरोधाभासी रिपोर्टों की समग्र जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि एक ही मामले में सरकारी अभिलेखों और प्रशासनिक निष्कर्षों में इतना बड़ा अंतर आखिर क्यों दिखाई दे रहा है। ऐसे मे अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या इस मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होगी, या फिर गाटा संख्या 75 का यह विवाद आने वाले समय में और बड़े सवाल खड़े करेगा।
शातिर अपराधी गुफरान अहमद 6 महीने के लिए जिला बदर
ADM राकेश सिंह के आदेश पर पुलिस ने चस्पा की नोटिस


सुल्तानपुर। में जिला प्रशासन ने शनिवार को एक शातिर अपराधी गुफरान अहमद को 6 महीने के लिए जिला बदर कर दिया है। शनिवार दोपहर पुलिस ने अपराधी के घर पर न सिर्फ नोटिस चस्पा कराया बल्कि क्षेत्र में मुनादी भी कराया है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) राकेश सिंह की अदालत ने यह आदेश जारी किया। यह कार्रवाई योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत की गई है।

गुफरान अहमद कादीपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम खन्डौरा का निवासी है। वह इलाके में एक आदतन और शातिर अपराधी के रूप में सक्रिय था। पुलिस अधीक्षक सुल्तानपुर की रिपोर्ट और कादीपुर इंस्पेक्टर की जांच आख्या के आधार पर अदालत ने पाया कि गुफरान अहमद समाज के लिए गंभीर खतरा बन चुका था।

आरोपी गुफरान अहमद के खिलाफ कादीपुर थाने में कई गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि गुफरान अहमद एक आदतन अपराधी (गुंडा) है, जिसके खौफ के कारण आम जनता उसके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाती है। उसका जिले में स्वतंत्र घूमना जनहित और शांति व्यवस्था के लिए हानिकारक है। एडीएम राकेश सिंह ने उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह कार्रवाई की।

निष्कासन की 6 महीने की अवधि के दौरान गुफरान अहमद सुल्तानपुर जिले में निवास नहीं कर सकेगा और न ही जिले की सीमा में प्रवेश का प्रयास करेगा। उसे केवल अदालत में पेशी के दिन ही पूर्व अनुमति के साथ जिले में प्रवेश की अनुमति होगी। इस दौरान वह कोई भी आग्नेयास्त्र नहीं रख सकेगा। आरोपी को कादीपुर थानाध्यक्ष के समक्ष 50,000 रुपये का बंधपत्र भी प्रस्तुत करना होगा।

यदि आरोपी ने जिला बदर के इस आदेश का उल्लंघन किया या सुल्तानपुर की सीमा में पाया गया, तो उसके खिलाफ गुंडा एक्ट की धारा 10 और 11 के तहत सीधे जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।
खत्म हो गई तकरार! कल्याण बनर्जी के बदले सुर, अभिषेक बनर्जी को बताया बेटे समान

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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी के सुर बदले-बदले नजर आ रहे हैं। पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी को घमंडी कहने वाले कल्याण बनर्जी ने अब उन्हें अपने बेटे जैसा बताया है। इससे पहले हाल ही में कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी को अल्टीमेटम दिया था कि वे अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनमें से किसी एक को चुन लें।

श्रीरामपुर के दिग्गज सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, वह मेरे बेटा जैसा है। पिता का कर्तव्य है कि वह बेटे की सभी गलतियों को माफ कर दे। देश में लोकतंत्र खतरे में है। पश्चिम बंगाल में पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं आई, जहां विपक्ष का पूरी तरह से सफाया हो गया हो। यह मुख्यमंत्री प्रतिशोध की भावना से ग्रस्त है। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है।

24 घंटे पहले ममता बनर्जी को दिया था अल्टीमेटम

यह बयान ऐसे समय आया है, जब इससे महज 24 घंटे पहले कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर हमला बोलते हुए उन पर अहंकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने डायमंड हार्बर सांसद से जुड़े सभी कानूनी मामलों से खुद को अलग करने की घोषणा की थी और यहां तक कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को अल्टीमेटम भी दे दिया था कि वह अपने भतीजे और उन जैसे वरिष्ठों में से किसी एक को चुनें।

कल्याण बनर्जी के बयान पर अभिषेक का संयमित रुख

वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को संयमित रुख अपनाते हुए वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के साथ टकराव की अटकलों को विराम देने की कोशिश की। अभिषेक ने कल्याण बनर्जी को अपना राजनीतिक मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उन्हें आलोचना करने का पूरा अधिकार है, जिससे पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों के बीच सुलह और संतुलन का संदेश देने का प्रयास नजर आया।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी ने कल्याण बनर्जी को पैरवी से हटा दिया था। इससे कल्याण बनर्जी बुरी तरह से नाराज हो गए थे और इसे अपमान और अनादर बताया था। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने उन्हें फोन करके बताया कि अभिषेक बनर्जी के फर्जी हस्ताक्षर मामले में उन्हें कोर्ट नहीं जाना है और उनकी जगह वकील किशोर दत्ता पक्ष रखेंगे। कल्याण बनर्जी ने कहा 'अभिषेक को सीनियर्स का सम्मान करना नहीं आता। वह बहुत घमंडी है और कभी भी मुझ पर भरोसा नहीं करता था और न ही करेगा।'

मोदी सरकार के सफल 12 वर्ष पूर्ण होने पर निजामुद्दीन दरगाह में विशेष दुआ

मुस्लिम भाजपाइयों ने प्रधानमंत्री मोदी की दीर्घायु और देश की तरक्की के लिए मांगी दुआएं

भोपाल/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देश की राजधानी दिल्ली स्थित ऐतिहासिक हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह में विशेष दुआ और चादरपोशी का आयोजन किया गया। पसमांदा मुस्लिम समाज उत्थान समिति (पंजीकृत) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य तथा भारत की निरंतर प्रगति और समृद्धि के लिए सामूहिक दुआ की गई।

कार्यक्रम के दौरान देश में शांति, सौहार्द, भाईचारा और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की भी प्रार्थना की गई। समिति के मुख्य संरक्षक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता इरफ़ान अहमद तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष एहसान अब्बासी के नेतृत्व में दरगाह पर चादर और अकीदत के फूल पेश किए गए।

जनकल्याणकारी योजनाओं को बताया विकास की आधारशिला

इस अवसर पर आयोजित पत्रकार वार्ता में वक्ताओं ने केंद्र सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल को विकास, सुशासन और जनकल्याण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया। मुख्य संरक्षक इरफ़ान अहमद ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार की अनेक योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुद्रा योजना, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी पहल ने गरीब, पिछड़े और वंचित वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है। उन्होंने दावा किया कि इन योजनाओं के माध्यम से करोड़ों लोगों को बैंकिंग, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छता, रोजगार, पेयजल और खाद्यान्न जैसी मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिला है। साथ ही पसमांदा मुस्लिम समाज की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त किया गया।

अनेक गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित

कार्यक्रम में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य मुन्नव्वरी बेगम, अकरम हाशमी, बिलाल जै़दी, गुलाम निज़ाम निज़ामी, इकबाल खान, फुरकान सलमानी, बाबर निज़ामी, मजाहिर हुसैन सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।

मुख्य बिंदु:-

- हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया दरगाह में विशेष दुआ का आयोजन।

- प्रधानमंत्री मोदी की दीर्घायु और देश की उन्नति के लिए प्रार्थना।

- पसमांदा मुस्लिम समाज उत्थान समिति द्वारा चादरपोशी।

- केंद्र सरकार की 12 वर्षों की उपलब्धियों पर चर्चा।

- शांति, सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का संदेश।

सेवाढ़ाब में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, माइका लदा वाहन जब्त चालक अंधेरे का फायदा उठाकर फरार, जांच में दो नाम आए सामने;

  गिरिडीह: जिले के तिसरी थाना क्षेत्र के सेवाढाब में वन विभाग ने अवैध माइका कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए माइका से लदे एक पिकअप वाहन को जब्त किया है। हालांकि कार्रवाई के दौरान चालक अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। वन विभाग ने वाहन को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में दो लोगों के नाम सामने आने के बाद अवैध माइका कारोबार से जुड़े नेटवर्क को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारी के अनुसार, वन विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि तिसरी क्षेत्र के जंगलों से अवैध रूप से निकाला गया माइका पिकअप वाहन के माध्यम से बाहर भेजा जा रहा है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने देर रात सेवादाब के समीप घेराबंदी की। इसी दौरान संदिग्ध पिकअप वाहन को रोकने का प्रयास किया गया। वनकर्मियों को देखते ही चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। जब वाहन की तलाशी ली गई तो उसमें भारी मात्रा में माइका लदा मिला। इसके बाद वाहन को जब्त कर गावां बीट कार्यालय ले जाया गया। सूत्रों के अनुसार, पचरुखी, गड़कुरा समेत आसपास के जंगलों से माइका निकालकर विभिन्न रास्तों से उसकी ढुलाई किए जाने की सूचना वन विभाग को लगातार मिल रही थी। इसी आधार पर यह कार्रवाई की गई। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि जब्त माइका किस स्थान से लाया गया था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। इस संबंध में गावां के वनपाल राजेंद्र कुमार ने बताया कि मामले की जांच जारी है। अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। प्रारंभिक जांच में मुकेश बरनवाल एवं पिंटू यादव का नाम सामने आया है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के बावजूद थम नहीं रहा अवैध कारोबार स्थानीय सूत्रों की माने तो तिसरी, गावां और आसपास के क्षेत्रों में अवैध माइका कारोबार पर पूरी तरह लगाम नहीं लग सकी है। वन विभाग और प्रशासन की समय-समय पर होने वाली कार्रवाइयों के बावजूद कई माइका कारोबारी अब भी सक्रिय हैं और धड़ल्ले से अवैध कारोबार संचालित कर रहे हैं। जंगलों और बंद खदानों से माइका निकालकर विभिन्न माध्यमों से उसकी ढुलाई की जाती है। हालिया कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अवैध माइका कारोबार का नेटवर्क किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है और इस पर प्रभावी रोक कब लगेगी। छापेमारी दल में प्रभारी वनपाल राजेंद्र प्रसाद, वन उप परिसर पदाधिकारी, होमगार्ड जवान सुरेश महतो समेत अन्य वनकर्मी शामिल थे। वन विभाग का कहना है कि जांच के आधार पर जल्द ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब देखना है कि आगे और वन विभाग को कितनी सफलता मिलती है और कितना जल्द इस अवैध कारोबार पर पूर्णतः रोक लगाया जा सकेगा।
मुजफ्फरनगर: 10.68 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी में बड़ी कार्रवाई, ईओडब्ल्यू ने वांछित आरोपी जुनैद सैफी को किया गिरफ्तार
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में आर्थिक अपराधों और टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत 'आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन' (EOW) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। ईओडब्ल्यू की मेरठ सेक्टर टीम ने मुजफ्फरनगर जिले से करीब 10.68 करोड़ रुपये की जीएसटी (GST) और सेल टैक्स चोरी के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य अभियुक्त जुनैद सैफी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाने का आरोप है।

सोची-समझी साजिश के तहत बनाई फर्जी फर्म

मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्त जुनैद सैफी, पुत्र नासिर सैफी, मुजफ्फरनगर के सुजडू चुंगी (जहांगीर पट्टी) का रहने वाला है। वह मुजफ्फरनगर के जी.टी. रोड पर स्थित 'सर्वश्री राजकमल ट्रेडर्स' नाम की फर्म का स्वामी था।आरोप है कि जुनैद सैफी ने अपने कुछ अन्य साथियों के साथ मिलकर एक योजनाबद्ध आपराधिक षड्यंत्र रचा था। इन लोगों ने टैक्स चोरी (करापवंचन) करने के उद्देश्य से फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लिया और कपटपूर्ण तरीके से 'श्री राजकमल ट्रेडर्स' नाम की फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया।

ऐसे दिया अरबों के वित्तीय घोटाले को अंजाम

ईओडब्ल्यू (EOW) द्वारा की गई जांच में सामने आया कि आरोपी जुनैद ने न सिर्फ कागजों पर फर्जी फर्म खड़ी की, बल्कि बड़े पैमाने पर सेल टैक्स की चोरी भी की। इस फर्जीवाड़े के जरिए उसने अपनी फर्म से जुड़ी अन्य अनुवर्ती (आगे की) फर्मों को अवैध रूप से करोड़ों रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ पहुंचाया। इस पूरी हेराफेरी के माध्यम से आरोपियों ने सरकार को सीधे तौर पर 10,68,00,000 रुपये (दस करोड़ अड़सठ लाख रुपये) की जीएसटी की चपत लगाई और खुद अवैध रूप से मोटा मुनाफा कमाया।

दर्ज मामले और पुलिस की कार्रवाई

इस धोखाधड़ी को लेकर मुजफ्फरनगर के थाना मन्सूरपुर में मुकदमा अपराध संख्या 77/21 दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच (विवेचना संख्या-22/23) ईओडब्ल्यू मेरठ सेक्टर को सौंपी गई थी। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 419, 409, 420, 467, 468, 471, 120बी के साथ-साथ आईटी एक्ट की धारा 66सी और जीएसटी एक्ट की धारा 35(i) के तहत केस दर्ज है।

आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था

मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था। ईओडब्ल्यू लखनऊ के निर्देश पर वांछित अपराधियों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत, पुलिस अधीक्षक (EOW मेरठ सेक्टर) के पर्यवेक्षण में टीम का गठन किया गया। ईओडब्ल्यू की टीम ने जाल बिछाकर 12 जून 2026 को आरोपी जुनैद सैफी को मुजफ्फरनगर से धर दबोचा। पुलिस अब इस सिंडिकेट में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।
डॉ. प्रदीप नारायण डोंगरे को प्रोफेसर पदनाम मिला: प्राचार्य पद पर रहते हुए यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले व्यक्ति

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही ‌। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, ज्ञानपुर के पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रदीप नारायण डोंगरे को प्रोफेसर पदनाम प्रदान किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने उन्हें यह पदनाम उनके विषय वनस्पति विज्ञान में उनकी शैक्षणिक और शोध विशेषज्ञता के आधार पर दिया है।
डॉ. डोंगरे ने इस पद के लिए पहली बार वर्ष 2022 में आवेदन किया था। हालांकि, वांछित आदेश जारी नहीं हुए। इसके बाद, उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत अनुमति प्राप्त करने के बाद वर्ष 2025 में पुनः आवेदन किया। लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी आदेश प्राप्त न होने पर डॉ. डोंगरे ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। वे प्राचार्य पद पर चयन के उपरांत संबंधित विषय में प्रोफेसर पदनाम प्राप्त करने वाले प्रदेश के पहले और एकमात्र प्राचार्य हैं।
भीषण सड़क हादसे में कैसे बचा शर्मा परिवार,साहस, संघर्ष और पारिवारिक समर्पण की प्रेरणादायक कहानी
मुंबई। मुंबई निवासी अंकुर शर्मा और उनके परिवार की यह सच्ची कहानी केवल एक सड़क दुर्घटना की नहीं, बल्कि अदम्य साहस, पारिवारिक प्रेम, धैर्य और ईश्वर की कृपा की मिसाल है। यह घटना सिद्ध करती है कि जब इंसान का हौसला अडिग हो और परिवार एकजुट हो, तो जीवन की सबसे कठिन परीक्षाएं भी पार की जा सकती हैं।
24 दिसंबर 2025 की सुबह लगभग 6:30 बजे राजस्थान के एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर अंकुर शर्मा अपनी पत्नी पूनम शर्मा, 12 वर्षीय पुत्री वंशिका शर्मा, 4 वर्षीय पुत्र देवांश शर्मा और चालक संजय के साथ यात्रा कर रहे थे। यात्रा सामान्य रूप से चल रही थी कि अचानक सामने चल रहे ट्रक ने तेज ब्रेक लगा दिए। इससे उनकी कार ट्रक के पीछे जा टकराई और देखते ही देखते एक भयावह दुर्घटना घट गई।हादसे में पूनम शर्मा, वंशिका शर्मा और चालक गंभीर रूप से घायल हो गए। स्वयं अंकुर शर्मा को भी अंदरूनी चोटें आईं। सौभाग्यवश छोटे देवांश को गंभीर चोट नहीं लगी। दुर्घटना के दौरान मात्र 12 वर्ष की वंशिका ने जिस साहस और सूझबूझ का परिचय दिया, वह किसी बड़े व्यक्ति से कम नहीं था। उसने अपने छोटे भाई की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। घायल होने के बावजूद अंकुर शर्मा ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने सबसे पहले अपने परिवार को बचाने का संकल्प लिया। इसी बीच अश्विन नामक एक सज्जन व्यक्ति देवदूत बनकर सामने आए। उनकी मदद से सभी घायलों को तत्काल निकटवर्ती अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार दिया गया। संकट की उस घड़ी में अश्विनी का सहयोग शर्मा परिवार कभी नहीं भूल सकता। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए अंकुर शर्मा ने तुरंत एम्बुलेंस की व्यवस्था की और लगभग 70 किलोमीटर दूर जोधपुर स्थित मथुरादास माथुर अस्पताल में परिवार को भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों ने गहन चिकित्सा शुरू की, लेकिन सबसे चिंताजनक स्थिति पूनम शर्मा की थी। उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। पूरा परिवार अनिश्चितता और चिंता के दौर से गुजर रहा था।
कई दिनों तक चले इलाज के बाद अंकुर शर्मा ने अपनी पत्नी को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का कठिन निर्णय लिया। 29 दिसंबर 2025 को विशेष व्यवस्था के तहत पूनम शर्मा को एयरलिफ्ट कर मुंबई लाया गया और उन्हें लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. अतुल गोयल के मार्गदर्शन में उनका उपचार प्रारंभ हुआ।
अंकुर शर्मा बताते हैं कि उनके जीवन का यह सबसे कठिन समय था। एक ओर पत्नी जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही थीं, दूसरी ओर चार वर्षीय पुत्र की देखभाल की जिम्मेदारी थी। अस्पताल और घर के बीच उनका जीवन सीमित हो गया था। प्रतिदिन लगभग 17 घंटे अस्पताल में बिताना उनकी दिनचर्या बन गई थी। जब वे घर जाते, तब उनके पिता अस्पताल में रहकर परिवार का संबल बनते। इस कठिन दौर में अंकुर शर्मा के माता-पिता और पुत्री वंशिका ने असाधारण धैर्य और साहस का परिचय दिया। अंकुर शर्मा स्वीकार करते हैं कि यदि परिवार का साथ न होता तो इस संघर्ष को पार कर पाना संभव नहीं था। पहले 108 दिनों तक उन्हें पर्याप्त नींद और आराम भी नसीब नहीं हुआ।
लगभग 35 दिनों बाद जब पूनम शर्मा को आईसीयू से सामान्य वार्ड में स्थानांतरित किया गया, तब परिवार को पहली बार राहत की किरण दिखाई दी। इसके बाद धीरे-धीरे स्वास्थ्य में सुधार होता गया।आखिरकार 10 अप्रैल 2026 को 108 दिनों तक चले लंबे उपचार, चिकित्सकों के अथक प्रयास और परिवार की अटूट सेवा के बाद पूनम शर्मा को लीलावती अस्पताल से छुट्टी मिल गई। आज वे पूर्णतः स्वस्थ होकर अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन व्यतीत कर रही हैं।
यह कहानी केवल एक दुर्घटना से बच निकलने की नहीं है। यह कहानी है एक पति के समर्पण की, एक पिता के उत्तरदायित्व की, एक बेटी के साहस की, माता-पिता के त्याग की और उस विश्वास की, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मनुष्य को टूटने नहीं देता।
अंकुर शर्मा ने जिस प्रकार विपरीत परिस्थितियों में अपने परिवार का साथ निभाया, वह आज के समाज के लिए एक प्रेरणा है। उनका संघर्ष हमें सिखाता है कि सच्चा पारिवारिक प्रेम केवल सुख के दिनों में नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में अपने वास्तविक स्वरूप में दिखाई देता है।
सच ही कहा गया है—
"जाको राखे साईंया, मार सके ना कोय।"
धोबी समाज विकास वेलफेयर एसोसिएशन विरार के अध्यक्ष बने विनोद कनौजिया
विरार। धोबी समाज विकास वेलफेयर एसोसिएशन,विरार के चुनाव समिति की बैठक में चुनाव समिति के अध्यक्ष शेष बहादुर अक्षैवर कनौजिया ने सर्व सम्मति से विनोद लालमणि कनौजिया को धोबी समाज विकास वेलफेयर एसोसिएशन विरार का नया अध्यक्ष घोषित किया। इसके उपरांत मौजूद सभी लोगों ने पुष्पगुच्छ तथा भारतीय संविधान की किताब देकर उनका अभिनन्दन किया। इसके बाद उपस्थित सभी सदस्यों ने अशोक कनौजिया को महासचिव तथा शशीकांत कनौजिया को कोषाध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा जिसे चुनाव समिति के अध्यक्ष महोदय ने सर्वसम्मति से अशोक कनौजिया को महासचिव तथा शशीकांत कनौजिया को कोषाध्यक्ष घोषित किया। सभी लोगों ने उनके नेतृत्व में एकजुट होकर समाज के विकास में कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलने का आश्वासन दिया, सभी को उम्मीद है कि पूर्व अध्यक्ष की तरह उनके नेतृत्व में भी समाज मजबूत होगा। इस अवसर पर पूर्व अध्यक्ष दिनेश कुमार (दीनूकाका),छविनाथ रजक,शेष बहादुर कनौजिया, गामा प्रसाद रजक, जिया लाल कनौजिया, अरविंद कनौजिया (एल आई सी एजेंट), प्रेम शंकर कनौजिया, अरविंद (shonu)कनौजिया पूर्व कप्तान क्रिकेट टीम,राम आसरे, सतीश, सियाराम, मेवालाल, राजेश, फूलचंद, रवि, ओमप्रकाश, छोटे लाल, जयप्रकाश (पप्पू) समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।
महदा में आयोजित श्री राम कथा के पांचवें दिन राम– सीता  विवाह के जश्न में डूबा उपाध्याय परिवार
जौनपुर। राम कथा (रामायण) केवल एक धार्मिक कहानी नहीं, बल्कि मानव जीवन जीने की कला और आदर्शों का एक संपूर्ण मार्गदर्शक है। इसका मूल संदेश मर्यादा (कर्तव्य का पालन), प्रेम, त्याग, और धर्म की विजय है, जो हमें सिखाता है कि हर परिस्थिति में सत्य और सदाचार का मार्ग कैसे अपनाना चाहिए। बदलापुर तहसील अंतर्गत स्थित महदा, बहरीपुर गांव में पंडित रामजी उपाध्याय के यहां आयोजित संगीतमय श्री रामकथा के पांचवें दिन प्यास पीठ से बोलते हुए प्रख्यात कथावाचक पंडित धर्मराज तिवारी महाराज ने उपरोक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि आदर्श पुत्र भाई, पति, राजा के रूप में भगवान राम का चरित्र समाज के लिए प्रेरणादायक और अनुकरणीय है। कथा के दौरान मंच पर राम  विवाह का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें उपाध्याय परिवार के साथ-साथ उपस्थित सभी लोगों ने नाच गाकर जश्न मनाया। कार्यक्रम के आयोजक पंडित रामजी उपाध्याय , उनकी धर्मपत्नी ललिता देवी, दोनों पुत्र  मुंबई के युवा उद्योगपति हरिवंश उपाध्याय और जन प्रकृति सेवा ट्रस्ट के संस्थापक रघुवंश उपाध्याय के अलावा पौत्र आशुतोष उपाध्याय, बेटी हिमलेश उपाध्याय समेत पूरे परिवार ने राम विवाह के बाद जमकर दान दक्षिणा भी की। खुशी का आलम यह था कि हरिवंश उपाध्याय मंच पर नोटों की गड्डी उड़ाते दिखाई दिए। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में सीओ बदलापुर सुनील चंद तिवारी, सिंगरामऊ थाना प्रभारी अखिलेश मौर्या, पूर्व प्रधानाचार्य बद्रीनारायण मिश्र, भाजपा जिला कार्य समिति सदस्य सुचिता तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, रामचंद्र पांडे सुभाष तिवारी, लाल बहादुर यादव, सुरेश चंद्र मिश्र, राकेश पाठक, रमेश चंद्र मिश्र, मुन्ना मिश्रा, संजय पांडे, ओंकार नाथ उपाध्याय समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।
बिलग्राम तहसील प्रशासन के कारनामे, मेड़बंदी कराई, कब्जा दिलाया, फिर बदल गई रिपोर्ट
*गाटा संख्या 75 मे 0.0918 हेक्टेयर भूमि घाटे की पैमाइश पर पारित हुआ था थाकबंदी आदेश*

*मेड़ तोड़े जाने की पुष्टि के बाद भी कार्रवाई नहीं बाद की रिपोर्ट ने खड़े किए नए प्रश्न*

रितेश मिश्रा
हरदोई। उत्तर प्रदेश सरकार जहां प्रशासन में पारदर्शिता और "जीरो टॉलरेंस" नीति को सुशासन का आधार बताती है, वहीं हरदोई जिले की बिलग्राम तहसील का एक भूमि विवाद राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक ही प्रकरण में पहले पैमाइश, फिर थाकबंदी आदेश, उसके अनुपालन में मेड़बंदी और कब्जा दिलाने की कार्रवाई, और बाद में उसी मामले में विपरीत रिपोर्ट—पूरा घटनाक्रम ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।बिलग्राम तहसील के ग्राम श्यामपुर में गाटा संख्या 75 से जुड़े इस मामले में न्यायालय के आदेश से लेकर प्रशासनिक कार्रवाई तक की कहानी कई मोड़ों से गुजरती है। हर मोड़ पर एक नया सवाल खड़ा होता है और हर सवाल का जवाब अभी भी फाइलों के पन्नों में तलाशा जा रहा है।ग्राम श्यामपुर निवासी दिवाकर मिश्रा पुत्र प्रेमचंद्र ने गाटा संख्या 75 की भूमि के संबंध में उपजिलाधिकारी बिलग्राम के न्यायालय में थाकबदी वाद प्रस्तुत किया था। न्यायालय के निर्देश पर क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक ने मौके पर पैमाइश कर नक्शा नजरी एवं थाकबंदी आख्या तैयार की।
पैमाइश में सामने आया 0.0918 हेक्टेयर भूमि का घाटा
राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 75 का क्षेत्रफल 0.2710 हेक्टेयर दर्ज था, जबकि मौके पर हुई पैमाइश में उसका वास्तविक क्षेत्रफल मात्र 0.1792 हेक्टेयर पाया गया। इस प्रकार गाटा संख्या 75 में कुल 0.0918 हेक्टेयर भूमि का घाटा दर्ज हुआ।
इतना ही नहीं, आसपास के कई गाटों में क्षेत्रफल की बढ़त भी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार—
गाटा संख्या 55 में 0.0635 हेक्टेयर बढ़त
गाटा संख्या 74 में 0.0376 हेक्टेयर बढ़त
गाटा संख्या 76 में 0.0278 हेक्टेयर बढ़त
गाटा संख्या 77 में 0.0283 हेक्टेयर बढ़त
गाटा संख्या 72 एवं 73 में भी क्षेत्रफल का अंतर दर्ज किया गया
पड़ोसी गाटों की पैमाइश के आधार पर तैयार आख्या न्यायालय में प्रस्तुत की गई। प्रभावित पक्षों को समन और समाचार पत्र के माध्यम से सूचना दी गई, लेकिन किसी भी पक्ष ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। इसके बाद एसडीएम न्यायालय ने 28 मई 2025 को प्रस्तुत आख्या को स्वीकार करते हुए थाकबंदी आदेश पारित कर दिया।
आदेश मिला, लेकिन अनुपालन में हुई देरी

दिवाकर मिश्रा का आरोप है कि न्यायालय का आदेश पारित होने के बावजूद लंबे समय तक उसका अनुपालन नहीं कराया गया। न्यायालय का आदेश अभिलेखों में दर्ज रहा, लेकिन जमीन पर उसकी तस्वीर दिखाई नहीं दी।आखिरकार 11 मार्च 2026 को दिवाकर मिश्रा ने जिलाधिकारी हरदोई को शिकायत देकर थाकबंदी आदेश का अनुपालन कराने की मांग कीजिलाधिकारी के निर्देश के बाद एसडीएम बिलग्राम ने राजस्व निरीक्षक और लेखपाल को मौके पर भेजा। इसके बाद मेड़बंदी कराई गई और दिवाकर मिश्रा को भूमि पर कब्जा दिलाया गया।

कब्जे के बाद फिर शुरू हुआ विवाद

दिवाकर मिश्रा का आरोप है कि कब्जा मिलने के बाद रामलखन त्रिपाठी पुत्र श्याममोहन तथा उमाकांत शुक्ल निवासी बालामऊ चार-पांच अन्य व्यक्तियों के साथ मौके पर पहुंचे और बनाई गई मेड़ को तोड़ दिया। आरोप है कि भूमि को पुनः अपने खेत में मिला लिया गया तथा विरोध करने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई।
इस संबंध में दिवाकर मिश्रा नेआईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत संख्या20015536022250 दर्ज कराई।

पहली रिपोर्ट में मेड़ तोड़ने की पुष्टि

शिकायत की जांच में क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक ने 19 मई 2026 को प्रस्तुत अपनी आख्या में मेड़ तोड़े जाने का उल्लेख किया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि थाकबंदी आदेश के अनुरूप की गई मेड़बंदी को नहीं माना गया और मौके की स्थिति बदल दी गई।
रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की उम्मीद जगी, लेकिन दिवाकर मिश्रा का आरोप है कि इसके बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

दूसरी शिकायत और बदल गई पूरी तस्वीर

इसके बाद दिवाकर मिश्रा ने पुनः आईजीआरएस शिकायत संख्या 20015526024152 दर्ज कराई। इस बार जांच में प्रस्तुत रिपोर्ट ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।
आरोप है कि उसी राजस्व निरीक्षक ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा कि आवेदक का भू-चित्र छोटा बना हुआ है, इसलिए उसे पूरी भूमि नहीं दी जा सकती। रिपोर्ट में विपक्षी पक्ष के प्रत्यावेदन का भी उल्लेख किया गया। बाद में एसडीएम बिलग्राम स्तर से भी इसी आधार पर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई।

सवालों के घेरे में पूरा घटनाक्रम

यहीं से कई प्रश्न जन्म लेते हैं। यदि भू-चित्र छोटा था तो उसी पैमाइश रिपोर्ट के आधार पर थाकबंदी आदेश कैसे पारित हुआ? यदि आदेश सही नहीं था तो प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर मेड़बंदी कर कब्जा क्यों दिलाया? और यदि कब्जा दिलाना सही था तो बाद में अधिकारियों की रिपोर्ट का आधार क्या था?
जब पहली रिपोर्ट में मेड़ तोड़े जाने की पुष्टि हो चुकी थी, तब संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि दूसरी रिपोर्ट सही है तो पहली रिपोर्ट तथा उसके आधार पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई को किस नजर से देखा जाए?
यही वे प्रश्न हैं जो आज ग्राम श्यामपुर से लेकर तहसील मुख्यालय तक चर्चा का विषय बने हुए हैं।
जांच की मांग तेज
दिवाकर मिश्रा ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि न्यायालय के आदेश, पैमाइश रिपोर्ट, नक्शा नजरी, आईजीआरएस शिकायतों और बाद में प्रस्तुतविरोधाभासी रिपोर्टों की समग्र जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि एक ही मामले में सरकारी अभिलेखों और प्रशासनिक निष्कर्षों में इतना बड़ा अंतर आखिर क्यों दिखाई दे रहा है। ऐसे मे अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या इस मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होगी, या फिर गाटा संख्या 75 का यह विवाद आने वाले समय में और बड़े सवाल खड़े करेगा।
शातिर अपराधी गुफरान अहमद 6 महीने के लिए जिला बदर
ADM राकेश सिंह के आदेश पर पुलिस ने चस्पा की नोटिस


सुल्तानपुर। में जिला प्रशासन ने शनिवार को एक शातिर अपराधी गुफरान अहमद को 6 महीने के लिए जिला बदर कर दिया है। शनिवार दोपहर पुलिस ने अपराधी के घर पर न सिर्फ नोटिस चस्पा कराया बल्कि क्षेत्र में मुनादी भी कराया है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) राकेश सिंह की अदालत ने यह आदेश जारी किया। यह कार्रवाई योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत की गई है।

गुफरान अहमद कादीपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम खन्डौरा का निवासी है। वह इलाके में एक आदतन और शातिर अपराधी के रूप में सक्रिय था। पुलिस अधीक्षक सुल्तानपुर की रिपोर्ट और कादीपुर इंस्पेक्टर की जांच आख्या के आधार पर अदालत ने पाया कि गुफरान अहमद समाज के लिए गंभीर खतरा बन चुका था।

आरोपी गुफरान अहमद के खिलाफ कादीपुर थाने में कई गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि गुफरान अहमद एक आदतन अपराधी (गुंडा) है, जिसके खौफ के कारण आम जनता उसके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाती है। उसका जिले में स्वतंत्र घूमना जनहित और शांति व्यवस्था के लिए हानिकारक है। एडीएम राकेश सिंह ने उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह कार्रवाई की।

निष्कासन की 6 महीने की अवधि के दौरान गुफरान अहमद सुल्तानपुर जिले में निवास नहीं कर सकेगा और न ही जिले की सीमा में प्रवेश का प्रयास करेगा। उसे केवल अदालत में पेशी के दिन ही पूर्व अनुमति के साथ जिले में प्रवेश की अनुमति होगी। इस दौरान वह कोई भी आग्नेयास्त्र नहीं रख सकेगा। आरोपी को कादीपुर थानाध्यक्ष के समक्ष 50,000 रुपये का बंधपत्र भी प्रस्तुत करना होगा।

यदि आरोपी ने जिला बदर के इस आदेश का उल्लंघन किया या सुल्तानपुर की सीमा में पाया गया, तो उसके खिलाफ गुंडा एक्ट की धारा 10 और 11 के तहत सीधे जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।
खत्म हो गई तकरार! कल्याण बनर्जी के बदले सुर, अभिषेक बनर्जी को बताया बेटे समान

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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी के सुर बदले-बदले नजर आ रहे हैं। पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी को घमंडी कहने वाले कल्याण बनर्जी ने अब उन्हें अपने बेटे जैसा बताया है। इससे पहले हाल ही में कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी को अल्टीमेटम दिया था कि वे अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनमें से किसी एक को चुन लें।

श्रीरामपुर के दिग्गज सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, वह मेरे बेटा जैसा है। पिता का कर्तव्य है कि वह बेटे की सभी गलतियों को माफ कर दे। देश में लोकतंत्र खतरे में है। पश्चिम बंगाल में पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं आई, जहां विपक्ष का पूरी तरह से सफाया हो गया हो। यह मुख्यमंत्री प्रतिशोध की भावना से ग्रस्त है। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है।

24 घंटे पहले ममता बनर्जी को दिया था अल्टीमेटम

यह बयान ऐसे समय आया है, जब इससे महज 24 घंटे पहले कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर हमला बोलते हुए उन पर अहंकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने डायमंड हार्बर सांसद से जुड़े सभी कानूनी मामलों से खुद को अलग करने की घोषणा की थी और यहां तक कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को अल्टीमेटम भी दे दिया था कि वह अपने भतीजे और उन जैसे वरिष्ठों में से किसी एक को चुनें।

कल्याण बनर्जी के बयान पर अभिषेक का संयमित रुख

वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को संयमित रुख अपनाते हुए वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के साथ टकराव की अटकलों को विराम देने की कोशिश की। अभिषेक ने कल्याण बनर्जी को अपना राजनीतिक मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उन्हें आलोचना करने का पूरा अधिकार है, जिससे पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों के बीच सुलह और संतुलन का संदेश देने का प्रयास नजर आया।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी ने कल्याण बनर्जी को पैरवी से हटा दिया था। इससे कल्याण बनर्जी बुरी तरह से नाराज हो गए थे और इसे अपमान और अनादर बताया था। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने उन्हें फोन करके बताया कि अभिषेक बनर्जी के फर्जी हस्ताक्षर मामले में उन्हें कोर्ट नहीं जाना है और उनकी जगह वकील किशोर दत्ता पक्ष रखेंगे। कल्याण बनर्जी ने कहा 'अभिषेक को सीनियर्स का सम्मान करना नहीं आता। वह बहुत घमंडी है और कभी भी मुझ पर भरोसा नहीं करता था और न ही करेगा।'

मोदी सरकार के सफल 12 वर्ष पूर्ण होने पर निजामुद्दीन दरगाह में विशेष दुआ

मुस्लिम भाजपाइयों ने प्रधानमंत्री मोदी की दीर्घायु और देश की तरक्की के लिए मांगी दुआएं

भोपाल/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देश की राजधानी दिल्ली स्थित ऐतिहासिक हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह में विशेष दुआ और चादरपोशी का आयोजन किया गया। पसमांदा मुस्लिम समाज उत्थान समिति (पंजीकृत) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य तथा भारत की निरंतर प्रगति और समृद्धि के लिए सामूहिक दुआ की गई।

कार्यक्रम के दौरान देश में शांति, सौहार्द, भाईचारा और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की भी प्रार्थना की गई। समिति के मुख्य संरक्षक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता इरफ़ान अहमद तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष एहसान अब्बासी के नेतृत्व में दरगाह पर चादर और अकीदत के फूल पेश किए गए।

जनकल्याणकारी योजनाओं को बताया विकास की आधारशिला

इस अवसर पर आयोजित पत्रकार वार्ता में वक्ताओं ने केंद्र सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल को विकास, सुशासन और जनकल्याण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया। मुख्य संरक्षक इरफ़ान अहमद ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार की अनेक योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुद्रा योजना, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी पहल ने गरीब, पिछड़े और वंचित वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है। उन्होंने दावा किया कि इन योजनाओं के माध्यम से करोड़ों लोगों को बैंकिंग, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छता, रोजगार, पेयजल और खाद्यान्न जैसी मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिला है। साथ ही पसमांदा मुस्लिम समाज की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त किया गया।

अनेक गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित

कार्यक्रम में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य मुन्नव्वरी बेगम, अकरम हाशमी, बिलाल जै़दी, गुलाम निज़ाम निज़ामी, इकबाल खान, फुरकान सलमानी, बाबर निज़ामी, मजाहिर हुसैन सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।

मुख्य बिंदु:-

- हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया दरगाह में विशेष दुआ का आयोजन।

- प्रधानमंत्री मोदी की दीर्घायु और देश की उन्नति के लिए प्रार्थना।

- पसमांदा मुस्लिम समाज उत्थान समिति द्वारा चादरपोशी।

- केंद्र सरकार की 12 वर्षों की उपलब्धियों पर चर्चा।

- शांति, सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का संदेश।

सेवाढ़ाब में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, माइका लदा वाहन जब्त चालक अंधेरे का फायदा उठाकर फरार, जांच में दो नाम आए सामने;

  गिरिडीह: जिले के तिसरी थाना क्षेत्र के सेवाढाब में वन विभाग ने अवैध माइका कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए माइका से लदे एक पिकअप वाहन को जब्त किया है। हालांकि कार्रवाई के दौरान चालक अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। वन विभाग ने वाहन को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में दो लोगों के नाम सामने आने के बाद अवैध माइका कारोबार से जुड़े नेटवर्क को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारी के अनुसार, वन विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि तिसरी क्षेत्र के जंगलों से अवैध रूप से निकाला गया माइका पिकअप वाहन के माध्यम से बाहर भेजा जा रहा है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने देर रात सेवादाब के समीप घेराबंदी की। इसी दौरान संदिग्ध पिकअप वाहन को रोकने का प्रयास किया गया। वनकर्मियों को देखते ही चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। जब वाहन की तलाशी ली गई तो उसमें भारी मात्रा में माइका लदा मिला। इसके बाद वाहन को जब्त कर गावां बीट कार्यालय ले जाया गया। सूत्रों के अनुसार, पचरुखी, गड़कुरा समेत आसपास के जंगलों से माइका निकालकर विभिन्न रास्तों से उसकी ढुलाई किए जाने की सूचना वन विभाग को लगातार मिल रही थी। इसी आधार पर यह कार्रवाई की गई। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि जब्त माइका किस स्थान से लाया गया था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। इस संबंध में गावां के वनपाल राजेंद्र कुमार ने बताया कि मामले की जांच जारी है। अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। प्रारंभिक जांच में मुकेश बरनवाल एवं पिंटू यादव का नाम सामने आया है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के बावजूद थम नहीं रहा अवैध कारोबार स्थानीय सूत्रों की माने तो तिसरी, गावां और आसपास के क्षेत्रों में अवैध माइका कारोबार पर पूरी तरह लगाम नहीं लग सकी है। वन विभाग और प्रशासन की समय-समय पर होने वाली कार्रवाइयों के बावजूद कई माइका कारोबारी अब भी सक्रिय हैं और धड़ल्ले से अवैध कारोबार संचालित कर रहे हैं। जंगलों और बंद खदानों से माइका निकालकर विभिन्न माध्यमों से उसकी ढुलाई की जाती है। हालिया कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अवैध माइका कारोबार का नेटवर्क किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है और इस पर प्रभावी रोक कब लगेगी। छापेमारी दल में प्रभारी वनपाल राजेंद्र प्रसाद, वन उप परिसर पदाधिकारी, होमगार्ड जवान सुरेश महतो समेत अन्य वनकर्मी शामिल थे। वन विभाग का कहना है कि जांच के आधार पर जल्द ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब देखना है कि आगे और वन विभाग को कितनी सफलता मिलती है और कितना जल्द इस अवैध कारोबार पर पूर्णतः रोक लगाया जा सकेगा।
मुजफ्फरनगर: 10.68 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी में बड़ी कार्रवाई, ईओडब्ल्यू ने वांछित आरोपी जुनैद सैफी को किया गिरफ्तार
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में आर्थिक अपराधों और टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत 'आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन' (EOW) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। ईओडब्ल्यू की मेरठ सेक्टर टीम ने मुजफ्फरनगर जिले से करीब 10.68 करोड़ रुपये की जीएसटी (GST) और सेल टैक्स चोरी के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य अभियुक्त जुनैद सैफी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लगाने का आरोप है।

सोची-समझी साजिश के तहत बनाई फर्जी फर्म

मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार अभियुक्त जुनैद सैफी, पुत्र नासिर सैफी, मुजफ्फरनगर के सुजडू चुंगी (जहांगीर पट्टी) का रहने वाला है। वह मुजफ्फरनगर के जी.टी. रोड पर स्थित 'सर्वश्री राजकमल ट्रेडर्स' नाम की फर्म का स्वामी था।आरोप है कि जुनैद सैफी ने अपने कुछ अन्य साथियों के साथ मिलकर एक योजनाबद्ध आपराधिक षड्यंत्र रचा था। इन लोगों ने टैक्स चोरी (करापवंचन) करने के उद्देश्य से फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लिया और कपटपूर्ण तरीके से 'श्री राजकमल ट्रेडर्स' नाम की फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया।

ऐसे दिया अरबों के वित्तीय घोटाले को अंजाम

ईओडब्ल्यू (EOW) द्वारा की गई जांच में सामने आया कि आरोपी जुनैद ने न सिर्फ कागजों पर फर्जी फर्म खड़ी की, बल्कि बड़े पैमाने पर सेल टैक्स की चोरी भी की। इस फर्जीवाड़े के जरिए उसने अपनी फर्म से जुड़ी अन्य अनुवर्ती (आगे की) फर्मों को अवैध रूप से करोड़ों रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ पहुंचाया। इस पूरी हेराफेरी के माध्यम से आरोपियों ने सरकार को सीधे तौर पर 10,68,00,000 रुपये (दस करोड़ अड़सठ लाख रुपये) की जीएसटी की चपत लगाई और खुद अवैध रूप से मोटा मुनाफा कमाया।

दर्ज मामले और पुलिस की कार्रवाई

इस धोखाधड़ी को लेकर मुजफ्फरनगर के थाना मन्सूरपुर में मुकदमा अपराध संख्या 77/21 दर्ज किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच (विवेचना संख्या-22/23) ईओडब्ल्यू मेरठ सेक्टर को सौंपी गई थी। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 419, 409, 420, 467, 468, 471, 120बी के साथ-साथ आईटी एक्ट की धारा 66सी और जीएसटी एक्ट की धारा 35(i) के तहत केस दर्ज है।

आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था

मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था। ईओडब्ल्यू लखनऊ के निर्देश पर वांछित अपराधियों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत, पुलिस अधीक्षक (EOW मेरठ सेक्टर) के पर्यवेक्षण में टीम का गठन किया गया। ईओडब्ल्यू की टीम ने जाल बिछाकर 12 जून 2026 को आरोपी जुनैद सैफी को मुजफ्फरनगर से धर दबोचा। पुलिस अब इस सिंडिकेट में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।
डॉ. प्रदीप नारायण डोंगरे को प्रोफेसर पदनाम मिला: प्राचार्य पद पर रहते हुए यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले व्यक्ति

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही ‌। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, ज्ञानपुर के पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रदीप नारायण डोंगरे को प्रोफेसर पदनाम प्रदान किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने उन्हें यह पदनाम उनके विषय वनस्पति विज्ञान में उनकी शैक्षणिक और शोध विशेषज्ञता के आधार पर दिया है।
डॉ. डोंगरे ने इस पद के लिए पहली बार वर्ष 2022 में आवेदन किया था। हालांकि, वांछित आदेश जारी नहीं हुए। इसके बाद, उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत अनुमति प्राप्त करने के बाद वर्ष 2025 में पुनः आवेदन किया। लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी आदेश प्राप्त न होने पर डॉ. डोंगरे ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। वे प्राचार्य पद पर चयन के उपरांत संबंधित विषय में प्रोफेसर पदनाम प्राप्त करने वाले प्रदेश के पहले और एकमात्र प्राचार्य हैं।
भीषण सड़क हादसे में कैसे बचा शर्मा परिवार,साहस, संघर्ष और पारिवारिक समर्पण की प्रेरणादायक कहानी
मुंबई। मुंबई निवासी अंकुर शर्मा और उनके परिवार की यह सच्ची कहानी केवल एक सड़क दुर्घटना की नहीं, बल्कि अदम्य साहस, पारिवारिक प्रेम, धैर्य और ईश्वर की कृपा की मिसाल है। यह घटना सिद्ध करती है कि जब इंसान का हौसला अडिग हो और परिवार एकजुट हो, तो जीवन की सबसे कठिन परीक्षाएं भी पार की जा सकती हैं।
24 दिसंबर 2025 की सुबह लगभग 6:30 बजे राजस्थान के एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर अंकुर शर्मा अपनी पत्नी पूनम शर्मा, 12 वर्षीय पुत्री वंशिका शर्मा, 4 वर्षीय पुत्र देवांश शर्मा और चालक संजय के साथ यात्रा कर रहे थे। यात्रा सामान्य रूप से चल रही थी कि अचानक सामने चल रहे ट्रक ने तेज ब्रेक लगा दिए। इससे उनकी कार ट्रक के पीछे जा टकराई और देखते ही देखते एक भयावह दुर्घटना घट गई।हादसे में पूनम शर्मा, वंशिका शर्मा और चालक गंभीर रूप से घायल हो गए। स्वयं अंकुर शर्मा को भी अंदरूनी चोटें आईं। सौभाग्यवश छोटे देवांश को गंभीर चोट नहीं लगी। दुर्घटना के दौरान मात्र 12 वर्ष की वंशिका ने जिस साहस और सूझबूझ का परिचय दिया, वह किसी बड़े व्यक्ति से कम नहीं था। उसने अपने छोटे भाई की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। घायल होने के बावजूद अंकुर शर्मा ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने सबसे पहले अपने परिवार को बचाने का संकल्प लिया। इसी बीच अश्विन नामक एक सज्जन व्यक्ति देवदूत बनकर सामने आए। उनकी मदद से सभी घायलों को तत्काल निकटवर्ती अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार दिया गया। संकट की उस घड़ी में अश्विनी का सहयोग शर्मा परिवार कभी नहीं भूल सकता। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए अंकुर शर्मा ने तुरंत एम्बुलेंस की व्यवस्था की और लगभग 70 किलोमीटर दूर जोधपुर स्थित मथुरादास माथुर अस्पताल में परिवार को भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों ने गहन चिकित्सा शुरू की, लेकिन सबसे चिंताजनक स्थिति पूनम शर्मा की थी। उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। पूरा परिवार अनिश्चितता और चिंता के दौर से गुजर रहा था।
कई दिनों तक चले इलाज के बाद अंकुर शर्मा ने अपनी पत्नी को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का कठिन निर्णय लिया। 29 दिसंबर 2025 को विशेष व्यवस्था के तहत पूनम शर्मा को एयरलिफ्ट कर मुंबई लाया गया और उन्हें लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. अतुल गोयल के मार्गदर्शन में उनका उपचार प्रारंभ हुआ।
अंकुर शर्मा बताते हैं कि उनके जीवन का यह सबसे कठिन समय था। एक ओर पत्नी जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही थीं, दूसरी ओर चार वर्षीय पुत्र की देखभाल की जिम्मेदारी थी। अस्पताल और घर के बीच उनका जीवन सीमित हो गया था। प्रतिदिन लगभग 17 घंटे अस्पताल में बिताना उनकी दिनचर्या बन गई थी। जब वे घर जाते, तब उनके पिता अस्पताल में रहकर परिवार का संबल बनते। इस कठिन दौर में अंकुर शर्मा के माता-पिता और पुत्री वंशिका ने असाधारण धैर्य और साहस का परिचय दिया। अंकुर शर्मा स्वीकार करते हैं कि यदि परिवार का साथ न होता तो इस संघर्ष को पार कर पाना संभव नहीं था। पहले 108 दिनों तक उन्हें पर्याप्त नींद और आराम भी नसीब नहीं हुआ।
लगभग 35 दिनों बाद जब पूनम शर्मा को आईसीयू से सामान्य वार्ड में स्थानांतरित किया गया, तब परिवार को पहली बार राहत की किरण दिखाई दी। इसके बाद धीरे-धीरे स्वास्थ्य में सुधार होता गया।आखिरकार 10 अप्रैल 2026 को 108 दिनों तक चले लंबे उपचार, चिकित्सकों के अथक प्रयास और परिवार की अटूट सेवा के बाद पूनम शर्मा को लीलावती अस्पताल से छुट्टी मिल गई। आज वे पूर्णतः स्वस्थ होकर अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन व्यतीत कर रही हैं।
यह कहानी केवल एक दुर्घटना से बच निकलने की नहीं है। यह कहानी है एक पति के समर्पण की, एक पिता के उत्तरदायित्व की, एक बेटी के साहस की, माता-पिता के त्याग की और उस विश्वास की, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मनुष्य को टूटने नहीं देता।
अंकुर शर्मा ने जिस प्रकार विपरीत परिस्थितियों में अपने परिवार का साथ निभाया, वह आज के समाज के लिए एक प्रेरणा है। उनका संघर्ष हमें सिखाता है कि सच्चा पारिवारिक प्रेम केवल सुख के दिनों में नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में अपने वास्तविक स्वरूप में दिखाई देता है।
सच ही कहा गया है—
"जाको राखे साईंया, मार सके ना कोय।"
धोबी समाज विकास वेलफेयर एसोसिएशन विरार के अध्यक्ष बने विनोद कनौजिया
विरार। धोबी समाज विकास वेलफेयर एसोसिएशन,विरार के चुनाव समिति की बैठक में चुनाव समिति के अध्यक्ष शेष बहादुर अक्षैवर कनौजिया ने सर्व सम्मति से विनोद लालमणि कनौजिया को धोबी समाज विकास वेलफेयर एसोसिएशन विरार का नया अध्यक्ष घोषित किया। इसके उपरांत मौजूद सभी लोगों ने पुष्पगुच्छ तथा भारतीय संविधान की किताब देकर उनका अभिनन्दन किया। इसके बाद उपस्थित सभी सदस्यों ने अशोक कनौजिया को महासचिव तथा शशीकांत कनौजिया को कोषाध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा जिसे चुनाव समिति के अध्यक्ष महोदय ने सर्वसम्मति से अशोक कनौजिया को महासचिव तथा शशीकांत कनौजिया को कोषाध्यक्ष घोषित किया। सभी लोगों ने उनके नेतृत्व में एकजुट होकर समाज के विकास में कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलने का आश्वासन दिया, सभी को उम्मीद है कि पूर्व अध्यक्ष की तरह उनके नेतृत्व में भी समाज मजबूत होगा। इस अवसर पर पूर्व अध्यक्ष दिनेश कुमार (दीनूकाका),छविनाथ रजक,शेष बहादुर कनौजिया, गामा प्रसाद रजक, जिया लाल कनौजिया, अरविंद कनौजिया (एल आई सी एजेंट), प्रेम शंकर कनौजिया, अरविंद (shonu)कनौजिया पूर्व कप्तान क्रिकेट टीम,राम आसरे, सतीश, सियाराम, मेवालाल, राजेश, फूलचंद, रवि, ओमप्रकाश, छोटे लाल, जयप्रकाश (पप्पू) समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।
महदा में आयोजित श्री राम कथा के पांचवें दिन राम– सीता  विवाह के जश्न में डूबा उपाध्याय परिवार
जौनपुर। राम कथा (रामायण) केवल एक धार्मिक कहानी नहीं, बल्कि मानव जीवन जीने की कला और आदर्शों का एक संपूर्ण मार्गदर्शक है। इसका मूल संदेश मर्यादा (कर्तव्य का पालन), प्रेम, त्याग, और धर्म की विजय है, जो हमें सिखाता है कि हर परिस्थिति में सत्य और सदाचार का मार्ग कैसे अपनाना चाहिए। बदलापुर तहसील अंतर्गत स्थित महदा, बहरीपुर गांव में पंडित रामजी उपाध्याय के यहां आयोजित संगीतमय श्री रामकथा के पांचवें दिन प्यास पीठ से बोलते हुए प्रख्यात कथावाचक पंडित धर्मराज तिवारी महाराज ने उपरोक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि आदर्श पुत्र भाई, पति, राजा के रूप में भगवान राम का चरित्र समाज के लिए प्रेरणादायक और अनुकरणीय है। कथा के दौरान मंच पर राम  विवाह का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें उपाध्याय परिवार के साथ-साथ उपस्थित सभी लोगों ने नाच गाकर जश्न मनाया। कार्यक्रम के आयोजक पंडित रामजी उपाध्याय , उनकी धर्मपत्नी ललिता देवी, दोनों पुत्र  मुंबई के युवा उद्योगपति हरिवंश उपाध्याय और जन प्रकृति सेवा ट्रस्ट के संस्थापक रघुवंश उपाध्याय के अलावा पौत्र आशुतोष उपाध्याय, बेटी हिमलेश उपाध्याय समेत पूरे परिवार ने राम विवाह के बाद जमकर दान दक्षिणा भी की। खुशी का आलम यह था कि हरिवंश उपाध्याय मंच पर नोटों की गड्डी उड़ाते दिखाई दिए। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में सीओ बदलापुर सुनील चंद तिवारी, सिंगरामऊ थाना प्रभारी अखिलेश मौर्या, पूर्व प्रधानाचार्य बद्रीनारायण मिश्र, भाजपा जिला कार्य समिति सदस्य सुचिता तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, रामचंद्र पांडे सुभाष तिवारी, लाल बहादुर यादव, सुरेश चंद्र मिश्र, राकेश पाठक, रमेश चंद्र मिश्र, मुन्ना मिश्रा, संजय पांडे, ओंकार नाथ उपाध्याय समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।