प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं मेला का प्रभारी मंत्री ने किया
फर्रुखाबाद lकेन्द्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला-मेला का आयोजन
केन्द्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला-मेला का आयोजन आज मधुवन रिसोर्ट, कमालगंज रोड पर सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह उपस्थित रहे l कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्री जयवीर सिंह एवं जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर द्वारा सर्वप्रथम फीता काटकर सूचना विभाग की ओर से केन्द्र एवं प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन कर किया गया। इसके उपरांत उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए विभिन्न योजनाओं के प्रचार-प्रसार संबंधी जानकारी प्राप्त की। इसके बाद कृषि, उद्यान, पशुपालन एवं अन्य विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया तथा अधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन एवं किसानों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि शासन की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जाए।
इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़, विधायक अमृतपुर सुशील शाक्य, भाजपा जिलाध्यक्ष फतेहचन्द्र वर्मा, जिला विकास अधिकारी एस.के. तिवारी, उप कृषि निदेशक अरविन्द मोहन मिश्र, जिला कृषि अधिकारी शैलेन्द्र कुमार वर्मा, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित रहे।
उप कृषि निदेशक ने किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री कुसुम, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती एवं जैविक खेती सहित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसान अपनी भूमि के एक हिस्से पर प्राकृतिक खेती प्रारम्भ कर रसायनमुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
मुख्य अतिथि मंत्री जयवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हरित क्रांति ने देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया, किन्तु रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति एवं मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने किसानों से गोबर, गौमूत्र, हरी खाद एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित खेती अपनाकर स्वस्थ समाज और समृद्ध कृषि व्यवस्था के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती से किसानों को बेहतर बाजार, भूमि की उर्वरता में वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण तथा स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्राप्त होते हैं। उन्होंने किसानों से भविष्य की पीढ़ियों के हित में प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री एवं जिलाधिकारी द्वारा 8 कृषकों को बीज मिनीकिट, 5 कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड तथा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने हेतु 5 कृषकों को नैपसेक स्प्रेयर वितरित किए गए। लाभार्थी किसानों ने शासन की योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इन पहलों को कृषि क्षेत्र के लिए उपयोगी बताया।
समापन के दौरान जिलाधिकारी ने उपस्थित कृषकों से विभागीय स्टालों का भ्रमण कर नवीन तकनीकों एवं योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने तथा शासन द्वारा संचालित कृषि एवं किसान कल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती एवं आधुनिक कृषि तकनीकों के समन्वय से किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
त्रिभाषा सूत्र राष्ट्रीय एकता का सशक्त माध्यम : प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह

भाषाओं के संरक्षण में जनभागीदारी आवश्यक : प्रोफेसर सत्यकाम


प्रयागराज, 19 जून। केंद्र सरकार के 12 साल बेमिसाल कार्यक्रमों के अंतर्गत उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में आयोजित व्याख्यानमाला के छठे दिन शुक्रवार को भारत की बहुभाषिकता एवं त्रिभाषा सूत्र विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता गोविन्द बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागराज के निदेशक  प्रोफेसर योगेन्द्र प्रताप सिंह ने भारत की भाषाई विविधता की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषा किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना की अभिव्यक्ति है। भाषा संवाद का माध्यम होने के साथ-साथ सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक स्मृतियों की संवाहक भी है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की अनुशंसाओं के अनुरूप भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु भारतीय भाषा समिति का गठन किया गया है। विश्व में लगभग 6800 से 7000 भाषाएँ बोली जाती हैं और भाषा का निर्माण समाज द्वारा होता है। प्रोफेसर सिंह ने कहा कि भारत की बहुभाषिक परम्परा उसकी सांस्कृतिक अखण्डता का प्रतीक है। प्राचीन काल में चारधाम यात्राएँ भाषाई संवाद और सांस्कृतिक एकात्मता का माध्यम थीं। भाषाओं के बीच संवाद उन्हें लोकतांत्रिक बनाता है। रामायण के लगभग 250 भाषायी स्वरूप इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
उन्होंने कोठारी आयोग (1968) द्वारा प्रतिपादित त्रिभाषा सूत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि मातृभाषा, संपर्क भाषा तथा अन्य भारतीय भाषा का अध्ययन राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि व्यवहार में लोकतांत्रिकता, भाषा में लोकतांत्रिकता के माध्यम से ही संभव है तथा भाषा के माध्यम से ही अतुल्य भारत की अवधारणा साकार हो सकती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुक्त  विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि प्रत्येक हिंदीभाषी को कम से कम एक दक्षिण भारतीय भाषा अवश्य सीखनी चाहिए। हिंदी को जन-जन तक पहुँचाने के लिए उसकी भगिनी भाषाओं के प्रति सम्मान तथा उन्हें सीखने की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि भाषा केवल सरकार का नहीं, अपितु आमजन का विषय है। भाषा का संरक्षण और संवर्धन जनभागीदारी से ही संभव है।
जनसंपर्क अधिकारी डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र ने बताया कि कार्यक्रम के प्रारंभ में नोडल अधिकारी प्रोफेसर संजय सिंह ने अतिथियों का वाचिक स्वागत एवं विषय प्रवर्तन किया। संचालन डॉ. सुनील कुमार ने तथा प्रोफेसर आनंदानंद त्रिपाठी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
जिले के 52 गांवों से 35 किमी गुजरेगा विंध्य एक्सप्रेस-वे, डीपीआर का काम शुरू


नितेश श्रीवास्तव


भदोही। बहुप्रतीक्षित विंध्य एक्सप्रेस-वे विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) का काम शुरू हो गया है। 333 किमी का यह एक्सप्रेस-वे भदोही के 52 गांवों से होकर गुजरेगा। जिले में इसकी लंबाई करीब 35 किलोमीटर होगी। यह एक्सप्रेस-वे सिक्स लेन का होगा, जिसे आठ लेन तक बढ़ाया जा सकेगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने प्रशासन से तहसीलवार गांवों और भूमि संबंधी रिपोर्ट मांगी है। विंध्य एक्सप्रेसवे प्रयागराज जिले से होकर भदोही और मिर्जापुर होते हुए सोनभद्र तक जाएगा। इससे जिले में कनेक्टिविटी और बेहतर हो सकेगी।
वर्ष 2020 में प्रयागराज-वाराणसी सिक्सलेन, 2025 में भदोही-मछलीशहर हाईवे के बाद अब अब प्रदेश सरकार ने विंध्य एक्सप्रेस की स्वीकृति दी है। इसके लिए डीपीआर का काम शुरू कर दिया गया है। एक्सप्रेस-वे के सर्वे के बाद मिट्टी की जांच आदि पूरी हो चुकी है। यह एक्सप्रेस-वे प्रयागराज के सोरांव तहसील के जुड़ापुर दांदू गांव से शुरू होगा। उसके बाद भदोही, मिर्जापुर, चंदौली, सोनभद्र से होकर छत्तीसगढ़ की सीमा तक जाएगा।


विंध्य एक्सप्रेस - वे के लिए डीपीआर का काम यूपीडा को ही करना है। इसके लिए प्रभावित गांवों और जमीन संबंधों जानकारी मांगी गई है। जिसके लिए सर्वे कराया जा रहा है। 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपने की तैयारी है। 

शैलेश कुमार डीएम भदोही
दो सौ गांवों में तैयार होंगे बाग-बगीचे
*आंखों को सुकून देगी हरियाली*


रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही । प्रभागीय वनाधिकारी विवेक कुमार ने बताया कि जिले मे कुल 546 ग्राम पंचायत हैं। इनमें दो सौ गांव में वन विभाग द्वारा सघन वन तैयार किया जाएगा। पौधा रोपित करने के साथ ही नियमित निगरानी संग सिंचाई की जाएगी। जिन स्थानों पर पौधा सूखेगा वहां पुन: पौधा रोपित होगा। इस मुहिम में वन विभाग के साथ ही एनजीओ एवं अन्य संस्थाओं द्वारा पौधों का संरक्षण किया जाएगा। तीन वर्ष में हर एक गांव में वन तैयार होगा।
हरियाली बढ़ाने की दिशा में वन विभाग ने नई मुहिम शुरू कर दी है। निरंतर हो रही वृक्षों की कटाई से पर्यावरण प्रभावित हो रहा था। ऐसे में दो सौ गांव में बाग-बगीचा तैयार करने की तैयारी शुरू हो गई है। वन विभाग जिले के दो सौ गांव में सघन वन स्थापित करेगा। पौधरोपण के लिए विभागीय स्तर से पौधरोपण होने वाले गांवों को चिन्हित किया जा रहा है। इसके बाद बड़ी संख्या में पौधे रोपित करने के साथ ही नियमित संरक्षण किया जाएगा। डीएफओ विवेक कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से एक ही जगह पर 300 से 1000 पौधे रोपित किए जाएंगे। गांव की बंजर और जीएस की जमीनों को इस अभियान के माध्यम से उपयोग में लाया जाएगा। एक दशक पहले तक हर गांव में बाग बगीचा होते थे, लेकिन आधुनिकता की अंधी दौड़ के बीच लोगों ने तेजी से पेड़ों की कटाई की। जिससे गांवों में बाग-बगीचे कम होते चले गए। स्थिति यह है कि अब गांवों में जाने के बाद किसी पेड़ की छांव मिलना मुश्किल होता है। ऐसे में वन विभाग अब नए सिरे से गांवों में बगीचे स्थापित करेगा। विभाग तीन साल में जिले के 546 ग्राम पंचायत में पौधा लगाएगा और मॉनीटरिंग भी करेगा। जो भी पौधे रोपित किए जाते हैं। उसमें 75 से 80 फीसदी पौधे जिंदा रहते हैं।
सपा कार्यालय के बाहर लगा राजनीतिक पोस्टर, 2027 में अखिलेश की वापसी का दावा
-  हनुमान जी की पूजा करते दिखाए गए अखिलेश यादव, पोस्टर में योगी सरकार पर साधा गया निशाना

लखनऊ। राजधानी लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर शुक्रवार को एक राजनीतिक पोस्टर चर्चा का विषय बन गया। पोस्टर में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की सत्ता में वापसी का दावा किया गया है।
पोस्टर में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हुए दर्शाया गया है। साथ ही पोस्टर में लिखा गया है, "मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हुए नाराज, अब न आएंगे योगी महाराज।" इसके अलावा भाजपा पर निशाना साधते हुए पोस्टर में "महापापियों का खुला भेद, भाजपाइयों से सच्चे सनातनियों को है खेद" जैसे संदेश भी लिखे गए हैं।
बताया जा रहा है कि पोस्टर में सपा विधायक पंकज मलिक तथा पार्टी कार्यकर्ता सोमिल सिंह श्रीनेत्र की तस्वीरें भी लगाई गई हैं। पोस्टर लगने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा तेज हो गई है और इसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह पोस्टर राजधानी में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
एचपीवी टीकाकरण का अभियान चलाकर 14 से 15 वर्ष तक की किशोरियों का टीकाकरण किया गया

कमलेश मेहरोत्रा, लहरपुर (सीतापुर)। सर्वाइकल कैंसर  एचपीवी से किशोरियों के बचाव के लिए स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आने वाले 32 सत्र केंद्रों पर एचपीवी टीकाकरण का अभियान चलाकर 14 से 15 वर्ष तक की किशोरियों का टीकाकरण किया गया। शुक्रवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक डॉक्टर अरविंद वाजपेई के नेतृत्व में क्षेत्र के 32 सत्र स्थलों पर अभियान चला कर 82 किशोरियों का टीकाकरण किया गया। इस मौके पर उन्होंने बताया कि यह सरकार की एक महत्व जो की पूरी तरह निशुल्क है उन्होंने बताया कि 14 वर्ष की किशोरियों को दो डोज व 15 वर्ष की किशोरियों को तीन डोज  लगाएं जाते हैं इस टीकाकरण से सर्वाइकल कैंसर का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
गाड़ी पर बत्ती लगाकर अवैध वसूली करने का आरोप, वीडियो प्रसारित

(विपिन राठौर मीरापुर मुज़फ्फरनगर )मंडी समिति की गाड़ी पर बत्ती लगाकर अवैध वसूली करने का आरोप, वीडियो प्रसारित ,देर रात से इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हा रही दो वीडियो से खलबली मची हुई है। वीडियो में एक युवक मंडी समिति के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दिख रहा है। युवक का दावा है कि मंडी समिति के लोग नियमों को ताक पर रखकर देर रात सड़कों पर वाहनों को रोकते हैं और उनसे अवैध रूप से पैसों की वसूली करते हैं।
वीडियो में युवक ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि मंडी समिति के पास वाहनों पर लाल या नीली बत्ती लगाने की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं है, इसके बावजूद धड़ल्ले से बत्ती लगी गाड़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। युवक का कहना है कि इस अवैध बत्ती का रौब दिखाकर देर रात आने-जाने वाले सीधे-साधे वाहन चालकों को डराया-धमकाया जाता है और उन पर दबाव बनाया जाता है। आरोप लगाने वाला युवक मंडी सहायक सागर को मंडी इंस्पेक्टर बता रहा है। चर्चा है कि मंडी समिति के कर्मचारी रात में लकड़ी से भरे वाहनों के चालकों पर रौब दिखाकर अवैध वसूली करते हैं।
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इन्होंने कहा.... जब किसी पर आर्थिक दंड लगाया जाता है तो फिर लोग झूठे आरोप लगाते हैं। गाडी पर बत्ती लगाने की अनुमति एसडीएम ने दी हुई है। मुकेश कुमार, मंडी निरीक्षक, उप मंडी स्थल मीरापुर।
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हम रात में होटल पर खाना खा रहे थे, तभी एक युवक ने आकर झूठे आरोप लगाते हुए वीडियो बनाई है। झूठे आरोप लगाने पर युवक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी। सागर कुमार मंडी सहायक, उप मंडी स्थल, मीरापुर।
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मेरे द्वारा कोई अनुमति नहीं दी गई है। यदि मेरे से पूर्व के अधिकारियों ने अनुमति दी हुई है तो यह मेरे संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी। रश्मि लांबा, एसडीएम जानसठ।
मुख्यमंत्री योगी ने 4901.65 करोड़ के कार्य प्रस्तावों को दी मंजूरी, मां पाटेश्वरी शक्तिपीठ संग बेहतर संपर्क के लिए 13 मार्गों का होगा विकास
- *देवीपाटन और बस्ती मंडल के विधानसभा क्षेत्रों में लोक निर्माण विभाग की विकास परियोजनाओं के कार्यों की हुई समीक्षा*

- *मां पाटेश्वरी देवी शक्तिपीठ, स्वामीनाराण मंदिर से बस्ती के मखौड़ा धाम व अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाले प्रमुख 13 मार्ग किए जाएंगे विकसित*

- *तेरह दिन बाद फिर दौरे पर गोंडा पहुंचे थे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ*

- *प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के 50-50 करोड़ के विकास कार्यों का देखा प्रेजेंटेशन*

- - *मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के सर्वाधिक 810 कार्यों को दी मंजूरी*

- *गड्ढामुक्त अभियान के तहत सड़कों के दुरुस्तीकरण की जानी प्रगति*

*गोंडा, 19 जून*। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को महज़ तेरह दिनों बाद फिर गोंडा का दौरा किया। उन्होंने अपने दो घंटे के कार्यक्रम के दौरान 33 विधानसभा क्षेत्रों से जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों का प्रेजेंटेशन भी देखा। इसमें प्रमुख रूप से मां पाटेश्वरी शक्तिपीठ धाम संग अन्य धार्मिक स्थलों तक कनेक्टिविटी को बेहतर करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने देवीपाटन मंडल के मां पाटेश्वरी देवी शक्तिपीठ, स्वामीनाराण मंदिर से बस्ती के मखौड़ा धाम व अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाले प्रमुख 13 मार्गों के विकास को मंजूरी दी। कुल 4901.65 करोड़ रुपये की एक हजार से अधिक विकास परियोजनाओं के प्रस्तावों को स्वीकृति दी।

उन्होंने महाराजा सुहेलदेव सभागार में लोक निर्माण विभाग की परियोजनाओं की समीक्षा की। साथ ही नई कार्य योजनाओं पर जनप्रतिनिधियों के साथ मंथन किया। इस दौरान देवीपाटन मंडल के गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती की सड़क व संपर्क मार्ग परियोजनाओं की प्रगति परखी। इसके साथ बस्ती मंडल के बस्ती, सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर की विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य मार्गो से जोड़ने, जर्जर सड़कों के पुनर्निर्माण, संपर्क मार्गों के सुदृढ़ीकरण और पुल सेतु से जुड़े निर्माण कार्यों पर मंथन हुआ।
मुख्यमंत्री को देवीपाटन मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने सड़क, पुल, सेतु और अन्य आधारभूत विकास परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने लंबित कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को विभिन्न विकास परियोजनाओं की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने गड्ढामुक्त अभियान की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 810 कामों को मंजूरी दी। इसमें करीब 1472.83 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे ग्रामीण अंचलों में 1602 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाकर बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। करीब पचास से अधिक सड़कों का चौड़ीकरण व दुरुस्तीकरण किया जाएगा। 

*प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की विकास परियोजनाओं पर हुआ मंथन*

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की करीब 50-50 करोड़ की विकास परियोजनाओं का प्रस्तुतीकरण देखा। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से विकास परियोजनाओं की स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों की बेहतर कनेक्टिविटी और सुगम यातायात के लिए सड़क मार्गों के दुरुस्तीकरण पर केंद्रित प्रस्तावों को प्राथमिकता के साथ देखा। इसमें आधारभूत संरचना के कार्य भी शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने पिछड़े क्षेत्रों व आकांक्षात्मक ब्लॉक क्षेत्रों में जारी विकास परियोजनाओं की भी समीक्षा की।

*औद्योगिक क्षेत्रों की भी बेहतर होगी कनेक्टिविटी*
मुख्यमंत्री ने दो राज्य राजमार्गों, प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों की बेहतर कनेक्टिविटी, 81 लघु सेतु व सात बड़े पुलों को बनाने की मंजूरी दी। शहरी क्षेत्रों में बेहतर यातायात व्यवस्था के लिए बाईपास मार्गों, ओवरब्रिज आदि के कामों को मंजूरी दी। देवीपाटन मंडल में सड़क सुरक्षा के कार्यों को कराने कभी निर्देश दिया। इसके साथ जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में 12 हेलीपैड के निर्माण कार्यों को भी मंजूरी दी। उन्होंने हरदौपट्टी संपर्क मार्ग का विशेष मरम्मत कार्य, कटरा बाजार के पंडितपुरवा नहवा परसौरा वाया खजुहा संपर्क मार्ग का विशेष मरम्मत कार्य, सुभानपुर बेलवानोहर मार्ग के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण कार्य, हट्टीपुरवा से कुढि़यांव संपर्क मार्ग का विशेष मरम्मत कार्य, चांदपुरडीहा संपर्क मार्ग निर्माण कार्य आदि की अद्यतन स्थिति पर भी जानकारी ली।
गांव-गांव पहुंच रहा नशामुक्ति का संदेश, जनजागरूकता अभियान के पांचवें दिन व्यापक सहभागिता


निषिद्ध मादक पदार्थों के विरुद्ध संचालित राज्यव्यापी जनजागरूकता अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को हजारीबाग जिले के विभिन्न प्रखंडों एवं शहरी क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों का व्यापक आयोजन किया गया। अभियान के पांचवें दिन प्रचार रथों और सांस्कृतिक दलों ने जनसंपर्क एवं संवाद के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराया तथा नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया।

जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित पांच जागरूकता प्रचार रथों ने सार्वजनिक स्थलों, हाट-बाजारों, बस स्टैंडों, शैक्षणिक संस्थानों एवं चौक-चौराहों पर पहुंचकर नशामुक्ति का संदेश प्रसारित किया। चौपारण, ईचाक, विष्णुगढ़, सदर एवं कटकमदाग प्रखंड के अनेक पंचायत क्षेत्रों में लोगों ने प्रचार रथों के माध्यम से प्रसारित ऑडियो जिंगल एवं लघु फिल्मों को देखा और अभियान के प्रति रुचि दिखाई। इस दौरान आमजन के बीच नशामुक्ति संबंधी पंपलेटों का वितरण भी किया गया।

अभियान के दूसरे प्रमुख घटक के रूप में 10 सांस्कृतिक दलों ने जिले के 20 चयनित स्थलों पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए। बाजारों, पंचायत क्षेत्रों, शैक्षणिक संस्थानों एवं भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित इन कार्यक्रमों में कलाकारों ने नशे की लत से होने वाले दुष्परिणामों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि परिवार, समाज और भविष्य की पीढ़ियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

कार्यक्रमों के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, युवाओं एवं महिलाओं की सहभागिता देखने को मिली। उपस्थित लोगों ने नशामुक्त समाज के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। साथ ही उन्हें नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।

जिला प्रशासन द्वारा संचालित यह अभियान आगामी दिनों में भी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जारी रहेगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाया जा सके और एक स्वस्थ, जागरूक एवं जिम्मेदार समाज के निर्माण की दिशा में जनसहभागिता को सशक्त बनाया जा सके।

प्राकृतिक खेती ही किसानों के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी: डॉ. युवराज सिंह
भुसेरा में एक दिवसीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला में जुटे सैकड़ों किसान

भाजपा नेता डॉ. युवराज सिंह ने किसानों को किया सम्मानित, विशेषज्ञों ने बताईं जैविक खेती की आधुनिक तकनीकें

अमृतपुर, फर्रुखाबाद।खेती की बढ़ती लागत, घटती भूमि उर्वरता और रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों के बीच किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से ग्राम भुसेरा स्थित जी.एस. चौहान पैलेस में एक दिवसीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आयोजक भाजपा नेता डॉ. युवराज सिंह रहे। उन्होंने क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे किसानों एवं कृषक महिलाओं को सम्मानित करते हुए प्राकृतिक खेती को आत्मनिर्भर और समृद्ध किसान का मजबूत आधार बताया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा जिलाध्यक्ष फतेहचंद राजपूत उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश सरकार किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत कम होती है, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान किया।

कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. खलील खान, मृदा विशेषज्ञ एस.एम. सुनील पांडे, मौसम विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह परिहार, सीनियर रिसर्च फेलो प्रशांत सिंह परिहार तथा चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के पूर्व शोध निदेशक डॉ. एच.जी. श्रीवास्तव ने किसानों को प्राकृतिक खेती की आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की पद्धति नहीं, बल्कि मिट्टी, जल और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम भी है।

विशेषज्ञों ने किसानों को जीवामृत, घन जीवामृत और गोबर आधारित किण्वित जैविक खाद तैयार करने की विधि समझाई। उन्होंने बताया कि किसान अपने घरों और खेतों में उपलब्ध संसाधनों से ही गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद तैयार कर सकते हैं, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह खाद बुवाई से 7 से 10 दिन पूर्व खेत में डालने के साथ-साथ खड़ी फसल में भी प्रयोग की जा सकती है।

डॉ. एच.जी. श्रीवास्तव ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेतों में आवश्यकता से अधिक रासायनिक खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता को नुकसान पहुंचाता है। इससे भूमि की गुणवत्ता धीरे-धीरे कमजोर होती जाती है और आने वाली फसलों का उत्पादन प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान इस समस्या से काफी हद तक निजात पा सकते हैं। प्राकृतिक एवं जैविक संसाधनों के उपयोग से मिट्टी की सेहत बेहतर होती है, उत्पादन लागत घटती है और लंबे समय तक बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

कार्यक्रम में जैविक खाद के वैज्ञानिक महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने बताया कि कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट में फसलों, सब्जियों, पौधों और पशुओं से प्राप्त अपशिष्ट पदार्थों को वैज्ञानिक प्रक्रिया से जैविक खाद में बदला जाता है। इस खाद में 12 से 25 प्रतिशत कार्बनिक पदार्थ, 1 से 3 प्रतिशत नाइट्रोजन, 0.5 से 2.5 प्रतिशत फास्फोरस, 1 से 3 प्रतिशत पोटाश तथा 15 से 25 प्रतिशत नमी पाई जाती है, जो भूमि की संरचना सुधारने और फसल उत्पादन बढ़ाने में सहायक है।

कार्यशाला में उपस्थित कृषक महिलाओं ने भी प्राकृतिक खेती के प्रति विशेष रुचि दिखाई और विशेषज्ञों से तकनीकी जानकारियां प्राप्त कीं। किसानों ने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने से न केवल खेती की लागत कम की जा सकती है, बल्कि स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उत्पादन भी संभव है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. युवराज सिंह ने सभी वैज्ञानिकों, अतिथियों, किसानों और कृषक महिलाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसानों को नई कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे। एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में बड़ी संख्या में किसान, कृषक महिलाएं, कृषि विशेषज्ञ और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं मेला का प्रभारी मंत्री ने किया
फर्रुखाबाद lकेन्द्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला-मेला का आयोजन
केन्द्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला-मेला का आयोजन आज मधुवन रिसोर्ट, कमालगंज रोड पर सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह उपस्थित रहे l कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्री जयवीर सिंह एवं जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर द्वारा सर्वप्रथम फीता काटकर सूचना विभाग की ओर से केन्द्र एवं प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन कर किया गया। इसके उपरांत उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए विभिन्न योजनाओं के प्रचार-प्रसार संबंधी जानकारी प्राप्त की। इसके बाद कृषि, उद्यान, पशुपालन एवं अन्य विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का निरीक्षण किया तथा अधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन एवं किसानों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि शासन की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जाए।
इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़, विधायक अमृतपुर सुशील शाक्य, भाजपा जिलाध्यक्ष फतेहचन्द्र वर्मा, जिला विकास अधिकारी एस.के. तिवारी, उप कृषि निदेशक अरविन्द मोहन मिश्र, जिला कृषि अधिकारी शैलेन्द्र कुमार वर्मा, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित रहे।
उप कृषि निदेशक ने किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री कुसुम, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती एवं जैविक खेती सहित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसान अपनी भूमि के एक हिस्से पर प्राकृतिक खेती प्रारम्भ कर रसायनमुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
मुख्य अतिथि मंत्री जयवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हरित क्रांति ने देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया, किन्तु रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति एवं मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने किसानों से गोबर, गौमूत्र, हरी खाद एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित खेती अपनाकर स्वस्थ समाज और समृद्ध कृषि व्यवस्था के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती से किसानों को बेहतर बाजार, भूमि की उर्वरता में वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण तथा स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्राप्त होते हैं। उन्होंने किसानों से भविष्य की पीढ़ियों के हित में प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री एवं जिलाधिकारी द्वारा 8 कृषकों को बीज मिनीकिट, 5 कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड तथा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने हेतु 5 कृषकों को नैपसेक स्प्रेयर वितरित किए गए। लाभार्थी किसानों ने शासन की योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इन पहलों को कृषि क्षेत्र के लिए उपयोगी बताया।
समापन के दौरान जिलाधिकारी ने उपस्थित कृषकों से विभागीय स्टालों का भ्रमण कर नवीन तकनीकों एवं योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने तथा शासन द्वारा संचालित कृषि एवं किसान कल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती एवं आधुनिक कृषि तकनीकों के समन्वय से किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
त्रिभाषा सूत्र राष्ट्रीय एकता का सशक्त माध्यम : प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह

भाषाओं के संरक्षण में जनभागीदारी आवश्यक : प्रोफेसर सत्यकाम


प्रयागराज, 19 जून। केंद्र सरकार के 12 साल बेमिसाल कार्यक्रमों के अंतर्गत उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में आयोजित व्याख्यानमाला के छठे दिन शुक्रवार को भारत की बहुभाषिकता एवं त्रिभाषा सूत्र विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता गोविन्द बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागराज के निदेशक  प्रोफेसर योगेन्द्र प्रताप सिंह ने भारत की भाषाई विविधता की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषा किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना की अभिव्यक्ति है। भाषा संवाद का माध्यम होने के साथ-साथ सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक स्मृतियों की संवाहक भी है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की अनुशंसाओं के अनुरूप भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु भारतीय भाषा समिति का गठन किया गया है। विश्व में लगभग 6800 से 7000 भाषाएँ बोली जाती हैं और भाषा का निर्माण समाज द्वारा होता है। प्रोफेसर सिंह ने कहा कि भारत की बहुभाषिक परम्परा उसकी सांस्कृतिक अखण्डता का प्रतीक है। प्राचीन काल में चारधाम यात्राएँ भाषाई संवाद और सांस्कृतिक एकात्मता का माध्यम थीं। भाषाओं के बीच संवाद उन्हें लोकतांत्रिक बनाता है। रामायण के लगभग 250 भाषायी स्वरूप इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
उन्होंने कोठारी आयोग (1968) द्वारा प्रतिपादित त्रिभाषा सूत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि मातृभाषा, संपर्क भाषा तथा अन्य भारतीय भाषा का अध्ययन राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि व्यवहार में लोकतांत्रिकता, भाषा में लोकतांत्रिकता के माध्यम से ही संभव है तथा भाषा के माध्यम से ही अतुल्य भारत की अवधारणा साकार हो सकती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुक्त  विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि प्रत्येक हिंदीभाषी को कम से कम एक दक्षिण भारतीय भाषा अवश्य सीखनी चाहिए। हिंदी को जन-जन तक पहुँचाने के लिए उसकी भगिनी भाषाओं के प्रति सम्मान तथा उन्हें सीखने की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि भाषा केवल सरकार का नहीं, अपितु आमजन का विषय है। भाषा का संरक्षण और संवर्धन जनभागीदारी से ही संभव है।
जनसंपर्क अधिकारी डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र ने बताया कि कार्यक्रम के प्रारंभ में नोडल अधिकारी प्रोफेसर संजय सिंह ने अतिथियों का वाचिक स्वागत एवं विषय प्रवर्तन किया। संचालन डॉ. सुनील कुमार ने तथा प्रोफेसर आनंदानंद त्रिपाठी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
जिले के 52 गांवों से 35 किमी गुजरेगा विंध्य एक्सप्रेस-वे, डीपीआर का काम शुरू


नितेश श्रीवास्तव


भदोही। बहुप्रतीक्षित विंध्य एक्सप्रेस-वे विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) का काम शुरू हो गया है। 333 किमी का यह एक्सप्रेस-वे भदोही के 52 गांवों से होकर गुजरेगा। जिले में इसकी लंबाई करीब 35 किलोमीटर होगी। यह एक्सप्रेस-वे सिक्स लेन का होगा, जिसे आठ लेन तक बढ़ाया जा सकेगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने प्रशासन से तहसीलवार गांवों और भूमि संबंधी रिपोर्ट मांगी है। विंध्य एक्सप्रेसवे प्रयागराज जिले से होकर भदोही और मिर्जापुर होते हुए सोनभद्र तक जाएगा। इससे जिले में कनेक्टिविटी और बेहतर हो सकेगी।
वर्ष 2020 में प्रयागराज-वाराणसी सिक्सलेन, 2025 में भदोही-मछलीशहर हाईवे के बाद अब अब प्रदेश सरकार ने विंध्य एक्सप्रेस की स्वीकृति दी है। इसके लिए डीपीआर का काम शुरू कर दिया गया है। एक्सप्रेस-वे के सर्वे के बाद मिट्टी की जांच आदि पूरी हो चुकी है। यह एक्सप्रेस-वे प्रयागराज के सोरांव तहसील के जुड़ापुर दांदू गांव से शुरू होगा। उसके बाद भदोही, मिर्जापुर, चंदौली, सोनभद्र से होकर छत्तीसगढ़ की सीमा तक जाएगा।


विंध्य एक्सप्रेस - वे के लिए डीपीआर का काम यूपीडा को ही करना है। इसके लिए प्रभावित गांवों और जमीन संबंधों जानकारी मांगी गई है। जिसके लिए सर्वे कराया जा रहा है। 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपने की तैयारी है। 

शैलेश कुमार डीएम भदोही
दो सौ गांवों में तैयार होंगे बाग-बगीचे
*आंखों को सुकून देगी हरियाली*


रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही । प्रभागीय वनाधिकारी विवेक कुमार ने बताया कि जिले मे कुल 546 ग्राम पंचायत हैं। इनमें दो सौ गांव में वन विभाग द्वारा सघन वन तैयार किया जाएगा। पौधा रोपित करने के साथ ही नियमित निगरानी संग सिंचाई की जाएगी। जिन स्थानों पर पौधा सूखेगा वहां पुन: पौधा रोपित होगा। इस मुहिम में वन विभाग के साथ ही एनजीओ एवं अन्य संस्थाओं द्वारा पौधों का संरक्षण किया जाएगा। तीन वर्ष में हर एक गांव में वन तैयार होगा।
हरियाली बढ़ाने की दिशा में वन विभाग ने नई मुहिम शुरू कर दी है। निरंतर हो रही वृक्षों की कटाई से पर्यावरण प्रभावित हो रहा था। ऐसे में दो सौ गांव में बाग-बगीचा तैयार करने की तैयारी शुरू हो गई है। वन विभाग जिले के दो सौ गांव में सघन वन स्थापित करेगा। पौधरोपण के लिए विभागीय स्तर से पौधरोपण होने वाले गांवों को चिन्हित किया जा रहा है। इसके बाद बड़ी संख्या में पौधे रोपित करने के साथ ही नियमित संरक्षण किया जाएगा। डीएफओ विवेक कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से एक ही जगह पर 300 से 1000 पौधे रोपित किए जाएंगे। गांव की बंजर और जीएस की जमीनों को इस अभियान के माध्यम से उपयोग में लाया जाएगा। एक दशक पहले तक हर गांव में बाग बगीचा होते थे, लेकिन आधुनिकता की अंधी दौड़ के बीच लोगों ने तेजी से पेड़ों की कटाई की। जिससे गांवों में बाग-बगीचे कम होते चले गए। स्थिति यह है कि अब गांवों में जाने के बाद किसी पेड़ की छांव मिलना मुश्किल होता है। ऐसे में वन विभाग अब नए सिरे से गांवों में बगीचे स्थापित करेगा। विभाग तीन साल में जिले के 546 ग्राम पंचायत में पौधा लगाएगा और मॉनीटरिंग भी करेगा। जो भी पौधे रोपित किए जाते हैं। उसमें 75 से 80 फीसदी पौधे जिंदा रहते हैं।
सपा कार्यालय के बाहर लगा राजनीतिक पोस्टर, 2027 में अखिलेश की वापसी का दावा
-  हनुमान जी की पूजा करते दिखाए गए अखिलेश यादव, पोस्टर में योगी सरकार पर साधा गया निशाना

लखनऊ। राजधानी लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर शुक्रवार को एक राजनीतिक पोस्टर चर्चा का विषय बन गया। पोस्टर में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की सत्ता में वापसी का दावा किया गया है।
पोस्टर में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हुए दर्शाया गया है। साथ ही पोस्टर में लिखा गया है, "मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हुए नाराज, अब न आएंगे योगी महाराज।" इसके अलावा भाजपा पर निशाना साधते हुए पोस्टर में "महापापियों का खुला भेद, भाजपाइयों से सच्चे सनातनियों को है खेद" जैसे संदेश भी लिखे गए हैं।
बताया जा रहा है कि पोस्टर में सपा विधायक पंकज मलिक तथा पार्टी कार्यकर्ता सोमिल सिंह श्रीनेत्र की तस्वीरें भी लगाई गई हैं। पोस्टर लगने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा तेज हो गई है और इसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह पोस्टर राजधानी में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
एचपीवी टीकाकरण का अभियान चलाकर 14 से 15 वर्ष तक की किशोरियों का टीकाकरण किया गया

कमलेश मेहरोत्रा, लहरपुर (सीतापुर)। सर्वाइकल कैंसर  एचपीवी से किशोरियों के बचाव के लिए स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आने वाले 32 सत्र केंद्रों पर एचपीवी टीकाकरण का अभियान चलाकर 14 से 15 वर्ष तक की किशोरियों का टीकाकरण किया गया। शुक्रवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक डॉक्टर अरविंद वाजपेई के नेतृत्व में क्षेत्र के 32 सत्र स्थलों पर अभियान चला कर 82 किशोरियों का टीकाकरण किया गया। इस मौके पर उन्होंने बताया कि यह सरकार की एक महत्व जो की पूरी तरह निशुल्क है उन्होंने बताया कि 14 वर्ष की किशोरियों को दो डोज व 15 वर्ष की किशोरियों को तीन डोज  लगाएं जाते हैं इस टीकाकरण से सर्वाइकल कैंसर का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
गाड़ी पर बत्ती लगाकर अवैध वसूली करने का आरोप, वीडियो प्रसारित

(विपिन राठौर मीरापुर मुज़फ्फरनगर )मंडी समिति की गाड़ी पर बत्ती लगाकर अवैध वसूली करने का आरोप, वीडियो प्रसारित ,देर रात से इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हा रही दो वीडियो से खलबली मची हुई है। वीडियो में एक युवक मंडी समिति के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दिख रहा है। युवक का दावा है कि मंडी समिति के लोग नियमों को ताक पर रखकर देर रात सड़कों पर वाहनों को रोकते हैं और उनसे अवैध रूप से पैसों की वसूली करते हैं।
वीडियो में युवक ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि मंडी समिति के पास वाहनों पर लाल या नीली बत्ती लगाने की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं है, इसके बावजूद धड़ल्ले से बत्ती लगी गाड़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। युवक का कहना है कि इस अवैध बत्ती का रौब दिखाकर देर रात आने-जाने वाले सीधे-साधे वाहन चालकों को डराया-धमकाया जाता है और उन पर दबाव बनाया जाता है। आरोप लगाने वाला युवक मंडी सहायक सागर को मंडी इंस्पेक्टर बता रहा है। चर्चा है कि मंडी समिति के कर्मचारी रात में लकड़ी से भरे वाहनों के चालकों पर रौब दिखाकर अवैध वसूली करते हैं।
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इन्होंने कहा.... जब किसी पर आर्थिक दंड लगाया जाता है तो फिर लोग झूठे आरोप लगाते हैं। गाडी पर बत्ती लगाने की अनुमति एसडीएम ने दी हुई है। मुकेश कुमार, मंडी निरीक्षक, उप मंडी स्थल मीरापुर।
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हम रात में होटल पर खाना खा रहे थे, तभी एक युवक ने आकर झूठे आरोप लगाते हुए वीडियो बनाई है। झूठे आरोप लगाने पर युवक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराई जाएगी। सागर कुमार मंडी सहायक, उप मंडी स्थल, मीरापुर।
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मेरे द्वारा कोई अनुमति नहीं दी गई है। यदि मेरे से पूर्व के अधिकारियों ने अनुमति दी हुई है तो यह मेरे संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी। रश्मि लांबा, एसडीएम जानसठ।
मुख्यमंत्री योगी ने 4901.65 करोड़ के कार्य प्रस्तावों को दी मंजूरी, मां पाटेश्वरी शक्तिपीठ संग बेहतर संपर्क के लिए 13 मार्गों का होगा विकास
- *देवीपाटन और बस्ती मंडल के विधानसभा क्षेत्रों में लोक निर्माण विभाग की विकास परियोजनाओं के कार्यों की हुई समीक्षा*

- *मां पाटेश्वरी देवी शक्तिपीठ, स्वामीनाराण मंदिर से बस्ती के मखौड़ा धाम व अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाले प्रमुख 13 मार्ग किए जाएंगे विकसित*

- *तेरह दिन बाद फिर दौरे पर गोंडा पहुंचे थे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ*

- *प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के 50-50 करोड़ के विकास कार्यों का देखा प्रेजेंटेशन*

- - *मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के सर्वाधिक 810 कार्यों को दी मंजूरी*

- *गड्ढामुक्त अभियान के तहत सड़कों के दुरुस्तीकरण की जानी प्रगति*

*गोंडा, 19 जून*। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को महज़ तेरह दिनों बाद फिर गोंडा का दौरा किया। उन्होंने अपने दो घंटे के कार्यक्रम के दौरान 33 विधानसभा क्षेत्रों से जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों का प्रेजेंटेशन भी देखा। इसमें प्रमुख रूप से मां पाटेश्वरी शक्तिपीठ धाम संग अन्य धार्मिक स्थलों तक कनेक्टिविटी को बेहतर करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने देवीपाटन मंडल के मां पाटेश्वरी देवी शक्तिपीठ, स्वामीनाराण मंदिर से बस्ती के मखौड़ा धाम व अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाले प्रमुख 13 मार्गों के विकास को मंजूरी दी। कुल 4901.65 करोड़ रुपये की एक हजार से अधिक विकास परियोजनाओं के प्रस्तावों को स्वीकृति दी।

उन्होंने महाराजा सुहेलदेव सभागार में लोक निर्माण विभाग की परियोजनाओं की समीक्षा की। साथ ही नई कार्य योजनाओं पर जनप्रतिनिधियों के साथ मंथन किया। इस दौरान देवीपाटन मंडल के गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती की सड़क व संपर्क मार्ग परियोजनाओं की प्रगति परखी। इसके साथ बस्ती मंडल के बस्ती, सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर की विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य मार्गो से जोड़ने, जर्जर सड़कों के पुनर्निर्माण, संपर्क मार्गों के सुदृढ़ीकरण और पुल सेतु से जुड़े निर्माण कार्यों पर मंथन हुआ।
मुख्यमंत्री को देवीपाटन मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने सड़क, पुल, सेतु और अन्य आधारभूत विकास परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने लंबित कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को विभिन्न विकास परियोजनाओं की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने गड्ढामुक्त अभियान की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 810 कामों को मंजूरी दी। इसमें करीब 1472.83 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे ग्रामीण अंचलों में 1602 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाकर बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। करीब पचास से अधिक सड़कों का चौड़ीकरण व दुरुस्तीकरण किया जाएगा। 

*प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की विकास परियोजनाओं पर हुआ मंथन*

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की करीब 50-50 करोड़ की विकास परियोजनाओं का प्रस्तुतीकरण देखा। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से विकास परियोजनाओं की स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों की बेहतर कनेक्टिविटी और सुगम यातायात के लिए सड़क मार्गों के दुरुस्तीकरण पर केंद्रित प्रस्तावों को प्राथमिकता के साथ देखा। इसमें आधारभूत संरचना के कार्य भी शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने पिछड़े क्षेत्रों व आकांक्षात्मक ब्लॉक क्षेत्रों में जारी विकास परियोजनाओं की भी समीक्षा की।

*औद्योगिक क्षेत्रों की भी बेहतर होगी कनेक्टिविटी*
मुख्यमंत्री ने दो राज्य राजमार्गों, प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों की बेहतर कनेक्टिविटी, 81 लघु सेतु व सात बड़े पुलों को बनाने की मंजूरी दी। शहरी क्षेत्रों में बेहतर यातायात व्यवस्था के लिए बाईपास मार्गों, ओवरब्रिज आदि के कामों को मंजूरी दी। देवीपाटन मंडल में सड़क सुरक्षा के कार्यों को कराने कभी निर्देश दिया। इसके साथ जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में 12 हेलीपैड के निर्माण कार्यों को भी मंजूरी दी। उन्होंने हरदौपट्टी संपर्क मार्ग का विशेष मरम्मत कार्य, कटरा बाजार के पंडितपुरवा नहवा परसौरा वाया खजुहा संपर्क मार्ग का विशेष मरम्मत कार्य, सुभानपुर बेलवानोहर मार्ग के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण कार्य, हट्टीपुरवा से कुढि़यांव संपर्क मार्ग का विशेष मरम्मत कार्य, चांदपुरडीहा संपर्क मार्ग निर्माण कार्य आदि की अद्यतन स्थिति पर भी जानकारी ली।
गांव-गांव पहुंच रहा नशामुक्ति का संदेश, जनजागरूकता अभियान के पांचवें दिन व्यापक सहभागिता


निषिद्ध मादक पदार्थों के विरुद्ध संचालित राज्यव्यापी जनजागरूकता अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को हजारीबाग जिले के विभिन्न प्रखंडों एवं शहरी क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों का व्यापक आयोजन किया गया। अभियान के पांचवें दिन प्रचार रथों और सांस्कृतिक दलों ने जनसंपर्क एवं संवाद के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराया तथा नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया।

जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित पांच जागरूकता प्रचार रथों ने सार्वजनिक स्थलों, हाट-बाजारों, बस स्टैंडों, शैक्षणिक संस्थानों एवं चौक-चौराहों पर पहुंचकर नशामुक्ति का संदेश प्रसारित किया। चौपारण, ईचाक, विष्णुगढ़, सदर एवं कटकमदाग प्रखंड के अनेक पंचायत क्षेत्रों में लोगों ने प्रचार रथों के माध्यम से प्रसारित ऑडियो जिंगल एवं लघु फिल्मों को देखा और अभियान के प्रति रुचि दिखाई। इस दौरान आमजन के बीच नशामुक्ति संबंधी पंपलेटों का वितरण भी किया गया।

अभियान के दूसरे प्रमुख घटक के रूप में 10 सांस्कृतिक दलों ने जिले के 20 चयनित स्थलों पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए। बाजारों, पंचायत क्षेत्रों, शैक्षणिक संस्थानों एवं भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित इन कार्यक्रमों में कलाकारों ने नशे की लत से होने वाले दुष्परिणामों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि परिवार, समाज और भविष्य की पीढ़ियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

कार्यक्रमों के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, युवाओं एवं महिलाओं की सहभागिता देखने को मिली। उपस्थित लोगों ने नशामुक्त समाज के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। साथ ही उन्हें नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।

जिला प्रशासन द्वारा संचालित यह अभियान आगामी दिनों में भी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जारी रहेगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाया जा सके और एक स्वस्थ, जागरूक एवं जिम्मेदार समाज के निर्माण की दिशा में जनसहभागिता को सशक्त बनाया जा सके।

प्राकृतिक खेती ही किसानों के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी: डॉ. युवराज सिंह
भुसेरा में एक दिवसीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला में जुटे सैकड़ों किसान

भाजपा नेता डॉ. युवराज सिंह ने किसानों को किया सम्मानित, विशेषज्ञों ने बताईं जैविक खेती की आधुनिक तकनीकें

अमृतपुर, फर्रुखाबाद।खेती की बढ़ती लागत, घटती भूमि उर्वरता और रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों के बीच किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से ग्राम भुसेरा स्थित जी.एस. चौहान पैलेस में एक दिवसीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आयोजक भाजपा नेता डॉ. युवराज सिंह रहे। उन्होंने क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे किसानों एवं कृषक महिलाओं को सम्मानित करते हुए प्राकृतिक खेती को आत्मनिर्भर और समृद्ध किसान का मजबूत आधार बताया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा जिलाध्यक्ष फतेहचंद राजपूत उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश सरकार किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत कम होती है, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान किया।

कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. खलील खान, मृदा विशेषज्ञ एस.एम. सुनील पांडे, मौसम विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह परिहार, सीनियर रिसर्च फेलो प्रशांत सिंह परिहार तथा चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के पूर्व शोध निदेशक डॉ. एच.जी. श्रीवास्तव ने किसानों को प्राकृतिक खेती की आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की पद्धति नहीं, बल्कि मिट्टी, जल और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम भी है।

विशेषज्ञों ने किसानों को जीवामृत, घन जीवामृत और गोबर आधारित किण्वित जैविक खाद तैयार करने की विधि समझाई। उन्होंने बताया कि किसान अपने घरों और खेतों में उपलब्ध संसाधनों से ही गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद तैयार कर सकते हैं, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह खाद बुवाई से 7 से 10 दिन पूर्व खेत में डालने के साथ-साथ खड़ी फसल में भी प्रयोग की जा सकती है।

डॉ. एच.जी. श्रीवास्तव ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेतों में आवश्यकता से अधिक रासायनिक खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता को नुकसान पहुंचाता है। इससे भूमि की गुणवत्ता धीरे-धीरे कमजोर होती जाती है और आने वाली फसलों का उत्पादन प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान इस समस्या से काफी हद तक निजात पा सकते हैं। प्राकृतिक एवं जैविक संसाधनों के उपयोग से मिट्टी की सेहत बेहतर होती है, उत्पादन लागत घटती है और लंबे समय तक बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

कार्यक्रम में जैविक खाद के वैज्ञानिक महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने बताया कि कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट में फसलों, सब्जियों, पौधों और पशुओं से प्राप्त अपशिष्ट पदार्थों को वैज्ञानिक प्रक्रिया से जैविक खाद में बदला जाता है। इस खाद में 12 से 25 प्रतिशत कार्बनिक पदार्थ, 1 से 3 प्रतिशत नाइट्रोजन, 0.5 से 2.5 प्रतिशत फास्फोरस, 1 से 3 प्रतिशत पोटाश तथा 15 से 25 प्रतिशत नमी पाई जाती है, जो भूमि की संरचना सुधारने और फसल उत्पादन बढ़ाने में सहायक है।

कार्यशाला में उपस्थित कृषक महिलाओं ने भी प्राकृतिक खेती के प्रति विशेष रुचि दिखाई और विशेषज्ञों से तकनीकी जानकारियां प्राप्त कीं। किसानों ने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने से न केवल खेती की लागत कम की जा सकती है, बल्कि स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उत्पादन भी संभव है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. युवराज सिंह ने सभी वैज्ञानिकों, अतिथियों, किसानों और कृषक महिलाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसानों को नई कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे। एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में बड़ी संख्या में किसान, कृषक महिलाएं, कृषि विशेषज्ञ और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।