5 जून विश्व पर्यावरण दिवस एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित
तुलसीपुर, बलरामपुर, 5 जून।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आदि शक्ति माँ पाटेश्वरी पब्लिक स्कूल, भवनियापुर, तुलसीपुर, बलरामपुर में पर्यावरण संरक्षण एवं जन-जागरूकता को बढ़ावा देने हेतु विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण किया गया तथा विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।
इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम *"Climate Action – For Climate, For Our Future"*  रही। इसी क्रम में विद्यालय परिवार द्वारा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने तथा प्रकृति संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस विषयक विशेष पोस्टर प्रदर्शित किए गए तथा विद्यार्थियों को अधिक से अधिक वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छता अपनाने एवं प्लास्टिक मुक्त वातावरण के निर्माण का संदेश दिया गया। उपस्थित सभी लोगों ने हरित एवं स्वच्छ पर्यावरण के संरक्षण हेतु संकल्प भी लिया।
आज विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ डी पी सिंह द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ के जन्मदिवस पर उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई प्रेषित की गई। विद्यालय परिवार ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सफल नेतृत्व की कामना करते हुए प्रदेश के विकास एवं जनकल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ डी पी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस तक सीमित न रहकर प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित एवं स्वस्थ भविष्य के लिए सभी को वृक्षारोपण, जल संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन हेतु सक्रिय भूमिका निभानी होगी।इसी के साथ जनपद में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए विश्व हिंदू महासंघ बलरामपुर द्वारा देवीपाटन मंदिर तुलसीपुर मे पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ का 55 वें जन्मदिवस के अवसर पर रुद्राभिषेक का कार्यक्रम किया गया जिसमें जिला अध्यक्ष चौधरी विजय सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष जीवन लाल उपाध्यक्ष मिथिलेश गिरी उपाध्यक्ष विजय प्रताप सोनी मंत्री सुग्रीव कश्यप भोला सरोज है जय सिंह सहित दर्जनों कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
वैभव लॉन, में 21 जून से 27 जून तक श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन

रितेश मिश्रा
हरदोई। कमलेश्वर फाउंडेशन एवं सहयोगी संस्था कुबेर लाल जनसेवा संस्थान द्वारा जनकल्याण एवं सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से दिनांक 21 जून 2026 से 27 जून 2026 तक वैभव लॉन, हरदोई में प्रतिदिन सायं 4:00 बजे से भव्य श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है।
संस्था के सदस्यों द्वारा समाचार पत्रों में प्रकाशित घटनाओं एवं सामाजिक परिस्थितियों का अध्ययन करने पर यह तथ्य सामने आया कि जनपद हरदोई सहित समाज के विभिन्न वर्गों में आत्महत्या, मानसिक तनाव, घबराहट, उच्च रक्तचाप, पारिवारिक विघटन, सामाजिक संघर्ष तथा नशे की प्रवृत्तियों में निरंतर वृद्धि हो रही है। किशोर, युवा, विद्यार्थी, नौकरीपेशा, व्यवसायी, बेरोजगार, महिलाएं एवं पुरुष सभी किसी न किसी रूप में इन समस्याओं से प्रभावित हो रहे हैं।
संस्था द्वारा किए गए अध्ययन एवं शोध के आधार पर यह निष्कर्ष प्राप्त हुआ कि उचित परामर्श (काउंसलिंग) एवं सकारात्मक मार्गदर्शन के माध्यम से इन समस्याओं में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है। साथ ही भक्ति, अध्यात्म एवं भारतीय संस्कृति से जोड़ते हुए रुचिपूर्ण ढंग से प्रदान की गई परामर्श सेवाएं अधिक प्रभावी एवं लाभकारी सिद्ध होती हैं।
इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए संस्था द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा का वाचन सुप्रसिद्ध कथावाचिका एवं परामर्शदाता पूज्या श्री राधा प्रिया जी के श्रीमुख से संपन्न होगा। श्री राधा प्रिया जी आध्यात्मिक एवं परामर्श सेवा के क्षेत्र में निरंतर सराहनीय कार्य कर रही हैं। उनके सानिध्य में आयोजित यह कथा केवल आध्यात्मिक यात्रा ही नहीं होगी, बल्कि मानसिक एवं भावनात्मक हीलिंग का भी एक सशक्त माध्यम बनेगी।
कार्यक्रम के प्रथम दिवस 21 जून 2026 को प्रातः 7:00 बजे भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया जाएगा। यह यात्रा श्रीराम जानकी मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए वैभव लॉन में सम्पन्न होगी।
कमलेश्वर फाउंडेशन एवं कुबेरलाल जन सेवा संस्थान ने जनपदवासियों से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण एवं आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन के इस अभियान का सहभागी बनने का आग्रह किया है।
कमलेश्वर फाउंडेशन की सचिव अमिता मिश्रा "मीतू" ने बताया कि आज के समय में इस तनाव पूर्ण वातावरण में लोगों को तनाव मुक्त करने का सबसे बेहतर माध्यम अध्यात्म है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को हीलिंग देना भी है। अध्यात्म के साथ साथ उनके तनाव को कैसे कम किया जा सकता है। इसके लिए ये कमलेश्वर फाउंडेशन का एवं कुबेरलाल जनसेवा संस्थान का एक प्रयास है।
कुबेर लाल जन सेवा संस्थान की संस्थापिका निरमा देवी ने बताया कि भागवत कथा के द्वारा आज की पीढ़ी को अपने देश की संस्कृति और संस्कारों से पुनः जोड़ा जा सकेगा ।इससे एक मजबूत समाज की स्थापना करने में सहायता मिलेगी।
पोस्टर विमोचन में विधायक प्रभाष कुमार, भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन, नगरपालिका अध्यक्ष सुख सागर मिश्रा ,"मधुर" , डॉ सीपी कटियार, निरमा देवी , डॉ चित्रा मिश्रा , विजय लक्ष्मी सिंह, अमिताभ शुक्ला "मोनू" , संजीव मिश्रा, अमिताभ शुक्ला,पंकज अवस्थी , सचिन मिश्रा, अभिषेक गुप्ता , सुमन सिंह, प्रशांत गुप्ता नितिन , काजल गुप्ता, सुमित श्रीवास्तव , वंदना सिंह, शांतनु सिंह सहित संस्था के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
जब विकास के अश्व कागज़ों पर दौड़े और प्रजा प्रतीक्षा करती रही
लक्ष्मी कान्त पाठक

हरदोई हस्तिनापुर के विशाल राजमहल में आज उत्सव का वातावरण है। राजकोष के अभिलेखों में अंकित है कि ग्रामराज्य समृद्धि के स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुका है। गांवों तक निर्मल जल पहुंच चुका है, गलियां विकास की चमक से आलोकित हैं, स्वच्छता ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है और प्रजा सुख, शांति तथा संतोष का जीवन व्यतीत कर रही है। दरबार में बैठे महामंत्री आंकड़ों के स्वर्णिम पन्ने खोल-खोलकर बताते हैं कि बीते पांच वर्षों में विकास की ऐसी गंगा बही है, जैसी पूर्वकाल में कभी नहीं बही।
किन्तु यदि कोई पथिक राजमहल की चकाचौंध छोड़कर गांव की चौपाल तक पहुंच जाए, तो उसे एक दूसरी ही कथा सुनाई देगी—वह कथा, जो राजकीय अभिलेखों में नहीं मिलती; वह कथा, जो गांव की टूटी गलियों, सूखे हैंडपंपों, कूड़े के ढेरों और प्रजा की आंखों में लिखी हुई है।
हस्तिनापुर के इस ग्रामराज्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान स्वर्ण मुद्राओं की अभूतपूर्व वर्षा हुई। राजकोष के द्वार खुले, योजनाएं बनीं, प्रस्ताव पारित हुए, निर्माण कार्यों की लंबी सूचियां तैयार हुईं और विकास के रथों को आगे बढ़ाने की घोषणाएं होती रहीं। ऐसा प्रतीत होता था मानो प्रत्येक गांव शीघ्र ही इंद्रप्रस्थ की भांति वैभवशाली और सुन्दर हो जाएगा। किन्तु समय बीतने के बाद जब प्रजा ने अपने चारों ओर दृष्टि डाली, तो पाया कि परिवर्तन का अधिकांश वैभव केवल राजकीय दस्तावेजों में ही सुरक्षित रह गया है।
सबसे पहले बात जल की।
ऋषियों ने कहा था—“जल ही जीवन है।” अतः ग्रामराज्य में जल योजनाओं पर सर्वाधिक धन व्यय हुआ। अभिलेख बताते हैं कि असंख्य नए हैंडपंप स्थापित किए गए। पुराने हैंडपंपों का रिबोर हुआ। उनकी मरम्मत हुई। पाइप बदले गए। प्लेटफार्म बने। जल स्रोतों का पुनर्जीवन हुआ। कागज़ों पर तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रत्येक ग्रामीण के द्वार पर गंगा की धारा बह रही हो।
किन्तु गांव की धरती पर खड़ी प्रजा पूछती है—वे हैंडपंप कहां हैं?
जिन हैंडपंपों के बार-बार रिबोर का उल्लेख है, वे आज भी उसी जर्जर अवस्था में खड़े हैं। जिनकी मरम्मत के भुगतान हुए, वे वर्षों से पानी के स्थान पर केवल जंग उगल रहे हैं। ऐसा लगता है कि हस्तिनापुर के इस ग्रामराज्य में हैंडपंप धरती पर कम और कागज़ों में अधिक लगाए गए। पानी नलों और पाइपों से कम, फाइलों और भुगतान पत्रकों से अधिक बहता रहा।
राजमहल में बैठा कोई अभिलेखकार यदि सरकारी दस्तावेज पढ़े तो उसे लगेगा कि जल संकट इतिहास बन चुका है। परन्तु गांव की स्त्रियां आज भी सुबह और शाम सिर पर मटके रखकर पानी की तलाश में भटकती हैं। यही दृश्य बताता है कि राजकीय सत्य और जनसत्य में कितना गहरा अंतर है।
इसके बाद आती है गलियों की कथा।
राजकीय इतिहासकार लिखते हैं कि गांवों में खड़ंजों का जाल बिछा दिया गया। मार्गों का निर्माण हुआ। विकास की नई राहें बनाई गईं। लेकिन जैसे ही वर्षा ऋतु की पहली बूंद गिरती है, विकास की चमक की वास्तविक परीक्षा आरम्भ हो जाती है।
जहां नालियां नहीं हैं, वहां सड़कें तालाब बन जाती हैं। जहां जल निकासी नहीं है, वहां खड़ंजे कीचड़ में समा जाते हैं। अनेक गलियां ऐसी प्रतीत होती हैं मानो वे किसी ग्रामराज्य की नहीं, बल्कि किसी परित्यक्त बस्ती की हों। पत्थरों पर खर्च हुई स्वर्ण मुद्राओं के ढेर भी उस कीचड़ को नहीं रोक पाए, जो हर वर्ष ग्रामीण जीवन को दुश्वार बना देता है।
स्वच्छता की कहानी तो और भी अद्भुत है।
अभिलेख बताते हैं कि सफाई कर्मचारियों की पूरी सेना गांवों में तैनात रही। झाड़ू चलती रही। सफाई होती रही। भुगतान होते रहे। निरीक्षण होते रहे। बैठकों में प्रशंसा होती रही। किन्तु गांव की गलियों में पड़े कूड़े के ढेर, दुर्गंध से भरी नालियां और सार्वजनिक स्थलों की स्थिति कुछ और ही साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं।
ऐसा प्रतीत होता है कि झाड़ू की सबसे अधिक कृपा उन्हीं स्थानों पर हुई, जहां प्रभाव, प्रतिष्ठा और पहुंच का निवास था। सामान्य ग्रामीण अक्सर उस स्वच्छता अभियान का लाभ खोजता रह गया, जिसकी प्रशंसा रिपोर्टों और प्रस्तुतियों में की जाती रही।
फिर आया स्वच्छता का सबसे भव्य अध्याय—आरआरसी सेंटरों का।
घोषणा हुई कि अब गांवों से कूड़ा समाप्त हो जाएगा। कूड़ा निस्तारण के लिए आधुनिक केंद्र बनाए जाएंगे। भूमि चयनित हुई। भवन बने। संसाधन खरीदे गए। उद्घाटन हुए। तस्वीरें खिंचीं। प्रशस्ति गान हुए।
किन्तु इस योजना का सबसे बड़ा व्यंग्य यह रहा कि कूड़ा निस्तारण केंद्र तो बन गए, परंतु कूड़ा वहां तक पहुंच ही नहीं पाया।
केंद्र साफ-सुथरे खड़े रहे और गांव की गलियां कूड़े से भरी रहीं। मानो कूड़े और केंद्र के बीच कोई अदृश्य दीवार खड़ी हो गई हो। कूड़ा उठाने के लिए खरीदे गए साधन भी धीरे-धीरे रहस्य का विषय बन गए। यदि वे वास्तव में सक्रिय होते, तो शायद गांवों में कूड़े के पहाड़ दिखाई न देते।
इस पूरे ग्रामराज्य की सबसे गूढ़ कथा शिकायतों की है।
प्रजा शिकायत करती रही। आवेदन लिखे जाते रहे। दरबारों के चक्कर लगाए जाते रहे। अधिकारी आते रहे, जाते रहे। जांच की घोषणाएं होती रहीं। किन्तु परिणाम प्रायः उसी धूल में दब जाते रहे, जो गांव की पगडंडियों पर उड़ती रहती है।
अब इस कथा का एक महत्वपूर्ण और गंभीर पक्ष कानूनी व्यवस्था से भी जुड़ता है।
भारत का संविधान ग्राम स्वराज की अवधारणा को केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सहभागिता का आधार मानता है। संविधान के 73वें संशोधन द्वारा पंचायतों को स्थानीय स्वशासन की संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई। ग्राम सभा को गांव की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था माना गया, जहां जनता को विकास कार्यों की समीक्षा, प्रश्न पूछने और जवाब मांगने का अधिकार प्राप्त है।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 प्रत्येक नागरिक को यह शक्ति देता है कि वह सार्वजनिक धन के व्यय, निर्माण कार्यों, भुगतान, निविदाओं और योजनाओं का विवरण प्राप्त कर सके। पंचायत राज अधिनियमों में भी सामाजिक अंकेक्षण, अभिलेखों के निरीक्षण तथा जनभागीदारी की व्यवस्था की गई है। अतः यदि कोई ग्रामीण ग्राम निधि, हैंडपंप, सड़क, स्वच्छता या किसी अन्य विकास कार्य के संबंध में जानकारी मांगता है, तो वह किसी पर उपकार नहीं कर रहा होता, बल्कि अपने वैधानिक और संवैधानिक अधिकार का प्रयोग कर रहा होता है।
किन्तु इस कथा का एक और पक्ष है, जो हस्तिनापुर की प्रजा के मन में सबसे अधिक भय उत्पन्न करता है।
जब तक प्रजा मौन रही, तब तक सब कुछ शांत दिखाई देता रहा। लेकिन जैसे ही किसी ग्रामीण ने ग्राम निधि के व्यय का लेखा-जोखा मांगने का साहस किया, किसी ने कागज़ों में लगे हैंडपंपों की वास्तविकता जाननी चाही, किसी ने अधूरे निर्माण कार्यों पर प्रश्न उठाया अथवा किसी ने सफाई व्यवस्था और कूड़ा निस्तारण की विफलताओं को सार्वजनिक करने का प्रयास किया, तब राजकीय व्यवस्था का दूसरा स्वरूप सामने आने लगा।
कई स्थानों पर ऐसा प्रतीत हुआ मानो समस्या के समाधान से अधिक चिंता समस्या उजागर करने वालों की होने लगी हो। प्रजा के स्वर को सुनने के स्थान पर राजकीय रक्षक उसके द्वार तक पहुंचने लगे। शिकायतकर्ता ही संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया गया। कहीं चेतावनियों का सहारा लिया गया, कहीं दबाव का और कहीं नियमों व मर्यादाओं के नाम पर ऐसे लोगों को मुकदमों में उलझा दिया गया, जिन्होंने केवल अपने गांव और अपने अधिकारों की बात कही थी।
कुछ प्रजाजन तो ऐसे भी रहे जिन्हें न्याय की अपेक्षा राजकीय कारागार का मार्ग अधिक शीघ्र दिखाई दिया। धीरे-धीरे ग्रामराज्य में यह धारणा घर करने लगी कि विकास पर प्रश्न पूछना सरल नहीं है। परिणाम यह हुआ कि अनेक लोगों ने अन्याय सहना स्वीकार किया, परंतु व्यवस्था से टकराने का साहस नहीं किया।
जबकि विधि का मूल सिद्धांत कहता है कि शिकायतकर्ता, सूचना मांगने वाला नागरिक अथवा जनहित में प्रश्न पूछने वाला व्यक्ति लोकतंत्र का विरोधी नहीं, बल्कि उसकी मजबूती का आधार होता है। यदि किसी व्यवस्था में प्रश्न पूछना अपराध जैसा प्रतीत होने लगे, तो यह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि लोकतांत्रिक चिंता का विषय बन जाता है।
और जब किसी राज्य में प्रजा प्रश्न पूछने से भयभीत होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि वहां विकास से अधिक मौन का विस्तार हो रहा है।
ऐसा नहीं कि हस्तिनापुर का खजाना खाली था। खजाना भरा हुआ था। योजनाएं भी थीं। कर्मचारी भी थे। नियम भी थे। लेकिन व्यवस्था का वह आत्मबल कहीं खो गया था, जो धन को विकास और योजना को परिणाम में बदल देता है।
आज पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं।
ग्रामराज्य की प्रजा अपने शासकों से कोई असंभव प्रश्न नहीं पूछ रही। वह केवल इतना जानना चाहती है कि जिन हैंडपंपों पर धन खर्च हुआ, वे कहां हैं? जिनकी मरम्मत हुई, उनमें पानी क्यों नहीं है? जिन गलियों पर लाखों रुपये खर्च हुए, वे कीचड़ से क्यों भरी हैं? जिन सफाई कर्मचारियों का वेतन वर्षों तक निकला, गांव गंदा क्यों है? और जिन कूड़ा निस्तारण केंद्रों पर धन बहाया गया, वहां गांव का कूड़ा क्यों नहीं पहुंचा?
हस्तिनापुर के प्राचीन ग्रंथ कहते हैं कि राज्य की शक्ति उसके राजमहलों की ऊंचाई से नहीं, बल्कि उसकी प्रजा के चेहरे पर दिखाई देने वाली संतुष्टि से मापी जाती है। यदि प्रजा प्रश्न पूछ रही है, यदि गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है, तो यह केवल किसी एक प्रधान, सचिव या अधिकारी का प्रश्न नहीं है; यह पूरी व्यवस्था के आत्ममंथन का विषय है।उत्तर प्रदेश में ग्राम स्वराज की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी, जब विकास की कहानी केवल अभिलेखों में नहीं, बल्कि गांव की गलियों, स्वच्छ जल स्रोतों, साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थलों, सक्रिय ग्राम सभाओं और निर्भय नागरिकों के जीवन में दिखाई देगी। क्योंकि लोकतंत्र का अर्थ केवल योजनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि उनके परिणामों की सार्वजनिक जवाबदेही भी है।अन्यथा इतिहास एक दिन यह लिखेगा कि उत्तर प्रदेश के ग्राम स्वराज में विकास के अश्व बहुत तेज़ दौड़े थे, परंतु वे धरती पर नहीं, केवल कागज़ों के मैदान में दौड़ते रहे। प्रजा वहीं खड़ी रही—पानी की प्रतीक्षा में, स्वच्छता की प्रतीक्षा में, न्याय की प्रतीक्षा में, और उस विकास की प्रतीक्षा में, जिसका वादा उससे बार-बार किया गया।
भाजपा नेता मुकुल सिंह आशा ने एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत किया पौधारोपण
रितेश मिश्रा
हरदोई। भारतीय जनता पार्टी द्वारा पर्यावरण संरक्षण और हरित वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत भाजपा जिला कार्यसमिति सदस्य मुकुल सिंह आशा ने पौधारोपण किया।
भाजपा नेता मुकुल सिंह आशा ने अपनी माँ के सम्मान में एक पौधा रोपते हुए कहा कि माँ जीवन का आधार होती हैं और उनके नाम पर पौधा लगाना प्रकृति तथा मातृत्व दोनों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि वृक्ष न केवल पर्यावरण को संतुलित रखते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य भी सुनिश्चित करते हैं। “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। उन्होंने सभी से अपील की कि आप सभी लोग पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक एक पौधा अवश्य लगाएं और साथ ही उसकी देखभाल करें।
विश्व पर्यावरण दिवस-2026’’ के अवसर पर नगर पालिका परिषद सुलतानपुर द्वारा एक पेड़ मॉं के नाम अभियान के तहत नवीन वर्कशाप परिसर वृक्षारोपण किया गया*
आज दिनांक 5 जून, 2026 को ‘‘विश्व पर्यावरण दिवस-2026’’ के अवसर पर नगर पालिका परिषद सुलतानपुर द्वारा एक पेड़ मॉं के नाम अभियान के तहत पालिका के गोराबारिक स्थित नवीन वर्कशाप परिसर में पालिका अध्यक्ष प्रवीन कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में शहर के विभिन्न सामाजिक संगठन, संयुक्त सेवा समिति व भारतीय जनता पार्टी सुलतानपुर के प्रमुखों की उपस्थिति में समारोहपूर्वक वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बतौर मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी रहे तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ चिकित्सक डा0 ए0के0 सिंह एवं संयुक्त समिति के अध्यक्ष डा0 सुधाकर सिंह, जगजीत सिंह छंगू, श्रीमती रीना जायसवाल, अयोध्या वर्मा आशीष सिंह, रज्जन सिंह, दिनकर सिंह आदि सामाजिक संगठन से जुड़े हुए कार्यकर्ता द्वारा वृक्षारोपण किया गया। पालिकाध्यक्ष ने अपने सम्बोधन में कहा कि गत वर्ष सामाजिक संगठनों के सहयोग से पालिका द्वारा ‘‘स्वच्छ सुन्दर हरित सुल्तानपुर‘‘ के संकल्प को दोहराते हुए ‘‘एक पेड़ मॉं के नाम‘‘ वृहद् वृक्षारोपण महाअभियान-2025 के अन्तर्गत ‘‘पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ‘‘ एवं ‘‘पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ‘‘ के नारे के साथ आक्सीजन बैंक के रूप में वाल्मीकि उपवन का निर्माण किया, नगर के प्रमुख मार्गों के डिवाइडरों व दोनों पटरियों पर नगर क्षेत्र में कुल लगभग 16000 की संख्या में वृक्षारोपण का कार्य कराया गया। जिसकी सुरक्षा हेतु पालिका द्वारा विशेष कर्मचारियों व की ड्यूटी लगाते हुए लगभग 90ः पेड़ों का संरक्षण किया है तथा यह भी कहा कि पर्यावरण एवं जल-संरक्षण को दृष्टिगत रखते हुए पालिका द्वारा विभिन्न तालाब पोखर व पार्कों का निर्माण कराया जा रहा है, आज 05 जून को यह कार्यक्रम एक संकल्प दिवस के रूप में देश के प्रधानमन्त्री मा0 श्री नरेन्द्र मोदी जी व प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री मा0 योगी जी की प्रेरणा से प्रेरित होकर आयोजित किया गया है। इस वर्ष भी नगर पालिका द्वारा नगर क्षेत्र के विभिन्न बचे हुए स्थल, सड़क, डिवाइडर व पार्कों में लगभग 10000 पौधों का वृक्षारोपण कराया जायेगा। समारोह में संयुक्त समिति के अध्यक्ष डा0 सुधाकर सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि सामाजिक संस्थाओं को जोड़कर नगर पालिकाध्यक्ष द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से किये जा रहे कार्यों की सराहना की तथा लोगों से अपील की कि जल संरक्षण एवं वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष जोर दिया जाय व संकल्प लें कि पर्यावरण संरक्षण हेतु वृक्षारोपण के इस महाअभियान में एक जुट होकर वृक्षारोपण करेंगे। हम सभी पेड़ लगाते हैं, जिनके प्रति अपनी संवेदना को भी जगाना होगा, हमंे नदियों, पौधों आदि सभी को बचाना है, इस पर गम्भीर चिंतन करने की आवश्यकता है, तभी हमारी आने वाली पीढ़ियों को हम स्वच्छ रोगरहित वातावरण दे पायंेगे। वरिष्ठ चिकित्सक डा0 ए0के0 सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि पेड़ लगाना और उसका संरक्षण करना आज हर व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है। सभी समितियां व आम जनमानस स्वयं आगे बढ़कर पेड़ लगाने व जल संरक्षण का कार्य करें व कहा कि पेड़ वही व्यक्ति लगाये, जो उसका संरक्षण कर सके। मुख्य अतिथि श्री सुशील त्रिपाठी ने कहा कि वर्तमान समय में देश की सरकार मा0 श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में एवं प्रदेश की सरकार मा0 श्री योगी जी के नेतृत्व में समग्र विकास की दृष्टि से सफलतापूर्वक कार्य कर रही है, भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता इस मुहिम में बढ़चढ़कर अपना योगदान दे रहा है। वृक्षारोपण सहित अन्य कार्याें की सराहना की तथा अपील किया कि यह एक पुनीत अवसर है, इसमें अधिक से अधिक औषधीय एवं आक्सीजन युक्त पेड़ लगाने पर जोर दिया। कार्यक्रम का समापन अधिशासी अधिकारी लाल चन्द्र सरोज ने सबका आभार व्यक्त करते हुए इस आश्वासन के साथ किया कि शासन की योजनाओं को प्राथमिकता पर लेते हुए सफलतापूर्वक क्रियान्वयन व लागू किया जायेगा। कार्यक्रम का संयोजन सभासद दिनेश चौरसिया ने तथा संचालन सभासद प्रवीण मिश्र ने किया। इस अवसर पर पालिकाध्यक्ष, मुख्य अतिथि व सम्मानित आगन्तुकों द्वारा आम, नीम, चितवन आदि पेड़ों का वृक्षारोपण किया गया। इस अवसर पर सभासद संजय कप्तान, विजय जायसवाल, मीना जायसवाल, अरूण कुमार तिवारी, अफजल अंसारी, रवि अग्रहरि, रेनू सिंह व मंगरू प्रसाद प्रजापति, सन्दीप सोनकर, मनीष जायसवाल तथा सामाजिक संगठनों के पदाधिकारीगण सहित भाजपा के कार्यकर्तागण उपस्थित रहे।
देवघर-विश्व पर्यावरण दिवस पर भारत विकास परिषद, देवघर शाखा द्वारा गांव में जाकर फलदार पौधारोपण।
देवघर: 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारत विकास परिषद, देवघर शाखा द्वारा मोहनपुर प्रखंड के ग्राम तरडीहा (बारा पंचायत) एवं हिरणा (नया चितकाठ पंचायत) में फलदार पौधों के वितरण एवं पौधारोपण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्राम ज्योति के सचिव एवं परिषद सदस्य पशुपति कुमार के विशेष सहयोग से आयोजित की गई। उन्होंने परिषद सदस्य एस.पी. भुईयां बिलास के साथ मिलकर स्थानीय ग्रामीणों को इस अभियान से जोड़ा तथा पौधारोपण हेतु गड्ढों की व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक प्रबंध पूर्व से ही सुनिश्चित किया। कार्यक्रम में वहां के मुखिया अनिल साह की महत्वपूर्ण उपस्थिति रही। उन्होंने ग्रामीणों से अधिकाधिक वृक्षारोपण करने तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण का आह्वान किया। परिषद द्वारा लगभग 75 फलदार पौधों एवं आवश्यक खाद की व्यवस्था की गई। ग्रामीणों एवं परिषद सदस्यों ने मिलकर उत्साहपूर्वक पौधारोपण किया तथा पौधों की नियमित देखभाल का संकल्प लिया। इस वर्ष परिषद ने पौधारोपण को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी पर विशेष बल दिया। फलदार पौधे ग्रामीण परिवारों को उपलब्ध कराए गए, जिससे उनके संरक्षण की स्वाभाविक जिम्मेदारी भी सुनिश्चित हो सके। भविष्य में ये वृक्ष पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ छाया, फल एवं स्वच्छ वायु का स्रोत बनेंगे। इस अवसर पर संरक्षक डॉ. सुनील सिन्हा, सचिव रूपा केशरी, पर्यावरण संयोजक संतोष सिंह, संपर्क संयोजक जयप्रकाश गुप्ता, पशुपति कुमार, एस. पी. भुईयां बिलास, रंजीत बरनवाल सहित अनेक सदस्य और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे। परिषद ने कहा कि “एक वृक्ष दस पुत्रों के समान माना गया है। वृक्ष केवल पर्यावरण की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन का आधार भी प्रदान करते हैं।” प्रत्येक नागरिक से कम-से-कम एक पौधा लगाने एवं उसके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर भारत विकास परिषद, देवघर शाखा की अध्यक्ष कंचन मूर्ति साह ने सभी सदस्यों, ग्रामीणों एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि परिषद पर्यावरण संरक्षण एवं समाजहित के ऐसे अभियानों को निरंतर आगे बढ़ाती रहेगी। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि “एक पौधा पर्यावरण के नाम तथा एक पौधा माँ के नाम अवश्य लगाएँ।”
विश्व पर्यावरण दिवस पर विकासखंड महाराजगंज में हुआ वृक्षारोपण
जौनपुर । विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शासन की मंशा के अनुरूप चलाए जा रहे "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत विकासखंड महाराजगंज परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए पौधरोपण किया।इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी दिनेश कुमार मौर्य, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी अंकित सिंह, पूर्व मंडल अध्यक्ष एवं सवंसा प्रधान यादवेन्द्र प्रताप सिंह "लवकुश", क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी पंकज सिंह, तकनीकी सहायक निखिलेश यादव, इंद्रजीत मौर्य, लाल बहादुर गौतम सहित विकासखंड कार्यालय के अन्य कर्मचारियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
खंड विकास अधिकारी ने कहा कि वृक्ष मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। पर्यावरण को संतुलित रखने तथा आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण प्रदान करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी करनी चाहिए कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित लोगों ने पौधों के संरक्षण का संकल्प लिया तथा अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने के लिए लोगों को जागरूक करने का आह्वान किया। इस अवसर पर विकासखंड परिसर हरियाली से सराबोर दिखाई दिया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में उत्साह देखने को मिला।
पौध रोपड से ज्यादा जरूरी है पुराने व लगे हुए बृक्षों को देखभाल करना*
सुल्तानपुर,पौध रोपड से ज्यादा जरूरी है पुराने व लगे हुए बृक्षों को सहेजना। डॅा.दिनकर वर्षों से विश्व हिन्दू महासंघ के जिला अध्यक्ष व गोमती मित्र मंडल समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी डॅा.कुंवर दिनकर प्रताप सिंह गोमती नदी के तट व खाली स्थानों पर बड़ी संख्या में पौधरोपण करते आ रहे हैं। डॅा.दिनकर कहते हैं कि हर किसी को अपने जन्मदिन व विवाह दिवस पर या किसी भी शुभ अवसर पर एक पौधा जरूर लगाना चाहिए पर उसे पेड बनने तक उसकी सेवा बच्चों की तरह करना होगा।,जैसे हम अपने बच्चों व परिजनों का ध्यान रखते है वैसे ही अपने द्वारा लगाए पौधों की देखभाल करके उन्हें बड़ा करने का दायित्व भी हमारा होना चाहिए। पृथ्वी हमारी माता है और इसका संरक्षण हमारी प्रतिबद्धता है।आइए,आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का प्रण लें और प्रकृति के प्रति अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करें। विश्व पर्यावरण दिवस एवं उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्य मन्त्री मा.योगी आदित्य नाथ जी महाराज के जन्मदिवस पर विश्व हिन्दू महासंघ के जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में प्रमुख स्थानों पर वृक्षारोपड किया गया। प्रातःवेला में सीताकुण्ड धाम पर नीम,अमरूद,आंवला सहित पांच पेड,अमहट में नगर पालिका परिषद द्वारा निर्मित वर्कशाप परिसर में पाकड के दो पेड व कदम्ब का एक पेड तथा गनपत सहाय पी.जी.कालेज पयागीपुर में पांच पेड रोपे गये,साथ ही सभी पेडों को सुरक्षित रखने का संकल्प भी लिया गया। इस मौके पर जनपद के वरिष्ठ डाक्टर ए.के.सिंह विभाग संघचालक,प्रो.अंग्रेज सिंह”राणा”, प्रो.मो. शाहिद,रुद्र प्रताप सिंह मदन,रतन जी कसौंधन,मुन्ना सोनी,प्रो.राजीव श्रीवास्तव, प्रो.मनोज मिश्र,राजेन्द्र शर्मा,अभिषेक सिंह, अनुराग पाण्डेय,राजीव कसौंधन, सच्चिदानन्द सिंह सोनू,डॅा.अजय मिश्र, शुभेन्द्र वीर सिंह,राजेश पाठक इत्यादि लोग उपस्थित रहे।
गनपत सहाय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 'विश्व पर्यावरण दिवस' पर बृहद वृक्षारोपण : प्रकृति संरक्षण का लिया संकल्प*
गनपत सहाय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आज'विश्व पर्यावरण दिवस' के शुभ अवसर पर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना की समस्त पांचों इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय के पयागीपुर परिसर में महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ.ओम प्रकाश पाण्डेय 'बजरंगी'की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन तथा महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.अंग्रेज सिंह ”राणा” के नेतृत्व में एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया एवं जन जागरूकता के लिए पयागीपुर परिसर से एक विशाल रैली निकाली गई जोकि अहिमने,जोगीवीर झालापुर होते हुए पुनःपयागीपुर परिसर पर समाप्त हुई। प्राचार्य प्रो.अंग्रेज सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में वृक्ष ही हमारे सबसे बड़े रक्षक हैं। आज का यह वृक्षारोपण केवल एक औपचारिकता नहीं,बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ वातावरण देने का हमारा एक छोटा सा प्रयास है। मुख्य परिसर प्रभारी प्रो.मो.शाहिद द्वारा उपस्थित सभी प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं को पर्यावरण को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने की शपथ दिलाई। इस पुनीत कार्य को धरातल पर उतारने में राष्ट्रीय सेवा योजना के सभी कार्यक्रम अधिकारियों डॉ.शाहनवाज आलम, डॉ.दीपा सिंह,डॉ.विष्णु शंकर अग्रहरि,डॉ.भोलानाथ,डा.देवेन्द्र नाथ मिश्र का विशेष और सराहनीय सहयोग रहा।

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने न केवल उत्साहपूर्वक पौधे लगाए,बल्कि भविष्य में उनकी देखभाल और सुरक्षा करने की जिम्मेदारी भी ली।आज के इस विशेष अभियान के तहत महाविद्यालय परिसर में आम,पीपल,बरगद,आंवला और जामुन जैसे अनेक छायादार व औषधीय पौधे रोपे गए। कार्यक्रम के अंत में डॉ भोलानाथ द्वारा इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी कार्यक्रमाधिकारियों,शिक्षक एवं छात्र छात्राओं का आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर प्रो.राजीव श्रीवास्तव, प्रो मनोज मिश्र,डॉ.मो.शकील खान,डॉ.अजय कुमार मिश्र,डॉ.कुंवर दिनकर प्रताप सिंह एवं बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और स्वयंसेविकाएं उपस्थित रहे।
विश्व पर्यावरण दिवस पर न्यायालय परिसर में वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित
* पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण का किया गया आह्वान

लखनऊ। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के तत्वावधान में पुराना उच्च न्यायालय परिसर में वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता  प्रभारी जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ हुसैन अहमद अंसारी ने की। इस अवसर पर उनके कर कमलों द्वारा न्यायालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया।
कार्यक्रम में प्रभारी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ अभिषेक गुप्ता सहित न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए छायादार, फलदार तथा औषधीय गुणों से युक्त पौधों का रोपण किया। वृक्षारोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर  प्रभारी जनपद न्यायाधीश  हुसैन अहमद अंसारी ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण मानवता की सबसे बड़ी आवश्यकताओं में से एक है। बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यवहार और जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधों के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है, क्योंकि यही हमें शुद्ध वायु, स्वच्छ पर्यावरण और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करते हैं।
5 जून विश्व पर्यावरण दिवस एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित
तुलसीपुर, बलरामपुर, 5 जून।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आदि शक्ति माँ पाटेश्वरी पब्लिक स्कूल, भवनियापुर, तुलसीपुर, बलरामपुर में पर्यावरण संरक्षण एवं जन-जागरूकता को बढ़ावा देने हेतु विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण किया गया तथा विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।
इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की थीम *"Climate Action – For Climate, For Our Future"*  रही। इसी क्रम में विद्यालय परिवार द्वारा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने तथा प्रकृति संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस विषयक विशेष पोस्टर प्रदर्शित किए गए तथा विद्यार्थियों को अधिक से अधिक वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छता अपनाने एवं प्लास्टिक मुक्त वातावरण के निर्माण का संदेश दिया गया। उपस्थित सभी लोगों ने हरित एवं स्वच्छ पर्यावरण के संरक्षण हेतु संकल्प भी लिया।
आज विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ डी पी सिंह द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ के जन्मदिवस पर उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई प्रेषित की गई। विद्यालय परिवार ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सफल नेतृत्व की कामना करते हुए प्रदेश के विकास एवं जनकल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ डी पी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस तक सीमित न रहकर प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित एवं स्वस्थ भविष्य के लिए सभी को वृक्षारोपण, जल संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन हेतु सक्रिय भूमिका निभानी होगी।इसी के साथ जनपद में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए विश्व हिंदू महासंघ बलरामपुर द्वारा देवीपाटन मंदिर तुलसीपुर मे पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ का 55 वें जन्मदिवस के अवसर पर रुद्राभिषेक का कार्यक्रम किया गया जिसमें जिला अध्यक्ष चौधरी विजय सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष जीवन लाल उपाध्यक्ष मिथिलेश गिरी उपाध्यक्ष विजय प्रताप सोनी मंत्री सुग्रीव कश्यप भोला सरोज है जय सिंह सहित दर्जनों कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
वैभव लॉन, में 21 जून से 27 जून तक श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन

रितेश मिश्रा
हरदोई। कमलेश्वर फाउंडेशन एवं सहयोगी संस्था कुबेर लाल जनसेवा संस्थान द्वारा जनकल्याण एवं सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से दिनांक 21 जून 2026 से 27 जून 2026 तक वैभव लॉन, हरदोई में प्रतिदिन सायं 4:00 बजे से भव्य श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है।
संस्था के सदस्यों द्वारा समाचार पत्रों में प्रकाशित घटनाओं एवं सामाजिक परिस्थितियों का अध्ययन करने पर यह तथ्य सामने आया कि जनपद हरदोई सहित समाज के विभिन्न वर्गों में आत्महत्या, मानसिक तनाव, घबराहट, उच्च रक्तचाप, पारिवारिक विघटन, सामाजिक संघर्ष तथा नशे की प्रवृत्तियों में निरंतर वृद्धि हो रही है। किशोर, युवा, विद्यार्थी, नौकरीपेशा, व्यवसायी, बेरोजगार, महिलाएं एवं पुरुष सभी किसी न किसी रूप में इन समस्याओं से प्रभावित हो रहे हैं।
संस्था द्वारा किए गए अध्ययन एवं शोध के आधार पर यह निष्कर्ष प्राप्त हुआ कि उचित परामर्श (काउंसलिंग) एवं सकारात्मक मार्गदर्शन के माध्यम से इन समस्याओं में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है। साथ ही भक्ति, अध्यात्म एवं भारतीय संस्कृति से जोड़ते हुए रुचिपूर्ण ढंग से प्रदान की गई परामर्श सेवाएं अधिक प्रभावी एवं लाभकारी सिद्ध होती हैं।
इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए संस्था द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा का वाचन सुप्रसिद्ध कथावाचिका एवं परामर्शदाता पूज्या श्री राधा प्रिया जी के श्रीमुख से संपन्न होगा। श्री राधा प्रिया जी आध्यात्मिक एवं परामर्श सेवा के क्षेत्र में निरंतर सराहनीय कार्य कर रही हैं। उनके सानिध्य में आयोजित यह कथा केवल आध्यात्मिक यात्रा ही नहीं होगी, बल्कि मानसिक एवं भावनात्मक हीलिंग का भी एक सशक्त माध्यम बनेगी।
कार्यक्रम के प्रथम दिवस 21 जून 2026 को प्रातः 7:00 बजे भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया जाएगा। यह यात्रा श्रीराम जानकी मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए वैभव लॉन में सम्पन्न होगी।
कमलेश्वर फाउंडेशन एवं कुबेरलाल जन सेवा संस्थान ने जनपदवासियों से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण एवं आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन के इस अभियान का सहभागी बनने का आग्रह किया है।
कमलेश्वर फाउंडेशन की सचिव अमिता मिश्रा "मीतू" ने बताया कि आज के समय में इस तनाव पूर्ण वातावरण में लोगों को तनाव मुक्त करने का सबसे बेहतर माध्यम अध्यात्म है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को हीलिंग देना भी है। अध्यात्म के साथ साथ उनके तनाव को कैसे कम किया जा सकता है। इसके लिए ये कमलेश्वर फाउंडेशन का एवं कुबेरलाल जनसेवा संस्थान का एक प्रयास है।
कुबेर लाल जन सेवा संस्थान की संस्थापिका निरमा देवी ने बताया कि भागवत कथा के द्वारा आज की पीढ़ी को अपने देश की संस्कृति और संस्कारों से पुनः जोड़ा जा सकेगा ।इससे एक मजबूत समाज की स्थापना करने में सहायता मिलेगी।
पोस्टर विमोचन में विधायक प्रभाष कुमार, भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन, नगरपालिका अध्यक्ष सुख सागर मिश्रा ,"मधुर" , डॉ सीपी कटियार, निरमा देवी , डॉ चित्रा मिश्रा , विजय लक्ष्मी सिंह, अमिताभ शुक्ला "मोनू" , संजीव मिश्रा, अमिताभ शुक्ला,पंकज अवस्थी , सचिन मिश्रा, अभिषेक गुप्ता , सुमन सिंह, प्रशांत गुप्ता नितिन , काजल गुप्ता, सुमित श्रीवास्तव , वंदना सिंह, शांतनु सिंह सहित संस्था के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
जब विकास के अश्व कागज़ों पर दौड़े और प्रजा प्रतीक्षा करती रही
लक्ष्मी कान्त पाठक

हरदोई हस्तिनापुर के विशाल राजमहल में आज उत्सव का वातावरण है। राजकोष के अभिलेखों में अंकित है कि ग्रामराज्य समृद्धि के स्वर्णिम युग में प्रवेश कर चुका है। गांवों तक निर्मल जल पहुंच चुका है, गलियां विकास की चमक से आलोकित हैं, स्वच्छता ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है और प्रजा सुख, शांति तथा संतोष का जीवन व्यतीत कर रही है। दरबार में बैठे महामंत्री आंकड़ों के स्वर्णिम पन्ने खोल-खोलकर बताते हैं कि बीते पांच वर्षों में विकास की ऐसी गंगा बही है, जैसी पूर्वकाल में कभी नहीं बही।
किन्तु यदि कोई पथिक राजमहल की चकाचौंध छोड़कर गांव की चौपाल तक पहुंच जाए, तो उसे एक दूसरी ही कथा सुनाई देगी—वह कथा, जो राजकीय अभिलेखों में नहीं मिलती; वह कथा, जो गांव की टूटी गलियों, सूखे हैंडपंपों, कूड़े के ढेरों और प्रजा की आंखों में लिखी हुई है।
हस्तिनापुर के इस ग्रामराज्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान स्वर्ण मुद्राओं की अभूतपूर्व वर्षा हुई। राजकोष के द्वार खुले, योजनाएं बनीं, प्रस्ताव पारित हुए, निर्माण कार्यों की लंबी सूचियां तैयार हुईं और विकास के रथों को आगे बढ़ाने की घोषणाएं होती रहीं। ऐसा प्रतीत होता था मानो प्रत्येक गांव शीघ्र ही इंद्रप्रस्थ की भांति वैभवशाली और सुन्दर हो जाएगा। किन्तु समय बीतने के बाद जब प्रजा ने अपने चारों ओर दृष्टि डाली, तो पाया कि परिवर्तन का अधिकांश वैभव केवल राजकीय दस्तावेजों में ही सुरक्षित रह गया है।
सबसे पहले बात जल की।
ऋषियों ने कहा था—“जल ही जीवन है।” अतः ग्रामराज्य में जल योजनाओं पर सर्वाधिक धन व्यय हुआ। अभिलेख बताते हैं कि असंख्य नए हैंडपंप स्थापित किए गए। पुराने हैंडपंपों का रिबोर हुआ। उनकी मरम्मत हुई। पाइप बदले गए। प्लेटफार्म बने। जल स्रोतों का पुनर्जीवन हुआ। कागज़ों पर तो ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रत्येक ग्रामीण के द्वार पर गंगा की धारा बह रही हो।
किन्तु गांव की धरती पर खड़ी प्रजा पूछती है—वे हैंडपंप कहां हैं?
जिन हैंडपंपों के बार-बार रिबोर का उल्लेख है, वे आज भी उसी जर्जर अवस्था में खड़े हैं। जिनकी मरम्मत के भुगतान हुए, वे वर्षों से पानी के स्थान पर केवल जंग उगल रहे हैं। ऐसा लगता है कि हस्तिनापुर के इस ग्रामराज्य में हैंडपंप धरती पर कम और कागज़ों में अधिक लगाए गए। पानी नलों और पाइपों से कम, फाइलों और भुगतान पत्रकों से अधिक बहता रहा।
राजमहल में बैठा कोई अभिलेखकार यदि सरकारी दस्तावेज पढ़े तो उसे लगेगा कि जल संकट इतिहास बन चुका है। परन्तु गांव की स्त्रियां आज भी सुबह और शाम सिर पर मटके रखकर पानी की तलाश में भटकती हैं। यही दृश्य बताता है कि राजकीय सत्य और जनसत्य में कितना गहरा अंतर है।
इसके बाद आती है गलियों की कथा।
राजकीय इतिहासकार लिखते हैं कि गांवों में खड़ंजों का जाल बिछा दिया गया। मार्गों का निर्माण हुआ। विकास की नई राहें बनाई गईं। लेकिन जैसे ही वर्षा ऋतु की पहली बूंद गिरती है, विकास की चमक की वास्तविक परीक्षा आरम्भ हो जाती है।
जहां नालियां नहीं हैं, वहां सड़कें तालाब बन जाती हैं। जहां जल निकासी नहीं है, वहां खड़ंजे कीचड़ में समा जाते हैं। अनेक गलियां ऐसी प्रतीत होती हैं मानो वे किसी ग्रामराज्य की नहीं, बल्कि किसी परित्यक्त बस्ती की हों। पत्थरों पर खर्च हुई स्वर्ण मुद्राओं के ढेर भी उस कीचड़ को नहीं रोक पाए, जो हर वर्ष ग्रामीण जीवन को दुश्वार बना देता है।
स्वच्छता की कहानी तो और भी अद्भुत है।
अभिलेख बताते हैं कि सफाई कर्मचारियों की पूरी सेना गांवों में तैनात रही। झाड़ू चलती रही। सफाई होती रही। भुगतान होते रहे। निरीक्षण होते रहे। बैठकों में प्रशंसा होती रही। किन्तु गांव की गलियों में पड़े कूड़े के ढेर, दुर्गंध से भरी नालियां और सार्वजनिक स्थलों की स्थिति कुछ और ही साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं।
ऐसा प्रतीत होता है कि झाड़ू की सबसे अधिक कृपा उन्हीं स्थानों पर हुई, जहां प्रभाव, प्रतिष्ठा और पहुंच का निवास था। सामान्य ग्रामीण अक्सर उस स्वच्छता अभियान का लाभ खोजता रह गया, जिसकी प्रशंसा रिपोर्टों और प्रस्तुतियों में की जाती रही।
फिर आया स्वच्छता का सबसे भव्य अध्याय—आरआरसी सेंटरों का।
घोषणा हुई कि अब गांवों से कूड़ा समाप्त हो जाएगा। कूड़ा निस्तारण के लिए आधुनिक केंद्र बनाए जाएंगे। भूमि चयनित हुई। भवन बने। संसाधन खरीदे गए। उद्घाटन हुए। तस्वीरें खिंचीं। प्रशस्ति गान हुए।
किन्तु इस योजना का सबसे बड़ा व्यंग्य यह रहा कि कूड़ा निस्तारण केंद्र तो बन गए, परंतु कूड़ा वहां तक पहुंच ही नहीं पाया।
केंद्र साफ-सुथरे खड़े रहे और गांव की गलियां कूड़े से भरी रहीं। मानो कूड़े और केंद्र के बीच कोई अदृश्य दीवार खड़ी हो गई हो। कूड़ा उठाने के लिए खरीदे गए साधन भी धीरे-धीरे रहस्य का विषय बन गए। यदि वे वास्तव में सक्रिय होते, तो शायद गांवों में कूड़े के पहाड़ दिखाई न देते।
इस पूरे ग्रामराज्य की सबसे गूढ़ कथा शिकायतों की है।
प्रजा शिकायत करती रही। आवेदन लिखे जाते रहे। दरबारों के चक्कर लगाए जाते रहे। अधिकारी आते रहे, जाते रहे। जांच की घोषणाएं होती रहीं। किन्तु परिणाम प्रायः उसी धूल में दब जाते रहे, जो गांव की पगडंडियों पर उड़ती रहती है।
अब इस कथा का एक महत्वपूर्ण और गंभीर पक्ष कानूनी व्यवस्था से भी जुड़ता है।
भारत का संविधान ग्राम स्वराज की अवधारणा को केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सहभागिता का आधार मानता है। संविधान के 73वें संशोधन द्वारा पंचायतों को स्थानीय स्वशासन की संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई। ग्राम सभा को गांव की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था माना गया, जहां जनता को विकास कार्यों की समीक्षा, प्रश्न पूछने और जवाब मांगने का अधिकार प्राप्त है।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 प्रत्येक नागरिक को यह शक्ति देता है कि वह सार्वजनिक धन के व्यय, निर्माण कार्यों, भुगतान, निविदाओं और योजनाओं का विवरण प्राप्त कर सके। पंचायत राज अधिनियमों में भी सामाजिक अंकेक्षण, अभिलेखों के निरीक्षण तथा जनभागीदारी की व्यवस्था की गई है। अतः यदि कोई ग्रामीण ग्राम निधि, हैंडपंप, सड़क, स्वच्छता या किसी अन्य विकास कार्य के संबंध में जानकारी मांगता है, तो वह किसी पर उपकार नहीं कर रहा होता, बल्कि अपने वैधानिक और संवैधानिक अधिकार का प्रयोग कर रहा होता है।
किन्तु इस कथा का एक और पक्ष है, जो हस्तिनापुर की प्रजा के मन में सबसे अधिक भय उत्पन्न करता है।
जब तक प्रजा मौन रही, तब तक सब कुछ शांत दिखाई देता रहा। लेकिन जैसे ही किसी ग्रामीण ने ग्राम निधि के व्यय का लेखा-जोखा मांगने का साहस किया, किसी ने कागज़ों में लगे हैंडपंपों की वास्तविकता जाननी चाही, किसी ने अधूरे निर्माण कार्यों पर प्रश्न उठाया अथवा किसी ने सफाई व्यवस्था और कूड़ा निस्तारण की विफलताओं को सार्वजनिक करने का प्रयास किया, तब राजकीय व्यवस्था का दूसरा स्वरूप सामने आने लगा।
कई स्थानों पर ऐसा प्रतीत हुआ मानो समस्या के समाधान से अधिक चिंता समस्या उजागर करने वालों की होने लगी हो। प्रजा के स्वर को सुनने के स्थान पर राजकीय रक्षक उसके द्वार तक पहुंचने लगे। शिकायतकर्ता ही संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया गया। कहीं चेतावनियों का सहारा लिया गया, कहीं दबाव का और कहीं नियमों व मर्यादाओं के नाम पर ऐसे लोगों को मुकदमों में उलझा दिया गया, जिन्होंने केवल अपने गांव और अपने अधिकारों की बात कही थी।
कुछ प्रजाजन तो ऐसे भी रहे जिन्हें न्याय की अपेक्षा राजकीय कारागार का मार्ग अधिक शीघ्र दिखाई दिया। धीरे-धीरे ग्रामराज्य में यह धारणा घर करने लगी कि विकास पर प्रश्न पूछना सरल नहीं है। परिणाम यह हुआ कि अनेक लोगों ने अन्याय सहना स्वीकार किया, परंतु व्यवस्था से टकराने का साहस नहीं किया।
जबकि विधि का मूल सिद्धांत कहता है कि शिकायतकर्ता, सूचना मांगने वाला नागरिक अथवा जनहित में प्रश्न पूछने वाला व्यक्ति लोकतंत्र का विरोधी नहीं, बल्कि उसकी मजबूती का आधार होता है। यदि किसी व्यवस्था में प्रश्न पूछना अपराध जैसा प्रतीत होने लगे, तो यह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि लोकतांत्रिक चिंता का विषय बन जाता है।
और जब किसी राज्य में प्रजा प्रश्न पूछने से भयभीत होने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि वहां विकास से अधिक मौन का विस्तार हो रहा है।
ऐसा नहीं कि हस्तिनापुर का खजाना खाली था। खजाना भरा हुआ था। योजनाएं भी थीं। कर्मचारी भी थे। नियम भी थे। लेकिन व्यवस्था का वह आत्मबल कहीं खो गया था, जो धन को विकास और योजना को परिणाम में बदल देता है।
आज पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं।
ग्रामराज्य की प्रजा अपने शासकों से कोई असंभव प्रश्न नहीं पूछ रही। वह केवल इतना जानना चाहती है कि जिन हैंडपंपों पर धन खर्च हुआ, वे कहां हैं? जिनकी मरम्मत हुई, उनमें पानी क्यों नहीं है? जिन गलियों पर लाखों रुपये खर्च हुए, वे कीचड़ से क्यों भरी हैं? जिन सफाई कर्मचारियों का वेतन वर्षों तक निकला, गांव गंदा क्यों है? और जिन कूड़ा निस्तारण केंद्रों पर धन बहाया गया, वहां गांव का कूड़ा क्यों नहीं पहुंचा?
हस्तिनापुर के प्राचीन ग्रंथ कहते हैं कि राज्य की शक्ति उसके राजमहलों की ऊंचाई से नहीं, बल्कि उसकी प्रजा के चेहरे पर दिखाई देने वाली संतुष्टि से मापी जाती है। यदि प्रजा प्रश्न पूछ रही है, यदि गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है, तो यह केवल किसी एक प्रधान, सचिव या अधिकारी का प्रश्न नहीं है; यह पूरी व्यवस्था के आत्ममंथन का विषय है।उत्तर प्रदेश में ग्राम स्वराज की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी, जब विकास की कहानी केवल अभिलेखों में नहीं, बल्कि गांव की गलियों, स्वच्छ जल स्रोतों, साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थलों, सक्रिय ग्राम सभाओं और निर्भय नागरिकों के जीवन में दिखाई देगी। क्योंकि लोकतंत्र का अर्थ केवल योजनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि उनके परिणामों की सार्वजनिक जवाबदेही भी है।अन्यथा इतिहास एक दिन यह लिखेगा कि उत्तर प्रदेश के ग्राम स्वराज में विकास के अश्व बहुत तेज़ दौड़े थे, परंतु वे धरती पर नहीं, केवल कागज़ों के मैदान में दौड़ते रहे। प्रजा वहीं खड़ी रही—पानी की प्रतीक्षा में, स्वच्छता की प्रतीक्षा में, न्याय की प्रतीक्षा में, और उस विकास की प्रतीक्षा में, जिसका वादा उससे बार-बार किया गया।
भाजपा नेता मुकुल सिंह आशा ने एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत किया पौधारोपण
रितेश मिश्रा
हरदोई। भारतीय जनता पार्टी द्वारा पर्यावरण संरक्षण और हरित वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत भाजपा जिला कार्यसमिति सदस्य मुकुल सिंह आशा ने पौधारोपण किया।
भाजपा नेता मुकुल सिंह आशा ने अपनी माँ के सम्मान में एक पौधा रोपते हुए कहा कि माँ जीवन का आधार होती हैं और उनके नाम पर पौधा लगाना प्रकृति तथा मातृत्व दोनों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि वृक्ष न केवल पर्यावरण को संतुलित रखते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य भी सुनिश्चित करते हैं। “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। उन्होंने सभी से अपील की कि आप सभी लोग पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक एक पौधा अवश्य लगाएं और साथ ही उसकी देखभाल करें।
विश्व पर्यावरण दिवस-2026’’ के अवसर पर नगर पालिका परिषद सुलतानपुर द्वारा एक पेड़ मॉं के नाम अभियान के तहत नवीन वर्कशाप परिसर वृक्षारोपण किया गया*
आज दिनांक 5 जून, 2026 को ‘‘विश्व पर्यावरण दिवस-2026’’ के अवसर पर नगर पालिका परिषद सुलतानपुर द्वारा एक पेड़ मॉं के नाम अभियान के तहत पालिका के गोराबारिक स्थित नवीन वर्कशाप परिसर में पालिका अध्यक्ष प्रवीन कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में शहर के विभिन्न सामाजिक संगठन, संयुक्त सेवा समिति व भारतीय जनता पार्टी सुलतानपुर के प्रमुखों की उपस्थिति में समारोहपूर्वक वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बतौर मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी रहे तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ चिकित्सक डा0 ए0के0 सिंह एवं संयुक्त समिति के अध्यक्ष डा0 सुधाकर सिंह, जगजीत सिंह छंगू, श्रीमती रीना जायसवाल, अयोध्या वर्मा आशीष सिंह, रज्जन सिंह, दिनकर सिंह आदि सामाजिक संगठन से जुड़े हुए कार्यकर्ता द्वारा वृक्षारोपण किया गया। पालिकाध्यक्ष ने अपने सम्बोधन में कहा कि गत वर्ष सामाजिक संगठनों के सहयोग से पालिका द्वारा ‘‘स्वच्छ सुन्दर हरित सुल्तानपुर‘‘ के संकल्प को दोहराते हुए ‘‘एक पेड़ मॉं के नाम‘‘ वृहद् वृक्षारोपण महाअभियान-2025 के अन्तर्गत ‘‘पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ‘‘ एवं ‘‘पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ‘‘ के नारे के साथ आक्सीजन बैंक के रूप में वाल्मीकि उपवन का निर्माण किया, नगर के प्रमुख मार्गों के डिवाइडरों व दोनों पटरियों पर नगर क्षेत्र में कुल लगभग 16000 की संख्या में वृक्षारोपण का कार्य कराया गया। जिसकी सुरक्षा हेतु पालिका द्वारा विशेष कर्मचारियों व की ड्यूटी लगाते हुए लगभग 90ः पेड़ों का संरक्षण किया है तथा यह भी कहा कि पर्यावरण एवं जल-संरक्षण को दृष्टिगत रखते हुए पालिका द्वारा विभिन्न तालाब पोखर व पार्कों का निर्माण कराया जा रहा है, आज 05 जून को यह कार्यक्रम एक संकल्प दिवस के रूप में देश के प्रधानमन्त्री मा0 श्री नरेन्द्र मोदी जी व प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री मा0 योगी जी की प्रेरणा से प्रेरित होकर आयोजित किया गया है। इस वर्ष भी नगर पालिका द्वारा नगर क्षेत्र के विभिन्न बचे हुए स्थल, सड़क, डिवाइडर व पार्कों में लगभग 10000 पौधों का वृक्षारोपण कराया जायेगा। समारोह में संयुक्त समिति के अध्यक्ष डा0 सुधाकर सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि सामाजिक संस्थाओं को जोड़कर नगर पालिकाध्यक्ष द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से किये जा रहे कार्यों की सराहना की तथा लोगों से अपील की कि जल संरक्षण एवं वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष जोर दिया जाय व संकल्प लें कि पर्यावरण संरक्षण हेतु वृक्षारोपण के इस महाअभियान में एक जुट होकर वृक्षारोपण करेंगे। हम सभी पेड़ लगाते हैं, जिनके प्रति अपनी संवेदना को भी जगाना होगा, हमंे नदियों, पौधों आदि सभी को बचाना है, इस पर गम्भीर चिंतन करने की आवश्यकता है, तभी हमारी आने वाली पीढ़ियों को हम स्वच्छ रोगरहित वातावरण दे पायंेगे। वरिष्ठ चिकित्सक डा0 ए0के0 सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि पेड़ लगाना और उसका संरक्षण करना आज हर व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है। सभी समितियां व आम जनमानस स्वयं आगे बढ़कर पेड़ लगाने व जल संरक्षण का कार्य करें व कहा कि पेड़ वही व्यक्ति लगाये, जो उसका संरक्षण कर सके। मुख्य अतिथि श्री सुशील त्रिपाठी ने कहा कि वर्तमान समय में देश की सरकार मा0 श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में एवं प्रदेश की सरकार मा0 श्री योगी जी के नेतृत्व में समग्र विकास की दृष्टि से सफलतापूर्वक कार्य कर रही है, भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता इस मुहिम में बढ़चढ़कर अपना योगदान दे रहा है। वृक्षारोपण सहित अन्य कार्याें की सराहना की तथा अपील किया कि यह एक पुनीत अवसर है, इसमें अधिक से अधिक औषधीय एवं आक्सीजन युक्त पेड़ लगाने पर जोर दिया। कार्यक्रम का समापन अधिशासी अधिकारी लाल चन्द्र सरोज ने सबका आभार व्यक्त करते हुए इस आश्वासन के साथ किया कि शासन की योजनाओं को प्राथमिकता पर लेते हुए सफलतापूर्वक क्रियान्वयन व लागू किया जायेगा। कार्यक्रम का संयोजन सभासद दिनेश चौरसिया ने तथा संचालन सभासद प्रवीण मिश्र ने किया। इस अवसर पर पालिकाध्यक्ष, मुख्य अतिथि व सम्मानित आगन्तुकों द्वारा आम, नीम, चितवन आदि पेड़ों का वृक्षारोपण किया गया। इस अवसर पर सभासद संजय कप्तान, विजय जायसवाल, मीना जायसवाल, अरूण कुमार तिवारी, अफजल अंसारी, रवि अग्रहरि, रेनू सिंह व मंगरू प्रसाद प्रजापति, सन्दीप सोनकर, मनीष जायसवाल तथा सामाजिक संगठनों के पदाधिकारीगण सहित भाजपा के कार्यकर्तागण उपस्थित रहे।
देवघर-विश्व पर्यावरण दिवस पर भारत विकास परिषद, देवघर शाखा द्वारा गांव में जाकर फलदार पौधारोपण।
देवघर: 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारत विकास परिषद, देवघर शाखा द्वारा मोहनपुर प्रखंड के ग्राम तरडीहा (बारा पंचायत) एवं हिरणा (नया चितकाठ पंचायत) में फलदार पौधों के वितरण एवं पौधारोपण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्राम ज्योति के सचिव एवं परिषद सदस्य पशुपति कुमार के विशेष सहयोग से आयोजित की गई। उन्होंने परिषद सदस्य एस.पी. भुईयां बिलास के साथ मिलकर स्थानीय ग्रामीणों को इस अभियान से जोड़ा तथा पौधारोपण हेतु गड्ढों की व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक प्रबंध पूर्व से ही सुनिश्चित किया। कार्यक्रम में वहां के मुखिया अनिल साह की महत्वपूर्ण उपस्थिति रही। उन्होंने ग्रामीणों से अधिकाधिक वृक्षारोपण करने तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण का आह्वान किया। परिषद द्वारा लगभग 75 फलदार पौधों एवं आवश्यक खाद की व्यवस्था की गई। ग्रामीणों एवं परिषद सदस्यों ने मिलकर उत्साहपूर्वक पौधारोपण किया तथा पौधों की नियमित देखभाल का संकल्प लिया। इस वर्ष परिषद ने पौधारोपण को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी पर विशेष बल दिया। फलदार पौधे ग्रामीण परिवारों को उपलब्ध कराए गए, जिससे उनके संरक्षण की स्वाभाविक जिम्मेदारी भी सुनिश्चित हो सके। भविष्य में ये वृक्ष पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ छाया, फल एवं स्वच्छ वायु का स्रोत बनेंगे। इस अवसर पर संरक्षक डॉ. सुनील सिन्हा, सचिव रूपा केशरी, पर्यावरण संयोजक संतोष सिंह, संपर्क संयोजक जयप्रकाश गुप्ता, पशुपति कुमार, एस. पी. भुईयां बिलास, रंजीत बरनवाल सहित अनेक सदस्य और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे। परिषद ने कहा कि “एक वृक्ष दस पुत्रों के समान माना गया है। वृक्ष केवल पर्यावरण की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन का आधार भी प्रदान करते हैं।” प्रत्येक नागरिक से कम-से-कम एक पौधा लगाने एवं उसके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर भारत विकास परिषद, देवघर शाखा की अध्यक्ष कंचन मूर्ति साह ने सभी सदस्यों, ग्रामीणों एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि परिषद पर्यावरण संरक्षण एवं समाजहित के ऐसे अभियानों को निरंतर आगे बढ़ाती रहेगी। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि “एक पौधा पर्यावरण के नाम तथा एक पौधा माँ के नाम अवश्य लगाएँ।”
विश्व पर्यावरण दिवस पर विकासखंड महाराजगंज में हुआ वृक्षारोपण
जौनपुर । विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शासन की मंशा के अनुरूप चलाए जा रहे "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत विकासखंड महाराजगंज परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए पौधरोपण किया।इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी दिनेश कुमार मौर्य, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी अंकित सिंह, पूर्व मंडल अध्यक्ष एवं सवंसा प्रधान यादवेन्द्र प्रताप सिंह "लवकुश", क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी पंकज सिंह, तकनीकी सहायक निखिलेश यादव, इंद्रजीत मौर्य, लाल बहादुर गौतम सहित विकासखंड कार्यालय के अन्य कर्मचारियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
खंड विकास अधिकारी ने कहा कि वृक्ष मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। पर्यावरण को संतुलित रखने तथा आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण प्रदान करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी करनी चाहिए कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित लोगों ने पौधों के संरक्षण का संकल्प लिया तथा अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने के लिए लोगों को जागरूक करने का आह्वान किया। इस अवसर पर विकासखंड परिसर हरियाली से सराबोर दिखाई दिया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में उत्साह देखने को मिला।
पौध रोपड से ज्यादा जरूरी है पुराने व लगे हुए बृक्षों को देखभाल करना*
सुल्तानपुर,पौध रोपड से ज्यादा जरूरी है पुराने व लगे हुए बृक्षों को सहेजना। डॅा.दिनकर वर्षों से विश्व हिन्दू महासंघ के जिला अध्यक्ष व गोमती मित्र मंडल समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी डॅा.कुंवर दिनकर प्रताप सिंह गोमती नदी के तट व खाली स्थानों पर बड़ी संख्या में पौधरोपण करते आ रहे हैं। डॅा.दिनकर कहते हैं कि हर किसी को अपने जन्मदिन व विवाह दिवस पर या किसी भी शुभ अवसर पर एक पौधा जरूर लगाना चाहिए पर उसे पेड बनने तक उसकी सेवा बच्चों की तरह करना होगा।,जैसे हम अपने बच्चों व परिजनों का ध्यान रखते है वैसे ही अपने द्वारा लगाए पौधों की देखभाल करके उन्हें बड़ा करने का दायित्व भी हमारा होना चाहिए। पृथ्वी हमारी माता है और इसका संरक्षण हमारी प्रतिबद्धता है।आइए,आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का प्रण लें और प्रकृति के प्रति अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करें। विश्व पर्यावरण दिवस एवं उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्य मन्त्री मा.योगी आदित्य नाथ जी महाराज के जन्मदिवस पर विश्व हिन्दू महासंघ के जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में प्रमुख स्थानों पर वृक्षारोपड किया गया। प्रातःवेला में सीताकुण्ड धाम पर नीम,अमरूद,आंवला सहित पांच पेड,अमहट में नगर पालिका परिषद द्वारा निर्मित वर्कशाप परिसर में पाकड के दो पेड व कदम्ब का एक पेड तथा गनपत सहाय पी.जी.कालेज पयागीपुर में पांच पेड रोपे गये,साथ ही सभी पेडों को सुरक्षित रखने का संकल्प भी लिया गया। इस मौके पर जनपद के वरिष्ठ डाक्टर ए.के.सिंह विभाग संघचालक,प्रो.अंग्रेज सिंह”राणा”, प्रो.मो. शाहिद,रुद्र प्रताप सिंह मदन,रतन जी कसौंधन,मुन्ना सोनी,प्रो.राजीव श्रीवास्तव, प्रो.मनोज मिश्र,राजेन्द्र शर्मा,अभिषेक सिंह, अनुराग पाण्डेय,राजीव कसौंधन, सच्चिदानन्द सिंह सोनू,डॅा.अजय मिश्र, शुभेन्द्र वीर सिंह,राजेश पाठक इत्यादि लोग उपस्थित रहे।
गनपत सहाय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 'विश्व पर्यावरण दिवस' पर बृहद वृक्षारोपण : प्रकृति संरक्षण का लिया संकल्प*
गनपत सहाय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आज'विश्व पर्यावरण दिवस' के शुभ अवसर पर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना की समस्त पांचों इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय के पयागीपुर परिसर में महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ.ओम प्रकाश पाण्डेय 'बजरंगी'की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन तथा महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.अंग्रेज सिंह ”राणा” के नेतृत्व में एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया एवं जन जागरूकता के लिए पयागीपुर परिसर से एक विशाल रैली निकाली गई जोकि अहिमने,जोगीवीर झालापुर होते हुए पुनःपयागीपुर परिसर पर समाप्त हुई। प्राचार्य प्रो.अंग्रेज सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में वृक्ष ही हमारे सबसे बड़े रक्षक हैं। आज का यह वृक्षारोपण केवल एक औपचारिकता नहीं,बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ वातावरण देने का हमारा एक छोटा सा प्रयास है। मुख्य परिसर प्रभारी प्रो.मो.शाहिद द्वारा उपस्थित सभी प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं को पर्यावरण को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने की शपथ दिलाई। इस पुनीत कार्य को धरातल पर उतारने में राष्ट्रीय सेवा योजना के सभी कार्यक्रम अधिकारियों डॉ.शाहनवाज आलम, डॉ.दीपा सिंह,डॉ.विष्णु शंकर अग्रहरि,डॉ.भोलानाथ,डा.देवेन्द्र नाथ मिश्र का विशेष और सराहनीय सहयोग रहा।

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने न केवल उत्साहपूर्वक पौधे लगाए,बल्कि भविष्य में उनकी देखभाल और सुरक्षा करने की जिम्मेदारी भी ली।आज के इस विशेष अभियान के तहत महाविद्यालय परिसर में आम,पीपल,बरगद,आंवला और जामुन जैसे अनेक छायादार व औषधीय पौधे रोपे गए। कार्यक्रम के अंत में डॉ भोलानाथ द्वारा इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी कार्यक्रमाधिकारियों,शिक्षक एवं छात्र छात्राओं का आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर प्रो.राजीव श्रीवास्तव, प्रो मनोज मिश्र,डॉ.मो.शकील खान,डॉ.अजय कुमार मिश्र,डॉ.कुंवर दिनकर प्रताप सिंह एवं बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और स्वयंसेविकाएं उपस्थित रहे।
विश्व पर्यावरण दिवस पर न्यायालय परिसर में वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित
* पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण का किया गया आह्वान

लखनऊ। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के तत्वावधान में पुराना उच्च न्यायालय परिसर में वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता  प्रभारी जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ हुसैन अहमद अंसारी ने की। इस अवसर पर उनके कर कमलों द्वारा न्यायालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया।
कार्यक्रम में प्रभारी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ अभिषेक गुप्ता सहित न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए छायादार, फलदार तथा औषधीय गुणों से युक्त पौधों का रोपण किया। वृक्षारोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर  प्रभारी जनपद न्यायाधीश  हुसैन अहमद अंसारी ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण मानवता की सबसे बड़ी आवश्यकताओं में से एक है। बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यवहार और जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधों के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है, क्योंकि यही हमें शुद्ध वायु, स्वच्छ पर्यावरण और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करते हैं।