हजारीबाग में 13वें वर्ष निकली श्री श्याम फाल्गुन निशान ध्वज यात्रा, भक्ति में डूबा पूरा शहर

हजारीबाग - श्याम भक्त परिवार हजारीबाग के द्वारा मंगलवार को श्री श्याम फाल्गुन निशान ध्वज यात्रा का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के अद्भुत संगम के साथ संपन्न हुआ मालवीय मार्ग स्थित नवनिर्मित श्याम मंदिर परिसर से आरंभ हुई यह दिव्य शोभायात्रा पूरे शहर में भक्ति की अलख जगाती हुई विभिन्न प्रमुख मार्गों एवं चौक-चौराहों से होकर पुनः मंदिर परिसर पहुंची, जहां आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान से संपन्न पूजा-अर्चना के साथ हुआ। यजमान के रूप में बजरंग खेतान एवं उनकी धर्मपत्नी तथा नरेश वैद्य एवं उनकी धर्मपत्नी ने बाबा श्याम की पूजा-अर्चना कर शहरवासियों की सुख-शांति, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की। पूजा के उपरांत जैसे ही निशान ध्वज यात्रा प्रारंभ हुई, पूरा वातावरण हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा और जय श्री श्याम के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हो उठा। शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण सुसज्जित भव्य रथ रहा, जिस पर प्रभु श्री श्याम की मनोहारी झांकी विराजमान थी। रथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। रथ के पीछे राधा रानी की आकर्षक प्रस्तुति ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। धार्मिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। इस भव्य आयोजन में लगभग 500 से अधिक महिलाएं एवं पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। महिलाएं लाल और पीली साड़ियों में सुसज्जित होकर निशान ध्वज लिए भक्ति-भाव से चल रही थीं, जबकि पुरुष पारंपरिक कुर्ता-पायजामा में अनुशासित पंक्तियों में आगे बढ़ रहे थे। सभी श्रद्धालु एक स्वर में भजन-कीर्तन करते हुए कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे, जिससे पूरा शहर श्याम मय हो गया।यात्रा के दौरान धार्मिक झांकियों ने विशेष आकर्षण बटोरा। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से एक सज्जन के द्वारा लंगूर के स्वरूप में बच्चों और बड़ों का मनोरंजन करते दिखाई दिए, वहीं अग्रिम पंक्ति में हनुमान स्वरूप धारण किए एक भक्त पूरी श्रद्धा और ऊर्जा के साथ यात्रा का मार्ग प्रशस्त करते नजर आए ढोल-नगाड़ों और भजनों की मधुर धुन पर श्रद्धालु झूमते हुए आगे बढ़ रहे थे। कई स्थानों पर कई समाज एवं सामाजिक संगठनों द्वारा पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया गया तथा श्रद्धालुओं के लिए जलपान की व्यवस्था की गई। समाजसेवी मुन्ना सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे और आयोजन की सराहना की। मंदिर परिसर पहुंचने के उपरांत बाबा श्याम की सामूहिक आरती की गई। आरती के समय उपस्थित श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक स्वर में जयकारे लगाए, जिससे वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो उठा। इसके पश्चात प्रसाद वितरण किया गया। आयोजक मंडली ने बताया कि बाबा श्याम की असीम कृपा और आशीर्वाद से यह आयोजन लगातार 13 वें वर्ष सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। उन्होंने प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों, स्वागतकर्ताओं तथा पर्दे के पीछे रहकर व्यवस्था संभालने वाले कार्यकर्ताओं के साथ महिला सदस्यों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी इसी भव्यता के साथ आयोजन जारी रखने का संकल्प दोहराया।

हज़ारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद ने वर्ष 2026-27 के बजट को बताया दिशाहीन और जनविरोधी

हज़ारीबाग सदर विधानसभा के विधायक प्रदीप प्रसाद ने झारखंड विधानसभा में प्रस्तुत वर्ष 2026-27 के बजट को पूरी तरह निराधार, दिशाहीन और जनविरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट राज्य की महिलाओं, युवाओं, किसानों एवं आम नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में असफल रहा है।

विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि सरकार ने कुल ₹1,58,560 करोड़ का बजट प्रस्तुत किया है किंतु इस भारी-भरकम आंकड़े के बावजूद ज़मीनी विकास की स्पष्ट रणनीति नज़र नहीं आती। राजस्व आय को ₹1,36,210.04 करोड़ तथा राजस्व व्यय को ₹1,20,851.90 करोड़ दर्शाया गया है परंतु इन आंकड़ों में आम जनता के जीवन स्तर में ठोस सुधार का कोई रोडमैप नहीं दिखता।

उन्होंने विशेष रूप से कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के नाम पर केवल योजनागत प्रावधान दिखाए गए हैं, लेकिन रोजगार, सुरक्षा और स्वावलंबन के लिए ठोस एवं नवीन पहल का अभाव है। युवाओं के लिए कौशल विकास और स्थायी रोजगार सृजन की दिशा में कोई स्पष्ट नीति या बड़े निवेश की घोषणा नहीं की गई है। किसानों एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए बजट में अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी गई है। शिक्षा, स्वास्थ्य और शहरी विकास के मद में आवंटन तो दर्शाया गया है, परंतु पिछली योजनाओं के परिणामों की समीक्षा और जवाबदेही का अभाव है।

विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का खेल है, जिसमें पिछले वर्ष की तरह इस बार भी जनता को “छलावा” परोसा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आधारभूत संरचना की चुनौतियों पर गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि हज़ारीबाग सहित पूरे झारखंड की जनता एक ऐसे बजट की अपेक्षा करती थी, जो युवाओं को रोजगार, महिलाओं को आत्मनिर्भरता, किसानों को राहत और शहरों को बेहतर आधारभूत सुविधाएँ प्रदान करे। किंतु प्रस्तुत बजट में न तो दूरदृष्टि है और न ही ठोस कार्ययोजना।

विधायक प्रदीप प्रसाद ने सरकार से मांग की कि वह जनभावनाओं का सम्मान करते हुए बजट प्रावधानों की पुनर्समीक्षा करे तथा वास्तविक विकास और पारदर्शिता सुनिश्चित करे।

दूसरे दिन भी काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य जारी रहा*
सुल्तानपुर,टीईटी अनिवार्यता के विरोध में टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चंद्र शर्मा के आह्वान पर 23 फरवरी से 25 फरवरी तक जनपद के शिक्षक बाहों में काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य संपादित कर रहे हैं। सोमवार को पूरे जिले के शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ काली पट्टी बांधकर पढ़ाया। दूसरे दिन भी काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य जारी रहा।
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विद्यालय बंद होने के बाद कुड़वार ब्लॉक संसाधन केंद्र पर ब्लॉक अध्यक्ष निजाम खान के नेतृत्व में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, उच्च प्राथमिक शिक्षक संघ तथा महिला शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने एकत्र होकर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। ब्लॉक अध्यक्ष निजाम खान ने शिक्षकों में उत्साह और ऊर्जा भरते हुए भावुक उद्बोधन में कहा कि टीईटी अनिवार्यता की वापसी लाखों शिक्षकों के आत्मसम्मान की पुनर्स्थापना होगी। उन्होंने कहा कि जब तक अनिश्चितता का बादल छाया है, तब तक शिक्षकों के घरों में चिंता स्वाभाविक है। वर्षों का अनुभव, समर्पण और सेवा देने के बावजूद असुरक्षा की भावना किसी भी शिक्षक के लिए सबसे बड़ा संकट है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला कर्मी नहीं, बल्कि समाज का निर्माता है। धैर्य, विश्वास और लोकतांत्रिक संघर्ष ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। जिस दिन टीईटी अनिवार्यता से मुक्ति मिलेगी, वह दिन शिक्षकों की एकता और संयमित आंदोलन की ऐतिहासिक जीत का दिन होगा। इससे विद्यार्थियों को भी अपने अनुभवी गुरुजनों का मार्गदर्शन निरंतर मिलता रहेगा।
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इस अवसर पर रेखा सिंह, अंजू, विनय पाण्डेय, प्रदीप यादव (अध्यक्ष, आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन), राकेश शुक्ला, राम भवन, अरविंद कुमार, आशीष यादव, मृदुल देव तिवारी, मान सिंह, राजमणि यादव, कैलाश सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।
गले में चारा मशीन की सरिया घुसने से छात्र की मौत,घर के बाहर खेलते समय हुआ हादसा
*अस्पताल ले जाते समय रास्ते में हुई मौत

गोंडा।जिले के कटरा बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत निकरवा निश्यल पुरवा में गांव में चारा काटने वाली मशीन का सरिया गले में घुसने से कक्षा दो के छात्र आर्यन (8) वर्ष की मौत हो गई।बताते चलें कि निकरवा निश्यल पुरवा गांव निवासी दशरथ गोस्वामी का बेटा आर्यन अपने घर के बाहर साथियों के साथ खेल रहा था।इसी दौरान वह चारा काटने वाली मशीन से टकराकर जमीन पर गिर गया और मशीन उसके ऊपर गिर गई,जिससे मशीन के हत्थे की सरिया उसके गले में धंस गई।घटना के बाद परिजन आर्यन को अस्पताल ले जा रहे थे कि रास्ते में ही आर्यन की मौत हो गई।गांव के प्रधान बल्देव राज ने बताया कि आर्यन एक होनहार बच्चा था।कन्या कंपोजिट विद्यालय के शिक्षक अरुण सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि आर्यन अपने दो बड़े भाइयों आनंद और आदर्श के साथ विद्यालय आता था।बेटे के इस तरह हुए असामयिक निधन से परिवार में शोक का माहौल है।पिता दशरथ गोस्वामी ने कहा कि वे अपने बेटे का इलाज भी नहीं करा पाए।कटरा बाजार थाने के प्रभारी निरीक्षक विवेक त्रिवेदी ने बताया कि इस मामले में अभी तक कोई लिखित तहरीर प्राप्त नहीं हुई है।
मीरा भायंदर के नो हॉकर्स जोन में अवैध वसूली को लेकर रवि व्यास ने दी चेतावनी

भायंदर। मीरा भायंदर शहर में नो-हॉकर ज़ोन घोषित क्षेत्रों में अवैध रूप से फेरीवालों से शुल्क वसूली तथा अवैध बैठकों को संरक्षण दिए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इस संदर्भ में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नगरसेवक एड रवि व्यास ने मनपा आयुक्त को एक शिकायत पत्र लिखा पत्र में कहा गया है कि महानगरपालिका द्वारा घोषित नो-हॉकर ज़ोन में भी ठेकेदार एवं उसके प्रतिनिधियों द्वारा फेरीवालों से अवैध शुल्क वसूला जा रहा है तथा उन्हें अनधिकृत रूप से बैठने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे आम नागरिकों को यातायात बाधा, अतिक्रमण, असुविधा तथा कानून व्यवस्था संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

यह कृत्य ‘स्ट्रीट वेंडर्स (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act, 2014’ तथा महानगरपालिका के नियमों का उल्लंघन है। नो-हॉकर ज़ोन में किसी भी प्रकार की वसूली अथवा व्यवसाय की अनुमति देना पूरी तरह अवैध है। यदि प्रशासन द्वारा घोषित क्षेत्र में ही नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। एड रवि व्यास ने प्रशासन से निम्न मांगें की हैं: 1. संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध तत्काल जांच के आदेश दिए जाएं। 2. जांच पूर्ण होने तक नो-हॉकर ज़ोन में किसी भी प्रकार की शुल्क वसूली तत्काल रोकी जाए। 3. संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।

4. अवैध रूप से बैठाए गए फेरीवालों को हटाकर क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त किया जाए। 5. अधिकृत एवं नो-हॉकर ज़ोन की सूची सार्वजनिक की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस विषय में शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो जनहित में उच्च अधिकारियों एवं सक्षम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। मिरा-भाईंदर के नागरिकों के हितों की रक्षा हेतु प्रशासन से पारदर्शी एवं सख्त कदम उठाने की अपेक्षा की गई है।
झारखंड बजट 2026-27: 1.58 लाख करोड़ का ऐतिहासिक बजट पेश, 'नया झारखंड' बनाने का रोडमैप तैयार

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रांची: झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट विधानसभा में पेश करते हुए राज्य के समग्र विकास का स्पष्ट रोडमैप रखा. 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ रुपये के इस बजट में बुनियादी ढांचा, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और सामाजिक सुरक्षा को विकास का इंजन बताया गया है.

बजट का आकार और वित्तीय तस्वीर

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सकल बजट अनुमान पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक रखा गया है. राजस्व व्यय के लिए 1.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक और पूंजीगत व्यय के लिए 37,708 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. सरकार ने स्पष्ट किया कि यह बजट विकास के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन को भी साधने का प्रयास है. राजकोषीय घाटा 13,595.96 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो राज्य के GSDP का 2.18 प्रतिशत है.

निधि की व्यवस्था के लिए अपने कर राजस्व से 46,000 करोड़, गैर कर राजस्व से 20,700 करोड़, केंद्रीय सहायता से 18,273.66 करोड़, केंद्रीय करों में राज्य के हिस्सेदारी के रूप में 51,236.38 करोड़, लोक ऋण से 22,049.96 करोड़ और उधार तथा अग्रिम की वसूली से 300 करोड़ रु होने का अनुमान है.

GSDP दोगुना करने का लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में झारखंड की अर्थव्यवस्था को दोगुना करना है. इसके लिए कृषि, उद्योग, भौतिक संरचना, वित्तीय क्षेत्र, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष फोकस रखा गया है. वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा संसाधनों के बेहतर उपयोग और सूखे जैसे बाहरी कारकों के प्रभाव को कम कर 14 प्रतिशत की लक्षित विकास दर हासिल की जाएगी.

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल

महिला किसान खुशहाली योजना के जरिए महिला किसानों को आधुनिक तकनीक और मार्केटिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा. नकदी फसलों के विस्तार, कोल्ड स्टोरेज युक्त कोऑपरेटिव मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स और लघु वन उत्पादों के उन्नयन से ग्रामीण आय बढ़ाने का प्रयास किया गया है.

शिक्षा और कौशल विकास

राज्य के सभी सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों को Jharkhand Institute of Technology के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई है. इसके साथ ही चतरा में डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की स्थापना और चयनित ITI में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रशिक्षण की योजना पेश की गई है.

स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़ा निवेश

कैंसर की शुरुआती पहचान और इलाज के लिए मेडिकल कॉलेजों में PET-CT, कैथलैब और जिला अस्पतालों में मैमोग्राफी मशीनें लगेंगी. 750 अबुआ दवाखानों के माध्यम से सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है.

सड़क, पुल और पर्यटन को रफ्तार

मुख्यमंत्री ग्राम सड़क और सेतु योजना के तहत हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. पर्यटन के क्षेत्र में ग्लास ब्रिज, रोपवे, स्काइवॉक, सोलर बोट और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट जैसी परियोजनाओं से राज्य को नया पर्यटन मानचित्र देने की तैयारी है.

निवेश और रोजगार

सरकार के अनुसार वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से झारखंड को 1.24 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिससे करीब 45 हजार रोजगार के अवसर बनने की संभावना है. इसके अलावा औद्योगिक नीतियों के तहत 20 हजार करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है.

बाल बजट और जेंडर बजट

इस बजट की खासियत आउटकम बजट के तहत तैयार किया गया बाल बजट और जेंडर बजट है. बच्चों से जुड़ी योजनाओं के लिए कुल योजना आकार का 10.7 प्रतिशत और महिलाओं से संबंधित योजनाओं के लिए 34 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है.

कुल मिलाकर, बजट 2026-27 को सरकार ने “विकास, निवेश और सामाजिक न्याय का संतुलित दस्तावेज” बताया है, जो झारखंड को अगले दशक में तेज आर्थिक वृद्धि की राह पर ले जाने का दावा करता है.

झारखंड बजट 2026-27: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर आज खोलेंगे पिटारा, महिलाओं और युवाओं पर रहेगा फोकस

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रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज, 24 फरवरी को राज्य का वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर सदन पटल पर बजट रखेंगे। इस बार का बजट राज्य के विकास की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मंत्री ने पहले ही संकेत दिए हैं कि इसमें महिलाओं के स्वावलंबन के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।

बजट की मुख्य प्राथमिकताएं:

सूत्रों के अनुसार, सरकार इस बजट में 'समावेशी विकास' का लक्ष्य लेकर चल रही है। बजट के केंद्र में मुख्य रूप से चार स्तंभ होने की उम्मीद है:

महिला सशक्तिकरण: महिलाओं के लिए विशेष योजनाओं और सुरक्षा के लिए बड़ा आवंटन।

युवा एवं रोजगार: स्वरोजगार को बढ़ावा देने और खाली पड़े सरकारी पदों को भरने के लिए वित्तीय रोडमैप।

शिक्षा एवं स्वास्थ्य: ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर अस्पताल और स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना।

कनेक्टिविटी: दूर-दराज के गांवों को मुख्य सड़कों और डिजिटल माध्यमों से जोड़ना।

जनता की उम्मीदें:

झारखंड की जनता को उम्मीद है कि बढ़ती महंगाई के बीच सरकार कुछ कर राहत (Tax relief) और जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से मध्यम वर्ग और किसानों को राहत पहुंचाएगी। वित्त मंत्री के इस 'पिटारे' से यह साफ होगा कि झारखंड आगामी वर्षों में विकास की कितनी ऊंची छलांग लगाने के लिए तैयार है।

मेरठ में आग का कहर, जलती इमारत में जिंदा दफ्न हुआ परिवार, पांच मासूम समेत 6 की दर्दनाक मौत

मेरठ । यूपी के मेरठ में सोमवार रात एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। यहां के लिसाड़ी गेट थानाक्षेत्र के किदवई नगर इस्लामाबाद की गली नंबर-3 में स्थित एक तीन मंजिला मकान अचानक आग की लपटों में घिर गया। कुछ ही मिनटों में पूरा घर धुएं से भर गया और अंदर फंसे मासूम बच्चों व महिला की दर्दनाक मौत हो गई।इस भयावह हादसे में एक ही परिवार के पांच बच्चों और एक महिला सहित कुल छह लोगों की जान चली गई। इलाके में मातम पसरा है और चीख-पुकार की गूंज देर रात तक सुनाई देती रही।

नमाज पढ़ने गए थे घर के पुरुष, पीछे छूट गया जलता घर

मकान कपड़ा कारोबारी इकबाल अहमद का बताया जा रहा है। घटना के समय इकबाल और उनके दोनों बेटे आसिम व फारूक तरावीह की नमाज पढ़ने मस्जिद गए हुए थे। घर में महिलाएं और बच्चे मौजूद थे।
रात करीब 9:30 बजे अचानक घर के अंदर से धुआं उठने लगा। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। बताया जा रहा है कि आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

संकरी गलियां बनीं बाधा, लोग छतों से पहुंचे अंदर

घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई, लेकिन घनी आबादी और संकरी गलियों के कारण दमकल की गाड़ियां सीधे मौके तक नहीं पहुंच सकीं।
ऐसे में स्थानीय लोगों ने जान जोखिम में डालकर छतों के रास्ते घर में प्रवेश किया और झुलसे हुए बच्चों व महिलाओं को बाहर निकाला। तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

अस्पताल में टूटी सांसें

घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने रुखसार (30 वर्ष), अकदस (3 वर्ष), नबिया (6 माह), इनायत (6 माह), महविश (12 वर्ष), हम्माद (4 वर्ष) को मृत घोषित कर दिया। जबकि दो लोग गंभीर रूप से झुलसे हैं, जिनका इलाज जारी है।

शॉर्ट सर्किट की आशंका

प्रशासन के अनुसार, प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और राहत कार्य में आई बाधाओं की भी समीक्षा होगी।यह हादसा कई सवाल खड़े कर गया है—क्या घर में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम थे? क्या फैक्ट्री और रिहाइश एक साथ होने से खतरा बढ़ा?फिलहाल, मेरठ के इस इलाके में मातम का माहौल है। पांच मासूमों की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है।
रांची से दिल्ली जा रही एयर एम्बुलेंस क्रैश, सात लोगों की दर्दनाक मौत

रांची : झारखंड के चतरा जिले से एक अत्यंत दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एम्बुलेंस सिमरिया थाना क्षेत्र के घने जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस भयावह हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, लातेहार निवासी होटल संचालक संजय कुमार आग की एक घटना में 65 प्रतिशत से अधिक झुलस गए थे। उन्हें बेहतर इलाज के लिए देवकमल अस्पताल से दिल्ली ले जाया जा रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और रास्ते में ही यह विमान हादसे का शिकार हो गया।

मृतकों में संजय कुमार, उनकी पत्नी, सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विकास कुमार गुप्ता, एक नर्सिंग स्टाफ, दो क्रू मेंबर और एक अन्य सहायक कर्मी शामिल हैं।

हादसे की खबर मिलते ही चतरा और लातेहार जिला प्रशासन की टीमें तुरंत हरकत में आईं और बचाव कार्य शुरू किया। चूंकि दुर्घटना स्थल घने जंगलों के बीच है, इसलिए बचाव दल को वहां पहुंचने और राहत कार्य संचालित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। चतरा के पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार अग्रवाल ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि विमान में सवार सभी सात लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। सुरक्षा और साक्ष्य जुटाने के उद्देश्य से घटनास्थल के आसपास के लगभग तीन किलोमीटर के क्षेत्र को पूरी तरह से सील कर दिया गया है।

इस गंभीर विमान दुर्घटना की तकनीकी जांच के लिए दिल्ली से विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की टीम को रवाना किया गया है, जिसके बाद ही क्रैश के सटीक कारणों का पता चल पाएगा। इस हादसे ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को जीवनदान दिलाने की कोशिश में निकली यह यात्रा बेहद त्रासद अंत में तब्दील हो गई, जिससे लातेहार और चतरा सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है।

BMSICL में जातिगत भेदभाव का आरोप: सवर्ण अधिकारियों पर गाज, यादव अफसर बेदाग — क्या यही है बिहार की “सामाजिक न्याय” की राजनीति?

पटना। बिहार में सत्तारूढ़ दल हमेशा से सामाजिक न्याय का नारा बुलंद करते आए हैं, लेकिन क्या यह “न्याय” अब प्रशासनिक संस्थाओं में जातिगत प्रतिशोध का रूप लेने लगा है? बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMSICL) से सामने आए ताजा मामले ने इस सवाल को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि: बिहार में जाति और सत्ता का गठजोड़

बिहार की राजनीति दशकों से जातिगत समीकरणों पर टिकी रही है। 1990 के दशक में लालू प्रसाद यादव के उदय के बाद से “पिछड़ा वर्ग बनाम सवर्ण” की राजनीति बिहार की मुख्यधारा बन गई। नीतीश कुमार के शासनकाल में भले ही “सुशासन” का दावा किया गया, लेकिन जातिगत समीकरण आज भी नौकरशाही और सरकारी संस्थाओं की कार्यशैली को गहराई से प्रभावित करते हैं।

ऐसे माहौल में जब किसी सरकारी संस्था की शीर्ष अधिकारी के इशारे पर केवल सवर्ण और अल्पसंख्यक समुदाय के कर्मचारियों पर कार्रवाई हो और उसी जाति के अधिकारी — जिन पर गंभीर आरोप हों — बचे रहें, तो यह महज प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित जातिगत भेदभाव की ओर संकेत करता है।

BMSICL प्रकरण: क्या हुआ?

BMSICL, जो बिहार में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति श्रृंखला का प्रबंधन करती है, वहां मुख्य महाप्रबंधक (आपूर्ति श्रृंखला) कुमारी सीमा यादव के कार्यकाल में निम्नलिखित अधिकारियों और कर्मचारियों को निशाना बनाया गया —

∙ सुनील कुमार सिंह — GM लॉजिस्टिक एवं IT

∙ मोहित शर्मा — IT मैनेजर

∙ आशीष कुमार — लॉजिस्टिक मैनेजर

∙ विकाश झा — DGM प्रोजेक्ट

∙ नितीश उपाध्याय — मैनेजर प्रोजेक्ट

∙ कृति किरण — मैनेजर ड्रग्स

∙ धीरज कुमार सिंह — बिहटा वेयरहाउस मैनेजर

∙ नवनीत कुमार — DGM ड्रग्स

∙ फिरोज खान — फतुहा वेयरहाउस मैनेजर

इन सभी के विरुद्ध कार्रवाई की गई। इनमें से अधिकांश सवर्ण या अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं।

सबसे बड़ा सवाल: यादव अधिकारी क्यों बचे?

जो बात इस पूरे प्रकरण को और अधिक संदिग्ध बनाती है, वह यह है कि सहायक प्रबंधक नितिन कुमार यादव और धीरेंद्र कुमार — जिन पर कई गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं — उन्हें पूरी तरह बख्श दिया गया। न कोई जांच, न कोई निलंबन, न कोई नोटिस।

यह “चयनात्मक न्याय” स्पष्ट रूप से इशारा करता है कि कार्रवाई का आधार कदाचार नहीं, बल्कि जाति थी।

सामाजिक पृष्ठभूमि: सवर्ण विरोधी भावना या संस्थागत भेदभाव?

बिहार में पिछले तीन दशकों में सवर्ण समुदायों — भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ — के प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभाव में उल्लेखनीय कमी आई है। आरक्षण नीति और पिछड़ा वर्ग की राजनीतिक मजबूती के बाद सत्ता का ध्रुवीकरण हुआ है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि सामाजिक न्याय का असली अर्थ किसी एक वर्ग को दंडित करना नहीं, बल्कि सबके साथ समान व्यवहार करना है।

BMSICL जैसी स्वास्थ्य आपूर्ति संस्था — जिस पर करोड़ों मरीजों के लिए दवास्वतंत्र जांच कराई

हजारीबाग में 13वें वर्ष निकली श्री श्याम फाल्गुन निशान ध्वज यात्रा, भक्ति में डूबा पूरा शहर

हजारीबाग - श्याम भक्त परिवार हजारीबाग के द्वारा मंगलवार को श्री श्याम फाल्गुन निशान ध्वज यात्रा का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के अद्भुत संगम के साथ संपन्न हुआ मालवीय मार्ग स्थित नवनिर्मित श्याम मंदिर परिसर से आरंभ हुई यह दिव्य शोभायात्रा पूरे शहर में भक्ति की अलख जगाती हुई विभिन्न प्रमुख मार्गों एवं चौक-चौराहों से होकर पुनः मंदिर परिसर पहुंची, जहां आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान से संपन्न पूजा-अर्चना के साथ हुआ। यजमान के रूप में बजरंग खेतान एवं उनकी धर्मपत्नी तथा नरेश वैद्य एवं उनकी धर्मपत्नी ने बाबा श्याम की पूजा-अर्चना कर शहरवासियों की सुख-शांति, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की। पूजा के उपरांत जैसे ही निशान ध्वज यात्रा प्रारंभ हुई, पूरा वातावरण हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा और जय श्री श्याम के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हो उठा। शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण सुसज्जित भव्य रथ रहा, जिस पर प्रभु श्री श्याम की मनोहारी झांकी विराजमान थी। रथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। रथ के पीछे राधा रानी की आकर्षक प्रस्तुति ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। धार्मिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। इस भव्य आयोजन में लगभग 500 से अधिक महिलाएं एवं पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। महिलाएं लाल और पीली साड़ियों में सुसज्जित होकर निशान ध्वज लिए भक्ति-भाव से चल रही थीं, जबकि पुरुष पारंपरिक कुर्ता-पायजामा में अनुशासित पंक्तियों में आगे बढ़ रहे थे। सभी श्रद्धालु एक स्वर में भजन-कीर्तन करते हुए कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे, जिससे पूरा शहर श्याम मय हो गया।यात्रा के दौरान धार्मिक झांकियों ने विशेष आकर्षण बटोरा। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से एक सज्जन के द्वारा लंगूर के स्वरूप में बच्चों और बड़ों का मनोरंजन करते दिखाई दिए, वहीं अग्रिम पंक्ति में हनुमान स्वरूप धारण किए एक भक्त पूरी श्रद्धा और ऊर्जा के साथ यात्रा का मार्ग प्रशस्त करते नजर आए ढोल-नगाड़ों और भजनों की मधुर धुन पर श्रद्धालु झूमते हुए आगे बढ़ रहे थे। कई स्थानों पर कई समाज एवं सामाजिक संगठनों द्वारा पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया गया तथा श्रद्धालुओं के लिए जलपान की व्यवस्था की गई। समाजसेवी मुन्ना सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे और आयोजन की सराहना की। मंदिर परिसर पहुंचने के उपरांत बाबा श्याम की सामूहिक आरती की गई। आरती के समय उपस्थित श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक स्वर में जयकारे लगाए, जिससे वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो उठा। इसके पश्चात प्रसाद वितरण किया गया। आयोजक मंडली ने बताया कि बाबा श्याम की असीम कृपा और आशीर्वाद से यह आयोजन लगातार 13 वें वर्ष सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। उन्होंने प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों, स्वागतकर्ताओं तथा पर्दे के पीछे रहकर व्यवस्था संभालने वाले कार्यकर्ताओं के साथ महिला सदस्यों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी इसी भव्यता के साथ आयोजन जारी रखने का संकल्प दोहराया।

हज़ारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद ने वर्ष 2026-27 के बजट को बताया दिशाहीन और जनविरोधी

हज़ारीबाग सदर विधानसभा के विधायक प्रदीप प्रसाद ने झारखंड विधानसभा में प्रस्तुत वर्ष 2026-27 के बजट को पूरी तरह निराधार, दिशाहीन और जनविरोधी बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट राज्य की महिलाओं, युवाओं, किसानों एवं आम नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में असफल रहा है।

विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि सरकार ने कुल ₹1,58,560 करोड़ का बजट प्रस्तुत किया है किंतु इस भारी-भरकम आंकड़े के बावजूद ज़मीनी विकास की स्पष्ट रणनीति नज़र नहीं आती। राजस्व आय को ₹1,36,210.04 करोड़ तथा राजस्व व्यय को ₹1,20,851.90 करोड़ दर्शाया गया है परंतु इन आंकड़ों में आम जनता के जीवन स्तर में ठोस सुधार का कोई रोडमैप नहीं दिखता।

उन्होंने विशेष रूप से कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के नाम पर केवल योजनागत प्रावधान दिखाए गए हैं, लेकिन रोजगार, सुरक्षा और स्वावलंबन के लिए ठोस एवं नवीन पहल का अभाव है। युवाओं के लिए कौशल विकास और स्थायी रोजगार सृजन की दिशा में कोई स्पष्ट नीति या बड़े निवेश की घोषणा नहीं की गई है। किसानों एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए बजट में अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी गई है। शिक्षा, स्वास्थ्य और शहरी विकास के मद में आवंटन तो दर्शाया गया है, परंतु पिछली योजनाओं के परिणामों की समीक्षा और जवाबदेही का अभाव है।

विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का खेल है, जिसमें पिछले वर्ष की तरह इस बार भी जनता को “छलावा” परोसा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आधारभूत संरचना की चुनौतियों पर गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि हज़ारीबाग सहित पूरे झारखंड की जनता एक ऐसे बजट की अपेक्षा करती थी, जो युवाओं को रोजगार, महिलाओं को आत्मनिर्भरता, किसानों को राहत और शहरों को बेहतर आधारभूत सुविधाएँ प्रदान करे। किंतु प्रस्तुत बजट में न तो दूरदृष्टि है और न ही ठोस कार्ययोजना।

विधायक प्रदीप प्रसाद ने सरकार से मांग की कि वह जनभावनाओं का सम्मान करते हुए बजट प्रावधानों की पुनर्समीक्षा करे तथा वास्तविक विकास और पारदर्शिता सुनिश्चित करे।

दूसरे दिन भी काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य जारी रहा*
सुल्तानपुर,टीईटी अनिवार्यता के विरोध में टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चंद्र शर्मा के आह्वान पर 23 फरवरी से 25 फरवरी तक जनपद के शिक्षक बाहों में काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य संपादित कर रहे हैं। सोमवार को पूरे जिले के शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ काली पट्टी बांधकर पढ़ाया। दूसरे दिन भी काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य जारी रहा।
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विद्यालय बंद होने के बाद कुड़वार ब्लॉक संसाधन केंद्र पर ब्लॉक अध्यक्ष निजाम खान के नेतृत्व में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, उच्च प्राथमिक शिक्षक संघ तथा महिला शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने एकत्र होकर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। ब्लॉक अध्यक्ष निजाम खान ने शिक्षकों में उत्साह और ऊर्जा भरते हुए भावुक उद्बोधन में कहा कि टीईटी अनिवार्यता की वापसी लाखों शिक्षकों के आत्मसम्मान की पुनर्स्थापना होगी। उन्होंने कहा कि जब तक अनिश्चितता का बादल छाया है, तब तक शिक्षकों के घरों में चिंता स्वाभाविक है। वर्षों का अनुभव, समर्पण और सेवा देने के बावजूद असुरक्षा की भावना किसी भी शिक्षक के लिए सबसे बड़ा संकट है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला कर्मी नहीं, बल्कि समाज का निर्माता है। धैर्य, विश्वास और लोकतांत्रिक संघर्ष ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। जिस दिन टीईटी अनिवार्यता से मुक्ति मिलेगी, वह दिन शिक्षकों की एकता और संयमित आंदोलन की ऐतिहासिक जीत का दिन होगा। इससे विद्यार्थियों को भी अपने अनुभवी गुरुजनों का मार्गदर्शन निरंतर मिलता रहेगा।
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इस अवसर पर रेखा सिंह, अंजू, विनय पाण्डेय, प्रदीप यादव (अध्यक्ष, आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन), राकेश शुक्ला, राम भवन, अरविंद कुमार, आशीष यादव, मृदुल देव तिवारी, मान सिंह, राजमणि यादव, कैलाश सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।
गले में चारा मशीन की सरिया घुसने से छात्र की मौत,घर के बाहर खेलते समय हुआ हादसा
*अस्पताल ले जाते समय रास्ते में हुई मौत

गोंडा।जिले के कटरा बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत निकरवा निश्यल पुरवा में गांव में चारा काटने वाली मशीन का सरिया गले में घुसने से कक्षा दो के छात्र आर्यन (8) वर्ष की मौत हो गई।बताते चलें कि निकरवा निश्यल पुरवा गांव निवासी दशरथ गोस्वामी का बेटा आर्यन अपने घर के बाहर साथियों के साथ खेल रहा था।इसी दौरान वह चारा काटने वाली मशीन से टकराकर जमीन पर गिर गया और मशीन उसके ऊपर गिर गई,जिससे मशीन के हत्थे की सरिया उसके गले में धंस गई।घटना के बाद परिजन आर्यन को अस्पताल ले जा रहे थे कि रास्ते में ही आर्यन की मौत हो गई।गांव के प्रधान बल्देव राज ने बताया कि आर्यन एक होनहार बच्चा था।कन्या कंपोजिट विद्यालय के शिक्षक अरुण सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि आर्यन अपने दो बड़े भाइयों आनंद और आदर्श के साथ विद्यालय आता था।बेटे के इस तरह हुए असामयिक निधन से परिवार में शोक का माहौल है।पिता दशरथ गोस्वामी ने कहा कि वे अपने बेटे का इलाज भी नहीं करा पाए।कटरा बाजार थाने के प्रभारी निरीक्षक विवेक त्रिवेदी ने बताया कि इस मामले में अभी तक कोई लिखित तहरीर प्राप्त नहीं हुई है।
मीरा भायंदर के नो हॉकर्स जोन में अवैध वसूली को लेकर रवि व्यास ने दी चेतावनी

भायंदर। मीरा भायंदर शहर में नो-हॉकर ज़ोन घोषित क्षेत्रों में अवैध रूप से फेरीवालों से शुल्क वसूली तथा अवैध बैठकों को संरक्षण दिए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इस संदर्भ में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नगरसेवक एड रवि व्यास ने मनपा आयुक्त को एक शिकायत पत्र लिखा पत्र में कहा गया है कि महानगरपालिका द्वारा घोषित नो-हॉकर ज़ोन में भी ठेकेदार एवं उसके प्रतिनिधियों द्वारा फेरीवालों से अवैध शुल्क वसूला जा रहा है तथा उन्हें अनधिकृत रूप से बैठने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे आम नागरिकों को यातायात बाधा, अतिक्रमण, असुविधा तथा कानून व्यवस्था संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

यह कृत्य ‘स्ट्रीट वेंडर्स (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act, 2014’ तथा महानगरपालिका के नियमों का उल्लंघन है। नो-हॉकर ज़ोन में किसी भी प्रकार की वसूली अथवा व्यवसाय की अनुमति देना पूरी तरह अवैध है। यदि प्रशासन द्वारा घोषित क्षेत्र में ही नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। एड रवि व्यास ने प्रशासन से निम्न मांगें की हैं: 1. संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध तत्काल जांच के आदेश दिए जाएं। 2. जांच पूर्ण होने तक नो-हॉकर ज़ोन में किसी भी प्रकार की शुल्क वसूली तत्काल रोकी जाए। 3. संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।

4. अवैध रूप से बैठाए गए फेरीवालों को हटाकर क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त किया जाए। 5. अधिकृत एवं नो-हॉकर ज़ोन की सूची सार्वजनिक की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस विषय में शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो जनहित में उच्च अधिकारियों एवं सक्षम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। मिरा-भाईंदर के नागरिकों के हितों की रक्षा हेतु प्रशासन से पारदर्शी एवं सख्त कदम उठाने की अपेक्षा की गई है।
झारखंड बजट 2026-27: 1.58 लाख करोड़ का ऐतिहासिक बजट पेश, 'नया झारखंड' बनाने का रोडमैप तैयार

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रांची: झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट विधानसभा में पेश करते हुए राज्य के समग्र विकास का स्पष्ट रोडमैप रखा. 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ रुपये के इस बजट में बुनियादी ढांचा, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और सामाजिक सुरक्षा को विकास का इंजन बताया गया है.

बजट का आकार और वित्तीय तस्वीर

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सकल बजट अनुमान पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक रखा गया है. राजस्व व्यय के लिए 1.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक और पूंजीगत व्यय के लिए 37,708 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. सरकार ने स्पष्ट किया कि यह बजट विकास के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन को भी साधने का प्रयास है. राजकोषीय घाटा 13,595.96 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो राज्य के GSDP का 2.18 प्रतिशत है.

निधि की व्यवस्था के लिए अपने कर राजस्व से 46,000 करोड़, गैर कर राजस्व से 20,700 करोड़, केंद्रीय सहायता से 18,273.66 करोड़, केंद्रीय करों में राज्य के हिस्सेदारी के रूप में 51,236.38 करोड़, लोक ऋण से 22,049.96 करोड़ और उधार तथा अग्रिम की वसूली से 300 करोड़ रु होने का अनुमान है.

GSDP दोगुना करने का लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में झारखंड की अर्थव्यवस्था को दोगुना करना है. इसके लिए कृषि, उद्योग, भौतिक संरचना, वित्तीय क्षेत्र, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष फोकस रखा गया है. वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा संसाधनों के बेहतर उपयोग और सूखे जैसे बाहरी कारकों के प्रभाव को कम कर 14 प्रतिशत की लक्षित विकास दर हासिल की जाएगी.

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल

महिला किसान खुशहाली योजना के जरिए महिला किसानों को आधुनिक तकनीक और मार्केटिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा. नकदी फसलों के विस्तार, कोल्ड स्टोरेज युक्त कोऑपरेटिव मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स और लघु वन उत्पादों के उन्नयन से ग्रामीण आय बढ़ाने का प्रयास किया गया है.

शिक्षा और कौशल विकास

राज्य के सभी सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों को Jharkhand Institute of Technology के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई है. इसके साथ ही चतरा में डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की स्थापना और चयनित ITI में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रशिक्षण की योजना पेश की गई है.

स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़ा निवेश

कैंसर की शुरुआती पहचान और इलाज के लिए मेडिकल कॉलेजों में PET-CT, कैथलैब और जिला अस्पतालों में मैमोग्राफी मशीनें लगेंगी. 750 अबुआ दवाखानों के माध्यम से सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है.

सड़क, पुल और पर्यटन को रफ्तार

मुख्यमंत्री ग्राम सड़क और सेतु योजना के तहत हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. पर्यटन के क्षेत्र में ग्लास ब्रिज, रोपवे, स्काइवॉक, सोलर बोट और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट जैसी परियोजनाओं से राज्य को नया पर्यटन मानचित्र देने की तैयारी है.

निवेश और रोजगार

सरकार के अनुसार वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से झारखंड को 1.24 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिससे करीब 45 हजार रोजगार के अवसर बनने की संभावना है. इसके अलावा औद्योगिक नीतियों के तहत 20 हजार करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है.

बाल बजट और जेंडर बजट

इस बजट की खासियत आउटकम बजट के तहत तैयार किया गया बाल बजट और जेंडर बजट है. बच्चों से जुड़ी योजनाओं के लिए कुल योजना आकार का 10.7 प्रतिशत और महिलाओं से संबंधित योजनाओं के लिए 34 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है.

कुल मिलाकर, बजट 2026-27 को सरकार ने “विकास, निवेश और सामाजिक न्याय का संतुलित दस्तावेज” बताया है, जो झारखंड को अगले दशक में तेज आर्थिक वृद्धि की राह पर ले जाने का दावा करता है.

झारखंड बजट 2026-27: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर आज खोलेंगे पिटारा, महिलाओं और युवाओं पर रहेगा फोकस

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रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज, 24 फरवरी को राज्य का वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर सदन पटल पर बजट रखेंगे। इस बार का बजट राज्य के विकास की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मंत्री ने पहले ही संकेत दिए हैं कि इसमें महिलाओं के स्वावलंबन के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।

बजट की मुख्य प्राथमिकताएं:

सूत्रों के अनुसार, सरकार इस बजट में 'समावेशी विकास' का लक्ष्य लेकर चल रही है। बजट के केंद्र में मुख्य रूप से चार स्तंभ होने की उम्मीद है:

महिला सशक्तिकरण: महिलाओं के लिए विशेष योजनाओं और सुरक्षा के लिए बड़ा आवंटन।

युवा एवं रोजगार: स्वरोजगार को बढ़ावा देने और खाली पड़े सरकारी पदों को भरने के लिए वित्तीय रोडमैप।

शिक्षा एवं स्वास्थ्य: ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर अस्पताल और स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना।

कनेक्टिविटी: दूर-दराज के गांवों को मुख्य सड़कों और डिजिटल माध्यमों से जोड़ना।

जनता की उम्मीदें:

झारखंड की जनता को उम्मीद है कि बढ़ती महंगाई के बीच सरकार कुछ कर राहत (Tax relief) और जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से मध्यम वर्ग और किसानों को राहत पहुंचाएगी। वित्त मंत्री के इस 'पिटारे' से यह साफ होगा कि झारखंड आगामी वर्षों में विकास की कितनी ऊंची छलांग लगाने के लिए तैयार है।

मेरठ में आग का कहर, जलती इमारत में जिंदा दफ्न हुआ परिवार, पांच मासूम समेत 6 की दर्दनाक मौत

मेरठ । यूपी के मेरठ में सोमवार रात एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। यहां के लिसाड़ी गेट थानाक्षेत्र के किदवई नगर इस्लामाबाद की गली नंबर-3 में स्थित एक तीन मंजिला मकान अचानक आग की लपटों में घिर गया। कुछ ही मिनटों में पूरा घर धुएं से भर गया और अंदर फंसे मासूम बच्चों व महिला की दर्दनाक मौत हो गई।इस भयावह हादसे में एक ही परिवार के पांच बच्चों और एक महिला सहित कुल छह लोगों की जान चली गई। इलाके में मातम पसरा है और चीख-पुकार की गूंज देर रात तक सुनाई देती रही।

नमाज पढ़ने गए थे घर के पुरुष, पीछे छूट गया जलता घर

मकान कपड़ा कारोबारी इकबाल अहमद का बताया जा रहा है। घटना के समय इकबाल और उनके दोनों बेटे आसिम व फारूक तरावीह की नमाज पढ़ने मस्जिद गए हुए थे। घर में महिलाएं और बच्चे मौजूद थे।
रात करीब 9:30 बजे अचानक घर के अंदर से धुआं उठने लगा। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। बताया जा रहा है कि आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

संकरी गलियां बनीं बाधा, लोग छतों से पहुंचे अंदर

घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई, लेकिन घनी आबादी और संकरी गलियों के कारण दमकल की गाड़ियां सीधे मौके तक नहीं पहुंच सकीं।
ऐसे में स्थानीय लोगों ने जान जोखिम में डालकर छतों के रास्ते घर में प्रवेश किया और झुलसे हुए बच्चों व महिलाओं को बाहर निकाला। तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

अस्पताल में टूटी सांसें

घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने रुखसार (30 वर्ष), अकदस (3 वर्ष), नबिया (6 माह), इनायत (6 माह), महविश (12 वर्ष), हम्माद (4 वर्ष) को मृत घोषित कर दिया। जबकि दो लोग गंभीर रूप से झुलसे हैं, जिनका इलाज जारी है।

शॉर्ट सर्किट की आशंका

प्रशासन के अनुसार, प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और राहत कार्य में आई बाधाओं की भी समीक्षा होगी।यह हादसा कई सवाल खड़े कर गया है—क्या घर में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम थे? क्या फैक्ट्री और रिहाइश एक साथ होने से खतरा बढ़ा?फिलहाल, मेरठ के इस इलाके में मातम का माहौल है। पांच मासूमों की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है।
रांची से दिल्ली जा रही एयर एम्बुलेंस क्रैश, सात लोगों की दर्दनाक मौत

रांची : झारखंड के चतरा जिले से एक अत्यंत दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एम्बुलेंस सिमरिया थाना क्षेत्र के घने जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस भयावह हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, लातेहार निवासी होटल संचालक संजय कुमार आग की एक घटना में 65 प्रतिशत से अधिक झुलस गए थे। उन्हें बेहतर इलाज के लिए देवकमल अस्पताल से दिल्ली ले जाया जा रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और रास्ते में ही यह विमान हादसे का शिकार हो गया।

मृतकों में संजय कुमार, उनकी पत्नी, सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विकास कुमार गुप्ता, एक नर्सिंग स्टाफ, दो क्रू मेंबर और एक अन्य सहायक कर्मी शामिल हैं।

हादसे की खबर मिलते ही चतरा और लातेहार जिला प्रशासन की टीमें तुरंत हरकत में आईं और बचाव कार्य शुरू किया। चूंकि दुर्घटना स्थल घने जंगलों के बीच है, इसलिए बचाव दल को वहां पहुंचने और राहत कार्य संचालित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। चतरा के पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार अग्रवाल ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि विमान में सवार सभी सात लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। सुरक्षा और साक्ष्य जुटाने के उद्देश्य से घटनास्थल के आसपास के लगभग तीन किलोमीटर के क्षेत्र को पूरी तरह से सील कर दिया गया है।

इस गंभीर विमान दुर्घटना की तकनीकी जांच के लिए दिल्ली से विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की टीम को रवाना किया गया है, जिसके बाद ही क्रैश के सटीक कारणों का पता चल पाएगा। इस हादसे ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को जीवनदान दिलाने की कोशिश में निकली यह यात्रा बेहद त्रासद अंत में तब्दील हो गई, जिससे लातेहार और चतरा सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है।

BMSICL में जातिगत भेदभाव का आरोप: सवर्ण अधिकारियों पर गाज, यादव अफसर बेदाग — क्या यही है बिहार की “सामाजिक न्याय” की राजनीति?

पटना। बिहार में सत्तारूढ़ दल हमेशा से सामाजिक न्याय का नारा बुलंद करते आए हैं, लेकिन क्या यह “न्याय” अब प्रशासनिक संस्थाओं में जातिगत प्रतिशोध का रूप लेने लगा है? बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMSICL) से सामने आए ताजा मामले ने इस सवाल को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि: बिहार में जाति और सत्ता का गठजोड़

बिहार की राजनीति दशकों से जातिगत समीकरणों पर टिकी रही है। 1990 के दशक में लालू प्रसाद यादव के उदय के बाद से “पिछड़ा वर्ग बनाम सवर्ण” की राजनीति बिहार की मुख्यधारा बन गई। नीतीश कुमार के शासनकाल में भले ही “सुशासन” का दावा किया गया, लेकिन जातिगत समीकरण आज भी नौकरशाही और सरकारी संस्थाओं की कार्यशैली को गहराई से प्रभावित करते हैं।

ऐसे माहौल में जब किसी सरकारी संस्था की शीर्ष अधिकारी के इशारे पर केवल सवर्ण और अल्पसंख्यक समुदाय के कर्मचारियों पर कार्रवाई हो और उसी जाति के अधिकारी — जिन पर गंभीर आरोप हों — बचे रहें, तो यह महज प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित जातिगत भेदभाव की ओर संकेत करता है।

BMSICL प्रकरण: क्या हुआ?

BMSICL, जो बिहार में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति श्रृंखला का प्रबंधन करती है, वहां मुख्य महाप्रबंधक (आपूर्ति श्रृंखला) कुमारी सीमा यादव के कार्यकाल में निम्नलिखित अधिकारियों और कर्मचारियों को निशाना बनाया गया —

∙ सुनील कुमार सिंह — GM लॉजिस्टिक एवं IT

∙ मोहित शर्मा — IT मैनेजर

∙ आशीष कुमार — लॉजिस्टिक मैनेजर

∙ विकाश झा — DGM प्रोजेक्ट

∙ नितीश उपाध्याय — मैनेजर प्रोजेक्ट

∙ कृति किरण — मैनेजर ड्रग्स

∙ धीरज कुमार सिंह — बिहटा वेयरहाउस मैनेजर

∙ नवनीत कुमार — DGM ड्रग्स

∙ फिरोज खान — फतुहा वेयरहाउस मैनेजर

इन सभी के विरुद्ध कार्रवाई की गई। इनमें से अधिकांश सवर्ण या अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं।

सबसे बड़ा सवाल: यादव अधिकारी क्यों बचे?

जो बात इस पूरे प्रकरण को और अधिक संदिग्ध बनाती है, वह यह है कि सहायक प्रबंधक नितिन कुमार यादव और धीरेंद्र कुमार — जिन पर कई गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं — उन्हें पूरी तरह बख्श दिया गया। न कोई जांच, न कोई निलंबन, न कोई नोटिस।

यह “चयनात्मक न्याय” स्पष्ट रूप से इशारा करता है कि कार्रवाई का आधार कदाचार नहीं, बल्कि जाति थी।

सामाजिक पृष्ठभूमि: सवर्ण विरोधी भावना या संस्थागत भेदभाव?

बिहार में पिछले तीन दशकों में सवर्ण समुदायों — भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ — के प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभाव में उल्लेखनीय कमी आई है। आरक्षण नीति और पिछड़ा वर्ग की राजनीतिक मजबूती के बाद सत्ता का ध्रुवीकरण हुआ है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि सामाजिक न्याय का असली अर्थ किसी एक वर्ग को दंडित करना नहीं, बल्कि सबके साथ समान व्यवहार करना है।

BMSICL जैसी स्वास्थ्य आपूर्ति संस्था — जिस पर करोड़ों मरीजों के लिए दवास्वतंत्र जांच कराई