संगम की रेती पर आस्था का महोत्सव, दिव्यता और व्यवस्था का अनूठा संगम
संजय द्विवेदी,प्रयागराज । संगम की पावन रेती एक बार फिर श्रद्धा, साधना और सनातन परंपरा की साक्षी बन गई है। तंबुओं से सजी अस्थायी नगरी में माघ मेले का भव्य शुभारंभ हो चुका है। पहले मुख्य स्नान पर्व पौष पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा-यमुना के पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगाई। हर-हर गंगे और जय सनातन के उद्घोष से संगम तट आध्यात्मिक ऊर्जा से गूंज उठा।
12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आगमन की संभावना
44 दिनों तक चलने वाला यह ऐतिहासिक मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का जीवंत उत्सव भी है। मेला प्रशासन के अनुसार इस अवधि में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आगमन की संभावना है, जबकि करीब 20 लाख कल्पवासी तीन जनवरी से एक फरवरी तक कठोर नियमों के साथ कल्पवास कर साधना में लीन रहेंगे।
मेला क्षेत्र में 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर इस बार विशेष सतर्कता बरती गई है। मेला क्षेत्र में 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (एटीएस) की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। पूरे माघ मेले को सात सेक्टरों में विभाजित किया गया है और इसे महाकुंभ मॉडल पर आधारित टेंट सिटी के रूप में विकसित किया गया है।
26 किलोमीटर लंबे मार्ग चेकर्ड प्लेट से तैयार किए गए
करीब 800 हेक्टेयर में फैले मेला क्षेत्र में 126 किलोमीटर लंबे मार्ग चेकर्ड प्लेट से तैयार किए गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम हो सके। रात्रि के समय संगम की छटा और भी मनमोहक हो जाती है—नावों पर एलईडी लाइट से सजी रंगीन छतरियां, जल में सात रंगों की रोशनी छोड़ते फव्वारे और घाटों पर बनाए गए कलर-कोडेड चेंजिंग रूम श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभूति कराते हैं।
पौष पूर्णिमा से ही कल्पवासियों का व्रत आरंभ
पौष पूर्णिमा से ही कल्पवासियों का व्रत आरंभ हो गया है। आचार्य चौक, दंडीवाड़ा, खाक चौक, तीर्थ पुरोहितों के शिविर और प्रमुख आध्यात्मिक संस्थाओं के आश्रम पूरी तरह सज-संवर चुके हैं। पहले पुण्य स्नान के साथ ही संगम तट पर आस्था, परंपरा और संस्कृति का अनुपम संगम देखने को मिला। माघ मेला आज भी सदियों पुरानी सनातन परंपरा का सशक्त प्रतीक बना हुआ है।
स्वच्छता बनाए रखने के लिए 3300 सफाईकर्मी तैनात
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेला क्षेत्र से लेकर शहर तक रंग-बिरंगे संकेतक बोर्ड, हेल्प डेस्क और सूचना केंद्र स्थापित किए गए हैं। परिवहन व्यवस्था के तहत 3800 रोडवेज बसें, 75 ई-बसें और 500 से अधिक ई-रिक्शा मेला क्षेत्र में संचालित किए जा रहे हैं। अग्नि सुरक्षा के लिए 17 फायर स्टेशन, जबकि स्वच्छता बनाए रखने के लिए 3300 सफाईकर्मी चौबीसों घंटे तैनात हैं।
17 अस्थायी थाने और 42 पुलिस चौकियां स्थापित
मेला क्षेत्र में 17 अस्थायी थाने और 42 पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं। एसपी मेला नीरज कुमार पांडेय के अनुसार, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है।महाकुंभ के अनुभवों से प्रेरित इस माघ मेले में संगम क्षेत्र को जोड़ने के लिए सात पांटून पुल, जबकि फाफामऊ क्षेत्र में दो अतिरिक्त पुल बनाए गए हैं।
सौंदर्य का भव्य संगम बन चुका है माघ मेला
सभी पुलों को दिशा-विशेष के अनुसार आरक्षित किया गया है, ताकि श्रद्धालु बिना किसी अवरोध के पुण्य लाभ प्राप्त कर सकें। संगम की रेती पर बसी यह तंबुओं की नगरी इन दिनों आस्था, अनुशासन, सुरक्षा और सौंदर्य का भव्य संगम बन चुकी है।
11 min ago
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