राजाओं की शिकारगाह से विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व तक, बांधवगढ़ की बेमिसाल संरक्षण यात्रा

जहां जंगलों की गूंजती दहाड़ आज सफल वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति संतुलन की मिसाल बन चुकी है

लेखक - पत्रकार सय्यद असीम अली

भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में शामिल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व आज केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध जैव विविधता, ऐतिहासिक विरासत और सफल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के कारण भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। घने जंगलों, प्राचीन पहाड़ियों, दुर्लभ वन्यजीवों और प्राकृतिक जल स्रोतों से भरपूर बांधवगढ़ आज प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों की पहली पसंद बन चुका है।

महाराजाओं की शिकारगाह से संरक्षण क्षेत्र तक का सफर

कभी बांधवगढ़ का जंगल Maharajas of Rewa की निजी शिकारगाह हुआ करता था। यहां राजघराने द्वारा शिकार अभियानों का आयोजन किया जाता था। इसी धरती ने दुनिया को प्रसिद्ध सफेद बाघ “Mohan” दिया, जिसे वर्ष 1951 में रीवा रियासत के महाराजा मार्तंड सिंह ने खोजा था। मोहन को विश्व के सभी सफेद बाघों का मूल माना जाता है।

समय के साथ अत्यधिक शिकार और मानवीय हस्तक्षेप के कारण जंगलों में वन्यजीवों की संख्या तेजी से घटने लगी। इसके बाद वन विभाग और सरकार ने संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। पहले इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया और बाद में वर्ष 1993 में बांधवगढ़ को आधिकारिक रूप से टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला।

आज वन विभाग की सतत निगरानी, गश्त और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण यहां वन्यजीव सुरक्षित वातावरण में विकसित हो रहे हैं। स्थानीय निवासी भी संरक्षण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे बांधवगढ़ वन्यजीव संरक्षण का सफल मॉडल बन चुका है।

582 एकड़ में फैले 12 प्राचीन तालाब: बांधवगढ़ की अनोखी प्राकृतिक धरोहर

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व की पहचान केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि इसकी ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों के लिए भी की जाती है। बांधवगढ़ में लगभग 582 एकड़ क्षेत्र में फैले 12 प्राचीन तालाब आज भी इस जंगल की जीवनरेखा माने जाते हैं। माना जाता है कि इन तालाबों का निर्माण प्राचीन काल में जल संरक्षण और वन्यजीवों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया था।

ये तालाब आज भी जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गर्मियों के मौसम में जब जंगल के कई छोटे जल स्रोत सूख जाते हैं, तब यही प्राचीन तालाब बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, जंगली सूअर और अनेक पक्षियों के लिए प्रमुख जल स्रोत बन जाते हैं। वन्यजीवों की गतिविधियां अक्सर इन तालाबों के आसपास देखी जाती हैं, जिससे यह क्षेत्र सफारी के दौरान भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

इन तालाबों के आसपास फैले घने साल और सागौन के जंगल बांधवगढ़ की सुंदरता को और अधिक अद्भुत बनाते हैं। यहां की पहाड़ियां, प्राचीन गुफाएं, शिलालेख और ऐतिहासिक अवशेष इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत करते हैं।

प्रकृति, इतिहास और वन्यजीवन का ऐसा अनोखा संगम बांधवगढ़ को देश के सबसे विशेष टाइगर रिजर्वों में शामिल करता है। यहां आने वाला हर पर्यटक इन प्राचीन तालाबों और प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठता है।

गौरों की शानदार वापसी: बांधवगढ़ में वन्यजीव पुनर्स्थापन की सफल कहानी

बांधवगढ़ में गौरों की वापसी भारत के सबसे सफल वन्यजीव पुनर्स्थापन अभियानों में गिनी जाती है। एक समय अत्यधिक शिकार और प्राकृतिक आवासों में बदलाव के कारण गौर यहां लगभग विलुप्त हो चुके थे, जिससे जंगल के पारिस्थितिक संतुलन पर भी असर पड़ा था।

स्थिति को देखते हुए मध्यप्रदेश वन विभाग ने वर्ष 2012 में गौर पुनर्स्थापन परियोजना शुरू की। कान्हा और बाद में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से चरणबद्ध तरीके से गौरों को बांधवगढ़ लाया गया। वर्ष 2026 में तीसरे चरण के तहत 27 गौरों का सफल ट्रांसलोकेशन किया गया, जिसका उद्देश्य उनकी आनुवंशिक विविधता को मजबूत करना था।

वन विभाग ने गौरों के लिए सुरक्षित घासभूमि, जल स्रोत और अनुकूल वातावरण विकसित किया। धीरे-धीरे गौरों ने जंगल को अपना नया आवास बना लिया और उनकी संख्या बढ़ने लगी।

वर्तमान में बांधवगढ़ में गौरों की संख्या लगभग 160 तक पहुंच चुकी है, जिनमें कई खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गौरों की वापसी ने जंगल के पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

एशियाई हाथियों की दस्तक से बदलता बांधवगढ़ का जंगल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व लंबे समय से बाघों की धरती के रूप में प्रसिद्ध रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां एशियाई जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी ने जंगल के पारिस्थितिक तंत्र में बड़ा बदलाव लाया है। वर्ष 2017-18 से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जंगलों से हाथियों के झुंड स्वाभाविक रूप से बांधवगढ़ पहुंचने लगे। खास बात यह है कि इन्हें यहां बसाने के लिए किसी प्रकार का ट्रांसलोकेशन नहीं किया गया, बल्कि उन्होंने स्वयं इस क्षेत्र को अपना नया आवास बनाया।

वन विभाग के अनुसार वर्तमान में बांधवगढ़ और आसपास के वन क्षेत्रों में लगभग 80 से 90 जंगली हाथी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी जंगल के प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जंगल में नए रास्ते और घासभूमियां विकसित करते हैं, जिससे हिरण, सांभर, चीतल और बारहसिंगा जैसे शाकाहारी वन्यजीवों को लाभ मिलता है। साथ ही बीजों के प्रसार से जंगल का प्राकृतिक पुनर्जनन भी तेजी से होता है।

वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में बांधवगढ़ बाघों के साथ-साथ एशियाई हाथियों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में भी नई पहचान बना सकता है।

मगधी रेंज में बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र: विलुप्ति से वापसी की प्रेरणादायक पहल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के मगधी रेंज में विकसित लगभग 75 हेक्टेयर का बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह इन्क्लोजर विशेष रूप से संकटग्रस्त बारहसिंगा प्रजाति के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षित प्रजनन के लिए तैयार किया गया है।

एक समय मध्य भारत में बारहसिंगा बड़ी संख्या में पाए जाते थे, लेकिन शिकार, आवास की कमी और पर्यावरणीय बदलावों के कारण इनकी संख्या तेजी से घट गई। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने मगधी रेंज में इनके लिए यह विशेष संरक्षण क्षेत्र विकसित किया, क्योंकि यहां का घासभूमि और जल स्रोत इनके लिए अनुकूल हैं।

यहां प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खुली घासभूमि, जल स्रोत और सुरक्षित प्रजनन क्षेत्र विकसित किए गए हैं। वन विभाग द्वारा नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे इनके संरक्षण को मजबूती मिल रही है।

परियोजना के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं—बारहसिंगों की संख्या में वृद्धि हो रही है और उनका व्यवहार भी प्राकृतिक होता जा रहा है। यह पहल साबित करती है कि सही योजना से संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाया जा सकता है।

यह संरक्षण क्षेत्र न केवल एक प्रजाति के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज यह पहल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की एक नई पहचान बन चुकी है और अन्य अभयारण्यों के लिए प्रेरणास्रोत है।

बांधवगढ़ की दहाड़: एक सफारी में 9 बाघों ने बनाया नया रोमांच

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व का ताला जोन हमेशा से बाघों की शानदार गतिविधियों और रोमांचक सफारी अनुभवों के लिए प्रसिद्ध रहा है। लेकिन एक ही सफारी में 9 बाघों का दिखाई देना अपने आप में एक ऐतिहासिक और बेहद दुर्लभ घटना मानी गई। जंगल के शांत वातावरण में अलग-अलग स्थानों पर बाघों की मौजूदगी ने पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को रोमांच से भर दिया।

वन विभाग के अनुसार सामान्यतः किसी सफारी में एक या दो बाघों का दिखाई देना बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन एक साथ 9 बाघों का दिखाई देना बांधवगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, सुरक्षित वन क्षेत्र और सफल संरक्षण प्रयासों को दर्शाता है। यही कारण है कि अन्य टाइगर रिजर्वों की तुलना में भी बांधवगढ़ को “शेरों का गढ़” कहा जाता है। यह अनुभव पर्यटकों के लिए जीवनभर याद रहने वाला पल बन गया।

पिछली गणना के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगभग 220 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। लगातार बेहतर संरक्षण, सुरक्षित आवास, पर्याप्त शिकार आधार और वन विभाग की सतत निगरानी के कारण यहां बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली गणनाओं में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है।

बजरंग: बांधवगढ़ की पहचान और जंगल का सबसे चर्चित बाघ

बांधवगढ़ का नाम आते ही जिस बाघ की सबसे पहले चर्चा होती है, वह है प्रसिद्ध टाइगर “बजरंग”। अपनी विशाल कद-काठी, दमदार चाल और प्रभावशाली मौजूदगी के कारण बजरंग केवल एक बाघ नहीं, बल्कि बांधवगढ़ की पहचान बन चुका है। देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच भी उसकी अलग पहचान है।

कहा जाता है कि अगर बांधवगढ़ की चर्चा हो और बजरंग का नाम न आए, तो कहानी अधूरी सी लगती है। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक हर कोई उसकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित रहता है। सफारी पर आने वाले पर्यटक घंटों जंगल की पगडंडियों पर इस उम्मीद में इंतज़ार करते हैं कि शायद आज बजरंग का दीदार हो जाए। उसकी मौजूदगी भर से जंगल का रोमांच कई गुना बढ़ जाता है।

बजरंग ने न केवल पर्यटकों को आकर्षित किया है, बल्कि बांधवगढ़ को विश्वभर में नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसकी लोकप्रियता इस बात का प्रतीक है कि बांधवगढ़ आज भी भारत के सबसे समृद्ध और रोमांचक टाइगर रिजर्वों में शामिल है।

जंगल का ‘पुजारी’ अब प्रकृति की गोद में विलीन

बांधवगढ़ के चर्चित नर बाघ “पुजारी ” की मौत ने वन्यजीव प्रेमियों को गहरा दुख पहुंचाया। डी-1 टाइगर के साथ संघर्ष में पुजारी की मृत्यु हो गई, जिसने पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और वन विभाग के कर्मचारियों को भावुक कर दिया।

पुजारी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों और पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय था। वह अक्सर कैमरों के सामने शानदार अंदाज में दिखाई देता था। स्थानीय लोगों ने उसका नाम “पुजारी” इसलिए रखा था क्योंकि सुबह के समय वह ऐसी मुद्रा में दिखाई देता था, मानो सूर्य को प्रणाम कर रहा हो।

पुजारी की मृत्यु के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की गहरी भावनाएं देखने को मिलीं। वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफरों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने भावुक पोस्ट साझा कर पुजारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने उसके साथ बिताए सफारी के यादगार पलों और तस्वीरों को साझा करते हुए उसे बांधवगढ़ के सबसे खास और लोकप्रिय बाघों में से एक बताया।

सोशल मीडिया पर उमड़ी यह संवेदनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि पुजारी केवल एक बाघ नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ एक जीवंत प्रतीक बन चुका था।

उसकी मौत के बाद लोगों ने जिस तरह भावुक होकर श्रद्धांजलि दी, उससे यह स्पष्ट हो गया कि बांधवगढ़ में वन्यजीवों और इंसानों के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन चुका है।

संरक्षण और प्रकृति का जीवंत उदाहरण

आज बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व केवल एक टाइगर रिजर्व नहीं, बल्कि सफल वन्यजीव संरक्षण, समृद्ध जैव विविधता और मानव-प्रकृति संबंध का जीवंत उदाहरण बन चुका है। वन विभाग, स्थानीय समुदाय और संरक्षण विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों ने बांधवगढ़ को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

घने जंगलों में गूंजती बाघों की दहाड़, हाथियों की आवाजाही, गौरों के विशाल झुंड और प्राचीन पहाड़ियों के बीच बसे तालाब आज भी यह संदेश देते हैं कि यदि संरक्षण के प्रयास निरंतर और ईमानदारी से किए जाएं, तो प्रकृति स्वयं को फिर से जीवंत कर सकती है।बांधवगढ़ में गांव वालों और वन विभाग के बीच बेहतर संवाद और समन्वय वन्यजीव संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है। दोनों के बीच तालमेल बना रहना ही जंगल, वन्यजीव और मानव के बीच संतुलन बनाए रखने की अहम कुंजी माना जाता है।

बाइक की टक्कर से महिला की मौत


अमृतपुर फर्रुखाबाद 18 मई। थाना क्षेत्र के बांसी अड्डा के पास स्थित एचपी पेट्रोल पंप के सामने मुख्य मार्ग पर एक तेज रफ्तार बाइक सवार ने बुजुर्ग महिला को जोरदार टक्कर मार दी जिसमें महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। जिसकी पहचान मुजहा निवासी लज्जावती पत्नी सुरेंद्र के रूप में हुई। मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ लग गई। सूचना मिलने पर अमृतपुर थाना पुलिस भी  पहुंची और घायल महिला को एंबुलेंस के माध्यम से इलाज हेतु राजेपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।जहां पर उसकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल लोहिया रेफर कर दिया गया। जहा जांच के बाद डॉक्टर द्वारा  महिला को मृत घोषित  कर दिया गय।महिला की मौत की सूचना परिजनों को मिलते ही  कोहराम मच गया। घर में मौजूद महिलाएं चीखने और चिल्लाने लगी। परिजनों ने बताया है कि महिला अमृतपुर स्थित सरकारी अस्पताल से दवा लेने के लिए गई थी। मृतका का एक लड़का विनोद है जिसकी उम्र 32 वर्ष है जो खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का पालन पोषण करता है। एक लड़की है जिसका नाम मीना है जिसकी शादी हो चुकी है। मृतका के पति सुरेंद्र की भी लगभग 2 वर्ष पहले मौत हो चुकी है.वही अमृतपुर थाना प्रभारी इंद्रजीत सिंह ने बताया है कि बाइक को कब्जे में ले लिया गया है और उपनिरीक्षक खूबेलाल को पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है। आगे अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।
एसआरएन अस्पताल में डॉक्टर मरीजों को कब देखेंगे...किसी को पता नहीं, प्रयागराज में मंडल का सबसे बड़ा हॉस्पिटल का यह हाल
मंडल का सबसे बड़ा सरकारी एसआरएन अस्पताल के चिकित्सक और स्टाफ भी खूब हैं। अस्पताल प्रशासन के तो कुछ कहने ही नहीं। इस हफ्ते में अलग-अलग दिनों में चार एडीएम इस अस्पताल का निरीक्षण कर चुके हैं। रोज ही कमियां और गड़बड़ियां मिलीं मगर अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी।



विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज। चिकित्सक समय से अस्पताल नहीं पहुंचते
शनिवार को भी एडीएम आपूर्ति विजय शर्मा ने एसीएम के साथ निरीक्षण किया। वहां पर ड्यूटी डिस्प्ले चार्ट क्रियाशील नहीं था। वार्डों एवं ओपीडी में डाॅक्टरों के रोस्टर अनुसार बैठने का चार्ट दीवारों पर लगाया गया है, लेकिन समय दर्शित नहीं किया गया है। चिकित्सक किस समय मरीजों को देखेंगे, इसकी जानकारी किसी को नहीं। स्पष्ट है कि चिकित्सक समय से अस्पताल नहीं पहुंचते।

एडीएम आपूर्ति ने अस्पताल का निरीक्षण किया
डीएम मनीष कुमार वर्मा के निर्देश पर एडीएम आपूर्ति शनिवार की सुबह 9.50 बजे अस्पताल के नए भवन में पहुंचे। वार्डाे, पीएमएसएसआइ ओपीडी, ट्रामा सेंटर, गैस्ट्रोलाजी, कार्डियोलाजी, सेंटर पैथोलाजी, ब्लडबैंक, कैश काउंटर, औषधि वितरण, रजिस्ट्रेशन काउंटर को देखा। इसेक बाद पुरानी बिल्डिंग स्थित अल्ट्रासाउंड, एमआरआइ कक्ष पर कार्यरत डाॅक्टरों व स्टाफ की उपस्थिति तथा ड्यूटी डिस्प्ले का निरीक्षण किया गया।

दवा की उपलब्धता को लेकर जताई नाराजगी
उन्होंने कार्डियोलाजी, सेंट्रल पैथोलाजी ब्लडबैंक, कैश काउंटर, औषधि वितरण, रजिस्ट्रेशन काउंटर पर मरीजों व तीमारदारों से पूछताछ की। भर्ती मरीजों से भी वार्ता की और स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। शीतल पेयजल की बेहतर व्यवस्था कराने की एडीएम ने जोर दिया। यह भी अवगत कराया गया कि चिकित्सालय में इमरजेंसी की स्थिति में कुछ दवाएं स्टाक में अनुपलब्ध होने के कारण बाहर से मंगाई जाती हैं। इस पर एडीएम ने नाराजगी जताई। निर्देश दिए कि आवश्यक दवाएं स्टाक में होनी ही चाहिए।

डाॅक्टर-स्टाफ की पार्किंग को जोन, तीमारदार परेशान
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि अस्पताल में वाहन इधर-उधर खड़े थे। कर्मचारियों ने बताया कि अस्पताल के डाॅक्टर-स्टाफ की पार्किंग के लिए तीन जोन बने हैं। तीमारदारों एवं बाहरी वाहनों के पार्किंग की समस्या बनी रहती है। चिकित्सालय में उपलब्ध सुरक्षाबल, चिकित्सालय प्रशासन एवं चौकी की पुलिस को इस पर ध्यान देना चाहिए।
मानदेय न मिलने पर चिकित्सकों ने जताया विरोध:भदोही में काली पट्टी बांधकर काम किया, 21 से पूर्ण बहिष्कार की चेतावनी
नितेश श्रीवास्तव


भदोही। प्रदेश कार्यकारिणी के आवाहन पर सोमवार को सीएचसी भदोही के NHM कर्मचारियों ने पिछले तीन माह
से मानदेय न मिलने पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। यह विरोध प्रदर्शन 18, 19 और 20 तारीख तक चलेगा, जिसमें कर्मचारी काली पट्टी बांधकर ही काम करेंगे। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 20 तारीख तक मानदेय का भुगतान नहीं किया गया, तो 21 तारीख से पूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
जिला अस्पताल के एचएम उपाध्यक्ष महेंद्र पाल ने बताया कि तीन माह से वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों को घर-परिवार चलाने और बच्चों की स्कूल फीस भरने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि काम करने के बाद भी भुगतान न मिलने से परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो जाता है।
जिले भर में 500 से अधिक चिकित्सक और कर्मचारी इस संगठन में शामिल हैं। सभी सीएचसी और पीएससी पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताते हुए अपना कार्य कर रहे हैं। कर्मचारियों ने दोहराया कि यदि 21 तारीख तक मानदेय का भुगतान नहीं हुआ, तो पूर्ण बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन तेज किया जाएगा।
Sambhal लखनऊ लाठीचार्ज के विरोध में वकीलों का फूटा गुस्सा, सम्भल बार एसोसिएशन का प्रदर्शन
लखनऊ कचहरी में अधिवक्ताओं के चैंबर तोड़े जाने और पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में सम्भल जिला बार एसोसिएशन के वकीलों ने जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग उठाई।

जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शकील अहमद अशरफी ने आरोप लगाया कि लखनऊ प्रशासन और पुलिस ने अधिवक्ताओं के साथ बर्बरता की है। उन्होंने कहा कि वकीलों को चैंबरों से खींचकर पीटा गया और कई अधिवक्ता घायल हुए हैं। उन्होंने मांग की कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए तथा घायल अधिवक्ताओं को ₹10-10 लाख मुआवजा दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो पूरे उत्तर प्रदेश के वकील सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। जिला बार एसोसिएशन की उपाध्यक्ष मुख्तार फात्मा ने कहा कि अधिवक्ताओं के साथ लगातार अत्याचार की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि कानून और न्याय के लिए लड़ने वाले वकीलों की ही सुनवाई नहीं हो रही है। महिला अधिवक्ताओं के साथ मारपीट की घटना को उन्होंने बेहद शर्मनाक बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। बार एसोसिएशन के सचिव सरफराज नवाज़ ने कहा कि लखनऊ कचहरी में करीब 30 वर्षों से अधिवक्ताओं के चैंबर बने हुए थे, लेकिन प्रशासन ने बुलडोजर और पुलिस बल के दम पर कार्रवाई की। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला अधिवक्ताओं तक को नहीं छोड़ा गया और कई वकील अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग उठाते हुए कहा कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। अधिवक्ताओं ने साफ कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक और तेज किया जाएगा।
भीषण गर्मी एवं लू से बचाव को लेकर जिला प्रशासन सतर्क

नितेश श्रीवास्तव

भदोही । जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने बताया कि जनपद में लगातार बढ़ते तापमान एवं भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क एवं सक्रिय है। आमजन को लू (हीट स्ट्रोक) से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश एवं एडवाइजरी जारी की गई है। जिलाधिकारी ने बताया कि विगत दिनों से जनपद का तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है तथा आगामी दिनों में इसके 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। ऐसी स्थिति में लू लगने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
जिलाधिकारी ने बताया कि लू लगने की स्थिति में शरीर का अत्यधिक गर्म एवं लाल हो जाना, त्वचा का शुष्क होना, तेज नाड़ी चलना, सिरदर्द, चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, थकान तथा पसीना कम या बंद हो जाना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है।
उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें। यदि बाहर जाना अत्यंत आवश्यक हो तो हल्के रंग in के ढीले एवं सूती वस्त्र पहनें तथा सिर को टोपी, गमछा या छाते से ढककर रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं तथा शरीर में जल की कमी न होने दें। ओआरएस घोल, नमक-चीनी का घोल एवं अन्य तरल पदार्थों का सेवन लाभकारी रहेगा।
इसी क्रम में जिलाधिकारी ने आज सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय, सरपतहा के लू वार्ड का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) की अनुपस्थिति पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए वेतन रोकने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में तीन अस्पताल 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं 20 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर लू वार्ड बनाए गए हैं सभी केदो पर 24 घंटे डॉक्टरों की टीम भी लगाई गई है लू वार्ड की व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद के सभी कार्यालयों सार्वजनिक स्थलों एवं पशु पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था कराई गई है।
तत्पश्चात जिलाधिकारी द्वारा महाराजा चेतसिंह चिकित्सालय, ज्ञानपुर का भी आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान एनआरसी, डेंगू वार्ड एवं लू वार्ड की व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रूप से संचालित मिलीं। जिलाधिकारी ने अस्पताल में मरीजों के लिए शुद्ध पेयजल, आवश्यक दवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने भर्ती मरीजों से उनका हालचाल जाना तथा चिकित्सकों को निर्देशित करते हुए कहा कि सभी मरीजों को समयबद्ध, समुचित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उपचार व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जिलाधिकारी ने समस्त जनपदवासियों आम जनमानस से अपील की है कि गर्मी एवं लू के प्रभाव को देखते हुए आवश्यक सावधानियां बरतें, स्वयं को सुरक्षित रखें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
प्रदेश के दक्षिणी हिस्से से शुरू होगा लू का प्रभाव
नितेश श्रीवास्तव

भदोही। मौसम विभाग के अनुसार, भदोही में 22 म‌ई तक आरेंज अलर्ट जारी है। तापमान में लगातार वृद्धि के साथ लू चलने की संभावना है। सुबह 11 बजे के बाद अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी। किसी प्रभावी मौसम तंत्र के सक्रिय न होने के कारण इस सप्ताह मौसम शुष्क बना रह सकता है। प्रदेश के दक्षिणी हिस्से से लू का नया दौर शुरू होने की संभावना है। जिसका असर जिले में भी देखने को मिल सकता है।
आज विधायक विनोद सिंह की अगुवाई में नगर पालिका परिषद में एक महत्वपूर्व बैठक हुई*
सुल्तानपुर में आज विधायक विनोद सिंह की अगुवाई में नगर पालिका परिषद में एक महत्वपूर्व बैठक हुई। इस दौरान नगर पालिका क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था सुधारने, सहित तमाम समस्याओं को लेकर चर्चा हुई। बैठक में विद्युत विभाग के आलाधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होनें समय सीमा के भीतर विद्युत समस्याओं के निस्तारण का भरोसा दिया है। दरअसल नगर पालिका क्षेत्र के तमाम वार्डों में तमाम विद्युत समस्या बनी हुई है। लिहाजा सभासदों ने इसके लिए विधायक विनोद सिंह और नगर पालिका परिषद के चेयरमैन को अवगत करवाया था। इसी के मद्दे नजर आज नगर पालिका परिषद में विधायक विनोद सिंह की अगुवाई में महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें विभिन्न वार्डों के जर्जर विद्युत पोल, तार , स्ट्रीट लाइट , विभिन्न मोहल्लों में नए विद्युत पोल सहित तमाम समस्याओं को लेकर वार्ता की गई।बैठक में विधायक के निर्देश पर विद्युत विभाग के अधिशाषी अभियंता सहित तमाम आलाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान विधायक ने विद्युत अधिकारियों को समस्याएं नोट करवाई साथ ही जल्द से जल्द चिन्हित कर इस पर कार्य करवाने को कहा। सुल्तानपुर एवं पूर्व मंत्री वी ओ-वहीं बैठक में मौजूद नगर पालिका परिषद के चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल की माने तो सभासदों के वार्डो की समस्याओं को देखते हुए ये बैठक विधायक विनोद सिंह के नेतृत्व में सम्पन्न हुई। जिसमें जल्द से जल्द विद्युत समस्याओं के निस्तारण की बात कही गई है। बाइट -प्रवीण कुमार अग्रवाल चेयरमैन नगर पालिका परिषद सुल्तानपुर
आज विधायक विनोद सिंह की अगुवाई में नगर पालिका परिषद में एक महत्वपूर्व बैठक हुई*
सुल्तानपुर में आज विधायक विनोद सिंह की अगुवाई में नगर पालिका परिषद में एक महत्वपूर्व बैठक हुई। इस दौरान नगर पालिका क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था सुधारने, सहित तमाम समस्याओं को लेकर चर्चा हुई। बैठक में विद्युत विभाग के आलाधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होनें समय सीमा के भीतर विद्युत समस्याओं के निस्तारण का भरोसा दिया है। दरअसल नगर पालिका क्षेत्र के तमाम वार्डों में तमाम विद्युत समस्या बनी हुई है। लिहाजा सभासदों ने इसके लिए विधायक विनोद सिंह और नगर पालिका परिषद के चेयरमैन को अवगत करवाया था। इसी के मद्दे नजर आज नगर पालिका परिषद में विधायक विनोद सिंह की अगुवाई में महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें विभिन्न वार्डों के जर्जर विद्युत पोल, तार , स्ट्रीट लाइट , विभिन्न मोहल्लों में नए विद्युत पोल सहित तमाम समस्याओं को लेकर वार्ता की गई।बैठक में विधायक के निर्देश पर विद्युत विभाग के अधिशाषी अभियंता सहित तमाम आलाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान विधायक ने विद्युत अधिकारियों को समस्याएं नोट करवाई साथ ही जल्द से जल्द चिन्हित कर इस पर कार्य करवाने को कहा। सुल्तानपुर एवं पूर्व मंत्री वी ओ-वहीं बैठक में मौजूद नगर पालिका परिषद के चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल की माने तो सभासदों के वार्डो की समस्याओं को देखते हुए ये बैठक विधायक विनोद सिंह के नेतृत्व में सम्पन्न हुई। जिसमें जल्द से जल्द विद्युत समस्याओं के निस्तारण की बात कही गई है। बाइट -प्रवीण कुमार अग्रवाल चेयरमैन नगर पालिका परिषद सुल्तानपुर
पुलिस मुठभेड़ में आरोपी के गोली लगने पर हुआ लंगड़ा, किया गिरफ्तार
फर्रुखाबाद l थाना राजेपुर क्षेत्र के ग्राम कुइयां में 17 मई को अधिवक्ता राजेश पाठक के घर पर चोरी और भतीजों पर फायरिंग करने पर गंभीर रूप से घायल हो गए थे,घटना को अंजाम देने के बाद फरार हो गया था। इस शातिर अभियुक्त को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से लंगड़ा होने पर गिरफ्तार कर लिया। जवाबी कार्रवाई में अभियुक्त के पैर में गोली लगने से वह घायल हो गया। पुलिस ने उसके कब्जे से अवैध तमंचा व कारतूस बरामद किए हैं।
पुलिस ने बताया कि घटना के बाद से आरोपी फरार चल रहा था, जिसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही थी। रविवार देर रात चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस को आरोपी का सुराग मिला। तभी पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ने का प्रयास किया। लेकिन आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की तो आरोपी घायल हो गया। घायल अभियुक्त को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस जांच में आरोपी का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके खिलाफ विभिन्न थानों में कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।
राजाओं की शिकारगाह से विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व तक, बांधवगढ़ की बेमिसाल संरक्षण यात्रा

जहां जंगलों की गूंजती दहाड़ आज सफल वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति संतुलन की मिसाल बन चुकी है

लेखक - पत्रकार सय्यद असीम अली

भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में शामिल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व आज केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध जैव विविधता, ऐतिहासिक विरासत और सफल वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के कारण भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। घने जंगलों, प्राचीन पहाड़ियों, दुर्लभ वन्यजीवों और प्राकृतिक जल स्रोतों से भरपूर बांधवगढ़ आज प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों की पहली पसंद बन चुका है।

महाराजाओं की शिकारगाह से संरक्षण क्षेत्र तक का सफर

कभी बांधवगढ़ का जंगल Maharajas of Rewa की निजी शिकारगाह हुआ करता था। यहां राजघराने द्वारा शिकार अभियानों का आयोजन किया जाता था। इसी धरती ने दुनिया को प्रसिद्ध सफेद बाघ “Mohan” दिया, जिसे वर्ष 1951 में रीवा रियासत के महाराजा मार्तंड सिंह ने खोजा था। मोहन को विश्व के सभी सफेद बाघों का मूल माना जाता है।

समय के साथ अत्यधिक शिकार और मानवीय हस्तक्षेप के कारण जंगलों में वन्यजीवों की संख्या तेजी से घटने लगी। इसके बाद वन विभाग और सरकार ने संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। पहले इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया और बाद में वर्ष 1993 में बांधवगढ़ को आधिकारिक रूप से टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला।

आज वन विभाग की सतत निगरानी, गश्त और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण यहां वन्यजीव सुरक्षित वातावरण में विकसित हो रहे हैं। स्थानीय निवासी भी संरक्षण कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे बांधवगढ़ वन्यजीव संरक्षण का सफल मॉडल बन चुका है।

582 एकड़ में फैले 12 प्राचीन तालाब: बांधवगढ़ की अनोखी प्राकृतिक धरोहर

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व की पहचान केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि इसकी ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों के लिए भी की जाती है। बांधवगढ़ में लगभग 582 एकड़ क्षेत्र में फैले 12 प्राचीन तालाब आज भी इस जंगल की जीवनरेखा माने जाते हैं। माना जाता है कि इन तालाबों का निर्माण प्राचीन काल में जल संरक्षण और वन्यजीवों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया था।

ये तालाब आज भी जंगल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गर्मियों के मौसम में जब जंगल के कई छोटे जल स्रोत सूख जाते हैं, तब यही प्राचीन तालाब बाघ, तेंदुआ, सांभर, चीतल, जंगली सूअर और अनेक पक्षियों के लिए प्रमुख जल स्रोत बन जाते हैं। वन्यजीवों की गतिविधियां अक्सर इन तालाबों के आसपास देखी जाती हैं, जिससे यह क्षेत्र सफारी के दौरान भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

इन तालाबों के आसपास फैले घने साल और सागौन के जंगल बांधवगढ़ की सुंदरता को और अधिक अद्भुत बनाते हैं। यहां की पहाड़ियां, प्राचीन गुफाएं, शिलालेख और ऐतिहासिक अवशेष इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत करते हैं।

प्रकृति, इतिहास और वन्यजीवन का ऐसा अनोखा संगम बांधवगढ़ को देश के सबसे विशेष टाइगर रिजर्वों में शामिल करता है। यहां आने वाला हर पर्यटक इन प्राचीन तालाबों और प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध हो उठता है।

गौरों की शानदार वापसी: बांधवगढ़ में वन्यजीव पुनर्स्थापन की सफल कहानी

बांधवगढ़ में गौरों की वापसी भारत के सबसे सफल वन्यजीव पुनर्स्थापन अभियानों में गिनी जाती है। एक समय अत्यधिक शिकार और प्राकृतिक आवासों में बदलाव के कारण गौर यहां लगभग विलुप्त हो चुके थे, जिससे जंगल के पारिस्थितिक संतुलन पर भी असर पड़ा था।

स्थिति को देखते हुए मध्यप्रदेश वन विभाग ने वर्ष 2012 में गौर पुनर्स्थापन परियोजना शुरू की। कान्हा और बाद में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से चरणबद्ध तरीके से गौरों को बांधवगढ़ लाया गया। वर्ष 2026 में तीसरे चरण के तहत 27 गौरों का सफल ट्रांसलोकेशन किया गया, जिसका उद्देश्य उनकी आनुवंशिक विविधता को मजबूत करना था।

वन विभाग ने गौरों के लिए सुरक्षित घासभूमि, जल स्रोत और अनुकूल वातावरण विकसित किया। धीरे-धीरे गौरों ने जंगल को अपना नया आवास बना लिया और उनकी संख्या बढ़ने लगी।

वर्तमान में बांधवगढ़ में गौरों की संख्या लगभग 160 तक पहुंच चुकी है, जिनमें कई खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गौरों की वापसी ने जंगल के पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

एशियाई हाथियों की दस्तक से बदलता बांधवगढ़ का जंगल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व लंबे समय से बाघों की धरती के रूप में प्रसिद्ध रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां एशियाई जंगली हाथियों की बढ़ती मौजूदगी ने जंगल के पारिस्थितिक तंत्र में बड़ा बदलाव लाया है। वर्ष 2017-18 से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जंगलों से हाथियों के झुंड स्वाभाविक रूप से बांधवगढ़ पहुंचने लगे। खास बात यह है कि इन्हें यहां बसाने के लिए किसी प्रकार का ट्रांसलोकेशन नहीं किया गया, बल्कि उन्होंने स्वयं इस क्षेत्र को अपना नया आवास बनाया।

वन विभाग के अनुसार वर्तमान में बांधवगढ़ और आसपास के वन क्षेत्रों में लगभग 80 से 90 जंगली हाथी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी जंगल के प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जंगल में नए रास्ते और घासभूमियां विकसित करते हैं, जिससे हिरण, सांभर, चीतल और बारहसिंगा जैसे शाकाहारी वन्यजीवों को लाभ मिलता है। साथ ही बीजों के प्रसार से जंगल का प्राकृतिक पुनर्जनन भी तेजी से होता है।

वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में बांधवगढ़ बाघों के साथ-साथ एशियाई हाथियों के महत्वपूर्ण आवास के रूप में भी नई पहचान बना सकता है।

मगधी रेंज में बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र: विलुप्ति से वापसी की प्रेरणादायक पहल

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के मगधी रेंज में विकसित लगभग 75 हेक्टेयर का बारहसिंगा संरक्षण क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण पहल है। यह इन्क्लोजर विशेष रूप से संकटग्रस्त बारहसिंगा प्रजाति के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षित प्रजनन के लिए तैयार किया गया है।

एक समय मध्य भारत में बारहसिंगा बड़ी संख्या में पाए जाते थे, लेकिन शिकार, आवास की कमी और पर्यावरणीय बदलावों के कारण इनकी संख्या तेजी से घट गई। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने मगधी रेंज में इनके लिए यह विशेष संरक्षण क्षेत्र विकसित किया, क्योंकि यहां का घासभूमि और जल स्रोत इनके लिए अनुकूल हैं।

यहां प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खुली घासभूमि, जल स्रोत और सुरक्षित प्रजनन क्षेत्र विकसित किए गए हैं। वन विभाग द्वारा नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन किया जा रहा है, जिससे इनके संरक्षण को मजबूती मिल रही है।

परियोजना के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं—बारहसिंगों की संख्या में वृद्धि हो रही है और उनका व्यवहार भी प्राकृतिक होता जा रहा है। यह पहल साबित करती है कि सही योजना से संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाया जा सकता है।

यह संरक्षण क्षेत्र न केवल एक प्रजाति के संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज यह पहल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की एक नई पहचान बन चुकी है और अन्य अभयारण्यों के लिए प्रेरणास्रोत है।

बांधवगढ़ की दहाड़: एक सफारी में 9 बाघों ने बनाया नया रोमांच

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व का ताला जोन हमेशा से बाघों की शानदार गतिविधियों और रोमांचक सफारी अनुभवों के लिए प्रसिद्ध रहा है। लेकिन एक ही सफारी में 9 बाघों का दिखाई देना अपने आप में एक ऐतिहासिक और बेहद दुर्लभ घटना मानी गई। जंगल के शांत वातावरण में अलग-अलग स्थानों पर बाघों की मौजूदगी ने पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को रोमांच से भर दिया।

वन विभाग के अनुसार सामान्यतः किसी सफारी में एक या दो बाघों का दिखाई देना बड़ी उपलब्धि माना जाता है, लेकिन एक साथ 9 बाघों का दिखाई देना बांधवगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, सुरक्षित वन क्षेत्र और सफल संरक्षण प्रयासों को दर्शाता है। यही कारण है कि अन्य टाइगर रिजर्वों की तुलना में भी बांधवगढ़ को “शेरों का गढ़” कहा जाता है। यह अनुभव पर्यटकों के लिए जीवनभर याद रहने वाला पल बन गया।

पिछली गणना के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में लगभग 220 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। लगातार बेहतर संरक्षण, सुरक्षित आवास, पर्याप्त शिकार आधार और वन विभाग की सतत निगरानी के कारण यहां बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली गणनाओं में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है।

बजरंग: बांधवगढ़ की पहचान और जंगल का सबसे चर्चित बाघ

बांधवगढ़ का नाम आते ही जिस बाघ की सबसे पहले चर्चा होती है, वह है प्रसिद्ध टाइगर “बजरंग”। अपनी विशाल कद-काठी, दमदार चाल और प्रभावशाली मौजूदगी के कारण बजरंग केवल एक बाघ नहीं, बल्कि बांधवगढ़ की पहचान बन चुका है। देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच भी उसकी अलग पहचान है।

कहा जाता है कि अगर बांधवगढ़ की चर्चा हो और बजरंग का नाम न आए, तो कहानी अधूरी सी लगती है। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक हर कोई उसकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित रहता है। सफारी पर आने वाले पर्यटक घंटों जंगल की पगडंडियों पर इस उम्मीद में इंतज़ार करते हैं कि शायद आज बजरंग का दीदार हो जाए। उसकी मौजूदगी भर से जंगल का रोमांच कई गुना बढ़ जाता है।

बजरंग ने न केवल पर्यटकों को आकर्षित किया है, बल्कि बांधवगढ़ को विश्वभर में नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसकी लोकप्रियता इस बात का प्रतीक है कि बांधवगढ़ आज भी भारत के सबसे समृद्ध और रोमांचक टाइगर रिजर्वों में शामिल है।

जंगल का ‘पुजारी’ अब प्रकृति की गोद में विलीन

बांधवगढ़ के चर्चित नर बाघ “पुजारी ” की मौत ने वन्यजीव प्रेमियों को गहरा दुख पहुंचाया। डी-1 टाइगर के साथ संघर्ष में पुजारी की मृत्यु हो गई, जिसने पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और वन विभाग के कर्मचारियों को भावुक कर दिया।

पुजारी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों और पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय था। वह अक्सर कैमरों के सामने शानदार अंदाज में दिखाई देता था। स्थानीय लोगों ने उसका नाम “पुजारी” इसलिए रखा था क्योंकि सुबह के समय वह ऐसी मुद्रा में दिखाई देता था, मानो सूर्य को प्रणाम कर रहा हो।

पुजारी की मृत्यु के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की गहरी भावनाएं देखने को मिलीं। वन्यजीव प्रेमियों, फोटोग्राफरों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने भावुक पोस्ट साझा कर पुजारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने उसके साथ बिताए सफारी के यादगार पलों और तस्वीरों को साझा करते हुए उसे बांधवगढ़ के सबसे खास और लोकप्रिय बाघों में से एक बताया।

सोशल मीडिया पर उमड़ी यह संवेदनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि पुजारी केवल एक बाघ नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ एक जीवंत प्रतीक बन चुका था।

उसकी मौत के बाद लोगों ने जिस तरह भावुक होकर श्रद्धांजलि दी, उससे यह स्पष्ट हो गया कि बांधवगढ़ में वन्यजीवों और इंसानों के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन चुका है।

संरक्षण और प्रकृति का जीवंत उदाहरण

आज बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व केवल एक टाइगर रिजर्व नहीं, बल्कि सफल वन्यजीव संरक्षण, समृद्ध जैव विविधता और मानव-प्रकृति संबंध का जीवंत उदाहरण बन चुका है। वन विभाग, स्थानीय समुदाय और संरक्षण विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों ने बांधवगढ़ को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

घने जंगलों में गूंजती बाघों की दहाड़, हाथियों की आवाजाही, गौरों के विशाल झुंड और प्राचीन पहाड़ियों के बीच बसे तालाब आज भी यह संदेश देते हैं कि यदि संरक्षण के प्रयास निरंतर और ईमानदारी से किए जाएं, तो प्रकृति स्वयं को फिर से जीवंत कर सकती है।बांधवगढ़ में गांव वालों और वन विभाग के बीच बेहतर संवाद और समन्वय वन्यजीव संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है। दोनों के बीच तालमेल बना रहना ही जंगल, वन्यजीव और मानव के बीच संतुलन बनाए रखने की अहम कुंजी माना जाता है।

बाइक की टक्कर से महिला की मौत


अमृतपुर फर्रुखाबाद 18 मई। थाना क्षेत्र के बांसी अड्डा के पास स्थित एचपी पेट्रोल पंप के सामने मुख्य मार्ग पर एक तेज रफ्तार बाइक सवार ने बुजुर्ग महिला को जोरदार टक्कर मार दी जिसमें महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। जिसकी पहचान मुजहा निवासी लज्जावती पत्नी सुरेंद्र के रूप में हुई। मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ लग गई। सूचना मिलने पर अमृतपुर थाना पुलिस भी  पहुंची और घायल महिला को एंबुलेंस के माध्यम से इलाज हेतु राजेपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।जहां पर उसकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल लोहिया रेफर कर दिया गया। जहा जांच के बाद डॉक्टर द्वारा  महिला को मृत घोषित  कर दिया गय।महिला की मौत की सूचना परिजनों को मिलते ही  कोहराम मच गया। घर में मौजूद महिलाएं चीखने और चिल्लाने लगी। परिजनों ने बताया है कि महिला अमृतपुर स्थित सरकारी अस्पताल से दवा लेने के लिए गई थी। मृतका का एक लड़का विनोद है जिसकी उम्र 32 वर्ष है जो खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का पालन पोषण करता है। एक लड़की है जिसका नाम मीना है जिसकी शादी हो चुकी है। मृतका के पति सुरेंद्र की भी लगभग 2 वर्ष पहले मौत हो चुकी है.वही अमृतपुर थाना प्रभारी इंद्रजीत सिंह ने बताया है कि बाइक को कब्जे में ले लिया गया है और उपनिरीक्षक खूबेलाल को पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है। आगे अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।
एसआरएन अस्पताल में डॉक्टर मरीजों को कब देखेंगे...किसी को पता नहीं, प्रयागराज में मंडल का सबसे बड़ा हॉस्पिटल का यह हाल
मंडल का सबसे बड़ा सरकारी एसआरएन अस्पताल के चिकित्सक और स्टाफ भी खूब हैं। अस्पताल प्रशासन के तो कुछ कहने ही नहीं। इस हफ्ते में अलग-अलग दिनों में चार एडीएम इस अस्पताल का निरीक्षण कर चुके हैं। रोज ही कमियां और गड़बड़ियां मिलीं मगर अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी।



विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज। चिकित्सक समय से अस्पताल नहीं पहुंचते
शनिवार को भी एडीएम आपूर्ति विजय शर्मा ने एसीएम के साथ निरीक्षण किया। वहां पर ड्यूटी डिस्प्ले चार्ट क्रियाशील नहीं था। वार्डों एवं ओपीडी में डाॅक्टरों के रोस्टर अनुसार बैठने का चार्ट दीवारों पर लगाया गया है, लेकिन समय दर्शित नहीं किया गया है। चिकित्सक किस समय मरीजों को देखेंगे, इसकी जानकारी किसी को नहीं। स्पष्ट है कि चिकित्सक समय से अस्पताल नहीं पहुंचते।

एडीएम आपूर्ति ने अस्पताल का निरीक्षण किया
डीएम मनीष कुमार वर्मा के निर्देश पर एडीएम आपूर्ति शनिवार की सुबह 9.50 बजे अस्पताल के नए भवन में पहुंचे। वार्डाे, पीएमएसएसआइ ओपीडी, ट्रामा सेंटर, गैस्ट्रोलाजी, कार्डियोलाजी, सेंटर पैथोलाजी, ब्लडबैंक, कैश काउंटर, औषधि वितरण, रजिस्ट्रेशन काउंटर को देखा। इसेक बाद पुरानी बिल्डिंग स्थित अल्ट्रासाउंड, एमआरआइ कक्ष पर कार्यरत डाॅक्टरों व स्टाफ की उपस्थिति तथा ड्यूटी डिस्प्ले का निरीक्षण किया गया।

दवा की उपलब्धता को लेकर जताई नाराजगी
उन्होंने कार्डियोलाजी, सेंट्रल पैथोलाजी ब्लडबैंक, कैश काउंटर, औषधि वितरण, रजिस्ट्रेशन काउंटर पर मरीजों व तीमारदारों से पूछताछ की। भर्ती मरीजों से भी वार्ता की और स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। शीतल पेयजल की बेहतर व्यवस्था कराने की एडीएम ने जोर दिया। यह भी अवगत कराया गया कि चिकित्सालय में इमरजेंसी की स्थिति में कुछ दवाएं स्टाक में अनुपलब्ध होने के कारण बाहर से मंगाई जाती हैं। इस पर एडीएम ने नाराजगी जताई। निर्देश दिए कि आवश्यक दवाएं स्टाक में होनी ही चाहिए।

डाॅक्टर-स्टाफ की पार्किंग को जोन, तीमारदार परेशान
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि अस्पताल में वाहन इधर-उधर खड़े थे। कर्मचारियों ने बताया कि अस्पताल के डाॅक्टर-स्टाफ की पार्किंग के लिए तीन जोन बने हैं। तीमारदारों एवं बाहरी वाहनों के पार्किंग की समस्या बनी रहती है। चिकित्सालय में उपलब्ध सुरक्षाबल, चिकित्सालय प्रशासन एवं चौकी की पुलिस को इस पर ध्यान देना चाहिए।
मानदेय न मिलने पर चिकित्सकों ने जताया विरोध:भदोही में काली पट्टी बांधकर काम किया, 21 से पूर्ण बहिष्कार की चेतावनी
नितेश श्रीवास्तव


भदोही। प्रदेश कार्यकारिणी के आवाहन पर सोमवार को सीएचसी भदोही के NHM कर्मचारियों ने पिछले तीन माह
से मानदेय न मिलने पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। यह विरोध प्रदर्शन 18, 19 और 20 तारीख तक चलेगा, जिसमें कर्मचारी काली पट्टी बांधकर ही काम करेंगे। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 20 तारीख तक मानदेय का भुगतान नहीं किया गया, तो 21 तारीख से पूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
जिला अस्पताल के एचएम उपाध्यक्ष महेंद्र पाल ने बताया कि तीन माह से वेतन न मिलने के कारण कर्मचारियों को घर-परिवार चलाने और बच्चों की स्कूल फीस भरने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि काम करने के बाद भी भुगतान न मिलने से परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो जाता है।
जिले भर में 500 से अधिक चिकित्सक और कर्मचारी इस संगठन में शामिल हैं। सभी सीएचसी और पीएससी पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताते हुए अपना कार्य कर रहे हैं। कर्मचारियों ने दोहराया कि यदि 21 तारीख तक मानदेय का भुगतान नहीं हुआ, तो पूर्ण बहिष्कार कर विरोध प्रदर्शन तेज किया जाएगा।
Sambhal लखनऊ लाठीचार्ज के विरोध में वकीलों का फूटा गुस्सा, सम्भल बार एसोसिएशन का प्रदर्शन
लखनऊ कचहरी में अधिवक्ताओं के चैंबर तोड़े जाने और पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में सम्भल जिला बार एसोसिएशन के वकीलों ने जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग उठाई।

जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शकील अहमद अशरफी ने आरोप लगाया कि लखनऊ प्रशासन और पुलिस ने अधिवक्ताओं के साथ बर्बरता की है। उन्होंने कहा कि वकीलों को चैंबरों से खींचकर पीटा गया और कई अधिवक्ता घायल हुए हैं। उन्होंने मांग की कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए तथा घायल अधिवक्ताओं को ₹10-10 लाख मुआवजा दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो पूरे उत्तर प्रदेश के वकील सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। जिला बार एसोसिएशन की उपाध्यक्ष मुख्तार फात्मा ने कहा कि अधिवक्ताओं के साथ लगातार अत्याचार की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि कानून और न्याय के लिए लड़ने वाले वकीलों की ही सुनवाई नहीं हो रही है। महिला अधिवक्ताओं के साथ मारपीट की घटना को उन्होंने बेहद शर्मनाक बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। बार एसोसिएशन के सचिव सरफराज नवाज़ ने कहा कि लखनऊ कचहरी में करीब 30 वर्षों से अधिवक्ताओं के चैंबर बने हुए थे, लेकिन प्रशासन ने बुलडोजर और पुलिस बल के दम पर कार्रवाई की। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला अधिवक्ताओं तक को नहीं छोड़ा गया और कई वकील अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग उठाते हुए कहा कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। अधिवक्ताओं ने साफ कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक और तेज किया जाएगा।
भीषण गर्मी एवं लू से बचाव को लेकर जिला प्रशासन सतर्क

नितेश श्रीवास्तव

भदोही । जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने बताया कि जनपद में लगातार बढ़ते तापमान एवं भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क एवं सक्रिय है। आमजन को लू (हीट स्ट्रोक) से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश एवं एडवाइजरी जारी की गई है। जिलाधिकारी ने बताया कि विगत दिनों से जनपद का तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है तथा आगामी दिनों में इसके 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। ऐसी स्थिति में लू लगने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
जिलाधिकारी ने बताया कि लू लगने की स्थिति में शरीर का अत्यधिक गर्म एवं लाल हो जाना, त्वचा का शुष्क होना, तेज नाड़ी चलना, सिरदर्द, चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, थकान तथा पसीना कम या बंद हो जाना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है।
उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें। यदि बाहर जाना अत्यंत आवश्यक हो तो हल्के रंग in के ढीले एवं सूती वस्त्र पहनें तथा सिर को टोपी, गमछा या छाते से ढककर रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं तथा शरीर में जल की कमी न होने दें। ओआरएस घोल, नमक-चीनी का घोल एवं अन्य तरल पदार्थों का सेवन लाभकारी रहेगा।
इसी क्रम में जिलाधिकारी ने आज सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय, सरपतहा के लू वार्ड का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) की अनुपस्थिति पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए वेतन रोकने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में तीन अस्पताल 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं 20 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर लू वार्ड बनाए गए हैं सभी केदो पर 24 घंटे डॉक्टरों की टीम भी लगाई गई है लू वार्ड की व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद के सभी कार्यालयों सार्वजनिक स्थलों एवं पशु पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था कराई गई है।
तत्पश्चात जिलाधिकारी द्वारा महाराजा चेतसिंह चिकित्सालय, ज्ञानपुर का भी आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान एनआरसी, डेंगू वार्ड एवं लू वार्ड की व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रूप से संचालित मिलीं। जिलाधिकारी ने अस्पताल में मरीजों के लिए शुद्ध पेयजल, आवश्यक दवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने भर्ती मरीजों से उनका हालचाल जाना तथा चिकित्सकों को निर्देशित करते हुए कहा कि सभी मरीजों को समयबद्ध, समुचित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उपचार व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जिलाधिकारी ने समस्त जनपदवासियों आम जनमानस से अपील की है कि गर्मी एवं लू के प्रभाव को देखते हुए आवश्यक सावधानियां बरतें, स्वयं को सुरक्षित रखें तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
प्रदेश के दक्षिणी हिस्से से शुरू होगा लू का प्रभाव
नितेश श्रीवास्तव

भदोही। मौसम विभाग के अनुसार, भदोही में 22 म‌ई तक आरेंज अलर्ट जारी है। तापमान में लगातार वृद्धि के साथ लू चलने की संभावना है। सुबह 11 बजे के बाद अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी। किसी प्रभावी मौसम तंत्र के सक्रिय न होने के कारण इस सप्ताह मौसम शुष्क बना रह सकता है। प्रदेश के दक्षिणी हिस्से से लू का नया दौर शुरू होने की संभावना है। जिसका असर जिले में भी देखने को मिल सकता है।
आज विधायक विनोद सिंह की अगुवाई में नगर पालिका परिषद में एक महत्वपूर्व बैठक हुई*
सुल्तानपुर में आज विधायक विनोद सिंह की अगुवाई में नगर पालिका परिषद में एक महत्वपूर्व बैठक हुई। इस दौरान नगर पालिका क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था सुधारने, सहित तमाम समस्याओं को लेकर चर्चा हुई। बैठक में विद्युत विभाग के आलाधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होनें समय सीमा के भीतर विद्युत समस्याओं के निस्तारण का भरोसा दिया है। दरअसल नगर पालिका क्षेत्र के तमाम वार्डों में तमाम विद्युत समस्या बनी हुई है। लिहाजा सभासदों ने इसके लिए विधायक विनोद सिंह और नगर पालिका परिषद के चेयरमैन को अवगत करवाया था। इसी के मद्दे नजर आज नगर पालिका परिषद में विधायक विनोद सिंह की अगुवाई में महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें विभिन्न वार्डों के जर्जर विद्युत पोल, तार , स्ट्रीट लाइट , विभिन्न मोहल्लों में नए विद्युत पोल सहित तमाम समस्याओं को लेकर वार्ता की गई।बैठक में विधायक के निर्देश पर विद्युत विभाग के अधिशाषी अभियंता सहित तमाम आलाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान विधायक ने विद्युत अधिकारियों को समस्याएं नोट करवाई साथ ही जल्द से जल्द चिन्हित कर इस पर कार्य करवाने को कहा। सुल्तानपुर एवं पूर्व मंत्री वी ओ-वहीं बैठक में मौजूद नगर पालिका परिषद के चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल की माने तो सभासदों के वार्डो की समस्याओं को देखते हुए ये बैठक विधायक विनोद सिंह के नेतृत्व में सम्पन्न हुई। जिसमें जल्द से जल्द विद्युत समस्याओं के निस्तारण की बात कही गई है। बाइट -प्रवीण कुमार अग्रवाल चेयरमैन नगर पालिका परिषद सुल्तानपुर
आज विधायक विनोद सिंह की अगुवाई में नगर पालिका परिषद में एक महत्वपूर्व बैठक हुई*
सुल्तानपुर में आज विधायक विनोद सिंह की अगुवाई में नगर पालिका परिषद में एक महत्वपूर्व बैठक हुई। इस दौरान नगर पालिका क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था सुधारने, सहित तमाम समस्याओं को लेकर चर्चा हुई। बैठक में विद्युत विभाग के आलाधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होनें समय सीमा के भीतर विद्युत समस्याओं के निस्तारण का भरोसा दिया है। दरअसल नगर पालिका क्षेत्र के तमाम वार्डों में तमाम विद्युत समस्या बनी हुई है। लिहाजा सभासदों ने इसके लिए विधायक विनोद सिंह और नगर पालिका परिषद के चेयरमैन को अवगत करवाया था। इसी के मद्दे नजर आज नगर पालिका परिषद में विधायक विनोद सिंह की अगुवाई में महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमें विभिन्न वार्डों के जर्जर विद्युत पोल, तार , स्ट्रीट लाइट , विभिन्न मोहल्लों में नए विद्युत पोल सहित तमाम समस्याओं को लेकर वार्ता की गई।बैठक में विधायक के निर्देश पर विद्युत विभाग के अधिशाषी अभियंता सहित तमाम आलाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान विधायक ने विद्युत अधिकारियों को समस्याएं नोट करवाई साथ ही जल्द से जल्द चिन्हित कर इस पर कार्य करवाने को कहा। सुल्तानपुर एवं पूर्व मंत्री वी ओ-वहीं बैठक में मौजूद नगर पालिका परिषद के चेयरमैन प्रवीण अग्रवाल की माने तो सभासदों के वार्डो की समस्याओं को देखते हुए ये बैठक विधायक विनोद सिंह के नेतृत्व में सम्पन्न हुई। जिसमें जल्द से जल्द विद्युत समस्याओं के निस्तारण की बात कही गई है। बाइट -प्रवीण कुमार अग्रवाल चेयरमैन नगर पालिका परिषद सुल्तानपुर
पुलिस मुठभेड़ में आरोपी के गोली लगने पर हुआ लंगड़ा, किया गिरफ्तार
फर्रुखाबाद l थाना राजेपुर क्षेत्र के ग्राम कुइयां में 17 मई को अधिवक्ता राजेश पाठक के घर पर चोरी और भतीजों पर फायरिंग करने पर गंभीर रूप से घायल हो गए थे,घटना को अंजाम देने के बाद फरार हो गया था। इस शातिर अभियुक्त को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान गोली लगने से लंगड़ा होने पर गिरफ्तार कर लिया। जवाबी कार्रवाई में अभियुक्त के पैर में गोली लगने से वह घायल हो गया। पुलिस ने उसके कब्जे से अवैध तमंचा व कारतूस बरामद किए हैं।
पुलिस ने बताया कि घटना के बाद से आरोपी फरार चल रहा था, जिसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही थी। रविवार देर रात चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस को आरोपी का सुराग मिला। तभी पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ने का प्रयास किया। लेकिन आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की तो आरोपी घायल हो गया। घायल अभियुक्त को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस जांच में आरोपी का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके खिलाफ विभिन्न थानों में कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।