चंदौसी में ‘फेस्टिव फिएस्टा’ एग्जीबिशन का भव्य आयोजन, महिला सशक्तिकरण को मिला नया मंच

संभल, चंदौसी। रोटरी क्लब चंदौसी रॉयल्स द्वारा आज चंदौसी के संजीवनी पैलेस में “फेस्टिव फिएस्टा” नाम से एक भव्य एग्जीबिशन का आयोजन किया गया। इस आकर्षक प्रदर्शनी में शहर एवं आसपास के क्षेत्रों के लोगों ने भारी उत्साह के साथ भाग लिया और हजारों की संख्या में पहुंचकर खरीदारी का आनंद लिया।

इस एग्जीबिशन में ज्वेलरी, ट्रेंडिंग क्लॉथ्स, पार्टी वियर आइटम, मसाले, ड्राई फ्रूट्स, होम डेकोर, किचन एसेसरीज, लेडीज सूट, आर्टिफिशियल ज्वेलरी सहित अनेक प्रकार के स्टॉल लगाए गए। खास बात यह रही कि इन सभी स्टॉल्स का संचालन महिलाओं द्वारा किया गया, जो अपने घरों से कार्य करती हैं। इस पहल के माध्यम से उन्हें अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और व्यापक पहचान बनाने का सशक्त मंच प्राप्त हुआ।

इस प्रदर्शनी में चंदौसी के अलावा बरेली, हल्द्वानी, रुद्रपुर, मेरठ एवं मुरादाबाद जैसे विभिन्न शहरों से भी प्रतिभागियों ने आकर अपने स्टॉल लगाए, जिससे कार्यक्रम का दायरा और भी विस्तृत हो गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ डिप्टी कलेक्टर श्रीमती वंदना मिश्रा ज़ी , चंदौसी नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती लता वार्ष्णेय ज़ी , रोटरी अंतरराष्ट्रीय मंडल 3100 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रोटेरियन CA नितिन अग्रवाल ज़ी , आगामी गवर्नर काव्य सौरभ रस्तोगी ने फीता काटकर किया। इस अवसर क्लब  सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

क्लब अध्यक्ष रोटेरियन वन्दना अग्रवाल, क्लब सचिव रोटेरियन शिल्पी अग्रवाल, कार्यक्रम अध्यक्ष अपूर्व अग्रवाल एवं नैना अग्रवाल, पब्लिक इमेज चेयर रो. राहुल अग्रवाल, असिस्टेंट गवर्नर निखिल अग्रवाल सहित क्लब के अनेक सदस्यों—रो. सौरभ अग्रवाल, आदित्य वार्ष्णेय, विक्रम वार्ष्णेय , मोहित गुप्ता, निमित वार्ष्णेय, शोभित अग्रवाल, नितिन अग्रवाल, शशांक अग्रवाल, पराग अग्रवाल, सुनीत, आकांशा भार्गव, तनीषा अग्रवाल, सुप्रिया अग्रवाल, प्रियंका वार्ष्णेय, रितु वार्ष्णेय, ज्योति गुप्ता, महिमा अग्रवाल, प्रियंका चौधरी, नैन्सी अग्रवाल, निष्ठा अग्रवाल, शिखा अग्रवाल, निकिता अग्रवाल, वाणी अग्रवाल की सक्रिय उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया।

रोटरी क्लब चंदौसी रॉयल्स का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सेवा एवं महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। “फेस्टिव फिएस्टा” इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपने हुनर को पहचान दिलाने का अवसर मिला।

क्लब द्वारा भविष्य में भी इसी प्रकार की सामाजिक एवं सशक्तिकरण से जुड़ी पहलें निरंतर आयोजित की जाती रहेंगी।
सक्षम फाउंडेशन द्वारा भीमसेन अस्पताल को दवाइयों व सर्जिकल उपकरणों का सहयोग
भायंदर । सक्षम फाउंडेशन द्वारा थायरोकेयर टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के सौजन्य से भारत रत्न पंडित भीमसेन रुग्णालय,भायंदर में जनसेवा हेतु एक सराहनीय पहल के तहत एकमुश्त (बल्क) दवाइयों एवं सर्जिकल उपकरणों का सहयोग प्रदान किया गया। समाजसेवा और स्वास्थ्य सेवा के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक नरेंद्र मेहता ने इस योगदान के लिए फाउंडेशन एवं थायरोकेयर की सराहना की एवं हॉस्पिटल के डॉक्टर्स का संदेश दिया कि जो दवाएं जरूरतमंदों के लिए दी गई हैं उनका सदुपयोग होना चाहिए किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए सम्माननीय अतिथि के रूप में मीरा भयंदर महानगरपालिका की महापौर श्रीमती डिंपल मेहता एवं उप महापौर ध्रुव किशोर पाटिल उपस्थित रहे। विशेष अतिथि के रूप में डॉ. नरेन्द्र गुप्ता उपस्थित थे भरत लाल अग्रवाल, सुशील पोद्दार, डॉ नवल अग्रवाल सहित समाज के गणमान्य लोगों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इस अवसर पर नगरसेवक सुरेश खंडेलवाल, वर्षा  भानुशाली, नियामक सदस्य  ओमप्रकाश गडोदिया एवं अनीता दीक्षित सहित थायरोकेयर से आए हुए आशीष अरोरा, यश शर्मा, मोहित शर्मा, प्रियदर्शिनी सिन्हा, जिगर देसाई एवं अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के सहयोग से अस्पताल की सेवाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी तथा जरूरतमंद मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा। सक्षम फाउंडेशन के ट्रस्टी अनुज सरावगी एवं अध्यक्ष  सुमीत अग्रवाल ने बताया कि संस्था का उद्देश्य सदैव समाज के जरूरतमंद वर्ग तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है। उन्होंने सभी सहयोगकर्ताओं एवं उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

फाउंडेशन के सौरभ पोद्दार,अमित अग्रवाल, अभिजीत घोषाल, सचिन अग्रवाल, क्रुणाल शाह,अजित मिश्रा,भारत जालोर सहित अनेक सदस्य उपस्थित थे।
रिश्तों का कत्ल: कलयुगी चाचा ने उजाड़ दिया भाई का संसार,तीन मासूमों की गला रेतकर किया निर्मम हत्या

औरंगाबाद रिश्तों की मर्यादा और ममता को शर्मसार करने वाली एवं रोंगटे खड़े कर देने वाली एक हृदयविदारक वारदात में शुक्रवार को खुटहन गांव का एक घर खून से लाल हो गया। एक सनकी चाचा ने घरेलू विवाद का बदला लेने के लिए अपने सगे बड़े भाई के तीन मासूम बच्चों की बलि चढ़ा दी। आरोपी अमंत पाल उर्फ अमन पाल ने अपनी रंजिश का शिकार उन नन्हे-मुन्नों को बनाया,जो उसे 'चाचा' कहकर पुकारते थें । आरोपी ने बड़े हीं शातिराना अंदाज में वारदात को अंजाम दिया और फिर पकड़े जाने के डर से या पश्चाताप में खुद का गला भी रेत लिया। इस सामूहिक हत्याकांड के बाद पूरे अनुमंडल में सनसनी फैल गई है।

पैसे के विवाद ने बनाया 'हैवान', मां के अपमान का बदला बच्चों से लिया

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इस खौफनाक वारदात के पीछे की वजह महज कुछ हजार रुपये और मां के साथ हुई कहासुनी बताई जा रही है। बताया जाता है कि बड़ा भाई गुड्डू पाल और छोटा भाई अमंत पाल दोनों बाहर रहकर कमाते थें । पैसों के लेनदेन को लेकर घर में अक्सर 'तू-तू मैं-मैं' होती थी। दो दिन पूर्व जब बड़ा भाई मुंबई काम पर लौटा,तो पीछे से आए अमंत ने मां से पुरानी मारपीट की बात सुनी। बस, इसी बात ने उसके भीतर हैवानियत जगा दी। उसने ठान लिया कि वह अपने भाई का 'वंश' हीं खत्म कर देगा। शुक्रवार की सुबह उसने उस वक्त का इंतजार किया जब घर के बाकी लोग काम में उलझे थें।

कमरे में बजता रहा संगीत और बाहर सिसकती रही इंसानियत

आरोपी ने कत्ल की पटकथा पहले हीं लिख ली थी। उसने कमरे में लगे होम थिएटर बॉक्स की आवाज इतनी तेज कर दी कि मासूमों की चीखें पड़ोसियों के कानों तक न पहुंच सकें। उसने अपने भतीजे अनीश (10),आयुष (7) और भतीजी अनुष्का (5) को मोबाइल पर गेम दिखाने का लालच देकर कमरे में ले गया। मासूम अपने चाचा की गलत नीयत से बेखबर होकर कमरे में चले गए। जैसे हीं दरवाजा बंद हुआ, अमंत ने धारदार हथियार निकाला और बारी-बारी से तीनों का गला रेतनें लगा। बच्चों के चीख पुकार सुन मां दौड़ी आई, लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था और वह बेबस माँ चाह कर भी कुछ नहीं कर पाई।जब तक ग्रामीण दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंचे,तीनों मासूम दम तोड़ चुके थें और कमरा बूचड़खाना बन चुका था।

हमर लइकवन के का दोष हलै.. : मां की चीख से सहम गया पुरा गांव व क्षेत्र

घटनास्थल पर मौजूद हर शख्स की आंखें उस वक्त छलक उठीं, जब बच्चों की मां अनीता देवी बदहवास होकर जमीन पर गिरने पटकाने लगीं। वह चीख-चीख कर कह रही थीं, "हमर लइकवन दुश्मनवा के का बिगड़ले हलक मईया? ऊ त तनी-तनी सन हलक,ओकरा से केकर का दुश्मनी हलै?" मां का यह विलाप सुनकर गांव की महिलाएं क्या पुरुषों की आँखों में भी आंसू नहीं रुक पायें। अनीता बार-बार बेहोश हो रही हैं और होश आते हीं अपने बच्चों के नाम पुकारने लगती हैं। उनके करुण क्रंदन ने गांव की हवाओं में भी गम घोल दिया है।

गंभीर हालात में आरोपी गया रेफर,औरंगाबाद सदर अस्पताल में होगा बच्चों का पोस्टमार्टम

दाऊदनगर एसडीपीओ अशोक कुमार दास ने बताया कि आरोपी अमंत पाल ने बच्चों की हत्या के बाद खुदकुशी का प्रयास किया।हसपुरा पुलिस उसे उठा कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हसपुरा लेकर गई,जहाँ डॉ.संजय नें प्राथमिक उपचार करने के बाद स्तिथि गंभीर देखते हुये मगध मेडिकल कॉलेज,गयाजी रेफर कर दिया है। पुलिस ने मौके से हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार जब्त कर लिया है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल औरंगाबाद भेजा गया है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट है कि विवाद मामूली था,लेकिन आरोपी के सनकीपन ने इसे एक बड़े नरसंहार में बदल दिया। पुलिस मामले की हर बिंदु पर जांच कर रही है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का हर सम्भव भरोसा दिया है।

औरंगाबाद से धिरेन्द्र पाण्डेय

मुज़फ्फरनगर )मीरापुर क्षेत्र के गांव भूम्मा रोड पर मधुमक्खीयो ने दो युवक घायल रोहागीरों को मारा डंक


जनपद मुज़फ्फरनगर। के गुरुवार को लगभग 11बजे मीरापुर क्षेत्र के गांव भूम्मा के रास्ते मे मधुमक्खियो के हमले अफरा-तफरी मच गई।एक आइसक्रीम बेचने वाले युवक पर मधुमक्खी के झुंड ने हमला कर दिया। जिससे वह युवक ने जान बचाने के लिए क़रीब आधा किलोमीटर तक भागता रहा अंत मे रहागीरों ने धुआ कर युवक बचाया।बताया जा रहा है कि एक युवक किथौड़ा निवासी जो रोज की भांति मीरापुर से गांव भूम्मा आइसक्रीम बेचने जा रहा था जैसे ही भूम्मा रजवाहे के पास पहुचा इसी दौरान वहाँ आम के बाग में लगे मधुमक्खियां के छते के पास हलचल होने से मधुमक्खियां आक्रामक हो गई और रास्ते में लोगों पर हमला कर दिया रास्ते में आने जाने वाले सब इधर-उधर भागने लगे लेकिन आइसक्रीम युवक पर मधुमक्खियां टूट पड़ी।

स्थानीय लोगों ने चीख पुकार सुनकर मौके पर आग जलाई और धुआ करके मधुमक्खियां को भगाया। जो युवक घायल हुआ उसे अस्पताल पहुंचाया।
आस्था और पर्यावरण का संगम: बागपत का पुरा महादेव बना जीरो वेस्ट तीर्थ पर्यटन का मॉडल

* बेस्ट हेरिटेज टूरिस्ट विलेज 2024 से सम्मानित पुरा महादेव में ‘टेंपल इकोनॉमी’ पहल से सतत विकास की नई मिसाल

लखनऊ/बागपत। उत्तर प्रदेश के पुरा महादेव ने ‘बेस्ट हेरिटेज टूरिस्ट विलेज 2024’ का गौरव हासिल करने के बाद अब सतत और जिम्मेदार तीर्थ पर्यटन का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। ‘टेंपल इकोनॉमी’ पहल के तहत परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर जीरो वेस्ट व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू की गई।
इस पहल के तहत मंदिर में चढ़ने वाली भेंट और उत्सव के दौरान उत्पन्न कचरे का वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रबंधन किया गया, वह भी धार्मिक परंपराओं की पवित्रता को बनाए रखते हुए। फूलों, दूध, जैविक अवशेष, प्लास्टिक बोतलों, पूजा धागों और यहां तक कि छोड़ी गई चप्पलों को भी एकत्र कर प्रोसेस कर पुनः उपयोग में लाया गया।

* कचरा नहीं, संसाधन: सफलता की मिसाल
इस अनूठी पहल के परिणाम प्रभावशाली रहे। 450 किलोग्राम से अधिक फूलों को प्रोसेस किया गया, लगभग एक टन जैविक सामग्री से खाद तैयार हुई और करीब 700 किलोग्राम प्लास्टिक को फाइबर फिल में बदला गया। 3,000 से अधिक पूजा धागों का पुनः उपयोग हुआ, 2,500 चप्पलों को मैट व इंस्टॉलेशन में बदला गया, जबकि 4,563 लीटर दूध पशु देखभाल के लिए उपयोग में लाया गया।
जिला प्रशासन के अनुसार यह मॉडल दो प्रमुख स्तंभों—भेंट सामग्री की रिकवरी एवं पुनर्वितरण तथा समुदाय आधारित सर्कुलर पुनः उपयोग—पर आधारित है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय आजीविका को भी बढ़ावा मिला है।
इस पहल में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही, विशेषकर महिलाओं ने छंटाई और प्रोसेसिंग कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे यह सिद्ध हुआ कि धार्मिक स्थल न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के भी प्रमुख केंद्र बन सकते हैं।
मंदिर परिसर में स्वच्छता, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं के अनुभव में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने स्वच्छ वातावरण और भेंट सामग्री के सम्मानजनक पुनः उपयोग की सराहना की। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉडल प्रदेश की टेंपल इकोनॉमी को मजबूत करने और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि यह पहल दर्शाती है कि सामुदायिक सहभागिता और सुव्यवस्थित प्रणाली के माध्यम से धार्मिक स्थलों को जिम्मेदार पर्यटन के प्रभावी मॉडल में बदला जा सकता है। बागपत प्रशासन अब इस मॉडल को अन्य मंदिरों में लागू करने की योजना बना रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर सततता और स्वच्छता को और बढ़ावा मिल सके।
छात्रा से छेड़छाड़ व अवैध संचालन पर प्रशासन का चला हंटर,केजीएन पब्लिक स्कूल हुआ बंद

गोंडा।जिला प्रशासन ने जिले के कटरा बाजार विकास खंड अंतर्गत स्थित केजीएन पब्लिक स्कूल के खिलाफ बड़ी  कार्रवाई की है।एक नौवीं कक्षा की छात्रा के साथ छेड़छाड़ व बार बार अश्लील मैसेज भेजकर परेशान करने के मामले में विरोध करने पर छात्रा के भाई के साथ मारपीट भी हुई थी।इन आरोपों और अवैध संचालन के चलते विद्यालय को अग्रिम आदेशों तक तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है।यह कार्रवाई स्ट्रीटबुज पर खबर प्रकाशित होने के बाद शासन द्वारा जिलाधिकारी को जांच के निर्देश दिए जाने पर की गई।जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने उपजिलाधिकारी करनैलगंज नेहा मिश्रा की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया ।इस समिति में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह व जिला विद्यालय निरीक्षक डाक्टर रामचंद्र भी सदस्य थे।समिति ने मौके पर पहुंचकर जांच किया,जिसमें पाया गया कि विद्यालय के पास महज कक्षा एक से कक्षा आठ तक की मान्यता थी लेकिन वह अवैध रूप से कक्षा नौ से 12 तक की कक्षाएं संचालित कर रहा था।अवैध संचालन की पुष्टि होने के बाद विद्यालय के गेट पर ताला लगा दिया गया है।दरअसल यह मामला 15 फरवरी को सामने आया था जब नौवीं कक्षा के छात्रा के भाई ने आरोपी परवेज खान द्वारा की जा रही छेड़छाड़ और अश्लील मैसेज भेजने से मना करने के लिए स्कूल का दौरा किया था।वहाँ स्कूल के मालिक और परवेज खान ने अन्य लोगों के साथ मिलकर उसके साथ मारपीट किया था।पुलिस ने 15 फरवरी को ही छेड़छाड़, मारपीट व अश्लील मैसेज भेजने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था और 16 फरवरी को चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।स्कूल की जांच में निकलकर आया कि इस स्कूल की मान्यता महज कक्षा आठ तक है लेकिन यहाँ पर कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाएं अवैध रूप से संचालित की जा रही हैं।उक्त आधार पर कार्रवाई करते हुए विद्यालय को बंद कर दिया गया है जो अग्रिम आदेशों तक प्रभावी रहेगा और विद्यालय के गेट पर एक नोटिस भी चस्पा की गई है।
ग्रामीणों को साक्षरता के लिए किया जागरूक

कमलेश मेहरोत्रा लहरपुर (सीतापुर)। विकास खंड क्षेत्र के ग्राम भवानीपुर में प्रभात राजेंद्र कुमार पूनम देवी महाविद्यालय के तत्वावधान में चल रहे राष्ट्रीय सेवा योजना के विशेष शिविर में साक्षरता जागरूकता हेतु गांव के विभिन्न मार्गों पर रैली निकालकर ग्रामीणों को साक्षरता के लिए जागरूक किया गया। शुक्रवार को साक्षरता बढ़ाने हेतु सेवक सेविकाओं ने रैली निकाल कर सब पढ़ें सब बढ़े के लिए लोगों को जागरूक किया इस मौके पर ग्रामीण से संवाद कर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए जागरूक किया गया, रैली के उपरांत प्राथमिक विद्यालय भवानीपुर के प्रांगण में आयोजित  साक्षरता गोष्ठी में विद्यालय संस्थापक राजेंद्र श्रीवास्तव ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला और सभी से अपने-अपने बच्चों को स्कूल भेजने की अपील की।

प्राचार्य मनोज श्रीवास्तव व कार्यक्रम अधिकारी  प्रकाश चन्द्र एवं गौतम कुमार ने गोष्ठी में बोलते हुए कहा कि साक्षरता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सभी लोगों को संवेदनशील होना चाहिए और साक्षरता की दर बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए। कार्यक्रम क संयोजक  अमरेन्द्र सिंह चौहान, अमित वर्मा नमित मिश्रा व अस्तुति अवस्थी ने भी गोष्टी को संबोधित करते हुए बालिका शिक्षा पर जोर दिया और कहा कि साक्षरता अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक करती है। इस मौके पर छात्र-छात्राएं एवं ग्रामीण उपस्थित थे।
हर दिन की हेल्दी स्नैकिंग का पूरक बनेगा न्यूट्रिका का पीनट बटर
नई दिल्ली, 26 मार्च, 2026: आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग सेहत का ध्यान तो रखना चाहते हैं, लेकिन सही और आसान विकल्प की तलाश करना चुनौती बन जाता है। ऐसे में, रोजमर्रा के खानपान में छोटा-सा बदलाव भी बड़ा असर डाल सकता है।

इसी सोच के साथ, बीएन एग्रीटेक के लाइफस्टाइल और वेलनेस ब्रांड न्यूट्रिका ने अपनी नई पीनट बटर रेंज लॉन्च की है। यह सिर्फ एक नया प्रोडक्ट नहीं, बल्कि एक ऐसा विकल्प है, जो रोजमर्रा की जिंदगी में हेल्दी खाने को थोड़ा आसान और थोड़ा स्वादिष्ट बना देता है।

न्यूट्रिका के डायरेक्टर और बिज़नेस हेड- एफएमसीजी, स्पर्श सचर ने कहा, "हम चाहते हैं कि लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे आसानी से हेल्दी विकल्प चुन सकें और सेहत को अपनी रोज की आदत बना लें।"

न्यूट्रिका पीनट बटर दो वैरिएंट्स- क्रंची और क्रीमी में आता है। यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर है, 100 प्रतिशत शाकाहारी सामग्री से बना है और इसमें किसी तरह का आर्टिफिशियल प्रिजर्वेटिव नहीं मिलाया गया है। यानि स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखा गया है।

यह रेंज दिल्ली, मुंबई, पुणे और चंडीगढ़ समेत 14 शहरों में जनरल ट्रेड स्टोर्स पर उपलब्ध है और 300 ग्राम, 750 ग्राम व 900 ग्राम के पैक में मिलती है। अच्छी बात यह है कि इसे बच्चे से लेकर बड़े तक, पूरा परिवार अपनी रोज की डाइट में आसानी से शामिल कर सकता है।

इससे पहले न्यूट्रिका बी हनी और विटामिन युक्त कुकिंग ऑइल्स के जरिए ब्रांड लोगों के बीच अपनी जगह बना चुका है। अब यह नया पीनट बटर उसी सफर को आगे बढ़ाते हुए, हेल्दी लाइफस्टाइल को और भी आसान बनाने की कोशिश है।
*लखनऊ में एजुकेट गर्ल्स ने मनाया 18वाँ स्थापना दिवस, बालिका शिक्षा को आगे बढ़ाने में जमीनी साझेदारियों के प्रभाव को किया प्रदर्शित*

लखनऊ, 25 मार्च, 2026: एजुकेट गर्ल्स, जिसे 2025 के रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, ने 25 मार्च 2026 को लखनऊ में अपना 18वाँ स्थापना दिवस मनाया। इस पुरस्कार को व्यापक रूप से एशिया का नोबेल पुरस्कार माना जाता है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में 300 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए, जिनमें टीम बालिका स्वयंसेवक, फील्ड स्टाफ, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सिविल सोसाइटी साझेदार और शिक्षा क्षेत्र के हितधारक शामिल थे। इस अवसर पर संस्था की यात्रा पर विचार किया गया और भारत भर में बालिका शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मुख्य संबोधन दिया और राज्य में प्रत्येक बालिका के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार के सतत प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “देशव्यापी पहलों जैसे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से लेकर उत्तर प्रदेश में एजुकेट गर्ल्स जैसे साझेदारों के माध्यम से निरंतर प्रयासों तक, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। वर्ष 2017 के बाद से राज्य में बुनियादी, माध्यमिक और उच्च शिक्षा में व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं, जिनमें बेहतर बुनियादी ढाँचा, संसाधनों में वृद्धि और ड्रॉपआउट दर को कम करने के लिए केंद्रित प्रयास शामिल हैं। कायाकल्प योजना और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के विस्तार जैसी सरकारी योजनाओं ने बालिकाओं को स्कूल में वापस लाने और उनकी शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज अधिकांश बालिकाएँ कक्षाओं में हैं और ड्रॉपआउट दर लगातार घट रही है। मिशन शक्ति के माध्यम से हम बालिकाओं को गरिमा, अवसर और समानता के साथ जीवन जीने में सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम एजुकेट गर्ल्स के साथ मिलकर बालिका शिक्षा और सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने के हर प्रयास में दृढ़ता से साथ खड़े हैं।”

माध्यमिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक विष्णु कांत पांडेय ने राज्यभर में सामुदायिक भागीदारी और पुनःसमावेशन प्रयासों के माध्यम से हासिल की गई प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “लगातार प्रयासों के माध्यम से हम लगभग 23 जिलों में बालिकाओं की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में सफल हुए हैं, साथ ही जोखिमग्रस्त छात्रों को विद्यालय में बनाए रखने में भी सहयोग किया है। विद्या कार्यक्रम के अंतर्गत टीम बालिका स्वयंसेवक गाँव-गाँव जाकर स्कूल से बाहर बालिकाओं को पुनः शिक्षा से जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं और सामाजिक या आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ चुकी बालिकाओं के लिए ओपन स्कूलिंग के माध्यम से निरंतरता सुनिश्चित कर रहे हैं। किशोर बालिकाओं को पुनः मुख्यधारा में लाना एक जटिल चुनौती बनी हुई है, लेकिन एजुकेट गर्ल्स ने मजबूत सामुदायिक जुड़ाव और साझेदारियों के माध्यम से इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके जमीनी अनुभवों ने हमारी योजना और क्रियान्वयन को मजबूत किया है, जिससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिली है कि कोई भी बालिका पीछे न रह जाए। हम इस सहयोग और एजुकेट गर्ल्स, टीम बालिका तथा सभी साझेदारों की बालिका शिक्षा को आगे बढ़ाने की निरंतर प्रतिबद्धता को अत्यंत महत्व देते हैं।”




एजुकेट गर्ल्स की सीईओ गायत्री नायर लोबो ने संस्था की जमीनी पहल से राष्ट्रीय स्तर पर परिवर्तनकारी शक्ति बनने की यात्रा पर प्रकाश डाला और 2025 के रेमन मैग्सेसे पुरस्कार का श्रेय अग्रिम पंक्ति में कार्यरत स्वयंसेवकों और फील्ड टीमों के सामूहिक साहस को दिया।

उन्होंने कहा, “एजुकेट गर्ल्स यह दर्शाता है कि मजबूत साझेदारियाँ किस प्रकार बड़े स्तर पर सार्थक परिवर्तन ला सकती हैं। ज्ञान का पिटारा जैसे हमारे रेमेडियल लर्निंग कार्यक्रमों के माध्यम से हम सबसे वंचित बालिकाओं तक पहुँचते हैं, उन्हें स्कूल में वापस लाने और सीखने की राह पर बनाए रखने में सहयोग करते हैं। रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, जिसे एशिया का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है हमारी टीम बालिका स्वयंसेवकों, फील्ड टीमों और साझेदारों के सामूहिक प्रयासों को मान्यता देता है और सेवा, ईमानदारी तथा जमीनी नेतृत्व की उस भावना को दर्शाता है, जो हमारे कार्य को आगे बढ़ाती है। घर-घर जाकर स्कूल से बाहर बालिकाओं की पहचान करना और गहरी जड़ें जमाए सामाजिक दृष्टिकोणों को बदलना, यह सम्मान अग्रिम पंक्ति में काम कर रहे लोगों के असाधारण साहस और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। हम अपने कार्य में निरंतर सहयोग के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति भी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।”

इस आयोजन में शिक्षार्थियों और स्वयंसेवकों की प्रेरणादायक कहानियाँ और प्रस्तुतियाँ भी शामिल थीं, जिन्होंने शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति को उजागर किया। बिहार की प्रगति टीम से जुड़ी शिक्षार्थी हलीमा सादिया भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। संचालन निदेशक विक्रम सिंह सोलंकी द्वारा संचालित टीम बालिका पैनल चर्चा में 55,000 से अधिक स्वयंसेवकों के प्रभाव को दर्शाया गया, जो घर-घर जाकर समुदायों में परिवर्तन ला रहे हैं और बाल विवाह, घरेलू जिम्मेदारियों तथा सामाजिक मान्यताओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जो अक्सर बालिकाओं के स्कूल छोड़ने का कारण बनती हैं।

इन्हीं में से बदायूं की सोनम ने साझा किया कि पिछले दो वर्षों में एजुकेट गर्ल्स के साथ उनकी यात्रा ने उन्हें अधिक आत्मविश्वासी बनाया है और शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति को समझने में मदद की है। सोनभद्र की प्रांचल गुप्ता ने बताया कि ड्रॉपआउट बच्चों को शिक्षा से जोड़ना उन्हें अपार खुशी और उद्देश्य देता है। अंकित मौर्य ने अपने गाँव में जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों को साझा किया, जहाँ वे सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवारों को, विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करते हैं। निर्मला यादव की कहानी विशेष रूप से प्रेरणादायक रही। कम उम्र में विवाह और विरोध का सामना करने के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी, यहाँ तक कि उनकी किताबें नष्ट कर दी गईं, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और बीए तथा एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई पूर्ण की, जिससे वे कई लोगों के लिए प्रेरणा बनीं।
अस्पताल जाने से पहले इन बातों का खास ध्यान रखकर बनें 'मरीज के लिए सबसे बड़ी मदद' - डॉ अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

जब परिवार का कोई सदस्य बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होता है, तो रिश्तेदार और जान-पहचान वाले उसे देखने जरूर जाते हैं। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है कि हम मुश्किल समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहें। लेकिन कई बार हमारी यही अच्छी भावना मरीज और उसके परिवार के लिए परेशानी भी बन जाती है। इसलिए अस्पताल जाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।

अस्पताल में मरीज पहले से ही शारीरिक और मानसिक तनाव में होता है, इसलिए सबसे जरूरी है कि हम संवेदनशीलता और समझदारी के साथ व्यवहार करें। हमारी मौजूदगी से उसे सुकून मिलना चाहिए, न कि उसका तनाव बढ़ना चाहिए। ऐसे समय में यदि हम आर्थिक रूप से थोड़ी मदद कर सकें, तो यह परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकती है। जैसे हम खुशी के अवसरों पर सहयोग करते हैं, वैसे ही मुश्किल समय में किया गया छोटा-सा सहयोग भी बहुत मायने रखता है, क्योंकि इलाज, दवाइयाँ और जांच का खर्च परिवार पर भारी बोझ डाल देता है।

आजकल एक आम समस्या यह भी है कि लोग बिना जानकारी के डॉक्टर बनने की कोशिश करने लगते हैं। इंटरनेट या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर सलाह देना मरीज और उसके परिवार के तनाव को और बढ़ा देता है। इलाज डॉक्टर का काम है, इसलिए हमें केवल भावनात्मक सहारा देना चाहिए। मरीज के सामने हमेशा सकारात्मक बातें करनी चाहिए। “सब ठीक हो जाएगा”, “आप जल्दी ठीक हो जाएंगे” जैसे शब्द मरीज का मनोबल बढ़ाते हैं, जबकि नकारात्मक उदाहरण देना उसे मानसिक रूप से कमजोर कर सकता है। अस्पताल में साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हाथ साफ रखना, मास्क पहनना और अस्पताल के नियमों का पालन करना जरूरी है, क्योंकि वहां भर्ती मरीजों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। अगर खुद को खांसी-जुकाम या बुखार जैसी समस्या हो, तो अस्पताल जाने से बचना ही बेहतर है।

मरीज को सबसे ज्यादा जरूरत आराम की होती है, इसलिए ज्यादा देर तक उसके पास बैठना या बातचीत करना सही नहीं है। थोड़ी देर मिलकर हौसला बढ़ाना और फिर वापस आ जाना ही सही तरीका है। अक्सर लोग ज्यादा देर बैठना अपनापन समझते हैं, जबकि इससे मरीज थक जाता है। इसी तरह एक साथ ज्यादा लोगों का जाना भी सही नहीं है। भीड़ होने से मरीज, अन्य मरीजों और अस्पताल स्टाफ को परेशानी होती है, इसलिए सीमित संख्या में ही लोगों को जाना चाहिए।

अस्पताल में शांति बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। तेज आवाज में बात करना, हँसना या मोबाइल पर जोर से बातचीत करना दूसरों के लिए असुविधाजनक होता है। मोबाइल को साइलेंट रखना और धीरे बोलना ही सही व्यवहार है। साथ ही, मरीज की निजता का सम्मान करना भी जरूरी है। हर व्यक्ति अपनी बीमारी के बारे में खुलकर बात नहीं करना चाहता, इसलिए अनावश्यक सवाल पूछना या रिपोर्ट देखने की जिद करना उचित नहीं है। डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ अपने काम में प्रशिक्षित होते हैं, इसलिए उनके काम में दखल देना या उनसे बहस करना गलत है। इससे इलाज में बाधा आ सकती है और कई बार स्थिति बिगड़ भी सकती है। यदि कोई शंका हो, तो उसे शांत तरीके से समझना चाहिए, न कि विवाद करना चाहिए।

खाने-पीने की चीजें ले जाते समय भी सावधानी जरूरी है। हर मरीज की डाइट अलग होती है, इसलिए बिना पूछे कुछ भी देना नुकसानदायक हो सकता है। परिवार या डॉक्टर से पूछकर ही कुछ ले जाना चाहिए। मरीज के साथ व्यवहार करते समय दया दिखाने के बजाय उसे भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना अधिक जरूरी है। “बेचारा” जैसे शब्द उसकी हिम्मत कम करते हैं, जबकि भरोसा और सकारात्मकता उसे ताकत देती है। सिर्फ मिलने जाना ही काफी नहीं होता, बल्कि जरूरत पड़ने पर प्रैक्टिकल मदद करना भी उतना ही जरूरी है। दवा लाना, रिपोर्ट लेना, ब्लड की व्यवस्था करना या परिवार की छोटी-छोटी जरूरतों में सहयोग करना वास्तव में बड़ी मदद साबित होती है।

अंत में यही समझना जरूरी है कि अस्पताल जाना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। हमारा व्यवहार, हमारी बात और हमारा सहयोग ही मरीज के लिए सबसे बड़ी दवा बन सकता है। जब भी अस्पताल जाएं, इस बात का ध्यान रखें कि आपका उद्देश्य मरीज को राहत देना होना चाहिए, न कि परेशानी। आपकी छोटी-सी समझदारी और संवेदनशीलता किसी के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
चंदौसी में ‘फेस्टिव फिएस्टा’ एग्जीबिशन का भव्य आयोजन, महिला सशक्तिकरण को मिला नया मंच

संभल, चंदौसी। रोटरी क्लब चंदौसी रॉयल्स द्वारा आज चंदौसी के संजीवनी पैलेस में “फेस्टिव फिएस्टा” नाम से एक भव्य एग्जीबिशन का आयोजन किया गया। इस आकर्षक प्रदर्शनी में शहर एवं आसपास के क्षेत्रों के लोगों ने भारी उत्साह के साथ भाग लिया और हजारों की संख्या में पहुंचकर खरीदारी का आनंद लिया।

इस एग्जीबिशन में ज्वेलरी, ट्रेंडिंग क्लॉथ्स, पार्टी वियर आइटम, मसाले, ड्राई फ्रूट्स, होम डेकोर, किचन एसेसरीज, लेडीज सूट, आर्टिफिशियल ज्वेलरी सहित अनेक प्रकार के स्टॉल लगाए गए। खास बात यह रही कि इन सभी स्टॉल्स का संचालन महिलाओं द्वारा किया गया, जो अपने घरों से कार्य करती हैं। इस पहल के माध्यम से उन्हें अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और व्यापक पहचान बनाने का सशक्त मंच प्राप्त हुआ।

इस प्रदर्शनी में चंदौसी के अलावा बरेली, हल्द्वानी, रुद्रपुर, मेरठ एवं मुरादाबाद जैसे विभिन्न शहरों से भी प्रतिभागियों ने आकर अपने स्टॉल लगाए, जिससे कार्यक्रम का दायरा और भी विस्तृत हो गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ डिप्टी कलेक्टर श्रीमती वंदना मिश्रा ज़ी , चंदौसी नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती लता वार्ष्णेय ज़ी , रोटरी अंतरराष्ट्रीय मंडल 3100 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रोटेरियन CA नितिन अग्रवाल ज़ी , आगामी गवर्नर काव्य सौरभ रस्तोगी ने फीता काटकर किया। इस अवसर क्लब  सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

क्लब अध्यक्ष रोटेरियन वन्दना अग्रवाल, क्लब सचिव रोटेरियन शिल्पी अग्रवाल, कार्यक्रम अध्यक्ष अपूर्व अग्रवाल एवं नैना अग्रवाल, पब्लिक इमेज चेयर रो. राहुल अग्रवाल, असिस्टेंट गवर्नर निखिल अग्रवाल सहित क्लब के अनेक सदस्यों—रो. सौरभ अग्रवाल, आदित्य वार्ष्णेय, विक्रम वार्ष्णेय , मोहित गुप्ता, निमित वार्ष्णेय, शोभित अग्रवाल, नितिन अग्रवाल, शशांक अग्रवाल, पराग अग्रवाल, सुनीत, आकांशा भार्गव, तनीषा अग्रवाल, सुप्रिया अग्रवाल, प्रियंका वार्ष्णेय, रितु वार्ष्णेय, ज्योति गुप्ता, महिमा अग्रवाल, प्रियंका चौधरी, नैन्सी अग्रवाल, निष्ठा अग्रवाल, शिखा अग्रवाल, निकिता अग्रवाल, वाणी अग्रवाल की सक्रिय उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया।

रोटरी क्लब चंदौसी रॉयल्स का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सेवा एवं महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। “फेस्टिव फिएस्टा” इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपने हुनर को पहचान दिलाने का अवसर मिला।

क्लब द्वारा भविष्य में भी इसी प्रकार की सामाजिक एवं सशक्तिकरण से जुड़ी पहलें निरंतर आयोजित की जाती रहेंगी।
सक्षम फाउंडेशन द्वारा भीमसेन अस्पताल को दवाइयों व सर्जिकल उपकरणों का सहयोग
भायंदर । सक्षम फाउंडेशन द्वारा थायरोकेयर टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के सौजन्य से भारत रत्न पंडित भीमसेन रुग्णालय,भायंदर में जनसेवा हेतु एक सराहनीय पहल के तहत एकमुश्त (बल्क) दवाइयों एवं सर्जिकल उपकरणों का सहयोग प्रदान किया गया। समाजसेवा और स्वास्थ्य सेवा के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक नरेंद्र मेहता ने इस योगदान के लिए फाउंडेशन एवं थायरोकेयर की सराहना की एवं हॉस्पिटल के डॉक्टर्स का संदेश दिया कि जो दवाएं जरूरतमंदों के लिए दी गई हैं उनका सदुपयोग होना चाहिए किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए सम्माननीय अतिथि के रूप में मीरा भयंदर महानगरपालिका की महापौर श्रीमती डिंपल मेहता एवं उप महापौर ध्रुव किशोर पाटिल उपस्थित रहे। विशेष अतिथि के रूप में डॉ. नरेन्द्र गुप्ता उपस्थित थे भरत लाल अग्रवाल, सुशील पोद्दार, डॉ नवल अग्रवाल सहित समाज के गणमान्य लोगों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इस अवसर पर नगरसेवक सुरेश खंडेलवाल, वर्षा  भानुशाली, नियामक सदस्य  ओमप्रकाश गडोदिया एवं अनीता दीक्षित सहित थायरोकेयर से आए हुए आशीष अरोरा, यश शर्मा, मोहित शर्मा, प्रियदर्शिनी सिन्हा, जिगर देसाई एवं अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के सहयोग से अस्पताल की सेवाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी तथा जरूरतमंद मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा। सक्षम फाउंडेशन के ट्रस्टी अनुज सरावगी एवं अध्यक्ष  सुमीत अग्रवाल ने बताया कि संस्था का उद्देश्य सदैव समाज के जरूरतमंद वर्ग तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है। उन्होंने सभी सहयोगकर्ताओं एवं उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

फाउंडेशन के सौरभ पोद्दार,अमित अग्रवाल, अभिजीत घोषाल, सचिन अग्रवाल, क्रुणाल शाह,अजित मिश्रा,भारत जालोर सहित अनेक सदस्य उपस्थित थे।
रिश्तों का कत्ल: कलयुगी चाचा ने उजाड़ दिया भाई का संसार,तीन मासूमों की गला रेतकर किया निर्मम हत्या

औरंगाबाद रिश्तों की मर्यादा और ममता को शर्मसार करने वाली एवं रोंगटे खड़े कर देने वाली एक हृदयविदारक वारदात में शुक्रवार को खुटहन गांव का एक घर खून से लाल हो गया। एक सनकी चाचा ने घरेलू विवाद का बदला लेने के लिए अपने सगे बड़े भाई के तीन मासूम बच्चों की बलि चढ़ा दी। आरोपी अमंत पाल उर्फ अमन पाल ने अपनी रंजिश का शिकार उन नन्हे-मुन्नों को बनाया,जो उसे 'चाचा' कहकर पुकारते थें । आरोपी ने बड़े हीं शातिराना अंदाज में वारदात को अंजाम दिया और फिर पकड़े जाने के डर से या पश्चाताप में खुद का गला भी रेत लिया। इस सामूहिक हत्याकांड के बाद पूरे अनुमंडल में सनसनी फैल गई है।

पैसे के विवाद ने बनाया 'हैवान', मां के अपमान का बदला बच्चों से लिया

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इस खौफनाक वारदात के पीछे की वजह महज कुछ हजार रुपये और मां के साथ हुई कहासुनी बताई जा रही है। बताया जाता है कि बड़ा भाई गुड्डू पाल और छोटा भाई अमंत पाल दोनों बाहर रहकर कमाते थें । पैसों के लेनदेन को लेकर घर में अक्सर 'तू-तू मैं-मैं' होती थी। दो दिन पूर्व जब बड़ा भाई मुंबई काम पर लौटा,तो पीछे से आए अमंत ने मां से पुरानी मारपीट की बात सुनी। बस, इसी बात ने उसके भीतर हैवानियत जगा दी। उसने ठान लिया कि वह अपने भाई का 'वंश' हीं खत्म कर देगा। शुक्रवार की सुबह उसने उस वक्त का इंतजार किया जब घर के बाकी लोग काम में उलझे थें।

कमरे में बजता रहा संगीत और बाहर सिसकती रही इंसानियत

आरोपी ने कत्ल की पटकथा पहले हीं लिख ली थी। उसने कमरे में लगे होम थिएटर बॉक्स की आवाज इतनी तेज कर दी कि मासूमों की चीखें पड़ोसियों के कानों तक न पहुंच सकें। उसने अपने भतीजे अनीश (10),आयुष (7) और भतीजी अनुष्का (5) को मोबाइल पर गेम दिखाने का लालच देकर कमरे में ले गया। मासूम अपने चाचा की गलत नीयत से बेखबर होकर कमरे में चले गए। जैसे हीं दरवाजा बंद हुआ, अमंत ने धारदार हथियार निकाला और बारी-बारी से तीनों का गला रेतनें लगा। बच्चों के चीख पुकार सुन मां दौड़ी आई, लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था और वह बेबस माँ चाह कर भी कुछ नहीं कर पाई।जब तक ग्रामीण दरवाजा तोड़कर अंदर पहुंचे,तीनों मासूम दम तोड़ चुके थें और कमरा बूचड़खाना बन चुका था।

हमर लइकवन के का दोष हलै.. : मां की चीख से सहम गया पुरा गांव व क्षेत्र

घटनास्थल पर मौजूद हर शख्स की आंखें उस वक्त छलक उठीं, जब बच्चों की मां अनीता देवी बदहवास होकर जमीन पर गिरने पटकाने लगीं। वह चीख-चीख कर कह रही थीं, "हमर लइकवन दुश्मनवा के का बिगड़ले हलक मईया? ऊ त तनी-तनी सन हलक,ओकरा से केकर का दुश्मनी हलै?" मां का यह विलाप सुनकर गांव की महिलाएं क्या पुरुषों की आँखों में भी आंसू नहीं रुक पायें। अनीता बार-बार बेहोश हो रही हैं और होश आते हीं अपने बच्चों के नाम पुकारने लगती हैं। उनके करुण क्रंदन ने गांव की हवाओं में भी गम घोल दिया है।

गंभीर हालात में आरोपी गया रेफर,औरंगाबाद सदर अस्पताल में होगा बच्चों का पोस्टमार्टम

दाऊदनगर एसडीपीओ अशोक कुमार दास ने बताया कि आरोपी अमंत पाल ने बच्चों की हत्या के बाद खुदकुशी का प्रयास किया।हसपुरा पुलिस उसे उठा कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हसपुरा लेकर गई,जहाँ डॉ.संजय नें प्राथमिक उपचार करने के बाद स्तिथि गंभीर देखते हुये मगध मेडिकल कॉलेज,गयाजी रेफर कर दिया है। पुलिस ने मौके से हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार जब्त कर लिया है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल औरंगाबाद भेजा गया है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट है कि विवाद मामूली था,लेकिन आरोपी के सनकीपन ने इसे एक बड़े नरसंहार में बदल दिया। पुलिस मामले की हर बिंदु पर जांच कर रही है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का हर सम्भव भरोसा दिया है।

औरंगाबाद से धिरेन्द्र पाण्डेय

मुज़फ्फरनगर )मीरापुर क्षेत्र के गांव भूम्मा रोड पर मधुमक्खीयो ने दो युवक घायल रोहागीरों को मारा डंक


जनपद मुज़फ्फरनगर। के गुरुवार को लगभग 11बजे मीरापुर क्षेत्र के गांव भूम्मा के रास्ते मे मधुमक्खियो के हमले अफरा-तफरी मच गई।एक आइसक्रीम बेचने वाले युवक पर मधुमक्खी के झुंड ने हमला कर दिया। जिससे वह युवक ने जान बचाने के लिए क़रीब आधा किलोमीटर तक भागता रहा अंत मे रहागीरों ने धुआ कर युवक बचाया।बताया जा रहा है कि एक युवक किथौड़ा निवासी जो रोज की भांति मीरापुर से गांव भूम्मा आइसक्रीम बेचने जा रहा था जैसे ही भूम्मा रजवाहे के पास पहुचा इसी दौरान वहाँ आम के बाग में लगे मधुमक्खियां के छते के पास हलचल होने से मधुमक्खियां आक्रामक हो गई और रास्ते में लोगों पर हमला कर दिया रास्ते में आने जाने वाले सब इधर-उधर भागने लगे लेकिन आइसक्रीम युवक पर मधुमक्खियां टूट पड़ी।

स्थानीय लोगों ने चीख पुकार सुनकर मौके पर आग जलाई और धुआ करके मधुमक्खियां को भगाया। जो युवक घायल हुआ उसे अस्पताल पहुंचाया।
आस्था और पर्यावरण का संगम: बागपत का पुरा महादेव बना जीरो वेस्ट तीर्थ पर्यटन का मॉडल

* बेस्ट हेरिटेज टूरिस्ट विलेज 2024 से सम्मानित पुरा महादेव में ‘टेंपल इकोनॉमी’ पहल से सतत विकास की नई मिसाल

लखनऊ/बागपत। उत्तर प्रदेश के पुरा महादेव ने ‘बेस्ट हेरिटेज टूरिस्ट विलेज 2024’ का गौरव हासिल करने के बाद अब सतत और जिम्मेदार तीर्थ पर्यटन का एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। ‘टेंपल इकोनॉमी’ पहल के तहत परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर जीरो वेस्ट व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू की गई।
इस पहल के तहत मंदिर में चढ़ने वाली भेंट और उत्सव के दौरान उत्पन्न कचरे का वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रबंधन किया गया, वह भी धार्मिक परंपराओं की पवित्रता को बनाए रखते हुए। फूलों, दूध, जैविक अवशेष, प्लास्टिक बोतलों, पूजा धागों और यहां तक कि छोड़ी गई चप्पलों को भी एकत्र कर प्रोसेस कर पुनः उपयोग में लाया गया।

* कचरा नहीं, संसाधन: सफलता की मिसाल
इस अनूठी पहल के परिणाम प्रभावशाली रहे। 450 किलोग्राम से अधिक फूलों को प्रोसेस किया गया, लगभग एक टन जैविक सामग्री से खाद तैयार हुई और करीब 700 किलोग्राम प्लास्टिक को फाइबर फिल में बदला गया। 3,000 से अधिक पूजा धागों का पुनः उपयोग हुआ, 2,500 चप्पलों को मैट व इंस्टॉलेशन में बदला गया, जबकि 4,563 लीटर दूध पशु देखभाल के लिए उपयोग में लाया गया।
जिला प्रशासन के अनुसार यह मॉडल दो प्रमुख स्तंभों—भेंट सामग्री की रिकवरी एवं पुनर्वितरण तथा समुदाय आधारित सर्कुलर पुनः उपयोग—पर आधारित है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय आजीविका को भी बढ़ावा मिला है।
इस पहल में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही, विशेषकर महिलाओं ने छंटाई और प्रोसेसिंग कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे यह सिद्ध हुआ कि धार्मिक स्थल न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों के भी प्रमुख केंद्र बन सकते हैं।
मंदिर परिसर में स्वच्छता, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं के अनुभव में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने स्वच्छ वातावरण और भेंट सामग्री के सम्मानजनक पुनः उपयोग की सराहना की। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉडल प्रदेश की टेंपल इकोनॉमी को मजबूत करने और सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि यह पहल दर्शाती है कि सामुदायिक सहभागिता और सुव्यवस्थित प्रणाली के माध्यम से धार्मिक स्थलों को जिम्मेदार पर्यटन के प्रभावी मॉडल में बदला जा सकता है। बागपत प्रशासन अब इस मॉडल को अन्य मंदिरों में लागू करने की योजना बना रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर सततता और स्वच्छता को और बढ़ावा मिल सके।
छात्रा से छेड़छाड़ व अवैध संचालन पर प्रशासन का चला हंटर,केजीएन पब्लिक स्कूल हुआ बंद

गोंडा।जिला प्रशासन ने जिले के कटरा बाजार विकास खंड अंतर्गत स्थित केजीएन पब्लिक स्कूल के खिलाफ बड़ी  कार्रवाई की है।एक नौवीं कक्षा की छात्रा के साथ छेड़छाड़ व बार बार अश्लील मैसेज भेजकर परेशान करने के मामले में विरोध करने पर छात्रा के भाई के साथ मारपीट भी हुई थी।इन आरोपों और अवैध संचालन के चलते विद्यालय को अग्रिम आदेशों तक तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है।यह कार्रवाई स्ट्रीटबुज पर खबर प्रकाशित होने के बाद शासन द्वारा जिलाधिकारी को जांच के निर्देश दिए जाने पर की गई।जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने उपजिलाधिकारी करनैलगंज नेहा मिश्रा की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया ।इस समिति में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह व जिला विद्यालय निरीक्षक डाक्टर रामचंद्र भी सदस्य थे।समिति ने मौके पर पहुंचकर जांच किया,जिसमें पाया गया कि विद्यालय के पास महज कक्षा एक से कक्षा आठ तक की मान्यता थी लेकिन वह अवैध रूप से कक्षा नौ से 12 तक की कक्षाएं संचालित कर रहा था।अवैध संचालन की पुष्टि होने के बाद विद्यालय के गेट पर ताला लगा दिया गया है।दरअसल यह मामला 15 फरवरी को सामने आया था जब नौवीं कक्षा के छात्रा के भाई ने आरोपी परवेज खान द्वारा की जा रही छेड़छाड़ और अश्लील मैसेज भेजने से मना करने के लिए स्कूल का दौरा किया था।वहाँ स्कूल के मालिक और परवेज खान ने अन्य लोगों के साथ मिलकर उसके साथ मारपीट किया था।पुलिस ने 15 फरवरी को ही छेड़छाड़, मारपीट व अश्लील मैसेज भेजने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था और 16 फरवरी को चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।स्कूल की जांच में निकलकर आया कि इस स्कूल की मान्यता महज कक्षा आठ तक है लेकिन यहाँ पर कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाएं अवैध रूप से संचालित की जा रही हैं।उक्त आधार पर कार्रवाई करते हुए विद्यालय को बंद कर दिया गया है जो अग्रिम आदेशों तक प्रभावी रहेगा और विद्यालय के गेट पर एक नोटिस भी चस्पा की गई है।
ग्रामीणों को साक्षरता के लिए किया जागरूक

कमलेश मेहरोत्रा लहरपुर (सीतापुर)। विकास खंड क्षेत्र के ग्राम भवानीपुर में प्रभात राजेंद्र कुमार पूनम देवी महाविद्यालय के तत्वावधान में चल रहे राष्ट्रीय सेवा योजना के विशेष शिविर में साक्षरता जागरूकता हेतु गांव के विभिन्न मार्गों पर रैली निकालकर ग्रामीणों को साक्षरता के लिए जागरूक किया गया। शुक्रवार को साक्षरता बढ़ाने हेतु सेवक सेविकाओं ने रैली निकाल कर सब पढ़ें सब बढ़े के लिए लोगों को जागरूक किया इस मौके पर ग्रामीण से संवाद कर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए जागरूक किया गया, रैली के उपरांत प्राथमिक विद्यालय भवानीपुर के प्रांगण में आयोजित  साक्षरता गोष्ठी में विद्यालय संस्थापक राजेंद्र श्रीवास्तव ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला और सभी से अपने-अपने बच्चों को स्कूल भेजने की अपील की।

प्राचार्य मनोज श्रीवास्तव व कार्यक्रम अधिकारी  प्रकाश चन्द्र एवं गौतम कुमार ने गोष्ठी में बोलते हुए कहा कि साक्षरता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सभी लोगों को संवेदनशील होना चाहिए और साक्षरता की दर बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए। कार्यक्रम क संयोजक  अमरेन्द्र सिंह चौहान, अमित वर्मा नमित मिश्रा व अस्तुति अवस्थी ने भी गोष्टी को संबोधित करते हुए बालिका शिक्षा पर जोर दिया और कहा कि साक्षरता अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक करती है। इस मौके पर छात्र-छात्राएं एवं ग्रामीण उपस्थित थे।
हर दिन की हेल्दी स्नैकिंग का पूरक बनेगा न्यूट्रिका का पीनट बटर
नई दिल्ली, 26 मार्च, 2026: आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग सेहत का ध्यान तो रखना चाहते हैं, लेकिन सही और आसान विकल्प की तलाश करना चुनौती बन जाता है। ऐसे में, रोजमर्रा के खानपान में छोटा-सा बदलाव भी बड़ा असर डाल सकता है।

इसी सोच के साथ, बीएन एग्रीटेक के लाइफस्टाइल और वेलनेस ब्रांड न्यूट्रिका ने अपनी नई पीनट बटर रेंज लॉन्च की है। यह सिर्फ एक नया प्रोडक्ट नहीं, बल्कि एक ऐसा विकल्प है, जो रोजमर्रा की जिंदगी में हेल्दी खाने को थोड़ा आसान और थोड़ा स्वादिष्ट बना देता है।

न्यूट्रिका के डायरेक्टर और बिज़नेस हेड- एफएमसीजी, स्पर्श सचर ने कहा, "हम चाहते हैं कि लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे आसानी से हेल्दी विकल्प चुन सकें और सेहत को अपनी रोज की आदत बना लें।"

न्यूट्रिका पीनट बटर दो वैरिएंट्स- क्रंची और क्रीमी में आता है। यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर है, 100 प्रतिशत शाकाहारी सामग्री से बना है और इसमें किसी तरह का आर्टिफिशियल प्रिजर्वेटिव नहीं मिलाया गया है। यानि स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखा गया है।

यह रेंज दिल्ली, मुंबई, पुणे और चंडीगढ़ समेत 14 शहरों में जनरल ट्रेड स्टोर्स पर उपलब्ध है और 300 ग्राम, 750 ग्राम व 900 ग्राम के पैक में मिलती है। अच्छी बात यह है कि इसे बच्चे से लेकर बड़े तक, पूरा परिवार अपनी रोज की डाइट में आसानी से शामिल कर सकता है।

इससे पहले न्यूट्रिका बी हनी और विटामिन युक्त कुकिंग ऑइल्स के जरिए ब्रांड लोगों के बीच अपनी जगह बना चुका है। अब यह नया पीनट बटर उसी सफर को आगे बढ़ाते हुए, हेल्दी लाइफस्टाइल को और भी आसान बनाने की कोशिश है।
*लखनऊ में एजुकेट गर्ल्स ने मनाया 18वाँ स्थापना दिवस, बालिका शिक्षा को आगे बढ़ाने में जमीनी साझेदारियों के प्रभाव को किया प्रदर्शित*

लखनऊ, 25 मार्च, 2026: एजुकेट गर्ल्स, जिसे 2025 के रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, ने 25 मार्च 2026 को लखनऊ में अपना 18वाँ स्थापना दिवस मनाया। इस पुरस्कार को व्यापक रूप से एशिया का नोबेल पुरस्कार माना जाता है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में 300 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए, जिनमें टीम बालिका स्वयंसेवक, फील्ड स्टाफ, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सिविल सोसाइटी साझेदार और शिक्षा क्षेत्र के हितधारक शामिल थे। इस अवसर पर संस्था की यात्रा पर विचार किया गया और भारत भर में बालिका शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मुख्य संबोधन दिया और राज्य में प्रत्येक बालिका के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार के सतत प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “देशव्यापी पहलों जैसे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से लेकर उत्तर प्रदेश में एजुकेट गर्ल्स जैसे साझेदारों के माध्यम से निरंतर प्रयासों तक, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। वर्ष 2017 के बाद से राज्य में बुनियादी, माध्यमिक और उच्च शिक्षा में व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं, जिनमें बेहतर बुनियादी ढाँचा, संसाधनों में वृद्धि और ड्रॉपआउट दर को कम करने के लिए केंद्रित प्रयास शामिल हैं। कायाकल्प योजना और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के विस्तार जैसी सरकारी योजनाओं ने बालिकाओं को स्कूल में वापस लाने और उनकी शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज अधिकांश बालिकाएँ कक्षाओं में हैं और ड्रॉपआउट दर लगातार घट रही है। मिशन शक्ति के माध्यम से हम बालिकाओं को गरिमा, अवसर और समानता के साथ जीवन जीने में सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम एजुकेट गर्ल्स के साथ मिलकर बालिका शिक्षा और सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने के हर प्रयास में दृढ़ता से साथ खड़े हैं।”

माध्यमिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक विष्णु कांत पांडेय ने राज्यभर में सामुदायिक भागीदारी और पुनःसमावेशन प्रयासों के माध्यम से हासिल की गई प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “लगातार प्रयासों के माध्यम से हम लगभग 23 जिलों में बालिकाओं की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में सफल हुए हैं, साथ ही जोखिमग्रस्त छात्रों को विद्यालय में बनाए रखने में भी सहयोग किया है। विद्या कार्यक्रम के अंतर्गत टीम बालिका स्वयंसेवक गाँव-गाँव जाकर स्कूल से बाहर बालिकाओं को पुनः शिक्षा से जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं और सामाजिक या आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ चुकी बालिकाओं के लिए ओपन स्कूलिंग के माध्यम से निरंतरता सुनिश्चित कर रहे हैं। किशोर बालिकाओं को पुनः मुख्यधारा में लाना एक जटिल चुनौती बनी हुई है, लेकिन एजुकेट गर्ल्स ने मजबूत सामुदायिक जुड़ाव और साझेदारियों के माध्यम से इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके जमीनी अनुभवों ने हमारी योजना और क्रियान्वयन को मजबूत किया है, जिससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिली है कि कोई भी बालिका पीछे न रह जाए। हम इस सहयोग और एजुकेट गर्ल्स, टीम बालिका तथा सभी साझेदारों की बालिका शिक्षा को आगे बढ़ाने की निरंतर प्रतिबद्धता को अत्यंत महत्व देते हैं।”




एजुकेट गर्ल्स की सीईओ गायत्री नायर लोबो ने संस्था की जमीनी पहल से राष्ट्रीय स्तर पर परिवर्तनकारी शक्ति बनने की यात्रा पर प्रकाश डाला और 2025 के रेमन मैग्सेसे पुरस्कार का श्रेय अग्रिम पंक्ति में कार्यरत स्वयंसेवकों और फील्ड टीमों के सामूहिक साहस को दिया।

उन्होंने कहा, “एजुकेट गर्ल्स यह दर्शाता है कि मजबूत साझेदारियाँ किस प्रकार बड़े स्तर पर सार्थक परिवर्तन ला सकती हैं। ज्ञान का पिटारा जैसे हमारे रेमेडियल लर्निंग कार्यक्रमों के माध्यम से हम सबसे वंचित बालिकाओं तक पहुँचते हैं, उन्हें स्कूल में वापस लाने और सीखने की राह पर बनाए रखने में सहयोग करते हैं। रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, जिसे एशिया का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है हमारी टीम बालिका स्वयंसेवकों, फील्ड टीमों और साझेदारों के सामूहिक प्रयासों को मान्यता देता है और सेवा, ईमानदारी तथा जमीनी नेतृत्व की उस भावना को दर्शाता है, जो हमारे कार्य को आगे बढ़ाती है। घर-घर जाकर स्कूल से बाहर बालिकाओं की पहचान करना और गहरी जड़ें जमाए सामाजिक दृष्टिकोणों को बदलना, यह सम्मान अग्रिम पंक्ति में काम कर रहे लोगों के असाधारण साहस और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। हम अपने कार्य में निरंतर सहयोग के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति भी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।”

इस आयोजन में शिक्षार्थियों और स्वयंसेवकों की प्रेरणादायक कहानियाँ और प्रस्तुतियाँ भी शामिल थीं, जिन्होंने शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति को उजागर किया। बिहार की प्रगति टीम से जुड़ी शिक्षार्थी हलीमा सादिया भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। संचालन निदेशक विक्रम सिंह सोलंकी द्वारा संचालित टीम बालिका पैनल चर्चा में 55,000 से अधिक स्वयंसेवकों के प्रभाव को दर्शाया गया, जो घर-घर जाकर समुदायों में परिवर्तन ला रहे हैं और बाल विवाह, घरेलू जिम्मेदारियों तथा सामाजिक मान्यताओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जो अक्सर बालिकाओं के स्कूल छोड़ने का कारण बनती हैं।

इन्हीं में से बदायूं की सोनम ने साझा किया कि पिछले दो वर्षों में एजुकेट गर्ल्स के साथ उनकी यात्रा ने उन्हें अधिक आत्मविश्वासी बनाया है और शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति को समझने में मदद की है। सोनभद्र की प्रांचल गुप्ता ने बताया कि ड्रॉपआउट बच्चों को शिक्षा से जोड़ना उन्हें अपार खुशी और उद्देश्य देता है। अंकित मौर्य ने अपने गाँव में जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों को साझा किया, जहाँ वे सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवारों को, विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करते हैं। निर्मला यादव की कहानी विशेष रूप से प्रेरणादायक रही। कम उम्र में विवाह और विरोध का सामना करने के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी, यहाँ तक कि उनकी किताबें नष्ट कर दी गईं, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और बीए तथा एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई पूर्ण की, जिससे वे कई लोगों के लिए प्रेरणा बनीं।
अस्पताल जाने से पहले इन बातों का खास ध्यान रखकर बनें 'मरीज के लिए सबसे बड़ी मदद' - डॉ अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

जब परिवार का कोई सदस्य बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होता है, तो रिश्तेदार और जान-पहचान वाले उसे देखने जरूर जाते हैं। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है कि हम मुश्किल समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहें। लेकिन कई बार हमारी यही अच्छी भावना मरीज और उसके परिवार के लिए परेशानी भी बन जाती है। इसलिए अस्पताल जाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।

अस्पताल में मरीज पहले से ही शारीरिक और मानसिक तनाव में होता है, इसलिए सबसे जरूरी है कि हम संवेदनशीलता और समझदारी के साथ व्यवहार करें। हमारी मौजूदगी से उसे सुकून मिलना चाहिए, न कि उसका तनाव बढ़ना चाहिए। ऐसे समय में यदि हम आर्थिक रूप से थोड़ी मदद कर सकें, तो यह परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकती है। जैसे हम खुशी के अवसरों पर सहयोग करते हैं, वैसे ही मुश्किल समय में किया गया छोटा-सा सहयोग भी बहुत मायने रखता है, क्योंकि इलाज, दवाइयाँ और जांच का खर्च परिवार पर भारी बोझ डाल देता है।

आजकल एक आम समस्या यह भी है कि लोग बिना जानकारी के डॉक्टर बनने की कोशिश करने लगते हैं। इंटरनेट या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर सलाह देना मरीज और उसके परिवार के तनाव को और बढ़ा देता है। इलाज डॉक्टर का काम है, इसलिए हमें केवल भावनात्मक सहारा देना चाहिए। मरीज के सामने हमेशा सकारात्मक बातें करनी चाहिए। “सब ठीक हो जाएगा”, “आप जल्दी ठीक हो जाएंगे” जैसे शब्द मरीज का मनोबल बढ़ाते हैं, जबकि नकारात्मक उदाहरण देना उसे मानसिक रूप से कमजोर कर सकता है। अस्पताल में साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हाथ साफ रखना, मास्क पहनना और अस्पताल के नियमों का पालन करना जरूरी है, क्योंकि वहां भर्ती मरीजों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। अगर खुद को खांसी-जुकाम या बुखार जैसी समस्या हो, तो अस्पताल जाने से बचना ही बेहतर है।

मरीज को सबसे ज्यादा जरूरत आराम की होती है, इसलिए ज्यादा देर तक उसके पास बैठना या बातचीत करना सही नहीं है। थोड़ी देर मिलकर हौसला बढ़ाना और फिर वापस आ जाना ही सही तरीका है। अक्सर लोग ज्यादा देर बैठना अपनापन समझते हैं, जबकि इससे मरीज थक जाता है। इसी तरह एक साथ ज्यादा लोगों का जाना भी सही नहीं है। भीड़ होने से मरीज, अन्य मरीजों और अस्पताल स्टाफ को परेशानी होती है, इसलिए सीमित संख्या में ही लोगों को जाना चाहिए।

अस्पताल में शांति बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। तेज आवाज में बात करना, हँसना या मोबाइल पर जोर से बातचीत करना दूसरों के लिए असुविधाजनक होता है। मोबाइल को साइलेंट रखना और धीरे बोलना ही सही व्यवहार है। साथ ही, मरीज की निजता का सम्मान करना भी जरूरी है। हर व्यक्ति अपनी बीमारी के बारे में खुलकर बात नहीं करना चाहता, इसलिए अनावश्यक सवाल पूछना या रिपोर्ट देखने की जिद करना उचित नहीं है। डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ अपने काम में प्रशिक्षित होते हैं, इसलिए उनके काम में दखल देना या उनसे बहस करना गलत है। इससे इलाज में बाधा आ सकती है और कई बार स्थिति बिगड़ भी सकती है। यदि कोई शंका हो, तो उसे शांत तरीके से समझना चाहिए, न कि विवाद करना चाहिए।

खाने-पीने की चीजें ले जाते समय भी सावधानी जरूरी है। हर मरीज की डाइट अलग होती है, इसलिए बिना पूछे कुछ भी देना नुकसानदायक हो सकता है। परिवार या डॉक्टर से पूछकर ही कुछ ले जाना चाहिए। मरीज के साथ व्यवहार करते समय दया दिखाने के बजाय उसे भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना अधिक जरूरी है। “बेचारा” जैसे शब्द उसकी हिम्मत कम करते हैं, जबकि भरोसा और सकारात्मकता उसे ताकत देती है। सिर्फ मिलने जाना ही काफी नहीं होता, बल्कि जरूरत पड़ने पर प्रैक्टिकल मदद करना भी उतना ही जरूरी है। दवा लाना, रिपोर्ट लेना, ब्लड की व्यवस्था करना या परिवार की छोटी-छोटी जरूरतों में सहयोग करना वास्तव में बड़ी मदद साबित होती है।

अंत में यही समझना जरूरी है कि अस्पताल जाना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। हमारा व्यवहार, हमारी बात और हमारा सहयोग ही मरीज के लिए सबसे बड़ी दवा बन सकता है। जब भी अस्पताल जाएं, इस बात का ध्यान रखें कि आपका उद्देश्य मरीज को राहत देना होना चाहिए, न कि परेशानी। आपकी छोटी-सी समझदारी और संवेदनशीलता किसी के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकती है।