पानी की निकासी को लेकर ग्रामीणों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन
आशीष कुमार
मुजफ्फरनगर। जनपद के विकासखंड क्षेत्र के ग्राम गांदला में विकास के नाम पर विनाश का एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां वर्तमान ग्राम प्रधान की मनमानी के कारण पूरा गांव नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर है। गांव के मुख्य रास्ते पर पिछले छह महीनों से घुटनों तक गंदा पानी भरा हुआ है, जिससे प्राथमिक विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आंगनवाड़ी केंद्र और शिव मंदिर का रास्ता पूरी तरह ठप हो गया है। ग्राम प्रधान की दबंगई से त्रस्त ग्रामीणों ने अब एकजुट होकर जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर से लिखित शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है।ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या लगभग 7 वर्ष पहले शुरू हुई थी, जब तत्कालीन प्रधान ने पानी की निकासी वाली मुख्य नाली पर इंटरलॉकिंग करा दी थी, जिससे पानी का बहाव कम हो गया था। लेकिन हद तो तब हो गई जब करीब 6 महीने पहले वर्तमान ग्राम प्रधान ने उस पुरानी इंटरलॉकिंग को उखाड़कर, सड़क पर मिट्टी का भराव किया और रास्ते को और ऊंचा उठाकर दोबारा इंटरलॉकिंग करा दी। इस लापरवाही के कारण घनी आबादी के घरों से निकलने वाले रोजमर्रा के पानी का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया और सारा गंदा पानी मुख्य सड़क पर जमा होने लगा।
इस जलभराव के कारण स्कूल जाने वाले मासूम बच्चे, अस्पताल आने वाले मरीज और गर्भवती महिलाएं आए दिन इस गंदे पानी में फिसलकर गिर रहे हैं और गंभीर रूप से चोटिल हो रहे हैं। गांव में संक्रामक और गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा चरम पर है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब सड़क निर्माण के समय उन्होंने इसका विरोध किया था, तो प्रधान ने जल निकासी का झूठा आश्वासन दिया था। लेकिन अब समस्या बढ़ने पर जब ग्रामीण शिकायत लेकर पहुंचे, तो दबंग प्रधान ने साफ कह दिया— "पानी की निकासी का कोई समाधान नहीं होगा, तुम्हें जहाँ शिकायत करनी है, कर दो।"
प्रधान की इसी दबंगई और खौफ के कारण ग्रामीण अब तक अधिकारियों से सिर्फ मौखिक शिकायत कर रहे थे, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार परेशान होकर मौसज्जाद, प्रमोद कुमार, प्रदीप कुमार, जोगिन्द्र, सुखराम नायक, राजकुमार, अंकित कुमार सहित दर्जनों ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर मामले की जांच कराने, दोषी प्रधान पर कार्रवाई करने और जल्द से जल्द जल निकासी का निस्तारण कराने की मांग की है।
8 hours ago
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