हजारीबाग यूथ विंग का 13 अप्रैल को भव्य रक्तदान शिविर, 500 यूनिट रक्त संग्रह का लक्ष्य

हजारीबाग यूथ विंग के तत्वावधान में 13 अप्रैल को लक्ष्मी सिनेमा हॉल के सभागार में सुबह 9 बजे से आयोजित होने वाले भव्य रक्तदान शिविर की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों तथा थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को जीवनदायिनी सहायता उपलब्ध कराना है।

युवाओं और समाजसेवियों की सक्रिय भागीदारी से इस अभियान को जनआंदोलन का रूप देने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। संस्था के संरक्षक चंद्रप्रकाश जैन और अध्यक्ष करण जायसवाल के नेतृत्व में उपाध्यक्ष विकास तिवारी और सचिव रितेश खंडेलवाल ने डीआईजी अंजनी झा को औपचारिक आमंत्रण पत्र सौंपा।

डीआईजी अंजनी झा ने इस पहल की सराहना करते हुए जिलेवासियों से अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में अस्पतालों में रक्त की जरूरत अक्सर होती है, वहीं थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए नियमित रक्त की आवश्यकता बनी रहती है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।

इस शिविर में 500 से अधिक यूनिट रक्त संग्रह करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। रक्तदाताओं के लिए प्राथमिक चिकित्सा, अल्पाहार और प्रमाणपत्र की व्यवस्था की गई है। साथ ही, सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रत्येक रक्तदाता को हेलमेट भेंट किया जाएगा।

रक्त संग्रह का कार्य रेड क्रॉस सोसाइटी और सदर अस्पताल की संयुक्त टीम द्वारा किया जाएगा, जबकि हजारीबाग पुलिस का भी विशेष सहयोग मिलेगा। हजारीबाग यूथ विंग द्वारा लगातार रक्तदान के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, ताकि रक्त की कमी से होने वाली समस्याओं को कम किया जा सके।

संस्था के संरक्षक चंद्रप्रकाश जैन ने कहा कि रक्तदान एक महान सेवा है, जो जरूरतमंदों को नया जीवन देती है और समाज में मानवता को मजबूत करती है। वहीं अध्यक्ष करण जायसवाल ने युवाओं से आगे आकर इस अभियान को सफल बनाने की अपील की।

प्रयागराज में प्रॉपर्टी डीलर की गोली मारकर हत्या
करेली में नकाबपोश बदमाशों ने वारदात कर फैलाई सनसनी
गमछे और मास्क से ढके थे चेहरे

परिजन बोले, किसी से कोई रंजिश नहीं...

पुलिस ने खंगाले 30 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे, दिखे आरोपी

करेली थाना क्षेत्र के गौसनगर स्थित बिस्मिल्ला चौराहे के पास बुधवार शाम प्रॉपर्टी डीलर मोहम्मद इरफान (47) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दो बाइक पर सवार चार नकाबपोश बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया। एक गोली मृतक के सीने के बाईं तरफ लगी। जमीन के विवाद में हत्या की आशंका है। करेली पुलिस एफआईआर दर्ज कर बदमाशों की पहचान करने में जुट गई है।

ऐनुद्दीनपुर में मोहम्मद इरफान अपनी पत्नी मंगरुल निशा के साथ रहते थे। उनके दो बेटे मोहम्मद आमिर व फैसल और दो बेटियां हैं। वह प्रॉपर्टी डीलर थे। बुधवार शाम घर से करीब 50 मीटर दूर इरफान एक दुकान पर चाय पी रहे थे। इसी दौरान शाम करीब 6:30 बजे दो बाइक पर सवार चार बदमाश आए और इरफान के सीने में गोली मारकर फरार हो गए।गोली लगते ही इरफान जमीन पर गिर गए। सूचना पर डीसीपी नगर मनीष शांडिल्य, एडीसीपी राजकुमार मीना समेत अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तत्काल इरफान को एसआरएन अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि दो बाइक पर सवार चार बदमाश मौके पर पहुंचे थे। चारों बदमाशों ने अपने चेहरे गमछे व मास्क से ढक रखे थे।

इनमें से एक बदमाश मोहम्मद इरफान के पास आया और उन्हें गोली मारकर अपने साथी के साथ बाइक पर बैठकर फरार हो गया। सरेआम गोली चलने से क्षेत्र में दहशत फैल गई।वारदात के बाद मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया। परिजन रोते-बिलखते एसआरएन अस्पताल पहुंचे। परिजन व रिश्तेदार रोते-बिलखते यही कह रहे थे कि इरफान की किसी से रंजिश नहीं थी। न जाने क्यों उन्हें मार दिया गया। उन्होंने पुलिस से आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की।  प्रॉपर्टी डीलर मोहम्मद इरफान की हत्या के मामले में पुलिस आरोपियों तक पहुंचने के लिए देर रात तक कैमरों को खंगालती रही। इस दौरान एक फुटेज में आरोपी दिखे भी, लेकिन उनकी स्पष्ट पहचान नहीं हो सकी है। बदमाशों की पहचान के लिए पुलिस ने आसपास के 30 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले हैं पर इनमें उनका चेहरा साफ नहीं है।

पुलिस के मुताबिक, नकाबपोश बदमाश वारदात को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गए। कई सीसीटीवी फुटेज में बाइक सवार संदिग्ध नजर आए हैं, लेकिन उनकी पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी है। घटनास्थल से लेकर आसपास के मुख्य मार्गों व चौराहों पर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली है। इसके अलावा, संदिग्धों के भागने के संभावित रास्तों की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों के साथ-साथ मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय कर दिया गया है। जल्द ही मामले का खुलासा कर दिया जाएगा। उधर, घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है। लोग सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंतित हैं, वहीं पुलिस ने गश्त बढ़ाकर स्थिति को नियंत्रित किया। डीसीपी ने बताया कि मामले के खुलासे के लिए तीन टीमें गठित की गई हैं। सर्विलांस सेल की भी मदद ली जा रही है।

प्रथम दृष्टया पुरानी रंजिश को लेकर इरफान को गोली मारे जाने की बात सामने आई है। सीसीटीवी फुटेज और आसपास के लोगों से पूछताछ के आधार पर बदमाशों की पहचान की जा रही है। जल्द ही मामले का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। - मनीष कुमार शांडिल्य, डीसीपी नगर
25 करोड़ से तैयार मातृ-शिशु विभाग शुरू होने की जगी आस


*20-21 अप्रैल को न‌ई दिल्ली में स्वास्थ्य शिक्षा की बैठक में मिल सकती है हरी झंडी*


रिपोर्ट,-‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही ।‌महाराजा बलवंत सिंह राजकीय अस्पताल परिसर में कोविड काल से बनकर तैयार 100 बेड के मातृ-शिशु विंग शीघ्र ही शुभारंभ हो जाने की उम्मीद जग गई है। साल 2018 मे यह अस्पताल बनकर तैयार हो गया था। अस्पताल समूह द्वारा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर इसका संचालन होना है। लगभग आठ वर्ष से एक न एक बाधा के चलते अब तक इसका शुभारंभ नहीं हो सका है। हलांकि अब आगामी 20 अप्रैल को नई दिल्ली में होने वाली स्वास्थ्य विभाग की बैठक में इसके संचालन को हरी झंडी मिल सकती है। लगभग 25 करोड़ की लागत से बनकर तैयार इस अस्पताल के परिसर को कोविड महामारी के समय कोविड हास्पिटल के रूप में इस्तेमाल किया गया था।
कोविड बीतने के बाद हेरिटेज समूह के अधिकारियों ने कई बार इसका निरीक्षण किया और बार-बार कमियां निकालीं। जिन्हें दुरूस्त किया गया। लगभग एक साल पहले अस्पताल को संचालन के लिए हेरिटेज समूह को सौंपा जा चुका है।
जहां हेरिटेज समूह ने अस्पताल का साईन बोर्ड लगाकर डाक्टरों, स्टाफ आदि की नियुक्ति कर अपना पूरा सेटअप तक तैयार कर लिया है। अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार तभी से यहां अस्पताल के लिए आवश्यक विभिन्न उपकरण भी स्थापित किए जा चुके हैं।
महिलाओं और शिशुओं के लिए बेहद लाभकारी माने जा रहे इस अस्पताल का संचालन शुरू कराने के लिए भदोही विधायक जाहिद बेग के अलावा मड़ियाहूं विधायक डॉ. आरके पटेल भी से प्रयास कर चुके हैं, लेकिन फिर भी कोई नतीजा नहीं निकल सका है।
अब माना जा रहा है कि 20-21 अप्रैल को नई दिल्ली में राज्य और केंद्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों की बैठक में अन्य मामलों के अलावा इस अस्पताल के संचालन पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। जिसमें अस्पताल प्रबंधन को पूरी आशा है कि इसके संचालन को हरी झंडी मिल सकती है।


अस्पताल का पूरा सेट‌अप तैयार है। आगामी बैठक में अस्पताल के संचालक के लिए अनुमति मिल सकती है। अगर अनुमति मिली तो हमारी ओर से पूरी तैयारी है।

डॉ आरके सिंह चीफ आपरेटिंग आफिसर
सुल्तानपुर में शराब की दुकान को लेकर व्यापारियों ने उठाई आवाज, डीएम से की कार्रवाई की मांग
सुल्तानपुर में गोराबारिक मोहल्ले में एक शराब की दुकान को लेकर स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, उत्तर प्रदेश के बैनर तले जिला प्रशासन को एक शिकायत पत्र सौंपा गया है, जिसमें दुकान के संचालन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

शिकायत के अनुसार, गोराबारिक क्षेत्र में स्थित कंपोजिट मदिरा की दुकान पर शराब खरीदने आने वाले लोग अक्सर वहीं खड़े होकर शराब पीते हैं। इससे आसपास का माहौल बिगड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नशे में धुत लोग गाली-गलौज करते हैं और कई बार अशोभनीय हरकतें भी करते हैं, जिससे खासकर महिलाओं को काफी असहजता का सामना करना पड़ रहा है।

व्यापारियों ने यह भी बताया कि दुकान के पास ही अस्पताल, मंदिर और मस्जिद जैसे महत्वपूर्ण स्थल मौजूद हैं। इसके बावजूद दुकान के बाहर ही शराब पिलाने की सुविधा दी जा रही है, जिससे धार्मिक और सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। साथ ही, ग्राहक अपनी गाड़ियां सड़कों पर खड़ी कर देते हैं, जिससे यातायात में बाधा उत्पन्न हो रही है।

शिकायत में यह भी आरोप है कि दुकान के सेल्समैन द्वारा ग्राहकों को पानी, गिलास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे वे वहीं बैठकर शराब पीते हैं। विरोध करने पर दुकानदार और उसके कर्मचारी अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी देते हैं।

उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दुकान के लाइसेंस की जांच की जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही दुकान के बाहर शराब पीने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग भी की गई है।

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही इस समस्या का समाधान करेगा और क्षेत्र में शांति एवं व्यवस्था बहाल होगी।
नालंदा की घटना पर उबाल: गया में प्रजापति समाज की आपात बैठक, दोषियों को फांसी देने की मांग

गया: बिहार कुम्हार प्रजापति समन्वय समिति, जिला शाखा गया की ओर से गुरुवार को आज प्रजापति धर्मशाला, दांडी बाग में कोर कमेटी की एक अति आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष कृष्ण कुमार अजय ने की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नालंदा जिले के नूरसराय प्रखंड अंतर्गत अजयपुर गांव में प्रजापति समाज की एक महिला के साथ सरेआम सड़क पर हुई कथित सामूहिक दुष्कर्म की वीभत्स घटना पर चर्चा करना और आगे की रणनीति तय करना था।

बैठक के दौरान उपस्थित सभी सदस्यों ने इस जघन्य घटना की कड़ी निंदा की और इसे मानवता को शर्मसार करने वाला कृत्य बताया। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करती हैं, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। समिति के सदस्यों ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाना चाहिए।

समिति ने सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया कि घटना में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल चलाया जाए और उन्हें अविलंब कठोरतम दंड, विशेष रूप से फांसी की सजा दी जाए।

सदस्यों का कहना था कि जब तक अपराधियों को सख्त सजा नहीं मिलेगी, तब तक इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा। इसके साथ ही समिति ने निर्णय लिया कि इस मुद्दे को लेकर जनस्तर पर भी आवाज उठाई जाएगी और आवश्यक होने पर आंदोलनात्मक कदम भी उठाए जाएंगे। इसी क्रम में आगामी 12 अप्रैल 2026 को गया जिला कार्यकारिणी की एक विशेष बैठक बुलाने की घोषणा की गई है, जिसमें इस घटना की विस्तृत समीक्षा कर आगे की रणनीति और कार्रवाई तय की जाएगी।

बैठक में जिला सचिव विनोद कुमार, संरक्षक द्वारका प्रजापति, पूर्व अध्यक्ष नंदलाल प्रजापति, जिला उपाध्यक्ष बाल अमृत प्रसाद, कोषाध्यक्ष मोहन प्रजापति सहित कई प्रमुख पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। इसके अलावा ज्ञान दत्त प्रजापति, विष्णु कुमार, बिजेंद्र कुमार, प्रभाकर, राजदेव पंडित, विनोद कुमार पंडित, राजेंद्र पंडित, एस.के. सुमन, रामविलास पंडित, रविंद्र प्रजापति और नागेश्वर प्रजापति समेत अन्य गणमान्य लोगों ने भी बैठक में भाग लिया।

‘माय मुंबई’ प्रदर्शनी में दिखी बेघर नागरिकों द्वारा खींची अद्वितीय कलाकृतियां
मुंबई : तेज़ रफ्तार और भागदौड़ भरी मुंबई में कई ऐसे दृश्य होते हैं, जो अक्सर हमारी नजरों से छूट जाते हैं। इन्हीं “अनदेखी और अलग” तस्वीरों को ‘माय मुंबई’ छायाचित्र प्रदर्शनी ने सामने लाने का कार्य किया। खास बात यह रही कि ये सभी तस्वीरें उन बेघर नागरिकों द्वारा खींची गई थीं, जिन्होंने कभी कैमरा तक नहीं पकड़ा था। इसके बावजूद उनकी नजरों से कैद हुए ये छायाचित्र अद्वितीय और भावनात्मक अभिव्यक्ति 8का सशक्त माध्यम बनकर सामने आए, जिनका सभी ने दिल से सराहना की।३५ बेघर लोगों ने Fujifilm Quicksnap डिस्पोज़ेबल कैमरों का उपयोग करके कुल ९४५ तस्वीरें खींचीं। मुंबई स्थित पहचान संस्था द्वारा आयोजित यह विशेष प्रदर्शनी मुंबई प्रेस क्लब में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस अनोखे प्रोजेक्ट के तहत बेघर नागरिकों ने स्वयं मुंबई के विभिन्न पहलुओं को अपने कैमरे में कैद किया, जिससे शहर को देखने का एक नया और संवेदनशील दृष्टिकोण सामने आया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं राज्य स्तरीय आश्रय निगरानी समिति के अध्यक्ष उज्ज्वल उके ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने अपने छात्र जीवन के फोटोग्राफी अनुभव साझा करते हुए कहा कि बेघर नागरिकों द्वारा तस्वीरों के माध्यम से अपनी कहानी कहना अत्यंत प्रेरणादायक है।कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली और भाजपा प्रवक्ता संजय ठाकूर प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने पहचान संस्था के सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि बेघर लोगों के लिए आश्रय और उनके विचारों को मंच देना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। संस्था के संस्थापक-संचालक बृजेश आर्य ने प्रोजेक्ट के पीछे की प्रेरणा साझा करते हुए पिछले दो वर्षों में आयोजित सफल प्रदर्शनों का उल्लेख किया। कार्यक्रम में पूर्व मुंबई विश्वविद्यालय कुलगुरु प्रो. भालचंद्र मुणगेकर, पूर्व उपमहापौर अरुण देव, अमरजीत मिश्रा, एडवोकेट संतोष पांडे, उदयप्रताप सिंह, सुमिति सिंह, रवि नायर, डॉ. सुरैना मल्होत्रा, भावना जैन, निजामुद्दीन राईन, प्रमिला शर्मा, डॉ. दीपनारायण शुक्ला, सोनल खानोलकर, डॉ. धीरज सिंह, राजेंद्र आकेलकर, रौनक कुकड़े, विजय सिंह, इंद्रजीत सिंह, जमीर काज़ी, भगवती मिश्रा, अंकित मिश्रा और डिंपल छेड़ा सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। पहचान फाउंडेशन की टीम—सुभाष, रेचेल, समीर और सार्थक—के प्रयासों की भी सभी ने सराहना की। विशेष रूप से, प्रदर्शनी में शामिल बेघर छायाकारों ने इस पहल को केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपनी पहचान, भावनाओं और संघर्षों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम बना दिया।
‘माय मुंबई’ प्रदर्शनी ने यह सिद्ध कर दिया कि कला किसी साधन की मोहताज नहीं होती, बल्कि संवेदनशील दृष्टि और अनुभव ही उसे असाधारण बनाते हैं।
बदलापुर में KDR फाउंडेशन द्वारा आयोजित निशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर संपन्न
जौनपुर। सेवा सबसे बड़ा धर्म है।  निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करना, मानवता की सेवा करना ही ईश्वर की सच्ची पूजा है। जरूरतमंदों, माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा से न केवल आत्मा को संतोष मिलता है, बल्कि समाज में प्रेम और सद्भाव भी बढ़ता है। केवला देवी रामबहाल फाउंडेशन एक ऐसी सामाजिक संस्था है जो पिछले कई वर्षों से ग्रामीण भागों में लगातार जन सेवा का पुनीत काम कर रही है। विशेषकर जरूरतमंद एवं गरीब लोगों के निशुल्क नेत्र परीक्षण, मोतियाबिंद जांच तथा चयनित मरीजों के लिए निशुल्क लेंस प्रत्यारोपण सुविधा की दिशा में यह संस्था अब तक हजारों मरीजों के अंधेरे जीवन को उजालों में बदल चुकी है।संस्था द्वारा 9 अप्रैल को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक, जनपद के बदलापुर तहसील अंतर्गत स्थित कठार गांव के केडीआर हाउस में निशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें करीब 100 लोगों ने लाभ उठाया। आर जे शंकरा आंख अस्पताल की तरफ से डॉ मुमताज अली, डॉ प्रिया तथा डॉ. अर्चना की टीम ने लोगों का नेत्र परीक्षण किया। संस्था के अध्यक्ष विनोद आर सिंह ने बताया कि चयनित मरीजों को वाराणसी स्थित आरजे शंकरा आंख अस्पताल ले जाया जाएगा। बस सेवा भी पूरी तरह से निशुल्क होगी। मरीजों के उपचार एवं भोजन की व्यवस्था अस्पताल द्वारा निशुल्क किया गया है। शिविर में आए अनेक लोगों ने बताया कि पिछले अनेक वर्षों से संस्था द्वारा सुंदर तरीके से कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिससे क्षेत्रवासियों के साथ-साथ दूर के लोगों को भी लाभ मिल रहा है। शिविर में आयोजक के रूप में उपस्थित ठाकुर अमरधारी सिंह, अशोक सिंह, विनय सिंह, सौरभ सिंह, विकास सिंह तथा उनके सहयोगियों त्रिभुवन सिंह, शिवनारायण विश्वकर्मा  अंकुर सिंह, सुरेंद्र दुबे, विपिन मिश्रा, आजाद पांडे, उत्तम दुबे आदि ने शिविर में आए लोगों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा।
मेहनत को मिला इंजन—मेधावी छात्रों को स्कूटी, लैपटॉप और साइकिल, लालापुर बना शिक्षा का उत्सव स्थल
इनाम नहीं, इरादों को मिली उड़ान गांव की प्रतिभाओं ने रचा नया इतिहास, तालियों से गूंजा परिसर



विश्वनाथ प्रताप सिंह


प्रयागराज,यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत लालापुर में स्थित पंडित विष्णु राम तिवारी इंटर कॉलेज में रविवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने ग्रामीण शिक्षा के परिदृश्य को नई दिशा दे दी। राष्ट्र सेवा संस्थान के अध्यक्ष रूपेश त्रिपाठी (भार्गव), निवासी ग्राम सभा चकशिवचेर, के सौजन्य से आयोजित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता और उसके भव्य प्रतिभा सम्मान समारोह ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया। यह प्रतियोगिता उनतीस मार्च, रविवार को आयोजित की गई थी, जिसका परिणाम पाँच अप्रैल, रविवार को दोपहर एक बजे से शाम सात बजे तक घोषित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों की प्रतिभा को पहचानना, उन्हें प्रोत्साहित करना और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित करना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रेमशंकर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रतिभाओं को सम्मानित करना न केवल उनके परिश्रम की सराहना है, बल्कि यह अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का दीप भी जलाता है। प्रतियोगिता में कक्षा नौ से बारह तक के विद्यार्थियों के लिए प्रथम स्थान पर इलेक्ट्रिक स्कूटी, द्वितीय स्थान पर लैपटॉप तथा तृतीय स्थान पर सीलिंग फैन एवं कुर्सी -मेज प्रदान किए गए। वहीं कक्षा चार से पाँच तक के विद्यार्थियों के लिए प्रथम स्थान पर रेंजर साइकिल, द्वितीय स्थान पर कुर्सी-मेज और तृतीय स्थान पर स्कूल बैग व टेबल लैंप देकर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में विजेताओं को जब मंच पर बुलाकर स्कूटी और साइकिल सौंपी गई, तो तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंज उठा। यह दृश्य न केवल छात्रों के लिए गर्व का क्षण था, बल्कि अभिभावकों के लिए भी भावुक और प्रेरणादायक पल साबित हुआ। मुख्य अतिथियों में ग्राम प्रधान शंकर लाल पांडेय, सुप्रसिद्ध जादूगर ज्ञानेंद्र भार्गव, आचार्य हरिकृष्ण शुक्ला, विद्यालय के प्रबंधक सुरेश त्रिपाठी, नरेंद्र त्रिपाठी, जय सिंह पटेल (राष्ट्र सेवा ट्रस्ट), होरीलाल केसरवानी, कमलेश त्रिपाठी, अंबिका पांडेय, पुष्पा श्रीवास्तव और प्रकाश शुक्ला उर्फ प्रचंड शुक्ला सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें अनुशासन, निरंतर परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश दिया। समारोह में समाजसेवियों और अभिभावकों की भी भारी उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई। वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में शिक्षा ही वह शक्ति है, जो किसी भी साधारण व्यक्ति को असाधारण ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। कार्यक्रम में मनोरंजन का भी विशेष रंग देखने को मिला। प्रसिद्ध जादूगर ज्ञानेंद्र भार्गव और पुष्पा के जादुई करतबों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस प्रस्तुति का आनंद लेते नजर आया। विजेताओं में कक्षा पाँच की छात्रा दीक्षा तिवारी (पीवीआरटी विद्यालय) को रेंजर साइकिल, कक्षा सात के छात्र हिमांशु तिवारी (पीवीआर विद्यालय) को कुर्सी-मेज, कक्षा आठ की छात्रा सांवली (एसजीएम विद्यालय, प्रतापपुर) को रेंजर साइकिल प्रदान की गई। वहीं कक्षा ग्यारह-बारह वर्ग में आराध्या तिवारी (पीवीआरटी विद्यालय) को लैपटॉप, आस्था यादव (पीवीआरटी विद्यालय) को रेंजर साइकिल और आमिर (सरदार पटेल विद्यालय) को इलेक्ट्रिक स्कूटी देकर सम्मानित किया गया। अंत में विद्यालय प्रबंधन ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी इस तरह के आयोजन जारी रहेंगे, ताकि ग्रामीण अंचल की प्रतिभाओं को मंच मिलता रहे और वे सफलता की नई ऊंचाइयों को छू सकें। यह आयोजन सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि गांव की नई सोच और शिक्षा के प्रति जागरूकता का प्रतीक बनकर उभरा जहां इनाम के साथ-साथ सपनों को भी पंख मिले।
ईरान-अमेरिका सीजफायर में पाकिस्तान मध्यस्थ या मोहरा? जानें क्यों उठ रहे सवाल

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अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर हो गया है। इसमें पाकिस्तान की अहम भूमिका सामने आई है, जिसे खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है। लेकिन पाकिस्तान यहां भी अपनी नापाक हरकत से बाज नहीं आया है। ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर को लेकर पाकिस्तान खुद को शांति दूत के रूप में पेश कर रहा है। शांति वार्ता की मेजबानी कर वह अपनी छाती ठोक रहा है। लेकिन, सच्चाई कुछ अलग है।

पाक मात्र एक मैसेंजर

ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक असल में व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान को दबाव डालकर इस्तेमाल किया। इस्लामाबाद कोई न्यूट्रल ब्रोकर नहीं था। वह सिर्फ अमेरिका का सुविधाजनक मैसेंजर बनकर रह गया। रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका ने पाकिस्तान पर जोर डाला कि वह वाशिंगटन का प्रस्ताव तेहरान तक पहुंचाए। पाकिस्तान को सक्रिय भूमिका नहीं दी गई, बल्कि सिर्फ एक चैनल बनाया गया।

यूएस ने पाकिस्तान को ही क्यों चुना?

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका को लगा कि ईरान मुस्लिम पड़ोसी देश के जरिए आने वाले ऑफर को ज्यादा आसानी से मान लेगा। यही वजह थी कि पाकिस्तान को चुना गया।

इजरायल के राजदूत ने भी उठाया सवाल

अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर पर पाकिस्तान खुद की अपनी पीठ थपथपा रहा है। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने भी उसकी मध्यस्थ की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। इजरायली राजदूत रूवेन ने अमेरिका-ईरान के बीच चल रही सीजफायर की बातचीत में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर संदेह जताया है। उन्होने कहा, इजरायल इस्लामाबाद को एक "विश्वसनीय पक्ष" के रूप में नहीं देखता है। रूवेन अजार ने कहा, 'हम पाकिस्तान को एक भरोसेमंद पक्ष के रूप में नहीं देखते हैं. मुझे लगता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने निजी कारणों से पाकिस्तान की मध्यस्थता का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है।

किसके इशारों पर नाच रहा पाक?

वहीं, 'फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज' (FDD) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और अमेरिकी ट्रेजरी के पूर्व एनालिस्ट जोनाथन श्नाइजर ने पाकिस्तान की इस भूमिका पर गंभीर संदेह जताते हुए पूछा है कि क्या पाकिस्तान वाकई शांति चाहता है या वह सिर्फ चीन के इशारों पर नाच रहा है? जोनाथन श्नाइजर का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति उसे स्वतंत्र फैसले लेने की अनुमति नहीं देती है। पाकिस्तान, चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) और 'डेब्ट-ट्रैप डिप्लोमेसी' में बुरी तरह फंसा हुआ है। श्नाइजर ने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान अमेरिका के साथ नए गठबंधन बनाकर अपनी स्थिति सुधारना चाहता है या वह केवल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के 'माउथपीस' के तौर पर काम कर रहा है।

मेरठ के सेंट्रल मार्केट में बड़ा प्रशासनिक एक्शन: 40 साल पुराना कारोबार ढहा, 44 भवन सील

मेरठ। मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में बुधवार का दिन इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बड़ी कार्रवाई करते हुए 44 व्यावसायिक भवनों को सील कर दिया। इस कार्रवाई से क्षेत्र में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बन गया।सुबह करीब 9 बजे से शुरू हुआ सीलिंग अभियान शाम 6 बजे तक चला। सात अलग-अलग टीमों ने एक साथ कार्रवाई की, जबकि पूरे इलाके को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बैरिकेड कर दिया गया था।

40 साल पुराना बाजार एक झटके में सील

सेंट्रल मार्केट में दशकों से चल रहे अस्पताल, स्कूल, कोचिंग सेंटर, रेस्टोरेंट और दर्जनों दुकानें इस कार्रवाई की जद में आ गईं। शुरुआती कार्रवाई में कई प्रतिष्ठानों पर सील लगाई गई, जिससे व्यापारियों में हड़कंप मच गया।एमपीजीएस गर्ल्स कॉलेज से शुरू हुई कार्रवाई धीरे-धीरे पूरे मार्केट में फैल गई। कुछ ही घंटों में अस्पतालों, क्लीनिकों, रेस्टोरेंट और कॉम्प्लेक्स पर ताले लग गए।

व्यापारियों और कर्मचारियों में कोहराम

सीलिंग की कार्रवाई के दौरान कई जगहों पर व्यापारी और कर्मचारी रोते-बिलखते नजर आए। लोग अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाते रहे, लेकिन कार्रवाई जारी रही।कई व्यापारियों ने कहा कि वे 20 से 30 साल से यहां कारोबार कर रहे थे और अब अचानक सबकुछ खत्म हो गया। इससे करीब 40 हजार लोगों की आजीविका प्रभावित होने का अनुमान है।

कोर्ट आदेश के तहत कार्रवाई

प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन को लेकर यह कदम उठाया गया है।सीलिंग के दौरान कई कॉम्प्लेक्सों में व्यापारियों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस और नोकझोंक भी देखने को मिली। कुछ स्थानों पर तनाव इतना बढ़ गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।कुछ व्यापारियों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई में भेदभाव किया जा रहा है, हालांकि प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज किया।

स्कूल, अस्पताल और दुकानें भी बंद

इस अभियान में कई अस्पताल, स्कूल, बैंक्वेट हॉल और कॉम्प्लेक्स भी सील कर दिए गए। इससे न सिर्फ व्यापार प्रभावित हुआ बल्कि बड़ी संख्या में कर्मचारी बेरोजगारी की स्थिति में आ गए।कार्रवाई के बाद कई दुकानदारों और निवासियों ने इसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बताया। उनका कहना था कि वे वर्षों से यहां रह और काम कर रहे थे, लेकिन अब सबकुछ एक झटके में खत्म हो गया।सेंट्रल मार्केट में हुई यह कार्रवाई मेरठ के व्यापारिक इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक मानी जा रही है, जिसने हजारों परिवारों की आजीविका पर गहरा असर डाला है।
हजारीबाग यूथ विंग का 13 अप्रैल को भव्य रक्तदान शिविर, 500 यूनिट रक्त संग्रह का लक्ष्य

हजारीबाग यूथ विंग के तत्वावधान में 13 अप्रैल को लक्ष्मी सिनेमा हॉल के सभागार में सुबह 9 बजे से आयोजित होने वाले भव्य रक्तदान शिविर की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों तथा थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को जीवनदायिनी सहायता उपलब्ध कराना है।

युवाओं और समाजसेवियों की सक्रिय भागीदारी से इस अभियान को जनआंदोलन का रूप देने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। संस्था के संरक्षक चंद्रप्रकाश जैन और अध्यक्ष करण जायसवाल के नेतृत्व में उपाध्यक्ष विकास तिवारी और सचिव रितेश खंडेलवाल ने डीआईजी अंजनी झा को औपचारिक आमंत्रण पत्र सौंपा।

डीआईजी अंजनी झा ने इस पहल की सराहना करते हुए जिलेवासियों से अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में अस्पतालों में रक्त की जरूरत अक्सर होती है, वहीं थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए नियमित रक्त की आवश्यकता बनी रहती है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।

इस शिविर में 500 से अधिक यूनिट रक्त संग्रह करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। रक्तदाताओं के लिए प्राथमिक चिकित्सा, अल्पाहार और प्रमाणपत्र की व्यवस्था की गई है। साथ ही, सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रत्येक रक्तदाता को हेलमेट भेंट किया जाएगा।

रक्त संग्रह का कार्य रेड क्रॉस सोसाइटी और सदर अस्पताल की संयुक्त टीम द्वारा किया जाएगा, जबकि हजारीबाग पुलिस का भी विशेष सहयोग मिलेगा। हजारीबाग यूथ विंग द्वारा लगातार रक्तदान के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, ताकि रक्त की कमी से होने वाली समस्याओं को कम किया जा सके।

संस्था के संरक्षक चंद्रप्रकाश जैन ने कहा कि रक्तदान एक महान सेवा है, जो जरूरतमंदों को नया जीवन देती है और समाज में मानवता को मजबूत करती है। वहीं अध्यक्ष करण जायसवाल ने युवाओं से आगे आकर इस अभियान को सफल बनाने की अपील की।

प्रयागराज में प्रॉपर्टी डीलर की गोली मारकर हत्या
करेली में नकाबपोश बदमाशों ने वारदात कर फैलाई सनसनी
गमछे और मास्क से ढके थे चेहरे

परिजन बोले, किसी से कोई रंजिश नहीं...

पुलिस ने खंगाले 30 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे, दिखे आरोपी

करेली थाना क्षेत्र के गौसनगर स्थित बिस्मिल्ला चौराहे के पास बुधवार शाम प्रॉपर्टी डीलर मोहम्मद इरफान (47) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दो बाइक पर सवार चार नकाबपोश बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया। एक गोली मृतक के सीने के बाईं तरफ लगी। जमीन के विवाद में हत्या की आशंका है। करेली पुलिस एफआईआर दर्ज कर बदमाशों की पहचान करने में जुट गई है।

ऐनुद्दीनपुर में मोहम्मद इरफान अपनी पत्नी मंगरुल निशा के साथ रहते थे। उनके दो बेटे मोहम्मद आमिर व फैसल और दो बेटियां हैं। वह प्रॉपर्टी डीलर थे। बुधवार शाम घर से करीब 50 मीटर दूर इरफान एक दुकान पर चाय पी रहे थे। इसी दौरान शाम करीब 6:30 बजे दो बाइक पर सवार चार बदमाश आए और इरफान के सीने में गोली मारकर फरार हो गए।गोली लगते ही इरफान जमीन पर गिर गए। सूचना पर डीसीपी नगर मनीष शांडिल्य, एडीसीपी राजकुमार मीना समेत अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तत्काल इरफान को एसआरएन अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि दो बाइक पर सवार चार बदमाश मौके पर पहुंचे थे। चारों बदमाशों ने अपने चेहरे गमछे व मास्क से ढक रखे थे।

इनमें से एक बदमाश मोहम्मद इरफान के पास आया और उन्हें गोली मारकर अपने साथी के साथ बाइक पर बैठकर फरार हो गया। सरेआम गोली चलने से क्षेत्र में दहशत फैल गई।वारदात के बाद मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया। परिजन रोते-बिलखते एसआरएन अस्पताल पहुंचे। परिजन व रिश्तेदार रोते-बिलखते यही कह रहे थे कि इरफान की किसी से रंजिश नहीं थी। न जाने क्यों उन्हें मार दिया गया। उन्होंने पुलिस से आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की।  प्रॉपर्टी डीलर मोहम्मद इरफान की हत्या के मामले में पुलिस आरोपियों तक पहुंचने के लिए देर रात तक कैमरों को खंगालती रही। इस दौरान एक फुटेज में आरोपी दिखे भी, लेकिन उनकी स्पष्ट पहचान नहीं हो सकी है। बदमाशों की पहचान के लिए पुलिस ने आसपास के 30 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले हैं पर इनमें उनका चेहरा साफ नहीं है।

पुलिस के मुताबिक, नकाबपोश बदमाश वारदात को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गए। कई सीसीटीवी फुटेज में बाइक सवार संदिग्ध नजर आए हैं, लेकिन उनकी पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी है। घटनास्थल से लेकर आसपास के मुख्य मार्गों व चौराहों पर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली है। इसके अलावा, संदिग्धों के भागने के संभावित रास्तों की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों के साथ-साथ मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय कर दिया गया है। जल्द ही मामले का खुलासा कर दिया जाएगा। उधर, घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है। लोग सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंतित हैं, वहीं पुलिस ने गश्त बढ़ाकर स्थिति को नियंत्रित किया। डीसीपी ने बताया कि मामले के खुलासे के लिए तीन टीमें गठित की गई हैं। सर्विलांस सेल की भी मदद ली जा रही है।

प्रथम दृष्टया पुरानी रंजिश को लेकर इरफान को गोली मारे जाने की बात सामने आई है। सीसीटीवी फुटेज और आसपास के लोगों से पूछताछ के आधार पर बदमाशों की पहचान की जा रही है। जल्द ही मामले का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। - मनीष कुमार शांडिल्य, डीसीपी नगर
25 करोड़ से तैयार मातृ-शिशु विभाग शुरू होने की जगी आस


*20-21 अप्रैल को न‌ई दिल्ली में स्वास्थ्य शिक्षा की बैठक में मिल सकती है हरी झंडी*


रिपोर्ट,-‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही ।‌महाराजा बलवंत सिंह राजकीय अस्पताल परिसर में कोविड काल से बनकर तैयार 100 बेड के मातृ-शिशु विंग शीघ्र ही शुभारंभ हो जाने की उम्मीद जग गई है। साल 2018 मे यह अस्पताल बनकर तैयार हो गया था। अस्पताल समूह द्वारा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर इसका संचालन होना है। लगभग आठ वर्ष से एक न एक बाधा के चलते अब तक इसका शुभारंभ नहीं हो सका है। हलांकि अब आगामी 20 अप्रैल को नई दिल्ली में होने वाली स्वास्थ्य विभाग की बैठक में इसके संचालन को हरी झंडी मिल सकती है। लगभग 25 करोड़ की लागत से बनकर तैयार इस अस्पताल के परिसर को कोविड महामारी के समय कोविड हास्पिटल के रूप में इस्तेमाल किया गया था।
कोविड बीतने के बाद हेरिटेज समूह के अधिकारियों ने कई बार इसका निरीक्षण किया और बार-बार कमियां निकालीं। जिन्हें दुरूस्त किया गया। लगभग एक साल पहले अस्पताल को संचालन के लिए हेरिटेज समूह को सौंपा जा चुका है।
जहां हेरिटेज समूह ने अस्पताल का साईन बोर्ड लगाकर डाक्टरों, स्टाफ आदि की नियुक्ति कर अपना पूरा सेटअप तक तैयार कर लिया है। अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार तभी से यहां अस्पताल के लिए आवश्यक विभिन्न उपकरण भी स्थापित किए जा चुके हैं।
महिलाओं और शिशुओं के लिए बेहद लाभकारी माने जा रहे इस अस्पताल का संचालन शुरू कराने के लिए भदोही विधायक जाहिद बेग के अलावा मड़ियाहूं विधायक डॉ. आरके पटेल भी से प्रयास कर चुके हैं, लेकिन फिर भी कोई नतीजा नहीं निकल सका है।
अब माना जा रहा है कि 20-21 अप्रैल को नई दिल्ली में राज्य और केंद्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों की बैठक में अन्य मामलों के अलावा इस अस्पताल के संचालन पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। जिसमें अस्पताल प्रबंधन को पूरी आशा है कि इसके संचालन को हरी झंडी मिल सकती है।


अस्पताल का पूरा सेट‌अप तैयार है। आगामी बैठक में अस्पताल के संचालक के लिए अनुमति मिल सकती है। अगर अनुमति मिली तो हमारी ओर से पूरी तैयारी है।

डॉ आरके सिंह चीफ आपरेटिंग आफिसर
सुल्तानपुर में शराब की दुकान को लेकर व्यापारियों ने उठाई आवाज, डीएम से की कार्रवाई की मांग
सुल्तानपुर में गोराबारिक मोहल्ले में एक शराब की दुकान को लेकर स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, उत्तर प्रदेश के बैनर तले जिला प्रशासन को एक शिकायत पत्र सौंपा गया है, जिसमें दुकान के संचालन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

शिकायत के अनुसार, गोराबारिक क्षेत्र में स्थित कंपोजिट मदिरा की दुकान पर शराब खरीदने आने वाले लोग अक्सर वहीं खड़े होकर शराब पीते हैं। इससे आसपास का माहौल बिगड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नशे में धुत लोग गाली-गलौज करते हैं और कई बार अशोभनीय हरकतें भी करते हैं, जिससे खासकर महिलाओं को काफी असहजता का सामना करना पड़ रहा है।

व्यापारियों ने यह भी बताया कि दुकान के पास ही अस्पताल, मंदिर और मस्जिद जैसे महत्वपूर्ण स्थल मौजूद हैं। इसके बावजूद दुकान के बाहर ही शराब पिलाने की सुविधा दी जा रही है, जिससे धार्मिक और सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। साथ ही, ग्राहक अपनी गाड़ियां सड़कों पर खड़ी कर देते हैं, जिससे यातायात में बाधा उत्पन्न हो रही है।

शिकायत में यह भी आरोप है कि दुकान के सेल्समैन द्वारा ग्राहकों को पानी, गिलास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे वे वहीं बैठकर शराब पीते हैं। विरोध करने पर दुकानदार और उसके कर्मचारी अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी देते हैं।

उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दुकान के लाइसेंस की जांच की जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही दुकान के बाहर शराब पीने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग भी की गई है।

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही इस समस्या का समाधान करेगा और क्षेत्र में शांति एवं व्यवस्था बहाल होगी।
नालंदा की घटना पर उबाल: गया में प्रजापति समाज की आपात बैठक, दोषियों को फांसी देने की मांग

गया: बिहार कुम्हार प्रजापति समन्वय समिति, जिला शाखा गया की ओर से गुरुवार को आज प्रजापति धर्मशाला, दांडी बाग में कोर कमेटी की एक अति आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष कृष्ण कुमार अजय ने की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नालंदा जिले के नूरसराय प्रखंड अंतर्गत अजयपुर गांव में प्रजापति समाज की एक महिला के साथ सरेआम सड़क पर हुई कथित सामूहिक दुष्कर्म की वीभत्स घटना पर चर्चा करना और आगे की रणनीति तय करना था।

बैठक के दौरान उपस्थित सभी सदस्यों ने इस जघन्य घटना की कड़ी निंदा की और इसे मानवता को शर्मसार करने वाला कृत्य बताया। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करती हैं, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। समिति के सदस्यों ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाना चाहिए।

समिति ने सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया कि घटना में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल चलाया जाए और उन्हें अविलंब कठोरतम दंड, विशेष रूप से फांसी की सजा दी जाए।

सदस्यों का कहना था कि जब तक अपराधियों को सख्त सजा नहीं मिलेगी, तब तक इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा। इसके साथ ही समिति ने निर्णय लिया कि इस मुद्दे को लेकर जनस्तर पर भी आवाज उठाई जाएगी और आवश्यक होने पर आंदोलनात्मक कदम भी उठाए जाएंगे। इसी क्रम में आगामी 12 अप्रैल 2026 को गया जिला कार्यकारिणी की एक विशेष बैठक बुलाने की घोषणा की गई है, जिसमें इस घटना की विस्तृत समीक्षा कर आगे की रणनीति और कार्रवाई तय की जाएगी।

बैठक में जिला सचिव विनोद कुमार, संरक्षक द्वारका प्रजापति, पूर्व अध्यक्ष नंदलाल प्रजापति, जिला उपाध्यक्ष बाल अमृत प्रसाद, कोषाध्यक्ष मोहन प्रजापति सहित कई प्रमुख पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। इसके अलावा ज्ञान दत्त प्रजापति, विष्णु कुमार, बिजेंद्र कुमार, प्रभाकर, राजदेव पंडित, विनोद कुमार पंडित, राजेंद्र पंडित, एस.के. सुमन, रामविलास पंडित, रविंद्र प्रजापति और नागेश्वर प्रजापति समेत अन्य गणमान्य लोगों ने भी बैठक में भाग लिया।

‘माय मुंबई’ प्रदर्शनी में दिखी बेघर नागरिकों द्वारा खींची अद्वितीय कलाकृतियां
मुंबई : तेज़ रफ्तार और भागदौड़ भरी मुंबई में कई ऐसे दृश्य होते हैं, जो अक्सर हमारी नजरों से छूट जाते हैं। इन्हीं “अनदेखी और अलग” तस्वीरों को ‘माय मुंबई’ छायाचित्र प्रदर्शनी ने सामने लाने का कार्य किया। खास बात यह रही कि ये सभी तस्वीरें उन बेघर नागरिकों द्वारा खींची गई थीं, जिन्होंने कभी कैमरा तक नहीं पकड़ा था। इसके बावजूद उनकी नजरों से कैद हुए ये छायाचित्र अद्वितीय और भावनात्मक अभिव्यक्ति 8का सशक्त माध्यम बनकर सामने आए, जिनका सभी ने दिल से सराहना की।३५ बेघर लोगों ने Fujifilm Quicksnap डिस्पोज़ेबल कैमरों का उपयोग करके कुल ९४५ तस्वीरें खींचीं। मुंबई स्थित पहचान संस्था द्वारा आयोजित यह विशेष प्रदर्शनी मुंबई प्रेस क्लब में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस अनोखे प्रोजेक्ट के तहत बेघर नागरिकों ने स्वयं मुंबई के विभिन्न पहलुओं को अपने कैमरे में कैद किया, जिससे शहर को देखने का एक नया और संवेदनशील दृष्टिकोण सामने आया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं राज्य स्तरीय आश्रय निगरानी समिति के अध्यक्ष उज्ज्वल उके ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने अपने छात्र जीवन के फोटोग्राफी अनुभव साझा करते हुए कहा कि बेघर नागरिकों द्वारा तस्वीरों के माध्यम से अपनी कहानी कहना अत्यंत प्रेरणादायक है।कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली और भाजपा प्रवक्ता संजय ठाकूर प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने पहचान संस्था के सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि बेघर लोगों के लिए आश्रय और उनके विचारों को मंच देना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। संस्था के संस्थापक-संचालक बृजेश आर्य ने प्रोजेक्ट के पीछे की प्रेरणा साझा करते हुए पिछले दो वर्षों में आयोजित सफल प्रदर्शनों का उल्लेख किया। कार्यक्रम में पूर्व मुंबई विश्वविद्यालय कुलगुरु प्रो. भालचंद्र मुणगेकर, पूर्व उपमहापौर अरुण देव, अमरजीत मिश्रा, एडवोकेट संतोष पांडे, उदयप्रताप सिंह, सुमिति सिंह, रवि नायर, डॉ. सुरैना मल्होत्रा, भावना जैन, निजामुद्दीन राईन, प्रमिला शर्मा, डॉ. दीपनारायण शुक्ला, सोनल खानोलकर, डॉ. धीरज सिंह, राजेंद्र आकेलकर, रौनक कुकड़े, विजय सिंह, इंद्रजीत सिंह, जमीर काज़ी, भगवती मिश्रा, अंकित मिश्रा और डिंपल छेड़ा सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। पहचान फाउंडेशन की टीम—सुभाष, रेचेल, समीर और सार्थक—के प्रयासों की भी सभी ने सराहना की। विशेष रूप से, प्रदर्शनी में शामिल बेघर छायाकारों ने इस पहल को केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपनी पहचान, भावनाओं और संघर्षों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम बना दिया।
‘माय मुंबई’ प्रदर्शनी ने यह सिद्ध कर दिया कि कला किसी साधन की मोहताज नहीं होती, बल्कि संवेदनशील दृष्टि और अनुभव ही उसे असाधारण बनाते हैं।
बदलापुर में KDR फाउंडेशन द्वारा आयोजित निशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर संपन्न
जौनपुर। सेवा सबसे बड़ा धर्म है।  निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करना, मानवता की सेवा करना ही ईश्वर की सच्ची पूजा है। जरूरतमंदों, माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा से न केवल आत्मा को संतोष मिलता है, बल्कि समाज में प्रेम और सद्भाव भी बढ़ता है। केवला देवी रामबहाल फाउंडेशन एक ऐसी सामाजिक संस्था है जो पिछले कई वर्षों से ग्रामीण भागों में लगातार जन सेवा का पुनीत काम कर रही है। विशेषकर जरूरतमंद एवं गरीब लोगों के निशुल्क नेत्र परीक्षण, मोतियाबिंद जांच तथा चयनित मरीजों के लिए निशुल्क लेंस प्रत्यारोपण सुविधा की दिशा में यह संस्था अब तक हजारों मरीजों के अंधेरे जीवन को उजालों में बदल चुकी है।संस्था द्वारा 9 अप्रैल को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक, जनपद के बदलापुर तहसील अंतर्गत स्थित कठार गांव के केडीआर हाउस में निशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें करीब 100 लोगों ने लाभ उठाया। आर जे शंकरा आंख अस्पताल की तरफ से डॉ मुमताज अली, डॉ प्रिया तथा डॉ. अर्चना की टीम ने लोगों का नेत्र परीक्षण किया। संस्था के अध्यक्ष विनोद आर सिंह ने बताया कि चयनित मरीजों को वाराणसी स्थित आरजे शंकरा आंख अस्पताल ले जाया जाएगा। बस सेवा भी पूरी तरह से निशुल्क होगी। मरीजों के उपचार एवं भोजन की व्यवस्था अस्पताल द्वारा निशुल्क किया गया है। शिविर में आए अनेक लोगों ने बताया कि पिछले अनेक वर्षों से संस्था द्वारा सुंदर तरीके से कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिससे क्षेत्रवासियों के साथ-साथ दूर के लोगों को भी लाभ मिल रहा है। शिविर में आयोजक के रूप में उपस्थित ठाकुर अमरधारी सिंह, अशोक सिंह, विनय सिंह, सौरभ सिंह, विकास सिंह तथा उनके सहयोगियों त्रिभुवन सिंह, शिवनारायण विश्वकर्मा  अंकुर सिंह, सुरेंद्र दुबे, विपिन मिश्रा, आजाद पांडे, उत्तम दुबे आदि ने शिविर में आए लोगों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा।
मेहनत को मिला इंजन—मेधावी छात्रों को स्कूटी, लैपटॉप और साइकिल, लालापुर बना शिक्षा का उत्सव स्थल
इनाम नहीं, इरादों को मिली उड़ान गांव की प्रतिभाओं ने रचा नया इतिहास, तालियों से गूंजा परिसर



विश्वनाथ प्रताप सिंह


प्रयागराज,यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत लालापुर में स्थित पंडित विष्णु राम तिवारी इंटर कॉलेज में रविवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने ग्रामीण शिक्षा के परिदृश्य को नई दिशा दे दी। राष्ट्र सेवा संस्थान के अध्यक्ष रूपेश त्रिपाठी (भार्गव), निवासी ग्राम सभा चकशिवचेर, के सौजन्य से आयोजित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता और उसके भव्य प्रतिभा सम्मान समारोह ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया। यह प्रतियोगिता उनतीस मार्च, रविवार को आयोजित की गई थी, जिसका परिणाम पाँच अप्रैल, रविवार को दोपहर एक बजे से शाम सात बजे तक घोषित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों की प्रतिभा को पहचानना, उन्हें प्रोत्साहित करना और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित करना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रेमशंकर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रतिभाओं को सम्मानित करना न केवल उनके परिश्रम की सराहना है, बल्कि यह अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का दीप भी जलाता है। प्रतियोगिता में कक्षा नौ से बारह तक के विद्यार्थियों के लिए प्रथम स्थान पर इलेक्ट्रिक स्कूटी, द्वितीय स्थान पर लैपटॉप तथा तृतीय स्थान पर सीलिंग फैन एवं कुर्सी -मेज प्रदान किए गए। वहीं कक्षा चार से पाँच तक के विद्यार्थियों के लिए प्रथम स्थान पर रेंजर साइकिल, द्वितीय स्थान पर कुर्सी-मेज और तृतीय स्थान पर स्कूल बैग व टेबल लैंप देकर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में विजेताओं को जब मंच पर बुलाकर स्कूटी और साइकिल सौंपी गई, तो तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंज उठा। यह दृश्य न केवल छात्रों के लिए गर्व का क्षण था, बल्कि अभिभावकों के लिए भी भावुक और प्रेरणादायक पल साबित हुआ। मुख्य अतिथियों में ग्राम प्रधान शंकर लाल पांडेय, सुप्रसिद्ध जादूगर ज्ञानेंद्र भार्गव, आचार्य हरिकृष्ण शुक्ला, विद्यालय के प्रबंधक सुरेश त्रिपाठी, नरेंद्र त्रिपाठी, जय सिंह पटेल (राष्ट्र सेवा ट्रस्ट), होरीलाल केसरवानी, कमलेश त्रिपाठी, अंबिका पांडेय, पुष्पा श्रीवास्तव और प्रकाश शुक्ला उर्फ प्रचंड शुक्ला सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें अनुशासन, निरंतर परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश दिया। समारोह में समाजसेवियों और अभिभावकों की भी भारी उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई। वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में शिक्षा ही वह शक्ति है, जो किसी भी साधारण व्यक्ति को असाधारण ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। कार्यक्रम में मनोरंजन का भी विशेष रंग देखने को मिला। प्रसिद्ध जादूगर ज्ञानेंद्र भार्गव और पुष्पा के जादुई करतबों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस प्रस्तुति का आनंद लेते नजर आया। विजेताओं में कक्षा पाँच की छात्रा दीक्षा तिवारी (पीवीआरटी विद्यालय) को रेंजर साइकिल, कक्षा सात के छात्र हिमांशु तिवारी (पीवीआर विद्यालय) को कुर्सी-मेज, कक्षा आठ की छात्रा सांवली (एसजीएम विद्यालय, प्रतापपुर) को रेंजर साइकिल प्रदान की गई। वहीं कक्षा ग्यारह-बारह वर्ग में आराध्या तिवारी (पीवीआरटी विद्यालय) को लैपटॉप, आस्था यादव (पीवीआरटी विद्यालय) को रेंजर साइकिल और आमिर (सरदार पटेल विद्यालय) को इलेक्ट्रिक स्कूटी देकर सम्मानित किया गया। अंत में विद्यालय प्रबंधन ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी इस तरह के आयोजन जारी रहेंगे, ताकि ग्रामीण अंचल की प्रतिभाओं को मंच मिलता रहे और वे सफलता की नई ऊंचाइयों को छू सकें। यह आयोजन सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि गांव की नई सोच और शिक्षा के प्रति जागरूकता का प्रतीक बनकर उभरा जहां इनाम के साथ-साथ सपनों को भी पंख मिले।
ईरान-अमेरिका सीजफायर में पाकिस्तान मध्यस्थ या मोहरा? जानें क्यों उठ रहे सवाल

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अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर हो गया है। इसमें पाकिस्तान की अहम भूमिका सामने आई है, जिसे खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है। लेकिन पाकिस्तान यहां भी अपनी नापाक हरकत से बाज नहीं आया है। ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर को लेकर पाकिस्तान खुद को शांति दूत के रूप में पेश कर रहा है। शांति वार्ता की मेजबानी कर वह अपनी छाती ठोक रहा है। लेकिन, सच्चाई कुछ अलग है।

पाक मात्र एक मैसेंजर

ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक असल में व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान को दबाव डालकर इस्तेमाल किया। इस्लामाबाद कोई न्यूट्रल ब्रोकर नहीं था। वह सिर्फ अमेरिका का सुविधाजनक मैसेंजर बनकर रह गया। रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका ने पाकिस्तान पर जोर डाला कि वह वाशिंगटन का प्रस्ताव तेहरान तक पहुंचाए। पाकिस्तान को सक्रिय भूमिका नहीं दी गई, बल्कि सिर्फ एक चैनल बनाया गया।

यूएस ने पाकिस्तान को ही क्यों चुना?

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका को लगा कि ईरान मुस्लिम पड़ोसी देश के जरिए आने वाले ऑफर को ज्यादा आसानी से मान लेगा। यही वजह थी कि पाकिस्तान को चुना गया।

इजरायल के राजदूत ने भी उठाया सवाल

अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर पर पाकिस्तान खुद की अपनी पीठ थपथपा रहा है। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने भी उसकी मध्यस्थ की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। इजरायली राजदूत रूवेन ने अमेरिका-ईरान के बीच चल रही सीजफायर की बातचीत में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर संदेह जताया है। उन्होने कहा, इजरायल इस्लामाबाद को एक "विश्वसनीय पक्ष" के रूप में नहीं देखता है। रूवेन अजार ने कहा, 'हम पाकिस्तान को एक भरोसेमंद पक्ष के रूप में नहीं देखते हैं. मुझे लगता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने निजी कारणों से पाकिस्तान की मध्यस्थता का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है।

किसके इशारों पर नाच रहा पाक?

वहीं, 'फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज' (FDD) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और अमेरिकी ट्रेजरी के पूर्व एनालिस्ट जोनाथन श्नाइजर ने पाकिस्तान की इस भूमिका पर गंभीर संदेह जताते हुए पूछा है कि क्या पाकिस्तान वाकई शांति चाहता है या वह सिर्फ चीन के इशारों पर नाच रहा है? जोनाथन श्नाइजर का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति उसे स्वतंत्र फैसले लेने की अनुमति नहीं देती है। पाकिस्तान, चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) और 'डेब्ट-ट्रैप डिप्लोमेसी' में बुरी तरह फंसा हुआ है। श्नाइजर ने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान अमेरिका के साथ नए गठबंधन बनाकर अपनी स्थिति सुधारना चाहता है या वह केवल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के 'माउथपीस' के तौर पर काम कर रहा है।

मेरठ के सेंट्रल मार्केट में बड़ा प्रशासनिक एक्शन: 40 साल पुराना कारोबार ढहा, 44 भवन सील

मेरठ। मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में बुधवार का दिन इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बड़ी कार्रवाई करते हुए 44 व्यावसायिक भवनों को सील कर दिया। इस कार्रवाई से क्षेत्र में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बन गया।सुबह करीब 9 बजे से शुरू हुआ सीलिंग अभियान शाम 6 बजे तक चला। सात अलग-अलग टीमों ने एक साथ कार्रवाई की, जबकि पूरे इलाके को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बैरिकेड कर दिया गया था।

40 साल पुराना बाजार एक झटके में सील

सेंट्रल मार्केट में दशकों से चल रहे अस्पताल, स्कूल, कोचिंग सेंटर, रेस्टोरेंट और दर्जनों दुकानें इस कार्रवाई की जद में आ गईं। शुरुआती कार्रवाई में कई प्रतिष्ठानों पर सील लगाई गई, जिससे व्यापारियों में हड़कंप मच गया।एमपीजीएस गर्ल्स कॉलेज से शुरू हुई कार्रवाई धीरे-धीरे पूरे मार्केट में फैल गई। कुछ ही घंटों में अस्पतालों, क्लीनिकों, रेस्टोरेंट और कॉम्प्लेक्स पर ताले लग गए।

व्यापारियों और कर्मचारियों में कोहराम

सीलिंग की कार्रवाई के दौरान कई जगहों पर व्यापारी और कर्मचारी रोते-बिलखते नजर आए। लोग अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाते रहे, लेकिन कार्रवाई जारी रही।कई व्यापारियों ने कहा कि वे 20 से 30 साल से यहां कारोबार कर रहे थे और अब अचानक सबकुछ खत्म हो गया। इससे करीब 40 हजार लोगों की आजीविका प्रभावित होने का अनुमान है।

कोर्ट आदेश के तहत कार्रवाई

प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन को लेकर यह कदम उठाया गया है।सीलिंग के दौरान कई कॉम्प्लेक्सों में व्यापारियों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस और नोकझोंक भी देखने को मिली। कुछ स्थानों पर तनाव इतना बढ़ गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।कुछ व्यापारियों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई में भेदभाव किया जा रहा है, हालांकि प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज किया।

स्कूल, अस्पताल और दुकानें भी बंद

इस अभियान में कई अस्पताल, स्कूल, बैंक्वेट हॉल और कॉम्प्लेक्स भी सील कर दिए गए। इससे न सिर्फ व्यापार प्रभावित हुआ बल्कि बड़ी संख्या में कर्मचारी बेरोजगारी की स्थिति में आ गए।कार्रवाई के बाद कई दुकानदारों और निवासियों ने इसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बताया। उनका कहना था कि वे वर्षों से यहां रह और काम कर रहे थे, लेकिन अब सबकुछ एक झटके में खत्म हो गया।सेंट्रल मार्केट में हुई यह कार्रवाई मेरठ के व्यापारिक इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक मानी जा रही है, जिसने हजारों परिवारों की आजीविका पर गहरा असर डाला है।