पूर्व रेलवे मंत्री और सीएम ममता के करीबी मुकुल रॉय का निधन, कहे जाते थे बंगाल के चाणक्य
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पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन हो गया है। मुकुल रॉय बीमार थे और उनका कोलकाता के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु रॉय ने अपने पिता के निधन की पुष्टि की है।
बेटे शुभ्रांशु रॉय ने बताया कि मुकुल रॉय ने रविवार रात करीब 1:30 बजे कोलकाता के अपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली। अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी। बताया जा रहा है कि मुकुल रॉय लंबे समय से कई तरह की बीमारियों की वजह से जूझ रहे थे।
कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से थे ग्रसित
मुकुल रॉय पिछले कुछ सालों से बीमार चल रहे थे। बेटे शुभ्रांशु ने कहा, वह कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। वे पार्किंसंस रोग और डिमेंशिया से पीड़ित थे। ब्रेन में हाइड्रोसेफलस की समस्या के कारण ब्रेन सर्जरी भी हुई थी। 2024 में भी कई बार अस्पताल में भर्ती हुए, जिसमें सिर में चोट और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं शामिल थीं। हाल ही में अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत क्रिटिकल बताई गई थी।
तृणमूल कांग्रेस का प्रमुख चेहरा
1998 में गठित टीएमसी के शुरुआती दौर से जुड़े रॉय को कभी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी सहयोगी माना जाता था। ममता बनर्जी की तरह ही उन्होंने भी अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बंगाल में यूथ कांग्रेस से की थी। तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद रॉय ने पार्टी संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया। समय के साथ वे दिल्ली की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे।
मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर
वर्ष 2006 में वह राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और 2009 से 2012 तक सदन में पार्टी के नेता रहे। यूपीए-2 सरकार के दौरान उन्होंने पहले शिपिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में काम किया और बाद में मार्च 2012 में पार्टी सहयोगी दिनेश त्रिवेदी की जगह रेल मंत्री का पद संभाला। हालांकि, मुकुल रॉय के टीएमसी के साथ रिश्ते बिगड़ गए। खासकर शारदा चिटफंड घोटाले जैसे मुद्दों के बाद वह टीएमसी से दूर हो गए। फरवरी 2015 में पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव पद से हटा दिया। सितंबर 2017 में मुकुल रॉय ने टीएमसी से इस्तीफा दे दिया।
2017 में बीजेपी का दामन थामा
नवंबर 2017 में रॉय बीजेपी में शामिल हो गए थे। रॉय ने जमीनी स्तर पर काम करके बीजेपी को राज्य में बेस बनाने में मदद की। उन्हें 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी की 18 सीटें जीतने का क्रेडिट दिया जाता है। उन्होंने बीजेपी को टीएमसी के कई बड़े नेताओं को अपने पाले में लाने में मदद की और 2021 के विधानसभा चुनावों में कृष्णानगर उत्तर से बीजेपी विधायक चुने गए। लेकिन जल्द ही, उन्होंने बीजेपी से दूरी बना ली। जून 2021 में वो तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। हालांकि, टीएमसी में वापस आने पर वह कद और समझ दोनों में पहले जैसे कभी नहीं रहे।
1 min ago
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