लखनऊ में सेफ्टी टैंक हादसा: जहरीली गैस से दो सफाईकर्मियों की मौत
* मुख्यमंत्री ने जताया शोक, जांच और मुआवजे के दिए निर्देश
लखनऊ। लखनऊ के माल थाना क्षेत्र स्थित नबी पनाह गांव में सेफ्टी टैंक की सफाई के दौरान बड़ा हादसा हो गया। टैंक की सफाई करने उतरे दो मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है।
मृतकों की पहचान रिंकू और राजेश के रूप में हुई है। दोनों की उम्र करीब 35 वर्ष बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार दोनों युवक सेफ्टी टैंक की सफाई के लिए अंदर उतरे थे, तभी जहरीली गैस की चपेट में आने से उनका दम घुट गया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया, जबकि अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
घटना का संज्ञान लेते हुए योगी आदित्यनाथ ने मृतक सफाईमित्रों के परिजनों के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने, उचित मुआवजा उपलब्ध कराने तथा पूरे हादसे की विस्तृत जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
योगी सरकार में कानून व्यवस्था मजबूत, दंगों और फिरौती पर लगी लगाम
* एनसीआरबी रिपोर्ट का दावा— 2023 और 2024 में फिरौती के लिए अपहरण की अपराध दर शून्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश, जिसे वर्ष 2017 से पहले ‘दंगा प्रदेश’ कहा जाता था, आज सख्त कानून व्यवस्था और जीरो टॉलरेंस नीति के चलते अपराध नियंत्रण के नए मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। राज्य सरकार के अनुसार योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ, जबकि वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में 25 हजार से अधिक दंगे दर्ज किए गए थे।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 19 दंगे और 33 अपहरण की घटनाएं सामने आती थीं। वहीं वर्तमान सरकार का दावा है कि कठोर कानून व्यवस्था और अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई के कारण दंगाइयों एवं माफियाओं के मंसूबे विफल हुए हैं।
एनसीआरबी की वर्ष 2024 रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में फिरौती के लिए अपहरण की अपराध दर शून्य दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक नगालैंड में यह दर 0.7, मणिपुर में 0.6, अरुणाचल प्रदेश में 0.3 और मेघालय में 0.2 रही, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा शून्य रहा। वर्ष 2023 में भी प्रदेश में इस श्रेणी में अपराध दर शून्य दर्ज की गई थी।
सरकार का कहना है कि अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति, सक्रिय पुलिसिंग, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और माफियाओं की संपत्तियों की जब्ती जैसे कदमों का असर अब धरातल पर दिखाई दे रहा है। संगठित अपराधों पर आर्थिक कार्रवाई ने अपराधियों की कमर तोड़ने का काम किया है।
प्रदेश सरकार के अनुसार पिछले नौ वर्षों में कुछ अराजक तत्वों द्वारा दंगा भड़काने की कोशिश जरूर की गई, लेकिन समय रहते पुलिस और प्रशासन ने सख्त कार्रवाई कर हालात को नियंत्रित कर लिया। एनसीआरबी की 2024 रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में बलवा की अपराध दर 1.1 दर्ज की गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत 2.2 रहा। रिपोर्ट के अनुसार मणिपुर में यह दर 8.4, महाराष्ट्र में 6.4, कर्नाटक में 5.4, हरियाणा में 5.3 और हिमाचल प्रदेश में 4.7 दर्ज की गई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सार्वजनिक मंचों से अक्सर कहते हैं— “नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा।” सरकार का दावा है कि यही सख्त नीति प्रदेश में कानून व्यवस्था सुधारने का आधार बनी है।
सेवा और करूणा का पर्याय है रेडक्रॉस, साई कॉलेज में मना विश्व रेडक्रॉस दिवस

अम्बिकापुर- सेवा का प्रतिफल हमेशा कल्याणकारी होता है। रेडक्रॉस सेवा और करूणा का पर्याय है। यह बातें श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय में रेडक्रॉस दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने कही। उन्होंंने सेवा और चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग और समर्पण के महत्व को अवगत कराते हुए कहा कि पेनसिलीन का आविष्कार की कहानी से अवगत कराया। सर अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने १९२८ में लंदन के सेंट मैरी अस्पताल में अथक परिश्रम से किया था। यह दुनिया की पहली एंटीबायोटिक दवा है, जिसकी खोज एक फंगस (पेनिसिलियम नोटेटम) से अचानक हुई जब उन्होंने देखा कि फंगस ने बैक्टीरिया के विकास को रोक दिया। डॉ. श्रीवास्तव ने यूथ रेडक्रॉस के विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि इंटरनेशनल रेड क्रॉस सोसाइटी की स्थापना १७ फरवरी १८६३ को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में हेनरी ड्यूनेंट द्वारा की गई थी। ८ मई को विश्व रेडक्रॉस दिवस मनाया जाता है।

इस अवसर यूथ रेडक्रॉस प्रभारी डॉ. एलपी गुप्ता ने सभी कार्यकर्ताओं को कर्तव्य एवं दायित्व के प्रति प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम प्रभारी देवेन्द्र दास सोनवानी ने किया। इस अवसर पर स्वीप नोडल अधिकारी डॉ. अजय कुमार तिवारी, सहायक प्राध्यापक सोनाली गोस्वामी तथा चांदनी व्यापारी उपस्थित रहीं।

सौ शय्या, जिला अस्पताल में नहीं है ईएनटी के डॉक्टर, मरीज परेशांन

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव


भदोही। करीब दो से ढाई लाख लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने वाले जिला चिकित्सालय और सरपतहां के सौ शय्या अस्पताल में एक भी ईएनटी के डॉक्टर नहीं हैं। मरीजों को बेहतर उपचार के लिए भदोही के महाराजा बलवंत सिंह राजकीय अस्पताल या निजी अस्पताल का रूख करना पड़ता है। जिले में कुल चार पद सृजित है। जिले के 29 सरकारी अस्पतालों में रोजाना 5000 से 5500 की ओपीडी होती है। इसमें से करीब 100 से 125 मरीज ईएनटी के होते हैं। ज्यादातर मरीज जिला अस्पताल आते हैं। यहां 18 महीने पहले ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. दिप्ती पांडेय की तैनाती हुई थी, लेकिन उनका तबादला भदोही एमबीएस हो गया। जिससे अस्पताल में पद खाली है। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को वापस लौटना पड़ता है या किसी अन्य डॉक्टरों से दवा लेना पड़ता है। सौ शय्या अस्पताल में दो पद सृजित है। यहां तीन साल से नाक, कान, गला के डॉक्टर नहीं है। ऐसे में अस्पताल आने वाले मरीजों को उपचार कराने में परेशानी होती है। उन्हें विशेषज्ञ के बजाए अन्य डॉक्टरों से दवा लेना पड़ता है। बेहतर उपचार के लिए निजी अस्पताल या महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय का रूख करना पड़ता है। भदोही एबीएस में एक डॉक्टर की तैनाती है।



भदोही एमबीएस में एक ईएनटी सर्जन की तैनाती है। जिला अस्पताल,सौ शैय्या में तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र को लिखा दिया गया है।

डॉ संतोष कुमार चक

सीएमओ भदोही
भाजपा कार्यकर्ताओं के 'लहू' से सींचा गया है बंगाल का कमल : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत को चुनाव आयोग की मेहरबानी बतलाने वाले दलों को अपनी तथ्यपरक उदाहरणों के साथ आईना दिखाने का काम किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स पर लिखा है कि चुनाव आयोग की मेहरबानी से नहीं, बल्कि हमारे कार्यकर्ताओं के 'लहू' से बंगाल का कमल सींचा गया है।

श्री मरांडी ने कहा कि कुछ लोग आज भी इस मुगालते में जी रहे हैं कि बंगाल में भाजपा की सत्ता चुनाव आयोग का 'गिफ्ट' है। जिन्हें लगता है कि EVM की मशीनें, केंद्रीय बल या दिल्ली का दखल भाजपा को सत्ता की दहलीज तक लाया है, वे शायद बंगाल की तासीर से वाकिफ नहीं हैं। सुन लीजिये! बंगाल में कमल बैलेट बॉक्स से पहले कार्यकर्ताओं के खून से खिला है।

श्री मरांडी ने अपने पोस्ट में कुल चार पार्ट में "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने, चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी, 15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर एवं यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है!" पर क्रमवार शीर्षक देकर पार्टी के उतार चढ़ाव वाले सियासी सफरनामे, भाजपा कार्यकर्ताओं की शहादत, सत्तारूढ़ दल वामपंथियों और तृणमूल कांग्रेस के जुल्म को विस्तार से व्याख्या की है।

श्री मरांडी ने "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने" वाले पहले शीर्षक में लिखा है कि 2011 से 2025 तक का सफर कोई राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक महायज्ञ था जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी है। यहाँ लोकतंत्र की बात करने वालों को पेड़ों से लटकाया गया। किसी को बम से उड़ाया गया, तो किसी का शव क्षत-विक्षत हालत में तालाबों में मिला। नंदीग्राम से बीरभूम और कूचबिहार से बशीरहाट तक—सिर्फ भाजपा को वोट देने के अपराध में पूरे-पूरे गाँव खाक कर दिए गए। उन्होंने अतीत के पन्नों को पलटने की सलाह देते हुए कहा कि वह मंजर याद कीजिए, जब महिलाओं की अस्मत को राजनीतिक हथियार बनाया गया ताकि दहशत पैदा की जा सके। यह सत्ता किसी थाली में परोसकर नहीं मिली, इसके पीछे हाई कोर्ट की फटकार और CBI जांचों के वो पन्ने हैं जो TMC के 'खूनी खेल' की गवाही देते हैं।

श्री मरांडी ने अपने दूसरे शीर्षक "चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी" में लिखा है कि सोचिए! जिस बूथ अध्यक्ष की लाश सुबह पेड़ पर लटकी मिलती है, दोपहर को उसका बेटा कलेजे पर पत्थर रखकर उसी बूथ पर पोलिंग एजेंट बनकर खड़ा हो जाता है— यह हिम्मत EVM से नहीं, स्वाभिमान से आती है। जिस माँ का घर जला दिया गया, वह अगले दिन फिर हाथ में भगवा झंडा थामे गलियों में ललकारती है— यह हौसला चुनाव आयोग नहीं देता। वामपंथियों के 34 साल के दमन, तानाशाही और दीदी के 15 साल के खौफनाक, रक्तरंजित दहशतगर्दों की राजनीति को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अपनी छाती पर झेला है। फर्जी मुकदमे, जेल की सलाखें और सामाजिक बहिष्कार भी उनके कदम को नहीं डगमगा सके।

श्री मरांडी ने तीसरे शीर्षक "15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर" में लिखा है कि यह ग्राफ किसी आंकड़ों का खेल नहीं, यह उन माँओं के आँसुओं का हिसाब है। 2011 में सिर्फ 1 विधायक जीतने पर मजाक उड़ाया गया। 2016 में 3 विधायक जीते, यह संघर्ष की शुरुआत थी। 2019 में 18 सांसद जीते, ममता के गढ़ में सेंध लग चुकी थी। 2021 में 77 विधायक जीतकर पार्टी मुख्य विपक्ष की ताकत बनी।

2024 में 12 सीटें मिली, भयंकर दमन के बावजूद टिके रहे। आज 2026 में पूर्ण बहुमत की प्रचंड विजय। यह जीत उन बेटों के नाम है जिनकी 'तेरहवीं' पर उनकी माताओं ने विलाप नहीं किया, बल्कि कसम खाई थी कि जब तक सत्ता परिवर्तन नहीं होगा, लड़ाई जारी रहेगी। यह उन रिलीफ कैंपों में सड़ रहे परिवारों के सब्र की जीत है।

अपने चौथे शीर्षक यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है! में श्री मरांडी ने लिखा है कि जो लोग आज इसे "चुनाव आयोग की सेटिंग" कहते हैं, वे एक बार उन गुमनाम कब्रों और श्मशानों में जाकर देखें जहाँ भाजपा का झंडा ओढ़े हमारे भाई सो रहे हैं। उन जले हुए घरों की राख को हाथ लगाकर देखें, जहाँ आज भी चीखें सुनाई देती हैं। बंगाल में सत्ता किसी मशीन ने नहीं दी है। यहाँ हर एक वोट के पीछे एक शहादत छिपी है। 15 साल तक खून-पसीना बहाने के बाद, अपनों की लाशें ढोने के बाद और हर जुल्म सहने के बाद आज बंगाल की गलियों से यह हुंकार निकली है। इसे 'मेहरबानी' कहना उन शहीदों का अपमान है जिन्होंने लोकतंत्र को ज़िंदा रखने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह बंगाल के आत्मसम्मान की जीत है, यह कार्यकर्ताओं के 'बलिदान' की जीत है!

शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण न होने पर अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि के साथ ही प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी

फर्रूखाबाद l आईजीआरएस शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी l शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति में दो पड़ोसियों के बयान लिए जाएं । शिकायत गुणवत्ता एवं तत्वविहीन होने पर संबंधित अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि के साथ ही प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी l
जिलाधिकारी डॉ० अंकुर लाठर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आई0जी0आर0एस0 शिकायतों के निस्तारण एवं उनकी गुणवत्ता की समीक्षा हेतु महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा शिकायतों के निस्तारण की स्थिति, शिकायतकर्ताओं से संवाद, साक्ष्यों के अपलोड तथा फीडबैक की गुणवत्ता की गहन समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी महोदया ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी सक्षम अधिकारी स्वयं निस्तारण आख्या का परीक्षण कर उसे पोर्टल पर अपलोड कराया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिक निस्तारण पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण एवं तथ्यपरक समाधान किया जाना आवश्यक है। उन्होंने निर्देशित किया कि प्रत्येक निस्तारण आख्या के साथ आवश्यक साक्ष्य अनिवार्य रूप से संलग्न किए जाएं, जिनमें शिकायतकर्ता से वार्ता, स्थलीय निरीक्षण की रिपोर्ट, तथा शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति में दो पड़ोसियों के बयान सम्मिलित हों।
जिलाधिकारी ने शिकायतकर्ताओं से संपर्क न करने वाले अधिकारियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता से संवाद स्थापित न करना गंभीर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायतकर्ता से व्यक्तिगत रूप से वार्ता कर उसकी समस्या को समझते हुए गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में उदाहरण स्वरूप विभिन्न अधिकारियों की जांच आख्या को पढ़कर उसकी गुणवत्ता की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि किसी अधिकारी द्वारा गुणवत्ताहीन अथवा तथ्यहीन निस्तारण किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि सहित कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने पिछले एक माह में प्राप्त असंतोषजनक फीडबैक वाले संदर्भों को चिन्हित करते हुए निर्देश दिए कि ऐसे प्रकरणों की पुनः जांच कर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कराया जाए। राजस्व विभाग से संबंधित शिकायतों के पुनरीक्षण हेतु अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) तथा अन्य विभागीय शिकायतों हेतु मुख्य विकास अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई।
जिलाधिकारी महोदया ने यह भी निर्देश दिए कि सभी अधिकारी प्रतिदिन कार्यालय पहुंचने के बाद सर्वप्रथम आई जी आर एस पोर्टल का अवलोकन करें, साथ ही लंबित शिकायतों की समीक्षा कर उनका निस्तारण स्वयं की निगरानी में सुनिश्चित करें। यदि कोई शिकायत संबंधित अधिकारी के कार्यक्षेत्र से संबद्ध नहीं है, तो उसे उसी दिन अथवा अधिकतम अगले दिन संबंधित विभाग को वापस किया जाए।
उन्होंने निर्देशित किया कि किसी भी संदर्भ को डिफाल्टर श्रेणी में जाने से पूर्व कम से कम पांच दिन पहले गुणवत्तापूर्ण एवं स्पष्ट निस्तारण आख्या पोर्टल पर अपलोड कर दी जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि जिन अधिकारियों की लापरवाही से शिकायतकर्ताओं का फीडबैक खराब होगा एवं जनपद की रैंकिंग प्रभावित होगी, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।  आई जी आर एस शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की शिथिलता अथवा उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), उपजिलाधिकारी सदर सहित विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
मलिहाबाद ज्ञापन देने जा रहे प्रदर्शनकारियों को हरदोई पुलिस ने रोका; अतरौली सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात--सुनील अर्कवंशी राष्ट्रीय प्रवक्ता

रितेश मिश्रा
हरदोई/अतरौली: मलिहाबाद में ज्ञापन देने की घोषणा के बाद आज हरदोई और लखनऊ की सीमाओं पर भारी गहमागहमी का माहौल रहा। लखनऊ जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर हरदोई पुलिस ने कड़ा पहरा बिठा दिया है, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

अतरौली थाना क्षेत्र के अंतर्गत लखनऊ की ओर जाने वाले सभी रास्तों को पुलिस ने पूरी तरह से सील कर दिया है।
भारी पुलिस बल: स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सीमावर्ती इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जो किसी भी वाहन या समूह को आगे बढ़ने से रोक रहा है।
जबरदस्ती का आरोप: प्रदर्शनकारियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस बल प्रयोग कर उन्हें वापस भेज रही है। मलिहाबाद जाने की कोशिश कर रहे लोगों को अतरौली पुलिस द्वारा रोक दिया गया है।
अधिकारियों की चुप्पी बनी चर्चा का विषय
सबसे ज्यादा असमंजस की स्थिति तब पैदा हुई जब मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों और अधिकारियों ने इस 'अघोषित पाबंदी' का कारण बताने से इनकार कर दिया। किसी भी वरिष्ठ अधिकारी ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह कार्रवाई किस धारा या आदेश के तहत की जा रही है।
"हमें आगे जाने से रोका जा रहा है, लेकिन कोई यह नहीं बता रहा कि क्यों? हम शांतिपूर्ण ढंग से अपना ज्ञापन देने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने हमें अतरौली में ही बंधक जैसी स्थिति में डाल दिया है।" — एक प्रदर्शनकारी
यातायात प्रभावित
इस घेराबंदी के कारण न केवल ज्ञापन देने जा रहे लोग, बल्कि आम राहगीर भी घंटों जाम और चेकिंग में फंसे रहे। पुलिस की इस मुस्तैदी को देखते हुए इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतज़ार है ताकि इस प्रतिबंध की सही वजह सामने आ सके।
इस मौके पर हमारे साथ श्री रामसुचित्र अर्कवंशी, पंकज अर्कवंशी,संजय अर्कवंशी, अशोक अर्कवंशी, संदीप अर्कवंशी, शोभित अर्कवंशी,भारी संख्या में लोग मौजूद है
वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह को तरुण कला संगम पत्रकारिता पुरस्कार
 
मुंबई। महानगर की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था तरुण कला संगम की तरफ से नवभारत टाइम्स के राजनीतिक संपादक व मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह को पत्रकारिता पुरस्कार प्रदान किया गया। चर्चगेट के सम्राट होटल में आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के कौशल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, संस्था के अध्यक्ष चित्रसेन सिंह और महासचिव दीपक सिंह के हाथों राजकुमार सिंह को बतौर सम्मान एक लाख रुपए, स्मृति चिन्ह और शाल श्रीफल प्रदान किया गया।
         इस मौके पर मंत्री लोढ़ा ने कहा कि 47 साल से सफलतापूर्वक एक संस्था चलाना और पत्रकारिता से जुड़े लोगों को हर साल सम्मानित करना महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल मंत्र तारीफ के साथ आलोचना करना भी है। जब मैं राजनीति में आया तो पहले पत्रकारों से बहुत डरता था पर धीरे धीरे पत्रकारों के करीब आया। तकनीक की दुनिया में भी प्रिंट जिंदा है। खबरों की खबर आज भी अखबारों में ही मिलती है।
        मंत्री लोढ़ा ने कहा कि हिंदी को लेकर विवाद एक पार्टी का राजनीतिक एजेंडा है। मराठी सबको सीखनी चाहिए पर किसी को अपनी मातृ भाषा में बात करने से रोकना भी गलत है। इस शहर में सब मिलजुल कर रहते हैं। हम सब मिलकर मुंबई को विकसित करेंगे।
            महाराष्ट्र सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग अतिरिक्त मुख्य सचिव बी राधा ने कहा मैं दक्षिण भारतीय हूं, पर दिल्ली में पढ़ाई करने की वजह से हिंदी से मेरा भी नाता रहा है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह को मै लंबे समय से  जानती हूं । उनकी खबरों में गहराई होती है और हम अधिकारियों को भी यह बात पसंद आती है। हम अधिकारियों को पत्रकारों से पता चलता है कि हमारे काम का लोगो के जीवन पर क्या असर हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए।
                    कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विधायक श्रीकांत भारतीय ने कहा कि मै भी नागपुर में पत्रकार रहा हूं। उन्होंने केरल विधानसभा चुनाव के दौरान का अपना एक संस्मरण सुनते हुए कहा कि वहां मेरी मुलाकात एक वरिष्ठ पत्रकार से हुई तो उन्होंने कहा कि अब थ्री पी (पत्रकार, पुलिस और पॉलिटिशियन) की भूमिका में बदलाव आ चुका है। उन्होंने कहा कि राजनीति में यह बात मै महसूस कर रहा हूं कि संवेदनशीलता कम हो रही है। संस्था के अध्यक्ष चित्रसेन सिंह ने कहा कि 47 सालों से मैं इस तरह का कार्यक्रम कर रहा हूं और इस कार्य में हिंदी पत्रकारिता जगत का हमेशा साथ मिला। समारोह को विधायक संजय उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार राघवेंद्र द्विवेदी, मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के अध्यक्ष आदित्य दुबे, महासचिव विजय सिंह कौशिक, मंत्रालय पत्रकार संघ के कोषाध्यक्ष विनोद यादव ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडेय ने किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों में भाजपा प्रवक्ता उदयप्रताप सिंह, आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली, पूर्व नगरसेवक रामबचन मुराई, भाजपा प्रवक्ता ओमप्रकाश चौहान, उद्योगपति राजीव सिंघल, अजय सिंघानिया, निलेश गुप्ता, नवीन पांडे, सुनील मेहरोत्रा, डीपी सिंह, ललित जैन, हरि मृदुल, यूके सिंह, सुरेंद्र मिश्रा, मनोज दुबे, हरि सिंह राजपुरोहित, अशोक शुक्ला, विजय पांडे, विजय सिंह,ओम प्रकाश पांडे, सूरज पांडे आदि का समावेश रहा। संस्था के संयोजक राधेश्याम मिश्र, अभिषेक सिंह तथा वेदांत सिंह ने अतिथियों का स्वागत और सम्मान किया। अंत में संस्था के महासचिव दीपक सिंह ने समस्त लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
पति घर से बाहर, दबंगों ने घर में घुसकर महिला को पीटा; जेवर लूटने का आरोप

रितेश मिश्रा
पाली हरदोई/पाली थाना क्षेत्र के बाबरपुर गांव में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाला मामला सामने आया है। गांव के ही करीब आधा दर्जन दबंगों पर आरोप है कि उन्होंने पड़ोसी महिला को घर में अकेला पाकर उसके साथ मारपीट की और घर में रखे कीमती जेवर लेकर फरार हो गए। घटना के समय महिला का पति घर पर मौजूद नहीं था।पीड़ित परिवार का आरोप है कि दबंग अचानक घर में घुस आए और महिला के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। विरोध करने पर घर में रखा सामान भी अस्त-व्यस्त कर दिया गया। आरोप है कि इसी दौरान घर में रखे कीमती जेवर भी गायब हो गए। घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया और आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए।परिजनों का कहना है कि घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई थी, लेकिन पाली पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस की ढिलाई के कारण आरोपियों के हौसले बुलंद हैं और अब परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।वहीं कार्यवाहक थाना प्रभारी इरफ़ान अहमद ने बताया कि मामला बच्चों के विवाद से जुड़ा है। दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और विवाद हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों का चालान कर आवश्यक कार्रवाई की
आजमगढ़:-दर्दनाक सड़क हादसा: पिकअप से आमने-सामने भिड़ी बाइक, 6 माह के मासूम के पिता की मौके पर मौत

वी कुमार यदुवंशी


आजमगढ़। फूलपुर कोतवाली क्षेत्र के मकसूदिया गांव के पास बलिया-लखनऊ राजमार्ग पर गुरुवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में बाइक सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद पिकअप चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। घटना से परिवार में कोहराम मच गया।जानकारी के अनुसार निजामाबाद थाना क्षेत्र के खतीर पुर गांव निवासी 28 वर्षीय सनी विश्वकर्मा पुत्र हरिहर विश्वकर्मा अपनी ससुराल भादी, शाहगंज (जौनपुर) से सुबह बाइक द्वारा घर लौट रहे थे। इसी दौरान मकसूदिया गांव के पास मोड़ पर आजमगढ़ की तरफ से आ रही तेज रफ्तार पिकअप से उनकी आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि सनी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पिकअप भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के बाद पिकअप चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। सूचना मिलते ही फूलपुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

घटना की खबर मिलते ही मृतक की पत्नी पूजा विश्वकर्मा बेसुध हो गईं। बताया जा रहा है कि सनी छह माह के एक मासूम बेटे के पिता थे। वहीं उनके पिता रोजी-रोटी के सिलसिले में गुजरात में रहते हैं। युवक की असमय मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।पुलिस फरार पिकअप चालक की तलाश में जुटी हुई है।फूलपुर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ।

कोतवाली प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि सड़क दुर्घटना में हुई युवक की मौत हुई है , युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है । पिकअप को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है ।
लखनऊ में सेफ्टी टैंक हादसा: जहरीली गैस से दो सफाईकर्मियों की मौत
* मुख्यमंत्री ने जताया शोक, जांच और मुआवजे के दिए निर्देश
लखनऊ। लखनऊ के माल थाना क्षेत्र स्थित नबी पनाह गांव में सेफ्टी टैंक की सफाई के दौरान बड़ा हादसा हो गया। टैंक की सफाई करने उतरे दो मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है।
मृतकों की पहचान रिंकू और राजेश के रूप में हुई है। दोनों की उम्र करीब 35 वर्ष बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार दोनों युवक सेफ्टी टैंक की सफाई के लिए अंदर उतरे थे, तभी जहरीली गैस की चपेट में आने से उनका दम घुट गया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया, जबकि अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
घटना का संज्ञान लेते हुए योगी आदित्यनाथ ने मृतक सफाईमित्रों के परिजनों के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने, उचित मुआवजा उपलब्ध कराने तथा पूरे हादसे की विस्तृत जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
योगी सरकार में कानून व्यवस्था मजबूत, दंगों और फिरौती पर लगी लगाम
* एनसीआरबी रिपोर्ट का दावा— 2023 और 2024 में फिरौती के लिए अपहरण की अपराध दर शून्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश, जिसे वर्ष 2017 से पहले ‘दंगा प्रदेश’ कहा जाता था, आज सख्त कानून व्यवस्था और जीरो टॉलरेंस नीति के चलते अपराध नियंत्रण के नए मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। राज्य सरकार के अनुसार योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ, जबकि वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में 25 हजार से अधिक दंगे दर्ज किए गए थे।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 19 दंगे और 33 अपहरण की घटनाएं सामने आती थीं। वहीं वर्तमान सरकार का दावा है कि कठोर कानून व्यवस्था और अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई के कारण दंगाइयों एवं माफियाओं के मंसूबे विफल हुए हैं।
एनसीआरबी की वर्ष 2024 रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में फिरौती के लिए अपहरण की अपराध दर शून्य दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक नगालैंड में यह दर 0.7, मणिपुर में 0.6, अरुणाचल प्रदेश में 0.3 और मेघालय में 0.2 रही, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा शून्य रहा। वर्ष 2023 में भी प्रदेश में इस श्रेणी में अपराध दर शून्य दर्ज की गई थी।
सरकार का कहना है कि अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति, सक्रिय पुलिसिंग, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और माफियाओं की संपत्तियों की जब्ती जैसे कदमों का असर अब धरातल पर दिखाई दे रहा है। संगठित अपराधों पर आर्थिक कार्रवाई ने अपराधियों की कमर तोड़ने का काम किया है।
प्रदेश सरकार के अनुसार पिछले नौ वर्षों में कुछ अराजक तत्वों द्वारा दंगा भड़काने की कोशिश जरूर की गई, लेकिन समय रहते पुलिस और प्रशासन ने सख्त कार्रवाई कर हालात को नियंत्रित कर लिया। एनसीआरबी की 2024 रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में बलवा की अपराध दर 1.1 दर्ज की गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत 2.2 रहा। रिपोर्ट के अनुसार मणिपुर में यह दर 8.4, महाराष्ट्र में 6.4, कर्नाटक में 5.4, हरियाणा में 5.3 और हिमाचल प्रदेश में 4.7 दर्ज की गई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सार्वजनिक मंचों से अक्सर कहते हैं— “नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा।” सरकार का दावा है कि यही सख्त नीति प्रदेश में कानून व्यवस्था सुधारने का आधार बनी है।
सेवा और करूणा का पर्याय है रेडक्रॉस, साई कॉलेज में मना विश्व रेडक्रॉस दिवस

अम्बिकापुर- सेवा का प्रतिफल हमेशा कल्याणकारी होता है। रेडक्रॉस सेवा और करूणा का पर्याय है। यह बातें श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय में रेडक्रॉस दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने कही। उन्होंंने सेवा और चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग और समर्पण के महत्व को अवगत कराते हुए कहा कि पेनसिलीन का आविष्कार की कहानी से अवगत कराया। सर अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने १९२८ में लंदन के सेंट मैरी अस्पताल में अथक परिश्रम से किया था। यह दुनिया की पहली एंटीबायोटिक दवा है, जिसकी खोज एक फंगस (पेनिसिलियम नोटेटम) से अचानक हुई जब उन्होंने देखा कि फंगस ने बैक्टीरिया के विकास को रोक दिया। डॉ. श्रीवास्तव ने यूथ रेडक्रॉस के विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि इंटरनेशनल रेड क्रॉस सोसाइटी की स्थापना १७ फरवरी १८६३ को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में हेनरी ड्यूनेंट द्वारा की गई थी। ८ मई को विश्व रेडक्रॉस दिवस मनाया जाता है।

इस अवसर यूथ रेडक्रॉस प्रभारी डॉ. एलपी गुप्ता ने सभी कार्यकर्ताओं को कर्तव्य एवं दायित्व के प्रति प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम प्रभारी देवेन्द्र दास सोनवानी ने किया। इस अवसर पर स्वीप नोडल अधिकारी डॉ. अजय कुमार तिवारी, सहायक प्राध्यापक सोनाली गोस्वामी तथा चांदनी व्यापारी उपस्थित रहीं।

सौ शय्या, जिला अस्पताल में नहीं है ईएनटी के डॉक्टर, मरीज परेशांन

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव


भदोही। करीब दो से ढाई लाख लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने वाले जिला चिकित्सालय और सरपतहां के सौ शय्या अस्पताल में एक भी ईएनटी के डॉक्टर नहीं हैं। मरीजों को बेहतर उपचार के लिए भदोही के महाराजा बलवंत सिंह राजकीय अस्पताल या निजी अस्पताल का रूख करना पड़ता है। जिले में कुल चार पद सृजित है। जिले के 29 सरकारी अस्पतालों में रोजाना 5000 से 5500 की ओपीडी होती है। इसमें से करीब 100 से 125 मरीज ईएनटी के होते हैं। ज्यादातर मरीज जिला अस्पताल आते हैं। यहां 18 महीने पहले ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. दिप्ती पांडेय की तैनाती हुई थी, लेकिन उनका तबादला भदोही एमबीएस हो गया। जिससे अस्पताल में पद खाली है। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को वापस लौटना पड़ता है या किसी अन्य डॉक्टरों से दवा लेना पड़ता है। सौ शय्या अस्पताल में दो पद सृजित है। यहां तीन साल से नाक, कान, गला के डॉक्टर नहीं है। ऐसे में अस्पताल आने वाले मरीजों को उपचार कराने में परेशानी होती है। उन्हें विशेषज्ञ के बजाए अन्य डॉक्टरों से दवा लेना पड़ता है। बेहतर उपचार के लिए निजी अस्पताल या महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय का रूख करना पड़ता है। भदोही एबीएस में एक डॉक्टर की तैनाती है।



भदोही एमबीएस में एक ईएनटी सर्जन की तैनाती है। जिला अस्पताल,सौ शैय्या में तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र को लिखा दिया गया है।

डॉ संतोष कुमार चक

सीएमओ भदोही
भाजपा कार्यकर्ताओं के 'लहू' से सींचा गया है बंगाल का कमल : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत को चुनाव आयोग की मेहरबानी बतलाने वाले दलों को अपनी तथ्यपरक उदाहरणों के साथ आईना दिखाने का काम किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स पर लिखा है कि चुनाव आयोग की मेहरबानी से नहीं, बल्कि हमारे कार्यकर्ताओं के 'लहू' से बंगाल का कमल सींचा गया है।

श्री मरांडी ने कहा कि कुछ लोग आज भी इस मुगालते में जी रहे हैं कि बंगाल में भाजपा की सत्ता चुनाव आयोग का 'गिफ्ट' है। जिन्हें लगता है कि EVM की मशीनें, केंद्रीय बल या दिल्ली का दखल भाजपा को सत्ता की दहलीज तक लाया है, वे शायद बंगाल की तासीर से वाकिफ नहीं हैं। सुन लीजिये! बंगाल में कमल बैलेट बॉक्स से पहले कार्यकर्ताओं के खून से खिला है।

श्री मरांडी ने अपने पोस्ट में कुल चार पार्ट में "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने, चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी, 15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर एवं यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है!" पर क्रमवार शीर्षक देकर पार्टी के उतार चढ़ाव वाले सियासी सफरनामे, भाजपा कार्यकर्ताओं की शहादत, सत्तारूढ़ दल वामपंथियों और तृणमूल कांग्रेस के जुल्म को विस्तार से व्याख्या की है।

श्री मरांडी ने "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने" वाले पहले शीर्षक में लिखा है कि 2011 से 2025 तक का सफर कोई राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक महायज्ञ था जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी है। यहाँ लोकतंत्र की बात करने वालों को पेड़ों से लटकाया गया। किसी को बम से उड़ाया गया, तो किसी का शव क्षत-विक्षत हालत में तालाबों में मिला। नंदीग्राम से बीरभूम और कूचबिहार से बशीरहाट तक—सिर्फ भाजपा को वोट देने के अपराध में पूरे-पूरे गाँव खाक कर दिए गए। उन्होंने अतीत के पन्नों को पलटने की सलाह देते हुए कहा कि वह मंजर याद कीजिए, जब महिलाओं की अस्मत को राजनीतिक हथियार बनाया गया ताकि दहशत पैदा की जा सके। यह सत्ता किसी थाली में परोसकर नहीं मिली, इसके पीछे हाई कोर्ट की फटकार और CBI जांचों के वो पन्ने हैं जो TMC के 'खूनी खेल' की गवाही देते हैं।

श्री मरांडी ने अपने दूसरे शीर्षक "चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी" में लिखा है कि सोचिए! जिस बूथ अध्यक्ष की लाश सुबह पेड़ पर लटकी मिलती है, दोपहर को उसका बेटा कलेजे पर पत्थर रखकर उसी बूथ पर पोलिंग एजेंट बनकर खड़ा हो जाता है— यह हिम्मत EVM से नहीं, स्वाभिमान से आती है। जिस माँ का घर जला दिया गया, वह अगले दिन फिर हाथ में भगवा झंडा थामे गलियों में ललकारती है— यह हौसला चुनाव आयोग नहीं देता। वामपंथियों के 34 साल के दमन, तानाशाही और दीदी के 15 साल के खौफनाक, रक्तरंजित दहशतगर्दों की राजनीति को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अपनी छाती पर झेला है। फर्जी मुकदमे, जेल की सलाखें और सामाजिक बहिष्कार भी उनके कदम को नहीं डगमगा सके।

श्री मरांडी ने तीसरे शीर्षक "15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर" में लिखा है कि यह ग्राफ किसी आंकड़ों का खेल नहीं, यह उन माँओं के आँसुओं का हिसाब है। 2011 में सिर्फ 1 विधायक जीतने पर मजाक उड़ाया गया। 2016 में 3 विधायक जीते, यह संघर्ष की शुरुआत थी। 2019 में 18 सांसद जीते, ममता के गढ़ में सेंध लग चुकी थी। 2021 में 77 विधायक जीतकर पार्टी मुख्य विपक्ष की ताकत बनी।

2024 में 12 सीटें मिली, भयंकर दमन के बावजूद टिके रहे। आज 2026 में पूर्ण बहुमत की प्रचंड विजय। यह जीत उन बेटों के नाम है जिनकी 'तेरहवीं' पर उनकी माताओं ने विलाप नहीं किया, बल्कि कसम खाई थी कि जब तक सत्ता परिवर्तन नहीं होगा, लड़ाई जारी रहेगी। यह उन रिलीफ कैंपों में सड़ रहे परिवारों के सब्र की जीत है।

अपने चौथे शीर्षक यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है! में श्री मरांडी ने लिखा है कि जो लोग आज इसे "चुनाव आयोग की सेटिंग" कहते हैं, वे एक बार उन गुमनाम कब्रों और श्मशानों में जाकर देखें जहाँ भाजपा का झंडा ओढ़े हमारे भाई सो रहे हैं। उन जले हुए घरों की राख को हाथ लगाकर देखें, जहाँ आज भी चीखें सुनाई देती हैं। बंगाल में सत्ता किसी मशीन ने नहीं दी है। यहाँ हर एक वोट के पीछे एक शहादत छिपी है। 15 साल तक खून-पसीना बहाने के बाद, अपनों की लाशें ढोने के बाद और हर जुल्म सहने के बाद आज बंगाल की गलियों से यह हुंकार निकली है। इसे 'मेहरबानी' कहना उन शहीदों का अपमान है जिन्होंने लोकतंत्र को ज़िंदा रखने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह बंगाल के आत्मसम्मान की जीत है, यह कार्यकर्ताओं के 'बलिदान' की जीत है!

शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण न होने पर अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि के साथ ही प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी

फर्रूखाबाद l आईजीआरएस शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी l शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति में दो पड़ोसियों के बयान लिए जाएं । शिकायत गुणवत्ता एवं तत्वविहीन होने पर संबंधित अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि के साथ ही प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी l
जिलाधिकारी डॉ० अंकुर लाठर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आई0जी0आर0एस0 शिकायतों के निस्तारण एवं उनकी गुणवत्ता की समीक्षा हेतु महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा शिकायतों के निस्तारण की स्थिति, शिकायतकर्ताओं से संवाद, साक्ष्यों के अपलोड तथा फीडबैक की गुणवत्ता की गहन समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी महोदया ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी सक्षम अधिकारी स्वयं निस्तारण आख्या का परीक्षण कर उसे पोर्टल पर अपलोड कराया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिक निस्तारण पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण एवं तथ्यपरक समाधान किया जाना आवश्यक है। उन्होंने निर्देशित किया कि प्रत्येक निस्तारण आख्या के साथ आवश्यक साक्ष्य अनिवार्य रूप से संलग्न किए जाएं, जिनमें शिकायतकर्ता से वार्ता, स्थलीय निरीक्षण की रिपोर्ट, तथा शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति में दो पड़ोसियों के बयान सम्मिलित हों।
जिलाधिकारी ने शिकायतकर्ताओं से संपर्क न करने वाले अधिकारियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता से संवाद स्थापित न करना गंभीर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायतकर्ता से व्यक्तिगत रूप से वार्ता कर उसकी समस्या को समझते हुए गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में उदाहरण स्वरूप विभिन्न अधिकारियों की जांच आख्या को पढ़कर उसकी गुणवत्ता की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि किसी अधिकारी द्वारा गुणवत्ताहीन अथवा तथ्यहीन निस्तारण किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि सहित कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने पिछले एक माह में प्राप्त असंतोषजनक फीडबैक वाले संदर्भों को चिन्हित करते हुए निर्देश दिए कि ऐसे प्रकरणों की पुनः जांच कर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कराया जाए। राजस्व विभाग से संबंधित शिकायतों के पुनरीक्षण हेतु अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) तथा अन्य विभागीय शिकायतों हेतु मुख्य विकास अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई।
जिलाधिकारी महोदया ने यह भी निर्देश दिए कि सभी अधिकारी प्रतिदिन कार्यालय पहुंचने के बाद सर्वप्रथम आई जी आर एस पोर्टल का अवलोकन करें, साथ ही लंबित शिकायतों की समीक्षा कर उनका निस्तारण स्वयं की निगरानी में सुनिश्चित करें। यदि कोई शिकायत संबंधित अधिकारी के कार्यक्षेत्र से संबद्ध नहीं है, तो उसे उसी दिन अथवा अधिकतम अगले दिन संबंधित विभाग को वापस किया जाए।
उन्होंने निर्देशित किया कि किसी भी संदर्भ को डिफाल्टर श्रेणी में जाने से पूर्व कम से कम पांच दिन पहले गुणवत्तापूर्ण एवं स्पष्ट निस्तारण आख्या पोर्टल पर अपलोड कर दी जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि जिन अधिकारियों की लापरवाही से शिकायतकर्ताओं का फीडबैक खराब होगा एवं जनपद की रैंकिंग प्रभावित होगी, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।  आई जी आर एस शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की शिथिलता अथवा उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), उपजिलाधिकारी सदर सहित विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
मलिहाबाद ज्ञापन देने जा रहे प्रदर्शनकारियों को हरदोई पुलिस ने रोका; अतरौली सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात--सुनील अर्कवंशी राष्ट्रीय प्रवक्ता

रितेश मिश्रा
हरदोई/अतरौली: मलिहाबाद में ज्ञापन देने की घोषणा के बाद आज हरदोई और लखनऊ की सीमाओं पर भारी गहमागहमी का माहौल रहा। लखनऊ जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर हरदोई पुलिस ने कड़ा पहरा बिठा दिया है, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

अतरौली थाना क्षेत्र के अंतर्गत लखनऊ की ओर जाने वाले सभी रास्तों को पुलिस ने पूरी तरह से सील कर दिया है।
भारी पुलिस बल: स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सीमावर्ती इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जो किसी भी वाहन या समूह को आगे बढ़ने से रोक रहा है।
जबरदस्ती का आरोप: प्रदर्शनकारियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस बल प्रयोग कर उन्हें वापस भेज रही है। मलिहाबाद जाने की कोशिश कर रहे लोगों को अतरौली पुलिस द्वारा रोक दिया गया है।
अधिकारियों की चुप्पी बनी चर्चा का विषय
सबसे ज्यादा असमंजस की स्थिति तब पैदा हुई जब मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों और अधिकारियों ने इस 'अघोषित पाबंदी' का कारण बताने से इनकार कर दिया। किसी भी वरिष्ठ अधिकारी ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह कार्रवाई किस धारा या आदेश के तहत की जा रही है।
"हमें आगे जाने से रोका जा रहा है, लेकिन कोई यह नहीं बता रहा कि क्यों? हम शांतिपूर्ण ढंग से अपना ज्ञापन देने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने हमें अतरौली में ही बंधक जैसी स्थिति में डाल दिया है।" — एक प्रदर्शनकारी
यातायात प्रभावित
इस घेराबंदी के कारण न केवल ज्ञापन देने जा रहे लोग, बल्कि आम राहगीर भी घंटों जाम और चेकिंग में फंसे रहे। पुलिस की इस मुस्तैदी को देखते हुए इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतज़ार है ताकि इस प्रतिबंध की सही वजह सामने आ सके।
इस मौके पर हमारे साथ श्री रामसुचित्र अर्कवंशी, पंकज अर्कवंशी,संजय अर्कवंशी, अशोक अर्कवंशी, संदीप अर्कवंशी, शोभित अर्कवंशी,भारी संख्या में लोग मौजूद है
वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह को तरुण कला संगम पत्रकारिता पुरस्कार
 
मुंबई। महानगर की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था तरुण कला संगम की तरफ से नवभारत टाइम्स के राजनीतिक संपादक व मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह को पत्रकारिता पुरस्कार प्रदान किया गया। चर्चगेट के सम्राट होटल में आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के कौशल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, संस्था के अध्यक्ष चित्रसेन सिंह और महासचिव दीपक सिंह के हाथों राजकुमार सिंह को बतौर सम्मान एक लाख रुपए, स्मृति चिन्ह और शाल श्रीफल प्रदान किया गया।
         इस मौके पर मंत्री लोढ़ा ने कहा कि 47 साल से सफलतापूर्वक एक संस्था चलाना और पत्रकारिता से जुड़े लोगों को हर साल सम्मानित करना महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल मंत्र तारीफ के साथ आलोचना करना भी है। जब मैं राजनीति में आया तो पहले पत्रकारों से बहुत डरता था पर धीरे धीरे पत्रकारों के करीब आया। तकनीक की दुनिया में भी प्रिंट जिंदा है। खबरों की खबर आज भी अखबारों में ही मिलती है।
        मंत्री लोढ़ा ने कहा कि हिंदी को लेकर विवाद एक पार्टी का राजनीतिक एजेंडा है। मराठी सबको सीखनी चाहिए पर किसी को अपनी मातृ भाषा में बात करने से रोकना भी गलत है। इस शहर में सब मिलजुल कर रहते हैं। हम सब मिलकर मुंबई को विकसित करेंगे।
            महाराष्ट्र सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग अतिरिक्त मुख्य सचिव बी राधा ने कहा मैं दक्षिण भारतीय हूं, पर दिल्ली में पढ़ाई करने की वजह से हिंदी से मेरा भी नाता रहा है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सिंह को मै लंबे समय से  जानती हूं । उनकी खबरों में गहराई होती है और हम अधिकारियों को भी यह बात पसंद आती है। हम अधिकारियों को पत्रकारों से पता चलता है कि हमारे काम का लोगो के जीवन पर क्या असर हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए।
                    कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विधायक श्रीकांत भारतीय ने कहा कि मै भी नागपुर में पत्रकार रहा हूं। उन्होंने केरल विधानसभा चुनाव के दौरान का अपना एक संस्मरण सुनते हुए कहा कि वहां मेरी मुलाकात एक वरिष्ठ पत्रकार से हुई तो उन्होंने कहा कि अब थ्री पी (पत्रकार, पुलिस और पॉलिटिशियन) की भूमिका में बदलाव आ चुका है। उन्होंने कहा कि राजनीति में यह बात मै महसूस कर रहा हूं कि संवेदनशीलता कम हो रही है। संस्था के अध्यक्ष चित्रसेन सिंह ने कहा कि 47 सालों से मैं इस तरह का कार्यक्रम कर रहा हूं और इस कार्य में हिंदी पत्रकारिता जगत का हमेशा साथ मिला। समारोह को विधायक संजय उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार राघवेंद्र द्विवेदी, मुंबई हिंदी पत्रकार संघ के अध्यक्ष आदित्य दुबे, महासचिव विजय सिंह कौशिक, मंत्रालय पत्रकार संघ के कोषाध्यक्ष विनोद यादव ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडेय ने किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों में भाजपा प्रवक्ता उदयप्रताप सिंह, आरटीआई एक्टिविस्ट अनिल गलगली, पूर्व नगरसेवक रामबचन मुराई, भाजपा प्रवक्ता ओमप्रकाश चौहान, उद्योगपति राजीव सिंघल, अजय सिंघानिया, निलेश गुप्ता, नवीन पांडे, सुनील मेहरोत्रा, डीपी सिंह, ललित जैन, हरि मृदुल, यूके सिंह, सुरेंद्र मिश्रा, मनोज दुबे, हरि सिंह राजपुरोहित, अशोक शुक्ला, विजय पांडे, विजय सिंह,ओम प्रकाश पांडे, सूरज पांडे आदि का समावेश रहा। संस्था के संयोजक राधेश्याम मिश्र, अभिषेक सिंह तथा वेदांत सिंह ने अतिथियों का स्वागत और सम्मान किया। अंत में संस्था के महासचिव दीपक सिंह ने समस्त लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
पति घर से बाहर, दबंगों ने घर में घुसकर महिला को पीटा; जेवर लूटने का आरोप

रितेश मिश्रा
पाली हरदोई/पाली थाना क्षेत्र के बाबरपुर गांव में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाला मामला सामने आया है। गांव के ही करीब आधा दर्जन दबंगों पर आरोप है कि उन्होंने पड़ोसी महिला को घर में अकेला पाकर उसके साथ मारपीट की और घर में रखे कीमती जेवर लेकर फरार हो गए। घटना के समय महिला का पति घर पर मौजूद नहीं था।पीड़ित परिवार का आरोप है कि दबंग अचानक घर में घुस आए और महिला के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। विरोध करने पर घर में रखा सामान भी अस्त-व्यस्त कर दिया गया। आरोप है कि इसी दौरान घर में रखे कीमती जेवर भी गायब हो गए। घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया और आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए।परिजनों का कहना है कि घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई थी, लेकिन पाली पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस की ढिलाई के कारण आरोपियों के हौसले बुलंद हैं और अब परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।वहीं कार्यवाहक थाना प्रभारी इरफ़ान अहमद ने बताया कि मामला बच्चों के विवाद से जुड़ा है। दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और विवाद हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों का चालान कर आवश्यक कार्रवाई की
आजमगढ़:-दर्दनाक सड़क हादसा: पिकअप से आमने-सामने भिड़ी बाइक, 6 माह के मासूम के पिता की मौके पर मौत

वी कुमार यदुवंशी


आजमगढ़। फूलपुर कोतवाली क्षेत्र के मकसूदिया गांव के पास बलिया-लखनऊ राजमार्ग पर गुरुवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में बाइक सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद पिकअप चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। घटना से परिवार में कोहराम मच गया।जानकारी के अनुसार निजामाबाद थाना क्षेत्र के खतीर पुर गांव निवासी 28 वर्षीय सनी विश्वकर्मा पुत्र हरिहर विश्वकर्मा अपनी ससुराल भादी, शाहगंज (जौनपुर) से सुबह बाइक द्वारा घर लौट रहे थे। इसी दौरान मकसूदिया गांव के पास मोड़ पर आजमगढ़ की तरफ से आ रही तेज रफ्तार पिकअप से उनकी आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि सनी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पिकअप भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के बाद पिकअप चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। सूचना मिलते ही फूलपुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

घटना की खबर मिलते ही मृतक की पत्नी पूजा विश्वकर्मा बेसुध हो गईं। बताया जा रहा है कि सनी छह माह के एक मासूम बेटे के पिता थे। वहीं उनके पिता रोजी-रोटी के सिलसिले में गुजरात में रहते हैं। युवक की असमय मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।पुलिस फरार पिकअप चालक की तलाश में जुटी हुई है।फूलपुर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है ।

कोतवाली प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि सड़क दुर्घटना में हुई युवक की मौत हुई है , युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है । पिकअप को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है ।