गया में प्रकाश मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में कल निःशुल्क गैस्ट्रो जांच शिविर, डॉ. अवधेश नारायण देंगे सेवाएं

गया: गया शहर के गेवाल बीघा स्थित डीएम आवास के समीप प्रकाश मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में रविवार को निःशुल्क जांच शिविर का आयोजन किया जाएगा। इस शिविर में लीवर, पेट एवं आंत रोगों के विशेषज्ञ डॉ. अवधेश नारायण मरीजों की जांच कर उन्हें आवश्यक परामर्श देंगे।

अस्पताल के जनरल एवं एडवांस लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. जे.पी. सिंह ने बताया कि यह शिविर विशेष रूप से उन मरीजों के लिए उपयोगी होगा, जो लंबे समय से पेट दर्द, गैस, एसिडिटी, अपच, लीवर संबंधी समस्याओं या पाचन तंत्र से जुड़ी अन्य बीमारियों से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि शिविर का उद्देश्य लोगों को समय रहते सही इलाज और जागरूकता प्रदान करना है।

डॉ. अवधेश नारायण ने अपनी एमबीबीएस और एमडी (मेडिसिन) की पढ़ाई Banaras Hindu University से की है। इसके अलावा उन्होंने डीएनबी (गैस्ट्रो) की विशेषज्ञता Sir Ganga Ram Hospital से प्राप्त की है और वे Ruban Memorial Hospital से भी जुड़े हुए हैं। उनके पास गैस्ट्रो संबंधी रोगों के इलाज का व्यापक अनुभव है।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार शिविर में मरीजों को निःशुल्क परामर्श के साथ आवश्यक जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही उन्हें स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित जांच के महत्व के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और समय पर जांच कराकर गंभीर बीमारियों से बचाव सुनिश्चित करें। अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

गया में निःशुल्क मेगा हेल्थ कैंप, 200 से अधिक मरीजों का हुआ इलाज

गया। शहर के डेल्हा बस स्टैंड स्थित परैया रोड के बी.आई.टी मोड़ शाखा में कर्म मेरा सेवा सहयोग एकता मंच के तत्वावधान में एवं प्रकाश मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल द्वारा निःशुल्क मेगा स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में 200 से अधिक मरीजों की जांच एवं उपचार किया गया, जिससे स्थानीय लोगों को काफी राहत मिली।

शिविर में आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे और विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लिया। यहां मरीजों को विभिन्न बीमारियों की जांच, आवश्यक चिकित्सा सलाह और दवाइयां निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना था। स्वास्थ्य शिविर में जनरल एवं एडवांस लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. जे. पी. सिंह, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनी कुमारी और स्पाइन एवं ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. वैभव सिन्हा ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। डॉक्टरों ने मरीजों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनकर उचित उपचार और जरूरी सलाह दी।

शिविर के दौरान पेट संबंधी रोग, हर्निया, पथरी, बवासीर, कमर दर्द, गर्दन दर्द, स्लिप डिस्क, घुटना दर्द, महिलाओं की समस्याएं सहित कई सामान्य बीमारियों की जांच की गई। डॉक्टरों ने लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी।

अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को आधुनिक चिकित्सा सेवाएं मिल सकें। शिविर में शामिल लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर समाज के लिए बेहद लाभकारी हैं।

RSF की प्रेस स्वतंत्रता रिपोर्ट: वैश्विक पैमाना या भारत की अधूरी तस्वीर?

डॉ. पंकज सोनी

Reporters Without Borders (RSF) की सालाना रिपोर्ट पर भरोसा करने से पहले एक बुनियादी सवाल है—यह बनती कैसे है? किसके संसाधनों से, किन स्रोतों के आधार पर और किस दृष्टिकोण के साथ? 140 करोड़ की आबादी, दर्जनों भाषाओं और सैकड़ों संस्कृतियों वाले भारत की प्रेस स्वतंत्रता क्या पेरिस में बैठकर तैयार प्रश्नावलियों से मापी जा सकती है?

हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पेरिस स्थित एक NGO Reporters Without Borders (RSF) अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी करता है। इस रिपोर्ट में भारत का स्थान प्रायः 150 के बाद ही दिखाई देता है। 2026 की रिपोर्ट में भारत 157वें स्थान पर है, जबकि 2025 में भी यही रैंक और 2024 में 159वां स्थान था।

रिपोर्ट आते ही देश का एक वर्ग चिंतित स्वर में कहता है—“लोकतंत्र खतरे में है”, “पत्रकारिता समाप्त हो रही है”, “प्रेस पर दबाव बढ़ गया है।” लेकिन इन प्रतिक्रियाओं के बीच एक मूल प्रश्न अक्सर अनदेखा रह जाता है—यह सूचकांक तैयार कैसे होता है? भारत इसमें लगातार पीछे क्यों रहता है?

दरअसल, RSF एक फ्रांसीसी गैर-सरकारी संगठन है, जिसकी फंडिंग के स्रोत पूरी तरह पारदर्शी नहीं माने जाते। यूरोपीय सरकारें और कुछ निजी फाउंडेशन इसे सहयोग देते हैं। इसका प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक मुख्यतः सर्वेक्षण, धारणाओं और सीमित केस स्टडी पर आधारित होता है। यह कोई पूर्णतः वैज्ञानिक या वस्तुनिष्ठ मापदंड नहीं, बल्कि चुनिंदा लोगों की राय का संकलन है, जिसमें पश्चिमी उदारवादी मूल्यों को पत्रकारिता का मानक मान लिया जाता है।

यहीं एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है—क्या इतने विशाल और विविध देश की मीडिया स्वतंत्रता का आकलन सीमित प्रश्नावलियों के आधार पर किया जा सकता है? भारत में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन यहाँ के संविधान, न्यायपालिका और नागरिक अधिकारों के संदर्भ में होना चाहिए, न कि केवल किसी बाहरी संस्था के आकलन से।

इस रिपोर्ट का एक बड़ा विरोधाभास यह भी है कि इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों को कई बार भारत से बेहतर स्थान दिया गया है। पाकिस्तान में पत्रकारों के लापता होने, मीडिया पर सैन्य दबाव और वरिष्ठ पत्रकार Arshad Sharif की हत्या जैसी घटनाएं व्यापक रूप से सामने आ चुकी हैं। वहीं बांग्लादेश में डिजिटल सुरक्षा कानून के तहत पत्रकारों पर कार्रवाई के मामले भी सामने आए हैं। ऐसे में यह तुलना स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े करती है।

वैश्विक स्तर पर भी मीडिया स्वतंत्रता की स्थिति जटिल है। अमेरिका में Julian Assange के खिलाफ लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई चली। पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने मीडिया को “एनिमी ऑफ द पीपल” तक कहा। रूस और चीन में मीडिया पर राज्य का प्रभाव जगजाहिर है। इसके बावजूद RSF रैंकिंग में इन देशों की स्थिति अपेक्षाकृत कम आलोचनात्मक दिखाई देती है, जिससे भू-राजनीतिक पूर्वाग्रह की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

International Federation of Journalists (IFJ) के अनुसार 2025 में दुनिया भर में 128 पत्रकारों की हत्या हुई, जिनमें अधिकांश मध्य-पूर्व और संघर्ष क्षेत्रों से थे। भारत में ऐसे मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, और हर घटना पर न्यायिक व प्रशासनिक प्रक्रिया सक्रिय होती है।

भारत की जमीनी तस्वीर देखें तो यहाँ 900 से अधिक सैटेलाइट चैनल, 17,000 से ज्यादा पंजीकृत समाचारपत्र और लाखों डिजिटल प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं। अनेक मीडिया संस्थान सरकार की खुलकर आलोचना करते हैं और निर्बाध रूप से कार्य कर रहे हैं। संसद, न्यायपालिका और सोशल मीडिया—तीनों स्तरों पर अभिव्यक्ति की विविधता स्पष्ट दिखाई देती है।

हालाँकि, भारतीय पत्रकारिता की एक चुनौती यह भी है कि बिना प्रशिक्षण या मान्यता के बड़ी संख्या में लोग मीडिया के नाम पर सक्रिय हो गए हैं। कुछ मामलों में यह स्थिति अव्यवस्था और अविश्वसनीयता को जन्म देती है, जो समग्र तस्वीर को प्रभावित करती है।

RSF की निष्पक्षता पर सवाल केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। The GuardianGlobal Times और अन्य संस्थानों द्वारा इसके वित्तीय स्रोतों व दृष्टिकोण पर प्रश्न उठाए गए हैं। यहाँ तक कि Encyclopaedia Britannica में भी कुछ संदर्भों में इसके संभावित पक्षपात का उल्लेख मिलता है।

स्पष्ट है कि RSF का सूचकांक एक उपयोगी संकेतक हो सकता है, लेकिन इसे अंतिम सत्य मानना उचित नहीं। उतना ही गलत इसे पूरी तरह खारिज कर देना भी होगा।

भारत जैसे विशाल और विविध लोकतंत्र में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन बहुआयामी दृष्टिकोण से ही संभव है—जहाँ वैश्विक सूचकांक, स्थानीय वास्तविकता और संस्थागत अनुभव, तीनों को संतुलित रूप से समझा जाए।

(लेखक जनसंपर्क विभाग भोपाल में सहायक मीडिया सलाहकार हैं और यह इनके व्यक्तिगत विचार हैं।)

आवलीघाट में अवैध बजरी माफिया का आतंक, राहगीरों से मारपीट और वसूली

 

रेहटी। रेहटी तहसील के ग्राम आवलीघाट क्षेत्र में अवैध बजरी खनन करने वाले माफिया का आतंक बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, खनन से जुड़े गुंडे खुलेआम राह चलते लोगों और वाहन चालकों के साथ मारपीट कर रहे हैं और जबरन अवैध वसूली भी की जा रही है।

बताया जा रहा है कि हाल ही में हुई एक घटना में पीड़ित के साथ मारपीट की गई, जिसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई। इस मामले में पुलिस ने NCR (नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट) दर्ज करते हुए धारा 352, 131 और 115(2) के तहत मामला लिया है, लेकिन अभी तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन की ढिलाई के कारण इन असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं, जिससे आम जनता में भय का माहौल बना हुआ है। क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि पुलिस और प्रशासन तत्काल सख्त कदम उठाकर अवैध खनन और गुंडागर्दी पर रोक लगाए।

जनता की मांग:

अवैध बजरी खनन पर तुरंत रोक

दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई

* क्षेत्र में पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए

अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है।

प्रदेश सरकार फेल, जनता की जान से खिलवाड़”- जीतू पटवारी का हमला

- जहरीले पानी, हादसों और किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरा

- 7 मई को बड़वानी से मुरैना तक चक्का जाम करने का किया ऐलान

भोपाल, प्रतिनिधि। मध्यप्रदेश में विपक्ष ने एक बार फिर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में “जनता की जान से खिलवाड़” किया जा रहा है। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में पानी जैसी बुनियादी जरूरत भी सुरक्षित नहीं रह गई है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में जहरीले पानी के कारण 36 लोगों की मौत हुई, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं।

बरगी बांध की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां 9 लोगों की मौत हुई, लेकिन सरकार की ओर से संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मां-बेटे के शव निकाले जा रहे थे, उस समय मुख्यमंत्री अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त थे। परिवहन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पटवारी ने कहा कि नियमों की अनदेखी के कारण आदिवासी क्षेत्रों में लोग ट्रकों और बसों की छतों पर सफर करने को मजबूर हैं, जिससे हादसे बढ़ रहे हैं। इसे उन्होंने सरकार की नीतिगत विफलता बताया।

किसानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 2700 रुपये और धान का 3100 रुपये देने का वादा किया था, लेकिन किसानों को इससे कम कीमत मिल रही है। उन्होंने भावांतर योजना की राशि तुरंत किसानों के खातों में डालने की मांग की।

पटवारी ने 7 मई को बड़वानी से मुरैना तक चक्का जाम का ऐलान करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसानों के हित में होगा, भले ही इससे आमजन को असुविधा उठानी पड़े। न्याय व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है। इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह से मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने उनके काम की सराहना की है। पटवारी ने कहा कि वे प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर प्रदेश की स्थिति से अवगत कराएंगे।

कमर्शियल सिलेंडर के दाम बताए जाने की मांग व्यापार मंडल ने की


बलरामपुर तुलसीपुर - महंगाई के इस दौर में कामर्शियल व पांच किग्रा वाले गैस सिलिंडरों में की गई बढोत्तरी पर पुनर्विचार करने की मांग उ.प्र.उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारियों ने की है।
  महामन्त्री रूप चन्द्र गुप्ता ने बताया कि कामर्शियल सिलिंडरों के दाम बढ़ने का सीधा असर होटल,रेस्टोरेंट,खोमचे व रेहड़ी पटरी पर खाने पीने की वस्तुएं बेचने वालों पर पड़ेगा। जिसके चलते उनकी लागत बढ़ जाएगी आय एवं ग्राहक भी प्रभावित होंगे।
अध्यक्ष श्याम बिहारी अग्रहरि ने कहा कि खान-पान का कारोबार करने वालों की चिंता बढ़ गई है ऐसे में छोटे व ठेले वालों का व्यापार बन्द होने के कगार पर है।ऐसे कारोबार करने वालों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार व पेट्रोलियम कम्पनियों को मूल्यों में बढोत्तरी पर पुनर्विचार करना चाहिए तथा पाँच किग्रा वाले छोटे सिलिंडरों सब्सिडी जारी रखी जाए या बढ़ाई जाए,कामर्शियल सिलिंडरों के दामों में कमी की जाए व छोटे व्यापारियों को कनेक्शन लेने पर छूट व अतिरिक्त सब्सिडी की सुविधा दी जाए।
जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त रूप से जिला कारागार का किया निरीक्षण*

*गोण्डा 02 मई, 2026*।
जिलाधिकारी गोण्डा श्रीमती प्रियंका निरंजन एवं पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने जिला कारागार का संयुक्त निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने वहां पर कैदियों से वार्ता की तथा उन्हें जेल में दी जा रही सुविधाओं एवं उनकी समस्याओं के संबंध में जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान कारागार अस्पताल में जाकर वहां पर भर्ती कैदियों से मुलाकात किया, साथ ही सभी भर्ती कैदियों से वार्ता कर उनकी समस्याओं के संबंध में जानकारी ली। जिलाधिकारी तथा एसपी ने स्वयं विभिन्न बैरकों, अस्पताल, भोजनालय, भंडार कक्ष, पुस्तकालय आदि का निरीक्षण किया तथा संबंधित को निर्देश दिए कि जेल में जेल मैनुअल के अनुसार कैदियों को सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। इसके साथ ही ऐसे कैदी जिनके पास वकील नहीं है उनके लिए सरकारी वकील का भी प्रबंध कराया जाय। जेल में निरुद्ध कैदियों का बराबर मेडिकल चेकअप कराने के भी निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने महिला बन्दियों वार्ता की, उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास वकील नहीं है तो बता दीजिए वकील की व्यवस्था करा दी जायेगी।

निरीक्षण के दौरान जेल अधीक्षक, डिप्टी जेलर, कारागार डॉक्टर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
मौसम की मार से अस्पतालों में बढ़े डायरिया मरीज

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। कालीन नगरी में मौसम का मिजाज थोड़ा बदल गया है। सूर्यदेव का ताप थमा तो उमस ने व्याकूल करना शुरू कर दिया। चिपचिपी गर्मी से लोगों की व्याकूलता और बढ़ जा रही हैं। सुबह हल्का ठंडा हवा चला लेकिन दस बजते ही लोगों का शरीर पसीना से भिगता रहा। महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल समेत समस्त सीएचसी और पीएचसी में मरीजों में अचानक वृद्धि हो गई। ओपीडी के बाहर मरीजों की संख्या इतना बढ़ गया कि रोगी फर्स पर बैठने को विवश हो गए। जिला अस्पताल के चिकित्सकों की माने तो गर्मियों में होने वाली तमाम बीमारियों का सिलसिला जारी है। इन दिनों लोग डायरिया, डिहाड्रेशन, त्वचा और हृदय रोग की चपेट में आ जा रहे हैं। खानपान में थोड़ी सी लापरवाही लोगों को बीमार कर दे रही है। धूप से बचाव को लोग सिर पर गमच्छा रखने के साथ आंख में चश्मा लगाए थे। मरीजों की भीड़ देख डाक्टर हलकान नजर आए। सीएमओ डा. संतोष कुमार चक की माने तो गर्मी से बचाव को उचित उपाय करना अत्यंत जरुरी है। गर्मी में इजाफा होने से इंसान की इम्युनिटी घट जाती है। इस वजह से शरीर में कीटाणु व बैक्टीरिया आसानी से आ जाते हैं। यहीं कारण है कि लोग बीमार पड़ जाते हैं। इन दिनों तेज धूप संग धूल भरी हवा चल रहा है इस मौसम में पानी की कमी के साथ टाइफाइड, फूड प्वाइजनिंग जैसी बीमारी होती है। गन्ने के जूस में बर्फ डालकर पीना हानिकारक होता है। गर्मी में धूप से छांव में आते ही ठंडा पानी का सेवन करने से बचे। ऐसा करने पर सर्दी व बुखार होने की आशंका बढ़ जाती है। डायरिया, कांस्टिपेशन व एसिडिटी से बचाव को पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें।
श्री शांतिनिकेतन नाइट हाई स्कूल में मनाया गया महाराष्ट्र दिवस

मुंबई। पश्चिमी उपनगर के प्रतिष्ठित श्री शांतिनिकेतन नाइट हाई स्कूल में विगत वर्षों की तरह इस वर्ष भी धूमधाम के साथ महाराष्ट्र दिवस मनाया गया। इस अवसर पर बोलते हुए स्कूल के संस्थापक चेयरमैन एल पी मिश्रा ने मराठी में भाषण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र दिवस, जो हर साल 1 मई को मनाया जाता है, 1 मई 1960 को भाषाई आधार पर महाराष्ट्र राज्य के गठन की याद दिलाता है। यह दिवस मराठी भाषियों की अस्मिता, संस्कृति और 'संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन' के संघर्षों के प्रति सम्मान का प्रतीक है, जिसमें मुंबई को राज्य का हिस्सा बनाने के लिए 106 लोग शहीद हुए थे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र दिवस आपसी प्रेम और सौहार्द का प्रतीक है। हम सबको मिलकर महाराष्ट्र के विकास में अपना योगदान देना चाहिए। इस अवसर पर मुकेश द्विवेदी, प्रियंका पांडे, संतोष समेत अनेक शिक्षक और बच्चे उपस्थित रहे।
देवघर -1मई अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर पुराना सदर अस्पताल से प्रतिरोध मार्च निकाला गया।
देवघर: मई अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन AIPWA एवम् ऑल इंडिया स्कीम वर्कर फेडरेशन AICCTU के राष्ट्रीय अध्यक्ष गीता मंडल के नेतृत्व में पुराना सदर अस्पताल से प्रतिरोध मार्च निकला गया प्रतिरोध मार्च के माध्यम से केंद्र के मजदूर विरोधी एवं महिला विरोधी नारा के साथ जुलूस निकाला गया और कचहरी परिसर सूचना भवन के सामने सभा का आयोजन किया गया सभा का अध्यक्षता झारखंड राज्य विद्यालय रसोइया संघ की जिला सचिव मीनू देवी ने की एवं संचालन निर्माण मजदूर के नेता कॉम अशोक महतो ने किया कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गीता मंडल ने कहा 1 अप्रैल 2026 मजदूर विरोधी एवं मालिक पक्षीय श्रम _संहिता को लागू कर दिया है। इसे निरस्त कर पुराना श्रम कानून को पुनर्बहाल करने की मांग किया गया ,केंद्र की मोदी सरकार महिला आरक्षण का झूठा प्रचार फैलाया हुआ है जबकि 2023 में ही महिला आरक्षण पारित किया गया है इसे तुरंत लागू करे और आदिवासी,दलित और पिछड़ा वर्ग के महिलाओं को भी आरक्षण मिले केंद्र सरकार को यदि महिलाओं के प्रति सहानुभूति है तो देश में एक करोड़ से अधिक महिलाएं रसोइया,सहिया,सेविका,सहायिका,जलसहिया आदि अन्य अनुबंध महिला कर्मचारियों के जीविकोपार्जन के लिए लोकसभा का विशेष सत्र बुलाकर सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने का बिल पारित करे या नहीं तो जबतक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं तब तक सम्मानजनक मानदेय कम_से_कम 26 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय भुगतान करने की गारंटी करे तब मोदी सरकार का महिलावादी का असली चरित्र सामने आएगा। कार्यक्रम को भाकपा माले जिला सचिव कॉम रघुपति पंडित,जिला कमिटी सदस्य जयदेव सिंह,शंभू तुरी,रसोइया संघ की जिला उपाध्यक्ष चिंता देवी,अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन की जिला उपाध्यक्ष चमेली ने संबोधित किया इसके अलावा मुनि देवी,सुनीता किस्कु,सरस्वती देवी,पुतुल देवी,चंपा देवी,जगदंबा देवी,कविता देवी,लीला देवी,रिंकू देवी,sumiya देवी,मोना देवी,सुनीता देवी,रंजू देवी,सोनू भारती,लक्ष्मण मंडल,शंकर पंडित आदि दर्जनों लोगों ने भाग लिया।
गया में प्रकाश मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में कल निःशुल्क गैस्ट्रो जांच शिविर, डॉ. अवधेश नारायण देंगे सेवाएं

गया: गया शहर के गेवाल बीघा स्थित डीएम आवास के समीप प्रकाश मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में रविवार को निःशुल्क जांच शिविर का आयोजन किया जाएगा। इस शिविर में लीवर, पेट एवं आंत रोगों के विशेषज्ञ डॉ. अवधेश नारायण मरीजों की जांच कर उन्हें आवश्यक परामर्श देंगे।

अस्पताल के जनरल एवं एडवांस लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. जे.पी. सिंह ने बताया कि यह शिविर विशेष रूप से उन मरीजों के लिए उपयोगी होगा, जो लंबे समय से पेट दर्द, गैस, एसिडिटी, अपच, लीवर संबंधी समस्याओं या पाचन तंत्र से जुड़ी अन्य बीमारियों से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि शिविर का उद्देश्य लोगों को समय रहते सही इलाज और जागरूकता प्रदान करना है।

डॉ. अवधेश नारायण ने अपनी एमबीबीएस और एमडी (मेडिसिन) की पढ़ाई Banaras Hindu University से की है। इसके अलावा उन्होंने डीएनबी (गैस्ट्रो) की विशेषज्ञता Sir Ganga Ram Hospital से प्राप्त की है और वे Ruban Memorial Hospital से भी जुड़े हुए हैं। उनके पास गैस्ट्रो संबंधी रोगों के इलाज का व्यापक अनुभव है।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार शिविर में मरीजों को निःशुल्क परामर्श के साथ आवश्यक जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही उन्हें स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित जांच के महत्व के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और समय पर जांच कराकर गंभीर बीमारियों से बचाव सुनिश्चित करें। अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

गया में निःशुल्क मेगा हेल्थ कैंप, 200 से अधिक मरीजों का हुआ इलाज

गया। शहर के डेल्हा बस स्टैंड स्थित परैया रोड के बी.आई.टी मोड़ शाखा में कर्म मेरा सेवा सहयोग एकता मंच के तत्वावधान में एवं प्रकाश मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल द्वारा निःशुल्क मेगा स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में 200 से अधिक मरीजों की जांच एवं उपचार किया गया, जिससे स्थानीय लोगों को काफी राहत मिली।

शिविर में आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे और विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लिया। यहां मरीजों को विभिन्न बीमारियों की जांच, आवश्यक चिकित्सा सलाह और दवाइयां निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना था। स्वास्थ्य शिविर में जनरल एवं एडवांस लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. जे. पी. सिंह, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनी कुमारी और स्पाइन एवं ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. वैभव सिन्हा ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। डॉक्टरों ने मरीजों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनकर उचित उपचार और जरूरी सलाह दी।

शिविर के दौरान पेट संबंधी रोग, हर्निया, पथरी, बवासीर, कमर दर्द, गर्दन दर्द, स्लिप डिस्क, घुटना दर्द, महिलाओं की समस्याएं सहित कई सामान्य बीमारियों की जांच की गई। डॉक्टरों ने लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी।

अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को आधुनिक चिकित्सा सेवाएं मिल सकें। शिविर में शामिल लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर समाज के लिए बेहद लाभकारी हैं।

RSF की प्रेस स्वतंत्रता रिपोर्ट: वैश्विक पैमाना या भारत की अधूरी तस्वीर?

डॉ. पंकज सोनी

Reporters Without Borders (RSF) की सालाना रिपोर्ट पर भरोसा करने से पहले एक बुनियादी सवाल है—यह बनती कैसे है? किसके संसाधनों से, किन स्रोतों के आधार पर और किस दृष्टिकोण के साथ? 140 करोड़ की आबादी, दर्जनों भाषाओं और सैकड़ों संस्कृतियों वाले भारत की प्रेस स्वतंत्रता क्या पेरिस में बैठकर तैयार प्रश्नावलियों से मापी जा सकती है?

हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पेरिस स्थित एक NGO Reporters Without Borders (RSF) अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी करता है। इस रिपोर्ट में भारत का स्थान प्रायः 150 के बाद ही दिखाई देता है। 2026 की रिपोर्ट में भारत 157वें स्थान पर है, जबकि 2025 में भी यही रैंक और 2024 में 159वां स्थान था।

रिपोर्ट आते ही देश का एक वर्ग चिंतित स्वर में कहता है—“लोकतंत्र खतरे में है”, “पत्रकारिता समाप्त हो रही है”, “प्रेस पर दबाव बढ़ गया है।” लेकिन इन प्रतिक्रियाओं के बीच एक मूल प्रश्न अक्सर अनदेखा रह जाता है—यह सूचकांक तैयार कैसे होता है? भारत इसमें लगातार पीछे क्यों रहता है?

दरअसल, RSF एक फ्रांसीसी गैर-सरकारी संगठन है, जिसकी फंडिंग के स्रोत पूरी तरह पारदर्शी नहीं माने जाते। यूरोपीय सरकारें और कुछ निजी फाउंडेशन इसे सहयोग देते हैं। इसका प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक मुख्यतः सर्वेक्षण, धारणाओं और सीमित केस स्टडी पर आधारित होता है। यह कोई पूर्णतः वैज्ञानिक या वस्तुनिष्ठ मापदंड नहीं, बल्कि चुनिंदा लोगों की राय का संकलन है, जिसमें पश्चिमी उदारवादी मूल्यों को पत्रकारिता का मानक मान लिया जाता है।

यहीं एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है—क्या इतने विशाल और विविध देश की मीडिया स्वतंत्रता का आकलन सीमित प्रश्नावलियों के आधार पर किया जा सकता है? भारत में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन यहाँ के संविधान, न्यायपालिका और नागरिक अधिकारों के संदर्भ में होना चाहिए, न कि केवल किसी बाहरी संस्था के आकलन से।

इस रिपोर्ट का एक बड़ा विरोधाभास यह भी है कि इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों को कई बार भारत से बेहतर स्थान दिया गया है। पाकिस्तान में पत्रकारों के लापता होने, मीडिया पर सैन्य दबाव और वरिष्ठ पत्रकार Arshad Sharif की हत्या जैसी घटनाएं व्यापक रूप से सामने आ चुकी हैं। वहीं बांग्लादेश में डिजिटल सुरक्षा कानून के तहत पत्रकारों पर कार्रवाई के मामले भी सामने आए हैं। ऐसे में यह तुलना स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े करती है।

वैश्विक स्तर पर भी मीडिया स्वतंत्रता की स्थिति जटिल है। अमेरिका में Julian Assange के खिलाफ लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई चली। पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने मीडिया को “एनिमी ऑफ द पीपल” तक कहा। रूस और चीन में मीडिया पर राज्य का प्रभाव जगजाहिर है। इसके बावजूद RSF रैंकिंग में इन देशों की स्थिति अपेक्षाकृत कम आलोचनात्मक दिखाई देती है, जिससे भू-राजनीतिक पूर्वाग्रह की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

International Federation of Journalists (IFJ) के अनुसार 2025 में दुनिया भर में 128 पत्रकारों की हत्या हुई, जिनमें अधिकांश मध्य-पूर्व और संघर्ष क्षेत्रों से थे। भारत में ऐसे मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, और हर घटना पर न्यायिक व प्रशासनिक प्रक्रिया सक्रिय होती है।

भारत की जमीनी तस्वीर देखें तो यहाँ 900 से अधिक सैटेलाइट चैनल, 17,000 से ज्यादा पंजीकृत समाचारपत्र और लाखों डिजिटल प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं। अनेक मीडिया संस्थान सरकार की खुलकर आलोचना करते हैं और निर्बाध रूप से कार्य कर रहे हैं। संसद, न्यायपालिका और सोशल मीडिया—तीनों स्तरों पर अभिव्यक्ति की विविधता स्पष्ट दिखाई देती है।

हालाँकि, भारतीय पत्रकारिता की एक चुनौती यह भी है कि बिना प्रशिक्षण या मान्यता के बड़ी संख्या में लोग मीडिया के नाम पर सक्रिय हो गए हैं। कुछ मामलों में यह स्थिति अव्यवस्था और अविश्वसनीयता को जन्म देती है, जो समग्र तस्वीर को प्रभावित करती है।

RSF की निष्पक्षता पर सवाल केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। The GuardianGlobal Times और अन्य संस्थानों द्वारा इसके वित्तीय स्रोतों व दृष्टिकोण पर प्रश्न उठाए गए हैं। यहाँ तक कि Encyclopaedia Britannica में भी कुछ संदर्भों में इसके संभावित पक्षपात का उल्लेख मिलता है।

स्पष्ट है कि RSF का सूचकांक एक उपयोगी संकेतक हो सकता है, लेकिन इसे अंतिम सत्य मानना उचित नहीं। उतना ही गलत इसे पूरी तरह खारिज कर देना भी होगा।

भारत जैसे विशाल और विविध लोकतंत्र में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन बहुआयामी दृष्टिकोण से ही संभव है—जहाँ वैश्विक सूचकांक, स्थानीय वास्तविकता और संस्थागत अनुभव, तीनों को संतुलित रूप से समझा जाए।

(लेखक जनसंपर्क विभाग भोपाल में सहायक मीडिया सलाहकार हैं और यह इनके व्यक्तिगत विचार हैं।)

आवलीघाट में अवैध बजरी माफिया का आतंक, राहगीरों से मारपीट और वसूली

 

रेहटी। रेहटी तहसील के ग्राम आवलीघाट क्षेत्र में अवैध बजरी खनन करने वाले माफिया का आतंक बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, खनन से जुड़े गुंडे खुलेआम राह चलते लोगों और वाहन चालकों के साथ मारपीट कर रहे हैं और जबरन अवैध वसूली भी की जा रही है।

बताया जा रहा है कि हाल ही में हुई एक घटना में पीड़ित के साथ मारपीट की गई, जिसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई। इस मामले में पुलिस ने NCR (नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट) दर्ज करते हुए धारा 352, 131 और 115(2) के तहत मामला लिया है, लेकिन अभी तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन की ढिलाई के कारण इन असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं, जिससे आम जनता में भय का माहौल बना हुआ है। क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि पुलिस और प्रशासन तत्काल सख्त कदम उठाकर अवैध खनन और गुंडागर्दी पर रोक लगाए।

जनता की मांग:

अवैध बजरी खनन पर तुरंत रोक

दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई

* क्षेत्र में पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए

अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है।

प्रदेश सरकार फेल, जनता की जान से खिलवाड़”- जीतू पटवारी का हमला

- जहरीले पानी, हादसों और किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरा

- 7 मई को बड़वानी से मुरैना तक चक्का जाम करने का किया ऐलान

भोपाल, प्रतिनिधि। मध्यप्रदेश में विपक्ष ने एक बार फिर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में “जनता की जान से खिलवाड़” किया जा रहा है। पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में पानी जैसी बुनियादी जरूरत भी सुरक्षित नहीं रह गई है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में जहरीले पानी के कारण 36 लोगों की मौत हुई, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं।

बरगी बांध की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां 9 लोगों की मौत हुई, लेकिन सरकार की ओर से संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मां-बेटे के शव निकाले जा रहे थे, उस समय मुख्यमंत्री अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त थे। परिवहन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पटवारी ने कहा कि नियमों की अनदेखी के कारण आदिवासी क्षेत्रों में लोग ट्रकों और बसों की छतों पर सफर करने को मजबूर हैं, जिससे हादसे बढ़ रहे हैं। इसे उन्होंने सरकार की नीतिगत विफलता बताया।

किसानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 2700 रुपये और धान का 3100 रुपये देने का वादा किया था, लेकिन किसानों को इससे कम कीमत मिल रही है। उन्होंने भावांतर योजना की राशि तुरंत किसानों के खातों में डालने की मांग की।

पटवारी ने 7 मई को बड़वानी से मुरैना तक चक्का जाम का ऐलान करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसानों के हित में होगा, भले ही इससे आमजन को असुविधा उठानी पड़े। न्याय व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई और कहा कि लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है। इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह से मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने उनके काम की सराहना की है। पटवारी ने कहा कि वे प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर प्रदेश की स्थिति से अवगत कराएंगे।

कमर्शियल सिलेंडर के दाम बताए जाने की मांग व्यापार मंडल ने की


बलरामपुर तुलसीपुर - महंगाई के इस दौर में कामर्शियल व पांच किग्रा वाले गैस सिलिंडरों में की गई बढोत्तरी पर पुनर्विचार करने की मांग उ.प्र.उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारियों ने की है।
  महामन्त्री रूप चन्द्र गुप्ता ने बताया कि कामर्शियल सिलिंडरों के दाम बढ़ने का सीधा असर होटल,रेस्टोरेंट,खोमचे व रेहड़ी पटरी पर खाने पीने की वस्तुएं बेचने वालों पर पड़ेगा। जिसके चलते उनकी लागत बढ़ जाएगी आय एवं ग्राहक भी प्रभावित होंगे।
अध्यक्ष श्याम बिहारी अग्रहरि ने कहा कि खान-पान का कारोबार करने वालों की चिंता बढ़ गई है ऐसे में छोटे व ठेले वालों का व्यापार बन्द होने के कगार पर है।ऐसे कारोबार करने वालों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार व पेट्रोलियम कम्पनियों को मूल्यों में बढोत्तरी पर पुनर्विचार करना चाहिए तथा पाँच किग्रा वाले छोटे सिलिंडरों सब्सिडी जारी रखी जाए या बढ़ाई जाए,कामर्शियल सिलिंडरों के दामों में कमी की जाए व छोटे व्यापारियों को कनेक्शन लेने पर छूट व अतिरिक्त सब्सिडी की सुविधा दी जाए।
जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त रूप से जिला कारागार का किया निरीक्षण*

*गोण्डा 02 मई, 2026*।
जिलाधिकारी गोण्डा श्रीमती प्रियंका निरंजन एवं पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने जिला कारागार का संयुक्त निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने वहां पर कैदियों से वार्ता की तथा उन्हें जेल में दी जा रही सुविधाओं एवं उनकी समस्याओं के संबंध में जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान कारागार अस्पताल में जाकर वहां पर भर्ती कैदियों से मुलाकात किया, साथ ही सभी भर्ती कैदियों से वार्ता कर उनकी समस्याओं के संबंध में जानकारी ली। जिलाधिकारी तथा एसपी ने स्वयं विभिन्न बैरकों, अस्पताल, भोजनालय, भंडार कक्ष, पुस्तकालय आदि का निरीक्षण किया तथा संबंधित को निर्देश दिए कि जेल में जेल मैनुअल के अनुसार कैदियों को सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। इसके साथ ही ऐसे कैदी जिनके पास वकील नहीं है उनके लिए सरकारी वकील का भी प्रबंध कराया जाय। जेल में निरुद्ध कैदियों का बराबर मेडिकल चेकअप कराने के भी निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने महिला बन्दियों वार्ता की, उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास वकील नहीं है तो बता दीजिए वकील की व्यवस्था करा दी जायेगी।

निरीक्षण के दौरान जेल अधीक्षक, डिप्टी जेलर, कारागार डॉक्टर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
मौसम की मार से अस्पतालों में बढ़े डायरिया मरीज

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। कालीन नगरी में मौसम का मिजाज थोड़ा बदल गया है। सूर्यदेव का ताप थमा तो उमस ने व्याकूल करना शुरू कर दिया। चिपचिपी गर्मी से लोगों की व्याकूलता और बढ़ जा रही हैं। सुबह हल्का ठंडा हवा चला लेकिन दस बजते ही लोगों का शरीर पसीना से भिगता रहा। महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल समेत समस्त सीएचसी और पीएचसी में मरीजों में अचानक वृद्धि हो गई। ओपीडी के बाहर मरीजों की संख्या इतना बढ़ गया कि रोगी फर्स पर बैठने को विवश हो गए। जिला अस्पताल के चिकित्सकों की माने तो गर्मियों में होने वाली तमाम बीमारियों का सिलसिला जारी है। इन दिनों लोग डायरिया, डिहाड्रेशन, त्वचा और हृदय रोग की चपेट में आ जा रहे हैं। खानपान में थोड़ी सी लापरवाही लोगों को बीमार कर दे रही है। धूप से बचाव को लोग सिर पर गमच्छा रखने के साथ आंख में चश्मा लगाए थे। मरीजों की भीड़ देख डाक्टर हलकान नजर आए। सीएमओ डा. संतोष कुमार चक की माने तो गर्मी से बचाव को उचित उपाय करना अत्यंत जरुरी है। गर्मी में इजाफा होने से इंसान की इम्युनिटी घट जाती है। इस वजह से शरीर में कीटाणु व बैक्टीरिया आसानी से आ जाते हैं। यहीं कारण है कि लोग बीमार पड़ जाते हैं। इन दिनों तेज धूप संग धूल भरी हवा चल रहा है इस मौसम में पानी की कमी के साथ टाइफाइड, फूड प्वाइजनिंग जैसी बीमारी होती है। गन्ने के जूस में बर्फ डालकर पीना हानिकारक होता है। गर्मी में धूप से छांव में आते ही ठंडा पानी का सेवन करने से बचे। ऐसा करने पर सर्दी व बुखार होने की आशंका बढ़ जाती है। डायरिया, कांस्टिपेशन व एसिडिटी से बचाव को पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें।
श्री शांतिनिकेतन नाइट हाई स्कूल में मनाया गया महाराष्ट्र दिवस

मुंबई। पश्चिमी उपनगर के प्रतिष्ठित श्री शांतिनिकेतन नाइट हाई स्कूल में विगत वर्षों की तरह इस वर्ष भी धूमधाम के साथ महाराष्ट्र दिवस मनाया गया। इस अवसर पर बोलते हुए स्कूल के संस्थापक चेयरमैन एल पी मिश्रा ने मराठी में भाषण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र दिवस, जो हर साल 1 मई को मनाया जाता है, 1 मई 1960 को भाषाई आधार पर महाराष्ट्र राज्य के गठन की याद दिलाता है। यह दिवस मराठी भाषियों की अस्मिता, संस्कृति और 'संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन' के संघर्षों के प्रति सम्मान का प्रतीक है, जिसमें मुंबई को राज्य का हिस्सा बनाने के लिए 106 लोग शहीद हुए थे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र दिवस आपसी प्रेम और सौहार्द का प्रतीक है। हम सबको मिलकर महाराष्ट्र के विकास में अपना योगदान देना चाहिए। इस अवसर पर मुकेश द्विवेदी, प्रियंका पांडे, संतोष समेत अनेक शिक्षक और बच्चे उपस्थित रहे।
देवघर -1मई अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर पुराना सदर अस्पताल से प्रतिरोध मार्च निकाला गया।
देवघर: मई अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन AIPWA एवम् ऑल इंडिया स्कीम वर्कर फेडरेशन AICCTU के राष्ट्रीय अध्यक्ष गीता मंडल के नेतृत्व में पुराना सदर अस्पताल से प्रतिरोध मार्च निकला गया प्रतिरोध मार्च के माध्यम से केंद्र के मजदूर विरोधी एवं महिला विरोधी नारा के साथ जुलूस निकाला गया और कचहरी परिसर सूचना भवन के सामने सभा का आयोजन किया गया सभा का अध्यक्षता झारखंड राज्य विद्यालय रसोइया संघ की जिला सचिव मीनू देवी ने की एवं संचालन निर्माण मजदूर के नेता कॉम अशोक महतो ने किया कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गीता मंडल ने कहा 1 अप्रैल 2026 मजदूर विरोधी एवं मालिक पक्षीय श्रम _संहिता को लागू कर दिया है। इसे निरस्त कर पुराना श्रम कानून को पुनर्बहाल करने की मांग किया गया ,केंद्र की मोदी सरकार महिला आरक्षण का झूठा प्रचार फैलाया हुआ है जबकि 2023 में ही महिला आरक्षण पारित किया गया है इसे तुरंत लागू करे और आदिवासी,दलित और पिछड़ा वर्ग के महिलाओं को भी आरक्षण मिले केंद्र सरकार को यदि महिलाओं के प्रति सहानुभूति है तो देश में एक करोड़ से अधिक महिलाएं रसोइया,सहिया,सेविका,सहायिका,जलसहिया आदि अन्य अनुबंध महिला कर्मचारियों के जीविकोपार्जन के लिए लोकसभा का विशेष सत्र बुलाकर सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने का बिल पारित करे या नहीं तो जबतक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं तब तक सम्मानजनक मानदेय कम_से_कम 26 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय भुगतान करने की गारंटी करे तब मोदी सरकार का महिलावादी का असली चरित्र सामने आएगा। कार्यक्रम को भाकपा माले जिला सचिव कॉम रघुपति पंडित,जिला कमिटी सदस्य जयदेव सिंह,शंभू तुरी,रसोइया संघ की जिला उपाध्यक्ष चिंता देवी,अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन की जिला उपाध्यक्ष चमेली ने संबोधित किया इसके अलावा मुनि देवी,सुनीता किस्कु,सरस्वती देवी,पुतुल देवी,चंपा देवी,जगदंबा देवी,कविता देवी,लीला देवी,रिंकू देवी,sumiya देवी,मोना देवी,सुनीता देवी,रंजू देवी,सोनू भारती,लक्ष्मण मंडल,शंकर पंडित आदि दर्जनों लोगों ने भाग लिया।