पीटी उषा के पति वी श्रीनिवास का निधन, घर में इस हालत में मिला शव

#ptushashusbandvsrinivasanpasses_away

Image 2Image 3

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य पी टी उषा के पति वी श्रीनिवासन का शुक्रवार तड़के निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, उनका देहांत केरल के कोझिकोड स्थित आवास पर हुआ। वे 67 वर्ष के थे।

श्रीनिवासन अपने घर थिक्कोडी पेरुमलपुरम में लगभग 1:00 बजे गिर पड़े थे। उन्हें तुरंत पास के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह घटना तब हुई जब पीटी उषा एक संसदीय सत्र से लौट रही थीं और घर पर मौजूद नहीं थीं।

किरेन रिजिजू का ट्वीट

किरेन रिजिजू ने ट्वीट करते हुए लिखा कि राज्यसभा सांसद और इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन की प्रेसिडेंट पी टी उषा जी के पति श्री वी. श्रीनिवासन जी के निधन के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ। उषा जी और शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। इस मुश्किल समय में उन्हें शक्ति मिले, इसके लिए प्रार्थना।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया शोक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीटी उषा से फोन पर बात कर उनके पति के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने इस कठिन समय में परिवार के प्रति अपनी सहानुभूति और समर्थन भी जताया।

कौन थे वी. श्रीनिवासन?

वी. श्रीनिवासन का जन्म कुट्टिक्काड पोन्नानी के वेंगाली थारवाद में नारायणन और सरोजिनी के घर हुआ था। वे सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) में उप अधीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने 1991 में पीटी उषा से शादी की थी, जो उनकी दूर की रिश्तेदार भी थीं।

उषा के जीवन और करियर में निभाई अहम भूमिका

केंद्र सरकार के पूर्व कर्मचारी श्रीनिवासन उषा के शानदार खेल करियर और राजनीतिक करियर के दौरान हमेशा उनके साथ रहे। उन्हें उषा का मजबूत संबल और उनकी कई पेशेवर उपलब्धियों के पीछे प्रेरक शक्ति माना जाता था। इस दंपति का एक बेटा है जिसका नाम उज्ज्वल है।

एनओसी के फेर में फंसा अस्पताल का फायर हाइड्रेंट सिस्टम


*आग से बचाव के लिए जिला अस्पताल ज्ञानपुर में लगा है उपकरण,1.20 करोड़ का है प्रोजेक्ट*


नितेश श्रीवास्तव

भदोही। महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय में दो साल पहले शुरू हुआ फायर हाइड्रेंड सिस्टम का काम अब 98 फीसदी पूरा हो चुका है। अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण फायर हाइड्रेंड सिस्टम का संचालन शुरू नहीं हो सका है। यह 1.20 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है। अस्पताल परिसर में धुंआ उठते ही सेंसर आवाज करने लगेगा, इससे समय रहते आग पर काबू पाया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मी को प्रशिक्षित किया जाएगा। देश के कई अस्पतालों में अगलगी की घटनाओं में मरीजों की मौत हो चुकी है। शासन के निर्देश पर अस्पतालों में बचाव के लिए पहल की जा रही है। जिला अस्पताल में लगने वाले फायर हाइड्रेंड सिस्टम से जिला अस्पताल के हर बिल्डिंग को जोड़ा गया है। ओपीडी भवन, इमरजेंसी, ब्लड बैंक, एनआरसी, लेबर कक्ष, ऑपरेशन थियेटर, लैब, एक्स-रे कक्ष आदि स्थानों कहीं भी धुआं उठते ही सेंसर आवाज करने लगेगा। सायरन बजते ही स्वास्थ्य कर्मी अलर्ट मोड़ में होगे। फायर सिस्टम चालू करने पर पाइप के माध्यम से पानी के फुहारे आग की लपटों पर गिरेगी। इससे आग पर तुंरत काबू पाया जाएगा। अस्पताल में रोजाना एक हजार की ओपीडी होती है। वहीं, तीन से चार हजार मरीजों की भीड़ रहती है। जनवरी 2024 में फायर हाइड्रेंट सिस्टम कार्य शुरू हुआ था। जून 2025 हैंडओवर की अंतिम डेड लाइन थी। शासन से बजट समय से नहीं मिलने के कारण स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों ने हैंडओवर की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 कर दिया। इस डेडलाइन से पहले ही फायर सिस्टम बनकर तैयार हो गया। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने जिला अस्पताल का निरीक्षण भी कर लिया हैं, लेकिन अभी तक एनओसी नहीं मिली। इससे कार्यदायी संस्था ने प्रोजेक्ट को हैंडओवर नहीं किया।


छह स्वास्थ्यकर्मी होंगे प्रशिक्षित
फायर हाईड्रेंड सिस्टम को संचालित करने के लिए अग्निशमन विभाग की ओर से जिला अस्पताल के छह चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। आगजनी की घटना के बाद कैसे आग पर काबू पाया जाएगा। कर्मचारियों को अस्पताल में ट्रेंनिग दी जाएगी। इस दौरान पूरे सिस्टम को ऑन करके दिखाया जाएगा। आग कैसे बुझानी है, इसके बारे में बताया जाएगा। एक लाख लीटर पानी हमेशा संरक्षित रहेगा। इसके लिए टंकी का निर्माण कराया गया है।


सीएफओ ने फायर हाइड्रेंट सिस्टम के लिए अस्पताल का निरीक्षण किया है। अग्निशमन से एनओसी जारी होते ही हैंडओवर लिया जाएगा। आगजनी की घटना में यह प्रभावशाली होगा। - डॉ. अजय तिवारी सीएमएस जिला अस्पताल
मुठभेड़ के बाद 20 हजार का इनामी बदमाश विकास उर्फ अटरिया गिरफ्तार ।

ब्रह्म प्रकाश शर्मा

मुजफ्फरपुर/जानसठ, । जनपद में अपराध और अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे जीरो टॉलरेंस अभियान के तहत जानसठ पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। गुरुवार को पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में ₹20,000 का इनामी और शातिर अपराधी विकास उर्फ अटरिया पुलिस की गोली लगने से घायल हो गया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पकड़े गए अभियुक्त के पास से अवैध हथियार और नकदी बरामद हुई है।
मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी, गढ़ी-नया गांव मार्ग पर हुई मुठभेड़ ।

पुलिस प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, थाना जानसठ पुलिस वांछित अपराधियों की तलाश में सक्रिय थी। इसी दौरान थाना प्रभारी विनोद कुमार सिंह को मुखबिर से सूचना मिली कि गढ़ी-नया गांव मार्ग पर स्थित एक सरकारी ट्यूबवेल के पास इनामी बदमाश विकास अटरिया छिपा हुआ है।

सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी की। पुलिस को देखते ही अभियुक्त विकास ने जान से मारने की नीयत से पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी और ईख के खेतों की ओर भागने लगा।

आत्मरक्षार्थ पुलिस ने की जवाबी फायरिंग पुलिस टीम ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बदमाश का पीछा किया और उसे आत्मसमर्पण के लिए चेतावनी दी। इसके बावजूद अभियुक्त ने फायरिंग जारी रखी। पुलिस ने आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की, जिसमें एक गोली अभियुक्त के पैर में लगी और वह घायल होकर गिर पड़ा। पुलिस ने तत्काल उसे हिरासत में लेकर उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया।पुलिस ने उसके पास से  01 अवैध तमंचा (315 बोर) जिंदा व खोखा कारतूस 3,320 रुपये नकद जो थाना जानसठ और ककरौली की विभिन्न चोरी व लूट की घटनाओं होना बताया और बरामद करने का दावा किया है पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्त विकास उर्फ अटरिया (निवासी: ग्राम योगेन्द्रनगर, थाना भोपा) एक हिस्ट्रीशीटर अपराधी है। इसके विरुद्ध मुजफ्फरनगर और शामली के विभिन्न थानों में हत्या के प्रयास, लूट, चोरी और गैंगस्टर एक्ट जैसे 20 गंभीर मामले दर्ज हैं। यह लंबे समय से वांछित चल रहा था और पुलिस ने इस पर ₹20,000 का इनाम घोषित कर रखा था।

ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में थाना प्रभारी विनोद कुमार सिंह, उपनिरीक्षक दीपक कुमार, दीपक शर्मा और कांस्टेबल अनुज, कपिल व विजय कुमार शामिल रहे।
आजमगढ़:आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
आजमगढ़:आंगनवाड़ी संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश के आवाह्न पर जनपद आज़मगढ़ की इकाई ने अपनी लंबित जायज मांगों तथा वर्तमान की ज्वलंत समस्याओं के समाधान हेतु आज जिला मुख्यालय पर पदाधिकारियों द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी को संबोधित मांगपत्र जिलाधिकारी को सौपा गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष श्रीमती हेमा गुप्ता ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकत्रिया एवं सहायिकायें विगत कई दशकों से महिला एवं बाल विकास विभाग की आधारशिला के रूप में कार्य करते हुए पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, टीकाकरण, मातृ-शिशु देखभाल सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की अनेकों योजनाओं का सफल क्रियान्वयन करती चली आ रही हैं।इसके बावजूद आज भी आंगनवाड़ी कर्मचारियों को न तो पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्राप्त है और न ही उन्हें वैधानिक सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मानजनक सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारी मांगों से संबंधित ज्ञापन सरकार को अनगिनत बार पूर्व में दिया जा चुका है, किंतु सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं की गई। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानसिक और आर्थिक शोषण बढ़ता जा रहा है। इसलिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कोई भी काम कराने से पहले संसाधन मुहैया कराया जाए साथ ही सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और जब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जाता तब तक उनका मानदेय में बढ़ोत्तरी करते हुए सम्मानजनक मानदेय दिया जाए। जिससे इस महंगाई में वह अपना व परिवार का भरण पोषण कर सकें और प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा लिखित या मौखिक आदेश के माध्यम से सेवा समाप्ति का भय दिखाकर राजनीतिक कार्यक्रमों/समारोहों में भीड़ के रूप में उपयोग किए जाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए जिलाध्यक्ष नीतू पांडेय ने कहा विभागीय कार्यों को आफलाइन से आनलाइन कार्य करने की बदलती प्रक्रिया में हम आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अथक मेहनतकर ई केवाईसी तथा एफ आर एस की योजना को सफल बनाने का पुरजोर प्रयास किया है किन्तु विभाग द्वारा प्राप्त घटिया खराब मोबाइल तथा कमजोर नेटवर्क के कारण टी एच आर वितरण के समय एफ आर एस जैसी प्रक्रिया को कर पाना नामुमकिन हो रहा है।इसलिए पोषण ट्रैकर पर आनलाइन कार्य हेतु उच्च गुणवत्ता के 5G मोबाइल फोन की खरीद के लिए कम से कम 20,000 रू तथा प्रतिमाह 2,500 रू रीचार्ज एवं डाटा भत्ता अविलंब प्रदान किया जाए। जिलाध्यक्ष कंचन यादव ने कहा कि सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 20 से 40 वर्ष हो गये विभाग के कार्य करते हुए ऐसे में न तो प्रमोशन मिला, न पेंशन है, न ग्रेच्युटी है, न ही उचित मानदेय है, न कोई भविष्य निधि है, न कोई सामाजिक सुरक्षा फण्ड है, कमरतोड़ महंगाई में इतना अल्प मानदेय है कि भविष्य के लिए कुछ किया भी नहीं जा सकता है।आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा, शादी तथा मकान का सपना लिए दूसरे का बोझ बनकर असमय मृत्यु का शिकार हो रहीं हैं। इसलिए आंगनवाड़ी संघों के साथ उनकी समस्याओं के समाधान एवं योजनाओं के प्रभावी संचालन हेतु नियमित सरकारी बैठकें सुनिश्चित की जाएं। यदि समय रहते हमारी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता विवश होकर दिनाँक 08 मार्च 2026 को लखनऊ की ओर कूच करेंगी। जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने में श्रीमती गूंजा बरनवाल, प्रेमशीला यादव,सुशीला देवी, रेखा बिंद,शशिकला यादव, पूनम सिंह, सुनीला देवी, वंदना मौर्या, अमिता सिंह, किरन, सुनीता, गीता, नीलम, शोभावती, संध्या, पूनम,अनीता, सीता, रिंकू, मधुबाला, मीरा, मनीता,संगीता सुषमा, आशा,सरिता, विमला,सीमा, प्रमिला, प्रतिभा ऊषा इत्यादि सभी लोग उपस्थित रहीं।
कोचिंग सेंटरों की मनमानी पर सख्ती की मांग, छात्रों के हित के लिए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद बड़ा मुद्दा उठाया

नई दिल्ली- देश के लाखों छात्रों को निजी कोचिंग संस्थानों (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) की मनमानी से बचाने के लिए रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार से निर्णायक हस्तक्षेप की मांग की है।

असल में स्कूली छात्र कॉम्पिटिशन की तैयारी के लिए अलग अलग कोचिंग संस्थानों में पढाई करते हैं जहाँ उन्हें आईआईटी, एनआईटी, एम्स जैसे संस्थानों में गारंटी शुदा एडमिशन का प्रलोभन दिया जाता है और एक मुश्त पूरी फीस जमा करवा ली जाती है। गरीब, ग्रामीण एवं मध्यम वर्गीय परिवार भी सोना, ज़मीन बेचकर एवं क़र्ज़ लेकर होने बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए यह फीस अदा करते हैं।

लेकिन अगर उन्हें अनुकूल पढाई का वातावरण ना मिलने पर अगर वह संस्थान कोचिंग छोड़ना चाहे तो यह सेंटर मनमानी करते हैं, जिससे माँ बाप एवं बच्चे दोनों मानसिक रूप से प्रताड़ित होते हैं। हालांकि शिक्षा मंत्रालय (केंद्र सरकार) ने वर्ष 2024 में विभिन्न कोचिंग सेंटर के संदर्भ में गाइडलाइंस ज़ारी की है लेकिन इनका ज़मीनी स्तर पर पालन नहीं हो रहा है। उल्लेखनीय है कि यह मुद्दा सिर्फ स्कूली बच्चों तक नहीं बल्कि प्रोफेशनल कॉम्पिटिटिव एग्जाम जैसे यूपीएससी के लिए जाने वाले युवाओं के लिए भी प्रासंगिक है, दिल्ली जैसे महानगरों में युवा जाते हैं और भारी भरकम फीस जमा करते हैं लेकिन उन्हें भी इस प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। इसीलिए लोकसभा में इस विषय पर सांसद अग्रवाल ने अपनी बात रखी है। सांसद अग्रवाल का य़ह भी कहना है कि मेरा कार्यालय इस संबंध में सभी छात्रों के हित के लिए चौबीस घंटे खुलसांसद अग्रवाल द्वारा सरकार से किए गए प्रमुख आग्रह:

1) सभी राज्य सरकारें विद्यार्थियों द्वारा बीच में संस्थान छोड़ने पर 10 दिनों के भीतर फीस रिफंड का अनुपालन करने की अनिवार्यता का नियम बनाएं।

2) छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में इन कोचिंग संस्थानों के विवाद के निपटारे हेतु फ़ास्ट ट्रैक निवारण सेल स्थापित किये जाने के हेतु, छात्र/जन हित में सभी राज्य सरकारों को दिशा निर्देश देने का कष्ट करेंगे।

3) गाइडलाइन्स (2024) का कड़ाई से पालन होना सुनिश्चित करवाया जाए

रायपुर एवं दुर्ग-भिलाई मध्य भारत के कोटा के रूप में स्थापित हो रहे हैं एवं प्रदेश के बिलासपुर एवं रायगढ़ भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स भी छात्रों के बीच अपनी जगह बना रहे हैं परन्तु स्कूली विद्यार्थी इन कोचिंग संस्थानों के फीस - ट्रैप - मोनोपोली का शिकार बन रहे हैं।ा भी है।

रोड एक्सीडेंट में घायल मंडल उपाध्यक्ष धर्ममणि पाण्डेय का हालचाल जानने पहुँचे मंडल अध्यक्ष






आजमगढ़ बूढनपुर कोयलसा मंडल उपाध्यक्ष धर्ममणि पाण्डेय हाल ही में सड़क दुर्घटना में घायल हो गए। दुर्घटना की सूचना मिलते ही मंडल अध्यक्ष रूद्रप्रकाश शर्मा अन्य पदाधिकारियों के साथ उनके कुशलक्षेम की जानकारी लेने अस्पताल पहुँचे।मंडल अध्यक्ष रूद्रप्रकाश शर्मा ने श्री पाण्डेय से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सकों से भी बातचीत कर उपचार की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की। चिकित्सकों के अनुसार धर्ममणि पाण्डेय की हालत अब स्थिर है और उनका उपचार जारी है।मुलाकात के दौरान मंडल के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने घायल उपाध्यक्ष के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। मंडल अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि संगठन हर समय उनके साथ खड़ा है और किसी भी प्रकार की आवश्यकता होने पर पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाएगा।इस मौके पर बीरेंद्र सिंह अशोक कुमार मिश्र एडवोकेट राघवेंद्र पाण्डेय, मनोज सिंह उपेंद्र नाथ पाण्डेय,सहित अन्य लोग मौजूद रहे
कम हो गई कड़वाहट! राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मिले शशि थरूर

#shashitharoormeetrahulgandhiandkharge

Image 2Image 3

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गुरुवार को संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब शशि थरूर की पार्टी नेतृत्व से नाराजगी की खबरें आ रही हैं।

संसद में गुरुवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर राहुल गांधी के ऑफिस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मुलाकात की। यह आधे घंटे से अधिक समय तक चली। इस बैठक के बाद थरूर ने मुस्कुराते हुए कहा, "सब ठीक है।" उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर चल रहे मतभेदों और असंतोष की खबरों पर फिलहाल विराम लगा दिया है।

हम सब एक साथ मिलकर काम कर रहे- थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, 'मेरी पार्टी के 2 नेताओं, नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष के साथ हमारी बातचीत हुई। हमारी बहुत अच्छी, रचनात्मक, सकारात्मक बातचीत हुई। सब ठीक है और हम सब एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। मैं और क्या कह सकता हूं?... मैंने हमेशा पार्टी के लिए प्रचार किया है, मैंने कहां प्रचार नहीं किया है?

उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं-थरूर

जब उनसे पूछा गया कि क्या केरल के मुख्यमंत्री के बारे में बात हुई, तो उन्होंने कहा, 'नहीं, इस बारे में कभी बात नहीं हुई। मुझे किसी भी चीज़ के लिए उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। अभी, मैं पहले से ही सांसद हूं और तिरुवनंतपुरम के मेरे वोटर्स का मुझ पर भरोसा है। मुझे संसद में उनके हितों का ध्यान रखना है, यही मेरा काम है।'

शशि थरूर लगातार सुर्खियों में

बता दें कि हाल के महीनों में शशि थरूर लगातार सुर्खियों में रहे हैं। कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ को लेकर। कभी पार्टी बैठकों से दूरी को लेकर। कभी केरल कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर। बीते कुछ समय में शशि थरूर ने कई अहम बैठकों में हिस्सा नहीं लिया। केरल चुनाव की रणनीति पर होने वाली बैठक में वे नहीं पहुंचे। सोनिया गांधी के आवास पर हुई मीटिंग भी मिस की। वजह यात्रा बताई गई। लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक अंदरूनी नाराजगी की बात भी सामने आई।

थरूर ने माना-कुछ मुद्दे हैं

वहीं, थरूर ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि कुछ मुद्दे हैं, जिन्हें वे पार्टी के मंच पर उठाना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा था कि उन्होंने कभी भी संसद में पार्टी के तय रुख का उल्लंघन नहीं किया है। थरूर ने कहा था, 'मैं बस इतना कह सकता हूं कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें मुझे अपने पार्टी नेतृत्व के साथ उठाना है, न कि किसी सार्वजनिक मंच पर। मैं संसद के लिए दिल्ली जाऊंगा, और मुझे मौका मिलेगा, मेरा मानना है, कि मैं अपनी चिंताओं को पार्टी नेतृत्व के सामने बहुत स्पष्ट रूप से रख सकूं और उनका दृष्टिकोण जान सकूं, एक उचित बातचीत कर सकूं।'

UGC के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, कहा-दुरुपयोग का खतरा

#supreme_court_stayed_ugc_equity_regulations_2026

Image 2Image 3

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के नए नियमों को लेकर पूरे देशभर में जबरदस्त विरोध हो रहा है। नए नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सुनवाई हुई है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला किया है और यूजीसी के नियम पर फिलहाल रोक लगा दी है।

केंद्र को नोटिस जारी, 19 मार्च तक मांगा जवाब

सीजेआई सूर्यकांत की बेंच कहा कि ये प्रावधान पहली नज़र में अस्पष्ट हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया और जवाब तलब किया। सीजेआई सूर्यकांत ने केंद्र सरकार को रेगुलेशंस को फिर से बनाने के लिए कहा है, तब तक इनका संचालन रोक दिया गया है। अदालत ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी कर 19 मार्च तक जवाब देने को कहा है।

कोर्ट ने पूछा अहम सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के 23 जनवरी को जारी किए गए 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने' वाले नियमों में इस्तेमाल किए गए शब्दों पर सवाल उठाए। जस्टिस बागची ने कहा कि रेगुलेशन में इस्तेमाल किए गए शब्दों से ऐसा लगता है कि इनका दुरुपयोग हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हम समाज में एक निष्पक्ष और सबको साथ लेकर चलने वाला माहौल बनाना चाहते हैं। जस्टिस बागची ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि जब पहले से ही 3 'E' मौजूद हैं, तो फिर 2 'C' की क्या जरूरत पड़ जाती है? यह सवाल नियमों की प्रासंगिकता पर उठाया गया था।

दरअलस, यूजीसी के नए नियमों पर बीते कुछ दिनों से बवाल जारी है। सवर्ण तबके के स्टूडेंट्स इन नियमों का विरोध कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले यानी बुधवार को ही यूजीसी नियमों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने के लिए हामी भरी थी। याचिका में कहा गया है कि ये नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के खिलाफ भेदभाव पैदा कर सकते हैं। मामला राहुल देवन और अन्य बनाम केंद्र सरकार है। सीजेआई सूर्यकांत ने याचिका को सुनवाई के लिए आज लिस्ट किया था।

बाबू शोभनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा गणतंत्र दिवस एवं बसंतोत्सव संपन्न

मुंबई। साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था बाबू शोभनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट 'पालघर इकाई',दिल्ली इकाई, म.प्र.इकाई सहित राष्ट्रीय कमेटी ने गणतंत्र दिवस एवं बसंतोत्सव पर कविगोष्ठी का आयोजन किया।म.प्र.इकाई के मुख्य अतिथि शशि भार्गव,विशिष्ट अतिथि ए पी द्विवेदी एवं अध्यक्षता सत्यभामा सिंह ने किया। डॉ निशि मंजवानी के संयोजन एवं संचालन में नंदिनी तोमर,गणेश प्रसाद गौतम,डॉ शरद नारायण खरे,कविता पारस झा,अंकिता यादव,भारती खरे ने काव्य पाठ किया।दिल्ली इकाई की अध्यक्षता सत्यभामा सिंह जिया एवं संचालन आशा दिनकर आश ने किया।डॉ गीता विश्वकर्मा के सरस्वती वंदना से शुभारंभ तत्पश्चात अवधेश श्रीवास्तव,रेखा जी,मनोज मंजुल कासगंज,रामदेव राही मथुरा, प्रमोद राणा हापुड़,दीपा शर्मा फरीदाबाद,शोएब सादिक गाजियाबाद,सुरेश कुमार बंछोर, प्रमिला कौशिक, प्रेम टंडन,डॉ सुशीला शर्मा,जागृति सिंह अजय ने दिल्ली इकाई अध्यक्ष डॉ मधु स्वामी के आयोजन में काव्य पाठ किया।पालघर इकाई की गोष्ठी में इकाई अध्यक्ष किरण तिवारी की पुस्तक अंतर्द्वंद पर परिचर्चा एवं मासिक काव्यगोष्ठी उनके निवास स्थान पर रखी गई।

अध्यक्षता डॉ कृपा शंकर मिश्रा एवं मुख्य अतिथि के रूप में शिवकुमार सिंह,विशिष्ट अतिथि निडर जौनपुरी, रासबिहारी पांडे एवं अमरनाथ दुबे उपस्थित थे।सरस्वती वंदना पश्चात किरण तिवारी की पुस्तक 'अंतर्द्वंद' पर परिचर्चा कृपा शंकर मिश्र, सत्यभामा सिंह एवं शिवकुमार सिंह द्वारा किया गया।राजेश दुबे अल्हड़ असरदार के संचालन में काव्य गोष्ठी का आरंभ हुआ सभी कवि -कवित्रियों ने अपनी अपनी रचना गीत,गजल,छंद,दोहे, कविता सुनी और सुनाई। उक्त कार्यक्रम का आयोजन रमेश तिवारी ने किया तथा किरण तिवारी ने आभार व्यक्त किया।
कामचोरी करने वाले फौज की जरूरत नहीं, सरकार दे रही लाखों का बजट , आखिर कहां गए उपकरण,अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों पर की जाए निलंबन की कार्रवाई
फर्रुखाबाद l शासन स्वास्थ्य महकमा में चाक चौबंद व्यवस्था बनाए रखने के लिए लाखों रुपए का बजट दे रहा है लेकिन इसके बावजूद भी उपकरणों की चोरी फर्जी वाउचर और नियमित अस्पताल न जाने की शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को 72 घंटे में ऐसे कर्मचारियों और स्वास्थ्य महिमा की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश दिए हैं l उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि कामचोरी करने वाले कर्मचारियों को चिन्हित करके उनके खिलाफ अपने एवं शासन स्तर पर कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए हैं l जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने जिला स्वास्थ्य समिति की मासिक बैठक के दौरान चिकित्सालयों में फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति पर नाराजगी व्यक्त की, जिलाधिकारी ने सातो विकास खंडो की रिपोर्ट 72 घंटे के अंदर प्रस्तुत करने को कहा है ,जिलाधिकारी ने कहा कि कहां पर कौन से उपकरण उपलब्ध नहीं है और कोल्ड चैन कहां पर  है और काम नहीं कर रही, जिलाधिकारी ने कहा कि शमशाबाद क्षेत्र के जर्जर चिकित्सालय  के संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं l उन्होंने कहा कि तीन लोगों की समिति बनाकर निष्क्रिय कर्मचारियों को चिन्हित करने व सेवा मुक्त करने हेतु आवश्यक कार्यवाही करे, ऐसा न करने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध भी कठोर कार्यवाही की जाए l इस दौरान जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को प्रतिदिन निगरानी करने और अधीनस्थों से आवश्यक डाटा प्रतिदिन प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं l उन्होंने कहा कि निकम्मों की फौज की कोई जरूरत नहीं है ,प्रति माह एक लाख आयुष्मान कार्ड बनाएं सक्षम प्राधिकारी  इस पर ध्यान दें, अधीनस्थ अपना 100 प्रतिशत तक कार्य संपन्न नहीं हुआ प्रतिरक्षण अधिकारी व  अधीनस्थ  का कार्य भी संतोषजनक नहीं है । जिलाधिकारी ने तत्काल सुधार करने को कहा,कायमगंज में कार्य का प्रतिशत 41 प्रतिशत है उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाए निष्क्रिय कार्य के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों को आरोप पत्र देकर निलंबित करें तभी सुधार होगा, जिलाधिकारी ने एजेंडा रूपांतरित करने के निर्देश दिए टीकाकरण में विभाग की प्रगति अच्छी है l जिलाधिकारी ने चिकित्सा विभाग को बेसिक शिक्षा विभाग व पंचायती राज विभाग से समन्वय स्थापित करके कार्य करने के निर्देश दिए ताकि एक कार्य के त्रिआयामी बेहतर परिणाम प्राप्त हो सके बीएसए से कुल स्कूल व उसके बच्चे एवं उनके क्षेत्र का विवरण प्राप्त कर ले यदि कोई स्कूल मना करे तो बताएं आयुष्मान कार्ड बनने की प्रगति की समीक्षा प्रतिदिन 9:00 बजे होगी बैठक में संबंधित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे l
पीटी उषा के पति वी श्रीनिवास का निधन, घर में इस हालत में मिला शव

#ptushashusbandvsrinivasanpasses_away

Image 2Image 3

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य पी टी उषा के पति वी श्रीनिवासन का शुक्रवार तड़के निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, उनका देहांत केरल के कोझिकोड स्थित आवास पर हुआ। वे 67 वर्ष के थे।

श्रीनिवासन अपने घर थिक्कोडी पेरुमलपुरम में लगभग 1:00 बजे गिर पड़े थे। उन्हें तुरंत पास के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह घटना तब हुई जब पीटी उषा एक संसदीय सत्र से लौट रही थीं और घर पर मौजूद नहीं थीं।

किरेन रिजिजू का ट्वीट

किरेन रिजिजू ने ट्वीट करते हुए लिखा कि राज्यसभा सांसद और इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन की प्रेसिडेंट पी टी उषा जी के पति श्री वी. श्रीनिवासन जी के निधन के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ। उषा जी और शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। इस मुश्किल समय में उन्हें शक्ति मिले, इसके लिए प्रार्थना।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया शोक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीटी उषा से फोन पर बात कर उनके पति के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने इस कठिन समय में परिवार के प्रति अपनी सहानुभूति और समर्थन भी जताया।

कौन थे वी. श्रीनिवासन?

वी. श्रीनिवासन का जन्म कुट्टिक्काड पोन्नानी के वेंगाली थारवाद में नारायणन और सरोजिनी के घर हुआ था। वे सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) में उप अधीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने 1991 में पीटी उषा से शादी की थी, जो उनकी दूर की रिश्तेदार भी थीं।

उषा के जीवन और करियर में निभाई अहम भूमिका

केंद्र सरकार के पूर्व कर्मचारी श्रीनिवासन उषा के शानदार खेल करियर और राजनीतिक करियर के दौरान हमेशा उनके साथ रहे। उन्हें उषा का मजबूत संबल और उनकी कई पेशेवर उपलब्धियों के पीछे प्रेरक शक्ति माना जाता था। इस दंपति का एक बेटा है जिसका नाम उज्ज्वल है।

एनओसी के फेर में फंसा अस्पताल का फायर हाइड्रेंट सिस्टम


*आग से बचाव के लिए जिला अस्पताल ज्ञानपुर में लगा है उपकरण,1.20 करोड़ का है प्रोजेक्ट*


नितेश श्रीवास्तव

भदोही। महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय में दो साल पहले शुरू हुआ फायर हाइड्रेंड सिस्टम का काम अब 98 फीसदी पूरा हो चुका है। अग्निशमन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण फायर हाइड्रेंड सिस्टम का संचालन शुरू नहीं हो सका है। यह 1.20 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है। अस्पताल परिसर में धुंआ उठते ही सेंसर आवाज करने लगेगा, इससे समय रहते आग पर काबू पाया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मी को प्रशिक्षित किया जाएगा। देश के कई अस्पतालों में अगलगी की घटनाओं में मरीजों की मौत हो चुकी है। शासन के निर्देश पर अस्पतालों में बचाव के लिए पहल की जा रही है। जिला अस्पताल में लगने वाले फायर हाइड्रेंड सिस्टम से जिला अस्पताल के हर बिल्डिंग को जोड़ा गया है। ओपीडी भवन, इमरजेंसी, ब्लड बैंक, एनआरसी, लेबर कक्ष, ऑपरेशन थियेटर, लैब, एक्स-रे कक्ष आदि स्थानों कहीं भी धुआं उठते ही सेंसर आवाज करने लगेगा। सायरन बजते ही स्वास्थ्य कर्मी अलर्ट मोड़ में होगे। फायर सिस्टम चालू करने पर पाइप के माध्यम से पानी के फुहारे आग की लपटों पर गिरेगी। इससे आग पर तुंरत काबू पाया जाएगा। अस्पताल में रोजाना एक हजार की ओपीडी होती है। वहीं, तीन से चार हजार मरीजों की भीड़ रहती है। जनवरी 2024 में फायर हाइड्रेंट सिस्टम कार्य शुरू हुआ था। जून 2025 हैंडओवर की अंतिम डेड लाइन थी। शासन से बजट समय से नहीं मिलने के कारण स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों ने हैंडओवर की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 कर दिया। इस डेडलाइन से पहले ही फायर सिस्टम बनकर तैयार हो गया। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने जिला अस्पताल का निरीक्षण भी कर लिया हैं, लेकिन अभी तक एनओसी नहीं मिली। इससे कार्यदायी संस्था ने प्रोजेक्ट को हैंडओवर नहीं किया।


छह स्वास्थ्यकर्मी होंगे प्रशिक्षित
फायर हाईड्रेंड सिस्टम को संचालित करने के लिए अग्निशमन विभाग की ओर से जिला अस्पताल के छह चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। आगजनी की घटना के बाद कैसे आग पर काबू पाया जाएगा। कर्मचारियों को अस्पताल में ट्रेंनिग दी जाएगी। इस दौरान पूरे सिस्टम को ऑन करके दिखाया जाएगा। आग कैसे बुझानी है, इसके बारे में बताया जाएगा। एक लाख लीटर पानी हमेशा संरक्षित रहेगा। इसके लिए टंकी का निर्माण कराया गया है।


सीएफओ ने फायर हाइड्रेंट सिस्टम के लिए अस्पताल का निरीक्षण किया है। अग्निशमन से एनओसी जारी होते ही हैंडओवर लिया जाएगा। आगजनी की घटना में यह प्रभावशाली होगा। - डॉ. अजय तिवारी सीएमएस जिला अस्पताल
मुठभेड़ के बाद 20 हजार का इनामी बदमाश विकास उर्फ अटरिया गिरफ्तार ।

ब्रह्म प्रकाश शर्मा

मुजफ्फरपुर/जानसठ, । जनपद में अपराध और अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे जीरो टॉलरेंस अभियान के तहत जानसठ पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। गुरुवार को पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में ₹20,000 का इनामी और शातिर अपराधी विकास उर्फ अटरिया पुलिस की गोली लगने से घायल हो गया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पकड़े गए अभियुक्त के पास से अवैध हथियार और नकदी बरामद हुई है।
मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी, गढ़ी-नया गांव मार्ग पर हुई मुठभेड़ ।

पुलिस प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, थाना जानसठ पुलिस वांछित अपराधियों की तलाश में सक्रिय थी। इसी दौरान थाना प्रभारी विनोद कुमार सिंह को मुखबिर से सूचना मिली कि गढ़ी-नया गांव मार्ग पर स्थित एक सरकारी ट्यूबवेल के पास इनामी बदमाश विकास अटरिया छिपा हुआ है।

सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी की। पुलिस को देखते ही अभियुक्त विकास ने जान से मारने की नीयत से पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी और ईख के खेतों की ओर भागने लगा।

आत्मरक्षार्थ पुलिस ने की जवाबी फायरिंग पुलिस टीम ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बदमाश का पीछा किया और उसे आत्मसमर्पण के लिए चेतावनी दी। इसके बावजूद अभियुक्त ने फायरिंग जारी रखी। पुलिस ने आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की, जिसमें एक गोली अभियुक्त के पैर में लगी और वह घायल होकर गिर पड़ा। पुलिस ने तत्काल उसे हिरासत में लेकर उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया।पुलिस ने उसके पास से  01 अवैध तमंचा (315 बोर) जिंदा व खोखा कारतूस 3,320 रुपये नकद जो थाना जानसठ और ककरौली की विभिन्न चोरी व लूट की घटनाओं होना बताया और बरामद करने का दावा किया है पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्त विकास उर्फ अटरिया (निवासी: ग्राम योगेन्द्रनगर, थाना भोपा) एक हिस्ट्रीशीटर अपराधी है। इसके विरुद्ध मुजफ्फरनगर और शामली के विभिन्न थानों में हत्या के प्रयास, लूट, चोरी और गैंगस्टर एक्ट जैसे 20 गंभीर मामले दर्ज हैं। यह लंबे समय से वांछित चल रहा था और पुलिस ने इस पर ₹20,000 का इनाम घोषित कर रखा था।

ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में थाना प्रभारी विनोद कुमार सिंह, उपनिरीक्षक दीपक कुमार, दीपक शर्मा और कांस्टेबल अनुज, कपिल व विजय कुमार शामिल रहे।
आजमगढ़:आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
आजमगढ़:आंगनवाड़ी संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश के आवाह्न पर जनपद आज़मगढ़ की इकाई ने अपनी लंबित जायज मांगों तथा वर्तमान की ज्वलंत समस्याओं के समाधान हेतु आज जिला मुख्यालय पर पदाधिकारियों द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी को संबोधित मांगपत्र जिलाधिकारी को सौपा गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष श्रीमती हेमा गुप्ता ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकत्रिया एवं सहायिकायें विगत कई दशकों से महिला एवं बाल विकास विभाग की आधारशिला के रूप में कार्य करते हुए पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, टीकाकरण, मातृ-शिशु देखभाल सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की अनेकों योजनाओं का सफल क्रियान्वयन करती चली आ रही हैं।इसके बावजूद आज भी आंगनवाड़ी कर्मचारियों को न तो पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्राप्त है और न ही उन्हें वैधानिक सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मानजनक सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारी मांगों से संबंधित ज्ञापन सरकार को अनगिनत बार पूर्व में दिया जा चुका है, किंतु सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं की गई। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानसिक और आर्थिक शोषण बढ़ता जा रहा है। इसलिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कोई भी काम कराने से पहले संसाधन मुहैया कराया जाए साथ ही सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए और जब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जाता तब तक उनका मानदेय में बढ़ोत्तरी करते हुए सम्मानजनक मानदेय दिया जाए। जिससे इस महंगाई में वह अपना व परिवार का भरण पोषण कर सकें और प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा लिखित या मौखिक आदेश के माध्यम से सेवा समाप्ति का भय दिखाकर राजनीतिक कार्यक्रमों/समारोहों में भीड़ के रूप में उपयोग किए जाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए जिलाध्यक्ष नीतू पांडेय ने कहा विभागीय कार्यों को आफलाइन से आनलाइन कार्य करने की बदलती प्रक्रिया में हम आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अथक मेहनतकर ई केवाईसी तथा एफ आर एस की योजना को सफल बनाने का पुरजोर प्रयास किया है किन्तु विभाग द्वारा प्राप्त घटिया खराब मोबाइल तथा कमजोर नेटवर्क के कारण टी एच आर वितरण के समय एफ आर एस जैसी प्रक्रिया को कर पाना नामुमकिन हो रहा है।इसलिए पोषण ट्रैकर पर आनलाइन कार्य हेतु उच्च गुणवत्ता के 5G मोबाइल फोन की खरीद के लिए कम से कम 20,000 रू तथा प्रतिमाह 2,500 रू रीचार्ज एवं डाटा भत्ता अविलंब प्रदान किया जाए। जिलाध्यक्ष कंचन यादव ने कहा कि सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 20 से 40 वर्ष हो गये विभाग के कार्य करते हुए ऐसे में न तो प्रमोशन मिला, न पेंशन है, न ग्रेच्युटी है, न ही उचित मानदेय है, न कोई भविष्य निधि है, न कोई सामाजिक सुरक्षा फण्ड है, कमरतोड़ महंगाई में इतना अल्प मानदेय है कि भविष्य के लिए कुछ किया भी नहीं जा सकता है।आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा, शादी तथा मकान का सपना लिए दूसरे का बोझ बनकर असमय मृत्यु का शिकार हो रहीं हैं। इसलिए आंगनवाड़ी संघों के साथ उनकी समस्याओं के समाधान एवं योजनाओं के प्रभावी संचालन हेतु नियमित सरकारी बैठकें सुनिश्चित की जाएं। यदि समय रहते हमारी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता विवश होकर दिनाँक 08 मार्च 2026 को लखनऊ की ओर कूच करेंगी। जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने में श्रीमती गूंजा बरनवाल, प्रेमशीला यादव,सुशीला देवी, रेखा बिंद,शशिकला यादव, पूनम सिंह, सुनीला देवी, वंदना मौर्या, अमिता सिंह, किरन, सुनीता, गीता, नीलम, शोभावती, संध्या, पूनम,अनीता, सीता, रिंकू, मधुबाला, मीरा, मनीता,संगीता सुषमा, आशा,सरिता, विमला,सीमा, प्रमिला, प्रतिभा ऊषा इत्यादि सभी लोग उपस्थित रहीं।
कोचिंग सेंटरों की मनमानी पर सख्ती की मांग, छात्रों के हित के लिए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद बड़ा मुद्दा उठाया

नई दिल्ली- देश के लाखों छात्रों को निजी कोचिंग संस्थानों (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) की मनमानी से बचाने के लिए रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार से निर्णायक हस्तक्षेप की मांग की है।

असल में स्कूली छात्र कॉम्पिटिशन की तैयारी के लिए अलग अलग कोचिंग संस्थानों में पढाई करते हैं जहाँ उन्हें आईआईटी, एनआईटी, एम्स जैसे संस्थानों में गारंटी शुदा एडमिशन का प्रलोभन दिया जाता है और एक मुश्त पूरी फीस जमा करवा ली जाती है। गरीब, ग्रामीण एवं मध्यम वर्गीय परिवार भी सोना, ज़मीन बेचकर एवं क़र्ज़ लेकर होने बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए यह फीस अदा करते हैं।

लेकिन अगर उन्हें अनुकूल पढाई का वातावरण ना मिलने पर अगर वह संस्थान कोचिंग छोड़ना चाहे तो यह सेंटर मनमानी करते हैं, जिससे माँ बाप एवं बच्चे दोनों मानसिक रूप से प्रताड़ित होते हैं। हालांकि शिक्षा मंत्रालय (केंद्र सरकार) ने वर्ष 2024 में विभिन्न कोचिंग सेंटर के संदर्भ में गाइडलाइंस ज़ारी की है लेकिन इनका ज़मीनी स्तर पर पालन नहीं हो रहा है। उल्लेखनीय है कि यह मुद्दा सिर्फ स्कूली बच्चों तक नहीं बल्कि प्रोफेशनल कॉम्पिटिटिव एग्जाम जैसे यूपीएससी के लिए जाने वाले युवाओं के लिए भी प्रासंगिक है, दिल्ली जैसे महानगरों में युवा जाते हैं और भारी भरकम फीस जमा करते हैं लेकिन उन्हें भी इस प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। इसीलिए लोकसभा में इस विषय पर सांसद अग्रवाल ने अपनी बात रखी है। सांसद अग्रवाल का य़ह भी कहना है कि मेरा कार्यालय इस संबंध में सभी छात्रों के हित के लिए चौबीस घंटे खुलसांसद अग्रवाल द्वारा सरकार से किए गए प्रमुख आग्रह:

1) सभी राज्य सरकारें विद्यार्थियों द्वारा बीच में संस्थान छोड़ने पर 10 दिनों के भीतर फीस रिफंड का अनुपालन करने की अनिवार्यता का नियम बनाएं।

2) छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में इन कोचिंग संस्थानों के विवाद के निपटारे हेतु फ़ास्ट ट्रैक निवारण सेल स्थापित किये जाने के हेतु, छात्र/जन हित में सभी राज्य सरकारों को दिशा निर्देश देने का कष्ट करेंगे।

3) गाइडलाइन्स (2024) का कड़ाई से पालन होना सुनिश्चित करवाया जाए

रायपुर एवं दुर्ग-भिलाई मध्य भारत के कोटा के रूप में स्थापित हो रहे हैं एवं प्रदेश के बिलासपुर एवं रायगढ़ भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स भी छात्रों के बीच अपनी जगह बना रहे हैं परन्तु स्कूली विद्यार्थी इन कोचिंग संस्थानों के फीस - ट्रैप - मोनोपोली का शिकार बन रहे हैं।ा भी है।

रोड एक्सीडेंट में घायल मंडल उपाध्यक्ष धर्ममणि पाण्डेय का हालचाल जानने पहुँचे मंडल अध्यक्ष






आजमगढ़ बूढनपुर कोयलसा मंडल उपाध्यक्ष धर्ममणि पाण्डेय हाल ही में सड़क दुर्घटना में घायल हो गए। दुर्घटना की सूचना मिलते ही मंडल अध्यक्ष रूद्रप्रकाश शर्मा अन्य पदाधिकारियों के साथ उनके कुशलक्षेम की जानकारी लेने अस्पताल पहुँचे।मंडल अध्यक्ष रूद्रप्रकाश शर्मा ने श्री पाण्डेय से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सकों से भी बातचीत कर उपचार की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की। चिकित्सकों के अनुसार धर्ममणि पाण्डेय की हालत अब स्थिर है और उनका उपचार जारी है।मुलाकात के दौरान मंडल के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने घायल उपाध्यक्ष के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। मंडल अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि संगठन हर समय उनके साथ खड़ा है और किसी भी प्रकार की आवश्यकता होने पर पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाएगा।इस मौके पर बीरेंद्र सिंह अशोक कुमार मिश्र एडवोकेट राघवेंद्र पाण्डेय, मनोज सिंह उपेंद्र नाथ पाण्डेय,सहित अन्य लोग मौजूद रहे
कम हो गई कड़वाहट! राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मिले शशि थरूर

#shashitharoormeetrahulgandhiandkharge

Image 2Image 3

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गुरुवार को संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब शशि थरूर की पार्टी नेतृत्व से नाराजगी की खबरें आ रही हैं।

संसद में गुरुवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर राहुल गांधी के ऑफिस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मुलाकात की। यह आधे घंटे से अधिक समय तक चली। इस बैठक के बाद थरूर ने मुस्कुराते हुए कहा, "सब ठीक है।" उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर चल रहे मतभेदों और असंतोष की खबरों पर फिलहाल विराम लगा दिया है।

हम सब एक साथ मिलकर काम कर रहे- थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, 'मेरी पार्टी के 2 नेताओं, नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष के साथ हमारी बातचीत हुई। हमारी बहुत अच्छी, रचनात्मक, सकारात्मक बातचीत हुई। सब ठीक है और हम सब एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। मैं और क्या कह सकता हूं?... मैंने हमेशा पार्टी के लिए प्रचार किया है, मैंने कहां प्रचार नहीं किया है?

उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं-थरूर

जब उनसे पूछा गया कि क्या केरल के मुख्यमंत्री के बारे में बात हुई, तो उन्होंने कहा, 'नहीं, इस बारे में कभी बात नहीं हुई। मुझे किसी भी चीज़ के लिए उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। अभी, मैं पहले से ही सांसद हूं और तिरुवनंतपुरम के मेरे वोटर्स का मुझ पर भरोसा है। मुझे संसद में उनके हितों का ध्यान रखना है, यही मेरा काम है।'

शशि थरूर लगातार सुर्खियों में

बता दें कि हाल के महीनों में शशि थरूर लगातार सुर्खियों में रहे हैं। कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ को लेकर। कभी पार्टी बैठकों से दूरी को लेकर। कभी केरल कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर। बीते कुछ समय में शशि थरूर ने कई अहम बैठकों में हिस्सा नहीं लिया। केरल चुनाव की रणनीति पर होने वाली बैठक में वे नहीं पहुंचे। सोनिया गांधी के आवास पर हुई मीटिंग भी मिस की। वजह यात्रा बताई गई। लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक अंदरूनी नाराजगी की बात भी सामने आई।

थरूर ने माना-कुछ मुद्दे हैं

वहीं, थरूर ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि कुछ मुद्दे हैं, जिन्हें वे पार्टी के मंच पर उठाना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा था कि उन्होंने कभी भी संसद में पार्टी के तय रुख का उल्लंघन नहीं किया है। थरूर ने कहा था, 'मैं बस इतना कह सकता हूं कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें मुझे अपने पार्टी नेतृत्व के साथ उठाना है, न कि किसी सार्वजनिक मंच पर। मैं संसद के लिए दिल्ली जाऊंगा, और मुझे मौका मिलेगा, मेरा मानना है, कि मैं अपनी चिंताओं को पार्टी नेतृत्व के सामने बहुत स्पष्ट रूप से रख सकूं और उनका दृष्टिकोण जान सकूं, एक उचित बातचीत कर सकूं।'

UGC के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, कहा-दुरुपयोग का खतरा

#supreme_court_stayed_ugc_equity_regulations_2026

Image 2Image 3

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के नए नियमों को लेकर पूरे देशभर में जबरदस्त विरोध हो रहा है। नए नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सुनवाई हुई है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला किया है और यूजीसी के नियम पर फिलहाल रोक लगा दी है।

केंद्र को नोटिस जारी, 19 मार्च तक मांगा जवाब

सीजेआई सूर्यकांत की बेंच कहा कि ये प्रावधान पहली नज़र में अस्पष्ट हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया और जवाब तलब किया। सीजेआई सूर्यकांत ने केंद्र सरकार को रेगुलेशंस को फिर से बनाने के लिए कहा है, तब तक इनका संचालन रोक दिया गया है। अदालत ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी कर 19 मार्च तक जवाब देने को कहा है।

कोर्ट ने पूछा अहम सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के 23 जनवरी को जारी किए गए 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने' वाले नियमों में इस्तेमाल किए गए शब्दों पर सवाल उठाए। जस्टिस बागची ने कहा कि रेगुलेशन में इस्तेमाल किए गए शब्दों से ऐसा लगता है कि इनका दुरुपयोग हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हम समाज में एक निष्पक्ष और सबको साथ लेकर चलने वाला माहौल बनाना चाहते हैं। जस्टिस बागची ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि जब पहले से ही 3 'E' मौजूद हैं, तो फिर 2 'C' की क्या जरूरत पड़ जाती है? यह सवाल नियमों की प्रासंगिकता पर उठाया गया था।

दरअलस, यूजीसी के नए नियमों पर बीते कुछ दिनों से बवाल जारी है। सवर्ण तबके के स्टूडेंट्स इन नियमों का विरोध कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले यानी बुधवार को ही यूजीसी नियमों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने के लिए हामी भरी थी। याचिका में कहा गया है कि ये नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के खिलाफ भेदभाव पैदा कर सकते हैं। मामला राहुल देवन और अन्य बनाम केंद्र सरकार है। सीजेआई सूर्यकांत ने याचिका को सुनवाई के लिए आज लिस्ट किया था।

बाबू शोभनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा गणतंत्र दिवस एवं बसंतोत्सव संपन्न

मुंबई। साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था बाबू शोभनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट 'पालघर इकाई',दिल्ली इकाई, म.प्र.इकाई सहित राष्ट्रीय कमेटी ने गणतंत्र दिवस एवं बसंतोत्सव पर कविगोष्ठी का आयोजन किया।म.प्र.इकाई के मुख्य अतिथि शशि भार्गव,विशिष्ट अतिथि ए पी द्विवेदी एवं अध्यक्षता सत्यभामा सिंह ने किया। डॉ निशि मंजवानी के संयोजन एवं संचालन में नंदिनी तोमर,गणेश प्रसाद गौतम,डॉ शरद नारायण खरे,कविता पारस झा,अंकिता यादव,भारती खरे ने काव्य पाठ किया।दिल्ली इकाई की अध्यक्षता सत्यभामा सिंह जिया एवं संचालन आशा दिनकर आश ने किया।डॉ गीता विश्वकर्मा के सरस्वती वंदना से शुभारंभ तत्पश्चात अवधेश श्रीवास्तव,रेखा जी,मनोज मंजुल कासगंज,रामदेव राही मथुरा, प्रमोद राणा हापुड़,दीपा शर्मा फरीदाबाद,शोएब सादिक गाजियाबाद,सुरेश कुमार बंछोर, प्रमिला कौशिक, प्रेम टंडन,डॉ सुशीला शर्मा,जागृति सिंह अजय ने दिल्ली इकाई अध्यक्ष डॉ मधु स्वामी के आयोजन में काव्य पाठ किया।पालघर इकाई की गोष्ठी में इकाई अध्यक्ष किरण तिवारी की पुस्तक अंतर्द्वंद पर परिचर्चा एवं मासिक काव्यगोष्ठी उनके निवास स्थान पर रखी गई।

अध्यक्षता डॉ कृपा शंकर मिश्रा एवं मुख्य अतिथि के रूप में शिवकुमार सिंह,विशिष्ट अतिथि निडर जौनपुरी, रासबिहारी पांडे एवं अमरनाथ दुबे उपस्थित थे।सरस्वती वंदना पश्चात किरण तिवारी की पुस्तक 'अंतर्द्वंद' पर परिचर्चा कृपा शंकर मिश्र, सत्यभामा सिंह एवं शिवकुमार सिंह द्वारा किया गया।राजेश दुबे अल्हड़ असरदार के संचालन में काव्य गोष्ठी का आरंभ हुआ सभी कवि -कवित्रियों ने अपनी अपनी रचना गीत,गजल,छंद,दोहे, कविता सुनी और सुनाई। उक्त कार्यक्रम का आयोजन रमेश तिवारी ने किया तथा किरण तिवारी ने आभार व्यक्त किया।
कामचोरी करने वाले फौज की जरूरत नहीं, सरकार दे रही लाखों का बजट , आखिर कहां गए उपकरण,अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों पर की जाए निलंबन की कार्रवाई
फर्रुखाबाद l शासन स्वास्थ्य महकमा में चाक चौबंद व्यवस्था बनाए रखने के लिए लाखों रुपए का बजट दे रहा है लेकिन इसके बावजूद भी उपकरणों की चोरी फर्जी वाउचर और नियमित अस्पताल न जाने की शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को 72 घंटे में ऐसे कर्मचारियों और स्वास्थ्य महिमा की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश दिए हैं l उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि कामचोरी करने वाले कर्मचारियों को चिन्हित करके उनके खिलाफ अपने एवं शासन स्तर पर कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए हैं l जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने जिला स्वास्थ्य समिति की मासिक बैठक के दौरान चिकित्सालयों में फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति पर नाराजगी व्यक्त की, जिलाधिकारी ने सातो विकास खंडो की रिपोर्ट 72 घंटे के अंदर प्रस्तुत करने को कहा है ,जिलाधिकारी ने कहा कि कहां पर कौन से उपकरण उपलब्ध नहीं है और कोल्ड चैन कहां पर  है और काम नहीं कर रही, जिलाधिकारी ने कहा कि शमशाबाद क्षेत्र के जर्जर चिकित्सालय  के संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं l उन्होंने कहा कि तीन लोगों की समिति बनाकर निष्क्रिय कर्मचारियों को चिन्हित करने व सेवा मुक्त करने हेतु आवश्यक कार्यवाही करे, ऐसा न करने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध भी कठोर कार्यवाही की जाए l इस दौरान जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को प्रतिदिन निगरानी करने और अधीनस्थों से आवश्यक डाटा प्रतिदिन प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं l उन्होंने कहा कि निकम्मों की फौज की कोई जरूरत नहीं है ,प्रति माह एक लाख आयुष्मान कार्ड बनाएं सक्षम प्राधिकारी  इस पर ध्यान दें, अधीनस्थ अपना 100 प्रतिशत तक कार्य संपन्न नहीं हुआ प्रतिरक्षण अधिकारी व  अधीनस्थ  का कार्य भी संतोषजनक नहीं है । जिलाधिकारी ने तत्काल सुधार करने को कहा,कायमगंज में कार्य का प्रतिशत 41 प्रतिशत है उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाए निष्क्रिय कार्य के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों को आरोप पत्र देकर निलंबित करें तभी सुधार होगा, जिलाधिकारी ने एजेंडा रूपांतरित करने के निर्देश दिए टीकाकरण में विभाग की प्रगति अच्छी है l जिलाधिकारी ने चिकित्सा विभाग को बेसिक शिक्षा विभाग व पंचायती राज विभाग से समन्वय स्थापित करके कार्य करने के निर्देश दिए ताकि एक कार्य के त्रिआयामी बेहतर परिणाम प्राप्त हो सके बीएसए से कुल स्कूल व उसके बच्चे एवं उनके क्षेत्र का विवरण प्राप्त कर ले यदि कोई स्कूल मना करे तो बताएं आयुष्मान कार्ड बनने की प्रगति की समीक्षा प्रतिदिन 9:00 बजे होगी बैठक में संबंधित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे l