भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के परिवार पर दुखों का पहाड़: पिता का निधन
लखनऊ । भारतीय क्रिकेट टीम के युवा और विस्फोटक बल्लेबाज रिंकू सिंह के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। उनके पिता खानचंद सिंह का लंबी बीमारी के बाद देर रात ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में निधन हो गया। खानचंद सिंह स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे और करीब तीन दिन से अस्पताल में भर्ती थे।

रिंकू के लिए मुश्किल घड़ी

पिता की गंभीर स्थिति की सूचना मिलते ही रिंकू टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बीच ही अपने पिता से मिलने पहुंचे थे। लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच से पहले वह टीम के साथ दोबारा जुड़ गए थे। पिता के निधन की खबर मिलते ही रिंकू तुरंत वापस लौट रहे हैं। अब तक यह साफ नहीं है कि वह टूर्नामेंट में आगे टीम इंडिया का हिस्सा बनेंगे या नहीं।

पिता की मेहनत और योगदान

खानचंद सिंह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में गैस एजेंसी पर सिलिंडर वितरण का काम करते थे। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बेटे रिंकू के क्रिकेट सपने को पूरा करने में पूरा सहयोग किया। रिंकू ने भी शुरुआत में सिलिंडर वितरण के काम में पिता का हाथ बंटाया और गरीबी से लड़ते हुए क्रिकेट के मैदान पर अपनी जगह बनाई।

प्रेरणादायक क्रिकेट करियर

रिंकू सिंह ने भारतीय क्रिकेट में अपनी खास पहचान बनाई है। अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और मैच जिताऊ पारियों के लिए जाने जाने वाले रिंकू के क्रिकेट करियर में उनके पिता की प्रेरणा और समर्थन हमेशा अहम भूमिका निभाता रहा।
भोर का सन्नाटा टूटा: कानपुर-सागर हाईवे पर सड़क हादसे में तीन महिलाओं की मौत, दो परिवारों के बच्चे अनाथ
लखनऊ /महोबा। भोर के तीन बजे कानपुर-सागर हाईवे पर हुए दर्दनाक हादसे ने इलाके को हिलाकर रख दिया। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि सड़क पर धूल का गुबार उठ गया और जैसे ही धूल छटी, खून से लथपथ तीन महिलाएं बिखरी पड़ी मिलीं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के बाद जोरदार आवाज सुनाई दी और मौके पर पहुंचने पर एक महिला कराहते हुए कह रही थी, “हम तो मर गए।” इस मंजर ने राहगीरों का कलेजा भी कांपने पर मजबूर कर दिया।

सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और एम्बुलेंस बुलाकर घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में तीन महिलाओं को मृत घोषित कर दिया गया। हादसे की खबर जैसे ही उनके परिजनों तक पहुँची, तो चैन की नींद सो रहे परिवार पर दुख का पहाड़ टूट गया। जो महिलाएं परिवार का पालन-पोषण करने के लिए मेहनत कर रही थीं, उनका अब इस दुनिया में होना संभव नहीं रहा।

दो परिवारों की खुशियां अब दुख में बदल गईं

हादसे में जान गंवाने वाली भगवती और गीता पहले ही अपने पतियों को खो चुकी थीं। भगवती के पति फूलचंद्र और गीता के पति बालकिशन की मौत सड़क दुर्घटना में पहले ही हो चुकी थी।दोनों महिलाएं वैवाहिक समारोहों में मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही थीं। अब उनके बच्चों के सामने मां का सहारा भी उठ गया।
भगवती के दो बेटे: रविंद्र और रवि
गीता की दो बेटियां और एक बेटा: बंटी
पिता के जाने के बाद मां का अचानक चले जाना बच्चों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। बच्चे अब पूरी तरह से अनाथ हो गए हैं और रिश्तेदार, पड़ोसी उनकी चिंता में डूबे हुए हैं।

हादसे का भयावह मंजर

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर के बाद सड़क पर टमाटर भी बिखरे मिले। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि पिकअप टमाटर लदी हुई थी। पिकअप का बाईं ओर का हिस्सा दुर्घटना में टूटा हुआ पाया गया। पुलिस ने इसे जब्त कर चालक और वाहन की तलाश शुरू कर दी है।हाईवे पर खून से लथपथ महिलाओं को देख राहगीरों की समझ नहीं आई कि कैसे मदद करें। पुलिस ने तुरंत एम्बुलेंस बुलाई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

अस्पताल में चीख-पुकार

हादसे की जानकारी मिलने पर परिजन अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बच्चों और रिश्तेदारों की चीखें गूंज रही थीं। बच्चे अपने माताओं को देखकर पहली बार समझ ही नहीं पा रहे थे कि उनकी मां अब उनके साथ नहीं हैं। उन्हें संभालने के लिए परिजन और रिश्तेदार मौजूद थे, लेकिन बच्चों की आंतरिक पीड़ा को कोई भी पूरी तरह से नहीं समझ सका।गीता के जेठ, अधिवक्ता बलदेव प्रसाद ने बताया कि ढाई-तीन साल पहले उनके छोटे भाई बालकिशन की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी थी। अब गीता भी उसी तरह सड़क हादसे का शिकार हो गईं।

दो परिवारों के बच्चों के भविष्य पर सवाल

हादसे ने केवल जीवन की क्षति नहीं दी, बल्कि दो परिवारों के बच्चों के भविष्य को भी अनिश्चित कर दिया। पिता के बाद मां का सहारा भी उठ जाने से बच्चों की दुनिया उजड़ गई है। हादसे में जीवन का स्थिर आधार खोने के बाद बच्चे अब अनाथ हो गए हैं और उनका पालन-पोषण किस तरह होगा, यह अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
रांची नगर पालिका चुनाव 2026 की मतगणना आज, सुबह 8 बजे से शुरू होगी काउंटिंग।

रांची: झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, रांची नगर पालिका आम निर्वाचन 2026 के लिए मतगणना आज, 27 फरवरी 2026 को सुबह 8:00 बजे से प्रारंभ होगी। जिला प्रशासन ने इसके लिए अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

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उपायुक्त ने किया औचक निरीक्षण

देर रात जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त, श्री मंजुनाथ भजन्त्री ने मतगणना स्थलों का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपन्न होनी चाहिए। इस दौरान उनके साथ उप विकास आयुक्त श्री सौरभ कुमार भुवनिया सहित जिले के तमाम वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मतगणना केंद्र के लिए कड़े नियम

प्रशासन ने मतगणना स्थल पर अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं:

अनिवार्य पहचान पत्र: उम्मीदवारों के एजेंटों को रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा जारी पास और अपना फोटो युक्त पहचान पत्र लाना अनिवार्य है।

इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बैन: मतगणना केंद्र के भीतर मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने पर पूरी तरह से रोक रहेगी।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

मतगणना और उसके बाद परिणामों की घोषणा के दौरान शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस फोर्स और मजिस्ट्रेट की भारी तैनाती की गई है। उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन 24×7 नजर बनाए हुए है ताकि कोई भी असामाजिक तत्व माहौल खराब न कर सके।

लखनऊ में रिश्तों का कत्ल: बेटे ने पिता को मारी गोली, फिल्म देखकर किए शव के टुकड़े
लखनऊ । राजधानी के आशियाना इलाके में पैथोलॉजी संचालक व शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह (49) की हत्या ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस सनसनीखेज वारदात में उनके बेटे अक्षत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि हत्या के बाद आरोपी ने शव को ठिकाने लगाने के लिए फिल्म और यूट्यूब वीडियो से तरीका सीखा था।

फिल्म ‘वध’ से मिला आइडिया

सूत्रों के मुताबिक अक्षत ने वध फिल्म देखी थी, जिसमें आरी से शव काटकर ठिकाने लगाने का दृश्य था। इसी तरीके को अपनाने की उसने योजना बनाई। पहले उसने ऑनलाइन चाकू मंगवाया, लेकिन उससे शव काटने में सफल नहीं हुआ। बाद में वह घर से निकलकर दो आरी खरीद लाया और शव के टुकड़े कर दिए।

बताया जा रहा है कि आरोपी ने यूट्यूब पर भी शव को ठिकाने लगाने से जुड़े वीडियो देखे थे।

बहन से कहा – “तुम परेशान मत हो”

हत्या के बाद अक्षत ने अपनी छोटी बहन कृति से कहा कि वह घबराए नहीं, वह सब संभाल लेगा। सूत्रों के अनुसार कृति गंभीर बीमारी से जूझ रही है। पुलिस को आशंका है कि पारिवारिक तनाव और पिता के प्रति नफरत इस जघन्य अपराध की बड़ी वजह हो सकती है।पुलिस अब मानवेंद्र और अक्षत की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगाल रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि हत्या से पहले और बाद में आरोपी ने किन लोगों से संपर्क किया। वारदात के समय घर में मौजूद लोगों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं इस अपराध में किसी और की भूमिका तो नहीं थी।

परिवार ने साधी चुप्पी,जेल में बेचैन रहा आरोपी

मानवेंद्र के पिता ने पूरे मामले पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है। वहीं, अक्षत की मां की मौत को लेकर परिजनों ने आत्महत्या की बात से इनकार करते हुए बीमारी से निधन होना बताया है। कॉलोनी में अब भी सन्नाटा पसरा है और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं।गिरफ्तारी के बाद अक्षत को जेल भेज दिया गया। बुधवार रात वह सो नहीं सका और पूरी रात बड़बड़ाता रहा। उसकी मानसिक स्थिति को देखते हुए उसे जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सक उसकी निगरानी कर रहे हैं और काउंसिलिंग भी की जा रही है।जेल प्रशासन के अनुसार आरोपी ने बताया कि पहले उसके पिता ने उसे पीटा था, जिसके बाद उसने गुस्से में गोली मार दी। रातभर वह दीवार से टिककर बैठा रहा और कई बार रोते हुए पछतावा भी जताया।इस दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर पारिवारिक रिश्तों में बढ़ती दरार और मानसिक तनाव के गंभीर परिणामों को उजागर कर दिया है। पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।
रिंकू सिंह के पिता का निधन, स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे

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भारतीय टीम के विस्फोटक बल्लेबाज रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का निधन हो गया है। उन्होंने ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। खानचंद को लीवर कैंसर था और वह चौथे स्टेज में पहुंच चुका था। टी20 वर्ल्ड कप के बीच रिंकू सिंह के सिर से पिता का साया उठ गया।

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रिंकू सिंह के पिता ने आज सुबह अस्पताल में आखिरी सांस ली। रिंकू सिंह के पिता का नाम खानचंद्र सिंह था। उन्हें कैंसर की बीमारी थी। वह स्टेज 4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। हाल ही में उनकी तबीयत काफी खराब हो गई जिसके बाद उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में उनका इलाजा चल रहा था।

पिता से मिलने गए थे रिंकू सिंह

जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले से पहले रिंकू सिंह ने ब्रेक लिया था। पिता की गंभीर स्थिति की सूचना मिलते ही रिंकू सिंह टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बीच ही अपने पिता से मिलने आए थे। लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच से पहले दोबारा टीम के साथ जुड़ गए थे। पिता के निधन की खबर के बाद वो तुरंत वापस लौटे हैं।

सिलिंडर वितरण कर बेटे का सपना पूरा किया

रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र गैस एजेंसी पर सिलिंडर वितरण का काम करते थे। वह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक गैस एजेंसी में काम करते थे। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने बेटे रिंकू के क्रिकेटर बनने के सपने को पूरा करने में सहयोग किया। रिंकू की कामयाबी के बाद भी उन्होंने यह काम नहीं छोड़ा। रिंकू ने खुद शुरुआत में सिलिंडर वितरण के काम में पिता का हाथ बंटाया और गरीबी से लड़ते हुए क्रिकेट के मैदान पर अपनी जगह बनाई।

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित की गई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक

सीएचसी अधीक्षकों को जिलाधिकारी का सख्त निर्देश, शासन की मंशानुसार जनसामान्य को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराएं


जनपद के सभी सीएचसी में एक्सरे मशीन को सही कराकर संचालित कराने के निर्देश-जिलाधिकारी


गोण्डा। 26 फरवरी, 2026
कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी  प्रियंका निरंजन की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की मासिक समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत चलाए जा रहे कार्यक्रमों की समीक्षा की गयी।
बैठक में प्रस्तावित एजेंडा के आधार पर यू0पी0एच0एम0आई0एस0 हेल्थ डैशबोर्ड, मातृ स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, कम्युनिटी प्रोसेस, राष्ट्रीय कार्यक्रम नान कम्युनिकेबल डिजीज, एन0सी0डी0, एन0बी0सी0पी0, आर0एन0टी0सी0पी0, पी0एम0एम0वी0वाई0, नियमित टीकाकरण, वैक्सीनेशन, जननी सुरक्षा व मातृ वंदना योजना के तहत भुगतान की स्थिति, आशा इन्सेन्टिव, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, ओपीडी व आईपीडी की स्थिति, प्राथामिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा सीएचसी पर बेडों की ऑक्यूपेंसी की स्थिति सहित अन्य योजनाओं की जिलाधिकारी द्वारा गहन समीक्षा की गई। वहीं जिला स्वास्थ समिति की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित सभी योजनाओं की समीक्षा की गई।

बैठक में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जनवरी, 2026 का भ्रमण की समीक्षा की गई। एनआरसी में भर्ती बच्चों, आरसीएच पोर्टल फीडिंग के स्टेटस, एनपीसीडीसीएस, राष्ट्रीय कुष्ठ नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय अंधता एवं दृष्टिक्षीणता नियंत्रण कार्यक्रम आदि सभी की समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि समय से कार्य कराना सुनिश्चित करें।

जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जनपद के सभी सीएचसी अधीक्षकों से स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की योजनावार समीक्षा की। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी सीएचसी अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि सभी योजनाओं के कार्य समय से पूर्ण कराया जाय तथा समय-समय पर अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से योजनावार समीक्षा की जाय। ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन समय से किया जा सके।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की मंशानुसार जनसामान्य को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए सभी अधीक्षक अपने अपने सीएचसी एवं पीएचसी पर ही निवास करें तथा संस्थागत प्रसव एवं विभिन्न प्रकार के टीकों को समय से लगवाना सुनिश्चित करें। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई।

आयुष्मान कार्ड के माध्यम से मरीजों को भर्ती करायें, साथ ही इस पर विशेष ध्यान दिया जाय। ई-कवच को पोर्टल को अपडेट करें। प्रसव केंद्र पर प्रसव की संख्या बढ़ाएं। जनपद के सभी सब सेंटरों पर एएनएम की उपस्थिति सुनिश्चित की जाये। ताकि सेंटर पर आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ दिया जा सके।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी सीएचसी अधीक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में स्वयं जाकर टीकाकरण का स्थान चिन्हित करें और अधिक से अधिक बच्चों एवं महिलाओं का टीकाकरण करायें।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिये हैं कि क्षेत्र में जिन एएनएम व आशाओं द्वारा नियमित चेकअप का कार्य नहीं किया जा रहा है उनके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही करें।

बैठक में आरबीएसके का कार्य सही न होने के कारण नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्य में सुधार लाने के निर्देश।

बैठक में एक्सरे मशीन की जानकारी की गई, जिसमें अवगत कराया गया कि कुछ जगहों पर मशीन ही नहीं है, कुछ जगहों पर मशीन है पर एक्सरे टेक्नीशियन नहीं है। जिसके दृष्टिगत जिलाधिकारी ने सीएमओ को कड़े निर्देश दिये हैं कि सभी स्थानों पर मशीन उपलब्ध कराकर सही से संचालित कराया जाय।
आयुष्मान भारत कार्ड की समीक्षा में कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिये हैं कि जितने आईडी है सभी आईडी को संचालित कराकर कार्ड बनाये जाय। साथ ही सभी आईडी की प्रतिदिन रिपोर्ट लीजिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिये हैं कि जनपद के सभी सीएचओ का प्रतिदिन सेन्टर पर समय से उपस्थित रहने की लाइव लोकेशन के आधार पर जानकारी ली जाय।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती अंकिता जैन, सीएमओ डॉक्टर संत लाल पटेल, सीएमएस जिला महिला अस्पताल, जिला अस्पताल, एसीएमओ डॉक्टर आदित्य वर्मा, डॉक्टर सीके वर्मा, डॉक्टर जयगोविंद, डॉक्टर आरपी सिंह, डीपीएम जिला अस्पताल अमरनाथ, जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय उपाध्याय, बेसिक शिक्षा विभाग, सहित सभी संबंधित विभाग के अधिकारीगण व डब्ल्यू0एच0ओ0 यूनिसेफ के पदाअधिकारी, समस्त सी0एच0सी0 अधीक्षक तथा अन्य संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय में भोजन की आदतें और स्वास्थ्य विषयक  व्याख्यान हुआ संपन्न

गोंडा। 26 फरवरी 2026। भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज, गोंडा की इकाई द्वारा “बदलती खाद्य आदतें : आहार से जुड़ा हमारा स्वास्थ्य और चुनौतियां” विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया।इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में गृह विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. इला तिवारी ने कहा कि भोजन हमारे जीवन का आधार है। जैसा हमारा आहार होता है, वैसा ही हमारा स्वास्थ्य और व्यक्तित्व बनता है। यदि हम अपनी खाद्य आदतों में सुधार कर संतुलित आहार अपनाएं, तो अनेक बीमारियों से बच सकते हैं तथा एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने पोषक तत्वों से युक्त आहार, दैनिक जीवन में स्वस्थ रहने के उपाय, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों के महत्व, आर.डी.ए. (Recommended Dietary Allowance), बी.एम.आर. (Basal Metabolic Rate) तथा ग्लाइसेमिक इंडेक्स से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी रेड क्रॉस के स्वयंसेवकों को प्रदान की।

कार्यक्रम के अंत में ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत रेड क्रॉस के स्वयंसेवकों, महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं उपस्थित शिक्षकों को महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. बी.पी. सिंह द्वारा नशा मुक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान देने की शपथ दिलाई गई।

कार्यक्रम का संचालन रेड क्रॉस इकाई की संयोजक डॉ. ममता शुक्ला द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रचना श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत किया गया।कार्यक्रम में प्रो. अमन चंद्रा, प्रो. राजीव अग्रवाल, प्रो. वी.सी.एच.एन.के. श्रीनिवास राव, डॉ. मनीषा पाल, डॉ. योगेंद्र नाथ श्रीवास्तव एवं  सुमित कुमार तिवारी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
मनपा कर्मचारियों के आंदोलन से मिला सकारात्मक समाधान
मुंबई । बृहन्मुंबई महानगरपालिका कर्मचारियों की सबसे बड़ी यूनियन म्युनिसिपल मजदूर यूनियन के प्रतिनिधित्व में गुरुवार 26 फरवरी को सार्वजनिक स्वास्थ्य चिकित्सा विभाग मुख्यालय एफ दक्षिण, परेल कार्यालय पर कर्मचारियों ने एकदिवसीय सामूहिक छुट्टी लेकर आंदोलन किया। प्रशासन विगत दो वर्षों से कर्मचारियों की वरिष्ठता अनुसार पदोन्नति कर रही है सिर्फ आश्वासन देती रही थी, किन्तु सकारात्मक निर्णय नहीं ले रही थी। पदोन्नति के साथ वेतन विसंगति,वेतन ग्रेड,पद श्रृंखला नियमावली देने में आना-कानी करते देख कर्मचारियों में आक्रोश दिखा। म्युनिसिपल मजदूर यूनियन मुंबई ने कर्मचारियों के अधिकार दिलाने बाबत आंदोलन एवं प्रशासन के विरुद्ध हल्लाबोल किया। महानगर पालिका कार्यालय के प्रांगण में सुबह 10 बजे से लगभग 300 से अधिक कर्मचारियों ने उपस्थिति दर्ज कराई। आंदोलन का उग्र रूप देख प्रशासन के सहायक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ वल्ले पवार एवं स्वास्थ्य अधिकारी दक्षा शहा ने दोपहर 2 बजे यूनियन एवं कर्मचारियों के साथ मिटिंग लिया तथा आश्वासन देते हुए कहा कि सभी कर्मचारी हमारे हैं आंदोलन बंद करें। कर्मचारियों की पदोन्नति आगामी 10 दिनों में पदोन्नति कमेटी निर्णय पश्चात शीघ्र दे दी जाएगी। पदोन्नति के साथ साथ ग्रेड पे तथा पद श्रृंखला नियमावली भी लागू कर देंगे। उक्त आंदोलन में यूनियन अध्यक्ष अशोक जाधव, कार्याध्यक्ष यशवंत देशाई,सहायक सरचिटणिस प्रदीप नारकर,उपाध्यक्ष संदीप भरणकर,उपाध्यक्ष संजय बने, संघटक प्रवीण कदम,विट्ठल गावड़े,महेश दलवी सहित तकरार निवारण समिति अध्यक्ष भालचंद्र वाणी,कार्याध्यक्ष सुनील कर्पे,सेक्रेटरी विनयकुमार शर्मा,सचिव रवीन्द्र पवार, उपाध्यक्ष अनिल वायदंडे नायर अस्पताल,संघटक सुधीर कोरडे, शंकर खरात,नायर अस्पताल डेंटल कॉलेज शिकायत निवारण समिति महासचिव बालू शिंदे, युवा अध्यक्ष ललित वाघेला,युवा महासचिव योगेश जाधव,केईएम अस्पताल शिकायत निवारण समिति अध्यक्ष प्रफुल्ल अहिरे, महासचिव वैभव जुवेकर,क्षय रोग अस्पताल शिवडी शिकायत निवारण समिति अध्यक्ष मिलिंद नाइक, कीटनाशक विभाग शिकायत निवारण समिति अध्यक्ष विनोद घुगे, महासचिव नागेश गावड़े, प्रकाश झोरे, अस्पताल सायन शिकायत निवारण समिति महासचिव आतिश वायलेकर, पूर्णकालिक कार्यकर्ता अशोक सावंत, राजाराम पुरालकर, चंद्रकांत कांबले, दत्ताराम काजरोलकर, मनोहर कांबले,विजय मसारंकर, प्रसाद जाधव,परिवार कल्याण मातृ शिशु देखभाल विभाग अखिल शिंगाडे, विनायक भोसले, राहुल तायडे, स्वच्छता निरीक्षक रवीन्द्र जाधव, गणेश गोदिक सहित सर्वेलेंस संघटक, सक्रिय कार्यकर्ता एवं सभासद उपस्थित थे।
दु:ख की घड़ी में साथ: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन पहुँचे जिलिंगोड़ा, चंपई सोरेन के पोते 'वीर सोरेन' को दी श्रद्धांजलि

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सरायकेला-खरसावां (जिलिंगोड़ा): मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन गुरुवार को सरायकेला-खरसावां जिले के जिलिंगोड़ा गाँव पहुँचे। यहाँ उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री श्री चंपई सोरेन के पोते, वीर सोरेन (सुपुत्र श्री बाबूलाल सोरेन) के असामयिक और दुखद निधन पर गहरी शोक-संवेदना व्यक्त की।

मुख्यमंत्री ने दिवंगत वीर सोरेन के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अत्यंत कठिन समय में मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री श्री चंपई सोरेन, श्री बाबूलाल सोरेन एवं उनके परिवार के अन्य सदस्यों से व्यक्तिगत रूप से भेंट की और उन्हें ढाँढस बँधाया।

मुख्यमंत्री ने अपनी शोक-संवेदना में कहा कि एक युवा जीवन का इस प्रकार असमय चले जाना पूरे परिवार और समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने मरांग बुरु (ईश्वर) से प्रार्थना की कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस असहनीय कष्ट को सहने की शक्ति प्रदान करें।

NCERT विवाद पर धर्मेंद्र प्रधान की सफाई, बोले-न्यायपालिका का अपमान करने की मंशा नहीं थी

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एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े आपत्तिजनक बातों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इसे न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश करार दिया और बाजार से किताब को वापस लेने का निर्देश दिया।

एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका से जुड़े कथित विवादित अध्याय पर अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि जो कुछ हुआ उससे उन्हें गहरा दुख है और सरकार या शिक्षा मंत्रालय की ओर से न्यायपालिका का अपमान करने की कोई मंशा नहीं थी।

धर्मेद्र प्रधान ने कहा, 'हम ज्यूडिशियरी का पूरा सम्मान करते हैं। ज्यूडिशियरी ने जो भी कहा है, हम उसका पूरा पालन करेंगे। जो हुआ है, उससे मैं बहुत दुखी हूं, और मैं अफसोस जाहिर करता हूं। जैसे ही यह मामला मेरे ध्यान में आया, मैंने तुरंत NCERT को संबंधित किताबें वापस लेने का निर्देश दिया ताकि वे आगे सर्कुलेट न हों। उन्हें वापस बुलाने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं।'

सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही-प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार न्यायपालिका का सर्वोच्च सम्मान करती है और किसी भी शैक्षणिक सामग्री के जरिए संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ी सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अध्याय तैयार करने में शामिल लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य जागरूकता फैलाना है, संस्थाओं को बदनाम करना नहीं।

सीजेआई की अहम टिप्पणी

इससे पहले गुरूवार सुबह मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचौली की बेंच ने मामले पर सुनवाई की। सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कुछ अहम टिप्पणियां की। सीजेआई ने आदेश में कहा कि व्यवस्था के 3 अंग - विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका लोकतंत्र के सुचारू रूप से काम करने के लिए जरूरी हैं। उन्होंने कहा, 'हमें एक अखबार से NCERT की किताब में लिखे गए अंश का पता चला। इसे जानकर हमें आघात पहुंचा।'

न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश

सीजेआई ने कहा कि ऐसा लगता है कि यह सोच समझकर न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका के बारे में इस तरह की बातें करना और उसके प्रति असम्मान फैलाना निश्चित रूप से आपराधिक अवमानना का मामला हो सकता है। अगर ऐसा जान-बूझकर किया गया है तो।

हम सिर्फ माफी पर जाने नहीं दे सकते-सीजेआई

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह सोचा-समझा योजनाबद्ध कदम है। बच्चों के अलावा शिक्षक और अभिभावक भी इसे पढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि हम अधिकारियों को सिर्फ माफी पर जाने नहीं दे सकते। यह कहना कि इसे हटाया जा रहा है, काफी नहीं। किताब मार्केट में गई। मैंने भी इसकी एक कॉपी देखी है। उन्होंने शिक्षा विभाग को आदेश दिया कि मार्केट और स्कूलों में भेजी गई किताबें वापस ली जाएं और किताब का ऑनलाइन मटीरियल भी हटाया जाए।

भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के परिवार पर दुखों का पहाड़: पिता का निधन
लखनऊ । भारतीय क्रिकेट टीम के युवा और विस्फोटक बल्लेबाज रिंकू सिंह के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। उनके पिता खानचंद सिंह का लंबी बीमारी के बाद देर रात ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में निधन हो गया। खानचंद सिंह स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे और करीब तीन दिन से अस्पताल में भर्ती थे।

रिंकू के लिए मुश्किल घड़ी

पिता की गंभीर स्थिति की सूचना मिलते ही रिंकू टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बीच ही अपने पिता से मिलने पहुंचे थे। लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच से पहले वह टीम के साथ दोबारा जुड़ गए थे। पिता के निधन की खबर मिलते ही रिंकू तुरंत वापस लौट रहे हैं। अब तक यह साफ नहीं है कि वह टूर्नामेंट में आगे टीम इंडिया का हिस्सा बनेंगे या नहीं।

पिता की मेहनत और योगदान

खानचंद सिंह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में गैस एजेंसी पर सिलिंडर वितरण का काम करते थे। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बेटे रिंकू के क्रिकेट सपने को पूरा करने में पूरा सहयोग किया। रिंकू ने भी शुरुआत में सिलिंडर वितरण के काम में पिता का हाथ बंटाया और गरीबी से लड़ते हुए क्रिकेट के मैदान पर अपनी जगह बनाई।

प्रेरणादायक क्रिकेट करियर

रिंकू सिंह ने भारतीय क्रिकेट में अपनी खास पहचान बनाई है। अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और मैच जिताऊ पारियों के लिए जाने जाने वाले रिंकू के क्रिकेट करियर में उनके पिता की प्रेरणा और समर्थन हमेशा अहम भूमिका निभाता रहा।
भोर का सन्नाटा टूटा: कानपुर-सागर हाईवे पर सड़क हादसे में तीन महिलाओं की मौत, दो परिवारों के बच्चे अनाथ
लखनऊ /महोबा। भोर के तीन बजे कानपुर-सागर हाईवे पर हुए दर्दनाक हादसे ने इलाके को हिलाकर रख दिया। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि सड़क पर धूल का गुबार उठ गया और जैसे ही धूल छटी, खून से लथपथ तीन महिलाएं बिखरी पड़ी मिलीं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के बाद जोरदार आवाज सुनाई दी और मौके पर पहुंचने पर एक महिला कराहते हुए कह रही थी, “हम तो मर गए।” इस मंजर ने राहगीरों का कलेजा भी कांपने पर मजबूर कर दिया।

सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और एम्बुलेंस बुलाकर घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में तीन महिलाओं को मृत घोषित कर दिया गया। हादसे की खबर जैसे ही उनके परिजनों तक पहुँची, तो चैन की नींद सो रहे परिवार पर दुख का पहाड़ टूट गया। जो महिलाएं परिवार का पालन-पोषण करने के लिए मेहनत कर रही थीं, उनका अब इस दुनिया में होना संभव नहीं रहा।

दो परिवारों की खुशियां अब दुख में बदल गईं

हादसे में जान गंवाने वाली भगवती और गीता पहले ही अपने पतियों को खो चुकी थीं। भगवती के पति फूलचंद्र और गीता के पति बालकिशन की मौत सड़क दुर्घटना में पहले ही हो चुकी थी।दोनों महिलाएं वैवाहिक समारोहों में मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही थीं। अब उनके बच्चों के सामने मां का सहारा भी उठ गया।
भगवती के दो बेटे: रविंद्र और रवि
गीता की दो बेटियां और एक बेटा: बंटी
पिता के जाने के बाद मां का अचानक चले जाना बच्चों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। बच्चे अब पूरी तरह से अनाथ हो गए हैं और रिश्तेदार, पड़ोसी उनकी चिंता में डूबे हुए हैं।

हादसे का भयावह मंजर

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर के बाद सड़क पर टमाटर भी बिखरे मिले। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि पिकअप टमाटर लदी हुई थी। पिकअप का बाईं ओर का हिस्सा दुर्घटना में टूटा हुआ पाया गया। पुलिस ने इसे जब्त कर चालक और वाहन की तलाश शुरू कर दी है।हाईवे पर खून से लथपथ महिलाओं को देख राहगीरों की समझ नहीं आई कि कैसे मदद करें। पुलिस ने तुरंत एम्बुलेंस बुलाई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

अस्पताल में चीख-पुकार

हादसे की जानकारी मिलने पर परिजन अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बच्चों और रिश्तेदारों की चीखें गूंज रही थीं। बच्चे अपने माताओं को देखकर पहली बार समझ ही नहीं पा रहे थे कि उनकी मां अब उनके साथ नहीं हैं। उन्हें संभालने के लिए परिजन और रिश्तेदार मौजूद थे, लेकिन बच्चों की आंतरिक पीड़ा को कोई भी पूरी तरह से नहीं समझ सका।गीता के जेठ, अधिवक्ता बलदेव प्रसाद ने बताया कि ढाई-तीन साल पहले उनके छोटे भाई बालकिशन की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी थी। अब गीता भी उसी तरह सड़क हादसे का शिकार हो गईं।

दो परिवारों के बच्चों के भविष्य पर सवाल

हादसे ने केवल जीवन की क्षति नहीं दी, बल्कि दो परिवारों के बच्चों के भविष्य को भी अनिश्चित कर दिया। पिता के बाद मां का सहारा भी उठ जाने से बच्चों की दुनिया उजड़ गई है। हादसे में जीवन का स्थिर आधार खोने के बाद बच्चे अब अनाथ हो गए हैं और उनका पालन-पोषण किस तरह होगा, यह अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
रांची नगर पालिका चुनाव 2026 की मतगणना आज, सुबह 8 बजे से शुरू होगी काउंटिंग।

रांची: झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, रांची नगर पालिका आम निर्वाचन 2026 के लिए मतगणना आज, 27 फरवरी 2026 को सुबह 8:00 बजे से प्रारंभ होगी। जिला प्रशासन ने इसके लिए अपनी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

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उपायुक्त ने किया औचक निरीक्षण

देर रात जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त, श्री मंजुनाथ भजन्त्री ने मतगणना स्थलों का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपन्न होनी चाहिए। इस दौरान उनके साथ उप विकास आयुक्त श्री सौरभ कुमार भुवनिया सहित जिले के तमाम वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मतगणना केंद्र के लिए कड़े नियम

प्रशासन ने मतगणना स्थल पर अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं:

अनिवार्य पहचान पत्र: उम्मीदवारों के एजेंटों को रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा जारी पास और अपना फोटो युक्त पहचान पत्र लाना अनिवार्य है।

इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बैन: मतगणना केंद्र के भीतर मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने पर पूरी तरह से रोक रहेगी।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

मतगणना और उसके बाद परिणामों की घोषणा के दौरान शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस फोर्स और मजिस्ट्रेट की भारी तैनाती की गई है। उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन 24×7 नजर बनाए हुए है ताकि कोई भी असामाजिक तत्व माहौल खराब न कर सके।

लखनऊ में रिश्तों का कत्ल: बेटे ने पिता को मारी गोली, फिल्म देखकर किए शव के टुकड़े
लखनऊ । राजधानी के आशियाना इलाके में पैथोलॉजी संचालक व शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह (49) की हत्या ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस सनसनीखेज वारदात में उनके बेटे अक्षत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि हत्या के बाद आरोपी ने शव को ठिकाने लगाने के लिए फिल्म और यूट्यूब वीडियो से तरीका सीखा था।

फिल्म ‘वध’ से मिला आइडिया

सूत्रों के मुताबिक अक्षत ने वध फिल्म देखी थी, जिसमें आरी से शव काटकर ठिकाने लगाने का दृश्य था। इसी तरीके को अपनाने की उसने योजना बनाई। पहले उसने ऑनलाइन चाकू मंगवाया, लेकिन उससे शव काटने में सफल नहीं हुआ। बाद में वह घर से निकलकर दो आरी खरीद लाया और शव के टुकड़े कर दिए।

बताया जा रहा है कि आरोपी ने यूट्यूब पर भी शव को ठिकाने लगाने से जुड़े वीडियो देखे थे।

बहन से कहा – “तुम परेशान मत हो”

हत्या के बाद अक्षत ने अपनी छोटी बहन कृति से कहा कि वह घबराए नहीं, वह सब संभाल लेगा। सूत्रों के अनुसार कृति गंभीर बीमारी से जूझ रही है। पुलिस को आशंका है कि पारिवारिक तनाव और पिता के प्रति नफरत इस जघन्य अपराध की बड़ी वजह हो सकती है।पुलिस अब मानवेंद्र और अक्षत की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगाल रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि हत्या से पहले और बाद में आरोपी ने किन लोगों से संपर्क किया। वारदात के समय घर में मौजूद लोगों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं इस अपराध में किसी और की भूमिका तो नहीं थी।

परिवार ने साधी चुप्पी,जेल में बेचैन रहा आरोपी

मानवेंद्र के पिता ने पूरे मामले पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है। वहीं, अक्षत की मां की मौत को लेकर परिजनों ने आत्महत्या की बात से इनकार करते हुए बीमारी से निधन होना बताया है। कॉलोनी में अब भी सन्नाटा पसरा है और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं।गिरफ्तारी के बाद अक्षत को जेल भेज दिया गया। बुधवार रात वह सो नहीं सका और पूरी रात बड़बड़ाता रहा। उसकी मानसिक स्थिति को देखते हुए उसे जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सक उसकी निगरानी कर रहे हैं और काउंसिलिंग भी की जा रही है।जेल प्रशासन के अनुसार आरोपी ने बताया कि पहले उसके पिता ने उसे पीटा था, जिसके बाद उसने गुस्से में गोली मार दी। रातभर वह दीवार से टिककर बैठा रहा और कई बार रोते हुए पछतावा भी जताया।इस दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर पारिवारिक रिश्तों में बढ़ती दरार और मानसिक तनाव के गंभीर परिणामों को उजागर कर दिया है। पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।
रिंकू सिंह के पिता का निधन, स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे

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भारतीय टीम के विस्फोटक बल्लेबाज रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का निधन हो गया है। उन्होंने ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। खानचंद को लीवर कैंसर था और वह चौथे स्टेज में पहुंच चुका था। टी20 वर्ल्ड कप के बीच रिंकू सिंह के सिर से पिता का साया उठ गया।

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रिंकू सिंह के पिता ने आज सुबह अस्पताल में आखिरी सांस ली। रिंकू सिंह के पिता का नाम खानचंद्र सिंह था। उन्हें कैंसर की बीमारी थी। वह स्टेज 4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। हाल ही में उनकी तबीयत काफी खराब हो गई जिसके बाद उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में उनका इलाजा चल रहा था।

पिता से मिलने गए थे रिंकू सिंह

जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले से पहले रिंकू सिंह ने ब्रेक लिया था। पिता की गंभीर स्थिति की सूचना मिलते ही रिंकू सिंह टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बीच ही अपने पिता से मिलने आए थे। लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच से पहले दोबारा टीम के साथ जुड़ गए थे। पिता के निधन की खबर के बाद वो तुरंत वापस लौटे हैं।

सिलिंडर वितरण कर बेटे का सपना पूरा किया

रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र गैस एजेंसी पर सिलिंडर वितरण का काम करते थे। वह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक गैस एजेंसी में काम करते थे। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने बेटे रिंकू के क्रिकेटर बनने के सपने को पूरा करने में सहयोग किया। रिंकू की कामयाबी के बाद भी उन्होंने यह काम नहीं छोड़ा। रिंकू ने खुद शुरुआत में सिलिंडर वितरण के काम में पिता का हाथ बंटाया और गरीबी से लड़ते हुए क्रिकेट के मैदान पर अपनी जगह बनाई।

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित की गई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक

सीएचसी अधीक्षकों को जिलाधिकारी का सख्त निर्देश, शासन की मंशानुसार जनसामान्य को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराएं


जनपद के सभी सीएचसी में एक्सरे मशीन को सही कराकर संचालित कराने के निर्देश-जिलाधिकारी


गोण्डा। 26 फरवरी, 2026
कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी  प्रियंका निरंजन की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की मासिक समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत चलाए जा रहे कार्यक्रमों की समीक्षा की गयी।
बैठक में प्रस्तावित एजेंडा के आधार पर यू0पी0एच0एम0आई0एस0 हेल्थ डैशबोर्ड, मातृ स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, कम्युनिटी प्रोसेस, राष्ट्रीय कार्यक्रम नान कम्युनिकेबल डिजीज, एन0सी0डी0, एन0बी0सी0पी0, आर0एन0टी0सी0पी0, पी0एम0एम0वी0वाई0, नियमित टीकाकरण, वैक्सीनेशन, जननी सुरक्षा व मातृ वंदना योजना के तहत भुगतान की स्थिति, आशा इन्सेन्टिव, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, ओपीडी व आईपीडी की स्थिति, प्राथामिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा सीएचसी पर बेडों की ऑक्यूपेंसी की स्थिति सहित अन्य योजनाओं की जिलाधिकारी द्वारा गहन समीक्षा की गई। वहीं जिला स्वास्थ समिति की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित सभी योजनाओं की समीक्षा की गई।

बैठक में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जनवरी, 2026 का भ्रमण की समीक्षा की गई। एनआरसी में भर्ती बच्चों, आरसीएच पोर्टल फीडिंग के स्टेटस, एनपीसीडीसीएस, राष्ट्रीय कुष्ठ नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय अंधता एवं दृष्टिक्षीणता नियंत्रण कार्यक्रम आदि सभी की समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि समय से कार्य कराना सुनिश्चित करें।

जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जनपद के सभी सीएचसी अधीक्षकों से स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की योजनावार समीक्षा की। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी सीएचसी अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि सभी योजनाओं के कार्य समय से पूर्ण कराया जाय तथा समय-समय पर अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से योजनावार समीक्षा की जाय। ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन समय से किया जा सके।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की मंशानुसार जनसामान्य को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए सभी अधीक्षक अपने अपने सीएचसी एवं पीएचसी पर ही निवास करें तथा संस्थागत प्रसव एवं विभिन्न प्रकार के टीकों को समय से लगवाना सुनिश्चित करें। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई।

आयुष्मान कार्ड के माध्यम से मरीजों को भर्ती करायें, साथ ही इस पर विशेष ध्यान दिया जाय। ई-कवच को पोर्टल को अपडेट करें। प्रसव केंद्र पर प्रसव की संख्या बढ़ाएं। जनपद के सभी सब सेंटरों पर एएनएम की उपस्थिति सुनिश्चित की जाये। ताकि सेंटर पर आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ दिया जा सके।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी सीएचसी अधीक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में स्वयं जाकर टीकाकरण का स्थान चिन्हित करें और अधिक से अधिक बच्चों एवं महिलाओं का टीकाकरण करायें।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिये हैं कि क्षेत्र में जिन एएनएम व आशाओं द्वारा नियमित चेकअप का कार्य नहीं किया जा रहा है उनके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही करें।

बैठक में आरबीएसके का कार्य सही न होने के कारण नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्य में सुधार लाने के निर्देश।

बैठक में एक्सरे मशीन की जानकारी की गई, जिसमें अवगत कराया गया कि कुछ जगहों पर मशीन ही नहीं है, कुछ जगहों पर मशीन है पर एक्सरे टेक्नीशियन नहीं है। जिसके दृष्टिगत जिलाधिकारी ने सीएमओ को कड़े निर्देश दिये हैं कि सभी स्थानों पर मशीन उपलब्ध कराकर सही से संचालित कराया जाय।
आयुष्मान भारत कार्ड की समीक्षा में कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिये हैं कि जितने आईडी है सभी आईडी को संचालित कराकर कार्ड बनाये जाय। साथ ही सभी आईडी की प्रतिदिन रिपोर्ट लीजिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिये हैं कि जनपद के सभी सीएचओ का प्रतिदिन सेन्टर पर समय से उपस्थित रहने की लाइव लोकेशन के आधार पर जानकारी ली जाय।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती अंकिता जैन, सीएमओ डॉक्टर संत लाल पटेल, सीएमएस जिला महिला अस्पताल, जिला अस्पताल, एसीएमओ डॉक्टर आदित्य वर्मा, डॉक्टर सीके वर्मा, डॉक्टर जयगोविंद, डॉक्टर आरपी सिंह, डीपीएम जिला अस्पताल अमरनाथ, जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय उपाध्याय, बेसिक शिक्षा विभाग, सहित सभी संबंधित विभाग के अधिकारीगण व डब्ल्यू0एच0ओ0 यूनिसेफ के पदाअधिकारी, समस्त सी0एच0सी0 अधीक्षक तथा अन्य संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय में भोजन की आदतें और स्वास्थ्य विषयक  व्याख्यान हुआ संपन्न

गोंडा। 26 फरवरी 2026। भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज, गोंडा की इकाई द्वारा “बदलती खाद्य आदतें : आहार से जुड़ा हमारा स्वास्थ्य और चुनौतियां” विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया।इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में गृह विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. इला तिवारी ने कहा कि भोजन हमारे जीवन का आधार है। जैसा हमारा आहार होता है, वैसा ही हमारा स्वास्थ्य और व्यक्तित्व बनता है। यदि हम अपनी खाद्य आदतों में सुधार कर संतुलित आहार अपनाएं, तो अनेक बीमारियों से बच सकते हैं तथा एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने पोषक तत्वों से युक्त आहार, दैनिक जीवन में स्वस्थ रहने के उपाय, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों के महत्व, आर.डी.ए. (Recommended Dietary Allowance), बी.एम.आर. (Basal Metabolic Rate) तथा ग्लाइसेमिक इंडेक्स से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी रेड क्रॉस के स्वयंसेवकों को प्रदान की।

कार्यक्रम के अंत में ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत रेड क्रॉस के स्वयंसेवकों, महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं उपस्थित शिक्षकों को महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. बी.पी. सिंह द्वारा नशा मुक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान देने की शपथ दिलाई गई।

कार्यक्रम का संचालन रेड क्रॉस इकाई की संयोजक डॉ. ममता शुक्ला द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रचना श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत किया गया।कार्यक्रम में प्रो. अमन चंद्रा, प्रो. राजीव अग्रवाल, प्रो. वी.सी.एच.एन.के. श्रीनिवास राव, डॉ. मनीषा पाल, डॉ. योगेंद्र नाथ श्रीवास्तव एवं  सुमित कुमार तिवारी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
मनपा कर्मचारियों के आंदोलन से मिला सकारात्मक समाधान
मुंबई । बृहन्मुंबई महानगरपालिका कर्मचारियों की सबसे बड़ी यूनियन म्युनिसिपल मजदूर यूनियन के प्रतिनिधित्व में गुरुवार 26 फरवरी को सार्वजनिक स्वास्थ्य चिकित्सा विभाग मुख्यालय एफ दक्षिण, परेल कार्यालय पर कर्मचारियों ने एकदिवसीय सामूहिक छुट्टी लेकर आंदोलन किया। प्रशासन विगत दो वर्षों से कर्मचारियों की वरिष्ठता अनुसार पदोन्नति कर रही है सिर्फ आश्वासन देती रही थी, किन्तु सकारात्मक निर्णय नहीं ले रही थी। पदोन्नति के साथ वेतन विसंगति,वेतन ग्रेड,पद श्रृंखला नियमावली देने में आना-कानी करते देख कर्मचारियों में आक्रोश दिखा। म्युनिसिपल मजदूर यूनियन मुंबई ने कर्मचारियों के अधिकार दिलाने बाबत आंदोलन एवं प्रशासन के विरुद्ध हल्लाबोल किया। महानगर पालिका कार्यालय के प्रांगण में सुबह 10 बजे से लगभग 300 से अधिक कर्मचारियों ने उपस्थिति दर्ज कराई। आंदोलन का उग्र रूप देख प्रशासन के सहायक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ वल्ले पवार एवं स्वास्थ्य अधिकारी दक्षा शहा ने दोपहर 2 बजे यूनियन एवं कर्मचारियों के साथ मिटिंग लिया तथा आश्वासन देते हुए कहा कि सभी कर्मचारी हमारे हैं आंदोलन बंद करें। कर्मचारियों की पदोन्नति आगामी 10 दिनों में पदोन्नति कमेटी निर्णय पश्चात शीघ्र दे दी जाएगी। पदोन्नति के साथ साथ ग्रेड पे तथा पद श्रृंखला नियमावली भी लागू कर देंगे। उक्त आंदोलन में यूनियन अध्यक्ष अशोक जाधव, कार्याध्यक्ष यशवंत देशाई,सहायक सरचिटणिस प्रदीप नारकर,उपाध्यक्ष संदीप भरणकर,उपाध्यक्ष संजय बने, संघटक प्रवीण कदम,विट्ठल गावड़े,महेश दलवी सहित तकरार निवारण समिति अध्यक्ष भालचंद्र वाणी,कार्याध्यक्ष सुनील कर्पे,सेक्रेटरी विनयकुमार शर्मा,सचिव रवीन्द्र पवार, उपाध्यक्ष अनिल वायदंडे नायर अस्पताल,संघटक सुधीर कोरडे, शंकर खरात,नायर अस्पताल डेंटल कॉलेज शिकायत निवारण समिति महासचिव बालू शिंदे, युवा अध्यक्ष ललित वाघेला,युवा महासचिव योगेश जाधव,केईएम अस्पताल शिकायत निवारण समिति अध्यक्ष प्रफुल्ल अहिरे, महासचिव वैभव जुवेकर,क्षय रोग अस्पताल शिवडी शिकायत निवारण समिति अध्यक्ष मिलिंद नाइक, कीटनाशक विभाग शिकायत निवारण समिति अध्यक्ष विनोद घुगे, महासचिव नागेश गावड़े, प्रकाश झोरे, अस्पताल सायन शिकायत निवारण समिति महासचिव आतिश वायलेकर, पूर्णकालिक कार्यकर्ता अशोक सावंत, राजाराम पुरालकर, चंद्रकांत कांबले, दत्ताराम काजरोलकर, मनोहर कांबले,विजय मसारंकर, प्रसाद जाधव,परिवार कल्याण मातृ शिशु देखभाल विभाग अखिल शिंगाडे, विनायक भोसले, राहुल तायडे, स्वच्छता निरीक्षक रवीन्द्र जाधव, गणेश गोदिक सहित सर्वेलेंस संघटक, सक्रिय कार्यकर्ता एवं सभासद उपस्थित थे।
दु:ख की घड़ी में साथ: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन पहुँचे जिलिंगोड़ा, चंपई सोरेन के पोते 'वीर सोरेन' को दी श्रद्धांजलि

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सरायकेला-खरसावां (जिलिंगोड़ा): मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन गुरुवार को सरायकेला-खरसावां जिले के जिलिंगोड़ा गाँव पहुँचे। यहाँ उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री श्री चंपई सोरेन के पोते, वीर सोरेन (सुपुत्र श्री बाबूलाल सोरेन) के असामयिक और दुखद निधन पर गहरी शोक-संवेदना व्यक्त की।

मुख्यमंत्री ने दिवंगत वीर सोरेन के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अत्यंत कठिन समय में मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री श्री चंपई सोरेन, श्री बाबूलाल सोरेन एवं उनके परिवार के अन्य सदस्यों से व्यक्तिगत रूप से भेंट की और उन्हें ढाँढस बँधाया।

मुख्यमंत्री ने अपनी शोक-संवेदना में कहा कि एक युवा जीवन का इस प्रकार असमय चले जाना पूरे परिवार और समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने मरांग बुरु (ईश्वर) से प्रार्थना की कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस असहनीय कष्ट को सहने की शक्ति प्रदान करें।

NCERT विवाद पर धर्मेंद्र प्रधान की सफाई, बोले-न्यायपालिका का अपमान करने की मंशा नहीं थी

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एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े आपत्तिजनक बातों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इसे न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश करार दिया और बाजार से किताब को वापस लेने का निर्देश दिया।

एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका से जुड़े कथित विवादित अध्याय पर अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि जो कुछ हुआ उससे उन्हें गहरा दुख है और सरकार या शिक्षा मंत्रालय की ओर से न्यायपालिका का अपमान करने की कोई मंशा नहीं थी।

धर्मेद्र प्रधान ने कहा, 'हम ज्यूडिशियरी का पूरा सम्मान करते हैं। ज्यूडिशियरी ने जो भी कहा है, हम उसका पूरा पालन करेंगे। जो हुआ है, उससे मैं बहुत दुखी हूं, और मैं अफसोस जाहिर करता हूं। जैसे ही यह मामला मेरे ध्यान में आया, मैंने तुरंत NCERT को संबंधित किताबें वापस लेने का निर्देश दिया ताकि वे आगे सर्कुलेट न हों। उन्हें वापस बुलाने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं।'

सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही-प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार न्यायपालिका का सर्वोच्च सम्मान करती है और किसी भी शैक्षणिक सामग्री के जरिए संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ी सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अध्याय तैयार करने में शामिल लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य जागरूकता फैलाना है, संस्थाओं को बदनाम करना नहीं।

सीजेआई की अहम टिप्पणी

इससे पहले गुरूवार सुबह मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचौली की बेंच ने मामले पर सुनवाई की। सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कुछ अहम टिप्पणियां की। सीजेआई ने आदेश में कहा कि व्यवस्था के 3 अंग - विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका लोकतंत्र के सुचारू रूप से काम करने के लिए जरूरी हैं। उन्होंने कहा, 'हमें एक अखबार से NCERT की किताब में लिखे गए अंश का पता चला। इसे जानकर हमें आघात पहुंचा।'

न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश

सीजेआई ने कहा कि ऐसा लगता है कि यह सोच समझकर न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका के बारे में इस तरह की बातें करना और उसके प्रति असम्मान फैलाना निश्चित रूप से आपराधिक अवमानना का मामला हो सकता है। अगर ऐसा जान-बूझकर किया गया है तो।

हम सिर्फ माफी पर जाने नहीं दे सकते-सीजेआई

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह सोचा-समझा योजनाबद्ध कदम है। बच्चों के अलावा शिक्षक और अभिभावक भी इसे पढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि हम अधिकारियों को सिर्फ माफी पर जाने नहीं दे सकते। यह कहना कि इसे हटाया जा रहा है, काफी नहीं। किताब मार्केट में गई। मैंने भी इसकी एक कॉपी देखी है। उन्होंने शिक्षा विभाग को आदेश दिया कि मार्केट और स्कूलों में भेजी गई किताबें वापस ली जाएं और किताब का ऑनलाइन मटीरियल भी हटाया जाए।