आंगनबाड़ी केंद्रों पर विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश
*जिलाधिकारी ने नगमालपुर आंगनबाड़ी केंद्र पर टीकाकरण सत्र का किया आकस्मिक निरीक्षण*

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने बुधवार को विकास खंड क्षेत्र अभोली के आंगनबाड़ी केंद्र नगमालपुर में संचालित टीकाकरण सत्र का आकस्मिक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान केंद्र पर एएनएम एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री उपस्थित मिलीं तथा टीकाकरण संबंधी अभिलेखों का अवलोकन किया गया।
           निरीक्षण के दौरान एएनएम एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री द्वारा जिलाधिकारी को अवगत कराया गया कि ग्राम पंचायत में सभी 16 गर्भवती महिलाओं का निर्धारित टीकाकरण पूर्ण कराया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 52 बच्चों का नियमित टीकाकरण भी संपन्न कराया गया है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत में एक बच्चा गंभीर रूप से अस्वस्थ है, जिसका उपचार चिकित्सकीय देखरेख में कराया जा रहा है।
           जिलाधिकारी ने टीकाकरण कार्य की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के शत-प्रतिशत टीकाकरण तथा नियमित स्वास्थ्य निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान केंद्र पर विद्युत व्यवस्था उपलब्ध न होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देशित किया कि जनपद के सभी विकास खंडों के बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) से दो दिवस के भीतर आंगनबाड़ी केंद्रों की विद्युत व्यवस्था संबंधी विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त कर प्रस्तुत की जाए।
            उन्होंने सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर शीघ्र विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए कहा कि केंद्रों का संचालन सुव्यवस्थित, स्वच्छ एवं बाल हितैषी वातावरण में सुनिश्चित किया जाए। साथ ही बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं की नियमित निगरानी करने तथा शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर बल दिया।
         जिलाधिकारी ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बाल एवं मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला हैं। अतः इनके संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चक, चिकित्सा अधीक्षक अभोली डॉक्टर शुभांकर श्रीवास्तव, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी अनिल सिंह, अपर संख्या अधिकारी नीरव सिंह एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
भूटान को वाराणसी में बौद्ध मंदिर व गेस्ट हाउस निर्माण के लिए मिलेगी 2 एकड़ भूमि


*  लीज पर होगा भूमि आवंटन, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की मौजूदगी में हुआ समझौता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी में बौद्ध मंदिर एवं गेस्ट हाउस निर्माण के लिए रॉयल गवर्नमेंट ऑफ भूटान को दो एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस संबंध में बुधवार को पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह तथा अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात की उपस्थिति में पर्यटन विभाग और भूटान सरकार के बीच लीज डीड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए।
वाराणसी के अजईपुर, परगना कोलअसला, तहसील पिंडरा स्थित दो एकड़ जमीन भूटान सरकार को लीज पर दी जाएगी। भूमि हस्तांतरण से जुड़ी सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। समझौते पर भूटान सरकार की ओर से रॉयल भूटानी दूतावास, नई दिल्ली की उप-मिशन प्रमुख ताशी पेल्डन तथा उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से विशेष सचिव मृदुल चौधरी ने हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही दोनों पक्षों के अधिकारियों ने अभिलेखों का आदान-प्रदान किया।
इस अवसर पर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि भारत और भूटान के ऐतिहासिक एवं मैत्रीपूर्ण संबंधों को यह समझौता नई मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि सारनाथ पहले से ही बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केंद्र है और बौद्ध मंदिर व गेस्ट हाउस के निर्माण से देश-विदेश से आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार बौद्ध परिपथ के अंतर्गत आने वाले प्रमुख स्थलों, जैसे संकिसा और कुशीनगर में आधुनिक पर्यटन एवं आधारभूत सुविधाओं का विकास कर रही है। कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि होगी। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को वर्ष 2017 के बाद हुए सभी एमओयू की समीक्षा करने तथा ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए।भूटान सरकार की प्रतिनिधि ताशी पेल्डन ने उत्तर प्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह समझौता भारत और भूटान के संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम में महानिदेशक पर्यटन वेदपति मिश्रा, पर्यटन सलाहकार जेपी सिंह सहित पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
निगरानी ने एक चौकीदार को 9000 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा, केस से नाम हटाने के नाम पर मांगे थे रुपए, एएसआई पर भी गिर सकती है गाज

गया: गया जिले के बेलागंज थाना क्षेत्र में निगरानी की टीम ने बुधवार को एक चौकीदार को 9000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार चौकीदार की पहचान मनीष कुमार के रूप में की गई है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इस घूसकांड के तार सीधे थाने के एक सहायक पुलिस अवर निरीक्षक (ASI) से जुड़े हुए हैं।

केस से नाम हटाने के एवज में मांगी थी घूस

निगरानी विभाग के डीएसपी समीर चंद्र झा ने मामले की

पुष्टि करते हुए बताया कि बेलागंज थाने में दर्ज कांड संख्या 689/23 एक जमीनी विवाद से जुड़ा हुआ है। इस मामले में परिवादी रविंद्र यादव ग्राम पनारी के बेटे का नाम केस से हटाने के एवज में 12,000 रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। इसमें से 3,000 पहले ही लिए जा चुके थे।

बाकी के 9,000 की रकम देने के लिए परिवादी ने इसकी लिखित शिकायत पटना निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से की थी। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने मामले का गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें घूस मांगे जाने का आरोप पूरी तरह सही पाया गया। आरोप की पुष्टि होने के बाद निगरानी की एक विशेष टीम ने बेलागंज थाना के समीप स्थित अस्पताल परिसर में जाल बिछाया। जैसे ही परिवादी रविंद्र यादव ने चौकीदार मनीष कुमार को केमिकल लगे 9,000 दिए। वैसे ही घात लगाए बैठी विजिलेंस की टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया। अचानक हुई इस छापेमारी से अस्पताल व थाना परिसर में अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। अनुसंधानकर्ता ASI अशोक कुमार के इशारे पर हो रहा था खेल निगरानी डीएसपी समीर चंद्र झा ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि पकड़ा गया चौकीदार मनीष कुमार तो महज एक मोहरा था।

दरअसल, इस जमीन विवाद मामले के अनुसंधानकर्ता बेलागंज थाने के एएसआई अशोक कुमार हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि एएसआई अशोक कुमार के कहने और उनके इशारे पर ही चौकीदार द्वारा पैसे का यह लेन-देन किया जा रहा था। डीएसपी समीर चंद झा जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि मामले के आईओ एएसआई अशोक कुमार के कहने पर ही चौकीदार पैसे ले रहा था। इस पूरे मामले में सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। आरोपी चौकीदार को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पटना ले जाया जा रहा है। इस मामले में संलिप्त और दोषियों को खिलाफ भी विधि सम्मत सख्त कार्रवाई की जाएगी.

मिडिल ईस्ट में फिड़ भड़की युद्ध की चिंगारी, हेलीकॉप्टर गिराने जाने के बाद अमेरिका का ईरान पर हमला

मिडिल ईस्ट यानी खाड़ी में युद्ध की चिंगारी एक बार फिर से सुलग उठी है। ईरान द्वारा अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर मार गिराए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान पर हमला किया है। अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बंदर अब्बास तक एक साथ अटैक किया है। यूएस आर्मी ने ईरान के एयर डिफेंस, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और रडार साइट्स बम बरसाए है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, अमेरिकी बलों ने ईरान के खिलाफ आत्मरक्षा में हमले शुरू किए हैं। सेंटकॉम का कहना है कि यह कार्रवाई उस घटना के जवाब में की गई, जिसमें ईरान ने अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराने का दावा किया था। सेंटकॉम ने बताया कि राष्ट्रपति के निर्देश पर मंगलवार शाम से ये हमले शुरू किए गए। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह ईरान की अनुचित आक्रामकता के खिलाफ संतुलित और सीमित जवाबी कार्रवाई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में गूंजी धमाकों की आवाज

ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में केशम द्वीप पर धमाकों की आवाज सुनी गई है। यह एक अहम शिपिंग रूट है, जिसे ईरान ने युद्ध के दौरान असल में बंद कर दिया है। ईरानी मीडिया की रिपोर्ट से पता चलता है कि हमले ईरान की राजधानी का दूसरे बड़े शहरों में नहीं बल्कि केशम द्वीप पर हुए है। इससे जानमाल के नुकसान की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

ईरानी विदेश मंत्री की खुली चेतावनी

इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह सुरक्षित रहना चाहता है तो उसे फारस की खाड़ी क्षेत्र छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं किसी भी हमले या धमकी का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि युद्ध के मैदान में असफल रहने के बाद अमेरिका ने ईरान के संकल्प को परखने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि ईरान की शक्तिशाली सेना किसी भी हमले को बिना जवाब दिए नहीं छोड़ेगी। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि फारस की खाड़ी के इतिहास में बाहरी ताकतों के बुरे अंजाम के कई उदाहरण मौजूद हैं।

इजराइल और ईरान के बीच भी बढ़ा तनाव

बता दें कि हाल के दिनों में ईरान और इस्राइल के बीच भी तनाव बढ़ा है। दोनों देशों के बीच लगातार हमले और जवाबी हमले हो रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार इस्राइल ने ईरान के एक पेट्रोकेमिकल संयंत्र को निशाना बनाया, जबकि ईरान की ओर से इस्राइली सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में हालात को और गंभीर बना सकता है।

प्राकृतिक हीरा, धरती माता के अमर प्रेम का अनमोल उपहार
– संजय जीवन लाल शाह

प्राकृतिक हीरा केवल एक रत्न नहीं, बल्कि प्रकृति की करोड़ों वर्षों की साधना का परिणाम और धरती माता के अमर प्रेम का जीवंत प्रतीक है। इसकी अनुपम चमक, दुर्लभता, शाश्वतता और अद्वितीय सौंदर्य ने इसे सदियों से प्रेम, विश्वास, समर्पण, शक्ति और वैभव का सर्वोच्च प्रतीक बनाया है। यही कारण है कि प्राकृतिक हीरा आज भी दुनिया भर में प्रेम की सबसे सुंदर और सबसे मूल्यवान अभिव्यक्ति माना जाता है। कहा जाता है कि कुछ उपहार समय के साथ पुराने हो जाते हैं, लेकिन प्राकृतिक हीरा ऐसा उपहार है जिसकी चमक समय के साथ और अधिक निखरती जाती है। जब कोई व्यक्ति अपनी प्रिय को प्राकृतिक हीरे का उपहार देता है, तो वह केवल एक आभूषण नहीं देता, बल्कि अपने अटूट प्रेम, सम्मान, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने का वचन सौंपता है। इसी कारण प्राकृतिक हीरे को दुनिया भर में “अल्टीमेट गिफ्ट ऑफ लव” की संज्ञा दी गई है। ‘डायमंड’ शब्द ग्रीक भाषा के शब्द ‘एडामस’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है—अजेय और अविनाशी। यह नाम हीरे के गुणों का सटीक परिचय देता है। प्रेम की तरह ही हीरा भी अटूट, अमर और समय की हर कसौटी पर खरा उतरने वाला माना जाता है। इतिहास साक्षी है कि इस अद्भुत रत्न को प्राप्त करने के लिए अनेक राजाओं और साम्राज्यों ने संघर्ष किए, युद्ध लड़े और इसे अपने गौरव का प्रतीक बनाया। भारत को प्राकृतिक हीरों की जन्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है। हजारों वर्ष पूर्व विश्व के प्रथम हीरे भारत की धरती से प्राप्त हुए थे। गोलकुंडा की खदानों से निकले हीरों ने विश्व को चमत्कृत कर दिया था। विश्वविख्यात कोहिनूर, होप डायमंड और अनेक ऐतिहासिक हीरे भारत की गौरवशाली विरासत का हिस्सा रहे हैं। जब दुनिया के अधिकांश देशों में हीरे के बारे में जानकारी भी नहीं थी, तब भारतीय राजघरानों की रानियां और राजकुमारियां हीरों से सुसज्जित मुकुट, हार, बाजूबंद, कंगन और अंगूठियां धारण करती थीं। निजाम, गायकवाड़, सिंधिया और अन्य भारतीय राजवंशों के खजाने प्राकृतिक हीरों की अद्वितीय संपदा के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध थे। भारतीय संस्कृति में हीरे को केवल संपत्ति नहीं, बल्कि सौभाग्य, समृद्धि और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना गया है।
विश्व की विभिन्न सभ्यताओं में भी प्राकृतिक हीरे को विशेष सम्मान प्राप्त हुआ है। यूनानियों का विश्वास था कि हीरे देवताओं के आंसुओं से बने हैं, जबकि प्राचीन रोमन उन्हें टूटते तारों के टुकड़े मानते थे। मध्यकालीन यूरोप में हीरे को साहस, सुरक्षा और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता था। इटली में इसे पति-पत्नी के मध्य प्रेम और सामंजस्य को सुदृढ़ करने वाला रत्न माना गया। सगाई की अंगूठी में हीरा जड़ने की परंपरा भी प्रेम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। वर्ष 1477 में ऑस्ट्रिया के आर्चड्यूक मैक्सिमिलियन ने मैरी ऑफ बरगंडी को हीरे की अंगूठी भेंट की थी। इसके बाद हीरे की अंगूठी प्रेम, प्रतिबद्धता और वैवाहिक बंधन का वैश्विक प्रतीक बन गई। आज भी विश्वभर में लाखों युगल अपने जीवन की नई शुरुआत प्राकृतिक हीरे की अंगूठी के साथ करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी प्राकृतिक हीरा प्रकृति का अद्भुत चमत्कार है। यह धरती की गहराइयों में लगभग 150 से 200 किलोमीटर नीचे, अत्यधिक तापमान और दबाव के बीच करोड़ों वर्षों में निर्मित होता है। प्रकृति की इस लंबी और अद्भुत प्रक्रिया के कारण प्रत्येक प्राकृतिक हीरा अद्वितीय होता है। कोई भी दो प्राकृतिक हीरे पूरी तरह समान नहीं होते। प्रत्येक हीरा अपनी अलग पहचान और विशिष्टता लिए होता है, मानो उस पर स्वयं प्रकृति के हस्ताक्षर अंकित हों।
प्राकृतिक हीरे की यात्रा भी उसकी चमक जितनी ही प्रेरणादायक होती है। धरती की गहराइयों से निकलकर वह खनिकों, कारीगरों, डिजाइनरों और ज्वेलरी विशेषज्ञों के कुशल हाथों से गुजरता है। अनगिनत घंटों की मेहनत और कलात्मकता के बाद वह एक शानदार आभूषण का रूप धारण करता है, जो किसी के जीवन की सबसे यादगार स्मृति बन जाता है। आज के आधुनिक युग में भी प्राकृतिक हीरा केवल फैशन का हिस्सा नहीं है, बल्कि भावनाओं, उपलब्धियों और जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी है। सगाई, विवाह, वर्षगांठ, सफलता, मातृत्व अथवा किसी विशेष उपलब्धि के अवसर पर दिया गया प्राकृतिक हीरा जीवनभर की यादों को संजोए रखता है। ज्वैल मेकर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय जीवनलाल शाह के अनुसार, “प्राकृतिक हीरा हमें यह संदेश देता है कि वास्तविक मूल्य समय, धैर्य, समर्पण और प्रकृति की अनमोल रचना में निहित होता है। करोड़ों वर्षों में निर्मित यह रत्न प्रेम, निष्ठा और स्थायित्व का जीवंत प्रतीक है।”
जब तक संसार में प्रेम, विश्वास, सौंदर्य और समर्पण का अस्तित्व रहेगा, तब तक प्राकृतिक हीरे की दिव्य चमक मानव हृदयों को आलोकित करती रहेगी। वास्तव में, प्राकृतिक हीरा केवल एक रत्न नहीं, बल्कि धरती माता द्वारा मानवता को दिया गया अमर प्रेम का अनमोल उपहार है—एक ऐसा उपहार जो पीढ़ियों तक रिश्तों, भावनाओं और स्मृतियों को जीवंत बनाए रखता है। यही कारण है कि प्राकृतिक हीरा सदैव प्रेम की सबसे सुंदर, सबसे शुद्ध और सबसे शाश्वत अभिव्यक्ति बना रहेगा।
सालगिरह से लौट रहे परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, सड़क हादसे में महिला समेत तीन की मौत
बाराबंकी। जिले के देवा-चिनहट मार्ग पर मंगलवार देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया, जबकि गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई।

जानकारी के अनुसार देवा कोतवाली क्षेत्र के मलिका असंड गांव निवासी निर्मल रावत अपने परिवार के साथ लखनऊ के अरदासी खेड़ा गांव में बहन की शादी की सालगिरह समारोह में शामिल होने गए थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सभी लोग मंगलवार रात करीब 12 बजे दो बाइकों से अपने घर लौट रहे थे।

बताया गया कि दूसरी बाइक पर चार वर्षीय नेहा, 42 वर्षीय महिला और 20 वर्षीय विजेंद्र सवार थे। जब वे देवा-चिनहट मार्ग पर गोपालपुर गांव के पास पहुंचे, तभी उनकी बाइक आगे चल रही ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और तीनों सड़क पर गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने तीनों घायलों को तत्काल जिला चिकित्सालय पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। शादी की सालगिरह की खुशियां देखते ही देखते मातम में बदल गईं। मृतकों के घर पर रिश्तेदारों और ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।

पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में ट्रैक्टर-ट्रॉली से टक्कर के चलते हादसा होने की बात सामने आई है।

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और रात के समय वाहनों की सावधानीपूर्वक आवाजाही की आवश्यकता को उजागर किया है। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की असमय मौत से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।
मानवता की मिसाल बनी महिगवां पुलिस, भटके हुए युवक को सकुशल परिजनों से मिलाया
लखनऊ। पुलिस की संवेदनशीलता और जनसेवा का एक सराहनीय उदाहरण महिगवां थाना क्षेत्र में देखने को मिला, जहां रात्रि गश्त के दौरान भटके हुए एक मंदबुद्धि युवक को पुलिस ने सुरक्षित संरक्षण में लेकर उसके परिजनों से मिलाया। पुलिस की तत्परता और मानवीय व्यवहार के चलते चिंतित परिवार को बड़ी राहत मिली।

जानकारी के अनुसार 8/9 जून 2026 की रात थाना महिगवां पुलिस टीम क्षेत्र में गश्त और भ्रमण पर थी। इसी दौरान पुलिसकर्मियों की नजर एक युवक पर पड़ी, जो संदिग्ध अवस्था में इधर-उधर भटकता हुआ दिखाई दिया। पुलिस टीम ने उसे रोककर पूछताछ की तो उसने अपना नाम आशीष शर्मा पुत्र वीरपाल शर्मा, निवासी वेली सिटी, इज्जतनगर, जनपद बरेली बताया।

पूछताछ के दौरान युवक का व्यवहार सामान्य नहीं लगा और वह अपने परिजनों के बारे में स्पष्ट जानकारी देने में असमर्थ था। बातचीत में उसने बताया कि वह उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा देने के लिए 7 जून को लखनऊ आया था, लेकिन रास्ता भटक जाने के कारण घर वापस नहीं जा सका।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महिगवां पुलिस ने युवक को अपने संरक्षण में लिया और उसे भोजन एवं जलपान उपलब्ध कराया। इसके बाद उसे सुरक्षित रूप से थाने लाया गया, जहां उससे शांतिपूर्वक और विस्तार से पूछताछ की गई।

पूछताछ के दौरान युवक ने अपने मामा कृष्ण पाल शर्मा का नाम और एक मोबाइल नंबर बताया। पुलिस ने तत्काल उस नंबर पर संपर्क किया। बातचीत के दौरान युवक के पिता वीरपाल शर्मा ने पुष्टि की कि आशीष उनका पुत्र है, जो उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा देने लखनऊ गया था और वापस घर नहीं लौटा था। परिवार पिछले कई दिनों से उसकी तलाश कर रहा था और काफी चिंतित था।

महिगवां पुलिस ने युवक के पिता को जानकारी दी कि उनका बेटा पूरी तरह सुरक्षित है और थाना महिगवां में मौजूद है। सूचना मिलते ही परिजन थाने पहुंचे। आवश्यक कानूनी और औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने आशीष शर्मा को सकुशल उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया।

अपने बेटे को सुरक्षित पाकर परिजनों की आंखें नम हो गईं और उन्होंने महिगवां पुलिस की तत्परता, संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार के लिए आभार व्यक्त किया।

इस सराहनीय कार्यवाही में थाना महिगवां के थानाध्यक्ष राधे श्याम मौर्य, उपनिरीक्षक सतीश सिंह, उपनिरीक्षक अमित सिंह, कांस्टेबल लाल बहादुर और अरविंद कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

महिगवां पुलिस की यह पहल न केवल कानून-व्यवस्था के प्रति उसकी जिम्मेदारी को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि पुलिस समाज में जरूरतमंद लोगों के लिए एक भरोसेमंद सहारा बनकर खड़ी है। मानवता और जनसेवा का यह उदाहरण लोगों के बीच पुलिस की सकारात्मक छवि को और मजबूत करता है।
यूपी में डॉक्टरों का बड़ा संकट: 18,500 पदों में 7,500 खाली, विशेषज्ञों की भर्ती के लिए बनेगा नया बोर्ड
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रही हैं। प्रांतीय चिकित्सा सेवा (पीएमएस) संवर्ग के करीब 40 प्रतिशत पद रिक्त हैं। प्रदेश में स्वीकृत लगभग 18,500 पदों के सापेक्ष केवल 11 हजार डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जबकि करीब 7,500 पद खाली पड़े हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए सरकार विभिन्न स्तरों पर भर्ती प्रक्रिया चला रही है और अब इसके लिए एक नया भर्ती बोर्ड गठित करने की तैयारी भी कर रही है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इस समस्या से निपटने के लिए करीब 2,500 विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजा गया है।

रिवर्स बिडिंग से हो रही विशेषज्ञों की नियुक्ति

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए रिवर्स बिडिंग व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत पांच लाख रुपये प्रतिमाह तक के मानदेय पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती की जा रही है। पिछले वर्ष इस प्रक्रिया के जरिए करीब 170 विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की गई थी। इन्हें चयनित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में तैनात किया गया है।

इसके अलावा जनवरी 2026 में संविदा के आधार पर 710 डॉक्टरों की भर्ती के लिए वॉक-इन-इंटरव्यू भी आयोजित किए गए थे। सरकार ने डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सेवानिवृत्ति की आयु भी 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी है।

विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षक भर्ती बोर्ड का गठन

डॉक्टरों की कमी और लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती में लगने वाले लंबे समय को देखते हुए प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षक भर्ती बोर्ड के गठन का निर्णय लिया है। यह बोर्ड एमडी-एमएस डिग्रीधारी विशेषज्ञ चिकित्सकों (लेवल-2) की सीधी भर्ती करेगा। साथ ही एमबीबीएस डिग्रीधारी चिकित्सकों (लेवल-1) की पदोन्नति प्रक्रिया को भी तेज करेगा।

सरकार का मानना है कि नए बोर्ड के गठन से भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी और रिक्त पदों को जल्द भरा जा सकेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में टिक नहीं पा रहे विशेषज्ञ डॉक्टर

स्वास्थ्य विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात कई विशेषज्ञ डॉक्टर कुछ समय बाद नौकरी छोड़ देते हैं। हर वर्ष सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग 200 से 250 विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की जाती है, लेकिन इनमें से करीब 25 प्रतिशत डॉक्टर कार्यभार ग्रहण करने के कुछ समय बाद ही अनुपस्थित हो जाते हैं।

लंबे समय तक ड्यूटी पर न लौटने पर विभाग की ओर से नोटिस जारी किए जाते हैं। इसके बावजूद जब डॉक्टर वापस नहीं आते तो उनकी सेवाएं समाप्त कर पद को पुनः रिक्त घोषित कर दिया जाता है।

ग्रामीण क्षेत्रों से नौकरी छोड़ने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि उन्हें सरकारी आवास, बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और चिकित्सा सेवाओं के लिए आवश्यक संसाधन जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं। वहीं निजी अस्पतालों में बेहतर शहरी सुविधाओं के साथ आकर्षक वेतन मिलने से कई डॉक्टर सरकारी सेवा छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।

अगले दो वर्षों में रिक्त पद भरने का दावा

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कहा कि प्रदेश में कई स्तरों पर डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। नए मेडिकल कॉलेजों से निकलने वाले विशेषज्ञ चिकित्सक भी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले एक-दो वर्षों में अधिकांश रिक्त पद भर लिए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के मरीजों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है तथा इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर भर्ती और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे
यूपी में गर्मी का कहर: बांदा 45 डिग्री के साथ सबसे गर्म, 17 जिलों में लू और 36 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इन दिनों मौसम के दो अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। एक ओर बुंदेलखंड और दक्षिणी जिलों में भीषण गर्मी, लू और उमस लोगों का जीना मुहाल किए हुए हैं, तो दूसरी ओर तराई और कुछ अन्य क्षेत्रों में आंधी, बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश का दौर जारी है। मौसम के इस दोहरे मिजाज ने प्रदेशवासियों को असमंजस में डाल दिया है।

मंगलवार को प्रदेश के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया। बुंदेलखंड क्षेत्र में गर्मी का असर सबसे अधिक देखने को मिला। बांदा 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा। इसके अलावा प्रयागराज में 44.6 डिग्री, झांसी में 44.4 डिग्री, कानपुर में 43.9 डिग्री और वाराणसी में 43.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

भीषण गर्मी और तेज धूप के कारण दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। गर्म हवाओं और उमस ने लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया। बिजली और पानी की बढ़ती मांग ने भी कई इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम ने थोड़ी राहत भी दी। कई जिलों में बादलों की आवाजाही के साथ हल्की बूंदाबांदी हुई, जिससे तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई। लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी और उमस ने लोगों को परेशान किया।

मौसम विभाग ने बुधवार के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार बुंदेलखंड और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में लू चलने की संभावना है। वहीं तराई क्षेत्र समेत 36 जिलों में गरज-चमक, तेज हवाएं और हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि 11 जून से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से 13 जून तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तेज हवाएं चल सकती हैं और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है। इससे तापमान में कुछ कमी आने की संभावना है, हालांकि उमस बरकरार रह सकती है।

राजधानी लखनऊ में भी मौसम का बदला हुआ स्वरूप देखने को मिला। दिनभर कड़ी धूप और गर्मी के बाद मंगलवार शाम को कई इलाकों में तेज आंधी चली। कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी भी हुई। इसके बावजूद लोगों को गर्मी से विशेष राहत नहीं मिल सकी। मंगलवार को अधिकतम तापमान में 1.7 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसम विभाग का अनुमान है कि 12 जून से राजधानी समेत प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से बादल छाने, तेज हवाएं चलने और बूंदाबांदी होने की संभावना है। हालांकि तब तक लोगों को भीषण गर्मी और लू से सतर्क रहने की जरूरत है।

विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय घरों से कम निकलने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और धूप से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। उत्तर प्रदेश में फिलहाल गर्मी और बदलते मौसम का यह दौर अगले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।
बाबा बालखंडी नाथ मंदिर में भव्य शुरुआत; लाखों श्रद्धालुओं के बीच सात दिवसीय श्री अधिक मास शिव महापुराण कथा का उद्घाटन
संजीव सिंह बलिया, 9 जून 2026 — बाबा बालखंडी नाथ मंदिर परिसर में मंगलवार से शुरू हुई सात दिवसीय श्री अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) शिव महापुराण कथा का भव्य और भक्तिमय आयोजन पहले ही दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के साथ संपन्न हुआ। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कथा के प्रथम दिन अधिक मास की महिमा तथा भगवान शिव की आराधना के महत्व का विस्तृत वर्णन किया।
कथा का शुभारंभ परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, राज्यसभा सांसद नीरज शेखर तथा भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा द्वारा व्यासपीठ पूजन के साथ हुआ। इस मौके पर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बलिया की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस पवित्र भूमि पर कथा आयोजन कराना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने महर्षि भृगु की तपोभूमि और वीरों की धरती बलिया का नमन करते हुए कहा कि अधिक मास भगवान की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है। उन्होंने बताया कि इस पवित्र मास में शिव की उपासना और जलाभिषेक से अनेक गुना पुण्य फल मिलता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं” का जाप और एक लोटा जल अर्पित करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है। कथावचन के दौरान उन्होंने लिंग पुराण और स्कंद पुराण में बाबा बालेश्वर नाथ के वर्णन का संदर्भ भी दिया और श्रद्धालुओं से इन ग्रंथों का अध्ययन करने का आह्वान किया।
कथा के पहले दिन ही देश-प्रदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने पूरा परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गुंजायमान कर दिया। आयोजकों ने लगभग एक लाख लोगों की क्षमता वाला वॉटरप्रूफ पंडाल, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, पार्किंग, सुरक्षा एवं यातायात प्रबंध सहित व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सुरक्षा के कड़े प्रबंधों के तहत कई थानों की पुलिस फोर्स, यातायात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सतत मुस्तैद रहे। गर्मी को ध्यान में रखते हुए पानी व अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया।
आस्था, श्रद्धा और भक्ति के सम्मिलन से परिपूर्ण इस कथाक्रम का पहला दिन श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय रहा। कथा अगले छह दिनों तक चलने वाली है और आयोजन समिति ने आगे भी इसी प्रकार सुचारु व सुरक्षित व्यवस्था बनाए रखने का आश्वासन दिया है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश
*जिलाधिकारी ने नगमालपुर आंगनबाड़ी केंद्र पर टीकाकरण सत्र का किया आकस्मिक निरीक्षण*

नितेश श्रीवास्तव

भदोही। जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने बुधवार को विकास खंड क्षेत्र अभोली के आंगनबाड़ी केंद्र नगमालपुर में संचालित टीकाकरण सत्र का आकस्मिक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान केंद्र पर एएनएम एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री उपस्थित मिलीं तथा टीकाकरण संबंधी अभिलेखों का अवलोकन किया गया।
           निरीक्षण के दौरान एएनएम एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री द्वारा जिलाधिकारी को अवगत कराया गया कि ग्राम पंचायत में सभी 16 गर्भवती महिलाओं का निर्धारित टीकाकरण पूर्ण कराया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 52 बच्चों का नियमित टीकाकरण भी संपन्न कराया गया है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत में एक बच्चा गंभीर रूप से अस्वस्थ है, जिसका उपचार चिकित्सकीय देखरेख में कराया जा रहा है।
           जिलाधिकारी ने टीकाकरण कार्य की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के शत-प्रतिशत टीकाकरण तथा नियमित स्वास्थ्य निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान केंद्र पर विद्युत व्यवस्था उपलब्ध न होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देशित किया कि जनपद के सभी विकास खंडों के बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) से दो दिवस के भीतर आंगनबाड़ी केंद्रों की विद्युत व्यवस्था संबंधी विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त कर प्रस्तुत की जाए।
            उन्होंने सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर शीघ्र विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए कहा कि केंद्रों का संचालन सुव्यवस्थित, स्वच्छ एवं बाल हितैषी वातावरण में सुनिश्चित किया जाए। साथ ही बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं की नियमित निगरानी करने तथा शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर बल दिया।
         जिलाधिकारी ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बाल एवं मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला हैं। अतः इनके संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार चक, चिकित्सा अधीक्षक अभोली डॉक्टर शुभांकर श्रीवास्तव, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी अनिल सिंह, अपर संख्या अधिकारी नीरव सिंह एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
भूटान को वाराणसी में बौद्ध मंदिर व गेस्ट हाउस निर्माण के लिए मिलेगी 2 एकड़ भूमि


*  लीज पर होगा भूमि आवंटन, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की मौजूदगी में हुआ समझौता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी में बौद्ध मंदिर एवं गेस्ट हाउस निर्माण के लिए रॉयल गवर्नमेंट ऑफ भूटान को दो एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस संबंध में बुधवार को पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह तथा अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात की उपस्थिति में पर्यटन विभाग और भूटान सरकार के बीच लीज डीड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए।
वाराणसी के अजईपुर, परगना कोलअसला, तहसील पिंडरा स्थित दो एकड़ जमीन भूटान सरकार को लीज पर दी जाएगी। भूमि हस्तांतरण से जुड़ी सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। समझौते पर भूटान सरकार की ओर से रॉयल भूटानी दूतावास, नई दिल्ली की उप-मिशन प्रमुख ताशी पेल्डन तथा उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से विशेष सचिव मृदुल चौधरी ने हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही दोनों पक्षों के अधिकारियों ने अभिलेखों का आदान-प्रदान किया।
इस अवसर पर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि भारत और भूटान के ऐतिहासिक एवं मैत्रीपूर्ण संबंधों को यह समझौता नई मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि सारनाथ पहले से ही बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केंद्र है और बौद्ध मंदिर व गेस्ट हाउस के निर्माण से देश-विदेश से आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार बौद्ध परिपथ के अंतर्गत आने वाले प्रमुख स्थलों, जैसे संकिसा और कुशीनगर में आधुनिक पर्यटन एवं आधारभूत सुविधाओं का विकास कर रही है। कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि होगी। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को वर्ष 2017 के बाद हुए सभी एमओयू की समीक्षा करने तथा ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए।भूटान सरकार की प्रतिनिधि ताशी पेल्डन ने उत्तर प्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह समझौता भारत और भूटान के संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम में महानिदेशक पर्यटन वेदपति मिश्रा, पर्यटन सलाहकार जेपी सिंह सहित पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
निगरानी ने एक चौकीदार को 9000 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा, केस से नाम हटाने के नाम पर मांगे थे रुपए, एएसआई पर भी गिर सकती है गाज

गया: गया जिले के बेलागंज थाना क्षेत्र में निगरानी की टीम ने बुधवार को एक चौकीदार को 9000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार चौकीदार की पहचान मनीष कुमार के रूप में की गई है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इस घूसकांड के तार सीधे थाने के एक सहायक पुलिस अवर निरीक्षक (ASI) से जुड़े हुए हैं।

केस से नाम हटाने के एवज में मांगी थी घूस

निगरानी विभाग के डीएसपी समीर चंद्र झा ने मामले की

पुष्टि करते हुए बताया कि बेलागंज थाने में दर्ज कांड संख्या 689/23 एक जमीनी विवाद से जुड़ा हुआ है। इस मामले में परिवादी रविंद्र यादव ग्राम पनारी के बेटे का नाम केस से हटाने के एवज में 12,000 रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। इसमें से 3,000 पहले ही लिए जा चुके थे।

बाकी के 9,000 की रकम देने के लिए परिवादी ने इसकी लिखित शिकायत पटना निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से की थी। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने मामले का गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें घूस मांगे जाने का आरोप पूरी तरह सही पाया गया। आरोप की पुष्टि होने के बाद निगरानी की एक विशेष टीम ने बेलागंज थाना के समीप स्थित अस्पताल परिसर में जाल बिछाया। जैसे ही परिवादी रविंद्र यादव ने चौकीदार मनीष कुमार को केमिकल लगे 9,000 दिए। वैसे ही घात लगाए बैठी विजिलेंस की टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया। अचानक हुई इस छापेमारी से अस्पताल व थाना परिसर में अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। अनुसंधानकर्ता ASI अशोक कुमार के इशारे पर हो रहा था खेल निगरानी डीएसपी समीर चंद्र झा ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि पकड़ा गया चौकीदार मनीष कुमार तो महज एक मोहरा था।

दरअसल, इस जमीन विवाद मामले के अनुसंधानकर्ता बेलागंज थाने के एएसआई अशोक कुमार हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि एएसआई अशोक कुमार के कहने और उनके इशारे पर ही चौकीदार द्वारा पैसे का यह लेन-देन किया जा रहा था। डीएसपी समीर चंद झा जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि मामले के आईओ एएसआई अशोक कुमार के कहने पर ही चौकीदार पैसे ले रहा था। इस पूरे मामले में सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। आरोपी चौकीदार को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पटना ले जाया जा रहा है। इस मामले में संलिप्त और दोषियों को खिलाफ भी विधि सम्मत सख्त कार्रवाई की जाएगी.

मिडिल ईस्ट में फिड़ भड़की युद्ध की चिंगारी, हेलीकॉप्टर गिराने जाने के बाद अमेरिका का ईरान पर हमला

मिडिल ईस्ट यानी खाड़ी में युद्ध की चिंगारी एक बार फिर से सुलग उठी है। ईरान द्वारा अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर मार गिराए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान पर हमला किया है। अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बंदर अब्बास तक एक साथ अटैक किया है। यूएस आर्मी ने ईरान के एयर डिफेंस, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और रडार साइट्स बम बरसाए है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, अमेरिकी बलों ने ईरान के खिलाफ आत्मरक्षा में हमले शुरू किए हैं। सेंटकॉम का कहना है कि यह कार्रवाई उस घटना के जवाब में की गई, जिसमें ईरान ने अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराने का दावा किया था। सेंटकॉम ने बताया कि राष्ट्रपति के निर्देश पर मंगलवार शाम से ये हमले शुरू किए गए। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह ईरान की अनुचित आक्रामकता के खिलाफ संतुलित और सीमित जवाबी कार्रवाई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में गूंजी धमाकों की आवाज

ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में केशम द्वीप पर धमाकों की आवाज सुनी गई है। यह एक अहम शिपिंग रूट है, जिसे ईरान ने युद्ध के दौरान असल में बंद कर दिया है। ईरानी मीडिया की रिपोर्ट से पता चलता है कि हमले ईरान की राजधानी का दूसरे बड़े शहरों में नहीं बल्कि केशम द्वीप पर हुए है। इससे जानमाल के नुकसान की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

ईरानी विदेश मंत्री की खुली चेतावनी

इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह सुरक्षित रहना चाहता है तो उसे फारस की खाड़ी क्षेत्र छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं किसी भी हमले या धमकी का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि युद्ध के मैदान में असफल रहने के बाद अमेरिका ने ईरान के संकल्प को परखने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि ईरान की शक्तिशाली सेना किसी भी हमले को बिना जवाब दिए नहीं छोड़ेगी। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि फारस की खाड़ी के इतिहास में बाहरी ताकतों के बुरे अंजाम के कई उदाहरण मौजूद हैं।

इजराइल और ईरान के बीच भी बढ़ा तनाव

बता दें कि हाल के दिनों में ईरान और इस्राइल के बीच भी तनाव बढ़ा है। दोनों देशों के बीच लगातार हमले और जवाबी हमले हो रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार इस्राइल ने ईरान के एक पेट्रोकेमिकल संयंत्र को निशाना बनाया, जबकि ईरान की ओर से इस्राइली सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में हालात को और गंभीर बना सकता है।

प्राकृतिक हीरा, धरती माता के अमर प्रेम का अनमोल उपहार
– संजय जीवन लाल शाह

प्राकृतिक हीरा केवल एक रत्न नहीं, बल्कि प्रकृति की करोड़ों वर्षों की साधना का परिणाम और धरती माता के अमर प्रेम का जीवंत प्रतीक है। इसकी अनुपम चमक, दुर्लभता, शाश्वतता और अद्वितीय सौंदर्य ने इसे सदियों से प्रेम, विश्वास, समर्पण, शक्ति और वैभव का सर्वोच्च प्रतीक बनाया है। यही कारण है कि प्राकृतिक हीरा आज भी दुनिया भर में प्रेम की सबसे सुंदर और सबसे मूल्यवान अभिव्यक्ति माना जाता है। कहा जाता है कि कुछ उपहार समय के साथ पुराने हो जाते हैं, लेकिन प्राकृतिक हीरा ऐसा उपहार है जिसकी चमक समय के साथ और अधिक निखरती जाती है। जब कोई व्यक्ति अपनी प्रिय को प्राकृतिक हीरे का उपहार देता है, तो वह केवल एक आभूषण नहीं देता, बल्कि अपने अटूट प्रेम, सम्मान, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने का वचन सौंपता है। इसी कारण प्राकृतिक हीरे को दुनिया भर में “अल्टीमेट गिफ्ट ऑफ लव” की संज्ञा दी गई है। ‘डायमंड’ शब्द ग्रीक भाषा के शब्द ‘एडामस’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है—अजेय और अविनाशी। यह नाम हीरे के गुणों का सटीक परिचय देता है। प्रेम की तरह ही हीरा भी अटूट, अमर और समय की हर कसौटी पर खरा उतरने वाला माना जाता है। इतिहास साक्षी है कि इस अद्भुत रत्न को प्राप्त करने के लिए अनेक राजाओं और साम्राज्यों ने संघर्ष किए, युद्ध लड़े और इसे अपने गौरव का प्रतीक बनाया। भारत को प्राकृतिक हीरों की जन्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है। हजारों वर्ष पूर्व विश्व के प्रथम हीरे भारत की धरती से प्राप्त हुए थे। गोलकुंडा की खदानों से निकले हीरों ने विश्व को चमत्कृत कर दिया था। विश्वविख्यात कोहिनूर, होप डायमंड और अनेक ऐतिहासिक हीरे भारत की गौरवशाली विरासत का हिस्सा रहे हैं। जब दुनिया के अधिकांश देशों में हीरे के बारे में जानकारी भी नहीं थी, तब भारतीय राजघरानों की रानियां और राजकुमारियां हीरों से सुसज्जित मुकुट, हार, बाजूबंद, कंगन और अंगूठियां धारण करती थीं। निजाम, गायकवाड़, सिंधिया और अन्य भारतीय राजवंशों के खजाने प्राकृतिक हीरों की अद्वितीय संपदा के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध थे। भारतीय संस्कृति में हीरे को केवल संपत्ति नहीं, बल्कि सौभाग्य, समृद्धि और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना गया है।
विश्व की विभिन्न सभ्यताओं में भी प्राकृतिक हीरे को विशेष सम्मान प्राप्त हुआ है। यूनानियों का विश्वास था कि हीरे देवताओं के आंसुओं से बने हैं, जबकि प्राचीन रोमन उन्हें टूटते तारों के टुकड़े मानते थे। मध्यकालीन यूरोप में हीरे को साहस, सुरक्षा और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता था। इटली में इसे पति-पत्नी के मध्य प्रेम और सामंजस्य को सुदृढ़ करने वाला रत्न माना गया। सगाई की अंगूठी में हीरा जड़ने की परंपरा भी प्रेम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। वर्ष 1477 में ऑस्ट्रिया के आर्चड्यूक मैक्सिमिलियन ने मैरी ऑफ बरगंडी को हीरे की अंगूठी भेंट की थी। इसके बाद हीरे की अंगूठी प्रेम, प्रतिबद्धता और वैवाहिक बंधन का वैश्विक प्रतीक बन गई। आज भी विश्वभर में लाखों युगल अपने जीवन की नई शुरुआत प्राकृतिक हीरे की अंगूठी के साथ करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी प्राकृतिक हीरा प्रकृति का अद्भुत चमत्कार है। यह धरती की गहराइयों में लगभग 150 से 200 किलोमीटर नीचे, अत्यधिक तापमान और दबाव के बीच करोड़ों वर्षों में निर्मित होता है। प्रकृति की इस लंबी और अद्भुत प्रक्रिया के कारण प्रत्येक प्राकृतिक हीरा अद्वितीय होता है। कोई भी दो प्राकृतिक हीरे पूरी तरह समान नहीं होते। प्रत्येक हीरा अपनी अलग पहचान और विशिष्टता लिए होता है, मानो उस पर स्वयं प्रकृति के हस्ताक्षर अंकित हों।
प्राकृतिक हीरे की यात्रा भी उसकी चमक जितनी ही प्रेरणादायक होती है। धरती की गहराइयों से निकलकर वह खनिकों, कारीगरों, डिजाइनरों और ज्वेलरी विशेषज्ञों के कुशल हाथों से गुजरता है। अनगिनत घंटों की मेहनत और कलात्मकता के बाद वह एक शानदार आभूषण का रूप धारण करता है, जो किसी के जीवन की सबसे यादगार स्मृति बन जाता है। आज के आधुनिक युग में भी प्राकृतिक हीरा केवल फैशन का हिस्सा नहीं है, बल्कि भावनाओं, उपलब्धियों और जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी है। सगाई, विवाह, वर्षगांठ, सफलता, मातृत्व अथवा किसी विशेष उपलब्धि के अवसर पर दिया गया प्राकृतिक हीरा जीवनभर की यादों को संजोए रखता है। ज्वैल मेकर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय जीवनलाल शाह के अनुसार, “प्राकृतिक हीरा हमें यह संदेश देता है कि वास्तविक मूल्य समय, धैर्य, समर्पण और प्रकृति की अनमोल रचना में निहित होता है। करोड़ों वर्षों में निर्मित यह रत्न प्रेम, निष्ठा और स्थायित्व का जीवंत प्रतीक है।”
जब तक संसार में प्रेम, विश्वास, सौंदर्य और समर्पण का अस्तित्व रहेगा, तब तक प्राकृतिक हीरे की दिव्य चमक मानव हृदयों को आलोकित करती रहेगी। वास्तव में, प्राकृतिक हीरा केवल एक रत्न नहीं, बल्कि धरती माता द्वारा मानवता को दिया गया अमर प्रेम का अनमोल उपहार है—एक ऐसा उपहार जो पीढ़ियों तक रिश्तों, भावनाओं और स्मृतियों को जीवंत बनाए रखता है। यही कारण है कि प्राकृतिक हीरा सदैव प्रेम की सबसे सुंदर, सबसे शुद्ध और सबसे शाश्वत अभिव्यक्ति बना रहेगा।
सालगिरह से लौट रहे परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, सड़क हादसे में महिला समेत तीन की मौत
बाराबंकी। जिले के देवा-चिनहट मार्ग पर मंगलवार देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया, जबकि गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई।

जानकारी के अनुसार देवा कोतवाली क्षेत्र के मलिका असंड गांव निवासी निर्मल रावत अपने परिवार के साथ लखनऊ के अरदासी खेड़ा गांव में बहन की शादी की सालगिरह समारोह में शामिल होने गए थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सभी लोग मंगलवार रात करीब 12 बजे दो बाइकों से अपने घर लौट रहे थे।

बताया गया कि दूसरी बाइक पर चार वर्षीय नेहा, 42 वर्षीय महिला और 20 वर्षीय विजेंद्र सवार थे। जब वे देवा-चिनहट मार्ग पर गोपालपुर गांव के पास पहुंचे, तभी उनकी बाइक आगे चल रही ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और तीनों सड़क पर गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने तीनों घायलों को तत्काल जिला चिकित्सालय पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। शादी की सालगिरह की खुशियां देखते ही देखते मातम में बदल गईं। मृतकों के घर पर रिश्तेदारों और ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।

पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में ट्रैक्टर-ट्रॉली से टक्कर के चलते हादसा होने की बात सामने आई है।

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और रात के समय वाहनों की सावधानीपूर्वक आवाजाही की आवश्यकता को उजागर किया है। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की असमय मौत से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।
मानवता की मिसाल बनी महिगवां पुलिस, भटके हुए युवक को सकुशल परिजनों से मिलाया
लखनऊ। पुलिस की संवेदनशीलता और जनसेवा का एक सराहनीय उदाहरण महिगवां थाना क्षेत्र में देखने को मिला, जहां रात्रि गश्त के दौरान भटके हुए एक मंदबुद्धि युवक को पुलिस ने सुरक्षित संरक्षण में लेकर उसके परिजनों से मिलाया। पुलिस की तत्परता और मानवीय व्यवहार के चलते चिंतित परिवार को बड़ी राहत मिली।

जानकारी के अनुसार 8/9 जून 2026 की रात थाना महिगवां पुलिस टीम क्षेत्र में गश्त और भ्रमण पर थी। इसी दौरान पुलिसकर्मियों की नजर एक युवक पर पड़ी, जो संदिग्ध अवस्था में इधर-उधर भटकता हुआ दिखाई दिया। पुलिस टीम ने उसे रोककर पूछताछ की तो उसने अपना नाम आशीष शर्मा पुत्र वीरपाल शर्मा, निवासी वेली सिटी, इज्जतनगर, जनपद बरेली बताया।

पूछताछ के दौरान युवक का व्यवहार सामान्य नहीं लगा और वह अपने परिजनों के बारे में स्पष्ट जानकारी देने में असमर्थ था। बातचीत में उसने बताया कि वह उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा देने के लिए 7 जून को लखनऊ आया था, लेकिन रास्ता भटक जाने के कारण घर वापस नहीं जा सका।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महिगवां पुलिस ने युवक को अपने संरक्षण में लिया और उसे भोजन एवं जलपान उपलब्ध कराया। इसके बाद उसे सुरक्षित रूप से थाने लाया गया, जहां उससे शांतिपूर्वक और विस्तार से पूछताछ की गई।

पूछताछ के दौरान युवक ने अपने मामा कृष्ण पाल शर्मा का नाम और एक मोबाइल नंबर बताया। पुलिस ने तत्काल उस नंबर पर संपर्क किया। बातचीत के दौरान युवक के पिता वीरपाल शर्मा ने पुष्टि की कि आशीष उनका पुत्र है, जो उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा देने लखनऊ गया था और वापस घर नहीं लौटा था। परिवार पिछले कई दिनों से उसकी तलाश कर रहा था और काफी चिंतित था।

महिगवां पुलिस ने युवक के पिता को जानकारी दी कि उनका बेटा पूरी तरह सुरक्षित है और थाना महिगवां में मौजूद है। सूचना मिलते ही परिजन थाने पहुंचे। आवश्यक कानूनी और औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने आशीष शर्मा को सकुशल उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया।

अपने बेटे को सुरक्षित पाकर परिजनों की आंखें नम हो गईं और उन्होंने महिगवां पुलिस की तत्परता, संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार के लिए आभार व्यक्त किया।

इस सराहनीय कार्यवाही में थाना महिगवां के थानाध्यक्ष राधे श्याम मौर्य, उपनिरीक्षक सतीश सिंह, उपनिरीक्षक अमित सिंह, कांस्टेबल लाल बहादुर और अरविंद कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

महिगवां पुलिस की यह पहल न केवल कानून-व्यवस्था के प्रति उसकी जिम्मेदारी को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि पुलिस समाज में जरूरतमंद लोगों के लिए एक भरोसेमंद सहारा बनकर खड़ी है। मानवता और जनसेवा का यह उदाहरण लोगों के बीच पुलिस की सकारात्मक छवि को और मजबूत करता है।
यूपी में डॉक्टरों का बड़ा संकट: 18,500 पदों में 7,500 खाली, विशेषज्ञों की भर्ती के लिए बनेगा नया बोर्ड
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रही हैं। प्रांतीय चिकित्सा सेवा (पीएमएस) संवर्ग के करीब 40 प्रतिशत पद रिक्त हैं। प्रदेश में स्वीकृत लगभग 18,500 पदों के सापेक्ष केवल 11 हजार डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जबकि करीब 7,500 पद खाली पड़े हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए सरकार विभिन्न स्तरों पर भर्ती प्रक्रिया चला रही है और अब इसके लिए एक नया भर्ती बोर्ड गठित करने की तैयारी भी कर रही है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इस समस्या से निपटने के लिए करीब 2,500 विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजा गया है।

रिवर्स बिडिंग से हो रही विशेषज्ञों की नियुक्ति

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए रिवर्स बिडिंग व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत पांच लाख रुपये प्रतिमाह तक के मानदेय पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती की जा रही है। पिछले वर्ष इस प्रक्रिया के जरिए करीब 170 विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की गई थी। इन्हें चयनित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में तैनात किया गया है।

इसके अलावा जनवरी 2026 में संविदा के आधार पर 710 डॉक्टरों की भर्ती के लिए वॉक-इन-इंटरव्यू भी आयोजित किए गए थे। सरकार ने डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सेवानिवृत्ति की आयु भी 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी है।

विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षक भर्ती बोर्ड का गठन

डॉक्टरों की कमी और लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती में लगने वाले लंबे समय को देखते हुए प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षक भर्ती बोर्ड के गठन का निर्णय लिया है। यह बोर्ड एमडी-एमएस डिग्रीधारी विशेषज्ञ चिकित्सकों (लेवल-2) की सीधी भर्ती करेगा। साथ ही एमबीबीएस डिग्रीधारी चिकित्सकों (लेवल-1) की पदोन्नति प्रक्रिया को भी तेज करेगा।

सरकार का मानना है कि नए बोर्ड के गठन से भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी और रिक्त पदों को जल्द भरा जा सकेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में टिक नहीं पा रहे विशेषज्ञ डॉक्टर

स्वास्थ्य विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात कई विशेषज्ञ डॉक्टर कुछ समय बाद नौकरी छोड़ देते हैं। हर वर्ष सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग 200 से 250 विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की जाती है, लेकिन इनमें से करीब 25 प्रतिशत डॉक्टर कार्यभार ग्रहण करने के कुछ समय बाद ही अनुपस्थित हो जाते हैं।

लंबे समय तक ड्यूटी पर न लौटने पर विभाग की ओर से नोटिस जारी किए जाते हैं। इसके बावजूद जब डॉक्टर वापस नहीं आते तो उनकी सेवाएं समाप्त कर पद को पुनः रिक्त घोषित कर दिया जाता है।

ग्रामीण क्षेत्रों से नौकरी छोड़ने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि उन्हें सरकारी आवास, बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और चिकित्सा सेवाओं के लिए आवश्यक संसाधन जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं। वहीं निजी अस्पतालों में बेहतर शहरी सुविधाओं के साथ आकर्षक वेतन मिलने से कई डॉक्टर सरकारी सेवा छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।

अगले दो वर्षों में रिक्त पद भरने का दावा

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कहा कि प्रदेश में कई स्तरों पर डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। नए मेडिकल कॉलेजों से निकलने वाले विशेषज्ञ चिकित्सक भी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले एक-दो वर्षों में अधिकांश रिक्त पद भर लिए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के मरीजों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है तथा इसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर भर्ती और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे
यूपी में गर्मी का कहर: बांदा 45 डिग्री के साथ सबसे गर्म, 17 जिलों में लू और 36 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इन दिनों मौसम के दो अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। एक ओर बुंदेलखंड और दक्षिणी जिलों में भीषण गर्मी, लू और उमस लोगों का जीना मुहाल किए हुए हैं, तो दूसरी ओर तराई और कुछ अन्य क्षेत्रों में आंधी, बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश का दौर जारी है। मौसम के इस दोहरे मिजाज ने प्रदेशवासियों को असमंजस में डाल दिया है।

मंगलवार को प्रदेश के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया। बुंदेलखंड क्षेत्र में गर्मी का असर सबसे अधिक देखने को मिला। बांदा 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा। इसके अलावा प्रयागराज में 44.6 डिग्री, झांसी में 44.4 डिग्री, कानपुर में 43.9 डिग्री और वाराणसी में 43.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

भीषण गर्मी और तेज धूप के कारण दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। गर्म हवाओं और उमस ने लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया। बिजली और पानी की बढ़ती मांग ने भी कई इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम ने थोड़ी राहत भी दी। कई जिलों में बादलों की आवाजाही के साथ हल्की बूंदाबांदी हुई, जिससे तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई। लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी और उमस ने लोगों को परेशान किया।

मौसम विभाग ने बुधवार के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। विभाग के अनुसार बुंदेलखंड और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में लू चलने की संभावना है। वहीं तराई क्षेत्र समेत 36 जिलों में गरज-चमक, तेज हवाएं और हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि 11 जून से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से 13 जून तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तेज हवाएं चल सकती हैं और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश भी हो सकती है। इससे तापमान में कुछ कमी आने की संभावना है, हालांकि उमस बरकरार रह सकती है।

राजधानी लखनऊ में भी मौसम का बदला हुआ स्वरूप देखने को मिला। दिनभर कड़ी धूप और गर्मी के बाद मंगलवार शाम को कई इलाकों में तेज आंधी चली। कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी भी हुई। इसके बावजूद लोगों को गर्मी से विशेष राहत नहीं मिल सकी। मंगलवार को अधिकतम तापमान में 1.7 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

मौसम विभाग का अनुमान है कि 12 जून से राजधानी समेत प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से बादल छाने, तेज हवाएं चलने और बूंदाबांदी होने की संभावना है। हालांकि तब तक लोगों को भीषण गर्मी और लू से सतर्क रहने की जरूरत है।

विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय घरों से कम निकलने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और धूप से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। उत्तर प्रदेश में फिलहाल गर्मी और बदलते मौसम का यह दौर अगले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।
बाबा बालखंडी नाथ मंदिर में भव्य शुरुआत; लाखों श्रद्धालुओं के बीच सात दिवसीय श्री अधिक मास शिव महापुराण कथा का उद्घाटन
संजीव सिंह बलिया, 9 जून 2026 — बाबा बालखंडी नाथ मंदिर परिसर में मंगलवार से शुरू हुई सात दिवसीय श्री अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) शिव महापुराण कथा का भव्य और भक्तिमय आयोजन पहले ही दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के साथ संपन्न हुआ। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कथा के प्रथम दिन अधिक मास की महिमा तथा भगवान शिव की आराधना के महत्व का विस्तृत वर्णन किया।
कथा का शुभारंभ परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, राज्यसभा सांसद नीरज शेखर तथा भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा द्वारा व्यासपीठ पूजन के साथ हुआ। इस मौके पर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बलिया की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस पवित्र भूमि पर कथा आयोजन कराना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने महर्षि भृगु की तपोभूमि और वीरों की धरती बलिया का नमन करते हुए कहा कि अधिक मास भगवान की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है। उन्होंने बताया कि इस पवित्र मास में शिव की उपासना और जलाभिषेक से अनेक गुना पुण्य फल मिलता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं” का जाप और एक लोटा जल अर्पित करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है। कथावचन के दौरान उन्होंने लिंग पुराण और स्कंद पुराण में बाबा बालेश्वर नाथ के वर्णन का संदर्भ भी दिया और श्रद्धालुओं से इन ग्रंथों का अध्ययन करने का आह्वान किया।
कथा के पहले दिन ही देश-प्रदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने पूरा परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गुंजायमान कर दिया। आयोजकों ने लगभग एक लाख लोगों की क्षमता वाला वॉटरप्रूफ पंडाल, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, पार्किंग, सुरक्षा एवं यातायात प्रबंध सहित व्यापक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सुरक्षा के कड़े प्रबंधों के तहत कई थानों की पुलिस फोर्स, यातायात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सतत मुस्तैद रहे। गर्मी को ध्यान में रखते हुए पानी व अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया।
आस्था, श्रद्धा और भक्ति के सम्मिलन से परिपूर्ण इस कथाक्रम का पहला दिन श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय रहा। कथा अगले छह दिनों तक चलने वाली है और आयोजन समिति ने आगे भी इसी प्रकार सुचारु व सुरक्षित व्यवस्था बनाए रखने का आश्वासन दिया है।