अब चुनाव में "जन्म जहां, चुनाव वहां से" का मुद्दा उछला

• सामाजिक संस्था नया कारवां के फाउंडर ने उठाया मामला
भोपाल। शहर को, शहरवासियों को लफंडर और फकोड़ा कहकर एक पूर्व विधायक बवाल में आ गए हैं। उन्होंने जीते हुए विधायक से अपना अवसाद निकालने के लिए उन्हें अनर्गल भाषा अपनाने के बीच भोपालियों को भी झूठा और फकोड़ा कहने में कोताही नहीं बरती है। शहरवासी उनकी इस बात से खफा भी हैं, और जो व्यक्ति जहां जन्मा हो, चुनाव भी वहीं से लड़े, की मांग उठाने लगा है।नेशनल एनजीओ नया कारवां के फाउंडर मोहम्मद तारिक ने इस मामले को लेकर निर्वाचन आयोग में शिकायत करने की तैयारी की है। मोहम्मद तारिक लंबे समय से भाजपा की रीतिनीति से जुड़े रहे हैं, लेकिन उनका भाजपा से अलगाव तब हो गया, जब तत्कालीन भाजपा विधायक ध्रुव नारायण सिंह ने यह सार्वजनिक बयान दिया कि उनके पास कई मुस्लिम महिलाएं आती हैं, उनसे उनके अंतरंग रिश्ते भी हैं और इससे वे खुशी भी महसूस करते हैं। तारिक ने कहा कि जिस मध्य विधानसभा से वे चुनाव जीतकर विधायक बने थे, वहां करीब आधी आबादी मुस्लिमों की है। ऐसे में अपने मतदाताओं से इस तरह का दोगला व्यवहार रखना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस समय कांग्रेस प्रत्याशी नासिर इस्लाम को पराजित करने की रणनीति बनाई गई थी, तब उनको इन्हीं आरिफ मसूद ने का सहयोग लेना पड़ा था, जिन्हें अब वे फर्जी, गुंडा और झूठा करार दे रहे हैं।
भोपाली फकोड़े, तो छोड़ क्यों नहीं देते शहर...
ध्रुव नारायण सिंह जिन भोपालियों को फकोड़ा और बतौला कह रहे हैं, उन्हीं के वोट समर्थन से वे जीत हासिल करना चाहते हैं। वे मूलतः सतना जिले के रामपुर बघेलान के रहने वाले हैं, अगर वे खुद को इतना सबल मानते हैं, तो अपने पैतृक गांव जाकर चुनाव क्यों नहीं लड़ते। मोहम्मद तारिक इस मामले को लेकर चुनाव आयोग से मांग भी करने वाले हैं, कि जो व्यक्ति जहां जन्मा हो, वह वहीं से चुनाव लड़े।
धर्म सियासत नहीं चलेगी
मोहम्मद तारिक ने ध्रुव नारायण के उस प्रयास पर भी प्रहार किया है, जिसमें शहर की जनता को सांप्रदायिक आग में झोंकने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि आरिफ मसूद मुस्लिम समुदाय से हैं, विपक्षी दल से ताल्लुक रखते हैं और किसी अप्रत्याशित निर्णय के मामले में बोलने को स्वतंत्र हैं। उनके कार्यकाल में वे हर धर्म का सम्मान और सभी धर्मों के त्यौहार में सहभागिता करते रहे हैं। ऐसे में हार की हताशा में ध्रुव नारायण को इस तरह की सियासत करने से बाज आना चाहिए। वैसे भी यह शहर गंगा जमुनी तहजीब का बड़ा उदाहरण कहा जाता है, उनके इस तरह के बयानों से जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
इनका कहना
सियासत में मर्यादाओं का ख्याल जरूरी है। इस मामले में सिर्फ इतना ही कह पाऊंगा कि
इन दोनों में एक मेरा जूनियर छोटा भाई है तो दूसरी तरफ़ मेरा सुसराली पक्ष भाई। दोनों को धैर्य और संयम रखना चाहिए।
मोहम्मद तारिक,
नयां कारवां
(नेशनल एनजीओ)
2 hours and 14 min ago
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