महाराणा प्रताप जयंती शोभायात्रा को लेकर रामराज क्षेत्र में पुलिस का फ्लैग मार्च
मेरठ। रामराज चौकी क्षेत्र में महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में 9 मई 2026 को आयोजित होने वाली भव्य शोभायात्रा को शांतिपूर्ण एवं सकुशल संपन्न कराने के उद्देश्य से थाना बहसूमा पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। इसी क्रम में थाना अध्यक्ष बहसूमा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मय फोर्स क्षेत्र के प्रमुख मार्गों एवं संवेदनशील स्थानों पर फ्लैग मार्च निकाला।

फ्लैग मार्च के दौरान पुलिस अधिकारियों ने बाजारों, मुख्य चौराहों तथा भीड़भाड़ वाले इलाकों में पैदल गश्त कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। पुलिस प्रशासन ने क्षेत्रवासियों, व्यापारियों एवं शोभायात्रा आयोजकों से आपसी भाईचारा, शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। साथ ही लोगों को अफवाहों से दूर रहने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने के निर्देश दिए गए।

थाना प्रभारी रविंद्र कुमार ने कहा कि शोभायात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फ्लैग मार्च का उद्देश्य आमजन में सुरक्षा का विश्वास कायम करना तथा असामाजिक तत्वों में कानून का भय उत्पन्न करना है।

इस दौरान उप निरीक्षक सोनू कुमार, रामराज चौकी इंचार्ज आशीष यादव, उप निरीक्षक धर्मवीर कुमार, कांस्टेबल सुधीर कुमार सहित भारी पुलिस बल मौजूद रहा। पुलिस की सक्रियता से क्षेत्र में सुरक्षा एवं शांति का माहौल बना रहा।
कन्नौज में हुआ भीषण सडक  हादसा, एक युवक की मौत, 5 घायल

पंकज श्रीवास्तव/ विवेक कुमार

कन्नौज जिले के गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में पूर्व जिला पंचायत सदस्य के इकलौते पुत्र की मौत हो गई, जबकि कार में सवार पांच अन्य लोग घायल हो गए। सभी लोग पारिवारिक कार्यक्रम में तिलक चढ़ाकर वापस लौट रहे थे।

जानकारी के अनुसार चौकी जसोदा क्षेत्र के ग्राम फतेहपुर जसोदा निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य गोपाल त्रिपाठी के 38 वर्षीय पुत्र प्रशांत त्रिपाठी अपने साथियों शुभम तिवारी (30 वर्ष), बादल तिवारी (35 वर्ष), रमन तिवारी (36 वर्ष), निशांत अग्निहोत्री (22 वर्ष), विकास पांडे (36 वर्ष) और ग्राम पांडेपुरवा निवासी 32 वर्षीय विकास पांडे के साथ गुरुवार रात सीतापुर जिले के सिधौली में शुभम तिवारी की बहन निशा का तिलक चढ़ाने गए थे।
वापसी के दौरान तेज रफ्तार थार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे करीब 20 फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों और पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को बाहर निकाला।

हादसे में प्रशांत त्रिपाठी की मौत हो गई, जबकि अन्य घायल लोगों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। गंभीर रूप से घायल कुछ लोगों को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ताबड़-तोड़ छापा डालकर अवैध रूप से संचालित कई क्लीनिकों व पैथोलॉजी सेंटर को किया सील, मचा हड़कम्प

रितेश मिश्रा
कछौना(हरदोई):* गर्मी मौसम के मद्देनजर बुखार, डायरिया, दस्त, उल्टी बीमारी तेजी से फैल रही है। बड़ी आबादी, अशिक्षा व प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी के चलते आमजनमानस झोलाछाप डॉक्टर की शरण में जाने को विवश हैं जिसका फायदा ये झोलाछाप डॉक्टर उठाते हैं। गलत इलाज कर मरीज को और बीमार कर रहे हैं जिससे झोलाछाप डॉक्टर, क्लीनिक, पैथोलॉजी धड़ल्ले से चल रहे हैं, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग की मौन स्वीकृति मिलती है जिसके कारण कई बार मरीजों के साथ अनहोनी घटनाएं घटती हैं।

बढ़ती घटनाओं के चलते शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डॉ मनोज सिंह ने अपनी टीम के साथ कई क्लीनिक, पैथोलॉजी पर छापा डालकर उन्हें सीज कर विधिक कार्रवाई की है। नोडल अधिकारी डॉ. मनोज सिंह ने कमर कस ली है। टीम ने गाजू रोड पर स्थित मकरंद मेडिकल स्टोर पर गलत तरीके से मरीज का इलाज करते पाया। कोई योग डॉक्टर उपस्थित नहीं था, मरीज को भर्ती कर इलाज किया जा रहा था, जिस पर मेडिकल स्टोर को सील कर कार्रवाई की गई। इसके बाद पैथोलॉजी संचालक अभिराज के द्वारा आवश्यक कागज न दिखाने पर पैथोलॉजी को सील की कार्रवाई की गई। उसके उपरांत डॉक्टर चंद्रा क्लीनिक के संचालक द्वारा मेडिकल काउंसिल का पंजीकरण, मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा निर्गत पंजीकरण एवं क्लीनिक में पंजीकृत चिकित्सा उपस्थित न पाए जाने पर सील की कार्रवाई की गई। प्रदीप सोनी क्लीनिक पर अनियमितताओं के चलते सील की कार्रवाई की गई। नारायण हॉस्पिटल में संचालक डॉक्टर देवेंद्र मोहन द्वारा कोई चिकित्सक का मेडिकल काउंसिल का पंजीकरण, बायो वेस्ट मैनेजमेंट प्रमाण पत्र, चिकित्सालय में योग्य डॉक्टरों की कमी पर सील की कार्रवाई की गई। हसमत अली के क्लीनिक को सील कर विधिक कार्रवाई की गई। गाजू रोड स्थित बालाजी पाली क्लीनिक के संचालक द्वारा बिना पंजीकरण व योग्य डॉक्टरों की उपलब्धता न होने पर मरीजों का इलाज करते हुए पाया गया, इस क्लीनिक को भी सील कर कार्रवाई अमल में लाई गई।

डॉ मनोज सिंह नोडल अधिकारी की टीम द्वारा ताबड़तोड़ कार्रवाई से अन्य झोलाछाप डॉक्टर, क्लीनिक, पैथोलॉजी संचालक शटर बंद कर भाग गए। उन्होंने बताया कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। कछौना कस्बा सहित ग्रामीण क्षेत्र में सैकड़ो की संख्या में पंजीकृत नर्सिंग होम, क्लीनिक, पैथोलॉजी, अल्ट्रासाउंड सेंटर, अस्पताल स्वास्थ्य मानकों को ताक पर रखकर स्वास्थ्य सेवाएं देकर आम जनमानस के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। यहां तक कि गंभीर बीमारी के साथ ऑपरेशन तक करते हैं। मरीज के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर जीवन भर के लिए उन्हें अपंग कर देते हैं जिससे लाइलाज बीमारी तेजी से फैल रही है। जिससे आमजन आर्थिक व शारीरिक रूप से लूटा जाता है। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से झोलाछाप डॉक्टरों के हौसले पस्त हैं।
लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि बने देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, जानें देश के अगले सीडीएस के बारे में

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भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) एनएस राजा सुब्रमणि को देश का अगला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त किया है। वे रक्षा मामलों के विभाग के सचिव की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। मौजूदा सीडीएस अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई को खत्म हो रहा है।

देश के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ

नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि के हाथ में तीनों सेनाओं की कमान होगी। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि पदभार ग्रहण करने की तारीख से और अगले आदेश तक भारत सरकार के सैन्य मामलों के विभाग में सचिव के रूप में भी कार्य करेंगे। अभी तक देश के सीएडीएस यानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान हैं। लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि अब उन्हें ही रिप्लेस करेंगे। एनएस राजा सुब्रमणि देश के तीसरे सीडीएस होंगे।

भारतीय सेना में 37 वर्षों से अधिक का करियर

लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने यह जिम्मेदारी 1 सितंबर 2025 से संभाली हुई है। इससे पहले, उन्होंने 1 जुलाई, 2024 से 31 जुलाई, 2025 तक सेना के उप प्रमुख के रूप में कार्य किया। उन्होंने मार्च 2023 से जून 2024 तक केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) का पद भी संभाला। लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि को दिसंबर 1985 में गढ़वाल राइफल्स में कमीशन मिला था और भारतीय सेना में उनका करियर 37 वर्षों से अधिक का है।

जम्मू-कश्मीर से लेकर कजाकिस्तान तक जिम्मेदारी संभाली

अपने सैन्य करियर में सुब्रमणि ने अलग-अलग ऑपरेशनल फील्ड में काम किया। वे कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना स्थित भारतीय दूतावास में सेना से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। कर्नल रैंक में उन्होंने आर्मी हेडक्वार्टर में असिस्टेंट मिलिट्री सेक्रेटरी की जिम्मेदारी संभाली। बाद में ईस्टर्न कमांड में कर्नल जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस) रहे। जम्मू-कश्मीर में वे राष्ट्रीय राइफल्स सेक्टर के डिप्टी कमांडर भी रहे।

देश के लिए सेवाओं के लिए हो चुके हैं सम्मानित

ब्रिगेडियर बनने के बाद सुब्रमणि ने जम्मू-कश्मीर के सांबा में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली। इसके अलावा वे आर्मी हेडक्वार्टर में डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री इंटेलिजेंस (DDGMI) भी रहे। साल 2023 में उन्होंने सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद संभाला। इसके एक साल बाद वे सेना के 47वें वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बने। रिटायरमेंट के बाद उन्हें नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटरिएट (NSCS) में मिलिट्री एडवाइजर नियुक्त किया गया था। देश के लिए सेवाओं के लिए सुब्रमणि को परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।

2 दिन पूर्व हुए लुटेरों से आज हुई पुलिस की मुठभेड़,गोली लगाने से एक बदमाश घायल और तीन गिरफ्तार

सुल्तानपुर लूट के आरोपी के साथ पुलिस की मुठभेड़।पुलिस फायरिंग में प्रतीक भारती नाम के बदमाश के पैर में लगी गोली। इलाज के लिए अस्पताल में करवाया गया भर्ती। घटना स्थल से पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों को भी किया गिरफ्तार। लूटे गए 32 हजार में से 24,500 नगद, बाइक और अवैध असलहा बरामद। दो दिन पूर्व माइक्रोफाइनेंस कंपनी के कलेक्शन एजेंट रामकृष्ण विश्वकर्मा से 32 हजार की हुई थी लूट।नगर के अमहट के पास तमंचे की नोंक पर लूटे गए थे 32 हजार। मॉल बंटवारे की सूचना पर आज आरोपियों को पकड़ने पहुंची थी पुलिस। जिसके बाद पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़। नगर कोतवाली क्षेत्र से जुड़ा है मामला।
लखनऊ में सेफ्टी टैंक हादसा: जहरीली गैस से दो सफाईकर्मियों की मौत
* मुख्यमंत्री ने जताया शोक, जांच और मुआवजे के दिए निर्देश
लखनऊ। लखनऊ के माल थाना क्षेत्र स्थित नबी पनाह गांव में सेफ्टी टैंक की सफाई के दौरान बड़ा हादसा हो गया। टैंक की सफाई करने उतरे दो मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है।
मृतकों की पहचान रिंकू और राजेश के रूप में हुई है। दोनों की उम्र करीब 35 वर्ष बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार दोनों युवक सेफ्टी टैंक की सफाई के लिए अंदर उतरे थे, तभी जहरीली गैस की चपेट में आने से उनका दम घुट गया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया, जबकि अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
घटना का संज्ञान लेते हुए योगी आदित्यनाथ ने मृतक सफाईमित्रों के परिजनों के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने, उचित मुआवजा उपलब्ध कराने तथा पूरे हादसे की विस्तृत जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
योगी सरकार में कानून व्यवस्था मजबूत, दंगों और फिरौती पर लगी लगाम
* एनसीआरबी रिपोर्ट का दावा— 2023 और 2024 में फिरौती के लिए अपहरण की अपराध दर शून्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश, जिसे वर्ष 2017 से पहले ‘दंगा प्रदेश’ कहा जाता था, आज सख्त कानून व्यवस्था और जीरो टॉलरेंस नीति के चलते अपराध नियंत्रण के नए मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। राज्य सरकार के अनुसार योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ, जबकि वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में 25 हजार से अधिक दंगे दर्ज किए गए थे।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 19 दंगे और 33 अपहरण की घटनाएं सामने आती थीं। वहीं वर्तमान सरकार का दावा है कि कठोर कानून व्यवस्था और अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई के कारण दंगाइयों एवं माफियाओं के मंसूबे विफल हुए हैं।
एनसीआरबी की वर्ष 2024 रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में फिरौती के लिए अपहरण की अपराध दर शून्य दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक नगालैंड में यह दर 0.7, मणिपुर में 0.6, अरुणाचल प्रदेश में 0.3 और मेघालय में 0.2 रही, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा शून्य रहा। वर्ष 2023 में भी प्रदेश में इस श्रेणी में अपराध दर शून्य दर्ज की गई थी।
सरकार का कहना है कि अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति, सक्रिय पुलिसिंग, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और माफियाओं की संपत्तियों की जब्ती जैसे कदमों का असर अब धरातल पर दिखाई दे रहा है। संगठित अपराधों पर आर्थिक कार्रवाई ने अपराधियों की कमर तोड़ने का काम किया है।
प्रदेश सरकार के अनुसार पिछले नौ वर्षों में कुछ अराजक तत्वों द्वारा दंगा भड़काने की कोशिश जरूर की गई, लेकिन समय रहते पुलिस और प्रशासन ने सख्त कार्रवाई कर हालात को नियंत्रित कर लिया। एनसीआरबी की 2024 रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में बलवा की अपराध दर 1.1 दर्ज की गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत 2.2 रहा। रिपोर्ट के अनुसार मणिपुर में यह दर 8.4, महाराष्ट्र में 6.4, कर्नाटक में 5.4, हरियाणा में 5.3 और हिमाचल प्रदेश में 4.7 दर्ज की गई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सार्वजनिक मंचों से अक्सर कहते हैं— “नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा।” सरकार का दावा है कि यही सख्त नीति प्रदेश में कानून व्यवस्था सुधारने का आधार बनी है।
सेवा और करूणा का पर्याय है रेडक्रॉस, साई कॉलेज में मना विश्व रेडक्रॉस दिवस

अम्बिकापुर- सेवा का प्रतिफल हमेशा कल्याणकारी होता है। रेडक्रॉस सेवा और करूणा का पर्याय है। यह बातें श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय में रेडक्रॉस दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने कही। उन्होंंने सेवा और चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग और समर्पण के महत्व को अवगत कराते हुए कहा कि पेनसिलीन का आविष्कार की कहानी से अवगत कराया। सर अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने १९२८ में लंदन के सेंट मैरी अस्पताल में अथक परिश्रम से किया था। यह दुनिया की पहली एंटीबायोटिक दवा है, जिसकी खोज एक फंगस (पेनिसिलियम नोटेटम) से अचानक हुई जब उन्होंने देखा कि फंगस ने बैक्टीरिया के विकास को रोक दिया। डॉ. श्रीवास्तव ने यूथ रेडक्रॉस के विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि इंटरनेशनल रेड क्रॉस सोसाइटी की स्थापना १७ फरवरी १८६३ को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में हेनरी ड्यूनेंट द्वारा की गई थी। ८ मई को विश्व रेडक्रॉस दिवस मनाया जाता है।

इस अवसर यूथ रेडक्रॉस प्रभारी डॉ. एलपी गुप्ता ने सभी कार्यकर्ताओं को कर्तव्य एवं दायित्व के प्रति प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम प्रभारी देवेन्द्र दास सोनवानी ने किया। इस अवसर पर स्वीप नोडल अधिकारी डॉ. अजय कुमार तिवारी, सहायक प्राध्यापक सोनाली गोस्वामी तथा चांदनी व्यापारी उपस्थित रहीं।

सौ शय्या, जिला अस्पताल में नहीं है ईएनटी के डॉक्टर, मरीज परेशांन

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव


भदोही। करीब दो से ढाई लाख लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने वाले जिला चिकित्सालय और सरपतहां के सौ शय्या अस्पताल में एक भी ईएनटी के डॉक्टर नहीं हैं। मरीजों को बेहतर उपचार के लिए भदोही के महाराजा बलवंत सिंह राजकीय अस्पताल या निजी अस्पताल का रूख करना पड़ता है। जिले में कुल चार पद सृजित है। जिले के 29 सरकारी अस्पतालों में रोजाना 5000 से 5500 की ओपीडी होती है। इसमें से करीब 100 से 125 मरीज ईएनटी के होते हैं। ज्यादातर मरीज जिला अस्पताल आते हैं। यहां 18 महीने पहले ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. दिप्ती पांडेय की तैनाती हुई थी, लेकिन उनका तबादला भदोही एमबीएस हो गया। जिससे अस्पताल में पद खाली है। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को वापस लौटना पड़ता है या किसी अन्य डॉक्टरों से दवा लेना पड़ता है। सौ शय्या अस्पताल में दो पद सृजित है। यहां तीन साल से नाक, कान, गला के डॉक्टर नहीं है। ऐसे में अस्पताल आने वाले मरीजों को उपचार कराने में परेशानी होती है। उन्हें विशेषज्ञ के बजाए अन्य डॉक्टरों से दवा लेना पड़ता है। बेहतर उपचार के लिए निजी अस्पताल या महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय का रूख करना पड़ता है। भदोही एबीएस में एक डॉक्टर की तैनाती है।



भदोही एमबीएस में एक ईएनटी सर्जन की तैनाती है। जिला अस्पताल,सौ शैय्या में तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र को लिखा दिया गया है।

डॉ संतोष कुमार चक

सीएमओ भदोही
भाजपा कार्यकर्ताओं के 'लहू' से सींचा गया है बंगाल का कमल : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत को चुनाव आयोग की मेहरबानी बतलाने वाले दलों को अपनी तथ्यपरक उदाहरणों के साथ आईना दिखाने का काम किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स पर लिखा है कि चुनाव आयोग की मेहरबानी से नहीं, बल्कि हमारे कार्यकर्ताओं के 'लहू' से बंगाल का कमल सींचा गया है।

श्री मरांडी ने कहा कि कुछ लोग आज भी इस मुगालते में जी रहे हैं कि बंगाल में भाजपा की सत्ता चुनाव आयोग का 'गिफ्ट' है। जिन्हें लगता है कि EVM की मशीनें, केंद्रीय बल या दिल्ली का दखल भाजपा को सत्ता की दहलीज तक लाया है, वे शायद बंगाल की तासीर से वाकिफ नहीं हैं। सुन लीजिये! बंगाल में कमल बैलेट बॉक्स से पहले कार्यकर्ताओं के खून से खिला है।

श्री मरांडी ने अपने पोस्ट में कुल चार पार्ट में "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने, चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी, 15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर एवं यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है!" पर क्रमवार शीर्षक देकर पार्टी के उतार चढ़ाव वाले सियासी सफरनामे, भाजपा कार्यकर्ताओं की शहादत, सत्तारूढ़ दल वामपंथियों और तृणमूल कांग्रेस के जुल्म को विस्तार से व्याख्या की है।

श्री मरांडी ने "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने" वाले पहले शीर्षक में लिखा है कि 2011 से 2025 तक का सफर कोई राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक महायज्ञ था जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी है। यहाँ लोकतंत्र की बात करने वालों को पेड़ों से लटकाया गया। किसी को बम से उड़ाया गया, तो किसी का शव क्षत-विक्षत हालत में तालाबों में मिला। नंदीग्राम से बीरभूम और कूचबिहार से बशीरहाट तक—सिर्फ भाजपा को वोट देने के अपराध में पूरे-पूरे गाँव खाक कर दिए गए। उन्होंने अतीत के पन्नों को पलटने की सलाह देते हुए कहा कि वह मंजर याद कीजिए, जब महिलाओं की अस्मत को राजनीतिक हथियार बनाया गया ताकि दहशत पैदा की जा सके। यह सत्ता किसी थाली में परोसकर नहीं मिली, इसके पीछे हाई कोर्ट की फटकार और CBI जांचों के वो पन्ने हैं जो TMC के 'खूनी खेल' की गवाही देते हैं।

श्री मरांडी ने अपने दूसरे शीर्षक "चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी" में लिखा है कि सोचिए! जिस बूथ अध्यक्ष की लाश सुबह पेड़ पर लटकी मिलती है, दोपहर को उसका बेटा कलेजे पर पत्थर रखकर उसी बूथ पर पोलिंग एजेंट बनकर खड़ा हो जाता है— यह हिम्मत EVM से नहीं, स्वाभिमान से आती है। जिस माँ का घर जला दिया गया, वह अगले दिन फिर हाथ में भगवा झंडा थामे गलियों में ललकारती है— यह हौसला चुनाव आयोग नहीं देता। वामपंथियों के 34 साल के दमन, तानाशाही और दीदी के 15 साल के खौफनाक, रक्तरंजित दहशतगर्दों की राजनीति को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अपनी छाती पर झेला है। फर्जी मुकदमे, जेल की सलाखें और सामाजिक बहिष्कार भी उनके कदम को नहीं डगमगा सके।

श्री मरांडी ने तीसरे शीर्षक "15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर" में लिखा है कि यह ग्राफ किसी आंकड़ों का खेल नहीं, यह उन माँओं के आँसुओं का हिसाब है। 2011 में सिर्फ 1 विधायक जीतने पर मजाक उड़ाया गया। 2016 में 3 विधायक जीते, यह संघर्ष की शुरुआत थी। 2019 में 18 सांसद जीते, ममता के गढ़ में सेंध लग चुकी थी। 2021 में 77 विधायक जीतकर पार्टी मुख्य विपक्ष की ताकत बनी।

2024 में 12 सीटें मिली, भयंकर दमन के बावजूद टिके रहे। आज 2026 में पूर्ण बहुमत की प्रचंड विजय। यह जीत उन बेटों के नाम है जिनकी 'तेरहवीं' पर उनकी माताओं ने विलाप नहीं किया, बल्कि कसम खाई थी कि जब तक सत्ता परिवर्तन नहीं होगा, लड़ाई जारी रहेगी। यह उन रिलीफ कैंपों में सड़ रहे परिवारों के सब्र की जीत है।

अपने चौथे शीर्षक यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है! में श्री मरांडी ने लिखा है कि जो लोग आज इसे "चुनाव आयोग की सेटिंग" कहते हैं, वे एक बार उन गुमनाम कब्रों और श्मशानों में जाकर देखें जहाँ भाजपा का झंडा ओढ़े हमारे भाई सो रहे हैं। उन जले हुए घरों की राख को हाथ लगाकर देखें, जहाँ आज भी चीखें सुनाई देती हैं। बंगाल में सत्ता किसी मशीन ने नहीं दी है। यहाँ हर एक वोट के पीछे एक शहादत छिपी है। 15 साल तक खून-पसीना बहाने के बाद, अपनों की लाशें ढोने के बाद और हर जुल्म सहने के बाद आज बंगाल की गलियों से यह हुंकार निकली है। इसे 'मेहरबानी' कहना उन शहीदों का अपमान है जिन्होंने लोकतंत्र को ज़िंदा रखने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह बंगाल के आत्मसम्मान की जीत है, यह कार्यकर्ताओं के 'बलिदान' की जीत है!

महाराणा प्रताप जयंती शोभायात्रा को लेकर रामराज क्षेत्र में पुलिस का फ्लैग मार्च
मेरठ। रामराज चौकी क्षेत्र में महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में 9 मई 2026 को आयोजित होने वाली भव्य शोभायात्रा को शांतिपूर्ण एवं सकुशल संपन्न कराने के उद्देश्य से थाना बहसूमा पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। इसी क्रम में थाना अध्यक्ष बहसूमा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मय फोर्स क्षेत्र के प्रमुख मार्गों एवं संवेदनशील स्थानों पर फ्लैग मार्च निकाला।

फ्लैग मार्च के दौरान पुलिस अधिकारियों ने बाजारों, मुख्य चौराहों तथा भीड़भाड़ वाले इलाकों में पैदल गश्त कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। पुलिस प्रशासन ने क्षेत्रवासियों, व्यापारियों एवं शोभायात्रा आयोजकों से आपसी भाईचारा, शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। साथ ही लोगों को अफवाहों से दूर रहने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने के निर्देश दिए गए।

थाना प्रभारी रविंद्र कुमार ने कहा कि शोभायात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फ्लैग मार्च का उद्देश्य आमजन में सुरक्षा का विश्वास कायम करना तथा असामाजिक तत्वों में कानून का भय उत्पन्न करना है।

इस दौरान उप निरीक्षक सोनू कुमार, रामराज चौकी इंचार्ज आशीष यादव, उप निरीक्षक धर्मवीर कुमार, कांस्टेबल सुधीर कुमार सहित भारी पुलिस बल मौजूद रहा। पुलिस की सक्रियता से क्षेत्र में सुरक्षा एवं शांति का माहौल बना रहा।
कन्नौज में हुआ भीषण सडक  हादसा, एक युवक की मौत, 5 घायल

पंकज श्रीवास्तव/ विवेक कुमार

कन्नौज जिले के गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में पूर्व जिला पंचायत सदस्य के इकलौते पुत्र की मौत हो गई, जबकि कार में सवार पांच अन्य लोग घायल हो गए। सभी लोग पारिवारिक कार्यक्रम में तिलक चढ़ाकर वापस लौट रहे थे।

जानकारी के अनुसार चौकी जसोदा क्षेत्र के ग्राम फतेहपुर जसोदा निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य गोपाल त्रिपाठी के 38 वर्षीय पुत्र प्रशांत त्रिपाठी अपने साथियों शुभम तिवारी (30 वर्ष), बादल तिवारी (35 वर्ष), रमन तिवारी (36 वर्ष), निशांत अग्निहोत्री (22 वर्ष), विकास पांडे (36 वर्ष) और ग्राम पांडेपुरवा निवासी 32 वर्षीय विकास पांडे के साथ गुरुवार रात सीतापुर जिले के सिधौली में शुभम तिवारी की बहन निशा का तिलक चढ़ाने गए थे।
वापसी के दौरान तेज रफ्तार थार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे करीब 20 फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों और पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को बाहर निकाला।

हादसे में प्रशांत त्रिपाठी की मौत हो गई, जबकि अन्य घायल लोगों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। गंभीर रूप से घायल कुछ लोगों को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ताबड़-तोड़ छापा डालकर अवैध रूप से संचालित कई क्लीनिकों व पैथोलॉजी सेंटर को किया सील, मचा हड़कम्प

रितेश मिश्रा
कछौना(हरदोई):* गर्मी मौसम के मद्देनजर बुखार, डायरिया, दस्त, उल्टी बीमारी तेजी से फैल रही है। बड़ी आबादी, अशिक्षा व प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी के चलते आमजनमानस झोलाछाप डॉक्टर की शरण में जाने को विवश हैं जिसका फायदा ये झोलाछाप डॉक्टर उठाते हैं। गलत इलाज कर मरीज को और बीमार कर रहे हैं जिससे झोलाछाप डॉक्टर, क्लीनिक, पैथोलॉजी धड़ल्ले से चल रहे हैं, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग की मौन स्वीकृति मिलती है जिसके कारण कई बार मरीजों के साथ अनहोनी घटनाएं घटती हैं।

बढ़ती घटनाओं के चलते शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डॉ मनोज सिंह ने अपनी टीम के साथ कई क्लीनिक, पैथोलॉजी पर छापा डालकर उन्हें सीज कर विधिक कार्रवाई की है। नोडल अधिकारी डॉ. मनोज सिंह ने कमर कस ली है। टीम ने गाजू रोड पर स्थित मकरंद मेडिकल स्टोर पर गलत तरीके से मरीज का इलाज करते पाया। कोई योग डॉक्टर उपस्थित नहीं था, मरीज को भर्ती कर इलाज किया जा रहा था, जिस पर मेडिकल स्टोर को सील कर कार्रवाई की गई। इसके बाद पैथोलॉजी संचालक अभिराज के द्वारा आवश्यक कागज न दिखाने पर पैथोलॉजी को सील की कार्रवाई की गई। उसके उपरांत डॉक्टर चंद्रा क्लीनिक के संचालक द्वारा मेडिकल काउंसिल का पंजीकरण, मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा निर्गत पंजीकरण एवं क्लीनिक में पंजीकृत चिकित्सा उपस्थित न पाए जाने पर सील की कार्रवाई की गई। प्रदीप सोनी क्लीनिक पर अनियमितताओं के चलते सील की कार्रवाई की गई। नारायण हॉस्पिटल में संचालक डॉक्टर देवेंद्र मोहन द्वारा कोई चिकित्सक का मेडिकल काउंसिल का पंजीकरण, बायो वेस्ट मैनेजमेंट प्रमाण पत्र, चिकित्सालय में योग्य डॉक्टरों की कमी पर सील की कार्रवाई की गई। हसमत अली के क्लीनिक को सील कर विधिक कार्रवाई की गई। गाजू रोड स्थित बालाजी पाली क्लीनिक के संचालक द्वारा बिना पंजीकरण व योग्य डॉक्टरों की उपलब्धता न होने पर मरीजों का इलाज करते हुए पाया गया, इस क्लीनिक को भी सील कर कार्रवाई अमल में लाई गई।

डॉ मनोज सिंह नोडल अधिकारी की टीम द्वारा ताबड़तोड़ कार्रवाई से अन्य झोलाछाप डॉक्टर, क्लीनिक, पैथोलॉजी संचालक शटर बंद कर भाग गए। उन्होंने बताया कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। कछौना कस्बा सहित ग्रामीण क्षेत्र में सैकड़ो की संख्या में पंजीकृत नर्सिंग होम, क्लीनिक, पैथोलॉजी, अल्ट्रासाउंड सेंटर, अस्पताल स्वास्थ्य मानकों को ताक पर रखकर स्वास्थ्य सेवाएं देकर आम जनमानस के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। यहां तक कि गंभीर बीमारी के साथ ऑपरेशन तक करते हैं। मरीज के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर जीवन भर के लिए उन्हें अपंग कर देते हैं जिससे लाइलाज बीमारी तेजी से फैल रही है। जिससे आमजन आर्थिक व शारीरिक रूप से लूटा जाता है। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से झोलाछाप डॉक्टरों के हौसले पस्त हैं।
लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि बने देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, जानें देश के अगले सीडीएस के बारे में

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भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) एनएस राजा सुब्रमणि को देश का अगला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त किया है। वे रक्षा मामलों के विभाग के सचिव की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। मौजूदा सीडीएस अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई को खत्म हो रहा है।

देश के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ

नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि के हाथ में तीनों सेनाओं की कमान होगी। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि पदभार ग्रहण करने की तारीख से और अगले आदेश तक भारत सरकार के सैन्य मामलों के विभाग में सचिव के रूप में भी कार्य करेंगे। अभी तक देश के सीएडीएस यानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान हैं। लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि अब उन्हें ही रिप्लेस करेंगे। एनएस राजा सुब्रमणि देश के तीसरे सीडीएस होंगे।

भारतीय सेना में 37 वर्षों से अधिक का करियर

लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने यह जिम्मेदारी 1 सितंबर 2025 से संभाली हुई है। इससे पहले, उन्होंने 1 जुलाई, 2024 से 31 जुलाई, 2025 तक सेना के उप प्रमुख के रूप में कार्य किया। उन्होंने मार्च 2023 से जून 2024 तक केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (जीओसी-इन-सी) का पद भी संभाला। लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि को दिसंबर 1985 में गढ़वाल राइफल्स में कमीशन मिला था और भारतीय सेना में उनका करियर 37 वर्षों से अधिक का है।

जम्मू-कश्मीर से लेकर कजाकिस्तान तक जिम्मेदारी संभाली

अपने सैन्य करियर में सुब्रमणि ने अलग-अलग ऑपरेशनल फील्ड में काम किया। वे कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना स्थित भारतीय दूतावास में सेना से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। कर्नल रैंक में उन्होंने आर्मी हेडक्वार्टर में असिस्टेंट मिलिट्री सेक्रेटरी की जिम्मेदारी संभाली। बाद में ईस्टर्न कमांड में कर्नल जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस) रहे। जम्मू-कश्मीर में वे राष्ट्रीय राइफल्स सेक्टर के डिप्टी कमांडर भी रहे।

देश के लिए सेवाओं के लिए हो चुके हैं सम्मानित

ब्रिगेडियर बनने के बाद सुब्रमणि ने जम्मू-कश्मीर के सांबा में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली। इसके अलावा वे आर्मी हेडक्वार्टर में डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री इंटेलिजेंस (DDGMI) भी रहे। साल 2023 में उन्होंने सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद संभाला। इसके एक साल बाद वे सेना के 47वें वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बने। रिटायरमेंट के बाद उन्हें नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटरिएट (NSCS) में मिलिट्री एडवाइजर नियुक्त किया गया था। देश के लिए सेवाओं के लिए सुब्रमणि को परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।

2 दिन पूर्व हुए लुटेरों से आज हुई पुलिस की मुठभेड़,गोली लगाने से एक बदमाश घायल और तीन गिरफ्तार

सुल्तानपुर लूट के आरोपी के साथ पुलिस की मुठभेड़।पुलिस फायरिंग में प्रतीक भारती नाम के बदमाश के पैर में लगी गोली। इलाज के लिए अस्पताल में करवाया गया भर्ती। घटना स्थल से पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों को भी किया गिरफ्तार। लूटे गए 32 हजार में से 24,500 नगद, बाइक और अवैध असलहा बरामद। दो दिन पूर्व माइक्रोफाइनेंस कंपनी के कलेक्शन एजेंट रामकृष्ण विश्वकर्मा से 32 हजार की हुई थी लूट।नगर के अमहट के पास तमंचे की नोंक पर लूटे गए थे 32 हजार। मॉल बंटवारे की सूचना पर आज आरोपियों को पकड़ने पहुंची थी पुलिस। जिसके बाद पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़। नगर कोतवाली क्षेत्र से जुड़ा है मामला।
लखनऊ में सेफ्टी टैंक हादसा: जहरीली गैस से दो सफाईकर्मियों की मौत
* मुख्यमंत्री ने जताया शोक, जांच और मुआवजे के दिए निर्देश
लखनऊ। लखनऊ के माल थाना क्षेत्र स्थित नबी पनाह गांव में सेफ्टी टैंक की सफाई के दौरान बड़ा हादसा हो गया। टैंक की सफाई करने उतरे दो मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है।
मृतकों की पहचान रिंकू और राजेश के रूप में हुई है। दोनों की उम्र करीब 35 वर्ष बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार दोनों युवक सेफ्टी टैंक की सफाई के लिए अंदर उतरे थे, तभी जहरीली गैस की चपेट में आने से उनका दम घुट गया और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया, जबकि अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
घटना का संज्ञान लेते हुए योगी आदित्यनाथ ने मृतक सफाईमित्रों के परिजनों के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने, उचित मुआवजा उपलब्ध कराने तथा पूरे हादसे की विस्तृत जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
योगी सरकार में कानून व्यवस्था मजबूत, दंगों और फिरौती पर लगी लगाम
* एनसीआरबी रिपोर्ट का दावा— 2023 और 2024 में फिरौती के लिए अपहरण की अपराध दर शून्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश, जिसे वर्ष 2017 से पहले ‘दंगा प्रदेश’ कहा जाता था, आज सख्त कानून व्यवस्था और जीरो टॉलरेंस नीति के चलते अपराध नियंत्रण के नए मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। राज्य सरकार के अनुसार योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ, जबकि वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में 25 हजार से अधिक दंगे दर्ज किए गए थे।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 19 दंगे और 33 अपहरण की घटनाएं सामने आती थीं। वहीं वर्तमान सरकार का दावा है कि कठोर कानून व्यवस्था और अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई के कारण दंगाइयों एवं माफियाओं के मंसूबे विफल हुए हैं।
एनसीआरबी की वर्ष 2024 रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में फिरौती के लिए अपहरण की अपराध दर शून्य दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक नगालैंड में यह दर 0.7, मणिपुर में 0.6, अरुणाचल प्रदेश में 0.3 और मेघालय में 0.2 रही, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा शून्य रहा। वर्ष 2023 में भी प्रदेश में इस श्रेणी में अपराध दर शून्य दर्ज की गई थी।
सरकार का कहना है कि अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति, सक्रिय पुलिसिंग, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और माफियाओं की संपत्तियों की जब्ती जैसे कदमों का असर अब धरातल पर दिखाई दे रहा है। संगठित अपराधों पर आर्थिक कार्रवाई ने अपराधियों की कमर तोड़ने का काम किया है।
प्रदेश सरकार के अनुसार पिछले नौ वर्षों में कुछ अराजक तत्वों द्वारा दंगा भड़काने की कोशिश जरूर की गई, लेकिन समय रहते पुलिस और प्रशासन ने सख्त कार्रवाई कर हालात को नियंत्रित कर लिया। एनसीआरबी की 2024 रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में बलवा की अपराध दर 1.1 दर्ज की गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत 2.2 रहा। रिपोर्ट के अनुसार मणिपुर में यह दर 8.4, महाराष्ट्र में 6.4, कर्नाटक में 5.4, हरियाणा में 5.3 और हिमाचल प्रदेश में 4.7 दर्ज की गई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सार्वजनिक मंचों से अक्सर कहते हैं— “नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा।” सरकार का दावा है कि यही सख्त नीति प्रदेश में कानून व्यवस्था सुधारने का आधार बनी है।
सेवा और करूणा का पर्याय है रेडक्रॉस, साई कॉलेज में मना विश्व रेडक्रॉस दिवस

अम्बिकापुर- सेवा का प्रतिफल हमेशा कल्याणकारी होता है। रेडक्रॉस सेवा और करूणा का पर्याय है। यह बातें श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय में रेडक्रॉस दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने कही। उन्होंंने सेवा और चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग और समर्पण के महत्व को अवगत कराते हुए कहा कि पेनसिलीन का आविष्कार की कहानी से अवगत कराया। सर अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने १९२८ में लंदन के सेंट मैरी अस्पताल में अथक परिश्रम से किया था। यह दुनिया की पहली एंटीबायोटिक दवा है, जिसकी खोज एक फंगस (पेनिसिलियम नोटेटम) से अचानक हुई जब उन्होंने देखा कि फंगस ने बैक्टीरिया के विकास को रोक दिया। डॉ. श्रीवास्तव ने यूथ रेडक्रॉस के विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि इंटरनेशनल रेड क्रॉस सोसाइटी की स्थापना १७ फरवरी १८६३ को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में हेनरी ड्यूनेंट द्वारा की गई थी। ८ मई को विश्व रेडक्रॉस दिवस मनाया जाता है।

इस अवसर यूथ रेडक्रॉस प्रभारी डॉ. एलपी गुप्ता ने सभी कार्यकर्ताओं को कर्तव्य एवं दायित्व के प्रति प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम प्रभारी देवेन्द्र दास सोनवानी ने किया। इस अवसर पर स्वीप नोडल अधिकारी डॉ. अजय कुमार तिवारी, सहायक प्राध्यापक सोनाली गोस्वामी तथा चांदनी व्यापारी उपस्थित रहीं।

सौ शय्या, जिला अस्पताल में नहीं है ईएनटी के डॉक्टर, मरीज परेशांन

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव


भदोही। करीब दो से ढाई लाख लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने वाले जिला चिकित्सालय और सरपतहां के सौ शय्या अस्पताल में एक भी ईएनटी के डॉक्टर नहीं हैं। मरीजों को बेहतर उपचार के लिए भदोही के महाराजा बलवंत सिंह राजकीय अस्पताल या निजी अस्पताल का रूख करना पड़ता है। जिले में कुल चार पद सृजित है। जिले के 29 सरकारी अस्पतालों में रोजाना 5000 से 5500 की ओपीडी होती है। इसमें से करीब 100 से 125 मरीज ईएनटी के होते हैं। ज्यादातर मरीज जिला अस्पताल आते हैं। यहां 18 महीने पहले ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. दिप्ती पांडेय की तैनाती हुई थी, लेकिन उनका तबादला भदोही एमबीएस हो गया। जिससे अस्पताल में पद खाली है। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को वापस लौटना पड़ता है या किसी अन्य डॉक्टरों से दवा लेना पड़ता है। सौ शय्या अस्पताल में दो पद सृजित है। यहां तीन साल से नाक, कान, गला के डॉक्टर नहीं है। ऐसे में अस्पताल आने वाले मरीजों को उपचार कराने में परेशानी होती है। उन्हें विशेषज्ञ के बजाए अन्य डॉक्टरों से दवा लेना पड़ता है। बेहतर उपचार के लिए निजी अस्पताल या महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय का रूख करना पड़ता है। भदोही एबीएस में एक डॉक्टर की तैनाती है।



भदोही एमबीएस में एक ईएनटी सर्जन की तैनाती है। जिला अस्पताल,सौ शैय्या में तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र को लिखा दिया गया है।

डॉ संतोष कुमार चक

सीएमओ भदोही
भाजपा कार्यकर्ताओं के 'लहू' से सींचा गया है बंगाल का कमल : बाबूलाल मरांडी

नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत को चुनाव आयोग की मेहरबानी बतलाने वाले दलों को अपनी तथ्यपरक उदाहरणों के साथ आईना दिखाने का काम किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स पर लिखा है कि चुनाव आयोग की मेहरबानी से नहीं, बल्कि हमारे कार्यकर्ताओं के 'लहू' से बंगाल का कमल सींचा गया है।

श्री मरांडी ने कहा कि कुछ लोग आज भी इस मुगालते में जी रहे हैं कि बंगाल में भाजपा की सत्ता चुनाव आयोग का 'गिफ्ट' है। जिन्हें लगता है कि EVM की मशीनें, केंद्रीय बल या दिल्ली का दखल भाजपा को सत्ता की दहलीज तक लाया है, वे शायद बंगाल की तासीर से वाकिफ नहीं हैं। सुन लीजिये! बंगाल में कमल बैलेट बॉक्स से पहले कार्यकर्ताओं के खून से खिला है।

श्री मरांडी ने अपने पोस्ट में कुल चार पार्ट में "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने, चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी, 15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर एवं यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है!" पर क्रमवार शीर्षक देकर पार्टी के उतार चढ़ाव वाले सियासी सफरनामे, भाजपा कार्यकर्ताओं की शहादत, सत्तारूढ़ दल वामपंथियों और तृणमूल कांग्रेस के जुल्म को विस्तार से व्याख्या की है।

श्री मरांडी ने "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने" वाले पहले शीर्षक में लिखा है कि 2011 से 2025 तक का सफर कोई राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक महायज्ञ था जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी है। यहाँ लोकतंत्र की बात करने वालों को पेड़ों से लटकाया गया। किसी को बम से उड़ाया गया, तो किसी का शव क्षत-विक्षत हालत में तालाबों में मिला। नंदीग्राम से बीरभूम और कूचबिहार से बशीरहाट तक—सिर्फ भाजपा को वोट देने के अपराध में पूरे-पूरे गाँव खाक कर दिए गए। उन्होंने अतीत के पन्नों को पलटने की सलाह देते हुए कहा कि वह मंजर याद कीजिए, जब महिलाओं की अस्मत को राजनीतिक हथियार बनाया गया ताकि दहशत पैदा की जा सके। यह सत्ता किसी थाली में परोसकर नहीं मिली, इसके पीछे हाई कोर्ट की फटकार और CBI जांचों के वो पन्ने हैं जो TMC के 'खूनी खेल' की गवाही देते हैं।

श्री मरांडी ने अपने दूसरे शीर्षक "चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी" में लिखा है कि सोचिए! जिस बूथ अध्यक्ष की लाश सुबह पेड़ पर लटकी मिलती है, दोपहर को उसका बेटा कलेजे पर पत्थर रखकर उसी बूथ पर पोलिंग एजेंट बनकर खड़ा हो जाता है— यह हिम्मत EVM से नहीं, स्वाभिमान से आती है। जिस माँ का घर जला दिया गया, वह अगले दिन फिर हाथ में भगवा झंडा थामे गलियों में ललकारती है— यह हौसला चुनाव आयोग नहीं देता। वामपंथियों के 34 साल के दमन, तानाशाही और दीदी के 15 साल के खौफनाक, रक्तरंजित दहशतगर्दों की राजनीति को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अपनी छाती पर झेला है। फर्जी मुकदमे, जेल की सलाखें और सामाजिक बहिष्कार भी उनके कदम को नहीं डगमगा सके।

श्री मरांडी ने तीसरे शीर्षक "15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर" में लिखा है कि यह ग्राफ किसी आंकड़ों का खेल नहीं, यह उन माँओं के आँसुओं का हिसाब है। 2011 में सिर्फ 1 विधायक जीतने पर मजाक उड़ाया गया। 2016 में 3 विधायक जीते, यह संघर्ष की शुरुआत थी। 2019 में 18 सांसद जीते, ममता के गढ़ में सेंध लग चुकी थी। 2021 में 77 विधायक जीतकर पार्टी मुख्य विपक्ष की ताकत बनी।

2024 में 12 सीटें मिली, भयंकर दमन के बावजूद टिके रहे। आज 2026 में पूर्ण बहुमत की प्रचंड विजय। यह जीत उन बेटों के नाम है जिनकी 'तेरहवीं' पर उनकी माताओं ने विलाप नहीं किया, बल्कि कसम खाई थी कि जब तक सत्ता परिवर्तन नहीं होगा, लड़ाई जारी रहेगी। यह उन रिलीफ कैंपों में सड़ रहे परिवारों के सब्र की जीत है।

अपने चौथे शीर्षक यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है! में श्री मरांडी ने लिखा है कि जो लोग आज इसे "चुनाव आयोग की सेटिंग" कहते हैं, वे एक बार उन गुमनाम कब्रों और श्मशानों में जाकर देखें जहाँ भाजपा का झंडा ओढ़े हमारे भाई सो रहे हैं। उन जले हुए घरों की राख को हाथ लगाकर देखें, जहाँ आज भी चीखें सुनाई देती हैं। बंगाल में सत्ता किसी मशीन ने नहीं दी है। यहाँ हर एक वोट के पीछे एक शहादत छिपी है। 15 साल तक खून-पसीना बहाने के बाद, अपनों की लाशें ढोने के बाद और हर जुल्म सहने के बाद आज बंगाल की गलियों से यह हुंकार निकली है। इसे 'मेहरबानी' कहना उन शहीदों का अपमान है जिन्होंने लोकतंत्र को ज़िंदा रखने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह बंगाल के आत्मसम्मान की जीत है, यह कार्यकर्ताओं के 'बलिदान' की जीत है!