नामित सभासद अर्जुन काली ने नगर पालिका शपथ ग्रहण प्रकरण को लेकर कड़ा रुख अपनाया

मेरठ।मवाना।शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सरकार द्वारा नामित सभासद अर्जुन काली ने नगर पालिका शपथ ग्रहण प्रकरण को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने इस मामले में नरेन्द्र खजूरी से मुलाकात कर न्याय की मांग की और दोषियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज करने की अपील की।
बताया गया कि यह मामला मवाना नगर पालिका से जुड़ा है, जहां शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कथित रूप से रालोद नेता के साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया और मारपीट का प्रयास भी हुआ। इस घटना से आक्रोशित होकर अर्जुन काली ने इसे गंभीर सामाजिक अन्याय बताते हुए SC/ST आयोग में शिकायत दर्ज कराने की पहल की।
अर्जुन काली, जो कि पूर्व विधायक गोपाल काली के पुत्र हैं, ने स्पष्ट कहा कि इस प्रकार की घटनाएं समाज में असमानता और भय का माहौल पैदा करती हैं, जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस दौरान वरिष्ठ रालोद नेता सुनील रोहटा और जिला अध्यक्ष विनोद हरित से भी मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी गई और संगठन स्तर पर भी कार्रवाई की मांग की गई।
जिलाध्यक्ष अनिकेत भारद्वाज
SC/ST आयोग के सदस्य नरेन्द्र खजूरी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि यदि संबंधित अधिकारियों द्वारा जल्द कार्रवाई नहीं की जाती है, तो उन्हें आयोग के समक्ष तलब किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के जातीय उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मालदा का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने वाले मोफक्करुल इस्लाम समेत 35 पर शिकंजा

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पश्चिम बंगाल के मालदा (कालियाचक) में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने और हिंसा भड़काने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस पूरे कांड के मास्टरमाइंड माने जा रहे एडवोकेट मोफक्कारुल इस्लाम को बंगाल सीआईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के मुताबिक, मोफक्कारुल इस्लाम राज्य छोड़कर भागने की फिराक में था।

अब तक 35 लोग गिरफ्तार

सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान और पूरा मामला एनआईए को रेफर होने के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी को अरेस्ट कर लिया है। मालदा घटना पर उत्तरी बंगाल के एडीजी के. जयरामन के अनुसार अब तक 35 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस हिंसा में 19 मामले दर्ज किए हैं। उन्होंने बताया कि हिंसा भड़काने वाले मुख्य आरोपी मोफक्करुल इस्लाम को अरेस्ट किया गया है। जयरामन के अनुसार वह एक वकील लगता है। हम जांच कर रहे हैं कि बचाव कार्य में देरी क्यों हुई। फिर हम एक रिपोर्ट सौंपेंगे।

एआईएमआईएम का नेता बताया जा रहा मोफक्करुल

आरोपी मोफक्करुल इस्लाम कालियाचक की घटना का मुख्य साजिशकर्ता है। बुधवार रात हुई इस घटना में सात न्यायिक अधिकारियों को बीडीओ कार्यालय के अंदर कई घंटों तक बंधक बनाकर रखा गया था। वकील मोफक्करुल इस्लाम ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) का नेता बताया जा रहा है। मालदा में हुए विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करने के आरोप में उसे गिरफ्तार किया गया है।

न्यायिक अधिकारियों को क्यों बनाया गया बंधक?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहा मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया एक बड़ा मुद्दा बन गई है। एसआईआर प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची में 63 लाख से अधिक नाम हटाए गए, जबकि 60 लाख अन्य मतदाताओं को विचाराधीन रखा गया। न्यायिक अधिकारियों को इन मामलों की समीक्षा करने का कार्य सौंपा गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ये न्यायिक अधिकारी इन मामलों की जांच कर मतदाताओं को मतदाता सूची में बरकरार रखने या हटाने का फैसला कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को अधिकारियों के साथ बैठक का अनुरोध किया, जिसे अस्वीकार करने पर उन्होंने बीडीओ कार्यालय का घेराव कर तीन महिलाओं समेत सात अधिकारियों को बंधक बना लिया।

सुप्रीम कोर्ट ने मालदा हिंसा को बताया सोची-समझी साजिश

सुप्रीम कोर्ट ने मालदा हिंसा को इसे एक सोची-समझी साजिश बताया और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया। सीजेआई सूर्यकांत रात दो बजे तक इस घटना के बाद जागते रहे थे। चुनाव आयोग ने अदालत के निर्देश पर जांच NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को सौंप दी है। बंगाल चुनाव 2026 के मद्देनजर इस घटना ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है, जहां बीजेपी इसे कानून-व्यवस्था की विफलता बता रही है, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की एक साजिश करार दिया है।

मऊ : हनुमान सेतु (पीपा पुल) का लोकार्पण, 30 हजार लोगों को मिली बड़ी राहत

* ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा बोले—यह शुरुआत, जल्द बनेगा स्थायी पक्का पुल

लखनऊ/मऊ । नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने मऊ जनपद के दौरे के दौरान तमसा नदी स्थित हनुमान घाट पर निर्मित हनुमान सेतु (पीपा पुल) का विधिवत लोकार्पण कर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दी। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही।
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि यह पुल केवल अस्थायी व्यवस्था नहीं, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही यहां एक स्थायी एवं मजबूत पक्का पुल भी बनाया जाएगा, जिससे क्षेत्र के लोगों को दीर्घकालिक सुविधा मिल सके।
मंत्री ने बताया कि इस पुल के निर्माण से लगभग 30 हजार से अधिक लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के लिए आवागमन अब पहले से अधिक सुगम हो जाएगा, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विकास को अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति और बेहतर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। नगर विकास विभाग द्वारा लगाई गई आधुनिक स्ट्रीट लाइटों की गुणवत्ता की सराहना मुख्यमंत्री द्वारा भी की गई है।
मंत्री ए.के. शर्मा ने भरोसा दिलाया कि सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं हर नागरिक तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र अब तक विकास से अछूते थे, वहां भी तेजी से कार्य किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय नागरिकों ने मंत्री का स्वागत करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की और क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
राघव के जवाब पर 'आप' का पलटवार, सौरभ भारद्वाज से लेकर अनुराग ढांडा ने घेरा

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राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के एक दिन बाद सांसद राघव चड्ढा ने इस पर चुप्पी तोड़ी। उन्होंने शुक्रवार को एक वीडियो जारी करके कहा कि मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना। राघव चड्ढा ने कहा, 'खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।' यही नहीं उन्होंने इस मैसेज के साथ आम आदमी पार्टी पर कई गंभीर आरोप लगा दिए। राघव चड्ढा का वीडियो सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी की ओर से पलटवार किया गया है।

अनुराग ढांडा ने भी राघव चड्ढा को घेरा

आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के हालिया बयान और वीडियो को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। पार्टी नेता अनुराग ढांडा ने राघव चड्ढा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अब अरविंद केजरीवाल के सिपाही नहीं रहे हैं और सरकार के खिलाफ खुलकर बोलने से घबराने लगे हैं। अनुराग ढांडा ने कहा, 'हम केजरीवाल के सिपाही हैं। निडरता हमारी पहली पहचान है। जो डर जाए, वो देश के लिए क्या लड़ेगा?'

मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो- ढांडा

ढांडा ने आरोप लगाया कि संसद में सीमित समय मिलने के बावजूद राघव चड्ढा गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों के बजाय छोटे-छोटे मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘संसद में थोड़ा सा समय मिलता है बोलने का पार्टी को, उसमें या तो देश बचाने का संघर्ष कर सकते हैं या एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने का।’ उन्होंने कहा कि गुजरात में पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बावजूद चड्ढा ने संसद में आवाज नहीं उठाई। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर वोट के अधिकार से जुड़े मुद्दे पर भी उन्होंने चड्ढा को घेरा। ढांडा के मुताबिक, जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया, तो राघव चड्ढा ने उस पर साइन करने से इनकार कर दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब पार्टी ने संसद से वॉकआउट किया, तब भी चड्ढा सदन में बैठे रहे। अपने पोस्ट के आखिर में अनुराग ढांडा ने सीधे शब्दों में लिखा, ‘पिछले कुछ सालों से तुम डर गए हो राघव। मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो। देश के असली मुद्दों पर बोलने से घबराते हो। जो डर गया वो….’

सौरभ भारद्वाज ने कहा- ऐसे डरकर राजनीति कैसे होगी

आम आदमी पार्टी के दिल्ली यूनिट के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर रिएक्ट किया। उन्होंने कहा कि राघव भाई अभी आपका वीडियो देखा। हम सब लोग अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं। हमने एक ही बात सीखी थी जो डर गया समझो मर गया। हम सबको तो लोगों के मुद्दे उठाने थे सरकार की आंख में आंख डालकर। पिछले कुछ दिनों में हमने देखा जो भी कोई गंभीर मुद्दे उठाता और सरकार से सवाल पूछता है तो सरकार उस पर डिक्टेटर की तरह उनको तमाम सोशल मीडिया पर बैन करती है। सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता कोई सॉफ्ट पीआर अपनी संसद में करे। संसद में एक छोटी सी पार्टी का बड़ा ही सीमित समय होता है। उसमें अगर कोई समोसों की बात उठा रहा तो उससे जरूरी है कि देश के बड़े मुद्दों की बात उठाए। पूरे देश में हमने देखा हर राज्य में सही लोगों के वोट काटे जा रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि नकली और झूठे वोट बनाकर सरकार बेईमानी के साथ कब्जा करने पर जुटी है। पश्चिम बंगाल का मामला इसमें अहम है। पिछले कई अरसे से मैंने देखा कि आपने कोई ऐसा मुद्दा सदन में नहीं उठाया, जिसमें आपने सरकार से सवाल किए हों। ऐसे डरकर राजनीति कैसे होगी।

इंसानियत की मिसाल—450 जरूरतमंदों तक पहुंचा निःशुल्क भोजन, सेवा में जुटा राष्ट्रीय सामाजिक सेवा संघ
सुल्तानपुर।जनसेवा और इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए सुल्तानपुर जिले की अग्रणी सामाजिक संस्था “राष्ट्रीय सामाजिक सेवा संघ” द्वारा संचालित रसोई के अंतर्गत साप्ताहिक कार्यक्रम में गुरुवार को एक बार फिर सैकड़ों जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान बिखरी। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, जिला चिकित्सालय एवं रेलवे स्टेशन परिसर में कुल 450 मरीजों, तीमारदारों, यात्रियों और असहाय लोगों को निःशुल्क भोजन वितरित किया गया। राष्ट्रीय सामाजिक सेवा संघ अध्यक्ष मेराज अहमद खान के नेतृत्व में
देर रात आयोजित इस सेवा कार्यक्रम का शुभारंभप0प स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में नवागत सीएमएस डॉ. अविनाश गुप्ता द्वारा भोजन की थाली वितरित कर किया गया। उन्होंने इस पुनीत कार्य की सराहना करते हुए कहा कि “राष्ट्रीय सामाजिक सेवा संघ कई वर्षों से जिस निःस्वार्थ भाव से भूखे मरीजों और उनके तीमारदारों को भोजन उपलब्ध करा रहा है, वह वास्तव में अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है।”
वहीं रेलवे स्टेशन परिसर में वरिष्ठ टिकट निरीक्षक परतेश्वर सिंह ने जरूरतमंदों को भोजन की थाली देकर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग भोजन प्राप्त कर संतुष्टि और कृतज्ञता व्यक्त करते नजर आए।

संघ के संस्थापक निजाम खान ने बताया कि यह पूरा कार्य जनसहयोग के माध्यम से निरंतर संचालित हो रहा है, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों का सहयोग मिल रहा है। उन्होंने बताया कि इस बार के मेन्यू में अरहर की दाल, मौसमी सब्जी, रोटी और चावल शामिल रहे।

कार्यक्रम के अंतर्गत मेडिकल कॉलेज परिसर में 320 तथा रेलवे स्टेशन पर 130 लोगों को निःशुल्क भोजन वितरित किया गया। इस सेवा कार्य में जियाउल कमर सिद्दीकी, नफीसा बानो, हाजी मुज्तबा अंसारी, सरदार गुरुप्रीत सिंह, अब्दुल वदूद (मिलियन टेलर), आदिल हसन, यूसुफ पठान, बैजनाथ प्रजापति और माता प्रसाद जायसवाल सहित कई समाजसेवियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

यह पहल न केवल भूख मिटाने का कार्य कर रही है, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और मानवता का संदेश भी लगातार प्रसारित कर रही।

खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं', आप के एक्शन पर राघव चड्ढा का रिएक्शन

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आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद अपनी चुप्पी तोड़ी है। राघव चड्ढा की आप की तरफ से एक्शन पर पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा से डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के एक दिन बाद शुक्रवारको सांसद ने सुबह 10 बजे अपने एक्स अकाउंट से एक वीडियो संदेश जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है- 'खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।'

राघव चड्ढा ने पूछा-क्या जनता के मुद्दे उठाना अपराध

राघव चड्ढा ने कहा कि मुझे जब भी राज्यसभा में बोलने का मौका मिलता है तो मैंने आम आदमी से जुड़े मुद्दों को ही उठाया है। शायद ऐसे टॉपिक उठाता हूं, जिसे आम तौर पर संसद में नहीं उठाया जाता। मगर क्या जनता के मुद्दे उठाना अपराध है, क्या मैंने कोई गुनाह कर दिया। क्या मैं गलत करता हूं।

मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना-राघव चड्ढा

ये सवाल मैं इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि आप ने राज्यसभा के सक्रेटेरियट को कहा है कि राघव चड्ढा को पार्लियामेंट में बोलने का मौका न दिया जाए। अब भला मेरे बोलने पर कोई रोक क्यों लगाना चाहेगा। मैं तो हमेशा देश के आम आदमी की बात करता हूं। मेरे मुद्दों से देश के आम आदमी का तो फायदा हुआ, लेकिन आम आदमी पार्टी का क्या नुकसान हुआ। आप हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते हैं। आप मेरा हाथ थामे रेखिएगा। मैं आपसे हूं और आपके लिए हूं। जिन लोगों ने मुझे खामोश किया, उन्हें कहना चाहता हूं, मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।’

राज्यसभा में बोलने पर पाबंदी

इससे पहले गुरुवार को आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर राघव चड्ढा को सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटाने का आग्रह किया था। इतना ही नहीं, राघव चड्ढा के राज्यसभा में बोलने पर पाबंदी लगा दी गई थी। आम आदमी पार्टी ने सांसद राघव चड्ढा की जगह अब अशोक मित्तल को राज्यसभा में उपनेता नियुक्त किया है।

राघव चड्ढा के एक्शन पर भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने के मुद्दे पर दिल्ली भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस फैसले को पार्टी के अंदरूनी संकट और नेतृत्व की कमजोरी का संकेत बताया है। सचदेवा ने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि वह एक कमजोर नेता हैं, जिनमें न तो विपक्ष का सामना करने का साहस है और न ही अपनी पार्टी के भीतर उठ रहे असंतोष से निपटने की क्षमता है। सचदेवा ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को अपने संसदीय दल का नेता चुनने का अधिकार है, लेकिन जिस तरह राघव चड्ढा को न केवल राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया गया, बल्कि उन्हें सदन में बोलने का समय न देने का अनुरोध भी किया गया, यह असामान्य और चिंताजनक है। यह कदम इस बात की ओर इशारा करता है कि चड्ढा ने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व से दूरी बना ली है।

राघव चड्डा राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाए गए, क्या है AAP के एक्शन के पीछे की वजह?

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आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी से मिली करारी हार के बाद पार्टी दबाव में है। इस बीच राज्यसभा में एक बड़ा बदलाव हुआ है, जिसने पार्टी के अंदरखाने की खींचतान को सतह पर ला दिया है। दरअसल आप ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप नेता के पद से हटा दिया है। इतना ही नहीं, राज्यसभा में उनके बोलने पर भी रोक लगा दी गई है।

अशोक मित्तल को मिली राघव चड्ढा की जगह

आम आदमी पार्टी ने सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटा दिया है। पार्टी ने राज्य सभा सचिवालय को इस संदर्भ में एक पत्र भेजा। वहीं अब अशोक मित्तल राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की ओर से उपनेता होंगे। आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक पत्र सौंपकर सांसद अशोक मित्तल को पार्टी का उप-नेता नियुक्त करने का आग्रह किया है।

राघव चड्ढा के बोलने पर भी रोक

आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को सूचित किया है कि सांसद राघव चड्ढा को संसद में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। राघव चड्ढा पर यह एक्शन ऐसे वक्त में हुआ है, जब वह लगातार राज्यसभा में जनहित के मुद्दों पर वोकल थे। लगातार जनहित के मुद्दों को उठा रहे थे। चाहे वो एयरपोर्ट पर 10 रुपए की चाय हो या डिलीवरी बॉयज के मुद्दे हों।

मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए डाटा रोलओवर की सुविधा की मांग

राघव चड्ढा ने बीते दिनों राज्यसभा में दूरसंचार कंपनियों के डाटा इस्तेमाल के तरीके पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि जो डाटा उपभोक्ता इस्तेमाल नहीं कर पाते, वह खत्म नहीं होना चाहिए, बल्कि अगले दिन के लिए बचा रहना चाहिए। अभी रोजाना मिलने वाला डाटा रात 12 बजे के बाद खत्म हो जाता है, जबकि इसके लिए उपभोक्ता पैसे चुका चुके होते हैं। इसलिए इसका फायदा कंपनियों को नहीं, बल्कि ग्राहकों को मिलना चाहिए। चड्ढा ने सुझाव दिया था कि बचे हुए डाटा के आधार पर अगले महीने रिचार्ज में छूट दी जाए और ग्राहकों को डाटा रोलओवर की सुविधा मिले।

राघव चड्ढा पर एक्शन की वजह क्या?

लगातार जनगित के मुद्दों को उठाने के बाद भी आम आमदी पार्टी की ओर से कुए गए एक्शन पर सवाल उठ रहा है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी हाई कमान ने उन्हें चेतावनी दी थी कि वे बिना चर्चा के कुछ मुद्दों पर बोल रहे हैं। वह राज्यसभा में किस मुद्दे को उठाएंगे, इसकी जानकारी भी पार्टी को नहीं देते थे। सूत्रों का कहना है कि यह फैसला अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन का पालन न करने के आरोप में लिया गया हो सकता है। राघव चड्ढा पर आरोप लगते रहे हैं कि वह आम आदमी पार्टी की लाइन से अलग बात करते हैं। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को जब राउज एवेन्यू कोर्ट बरी किया था, तब भी राघव चड्ढा का बयान सामने नहीं आया था।

चाय बागान मजदूरों को अधिकार दिलाना हमारी प्राथमिकता: गोसाईंगांव में कल्पना सोरेन का बड़ा वादा।

गोसाईंगांव/असम: असम विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी क्रम में आज गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र से जेएमएम प्रत्याशी श्री फैड्रिक्शन हांसदा के पक्ष में एक विशाल चुनावी जनसभा का आयोजन किया गया, जिसे मुख्य वक्ता के रूप में झारखंड की गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने संबोधित किया।

इतिहास बदलने वाला चुनाव

जनसभा को संबोधित करते हुए कल्पना सोरेन ने कहा कि असम विधानसभा का यह चुनाव कोई सामान्य राजनीतिक मुकाबला नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के वंचितों और आदिवासियों के लिए इतिहास बनाने का चुनाव है। उन्होंने कहा कि असम की जनता अब वर्तमान व्यवस्था से ऊब चुकी है और बदलाव का मन बना चुकी है।

चाय बागान मजदूरों और आदिवासियों के हितों पर जोर

कल्पना सोरेन ने असम के चाय बागान मजदूरों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि जेएमएम इन मजदूरों को उनका उचित हक और अधिकार दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा:

असम के आदिवासियों के हितों की रक्षा अब केवल जेएमएम ही कर सकती है।

आपका एक-एक वोट बहुमूल्य है, जो असम में रहने वाले आदिवासी समुदाय को राजनीतिक और सामाजिक मजबूती प्रदान करेगा।

दिग्गज नेताओं की उपस्थिति

इस अवसर पर जेएमएम की वरिष्ठ नेता और सांसद श्रीमती जोबा माझी तथा विधायक श्री सोमेश चंद्र सोरेन ने भी जनता को संबोधित किया। नेताओं ने प्रत्याशी फैड्रिक्शन हांसदा की साफ-सुथरी छवि और सेवा भाव का जिक्र करते हुए उन्हें भारी मतों से विजयी बनाने की अपील की।

बदलाव की बयार

सभा में उमड़ी भारी भीड़ और कार्यकर्ताओं के उत्साह को देखते हुए कल्पना सोरेन ने दावा किया कि गोसाईंगांव सहित असम की कई सीटों पर जेएमएम एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरी है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे एकजुट होकर तीर-धनुष (जेएमएम का चुनाव चिह्न) पर बटन दबाएं और शोषण मुक्त असम के निर्माण में भागीदार बनें।

सरूपथर में उमड़ा जनसैलाब: मुख्यमंत्री सोरेन बोले—साहिल मुंडा को चुनना मतलब अपने हक-अधिकार को चुनना।

सरूपथर/असम: असम विधानसभा चुनाव के सियासी रण में झारखण्ड के मुख्यमंत्री और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमन्त सोरेन ने पूरी ताकत झोंक दी है। शुक्रवार को असम के सरूपथर विधानसभा क्षेत्र में जेएमएम प्रत्याशी साहिल मुंडा के समर्थन में आयोजित एक विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विरोधियों पर जमकर प्रहार किया और क्षेत्र की जनता से 'मिट्टी और जज्बे' के नाम पर वोट मांगा।

साहिल मुंडा: सत्ता नहीं, सामाजिक परिवर्तन का चेहरा

जनसभा में उमड़ी भारी भीड़ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि साहिल मुंडा का राजनीति में आना महज एक चुनाव लड़ना नहीं है, बल्कि यह असम की माटी और झारखण्ड के जज्बे का एक ऐतिहासिक संगम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि साहिल मुंडा केवल एक प्रत्याशी नहीं हैं, बल्कि वे उस वंचित समाज की आवाज हैं जिसे दशकों तक हाशिए पर रखा गया।

मुख्यमंत्री ने कहा, "साहिल का लक्ष्य विधायक की कुर्सी पाना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और विकास सुनिश्चित करना है। वे पद के लालच से ऊपर उठकर जनता के हक के लिए संघर्ष करने वाले नेता हैं।"

स्थानीय अधिकारों और अस्मिता की रक्षा

हेमन्त सोरेन ने अपने संबोधन में 'झारखण्डी अस्मिता' और स्थानीय अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सरूपथर के युवाओं और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए साहिल मुंडा से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने जनता को आगाह किया कि उन्हें अपने हक और अधिकार की रक्षा के लिए एक ऐसे नेतृत्व को चुनना होगा जो उनकी भाषा, उनकी संस्कृति और उनकी समस्याओं को गहराई से समझता हो।

मुख्यमंत्री ने युवाओं का विशेष आह्वान करते हुए कहा कि साहिल मुंडा युवाओं को केवल 'वोट बैंक' नहीं समझते, बल्कि उन्हें नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार कर रहे हैं। जेएमएम के नेतृत्व में सरूपथर में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय स्वायत्तता के मुद्दों पर ऐतिहासिक काम करने का रोडमैप तैयार किया गया है।

विरोधियों पर प्रहार और विकास का संकल्प

विपक्ष पर निशाना साधते हुए सोरेन ने कहा कि जो लोग केवल विभाजन की राजनीति करते हैं, उन्हें जनता इस बार करारा जवाब देगी। उन्होंने कहा कि झारखण्ड में जिस तरह उनकी सरकार जल-जंगल-जमीन और आदिवासियों-मूलवासियों के हितों के लिए काम कर रही है, वही मॉडल अब जेएमएम असम में भी लागू करना चाहती है।

"साहिल मुंडा के रूप में आपके पास एक नई उम्मीद है। इन्हें चुनना मतलब अपनी आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करना है।"

— मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

जनसभा के दौरान जेएमएम कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर था और "जय झारखण्ड, जय असम" के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। इस सभा के बाद सरूपथर का चुनावी समीकरण काफी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि मुख्यमंत्री की इस रैली ने स्थानीय मतदाताओं के बीच एक मजबूत संदेश दिया है।

नैमिष नगर योजना को रफ्तार: 2500 किसानों की सहमति, 430 हेक्टेयर भूमि के बैनामे की प्रक्रिया तेज

* आईआईएम रोड पर बसने जा रहा आधुनिक उपनगर, 2 लाख लोगों को मिलेगा आवास

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के उत्तरी क्षेत्र में आईआईएम रोड पर प्रस्तावित एलडीए की नैमिष नगर योजना तेजी से आकार ले रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत अब तक 150 हेक्टेयर भूमि का बैनामा प्राधिकरण के पक्ष में हो चुका है, जबकि 2500 से अधिक किसानों ने 430 हेक्टेयर भूमि के बैनामे के लिए सहमति पत्र जमा कर दिए हैं।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, योजना के दो सेक्टरों में भूखंडों के लिए पंजीकरण सितंबर 2026 से शुरू कर दिया जाएगा। योजना को धरातल पर उतारने के लिए विकास कार्य भी प्रारंभ हो चुके हैं।
योजना की प्रभारी अधिकारी संगीता राघव ने बताया कि बीकेटी तहसील के 18 गांवों की लगभग 1486 हेक्टेयर भूमि इस परियोजना में शामिल की जानी है। इनमें भौली, लक्ष्मीपुर, पूरब गांव, पुरवा, सैरपुर, फर्रुखाबाद, कोड़री भौली, कमलाबाद, कमलापुर, पलहरी, गोपरामऊ, बारूमऊ, धतिंगरा, सैदापुर, पश्चिम गांव, धोबैला, उमरभारी और दुग्गौर जैसे गांव शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरण और रजिस्ट्री प्रक्रिया के साथ लगातार सहमति पत्र मिल रहे हैं। साथ ही, योजना में शामिल गांवों का भी समग्र विकास किया जाएगा। इसके तहत संपर्क मार्ग, जल निकासी, खेल मैदान, बारात घर, स्वास्थ्य केंद्र, तालाब, स्कूल, पार्क और श्मशान जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।
करीब 2 लाख लोगों को आवासीय सुविधा देने वाली यह योजना एक आधुनिक उपनगर के रूप में विकसित की जाएगी। इसमें चौड़ी सड़कें, ग्रीन बेल्ट, पार्क, स्कूल, अस्पताल, कम्युनिटी सेंटर, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और व्यावसायिक केंद्र जैसी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
नैमिष नगर योजना से लखनऊ में उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों को भी नई गति मिलेगी। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
नामित सभासद अर्जुन काली ने नगर पालिका शपथ ग्रहण प्रकरण को लेकर कड़ा रुख अपनाया

मेरठ।मवाना।शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सरकार द्वारा नामित सभासद अर्जुन काली ने नगर पालिका शपथ ग्रहण प्रकरण को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने इस मामले में नरेन्द्र खजूरी से मुलाकात कर न्याय की मांग की और दोषियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज करने की अपील की।
बताया गया कि यह मामला मवाना नगर पालिका से जुड़ा है, जहां शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कथित रूप से रालोद नेता के साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया और मारपीट का प्रयास भी हुआ। इस घटना से आक्रोशित होकर अर्जुन काली ने इसे गंभीर सामाजिक अन्याय बताते हुए SC/ST आयोग में शिकायत दर्ज कराने की पहल की।
अर्जुन काली, जो कि पूर्व विधायक गोपाल काली के पुत्र हैं, ने स्पष्ट कहा कि इस प्रकार की घटनाएं समाज में असमानता और भय का माहौल पैदा करती हैं, जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस दौरान वरिष्ठ रालोद नेता सुनील रोहटा और जिला अध्यक्ष विनोद हरित से भी मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी गई और संगठन स्तर पर भी कार्रवाई की मांग की गई।
जिलाध्यक्ष अनिकेत भारद्वाज
SC/ST आयोग के सदस्य नरेन्द्र खजूरी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि यदि संबंधित अधिकारियों द्वारा जल्द कार्रवाई नहीं की जाती है, तो उन्हें आयोग के समक्ष तलब किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के जातीय उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मालदा का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने वाले मोफक्करुल इस्लाम समेत 35 पर शिकंजा

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पश्चिम बंगाल के मालदा (कालियाचक) में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने और हिंसा भड़काने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस पूरे कांड के मास्टरमाइंड माने जा रहे एडवोकेट मोफक्कारुल इस्लाम को बंगाल सीआईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के मुताबिक, मोफक्कारुल इस्लाम राज्य छोड़कर भागने की फिराक में था।

अब तक 35 लोग गिरफ्तार

सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान और पूरा मामला एनआईए को रेफर होने के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी को अरेस्ट कर लिया है। मालदा घटना पर उत्तरी बंगाल के एडीजी के. जयरामन के अनुसार अब तक 35 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस हिंसा में 19 मामले दर्ज किए हैं। उन्होंने बताया कि हिंसा भड़काने वाले मुख्य आरोपी मोफक्करुल इस्लाम को अरेस्ट किया गया है। जयरामन के अनुसार वह एक वकील लगता है। हम जांच कर रहे हैं कि बचाव कार्य में देरी क्यों हुई। फिर हम एक रिपोर्ट सौंपेंगे।

एआईएमआईएम का नेता बताया जा रहा मोफक्करुल

आरोपी मोफक्करुल इस्लाम कालियाचक की घटना का मुख्य साजिशकर्ता है। बुधवार रात हुई इस घटना में सात न्यायिक अधिकारियों को बीडीओ कार्यालय के अंदर कई घंटों तक बंधक बनाकर रखा गया था। वकील मोफक्करुल इस्लाम ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) का नेता बताया जा रहा है। मालदा में हुए विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करने के आरोप में उसे गिरफ्तार किया गया है।

न्यायिक अधिकारियों को क्यों बनाया गया बंधक?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहा मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया एक बड़ा मुद्दा बन गई है। एसआईआर प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची में 63 लाख से अधिक नाम हटाए गए, जबकि 60 लाख अन्य मतदाताओं को विचाराधीन रखा गया। न्यायिक अधिकारियों को इन मामलों की समीक्षा करने का कार्य सौंपा गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ये न्यायिक अधिकारी इन मामलों की जांच कर मतदाताओं को मतदाता सूची में बरकरार रखने या हटाने का फैसला कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को अधिकारियों के साथ बैठक का अनुरोध किया, जिसे अस्वीकार करने पर उन्होंने बीडीओ कार्यालय का घेराव कर तीन महिलाओं समेत सात अधिकारियों को बंधक बना लिया।

सुप्रीम कोर्ट ने मालदा हिंसा को बताया सोची-समझी साजिश

सुप्रीम कोर्ट ने मालदा हिंसा को इसे एक सोची-समझी साजिश बताया और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया। सीजेआई सूर्यकांत रात दो बजे तक इस घटना के बाद जागते रहे थे। चुनाव आयोग ने अदालत के निर्देश पर जांच NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को सौंप दी है। बंगाल चुनाव 2026 के मद्देनजर इस घटना ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है, जहां बीजेपी इसे कानून-व्यवस्था की विफलता बता रही है, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की एक साजिश करार दिया है।

मऊ : हनुमान सेतु (पीपा पुल) का लोकार्पण, 30 हजार लोगों को मिली बड़ी राहत

* ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा बोले—यह शुरुआत, जल्द बनेगा स्थायी पक्का पुल

लखनऊ/मऊ । नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने मऊ जनपद के दौरे के दौरान तमसा नदी स्थित हनुमान घाट पर निर्मित हनुमान सेतु (पीपा पुल) का विधिवत लोकार्पण कर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दी। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही।
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि यह पुल केवल अस्थायी व्यवस्था नहीं, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही यहां एक स्थायी एवं मजबूत पक्का पुल भी बनाया जाएगा, जिससे क्षेत्र के लोगों को दीर्घकालिक सुविधा मिल सके।
मंत्री ने बताया कि इस पुल के निर्माण से लगभग 30 हजार से अधिक लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के लिए आवागमन अब पहले से अधिक सुगम हो जाएगा, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विकास को अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति और बेहतर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। नगर विकास विभाग द्वारा लगाई गई आधुनिक स्ट्रीट लाइटों की गुणवत्ता की सराहना मुख्यमंत्री द्वारा भी की गई है।
मंत्री ए.के. शर्मा ने भरोसा दिलाया कि सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं हर नागरिक तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र अब तक विकास से अछूते थे, वहां भी तेजी से कार्य किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय नागरिकों ने मंत्री का स्वागत करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की और क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
राघव के जवाब पर 'आप' का पलटवार, सौरभ भारद्वाज से लेकर अनुराग ढांडा ने घेरा

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राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के एक दिन बाद सांसद राघव चड्ढा ने इस पर चुप्पी तोड़ी। उन्होंने शुक्रवार को एक वीडियो जारी करके कहा कि मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना। राघव चड्ढा ने कहा, 'खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।' यही नहीं उन्होंने इस मैसेज के साथ आम आदमी पार्टी पर कई गंभीर आरोप लगा दिए। राघव चड्ढा का वीडियो सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी की ओर से पलटवार किया गया है।

अनुराग ढांडा ने भी राघव चड्ढा को घेरा

आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के हालिया बयान और वीडियो को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। पार्टी नेता अनुराग ढांडा ने राघव चड्ढा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अब अरविंद केजरीवाल के सिपाही नहीं रहे हैं और सरकार के खिलाफ खुलकर बोलने से घबराने लगे हैं। अनुराग ढांडा ने कहा, 'हम केजरीवाल के सिपाही हैं। निडरता हमारी पहली पहचान है। जो डर जाए, वो देश के लिए क्या लड़ेगा?'

मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो- ढांडा

ढांडा ने आरोप लगाया कि संसद में सीमित समय मिलने के बावजूद राघव चड्ढा गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों के बजाय छोटे-छोटे मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘संसद में थोड़ा सा समय मिलता है बोलने का पार्टी को, उसमें या तो देश बचाने का संघर्ष कर सकते हैं या एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने का।’ उन्होंने कहा कि गुजरात में पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बावजूद चड्ढा ने संसद में आवाज नहीं उठाई। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर वोट के अधिकार से जुड़े मुद्दे पर भी उन्होंने चड्ढा को घेरा। ढांडा के मुताबिक, जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया, तो राघव चड्ढा ने उस पर साइन करने से इनकार कर दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब पार्टी ने संसद से वॉकआउट किया, तब भी चड्ढा सदन में बैठे रहे। अपने पोस्ट के आखिर में अनुराग ढांडा ने सीधे शब्दों में लिखा, ‘पिछले कुछ सालों से तुम डर गए हो राघव। मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो। देश के असली मुद्दों पर बोलने से घबराते हो। जो डर गया वो….’

सौरभ भारद्वाज ने कहा- ऐसे डरकर राजनीति कैसे होगी

आम आदमी पार्टी के दिल्ली यूनिट के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर रिएक्ट किया। उन्होंने कहा कि राघव भाई अभी आपका वीडियो देखा। हम सब लोग अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं। हमने एक ही बात सीखी थी जो डर गया समझो मर गया। हम सबको तो लोगों के मुद्दे उठाने थे सरकार की आंख में आंख डालकर। पिछले कुछ दिनों में हमने देखा जो भी कोई गंभीर मुद्दे उठाता और सरकार से सवाल पूछता है तो सरकार उस पर डिक्टेटर की तरह उनको तमाम सोशल मीडिया पर बैन करती है। सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता कोई सॉफ्ट पीआर अपनी संसद में करे। संसद में एक छोटी सी पार्टी का बड़ा ही सीमित समय होता है। उसमें अगर कोई समोसों की बात उठा रहा तो उससे जरूरी है कि देश के बड़े मुद्दों की बात उठाए। पूरे देश में हमने देखा हर राज्य में सही लोगों के वोट काटे जा रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि नकली और झूठे वोट बनाकर सरकार बेईमानी के साथ कब्जा करने पर जुटी है। पश्चिम बंगाल का मामला इसमें अहम है। पिछले कई अरसे से मैंने देखा कि आपने कोई ऐसा मुद्दा सदन में नहीं उठाया, जिसमें आपने सरकार से सवाल किए हों। ऐसे डरकर राजनीति कैसे होगी।

इंसानियत की मिसाल—450 जरूरतमंदों तक पहुंचा निःशुल्क भोजन, सेवा में जुटा राष्ट्रीय सामाजिक सेवा संघ
सुल्तानपुर।जनसेवा और इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए सुल्तानपुर जिले की अग्रणी सामाजिक संस्था “राष्ट्रीय सामाजिक सेवा संघ” द्वारा संचालित रसोई के अंतर्गत साप्ताहिक कार्यक्रम में गुरुवार को एक बार फिर सैकड़ों जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान बिखरी। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, जिला चिकित्सालय एवं रेलवे स्टेशन परिसर में कुल 450 मरीजों, तीमारदारों, यात्रियों और असहाय लोगों को निःशुल्क भोजन वितरित किया गया। राष्ट्रीय सामाजिक सेवा संघ अध्यक्ष मेराज अहमद खान के नेतृत्व में
देर रात आयोजित इस सेवा कार्यक्रम का शुभारंभप0प स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में नवागत सीएमएस डॉ. अविनाश गुप्ता द्वारा भोजन की थाली वितरित कर किया गया। उन्होंने इस पुनीत कार्य की सराहना करते हुए कहा कि “राष्ट्रीय सामाजिक सेवा संघ कई वर्षों से जिस निःस्वार्थ भाव से भूखे मरीजों और उनके तीमारदारों को भोजन उपलब्ध करा रहा है, वह वास्तव में अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है।”
वहीं रेलवे स्टेशन परिसर में वरिष्ठ टिकट निरीक्षक परतेश्वर सिंह ने जरूरतमंदों को भोजन की थाली देकर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग भोजन प्राप्त कर संतुष्टि और कृतज्ञता व्यक्त करते नजर आए।

संघ के संस्थापक निजाम खान ने बताया कि यह पूरा कार्य जनसहयोग के माध्यम से निरंतर संचालित हो रहा है, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों का सहयोग मिल रहा है। उन्होंने बताया कि इस बार के मेन्यू में अरहर की दाल, मौसमी सब्जी, रोटी और चावल शामिल रहे।

कार्यक्रम के अंतर्गत मेडिकल कॉलेज परिसर में 320 तथा रेलवे स्टेशन पर 130 लोगों को निःशुल्क भोजन वितरित किया गया। इस सेवा कार्य में जियाउल कमर सिद्दीकी, नफीसा बानो, हाजी मुज्तबा अंसारी, सरदार गुरुप्रीत सिंह, अब्दुल वदूद (मिलियन टेलर), आदिल हसन, यूसुफ पठान, बैजनाथ प्रजापति और माता प्रसाद जायसवाल सहित कई समाजसेवियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

यह पहल न केवल भूख मिटाने का कार्य कर रही है, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और मानवता का संदेश भी लगातार प्रसारित कर रही।

खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं', आप के एक्शन पर राघव चड्ढा का रिएक्शन

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आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद अपनी चुप्पी तोड़ी है। राघव चड्ढा की आप की तरफ से एक्शन पर पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा से डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के एक दिन बाद शुक्रवारको सांसद ने सुबह 10 बजे अपने एक्स अकाउंट से एक वीडियो संदेश जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है- 'खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।'

राघव चड्ढा ने पूछा-क्या जनता के मुद्दे उठाना अपराध

राघव चड्ढा ने कहा कि मुझे जब भी राज्यसभा में बोलने का मौका मिलता है तो मैंने आम आदमी से जुड़े मुद्दों को ही उठाया है। शायद ऐसे टॉपिक उठाता हूं, जिसे आम तौर पर संसद में नहीं उठाया जाता। मगर क्या जनता के मुद्दे उठाना अपराध है, क्या मैंने कोई गुनाह कर दिया। क्या मैं गलत करता हूं।

मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना-राघव चड्ढा

ये सवाल मैं इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि आप ने राज्यसभा के सक्रेटेरियट को कहा है कि राघव चड्ढा को पार्लियामेंट में बोलने का मौका न दिया जाए। अब भला मेरे बोलने पर कोई रोक क्यों लगाना चाहेगा। मैं तो हमेशा देश के आम आदमी की बात करता हूं। मेरे मुद्दों से देश के आम आदमी का तो फायदा हुआ, लेकिन आम आदमी पार्टी का क्या नुकसान हुआ। आप हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते हैं। आप मेरा हाथ थामे रेखिएगा। मैं आपसे हूं और आपके लिए हूं। जिन लोगों ने मुझे खामोश किया, उन्हें कहना चाहता हूं, मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।’

राज्यसभा में बोलने पर पाबंदी

इससे पहले गुरुवार को आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर राघव चड्ढा को सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटाने का आग्रह किया था। इतना ही नहीं, राघव चड्ढा के राज्यसभा में बोलने पर पाबंदी लगा दी गई थी। आम आदमी पार्टी ने सांसद राघव चड्ढा की जगह अब अशोक मित्तल को राज्यसभा में उपनेता नियुक्त किया है।

राघव चड्ढा के एक्शन पर भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने के मुद्दे पर दिल्ली भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस फैसले को पार्टी के अंदरूनी संकट और नेतृत्व की कमजोरी का संकेत बताया है। सचदेवा ने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि वह एक कमजोर नेता हैं, जिनमें न तो विपक्ष का सामना करने का साहस है और न ही अपनी पार्टी के भीतर उठ रहे असंतोष से निपटने की क्षमता है। सचदेवा ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को अपने संसदीय दल का नेता चुनने का अधिकार है, लेकिन जिस तरह राघव चड्ढा को न केवल राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया गया, बल्कि उन्हें सदन में बोलने का समय न देने का अनुरोध भी किया गया, यह असामान्य और चिंताजनक है। यह कदम इस बात की ओर इशारा करता है कि चड्ढा ने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व से दूरी बना ली है।

राघव चड्डा राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाए गए, क्या है AAP के एक्शन के पीछे की वजह?

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आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी से मिली करारी हार के बाद पार्टी दबाव में है। इस बीच राज्यसभा में एक बड़ा बदलाव हुआ है, जिसने पार्टी के अंदरखाने की खींचतान को सतह पर ला दिया है। दरअसल आप ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप नेता के पद से हटा दिया है। इतना ही नहीं, राज्यसभा में उनके बोलने पर भी रोक लगा दी गई है।

अशोक मित्तल को मिली राघव चड्ढा की जगह

आम आदमी पार्टी ने सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटा दिया है। पार्टी ने राज्य सभा सचिवालय को इस संदर्भ में एक पत्र भेजा। वहीं अब अशोक मित्तल राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की ओर से उपनेता होंगे। आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक पत्र सौंपकर सांसद अशोक मित्तल को पार्टी का उप-नेता नियुक्त करने का आग्रह किया है।

राघव चड्ढा के बोलने पर भी रोक

आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को सूचित किया है कि सांसद राघव चड्ढा को संसद में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। राघव चड्ढा पर यह एक्शन ऐसे वक्त में हुआ है, जब वह लगातार राज्यसभा में जनहित के मुद्दों पर वोकल थे। लगातार जनहित के मुद्दों को उठा रहे थे। चाहे वो एयरपोर्ट पर 10 रुपए की चाय हो या डिलीवरी बॉयज के मुद्दे हों।

मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए डाटा रोलओवर की सुविधा की मांग

राघव चड्ढा ने बीते दिनों राज्यसभा में दूरसंचार कंपनियों के डाटा इस्तेमाल के तरीके पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि जो डाटा उपभोक्ता इस्तेमाल नहीं कर पाते, वह खत्म नहीं होना चाहिए, बल्कि अगले दिन के लिए बचा रहना चाहिए। अभी रोजाना मिलने वाला डाटा रात 12 बजे के बाद खत्म हो जाता है, जबकि इसके लिए उपभोक्ता पैसे चुका चुके होते हैं। इसलिए इसका फायदा कंपनियों को नहीं, बल्कि ग्राहकों को मिलना चाहिए। चड्ढा ने सुझाव दिया था कि बचे हुए डाटा के आधार पर अगले महीने रिचार्ज में छूट दी जाए और ग्राहकों को डाटा रोलओवर की सुविधा मिले।

राघव चड्ढा पर एक्शन की वजह क्या?

लगातार जनगित के मुद्दों को उठाने के बाद भी आम आमदी पार्टी की ओर से कुए गए एक्शन पर सवाल उठ रहा है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी हाई कमान ने उन्हें चेतावनी दी थी कि वे बिना चर्चा के कुछ मुद्दों पर बोल रहे हैं। वह राज्यसभा में किस मुद्दे को उठाएंगे, इसकी जानकारी भी पार्टी को नहीं देते थे। सूत्रों का कहना है कि यह फैसला अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन का पालन न करने के आरोप में लिया गया हो सकता है। राघव चड्ढा पर आरोप लगते रहे हैं कि वह आम आदमी पार्टी की लाइन से अलग बात करते हैं। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को जब राउज एवेन्यू कोर्ट बरी किया था, तब भी राघव चड्ढा का बयान सामने नहीं आया था।

चाय बागान मजदूरों को अधिकार दिलाना हमारी प्राथमिकता: गोसाईंगांव में कल्पना सोरेन का बड़ा वादा।

गोसाईंगांव/असम: असम विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी क्रम में आज गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र से जेएमएम प्रत्याशी श्री फैड्रिक्शन हांसदा के पक्ष में एक विशाल चुनावी जनसभा का आयोजन किया गया, जिसे मुख्य वक्ता के रूप में झारखंड की गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने संबोधित किया।

इतिहास बदलने वाला चुनाव

जनसभा को संबोधित करते हुए कल्पना सोरेन ने कहा कि असम विधानसभा का यह चुनाव कोई सामान्य राजनीतिक मुकाबला नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के वंचितों और आदिवासियों के लिए इतिहास बनाने का चुनाव है। उन्होंने कहा कि असम की जनता अब वर्तमान व्यवस्था से ऊब चुकी है और बदलाव का मन बना चुकी है।

चाय बागान मजदूरों और आदिवासियों के हितों पर जोर

कल्पना सोरेन ने असम के चाय बागान मजदूरों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि जेएमएम इन मजदूरों को उनका उचित हक और अधिकार दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा:

असम के आदिवासियों के हितों की रक्षा अब केवल जेएमएम ही कर सकती है।

आपका एक-एक वोट बहुमूल्य है, जो असम में रहने वाले आदिवासी समुदाय को राजनीतिक और सामाजिक मजबूती प्रदान करेगा।

दिग्गज नेताओं की उपस्थिति

इस अवसर पर जेएमएम की वरिष्ठ नेता और सांसद श्रीमती जोबा माझी तथा विधायक श्री सोमेश चंद्र सोरेन ने भी जनता को संबोधित किया। नेताओं ने प्रत्याशी फैड्रिक्शन हांसदा की साफ-सुथरी छवि और सेवा भाव का जिक्र करते हुए उन्हें भारी मतों से विजयी बनाने की अपील की।

बदलाव की बयार

सभा में उमड़ी भारी भीड़ और कार्यकर्ताओं के उत्साह को देखते हुए कल्पना सोरेन ने दावा किया कि गोसाईंगांव सहित असम की कई सीटों पर जेएमएम एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरी है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे एकजुट होकर तीर-धनुष (जेएमएम का चुनाव चिह्न) पर बटन दबाएं और शोषण मुक्त असम के निर्माण में भागीदार बनें।

सरूपथर में उमड़ा जनसैलाब: मुख्यमंत्री सोरेन बोले—साहिल मुंडा को चुनना मतलब अपने हक-अधिकार को चुनना।

सरूपथर/असम: असम विधानसभा चुनाव के सियासी रण में झारखण्ड के मुख्यमंत्री और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमन्त सोरेन ने पूरी ताकत झोंक दी है। शुक्रवार को असम के सरूपथर विधानसभा क्षेत्र में जेएमएम प्रत्याशी साहिल मुंडा के समर्थन में आयोजित एक विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विरोधियों पर जमकर प्रहार किया और क्षेत्र की जनता से 'मिट्टी और जज्बे' के नाम पर वोट मांगा।

साहिल मुंडा: सत्ता नहीं, सामाजिक परिवर्तन का चेहरा

जनसभा में उमड़ी भारी भीड़ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि साहिल मुंडा का राजनीति में आना महज एक चुनाव लड़ना नहीं है, बल्कि यह असम की माटी और झारखण्ड के जज्बे का एक ऐतिहासिक संगम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि साहिल मुंडा केवल एक प्रत्याशी नहीं हैं, बल्कि वे उस वंचित समाज की आवाज हैं जिसे दशकों तक हाशिए पर रखा गया।

मुख्यमंत्री ने कहा, "साहिल का लक्ष्य विधायक की कुर्सी पाना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और विकास सुनिश्चित करना है। वे पद के लालच से ऊपर उठकर जनता के हक के लिए संघर्ष करने वाले नेता हैं।"

स्थानीय अधिकारों और अस्मिता की रक्षा

हेमन्त सोरेन ने अपने संबोधन में 'झारखण्डी अस्मिता' और स्थानीय अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सरूपथर के युवाओं और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए साहिल मुंडा से बेहतर कोई विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने जनता को आगाह किया कि उन्हें अपने हक और अधिकार की रक्षा के लिए एक ऐसे नेतृत्व को चुनना होगा जो उनकी भाषा, उनकी संस्कृति और उनकी समस्याओं को गहराई से समझता हो।

मुख्यमंत्री ने युवाओं का विशेष आह्वान करते हुए कहा कि साहिल मुंडा युवाओं को केवल 'वोट बैंक' नहीं समझते, बल्कि उन्हें नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार कर रहे हैं। जेएमएम के नेतृत्व में सरूपथर में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय स्वायत्तता के मुद्दों पर ऐतिहासिक काम करने का रोडमैप तैयार किया गया है।

विरोधियों पर प्रहार और विकास का संकल्प

विपक्ष पर निशाना साधते हुए सोरेन ने कहा कि जो लोग केवल विभाजन की राजनीति करते हैं, उन्हें जनता इस बार करारा जवाब देगी। उन्होंने कहा कि झारखण्ड में जिस तरह उनकी सरकार जल-जंगल-जमीन और आदिवासियों-मूलवासियों के हितों के लिए काम कर रही है, वही मॉडल अब जेएमएम असम में भी लागू करना चाहती है।

"साहिल मुंडा के रूप में आपके पास एक नई उम्मीद है। इन्हें चुनना मतलब अपनी आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करना है।"

— मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

जनसभा के दौरान जेएमएम कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर था और "जय झारखण्ड, जय असम" के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। इस सभा के बाद सरूपथर का चुनावी समीकरण काफी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि मुख्यमंत्री की इस रैली ने स्थानीय मतदाताओं के बीच एक मजबूत संदेश दिया है।

नैमिष नगर योजना को रफ्तार: 2500 किसानों की सहमति, 430 हेक्टेयर भूमि के बैनामे की प्रक्रिया तेज

* आईआईएम रोड पर बसने जा रहा आधुनिक उपनगर, 2 लाख लोगों को मिलेगा आवास

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के उत्तरी क्षेत्र में आईआईएम रोड पर प्रस्तावित एलडीए की नैमिष नगर योजना तेजी से आकार ले रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत अब तक 150 हेक्टेयर भूमि का बैनामा प्राधिकरण के पक्ष में हो चुका है, जबकि 2500 से अधिक किसानों ने 430 हेक्टेयर भूमि के बैनामे के लिए सहमति पत्र जमा कर दिए हैं।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, योजना के दो सेक्टरों में भूखंडों के लिए पंजीकरण सितंबर 2026 से शुरू कर दिया जाएगा। योजना को धरातल पर उतारने के लिए विकास कार्य भी प्रारंभ हो चुके हैं।
योजना की प्रभारी अधिकारी संगीता राघव ने बताया कि बीकेटी तहसील के 18 गांवों की लगभग 1486 हेक्टेयर भूमि इस परियोजना में शामिल की जानी है। इनमें भौली, लक्ष्मीपुर, पूरब गांव, पुरवा, सैरपुर, फर्रुखाबाद, कोड़री भौली, कमलाबाद, कमलापुर, पलहरी, गोपरामऊ, बारूमऊ, धतिंगरा, सैदापुर, पश्चिम गांव, धोबैला, उमरभारी और दुग्गौर जैसे गांव शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरण और रजिस्ट्री प्रक्रिया के साथ लगातार सहमति पत्र मिल रहे हैं। साथ ही, योजना में शामिल गांवों का भी समग्र विकास किया जाएगा। इसके तहत संपर्क मार्ग, जल निकासी, खेल मैदान, बारात घर, स्वास्थ्य केंद्र, तालाब, स्कूल, पार्क और श्मशान जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।
करीब 2 लाख लोगों को आवासीय सुविधा देने वाली यह योजना एक आधुनिक उपनगर के रूप में विकसित की जाएगी। इसमें चौड़ी सड़कें, ग्रीन बेल्ट, पार्क, स्कूल, अस्पताल, कम्युनिटी सेंटर, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और व्यावसायिक केंद्र जैसी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
नैमिष नगर योजना से लखनऊ में उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों को भी नई गति मिलेगी। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।