अमित शाह चुनेंगे पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री, बनाए गए पर्यवेक्षक, जेपी नड्डा को असम की जिम्मेदारी
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पश्चिम बंगाल और असम में नई सरकार के गठन के लिए भारतीय जनता पार्टी ने कवायद शुरू कर दी है। पश्चिम बंगाल और असम में विधायक दल का नेता चुनने के लिए भाजपा ने अपने केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी है। पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को दी गई है। वहीं, असम में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पर्यवेक्षक बनाया गया है।
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जल्द कोलकाता जाएंगे शाह
पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की है। पार्टी को 206 सीटें हासिल हुई है, जबकि टीएमसी को 82 सीटें मिली हैं। अब बीजेपी सरकार बनाने की तैयारी में जुट गई है। इसी क्रम में पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए गए हैं। पश्चिम बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील और महत्वपूर्ण राज्य में यह बड़ी जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दी गई है। अमित शाह अगले 2-3 तीनों में कोलकाता जाएंगे और विधायकों से बातचीत करेंगे। पश्चिम बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को होगा।
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नवनिर्वाचित विधायकों के साथ बैठक कर चुनेंगे नेता
वहीं, पूर्वोत्तर के सबसे अहम राज्य असम के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। उनके साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को केंद्रीय सह-पर्यवेक्षक बनाया गया है। यह दोनों वरिष्ठ नेता असम जाकर सभी नवनिर्वाचित विधायकों के साथ सीधी बैठक करेंगे और उनकी राय जानने के बाद ही विधायक दल के नेता के नाम पर अंतिम मुहर लगाएंगे। इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया से पार्टी के भीतर किसी भी तरह की गुटबाजी को रोकने में मदद मिलेगी।





उपायुक्त हेमंत सती ने आज 5 मई को शेख़ भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का निरीक्षण कर विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने परिसर का भ्रमण करते हुए पार्किंग व्यवस्था, एम्बुलेंस की उपलब्धता एवं उनकी संख्या की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने परिसर के अंदर सुव्यवस्थित पार्किंग सुनिश्चित करने हेतु नगर निगम को इसके संचालन की जिम्मेदारी सौंपने का निर्देश दिया।
कांग्रेस के जुझारू, बेबाक और जमीनी नेता डॉ. मुनम्म संजय का है—एक ऐसा नाम, जो संघर्ष की आग में तपकर राजनीति की असली पहचान बना है। आज जब उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी का महासचिव बनाया गया है, तो यह केवल एक पद नहीं, बल्कि वर्षों की तपस्या, त्याग और अडिग निष्ठा का सम्मान है। डॉ. संजय का राजनीतिक जीवन किसी आरामदायक रास्ते से नहीं, बल्कि संघर्षों के तूफान से होकर निकला है। छात्र जीवन से ही उन्होंने सत्ता के खिलाफ आवाज उठाई। देवघर का टावर चौक उनकी लड़ाइयों का साक्षी रहा है—जहां उन्होंने धरना दिया, अनशन किया, सड़कें जाम कीं, पुतला दहन किया और हर उस मुद्दे पर डटकर खड़े हुए, जहां आम जनता की आवाज दबाई जा रही थी। सैकड़ों बार गिरफ्तारियां झेलना उनके लिए डर का कारण नहीं, बल्कि संघर्ष का तमगा बन गया। सबसे बड़ी बात—जब कई लोग सत्ता के लालच में रास्ता बदल लेते हैं, तब डॉ. संजय ने कभी कांग्रेस का दामन नहीं छोड़ा। पार्टी के सबसे कठिन दौर में भी वे चट्टान की तरह डटे रहे। लेकिन डॉ. संजय ने अद्भुत धैर्य और साहस का परिचय दिया। उन्होंने साफ तौर पर ठान लिया कि किसी भी कीमत पर झुकना नहीं है—और अडिग होकर हर दबाव का मुकाबला किया। उन्होंने न कभी कांग्रेस से समझौता किया, न ही कांग्रेस की विचारधारा के साथ किसी प्रकार की सौदेबाजी की। गांधी परिवार के प्रति उनकी निष्ठा और कांग्रेस विचारधारा के प्रति उनका समर्पण कभी डगमगाया नहीं। यही कारण है कि पार्टी ने हर मोड़ पर उन पर भरोसा जताया। एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष से लेकर युवा कांग्रेस के नेतृत्व तक, और फिर करीब 14-15 वर्षों तक देवघर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को जमीनी स्तर पर खड़ा किया। विरोध, साजिश और अंदरूनी खींचतान के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी—बल्कि हर चुनौती को अपनी ताकत बना लिया। बीस सूत्री कार्यक्रम के जिला उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने जो काम किया, वह सिर्फ पद संभालना नहीं था, बल्कि व्यवस्था को आईना दिखाना था। उन्होंने यह साबित किया कि अगर नीयत साफ हो, तो सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि गरीबों के घर तक पहुंचती हैं। उन्होंने प्रशासन को जवाबदेह बनाया, अधिकारियों को सक्रिय किया और आम जनता के हक के लिए लड़ाई लड़ी। डॉ. संजय की पहचान सिर्फ एक नेता की नहीं, बल्कि एक लड़ाकू सिपाही की है—जो हर वक्त जनता के बीच खड़ा रहता है। उनकी पकड़ प्रशासन पर भी रही है और जनता के दिलों पर भी। कई बार प्रशासन से टकराव हुआ, लेकिन हर बार उन्होंने अपने हक की लड़ाई को मजबूती से रखा और समाधान भी निकाला। उनका स्वभाव जितना सरल है, उनकी राजनीति उतनी ही धारदार। युवाओं में उनकी जबरदस्त पकड़ है—क्योंकि वे सिर्फ भाषण नहीं देते, बल्कि साथ लेकर चलते हैं। यही वजह है कि उनके साथ हमेशा युवाओं की एक मजबूत फौज खड़ी रहती है। पार्टी ने उन्हें कई जिलों में प्रभारी और ऑब्जर्वर बनाकर उनकी क्षमता का उपयोग किया है। अब प्रदेश महासचिव के रूप में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे अपने अनुभव, संघर्ष और जमीनी समझ से संगठन को किस ऊंचाई तक ले जाते हैं। आज उनके इस नए दायित्व से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा, नया जोश और नई उम्मीद जगी है। आम कांग्रेसियों से लेकर बुद्धिजीवियों तक, हर कोई यह मान रहा है कि पार्टी ने इस बार एक ऐसे योद्धा को जिम्मेदारी दी है, जो सिर्फ कुर्सी नहीं, बल्कि विचार और संघर्ष की राजनीति को आगे बढ़ाएगा।


गया। पश्चिम बंगाल सहित तीन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रचंड जीत के बाद गया जी शहर में जश्न का माहौल देखने को मिला। शहर के प्रमुख स्थल टावर चौक पर सोमवार को बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक एकत्र हुए और जीत की खुशी मनाई।

बबलू प्रजापति
54 min ago
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