यूपी बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी लगाए जाने से नाराज डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने किया विरोध प्रदर्शन
*परीक्षा ड्यूटी से मुक्त किए जाने की मांग

गोंडा।उत्तर प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के बैनर तले सैकड़ों इंजीनियरों ने बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी लगाए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया।उन्होंने काली पट्टी बांधकर कलेक्ट्रेट और कमिश्नर कार्यालय तक मार्च किया,जहाँ राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट पंकज वर्मा को सौंपा।महासंघ की मुख्य मांग है कि सभी इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से परीक्षा ड्यूटी से मुक्त किया जाए।उनका कहना है कि शासनादेश के अनुसार इंजीनियरों की ड्यूटी नहीं लगानी चाहिए उसके बाद भी उन्हें मजिस्ट्रेट के दायित्वों का निर्वहन करने के लिए नियुक्त किया जा रहा है,जिससे उन्हें काफी दिक्कतें आ रही हैं।महासंघ के देवीपाटन मंडल अध्यक्ष इंजीनियर रवि कुमार यादव के नेतृत्व में सौंपे गये ज्ञापन में बताया गया कि शासन के गृह (पुलिस) अनुभाग 9 द्वारा 28 जनवरी 2026 को एक स्पष्ट शासनादेश जारी किया गया था।इस आदेश में माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए नामित अधिकारियों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्रदान की गई हैं।महासंघ का आरोप है कि शासनादेश में सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को इस ड्यूटी से छूट दी गई है।इसके बावजूद देवीपाटन मंडल के विभिन्न जिलों में प्रशासन द्वारा इन विभागों के अभियंताओं की जबरन ड्यूटी लगाई जा रही है।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नियम विरुद्ध ड्यूटी लगाने से तकनीकी कर्मचारियों के मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और उनमें गहरा असंतोष है।मंडल अध्यक्ष रवि कुमार यादव ने कहा कि जब शासन ने हमें इस कार्य से मुक्त कर रखा है तो स्थानीय प्रशासन नियमों की अवहेलना क्यों कर रहा है?यह सीधे तौर पर शासनादेश की गरिमा के प्रतिकूल है।सिंचाई और लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों को बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी से तत्काल कार्यमुक्त किया जाए।28 जनवरी 2026 के शासनादेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित हो।नियम विरुद्ध आदेश जारी करने वाले उत्तरदाई अधिकारियों पर संज्ञान लिया जाए।प्रदर्शन के दौरान महासंघ ने चेतावनी दिया है कि यदि जल्द ही इन गलत ड्यूटियों को निरस्त नहीं किया गया तो संगठन उग्र आंदोलन और कार्य बहिष्कार के लिए बाध्य होगा।ज्ञापन देते समय मंडल के विभिन्न जनपदों से आए भारी संख्या में डिप्लोमा इंजीनियर और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कोशिश द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा संपन्न

जौनपुर। कोशिश साहित्यिक संस्था के 24वें वार्षिकोत्सव तिलकधारी महिला कालेज परिसर में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का श्री गणेश दीप प्रज्ज्वलन एवं डॉ. नरेंद्र पाठक के सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर अहमद निसार ने किया तथा डॉ. अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य टी.डी. कॉलेज मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में कोशिश संस्था द्वारा प्रकाशित मंजरी नामक काव्य संग्रह का विमोचन हुआ जो उपस्थित श्रोताओं के लिए कौतूहल का विषय रहा। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ कवि जनार्दन प्रसाद अस्थाना के कहानी संग्रह प्रायश्चित एवं आनन्द राय द्वारा रचित रूठ गया स्नेहल संचित मन नामक काव्य संग्रह का भी विमोचन हुआ। आमंत्रित कवियों एवं उपस्थित श्रोताओं का स्वागत प्रो. आर.एन. सिंह ने किया। संस्था के उद्देश्यों पर संस्थाध्यक्ष जनार्दन प्रसाद अस्थाना ने प्रकाश डाला एवं अतिथियों के सम्मान में अशोक मिश्रा ने अपने उद्गार व्यक्त किया।विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठजन डा. एम.पी. सिंह, डॉ. एस.बी. सिंह, डा. अंबिकेश्वर सिंह, डॉ. राममोहन सिंह, डॉ, ओम प्रकाश सिंह, डॉ, अजय दुबे, रामकृष्ण त्रिपाठी, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह आदि को सम्मानित भी किया गया। प्रारंभिक सत्र के पश्चात गीत, गजल एवं कविताओं का जो प्रवाह प्रारंभ हुआ, वह सायंकाल तक चलता रहा। मिर्जापुर से पधारे लल्लू तिवारी का शेर 'प्यार कच्चा घड़ा नहीं होता, कोई छोटा बड़ा नहीं होता, पर खूब तालियां बजीं। मऊ से पधारे कवि डॉ. ईश्वर चंद्र त्रिपाठी की रचना 'जीत जाता हूं हार जाता हूं, रोज करने शिकार जाता हूं, सुनकर पूरा हाल वाह-वाह करता रहा। मुक्तेश्वर पाराशर की पंक्तियां 'अकेली यात्राओं में भी मन के गीत पाएंगे', लोगों को खूब पसंद आई। सांप्रदायिक सौहार्द पर पुष्पेंद्र अस्थाना की रचना 'यूं तो जन्नत नहीं जहन्नुम मिलेगा तुमको, नाम मजहब के खून बहाने वालों', बहुत सराही गई। लोक गीतों के महाकवि जगदीश पंथी ने जब कहां की 'बड़ा निक लागे ननद तोरा गंवुआं तो पूरा सभागार मस्ती में झूम उठा और तालियां की गड़गड़ाहट से पूरा हाल गूंजता रहा।काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप वशिष्ठ का शेर 'बड़े दिख रहे हैं वे कंधों पर चढ़कर, जो सचमुच बड़े हैं वो झुक कर खड़े हैं', लोगों के मन को छू गया और और बड़े ही सहज भाव में बड़प्पन को रेखांकित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य ने साहित्य एवं कविता की प्रासंगिकता को रेखांकित किया और इसके योगदान में कोशिश मंच के प्रयासों को खूब सराहा। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे मशहूर शायर अहमद निसार का शेर, ''बहुत संभाल के धरती पर पांव रखिएगा, हमारे शहर के जर्रे में भी दिल धड़कता है', तहे दिल से साराहा गया और खूब वाहवाही बटोरी।कवि सम्मेलन के बीच-बीच में कोशिश संस्था से जुड़े तमाम कवियों एवं शायरों में जनार्दन प्रसाद अस्थाना, प्रखर जौनपुरी, अशोक मिश्रा, गिरीश श्रीवास्तव, फूलचन्द भारती, एस.बी. उपाध्याय, डा. संजय सिंह सागर, रमेश चंद्र सेठ, अंसार जौनपुरी, अनिल उपाध्याय, नन्द लाल समीर, राजेश पांडेय, सुमति श्रीवास्तव, ओ.पी. खरे, ओंकार यादव, रामजीत मिश्रा, पहलवान, बृजेश राय, मंजू पांडेय, रूपेश साथी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन जीतने में सफल रहे और सृजन के क्षेत्र में जौनपुर के योगदान का सार्थक परिचय दिया। इसके अतिरिक्त काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कई शोध छात्रों ने गीत और गजलों के सृजन में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया जो श्रोताओं द्वारा बहुत पसंद किया गया।डॉ विमला सिंह, डॉ राम अवतार सिंह, संजय सेठ, संजय उपाध्याय, डॉ सुभाष सिंह प्रधानाचार्य, डॉ शुभ्रा सिंह, डॉ संतोष सरोज, प्रेम गुप्ता, डॉ सुधा सिंह, अनिल विश्वकर्मा, आर.पी. सिंह एडवोकेट, अश्वनी तिवारी सहित अन्य अनेक संभ्रांत नागरिकों ने कार्यक्रम की गरिमा में चार चांद लगाया। कवि सम्मेलन का संचालन सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा. अंबिकेश्वर सिंह ने किया।
कोशिश द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा संपन्न

जौनपुर। कोशिश साहित्यिक संस्था के 24वें वार्षिकोत्सव तिलकधारी महिला कालेज परिसर में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का श्री गणेश दीप प्रज्ज्वलन एवं डॉ. नरेंद्र पाठक के सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर अहमद निसार ने किया तथा डॉ. अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य टी.डी. कॉलेज मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में कोशिश संस्था द्वारा प्रकाशित मंजरी नामक काव्य संग्रह का विमोचन हुआ जो उपस्थित श्रोताओं के लिए कौतूहल का विषय रहा। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ कवि जनार्दन प्रसाद अस्थाना के कहानी संग्रह प्रायश्चित एवं आनन्द राय द्वारा रचित रूठ गया स्नेहल संचित मन नामक काव्य संग्रह का भी विमोचन हुआ। आमंत्रित कवियों एवं उपस्थित श्रोताओं का स्वागत प्रो. आर.एन. सिंह ने किया। संस्था के उद्देश्यों पर संस्थाध्यक्ष जनार्दन प्रसाद अस्थाना ने प्रकाश डाला एवं अतिथियों के सम्मान में अशोक मिश्रा ने अपने उद्गार व्यक्त किया।विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठजन डा. एम.पी. सिंह, डॉ. एस.बी. सिंह, डा. अंबिकेश्वर सिंह, डॉ. राममोहन सिंह, डॉ, ओम प्रकाश सिंह, डॉ, अजय दुबे, रामकृष्ण त्रिपाठी, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह आदि को सम्मानित भी किया गया। प्रारंभिक सत्र के पश्चात गीत, गजल एवं कविताओं का जो प्रवाह प्रारंभ हुआ, वह सायंकाल तक चलता रहा। मिर्जापुर से पधारे लल्लू तिवारी का शेर 'प्यार कच्चा घड़ा नहीं होता, कोई छोटा बड़ा नहीं होता, पर खूब तालियां बजीं। मऊ से पधारे कवि डॉ. ईश्वर चंद्र त्रिपाठी की रचना 'जीत जाता हूं हार जाता हूं, रोज करने शिकार जाता हूं, सुनकर पूरा हाल वाह-वाह करता रहा। मुक्तेश्वर पाराशर की पंक्तियां 'अकेली यात्राओं में भी मन के गीत पाएंगे', लोगों को खूब पसंद आई। सांप्रदायिक सौहार्द पर पुष्पेंद्र अस्थाना की रचना 'यूं तो जन्नत नहीं जहन्नुम मिलेगा तुमको, नाम मजहब के खून बहाने वालों', बहुत सराही गई। लोक गीतों के महाकवि जगदीश पंथी ने जब कहां की 'बड़ा निक लागे ननद तोरा गंवुआं तो पूरा सभागार मस्ती में झूम उठा और तालियां की गड़गड़ाहट से पूरा हाल गूंजता रहा।काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप वशिष्ठ का शेर 'बड़े दिख रहे हैं वे कंधों पर चढ़कर, जो सचमुच बड़े हैं वो झुक कर खड़े हैं', लोगों के मन को छू गया और और बड़े ही सहज भाव में बड़प्पन को रेखांकित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य ने साहित्य एवं कविता की प्रासंगिकता को रेखांकित किया और इसके योगदान में कोशिश मंच के प्रयासों को खूब सराहा। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे मशहूर शायर अहमद निसार का शेर, ''बहुत संभाल के धरती पर पांव रखिएगा, हमारे शहर के जर्रे में भी दिल धड़कता है', तहे दिल से साराहा गया और खूब वाहवाही बटोरी।कवि सम्मेलन के बीच-बीच में कोशिश संस्था से जुड़े तमाम कवियों एवं शायरों में जनार्दन प्रसाद अस्थाना, प्रखर जौनपुरी, अशोक मिश्रा, गिरीश श्रीवास्तव, फूलचन्द भारती, एस.बी. उपाध्याय, डा. संजय सिंह सागर, रमेश चंद्र सेठ, अंसार जौनपुरी, अनिल उपाध्याय, नन्द लाल समीर, राजेश पांडेय, सुमति श्रीवास्तव, ओ.पी. खरे, ओंकार यादव, रामजीत मिश्रा, पहलवान, बृजेश राय, मंजू पांडेय, रूपेश साथी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन जीतने में सफल रहे और सृजन के क्षेत्र में जौनपुर के योगदान का सार्थक परिचय दिया। इसके अतिरिक्त काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कई शोध छात्रों ने गीत और गजलों के सृजन में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया जो श्रोताओं द्वारा बहुत पसंद किया गया।डॉ विमला सिंह, डॉ राम अवतार सिंह, संजय सेठ, संजय उपाध्याय, डॉ सुभाष सिंह प्रधानाचार्य, डॉ शुभ्रा सिंह, डॉ संतोष सरोज, प्रेम गुप्ता, डॉ सुधा सिंह, अनिल विश्वकर्मा, आर.पी. सिंह एडवोकेट, अश्वनी तिवारी सहित अन्य अनेक संभ्रांत नागरिकों ने कार्यक्रम की गरिमा में चार चांद लगाया। कवि सम्मेलन का संचालन सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा. अंबिकेश्वर सिंह ने किया।
तारिक रहमान बने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री, 25 लोगों के मंत्रिमंडल में एक हिंदू चेहरा

#tariquerahmantakesoathasbangladeshprime_minister

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बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के प्रमुख तारिक रहमान ने मंगलवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 60 वर्षीय रहमान को बंगभवन के बजाय जातीय संसद के दक्षिण प्लाजा में पद की शपथ दिलाई, जो एक लंबे समय से चली आ रही परंपरा से हटकर था।

तारिक के साथ नई सरकार के मंत्रिमंडल को भी शपथ दिलाई गई। इनमें डॉ खलीलुर रहमान (विदेश मंत्री), सलाहुद्दीन अहमद (गृहमंत्री), डॉ अमीर खसरू महमूद (वित्त और प्लानिंग मंत्री), शमा ओबैद (विदेश राज्य मंत्री) पद संभालेंगे।

25 मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों ने ली शपथ

तारिक रहमान के अलावा 25 मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, बीएनपी मंत्रिमंडल में 50 सदस्य हैं, जिनमें 25 मंत्री, 24 राज्य मंत्री और तीन टेक्नोक्रेट शामिल हैं। इन 25 मंत्रियों में से 17 नए चेहरे हैं, और सभी राज्य मंत्री पहली बार इस पद पर आसीन हुए हैं। प्रधानमंत्री रहमान भी पहली बार मंत्रिमंडल के सदस्य बने हैं।

मंत्रिमंडल में एक हिंदू चेहरा

• सलाहुद्दीन अहमद - गृह मंत्रालय

• अमीर खसरू महमूद चौधरी – वित्त और योजना मंत्रालय

• खलीलुर रहमान – विदेश मंत्रालय

• खानदेकर अब्दुल मुक्तदिर – वाणिज्य, उद्योग, कपड़ा और जूट मंत्रालय

• मेजर (रिटायर्ड) हाफिज उद्दीन अहमद – मुक्ति युद्ध मामलों का मंत्रालय

• इकबाल हसन महमूद तुकू – बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्रालय

• AZM ज़ाहिद हुसैन – महिला और बाल मंत्रालय, सामाजिक कल्याण

• अब्दुल अवल मिंटू – पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

• मिजानुर रहमान मीनू – भूमि मंत्रालय

• निताई रॉय चौधरी - सांस्कृतिक मामलों का मंत्रालय

• मोहम्मद असदुज्जमां - कानून, न्याय और संसदीय मामलों का मंत्रालय

• काज़ी शाह मोफ़ज्जल हुसैन कैकोबाद – धार्मिक मामलों का मंत्रालय

• अरिफुल हक चौधरी – श्रम और रोज़गार मंत्रालय, प्रवासी कल्याण और विदेशी रोज़गार

• ज़ाहिर उद्दीन स्वपन – सूचना और प्रसारण मंत्रालय शाहिद

• उद्दीन चौधरी एनी - जल संसाधन मंत्रालय

• एहसानुल हक मिलन – शिक्षा, प्राइमरी और मास एजुकेशन मंत्रालय

• अमीन उर राशिद – कृषि, मत्स्य पालन और पशुधन मंत्रालय, खाद्य मंत्रालय

• अफरोजा खानम – नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय

• असदुल हबीब दुलु - आपदा प्रबंधन और राहत मंत्रालय

• ज़कारिया ताहिर - आवास और सार्वजनिक निर्माण मंत्रालय

• दीपेन दीवान - चटगाँव पहाड़ी इलाकों के मामले मंत्रालय

• सरदार एमडी सखावत हुसैन बकुल - स्वास्थ्य और परिवार नियोजन मंत्रालय

• फकीर महबूब अनम - डाक और दूरसंचार विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय

• शेख रबीउल आलम - सड़क परिवहन और पुल, रेलवे और शिपिंग मंत्रालय

• मिर्ज़ा फ़ख़रुल इस्लाम आलमगीर – स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्रालय

शपथ ग्रहण में भारत से कौन पहुंचा?

इस शपथ ग्रहण में दुनिया के अलग-अलग देशों के न्यौता भेजा गया। भारत से लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और विदेश सचिव विक्रम मिस्री शामिल होने के लिए ढाका पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत हुआ। इनके अलावा मलेशिया के पीएम, पाकिस्तान, मालदीव, तुर्की और श्रीलंका के प्रतिनिधि समारोह में मौजूद रहे। साथ ही चीन, सऊदी अरब, यूएई और ब्रुनेई को भी समारोह का आमंत्रण भेजा गया।

Sambhal मौलाना फ़ैज़ान अशरफ हामिदी सम्भल की मुसलमानों  से अपील
रमजान की आमद - इबादत तकवा और समाजी जिम्मेदारी का मुकम्मल पैगाम

सम्भल  रहमतों, बरकतों और गग़फ़िरत का पाक महीना रमजान शरीफ करीब है। यह महीना हर मुसलमान के लिए आत्म-सुधार, इबादत में इज़ाफ़ा और इंसानियत की ख़िदमत का सुनहरा मौक़ा लेकर आता है। रमजान हमें सिर्फ रोजा रखने का हुक्म नहीं देता बल्कि हमारी पूरी जिंदगी के निज़ाम को सुधारने की तालीम देता है। यह महीना सब्र, शुक्र, तक्रवा अख़लाक़ और सामाजिक हमदर्दी का जीता-जागता सबक़ है।

*मौलाना फ़ैज़ान अशरफ हामिदी* ने रमज़ान करीम की आमद पर शहर व क्षेत्र  के मुसलमानों से  अपील की कि वह इस महीने को सिर्फ रस्मी तौर पर न मनाएं, बल्कि इसकी असली रूह को समझें और अपने अमल से इसे जिंदा करें।

उन्होंने कहा कि रमजान कुरआन का महीना है। इस महीने में ज्यादा से ज्यादा तिलावत, तरावीह की पाबंदी, तहज्जुद, इस्तिग़फ़ार और दुआओं का एहतिमाम किया जाए। अपने घरों में दीन का माहौल बनाया जाए, बच्चों को रोज़े की अहमियत समझाऐं  और घर वालों के साथ मिलकर इबादत का सिलसिला बढ़ाया जाए।

*समाजी जिम्मेदारी का एहसास* :  मौलाना ने खास तौर पर समाजी जिम्मेदारी की तरफ ध्यान दिलाते हुए कहा कि रमजान का असली मक्रसद सिर्फ अपनी निजात नहीं, बल्कि समाज के कमजोर तबके को सहारा देना भी है। हमारे आसपास कई ऐसे
परिवार हैं जो आर्थिक तंगी, बीमारी या बेरोजगारी से जूझ रहे हैं। कुछ लोग अपनी गुरबत को छुपाए रखते हैं, मगर उनकी जरूरतें साफ दिखाई देती हैं। ऐसे लोगों तक मदद पहुंचाना बहुत बड़ा सवाब है।

उन्होंने कहा कि जकात, सदका और फ़ितरा का सही इस्तेमाल किया जाए। पहले अपने मोहल्ले और बस्ती के गरीबों की पहचान की जाए। अगर हर शख़्स अपने आसपास के दो-चार जरूरतमंद परिवारों की जिम्मेदारी ले ले, तो पूरा समाज खुशहाल हो सकता है। रमजान में इफ्तार का सामान, राशन किट, दवाइयां, बच्चों के कपड़े और ईद की बुनियादी जरूरतें मुहैया कराना बेहद नेक काम है।

*रोजाः सिर्फ भूख नहीं बल्कि एहसास* :  उन्होंने कहा कि रोज़ा हमें भूख और प्यास का एहसास कराता है, ताकि हम उन लोगों के दर्द को महसूस कर सकें जो साल भर तंगी में जीते हैं। अगर हमारे रोज़े हमें गरीबों के करीब नहीं लाते, तो हमें अपने इखलास का जायजा लेना चाहिए। रमजान आत्म मूल्यांकन का महीना है अपने गुनाहों से तौबा करने, रिश्तों को सुधारने और दिलों में मोहब्बत पैदा करने का वक्त है।

*नौजवानों के लिए पैग़ाम*:

मौलाना ने नौजवानों से अपील की कि वह रमजान को मोबाइल, टीवी,फिल्म और वेकार मशागिल में गंवाने के बजाय मस्जिदों में जुड़ें, तरावीह में हिस्सा लें और अपने बुजुर्गों की खिदमत करें। बच्चों को भी छोटी उम्र में रोज़े और नमाज की आदत डालना चाहिए ताकि उनमें दीन की मोहब्बत पैदा हो।

*मौहल्ला स्तर पर पहल की जरूरत*:
उन्होंन सुझाव दिया कि हर मौहल्ले में
एक छोटी कमेटी बनाई जाए जो खामोश तरीक़े से जरूरतमंदों की सूची तैयार करे और इज़्ज़त के साथ उनको मदद पहुंचाए। मदद देते वक्त उनके आत्मसम्मान का भी ख़्याल
जरूरी है। इस तरह की सामूहिक कोशिश से समाज में भाईचार ,भरोसा और एकता मजबूत होती है ।
आख़िर में मौलाना फ़ैज़ान अशरफ़ हामिदी ने दुआ की ,कि अल्लाह तआला इस रमजान शरीफ़ को हम सबके लिए हिदायत, बरकत और मग़फ़िरत का जरिया बनाए। हमें सच्चे दिल से इबादत करने अपने गुनाहों से तौबा करने और अपने आसपास के गरीब, मजलूम और यतीम लोगों की मदद करने की तौफीक आता फरमाए।
आइए, इस रमजान को सिर्फ एक धार्मिक परंपरा न रहने दें,इसे समाज की इस्लाह,इंसानियत की खिदमत और आपसी मोहब्बत का मजबूत आधार बनाऐं  ताके हमारे शहर व मुल्क में अमन, रहमत,और ख़ुशहाली का माहौल कायम हो सके।
बंदूक की नोक पर बार बालाओं को पैसे देने के मामले में आयोजक से पूछताछ शुरू
*लाइसेंसी असलहे के दुरूपयोग का आरोप,कार्रवाई की तैयारी

गोंडा।जिले के मोतीगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत किशुन पुरवा गांव में आयोजित एक तिलक समारोह का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।वायरल वीडियो में बार बालाओं को बंदूक के नोक पर पैसे दिए जाते देखा जा सकता है,जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।बताया जा रहा है कि उक्त कार्यक्रम नकछेद मिश्रा के पुत्र कबीर मिश्रा उर्फ़ यश के तिलकोत्सव का था।आरोप है कि परसपुर थाना क्षेत्र से आए लड़की पक्ष के कुछ लोगों ने समारोह के दौरान हथियारों का प्रदर्शन किया।वायरल वीडियो में एक युवक हाथ में बंदूक लेकर उसके नोक पर दस रुपए का नोट लगाता है और फिर बार बालाओं को देता दिखाई दे रहा है।नोट लेने के बाद बार बालाएं डांस करती नजर आ रही हैं।घटना का वीडियो सामने आने के बाद लाइसेंसी हथियारों के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।आमतौर पर हथियार आत्मरक्षा के लिए जारी किए जाते हैं,लेकिन सार्वजनिक आयोजनों में इस तरह के प्रदर्शन को नियम विरुद्ध माना जा रहा है।वीडियो वायरल होने के बाद मोतीगंज थाने की पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दिया है।पुलिस टीम गांव पहुंचकर कार्यक्रम के आयोजक नकछैद मिश्रा से पूछताछ कर रही है और वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है।मामले में मोतीगंज थानाध्यक्ष अरविंद कुमार यादव ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है।उन्होंने बताया कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्यवाही की जाएगी।पुलिसकर्मियों को मौके पर भेजकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी एकत्र की जा रही है।
गावस्कर, कपिल देव समेत 14 पूर्व कप्तानों ने पाक सरकार को लिखी चिट्ठी, इमरान खान से जुड़ा है मामला

#formercaptainsincludinggavaskarkapilwritestopakgovtforimran_khan

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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की खराब सेहत को लेकर 6 देशों के 14 पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कप्तानों ने पाकिस्तान सरकार को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अपील की है कि 73 साल के इमरान को जेल में उचित इलाज दिया जाए।

इमरान खान के समर्थन में आए पूर्व क्रिकेटर

पूर्व क्रिकेटर और पाकिस्तन के प्रधानमंत्री रह चुके इमरान खान की जेल में सेहत बिगड़ने की खबरों के बीच अब दुनिया भर के क्रिकेटर साथ आए हैं। अब दुनिया भर के पूर्व क्रिकेटरों ने मिलकर एक साथ जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री और 1992 वर्ल्ड कप जीतने वाले कप्तान, इमरान खान के साथ "सही और इंसानी बर्ताव" की मांग कर रहा है।

इन पूर्व क्रिकेटर के साइन

रिपोर्ट के मुताबिक इस इस चिट्ठी पर बेलिंडा क्लार्क, ग्रेग चैपल, माइकल एथरटन, सुनील गावस्कर, कपिल देव, नासिर हुसैन, इयान चैपल, माइकल ब्रियरली, एलन बॉर्डर, डेविड गावर, किम ह्यूजेस, क्लाइव लॉयड, स्टीव वॉ और जॉन राइट ने साइन किए हैं

पूर्व कप्तानों ने चिट्ठी में क्या लिखा?

पूर्व कप्तानों द्वारा पाकिस्तान सरकार को लिखी इस चिट्ठी में लिखा गया है, "इमरान खान की खेल में दिए गए योगदान की पूरी दुनिया में तारीफ होती है। कप्तान के तौर पर उन्होंने 1992 में पाकिस्तान को वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक जीत दिलाई। ये जीत स्किल, स्पोर्ट्समैनशिप, मजबूत लीडरशिप से आई थी, जिसने दुनिया की नई पीढ़ी को इंस्पायर किया। हमनें उनके साथ मैदान शेयर किया, उनसे सीखा। वह क्रिकेट के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर्स में से एक हैं, जिनका सभी सम्मान करते हैं। क्रिकेट के आलावा उन्होंने प्रधानमंत्री बनकर भी पाकिस्तान की सेवा की, और मुश्किल समय में पाकिस्तान को संभाला।"

जेल में इमरान खान की बिगड़ती तबियत को लेकर चिट्ठी में लिखा गया, "उनकी सेहत से जुड़ी रिपोर्ट्स, उनकी आंखों की रौशनी का कम होने की खबर ने, हमें चिंता में डाल दिया है।" चिट्ठी में पूर्व कप्तानों ने लिखा कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और ग्लोबल स्पोर्ट्स आइकॉन के साथ जेल में अच्छे से पेश आना चाहिए।

800 से ज्यादा दिनों से जेल में

बता दें कि इमरान को जेल में 800 दिनों से ज्यादा का समय हो गया है। उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही है, जिससे जेल में उनके साथ हो रहे बर्ताव को लेकर सवाल और चिंताएं होने लगी है। इमरान खान की बहन अलीमा खानम ने जेल में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री के साथ हो रहे बर्ताव और उनकी बिगड़ती सेहत के खिलाफ आवाज उठाई थी।

इमरान की एक आंख की 85% रोशनी खत्म

बताया जा रहा है कि इमरान खान की एक आंख की करीब 85% रोशनी चली गई है। यह खुलासा पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई जांच में हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नियुक्त वकील सलमान सफदर ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि इमरान खान जेल प्रशासन से कई महीनों आंखों में धुंधलापन होने की शिकायत कर रहे थे। अक्टूबर 2025 तक उनकी नजर सामान्य थी, लेकिन बाद में दाईं आंख की रोशनी अचानक चली गई। जांच के दौरान पिम्स अस्पताल के एक आई एक्सपर्ट को बुलाया गया था। डॉक्टरों ने पाया कि उनकी आंख में खून का थक्का जम गया था, जिससे गंभीर नुकसान हुआ। इलाज और इंजेक्शन देने के बाद भी उनकी दाईं आंख में अब सिर्फ लगभग 15% रोशनी बची है। वहीं इमरान का कहना है उन्हें निजी डॉक्टर से इलाज कराने की इजाजत नहीं दी गई है।

रमजान माह को दृष्टिगत समुचित व्यवस्था हेतु कर्मचारियों की छुट्टियां निरस्त।    
                         
                                           
बलरामपुर। पवित्र माह रमजान को ध्यान में रखते हुए आदर्श नगर पालिका परिषद द्वारा विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। अध्यक्ष डॉ.धीरेन्द्र प्रताप सिंह धीरू के निर्देश पर अधिशासी अधिकारी लालचंद मौर्य ने कर्मचारियों की छुट्टियां निरस्त करने का आदेश जारी किया है,ताकि नगर में साफ-सफाई,प्रकाश व्यवस्था एवं जलापूर्ति सुचारु रूप से संचालित हो सके।

अध्यक्ष प्रतिनिधि डीपी सिंह बैस ने बताया कि रमजान माह के दौरान नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो,इसके लिए विशेष कार्ययोजना लागू की गई है। नगर में जलापूर्ति का समय निर्धारित करते हुए बताया गया कि प्रातः 3 बजे से 10 बजे तक ओवरहेड टैंक के माध्यम से जलापूर्ति की जाएगी। इसके अतिरिक्त दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक डायरेक्ट सप्लाई चालू रहेगी। वहीं सायं 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक पुनः ओवरहेड टैंक के माध्यम से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
नगर पालिका प्रशासन ने सभी संबंधित कर्मचारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करें,जिससे रमजान माह में नगरवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
तंत्र-मंत्र के नाम पर घर में घुसकर लूट, कार्रवाई के बजाय पुलिस पर लीपापोती का आरोप

साण्डी हरदोई ।  जनपद के हरदोई में तंत्र-विद्या के नाम पर घर में सुनियोजित तरीके से लूट की वारदात सामने आई है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपियों ने पहले बीमारी का बहाना बनाकर तांत्रिक बुलवाया, फिर डर और मौत की धमकी देकर नगदी ऐंठ ली। इतना ही नहीं, शिकायत के बाद भी साण्डी थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बजाय पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की।

थाना साण्डी क्षेत्र के ग्राम लक्षनपुरवा निवासी सिद्धा श्री पत्नी स्व. मिठ्ठू के अनुसार उनकी पुत्रवधू की तबीयत खराब रहती है। 20 जनवरी 2026 को थाना सवायजपुर क्षेत्र के पदिमलापुर निवासी राकेश व हरिनाथ ने उनके पुत्र रामसेवक को फोन कर एक तथाकथित तांत्रिक से इलाज कराने का झांसा दिया। योजना के तहत पहले पदिमलापुर में झाड़-फूंक की गई और फिर कहा गया कि असली बाधा घर पर ही दूर होगी।

इसके बाद आरोपी राकेश, उसका पुत्र संतोष व उसकी सास राजेश्वरी देवी तांत्रिक को लेकर लक्षनपुरवा पहुंच गए। घर के मुख्य द्वार पर गड्ढा खुदवाया गया और सिद्धा श्री को कमरे में अकेले ले जाकर डराया गया कि उनके पास रखा सोने का हार “बाधा” का कारण है। तांत्रिक ने 18 हजार रुपये हवन-पूजन के नाम पर मांगे और धमकी दी कि 25 जनवरी तक रुपये न दिए तो उनके पुत्र और पुत्रवधू की मौत हो जाएगी।

भयभीत परिवार से 17 हजार रुपये तुरंत मंगवाए गए। पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद किसी तरह की क्रिया कर परिवार को असामान्य स्थिति में पहुंचा दिया गया। जब होश आया तो घर में रखे लगभग 50 हजार रुपये नगद गायब थे और आरोपी मौके से फरार हो चुके थे।

पीड़िता ने 21 जनवरी को थाना साण्डी में तहरीर दी, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। बाद में 5 फरवरी को पुलिस अधीक्षक से शिकायत की गई, परंतु थाना स्तर से मामले को “राजस्व प्रकृति” का बताकर निस्तारित करने की कोशिश की गई। पीड़िता का आरोप है कि थाना अध्यक्ष व संबंधित पुलिसकर्मियों ने आरोपियों से मिलीभगत कर झूठी आख्या भेजी और पूरे प्रकरण को दबाने का प्रयास किया। उनके पास कथित बातचीत की रिकॉर्डिंग भी होने का दावा किया गया है।
घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता ने उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी और दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
मसूरी में NH-707A को नुकसान पहुंचाने पर प्रशासन सख्त, भूस्वामियों पर 91 लाख की वसूली
* अनधिकृत खुदाई से धंसा राजमार्ग, 11 लाख जुर्माना और 80 लाख आरसी तय

मसूरी, उत्तराखंड। पर्यटन नगरी मसूरी में राष्ट्रीय राजमार्ग को नुकसान पहुंचाने के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। 12 फरवरी को NH-707A (त्यूनी-चकराता-मसूरी-बाटाघाट) के किमी 162 पर होटल देवलोक के पास सड़क का एक हिस्सा धंस गया था, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि निजी भूमि पर निर्माण कार्य और अनधिकृत खुदाई के कारण राजमार्ग के नीचे की सतह कमजोर हो गई थी। बिना अनुमति ढलान की कटिंग और कथित अवैध खनन के चलते सड़क का हिस्सा धंस गया। इस घटना से मसूरी से कैंपटी, उत्तरकाशी और चारधाम यात्रा मार्ग की आवाजाही प्रभावित रही, जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने संबंधित भूस्वामियों पर 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अतिरिक्त 80 लाख रुपये की वसूली आरसी (रिकवरी चार्ज) के रूप में निर्धारित की गई है। अधिकारियों के अनुसार यह राशि सड़क की मरम्मत, ढलान स्थिरीकरण और सुरक्षा कार्यों पर होने वाले खर्च की भरपाई के लिए वसूल की जाएगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अवैध खनन के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, खनन विभाग और राजस्व विभाग को संयुक्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
सड़क धंसने के बाद ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्ग से डायवर्ट किया गया। विभागीय टीम ने मौके का निरीक्षण कर ढलान की स्थिति का आकलन किया है। फिलहाल अस्थायी सुरक्षा के तहत बैरिकेडिंग और मलबा हटाने का कार्य किया गया है, जबकि स्थायी मरम्मत की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि भविष्य में राजमार्ग या किसी भी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो।
यूपी बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी लगाए जाने से नाराज डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने किया विरोध प्रदर्शन
*परीक्षा ड्यूटी से मुक्त किए जाने की मांग

गोंडा।उत्तर प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के बैनर तले सैकड़ों इंजीनियरों ने बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी लगाए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया।उन्होंने काली पट्टी बांधकर कलेक्ट्रेट और कमिश्नर कार्यालय तक मार्च किया,जहाँ राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट पंकज वर्मा को सौंपा।महासंघ की मुख्य मांग है कि सभी इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से परीक्षा ड्यूटी से मुक्त किया जाए।उनका कहना है कि शासनादेश के अनुसार इंजीनियरों की ड्यूटी नहीं लगानी चाहिए उसके बाद भी उन्हें मजिस्ट्रेट के दायित्वों का निर्वहन करने के लिए नियुक्त किया जा रहा है,जिससे उन्हें काफी दिक्कतें आ रही हैं।महासंघ के देवीपाटन मंडल अध्यक्ष इंजीनियर रवि कुमार यादव के नेतृत्व में सौंपे गये ज्ञापन में बताया गया कि शासन के गृह (पुलिस) अनुभाग 9 द्वारा 28 जनवरी 2026 को एक स्पष्ट शासनादेश जारी किया गया था।इस आदेश में माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए नामित अधिकारियों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्रदान की गई हैं।महासंघ का आरोप है कि शासनादेश में सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को इस ड्यूटी से छूट दी गई है।इसके बावजूद देवीपाटन मंडल के विभिन्न जिलों में प्रशासन द्वारा इन विभागों के अभियंताओं की जबरन ड्यूटी लगाई जा रही है।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नियम विरुद्ध ड्यूटी लगाने से तकनीकी कर्मचारियों के मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और उनमें गहरा असंतोष है।मंडल अध्यक्ष रवि कुमार यादव ने कहा कि जब शासन ने हमें इस कार्य से मुक्त कर रखा है तो स्थानीय प्रशासन नियमों की अवहेलना क्यों कर रहा है?यह सीधे तौर पर शासनादेश की गरिमा के प्रतिकूल है।सिंचाई और लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों को बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी से तत्काल कार्यमुक्त किया जाए।28 जनवरी 2026 के शासनादेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित हो।नियम विरुद्ध आदेश जारी करने वाले उत्तरदाई अधिकारियों पर संज्ञान लिया जाए।प्रदर्शन के दौरान महासंघ ने चेतावनी दिया है कि यदि जल्द ही इन गलत ड्यूटियों को निरस्त नहीं किया गया तो संगठन उग्र आंदोलन और कार्य बहिष्कार के लिए बाध्य होगा।ज्ञापन देते समय मंडल के विभिन्न जनपदों से आए भारी संख्या में डिप्लोमा इंजीनियर और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कोशिश द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा संपन्न

जौनपुर। कोशिश साहित्यिक संस्था के 24वें वार्षिकोत्सव तिलकधारी महिला कालेज परिसर में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का श्री गणेश दीप प्रज्ज्वलन एवं डॉ. नरेंद्र पाठक के सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर अहमद निसार ने किया तथा डॉ. अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य टी.डी. कॉलेज मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में कोशिश संस्था द्वारा प्रकाशित मंजरी नामक काव्य संग्रह का विमोचन हुआ जो उपस्थित श्रोताओं के लिए कौतूहल का विषय रहा। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ कवि जनार्दन प्रसाद अस्थाना के कहानी संग्रह प्रायश्चित एवं आनन्द राय द्वारा रचित रूठ गया स्नेहल संचित मन नामक काव्य संग्रह का भी विमोचन हुआ। आमंत्रित कवियों एवं उपस्थित श्रोताओं का स्वागत प्रो. आर.एन. सिंह ने किया। संस्था के उद्देश्यों पर संस्थाध्यक्ष जनार्दन प्रसाद अस्थाना ने प्रकाश डाला एवं अतिथियों के सम्मान में अशोक मिश्रा ने अपने उद्गार व्यक्त किया।विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठजन डा. एम.पी. सिंह, डॉ. एस.बी. सिंह, डा. अंबिकेश्वर सिंह, डॉ. राममोहन सिंह, डॉ, ओम प्रकाश सिंह, डॉ, अजय दुबे, रामकृष्ण त्रिपाठी, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह आदि को सम्मानित भी किया गया। प्रारंभिक सत्र के पश्चात गीत, गजल एवं कविताओं का जो प्रवाह प्रारंभ हुआ, वह सायंकाल तक चलता रहा। मिर्जापुर से पधारे लल्लू तिवारी का शेर 'प्यार कच्चा घड़ा नहीं होता, कोई छोटा बड़ा नहीं होता, पर खूब तालियां बजीं। मऊ से पधारे कवि डॉ. ईश्वर चंद्र त्रिपाठी की रचना 'जीत जाता हूं हार जाता हूं, रोज करने शिकार जाता हूं, सुनकर पूरा हाल वाह-वाह करता रहा। मुक्तेश्वर पाराशर की पंक्तियां 'अकेली यात्राओं में भी मन के गीत पाएंगे', लोगों को खूब पसंद आई। सांप्रदायिक सौहार्द पर पुष्पेंद्र अस्थाना की रचना 'यूं तो जन्नत नहीं जहन्नुम मिलेगा तुमको, नाम मजहब के खून बहाने वालों', बहुत सराही गई। लोक गीतों के महाकवि जगदीश पंथी ने जब कहां की 'बड़ा निक लागे ननद तोरा गंवुआं तो पूरा सभागार मस्ती में झूम उठा और तालियां की गड़गड़ाहट से पूरा हाल गूंजता रहा।काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप वशिष्ठ का शेर 'बड़े दिख रहे हैं वे कंधों पर चढ़कर, जो सचमुच बड़े हैं वो झुक कर खड़े हैं', लोगों के मन को छू गया और और बड़े ही सहज भाव में बड़प्पन को रेखांकित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य ने साहित्य एवं कविता की प्रासंगिकता को रेखांकित किया और इसके योगदान में कोशिश मंच के प्रयासों को खूब सराहा। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे मशहूर शायर अहमद निसार का शेर, ''बहुत संभाल के धरती पर पांव रखिएगा, हमारे शहर के जर्रे में भी दिल धड़कता है', तहे दिल से साराहा गया और खूब वाहवाही बटोरी।कवि सम्मेलन के बीच-बीच में कोशिश संस्था से जुड़े तमाम कवियों एवं शायरों में जनार्दन प्रसाद अस्थाना, प्रखर जौनपुरी, अशोक मिश्रा, गिरीश श्रीवास्तव, फूलचन्द भारती, एस.बी. उपाध्याय, डा. संजय सिंह सागर, रमेश चंद्र सेठ, अंसार जौनपुरी, अनिल उपाध्याय, नन्द लाल समीर, राजेश पांडेय, सुमति श्रीवास्तव, ओ.पी. खरे, ओंकार यादव, रामजीत मिश्रा, पहलवान, बृजेश राय, मंजू पांडेय, रूपेश साथी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन जीतने में सफल रहे और सृजन के क्षेत्र में जौनपुर के योगदान का सार्थक परिचय दिया। इसके अतिरिक्त काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कई शोध छात्रों ने गीत और गजलों के सृजन में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया जो श्रोताओं द्वारा बहुत पसंद किया गया।डॉ विमला सिंह, डॉ राम अवतार सिंह, संजय सेठ, संजय उपाध्याय, डॉ सुभाष सिंह प्रधानाचार्य, डॉ शुभ्रा सिंह, डॉ संतोष सरोज, प्रेम गुप्ता, डॉ सुधा सिंह, अनिल विश्वकर्मा, आर.पी. सिंह एडवोकेट, अश्वनी तिवारी सहित अन्य अनेक संभ्रांत नागरिकों ने कार्यक्रम की गरिमा में चार चांद लगाया। कवि सम्मेलन का संचालन सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा. अंबिकेश्वर सिंह ने किया।
कोशिश द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा संपन्न

जौनपुर। कोशिश साहित्यिक संस्था के 24वें वार्षिकोत्सव तिलकधारी महिला कालेज परिसर में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का श्री गणेश दीप प्रज्ज्वलन एवं डॉ. नरेंद्र पाठक के सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर अहमद निसार ने किया तथा डॉ. अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य टी.डी. कॉलेज मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में कोशिश संस्था द्वारा प्रकाशित मंजरी नामक काव्य संग्रह का विमोचन हुआ जो उपस्थित श्रोताओं के लिए कौतूहल का विषय रहा। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ कवि जनार्दन प्रसाद अस्थाना के कहानी संग्रह प्रायश्चित एवं आनन्द राय द्वारा रचित रूठ गया स्नेहल संचित मन नामक काव्य संग्रह का भी विमोचन हुआ। आमंत्रित कवियों एवं उपस्थित श्रोताओं का स्वागत प्रो. आर.एन. सिंह ने किया। संस्था के उद्देश्यों पर संस्थाध्यक्ष जनार्दन प्रसाद अस्थाना ने प्रकाश डाला एवं अतिथियों के सम्मान में अशोक मिश्रा ने अपने उद्गार व्यक्त किया।विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठजन डा. एम.पी. सिंह, डॉ. एस.बी. सिंह, डा. अंबिकेश्वर सिंह, डॉ. राममोहन सिंह, डॉ, ओम प्रकाश सिंह, डॉ, अजय दुबे, रामकृष्ण त्रिपाठी, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह आदि को सम्मानित भी किया गया। प्रारंभिक सत्र के पश्चात गीत, गजल एवं कविताओं का जो प्रवाह प्रारंभ हुआ, वह सायंकाल तक चलता रहा। मिर्जापुर से पधारे लल्लू तिवारी का शेर 'प्यार कच्चा घड़ा नहीं होता, कोई छोटा बड़ा नहीं होता, पर खूब तालियां बजीं। मऊ से पधारे कवि डॉ. ईश्वर चंद्र त्रिपाठी की रचना 'जीत जाता हूं हार जाता हूं, रोज करने शिकार जाता हूं, सुनकर पूरा हाल वाह-वाह करता रहा। मुक्तेश्वर पाराशर की पंक्तियां 'अकेली यात्राओं में भी मन के गीत पाएंगे', लोगों को खूब पसंद आई। सांप्रदायिक सौहार्द पर पुष्पेंद्र अस्थाना की रचना 'यूं तो जन्नत नहीं जहन्नुम मिलेगा तुमको, नाम मजहब के खून बहाने वालों', बहुत सराही गई। लोक गीतों के महाकवि जगदीश पंथी ने जब कहां की 'बड़ा निक लागे ननद तोरा गंवुआं तो पूरा सभागार मस्ती में झूम उठा और तालियां की गड़गड़ाहट से पूरा हाल गूंजता रहा।काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप वशिष्ठ का शेर 'बड़े दिख रहे हैं वे कंधों पर चढ़कर, जो सचमुच बड़े हैं वो झुक कर खड़े हैं', लोगों के मन को छू गया और और बड़े ही सहज भाव में बड़प्पन को रेखांकित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य ने साहित्य एवं कविता की प्रासंगिकता को रेखांकित किया और इसके योगदान में कोशिश मंच के प्रयासों को खूब सराहा। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे मशहूर शायर अहमद निसार का शेर, ''बहुत संभाल के धरती पर पांव रखिएगा, हमारे शहर के जर्रे में भी दिल धड़कता है', तहे दिल से साराहा गया और खूब वाहवाही बटोरी।कवि सम्मेलन के बीच-बीच में कोशिश संस्था से जुड़े तमाम कवियों एवं शायरों में जनार्दन प्रसाद अस्थाना, प्रखर जौनपुरी, अशोक मिश्रा, गिरीश श्रीवास्तव, फूलचन्द भारती, एस.बी. उपाध्याय, डा. संजय सिंह सागर, रमेश चंद्र सेठ, अंसार जौनपुरी, अनिल उपाध्याय, नन्द लाल समीर, राजेश पांडेय, सुमति श्रीवास्तव, ओ.पी. खरे, ओंकार यादव, रामजीत मिश्रा, पहलवान, बृजेश राय, मंजू पांडेय, रूपेश साथी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन जीतने में सफल रहे और सृजन के क्षेत्र में जौनपुर के योगदान का सार्थक परिचय दिया। इसके अतिरिक्त काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कई शोध छात्रों ने गीत और गजलों के सृजन में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया जो श्रोताओं द्वारा बहुत पसंद किया गया।डॉ विमला सिंह, डॉ राम अवतार सिंह, संजय सेठ, संजय उपाध्याय, डॉ सुभाष सिंह प्रधानाचार्य, डॉ शुभ्रा सिंह, डॉ संतोष सरोज, प्रेम गुप्ता, डॉ सुधा सिंह, अनिल विश्वकर्मा, आर.पी. सिंह एडवोकेट, अश्वनी तिवारी सहित अन्य अनेक संभ्रांत नागरिकों ने कार्यक्रम की गरिमा में चार चांद लगाया। कवि सम्मेलन का संचालन सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा. अंबिकेश्वर सिंह ने किया।
तारिक रहमान बने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री, 25 लोगों के मंत्रिमंडल में एक हिंदू चेहरा

#tariquerahmantakesoathasbangladeshprime_minister

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बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के प्रमुख तारिक रहमान ने मंगलवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 60 वर्षीय रहमान को बंगभवन के बजाय जातीय संसद के दक्षिण प्लाजा में पद की शपथ दिलाई, जो एक लंबे समय से चली आ रही परंपरा से हटकर था।

तारिक के साथ नई सरकार के मंत्रिमंडल को भी शपथ दिलाई गई। इनमें डॉ खलीलुर रहमान (विदेश मंत्री), सलाहुद्दीन अहमद (गृहमंत्री), डॉ अमीर खसरू महमूद (वित्त और प्लानिंग मंत्री), शमा ओबैद (विदेश राज्य मंत्री) पद संभालेंगे।

25 मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों ने ली शपथ

तारिक रहमान के अलावा 25 मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, बीएनपी मंत्रिमंडल में 50 सदस्य हैं, जिनमें 25 मंत्री, 24 राज्य मंत्री और तीन टेक्नोक्रेट शामिल हैं। इन 25 मंत्रियों में से 17 नए चेहरे हैं, और सभी राज्य मंत्री पहली बार इस पद पर आसीन हुए हैं। प्रधानमंत्री रहमान भी पहली बार मंत्रिमंडल के सदस्य बने हैं।

मंत्रिमंडल में एक हिंदू चेहरा

• सलाहुद्दीन अहमद - गृह मंत्रालय

• अमीर खसरू महमूद चौधरी – वित्त और योजना मंत्रालय

• खलीलुर रहमान – विदेश मंत्रालय

• खानदेकर अब्दुल मुक्तदिर – वाणिज्य, उद्योग, कपड़ा और जूट मंत्रालय

• मेजर (रिटायर्ड) हाफिज उद्दीन अहमद – मुक्ति युद्ध मामलों का मंत्रालय

• इकबाल हसन महमूद तुकू – बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्रालय

• AZM ज़ाहिद हुसैन – महिला और बाल मंत्रालय, सामाजिक कल्याण

• अब्दुल अवल मिंटू – पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

• मिजानुर रहमान मीनू – भूमि मंत्रालय

• निताई रॉय चौधरी - सांस्कृतिक मामलों का मंत्रालय

• मोहम्मद असदुज्जमां - कानून, न्याय और संसदीय मामलों का मंत्रालय

• काज़ी शाह मोफ़ज्जल हुसैन कैकोबाद – धार्मिक मामलों का मंत्रालय

• अरिफुल हक चौधरी – श्रम और रोज़गार मंत्रालय, प्रवासी कल्याण और विदेशी रोज़गार

• ज़ाहिर उद्दीन स्वपन – सूचना और प्रसारण मंत्रालय शाहिद

• उद्दीन चौधरी एनी - जल संसाधन मंत्रालय

• एहसानुल हक मिलन – शिक्षा, प्राइमरी और मास एजुकेशन मंत्रालय

• अमीन उर राशिद – कृषि, मत्स्य पालन और पशुधन मंत्रालय, खाद्य मंत्रालय

• अफरोजा खानम – नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय

• असदुल हबीब दुलु - आपदा प्रबंधन और राहत मंत्रालय

• ज़कारिया ताहिर - आवास और सार्वजनिक निर्माण मंत्रालय

• दीपेन दीवान - चटगाँव पहाड़ी इलाकों के मामले मंत्रालय

• सरदार एमडी सखावत हुसैन बकुल - स्वास्थ्य और परिवार नियोजन मंत्रालय

• फकीर महबूब अनम - डाक और दूरसंचार विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय

• शेख रबीउल आलम - सड़क परिवहन और पुल, रेलवे और शिपिंग मंत्रालय

• मिर्ज़ा फ़ख़रुल इस्लाम आलमगीर – स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्रालय

शपथ ग्रहण में भारत से कौन पहुंचा?

इस शपथ ग्रहण में दुनिया के अलग-अलग देशों के न्यौता भेजा गया। भारत से लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और विदेश सचिव विक्रम मिस्री शामिल होने के लिए ढाका पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत हुआ। इनके अलावा मलेशिया के पीएम, पाकिस्तान, मालदीव, तुर्की और श्रीलंका के प्रतिनिधि समारोह में मौजूद रहे। साथ ही चीन, सऊदी अरब, यूएई और ब्रुनेई को भी समारोह का आमंत्रण भेजा गया।

Sambhal मौलाना फ़ैज़ान अशरफ हामिदी सम्भल की मुसलमानों  से अपील
रमजान की आमद - इबादत तकवा और समाजी जिम्मेदारी का मुकम्मल पैगाम

सम्भल  रहमतों, बरकतों और गग़फ़िरत का पाक महीना रमजान शरीफ करीब है। यह महीना हर मुसलमान के लिए आत्म-सुधार, इबादत में इज़ाफ़ा और इंसानियत की ख़िदमत का सुनहरा मौक़ा लेकर आता है। रमजान हमें सिर्फ रोजा रखने का हुक्म नहीं देता बल्कि हमारी पूरी जिंदगी के निज़ाम को सुधारने की तालीम देता है। यह महीना सब्र, शुक्र, तक्रवा अख़लाक़ और सामाजिक हमदर्दी का जीता-जागता सबक़ है।

*मौलाना फ़ैज़ान अशरफ हामिदी* ने रमज़ान करीम की आमद पर शहर व क्षेत्र  के मुसलमानों से  अपील की कि वह इस महीने को सिर्फ रस्मी तौर पर न मनाएं, बल्कि इसकी असली रूह को समझें और अपने अमल से इसे जिंदा करें।

उन्होंने कहा कि रमजान कुरआन का महीना है। इस महीने में ज्यादा से ज्यादा तिलावत, तरावीह की पाबंदी, तहज्जुद, इस्तिग़फ़ार और दुआओं का एहतिमाम किया जाए। अपने घरों में दीन का माहौल बनाया जाए, बच्चों को रोज़े की अहमियत समझाऐं  और घर वालों के साथ मिलकर इबादत का सिलसिला बढ़ाया जाए।

*समाजी जिम्मेदारी का एहसास* :  मौलाना ने खास तौर पर समाजी जिम्मेदारी की तरफ ध्यान दिलाते हुए कहा कि रमजान का असली मक्रसद सिर्फ अपनी निजात नहीं, बल्कि समाज के कमजोर तबके को सहारा देना भी है। हमारे आसपास कई ऐसे
परिवार हैं जो आर्थिक तंगी, बीमारी या बेरोजगारी से जूझ रहे हैं। कुछ लोग अपनी गुरबत को छुपाए रखते हैं, मगर उनकी जरूरतें साफ दिखाई देती हैं। ऐसे लोगों तक मदद पहुंचाना बहुत बड़ा सवाब है।

उन्होंने कहा कि जकात, सदका और फ़ितरा का सही इस्तेमाल किया जाए। पहले अपने मोहल्ले और बस्ती के गरीबों की पहचान की जाए। अगर हर शख़्स अपने आसपास के दो-चार जरूरतमंद परिवारों की जिम्मेदारी ले ले, तो पूरा समाज खुशहाल हो सकता है। रमजान में इफ्तार का सामान, राशन किट, दवाइयां, बच्चों के कपड़े और ईद की बुनियादी जरूरतें मुहैया कराना बेहद नेक काम है।

*रोजाः सिर्फ भूख नहीं बल्कि एहसास* :  उन्होंने कहा कि रोज़ा हमें भूख और प्यास का एहसास कराता है, ताकि हम उन लोगों के दर्द को महसूस कर सकें जो साल भर तंगी में जीते हैं। अगर हमारे रोज़े हमें गरीबों के करीब नहीं लाते, तो हमें अपने इखलास का जायजा लेना चाहिए। रमजान आत्म मूल्यांकन का महीना है अपने गुनाहों से तौबा करने, रिश्तों को सुधारने और दिलों में मोहब्बत पैदा करने का वक्त है।

*नौजवानों के लिए पैग़ाम*:

मौलाना ने नौजवानों से अपील की कि वह रमजान को मोबाइल, टीवी,फिल्म और वेकार मशागिल में गंवाने के बजाय मस्जिदों में जुड़ें, तरावीह में हिस्सा लें और अपने बुजुर्गों की खिदमत करें। बच्चों को भी छोटी उम्र में रोज़े और नमाज की आदत डालना चाहिए ताकि उनमें दीन की मोहब्बत पैदा हो।

*मौहल्ला स्तर पर पहल की जरूरत*:
उन्होंन सुझाव दिया कि हर मौहल्ले में
एक छोटी कमेटी बनाई जाए जो खामोश तरीक़े से जरूरतमंदों की सूची तैयार करे और इज़्ज़त के साथ उनको मदद पहुंचाए। मदद देते वक्त उनके आत्मसम्मान का भी ख़्याल
जरूरी है। इस तरह की सामूहिक कोशिश से समाज में भाईचार ,भरोसा और एकता मजबूत होती है ।
आख़िर में मौलाना फ़ैज़ान अशरफ़ हामिदी ने दुआ की ,कि अल्लाह तआला इस रमजान शरीफ़ को हम सबके लिए हिदायत, बरकत और मग़फ़िरत का जरिया बनाए। हमें सच्चे दिल से इबादत करने अपने गुनाहों से तौबा करने और अपने आसपास के गरीब, मजलूम और यतीम लोगों की मदद करने की तौफीक आता फरमाए।
आइए, इस रमजान को सिर्फ एक धार्मिक परंपरा न रहने दें,इसे समाज की इस्लाह,इंसानियत की खिदमत और आपसी मोहब्बत का मजबूत आधार बनाऐं  ताके हमारे शहर व मुल्क में अमन, रहमत,और ख़ुशहाली का माहौल कायम हो सके।
बंदूक की नोक पर बार बालाओं को पैसे देने के मामले में आयोजक से पूछताछ शुरू
*लाइसेंसी असलहे के दुरूपयोग का आरोप,कार्रवाई की तैयारी

गोंडा।जिले के मोतीगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत किशुन पुरवा गांव में आयोजित एक तिलक समारोह का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।वायरल वीडियो में बार बालाओं को बंदूक के नोक पर पैसे दिए जाते देखा जा सकता है,जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।बताया जा रहा है कि उक्त कार्यक्रम नकछेद मिश्रा के पुत्र कबीर मिश्रा उर्फ़ यश के तिलकोत्सव का था।आरोप है कि परसपुर थाना क्षेत्र से आए लड़की पक्ष के कुछ लोगों ने समारोह के दौरान हथियारों का प्रदर्शन किया।वायरल वीडियो में एक युवक हाथ में बंदूक लेकर उसके नोक पर दस रुपए का नोट लगाता है और फिर बार बालाओं को देता दिखाई दे रहा है।नोट लेने के बाद बार बालाएं डांस करती नजर आ रही हैं।घटना का वीडियो सामने आने के बाद लाइसेंसी हथियारों के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।आमतौर पर हथियार आत्मरक्षा के लिए जारी किए जाते हैं,लेकिन सार्वजनिक आयोजनों में इस तरह के प्रदर्शन को नियम विरुद्ध माना जा रहा है।वीडियो वायरल होने के बाद मोतीगंज थाने की पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दिया है।पुलिस टीम गांव पहुंचकर कार्यक्रम के आयोजक नकछैद मिश्रा से पूछताछ कर रही है और वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है।मामले में मोतीगंज थानाध्यक्ष अरविंद कुमार यादव ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है।उन्होंने बताया कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्यवाही की जाएगी।पुलिसकर्मियों को मौके पर भेजकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी एकत्र की जा रही है।
गावस्कर, कपिल देव समेत 14 पूर्व कप्तानों ने पाक सरकार को लिखी चिट्ठी, इमरान खान से जुड़ा है मामला

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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की खराब सेहत को लेकर 6 देशों के 14 पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कप्तानों ने पाकिस्तान सरकार को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अपील की है कि 73 साल के इमरान को जेल में उचित इलाज दिया जाए।

इमरान खान के समर्थन में आए पूर्व क्रिकेटर

पूर्व क्रिकेटर और पाकिस्तन के प्रधानमंत्री रह चुके इमरान खान की जेल में सेहत बिगड़ने की खबरों के बीच अब दुनिया भर के क्रिकेटर साथ आए हैं। अब दुनिया भर के पूर्व क्रिकेटरों ने मिलकर एक साथ जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री और 1992 वर्ल्ड कप जीतने वाले कप्तान, इमरान खान के साथ "सही और इंसानी बर्ताव" की मांग कर रहा है।

इन पूर्व क्रिकेटर के साइन

रिपोर्ट के मुताबिक इस इस चिट्ठी पर बेलिंडा क्लार्क, ग्रेग चैपल, माइकल एथरटन, सुनील गावस्कर, कपिल देव, नासिर हुसैन, इयान चैपल, माइकल ब्रियरली, एलन बॉर्डर, डेविड गावर, किम ह्यूजेस, क्लाइव लॉयड, स्टीव वॉ और जॉन राइट ने साइन किए हैं

पूर्व कप्तानों ने चिट्ठी में क्या लिखा?

पूर्व कप्तानों द्वारा पाकिस्तान सरकार को लिखी इस चिट्ठी में लिखा गया है, "इमरान खान की खेल में दिए गए योगदान की पूरी दुनिया में तारीफ होती है। कप्तान के तौर पर उन्होंने 1992 में पाकिस्तान को वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक जीत दिलाई। ये जीत स्किल, स्पोर्ट्समैनशिप, मजबूत लीडरशिप से आई थी, जिसने दुनिया की नई पीढ़ी को इंस्पायर किया। हमनें उनके साथ मैदान शेयर किया, उनसे सीखा। वह क्रिकेट के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर्स में से एक हैं, जिनका सभी सम्मान करते हैं। क्रिकेट के आलावा उन्होंने प्रधानमंत्री बनकर भी पाकिस्तान की सेवा की, और मुश्किल समय में पाकिस्तान को संभाला।"

जेल में इमरान खान की बिगड़ती तबियत को लेकर चिट्ठी में लिखा गया, "उनकी सेहत से जुड़ी रिपोर्ट्स, उनकी आंखों की रौशनी का कम होने की खबर ने, हमें चिंता में डाल दिया है।" चिट्ठी में पूर्व कप्तानों ने लिखा कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और ग्लोबल स्पोर्ट्स आइकॉन के साथ जेल में अच्छे से पेश आना चाहिए।

800 से ज्यादा दिनों से जेल में

बता दें कि इमरान को जेल में 800 दिनों से ज्यादा का समय हो गया है। उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही है, जिससे जेल में उनके साथ हो रहे बर्ताव को लेकर सवाल और चिंताएं होने लगी है। इमरान खान की बहन अलीमा खानम ने जेल में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री के साथ हो रहे बर्ताव और उनकी बिगड़ती सेहत के खिलाफ आवाज उठाई थी।

इमरान की एक आंख की 85% रोशनी खत्म

बताया जा रहा है कि इमरान खान की एक आंख की करीब 85% रोशनी चली गई है। यह खुलासा पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई जांच में हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नियुक्त वकील सलमान सफदर ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि इमरान खान जेल प्रशासन से कई महीनों आंखों में धुंधलापन होने की शिकायत कर रहे थे। अक्टूबर 2025 तक उनकी नजर सामान्य थी, लेकिन बाद में दाईं आंख की रोशनी अचानक चली गई। जांच के दौरान पिम्स अस्पताल के एक आई एक्सपर्ट को बुलाया गया था। डॉक्टरों ने पाया कि उनकी आंख में खून का थक्का जम गया था, जिससे गंभीर नुकसान हुआ। इलाज और इंजेक्शन देने के बाद भी उनकी दाईं आंख में अब सिर्फ लगभग 15% रोशनी बची है। वहीं इमरान का कहना है उन्हें निजी डॉक्टर से इलाज कराने की इजाजत नहीं दी गई है।

रमजान माह को दृष्टिगत समुचित व्यवस्था हेतु कर्मचारियों की छुट्टियां निरस्त।    
                         
                                           
बलरामपुर। पवित्र माह रमजान को ध्यान में रखते हुए आदर्श नगर पालिका परिषद द्वारा विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। अध्यक्ष डॉ.धीरेन्द्र प्रताप सिंह धीरू के निर्देश पर अधिशासी अधिकारी लालचंद मौर्य ने कर्मचारियों की छुट्टियां निरस्त करने का आदेश जारी किया है,ताकि नगर में साफ-सफाई,प्रकाश व्यवस्था एवं जलापूर्ति सुचारु रूप से संचालित हो सके।

अध्यक्ष प्रतिनिधि डीपी सिंह बैस ने बताया कि रमजान माह के दौरान नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो,इसके लिए विशेष कार्ययोजना लागू की गई है। नगर में जलापूर्ति का समय निर्धारित करते हुए बताया गया कि प्रातः 3 बजे से 10 बजे तक ओवरहेड टैंक के माध्यम से जलापूर्ति की जाएगी। इसके अतिरिक्त दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक डायरेक्ट सप्लाई चालू रहेगी। वहीं सायं 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक पुनः ओवरहेड टैंक के माध्यम से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
नगर पालिका प्रशासन ने सभी संबंधित कर्मचारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करें,जिससे रमजान माह में नगरवासियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
तंत्र-मंत्र के नाम पर घर में घुसकर लूट, कार्रवाई के बजाय पुलिस पर लीपापोती का आरोप

साण्डी हरदोई ।  जनपद के हरदोई में तंत्र-विद्या के नाम पर घर में सुनियोजित तरीके से लूट की वारदात सामने आई है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपियों ने पहले बीमारी का बहाना बनाकर तांत्रिक बुलवाया, फिर डर और मौत की धमकी देकर नगदी ऐंठ ली। इतना ही नहीं, शिकायत के बाद भी साण्डी थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बजाय पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की।

थाना साण्डी क्षेत्र के ग्राम लक्षनपुरवा निवासी सिद्धा श्री पत्नी स्व. मिठ्ठू के अनुसार उनकी पुत्रवधू की तबीयत खराब रहती है। 20 जनवरी 2026 को थाना सवायजपुर क्षेत्र के पदिमलापुर निवासी राकेश व हरिनाथ ने उनके पुत्र रामसेवक को फोन कर एक तथाकथित तांत्रिक से इलाज कराने का झांसा दिया। योजना के तहत पहले पदिमलापुर में झाड़-फूंक की गई और फिर कहा गया कि असली बाधा घर पर ही दूर होगी।

इसके बाद आरोपी राकेश, उसका पुत्र संतोष व उसकी सास राजेश्वरी देवी तांत्रिक को लेकर लक्षनपुरवा पहुंच गए। घर के मुख्य द्वार पर गड्ढा खुदवाया गया और सिद्धा श्री को कमरे में अकेले ले जाकर डराया गया कि उनके पास रखा सोने का हार “बाधा” का कारण है। तांत्रिक ने 18 हजार रुपये हवन-पूजन के नाम पर मांगे और धमकी दी कि 25 जनवरी तक रुपये न दिए तो उनके पुत्र और पुत्रवधू की मौत हो जाएगी।

भयभीत परिवार से 17 हजार रुपये तुरंत मंगवाए गए। पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद किसी तरह की क्रिया कर परिवार को असामान्य स्थिति में पहुंचा दिया गया। जब होश आया तो घर में रखे लगभग 50 हजार रुपये नगद गायब थे और आरोपी मौके से फरार हो चुके थे।

पीड़िता ने 21 जनवरी को थाना साण्डी में तहरीर दी, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। बाद में 5 फरवरी को पुलिस अधीक्षक से शिकायत की गई, परंतु थाना स्तर से मामले को “राजस्व प्रकृति” का बताकर निस्तारित करने की कोशिश की गई। पीड़िता का आरोप है कि थाना अध्यक्ष व संबंधित पुलिसकर्मियों ने आरोपियों से मिलीभगत कर झूठी आख्या भेजी और पूरे प्रकरण को दबाने का प्रयास किया। उनके पास कथित बातचीत की रिकॉर्डिंग भी होने का दावा किया गया है।
घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता ने उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी और दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
मसूरी में NH-707A को नुकसान पहुंचाने पर प्रशासन सख्त, भूस्वामियों पर 91 लाख की वसूली
* अनधिकृत खुदाई से धंसा राजमार्ग, 11 लाख जुर्माना और 80 लाख आरसी तय

मसूरी, उत्तराखंड। पर्यटन नगरी मसूरी में राष्ट्रीय राजमार्ग को नुकसान पहुंचाने के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। 12 फरवरी को NH-707A (त्यूनी-चकराता-मसूरी-बाटाघाट) के किमी 162 पर होटल देवलोक के पास सड़क का एक हिस्सा धंस गया था, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि निजी भूमि पर निर्माण कार्य और अनधिकृत खुदाई के कारण राजमार्ग के नीचे की सतह कमजोर हो गई थी। बिना अनुमति ढलान की कटिंग और कथित अवैध खनन के चलते सड़क का हिस्सा धंस गया। इस घटना से मसूरी से कैंपटी, उत्तरकाशी और चारधाम यात्रा मार्ग की आवाजाही प्रभावित रही, जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने संबंधित भूस्वामियों पर 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अतिरिक्त 80 लाख रुपये की वसूली आरसी (रिकवरी चार्ज) के रूप में निर्धारित की गई है। अधिकारियों के अनुसार यह राशि सड़क की मरम्मत, ढलान स्थिरीकरण और सुरक्षा कार्यों पर होने वाले खर्च की भरपाई के लिए वसूल की जाएगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अवैध खनन के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, खनन विभाग और राजस्व विभाग को संयुक्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
सड़क धंसने के बाद ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्ग से डायवर्ट किया गया। विभागीय टीम ने मौके का निरीक्षण कर ढलान की स्थिति का आकलन किया है। फिलहाल अस्थायी सुरक्षा के तहत बैरिकेडिंग और मलबा हटाने का कार्य किया गया है, जबकि स्थायी मरम्मत की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि भविष्य में राजमार्ग या किसी भी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो।