टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया का तीसरे चरण का आंदोलन सम्पन्न, प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन*
सुल्तानपुर,टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वाधान में टीईटी अनिवार्यता के विरोध में चल रहा चरणबद्ध आंदोलन बुधवार को तीसरे चरण में प्रवेश कर गया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार स्थानीय तिकोनिया पार्क में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। आंदोलन का नेतृत्व टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा के निर्देश पर किया गया।
जनपदीय प्रवक्ता निजाम खान ने बताया कि कार्यक्रम की संयुक्त अध्यक्षता उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष दिलीप कुमार पाण्डेय, उच्च प्राथमिक जूनियर शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष देवेन्द्र त्रिपाठी तथा महिला शिक्षक संघ की जिला अध्यक्ष डॉ गायत्री सिंह ने की। धरना-प्रदर्शन के उपरांत शिक्षकों ने जुलूस निकालते हुए जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च किया और जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में प्रमुख मुद्दा टीईटी अनिवार्यता प्रकरण माननीय उच्चतम न्यायालय के दिनांक 01सितम्बर 2025 के निर्णय के द्वारा देश के सभी राज्यों में अधिनियम लागू होने की तिथि से पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को भी सेवा में बने रहने अथवा पदोन्नति हेतु टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है जोकि पूर्व में नियुक्त शिक्षकों के सरासर अन्याय है। टी एफ आई ने देश के प्रधानमंत्री से अनुरोध किया माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश का संज्ञान लेते हुए शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने की तिथि से पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट प्रदान करने हेतु अध्यादेश लाकर संसद द्वारा कानून पारित करा कर शिक्षकों को टीईटी से मुक्त किया जाए।
प्रवक्ता निजाम खान ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के हालिया निर्णय के बाद देशभर के लाखों कार्यरत शिक्षकों के समक्ष सेवा-सुरक्षा एवं भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ अध्यक्ष दिलीप पाण्डेय का कहना है कि संगठनों का तर्क है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय हुई थी जब टीईटी अनिवार्य नहीं था, उन पर पूर्वव्यापी रूप से यह शर्त लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
आंदोलनकारी शिक्षक सगठन जूनियर शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष देवेन्द्र त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि वे शिक्षा की गुणवत्ता के विरोधी नहीं हैं, बल्कि अपने अनुभव, पूर्व सेवा-नियमों और संवैधानिक अधिकारों के सम्मान की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों के स्तर पर इस विषय में स्पष्ट एवं एकरूप नीति का अभाव है, जिससे शिक्षकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। संघ जिला मंत्री डॉ हृषिकेश भानु सिंह ने कहा कि चार चरणों में चल रहे इस आंदोलन का उद्देश्य सरकार का ध्यान आकर्षित कर मानवीय एवं व्यावहारिक समाधान सुनिश्चित कराना है। वरिष्ठ उपाध्यक्ष वीरेन्द्र नारायण मिश्र ने चेतावनी दी कि यदि सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। महिला शिक्षक संघ जिला अध्यक्ष डॉ गायत्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री से ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने मांग की है कि टीईटी अनिवार्यता संबंधी प्रावधानों में आवश्यक संशोधन कर कार्यरत शिक्षकों को राहत प्रदान की जाए। संयुक्त मंत्री प्रशांत पाण्डेय ने कहा शिक्षकों को उनकी सेवा-सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।इस मौके जिला कार्यकारिणी समेत ब्लॉकों के सभी अध्यक्ष मंत्री और हजारों शिक्षक शिक्षिका उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कादीपुर अध्यक्ष अनिल यादव ने किया।
प्राथमिक शिक्षक के ब्लॉक अध्यक्ष राम बहादुर मिश्रा,निजाम खान,विनोद यादव ,डॉ अंबिकेश सिंह ,डॉ विक्रम सिंह,असरार अहमद,मृदुल त्रिपाठी,विजय प्रताप यादव,जय प्रकाश वर्मा,अंजनी कुमार शर्मा,डॉ रीतेश सिंह,मैथिली मिश्र,केदार नाथ दुबे,अखिलेश सिंह ,राज बख्श मौर्य,गोमती मिश्रा,अनीता पाण्डे अर्चना सिंह, मंजू मिश्रा विनय पाण्डेय सिकंदर वर्मा आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन प्रदेश उपाध्यक्ष देवेन्द्र त्रिपाठी,हाजी मुज्तबा,हाजी फैज उल्लाह , लईक अहमद,शिव नारायण वर्मा,मंत्री हेमंत यादव,सुरेश यादव,उत्तर प्रदेशीय जू.हा.स्कूल शिक्षक संघ महामंत्री कलहू पाल,जिला मंत्री संतोष पांडेय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय सिंह,उपाध्यक्ष राजीव मिश्र,उपाध्यक्ष रमेश मिश्र,कोषाध्यक्ष सुरेश चंद्र यादव,राजेश मिश्र,सचिन सिंह,मुनीश पांडेय,विजय कुमार,नवीन पांडेय,दिनेश मिश्रा,तौहीद अहमद,योगेंद्र सिंह,मालती शुक्ला,मंजुलता राय,अल्ताफ अहमद,बृजेश द्विवेदी, अनिल कुमार,इत्यादि।
4 hours ago
भोपाल। तीन अशरो में बंटे माह ए रमजान के पहले 9 दिन पूरे हो गए हैं। इसके साथ ही शनिवार को पहले अशरे की इबादत मुकम्मल हो जाएगी। शहर की विभिन्न मस्जिदों में पढ़ाई जा रही 10 दिन की तरावीह का दौर भी पूरा हो गया है। इधर जरूरी खरीदारी के लिए लोगों ने बाजार का रुख करना शुरू कर दिया है, जिससे बाजारों में भीड़ बढ़ गई है। घरेलू भाषा में इसे जिक्र, फिक्र और घी शकर के तीन भाग कहा जाता था। लेकिन असल में रमजान के तीन अशरे रहमत, बरकत और जहन्नुम से खुलासी के होते हैं। गुरुवार से शुरू हुआ रमजान के पहले अशरे का दौर शनिवार को पूरा हो गया। इसके बाद अब रविवार से दूसरे दौर की इबादत शुरू होंगी।
शहर में इबादतगुजारों की सहूलियत के लिहाज से अलग अलग अवधि की तरावीह पढ़ाई जाती है। मुकम्मल कुरान पढ़ने और सुनने का यह दौर 5 दिन से शुरु होकर 27 दिन की तरावीह तक चलता है। पहले असरे में 5 और 7 दिन अवधि की तरावीह मुकम्मल हो चुकी है। शनिवार शाम को शहर की कई मस्जिदों में 10 दिन की तरावीह पूरी हुई। इस दौरान पुराने शहर की मस्जिद सुल्तान सेठ में भी शनिवार को मुकम्मल तरावीह का आयोजन हुआ। मस्जिद के मुअज्जिन मोहम्मद नईम खान ने बताया कि इस दस दिन की तरावीह में मुहल्ले और शहर के अन्य क्षेत्रों के बाशिंदों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर मस्जिद में रोजा इफ्तार का आयोजन भी किया गया। तरावीह के बाद तबर्रुक भी बांटा गया। बड़ी तादाद में लोगों ने इसमें हिस्सा लिया।
शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने रमजान में निकाली जाने वाली जकात और फितरे की राशि का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा इसकी अदायगी ईद की नमाज के पहले करना जरूरी है। जान का सदका कहे जाने वाले फितरा के बारे में उन्होंने बताया कि इसके लिए हर शख्स को 1 किलो, 630 ग्राम गेहूं किसी ऐसे व्यक्ति को दान करना है, जो इसके योग्य हो। कोई व्यक्ति गेहूं की इस मात्रा की बजाए नगद राशि 70 रूपये प्रति व्यक्ति भी दे सकता है। शहर काजी साहब ने जकात को लेकर बताया कि यह ऐसे व्यक्ति पर लागू है जिसके पास 612 ग्राम चांदी मौजूद है, जिसकी कीमत 1 लाख, 65 हजार रुपए आंकलित की गई है।
रमजान का पहला अशरा पूरा होने के बाद अब लोगों ने ईद की तैयारियां शुरू कर दी हैं। सिलाई के कपड़ों, मैचिंग और तैयार किए जाने वाले खाद्य पदार्थों की खरीदारी इस दौरान की जा रही है। इसके चलते इब्राहिमपूरा, चौक बाजार, नदीम रोड, लखेरापुरा, जुमेराती, मंगलवारा, लक्ष्मी टॉकीज, जहांगीराबाद आदि बाजारों की रौनक बढ़ गई है। यहां बाजार देर रात तक सज रहे हैं।
रमजान का दूसरा जुमा अकीदत के साथ शहर में अदा किया गया। इस दौरान जामा मस्जिद, ताजुल मसाजिद, मोती मस्जिद, प्रेस कॉम्प्लेक्स आदि मस्जिदों में अकीदत के सजदे अदा किए गए।
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