होली के बाद तपेगा यूपी, मार्च के पहले सप्ताह में 35°C तक पहुंचेगा पारा
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में होली के बाद गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि मार्च के पहले सप्ताह में अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में पिछले चार–पांच दिनों से तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पारा 30 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया बुधवार को 15 से अधिक जिलों में पारा 30 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया। लखनऊ में अधिकतम तापमान 30.4°C और न्यूनतम 15.4°C रिकॉर्ड किया गया। गुरुवार को दिन और रात के तापमान में करीब दो डिग्री तक बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। अनुमान है कि शनिवार तक अधिकतम तापमान 32°C और 4 मार्च तक 34-35°C तक पहुंच सकता है। बांदा में भी पारा 31 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा प्रदेश में बुधवार को हमीरपुर सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 32.2°C दर्ज किया गया। वहीं वाराणसी और बांदा में भी पारा 31 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा।मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रशांत महासागर में सक्रिय ला नीना के कमजोर पड़ने का असर उत्तर भारत के मौसम पर दिख रहा है। फरवरी के अंतिम सप्ताह में साफ आसमान और तेज धूप के कारण दिन में तपिश बढ़ेगी और गर्मी का असर तेज बना रहेगा।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. उपाध्याय ने 'बीज वक्ता' के रूप में बढ़ाया बलिया का मान
संजीव सिंह बलिया!बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी और उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 'बुंदेलखंड के साहित्य, समाज और संस्कृति में श्रीराम' में जनपद के लब्धप्रतिष्ठित विद्वान और प्रखर विचारक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर जिले का मान बढ़ाया। डॉ. उपाध्याय को इस वैचारिक महाकुंभ में विशिष्ट अतिथि एवं 'बीज वक्ता' के रूप में आमंत्रित किया गया, जहाँ उन्होंने सनातन संस्कृति और रामकथा के अंतर्संबंधों का अत्यंत गंभीर और तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत किया। इस वैश्विक मंच पर डॉ. उपाध्याय ने रामायण के एक मार्मिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए श्रीराम के 'आतंकवाद विरोधी' स्वरूप की एक नवीन व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जब श्रीराम ने ऋषियों की हड्डियों का विशाल पहाड़ देखा और अपने गुरु से इसका कारण पूछा, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि ये उन महान ऋषियों के अवशेष हैं जिन्हें राक्षसों ने क्रूरतापूर्वक मार डाला था। डॉ. उपाध्याय ने इसके गहरे दार्शनिक अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि उस युग में ज्ञान 'श्रुति परंपरा' अर्थात सुनकर याद रखने पर आधारित था, क्योंकि तब कागज और कलम की खोज नहीं हुई थी। ऐसे में ज्ञान प्रदान करने वाले एक भी ऋषि की हत्या का अर्थ केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की उस संचित ज्ञान परंपरा की हत्या थी जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती थी। असंख्य ऋषियों की हत्या के माध्यम से ज्ञान के इस समूल विनाश को देखकर श्रीराम की करुणा 'महाक्रोध' में परिवर्तित हो गई और उन्होंने उसी क्षण यह दृढ़ प्रण लिया कि लंका विजय तो बाद की बात है, वह पहले अपने घर में बैठे इन आततायी राक्षसों और ज्ञान-विरोधी 'आतंकवादियों' का वध करेंगे। डॉ. उपाध्याय ने रेखांकित किया कि राम का यह संकल्प वास्तव में वैश्विक सभ्यता और ज्ञान-संस्कृति को बचाने का विश्व इतिहास का पहला बड़ा सुरक्षा अभियान था। मुख्य व्याख्यान को आगे बढ़ाते हुए डॉ. उपाध्याय ने प्रतिपादित किया कि बुंदेलखंड की माटी में राम केवल एक आराध्य देव भर नहीं हैं, बल्कि वे यहाँ की संपूर्ण जीवन पद्धति के आधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओरछा के 'रामराजा' सरकार से लेकर गाँवों की चौपालों पर गाई जाने वाली 'फाग' और 'आल्हा' तक, राम बुंदेली समाज के प्रत्येक संस्कार और सांसों में रचे-बसे हैं। बुंदेलखंड के समृद्ध साहित्य ने राम के मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप को लोक-भाषा के माध्यम से जन-जन के हृदय तक पहुँचाने का महती कार्य किया है। उनके अनुसार राम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति का पावन संगम ही वह अटूट सूत्र है, जो इस अंचल के समाज को कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नैतिकता, मर्यादा और धैर्य की शक्ति प्रदान करता है। डॉ. उपाध्याय का यह उद्बोधन न केवल अकादमिक दृष्टि से उत्कृष्ट रहा, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के सम्मुख बुंदेलखंड की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की चेतना को भी मजबूती से रखा। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की भव्यता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें भारत के विभिन्न राज्यों सहित विश्व के दस प्रमुख देशों के दिग्गज विद्वानों ने श्रीराम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति के अंतर्संबंधों पर गहन मंथन किया। परिचर्चा में नार्वे से डॉ. शरद आलोक, बुल्गारिया से डॉ. मौना कौशिक, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. भावना कुँअर, कुवैत से संगीता चौबे 'पंखुड़ी', दुबई से डॉ. आरती लोकेश, नीदरलैंड से डॉ. ऋतु शर्मा नन्नन पाण्डेय, न्यूज़ीलैंड से डॉ. सुनीता शर्मा, नेपाल से डॉ. श्वेता दीप्ति और सूरीनाम से लालाराम लैलावती एवं श्री धीरज कंधई जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। इस वैचारिक समागम में विभिन्न सत्रों के दौरान लगभग 100 शोध पत्रों का वाचन किया गया, जिससे रामकथा के वैश्विक और स्थानीय आयामों पर नई रोशनी पड़ी। आयोजन की गरिमा को बढ़ाते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामायण केंद्र भोपाल के निदेशक प्रो. राजेश श्रीवास्तव एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की संपादक डॉ. अमिता दुबे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने की। इस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता के मुख्य सूत्रधार कला संकाय के अधिष्ठाता एवं संयोजक प्रो. (डॉ.) पुनीत बिसारिया, कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार, वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह एवं परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर रहे, जिनके प्रयासों से यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुई। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को इस वैश्विक मंच पर मुख्य वक्ता के रूप में सम्मानित होते देख जनपद के साहित्यकारों, शिक्षाविदों और शुभचिंतकों में हर्ष की लहर दौड़ गई है। डॉ. गणेश पाठक, डॉ. जनार्दन राय, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. धनंजय पाण्डेय, डॉ. मदन राम, करुणानिधि तिवारी, राधेश्याम यादव, हरेंद्र नाथ मिश्र और लल्लन पाण्डेय आदि ने डॉ. उपाध्याय को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को समूचे क्षेत्र के लिए एक गौरवशाली क्षण बताया है।
माफी काफी नहीं है', एनसीईआरटी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त बरकरार, सीजेआई ने लगाई फटकार

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एनसीईआरटी ने कक्षा 8 की सोशल साइंस के ज्यूडिशियरी से जुड़े चैप्टर पर विवाद बढ़ गया है। किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाले अंश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रूख अपनाया है। विवाद पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में एनसीईआरटी का माफी मांगना पर्याप्त नहीं है।

कोर्ट ने पूछा- इसके पीछे कौन?

सीजेआई की फटकार के बाद एनसीईआरटी ने ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ वाले चैप्टर को हटाने का फैसला किया है। उसने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी गलती मानी है और इसके लिए माफी मांगी है।सीजेआई सूर्यकांत ने फटकार लगाते हुए कहा है कि बस माफी मांगना या चैप्टर हटाना काफी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी से कहा है कि वे बताए इसके पीछे कौन हैं, पूरी बात सामने आने तक सुनवाई जारी रहेगी।

एनसीईआरटी के निदेशक को कारण बताना होगा

सुनवाई के दौरान एनसीईआरटी ने कहा कि वे बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं। किताब से विवादित अंश को भी हटा दिया जाएगा। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि केवल माफी मांगना और किताब से आपत्तिजनक अंशों को हटाना पर्याप्त नहीं है। एनसीईआरटी के निदेशक को कारण बताना होगा। ये सोच-समझकर उठाया गया कदम है। अदालत ने सवाल किया कि इस मामले को अवमानना क्यों न माना जाए? चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ऑनलाइन प्रतियों को भी तत्काल हटाने के निर्देश दिए।

क्या है मामला?

दरअसल, NCERT ने क्लास 8 की सोशल साइंस की नई किताब जारी की। किताब में पहली बार ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन जोड़ा गया। बुक का अपडेटेड एडिशन पहले के एडिशन से अलग है। बुक में एक चैप्टर का नाम है हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका, जिसमें सिस्टम की कमजोरियों और लंबित मामलों के बारे में बताया गया है।

चैप्टर में क्या?

किताब में इस समस्या के बड़े पैमाने को साफ-साफ बताया गया है। इसमें अलग-अलग कोर्ट में लगभग 53,321,000 पेंडिंग केस बताए गए हैं। इनमें सुप्रीम कोर्ट में 81,000, पूरे भारत के हाई कोर्ट में 62.4 लाख (62,40,000) और डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट में लगभग 4.7 करोड़ (4,70,00,000) केस हैं। चैप्टर में लोगों की सोच और चिंताओं का भी जिक्र है। चैप्टर में लिखा है, लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का अनुभव करते हैं। गरीबों और ज़रूरतमंदों के लिए न्याय तक पहुंच आसान नहीं है। भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बी आर गवई का जिक्र करते हुए, बुक में कहा गया है कि करप्शन और गलत काम लोगों के भरोसे को नुकसान पहुंचाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

पुस्तक में जोड़े गए इस हिस्से को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया है। अदालत ने भरोसा दिलाया कि उचित और कानूनी कदम उठाए जाएंगे। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और विश्वसनीयता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

नैनीताल से लौट रहे परिवार की कार बनी आग का गोला, महिला सिपाही और 2 साल के बेटे की जिंदा जलकर मौत
नैनीताल/रामपुर। नैनीताल से घूमकर लौट रहा एक खुशहाल परिवार कुछ ही पलों में मातम में बदल गया। तेज रफ्तार डंपर की टक्कर के बाद कार में भीषण आग लग गई, जिससे महिला सिपाही और उनके दो साल के मासूम बेटे की दर्दनाक मौत हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार, मिलक क्षेत्र के बेहटरा गांव निवासी दान सिंह अपनी पत्नी लता सिंह, दो वर्षीय बेटे लड्डू और बरेली के जमालपुर निवासी चाचा रवि ठाकुर के साथ नैनीताल घूमने गए थे। लता सिंह कौशांबी जिला में महिला सिपाही के पद पर तैनात थीं और इन दिनों छुट्टी पर गांव आई हुई थीं।
बताया जा रहा है कि बुधवार रात परिवार स्विफ्ट कार से वापस लौट रहा था। काशीपुर गांव के पास सामने से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने कार को साइड से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार में तुरंत आग लग गई और वह देखते ही देखते आग का गोला बन गई।
हादसे के बाद अफरा-तफरी मच गई। कार सवार तीन लोग किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन दो साल का मासूम कार के अंदर ही फंस गया। बेटे को बचाने के प्रयास में मां लता सिंह दोबारा जलती कार की ओर दौड़ीं और आग की चपेट में आ गईं। मां-बेटे की मौके पर ही जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि एक अन्य सदस्य गंभीर रूप से झुलस गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग मौके पर पहुंचा और आग पर काबू पाया। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। पुलिस ने डंपर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
“जिस बेटे के लिए जिए… उसी ने ले ली जान”
लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आशियाना इलाके में शराब कारोबारी और पैथोलॉजी संचालक मानवेंद्र सिंह (49) की हत्या के मामले में चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इस हत्याकांड में आरोपी उनका बेटा अक्षत प्रताप सिंह (21) है, जिसकी बेरुखी और वारदात के बाद का व्यवहार हर किसी को हैरान कर रहा है।

हत्या के बाद सामान्य बनने की कोशिश

पुलिस के अनुसार पिता की गोली मारकर हत्या करने के बाद भी अक्षत के चेहरे पर जरा भी पछतावा नहीं था। उसने घर का माहौल सामान्य बनाए रखने की कोशिश की। बाजार से पनीर और मिठाई खरीदकर लाया। चाची को पनीर दिया, खाना बनवाया और परिवार के साथ बैठकर सामान्य ढंग से भोजन किया। यहां तक कि मिठाई भी बांटी, ताकि किसी को शक न हो कि घर के भीतर इतनी खौफनाक वारदात हो चुकी है।

बहन को दी जान से मारने की धमकी

घटना के समय कक्षा 11 की छात्रा कृति भी कमरे में मौजूद थी। पिता की हत्या के बाद अक्षत ने उसे धमकाया कि अगर उसने किसी को बताया तो उसे भी मार देगा। डर के साये में जी रही कृति 20 फरवरी को परीक्षा देने स्कूल भी गई, लेकिन उसने किसी से कुछ साझा नहीं किया। कॉलोनी के लोगों का कहना है कि मानवेंद्र अपनी बेटी से बेहद प्रेम करते थे और बच्चों की खातिर उन्होंने दूसरी शादी नहीं की थी।

शव के टुकड़े कर फेंके अंग

मामले के मुताबिक, 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे नीट परीक्षा की तैयारी को लेकर पिता-पुत्र में विवाद हुआ। गुस्से में आकर अक्षत ने लाइसेंसी राइफल से पिता को गोली मार दी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
इसके बाद आरोपी ने शव को तीसरी मंजिल से घसीटकर नीचे लाया। पहले कार से गोमती नदी में फेंकने की योजना बनाई, लेकिन वजन अधिक होने से असफल रहा। फिर आरी खरीदकर शव के टुकड़े किए। दोनों हाथ और पैर पारा के सदरौना इलाके में फेंक दिए, जबकि सिर सहित धड़ को नीले ड्रम में छिपा दिया। इससे पहले कि वह धड़ को भी ठिकाने लगा पाता, पुलिस को सुराग मिल गया।

गुमशुदगी से खुला राज

21 फरवरी को आशियाना थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज हुई। जांच के दौरान जब पुलिस ने अक्षत से सख्ती से पूछताछ की तो पूरा मामला सामने आ गया। आरोपी के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

अंतिम संस्कार में नहीं मिला अधिकार

मानवेंद्र सिंह का अंतिम संस्कार वीआईपी रोड स्थित बैकुंठ धाम में किया गया। मुखाग्नि उनके भतीजे कृत सिंह ने दी। परिवार में कोहराम मचा रहा। मां बार-बार बेसुध हो रही थीं। पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई।

जेल में अजीब व्यवहार

जिला कारागार भेजे जाने के बाद अक्षत बार-बार कहता रहा, “पापा ने मुझे मारा तो मैंने उन्हें मार दिया… मैं गिर जाऊंगा।” उसकी मानसिक स्थिति को देखते हुए जेल प्रशासन ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया है। डॉक्टरों की निगरानी में इलाज और काउंसिलिंग जारी है।

पुलिस का बयान

डीसीपी मध्य विक्रांत वीर के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिता द्वारा पढ़ाई का दबाव बनाए जाने से आरोपी नाराज था।
आशियाना पुलिस ने बहन कृति से भी पूछताछ की, लेकिन उसकी किसी भी प्रकार की भूमिका सामने नहीं आई है।

यह हत्याकांड न सिर्फ लखनऊ बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है—एक पिता, जिसने बच्चों की खातिर अपना जीवन समर्पित किया, उसी बेटे के हाथों मौत का शिकार हो गया।
बलरामपुर में नवनिर्मित मछली मंडी का शुभारंभ,नगर को स्वच्छ व सुव्यवस्थित बनाने की पहल
               
                                                        
बलरामपुर। आदर्श नगर पालिका परिषद क्षेत्र को  स्वच्छ,सुंदर और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बलरामपुर ब्लॉक के सामने नवनिर्मित मछली मंडी का शुभारंभ किया गया। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ.धीरेन्द्र प्रताप सिंह धीरू ने फीता काटकर मंडी का विधिवत उद्घाटन किया।
इस अवसर पर अध्यक्ष ने कहा कि नगर क्षेत्र में मांस-मछली विक्रेताओं को अब तक अलग-अलग स्थानों पर दुकानें लगानी पड़ती थीं,जिससे गंदगी और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती थी। नगर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने के उद्देश्य से सभी मछली विक्रेताओं के लिए एक ही स्थान पर व्यवस्थित रूप से जगह निर्धारित की गई है,ताकि व्यापार सुचारु रूप से संचालित हो और आम जनता को भी स्वच्छ वातावरण मिल सके।
उन्होंने सभी विक्रेताओं को निर्देशित किया कि वे निर्धारित स्थल पर ही अपने प्रतिष्ठान लगाएं और स्वच्छता के नियमों का पालन करें। नगर पालिका द्वारा मंडी परिसर में साफ-सफाई,जल निकासी और कूड़ा निस्तारण की समुचित व्यवस्था की गई है,जिससे गंदगी न फैले और लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
अध्यक्ष प्रतिनिधि डीपी सिंह बैस ने बताया कि नगर को सुदृढ़ और व्यवस्थित बनाने के लिए नगर पालिका निरंतर प्रयासरत है। भविष्य में भी बाजारों को सुव्यवस्थित करने और नागरिक सुविधाओं में वृद्धि के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राज कुमार श्रीवास्तव,नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी लाल चन्द्र मौर्या,कर निरीक्षक राजेश कुमार,सफाई निरीक्षक दिवाकर पांडेय,अधिवक्ता अनिल सिंह मामा,अध्यक्ष राम प्यारे कश्यप,सहायक निदेशक मत्स्य दीपांशु,वरिष्ठ निरीक्षक मत्स्य रमन चौधरी,सभासद सुभाष पाठक,राघवेंद्र कान्त सिंह मंटू,विनोद गिरी,अक्षय शुक्ल,सुशील साहू,आनंद किशोर,मनोज यादव,मनीष तिवारी,राजेश कुमार कश्यप,संदीप मिश्रा,मनोज साहू,शुभम चौधरी,सिद्धार्थ साहू,राजू कश्यप,राधे श्याम,बेकारू,संतोष कश्यप,पूरन कश्यप, फरीद,आफताब अहमद,चन्दन,धर्मेंद्र सहित अधिकारी,कर्मचारी,स्थानीय जनप्रतिनिधि,व्यापारी एवं नगरवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
मंडी के शुभारंभ से मछली व्यापारियों में उत्साह देखा गया और उन्होंने नगर पालिका की इस पहल की सराहना की।
नवाबगंज में दो पक्षों के बीच मो रंग और पैसे को लेकर विवाद, एक की लाठी लगने से मौत हो गई, आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने बनाई तीन टीम
फर्रुखाबाद। नवाबगंज थाना क्षेत्र में मोरंग और पैसे के लेन-देन को लेकर एक ही परिवार के चाचा भतीजों के बीच जमकर लाठी डंडे चलने से भतीजे की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हुए हैं पुलिस क्षेत्र अधिकारी अजय कुमार ने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गया था और घायलों को जिला अस्पताल लोहिया के लिए एंबुलेंस के जरिए भेजा गया जहां एक व्यक्ति की उपचार के दौरान मौत हो गई है उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच हुए विवाद का मुख्य कारण मोरंग और पैसे का लेनदेन था और आक्रोश में आकर घटना को अंजाम दिया है उन्होंने कहा कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए तीन टीमें बना दी गई है जो जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफल होगी।
आधे-अधूरे सच को 'जीत' बताना झामुमो की हताशा": प्रतुल शाहदेव का हेमंत सोरेन पर पलटवार

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राँची: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उन दावों की हवा निकाल दी, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत को 'ऐतिहासिक' बताया जा रहा था। प्रतुल ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका के निर्णयों को राजनीतिक लाभ के लिए तोड़-मरोड़ कर पेश करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

समन विवाद और 'तकनीकी' राहत:

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि झामुमो जिस राहत का ढिंढोरा पीट रहा है, वह केवल समन की अवहेलना (Non-compliance) से जुड़े तकनीकी पक्ष पर मिली अस्थायी रोक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि "कथित भूमि घोटाला" से संबंधित मुख्य आपराधिक मामला आज भी यथावत है और मुख्यमंत्री की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। उन्होंने झामुमो को सलाह दी कि वे आधे-अधूरे सच को परोस कर जनता को गुमराह न करें।

पश्चिम बंगाल मामले पर स्पष्टीकरण:

जेएमएम द्वारा उठाए गए दूसरे मुद्दे पर पलटवार करते हुए प्रतुल ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में 80 लाख विसंगतियां पाई गई थीं, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा। यह स्थानीय प्रशासन की निष्पक्षता पर कोर्ट का अविश्वास था। इसे राजनीतिक चश्मे से देखना झामुमो की संकीर्ण सोच को दर्शाता है।

निष्कर्ष:

शाहदेव ने अंत में कहा कि भाजपा हमेशा कानून के शासन और न्यायपालिका का सम्मान करती है। उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि वे कानूनी प्रक्रियाओं को 'राजनीतिक ढाल' बनाने के बजाय जांच का सामना करें, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

खड्डा विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर जनसंवाद
* क्षेत्र की आर्थिक तरक्की के लिए जनसेवक पवन दुबे ने रखे ठोस विकास प्रस्ताव

कुशीनगर। जनसेवक पवन दुबे ने खड्डा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित शिक्षा-स्वास्थ्य-रोजगार जनसंवाद कार्यक्रम के तहत क्षेत्र के लोगों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर क्षेत्र की आर्थिक उन्नति और समग्र विकास को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श भी किया गया।
कार्यक्रम में क्षेत्र के विकास के लिए निम्न प्रमुख बिंदुओं पर विचार रखे गए।

* खेतों में गन्ना, केला, धान और गेहूं बोया जा रहा है, वैसे ही घर-घर रोजगार बोने की आवश्यकता है, ताकि हर परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो सके।
* युवाओं के कौशल विकास के लिए तकनीकी संस्थानों की स्थापना जरूरी है।
* किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए स्थायी मंडी की स्थापना की आवश्यकता है।
* कृषि उत्पादों के संरक्षण के लिए कोल्ड स्टोरेज की स्थापना अनिवार्य है।
* क्षेत्रवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए बड़े अस्पताल की स्थापना की आवश्यकता है।
* स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन हेतु बड़े उद्योगों की स्थापना होनी चाहिए।
* युवाओं को पुलिस, रेलवे, आर्मी, बैंक और एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रोफेशनल ‘वन डे कॉम्पिटिशन’ कोचिंग सेंटर की व्यवस्था की जानी चाहिए।
* प्रत्येक पाँच गांवों के मध्य एक लाइब्रेरी की स्थापना की जाए, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन की बेहतर सुविधा मिल सके।
* खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने के लिए विकसित स्टेडियम और मिनी स्टेडियम का निर्माण आवश्यक है।
कार्यक्रम में भारी संख्या में क्षेत्रीय लोगों की उपस्थिति रही और क्षेत्र के विकास के लिए सभी ने एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया।
एआई युग में प्लेटफॉर्म गवर्नेंस की चुनौतियों पर चर्चा के लिए ग्लोबल साउथ विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया एसएफएलसी.इन (SFLC.in)

दिल्ली एनसीआर, फरवरी 2026: एसएफएलसी.इन (SFLC.in) ने मानवाधिकार, प्रौद्योगिकी नीति और इंटरनेट शासन के क्षेत्र में कार्यरत ब्रिटेन की संस्था ग्लोबल पार्टनर्स डिजिटल के साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर एकत्रित किया। विशेषज्ञों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जेनरेटिव एआई की तीव्र वृद्धि से उत्पन्न विनियमन, जवाबदेही और मानवाधिकारों की सुरक्षा से जुड़ी वैश्विक बहस के बदलते स्वरूप पर विचार-विमर्श किया।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के साथ आयोजित इस बैठक में लगभग 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें कानून निर्माता, नीति-निर्माता, नागरिक समाज के नेता, उद्योग प्रतिनिधि, शोधकर्ता तथा प्रौद्योगिकी शासन विशेषज्ञ शामिल थे। वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्लेटफॉर्म शासन से संबंधित नई चुनौतियों पर चर्चा के लिए एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, यूरोप और अन्य क्षेत्रों से एकत्र हुए थे।
प्रारंभिक चर्चाओं में यह सामने आया कि कई प्लेटफ़ॉर्म शासन नियम ग्लोबल साउथ की परिस्थितियों से अलग बनाए गए हैं और वे स्थानीय सामाजिक-राजनीतिक स्थितियों, भाषाई विविधता तथा सीमित संस्थागत क्षमता के अनुरूप पूरी तरह उपयुक्त नहीं हैं। जैसे-जैसे जेनरेटिव और एजेंट-आधारित एआई प्रणालियाँ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का हिस्सा बन रही हैं, नए प्रश्न उभर रहे हैं। इनमें स्वचालित सामग्री संयमन की जिम्मेदारी किसकी होगी, दायित्व का निर्धारण कैसे किया जाएगा, चुनावों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी और उपयोगकर्ताओं की रक्षा कैसे की जाएगी, जैसे प्रश्न शामिल हैं।
ग्लोबल पार्टनर्स डिजिटल की पॉलिसी और एडवोकेसी प्रमुख मारिया पाज़ ने कहा, "नियामक अब भी उन प्लेटफॉर्म के लिए पुराने मध्यस्थ दायित्व नियमों का उपयोग करने का प्रयास कर रहे हैं, जो अब जेनरेटिव एआई का व्यापक रूप से इस्तेमाल करते हैं। ग्लोबल साउथ के अनुभव दर्शाते हैं कि अस्पष्ट मॉडरेशन (संयमन) प्रणालियाँ और स्वचालित निर्णय कमजोर समुदायों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। अलग-अलग और असंगठित राष्ट्रीय नीतियों के बजाय अधिकार-आधारित तथा सहयोगात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।”
राज्यसभा सांसद श्री साकेत गोखले ने एक जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी राय साझा की। उन्होंने मतदाता डेटा, अनुवाद प्रणालियों और चुनावी मानचित्रण में एआई उपकरणों के बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने चेतावनी दी कि पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी के बिना स्वचालित प्रणालियों का उपयोग लोकतंत्र में विश्वास को कमज़ोर कर सकता है। उन्होंने कहा, “हमें एआई विनियमन को उसी गंभीरता से देखने की आवश्यकता है, जैसे हम जलवायु परिवर्तन को देखते हैं।” उन्होंने बड़े वैश्विक चुनावों से पूर्व लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।
बैठक में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के बी-टेक परियोजना की सलाहकार इसाबेल एबर्ट द्वारा व्यवसाय और मानवाधिकार पर एक प्रस्तुति दी गई। संयुक्त राष्ट्र के व्यवसाय और मानवाधिकार संबंधी मार्गदर्शक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने तीन प्रमुख बिंदुओं पर बल दिया—पहला, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना सरकारों की जिम्मेदारी है; दूसरा, मानवाधिकारों का सम्मान करना कंपनियों का दायित्व है; और तीसरा, अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में प्रभावी समाधान उपलब्ध कराना आवश्यक है।
क्षेत्रीय गोलमेज चर्चाओं में विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट शासन चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया। दक्षिण-पूर्व एशिया में काज़िया के एक प्रतिनिधि ने बताया कि इंडोनेशिया में कुछ संगठनों को महिलाओं से संबंधित डीपफेक सामग्री के कारण अस्थायी प्रतिबंध का सामना करना पड़ा। इससे स्पष्ट होता है कि एआई किस प्रकार लैंगिक आधार पर होने वाले नुकसान को बढ़ा सकता है। यद्यपि इंडोनेशिया में ऑनलाइन सामग्री को विनियमित करने के नियम मौजूद हैं, परंतु एआई से उत्पन्न जोखिमों से निपटने के लिए कोई विशिष्ट ढांचा नहीं है, जिससे दोषियों को दंडित करना कठिन हो जाता है।
लैटिन अमेरिका से ब्राज़ील स्थित इंटरनेटलैब में शोध प्रमुख कैमिला अकेमी ने जेनरेटिव एआई उपकरणों की तीव्र वृद्धि और चुनावी निष्पक्षता पर उनके प्रभावों पर चर्चा की। वहीं अफ्रीका से पैराडाइम इनिशिएटिव के सानी सुलेमान ने नीतिगत कमियों, सीमित आधारभूत संरचना, तकनीकी विशेषज्ञता की कमी तथा सरकारों और बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच शक्ति असंतुलन जैसी प्रमुख चुनौतियों को दर्शाया।
एसएफएलसी.इन ने कहा कि जैसे-जैसे जेनरेटिव एआई डिजिटल प्लेटफॉर्म का अभिन्न अंग बनता जा रहा है, शासन प्रणालियों को पारंपरिक इंटरनेट कानूनों से आगे बढ़ना होगा। ग्लोबल साउथ के दृष्टिकोण को शामिल करना और तीव्र गति से विकसित हो रही प्रौद्योगिकी के साथ जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में प्रतिभागियों ने सहमति व्यक्त की कि समावेशी और अधिकार-आधारित एआई शासन प्रणाली के निर्माण हेतु विभिन्न देशों के बीच निरंतर सहयोग और सशक्त वैश्विक साझेदारी की सख्त आवश्यकता है।
एसएफएलसी.इन ने डिजिटल अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, ग्लोबल साउथ के सुझावों को प्रमुखता देने और यह सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि एआई तथा सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी विनियमन मानवता और जवाबदेही पर आधारित रहें।
होली के बाद तपेगा यूपी, मार्च के पहले सप्ताह में 35°C तक पहुंचेगा पारा
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में होली के बाद गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि मार्च के पहले सप्ताह में अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में पिछले चार–पांच दिनों से तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पारा 30 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया बुधवार को 15 से अधिक जिलों में पारा 30 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया। लखनऊ में अधिकतम तापमान 30.4°C और न्यूनतम 15.4°C रिकॉर्ड किया गया। गुरुवार को दिन और रात के तापमान में करीब दो डिग्री तक बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। अनुमान है कि शनिवार तक अधिकतम तापमान 32°C और 4 मार्च तक 34-35°C तक पहुंच सकता है। बांदा में भी पारा 31 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा प्रदेश में बुधवार को हमीरपुर सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 32.2°C दर्ज किया गया। वहीं वाराणसी और बांदा में भी पारा 31 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा।मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रशांत महासागर में सक्रिय ला नीना के कमजोर पड़ने का असर उत्तर भारत के मौसम पर दिख रहा है। फरवरी के अंतिम सप्ताह में साफ आसमान और तेज धूप के कारण दिन में तपिश बढ़ेगी और गर्मी का असर तेज बना रहेगा।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. उपाध्याय ने 'बीज वक्ता' के रूप में बढ़ाया बलिया का मान
संजीव सिंह बलिया!बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी और उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 'बुंदेलखंड के साहित्य, समाज और संस्कृति में श्रीराम' में जनपद के लब्धप्रतिष्ठित विद्वान और प्रखर विचारक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर जिले का मान बढ़ाया। डॉ. उपाध्याय को इस वैचारिक महाकुंभ में विशिष्ट अतिथि एवं 'बीज वक्ता' के रूप में आमंत्रित किया गया, जहाँ उन्होंने सनातन संस्कृति और रामकथा के अंतर्संबंधों का अत्यंत गंभीर और तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत किया। इस वैश्विक मंच पर डॉ. उपाध्याय ने रामायण के एक मार्मिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए श्रीराम के 'आतंकवाद विरोधी' स्वरूप की एक नवीन व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जब श्रीराम ने ऋषियों की हड्डियों का विशाल पहाड़ देखा और अपने गुरु से इसका कारण पूछा, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि ये उन महान ऋषियों के अवशेष हैं जिन्हें राक्षसों ने क्रूरतापूर्वक मार डाला था। डॉ. उपाध्याय ने इसके गहरे दार्शनिक अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि उस युग में ज्ञान 'श्रुति परंपरा' अर्थात सुनकर याद रखने पर आधारित था, क्योंकि तब कागज और कलम की खोज नहीं हुई थी। ऐसे में ज्ञान प्रदान करने वाले एक भी ऋषि की हत्या का अर्थ केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की उस संचित ज्ञान परंपरा की हत्या थी जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती थी। असंख्य ऋषियों की हत्या के माध्यम से ज्ञान के इस समूल विनाश को देखकर श्रीराम की करुणा 'महाक्रोध' में परिवर्तित हो गई और उन्होंने उसी क्षण यह दृढ़ प्रण लिया कि लंका विजय तो बाद की बात है, वह पहले अपने घर में बैठे इन आततायी राक्षसों और ज्ञान-विरोधी 'आतंकवादियों' का वध करेंगे। डॉ. उपाध्याय ने रेखांकित किया कि राम का यह संकल्प वास्तव में वैश्विक सभ्यता और ज्ञान-संस्कृति को बचाने का विश्व इतिहास का पहला बड़ा सुरक्षा अभियान था। मुख्य व्याख्यान को आगे बढ़ाते हुए डॉ. उपाध्याय ने प्रतिपादित किया कि बुंदेलखंड की माटी में राम केवल एक आराध्य देव भर नहीं हैं, बल्कि वे यहाँ की संपूर्ण जीवन पद्धति के आधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओरछा के 'रामराजा' सरकार से लेकर गाँवों की चौपालों पर गाई जाने वाली 'फाग' और 'आल्हा' तक, राम बुंदेली समाज के प्रत्येक संस्कार और सांसों में रचे-बसे हैं। बुंदेलखंड के समृद्ध साहित्य ने राम के मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप को लोक-भाषा के माध्यम से जन-जन के हृदय तक पहुँचाने का महती कार्य किया है। उनके अनुसार राम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति का पावन संगम ही वह अटूट सूत्र है, जो इस अंचल के समाज को कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नैतिकता, मर्यादा और धैर्य की शक्ति प्रदान करता है। डॉ. उपाध्याय का यह उद्बोधन न केवल अकादमिक दृष्टि से उत्कृष्ट रहा, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के सम्मुख बुंदेलखंड की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की चेतना को भी मजबूती से रखा। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की भव्यता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें भारत के विभिन्न राज्यों सहित विश्व के दस प्रमुख देशों के दिग्गज विद्वानों ने श्रीराम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति के अंतर्संबंधों पर गहन मंथन किया। परिचर्चा में नार्वे से डॉ. शरद आलोक, बुल्गारिया से डॉ. मौना कौशिक, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. भावना कुँअर, कुवैत से संगीता चौबे 'पंखुड़ी', दुबई से डॉ. आरती लोकेश, नीदरलैंड से डॉ. ऋतु शर्मा नन्नन पाण्डेय, न्यूज़ीलैंड से डॉ. सुनीता शर्मा, नेपाल से डॉ. श्वेता दीप्ति और सूरीनाम से लालाराम लैलावती एवं श्री धीरज कंधई जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। इस वैचारिक समागम में विभिन्न सत्रों के दौरान लगभग 100 शोध पत्रों का वाचन किया गया, जिससे रामकथा के वैश्विक और स्थानीय आयामों पर नई रोशनी पड़ी। आयोजन की गरिमा को बढ़ाते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामायण केंद्र भोपाल के निदेशक प्रो. राजेश श्रीवास्तव एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की संपादक डॉ. अमिता दुबे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने की। इस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता के मुख्य सूत्रधार कला संकाय के अधिष्ठाता एवं संयोजक प्रो. (डॉ.) पुनीत बिसारिया, कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार, वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह एवं परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर रहे, जिनके प्रयासों से यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुई। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को इस वैश्विक मंच पर मुख्य वक्ता के रूप में सम्मानित होते देख जनपद के साहित्यकारों, शिक्षाविदों और शुभचिंतकों में हर्ष की लहर दौड़ गई है। डॉ. गणेश पाठक, डॉ. जनार्दन राय, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. धनंजय पाण्डेय, डॉ. मदन राम, करुणानिधि तिवारी, राधेश्याम यादव, हरेंद्र नाथ मिश्र और लल्लन पाण्डेय आदि ने डॉ. उपाध्याय को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को समूचे क्षेत्र के लिए एक गौरवशाली क्षण बताया है।
माफी काफी नहीं है', एनसीईआरटी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त बरकरार, सीजेआई ने लगाई फटकार

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एनसीईआरटी ने कक्षा 8 की सोशल साइंस के ज्यूडिशियरी से जुड़े चैप्टर पर विवाद बढ़ गया है। किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाले अंश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रूख अपनाया है। विवाद पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में एनसीईआरटी का माफी मांगना पर्याप्त नहीं है।

कोर्ट ने पूछा- इसके पीछे कौन?

सीजेआई की फटकार के बाद एनसीईआरटी ने ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ वाले चैप्टर को हटाने का फैसला किया है। उसने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी गलती मानी है और इसके लिए माफी मांगी है।सीजेआई सूर्यकांत ने फटकार लगाते हुए कहा है कि बस माफी मांगना या चैप्टर हटाना काफी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी से कहा है कि वे बताए इसके पीछे कौन हैं, पूरी बात सामने आने तक सुनवाई जारी रहेगी।

एनसीईआरटी के निदेशक को कारण बताना होगा

सुनवाई के दौरान एनसीईआरटी ने कहा कि वे बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं। किताब से विवादित अंश को भी हटा दिया जाएगा। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि केवल माफी मांगना और किताब से आपत्तिजनक अंशों को हटाना पर्याप्त नहीं है। एनसीईआरटी के निदेशक को कारण बताना होगा। ये सोच-समझकर उठाया गया कदम है। अदालत ने सवाल किया कि इस मामले को अवमानना क्यों न माना जाए? चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ऑनलाइन प्रतियों को भी तत्काल हटाने के निर्देश दिए।

क्या है मामला?

दरअसल, NCERT ने क्लास 8 की सोशल साइंस की नई किताब जारी की। किताब में पहली बार ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन जोड़ा गया। बुक का अपडेटेड एडिशन पहले के एडिशन से अलग है। बुक में एक चैप्टर का नाम है हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका, जिसमें सिस्टम की कमजोरियों और लंबित मामलों के बारे में बताया गया है।

चैप्टर में क्या?

किताब में इस समस्या के बड़े पैमाने को साफ-साफ बताया गया है। इसमें अलग-अलग कोर्ट में लगभग 53,321,000 पेंडिंग केस बताए गए हैं। इनमें सुप्रीम कोर्ट में 81,000, पूरे भारत के हाई कोर्ट में 62.4 लाख (62,40,000) और डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट में लगभग 4.7 करोड़ (4,70,00,000) केस हैं। चैप्टर में लोगों की सोच और चिंताओं का भी जिक्र है। चैप्टर में लिखा है, लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का अनुभव करते हैं। गरीबों और ज़रूरतमंदों के लिए न्याय तक पहुंच आसान नहीं है। भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बी आर गवई का जिक्र करते हुए, बुक में कहा गया है कि करप्शन और गलत काम लोगों के भरोसे को नुकसान पहुंचाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

पुस्तक में जोड़े गए इस हिस्से को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया है। अदालत ने भरोसा दिलाया कि उचित और कानूनी कदम उठाए जाएंगे। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और विश्वसनीयता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

नैनीताल से लौट रहे परिवार की कार बनी आग का गोला, महिला सिपाही और 2 साल के बेटे की जिंदा जलकर मौत
नैनीताल/रामपुर। नैनीताल से घूमकर लौट रहा एक खुशहाल परिवार कुछ ही पलों में मातम में बदल गया। तेज रफ्तार डंपर की टक्कर के बाद कार में भीषण आग लग गई, जिससे महिला सिपाही और उनके दो साल के मासूम बेटे की दर्दनाक मौत हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार, मिलक क्षेत्र के बेहटरा गांव निवासी दान सिंह अपनी पत्नी लता सिंह, दो वर्षीय बेटे लड्डू और बरेली के जमालपुर निवासी चाचा रवि ठाकुर के साथ नैनीताल घूमने गए थे। लता सिंह कौशांबी जिला में महिला सिपाही के पद पर तैनात थीं और इन दिनों छुट्टी पर गांव आई हुई थीं।
बताया जा रहा है कि बुधवार रात परिवार स्विफ्ट कार से वापस लौट रहा था। काशीपुर गांव के पास सामने से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने कार को साइड से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार में तुरंत आग लग गई और वह देखते ही देखते आग का गोला बन गई।
हादसे के बाद अफरा-तफरी मच गई। कार सवार तीन लोग किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन दो साल का मासूम कार के अंदर ही फंस गया। बेटे को बचाने के प्रयास में मां लता सिंह दोबारा जलती कार की ओर दौड़ीं और आग की चपेट में आ गईं। मां-बेटे की मौके पर ही जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि एक अन्य सदस्य गंभीर रूप से झुलस गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग मौके पर पहुंचा और आग पर काबू पाया। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। पुलिस ने डंपर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
“जिस बेटे के लिए जिए… उसी ने ले ली जान”
लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आशियाना इलाके में शराब कारोबारी और पैथोलॉजी संचालक मानवेंद्र सिंह (49) की हत्या के मामले में चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इस हत्याकांड में आरोपी उनका बेटा अक्षत प्रताप सिंह (21) है, जिसकी बेरुखी और वारदात के बाद का व्यवहार हर किसी को हैरान कर रहा है।

हत्या के बाद सामान्य बनने की कोशिश

पुलिस के अनुसार पिता की गोली मारकर हत्या करने के बाद भी अक्षत के चेहरे पर जरा भी पछतावा नहीं था। उसने घर का माहौल सामान्य बनाए रखने की कोशिश की। बाजार से पनीर और मिठाई खरीदकर लाया। चाची को पनीर दिया, खाना बनवाया और परिवार के साथ बैठकर सामान्य ढंग से भोजन किया। यहां तक कि मिठाई भी बांटी, ताकि किसी को शक न हो कि घर के भीतर इतनी खौफनाक वारदात हो चुकी है।

बहन को दी जान से मारने की धमकी

घटना के समय कक्षा 11 की छात्रा कृति भी कमरे में मौजूद थी। पिता की हत्या के बाद अक्षत ने उसे धमकाया कि अगर उसने किसी को बताया तो उसे भी मार देगा। डर के साये में जी रही कृति 20 फरवरी को परीक्षा देने स्कूल भी गई, लेकिन उसने किसी से कुछ साझा नहीं किया। कॉलोनी के लोगों का कहना है कि मानवेंद्र अपनी बेटी से बेहद प्रेम करते थे और बच्चों की खातिर उन्होंने दूसरी शादी नहीं की थी।

शव के टुकड़े कर फेंके अंग

मामले के मुताबिक, 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे नीट परीक्षा की तैयारी को लेकर पिता-पुत्र में विवाद हुआ। गुस्से में आकर अक्षत ने लाइसेंसी राइफल से पिता को गोली मार दी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
इसके बाद आरोपी ने शव को तीसरी मंजिल से घसीटकर नीचे लाया। पहले कार से गोमती नदी में फेंकने की योजना बनाई, लेकिन वजन अधिक होने से असफल रहा। फिर आरी खरीदकर शव के टुकड़े किए। दोनों हाथ और पैर पारा के सदरौना इलाके में फेंक दिए, जबकि सिर सहित धड़ को नीले ड्रम में छिपा दिया। इससे पहले कि वह धड़ को भी ठिकाने लगा पाता, पुलिस को सुराग मिल गया।

गुमशुदगी से खुला राज

21 फरवरी को आशियाना थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज हुई। जांच के दौरान जब पुलिस ने अक्षत से सख्ती से पूछताछ की तो पूरा मामला सामने आ गया। आरोपी के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

अंतिम संस्कार में नहीं मिला अधिकार

मानवेंद्र सिंह का अंतिम संस्कार वीआईपी रोड स्थित बैकुंठ धाम में किया गया। मुखाग्नि उनके भतीजे कृत सिंह ने दी। परिवार में कोहराम मचा रहा। मां बार-बार बेसुध हो रही थीं। पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई।

जेल में अजीब व्यवहार

जिला कारागार भेजे जाने के बाद अक्षत बार-बार कहता रहा, “पापा ने मुझे मारा तो मैंने उन्हें मार दिया… मैं गिर जाऊंगा।” उसकी मानसिक स्थिति को देखते हुए जेल प्रशासन ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया है। डॉक्टरों की निगरानी में इलाज और काउंसिलिंग जारी है।

पुलिस का बयान

डीसीपी मध्य विक्रांत वीर के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिता द्वारा पढ़ाई का दबाव बनाए जाने से आरोपी नाराज था।
आशियाना पुलिस ने बहन कृति से भी पूछताछ की, लेकिन उसकी किसी भी प्रकार की भूमिका सामने नहीं आई है।

यह हत्याकांड न सिर्फ लखनऊ बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है—एक पिता, जिसने बच्चों की खातिर अपना जीवन समर्पित किया, उसी बेटे के हाथों मौत का शिकार हो गया।
बलरामपुर में नवनिर्मित मछली मंडी का शुभारंभ,नगर को स्वच्छ व सुव्यवस्थित बनाने की पहल
               
                                                        
बलरामपुर। आदर्श नगर पालिका परिषद क्षेत्र को  स्वच्छ,सुंदर और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बलरामपुर ब्लॉक के सामने नवनिर्मित मछली मंडी का शुभारंभ किया गया। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ.धीरेन्द्र प्रताप सिंह धीरू ने फीता काटकर मंडी का विधिवत उद्घाटन किया।
इस अवसर पर अध्यक्ष ने कहा कि नगर क्षेत्र में मांस-मछली विक्रेताओं को अब तक अलग-अलग स्थानों पर दुकानें लगानी पड़ती थीं,जिससे गंदगी और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती थी। नगर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने के उद्देश्य से सभी मछली विक्रेताओं के लिए एक ही स्थान पर व्यवस्थित रूप से जगह निर्धारित की गई है,ताकि व्यापार सुचारु रूप से संचालित हो और आम जनता को भी स्वच्छ वातावरण मिल सके।
उन्होंने सभी विक्रेताओं को निर्देशित किया कि वे निर्धारित स्थल पर ही अपने प्रतिष्ठान लगाएं और स्वच्छता के नियमों का पालन करें। नगर पालिका द्वारा मंडी परिसर में साफ-सफाई,जल निकासी और कूड़ा निस्तारण की समुचित व्यवस्था की गई है,जिससे गंदगी न फैले और लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
अध्यक्ष प्रतिनिधि डीपी सिंह बैस ने बताया कि नगर को सुदृढ़ और व्यवस्थित बनाने के लिए नगर पालिका निरंतर प्रयासरत है। भविष्य में भी बाजारों को सुव्यवस्थित करने और नागरिक सुविधाओं में वृद्धि के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राज कुमार श्रीवास्तव,नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी लाल चन्द्र मौर्या,कर निरीक्षक राजेश कुमार,सफाई निरीक्षक दिवाकर पांडेय,अधिवक्ता अनिल सिंह मामा,अध्यक्ष राम प्यारे कश्यप,सहायक निदेशक मत्स्य दीपांशु,वरिष्ठ निरीक्षक मत्स्य रमन चौधरी,सभासद सुभाष पाठक,राघवेंद्र कान्त सिंह मंटू,विनोद गिरी,अक्षय शुक्ल,सुशील साहू,आनंद किशोर,मनोज यादव,मनीष तिवारी,राजेश कुमार कश्यप,संदीप मिश्रा,मनोज साहू,शुभम चौधरी,सिद्धार्थ साहू,राजू कश्यप,राधे श्याम,बेकारू,संतोष कश्यप,पूरन कश्यप, फरीद,आफताब अहमद,चन्दन,धर्मेंद्र सहित अधिकारी,कर्मचारी,स्थानीय जनप्रतिनिधि,व्यापारी एवं नगरवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
मंडी के शुभारंभ से मछली व्यापारियों में उत्साह देखा गया और उन्होंने नगर पालिका की इस पहल की सराहना की।
नवाबगंज में दो पक्षों के बीच मो रंग और पैसे को लेकर विवाद, एक की लाठी लगने से मौत हो गई, आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने बनाई तीन टीम
फर्रुखाबाद। नवाबगंज थाना क्षेत्र में मोरंग और पैसे के लेन-देन को लेकर एक ही परिवार के चाचा भतीजों के बीच जमकर लाठी डंडे चलने से भतीजे की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हुए हैं पुलिस क्षेत्र अधिकारी अजय कुमार ने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गया था और घायलों को जिला अस्पताल लोहिया के लिए एंबुलेंस के जरिए भेजा गया जहां एक व्यक्ति की उपचार के दौरान मौत हो गई है उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच हुए विवाद का मुख्य कारण मोरंग और पैसे का लेनदेन था और आक्रोश में आकर घटना को अंजाम दिया है उन्होंने कहा कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए तीन टीमें बना दी गई है जो जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफल होगी।
आधे-अधूरे सच को 'जीत' बताना झामुमो की हताशा": प्रतुल शाहदेव का हेमंत सोरेन पर पलटवार

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राँची: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उन दावों की हवा निकाल दी, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत को 'ऐतिहासिक' बताया जा रहा था। प्रतुल ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका के निर्णयों को राजनीतिक लाभ के लिए तोड़-मरोड़ कर पेश करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

समन विवाद और 'तकनीकी' राहत:

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि झामुमो जिस राहत का ढिंढोरा पीट रहा है, वह केवल समन की अवहेलना (Non-compliance) से जुड़े तकनीकी पक्ष पर मिली अस्थायी रोक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि "कथित भूमि घोटाला" से संबंधित मुख्य आपराधिक मामला आज भी यथावत है और मुख्यमंत्री की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। उन्होंने झामुमो को सलाह दी कि वे आधे-अधूरे सच को परोस कर जनता को गुमराह न करें।

पश्चिम बंगाल मामले पर स्पष्टीकरण:

जेएमएम द्वारा उठाए गए दूसरे मुद्दे पर पलटवार करते हुए प्रतुल ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में 80 लाख विसंगतियां पाई गई थीं, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा। यह स्थानीय प्रशासन की निष्पक्षता पर कोर्ट का अविश्वास था। इसे राजनीतिक चश्मे से देखना झामुमो की संकीर्ण सोच को दर्शाता है।

निष्कर्ष:

शाहदेव ने अंत में कहा कि भाजपा हमेशा कानून के शासन और न्यायपालिका का सम्मान करती है। उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि वे कानूनी प्रक्रियाओं को 'राजनीतिक ढाल' बनाने के बजाय जांच का सामना करें, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

खड्डा विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर जनसंवाद
* क्षेत्र की आर्थिक तरक्की के लिए जनसेवक पवन दुबे ने रखे ठोस विकास प्रस्ताव

कुशीनगर। जनसेवक पवन दुबे ने खड्डा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित शिक्षा-स्वास्थ्य-रोजगार जनसंवाद कार्यक्रम के तहत क्षेत्र के लोगों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर क्षेत्र की आर्थिक उन्नति और समग्र विकास को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श भी किया गया।
कार्यक्रम में क्षेत्र के विकास के लिए निम्न प्रमुख बिंदुओं पर विचार रखे गए।

* खेतों में गन्ना, केला, धान और गेहूं बोया जा रहा है, वैसे ही घर-घर रोजगार बोने की आवश्यकता है, ताकि हर परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो सके।
* युवाओं के कौशल विकास के लिए तकनीकी संस्थानों की स्थापना जरूरी है।
* किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए स्थायी मंडी की स्थापना की आवश्यकता है।
* कृषि उत्पादों के संरक्षण के लिए कोल्ड स्टोरेज की स्थापना अनिवार्य है।
* क्षेत्रवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए बड़े अस्पताल की स्थापना की आवश्यकता है।
* स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन हेतु बड़े उद्योगों की स्थापना होनी चाहिए।
* युवाओं को पुलिस, रेलवे, आर्मी, बैंक और एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रोफेशनल ‘वन डे कॉम्पिटिशन’ कोचिंग सेंटर की व्यवस्था की जानी चाहिए।
* प्रत्येक पाँच गांवों के मध्य एक लाइब्रेरी की स्थापना की जाए, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन की बेहतर सुविधा मिल सके।
* खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने के लिए विकसित स्टेडियम और मिनी स्टेडियम का निर्माण आवश्यक है।
कार्यक्रम में भारी संख्या में क्षेत्रीय लोगों की उपस्थिति रही और क्षेत्र के विकास के लिए सभी ने एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया।
एआई युग में प्लेटफॉर्म गवर्नेंस की चुनौतियों पर चर्चा के लिए ग्लोबल साउथ विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया एसएफएलसी.इन (SFLC.in)

दिल्ली एनसीआर, फरवरी 2026: एसएफएलसी.इन (SFLC.in) ने मानवाधिकार, प्रौद्योगिकी नीति और इंटरनेट शासन के क्षेत्र में कार्यरत ब्रिटेन की संस्था ग्लोबल पार्टनर्स डिजिटल के साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर एकत्रित किया। विशेषज्ञों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जेनरेटिव एआई की तीव्र वृद्धि से उत्पन्न विनियमन, जवाबदेही और मानवाधिकारों की सुरक्षा से जुड़ी वैश्विक बहस के बदलते स्वरूप पर विचार-विमर्श किया।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के साथ आयोजित इस बैठक में लगभग 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें कानून निर्माता, नीति-निर्माता, नागरिक समाज के नेता, उद्योग प्रतिनिधि, शोधकर्ता तथा प्रौद्योगिकी शासन विशेषज्ञ शामिल थे। वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्लेटफॉर्म शासन से संबंधित नई चुनौतियों पर चर्चा के लिए एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, यूरोप और अन्य क्षेत्रों से एकत्र हुए थे।
प्रारंभिक चर्चाओं में यह सामने आया कि कई प्लेटफ़ॉर्म शासन नियम ग्लोबल साउथ की परिस्थितियों से अलग बनाए गए हैं और वे स्थानीय सामाजिक-राजनीतिक स्थितियों, भाषाई विविधता तथा सीमित संस्थागत क्षमता के अनुरूप पूरी तरह उपयुक्त नहीं हैं। जैसे-जैसे जेनरेटिव और एजेंट-आधारित एआई प्रणालियाँ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का हिस्सा बन रही हैं, नए प्रश्न उभर रहे हैं। इनमें स्वचालित सामग्री संयमन की जिम्मेदारी किसकी होगी, दायित्व का निर्धारण कैसे किया जाएगा, चुनावों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी और उपयोगकर्ताओं की रक्षा कैसे की जाएगी, जैसे प्रश्न शामिल हैं।
ग्लोबल पार्टनर्स डिजिटल की पॉलिसी और एडवोकेसी प्रमुख मारिया पाज़ ने कहा, "नियामक अब भी उन प्लेटफॉर्म के लिए पुराने मध्यस्थ दायित्व नियमों का उपयोग करने का प्रयास कर रहे हैं, जो अब जेनरेटिव एआई का व्यापक रूप से इस्तेमाल करते हैं। ग्लोबल साउथ के अनुभव दर्शाते हैं कि अस्पष्ट मॉडरेशन (संयमन) प्रणालियाँ और स्वचालित निर्णय कमजोर समुदायों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। अलग-अलग और असंगठित राष्ट्रीय नीतियों के बजाय अधिकार-आधारित तथा सहयोगात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।”
राज्यसभा सांसद श्री साकेत गोखले ने एक जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी राय साझा की। उन्होंने मतदाता डेटा, अनुवाद प्रणालियों और चुनावी मानचित्रण में एआई उपकरणों के बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने चेतावनी दी कि पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी के बिना स्वचालित प्रणालियों का उपयोग लोकतंत्र में विश्वास को कमज़ोर कर सकता है। उन्होंने कहा, “हमें एआई विनियमन को उसी गंभीरता से देखने की आवश्यकता है, जैसे हम जलवायु परिवर्तन को देखते हैं।” उन्होंने बड़े वैश्विक चुनावों से पूर्व लोकतांत्रिक देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।
बैठक में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के बी-टेक परियोजना की सलाहकार इसाबेल एबर्ट द्वारा व्यवसाय और मानवाधिकार पर एक प्रस्तुति दी गई। संयुक्त राष्ट्र के व्यवसाय और मानवाधिकार संबंधी मार्गदर्शक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने तीन प्रमुख बिंदुओं पर बल दिया—पहला, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना सरकारों की जिम्मेदारी है; दूसरा, मानवाधिकारों का सम्मान करना कंपनियों का दायित्व है; और तीसरा, अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में प्रभावी समाधान उपलब्ध कराना आवश्यक है।
क्षेत्रीय गोलमेज चर्चाओं में विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट शासन चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया। दक्षिण-पूर्व एशिया में काज़िया के एक प्रतिनिधि ने बताया कि इंडोनेशिया में कुछ संगठनों को महिलाओं से संबंधित डीपफेक सामग्री के कारण अस्थायी प्रतिबंध का सामना करना पड़ा। इससे स्पष्ट होता है कि एआई किस प्रकार लैंगिक आधार पर होने वाले नुकसान को बढ़ा सकता है। यद्यपि इंडोनेशिया में ऑनलाइन सामग्री को विनियमित करने के नियम मौजूद हैं, परंतु एआई से उत्पन्न जोखिमों से निपटने के लिए कोई विशिष्ट ढांचा नहीं है, जिससे दोषियों को दंडित करना कठिन हो जाता है।
लैटिन अमेरिका से ब्राज़ील स्थित इंटरनेटलैब में शोध प्रमुख कैमिला अकेमी ने जेनरेटिव एआई उपकरणों की तीव्र वृद्धि और चुनावी निष्पक्षता पर उनके प्रभावों पर चर्चा की। वहीं अफ्रीका से पैराडाइम इनिशिएटिव के सानी सुलेमान ने नीतिगत कमियों, सीमित आधारभूत संरचना, तकनीकी विशेषज्ञता की कमी तथा सरकारों और बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच शक्ति असंतुलन जैसी प्रमुख चुनौतियों को दर्शाया।
एसएफएलसी.इन ने कहा कि जैसे-जैसे जेनरेटिव एआई डिजिटल प्लेटफॉर्म का अभिन्न अंग बनता जा रहा है, शासन प्रणालियों को पारंपरिक इंटरनेट कानूनों से आगे बढ़ना होगा। ग्लोबल साउथ के दृष्टिकोण को शामिल करना और तीव्र गति से विकसित हो रही प्रौद्योगिकी के साथ जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में प्रतिभागियों ने सहमति व्यक्त की कि समावेशी और अधिकार-आधारित एआई शासन प्रणाली के निर्माण हेतु विभिन्न देशों के बीच निरंतर सहयोग और सशक्त वैश्विक साझेदारी की सख्त आवश्यकता है।
एसएफएलसी.इन ने डिजिटल अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, ग्लोबल साउथ के सुझावों को प्रमुखता देने और यह सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि एआई तथा सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी विनियमन मानवता और जवाबदेही पर आधारित रहें।