जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित की गई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक

सीएचसी अधीक्षकों को जिलाधिकारी का सख्त निर्देश, शासन की मंशानुसार जनसामान्य को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराएं


जनपद के सभी सीएचसी में एक्सरे मशीन को सही कराकर संचालित कराने के निर्देश-जिलाधिकारी


गोण्डा। 26 फरवरी, 2026
कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी  प्रियंका निरंजन की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की मासिक समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत चलाए जा रहे कार्यक्रमों की समीक्षा की गयी।
बैठक में प्रस्तावित एजेंडा के आधार पर यू0पी0एच0एम0आई0एस0 हेल्थ डैशबोर्ड, मातृ स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, कम्युनिटी प्रोसेस, राष्ट्रीय कार्यक्रम नान कम्युनिकेबल डिजीज, एन0सी0डी0, एन0बी0सी0पी0, आर0एन0टी0सी0पी0, पी0एम0एम0वी0वाई0, नियमित टीकाकरण, वैक्सीनेशन, जननी सुरक्षा व मातृ वंदना योजना के तहत भुगतान की स्थिति, आशा इन्सेन्टिव, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, ओपीडी व आईपीडी की स्थिति, प्राथामिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा सीएचसी पर बेडों की ऑक्यूपेंसी की स्थिति सहित अन्य योजनाओं की जिलाधिकारी द्वारा गहन समीक्षा की गई। वहीं जिला स्वास्थ समिति की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित सभी योजनाओं की समीक्षा की गई।

बैठक में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जनवरी, 2026 का भ्रमण की समीक्षा की गई। एनआरसी में भर्ती बच्चों, आरसीएच पोर्टल फीडिंग के स्टेटस, एनपीसीडीसीएस, राष्ट्रीय कुष्ठ नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय अंधता एवं दृष्टिक्षीणता नियंत्रण कार्यक्रम आदि सभी की समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि समय से कार्य कराना सुनिश्चित करें।

जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जनपद के सभी सीएचसी अधीक्षकों से स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की योजनावार समीक्षा की। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी सीएचसी अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि सभी योजनाओं के कार्य समय से पूर्ण कराया जाय तथा समय-समय पर अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से योजनावार समीक्षा की जाय। ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन समय से किया जा सके।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की मंशानुसार जनसामान्य को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए सभी अधीक्षक अपने अपने सीएचसी एवं पीएचसी पर ही निवास करें तथा संस्थागत प्रसव एवं विभिन्न प्रकार के टीकों को समय से लगवाना सुनिश्चित करें। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई।

आयुष्मान कार्ड के माध्यम से मरीजों को भर्ती करायें, साथ ही इस पर विशेष ध्यान दिया जाय। ई-कवच को पोर्टल को अपडेट करें। प्रसव केंद्र पर प्रसव की संख्या बढ़ाएं। जनपद के सभी सब सेंटरों पर एएनएम की उपस्थिति सुनिश्चित की जाये। ताकि सेंटर पर आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ दिया जा सके।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी सीएचसी अधीक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में स्वयं जाकर टीकाकरण का स्थान चिन्हित करें और अधिक से अधिक बच्चों एवं महिलाओं का टीकाकरण करायें।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिये हैं कि क्षेत्र में जिन एएनएम व आशाओं द्वारा नियमित चेकअप का कार्य नहीं किया जा रहा है उनके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही करें।

बैठक में आरबीएसके का कार्य सही न होने के कारण नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्य में सुधार लाने के निर्देश।

बैठक में एक्सरे मशीन की जानकारी की गई, जिसमें अवगत कराया गया कि कुछ जगहों पर मशीन ही नहीं है, कुछ जगहों पर मशीन है पर एक्सरे टेक्नीशियन नहीं है। जिसके दृष्टिगत जिलाधिकारी ने सीएमओ को कड़े निर्देश दिये हैं कि सभी स्थानों पर मशीन उपलब्ध कराकर सही से संचालित कराया जाय।
आयुष्मान भारत कार्ड की समीक्षा में कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिये हैं कि जितने आईडी है सभी आईडी को संचालित कराकर कार्ड बनाये जाय। साथ ही सभी आईडी की प्रतिदिन रिपोर्ट लीजिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिये हैं कि जनपद के सभी सीएचओ का प्रतिदिन सेन्टर पर समय से उपस्थित रहने की लाइव लोकेशन के आधार पर जानकारी ली जाय।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती अंकिता जैन, सीएमओ डॉक्टर संत लाल पटेल, सीएमएस जिला महिला अस्पताल, जिला अस्पताल, एसीएमओ डॉक्टर आदित्य वर्मा, डॉक्टर सीके वर्मा, डॉक्टर जयगोविंद, डॉक्टर आरपी सिंह, डीपीएम जिला अस्पताल अमरनाथ, जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय उपाध्याय, बेसिक शिक्षा विभाग, सहित सभी संबंधित विभाग के अधिकारीगण व डब्ल्यू0एच0ओ0 यूनिसेफ के पदाअधिकारी, समस्त सी0एच0सी0 अधीक्षक तथा अन्य संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय में भोजन की आदतें और स्वास्थ्य विषयक  व्याख्यान हुआ संपन्न

गोंडा। 26 फरवरी 2026। भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज, गोंडा की इकाई द्वारा “बदलती खाद्य आदतें : आहार से जुड़ा हमारा स्वास्थ्य और चुनौतियां” विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया।इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में गृह विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. इला तिवारी ने कहा कि भोजन हमारे जीवन का आधार है। जैसा हमारा आहार होता है, वैसा ही हमारा स्वास्थ्य और व्यक्तित्व बनता है। यदि हम अपनी खाद्य आदतों में सुधार कर संतुलित आहार अपनाएं, तो अनेक बीमारियों से बच सकते हैं तथा एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने पोषक तत्वों से युक्त आहार, दैनिक जीवन में स्वस्थ रहने के उपाय, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों के महत्व, आर.डी.ए. (Recommended Dietary Allowance), बी.एम.आर. (Basal Metabolic Rate) तथा ग्लाइसेमिक इंडेक्स से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी रेड क्रॉस के स्वयंसेवकों को प्रदान की।

कार्यक्रम के अंत में ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत रेड क्रॉस के स्वयंसेवकों, महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं उपस्थित शिक्षकों को महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. बी.पी. सिंह द्वारा नशा मुक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान देने की शपथ दिलाई गई।

कार्यक्रम का संचालन रेड क्रॉस इकाई की संयोजक डॉ. ममता शुक्ला द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रचना श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत किया गया।कार्यक्रम में प्रो. अमन चंद्रा, प्रो. राजीव अग्रवाल, प्रो. वी.सी.एच.एन.के. श्रीनिवास राव, डॉ. मनीषा पाल, डॉ. योगेंद्र नाथ श्रीवास्तव एवं  सुमित कुमार तिवारी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
मनपा कर्मचारियों के आंदोलन से मिला सकारात्मक समाधान
मुंबई । बृहन्मुंबई महानगरपालिका कर्मचारियों की सबसे बड़ी यूनियन म्युनिसिपल मजदूर यूनियन के प्रतिनिधित्व में गुरुवार 26 फरवरी को सार्वजनिक स्वास्थ्य चिकित्सा विभाग मुख्यालय एफ दक्षिण, परेल कार्यालय पर कर्मचारियों ने एकदिवसीय सामूहिक छुट्टी लेकर आंदोलन किया। प्रशासन विगत दो वर्षों से कर्मचारियों की वरिष्ठता अनुसार पदोन्नति कर रही है सिर्फ आश्वासन देती रही थी, किन्तु सकारात्मक निर्णय नहीं ले रही थी। पदोन्नति के साथ वेतन विसंगति,वेतन ग्रेड,पद श्रृंखला नियमावली देने में आना-कानी करते देख कर्मचारियों में आक्रोश दिखा। म्युनिसिपल मजदूर यूनियन मुंबई ने कर्मचारियों के अधिकार दिलाने बाबत आंदोलन एवं प्रशासन के विरुद्ध हल्लाबोल किया। महानगर पालिका कार्यालय के प्रांगण में सुबह 10 बजे से लगभग 300 से अधिक कर्मचारियों ने उपस्थिति दर्ज कराई। आंदोलन का उग्र रूप देख प्रशासन के सहायक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ वल्ले पवार एवं स्वास्थ्य अधिकारी दक्षा शहा ने दोपहर 2 बजे यूनियन एवं कर्मचारियों के साथ मिटिंग लिया तथा आश्वासन देते हुए कहा कि सभी कर्मचारी हमारे हैं आंदोलन बंद करें। कर्मचारियों की पदोन्नति आगामी 10 दिनों में पदोन्नति कमेटी निर्णय पश्चात शीघ्र दे दी जाएगी। पदोन्नति के साथ साथ ग्रेड पे तथा पद श्रृंखला नियमावली भी लागू कर देंगे। उक्त आंदोलन में यूनियन अध्यक्ष अशोक जाधव, कार्याध्यक्ष यशवंत देशाई,सहायक सरचिटणिस प्रदीप नारकर,उपाध्यक्ष संदीप भरणकर,उपाध्यक्ष संजय बने, संघटक प्रवीण कदम,विट्ठल गावड़े,महेश दलवी सहित तकरार निवारण समिति अध्यक्ष भालचंद्र वाणी,कार्याध्यक्ष सुनील कर्पे,सेक्रेटरी विनयकुमार शर्मा,सचिव रवीन्द्र पवार, उपाध्यक्ष अनिल वायदंडे नायर अस्पताल,संघटक सुधीर कोरडे, शंकर खरात,नायर अस्पताल डेंटल कॉलेज शिकायत निवारण समिति महासचिव बालू शिंदे, युवा अध्यक्ष ललित वाघेला,युवा महासचिव योगेश जाधव,केईएम अस्पताल शिकायत निवारण समिति अध्यक्ष प्रफुल्ल अहिरे, महासचिव वैभव जुवेकर,क्षय रोग अस्पताल शिवडी शिकायत निवारण समिति अध्यक्ष मिलिंद नाइक, कीटनाशक विभाग शिकायत निवारण समिति अध्यक्ष विनोद घुगे, महासचिव नागेश गावड़े, प्रकाश झोरे, अस्पताल सायन शिकायत निवारण समिति महासचिव आतिश वायलेकर, पूर्णकालिक कार्यकर्ता अशोक सावंत, राजाराम पुरालकर, चंद्रकांत कांबले, दत्ताराम काजरोलकर, मनोहर कांबले,विजय मसारंकर, प्रसाद जाधव,परिवार कल्याण मातृ शिशु देखभाल विभाग अखिल शिंगाडे, विनायक भोसले, राहुल तायडे, स्वच्छता निरीक्षक रवीन्द्र जाधव, गणेश गोदिक सहित सर्वेलेंस संघटक, सक्रिय कार्यकर्ता एवं सभासद उपस्थित थे।
दु:ख की घड़ी में साथ: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन पहुँचे जिलिंगोड़ा, चंपई सोरेन के पोते 'वीर सोरेन' को दी श्रद्धांजलि

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सरायकेला-खरसावां (जिलिंगोड़ा): मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन गुरुवार को सरायकेला-खरसावां जिले के जिलिंगोड़ा गाँव पहुँचे। यहाँ उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री श्री चंपई सोरेन के पोते, वीर सोरेन (सुपुत्र श्री बाबूलाल सोरेन) के असामयिक और दुखद निधन पर गहरी शोक-संवेदना व्यक्त की।

मुख्यमंत्री ने दिवंगत वीर सोरेन के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अत्यंत कठिन समय में मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री श्री चंपई सोरेन, श्री बाबूलाल सोरेन एवं उनके परिवार के अन्य सदस्यों से व्यक्तिगत रूप से भेंट की और उन्हें ढाँढस बँधाया।

मुख्यमंत्री ने अपनी शोक-संवेदना में कहा कि एक युवा जीवन का इस प्रकार असमय चले जाना पूरे परिवार और समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने मरांग बुरु (ईश्वर) से प्रार्थना की कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस असहनीय कष्ट को सहने की शक्ति प्रदान करें।

NCERT विवाद पर धर्मेंद्र प्रधान की सफाई, बोले-न्यायपालिका का अपमान करने की मंशा नहीं थी

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एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े आपत्तिजनक बातों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इसे न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश करार दिया और बाजार से किताब को वापस लेने का निर्देश दिया।

एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका से जुड़े कथित विवादित अध्याय पर अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि जो कुछ हुआ उससे उन्हें गहरा दुख है और सरकार या शिक्षा मंत्रालय की ओर से न्यायपालिका का अपमान करने की कोई मंशा नहीं थी।

धर्मेद्र प्रधान ने कहा, 'हम ज्यूडिशियरी का पूरा सम्मान करते हैं। ज्यूडिशियरी ने जो भी कहा है, हम उसका पूरा पालन करेंगे। जो हुआ है, उससे मैं बहुत दुखी हूं, और मैं अफसोस जाहिर करता हूं। जैसे ही यह मामला मेरे ध्यान में आया, मैंने तुरंत NCERT को संबंधित किताबें वापस लेने का निर्देश दिया ताकि वे आगे सर्कुलेट न हों। उन्हें वापस बुलाने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं।'

सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही-प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार न्यायपालिका का सर्वोच्च सम्मान करती है और किसी भी शैक्षणिक सामग्री के जरिए संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ी सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अध्याय तैयार करने में शामिल लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य जागरूकता फैलाना है, संस्थाओं को बदनाम करना नहीं।

सीजेआई की अहम टिप्पणी

इससे पहले गुरूवार सुबह मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचौली की बेंच ने मामले पर सुनवाई की। सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कुछ अहम टिप्पणियां की। सीजेआई ने आदेश में कहा कि व्यवस्था के 3 अंग - विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका लोकतंत्र के सुचारू रूप से काम करने के लिए जरूरी हैं। उन्होंने कहा, 'हमें एक अखबार से NCERT की किताब में लिखे गए अंश का पता चला। इसे जानकर हमें आघात पहुंचा।'

न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश

सीजेआई ने कहा कि ऐसा लगता है कि यह सोच समझकर न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका के बारे में इस तरह की बातें करना और उसके प्रति असम्मान फैलाना निश्चित रूप से आपराधिक अवमानना का मामला हो सकता है। अगर ऐसा जान-बूझकर किया गया है तो।

हम सिर्फ माफी पर जाने नहीं दे सकते-सीजेआई

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह सोचा-समझा योजनाबद्ध कदम है। बच्चों के अलावा शिक्षक और अभिभावक भी इसे पढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि हम अधिकारियों को सिर्फ माफी पर जाने नहीं दे सकते। यह कहना कि इसे हटाया जा रहा है, काफी नहीं। किताब मार्केट में गई। मैंने भी इसकी एक कॉपी देखी है। उन्होंने शिक्षा विभाग को आदेश दिया कि मार्केट और स्कूलों में भेजी गई किताबें वापस ली जाएं और किताब का ऑनलाइन मटीरियल भी हटाया जाए।

मेट्रो पिलर के नीचे मस्जिद, लापरवाह प्रशासन पर गंभीर सवाल
मुंबई मेट्रो के डीएन नगर से मंडाले (मेट्रो 2B) प्रोजेक्ट के अंतर्गत चेंबूर स्थित सिद्धार्थ कॉलोनी क्षेत्र में मेट्रो पिलर के ठीक नीचे मस्जिद होने का मामला सामने आया है। इस घटना से मेट्रो परियोजना के नियोजन, सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
पूर्व में मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने MTHL (मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक) और SCLR (सांताक्रूज़–चेंबूर लिंक रोड) जैसे बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में प्रार्थनास्थलों का सुनियोजित और सफल स्थानांतरण किया है। ऐसे में मेट्रो 2B परियोजना में मेट्रो पिलर के नीचे प्रार्थनास्थल का रह जाना एमएमआरडीए की लापरवाह और असफल योजना का स्पष्ट प्रमाण माना जा रहा है।
मेट्रो 2B प्रोजेक्ट पहले से ही विवादों में रहा है। पूर्व में मार्ग में किए गए बदलावों के कारण कुर्ला पश्चिम के हलाव पुल क्षेत्र में गणेश विसर्जन का मार्ग स्थायी रूप से बंद हो जाने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा, कुछ प्रस्तावित मेट्रो स्टेशनों को हटाए जाने का भी गंभीर आरोप सामने आया है।
RTI कार्यकर्ता अनिल गलगली ने सवाल उठाया है कि बार-बार किए गए बदलावों, विफल नियोजन और इससे उत्पन्न समस्याओं की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र और गहन जांच की मांग की है। अनिल गलगली ने स्पष्ट किया कि यदि सार्वजनिक सुरक्षा, धार्मिक स्थलों के प्रति संवेदनशीलता और परियोजना की विश्वसनीयता का पालन नहीं किया गया, तो ऐसे महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स पर आम जनता का विश्वास गंभीर रूप से कमजोर होगा।
महोबा में भीषण हादसा: शादी से लौट रहीं चार महिलाओं को लोडर ने रौंदा, तीन की मौत
लखनऊ /महोबा। शादी समारोह से खाना बनाकर घर लौट रहीं चार महिलाओं को तेज रफ्तार लोडर ने कुचल दिया। हादसा गुरुवार तड़के करीब तीन बजे महोबा-छतरपुर रोड पर मां बड़ी चंद्रिका देवी मंदिर के पास हुआ। दुर्घटना में तीन महिलाओं की मौत हो गई, जबकि एक की हालत गंभीर बनी हुई है।
जानकारी के मुताबिक, सदर कोतवाली क्षेत्र के भटीपुरा मोहल्ला निवासी 45 वर्षीय श्यामरानी, 65 वर्षीय तुलसा, 35 वर्षीय गीता और 50 वर्षीय भगवती बुधवार रात महोबा-छतरपुर रोड किनारे स्थित मीना पैलेस में शादी समारोह में खाना बनाने गई थीं। तड़के चारों महिलाएं पैदल अपने घर लौट रही थीं, तभी तेज रफ्तार लोडर ने उन्हें टक्कर मार दी।
राहगीरों और पुलिस की मदद से सभी घायलों को जिला अस्पताल महोबा लाया गया, जहां सिर में गंभीर चोट के कारण श्यामरानी को मृत घोषित कर दिया गया। गीता ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। गंभीर हालत में भगवती और तुलसा को झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन झांसी ले जाते समय रास्ते में भगवती की भी मौत हो गई। तुलसा का उपचार जारी है।
हादसे के बाद चालक वाहन समेत फरार हो गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी चालक की तलाश शुरू कर दी है। घटना के बाद मृतकों के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
होली के बाद तपेगा यूपी, मार्च के पहले सप्ताह में 35°C तक पहुंचेगा पारा
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में होली के बाद गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि मार्च के पहले सप्ताह में अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में पिछले चार–पांच दिनों से तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पारा 30 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया बुधवार को 15 से अधिक जिलों में पारा 30 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया। लखनऊ में अधिकतम तापमान 30.4°C और न्यूनतम 15.4°C रिकॉर्ड किया गया। गुरुवार को दिन और रात के तापमान में करीब दो डिग्री तक बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। अनुमान है कि शनिवार तक अधिकतम तापमान 32°C और 4 मार्च तक 34-35°C तक पहुंच सकता है। बांदा में भी पारा 31 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा प्रदेश में बुधवार को हमीरपुर सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 32.2°C दर्ज किया गया। वहीं वाराणसी और बांदा में भी पारा 31 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा।मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रशांत महासागर में सक्रिय ला नीना के कमजोर पड़ने का असर उत्तर भारत के मौसम पर दिख रहा है। फरवरी के अंतिम सप्ताह में साफ आसमान और तेज धूप के कारण दिन में तपिश बढ़ेगी और गर्मी का असर तेज बना रहेगा।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. उपाध्याय ने 'बीज वक्ता' के रूप में बढ़ाया बलिया का मान
संजीव सिंह बलिया!बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी और उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 'बुंदेलखंड के साहित्य, समाज और संस्कृति में श्रीराम' में जनपद के लब्धप्रतिष्ठित विद्वान और प्रखर विचारक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर जिले का मान बढ़ाया। डॉ. उपाध्याय को इस वैचारिक महाकुंभ में विशिष्ट अतिथि एवं 'बीज वक्ता' के रूप में आमंत्रित किया गया, जहाँ उन्होंने सनातन संस्कृति और रामकथा के अंतर्संबंधों का अत्यंत गंभीर और तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत किया। इस वैश्विक मंच पर डॉ. उपाध्याय ने रामायण के एक मार्मिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए श्रीराम के 'आतंकवाद विरोधी' स्वरूप की एक नवीन व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जब श्रीराम ने ऋषियों की हड्डियों का विशाल पहाड़ देखा और अपने गुरु से इसका कारण पूछा, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि ये उन महान ऋषियों के अवशेष हैं जिन्हें राक्षसों ने क्रूरतापूर्वक मार डाला था। डॉ. उपाध्याय ने इसके गहरे दार्शनिक अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि उस युग में ज्ञान 'श्रुति परंपरा' अर्थात सुनकर याद रखने पर आधारित था, क्योंकि तब कागज और कलम की खोज नहीं हुई थी। ऐसे में ज्ञान प्रदान करने वाले एक भी ऋषि की हत्या का अर्थ केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की उस संचित ज्ञान परंपरा की हत्या थी जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती थी। असंख्य ऋषियों की हत्या के माध्यम से ज्ञान के इस समूल विनाश को देखकर श्रीराम की करुणा 'महाक्रोध' में परिवर्तित हो गई और उन्होंने उसी क्षण यह दृढ़ प्रण लिया कि लंका विजय तो बाद की बात है, वह पहले अपने घर में बैठे इन आततायी राक्षसों और ज्ञान-विरोधी 'आतंकवादियों' का वध करेंगे। डॉ. उपाध्याय ने रेखांकित किया कि राम का यह संकल्प वास्तव में वैश्विक सभ्यता और ज्ञान-संस्कृति को बचाने का विश्व इतिहास का पहला बड़ा सुरक्षा अभियान था। मुख्य व्याख्यान को आगे बढ़ाते हुए डॉ. उपाध्याय ने प्रतिपादित किया कि बुंदेलखंड की माटी में राम केवल एक आराध्य देव भर नहीं हैं, बल्कि वे यहाँ की संपूर्ण जीवन पद्धति के आधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओरछा के 'रामराजा' सरकार से लेकर गाँवों की चौपालों पर गाई जाने वाली 'फाग' और 'आल्हा' तक, राम बुंदेली समाज के प्रत्येक संस्कार और सांसों में रचे-बसे हैं। बुंदेलखंड के समृद्ध साहित्य ने राम के मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप को लोक-भाषा के माध्यम से जन-जन के हृदय तक पहुँचाने का महती कार्य किया है। उनके अनुसार राम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति का पावन संगम ही वह अटूट सूत्र है, जो इस अंचल के समाज को कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नैतिकता, मर्यादा और धैर्य की शक्ति प्रदान करता है। डॉ. उपाध्याय का यह उद्बोधन न केवल अकादमिक दृष्टि से उत्कृष्ट रहा, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के सम्मुख बुंदेलखंड की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की चेतना को भी मजबूती से रखा। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की भव्यता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें भारत के विभिन्न राज्यों सहित विश्व के दस प्रमुख देशों के दिग्गज विद्वानों ने श्रीराम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति के अंतर्संबंधों पर गहन मंथन किया। परिचर्चा में नार्वे से डॉ. शरद आलोक, बुल्गारिया से डॉ. मौना कौशिक, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. भावना कुँअर, कुवैत से संगीता चौबे 'पंखुड़ी', दुबई से डॉ. आरती लोकेश, नीदरलैंड से डॉ. ऋतु शर्मा नन्नन पाण्डेय, न्यूज़ीलैंड से डॉ. सुनीता शर्मा, नेपाल से डॉ. श्वेता दीप्ति और सूरीनाम से लालाराम लैलावती एवं श्री धीरज कंधई जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। इस वैचारिक समागम में विभिन्न सत्रों के दौरान लगभग 100 शोध पत्रों का वाचन किया गया, जिससे रामकथा के वैश्विक और स्थानीय आयामों पर नई रोशनी पड़ी। आयोजन की गरिमा को बढ़ाते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामायण केंद्र भोपाल के निदेशक प्रो. राजेश श्रीवास्तव एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की संपादक डॉ. अमिता दुबे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने की। इस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता के मुख्य सूत्रधार कला संकाय के अधिष्ठाता एवं संयोजक प्रो. (डॉ.) पुनीत बिसारिया, कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार, वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह एवं परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर रहे, जिनके प्रयासों से यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुई। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को इस वैश्विक मंच पर मुख्य वक्ता के रूप में सम्मानित होते देख जनपद के साहित्यकारों, शिक्षाविदों और शुभचिंतकों में हर्ष की लहर दौड़ गई है। डॉ. गणेश पाठक, डॉ. जनार्दन राय, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. धनंजय पाण्डेय, डॉ. मदन राम, करुणानिधि तिवारी, राधेश्याम यादव, हरेंद्र नाथ मिश्र और लल्लन पाण्डेय आदि ने डॉ. उपाध्याय को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को समूचे क्षेत्र के लिए एक गौरवशाली क्षण बताया है।
माफी काफी नहीं है', एनसीईआरटी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त बरकरार, सीजेआई ने लगाई फटकार

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एनसीईआरटी ने कक्षा 8 की सोशल साइंस के ज्यूडिशियरी से जुड़े चैप्टर पर विवाद बढ़ गया है। किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाले अंश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रूख अपनाया है। विवाद पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में एनसीईआरटी का माफी मांगना पर्याप्त नहीं है।

कोर्ट ने पूछा- इसके पीछे कौन?

सीजेआई की फटकार के बाद एनसीईआरटी ने ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ वाले चैप्टर को हटाने का फैसला किया है। उसने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी गलती मानी है और इसके लिए माफी मांगी है।सीजेआई सूर्यकांत ने फटकार लगाते हुए कहा है कि बस माफी मांगना या चैप्टर हटाना काफी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी से कहा है कि वे बताए इसके पीछे कौन हैं, पूरी बात सामने आने तक सुनवाई जारी रहेगी।

एनसीईआरटी के निदेशक को कारण बताना होगा

सुनवाई के दौरान एनसीईआरटी ने कहा कि वे बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं। किताब से विवादित अंश को भी हटा दिया जाएगा। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि केवल माफी मांगना और किताब से आपत्तिजनक अंशों को हटाना पर्याप्त नहीं है। एनसीईआरटी के निदेशक को कारण बताना होगा। ये सोच-समझकर उठाया गया कदम है। अदालत ने सवाल किया कि इस मामले को अवमानना क्यों न माना जाए? चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ऑनलाइन प्रतियों को भी तत्काल हटाने के निर्देश दिए।

क्या है मामला?

दरअसल, NCERT ने क्लास 8 की सोशल साइंस की नई किताब जारी की। किताब में पहली बार ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन जोड़ा गया। बुक का अपडेटेड एडिशन पहले के एडिशन से अलग है। बुक में एक चैप्टर का नाम है हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका, जिसमें सिस्टम की कमजोरियों और लंबित मामलों के बारे में बताया गया है।

चैप्टर में क्या?

किताब में इस समस्या के बड़े पैमाने को साफ-साफ बताया गया है। इसमें अलग-अलग कोर्ट में लगभग 53,321,000 पेंडिंग केस बताए गए हैं। इनमें सुप्रीम कोर्ट में 81,000, पूरे भारत के हाई कोर्ट में 62.4 लाख (62,40,000) और डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट में लगभग 4.7 करोड़ (4,70,00,000) केस हैं। चैप्टर में लोगों की सोच और चिंताओं का भी जिक्र है। चैप्टर में लिखा है, लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का अनुभव करते हैं। गरीबों और ज़रूरतमंदों के लिए न्याय तक पहुंच आसान नहीं है। भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बी आर गवई का जिक्र करते हुए, बुक में कहा गया है कि करप्शन और गलत काम लोगों के भरोसे को नुकसान पहुंचाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

पुस्तक में जोड़े गए इस हिस्से को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया है। अदालत ने भरोसा दिलाया कि उचित और कानूनी कदम उठाए जाएंगे। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और विश्वसनीयता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित की गई जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक

सीएचसी अधीक्षकों को जिलाधिकारी का सख्त निर्देश, शासन की मंशानुसार जनसामान्य को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराएं


जनपद के सभी सीएचसी में एक्सरे मशीन को सही कराकर संचालित कराने के निर्देश-जिलाधिकारी


गोण्डा। 26 फरवरी, 2026
कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी  प्रियंका निरंजन की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की मासिक समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत चलाए जा रहे कार्यक्रमों की समीक्षा की गयी।
बैठक में प्रस्तावित एजेंडा के आधार पर यू0पी0एच0एम0आई0एस0 हेल्थ डैशबोर्ड, मातृ स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, कम्युनिटी प्रोसेस, राष्ट्रीय कार्यक्रम नान कम्युनिकेबल डिजीज, एन0सी0डी0, एन0बी0सी0पी0, आर0एन0टी0सी0पी0, पी0एम0एम0वी0वाई0, नियमित टीकाकरण, वैक्सीनेशन, जननी सुरक्षा व मातृ वंदना योजना के तहत भुगतान की स्थिति, आशा इन्सेन्टिव, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, ओपीडी व आईपीडी की स्थिति, प्राथामिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा सीएचसी पर बेडों की ऑक्यूपेंसी की स्थिति सहित अन्य योजनाओं की जिलाधिकारी द्वारा गहन समीक्षा की गई। वहीं जिला स्वास्थ समिति की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित सभी योजनाओं की समीक्षा की गई।

बैठक में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जनवरी, 2026 का भ्रमण की समीक्षा की गई। एनआरसी में भर्ती बच्चों, आरसीएच पोर्टल फीडिंग के स्टेटस, एनपीसीडीसीएस, राष्ट्रीय कुष्ठ नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय अंधता एवं दृष्टिक्षीणता नियंत्रण कार्यक्रम आदि सभी की समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि समय से कार्य कराना सुनिश्चित करें।

जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जनपद के सभी सीएचसी अधीक्षकों से स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की योजनावार समीक्षा की। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी सीएचसी अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि सभी योजनाओं के कार्य समय से पूर्ण कराया जाय तथा समय-समय पर अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से योजनावार समीक्षा की जाय। ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन समय से किया जा सके।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की मंशानुसार जनसामान्य को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए सभी अधीक्षक अपने अपने सीएचसी एवं पीएचसी पर ही निवास करें तथा संस्थागत प्रसव एवं विभिन्न प्रकार के टीकों को समय से लगवाना सुनिश्चित करें। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई।

आयुष्मान कार्ड के माध्यम से मरीजों को भर्ती करायें, साथ ही इस पर विशेष ध्यान दिया जाय। ई-कवच को पोर्टल को अपडेट करें। प्रसव केंद्र पर प्रसव की संख्या बढ़ाएं। जनपद के सभी सब सेंटरों पर एएनएम की उपस्थिति सुनिश्चित की जाये। ताकि सेंटर पर आने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ दिया जा सके।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी सीएचसी अधीक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में स्वयं जाकर टीकाकरण का स्थान चिन्हित करें और अधिक से अधिक बच्चों एवं महिलाओं का टीकाकरण करायें।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिये हैं कि क्षेत्र में जिन एएनएम व आशाओं द्वारा नियमित चेकअप का कार्य नहीं किया जा रहा है उनके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही करें।

बैठक में आरबीएसके का कार्य सही न होने के कारण नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्य में सुधार लाने के निर्देश।

बैठक में एक्सरे मशीन की जानकारी की गई, जिसमें अवगत कराया गया कि कुछ जगहों पर मशीन ही नहीं है, कुछ जगहों पर मशीन है पर एक्सरे टेक्नीशियन नहीं है। जिसके दृष्टिगत जिलाधिकारी ने सीएमओ को कड़े निर्देश दिये हैं कि सभी स्थानों पर मशीन उपलब्ध कराकर सही से संचालित कराया जाय।
आयुष्मान भारत कार्ड की समीक्षा में कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिये हैं कि जितने आईडी है सभी आईडी को संचालित कराकर कार्ड बनाये जाय। साथ ही सभी आईडी की प्रतिदिन रिपोर्ट लीजिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिये हैं कि जनपद के सभी सीएचओ का प्रतिदिन सेन्टर पर समय से उपस्थित रहने की लाइव लोकेशन के आधार पर जानकारी ली जाय।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती अंकिता जैन, सीएमओ डॉक्टर संत लाल पटेल, सीएमएस जिला महिला अस्पताल, जिला अस्पताल, एसीएमओ डॉक्टर आदित्य वर्मा, डॉक्टर सीके वर्मा, डॉक्टर जयगोविंद, डॉक्टर आरपी सिंह, डीपीएम जिला अस्पताल अमरनाथ, जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय उपाध्याय, बेसिक शिक्षा विभाग, सहित सभी संबंधित विभाग के अधिकारीगण व डब्ल्यू0एच0ओ0 यूनिसेफ के पदाअधिकारी, समस्त सी0एच0सी0 अधीक्षक तथा अन्य संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय में भोजन की आदतें और स्वास्थ्य विषयक  व्याख्यान हुआ संपन्न

गोंडा। 26 फरवरी 2026। भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, श्री लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज, गोंडा की इकाई द्वारा “बदलती खाद्य आदतें : आहार से जुड़ा हमारा स्वास्थ्य और चुनौतियां” विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया।इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में गृह विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. इला तिवारी ने कहा कि भोजन हमारे जीवन का आधार है। जैसा हमारा आहार होता है, वैसा ही हमारा स्वास्थ्य और व्यक्तित्व बनता है। यदि हम अपनी खाद्य आदतों में सुधार कर संतुलित आहार अपनाएं, तो अनेक बीमारियों से बच सकते हैं तथा एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने पोषक तत्वों से युक्त आहार, दैनिक जीवन में स्वस्थ रहने के उपाय, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों के महत्व, आर.डी.ए. (Recommended Dietary Allowance), बी.एम.आर. (Basal Metabolic Rate) तथा ग्लाइसेमिक इंडेक्स से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी रेड क्रॉस के स्वयंसेवकों को प्रदान की।

कार्यक्रम के अंत में ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत रेड क्रॉस के स्वयंसेवकों, महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं उपस्थित शिक्षकों को महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. बी.पी. सिंह द्वारा नशा मुक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान देने की शपथ दिलाई गई।

कार्यक्रम का संचालन रेड क्रॉस इकाई की संयोजक डॉ. ममता शुक्ला द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रचना श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत किया गया।कार्यक्रम में प्रो. अमन चंद्रा, प्रो. राजीव अग्रवाल, प्रो. वी.सी.एच.एन.के. श्रीनिवास राव, डॉ. मनीषा पाल, डॉ. योगेंद्र नाथ श्रीवास्तव एवं  सुमित कुमार तिवारी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
मनपा कर्मचारियों के आंदोलन से मिला सकारात्मक समाधान
मुंबई । बृहन्मुंबई महानगरपालिका कर्मचारियों की सबसे बड़ी यूनियन म्युनिसिपल मजदूर यूनियन के प्रतिनिधित्व में गुरुवार 26 फरवरी को सार्वजनिक स्वास्थ्य चिकित्सा विभाग मुख्यालय एफ दक्षिण, परेल कार्यालय पर कर्मचारियों ने एकदिवसीय सामूहिक छुट्टी लेकर आंदोलन किया। प्रशासन विगत दो वर्षों से कर्मचारियों की वरिष्ठता अनुसार पदोन्नति कर रही है सिर्फ आश्वासन देती रही थी, किन्तु सकारात्मक निर्णय नहीं ले रही थी। पदोन्नति के साथ वेतन विसंगति,वेतन ग्रेड,पद श्रृंखला नियमावली देने में आना-कानी करते देख कर्मचारियों में आक्रोश दिखा। म्युनिसिपल मजदूर यूनियन मुंबई ने कर्मचारियों के अधिकार दिलाने बाबत आंदोलन एवं प्रशासन के विरुद्ध हल्लाबोल किया। महानगर पालिका कार्यालय के प्रांगण में सुबह 10 बजे से लगभग 300 से अधिक कर्मचारियों ने उपस्थिति दर्ज कराई। आंदोलन का उग्र रूप देख प्रशासन के सहायक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ वल्ले पवार एवं स्वास्थ्य अधिकारी दक्षा शहा ने दोपहर 2 बजे यूनियन एवं कर्मचारियों के साथ मिटिंग लिया तथा आश्वासन देते हुए कहा कि सभी कर्मचारी हमारे हैं आंदोलन बंद करें। कर्मचारियों की पदोन्नति आगामी 10 दिनों में पदोन्नति कमेटी निर्णय पश्चात शीघ्र दे दी जाएगी। पदोन्नति के साथ साथ ग्रेड पे तथा पद श्रृंखला नियमावली भी लागू कर देंगे। उक्त आंदोलन में यूनियन अध्यक्ष अशोक जाधव, कार्याध्यक्ष यशवंत देशाई,सहायक सरचिटणिस प्रदीप नारकर,उपाध्यक्ष संदीप भरणकर,उपाध्यक्ष संजय बने, संघटक प्रवीण कदम,विट्ठल गावड़े,महेश दलवी सहित तकरार निवारण समिति अध्यक्ष भालचंद्र वाणी,कार्याध्यक्ष सुनील कर्पे,सेक्रेटरी विनयकुमार शर्मा,सचिव रवीन्द्र पवार, उपाध्यक्ष अनिल वायदंडे नायर अस्पताल,संघटक सुधीर कोरडे, शंकर खरात,नायर अस्पताल डेंटल कॉलेज शिकायत निवारण समिति महासचिव बालू शिंदे, युवा अध्यक्ष ललित वाघेला,युवा महासचिव योगेश जाधव,केईएम अस्पताल शिकायत निवारण समिति अध्यक्ष प्रफुल्ल अहिरे, महासचिव वैभव जुवेकर,क्षय रोग अस्पताल शिवडी शिकायत निवारण समिति अध्यक्ष मिलिंद नाइक, कीटनाशक विभाग शिकायत निवारण समिति अध्यक्ष विनोद घुगे, महासचिव नागेश गावड़े, प्रकाश झोरे, अस्पताल सायन शिकायत निवारण समिति महासचिव आतिश वायलेकर, पूर्णकालिक कार्यकर्ता अशोक सावंत, राजाराम पुरालकर, चंद्रकांत कांबले, दत्ताराम काजरोलकर, मनोहर कांबले,विजय मसारंकर, प्रसाद जाधव,परिवार कल्याण मातृ शिशु देखभाल विभाग अखिल शिंगाडे, विनायक भोसले, राहुल तायडे, स्वच्छता निरीक्षक रवीन्द्र जाधव, गणेश गोदिक सहित सर्वेलेंस संघटक, सक्रिय कार्यकर्ता एवं सभासद उपस्थित थे।
दु:ख की घड़ी में साथ: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन पहुँचे जिलिंगोड़ा, चंपई सोरेन के पोते 'वीर सोरेन' को दी श्रद्धांजलि

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सरायकेला-खरसावां (जिलिंगोड़ा): मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन गुरुवार को सरायकेला-खरसावां जिले के जिलिंगोड़ा गाँव पहुँचे। यहाँ उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री श्री चंपई सोरेन के पोते, वीर सोरेन (सुपुत्र श्री बाबूलाल सोरेन) के असामयिक और दुखद निधन पर गहरी शोक-संवेदना व्यक्त की।

मुख्यमंत्री ने दिवंगत वीर सोरेन के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अत्यंत कठिन समय में मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री श्री चंपई सोरेन, श्री बाबूलाल सोरेन एवं उनके परिवार के अन्य सदस्यों से व्यक्तिगत रूप से भेंट की और उन्हें ढाँढस बँधाया।

मुख्यमंत्री ने अपनी शोक-संवेदना में कहा कि एक युवा जीवन का इस प्रकार असमय चले जाना पूरे परिवार और समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने मरांग बुरु (ईश्वर) से प्रार्थना की कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस असहनीय कष्ट को सहने की शक्ति प्रदान करें।

NCERT विवाद पर धर्मेंद्र प्रधान की सफाई, बोले-न्यायपालिका का अपमान करने की मंशा नहीं थी

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एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े आपत्तिजनक बातों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इसे न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश करार दिया और बाजार से किताब को वापस लेने का निर्देश दिया।

एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका से जुड़े कथित विवादित अध्याय पर अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि जो कुछ हुआ उससे उन्हें गहरा दुख है और सरकार या शिक्षा मंत्रालय की ओर से न्यायपालिका का अपमान करने की कोई मंशा नहीं थी।

धर्मेद्र प्रधान ने कहा, 'हम ज्यूडिशियरी का पूरा सम्मान करते हैं। ज्यूडिशियरी ने जो भी कहा है, हम उसका पूरा पालन करेंगे। जो हुआ है, उससे मैं बहुत दुखी हूं, और मैं अफसोस जाहिर करता हूं। जैसे ही यह मामला मेरे ध्यान में आया, मैंने तुरंत NCERT को संबंधित किताबें वापस लेने का निर्देश दिया ताकि वे आगे सर्कुलेट न हों। उन्हें वापस बुलाने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं।'

सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही-प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार न्यायपालिका का सर्वोच्च सम्मान करती है और किसी भी शैक्षणिक सामग्री के जरिए संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ी सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अध्याय तैयार करने में शामिल लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य जागरूकता फैलाना है, संस्थाओं को बदनाम करना नहीं।

सीजेआई की अहम टिप्पणी

इससे पहले गुरूवार सुबह मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचौली की बेंच ने मामले पर सुनवाई की। सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कुछ अहम टिप्पणियां की। सीजेआई ने आदेश में कहा कि व्यवस्था के 3 अंग - विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका लोकतंत्र के सुचारू रूप से काम करने के लिए जरूरी हैं। उन्होंने कहा, 'हमें एक अखबार से NCERT की किताब में लिखे गए अंश का पता चला। इसे जानकर हमें आघात पहुंचा।'

न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश

सीजेआई ने कहा कि ऐसा लगता है कि यह सोच समझकर न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका के बारे में इस तरह की बातें करना और उसके प्रति असम्मान फैलाना निश्चित रूप से आपराधिक अवमानना का मामला हो सकता है। अगर ऐसा जान-बूझकर किया गया है तो।

हम सिर्फ माफी पर जाने नहीं दे सकते-सीजेआई

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह सोचा-समझा योजनाबद्ध कदम है। बच्चों के अलावा शिक्षक और अभिभावक भी इसे पढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि हम अधिकारियों को सिर्फ माफी पर जाने नहीं दे सकते। यह कहना कि इसे हटाया जा रहा है, काफी नहीं। किताब मार्केट में गई। मैंने भी इसकी एक कॉपी देखी है। उन्होंने शिक्षा विभाग को आदेश दिया कि मार्केट और स्कूलों में भेजी गई किताबें वापस ली जाएं और किताब का ऑनलाइन मटीरियल भी हटाया जाए।

मेट्रो पिलर के नीचे मस्जिद, लापरवाह प्रशासन पर गंभीर सवाल
मुंबई मेट्रो के डीएन नगर से मंडाले (मेट्रो 2B) प्रोजेक्ट के अंतर्गत चेंबूर स्थित सिद्धार्थ कॉलोनी क्षेत्र में मेट्रो पिलर के ठीक नीचे मस्जिद होने का मामला सामने आया है। इस घटना से मेट्रो परियोजना के नियोजन, सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
पूर्व में मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने MTHL (मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक) और SCLR (सांताक्रूज़–चेंबूर लिंक रोड) जैसे बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में प्रार्थनास्थलों का सुनियोजित और सफल स्थानांतरण किया है। ऐसे में मेट्रो 2B परियोजना में मेट्रो पिलर के नीचे प्रार्थनास्थल का रह जाना एमएमआरडीए की लापरवाह और असफल योजना का स्पष्ट प्रमाण माना जा रहा है।
मेट्रो 2B प्रोजेक्ट पहले से ही विवादों में रहा है। पूर्व में मार्ग में किए गए बदलावों के कारण कुर्ला पश्चिम के हलाव पुल क्षेत्र में गणेश विसर्जन का मार्ग स्थायी रूप से बंद हो जाने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा, कुछ प्रस्तावित मेट्रो स्टेशनों को हटाए जाने का भी गंभीर आरोप सामने आया है।
RTI कार्यकर्ता अनिल गलगली ने सवाल उठाया है कि बार-बार किए गए बदलावों, विफल नियोजन और इससे उत्पन्न समस्याओं की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र और गहन जांच की मांग की है। अनिल गलगली ने स्पष्ट किया कि यदि सार्वजनिक सुरक्षा, धार्मिक स्थलों के प्रति संवेदनशीलता और परियोजना की विश्वसनीयता का पालन नहीं किया गया, तो ऐसे महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स पर आम जनता का विश्वास गंभीर रूप से कमजोर होगा।
महोबा में भीषण हादसा: शादी से लौट रहीं चार महिलाओं को लोडर ने रौंदा, तीन की मौत
लखनऊ /महोबा। शादी समारोह से खाना बनाकर घर लौट रहीं चार महिलाओं को तेज रफ्तार लोडर ने कुचल दिया। हादसा गुरुवार तड़के करीब तीन बजे महोबा-छतरपुर रोड पर मां बड़ी चंद्रिका देवी मंदिर के पास हुआ। दुर्घटना में तीन महिलाओं की मौत हो गई, जबकि एक की हालत गंभीर बनी हुई है।
जानकारी के मुताबिक, सदर कोतवाली क्षेत्र के भटीपुरा मोहल्ला निवासी 45 वर्षीय श्यामरानी, 65 वर्षीय तुलसा, 35 वर्षीय गीता और 50 वर्षीय भगवती बुधवार रात महोबा-छतरपुर रोड किनारे स्थित मीना पैलेस में शादी समारोह में खाना बनाने गई थीं। तड़के चारों महिलाएं पैदल अपने घर लौट रही थीं, तभी तेज रफ्तार लोडर ने उन्हें टक्कर मार दी।
राहगीरों और पुलिस की मदद से सभी घायलों को जिला अस्पताल महोबा लाया गया, जहां सिर में गंभीर चोट के कारण श्यामरानी को मृत घोषित कर दिया गया। गीता ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। गंभीर हालत में भगवती और तुलसा को झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन झांसी ले जाते समय रास्ते में भगवती की भी मौत हो गई। तुलसा का उपचार जारी है।
हादसे के बाद चालक वाहन समेत फरार हो गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी चालक की तलाश शुरू कर दी है। घटना के बाद मृतकों के परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
होली के बाद तपेगा यूपी, मार्च के पहले सप्ताह में 35°C तक पहुंचेगा पारा
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में होली के बाद गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि मार्च के पहले सप्ताह में अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में पिछले चार–पांच दिनों से तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पारा 30 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया बुधवार को 15 से अधिक जिलों में पारा 30 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया। लखनऊ में अधिकतम तापमान 30.4°C और न्यूनतम 15.4°C रिकॉर्ड किया गया। गुरुवार को दिन और रात के तापमान में करीब दो डिग्री तक बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। अनुमान है कि शनिवार तक अधिकतम तापमान 32°C और 4 मार्च तक 34-35°C तक पहुंच सकता है। बांदा में भी पारा 31 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा प्रदेश में बुधवार को हमीरपुर सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 32.2°C दर्ज किया गया। वहीं वाराणसी और बांदा में भी पारा 31 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा।मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रशांत महासागर में सक्रिय ला नीना के कमजोर पड़ने का असर उत्तर भारत के मौसम पर दिख रहा है। फरवरी के अंतिम सप्ताह में साफ आसमान और तेज धूप के कारण दिन में तपिश बढ़ेगी और गर्मी का असर तेज बना रहेगा।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ. उपाध्याय ने 'बीज वक्ता' के रूप में बढ़ाया बलिया का मान
संजीव सिंह बलिया!बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी और उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 'बुंदेलखंड के साहित्य, समाज और संस्कृति में श्रीराम' में जनपद के लब्धप्रतिष्ठित विद्वान और प्रखर विचारक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर जिले का मान बढ़ाया। डॉ. उपाध्याय को इस वैचारिक महाकुंभ में विशिष्ट अतिथि एवं 'बीज वक्ता' के रूप में आमंत्रित किया गया, जहाँ उन्होंने सनातन संस्कृति और रामकथा के अंतर्संबंधों का अत्यंत गंभीर और तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत किया। इस वैश्विक मंच पर डॉ. उपाध्याय ने रामायण के एक मार्मिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए श्रीराम के 'आतंकवाद विरोधी' स्वरूप की एक नवीन व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जब श्रीराम ने ऋषियों की हड्डियों का विशाल पहाड़ देखा और अपने गुरु से इसका कारण पूछा, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि ये उन महान ऋषियों के अवशेष हैं जिन्हें राक्षसों ने क्रूरतापूर्वक मार डाला था। डॉ. उपाध्याय ने इसके गहरे दार्शनिक अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि उस युग में ज्ञान 'श्रुति परंपरा' अर्थात सुनकर याद रखने पर आधारित था, क्योंकि तब कागज और कलम की खोज नहीं हुई थी। ऐसे में ज्ञान प्रदान करने वाले एक भी ऋषि की हत्या का अर्थ केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की उस संचित ज्ञान परंपरा की हत्या थी जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती थी। असंख्य ऋषियों की हत्या के माध्यम से ज्ञान के इस समूल विनाश को देखकर श्रीराम की करुणा 'महाक्रोध' में परिवर्तित हो गई और उन्होंने उसी क्षण यह दृढ़ प्रण लिया कि लंका विजय तो बाद की बात है, वह पहले अपने घर में बैठे इन आततायी राक्षसों और ज्ञान-विरोधी 'आतंकवादियों' का वध करेंगे। डॉ. उपाध्याय ने रेखांकित किया कि राम का यह संकल्प वास्तव में वैश्विक सभ्यता और ज्ञान-संस्कृति को बचाने का विश्व इतिहास का पहला बड़ा सुरक्षा अभियान था। मुख्य व्याख्यान को आगे बढ़ाते हुए डॉ. उपाध्याय ने प्रतिपादित किया कि बुंदेलखंड की माटी में राम केवल एक आराध्य देव भर नहीं हैं, बल्कि वे यहाँ की संपूर्ण जीवन पद्धति के आधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओरछा के 'रामराजा' सरकार से लेकर गाँवों की चौपालों पर गाई जाने वाली 'फाग' और 'आल्हा' तक, राम बुंदेली समाज के प्रत्येक संस्कार और सांसों में रचे-बसे हैं। बुंदेलखंड के समृद्ध साहित्य ने राम के मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप को लोक-भाषा के माध्यम से जन-जन के हृदय तक पहुँचाने का महती कार्य किया है। उनके अनुसार राम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति का पावन संगम ही वह अटूट सूत्र है, जो इस अंचल के समाज को कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नैतिकता, मर्यादा और धैर्य की शक्ति प्रदान करता है। डॉ. उपाध्याय का यह उद्बोधन न केवल अकादमिक दृष्टि से उत्कृष्ट रहा, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के सम्मुख बुंदेलखंड की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की चेतना को भी मजबूती से रखा। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की भव्यता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें भारत के विभिन्न राज्यों सहित विश्व के दस प्रमुख देशों के दिग्गज विद्वानों ने श्रीराम के आदर्शों और बुंदेली संस्कृति के अंतर्संबंधों पर गहन मंथन किया। परिचर्चा में नार्वे से डॉ. शरद आलोक, बुल्गारिया से डॉ. मौना कौशिक, ऑस्ट्रेलिया से डॉ. भावना कुँअर, कुवैत से संगीता चौबे 'पंखुड़ी', दुबई से डॉ. आरती लोकेश, नीदरलैंड से डॉ. ऋतु शर्मा नन्नन पाण्डेय, न्यूज़ीलैंड से डॉ. सुनीता शर्मा, नेपाल से डॉ. श्वेता दीप्ति और सूरीनाम से लालाराम लैलावती एवं श्री धीरज कंधई जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। इस वैचारिक समागम में विभिन्न सत्रों के दौरान लगभग 100 शोध पत्रों का वाचन किया गया, जिससे रामकथा के वैश्विक और स्थानीय आयामों पर नई रोशनी पड़ी। आयोजन की गरिमा को बढ़ाते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामायण केंद्र भोपाल के निदेशक प्रो. राजेश श्रीवास्तव एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की संपादक डॉ. अमिता दुबे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने की। इस ऐतिहासिक आयोजन की सफलता के मुख्य सूत्रधार कला संकाय के अधिष्ठाता एवं संयोजक प्रो. (डॉ.) पुनीत बिसारिया, कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार, वित्त अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह एवं परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर रहे, जिनके प्रयासों से यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुई। डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को इस वैश्विक मंच पर मुख्य वक्ता के रूप में सम्मानित होते देख जनपद के साहित्यकारों, शिक्षाविदों और शुभचिंतकों में हर्ष की लहर दौड़ गई है। डॉ. गणेश पाठक, डॉ. जनार्दन राय, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. धनंजय पाण्डेय, डॉ. मदन राम, करुणानिधि तिवारी, राधेश्याम यादव, हरेंद्र नाथ मिश्र और लल्लन पाण्डेय आदि ने डॉ. उपाध्याय को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को समूचे क्षेत्र के लिए एक गौरवशाली क्षण बताया है।
माफी काफी नहीं है', एनसीईआरटी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त बरकरार, सीजेआई ने लगाई फटकार

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एनसीईआरटी ने कक्षा 8 की सोशल साइंस के ज्यूडिशियरी से जुड़े चैप्टर पर विवाद बढ़ गया है। किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाले अंश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रूख अपनाया है। विवाद पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में एनसीईआरटी का माफी मांगना पर्याप्त नहीं है।

कोर्ट ने पूछा- इसके पीछे कौन?

सीजेआई की फटकार के बाद एनसीईआरटी ने ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ वाले चैप्टर को हटाने का फैसला किया है। उसने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी गलती मानी है और इसके लिए माफी मांगी है।सीजेआई सूर्यकांत ने फटकार लगाते हुए कहा है कि बस माफी मांगना या चैप्टर हटाना काफी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी से कहा है कि वे बताए इसके पीछे कौन हैं, पूरी बात सामने आने तक सुनवाई जारी रहेगी।

एनसीईआरटी के निदेशक को कारण बताना होगा

सुनवाई के दौरान एनसीईआरटी ने कहा कि वे बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं। किताब से विवादित अंश को भी हटा दिया जाएगा। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि केवल माफी मांगना और किताब से आपत्तिजनक अंशों को हटाना पर्याप्त नहीं है। एनसीईआरटी के निदेशक को कारण बताना होगा। ये सोच-समझकर उठाया गया कदम है। अदालत ने सवाल किया कि इस मामले को अवमानना क्यों न माना जाए? चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ऑनलाइन प्रतियों को भी तत्काल हटाने के निर्देश दिए।

क्या है मामला?

दरअसल, NCERT ने क्लास 8 की सोशल साइंस की नई किताब जारी की। किताब में पहली बार ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन जोड़ा गया। बुक का अपडेटेड एडिशन पहले के एडिशन से अलग है। बुक में एक चैप्टर का नाम है हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका, जिसमें सिस्टम की कमजोरियों और लंबित मामलों के बारे में बताया गया है।

चैप्टर में क्या?

किताब में इस समस्या के बड़े पैमाने को साफ-साफ बताया गया है। इसमें अलग-अलग कोर्ट में लगभग 53,321,000 पेंडिंग केस बताए गए हैं। इनमें सुप्रीम कोर्ट में 81,000, पूरे भारत के हाई कोर्ट में 62.4 लाख (62,40,000) और डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट में लगभग 4.7 करोड़ (4,70,00,000) केस हैं। चैप्टर में लोगों की सोच और चिंताओं का भी जिक्र है। चैप्टर में लिखा है, लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का अनुभव करते हैं। गरीबों और ज़रूरतमंदों के लिए न्याय तक पहुंच आसान नहीं है। भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बी आर गवई का जिक्र करते हुए, बुक में कहा गया है कि करप्शन और गलत काम लोगों के भरोसे को नुकसान पहुंचाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

पुस्तक में जोड़े गए इस हिस्से को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया है। अदालत ने भरोसा दिलाया कि उचित और कानूनी कदम उठाए जाएंगे। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और विश्वसनीयता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।