कांस्टेबल अमित कुमार के सराहनीय प्रयास से 104 वर्षीय बुजुर्ग संत परिजनों से मिले, सोशल मीडिया बना सहारा
गोण्डा। करनैलगंज रेलवे स्टेशन परिसर में भटके मिले 104 वर्षीय बुजुर्ग संत को कांस्टेबल अमित कुमार के सराहनीय प्रयास से आखिरकार उनके परिजनों तक सकुशल पहुंचा दिया गया। बुजुर्ग का नाम सूर्यबली बताया गया है, जो कमलापुर जनपद सीतापुर के निवासी हैं। उनके पौत्र कमलेश कुमार रविवार को करनैलगंज पहुंचकर उन्हें अपने साथ घर ले गए। बताया गया कि सूर्यबली बाबा करीब पांच दिन पहले लखनऊ के चौक स्थित मंदिर से घर जाने के लिए ट्रेन पर बैठे थे, लेकिन रास्ता भटक जाने के कारण करनैलगंज पहुंच गए। तीन दिन पहले वह करनैलगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 के ट्रैक किनारे असहाय अवस्था में पड़े मिले। सुबह टहलने निकले थाना कोतवाली करनैलगंज में तैनात कांस्टेबल अमित कुमार की नजर बुजुर्ग पर पड़ी। उन्होंने तत्काल उनसे पूछताछ की और मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए उनकी मदद शुरू की। इसके बाद बाबा का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जिसके माध्यम से उनके परिजनों तक सूचना पहुंची।
कांस्टेबल अमित कुमार ने बताया कि परिजनों से लगातार संपर्क बनाए रखा गया और बुजुर्ग को सुरक्षित रखा गया। उन्हें वस्त्र पहनाकर उचित सेवा-संभाल भी दी गई। अंततः रविवार को उनके पौत्र कमलेश कुमार करनैलगंज पहुंचे और आवश्यक पुष्टि के बाद बाबा को अपने साथ घर ले गए। स्थानीय लोगों ने कांस्टेबल अमित कुमार की इस सराहनीय पहल की प्रशंसा की। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ध्यान न दिया जाता तो ट्रैक किनारे पड़े बुजुर्ग के साथ कोई बड़ा हादसा हो सकता था। इस अवसर पर अमित कुमार ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सभी को अपने परिवार के वृद्धजनों की सेवा करनी चाहिए तथा जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आना चाहिए, ताकि कोई भी बुजुर्ग इस प्रकार भटकने को मजबूर न हो।
टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ बलिया से बजी संघर्ष की मशाल, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने निकाला विशाल मशाल जुलूस
संजीव सिंह बलिया!अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ (A.I.J.T.F.) के केन्द्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में चल रहे आंदोलन के द्वितीय चरण के तहत जनपद बलिया में विशाल मशाल जुलूस निकालकर जोरदार विरोध दर्ज किया गया। मशाल जुलूस रेलवे स्टेशन बलिया के उत्तरी छोर से टाउन चौराहे तक निकाला गया, जिसके माध्यम से शिक्षकों एवं कर्मचारी संगठनों ने सरकार को कड़ा संदेश देते हुए टेट अनिवार्यता वापस लेने की पुरजोर मांग की।जुलूस में शामिल सैकड़ों शिक्षक एवं कर्मचारी प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से कहा कि यह संघर्ष केवल शिक्षकों का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और समाज के अस्तित्व की लड़ाई है, जिसे हम सब मिलकर हर मोर्चे पर लড়ने के लिए संकल्पबद्ध हैं। सभी ने संकल्प लिया कि इस आंदोलन को सड़क से लेकर संसद तक व्यापक रूप से जारी रखा जाएगा। प्रतिनिधियों ने कहा कि आरटीई एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त एवं टेट से छूट प्राप्त शिक्षकों पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 01/09/25 को टीईटी अनिवार्यता थोपने का आदेश, पूर्व से स्थापित शिक्षक भर्ती नियमों एवं परंपरा के प्रतिकूल है। इस आदेश पर सरकार की चुप्पी के कारण वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त देश के लाखों शिक्षकों, उनके परिवारों तथा नौनिहालों के भविष्य पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। प्रतिनिधियों ने मांग की कि सरकार त्वरित प्रभाव से आवश्यक पहल करते हुए इस ‘तुगलकी’ आदेश को निरस्त कराने की दिशा में ठोस और सार्थक कदम उठाए।कार्यक्रम के दौरान सभी शिक्षक एवं कर्मचारी नेताओं ने जनपद बलिया से अनवरत संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया और टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे आंदोलन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।इस अवसर पर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ, जनपद बलिया से प्रमुख रूप से समीर कुमार पाण्डेय (अटेवा), अजय कुमार सिंह (प्राथमिक शिक्षक संघ), विनय राय (अटेवा), सतीश सिंह (TSCT), घनश्याम चौबे (विशिष्ट बीटीसी), राजेश सिंह (RSM), राजेश पाण्डेय (राज्य कर्मचारी संघ), अविनाश उपाध्याय (श्रमिक समन्वय समिति), सुशील त्रिपाठी (विकास भवन संघ), संजीव कुमार सिंह (मीडिया प्रभारी), रामनाथ पासवान, शशिकांत तिवारी (मंत्री रेलवे संघ), कमलाकर पाण्डेय (सिंचाई), दूधनाथ सिंह (आयुर्वेद), अभिषेक राय, राकेश कुमार मौर्य (महामंत्री अटेवा), मलय पाण्डेय (महामंत्री राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद), संजय पाण्डेय, राजीव कुमार गुप्ता, लाल साहब यादव (अध्यक्ष एकजुट), रेनु शर्मा (अध्यक्ष रसोइया संघ), विमला भारती (मंत्री), पंकज सिंह, गणेश सिंह, कुलभूषण त्रिपाठी,ज्ञान प्रकाश उपाध्याय, राज कुमार गुप्ता (एकजुट), अशोक राम (अध्यक्ष, रेलवे संघ), श्याम नारायण सिंह (L.A. संघ), धनंजय चौबे (XRAY संघ), वीरेंद्र सिंह, राकेश सिंह, विनय विशेन, अजीत सिंह, राजेश सिंह, हरेराम सिंह, नित्यानंद पाण्डेय, अंजू देवी, N.K. सिंह, राजीव नयन पाण्डेय, ओमकार पाण्डेय, नागेन्द्र श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार सिंह (अध्यक्ष चतुर्थ श्रेणी संघ), मनोज राय (अध्यक्ष LT), शंभू यादव (मंत्री), सुरेश वर्मा, कर्ण प्रताप सिंह, रितेश श्रीवास्तव, सत्य नारायण वर्मा, सुनील गुप्ता, नंदलाल मौर्य, संजय खरवार, रामाशीष यादव, पुष्पेंद्र सिंह, ओमकार सिंह, अजीत पाठक, जुबेर अहमद, राम नारायण, सुनील गुप्ता (ARP), राम प्रकाश सिंह, कृष्ण नंद पाण्डेय, चंदन सिंह, निर्भय सिंह, धर्मेन्द्र गुप्ता सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी साथी उपस्थित रहे।
ीडिया टीम – अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ (A.I.J.T.F.), बलिया
जलियांवाला बाग नरसंहार के शहीदों की याद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

जौनपुर। काकोरी-ऐक्शन शताब्दी वर्ष आयोजन समिति जौनपुर के तत्वाधान में आज दिनांक 13 अप्रैल 2026 को श्री आर. पी कालेज ऑफ फार्मेसी खजुरन बदलापुर जौनपुर के सभागार में जलियांवाला बाग नरसंहार के शहीदों की याद में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता  कृष्णचंद्र शुक्ल व संचालन- दिलीप कुमार ने किया। कार्यक्रम को काकोरी-ऐक्शन शताब्दी वर्ष आयोजन समिति के जिला सचिव प्रमोद कुमार शुक्ल व मिथिलेश कुमार मौर्य ने सम्बोधित किए। वक्ताओं ने कहा कि, 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में बैसाखी के दिन जनरल डायर ने निहत्थे लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलवाईं। रॉलेट एक्ट के विरोध में जुटे हज़ारों लोगों में से सैंकड़ों (आधिकारिक 379, अनौपचारिक 1000+) मारे गए। इस नरसंहार के विरोध में रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी ‘नाइटहुड’ उपाधि लौटा दी थी। दूसरी तरफ यह घटना भारतीय क्रांतिकारी युवाओं के लिए असहनीय थी। आत्मसम्मान पर भी गहरी चोट पहुंची। जिससे ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ देश के भीतर और देश के बाहर आजादी की ज्वाला धधक उठी। नौजवानों के दिल में आग ऐसी लगी कि क्रूर ब्रिटिश हुकूमत कांप उठी और उसे हिंदुस्तान को छोड़कर जाना पड़ा। क्रांतिकारी ऊधम सिंह जलियांवाला बाग नरसंहार के दौरान मौजूद थे। नरसंहार की घटना का मुख्य जिम्मेदार तत्कालीन गवर्नर जनरल माइकल ओ डायर को उधम सिंह ने 21 साल 1940 में इंग्लैंड जाकर भरी सभा में गोली मारा था। इस तरह उधमसिंह ने जलियाँवाला बाग नरसंहार का बदला लिया।अमृतसर में होने वाली जनसभाओं और जलियांवाला बाग हत्याकांड की घटना के प्रत्यक्ष गवाह पंजाबी कवि नानक सिंह ने लिखा है कि उस दौर में ऐसी एकता थी कि हिन्दू, मुसलमान, सिख एक ही गिलास पानी पी रहे थे और एक ही थाली में खाना खा रहे थे। वह इस नरसंहार के बाद, अंतिम संस्कार के जुलूसों का वर्णन करते हुए लिखते हैं कि कैसे हिंदू, मुस्लिम और सिख कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे। उन्होंने अपनी कविता ‘खूनी वैसाखी’ में उल्लेख किया है कि कैसे हिंदू, मुस्लिम और सिख एक साथ मिलकर एक ही त्योहार मना रहे थे-
“पंच वजे अप्रैल दी तेहरवीं नूं,
लोकीं बाग़ वल होए रवान चले।
दिलां विच इनसाफ़ दी आस रख के,
सारे सिख हिन्दू मुसलमान चले।
विरले आदमी शहिर विच रहे बाकी, सब बाल ते बिरध जवान चले।“वे बताते हैं कि हिन्दू, सिख मुसलमान सब एक ही साथ मिलकर त्यौहार मना रहे थे। इस तहजीब को खत्म करने की कोशिश शोषकवर्ग तब भी कर रहा था और आज भी। दरअसल 1947 में बोतल बदली थी शराब तो अब भी वही है। बोतल बदलने से जनता में जो भ्रम पैदा हुआ था वह धीरे-धीरे टूट रहा है। लोग धीरे-धीरे महसूस कर रहे हैं कि अंग्रेजों के वारिश सत्ता में आज तक बने हुए हैं, इसीलिए इनके खिलाफ लड़ाई अभी जारी है। अतः जलियाँवाला बाग नरसंहार जैसे खतरे आज भी बने हुए हैं। 13 अप्रैल जलियांवाला बाग नरसंहार में हुये सभी शहीदों को और आजादी आन्दोलन में अपने को कुर्बान कर देने वाले जाने-अनजाने जितने भी क्रातिकारी शहीद हुए हैं। सभी को क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देते हुए संकल्प लेते हैं कि आज जन विरोधी काले कानूनों के खिलाफ आंदोलन तेज करें। इस अवसर पर अरविंद सिंह, संतोष कुमार प्रजापति, विशाल गौतम, शेषना श्रीवास्तव, इदरीश अहमद, अरविंद गुप्ता, आजाद, संजय सिंह, शोभावती सहित अन्य कई लोग मौजूद रहे।
संविधान की रक्षा और भीम राव अम्बेडकर के सपनों को साकार करना समाजवादी पार्टी का उद्देश्य (इफ्तेखार हुसैन)

विश्वनाथ प्रताप सिंह

चौक महानगर कार्यालय पर बैठक में भीम राव अम्बेडकर जयंती को धूम धाम से मनाने पर हुई गहन चर्चा

प्रयागराज, समाजवाद पार्टी महानगर कार्यालय चौक में महानगर अध्यक्ष एडवोकेट सैय्यद इफ्तेखार हुसैन की अध्यक्षता व नगर महासचिव रवीन्द्र यादव रवि के संचालन में १४ अप्रैल मंगलवार को संविधान रचयिता डॉ भीम राव अम्बेडकर जयंती को व्यापक स्तर पर मनाने को एक अहम बैठक में शहर की तीनों विधानसभा में सेक्टर स्तर पर मनाने को वरिष्ठ नेताओं व कार्यकर्ताओं से विचार विमर्श किया गया।श्री इफ्तेखार ने कहा इस वक़्त संविधान को तार तार करने वाली भाजपा सरकार को बेनकाब करने और संविधान की रक्षा के लिए गली मुहल्लों में संविधान निर्माता बाबा साहब के संविधान के मूल उद्देश्य से लोगों को परिचित कराने और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के पीडीए परिवार के लिए प्राण प्रण से लग कर उनके हक़ में खड़े रहने को बताना आवश्यक है। महासचिव रवीन्द्र यादव ने कहा बाबा साहब के संविधान की अगर सच्चे मायनों में कोई दिल से रक्षा करता नज़र आ रहा है तो वह आदरणीय अखिलेश यादव जी ही हैं आगे बताया की वोटर लिस्ट जो जारी की गई है उसमें कई विसंगति सामने आई है ऐसे में उसे सही करवाना भी समाजवादीयों का मेन उद्देश्य है।२०२७ में समाजवादी पार्टी की सरकार आने वाली है और पीडीए परिवार ही सरकार बनवाने में अहम रोल अदा करेंगे।बैठक में विधान सभा अध्यक्षों सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं व नेताओं ने सम्बोधित किया।इस मौके पर सैय्यद इफ्तेखार हुसैन,रवीन्द्र यादव,राजेश गुप्ता,मोईन हबीबी,बब्बन द्वबे,महबूब उस्मानी,शुऐब खान,संदीप यादव,महेंद्र निषाद,रवीन्द्र गुप्ता, संतोष यादव,सैय्यद मोहम्मद अस्करी,मोहम्मद शारिक़,संतोष कुमार निषाद,जीतराज हेला,तहज़ीब अली, मोहम्मद अज़हर,शकील अहमद,हरीशचंद्र श्रीवास्तव,आलोक द्वबे, मृत्युंजय पाण्डेय,भोला पाल,देवी लाल,पंकज साहू,मोहम्मद मेराज अहमद,दीलीप यादव,शाहिद प्रधान,मंजू यादव,सवीता कैथवास,आरती पाल,भोला पाल,सैय्यद मोहम्मद हामिद,प्रमोद यादव, मोहम्मद सऊद,नेपाल सिंह पटेल,जय भारत यादव,अंकित कुमार पटेल,नीरज पासी,गोलू यादव,देवी लाल, मोहम्मद सिब्तैन,दीपू सोनकर,मुकेश जायसवाल, मोहम्मद हारुन आदि उपस्थित रहे।

गौतम बुद्ध नगर में औद्योगिक असामंजस्य पर सख्ती, उच्च स्तरीय समिति गठित

* स्टेकहोल्डर्स से संवाद कर सौहार्द बहाली की कोशिश, समिति ने शुरू किया काम

गौतमबुद्धनगर। जनपद गौतम बुद्ध नगर में उत्पन्न औद्योगिक असामंजस्य की स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने समाधान के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति का उद्देश्य संबंधित पक्षों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित कर औद्योगिक सौहार्द एवं शांति व्यवस्था को बहाल करना है।
समिति की अध्यक्षता औद्योगिक विकास आयुक्त, उत्तर प्रदेश को सौंपी गई है। इसके अलावा अपर मुख्य सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग तथा प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन विभाग को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। श्रम आयुक्त, उत्तर प्रदेश (कानपुर) को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।
समिति में श्रमिक संगठनों के पांच प्रतिनिधि और उद्यमी संघों के तीन प्रतिनिधियों को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, जिससे सभी पक्षों की सहभागिता सुनिश्चित हो सके।
उच्च स्तरीय समिति गौतम बुद्ध नगर पहुंच चुकी है और प्राथमिकता के आधार पर मामले का परीक्षण कर रही है। समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एई भर्ती 2024 का परिणाम जारी करने की मांग तेज, 13 अप्रैल को उप्र लोक सेवा आयोग प्रयागराज पर अभ्यर्थी करेंगे प्रदर्शन

विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज,उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की तकनीकी भर्तियों में परिणाम जारी करने में हो रही लगातार देरी को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा परीक्षा-2024 और राज्य कृषि अभियंत्रण सेवा परीक्षा-2024 के अभ्यर्थी कल रविवार 13 अप्रैल को आयोग के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। उनकी मांग है कि आयोग लंबित न्यायिक प्रक्रिया का शीघ्र निस्तारण कराकर मुख्य परीक्षा का परिणाम जल्द घोषित करे।

भर्ती प्रक्रिया कानूनी विवाद में फंस गई

आयोग ने दिसंबर 2024 में सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा परीक्षा-2024 के तहत 604 सहायक अभियंता पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। प्रारंभिक परीक्षा 20 अप्रैल 2025 को आयोजित की और मई 2025 में उसका परिणाम घोषित किया। हालांकि इसके बाद भर्ती प्रक्रिया माइग्रेशन नियम को लेकर कानूनी विवाद में फंस गई।

कोर्ट ने प्रारंभिक परिणाम संशोधित का दिया था निर्देश

प्रारंभिक परीक्षा में असफल कुछ अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालयमें में याचिका दाखिल कर यह आरोप लगाया कि विज्ञापन की कंडिका-14 में वर्णित माइग्रेशन नीति का सही पालन नहीं किया गया। इस पर एकल पीठ ने प्रारंभिक परिणाम संशोधित करने का निर्देश दिया था।

अभ्यर्थियों का क्या है आरोप?

अभ्यर्थियों ने कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद मुख्य परीक्षा तो समय पर संपन्न हो गई लेकिन सात महीने बीत जाने के बाद भी परिणाम जारी नहीं हो सका है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग की ओर से अदालत में प्रभावी पैरवी नहीं की जा रही है।

एक वर्ष बाद भी परिणाम घोषित नहीं

इसी तरह सम्मिलित राज्य कृषि अभियंत्रण सेवा परीक्षा-2024 भी इसी माइग्रेशन विवाद के कारण कोर्ट में लंबित है। इस भर्ती की मुख्य परीक्षा मार्च 2025 में आयोजित हुई थी, जिसमें करीब 1700 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, लेकिन एक वर्ष बीतने के बावजूद परिणाम घोषित नहीं हो सका।

19 महीने बाद बनी सौ शय्या अस्पताल की डिजिटल एक्स-रे मशीन

*2024 अगस्त में बिजली गिरने से खराब हुई थी मशीन*

रिपोर्ट -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। सरपतहां स्थित सौ शय्या अस्पताल में 19 महीने से खराब डिजिटल एक्स-रे मशीन बन गई। इससे ओपीडी में आने वाले मरीजों को लाभ मिलेगा। अगस्त 2024 में बिजली गिरने के कारण मशीन के ड्रैग कार्ड में तकनीकि खराबी आ गई थी। स्टेबलाइजर जल गया था। अस्पताल में रोजाना 500 मरीज आते हैं। इसमें से 50 फीसदी मरीज ऑर्थो के होते हैं। इसमें से कई मरीजों को एक्स-रे की जरुरत पड़ती है। ओपीडी भवन में व्यवस्था नहीं होने से मरीज को परिसर के टीबी अस्पताल में एक्स-रे कराने के लिए जाना पड़ता है। यहां रोजाना 60 से 70 एक्स-रे की जाती है। जो क्षमता से अधिक है। इसके अलावा जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी के भी मरीज एक्स-रे कराने आते हैं। एक्स-रे कराकर उन्हें दोबारा डॉक्टर को दिखाने में पूरा दिन लग जाता है। दिसंबर 2025 में एक्स-रे मशीन ठीक कराने के लिए लखनऊ बिजली एडी विभाग ने 20 लाख रुपये की तकनीकि स्वीकृति दी है। दिसंबर में बजट की स्वीकृति मिलने के बाद अप्रैल में मशीन को ठीक किया गया।


डिजिटल एक्स-रे मशीन खराब थी, इससे मरीजों को परेशानी होती है। लेकिन अब मशीन ठीक हो गई है। मरीजों का एक्स-रे अब तुरंत किया जाएगा।

डॉ सुशील पासवान सीएम‌एस 100 बेड सरपतहां
ई-संजीवनी एप से घर बैठे मिलेगी हर मर्ज की सलाह, डॉक्टर देंगे दवा

*नौ स्वास्थ्य केंद्र किए जा रहे अपडेट,दवा लेने के लिए मरीजों को जाना होगा स्वास्थ्य केंद्र*



नितेश श्रीवास्तव

भदोही। जिले के सरकारी अस्पतालों में टेलीमेडिसन सेवा बंद होने के बाद ई-संजीवीनी एप के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैयारियां तेज कर दी गई हैं। जिले के नौ स्वास्थ्य केंद्रों पर इस व्यवस्था को अपडेट किया जा रहा है। विभागीय कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। सीएमओ डॉ. एसके चक ने सभी अधीक्षक को ई.संजीवनी व्यवस्था अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। विभाग की ओर से हर महीने इसकी समीक्षा की जाएगी। महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल, महाराजा बलवंत सिंह राजकीय अस्पताल, सरपतहां स्थित सौ शय्या अस्पताल सहित छह सीएचसी भानीपुर, डीघ, गोपीगंज, औराई, सुरियावां, भदोही स्वास्थ्य केंद्र पर ई-संजीवनी व्यवस्था अपडेट होने लगी है। स्वास्थ्य विभाग हर महीने समीक्षा करेगा। इसमें ई-संजीवनी एप या पोर्टल से कितने मरीजों का उपचार किया गया। सरकारी अस्पतालों में लंबी कतारों और बढ़ती भीड़ से जूझ रहे मरीजों को राहत देने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब ई-संजीवनी ओपीडी एप के माध्यम से घर बैठे मरीजों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराएगा। इससे मरीजों को छोटी-मोटी बीमारियों के लिए अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ई-संजीवनी ओपीडी केंद्र सरकार की टेलीमेडिसिन सेवा है। इसके जरिए मरीज सीधे विशेषज्ञ डॉक्टरों से ऑनलाइन जुड़ सकते हैं।



सीएचओ जोड़ेंगी मरीज को
जिले के सभी 206 उप स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) मरीजों का पंजीकरण करके उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकों से ऑनलाइन जोड़ेंगी। जरूरत पड़ने पर मरीज की यथा स्थिति देखने के लिए उन्हें वीडियो कॉल से भी जोड़ा जाएगा।


ई-संजीवनी एक डिजिटल स्वास्थ्य सेवा प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए मरीज डॉक्टरों से ऑनलाइन चिकित्सकीय सलाह प्राप्त कर सकते हैं। इससे अस्पतालों में भीड़ कम होगी। अस्पतालों में यह व्यवस्था शुरू कराई जा रही है। हर महीने इसकी समीक्षा भी होगी। - डॉ. एसके चक, सीएमओ भदोही।
माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद में 14 महिलाओं की समस्याएं सुनी गईं
*आयुक्त ने अधिकारियों को त्वरित समाधान के सख्त निर्देश दिए*

*एक सप्ताह में कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश, लापरवाही पर चेतावनी*

*आयुक्त ने 14 महिलाओं की सुनी समस्याएं,दिये समाधान के निर्देश*


*गोण्डा, 13 अप्रैल 2026* - देवीपाटन मंडल मुख्यालय पर आयोजित ‘माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद’ महिला जनसुनवाई में आयुक्त शशि भूषण लाल सुशील ने 14 महिलाओं की समस्याओं को गम्भीरता से सुना। जनसुनवाई के दौरान महिलाओं ने भूमि विवाद, पारिवारिक उत्पीड़न, वरासत, पुलिस कार्रवाई में लापरवाही समेत विभिन्न समस्याएं रखीं। आयुक्त ने प्रत्येक प्रकरण को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कुछ मामलों में तत्काल निस्तारण के निर्देश दिए गए, जबकि शेष प्रकरणों में संबंधित विभागों को जांच कर एक सप्ताह के भीतर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए । उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं की समस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


*विद्युत चोरी के आरोप में महिला ने लगाया मनमानी कार्रवाई का आरोप*


जनसुनवाई के दौरान गोण्डा शहर के मेवातियान मोहल्ले की निवासी रुकसाना ने विद्युत विभाग पर गलत तरीके से भारी जुर्माना लगाने की शिकायत की। प्रार्थिनी के अनुसार पिछले साल 6 अक्टूबर को जब वह अपनी मां के निधन के कारण मायके गई हुई थीं, उसी दौरान विद्युत विभाग की टीम ने उनके घर पर जांच की। उस समय घर पर कोई सदस्य मौजूद नहीं था। टीम ने बिना विधिवत प्रक्रिया अपनाए और बिना किसी की मौजूदगी में जांच कर 1,31,544 रुपये का जुर्माना लगा दिया। रुकसाना का कहना है कि उनके घर में कोई अधिक विद्युत लोड वाले उपकरण भी नहीं हैं और वह नियमित रूप से बिल का भुगतान करती हैं। उन्होंने जांच में अनियमितता, वीडियोग्राफी व हस्ताक्षर की प्रक्रिया न अपनाने की बात कही है। पीड़िता ने आयुक्त से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर कार्रवाई की मांग की।

*तहसीलदार न्यायालय के आदेश के अनुपालन की मांग तेज*

देवीपाटन मंडल मुख्यालय पर आयोजित महिला जनसुनवाई में ग्राम भवाजिदपुर की निवासी किशना देवी ने तहसीलदार न्यायिक मनकापुर के आदेश के अनुपालन की मांग उठाई। उन्होंने बताया कि एक वाद में 26 दिसंबर 2023 को पारित आदेश में भूमि पर से अतिक्रमण हटाने और क्षतिपूर्ति व निष्पादन व्यय वसूलने के निर्देश दिए गए थे। इसके खिलाफ दायर अपील को भी मुख्य राजस्व अधिकारी ने 2 जनवरी 2026 को खारिज कर दिया, जिससे आदेश प्रभावी हो गया। बावजूद इसके, राजस्व विभाग द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़िता ने बताया कई बार थाना दिवस व संबंधित अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देने के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिससे ग्रामीणों का आवागमन बाधित है। उन्होंने आयुक्त से शीघ्र कार्रवाई कर न्याय दिलाने की मांग की है।

*राजस्व न्यायालय के आदेश के अनुपालन को लेकर महिला की गुहार*

देवीपाटन मंडल में आयोजित महिला जनसुनवाई के दौरान ग्राम सेहरिया, वजीरगंज की निवासी मुन्नी देवी ने उपजिलाधिकारी (न्यायिक) तरबगंज के आदेश के अनुपालन की मांग उठाई। उन्होंने बताया कि एक वाद में जून 2025 को न्यायालय ने भूमि की पैमाइश कर सीमांकन व पत्थर स्थापित कराने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके अब तक राजस्व अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोग जबरन खेत पर कब्जा करने और रास्ता निकालने का प्रयास कर रहे हैं। कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। मुन्नी देवी ने आयुक्त से हस्तक्षेप कर आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने और संबंधित विपक्षियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है, ताकि विवाद का स्थायी समाधान हो सके।

*जन्म प्रमाण पत्र के लिए महिला ने जनसुनवाई में लगाई गुहार*

गोण्डा में “माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद” महिला जनसुनवाई में बहराइच जनपद की प्रिया ने जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए गुहार लगाई। प्रिया ने बताया कि उन्होंने 21 जुलाई 2025 को ब्लॉक फखरपुर में एफिडेविट के आधार पर आवेदन किया था, लेकिन अब तक अनुमोदन नहीं हुआ है। अधिकारियों द्वारा माता-पिता का आधार व राशन कार्ड तथा शैक्षिक प्रमाण मांगे जा रहे हैं, जो उनके पास उपलब्ध नहीं हैं। प्रिया ने बताया कि पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उनका घर से संपर्क नहीं है, जिससे आवश्यक दस्तावेज जुटाना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आयुक्त से अनुरोध किया कि ग्राम पंचायत व तहसील स्तर पर जांच कराकर जन्म प्रमाण पत्र जारी कराया जाए। उनका कहना है कि प्रमाण पत्र के अभाव में वह शिक्षा व रोजगार के अवसरों से वंचित हैं।


*महिला ने जमीन कब्जे व धमकी के खिलाफ जनसुनवाई में लगाई गुहार*

“माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद” में आयोजित महिला जनसुनवाई में शांति देवी ने जमीन कब्जे और जानमाल की धमकी का गंभीर आरोप लगाया। ग्राम चन्द्रसुहा, तरबगंज की निवासी पीड़िता ने बताया कि ग्रामीण सड़क निर्माण के बाद उनकी शेष जमीन व बंजर भूमि पर विपक्षीगण कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। आरोप है कि पूर्व प्रधान व लेखपाल की मिलीभगत से जमीन का रिकॉर्ड बदलकर पट्टा अन्य व्यक्ति के नाम कर दिया गया और बाद में बैनामा भी करा लिया गया। पीड़िता का कहना है कि विपक्षीगण असलहा दिखाकर धमकाते हैं और घर में जबरन ताला लगाने जैसी घटनाएं भी हो चुकी हैं। उन्होंने आयुक्त से भूमि की पैमाइश कराकर कब्जा रोकने, निर्माण कार्य पर रोक लगाने तथा आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

आयुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वह महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए एक सप्ताह के अंदर समस्या का समाधान करायें।
शांति, समता और भाईचारे का संदेश लेकर लखनऊ में निकला बौद्ध भिक्षुओं का भव्य शांति मार्च
* उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने किया स्वागत, कहा— “बुद्धम् शरणम् गच्छामि ही शांति का मार्ग”

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में विश्व शांति के संदेश के साथ बौद्ध भिक्षुओं एवं पूज्य भन्तेगणों द्वारा भव्य शांति मार्च का आयोजन किया गया। यह मार्च डॉ. अम्बेडकर महासभा कार्यालय, विधानसभा मार्ग से प्रारंभ होकर हजरतगंज चौराहा होते हुए उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य के कैम्प कार्यालय, 7-कालिदास मार्ग तक निकाला गया।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अपने कैम्प कार्यालय पर पहुंचे भिक्षुओं का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस दौरान उन्होंने अंगवस्त्र भेंट कर भिक्षुओं को सम्मानित किया और विश्व शांति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के इस प्रयास की सराहना की।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “बुद्धम् शरणम् गच्छामि” ही शांति का सच्चा मार्ग है। भारत की परंपरा सदैव शांति, समता और मानवता की रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस कथन का उल्लेख किया कि “भारत ने दुनिया को बुद्ध दिया है, युद्ध नहीं”, जो आज के वैश्विक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब विश्व के कई देश युद्ध और अस्थिरता से जूझ रहे हैं, ऐसे में भगवान बुद्ध की शिक्षाएं मानवता के लिए आशा और मार्गदर्शन का आधार बन रही हैं। “विश्व एक परिवार है और शांति हमारा सबसे बड़ा अस्त्र है,” उन्होंने कहा।
उप मुख्यमंत्री ने सम्राट अशोक महान के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भगवान बुद्ध के उपदेशों को विश्वभर में फैलाने का ऐतिहासिक कार्य किया। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर उन्हें भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों को रूस के काल्मिकिया ले जाने का अवसर मिला, जहां लाखों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार “विरासत और विकास” को साथ लेकर कार्य कर रही है। काशी, मथुरा और अयोध्या के साथ-साथ सारनाथ, संकिसा और कुशीनगर जैसे बौद्ध स्थलों का भी व्यापक विकास किया जा रहा है।
इस अवसर पर उन्होंने भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती की शुभकामनाएं देते हुए उनके सामाजिक समता और न्याय के विचारों को स्मरण किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश अम्बेडकर महासभा के अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि प्रदेश सरकार बुद्ध विहारों के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। वहीं अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संस्थान के सदस्य भन्ते शीलरतन ने विश्व शांति और करुणा के संदेश को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षुगण, छात्राएं एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कांस्टेबल अमित कुमार के सराहनीय प्रयास से 104 वर्षीय बुजुर्ग संत परिजनों से मिले, सोशल मीडिया बना सहारा
गोण्डा। करनैलगंज रेलवे स्टेशन परिसर में भटके मिले 104 वर्षीय बुजुर्ग संत को कांस्टेबल अमित कुमार के सराहनीय प्रयास से आखिरकार उनके परिजनों तक सकुशल पहुंचा दिया गया। बुजुर्ग का नाम सूर्यबली बताया गया है, जो कमलापुर जनपद सीतापुर के निवासी हैं। उनके पौत्र कमलेश कुमार रविवार को करनैलगंज पहुंचकर उन्हें अपने साथ घर ले गए। बताया गया कि सूर्यबली बाबा करीब पांच दिन पहले लखनऊ के चौक स्थित मंदिर से घर जाने के लिए ट्रेन पर बैठे थे, लेकिन रास्ता भटक जाने के कारण करनैलगंज पहुंच गए। तीन दिन पहले वह करनैलगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 के ट्रैक किनारे असहाय अवस्था में पड़े मिले। सुबह टहलने निकले थाना कोतवाली करनैलगंज में तैनात कांस्टेबल अमित कुमार की नजर बुजुर्ग पर पड़ी। उन्होंने तत्काल उनसे पूछताछ की और मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए उनकी मदद शुरू की। इसके बाद बाबा का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जिसके माध्यम से उनके परिजनों तक सूचना पहुंची।
कांस्टेबल अमित कुमार ने बताया कि परिजनों से लगातार संपर्क बनाए रखा गया और बुजुर्ग को सुरक्षित रखा गया। उन्हें वस्त्र पहनाकर उचित सेवा-संभाल भी दी गई। अंततः रविवार को उनके पौत्र कमलेश कुमार करनैलगंज पहुंचे और आवश्यक पुष्टि के बाद बाबा को अपने साथ घर ले गए। स्थानीय लोगों ने कांस्टेबल अमित कुमार की इस सराहनीय पहल की प्रशंसा की। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ध्यान न दिया जाता तो ट्रैक किनारे पड़े बुजुर्ग के साथ कोई बड़ा हादसा हो सकता था। इस अवसर पर अमित कुमार ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सभी को अपने परिवार के वृद्धजनों की सेवा करनी चाहिए तथा जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आना चाहिए, ताकि कोई भी बुजुर्ग इस प्रकार भटकने को मजबूर न हो।
टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ बलिया से बजी संघर्ष की मशाल, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने निकाला विशाल मशाल जुलूस
संजीव सिंह बलिया!अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ (A.I.J.T.F.) के केन्द्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में चल रहे आंदोलन के द्वितीय चरण के तहत जनपद बलिया में विशाल मशाल जुलूस निकालकर जोरदार विरोध दर्ज किया गया। मशाल जुलूस रेलवे स्टेशन बलिया के उत्तरी छोर से टाउन चौराहे तक निकाला गया, जिसके माध्यम से शिक्षकों एवं कर्मचारी संगठनों ने सरकार को कड़ा संदेश देते हुए टेट अनिवार्यता वापस लेने की पुरजोर मांग की।जुलूस में शामिल सैकड़ों शिक्षक एवं कर्मचारी प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से कहा कि यह संघर्ष केवल शिक्षकों का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और समाज के अस्तित्व की लड़ाई है, जिसे हम सब मिलकर हर मोर्चे पर लড়ने के लिए संकल्पबद्ध हैं। सभी ने संकल्प लिया कि इस आंदोलन को सड़क से लेकर संसद तक व्यापक रूप से जारी रखा जाएगा। प्रतिनिधियों ने कहा कि आरटीई एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त एवं टेट से छूट प्राप्त शिक्षकों पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 01/09/25 को टीईटी अनिवार्यता थोपने का आदेश, पूर्व से स्थापित शिक्षक भर्ती नियमों एवं परंपरा के प्रतिकूल है। इस आदेश पर सरकार की चुप्पी के कारण वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त देश के लाखों शिक्षकों, उनके परिवारों तथा नौनिहालों के भविष्य पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। प्रतिनिधियों ने मांग की कि सरकार त्वरित प्रभाव से आवश्यक पहल करते हुए इस ‘तुगलकी’ आदेश को निरस्त कराने की दिशा में ठोस और सार्थक कदम उठाए।कार्यक्रम के दौरान सभी शिक्षक एवं कर्मचारी नेताओं ने जनपद बलिया से अनवरत संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया और टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे आंदोलन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।इस अवसर पर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ, जनपद बलिया से प्रमुख रूप से समीर कुमार पाण्डेय (अटेवा), अजय कुमार सिंह (प्राथमिक शिक्षक संघ), विनय राय (अटेवा), सतीश सिंह (TSCT), घनश्याम चौबे (विशिष्ट बीटीसी), राजेश सिंह (RSM), राजेश पाण्डेय (राज्य कर्मचारी संघ), अविनाश उपाध्याय (श्रमिक समन्वय समिति), सुशील त्रिपाठी (विकास भवन संघ), संजीव कुमार सिंह (मीडिया प्रभारी), रामनाथ पासवान, शशिकांत तिवारी (मंत्री रेलवे संघ), कमलाकर पाण्डेय (सिंचाई), दूधनाथ सिंह (आयुर्वेद), अभिषेक राय, राकेश कुमार मौर्य (महामंत्री अटेवा), मलय पाण्डेय (महामंत्री राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद), संजय पाण्डेय, राजीव कुमार गुप्ता, लाल साहब यादव (अध्यक्ष एकजुट), रेनु शर्मा (अध्यक्ष रसोइया संघ), विमला भारती (मंत्री), पंकज सिंह, गणेश सिंह, कुलभूषण त्रिपाठी,ज्ञान प्रकाश उपाध्याय, राज कुमार गुप्ता (एकजुट), अशोक राम (अध्यक्ष, रेलवे संघ), श्याम नारायण सिंह (L.A. संघ), धनंजय चौबे (XRAY संघ), वीरेंद्र सिंह, राकेश सिंह, विनय विशेन, अजीत सिंह, राजेश सिंह, हरेराम सिंह, नित्यानंद पाण्डेय, अंजू देवी, N.K. सिंह, राजीव नयन पाण्डेय, ओमकार पाण्डेय, नागेन्द्र श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार सिंह (अध्यक्ष चतुर्थ श्रेणी संघ), मनोज राय (अध्यक्ष LT), शंभू यादव (मंत्री), सुरेश वर्मा, कर्ण प्रताप सिंह, रितेश श्रीवास्तव, सत्य नारायण वर्मा, सुनील गुप्ता, नंदलाल मौर्य, संजय खरवार, रामाशीष यादव, पुष्पेंद्र सिंह, ओमकार सिंह, अजीत पाठक, जुबेर अहमद, राम नारायण, सुनील गुप्ता (ARP), राम प्रकाश सिंह, कृष्ण नंद पाण्डेय, चंदन सिंह, निर्भय सिंह, धर्मेन्द्र गुप्ता सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी साथी उपस्थित रहे।
ीडिया टीम – अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ (A.I.J.T.F.), बलिया
जलियांवाला बाग नरसंहार के शहीदों की याद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

जौनपुर। काकोरी-ऐक्शन शताब्दी वर्ष आयोजन समिति जौनपुर के तत्वाधान में आज दिनांक 13 अप्रैल 2026 को श्री आर. पी कालेज ऑफ फार्मेसी खजुरन बदलापुर जौनपुर के सभागार में जलियांवाला बाग नरसंहार के शहीदों की याद में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता  कृष्णचंद्र शुक्ल व संचालन- दिलीप कुमार ने किया। कार्यक्रम को काकोरी-ऐक्शन शताब्दी वर्ष आयोजन समिति के जिला सचिव प्रमोद कुमार शुक्ल व मिथिलेश कुमार मौर्य ने सम्बोधित किए। वक्ताओं ने कहा कि, 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में बैसाखी के दिन जनरल डायर ने निहत्थे लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलवाईं। रॉलेट एक्ट के विरोध में जुटे हज़ारों लोगों में से सैंकड़ों (आधिकारिक 379, अनौपचारिक 1000+) मारे गए। इस नरसंहार के विरोध में रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी ‘नाइटहुड’ उपाधि लौटा दी थी। दूसरी तरफ यह घटना भारतीय क्रांतिकारी युवाओं के लिए असहनीय थी। आत्मसम्मान पर भी गहरी चोट पहुंची। जिससे ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ देश के भीतर और देश के बाहर आजादी की ज्वाला धधक उठी। नौजवानों के दिल में आग ऐसी लगी कि क्रूर ब्रिटिश हुकूमत कांप उठी और उसे हिंदुस्तान को छोड़कर जाना पड़ा। क्रांतिकारी ऊधम सिंह जलियांवाला बाग नरसंहार के दौरान मौजूद थे। नरसंहार की घटना का मुख्य जिम्मेदार तत्कालीन गवर्नर जनरल माइकल ओ डायर को उधम सिंह ने 21 साल 1940 में इंग्लैंड जाकर भरी सभा में गोली मारा था। इस तरह उधमसिंह ने जलियाँवाला बाग नरसंहार का बदला लिया।अमृतसर में होने वाली जनसभाओं और जलियांवाला बाग हत्याकांड की घटना के प्रत्यक्ष गवाह पंजाबी कवि नानक सिंह ने लिखा है कि उस दौर में ऐसी एकता थी कि हिन्दू, मुसलमान, सिख एक ही गिलास पानी पी रहे थे और एक ही थाली में खाना खा रहे थे। वह इस नरसंहार के बाद, अंतिम संस्कार के जुलूसों का वर्णन करते हुए लिखते हैं कि कैसे हिंदू, मुस्लिम और सिख कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे। उन्होंने अपनी कविता ‘खूनी वैसाखी’ में उल्लेख किया है कि कैसे हिंदू, मुस्लिम और सिख एक साथ मिलकर एक ही त्योहार मना रहे थे-
“पंच वजे अप्रैल दी तेहरवीं नूं,
लोकीं बाग़ वल होए रवान चले।
दिलां विच इनसाफ़ दी आस रख के,
सारे सिख हिन्दू मुसलमान चले।
विरले आदमी शहिर विच रहे बाकी, सब बाल ते बिरध जवान चले।“वे बताते हैं कि हिन्दू, सिख मुसलमान सब एक ही साथ मिलकर त्यौहार मना रहे थे। इस तहजीब को खत्म करने की कोशिश शोषकवर्ग तब भी कर रहा था और आज भी। दरअसल 1947 में बोतल बदली थी शराब तो अब भी वही है। बोतल बदलने से जनता में जो भ्रम पैदा हुआ था वह धीरे-धीरे टूट रहा है। लोग धीरे-धीरे महसूस कर रहे हैं कि अंग्रेजों के वारिश सत्ता में आज तक बने हुए हैं, इसीलिए इनके खिलाफ लड़ाई अभी जारी है। अतः जलियाँवाला बाग नरसंहार जैसे खतरे आज भी बने हुए हैं। 13 अप्रैल जलियांवाला बाग नरसंहार में हुये सभी शहीदों को और आजादी आन्दोलन में अपने को कुर्बान कर देने वाले जाने-अनजाने जितने भी क्रातिकारी शहीद हुए हैं। सभी को क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देते हुए संकल्प लेते हैं कि आज जन विरोधी काले कानूनों के खिलाफ आंदोलन तेज करें। इस अवसर पर अरविंद सिंह, संतोष कुमार प्रजापति, विशाल गौतम, शेषना श्रीवास्तव, इदरीश अहमद, अरविंद गुप्ता, आजाद, संजय सिंह, शोभावती सहित अन्य कई लोग मौजूद रहे।
संविधान की रक्षा और भीम राव अम्बेडकर के सपनों को साकार करना समाजवादी पार्टी का उद्देश्य (इफ्तेखार हुसैन)

विश्वनाथ प्रताप सिंह

चौक महानगर कार्यालय पर बैठक में भीम राव अम्बेडकर जयंती को धूम धाम से मनाने पर हुई गहन चर्चा

प्रयागराज, समाजवाद पार्टी महानगर कार्यालय चौक में महानगर अध्यक्ष एडवोकेट सैय्यद इफ्तेखार हुसैन की अध्यक्षता व नगर महासचिव रवीन्द्र यादव रवि के संचालन में १४ अप्रैल मंगलवार को संविधान रचयिता डॉ भीम राव अम्बेडकर जयंती को व्यापक स्तर पर मनाने को एक अहम बैठक में शहर की तीनों विधानसभा में सेक्टर स्तर पर मनाने को वरिष्ठ नेताओं व कार्यकर्ताओं से विचार विमर्श किया गया।श्री इफ्तेखार ने कहा इस वक़्त संविधान को तार तार करने वाली भाजपा सरकार को बेनकाब करने और संविधान की रक्षा के लिए गली मुहल्लों में संविधान निर्माता बाबा साहब के संविधान के मूल उद्देश्य से लोगों को परिचित कराने और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के पीडीए परिवार के लिए प्राण प्रण से लग कर उनके हक़ में खड़े रहने को बताना आवश्यक है। महासचिव रवीन्द्र यादव ने कहा बाबा साहब के संविधान की अगर सच्चे मायनों में कोई दिल से रक्षा करता नज़र आ रहा है तो वह आदरणीय अखिलेश यादव जी ही हैं आगे बताया की वोटर लिस्ट जो जारी की गई है उसमें कई विसंगति सामने आई है ऐसे में उसे सही करवाना भी समाजवादीयों का मेन उद्देश्य है।२०२७ में समाजवादी पार्टी की सरकार आने वाली है और पीडीए परिवार ही सरकार बनवाने में अहम रोल अदा करेंगे।बैठक में विधान सभा अध्यक्षों सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं व नेताओं ने सम्बोधित किया।इस मौके पर सैय्यद इफ्तेखार हुसैन,रवीन्द्र यादव,राजेश गुप्ता,मोईन हबीबी,बब्बन द्वबे,महबूब उस्मानी,शुऐब खान,संदीप यादव,महेंद्र निषाद,रवीन्द्र गुप्ता, संतोष यादव,सैय्यद मोहम्मद अस्करी,मोहम्मद शारिक़,संतोष कुमार निषाद,जीतराज हेला,तहज़ीब अली, मोहम्मद अज़हर,शकील अहमद,हरीशचंद्र श्रीवास्तव,आलोक द्वबे, मृत्युंजय पाण्डेय,भोला पाल,देवी लाल,पंकज साहू,मोहम्मद मेराज अहमद,दीलीप यादव,शाहिद प्रधान,मंजू यादव,सवीता कैथवास,आरती पाल,भोला पाल,सैय्यद मोहम्मद हामिद,प्रमोद यादव, मोहम्मद सऊद,नेपाल सिंह पटेल,जय भारत यादव,अंकित कुमार पटेल,नीरज पासी,गोलू यादव,देवी लाल, मोहम्मद सिब्तैन,दीपू सोनकर,मुकेश जायसवाल, मोहम्मद हारुन आदि उपस्थित रहे।

गौतम बुद्ध नगर में औद्योगिक असामंजस्य पर सख्ती, उच्च स्तरीय समिति गठित

* स्टेकहोल्डर्स से संवाद कर सौहार्द बहाली की कोशिश, समिति ने शुरू किया काम

गौतमबुद्धनगर। जनपद गौतम बुद्ध नगर में उत्पन्न औद्योगिक असामंजस्य की स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने समाधान के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति का उद्देश्य संबंधित पक्षों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित कर औद्योगिक सौहार्द एवं शांति व्यवस्था को बहाल करना है।
समिति की अध्यक्षता औद्योगिक विकास आयुक्त, उत्तर प्रदेश को सौंपी गई है। इसके अलावा अपर मुख्य सचिव, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग तथा प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन विभाग को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। श्रम आयुक्त, उत्तर प्रदेश (कानपुर) को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।
समिति में श्रमिक संगठनों के पांच प्रतिनिधि और उद्यमी संघों के तीन प्रतिनिधियों को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, जिससे सभी पक्षों की सहभागिता सुनिश्चित हो सके।
उच्च स्तरीय समिति गौतम बुद्ध नगर पहुंच चुकी है और प्राथमिकता के आधार पर मामले का परीक्षण कर रही है। समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एई भर्ती 2024 का परिणाम जारी करने की मांग तेज, 13 अप्रैल को उप्र लोक सेवा आयोग प्रयागराज पर अभ्यर्थी करेंगे प्रदर्शन

विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज,उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की तकनीकी भर्तियों में परिणाम जारी करने में हो रही लगातार देरी को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा परीक्षा-2024 और राज्य कृषि अभियंत्रण सेवा परीक्षा-2024 के अभ्यर्थी कल रविवार 13 अप्रैल को आयोग के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। उनकी मांग है कि आयोग लंबित न्यायिक प्रक्रिया का शीघ्र निस्तारण कराकर मुख्य परीक्षा का परिणाम जल्द घोषित करे।

भर्ती प्रक्रिया कानूनी विवाद में फंस गई

आयोग ने दिसंबर 2024 में सम्मिलित राज्य अभियंत्रण सेवा परीक्षा-2024 के तहत 604 सहायक अभियंता पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। प्रारंभिक परीक्षा 20 अप्रैल 2025 को आयोजित की और मई 2025 में उसका परिणाम घोषित किया। हालांकि इसके बाद भर्ती प्रक्रिया माइग्रेशन नियम को लेकर कानूनी विवाद में फंस गई।

कोर्ट ने प्रारंभिक परिणाम संशोधित का दिया था निर्देश

प्रारंभिक परीक्षा में असफल कुछ अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालयमें में याचिका दाखिल कर यह आरोप लगाया कि विज्ञापन की कंडिका-14 में वर्णित माइग्रेशन नीति का सही पालन नहीं किया गया। इस पर एकल पीठ ने प्रारंभिक परिणाम संशोधित करने का निर्देश दिया था।

अभ्यर्थियों का क्या है आरोप?

अभ्यर्थियों ने कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद मुख्य परीक्षा तो समय पर संपन्न हो गई लेकिन सात महीने बीत जाने के बाद भी परिणाम जारी नहीं हो सका है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग की ओर से अदालत में प्रभावी पैरवी नहीं की जा रही है।

एक वर्ष बाद भी परिणाम घोषित नहीं

इसी तरह सम्मिलित राज्य कृषि अभियंत्रण सेवा परीक्षा-2024 भी इसी माइग्रेशन विवाद के कारण कोर्ट में लंबित है। इस भर्ती की मुख्य परीक्षा मार्च 2025 में आयोजित हुई थी, जिसमें करीब 1700 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, लेकिन एक वर्ष बीतने के बावजूद परिणाम घोषित नहीं हो सका।

19 महीने बाद बनी सौ शय्या अस्पताल की डिजिटल एक्स-रे मशीन

*2024 अगस्त में बिजली गिरने से खराब हुई थी मशीन*

रिपोर्ट -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। सरपतहां स्थित सौ शय्या अस्पताल में 19 महीने से खराब डिजिटल एक्स-रे मशीन बन गई। इससे ओपीडी में आने वाले मरीजों को लाभ मिलेगा। अगस्त 2024 में बिजली गिरने के कारण मशीन के ड्रैग कार्ड में तकनीकि खराबी आ गई थी। स्टेबलाइजर जल गया था। अस्पताल में रोजाना 500 मरीज आते हैं। इसमें से 50 फीसदी मरीज ऑर्थो के होते हैं। इसमें से कई मरीजों को एक्स-रे की जरुरत पड़ती है। ओपीडी भवन में व्यवस्था नहीं होने से मरीज को परिसर के टीबी अस्पताल में एक्स-रे कराने के लिए जाना पड़ता है। यहां रोजाना 60 से 70 एक्स-रे की जाती है। जो क्षमता से अधिक है। इसके अलावा जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी के भी मरीज एक्स-रे कराने आते हैं। एक्स-रे कराकर उन्हें दोबारा डॉक्टर को दिखाने में पूरा दिन लग जाता है। दिसंबर 2025 में एक्स-रे मशीन ठीक कराने के लिए लखनऊ बिजली एडी विभाग ने 20 लाख रुपये की तकनीकि स्वीकृति दी है। दिसंबर में बजट की स्वीकृति मिलने के बाद अप्रैल में मशीन को ठीक किया गया।


डिजिटल एक्स-रे मशीन खराब थी, इससे मरीजों को परेशानी होती है। लेकिन अब मशीन ठीक हो गई है। मरीजों का एक्स-रे अब तुरंत किया जाएगा।

डॉ सुशील पासवान सीएम‌एस 100 बेड सरपतहां
ई-संजीवनी एप से घर बैठे मिलेगी हर मर्ज की सलाह, डॉक्टर देंगे दवा

*नौ स्वास्थ्य केंद्र किए जा रहे अपडेट,दवा लेने के लिए मरीजों को जाना होगा स्वास्थ्य केंद्र*



नितेश श्रीवास्तव

भदोही। जिले के सरकारी अस्पतालों में टेलीमेडिसन सेवा बंद होने के बाद ई-संजीवीनी एप के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैयारियां तेज कर दी गई हैं। जिले के नौ स्वास्थ्य केंद्रों पर इस व्यवस्था को अपडेट किया जा रहा है। विभागीय कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है। सीएमओ डॉ. एसके चक ने सभी अधीक्षक को ई.संजीवनी व्यवस्था अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। विभाग की ओर से हर महीने इसकी समीक्षा की जाएगी। महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल, महाराजा बलवंत सिंह राजकीय अस्पताल, सरपतहां स्थित सौ शय्या अस्पताल सहित छह सीएचसी भानीपुर, डीघ, गोपीगंज, औराई, सुरियावां, भदोही स्वास्थ्य केंद्र पर ई-संजीवनी व्यवस्था अपडेट होने लगी है। स्वास्थ्य विभाग हर महीने समीक्षा करेगा। इसमें ई-संजीवनी एप या पोर्टल से कितने मरीजों का उपचार किया गया। सरकारी अस्पतालों में लंबी कतारों और बढ़ती भीड़ से जूझ रहे मरीजों को राहत देने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब ई-संजीवनी ओपीडी एप के माध्यम से घर बैठे मरीजों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराएगा। इससे मरीजों को छोटी-मोटी बीमारियों के लिए अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ई-संजीवनी ओपीडी केंद्र सरकार की टेलीमेडिसिन सेवा है। इसके जरिए मरीज सीधे विशेषज्ञ डॉक्टरों से ऑनलाइन जुड़ सकते हैं।



सीएचओ जोड़ेंगी मरीज को
जिले के सभी 206 उप स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) मरीजों का पंजीकरण करके उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकों से ऑनलाइन जोड़ेंगी। जरूरत पड़ने पर मरीज की यथा स्थिति देखने के लिए उन्हें वीडियो कॉल से भी जोड़ा जाएगा।


ई-संजीवनी एक डिजिटल स्वास्थ्य सेवा प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए मरीज डॉक्टरों से ऑनलाइन चिकित्सकीय सलाह प्राप्त कर सकते हैं। इससे अस्पतालों में भीड़ कम होगी। अस्पतालों में यह व्यवस्था शुरू कराई जा रही है। हर महीने इसकी समीक्षा भी होगी। - डॉ. एसके चक, सीएमओ भदोही।
माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद में 14 महिलाओं की समस्याएं सुनी गईं
*आयुक्त ने अधिकारियों को त्वरित समाधान के सख्त निर्देश दिए*

*एक सप्ताह में कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश, लापरवाही पर चेतावनी*

*आयुक्त ने 14 महिलाओं की सुनी समस्याएं,दिये समाधान के निर्देश*


*गोण्डा, 13 अप्रैल 2026* - देवीपाटन मंडल मुख्यालय पर आयोजित ‘माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद’ महिला जनसुनवाई में आयुक्त शशि भूषण लाल सुशील ने 14 महिलाओं की समस्याओं को गम्भीरता से सुना। जनसुनवाई के दौरान महिलाओं ने भूमि विवाद, पारिवारिक उत्पीड़न, वरासत, पुलिस कार्रवाई में लापरवाही समेत विभिन्न समस्याएं रखीं। आयुक्त ने प्रत्येक प्रकरण को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कुछ मामलों में तत्काल निस्तारण के निर्देश दिए गए, जबकि शेष प्रकरणों में संबंधित विभागों को जांच कर एक सप्ताह के भीतर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए । उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं की समस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


*विद्युत चोरी के आरोप में महिला ने लगाया मनमानी कार्रवाई का आरोप*


जनसुनवाई के दौरान गोण्डा शहर के मेवातियान मोहल्ले की निवासी रुकसाना ने विद्युत विभाग पर गलत तरीके से भारी जुर्माना लगाने की शिकायत की। प्रार्थिनी के अनुसार पिछले साल 6 अक्टूबर को जब वह अपनी मां के निधन के कारण मायके गई हुई थीं, उसी दौरान विद्युत विभाग की टीम ने उनके घर पर जांच की। उस समय घर पर कोई सदस्य मौजूद नहीं था। टीम ने बिना विधिवत प्रक्रिया अपनाए और बिना किसी की मौजूदगी में जांच कर 1,31,544 रुपये का जुर्माना लगा दिया। रुकसाना का कहना है कि उनके घर में कोई अधिक विद्युत लोड वाले उपकरण भी नहीं हैं और वह नियमित रूप से बिल का भुगतान करती हैं। उन्होंने जांच में अनियमितता, वीडियोग्राफी व हस्ताक्षर की प्रक्रिया न अपनाने की बात कही है। पीड़िता ने आयुक्त से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर कार्रवाई की मांग की।

*तहसीलदार न्यायालय के आदेश के अनुपालन की मांग तेज*

देवीपाटन मंडल मुख्यालय पर आयोजित महिला जनसुनवाई में ग्राम भवाजिदपुर की निवासी किशना देवी ने तहसीलदार न्यायिक मनकापुर के आदेश के अनुपालन की मांग उठाई। उन्होंने बताया कि एक वाद में 26 दिसंबर 2023 को पारित आदेश में भूमि पर से अतिक्रमण हटाने और क्षतिपूर्ति व निष्पादन व्यय वसूलने के निर्देश दिए गए थे। इसके खिलाफ दायर अपील को भी मुख्य राजस्व अधिकारी ने 2 जनवरी 2026 को खारिज कर दिया, जिससे आदेश प्रभावी हो गया। बावजूद इसके, राजस्व विभाग द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़िता ने बताया कई बार थाना दिवस व संबंधित अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देने के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिससे ग्रामीणों का आवागमन बाधित है। उन्होंने आयुक्त से शीघ्र कार्रवाई कर न्याय दिलाने की मांग की है।

*राजस्व न्यायालय के आदेश के अनुपालन को लेकर महिला की गुहार*

देवीपाटन मंडल में आयोजित महिला जनसुनवाई के दौरान ग्राम सेहरिया, वजीरगंज की निवासी मुन्नी देवी ने उपजिलाधिकारी (न्यायिक) तरबगंज के आदेश के अनुपालन की मांग उठाई। उन्होंने बताया कि एक वाद में जून 2025 को न्यायालय ने भूमि की पैमाइश कर सीमांकन व पत्थर स्थापित कराने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके अब तक राजस्व अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोग जबरन खेत पर कब्जा करने और रास्ता निकालने का प्रयास कर रहे हैं। कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। मुन्नी देवी ने आयुक्त से हस्तक्षेप कर आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने और संबंधित विपक्षियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है, ताकि विवाद का स्थायी समाधान हो सके।

*जन्म प्रमाण पत्र के लिए महिला ने जनसुनवाई में लगाई गुहार*

गोण्डा में “माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद” महिला जनसुनवाई में बहराइच जनपद की प्रिया ने जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए गुहार लगाई। प्रिया ने बताया कि उन्होंने 21 जुलाई 2025 को ब्लॉक फखरपुर में एफिडेविट के आधार पर आवेदन किया था, लेकिन अब तक अनुमोदन नहीं हुआ है। अधिकारियों द्वारा माता-पिता का आधार व राशन कार्ड तथा शैक्षिक प्रमाण मांगे जा रहे हैं, जो उनके पास उपलब्ध नहीं हैं। प्रिया ने बताया कि पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उनका घर से संपर्क नहीं है, जिससे आवश्यक दस्तावेज जुटाना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आयुक्त से अनुरोध किया कि ग्राम पंचायत व तहसील स्तर पर जांच कराकर जन्म प्रमाण पत्र जारी कराया जाए। उनका कहना है कि प्रमाण पत्र के अभाव में वह शिक्षा व रोजगार के अवसरों से वंचित हैं।


*महिला ने जमीन कब्जे व धमकी के खिलाफ जनसुनवाई में लगाई गुहार*

“माँ पाटेश्वरी शक्ति संवाद” में आयोजित महिला जनसुनवाई में शांति देवी ने जमीन कब्जे और जानमाल की धमकी का गंभीर आरोप लगाया। ग्राम चन्द्रसुहा, तरबगंज की निवासी पीड़िता ने बताया कि ग्रामीण सड़क निर्माण के बाद उनकी शेष जमीन व बंजर भूमि पर विपक्षीगण कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। आरोप है कि पूर्व प्रधान व लेखपाल की मिलीभगत से जमीन का रिकॉर्ड बदलकर पट्टा अन्य व्यक्ति के नाम कर दिया गया और बाद में बैनामा भी करा लिया गया। पीड़िता का कहना है कि विपक्षीगण असलहा दिखाकर धमकाते हैं और घर में जबरन ताला लगाने जैसी घटनाएं भी हो चुकी हैं। उन्होंने आयुक्त से भूमि की पैमाइश कराकर कब्जा रोकने, निर्माण कार्य पर रोक लगाने तथा आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

आयुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वह महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए एक सप्ताह के अंदर समस्या का समाधान करायें।
शांति, समता और भाईचारे का संदेश लेकर लखनऊ में निकला बौद्ध भिक्षुओं का भव्य शांति मार्च
* उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने किया स्वागत, कहा— “बुद्धम् शरणम् गच्छामि ही शांति का मार्ग”

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में विश्व शांति के संदेश के साथ बौद्ध भिक्षुओं एवं पूज्य भन्तेगणों द्वारा भव्य शांति मार्च का आयोजन किया गया। यह मार्च डॉ. अम्बेडकर महासभा कार्यालय, विधानसभा मार्ग से प्रारंभ होकर हजरतगंज चौराहा होते हुए उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य के कैम्प कार्यालय, 7-कालिदास मार्ग तक निकाला गया।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अपने कैम्प कार्यालय पर पहुंचे भिक्षुओं का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस दौरान उन्होंने अंगवस्त्र भेंट कर भिक्षुओं को सम्मानित किया और विश्व शांति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के इस प्रयास की सराहना की।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “बुद्धम् शरणम् गच्छामि” ही शांति का सच्चा मार्ग है। भारत की परंपरा सदैव शांति, समता और मानवता की रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस कथन का उल्लेख किया कि “भारत ने दुनिया को बुद्ध दिया है, युद्ध नहीं”, जो आज के वैश्विक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब विश्व के कई देश युद्ध और अस्थिरता से जूझ रहे हैं, ऐसे में भगवान बुद्ध की शिक्षाएं मानवता के लिए आशा और मार्गदर्शन का आधार बन रही हैं। “विश्व एक परिवार है और शांति हमारा सबसे बड़ा अस्त्र है,” उन्होंने कहा।
उप मुख्यमंत्री ने सम्राट अशोक महान के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भगवान बुद्ध के उपदेशों को विश्वभर में फैलाने का ऐतिहासिक कार्य किया। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर उन्हें भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों को रूस के काल्मिकिया ले जाने का अवसर मिला, जहां लाखों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार “विरासत और विकास” को साथ लेकर कार्य कर रही है। काशी, मथुरा और अयोध्या के साथ-साथ सारनाथ, संकिसा और कुशीनगर जैसे बौद्ध स्थलों का भी व्यापक विकास किया जा रहा है।
इस अवसर पर उन्होंने भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती की शुभकामनाएं देते हुए उनके सामाजिक समता और न्याय के विचारों को स्मरण किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश अम्बेडकर महासभा के अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि प्रदेश सरकार बुद्ध विहारों के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। वहीं अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संस्थान के सदस्य भन्ते शीलरतन ने विश्व शांति और करुणा के संदेश को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षुगण, छात्राएं एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।