दलित,जातिवाद समाप्त करने के लिए सवर्ण लड़की की ही मांग क्यों करते हैं : सूरज प्रसाद चौबे
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लखनऊ। राष्ट्रीय सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरज प्रसाद चौबे ने कहा कि दलित , जातिवाद समाप्त करने के लिए सवर्ण लड़की की ही मांग क्यों करते है किसी दूसरे दलित जातियों या जनजातियों के साथ अपनी लड़की का संबंध क्यों नहीं करते अथवा अपनी लड़की का विवाह किसी बेरोजगार ब्राह्मण लड़के के साथ करके जातिवाद खत्म करने की बात बात क्यों नहीं करते,लाखों बेरोजगार ब्राह्मण लड़के है जो किसी दलित उच्च अधिकारी,सांसद , विधायक,मंत्री की बेटी से सहर्ष विवाह के लिए बैठे हैं,दरअसल बात न तो जातीय भेदभाव की है और न विवाह संबंध की है।
पांच पीढ़ियों से हराम का आरक्षण खाकर इनकी मानसिकता कुंठित हो गई है। ये कुंठित लोग किसी न किसी बहाने दिन रात सिर्फ सवर्ण की अपमानित करके,जातिवादी नफ़रत फैलाने का काम करते है इन्हें पता है कि एससीएसटी एक्ट जैसे जातिवादी इन्हें पूरी तरह कानूनी सुरक्षा दे रहा है,जातीय संगठन इनका अंध समर्थन करते हैं इसलिए बेखौफ होकर जातिवादी नफ़रत फैलाते हैं । अंतर्जातीय विवाह से जाती समाप्त करने की बात चरम मूर्खतापूर्ण विचार है । हर साल लाखों की संख्या में अंतर्जातीय विवाह होते स्वांग अम्बेडकर ने भी अंतरजातीय विवाह किया था परन्तु आज तक किसी कि भी जाति समाप्त नहीं हुई । अंतरजातीय विवाह करने के बाद भी उनकी संताने सरकारी जाति प्रमाण पत्र बनवा कर पीढ़ी दर पीढ़ी आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं । अंतर्जातीय विवाह की बात सिर्फ सवर्ण के साथ क्यों दलित जनजातियों और ओबीसी की हजारों जातियां आपस में विवाह संबंध बनाकर जातिवाद समाप्त करने का प्रयास क्यों नहीं करते क्या दलित पिछड़ो को आपस में विवाह से कोई ब्राह्मण रोका है।





सुलतानपुर,राणा प्रताप पी.जी. कॉलेज, सुलतानपुर के बी.एड. विभाग द्वारा “विद्यार्थियों में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति” विषय पर एक सारगर्भित संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अध्यापकों एवं प्रशिक्षणार्थियों ने विषय की गंभीरता पर अपने विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए असिस्टेंट प्रो. शांतिलता कुमारी ने कहा कि आत्महत्या की प्रवृत्ति का मूल कारण विद्यार्थियों में बढ़ता मानसिक दबाव, अपेक्षाओं का बोझ और अकेलेपन की भावना है, जिसे समझना व संभालना जरूरी है।
सोशल मीडिया में विद्यार्थियों की अत्यधिक सक्रियता से वास्तविक जीवन मे सामंजस्य कठिन हो रहा है। फलस्वरूप छात्रों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ रही है। वास्तविक भावनात्मक सुरक्षा की कमी आत्महत्या की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रही है। डॉ.संतोष अंश ने अपने वक्तव्य में कहा कि हरेक विद्यार्थी अद्वितीय है, इसलिए हमें तुलना से बचकर उन्हें सहयोग, सहानुभूति और भरोसे का माहौल देना चाहिए, ताकि वे कठिन परिस्थितियों से उबर सकें। आत्महत्या समाधान नहीं समस्याओं से भागने का प्रयास है।
हर एक धड़कन और हर एक सपना, किसी भी परिणाम से अधिक कीमती है। डॉ. सीमा सिंह ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पर बल देते हुए कहा कि विद्यालय और परिवार दोनों को मिलकर विद्यार्थियों में भावनात्मक स्थिरता विकसित करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।कार्यक्रम में बी.एड. प्रथम वर्ष के प्रशिक्षणार्थियों ने भी विषय पर अपने संक्षिप्त विचार व्यक्त किए। अभिषेक समय पर संवाद ही छात्र जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा है। अंशिका पाण्डेय सकारात्मक सोच और सहयोगी वातावरण विद्यार्थियों को मजबूत बनाते हैं। लक्ष्मीकांत असफलता अंत नहीं, सीखने का अवसर है, इसी संदेश को फैलाना होगा। खुशी सिंह भावनात्मक तनाव को साझा करना आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकने का पहला कदम है। अनुपम वर्मा शैक्षणिक संस्थानों में काउंसलिंग को अनिवार्य किया जाना चाहिए।
शिखा मौर्या छात्रों को अपनी समस्याएँ बताने के लिए सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए। श्वेता मौर्या सामाजिक दबाव आत्महत्या को प्रेरित करता है । आदर्श दीक्षित सहपाठियों का सहयोग कई बार जीवनरक्षक साबित हो सकता है। विभागाध्यक्ष डॉ. भारती सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान वदेने की आवश्यकता है। विद्यार्थियों को आत्महत्या से बचाने का उत्तरदायित्व सभी का है। कार्यक्रम का सफल संचालन वर्षा यादव ने किया। इस अवसर पर बी.एड. प्रथम वर्ष के सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे।
सुल्तानपुर में एक प्रॉपर्टी डीलर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में कोतवाली देहात के उचहरा गांव स्थित एक बाग में मिला है। इस मृतक की पहचान भपटा निवासी 45 वर्षीय शिवकुमार गुप्ता के रूप में हुई है।......... शिवकुमार गुप्ता हनुमानगंज के असई चौराहे पर अपने परिवार के साथ रहते था। और वह प्रॉपर्टी के काम के साथ-साथ असई चौराहे पर किराना,बर्तन और फल की दुकान भी चलाता था, जिसकी देखरेख उनकी पत्नी करती थीं। मृतक के छोटे बेटे सनी गुप्ता ने बताया कि घटना वाली रात उनके पिता दादाजी के लिए किराना दुकान से दूध और बिस्किट लाए थे। उन्होंने अपनी बहन से रोटी बनाकर रखने को कहा था और बताया था कि वे एक घंटे में लौट आएंगे।
सनी के अनुसार,उनके पिता जबरदस्ती गाड़ी की चाबी लेकर गए,जबकि वे उन्हें रात में बाहर जाने से मना कर रहे थे। सुबह पड़ोसियों के फोन से उन्हें पिता की हत्या की जानकारी मिली। तो परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है।
सनी ने बताया कि उनके पिता प्रॉपर्टी के काम के बारे में कुछ नहीं बताते थे, इसलिए उन्हें किसी पर शक नहीं है। शिवकुमार का शव घर से लगभग तीन किलोमीटर दूर भपटा और पाठक पुरवा गांवों के बीच एक बाग में मिला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
इंस्पेक्टर अखंडदेव मिश्रा ने बताया कि तहरीर मिलने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। शिवकुमार अपने चार भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। उनके दो बेटे और एक बेटी है। बड़े बेटे सुमित कुमार गुप्ता की शादी 28 नवंबर 2024 को हुई थी और वह दिल्ली में नौकरी करते हैं। घटना के बाद से पत्नी सुमन गुप्ता, बेटी शिवानी गुप्ता और पिता राम सिंगार गुप्ता का रो-रोकर बुरा हाल है। बड़े भाई अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि मेरे भाई के साथ जो घटना हुई इस सम्बन्ध में हम बहुत ज़्यादा नहीं बता सकते।
इसलिए की भाई हनुमानगंज में रहता था और हम तीन किमी दूर भपटा में रहते हैं। सुबह हम गांव में खेत में काम कर रहे थे तब हमें पता चला की भाई के साथ ये घटना घटी। घटनास्थल पर जब हम पहुंचे तो दो सौ लोगों की भीड़ लगी थी। कब निकले घर से, घटना कैसे घटी ये उनका लड़का ही बता सकता है। कोई चोट है नहीं, गाड़ी उनकी मौजूद है मौके पर। क्या किया गया कुछ पता नहीं। शिवकुमार के बड़े भाई अशोक गुप्ता एक शिक्षा मित्र हैं। शिवकुमार हनुमानगंज के एक स्वयं सहायता समूह का भी सदस्य था,जहां से उसने ऋण लिया था।
1 hour and 23 min ago
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