"प्रकृति सुरक्षित, तो ही मानव सुरक्षित": सरहुल पूजा में शामिल हुए सीएम हेमंत सोरेन, राज्य की खुशहाली की मांगी दुआ।

रांची: झारखंड के महापर्व 'सरहुल' के पावन अवसर पर आज राजधानी रांची स्थित आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर, करमटोली में भक्ति, परंपरा और उल्लास का अद्भुत नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन अपनी धर्मपत्नी सह विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन के साथ इस भव्य सरहुल पूजा महोत्सव में सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक विधि-विधान से प्रकृति की पूजा-अर्चना की और समस्त राज्यवासियों की सुख, समृद्धि एवं उन्नति की मंगलकामना की।
मांदर की थाप पर झूमे मुख्यमंत्री
महोत्सव का सबसे खास पल वह रहा जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं अपने हाथों में मांदर थाम लिया। मांदर की गूँज और पारंपरिक धुनों के बीच मुख्यमंत्री ने आदिवासी समुदाय की खुशियों को साझा किया। उनके साथ कृषि मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की और विधायक कल्पना सोरेन ने भी मांदर की थाप पर कदम मिलाए, जिससे वहां मौजूद हजारों छात्र-छात्राओं और श्रद्धालुओं का उत्साह सातवें आसमान पर पहुँच गया।
"प्रकृति ही आदि और अंत है": मुख्यमंत्री का संबोधन
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "प्रकृति से ही सभी चीजों का सृजन होता है और अंत में प्रकृति में ही विलय होता है। अगर प्रकृति नहीं होती, तो मानव जीवन और इस संसार के किसी भी जीव-जंतु की कल्पना करना असंभव था।"
मुख्यमंत्री ने आधुनिक युग की आपा-धापी का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से हमें ऐसी परंपराएं सौंपी हैं, जहाँ हम एक छत या एक पेड़ के नीचे एकत्रित होकर अपनी जड़ों से जुड़ते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि इन समृद्ध परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुँचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
मुख्यमंत्री ने भौतिकवादी युग में प्रकृति की रक्षा को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है, तब आदिवासी समाज की प्रकृति-पूजा की यह व्यवस्था पूरी दुनिया को रास्ता दिखाती है। "प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी हमारा अस्तित्व बचेगा," मुख्यमंत्री के इस संदेश ने वहां मौजूद युवाओं को प्रेरित किया।
शुभकामनाओं का दौर
कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और विधायक कल्पना सोरेन ने भी समस्त झारखंड वासियों को सरहुल की बधाई दी। उन्होंने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि झारखंड की पहचान और गौरव का प्रतीक है।
आदिवासी कॉलेज छात्रावास का ऐतिहासिक महत्व
मुख्यमंत्री ने अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि वे हर वर्ष इस प्रांगण में आते रहे हैं और भविष्य में भी यहाँ के छात्र-छात्राओं से मिलने आते रहेंगे। करमटोली का यह छात्रावास परिसर वर्षों से सरहुल महोत्सव का मुख्य केंद्र रहा है, जहाँ राज्य के कोने-कोने से आए आदिवासी छात्र अपनी संस्कृति को जीवंत रखते हैं।
4 hours ago
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