ठंड व बारिश से फसल नुकसान पर किसानों की चिंता, मोहम्मदपुर सकिश्त बहसूमा में हुई अहम बैठक

बहसूमा। मेरठ क्षेत्र में लगातार पड़ रही ठंड और हो रही बारिश के चलते किसानों की फसलों को हुए भारी नुकसान को लेकर पूर्व डायरेक्टर चौधरी राजपाल सिंह के पुत्र अमित चौधरी के आवास पर एक महत्वपूर्ण चर्चा बैठक आयोजित की गई। बैठक में किसानों ने मौसम की मार से बर्बाद हो रही फसलों को लेकर गहरी चिंता जताई और शासन-प्रशासन से राहत की मांग की।

बैठक में बसपा सरकार में रहे चर्चित चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि असमय ठंड और बारिश से सरसों, आलू सहित अन्य रबी फसलों को गंभीर नुकसान हुआ है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की।

चर्चा के दौरान पत्रकार परविंदर चौधरी ने कहा कि किसानों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए इसे जनप्रतिनिधियों और उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि पीड़ित किसानों को समय रहते राहत मिल सके। उन्होंने किसानों से एकजुट होकर अपनी बात मजबूती से रखने का आह्वान किया।

बैठक में प्रवेश कुमार, परविंदर खंगवाल, जोगिंदर चौधरी, शौकिंदर चौधरी, बहसूमा पप्पू चौधरी, कपिल कुमार सहित काफी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों ने बताया कि मौसम की मार से खेतों में खड़ी फसलें बिछ गई हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

अंत में सभी ने एक स्वर में मांग की कि शासन द्वारा जल्द से जल्द नुकसान का आकलन कराकर किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, जिससे उन्हें इस प्राकृतिक आपदा से उबरने में मदद मिल सके।
माल ढुलाई और नदी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी

कोच्चि, केरल, 23 जनवरी, 2026: अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद (आईडब्ल्यूडीसी 3.0) की तीसरी बैठक भारत के अंतर्देशीय जल परिवहन नेटवर्क के विस्तार, प्रमुख अवसंरचना निवेशों को मंजूरी देने और देश की नदियों की पूरी आर्थिक क्षमता को उजागर करने के लिए केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने के लिए एक व्यापक रोडमैप के साथ संपन्न हुई। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सरबानंदा सोनोवाल की अध्यक्षता में हुई इस पूर्ण दिवसीय बैठक में हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री; बिहार सरकार के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार; नागालैंड सरकार के विद्युत और संसदीय कार्य मंत्री के. जी. केन्ये; अरुणाचल प्रदेश सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री ओजिंग तासिंग; और पंजाब सरकार के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल; उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह भी उपस्थित थे। यह बैठक सतत और कुशल लॉजिस्टिक के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में अंतर्देशीय जल परिवहन को मजबूत करने की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई। आईडब्ल्यूडीसी 3.0 ने हरित परिवहन को गति देने, बहुआयामी लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने और नदी आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की पहचान की। केरल, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा और तेलंगाना में नदी क्रूज जेटियों सहित 150 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई, जो देश भर में क्रूज पर्यटन सर्किट के विस्तार में सहायक होंगी। परिषद ने आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी (रा.ज.-4) पर स्थित मुक्त्याला और हरिश्चंद्रपुरम में रो-रो और कार्गो टर्मिनलों के विकास की घोषणा की जिससे 150 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ कम दूरी के कार्गो परिवहन को मजबूती मिलेगी। जम्मू और कश्मीर में झेलम नदी (रा.ज.49) पर तटवर्ती सुविधाओं को भी यात्री परिवहन और पर्यटन अवसंरचना को समर्थन देने के लिए मंजूरी दी गई। नौगम्यता, सुरक्षा और साल भर परिचालन को बेहतर बनाने के लिए ₹465 करोड़सेअधिककीपरिसंपत्तिखरीदकोमंजूरीदीगई।इनमेंकेरलमेंसर्वेक्षणजलयान; बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में रो-पैक्स बर्थिंग जेट्टी; उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में फ्लोटिंग पोंटून और क्विक पोटून ओपनिंग सिस्टम; हाइब्रिड सर्वेक्षण जलयान; उभयचर और कटर सक्शन ड्रेजर; और टग-बार्ज इकाइयां शामिल हैं। परिषद ने 900 करोड़ रुपये से अधिक की कई बड़ी नई परियोजनाओं को भी मंजूरी दी, जिनमें कोच्चि में स्लिपवे सुविधा का विकास, ओडिशा (25) और पूर्वोत्तर (85) में 110 जेट्टी का निर्माण, जम्मू-कश्मीर में 10 हाइब्रिड इलेक्ट्रिक जलयानों की तैनाती और महाराष्ट्र में राष्ट्रीय नदी यातायात और नौवहन प्रणाली (एनआरटीएनएस) का कार्यान्वयन शामिल है। असम के लिए, आईडब्ल्यूडीसी ने गुवाहाटी के उजान बाजार घाट पर 70 करोड़ रुपये के क्रूज टर्मिनल के विकास और बोगीबील तक 144 करोड़ रुपये की एप्रोच रोड संपर्क परियोजना  ब्रह्मपुत्र नदी (रा.ज.-2) पर डिब्रूगढ़ में नदी बंदरगाह का निर्माण असम के अंतर्देशीय जलमार्ग अवरंचना ढांचे और पर्यटन क्षमता को और मजबूत करेगा। परिषद को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतर्देशीय जलमार्ग भारत के परिवहन और लॉजिस्टिक परिवर्तन के एक कार्यनीतिक स्तंभ के रूप में उभरे हैं। हमारे ऊर्जावान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अंतर्देशीय जलमार्गों को विशेष प्रोत्साहन दिया है, जिससे सड़कों पर भीड़ कम हुई है, लॉजिस्टिक लागत में कमी आई है और व्यापार करने में सुगमता बढ़ी है। इस दूरदृष्टि से प्रेरित होकर, नदियों को अब केवल प्राकृतिक संसाधन के रूप में नहीं बल्कि विकास, स्थिरता और संपर्क को गति देने वाली आर्थिक जीवनरेखा के रूप में देखा जाता है। बैठक में पिछले दशक में इस क्षेत्र के तीव्र विस्तार की समीक्षा की गई। राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल ढुलाई 2013-14 में 18 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 145.84 मिलियन टन हो गई है, जबकि परिचालन में मौजूद राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या तीन से बढ़कर 32 हो गई है, यानी दस गुना वृद्धि हुई है। लक्जरी नदी क्रूज जलयानों की संख्या पांच से बढ़कर 25 हो गई है, जो उद्योग, निवेशकों और राज्य सरकारों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। केरल के विशाल बैकवाटर और नहर नेटवर्क को अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए एक प्रमुख अवसर के रूप में उजागर किया गया। परिषद ने भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा गुवाहाटी, वाराणसी, पटना, तेजपुर, डिब्रूगढ़ सहित 18 शहरों मेंशहरी जल परिवहन के विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। बैठक में इस बात पर फिर से जोर दिया गया कि अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन का सबसे अधिक ईंधन-कुशल, लागत-प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल साधन बने हुए हैं, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने, सड़कों और रेलवे पर भीड़भाड़ कम करने और समग्र लॉजिस्टिक लागत को घटाने में सहायक हैं। नदी क्रूज पर्यटन को समुद्री अर्थव्यवस्था के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक के रूप में पहचाना गया, जिसके लिए सरकार आधुनिक क्रूज टर्मिनल, उन्नत नौवहन प्रणाली और समर्पित क्रूज सर्किट विकसित कर रही है। "हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व में, भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग हरित विकास, डिजिटल परिवर्तन और पर्यटन आधारित विकास के शक्तिशाली कारक के रूप में उभर रहे हैं। माल ढुलाई, यात्री सेवाओं और क्रूज पर्यटन में तीव्र विस्तार के साथ, हमारी नदियाँ सतत गतिशीलता और आर्थिक अवसरों का इंजन बन रही हैं। स्वच्छ ऊर्जा से चलने वाले जलयानों, स्मार्ट नेविगेशन प्रणालियों और विश्व स्तरीय यात्री अवसंरचना को एकीकृत करके, हम लॉजिस्टिक लागत को कम करने, उत्सर्जन में कटौती करने और नई आजीविका सृजित करने के लिए जलमार्गों की पूरी क्षमता का उपयोग कर रहे हैं। कोच्चि वाटर मेट्रो जैसी पहलों की सफलता दर्शाती है कि नदियाँ शहरी गतिशीलता को कैसे बदल सकती हैं, और हम गुवाहाटी, वाराणसी, पटना, तेजपुर और डिब्रूगढ़ सहित अन्य शहरों में इस मॉडल को दोहराने के लिए प्रतिबद्ध हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि भारत के जलमार्ग विकसित भारत के पथ पर समावेशी विकास को गति प्रदान करें," सोनोवाल ने कहा। पूर्वोत्तर क्षेत्र पर विशेष जोर दिया गया, जहां जलमार्ग परियोजनाओं से संपर्क, व्यापार, पर्यटन और नदी किनारे बसे समुदायों की आजीविका में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। सरकार ने पूर्वोत्तर में 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से 85 घाटों का विकास करने की योजना बनाई है, जिससे क्षेत्रीय लॉजिस्टिक एकीकरण को मजबूती मिलेगी।  “भारतकीअंतर्देशीयजलमार्गयोजनामेंपूर्वोत्तरकाकेंद्रीयस्थानहै।अपनेविशालनदीनेटवर्ककेसाथ, यह क्षेत्र सतत परिवहन, व्यापार और पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता रखता है। 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से 85 जेटियों का विकास संपर्क को काफी मजबूत करेगा, क्षेत्रीय लॉजिस्टिक को एकीकृत करेगा और नदी किनारे बसे समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा करेगा। अंतर्देशीय जलमार्ग न केवल पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय बाजारों के करीब लाएगा बल्कि विकास, समृद्धि और क्षेत्रीय एकीकरण के प्रवेश द्वार के रूप में इसकी भूमिका को भी उजागर करेगा,” सर्वानंदा सोनोवाल। असम के लिए, परिषद ने गुवाहाटी के उजान बाजार घाट पर 70 करोड़ रुपये के क्रूज टर्मिनल और डिब्रूगढ़ के बोगीबील नदी बंदरगाह तक 144 करोड़ रुपये की पहुंच मार्ग संपर्क परियोजना को मंजूरी दी है। ये परियोजनाएं राज्य के अंतर्देशीय जलमार्ग अवसंरचना को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेंगी, नदी क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देंगी और अंतिम-मील संपर्क (कनेक्टिविटी) में सुधार करेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्वोत्तर को विकास के अष्ट लक्ष्मी इंजन के रूप में देखने के दृष्टिकोण से प्रेरित ये पहल ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे व्यापार, रोजगार और सतत विकास के नए अवसर पैदा करेंगी। (असम के लिए) परिषद ने सरकार की दूरदर्शी प्राथमिकताओं की पुष्टि की, जिनमें हरित और संकर जहाजों की तैनाती, डिजिटल नेविगेशन और यातायात प्रबंधन प्रणालियों का विस्तार, आधुनिक अंतर्देशीय टर्मिनलों का विकास, जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत सुविधाओं को सुदृढ़ करना और समुद्री कौशल विकास को बढ़ावा देना शामिल है। बैठक में सरल शहरी जल परिवहन प्रणालियों के निर्माण, माल परिवहन दक्षता में सुधार, यात्री आवागमन के लिए हरित और संकर जहाजों को बढ़ावा देने, नदी क्रूज पर्यटन का विस्तार करने और डिजिटल और टिकाऊ प्रथाओं को सुदृढ़ करने पर विस्तृत विचार-विमर्श भी हुआ। राज्यों द्वारा चल रही और प्रस्तावित अंतर्देशीय जल परिवहन परियोजनाओं के संबंध में उठाई गई चिंताओं की समीक्षा की गई, जिसमें समन्वित प्रयासों के माध्यम से कार्यान्वयन में तेजी लाने पर जोर दिया गया। आइडब्ल्यूडीसी3.0, 2024 में आयोजित आइडब्ल्यूडीसी1.0 और 2025 में आयोजित आइडब्ल्यूडीसी2.0 के दौरान रखी गई नींव पर आधारित है, जिसमें स्थिरता, प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान और परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस बैठक में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार, अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आइडब्ल्यूएआइ) के अध्यक्ष सुनील पालीवाल, उपाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह सहित केंद्र और राज्य सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और विशेषज्ञ उपस्थित थे। बैठक में अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद (आइडब्ल्यूडीसी) 1.0 और 2.0 के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की गई और अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के अगले चरण की रूपरेखा तैयार की गई। दिन भर चली इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों की उपलब्धियों की समीक्षा की गई, प्रमुख निवेशों और परियोजनाओं की घोषणा की गई और देश भर में अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप प्रस्तुत किया गया। अंतर्राष्ट्रीय जल परिवहन परिषद (आईडब्ल्यूडीसी 3.0) का समापन केंद्र और राज्यों द्वारा अंतर्देशीय जल परिवहन को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने, स्वच्छ परिवहन समाधानों को प्रोत्साहित करने और नदियों को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में स्थापित करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। बैठक में अंतर्देशीय जलमार्गों को माल और यात्रियों दोनों के लिए परिवहन के एक रुचिकर, भविष्य के लिए तैयार साधन के रूप में पुनः स्थापित किया गया, जो स्वच्छ परिवहन, बेहतर लॉजिस्टिक्स और एक मजबूत भारत में योगदान देगा। भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग ईंधन-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन साधन उपलब्ध कराकर सड़क और रेल नेटवर्क पर भीड़ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 23 राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 111 राष्ट्रीय जलमार्गों के साथ, अंतर्देशीय जलमार्ग रो-रो वाहन तथा, क्रूज पर्यटन जैसी पहलों को तेजी से समर्थन दे रहे हैं।पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन आइडब्ल्यूएआइ, राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास, रखरखाव और विनियमन के लिए जिम्मेदार नोडल एजेंसी बनी हुई है।
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में अब तक का सर्वाधिक तिमाही एनआईआई 1,000 करोड़ रुपए

* वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में वितरण रिकॉर्ड स्तर 8,293 करोड़ रुपए
* जमा 7.7% तिमाही दर तिमाही बढ़ी, ऋण पुस्तिका वृद्धि 7.1% तिमाही दर तिमाही से आगे
* सकल ऋण पुस्तिका (दिसंबर’25) 37,057 करोड़ रुपए, 21.6% सालाना वृद्धि; जमा 42,223 करोड़ रुपए, 22.4% सालाना वृद्धि
* सुरक्षित ऋण पुस्तिका 17,825 करोड़ रुपए (दिसंबर’25), 48.7% सालाना वृद्धि; कुल ऋण में सुरक्षित ऋण का हिस्सा 48.1%
* माइक्रो बैंकिंग सकल ऋण पुस्तिका 19,372 करोड़ रुपए (दिसंबर’25); 4.1% सालाना वृद्धि
*मुंबई, , जनवरी, 2026* :उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड [BSE: 542904; NSE: UJJIVANSFB] ने आज 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही के लिए अपने वित्तीय परिणामों की घोषणा की।
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक- व्यवसाय प्रदर्शन सारांश
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही एवं वित्त वर्ष 26 के 9 महीने
❖ परिसंपत्तियाँ
सकल ऋण पुस्तिका 37,057* करोड़ रुपए (दिसंबर’25), 21.6% सालाना / 7.1% तिमाही दर तिमाही वृद्धि
सुरक्षित ऋण पुस्तिका का हिस्सा 48.1% (दिसंबर’25) बनाम 39.3% (दिसंबर’24) और 46.8% (सितंबर’25)
अब तक का सर्वाधिक तिमाही वितरण 8,293 करोड़ रुपए; 54.7% सालाना / 4.5% तिमाही दर तिमाही वृद्धि
माइक्रो बैंकिंग वितरण 4,688 करोड़ रुपए; 62.4% सालाना / 10.1% तिमाही दर तिमाही वृद्धि
❖ संग्रह एवं परिसंपत्ति गुणवत्ता
समूह एवं व्यक्तिगत ऋण बकेट-एक्स की संग्रह दक्षता में सुधार; दिसंबर’25 में 99.7%
जोखिमग्रस्त पोर्टफोलियो*/जीएनपीए*/एनएनपीए* क्रमशः 3.98% / 2.39% / 0.58% (दिसंबर’25); जबकि दिसंबर’24 में 5.36% / 2.68% / 0.66%
प्रोविजन कवरेज रेशियो दिसंबर’25 में बढ़कर 76%
❖ जमा
जमा 42,223 करोड़ रुपए (दिसंबर’25), 22.4% सालाना / 7.7% तिमाही दर तिमाही वृद्धि
कासा 11,535 करोड़ रुपए; 33.2% सालाना वृद्धि, कासा अनुपात 27.3% (दिसंबर’25)
रिटेल टर्म डिपॉजिट^ + कासा 29,395 करोड़ रुपए; 16.3% सालाना वृद्धि
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में फंड की लागत (सीओएफ) 7.09%, वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही की तुलना में 25 बीपीएस कम

❖ वित्तीय प्रदर्शन
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में अब तक का सर्वाधिक एनआईआई 1,000 करोड़ रुपए; 12.8% सालाना वृद्धि
एनआईएम 33 बीपीएस बढ़कर वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में 8.23%
कॉस्ट-टू-इनकम अनुपात तिमाही के लिए 66% पर स्थिर; हालाँकि नए श्रम संहिता के तहत एकमुश्त ग्रेच्युटी खर्च समायोजन के बाद 65% से नीचे
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में पीएटी 186 करोड़ रुपए; 70.8% सालाना वृद्धि
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में आरओए 1.5% (सालाना 45 बीपीएस वृद्धि); आरओई 11.5% (सालाना 423 बीपीएस वृद्धि)
❖ पूँजी एवं तरलता
पूँजी पर्याप्तता अनुपात 21.6%
मजबूत तरलता; दिसंबर’25 के लिए औसत दैनिक एलसीआर 165.6%
* जहाँ लागू हो, शर्तें/परिभाषाएँ बैंक की रिपोर्टिंग के अनुसार।
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ श्री संजीव नौटियाल ने कहा, “भारत का व्यापक आर्थिक परिदृश्य अनुकूल बना हुआ है। वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में 8.2% की मजबूत जीडीपी वृद्धि ने ऋण वृद्धि और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार के लिए सहायक माहौल तैयार किया है।
उज्जीवन एसएफबी में जमा वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में 7.7% तिमाही दर तिमाही और 22.4% सालाना बढ़कर 42,223 करोड़ रुपए हो गई, जबकि दिसंबर’25 के अंत में क्रेडिट–डिपॉजिट अनुपात 88% रहा। गुणवत्ता वाले ‘न्यू-टू-बैंक’ ग्राहकों को जोड़ने तथा ‘एग्ज़िस्टिंग-टू-बैंक’ ग्राहकों से बेहतर जुड़ाव के लिए समर्पित चैनलों पर स्पष्ट फोकस के चलते कासा अनुपात लगातार दो तिमाहियों से 27% से ऊपर बना हुआ है। वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में किए गए जमा दरों में कटौती और बेहतर तरलता प्रबंधन के कारण फंड की लागत में गिरावट का रुझान जारी रहा। तिमाही के लिए सीआईएफ 7.08% रहा, जो सालाना आधार पर 49 बीपीएस कम है।
तिमाही के दौरान सकल ऋण पुस्तिका 7.1% तिमाही दर तिमाही और 21.6% सालाना बढ़कर 37,057 करोड़ रुपए हो गई, जिसे 8,293 करोड़ रुपए के अब तक के सर्वाधिक तिमाही वितरण का सहारा मिला। यह असुरक्षित और सुरक्षित, दोनों श्रेणियों के उत्पादों में सर्वांगीण प्रदर्शन का परिणाम रहा। आवास, एमएसएमई, गोल्ड, वाहन और कृषि ऋण जैसे सुरक्षित पोर्टफोलियो हमारी दीर्घकालिक विविधीकरण रणनीति के अनुरूप विस्तार करते रहे, जिससे दिसंबर’25 तक सुरक्षित ऋण का हिस्सा बढ़कर 48% हो गया।
बैंक का पीएआर 4% से नीचे रहा। वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में स्लिपेज घटकर 221 करोड़ रुपए रहा, जबकि दिसंबर’25 के अंत में जीएनपीए 2.39% और एनएनपीए 0.58% रहा। तिमाही के लिए क्रेडिट लागत ₹195 करोड़ रही और हमें मौजूदा परिचालन तिमाही में इसमें और कमी की उम्मीद है। दिसंबर’25 तक पीसीआर बढ़कर 76% हो गया। माइक्रोफाइनेंस बकेट-एक्स की संग्रह दक्षता दिसंबर’25 में 99.7% तक पहुँचने के साथ प्रावधान आवश्यकताएं घटने लगी हैं।
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में हमारी नेट इंटरेस्ट मार्जिन (एमआईएम) 33 bps तिमाही दर तिमाही बढ़कर 8.23% हो गई, जिसे कम CoF, अनुकूल उत्पाद मिश्रण, कम ब्याज रिवर्सल और सीआरआर में ढील का समर्थन मिला। हमने तिमाही में ₹1,000 करोड़ का अब तक का सर्वाधिक एनआईआई दर्ज किया। इसके परिणामस्वरूप लाभप्रदता मजबूत हुई और वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में कर पश्चात लाभ (पीएटी) ₹186 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 70.8% की स्वस्थ वृद्धि दर्शाता है। नवंबर’25 से लागू नए श्रम संहिता के तहत एकमुश्त ग्रेच्युटी खर्च को समायोजित करने पर हमारा पीएटी लगभग ₹200 करोड़ होता। वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में 1.5% का आरओए और 11.5% का आरओई हमारे रिटर्न मेट्रिक्स में निरंतर सुधार को रेखांकित करता है।
21.6% की स्वस्थ पूंजी पर्याप्तता, मजबूत तरलता बफर और वृद्धि के प्रति अनुशासित दृष्टिकोण के साथ बैंक आने वाली तिमाहियों में टिकाऊ और लाभकारी वृद्धि देने के लिए सुदृढ़ स्थिति में है।”
भारत ने दुनिया को चौंकाया: UN में ईरान का दिया साथ, पश्चिमी देशों को दिखाया आईना

#indiasupportsiranatnhrcrejectswestern_pressure

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यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट काउंसिल (UNHRC) में भारत की कूटनीति में बड़ा बदलाव देखा गया। UNHRC में भारत ने डंके की चोट पर ईरान का साथ दिया। भारत ने ईरान पर पश्चिमी देशों के प्रस्ताव के खिलाफ वोट डाला। भारत के साथ साथ चीन और पाकिस्तान ने भी प्रस्ताव के खिलाफ 'NO' वोट किया है। हालांकि भारत, चीन और पाकिस्तान के समर्थन के बावजूद UNHRC में ईरान के खिलाफ प्रस्ताव पास हो गया है।

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने शुक्रवार (23 जनवरी 2026) को ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर हुई कार्रवाई को लेकर अपनी जांच को और गहरा करने का फैसला किया है। इसमें बच्चों सहित हजारों लोगों के मारे जाने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव में ईरान से "क्रूर दमन" खत्म करने की मांग भी की गई है।

भारत के साथ चीन-पाकिस्तान ने भी NO में वोट किया

UNHRC में कुल 47 सदस्य देश हैं, जिन्होंने इस प्रस्ताव के जरिए ईरान में "सुरक्षा बलों द्वारा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई के अभूतपूर्व पैमाने" पर चिंता जताई है। ईरान के खिलाफ लाए गये पश्चिमी देशों के प्रस्ताव के समर्थन में 25 वोट, विरोध में 7 वोट और 15 देशों ने वोटिंग से दूर रहने का फैसला किया है। भारत, चीन और पाकिस्तान ने विरोध में यानि NO में वोट किया है।

भारत आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ

पश्चिमी देश और नाटो सदस्य जैसे अमेरिका, फ्रांस और दक्षिण कोरिया ईरान के खिलाफ थे। वे सख्त कार्रवाई चाहते थे। लेकिन भारत ने डंके की चोट पर ईरान का साथ दिया। भारत ने साफ कर दिया कि वह ईरान के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ है। इससे भारत की विदेश नीति की ताकत दिखी, जो संतुलित और स्वतंत्र है। पश्चिमी देशों को लगा कि वे आसानी से ईरान को अलग-थलग कर लेंगे, लेकिन भारत के वोट ने उनके प्लान पर पानी फेर दिया। भारत की तरह ही चीन ने भी ईरान का साथ दिया है।

पश्चिमी दबाव के आगे नहीं झुकता भारत

भारत की यह नीति उसके रणनीतिक हितों से जुड़ी है, जिसमें ईरान से ऊर्जा आयात, चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना शामिल है। भारत हमेशा जोर देता है कि मानवाधिकार के मुद्दों पर राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से बचा जाना चाहिए। इस वोट से भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को दोहराया, जिसमें वह पश्चिमी दबाव के आगे नहीं झुकता और दोस्त देशों के साथ खड़ा रहता है। ईरान के साथ भारत के संबंध मजबूत हैं, और यह कदम दोनों देशों के बीच विश्वास को और मजबूत करता है।

लंदन में गूँजी 'झारखण्ड' की अस्मिता: 'झारखण्ड @25' कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने साझा किया विकास का वैश्विक रोडमैप

लंदन / रांची, 24 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में लंदन में आयोजित ‘झारखण्ड कार्यक्रम ने एक नया इतिहास रच दिया है। यह संभवतः भारत का पहला ऐसा अवसर है जब किसी राज्य सरकार ने सात समंदर पार अपने छात्रों, प्रवासियों और उद्यमियों के लिए इतने भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया हो।

मरांग गोमके स्कॉलर्स की दिखी सक्रिय भागीदारी

लंदन के इस विशेष कार्यक्रम में झारखंड की मरांग गोमके ओवरसीज स्कॉलरशिप और चेवनिंग छात्रवृत्ति के तहत यूके की टॉप यूनिवर्सिटीज में पढ़ रहे छात्र, शोधकर्ता, विभिन्न विश्वविद्यालयों के फैकल्टी और सफल उद्यमियों सहित लगभग 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। अपनी मिट्टी से दूर विदेशी धरती पर झारखंडी युवाओं के इस हुजूम ने राज्य की बौद्धिक प्रगति का प्रदर्शन किया।

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"जड़ों से जुड़कर, भविष्य की ओर अग्रसर" – मुख्यमंत्री

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्य के संघर्ष और भविष्य के विजन को रेखांकित किया। उन्होंने कहा:

"यह कार्यक्रम 25 वर्षों की उपलब्धियों से आगे बढ़कर अनंत संभावनाओं की कहानी है। हमारी विकास यात्रा मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और दिशोम गुरुजी के आत्मसम्मान और न्याय के आदर्शों से प्रेरित है। झारखंड प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर समावेशी विकास के पथ पर निरंतर बढ़ता रहेगा।"

लंदन में सादरी गीतों की गूँज और सांस्कृतिक गौरव

कार्यक्रम स्थल पूरी तरह झारखंडी रंग में रंगा नजर आया। मरांग गोमके स्कॉलर्स और प्रवासी झारखंडियों ने पारंपरिक नृत्य और सादरी गीतों की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा हॉल झारखंड की संस्कृति से गुंजायमान हो उठा। छात्रों ने मुख्यमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे राज्य सरकार की छात्रवृत्ति ने उनके वैश्विक सपनों को हकीकत में बदला है।

प्रमुख आकर्षण:

ऐतिहासिक पहल: किसी राज्य द्वारा विदेश में अपनी अस्मिता और विकास पर केंद्रित पहला बड़ा आयोजन।

युवा शक्ति: उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं ने मुख्यमंत्री को राज्य के विकास में भागीदार बनने का भरोसा दिया।

संस्कृति का संरक्षण: आधुनिकता के बीच अपनी परंपरा और जड़ों के प्रति गर्व का भाव।

विद्यार्थी केवल परीक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि अपने कैरियर को लेकर स्पष्ट दृष्टि बनाए- शिवम सिंह
“मंथन” में 931 परीक्षार्थियों को मिला परीक्षा और कैरियर मार्गदर्शन*

अमेठी,अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा अमेठी जनपद में यूपी बोर्ड एवं सीबीएसई बोर्ड के हाई स्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा में सम्मिलित होने जा रहे विद्यार्थियों के लिए “मंथन " कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह मंच विद्यार्थियों की परीक्षा संबंधी जिज्ञासाओं, मानसिक तनाव और कैरियर विकल्पों पर समाधान प्रदान करने हेतु समर्पित रहा। कार्यक्रम में अमेठी जनपद के 931 परीक्षार्थी शामिल हुए। विद्यार्थियों के प्रश्नों का समाधान उप जिलाधिकारी अमेठी पंकज मिश्र, प्रान्त मंत्री शिवम सिंह तथा प्रान्त उपाध्यक्ष डॉ. संतोष अंश द्वारा किया गया। प्रान्त उपाध्यक्ष डॉ. संतोष अंश ने प्रास्ताविकी रखते हुए कहा कि आज विद्यार्थियों की आँखों में जो उत्सुकता, जिज्ञासा और आत्मविश्वास झलक रहा है, वह इस बात का प्रमाण है कि भारत का भविष्य जागरूक, कर्मठ और लक्ष्यबद्ध है। “मंथन” नाम स्वयं में सार्थक है। मंथन से अमृत निकलता है, और आज यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा का अमृत खोजने का प्रयास है। परीक्षा का समय हर विद्यार्थी के जीवन में निर्णायक पड़ाव होता है। यह केवल पाठ्यपुस्तकों की परीक्षा नहीं, बल्कि समय-प्रबंधन, धैर्य, मनोबल और आत्मअनुशासन की भी परीक्षा है। कई बार विद्यार्थी तनाव, भ्रम और भय से घिर जाते हैं। ऐसे समय में सही मार्गदर्शन दीपक की भाँति रास्ता दिखाता है। “मंथन” उसी दीपक को प्रज्वलित करने का मंच है। आज का युग प्रतिस्पर्धा का है, परंतु प्रतिस्पर्धा में वही सफल होता है जो स्वयं से प्रतिस्पर्धा करना सीखता है। अंक महत्त्वपूर्ण हैं, किंतु उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण है दृष्टि, दिशा और दृढ़ संकल्प। यही कारण है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद निरंतर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु ऐसे कार्यक्रम आयोजित करती रही है। याद रखिए, परीक्षा जीवन का पड़ाव है, मंज़िल नहीं। असफलता अंत नहीं, अनुभव है। परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता। अपने भीतर छिपी क्षमता को पहचानिए। लक्ष्य तय कीजिए। विद्यार्थी नियमित अभ्यास को जीवन का संस्कार बनायें और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य का भाव सदैव जागृत रखिए। मुख्य अतिथि उप जिलाधिकारी पंकज मिश्र ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि परीक्षा केवल अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मअनुशासन, धैर्य और समय-प्रबंधन की परीक्षा भी है। नियमित अध्ययन, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। विद्यार्थी तनाव से मुक्त होकर अपनी क्षमता पर विश्वास रखें। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें, बल्कि उनका मनोबल बढ़ाएँ। मुख्य वक्ता प्रान्त मंत्री शिवम सिंह ने परीक्षार्थियों को संबोधित करते हुए कि आज का विद्यार्थी केवल परीक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि अपने कैरियर को लेकर स्पष्ट दृष्टि बनाए। विज्ञान, वाणिज्य, कला के साथ-साथ तकनीकी और स्टार्टअप के क्षेत्र में भी अपार संभावनाएँ हैं। सही मार्गदर्शन और परिश्रम से विद्यार्थी राष्ट्र निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य तय कर निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा दी। प्रश्न –उत्तर सत्र के महत्वपूर्ण प्रश्न में, प्रश्न 1 परीक्षा में तनाव कैसे कम करें? उत्तर- समय-सारणी बनाकर पढ़ाई करें, पर्याप्त नींद लें और स्वयं पर विश्वास रखें। प्रश्न 2 यदि अपेक्षित अंक न आएँ तो क्या करें? उत्तर- आत्मविश्लेषण करें, हार न मानें, आगे बेहतर प्रयास करें। जीवन में अनेक अवसर उपलब्ध हैं। प्रश्न 3 बोर्ड परीक्षा के बाद कैरियर चयन कैसे करें? उत्तर- अपनी रुचि, क्षमता और उपलब्ध अवसरों का मूल्यांकन कर मार्गदर्शन लेकर निर्णय लें। प्रश्न 4 परीक्षा में समय प्रबंधन कैसे करें? उत्तर- प्रश्न पत्र पढ़कर उत्तर लिखने की प्राथमिकता तय करें और निर्धारित समय में संतुलन बनाए रखें।कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को परीक्षा-सफलता के साथ कैरियर-दृष्टि और आत्मविश्वास प्रदान करना रहा। “मंथन” कार्यक्रम वास्तव में जिज्ञासा, समाधान और प्रेरणा का सशक्त मंच सिद्ध हुआ। कार्यक्रम में विभाग संगठन मंत्री कौतुक, प्रान्त सह मंत्री युवराज, प्रान्त कार्यसमिति सदस्य सुबोध, जिला प्रमुख डॉ. धनंजय सिंह, तेजस्व पाण्डेय, जिला संयोजक आदित्य सिंह, देवांश तिवारी, शिखर पाठक सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व विद्यार्थी उपस्थित रहे।
जहानाबाद को मिली बड़ी सौगात, कुर्मा संस्कृति मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का हुआ भव्य उद्घाटन
बिहार के जहानाबाद जिले को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी सौगात मिली है। बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कुर्मा संस्कृति मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का विधिवत उद्घाटन किया। ग्रामीण क्षेत्र में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त इस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की शुरुआत से न केवल जहानाबाद, बल्कि पूरे मगध प्रमंडल के लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। उद्घाटन समारोह में बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान सहित कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला और इसे क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया गया। पूरे मगध प्रमंडल के लिए गर्व का क्षण : मंगल पांडे
सभा को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि कुर्मा संस्कृति मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का उद्घाटन केवल जहानाबाद जिले के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मगध प्रमंडल के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की लंबे समय से आवश्यकता थी, जिसे अब साकार किया गया है।
मेडिकल कॉलेज की स्थापना से इलाज के साथ-साथ मेडिकल शिक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र के युवाओं को अपने ही जिले में चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
आयुष्मान भारत योजना से जोड़े जाने पर सरकार देगी पूरा सहयोग स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार इस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से आग्रह किया कि इसे शीघ्र आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जाए, ताकि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त इलाज का लाभ मिल सके।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार की ओर से पूरा समर्थन रहेगा, जिससे मरीजों को निःशुल्क उपचार मिलेगा और अस्पताल को भी सरकारी भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाएगा।
फ्री मेडिकल कैंप में 500 मरीजों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण
उद्घाटन समारोह के अवसर पर मेडिकल कॉलेज परिसर में फ्री हेल्थ कैंप का भी आयोजन किया गया। इस कैंप में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए करीब 500 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से मरीजों को मुफ्त दवाइयाँ और आवश्यक जांच सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर—दोनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार निजी क्षेत्र के सहयोग से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। जटिल प्रक्रियाओं को सरल बनाकर हर वर्ष नए मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृति दी जा रही है, ताकि राज्य में डॉक्टरों की मजबूत टीम तैयार हो सके और आम लोगों को इलाज में अधिक सहूलियत मिल सके। स्वास्थ्य क्रांति की शुरुआत
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने अस्पताल परिसर का निरीक्षण किया और उपलब्ध अत्याधुनिक सुविधाओं की सराहना की। स्थानीय लोगों ने इस पहल को जहानाबाद और पूरे मगध प्रमंडल के लिए स्वास्थ्य क्रांति की शुरुआत बताया।
धर्मेंद्र प्रताप सिंह (पप्पू मड़हा) का आकस्मिक निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

गोंडा। करनैलगंज तहसील क्षेत्र के परसपुर विकासखंड अंतर्गत आंटा गांव निवासी तथा पूरे जनपद में पप्पू मड़हा के नाम से चर्चित धर्मेंद्र प्रताप सिंह (54 वर्ष) का हार्ट अटैक से आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद परिजन उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके असामयिक निधन से परिवार, समर्थकों और शुभचिंतकों में गहरा शोक व्याप्त है। धर्मेंद्र प्रताप सिंह सरल स्वभाव, मिलनसार और खुशमिजाज व्यक्तित्व के धनी थे। वे कर्नलगंज विधानसभा से पूर्व प्रत्याशी रह चुके थे तथा परसपुर के पूर्व ब्लाक प्रमुख के रूप में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी थीं। सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण वे क्षेत्र में व्यापक रूप से लोकप्रिय थे।

उनके निधन पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनपदवासियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सभी ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की, साथ ही शोकाकुल परिवार को इस असीम पीड़ा को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की। धर्मेंद्र प्रताप सिंह (पप्पू मड़हा) का जाना क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
ब्लैकआउट कर मार्क ड्रिल का हुआ प्रदर्शन, डीएम एसपी रहे मौजूद
फर्रूखाबाद l अग्निशमन कार्यालय में जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी व पुलिस अधीक्षक आरती सिंह की उपस्थिति में नागरिक सुरक्षा द्वारा मॉकड्रिल का आयोजन किया गया।

सर्वप्रथम  06:00 pm पर सायरन बजते ही ब्लैकआउट हुआ तत्पश्चात 02 मिनिट बाद पुनः सायरन बजने पर मॉकड्रिल शुरू हुई, मॉकड्रिल में सर्वप्रथम फायर टेंडर द्वारा लगी हुई आग को बुझाया  गया, इसके बाद घायलों का रेस्क्यू कर उनको प्राथमिक उपचार दिया गया, छत पर मौजूद घायलों को रस्सी के सहारे उतारकर उपचार देकर अस्पताल ले जाया गया।

इस मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक, नगर मजिस्ट्रेट, क्षेत्राधिकारी सदर,क्षेत्राधिकारी मोहम्दाबाद, चिकित्सा विभाग के अधिकारी व डॉक्टर व सभी अधिकारी,आपदा विशेषज्ञ, होमगार्ड, पी0आर0डी0जवान, आपदा मित्र उपस्थिति रहे।
भदोही पुलिस लाइन में मॉक ड्रिल, DM-SP ने किया निरीक्षण: नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर आपातकालीन बचाव का अभ्यास

नितेश श्रीवास्तव


भदोही। भदोही पुलिस लाइन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती 'पराक्रम दिवस' के अवसर पर एक नागरिक सुरक्षा/सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों से बचाव और जन-जागरूकता बढ़ाना था। जिलाधिकारी शैलेष कुमार एवं पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने मॉक ड्रिल का निरीक्षण किया, जिसमें पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक और अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। मॉक ड्रिल के तहत शाम 6 बजे पुलिस लाइन में दो मिनट तक चेतावनी सायरन बजाकर आपात स्थिति का अलर्ट जारी किया गया।

इसके तुरंत बाद, विद्युत विभाग ने चिह्नित क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर दी। नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों ने काल्पनिक क्षति का आकलन कर नियंत्रण कक्ष को सूचना दी। इस दौरान, नागरिकों ने सुरक्षित स्थानों पर शरण ली, जबकि अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने काल्पनिक आग पर त्वरित नियंत्रण पाया। नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों ने काल्पनिक घायलों को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान कर अस्पताल पहुँचाया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने घटनास्थल पर पहुँचकर राहत एवं बचाव कार्यों का सफलतापूर्वक अभ्यास किया।


इस संयुक्त अभ्यास में नागरिक सुरक्षा, विद्युत विभाग, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नगर निकाय और पुलिस विभाग का समन्वित प्रयास सराहनीय रहा।

जिलाधिकारी शैलेष कुमार के निर्देश पर हवाई हमलों से बचाव के लिए पुलिस लाइन क्षेत्र में 10 मिनट का ब्लैक आउट भी किया गया। इस दौरान स्वयंसेवकों ने आपात स्थिति और आपदाओं से बचाव के लिए विभिन्न मॉक ड्रिल गतिविधियाँ संचालित कीं।
ठंड व बारिश से फसल नुकसान पर किसानों की चिंता, मोहम्मदपुर सकिश्त बहसूमा में हुई अहम बैठक

बहसूमा। मेरठ क्षेत्र में लगातार पड़ रही ठंड और हो रही बारिश के चलते किसानों की फसलों को हुए भारी नुकसान को लेकर पूर्व डायरेक्टर चौधरी राजपाल सिंह के पुत्र अमित चौधरी के आवास पर एक महत्वपूर्ण चर्चा बैठक आयोजित की गई। बैठक में किसानों ने मौसम की मार से बर्बाद हो रही फसलों को लेकर गहरी चिंता जताई और शासन-प्रशासन से राहत की मांग की।

बैठक में बसपा सरकार में रहे चर्चित चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि असमय ठंड और बारिश से सरसों, आलू सहित अन्य रबी फसलों को गंभीर नुकसान हुआ है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की।

चर्चा के दौरान पत्रकार परविंदर चौधरी ने कहा कि किसानों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए इसे जनप्रतिनिधियों और उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि पीड़ित किसानों को समय रहते राहत मिल सके। उन्होंने किसानों से एकजुट होकर अपनी बात मजबूती से रखने का आह्वान किया।

बैठक में प्रवेश कुमार, परविंदर खंगवाल, जोगिंदर चौधरी, शौकिंदर चौधरी, बहसूमा पप्पू चौधरी, कपिल कुमार सहित काफी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों ने बताया कि मौसम की मार से खेतों में खड़ी फसलें बिछ गई हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।

अंत में सभी ने एक स्वर में मांग की कि शासन द्वारा जल्द से जल्द नुकसान का आकलन कराकर किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, जिससे उन्हें इस प्राकृतिक आपदा से उबरने में मदद मिल सके।
माल ढुलाई और नदी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी

कोच्चि, केरल, 23 जनवरी, 2026: अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद (आईडब्ल्यूडीसी 3.0) की तीसरी बैठक भारत के अंतर्देशीय जल परिवहन नेटवर्क के विस्तार, प्रमुख अवसंरचना निवेशों को मंजूरी देने और देश की नदियों की पूरी आर्थिक क्षमता को उजागर करने के लिए केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने के लिए एक व्यापक रोडमैप के साथ संपन्न हुई। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सरबानंदा सोनोवाल की अध्यक्षता में हुई इस पूर्ण दिवसीय बैठक में हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री; बिहार सरकार के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार; नागालैंड सरकार के विद्युत और संसदीय कार्य मंत्री के. जी. केन्ये; अरुणाचल प्रदेश सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री ओजिंग तासिंग; और पंजाब सरकार के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल; उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह भी उपस्थित थे। यह बैठक सतत और कुशल लॉजिस्टिक के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में अंतर्देशीय जल परिवहन को मजबूत करने की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई। आईडब्ल्यूडीसी 3.0 ने हरित परिवहन को गति देने, बहुआयामी लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने और नदी आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की पहचान की। केरल, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा और तेलंगाना में नदी क्रूज जेटियों सहित 150 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई, जो देश भर में क्रूज पर्यटन सर्किट के विस्तार में सहायक होंगी। परिषद ने आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी (रा.ज.-4) पर स्थित मुक्त्याला और हरिश्चंद्रपुरम में रो-रो और कार्गो टर्मिनलों के विकास की घोषणा की जिससे 150 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ कम दूरी के कार्गो परिवहन को मजबूती मिलेगी। जम्मू और कश्मीर में झेलम नदी (रा.ज.49) पर तटवर्ती सुविधाओं को भी यात्री परिवहन और पर्यटन अवसंरचना को समर्थन देने के लिए मंजूरी दी गई। नौगम्यता, सुरक्षा और साल भर परिचालन को बेहतर बनाने के लिए ₹465 करोड़सेअधिककीपरिसंपत्तिखरीदकोमंजूरीदीगई।इनमेंकेरलमेंसर्वेक्षणजलयान; बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में रो-पैक्स बर्थिंग जेट्टी; उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में फ्लोटिंग पोंटून और क्विक पोटून ओपनिंग सिस्टम; हाइब्रिड सर्वेक्षण जलयान; उभयचर और कटर सक्शन ड्रेजर; और टग-बार्ज इकाइयां शामिल हैं। परिषद ने 900 करोड़ रुपये से अधिक की कई बड़ी नई परियोजनाओं को भी मंजूरी दी, जिनमें कोच्चि में स्लिपवे सुविधा का विकास, ओडिशा (25) और पूर्वोत्तर (85) में 110 जेट्टी का निर्माण, जम्मू-कश्मीर में 10 हाइब्रिड इलेक्ट्रिक जलयानों की तैनाती और महाराष्ट्र में राष्ट्रीय नदी यातायात और नौवहन प्रणाली (एनआरटीएनएस) का कार्यान्वयन शामिल है। असम के लिए, आईडब्ल्यूडीसी ने गुवाहाटी के उजान बाजार घाट पर 70 करोड़ रुपये के क्रूज टर्मिनल के विकास और बोगीबील तक 144 करोड़ रुपये की एप्रोच रोड संपर्क परियोजना  ब्रह्मपुत्र नदी (रा.ज.-2) पर डिब्रूगढ़ में नदी बंदरगाह का निर्माण असम के अंतर्देशीय जलमार्ग अवरंचना ढांचे और पर्यटन क्षमता को और मजबूत करेगा। परिषद को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतर्देशीय जलमार्ग भारत के परिवहन और लॉजिस्टिक परिवर्तन के एक कार्यनीतिक स्तंभ के रूप में उभरे हैं। हमारे ऊर्जावान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अंतर्देशीय जलमार्गों को विशेष प्रोत्साहन दिया है, जिससे सड़कों पर भीड़ कम हुई है, लॉजिस्टिक लागत में कमी आई है और व्यापार करने में सुगमता बढ़ी है। इस दूरदृष्टि से प्रेरित होकर, नदियों को अब केवल प्राकृतिक संसाधन के रूप में नहीं बल्कि विकास, स्थिरता और संपर्क को गति देने वाली आर्थिक जीवनरेखा के रूप में देखा जाता है। बैठक में पिछले दशक में इस क्षेत्र के तीव्र विस्तार की समीक्षा की गई। राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल ढुलाई 2013-14 में 18 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 145.84 मिलियन टन हो गई है, जबकि परिचालन में मौजूद राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या तीन से बढ़कर 32 हो गई है, यानी दस गुना वृद्धि हुई है। लक्जरी नदी क्रूज जलयानों की संख्या पांच से बढ़कर 25 हो गई है, जो उद्योग, निवेशकों और राज्य सरकारों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। केरल के विशाल बैकवाटर और नहर नेटवर्क को अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए एक प्रमुख अवसर के रूप में उजागर किया गया। परिषद ने भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा गुवाहाटी, वाराणसी, पटना, तेजपुर, डिब्रूगढ़ सहित 18 शहरों मेंशहरी जल परिवहन के विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। बैठक में इस बात पर फिर से जोर दिया गया कि अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन का सबसे अधिक ईंधन-कुशल, लागत-प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल साधन बने हुए हैं, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने, सड़कों और रेलवे पर भीड़भाड़ कम करने और समग्र लॉजिस्टिक लागत को घटाने में सहायक हैं। नदी क्रूज पर्यटन को समुद्री अर्थव्यवस्था के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक के रूप में पहचाना गया, जिसके लिए सरकार आधुनिक क्रूज टर्मिनल, उन्नत नौवहन प्रणाली और समर्पित क्रूज सर्किट विकसित कर रही है। "हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व में, भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग हरित विकास, डिजिटल परिवर्तन और पर्यटन आधारित विकास के शक्तिशाली कारक के रूप में उभर रहे हैं। माल ढुलाई, यात्री सेवाओं और क्रूज पर्यटन में तीव्र विस्तार के साथ, हमारी नदियाँ सतत गतिशीलता और आर्थिक अवसरों का इंजन बन रही हैं। स्वच्छ ऊर्जा से चलने वाले जलयानों, स्मार्ट नेविगेशन प्रणालियों और विश्व स्तरीय यात्री अवसंरचना को एकीकृत करके, हम लॉजिस्टिक लागत को कम करने, उत्सर्जन में कटौती करने और नई आजीविका सृजित करने के लिए जलमार्गों की पूरी क्षमता का उपयोग कर रहे हैं। कोच्चि वाटर मेट्रो जैसी पहलों की सफलता दर्शाती है कि नदियाँ शहरी गतिशीलता को कैसे बदल सकती हैं, और हम गुवाहाटी, वाराणसी, पटना, तेजपुर और डिब्रूगढ़ सहित अन्य शहरों में इस मॉडल को दोहराने के लिए प्रतिबद्ध हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि भारत के जलमार्ग विकसित भारत के पथ पर समावेशी विकास को गति प्रदान करें," सोनोवाल ने कहा। पूर्वोत्तर क्षेत्र पर विशेष जोर दिया गया, जहां जलमार्ग परियोजनाओं से संपर्क, व्यापार, पर्यटन और नदी किनारे बसे समुदायों की आजीविका में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। सरकार ने पूर्वोत्तर में 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से 85 घाटों का विकास करने की योजना बनाई है, जिससे क्षेत्रीय लॉजिस्टिक एकीकरण को मजबूती मिलेगी।  “भारतकीअंतर्देशीयजलमार्गयोजनामेंपूर्वोत्तरकाकेंद्रीयस्थानहै।अपनेविशालनदीनेटवर्ककेसाथ, यह क्षेत्र सतत परिवहन, व्यापार और पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता रखता है। 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से 85 जेटियों का विकास संपर्क को काफी मजबूत करेगा, क्षेत्रीय लॉजिस्टिक को एकीकृत करेगा और नदी किनारे बसे समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा करेगा। अंतर्देशीय जलमार्ग न केवल पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय बाजारों के करीब लाएगा बल्कि विकास, समृद्धि और क्षेत्रीय एकीकरण के प्रवेश द्वार के रूप में इसकी भूमिका को भी उजागर करेगा,” सर्वानंदा सोनोवाल। असम के लिए, परिषद ने गुवाहाटी के उजान बाजार घाट पर 70 करोड़ रुपये के क्रूज टर्मिनल और डिब्रूगढ़ के बोगीबील नदी बंदरगाह तक 144 करोड़ रुपये की पहुंच मार्ग संपर्क परियोजना को मंजूरी दी है। ये परियोजनाएं राज्य के अंतर्देशीय जलमार्ग अवसंरचना को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेंगी, नदी क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देंगी और अंतिम-मील संपर्क (कनेक्टिविटी) में सुधार करेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्वोत्तर को विकास के अष्ट लक्ष्मी इंजन के रूप में देखने के दृष्टिकोण से प्रेरित ये पहल ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे व्यापार, रोजगार और सतत विकास के नए अवसर पैदा करेंगी। (असम के लिए) परिषद ने सरकार की दूरदर्शी प्राथमिकताओं की पुष्टि की, जिनमें हरित और संकर जहाजों की तैनाती, डिजिटल नेविगेशन और यातायात प्रबंधन प्रणालियों का विस्तार, आधुनिक अंतर्देशीय टर्मिनलों का विकास, जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत सुविधाओं को सुदृढ़ करना और समुद्री कौशल विकास को बढ़ावा देना शामिल है। बैठक में सरल शहरी जल परिवहन प्रणालियों के निर्माण, माल परिवहन दक्षता में सुधार, यात्री आवागमन के लिए हरित और संकर जहाजों को बढ़ावा देने, नदी क्रूज पर्यटन का विस्तार करने और डिजिटल और टिकाऊ प्रथाओं को सुदृढ़ करने पर विस्तृत विचार-विमर्श भी हुआ। राज्यों द्वारा चल रही और प्रस्तावित अंतर्देशीय जल परिवहन परियोजनाओं के संबंध में उठाई गई चिंताओं की समीक्षा की गई, जिसमें समन्वित प्रयासों के माध्यम से कार्यान्वयन में तेजी लाने पर जोर दिया गया। आइडब्ल्यूडीसी3.0, 2024 में आयोजित आइडब्ल्यूडीसी1.0 और 2025 में आयोजित आइडब्ल्यूडीसी2.0 के दौरान रखी गई नींव पर आधारित है, जिसमें स्थिरता, प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान और परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस बैठक में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार, अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आइडब्ल्यूएआइ) के अध्यक्ष सुनील पालीवाल, उपाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह सहित केंद्र और राज्य सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और विशेषज्ञ उपस्थित थे। बैठक में अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद (आइडब्ल्यूडीसी) 1.0 और 2.0 के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की गई और अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के अगले चरण की रूपरेखा तैयार की गई। दिन भर चली इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों की उपलब्धियों की समीक्षा की गई, प्रमुख निवेशों और परियोजनाओं की घोषणा की गई और देश भर में अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप प्रस्तुत किया गया। अंतर्राष्ट्रीय जल परिवहन परिषद (आईडब्ल्यूडीसी 3.0) का समापन केंद्र और राज्यों द्वारा अंतर्देशीय जल परिवहन को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने, स्वच्छ परिवहन समाधानों को प्रोत्साहित करने और नदियों को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में स्थापित करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। बैठक में अंतर्देशीय जलमार्गों को माल और यात्रियों दोनों के लिए परिवहन के एक रुचिकर, भविष्य के लिए तैयार साधन के रूप में पुनः स्थापित किया गया, जो स्वच्छ परिवहन, बेहतर लॉजिस्टिक्स और एक मजबूत भारत में योगदान देगा। भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग ईंधन-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन साधन उपलब्ध कराकर सड़क और रेल नेटवर्क पर भीड़ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 23 राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 111 राष्ट्रीय जलमार्गों के साथ, अंतर्देशीय जलमार्ग रो-रो वाहन तथा, क्रूज पर्यटन जैसी पहलों को तेजी से समर्थन दे रहे हैं।पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन आइडब्ल्यूएआइ, राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास, रखरखाव और विनियमन के लिए जिम्मेदार नोडल एजेंसी बनी हुई है।
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में अब तक का सर्वाधिक तिमाही एनआईआई 1,000 करोड़ रुपए

* वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में वितरण रिकॉर्ड स्तर 8,293 करोड़ रुपए
* जमा 7.7% तिमाही दर तिमाही बढ़ी, ऋण पुस्तिका वृद्धि 7.1% तिमाही दर तिमाही से आगे
* सकल ऋण पुस्तिका (दिसंबर’25) 37,057 करोड़ रुपए, 21.6% सालाना वृद्धि; जमा 42,223 करोड़ रुपए, 22.4% सालाना वृद्धि
* सुरक्षित ऋण पुस्तिका 17,825 करोड़ रुपए (दिसंबर’25), 48.7% सालाना वृद्धि; कुल ऋण में सुरक्षित ऋण का हिस्सा 48.1%
* माइक्रो बैंकिंग सकल ऋण पुस्तिका 19,372 करोड़ रुपए (दिसंबर’25); 4.1% सालाना वृद्धि
*मुंबई, , जनवरी, 2026* :उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड [BSE: 542904; NSE: UJJIVANSFB] ने आज 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही के लिए अपने वित्तीय परिणामों की घोषणा की।
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक- व्यवसाय प्रदर्शन सारांश
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही एवं वित्त वर्ष 26 के 9 महीने
❖ परिसंपत्तियाँ
सकल ऋण पुस्तिका 37,057* करोड़ रुपए (दिसंबर’25), 21.6% सालाना / 7.1% तिमाही दर तिमाही वृद्धि
सुरक्षित ऋण पुस्तिका का हिस्सा 48.1% (दिसंबर’25) बनाम 39.3% (दिसंबर’24) और 46.8% (सितंबर’25)
अब तक का सर्वाधिक तिमाही वितरण 8,293 करोड़ रुपए; 54.7% सालाना / 4.5% तिमाही दर तिमाही वृद्धि
माइक्रो बैंकिंग वितरण 4,688 करोड़ रुपए; 62.4% सालाना / 10.1% तिमाही दर तिमाही वृद्धि
❖ संग्रह एवं परिसंपत्ति गुणवत्ता
समूह एवं व्यक्तिगत ऋण बकेट-एक्स की संग्रह दक्षता में सुधार; दिसंबर’25 में 99.7%
जोखिमग्रस्त पोर्टफोलियो*/जीएनपीए*/एनएनपीए* क्रमशः 3.98% / 2.39% / 0.58% (दिसंबर’25); जबकि दिसंबर’24 में 5.36% / 2.68% / 0.66%
प्रोविजन कवरेज रेशियो दिसंबर’25 में बढ़कर 76%
❖ जमा
जमा 42,223 करोड़ रुपए (दिसंबर’25), 22.4% सालाना / 7.7% तिमाही दर तिमाही वृद्धि
कासा 11,535 करोड़ रुपए; 33.2% सालाना वृद्धि, कासा अनुपात 27.3% (दिसंबर’25)
रिटेल टर्म डिपॉजिट^ + कासा 29,395 करोड़ रुपए; 16.3% सालाना वृद्धि
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में फंड की लागत (सीओएफ) 7.09%, वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही की तुलना में 25 बीपीएस कम

❖ वित्तीय प्रदर्शन
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में अब तक का सर्वाधिक एनआईआई 1,000 करोड़ रुपए; 12.8% सालाना वृद्धि
एनआईएम 33 बीपीएस बढ़कर वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में 8.23%
कॉस्ट-टू-इनकम अनुपात तिमाही के लिए 66% पर स्थिर; हालाँकि नए श्रम संहिता के तहत एकमुश्त ग्रेच्युटी खर्च समायोजन के बाद 65% से नीचे
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में पीएटी 186 करोड़ रुपए; 70.8% सालाना वृद्धि
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में आरओए 1.5% (सालाना 45 बीपीएस वृद्धि); आरओई 11.5% (सालाना 423 बीपीएस वृद्धि)
❖ पूँजी एवं तरलता
पूँजी पर्याप्तता अनुपात 21.6%
मजबूत तरलता; दिसंबर’25 के लिए औसत दैनिक एलसीआर 165.6%
* जहाँ लागू हो, शर्तें/परिभाषाएँ बैंक की रिपोर्टिंग के अनुसार।
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ श्री संजीव नौटियाल ने कहा, “भारत का व्यापक आर्थिक परिदृश्य अनुकूल बना हुआ है। वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में 8.2% की मजबूत जीडीपी वृद्धि ने ऋण वृद्धि और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार के लिए सहायक माहौल तैयार किया है।
उज्जीवन एसएफबी में जमा वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में 7.7% तिमाही दर तिमाही और 22.4% सालाना बढ़कर 42,223 करोड़ रुपए हो गई, जबकि दिसंबर’25 के अंत में क्रेडिट–डिपॉजिट अनुपात 88% रहा। गुणवत्ता वाले ‘न्यू-टू-बैंक’ ग्राहकों को जोड़ने तथा ‘एग्ज़िस्टिंग-टू-बैंक’ ग्राहकों से बेहतर जुड़ाव के लिए समर्पित चैनलों पर स्पष्ट फोकस के चलते कासा अनुपात लगातार दो तिमाहियों से 27% से ऊपर बना हुआ है। वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में किए गए जमा दरों में कटौती और बेहतर तरलता प्रबंधन के कारण फंड की लागत में गिरावट का रुझान जारी रहा। तिमाही के लिए सीआईएफ 7.08% रहा, जो सालाना आधार पर 49 बीपीएस कम है।
तिमाही के दौरान सकल ऋण पुस्तिका 7.1% तिमाही दर तिमाही और 21.6% सालाना बढ़कर 37,057 करोड़ रुपए हो गई, जिसे 8,293 करोड़ रुपए के अब तक के सर्वाधिक तिमाही वितरण का सहारा मिला। यह असुरक्षित और सुरक्षित, दोनों श्रेणियों के उत्पादों में सर्वांगीण प्रदर्शन का परिणाम रहा। आवास, एमएसएमई, गोल्ड, वाहन और कृषि ऋण जैसे सुरक्षित पोर्टफोलियो हमारी दीर्घकालिक विविधीकरण रणनीति के अनुरूप विस्तार करते रहे, जिससे दिसंबर’25 तक सुरक्षित ऋण का हिस्सा बढ़कर 48% हो गया।
बैंक का पीएआर 4% से नीचे रहा। वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में स्लिपेज घटकर 221 करोड़ रुपए रहा, जबकि दिसंबर’25 के अंत में जीएनपीए 2.39% और एनएनपीए 0.58% रहा। तिमाही के लिए क्रेडिट लागत ₹195 करोड़ रही और हमें मौजूदा परिचालन तिमाही में इसमें और कमी की उम्मीद है। दिसंबर’25 तक पीसीआर बढ़कर 76% हो गया। माइक्रोफाइनेंस बकेट-एक्स की संग्रह दक्षता दिसंबर’25 में 99.7% तक पहुँचने के साथ प्रावधान आवश्यकताएं घटने लगी हैं।
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में हमारी नेट इंटरेस्ट मार्जिन (एमआईएम) 33 bps तिमाही दर तिमाही बढ़कर 8.23% हो गई, जिसे कम CoF, अनुकूल उत्पाद मिश्रण, कम ब्याज रिवर्सल और सीआरआर में ढील का समर्थन मिला। हमने तिमाही में ₹1,000 करोड़ का अब तक का सर्वाधिक एनआईआई दर्ज किया। इसके परिणामस्वरूप लाभप्रदता मजबूत हुई और वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में कर पश्चात लाभ (पीएटी) ₹186 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 70.8% की स्वस्थ वृद्धि दर्शाता है। नवंबर’25 से लागू नए श्रम संहिता के तहत एकमुश्त ग्रेच्युटी खर्च को समायोजित करने पर हमारा पीएटी लगभग ₹200 करोड़ होता। वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में 1.5% का आरओए और 11.5% का आरओई हमारे रिटर्न मेट्रिक्स में निरंतर सुधार को रेखांकित करता है।
21.6% की स्वस्थ पूंजी पर्याप्तता, मजबूत तरलता बफर और वृद्धि के प्रति अनुशासित दृष्टिकोण के साथ बैंक आने वाली तिमाहियों में टिकाऊ और लाभकारी वृद्धि देने के लिए सुदृढ़ स्थिति में है।”
भारत ने दुनिया को चौंकाया: UN में ईरान का दिया साथ, पश्चिमी देशों को दिखाया आईना

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यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट काउंसिल (UNHRC) में भारत की कूटनीति में बड़ा बदलाव देखा गया। UNHRC में भारत ने डंके की चोट पर ईरान का साथ दिया। भारत ने ईरान पर पश्चिमी देशों के प्रस्ताव के खिलाफ वोट डाला। भारत के साथ साथ चीन और पाकिस्तान ने भी प्रस्ताव के खिलाफ 'NO' वोट किया है। हालांकि भारत, चीन और पाकिस्तान के समर्थन के बावजूद UNHRC में ईरान के खिलाफ प्रस्ताव पास हो गया है।

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने शुक्रवार (23 जनवरी 2026) को ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर हुई कार्रवाई को लेकर अपनी जांच को और गहरा करने का फैसला किया है। इसमें बच्चों सहित हजारों लोगों के मारे जाने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव में ईरान से "क्रूर दमन" खत्म करने की मांग भी की गई है।

भारत के साथ चीन-पाकिस्तान ने भी NO में वोट किया

UNHRC में कुल 47 सदस्य देश हैं, जिन्होंने इस प्रस्ताव के जरिए ईरान में "सुरक्षा बलों द्वारा शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई के अभूतपूर्व पैमाने" पर चिंता जताई है। ईरान के खिलाफ लाए गये पश्चिमी देशों के प्रस्ताव के समर्थन में 25 वोट, विरोध में 7 वोट और 15 देशों ने वोटिंग से दूर रहने का फैसला किया है। भारत, चीन और पाकिस्तान ने विरोध में यानि NO में वोट किया है।

भारत आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ

पश्चिमी देश और नाटो सदस्य जैसे अमेरिका, फ्रांस और दक्षिण कोरिया ईरान के खिलाफ थे। वे सख्त कार्रवाई चाहते थे। लेकिन भारत ने डंके की चोट पर ईरान का साथ दिया। भारत ने साफ कर दिया कि वह ईरान के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ है। इससे भारत की विदेश नीति की ताकत दिखी, जो संतुलित और स्वतंत्र है। पश्चिमी देशों को लगा कि वे आसानी से ईरान को अलग-थलग कर लेंगे, लेकिन भारत के वोट ने उनके प्लान पर पानी फेर दिया। भारत की तरह ही चीन ने भी ईरान का साथ दिया है।

पश्चिमी दबाव के आगे नहीं झुकता भारत

भारत की यह नीति उसके रणनीतिक हितों से जुड़ी है, जिसमें ईरान से ऊर्जा आयात, चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना शामिल है। भारत हमेशा जोर देता है कि मानवाधिकार के मुद्दों पर राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से बचा जाना चाहिए। इस वोट से भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को दोहराया, जिसमें वह पश्चिमी दबाव के आगे नहीं झुकता और दोस्त देशों के साथ खड़ा रहता है। ईरान के साथ भारत के संबंध मजबूत हैं, और यह कदम दोनों देशों के बीच विश्वास को और मजबूत करता है।

लंदन में गूँजी 'झारखण्ड' की अस्मिता: 'झारखण्ड @25' कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने साझा किया विकास का वैश्विक रोडमैप

लंदन / रांची, 24 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में लंदन में आयोजित ‘झारखण्ड कार्यक्रम ने एक नया इतिहास रच दिया है। यह संभवतः भारत का पहला ऐसा अवसर है जब किसी राज्य सरकार ने सात समंदर पार अपने छात्रों, प्रवासियों और उद्यमियों के लिए इतने भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया हो।

मरांग गोमके स्कॉलर्स की दिखी सक्रिय भागीदारी

लंदन के इस विशेष कार्यक्रम में झारखंड की मरांग गोमके ओवरसीज स्कॉलरशिप और चेवनिंग छात्रवृत्ति के तहत यूके की टॉप यूनिवर्सिटीज में पढ़ रहे छात्र, शोधकर्ता, विभिन्न विश्वविद्यालयों के फैकल्टी और सफल उद्यमियों सहित लगभग 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। अपनी मिट्टी से दूर विदेशी धरती पर झारखंडी युवाओं के इस हुजूम ने राज्य की बौद्धिक प्रगति का प्रदर्शन किया।

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"जड़ों से जुड़कर, भविष्य की ओर अग्रसर" – मुख्यमंत्री

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्य के संघर्ष और भविष्य के विजन को रेखांकित किया। उन्होंने कहा:

"यह कार्यक्रम 25 वर्षों की उपलब्धियों से आगे बढ़कर अनंत संभावनाओं की कहानी है। हमारी विकास यात्रा मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और दिशोम गुरुजी के आत्मसम्मान और न्याय के आदर्शों से प्रेरित है। झारखंड प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर समावेशी विकास के पथ पर निरंतर बढ़ता रहेगा।"

लंदन में सादरी गीतों की गूँज और सांस्कृतिक गौरव

कार्यक्रम स्थल पूरी तरह झारखंडी रंग में रंगा नजर आया। मरांग गोमके स्कॉलर्स और प्रवासी झारखंडियों ने पारंपरिक नृत्य और सादरी गीतों की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा हॉल झारखंड की संस्कृति से गुंजायमान हो उठा। छात्रों ने मुख्यमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे राज्य सरकार की छात्रवृत्ति ने उनके वैश्विक सपनों को हकीकत में बदला है।

प्रमुख आकर्षण:

ऐतिहासिक पहल: किसी राज्य द्वारा विदेश में अपनी अस्मिता और विकास पर केंद्रित पहला बड़ा आयोजन।

युवा शक्ति: उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं ने मुख्यमंत्री को राज्य के विकास में भागीदार बनने का भरोसा दिया।

संस्कृति का संरक्षण: आधुनिकता के बीच अपनी परंपरा और जड़ों के प्रति गर्व का भाव।

विद्यार्थी केवल परीक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि अपने कैरियर को लेकर स्पष्ट दृष्टि बनाए- शिवम सिंह
“मंथन” में 931 परीक्षार्थियों को मिला परीक्षा और कैरियर मार्गदर्शन*

अमेठी,अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा अमेठी जनपद में यूपी बोर्ड एवं सीबीएसई बोर्ड के हाई स्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा में सम्मिलित होने जा रहे विद्यार्थियों के लिए “मंथन " कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह मंच विद्यार्थियों की परीक्षा संबंधी जिज्ञासाओं, मानसिक तनाव और कैरियर विकल्पों पर समाधान प्रदान करने हेतु समर्पित रहा। कार्यक्रम में अमेठी जनपद के 931 परीक्षार्थी शामिल हुए। विद्यार्थियों के प्रश्नों का समाधान उप जिलाधिकारी अमेठी पंकज मिश्र, प्रान्त मंत्री शिवम सिंह तथा प्रान्त उपाध्यक्ष डॉ. संतोष अंश द्वारा किया गया। प्रान्त उपाध्यक्ष डॉ. संतोष अंश ने प्रास्ताविकी रखते हुए कहा कि आज विद्यार्थियों की आँखों में जो उत्सुकता, जिज्ञासा और आत्मविश्वास झलक रहा है, वह इस बात का प्रमाण है कि भारत का भविष्य जागरूक, कर्मठ और लक्ष्यबद्ध है। “मंथन” नाम स्वयं में सार्थक है। मंथन से अमृत निकलता है, और आज यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा का अमृत खोजने का प्रयास है। परीक्षा का समय हर विद्यार्थी के जीवन में निर्णायक पड़ाव होता है। यह केवल पाठ्यपुस्तकों की परीक्षा नहीं, बल्कि समय-प्रबंधन, धैर्य, मनोबल और आत्मअनुशासन की भी परीक्षा है। कई बार विद्यार्थी तनाव, भ्रम और भय से घिर जाते हैं। ऐसे समय में सही मार्गदर्शन दीपक की भाँति रास्ता दिखाता है। “मंथन” उसी दीपक को प्रज्वलित करने का मंच है। आज का युग प्रतिस्पर्धा का है, परंतु प्रतिस्पर्धा में वही सफल होता है जो स्वयं से प्रतिस्पर्धा करना सीखता है। अंक महत्त्वपूर्ण हैं, किंतु उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण है दृष्टि, दिशा और दृढ़ संकल्प। यही कारण है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद निरंतर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु ऐसे कार्यक्रम आयोजित करती रही है। याद रखिए, परीक्षा जीवन का पड़ाव है, मंज़िल नहीं। असफलता अंत नहीं, अनुभव है। परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता। अपने भीतर छिपी क्षमता को पहचानिए। लक्ष्य तय कीजिए। विद्यार्थी नियमित अभ्यास को जीवन का संस्कार बनायें और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य का भाव सदैव जागृत रखिए। मुख्य अतिथि उप जिलाधिकारी पंकज मिश्र ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि परीक्षा केवल अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मअनुशासन, धैर्य और समय-प्रबंधन की परीक्षा भी है। नियमित अध्ययन, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास से हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। विद्यार्थी तनाव से मुक्त होकर अपनी क्षमता पर विश्वास रखें। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें, बल्कि उनका मनोबल बढ़ाएँ। मुख्य वक्ता प्रान्त मंत्री शिवम सिंह ने परीक्षार्थियों को संबोधित करते हुए कि आज का विद्यार्थी केवल परीक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि अपने कैरियर को लेकर स्पष्ट दृष्टि बनाए। विज्ञान, वाणिज्य, कला के साथ-साथ तकनीकी और स्टार्टअप के क्षेत्र में भी अपार संभावनाएँ हैं। सही मार्गदर्शन और परिश्रम से विद्यार्थी राष्ट्र निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य तय कर निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा दी। प्रश्न –उत्तर सत्र के महत्वपूर्ण प्रश्न में, प्रश्न 1 परीक्षा में तनाव कैसे कम करें? उत्तर- समय-सारणी बनाकर पढ़ाई करें, पर्याप्त नींद लें और स्वयं पर विश्वास रखें। प्रश्न 2 यदि अपेक्षित अंक न आएँ तो क्या करें? उत्तर- आत्मविश्लेषण करें, हार न मानें, आगे बेहतर प्रयास करें। जीवन में अनेक अवसर उपलब्ध हैं। प्रश्न 3 बोर्ड परीक्षा के बाद कैरियर चयन कैसे करें? उत्तर- अपनी रुचि, क्षमता और उपलब्ध अवसरों का मूल्यांकन कर मार्गदर्शन लेकर निर्णय लें। प्रश्न 4 परीक्षा में समय प्रबंधन कैसे करें? उत्तर- प्रश्न पत्र पढ़कर उत्तर लिखने की प्राथमिकता तय करें और निर्धारित समय में संतुलन बनाए रखें।कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को परीक्षा-सफलता के साथ कैरियर-दृष्टि और आत्मविश्वास प्रदान करना रहा। “मंथन” कार्यक्रम वास्तव में जिज्ञासा, समाधान और प्रेरणा का सशक्त मंच सिद्ध हुआ। कार्यक्रम में विभाग संगठन मंत्री कौतुक, प्रान्त सह मंत्री युवराज, प्रान्त कार्यसमिति सदस्य सुबोध, जिला प्रमुख डॉ. धनंजय सिंह, तेजस्व पाण्डेय, जिला संयोजक आदित्य सिंह, देवांश तिवारी, शिखर पाठक सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व विद्यार्थी उपस्थित रहे।
जहानाबाद को मिली बड़ी सौगात, कुर्मा संस्कृति मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का हुआ भव्य उद्घाटन
बिहार के जहानाबाद जिले को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी सौगात मिली है। बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कुर्मा संस्कृति मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का विधिवत उद्घाटन किया। ग्रामीण क्षेत्र में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त इस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की शुरुआत से न केवल जहानाबाद, बल्कि पूरे मगध प्रमंडल के लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। उद्घाटन समारोह में बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान सहित कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला और इसे क्षेत्र के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया गया। पूरे मगध प्रमंडल के लिए गर्व का क्षण : मंगल पांडे
सभा को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने कहा कि कुर्मा संस्कृति मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का उद्घाटन केवल जहानाबाद जिले के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मगध प्रमंडल के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की लंबे समय से आवश्यकता थी, जिसे अब साकार किया गया है।
मेडिकल कॉलेज की स्थापना से इलाज के साथ-साथ मेडिकल शिक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र के युवाओं को अपने ही जिले में चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
आयुष्मान भारत योजना से जोड़े जाने पर सरकार देगी पूरा सहयोग स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार इस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से आग्रह किया कि इसे शीघ्र आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जाए, ताकि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त इलाज का लाभ मिल सके।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार की ओर से पूरा समर्थन रहेगा, जिससे मरीजों को निःशुल्क उपचार मिलेगा और अस्पताल को भी सरकारी भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाएगा।
फ्री मेडिकल कैंप में 500 मरीजों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण
उद्घाटन समारोह के अवसर पर मेडिकल कॉलेज परिसर में फ्री हेल्थ कैंप का भी आयोजन किया गया। इस कैंप में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए करीब 500 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से मरीजों को मुफ्त दवाइयाँ और आवश्यक जांच सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर—दोनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार निजी क्षेत्र के सहयोग से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। जटिल प्रक्रियाओं को सरल बनाकर हर वर्ष नए मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृति दी जा रही है, ताकि राज्य में डॉक्टरों की मजबूत टीम तैयार हो सके और आम लोगों को इलाज में अधिक सहूलियत मिल सके। स्वास्थ्य क्रांति की शुरुआत
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने अस्पताल परिसर का निरीक्षण किया और उपलब्ध अत्याधुनिक सुविधाओं की सराहना की। स्थानीय लोगों ने इस पहल को जहानाबाद और पूरे मगध प्रमंडल के लिए स्वास्थ्य क्रांति की शुरुआत बताया।
धर्मेंद्र प्रताप सिंह (पप्पू मड़हा) का आकस्मिक निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

गोंडा। करनैलगंज तहसील क्षेत्र के परसपुर विकासखंड अंतर्गत आंटा गांव निवासी तथा पूरे जनपद में पप्पू मड़हा के नाम से चर्चित धर्मेंद्र प्रताप सिंह (54 वर्ष) का हार्ट अटैक से आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद परिजन उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके असामयिक निधन से परिवार, समर्थकों और शुभचिंतकों में गहरा शोक व्याप्त है। धर्मेंद्र प्रताप सिंह सरल स्वभाव, मिलनसार और खुशमिजाज व्यक्तित्व के धनी थे। वे कर्नलगंज विधानसभा से पूर्व प्रत्याशी रह चुके थे तथा परसपुर के पूर्व ब्लाक प्रमुख के रूप में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी थीं। सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण वे क्षेत्र में व्यापक रूप से लोकप्रिय थे।

उनके निधन पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनपदवासियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सभी ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की, साथ ही शोकाकुल परिवार को इस असीम पीड़ा को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की। धर्मेंद्र प्रताप सिंह (पप्पू मड़हा) का जाना क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
ब्लैकआउट कर मार्क ड्रिल का हुआ प्रदर्शन, डीएम एसपी रहे मौजूद
फर्रूखाबाद l अग्निशमन कार्यालय में जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी व पुलिस अधीक्षक आरती सिंह की उपस्थिति में नागरिक सुरक्षा द्वारा मॉकड्रिल का आयोजन किया गया।

सर्वप्रथम  06:00 pm पर सायरन बजते ही ब्लैकआउट हुआ तत्पश्चात 02 मिनिट बाद पुनः सायरन बजने पर मॉकड्रिल शुरू हुई, मॉकड्रिल में सर्वप्रथम फायर टेंडर द्वारा लगी हुई आग को बुझाया  गया, इसके बाद घायलों का रेस्क्यू कर उनको प्राथमिक उपचार दिया गया, छत पर मौजूद घायलों को रस्सी के सहारे उतारकर उपचार देकर अस्पताल ले जाया गया।

इस मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक, नगर मजिस्ट्रेट, क्षेत्राधिकारी सदर,क्षेत्राधिकारी मोहम्दाबाद, चिकित्सा विभाग के अधिकारी व डॉक्टर व सभी अधिकारी,आपदा विशेषज्ञ, होमगार्ड, पी0आर0डी0जवान, आपदा मित्र उपस्थिति रहे।
भदोही पुलिस लाइन में मॉक ड्रिल, DM-SP ने किया निरीक्षण: नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर आपातकालीन बचाव का अभ्यास

नितेश श्रीवास्तव


भदोही। भदोही पुलिस लाइन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती 'पराक्रम दिवस' के अवसर पर एक नागरिक सुरक्षा/सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों से बचाव और जन-जागरूकता बढ़ाना था। जिलाधिकारी शैलेष कुमार एवं पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने मॉक ड्रिल का निरीक्षण किया, जिसमें पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक और अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। मॉक ड्रिल के तहत शाम 6 बजे पुलिस लाइन में दो मिनट तक चेतावनी सायरन बजाकर आपात स्थिति का अलर्ट जारी किया गया।

इसके तुरंत बाद, विद्युत विभाग ने चिह्नित क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर दी। नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों ने काल्पनिक क्षति का आकलन कर नियंत्रण कक्ष को सूचना दी। इस दौरान, नागरिकों ने सुरक्षित स्थानों पर शरण ली, जबकि अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने काल्पनिक आग पर त्वरित नियंत्रण पाया। नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों ने काल्पनिक घायलों को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान कर अस्पताल पहुँचाया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने घटनास्थल पर पहुँचकर राहत एवं बचाव कार्यों का सफलतापूर्वक अभ्यास किया।


इस संयुक्त अभ्यास में नागरिक सुरक्षा, विद्युत विभाग, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नगर निकाय और पुलिस विभाग का समन्वित प्रयास सराहनीय रहा।

जिलाधिकारी शैलेष कुमार के निर्देश पर हवाई हमलों से बचाव के लिए पुलिस लाइन क्षेत्र में 10 मिनट का ब्लैक आउट भी किया गया। इस दौरान स्वयंसेवकों ने आपात स्थिति और आपदाओं से बचाव के लिए विभिन्न मॉक ड्रिल गतिविधियाँ संचालित कीं।