एनएच-33 पर 'महाजाम': बुंडू टोल प्लाजा पर 5 घंटे तक फंसी रहीं हजारों गाड़ियां, पानी-भोजन को तरसे यात्री।
रांची: आदिवासी नेता सोमा मुंडा की हत्या के खिलाफ आदिवासी संगठनों के झारखंड बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला है. खूंटी और चाईबासा में सुबह होते ही बंद समर्थक सड़कों पर उतर गये और ट्रैफिक सिस्टम को ठप कर दिया. वहीं दिन चढ़ते ही कई अन्य जिलों में भी बंद समर्थक सड़कों पर आ गये. इसकी वजह से आम यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी. सबसे ज्यादा खराब स्थिति जमशेदपुर-रांची एनएच पर दिखी. इसकी वजह से टोल प्लाजा के दोनों ओर एनएच पर हजारों गाड़ियां जाम में फंस गई. एनएच पर जाम का सिलसिला करीब 5 घंटे तक चला. सुबह करीब 11 बजे प्रदर्शनकारी टोल प्लाजा पहुंचे और प्रदर्शन कर लगे. इसकी वजह से जाम लग गया.
बुंडू टोल प्लाजा की घेराबंदी से यात्री रहे परेशान
इस दौरान बुंडू के एसडीएम, डीएसपी, सीओ और थाना प्रभारी लोगों को समझाते रहे. अंत में करीब 5 घंटे बाद 3 बजकर 20 मिनट के करीब प्रदर्शनकारी टोल प्लाजा से हट गये. अब एनएच पर गाड़ियों का आवाजाही शुरु हो गई है. लेकिन पांच घंटे तक जाम की वजह से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी. आम यात्री पानी और भोजन के लिए तरसते रहे. क्योंकि बुंडू नगर पंचायत की दुकानें बंद थीं. हालांकि इस दौरान सिर्फ एंबुलेंस और सेना की गाड़ी को जाने दिया जा रहा था.
एक महिला यह कहकर जाने देने की दरख्वास्त करती रहीं कि उनके ससुर की मृत्यु हो गई है. उनको घर पहुंचना बेहद जरूरी है. लेकिन प्रदर्शनकारी मानने को तैयार नहीं थे. इस दौरान एक महिला सड़क पर ही रोने लगीं. उनको रांची में फ्लाइट पकड़ना था. काफी मनुहार के बाद उन्हें जाने दिया गया. प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने कहा कि उनके पड़हा राजा की दिनदहाड़े हत्या हुई है. आदिवासी अस्मिता खतरे में है. अभी तक हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं हुई है. पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला है. इसलिए यात्रियों की परेशानी से वाकिफ होने के बावजूद ऐसा करना पड़ रहा है. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिना रोड जाम किए हमारी आवाज सरकार तक नहीं पहुंचेगी.
प्रशासन जाम हटाने के लिए करता रहा आग्रह
बुंडू टोल प्लाजा पर जाम लगते ही बुंडू के एसडीएम क्रिस्टोफर कुमार बेसरा, बुंडू के डीएसपी ओमप्रकाश, थाना प्रभारी रामकुमार वर्मा, अंचल अधिकारी हंस हेंब्रम पुलिस फोर्स के साथ वहां पहुंच गये थे. इस दौरान बंद समर्थकों को लगातार समझाने की कोशिश की जाती रही. लोगों को समझाने में करीब 5 घंटे लग गये. तबतक यात्री जाम में फंसे रहे. एसडीएन ने बताया कि ग्रामीणों ने एक ज्ञापन दिया है. सोमा मुंडा के परिवार को सरकारी नौकरी देने, फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए अपराधियों को सजा दिलाने, पांच करोड़ रु. बतौर मुआवजा देने की मांग की गई है. उन्होंने बताया कि मांगों से सरकार को अवगत कराया जाएगा.
दरअसल, 7 जनवरी को खूंटी में जमुवादाग के पास आदिवासी नेता सोमा मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या के विरोध में आदिवासी संगठनों ने 8 जनवरी को खूंटी बंद किया था, जिसका व्यापक असर दिखा था. खूंटी पुलिस इस मामले सात लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. पुलिस ने हत्या के पीछे जमीन विवाद को कारण बताया था. लेकिन आदिवासी संगठनों का कहना है कि अबतक शूटर और मुख्य साजिशकर्ता की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है.






जिला पंचायत सदस्य विवेक सिंह कलहंस ने दिखाई तत्परता, साथियों के सहयोग से घायलों को एंबुलेंस से पहुंचाया अस्पताल

सुल्तानपुर जिला कारागार में बंद अमेठी के एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। जेल प्रशासन ने जहां उसकी मौत का कारण हार्ट अटैक बताया है, वहीं परिजनों ने इस घटना पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोतवाली नगर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। मृतक बंदी शैलेंद्र सिंह के रिश्ते के भाई आशीष सिंह ने बताया कि शैलेंद्र पिछले 10 महीनों से सुल्तानपुर जिला कारागार में बंद थे। उन्हें आज सुबह एसएचओ (धम्मौर) द्वारा शैलेंद्र की मौत की सूचना मिली।
आशीष सिंह ने बताया कि जब उन्होंने मौत के कारण के बारे में पूछा, तो उन्हें बताया गया कि इसकी जानकारी जेलर ही दे पाएंगे। अस्पताल पहुंचने पर उन्हें पता चला कि शैलेंद्र को जब वहां लाया गया था, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनकी मृत्यु जेल के अंदर ही हुई। आशीष सिंह ने यह भी बताया कि वह खुद महीने में 2-3 बार शैलेंद्र से मिलने जाते थे, और उनकी पत्नी भी हफ्ते में दो दिन उनसे मिलने जाती थीं। उनके अनुसार, शैलेंद्र को कोई बीमारी नहीं थी और वह पूरी तरह से स्वस्थ थे। पेशी पर आने पर भी शैलेंद्र हमेशा अपनी अच्छी सेहत की बात कहते थे। शैलेंद्र सिंह करीब 20 साल पुराने हत्या के प्रयास के एक मामले में जेल में बंद थे।
हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में संसाधनों के रख-रखाव को लेकर व्याप्त घोर लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। सरकारी तंत्र की उदासीनता का आलम यह था कि करीब पांच साल पहले डीएमएफटी मद से लगभग 46 लाख की लागत से खरीदी गई एक बेशकीमती एम्बुलेंस कबाड़ में तब्दील होने की ओर बढ़ रही थी। विशेष रूप से हृदय रोगियों (कार्डिएक पेशेंट्स) को आपातकालीन सेवाएं देने के उद्देश्य से आई यह एम्बुलेंस पिछले काफी समय से अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के बाहर खड़ी धूल फांक रही थी। लाखों की लागत वाले संसाधनों का उपयोग न होना न केवल वित्तीय हानि है, बल्कि जिले की स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रबंधन की संवेदनहीनता को भी बखूबी दर्शाता है।
नगरा क्षेत्र के मलप हरसेनपुर गांव निवासी स्वर्गीय नरेंद्रनाथ सिंह की धर्मपत्नी एवं क्षेत्र की सम्मानित महिला श्रीमती महेश्वरी देवी की तेरहवीं (ब्रह्मभोज) का कार्यक्रम दिनांक 16 जनवरी 2026, शुक्रवार को शांतिपूर्ण एवं विधि-विधान के साथ संपन्न हो गया। ज्ञात हो कि श्रीमती महेश्वरी देवी का आकस्मिक निधन 03 जनवरी 2026, शनिवार को हो गया था। उनके असामयिक निधन से पूरे गांव एवं क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी। वे अपने सरल स्वभाव, धार्मिक आस्था और पारिवारिक मूल्यों के लिए जानी जाती थीं। तेरहवीं कार्यक्रम के अवसर पर गांव के गणमान्य नागरिकों, रिश्तेदारों, शुभचिंतकों एवं आसपास के क्षेत्रों से आए लोगों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया। ब्रह्मभोज में उपस्थित लोगों ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। इस अवसर पर शोकाकुल परिवार के सदस्य सतीश कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह एवं प्रदीप कुमार सिंह सहित अन्य परिजन उपस्थित रहे। वहीं हरिनारायण सिंह एवं प्रख्यात शिक्षक संजीव कुमार सिंह (दारा) सहित अनेक सम्मानित अतिथियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की। तेरहवीं संस्कार का आयोजन पूरी तरह से धार्मिक रीति-रिवाजों एवं सामाजिक मर्यादाओं के अनुरूप किया गया। कार्यक्रम के समापन पर परिजनों ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। क्षेत्र में श्रीमती महेश्वरी देवी के निधन को एक अपूरणीय क्षति बताते हुए लोगों ने उनके व्यक्तित्व को स्मरण किया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। ॐ शांति।
* पोते की मौत के सदमे से दादी ने तोड़ा दम,दो दिन पूर्व सूखे तालाब में मिला था शव
4 min ago
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