पेपर लीक राष्ट्रीय चिंता का विषय, इसे राजनीति का मुद्दा नहीं बनाया चाहिए, पीएम मोदी का बड़ा बयान

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दिल्ली में आज एनडीए संसदीय दल की बैठक हुई। इसका नाम 'मंगल मिलन' दिया गया। पीएम मोदी भी इस बैठक में शामिल हुए। इस दौरान पीएम मोदी ने NEET परीक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि पेपर लीक राजनीति का विषय नहीं है। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने बैठक के बाद दी।

पेपर लीक की खबरें पर सरकार ने तुरंत कार्रवाई की

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, "NEET परीक्षा के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक की खबरें सामने आते ही सरकार ने तुरंत कार्रवाई की और 13 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। साथ ही, यह सुनिश्चित करने के लिए कि छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो, NEET की दोबारा परीक्षा को प्राथमिकता दी गई, इसे सफलतापूर्वक आयोजित किया गया और बिना किसी देरी के नतीजे घोषित कर दिए गए।"

पेपर लीक को लेकर सख्त संदेश

किरेन रिजिजू के मुताबिक, पीएम मोदी ने पेपर लीक मामले पर विस्‍तार से बात की। पीएम मोदी ने सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि पेपर लीक फिर से नहीं होना चाहिए। साथ ही किसी भी छात्र का भविष्‍य प्रभावित नहीं होना चाहिए। पीएम मोदी ने पेपर लीक में शामिल आरोपियों को सख्‍त से सख्‍त सजा दिलाने की भी बात कही है।

पेपर लीक दलगत राजनीति का मामला नहीं

पीएम मोदी ने कहा, "पेपर लीक सिर्फ एक राज्य का मामला नहीं है। यह सिर्फ केंद्र का मामला नहीं है, हर एक राज्य में जहां-जहां पेपर लीक हो रहा है, जो लोग इस धंधे में लिप्त हैं, उनको सजा देने के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए। ये दलगत राजनीति का मामला नहीं है, ये पूरे देश का मामला है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो, इसके लिए सख्ती से कदम उठाए जाएं और सजा दिलाने के लिए मिलकर काम हो, ऐसा निर्देश पीएम मोदी ने दिया है।"

मानसून के साथ सत्र भी प्रोडक्टिव रहे...,संसद सत्र से पहले बोले पीएम मोदी

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आज से शुरू मानसून सत्र की कार्यवाही से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा, मानसून हो या मानसून सत्र हो, अगर दोनों प्रो-एक्टिव हों तो बहुत ही प्रोडक्टिव होते हैं। इससे देश का कल्याण होता है। इसलिए हम यही प्रार्थना करते हैं कि मानसून और मानसून सत्र प्रोडक्टिव रहे। इससे देश का कल्याण होता है।

सभी सांसदों को सदन में चर्चा के लिए निमंत्रण-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, ऐसे में जब ये मानसून सत्र आरंभ हो रहा है, देश ने स्पिरिट पकड़ ली है। संसद का सत्र उस स्पिरिट में ऊर्जा भर सकता है। सांसद किसी भी दल के हों, उनके पास लंबा अनुभव है। संसद में सार्थक चर्चा होना, मिलजुलकर देश को आगे ले जाने की चर्चा होना आज के वक्त की मांग है। तर्क-तथ्य के साथ सदन की चर्चा को मजबूत किया जाए, हर आवाज को सम्मान मिले। मैं सभी सांसदों को सदन में चर्चा के लिए निमंत्रण देता हूं।

सुधार एक्सप्रेस पर सवार होकर देश चल पड़ा है- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, पिछले 1 महीने में देश ने अनेक सिद्धियां प्राप्त की हैं। देशवासी गर्व से भर जाएं, इस प्रकार की सिद्धियों का सिलसिला चला है। चाहे राष्ट्रीय हो, अंतरराष्ट्रीय हो और अब तो अंतरिक्ष भी हो, एक प्रकार से भारत के लिए गर्व के पल रहे हैं। पिछ्ले वर्ष मानसून सत्र से ठीक पहले भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र पर पहुंचा था और परसों ही भारत के एक युवा स्टार्टअप ने बहुत बड़ी सिद्धि प्राप्त की है। ये संयोग नहीं, बल्कि एक संदेश है। और बड़ा मजबूत संदेश है कि हमारे देश के युवाओं की क्षमता और उनकी आकांक्षा अंतरिक्ष जितनी असीम हैं। सुधार एक्सप्रेस पर सवार होकर आज देश चल पड़ा है। उसी का नतीजा है कि भारत के नौजवान इतना बड़ा साहस कर पाते हैं और सफल भी हो रहे हैं।

भारत ने 7.7 प्रतिशत का विकास दर बनाए रखा-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि हम अच्छी तरह जानते हैं और पूरी दुनिया को अलग-अलग इलाकों में लगातार बने हुए युद्ध के खतरे की चिंता है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने भारत जैसे देशों के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया, जो ऊर्जा के लिए दूसरों पर निर्भर हैं। पेट्रोल, डीजल, LPG, फर्टिलाइजर और केमिकल को लेकर कई रुकावटें और संकट पैदा हुए। इसके बावजूद, भारत ने 7.7 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखी और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर उभरा। यह भारत की अंदरूनी ताकत को दिखाता है और उस जोश और उत्साह की झलक देता है जिसके साथ देश नई ऊंचाइयां छूना चाहता है। इसी माहौल में मॉनसून सत्र शुरू हो रहा है; देश ने रफ़्तार पकड़ ली है और संसद की भावना उस रफ्तार में नई ऊर्जा भरती है।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच 18 समझौतों पर बनी सहमति, पीएम मोदी बोले-एफटीए मील का पत्थर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे पर हैं। न्यूजीलैंड के ऐतिहासिक दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑकलैंड में अपने समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। पीएम मोदी ने भारत और न्यूजीलैंड को स्वाभाविक साझेदार बताया और दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई। बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच अहम समझौतौं पर आदान-प्रदान हुआ, जिसका मकसद अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाना है।

रक्षा और व्यापार समेत 18 समझौतों पर हस्ताक्षर

पीएम मोदी और कीवी प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों ने अपने रिश्तों को औपचारिक रूप से सामरिक साझेदारी में बदलने का फैसला किया और इसके लिए ‘भारत-न्यूजीलैंड सामरिक साझेदारी: रोडमैप 2030’ को मंजूरी दी। इसके साथ ही रक्षा, व्यापार, खेल, पशुपालन, आपदा प्रबंधन, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग समेत कुल 18 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

भारत-न्यूजीलैंड के बीच इन समझौतों पर सहमति

1- भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं की बैठक में भारत-न्यूजीलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी के लिए 2030 तक एक रोडमैप पर सहमति जताई। इसमें संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया। इससे भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी को दिशा देने के लिए एक व्यवस्थित रोडमैप मिलता है।

2- भारत के रक्षा मंत्रालय और न्यूजीलैंड डिफेंस फोर्स के बीच समुद्री सहयोग पर मेमोरेंडम ऑफ अरेंजमेंट पर सहमति बनी। इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा।

3- भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाइड्रोग्राफी और नॉटिकल कार्टोग्राफी के मामलों में सहगोय के लिए कार्यान्वयन व्यवस्था पर सहमति बनी है।

4- भारतीय नेवी और न्यूजीलैंड डिफेंस फोर्स के आपसी लॉजिस्टिक्स सहायता पर सहमति बनी है। यह दोनों बलों के बीच रसद सहायता को आसान बनाता है।

5- भारत और न्यूजीलैंड के बीच आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति बनी। इससे दोनों देश आतंकवाद रोधी बातचीत और खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान कर सकेंगे।

6- भारत के नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) और न्यूजीलैंड की नेशनल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (NEMA) के बीच सहयोग का समझौता। यह आपदा की तैयारी, उससे निपटने और उबरने की क्षमता में सहयोग को बढ़ावा देगा।

7- पशुपालन और डेयरी के क्षेत्र में भी समझौता हुआ है, जो तकनीकी सहयोग, जानकारी का आदान-प्रदान और बेहतरीन तौर-तरीकों को बढ़ावा देगा। इसका लक्ष्य किसानों को फायदा पहुंचाना और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।

8- पर्यटन क्षेत्र में मेमोरेंडम ऑफ अरेंजमेंट के तहत दोनों तरफ से पर्यटन और लोगों के बीच आपसी मेलजोल को बढ़ावा दिया जाएगा।

9- भारत-न्यूजीलैंड ने खेल पर संयुक्त कार्य योजना पर सहमति जताई है, जिसमें खेलों को बढावा दिया जाएगा। इसमें हाई-परफॉर्मेंस खेल, खेल विज्ञान और खेल चिकिस्ता शामिल है।

10- गुजरात के लोथल में नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स (NMHC) के विकास के लिए NMHC और न्यूजीलैंड मैरीटाइम म्यूजिमय के बीच समझौता ज्ञापन पर सहमति।

11- भारत के संस्कृति मंत्रालय और न्यूजीलैंड के संस्कृति और विरासत मंत्रालय के बीच सांस्कृतिक सहयोग पर समझौता हुआ है। इसके तहत कला, विरासत और सांस्कृतिक पहलों में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

12- 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 35000 करोड़ रुपये या 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही व्यवसायों के लिए नए अवसर, निर्यात को बढ़ावा देना और युवाओं के लिए नई नौकरियां पैदा की जाएंगी।

13- दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा पर बातचीत शुरू करने पर सहमति बनी है। इसके तहत समुद्री क्षेत्र में सहयोग, समन्वय और जानकारी के आदान-प्रदान को मजबूत करना शामिल है।

14- न्यूजीलैंड ने इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव के तहत समुद्री सुरक्षा को एक प्राथमिकता वाले स्तंभ के रूप में चुना है। इसके तहत अवैध, बिना रिपोर्ट की गई और अनियमित मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों से निपटने जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जा सकेगा।

15- न्यूजीलैंड ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस में शामिल हुआ। यह बायोफ्यूल पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करेगा।

16- कीवी फ्रूट एक्शन प्लान की स्थापना। इसके तहत नागालैंड व उत्तराखंड में कीवी के उत्पादन के लिए 2 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगें।

17- नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च, गोवा और यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी, न्यूजीलैंड के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए हैं। इससे अंटार्कटिक क्षेत्र की समझ विकसित करने में संयुक्त शोध और शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

18- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट, कुंडली और मैसी यूनिवर्सिटी, न्यूजीलैंड के बीच MoU पर हस्ताक्षर। इसके तहत शोध और शैक्षणिक आदान-प्रदान में सहयोग के लिए एक ढांचा तैयार किए जाएगा।

पीएम मोदी इंडोनेशिया के सबसे बड़े प्रम्बानन मंदिर पहुंचे, बोले- हमेशा शिव से जुड़ने का सौभाग्य मिला

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को मुस्लिम देश इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर के दौरे पर पहुंचे। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी उनके साथ गए। पीएम मोदी ने भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित लगभग 1,000 साल पुराने हिंदू मंदिर में पूजा-अर्चना की है। इस दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ मंदिर के संरक्षण-जीर्णोद्धार परियोजना का उद्घाटन किया।

पीएम मोदी बोले-'भव्य प्रम्बानन मंदिर

पीएम मोदी ने एक्स पर एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें वे हेलीकॉप्टर की खिड़की से वे प्रम्बानन मंदिर का नजारा देख रहे हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा-'भव्य प्रम्बानन मंदिर!' वहीं एक अन्य वीडियो में पीएम मोदी मंदिर में अन्य लोगों के साथ प्रार्थना करते नजर आ रहे हैं।

मंदिर के संरक्षण और पुनर्स्थापना में भारत करेगा सहयोग

पीएम मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने संयुक्त रूप से प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापना परियोजना का उद्घाटन किया। इस परियोजना के लिए भारत और इंडोनेशिया के बीच आशय पत्र यानि लेटर ऑफ इंटेंट का आदान-प्रदान पहले ही हो चुका है।

मुझे हमेशा भगवान शिव से जुड़ने का मौका मिला-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने जॉइंट प्रेस कॉन्फेंस के दौरान मंगलवार को कहा था कि योग्याकार्ता में राष्ट्रपति प्रबोवो के संग मिलकर प्रम्बानन मंदिर की संरक्षण परियोजना की शुरुआत करने का मौका मिला। मुझे किसी न किसी रूप में हमेशा भगवान शिव से जुड़ने का मौका मिला है। सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ धाम और उज्जैन के महाकाल मंदिर के बाद प्रम्बानन मंदिर के विकास का मौका मिलना मेरा सौभाग्य है।

मंदिरों की दीवारों पर रामायण महाकाव्य उकेरा गया

इंडोनेशिया में 10वीं सदी में बना भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। इसके केंद्र में तीन प्रमुख मंदिरों की दीवारों पर रामायण महाकाव्य को उकेरा गया है। ये मंदिर हिंदू धर्म के तीन प्रमुख देवों, ब्रह्मा, विष्णु और महेश को समर्पित हैं। इसके अलावा तीन अन्य मंदिर इन देवताओं के वाहनों को समर्पित हैं।

इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर रवाना हुए पीएम मोदी, जानें क्यों अहम है ये यात्रा?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के त्रिपक्षीय दौरे के लिए रवाना हो गए। पीएम मोदी की यह यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, महासागर विजन के साथ-साथ एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के प्रति भारत के दृष्टिकोण को और मजबूत करेगी। इस दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए कई अहम बैठकें होंगी। यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण समझौतों और घोषणाओं पर भी नजर रहेगी।

रवाना होने से पहले क्या बोले पीएम मोदी

तीन देशों की यात्रा के लिए रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने कहा कि इसका मकसद इन कीमती विकास साझेदारों के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना होगा कि आने वाले समय में हमारे देश के युवाओं को और मौके मिलें।

आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ेगा

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना लेख साझा किया और कहा, ‘अगले कुछ दिनों में मैं इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल हो रहा हूं। इन मीटिंग का मकसद अहम विकास साझेदारों के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना होगा कि आने वाले समय में हमारे देश के युवाओं को और मौके मिलें।’

इंडोनेशिया से होगी दौरे की शुरूआत

प्रधानमंत्री मोदी अपने तीन देशों के दौरे की शुरुआत 6 से करेंगे। पीएम मोदी 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा पर रहेंगे। अपनी यात्रा की शुरूआत इंडोनेशिया से करेंगे। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति महामहिम प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर वे 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया में रहेंगे। इस यात्रा के दौरान, वे इंडोनेशिया में रहने वाले भारतीय प्रवासियों से भी बातचीत करेंगे। राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ योग्याकार्ता स्थित प्रंबानन मंदिर परिसर का दौरा भी करेंगे।

8 से 10 जुलाई तक मेलबर्न का दौरा

दौरे के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे। मोदी 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न का दौरा करेंगे। यह यात्रा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर हो रही है। यहां मेलबर्न में भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेताओं का शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। क्वॉड के तहत सहयोग को और मजबूत करने पर भी जोर रहेगा। दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड जाएंगे। भारत और न्यूजीलैंड ने इसी साल मुक्त व्यापार समझौते पर साइन किए हैं।

चार दशक बाद भारतीय पीएम का न्यूजीलैंड दौरा

ऑस्ट्रेलिया के बाद प्रधानमंत्री मोदी 10 से 11 जुलाई तक न्यूजीलैंड के ऑकलैंड की आधिकारिक यात्रा करेंगे। करीब चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा होगी। ऑकलैंड में प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेता व्यापार, वाणिज्य, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा करेंगे, जिनमें पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

शहबाज शरीफ की विदाई पक्की...’, पाकिस्तानी के पूर्व मंत्री के दावे से बढ़ी हलचल

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की विदाई तय है। पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने ये दावा किया है। उन्होंने कहा है यह साल प्रधानमंत्री के रूप में शाहबाज शरीफ का आखिरी साल होने जा रहा है। उन्होंने यह दावा ऐसे समय में किया है, जब शहबाज शरीफ ईरान को लेकर कूटनीतिक सफलताओं का जश्न मना रहे हैं।

शहबाज नहीं जनरल मुनीर ले रहे अहम फैसले

एक पॉडकास्ट में पूर्व पाकिस्तानी मंत्री ने दावा किया है कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री के तौर पर शहबाज शरीफ का ये आखिरी साल होगा। उन्होंने कहा कि शाहबाज शरीफ देश में कोई फैसले नहीं ले रहे हैं। देश में सभी अहम फैसले जनरल मुनीर ले रहे हैं।

मिफ्ताह इस्माइल के दावे के पीछे का तर्क

मिफ्ताह इस्माइल ने पाकिस्तान के केंद्रीय गृह मंत्री मोहसिन नकवी की एक्स पर एक पोस्ट का हवाला दिया और कहा कि नकवी ने ईरान समझौते के लिए फील्ड मार्शल को बधाई दी और प्रधानमंत्री का नाम तक उनकी पोस्ट में नहीं था। उन्होंने इसे संकेत बताया कि कैबिनेट में बैठे लोग भी अब मान रहे हैं कि शहबाज शरीफ की विदाई पक्की है। उन्होंने इसके पीछे ये तर्क भी दिया कि पिछले चार साल में पाकिस्तान इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। गरीबी और बेरोजगारी उच्चतम स्तर पर है और विकास 4 फीसदी भी नहीं हुआ।

शहबाज से अहम फैसला लेने का अधिकार छीन लिया

इस्माइल ने इसके आगे बताया कि पाकिस्तानी राजनीति में इस वक्त स्थिति ही अलग है। इस समय सारे अहम फैसले पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व से लिए जा रहे हैं। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि कुछ घरेलू फैसले शहबाज शरीफ खुद से कर रहे हैं लेकिन कोई भी अहम फैसला लेने का अधिकार उनसे छीन लिया गया है। शहबाज शरीफ पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के सामने सरेंडर कर चुके हैं, यही वजह है कि वो टिके हुए भी हैं। हालांकि वे ज्यादा दिनों तक पद पर नहीं रहने वाले हैं।

जी7 सम्मेलन में आज पीएम मोदी-ट्रंप की अहम मुलाकात, क्‍या भारत-अमेरिका तनाव होगा कम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 देशों के सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। आज मंगलवार को सम्मेलन के दूसरे दिन उन्होंने मजबूती से भारत का पक्ष रखा। जी7 देशों की बैठक से इतर पीएम मोदी आज शाम करीब 6.15 बजे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे।

16 महीने के बाद आमने-सामने की बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आज फ्रांस में द्विपक्षीय बैठक होने वाली है। दोनों नेताओं के बीच फरवरी 2025 के बाद यानि करीब 16 महीने के बाद आमने-सामने की बैठक होनी है। इन 16 महीने में भारत अमेरिका के बीच के संबंध 20 साल पीछे जा चुके हैं। ट्रंप प्रशासन ने भारत के साथ संबंध काफी खराब कर लिए हैं।

तीन भारतीयों की मौत का मुद्दा अहम

मोदी-ट्रंप के बीच बैठक उस वक्त हो रही है जब अमेरिकी सेना ने एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला किया जिसमें तीन भारतीय मारे गये हैं और भारत सरकार पर अमेरिका को सख्त संदेश देने का दबाव है। आज की बैठक में भी यह मुद्दा छाया रह सकता है। कारण कि भारत ने पहले ही इस मसले पर अमेरिका के समक्ष अपना विरोध दर्ज करा दिया है। इसके अलावा ट्रेड से लेकर ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया संघर्ष पौर तमाम दूसरे द्विपक्षीय मसलों पर बातचीत होगी।

पीएम मोदी ने उठाया भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा

इससे पहले जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को फ़्रांस में जी-7 सम्मेलन के दौरान सुरक्षित समुद्री रास्तों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से भारत के मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। साथ ही होर्मु स्ट्रेट में समुद्री व्यापाार में आई बाधा की वजह से पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। इस संघर्ष में भारत के कई नागरिकों को जान गंवानी पड़ी है। पीएम मोदी ने कहा, वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सामूहिक दायित्व है। इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी ताकि नाविक बिना डर के काम कर सकें।

अमेरिका का नाम ना लेने पर विपक्ष हमलावर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओर से समुद्री में नाविकों की 'सुरक्षा का मुद्दा उठाने के तरीके' पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने पीएम मोदी के भाषण के एक अंश को रेखांकित करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, ''जी-7 मीटिंग में अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने देश का सिर झुका दिया। उनका कायराना बयान इस देश के साथ एक भद्दा मज़ाक है। हमारे लोगों का अपमान है। हिन्दुस्तान के तीन नाविकों की अमेरिका ने क्रूर हत्या कर दी और नरेंद्र मोदी अमेरिका का नाम लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। उन्होंने कई सिविलियन्स को जान गंवानी पड़ी कह कर छोड़ दिया। मृतकों का नाम आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया, परनाला सुरेश था है। इतना सम्मान तो देना चाहिए था। जो अपने देश का ना हुआ वह किसका होगा? लानत है मोदी जी!''

यूएस-ईरान समझौते का पीएम मोदी ने किया स्वागत, बोले-शांति और स्थिरता बहाली में मिलेगी मदद

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अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का एलान हो गया है, जिससे पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है। अमेरिका-ईरान के बीच समझौते पर दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं आई हैं। ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं की ओर से एक संयुक्त बयान जारी किया गया। वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के नेताओं ने भी प्रतिक्रियाएं दीं है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए घोषित शांति समझौते का स्वागत किया है।

अमेरिका-ईरान समझौते पर क्या बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इस कदम की प्रशंसा की है। पीएम मोदी ने सोमवार को एक्स पर लिखा, "मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता हूं। इस संघर्ष के कारण दुनियाभर में गंभीर आर्थिक अड़चन पैदा हुई और कई देशों में लोगों की जान गई। भारत को उम्मीद है कि इस सहमति के लागू होने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी और नेविगेशन और व्यापार की आज़ादी सुनिश्चित होगी।" इसके अलावा उन्होंने उम्मीद जताई कि 'बाक़ी बचे मुद्दों पर भी' होने वाली बातचीत 'एक टिकाऊ और अंतिम समझौते' तक पहुंचेगी।

ट्रंप ने किया शांति समझौते का ऐलान

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ट्रुथ पर पोस्ट कर ऐलान किया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन चुकी है। स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर साइन किए जाएंगे। इसमें अमेरिका से जेडी वेंस और ईरान से अराघची और गालिबफ शामिल होंगे। 60 दिनों के सीजफायर के दौरान समझौते पर दोनों देशों के बीच बातचीत होगी। इसमें ईरान पर लगे प्रतिबंधों, फ्रीज फंड को रिलीज करने से लेकर परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। जब तक फाइनल समझौता लागू नहीं हो जाता, अस्थायी व्यवस्थाएं लागू रहेंगी।

पेपर लीक राष्ट्रीय चिंता का विषय, इसे राजनीति का मुद्दा नहीं बनाया चाहिए, पीएम मोदी का बड़ा बयान

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दिल्ली में आज एनडीए संसदीय दल की बैठक हुई। इसका नाम 'मंगल मिलन' दिया गया। पीएम मोदी भी इस बैठक में शामिल हुए। इस दौरान पीएम मोदी ने NEET परीक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि पेपर लीक राजनीति का विषय नहीं है। यह जानकारी केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने बैठक के बाद दी।

पेपर लीक की खबरें पर सरकार ने तुरंत कार्रवाई की

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, "NEET परीक्षा के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक की खबरें सामने आते ही सरकार ने तुरंत कार्रवाई की और 13 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। साथ ही, यह सुनिश्चित करने के लिए कि छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो, NEET की दोबारा परीक्षा को प्राथमिकता दी गई, इसे सफलतापूर्वक आयोजित किया गया और बिना किसी देरी के नतीजे घोषित कर दिए गए।"

पेपर लीक को लेकर सख्त संदेश

किरेन रिजिजू के मुताबिक, पीएम मोदी ने पेपर लीक मामले पर विस्‍तार से बात की। पीएम मोदी ने सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि पेपर लीक फिर से नहीं होना चाहिए। साथ ही किसी भी छात्र का भविष्‍य प्रभावित नहीं होना चाहिए। पीएम मोदी ने पेपर लीक में शामिल आरोपियों को सख्‍त से सख्‍त सजा दिलाने की भी बात कही है।

पेपर लीक दलगत राजनीति का मामला नहीं

पीएम मोदी ने कहा, "पेपर लीक सिर्फ एक राज्य का मामला नहीं है। यह सिर्फ केंद्र का मामला नहीं है, हर एक राज्य में जहां-जहां पेपर लीक हो रहा है, जो लोग इस धंधे में लिप्त हैं, उनको सजा देने के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए। ये दलगत राजनीति का मामला नहीं है, ये पूरे देश का मामला है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो, इसके लिए सख्ती से कदम उठाए जाएं और सजा दिलाने के लिए मिलकर काम हो, ऐसा निर्देश पीएम मोदी ने दिया है।"

मानसून के साथ सत्र भी प्रोडक्टिव रहे...,संसद सत्र से पहले बोले पीएम मोदी

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आज से शुरू मानसून सत्र की कार्यवाही से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा, मानसून हो या मानसून सत्र हो, अगर दोनों प्रो-एक्टिव हों तो बहुत ही प्रोडक्टिव होते हैं। इससे देश का कल्याण होता है। इसलिए हम यही प्रार्थना करते हैं कि मानसून और मानसून सत्र प्रोडक्टिव रहे। इससे देश का कल्याण होता है।

सभी सांसदों को सदन में चर्चा के लिए निमंत्रण-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, ऐसे में जब ये मानसून सत्र आरंभ हो रहा है, देश ने स्पिरिट पकड़ ली है। संसद का सत्र उस स्पिरिट में ऊर्जा भर सकता है। सांसद किसी भी दल के हों, उनके पास लंबा अनुभव है। संसद में सार्थक चर्चा होना, मिलजुलकर देश को आगे ले जाने की चर्चा होना आज के वक्त की मांग है। तर्क-तथ्य के साथ सदन की चर्चा को मजबूत किया जाए, हर आवाज को सम्मान मिले। मैं सभी सांसदों को सदन में चर्चा के लिए निमंत्रण देता हूं।

सुधार एक्सप्रेस पर सवार होकर देश चल पड़ा है- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, पिछले 1 महीने में देश ने अनेक सिद्धियां प्राप्त की हैं। देशवासी गर्व से भर जाएं, इस प्रकार की सिद्धियों का सिलसिला चला है। चाहे राष्ट्रीय हो, अंतरराष्ट्रीय हो और अब तो अंतरिक्ष भी हो, एक प्रकार से भारत के लिए गर्व के पल रहे हैं। पिछ्ले वर्ष मानसून सत्र से ठीक पहले भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र पर पहुंचा था और परसों ही भारत के एक युवा स्टार्टअप ने बहुत बड़ी सिद्धि प्राप्त की है। ये संयोग नहीं, बल्कि एक संदेश है। और बड़ा मजबूत संदेश है कि हमारे देश के युवाओं की क्षमता और उनकी आकांक्षा अंतरिक्ष जितनी असीम हैं। सुधार एक्सप्रेस पर सवार होकर आज देश चल पड़ा है। उसी का नतीजा है कि भारत के नौजवान इतना बड़ा साहस कर पाते हैं और सफल भी हो रहे हैं।

भारत ने 7.7 प्रतिशत का विकास दर बनाए रखा-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि हम अच्छी तरह जानते हैं और पूरी दुनिया को अलग-अलग इलाकों में लगातार बने हुए युद्ध के खतरे की चिंता है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने भारत जैसे देशों के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया, जो ऊर्जा के लिए दूसरों पर निर्भर हैं। पेट्रोल, डीजल, LPG, फर्टिलाइजर और केमिकल को लेकर कई रुकावटें और संकट पैदा हुए। इसके बावजूद, भारत ने 7.7 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखी और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर उभरा। यह भारत की अंदरूनी ताकत को दिखाता है और उस जोश और उत्साह की झलक देता है जिसके साथ देश नई ऊंचाइयां छूना चाहता है। इसी माहौल में मॉनसून सत्र शुरू हो रहा है; देश ने रफ़्तार पकड़ ली है और संसद की भावना उस रफ्तार में नई ऊर्जा भरती है।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच 18 समझौतों पर बनी सहमति, पीएम मोदी बोले-एफटीए मील का पत्थर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे पर हैं। न्यूजीलैंड के ऐतिहासिक दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑकलैंड में अपने समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। पीएम मोदी ने भारत और न्यूजीलैंड को स्वाभाविक साझेदार बताया और दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई। बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच अहम समझौतौं पर आदान-प्रदान हुआ, जिसका मकसद अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाना है।

रक्षा और व्यापार समेत 18 समझौतों पर हस्ताक्षर

पीएम मोदी और कीवी प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों ने अपने रिश्तों को औपचारिक रूप से सामरिक साझेदारी में बदलने का फैसला किया और इसके लिए ‘भारत-न्यूजीलैंड सामरिक साझेदारी: रोडमैप 2030’ को मंजूरी दी। इसके साथ ही रक्षा, व्यापार, खेल, पशुपालन, आपदा प्रबंधन, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग समेत कुल 18 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

भारत-न्यूजीलैंड के बीच इन समझौतों पर सहमति

1- भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं की बैठक में भारत-न्यूजीलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी के लिए 2030 तक एक रोडमैप पर सहमति जताई। इसमें संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया। इससे भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी को दिशा देने के लिए एक व्यवस्थित रोडमैप मिलता है।

2- भारत के रक्षा मंत्रालय और न्यूजीलैंड डिफेंस फोर्स के बीच समुद्री सहयोग पर मेमोरेंडम ऑफ अरेंजमेंट पर सहमति बनी। इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा।

3- भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाइड्रोग्राफी और नॉटिकल कार्टोग्राफी के मामलों में सहगोय के लिए कार्यान्वयन व्यवस्था पर सहमति बनी है।

4- भारतीय नेवी और न्यूजीलैंड डिफेंस फोर्स के आपसी लॉजिस्टिक्स सहायता पर सहमति बनी है। यह दोनों बलों के बीच रसद सहायता को आसान बनाता है।

5- भारत और न्यूजीलैंड के बीच आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति बनी। इससे दोनों देश आतंकवाद रोधी बातचीत और खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान कर सकेंगे।

6- भारत के नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) और न्यूजीलैंड की नेशनल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (NEMA) के बीच सहयोग का समझौता। यह आपदा की तैयारी, उससे निपटने और उबरने की क्षमता में सहयोग को बढ़ावा देगा।

7- पशुपालन और डेयरी के क्षेत्र में भी समझौता हुआ है, जो तकनीकी सहयोग, जानकारी का आदान-प्रदान और बेहतरीन तौर-तरीकों को बढ़ावा देगा। इसका लक्ष्य किसानों को फायदा पहुंचाना और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।

8- पर्यटन क्षेत्र में मेमोरेंडम ऑफ अरेंजमेंट के तहत दोनों तरफ से पर्यटन और लोगों के बीच आपसी मेलजोल को बढ़ावा दिया जाएगा।

9- भारत-न्यूजीलैंड ने खेल पर संयुक्त कार्य योजना पर सहमति जताई है, जिसमें खेलों को बढावा दिया जाएगा। इसमें हाई-परफॉर्मेंस खेल, खेल विज्ञान और खेल चिकिस्ता शामिल है।

10- गुजरात के लोथल में नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स (NMHC) के विकास के लिए NMHC और न्यूजीलैंड मैरीटाइम म्यूजिमय के बीच समझौता ज्ञापन पर सहमति।

11- भारत के संस्कृति मंत्रालय और न्यूजीलैंड के संस्कृति और विरासत मंत्रालय के बीच सांस्कृतिक सहयोग पर समझौता हुआ है। इसके तहत कला, विरासत और सांस्कृतिक पहलों में सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

12- 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 35000 करोड़ रुपये या 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही व्यवसायों के लिए नए अवसर, निर्यात को बढ़ावा देना और युवाओं के लिए नई नौकरियां पैदा की जाएंगी।

13- दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा पर बातचीत शुरू करने पर सहमति बनी है। इसके तहत समुद्री क्षेत्र में सहयोग, समन्वय और जानकारी के आदान-प्रदान को मजबूत करना शामिल है।

14- न्यूजीलैंड ने इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव के तहत समुद्री सुरक्षा को एक प्राथमिकता वाले स्तंभ के रूप में चुना है। इसके तहत अवैध, बिना रिपोर्ट की गई और अनियमित मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों से निपटने जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जा सकेगा।

15- न्यूजीलैंड ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस में शामिल हुआ। यह बायोफ्यूल पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करेगा।

16- कीवी फ्रूट एक्शन प्लान की स्थापना। इसके तहत नागालैंड व उत्तराखंड में कीवी के उत्पादन के लिए 2 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगें।

17- नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च, गोवा और यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी, न्यूजीलैंड के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए हैं। इससे अंटार्कटिक क्षेत्र की समझ विकसित करने में संयुक्त शोध और शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

18- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट, कुंडली और मैसी यूनिवर्सिटी, न्यूजीलैंड के बीच MoU पर हस्ताक्षर। इसके तहत शोध और शैक्षणिक आदान-प्रदान में सहयोग के लिए एक ढांचा तैयार किए जाएगा।

पीएम मोदी इंडोनेशिया के सबसे बड़े प्रम्बानन मंदिर पहुंचे, बोले- हमेशा शिव से जुड़ने का सौभाग्य मिला

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को मुस्लिम देश इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर के दौरे पर पहुंचे। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी उनके साथ गए। पीएम मोदी ने भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को समर्पित लगभग 1,000 साल पुराने हिंदू मंदिर में पूजा-अर्चना की है। इस दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ मंदिर के संरक्षण-जीर्णोद्धार परियोजना का उद्घाटन किया।

पीएम मोदी बोले-'भव्य प्रम्बानन मंदिर

पीएम मोदी ने एक्स पर एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें वे हेलीकॉप्टर की खिड़की से वे प्रम्बानन मंदिर का नजारा देख रहे हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा-'भव्य प्रम्बानन मंदिर!' वहीं एक अन्य वीडियो में पीएम मोदी मंदिर में अन्य लोगों के साथ प्रार्थना करते नजर आ रहे हैं।

मंदिर के संरक्षण और पुनर्स्थापना में भारत करेगा सहयोग

पीएम मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने संयुक्त रूप से प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापना परियोजना का उद्घाटन किया। इस परियोजना के लिए भारत और इंडोनेशिया के बीच आशय पत्र यानि लेटर ऑफ इंटेंट का आदान-प्रदान पहले ही हो चुका है।

मुझे हमेशा भगवान शिव से जुड़ने का मौका मिला-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने जॉइंट प्रेस कॉन्फेंस के दौरान मंगलवार को कहा था कि योग्याकार्ता में राष्ट्रपति प्रबोवो के संग मिलकर प्रम्बानन मंदिर की संरक्षण परियोजना की शुरुआत करने का मौका मिला। मुझे किसी न किसी रूप में हमेशा भगवान शिव से जुड़ने का मौका मिला है। सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ धाम और उज्जैन के महाकाल मंदिर के बाद प्रम्बानन मंदिर के विकास का मौका मिलना मेरा सौभाग्य है।

मंदिरों की दीवारों पर रामायण महाकाव्य उकेरा गया

इंडोनेशिया में 10वीं सदी में बना भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। इसके केंद्र में तीन प्रमुख मंदिरों की दीवारों पर रामायण महाकाव्य को उकेरा गया है। ये मंदिर हिंदू धर्म के तीन प्रमुख देवों, ब्रह्मा, विष्णु और महेश को समर्पित हैं। इसके अलावा तीन अन्य मंदिर इन देवताओं के वाहनों को समर्पित हैं।

इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर रवाना हुए पीएम मोदी, जानें क्यों अहम है ये यात्रा?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के त्रिपक्षीय दौरे के लिए रवाना हो गए। पीएम मोदी की यह यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, महासागर विजन के साथ-साथ एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के प्रति भारत के दृष्टिकोण को और मजबूत करेगी। इस दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए कई अहम बैठकें होंगी। यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण समझौतों और घोषणाओं पर भी नजर रहेगी।

रवाना होने से पहले क्या बोले पीएम मोदी

तीन देशों की यात्रा के लिए रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने कहा कि इसका मकसद इन कीमती विकास साझेदारों के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना होगा कि आने वाले समय में हमारे देश के युवाओं को और मौके मिलें।

आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ेगा

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना लेख साझा किया और कहा, ‘अगले कुछ दिनों में मैं इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल हो रहा हूं। इन मीटिंग का मकसद अहम विकास साझेदारों के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना होगा कि आने वाले समय में हमारे देश के युवाओं को और मौके मिलें।’

इंडोनेशिया से होगी दौरे की शुरूआत

प्रधानमंत्री मोदी अपने तीन देशों के दौरे की शुरुआत 6 से करेंगे। पीएम मोदी 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा पर रहेंगे। अपनी यात्रा की शुरूआत इंडोनेशिया से करेंगे। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति महामहिम प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर वे 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया में रहेंगे। इस यात्रा के दौरान, वे इंडोनेशिया में रहने वाले भारतीय प्रवासियों से भी बातचीत करेंगे। राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ योग्याकार्ता स्थित प्रंबानन मंदिर परिसर का दौरा भी करेंगे।

8 से 10 जुलाई तक मेलबर्न का दौरा

दौरे के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे। मोदी 8 से 10 जुलाई तक ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न का दौरा करेंगे। यह यात्रा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर हो रही है। यहां मेलबर्न में भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेताओं का शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। क्वॉड के तहत सहयोग को और मजबूत करने पर भी जोर रहेगा। दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड जाएंगे। भारत और न्यूजीलैंड ने इसी साल मुक्त व्यापार समझौते पर साइन किए हैं।

चार दशक बाद भारतीय पीएम का न्यूजीलैंड दौरा

ऑस्ट्रेलिया के बाद प्रधानमंत्री मोदी 10 से 11 जुलाई तक न्यूजीलैंड के ऑकलैंड की आधिकारिक यात्रा करेंगे। करीब चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा होगी। ऑकलैंड में प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेता व्यापार, वाणिज्य, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा करेंगे, जिनमें पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

शहबाज शरीफ की विदाई पक्की...’, पाकिस्तानी के पूर्व मंत्री के दावे से बढ़ी हलचल

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की विदाई तय है। पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने ये दावा किया है। उन्होंने कहा है यह साल प्रधानमंत्री के रूप में शाहबाज शरीफ का आखिरी साल होने जा रहा है। उन्होंने यह दावा ऐसे समय में किया है, जब शहबाज शरीफ ईरान को लेकर कूटनीतिक सफलताओं का जश्न मना रहे हैं।

शहबाज नहीं जनरल मुनीर ले रहे अहम फैसले

एक पॉडकास्ट में पूर्व पाकिस्तानी मंत्री ने दावा किया है कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री के तौर पर शहबाज शरीफ का ये आखिरी साल होगा। उन्होंने कहा कि शाहबाज शरीफ देश में कोई फैसले नहीं ले रहे हैं। देश में सभी अहम फैसले जनरल मुनीर ले रहे हैं।

मिफ्ताह इस्माइल के दावे के पीछे का तर्क

मिफ्ताह इस्माइल ने पाकिस्तान के केंद्रीय गृह मंत्री मोहसिन नकवी की एक्स पर एक पोस्ट का हवाला दिया और कहा कि नकवी ने ईरान समझौते के लिए फील्ड मार्शल को बधाई दी और प्रधानमंत्री का नाम तक उनकी पोस्ट में नहीं था। उन्होंने इसे संकेत बताया कि कैबिनेट में बैठे लोग भी अब मान रहे हैं कि शहबाज शरीफ की विदाई पक्की है। उन्होंने इसके पीछे ये तर्क भी दिया कि पिछले चार साल में पाकिस्तान इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। गरीबी और बेरोजगारी उच्चतम स्तर पर है और विकास 4 फीसदी भी नहीं हुआ।

शहबाज से अहम फैसला लेने का अधिकार छीन लिया

इस्माइल ने इसके आगे बताया कि पाकिस्तानी राजनीति में इस वक्त स्थिति ही अलग है। इस समय सारे अहम फैसले पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व से लिए जा रहे हैं। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि कुछ घरेलू फैसले शहबाज शरीफ खुद से कर रहे हैं लेकिन कोई भी अहम फैसला लेने का अधिकार उनसे छीन लिया गया है। शहबाज शरीफ पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के सामने सरेंडर कर चुके हैं, यही वजह है कि वो टिके हुए भी हैं। हालांकि वे ज्यादा दिनों तक पद पर नहीं रहने वाले हैं।

जी7 सम्मेलन में आज पीएम मोदी-ट्रंप की अहम मुलाकात, क्‍या भारत-अमेरिका तनाव होगा कम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 देशों के सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। आज मंगलवार को सम्मेलन के दूसरे दिन उन्होंने मजबूती से भारत का पक्ष रखा। जी7 देशों की बैठक से इतर पीएम मोदी आज शाम करीब 6.15 बजे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे।

16 महीने के बाद आमने-सामने की बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आज फ्रांस में द्विपक्षीय बैठक होने वाली है। दोनों नेताओं के बीच फरवरी 2025 के बाद यानि करीब 16 महीने के बाद आमने-सामने की बैठक होनी है। इन 16 महीने में भारत अमेरिका के बीच के संबंध 20 साल पीछे जा चुके हैं। ट्रंप प्रशासन ने भारत के साथ संबंध काफी खराब कर लिए हैं।

तीन भारतीयों की मौत का मुद्दा अहम

मोदी-ट्रंप के बीच बैठक उस वक्त हो रही है जब अमेरिकी सेना ने एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला किया जिसमें तीन भारतीय मारे गये हैं और भारत सरकार पर अमेरिका को सख्त संदेश देने का दबाव है। आज की बैठक में भी यह मुद्दा छाया रह सकता है। कारण कि भारत ने पहले ही इस मसले पर अमेरिका के समक्ष अपना विरोध दर्ज करा दिया है। इसके अलावा ट्रेड से लेकर ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया संघर्ष पौर तमाम दूसरे द्विपक्षीय मसलों पर बातचीत होगी।

पीएम मोदी ने उठाया भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा

इससे पहले जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को फ़्रांस में जी-7 सम्मेलन के दौरान सुरक्षित समुद्री रास्तों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से भारत के मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। साथ ही होर्मु स्ट्रेट में समुद्री व्यापाार में आई बाधा की वजह से पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। इस संघर्ष में भारत के कई नागरिकों को जान गंवानी पड़ी है। पीएम मोदी ने कहा, वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सामूहिक दायित्व है। इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी ताकि नाविक बिना डर के काम कर सकें।

अमेरिका का नाम ना लेने पर विपक्ष हमलावर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओर से समुद्री में नाविकों की 'सुरक्षा का मुद्दा उठाने के तरीके' पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने पीएम मोदी के भाषण के एक अंश को रेखांकित करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, ''जी-7 मीटिंग में अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने देश का सिर झुका दिया। उनका कायराना बयान इस देश के साथ एक भद्दा मज़ाक है। हमारे लोगों का अपमान है। हिन्दुस्तान के तीन नाविकों की अमेरिका ने क्रूर हत्या कर दी और नरेंद्र मोदी अमेरिका का नाम लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। उन्होंने कई सिविलियन्स को जान गंवानी पड़ी कह कर छोड़ दिया। मृतकों का नाम आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया, परनाला सुरेश था है। इतना सम्मान तो देना चाहिए था। जो अपने देश का ना हुआ वह किसका होगा? लानत है मोदी जी!''

यूएस-ईरान समझौते का पीएम मोदी ने किया स्वागत, बोले-शांति और स्थिरता बहाली में मिलेगी मदद

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अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का एलान हो गया है, जिससे पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है। अमेरिका-ईरान के बीच समझौते पर दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं आई हैं। ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं की ओर से एक संयुक्त बयान जारी किया गया। वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के नेताओं ने भी प्रतिक्रियाएं दीं है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए घोषित शांति समझौते का स्वागत किया है।

अमेरिका-ईरान समझौते पर क्या बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इस कदम की प्रशंसा की है। पीएम मोदी ने सोमवार को एक्स पर लिखा, "मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता हूं। इस संघर्ष के कारण दुनियाभर में गंभीर आर्थिक अड़चन पैदा हुई और कई देशों में लोगों की जान गई। भारत को उम्मीद है कि इस सहमति के लागू होने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी और नेविगेशन और व्यापार की आज़ादी सुनिश्चित होगी।" इसके अलावा उन्होंने उम्मीद जताई कि 'बाक़ी बचे मुद्दों पर भी' होने वाली बातचीत 'एक टिकाऊ और अंतिम समझौते' तक पहुंचेगी।

ट्रंप ने किया शांति समझौते का ऐलान

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ट्रुथ पर पोस्ट कर ऐलान किया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन चुकी है। स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच शांति समझौते पर साइन किए जाएंगे। इसमें अमेरिका से जेडी वेंस और ईरान से अराघची और गालिबफ शामिल होंगे। 60 दिनों के सीजफायर के दौरान समझौते पर दोनों देशों के बीच बातचीत होगी। इसमें ईरान पर लगे प्रतिबंधों, फ्रीज फंड को रिलीज करने से लेकर परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। जब तक फाइनल समझौता लागू नहीं हो जाता, अस्थायी व्यवस्थाएं लागू रहेंगी।