राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव: सामाजिक प्रतिनिधित्व बढ़ा, पहली बार CEO की नियुक्ति
- संत समाज की केंद्रीय भूमिका बरकरार; मातृशक्ति, पिछड़ा वर्ग, दलित और विधि क्षेत्र को भी जगह, प्रशासनिक व्यवस्था को मिलेगा नया ढांचा
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए स्वरूप में केवल सदस्यों की संख्या बढ़ने की तस्वीर नहीं है, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व का दायरा भी पहले से व्यापक नजर आ रहा है। ट्रस्ट की मूल संरचना में संत समाज की केंद्रीय भूमिका कायम रखते हुए मातृशक्ति, पिछड़ा वर्ग, दलित और विधि क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों की मौजूदगी को महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
ट्रस्ट के स्वरूप में यह विस्तार ऐसे समय हुआ है जब श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाएं लगातार व्यापक होती जा रही हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, सुविधाओं का विस्तार, बड़े धार्मिक आयोजन और विकास परियोजनाओं के संचालन के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को भी अधिक व्यवस्थित किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
- पहली बार मंदिर के लिए CEO की नियुक्ति
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की व्यवस्थाओं के लिए पहली बार मुख्य कार्यपालक अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति की गई है। इसे ट्रस्ट की नीतियों को प्रशासनिक स्तर पर लागू करने के लिए पेशेवर व्यवस्था विकसित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
संभावित व्यवस्था के तहत नीतिगत फैसले ट्रस्ट के स्तर पर होंगे, जबकि CEO उन निर्णयों को जमीन पर लागू कराने और विभिन्न व्यवस्थाओं के संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे। CEO ट्रस्ट का विकल्प नहीं होगा, बल्कि ट्रस्ट की ओर से निर्धारित नीतियों के अनुरूप काम करेगा।
- श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर रहेगी नजर
CEO के सामने मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। इसमें मंदिर में प्रवेश और दर्शन व्यवस्था, कतार प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधाएं, परिसर की स्वच्छता तथा अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय प्रमुख रूप से शामिल हो सकते हैं।
- कर्मचारियों और मानव संसाधन का प्रबंधन
मंदिर से जुड़े कर्मचारियों की ड्यूटी, कार्यप्रणाली, मानव संसाधन और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना भी CEO की जिम्मेदारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
- दान और खर्च में पारदर्शिता पर जोर
मंदिर को मिलने वाले दान-चढ़ावे, खरीद, खर्च और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी CEO की जिम्मेदारियों में शामिल हो सकता है। हालांकि बड़े वित्तीय और नीतिगत फैसलों का अधिकार ट्रस्ट के पास ही रहेगा।
- पुलिस-प्रशासन और एजेंसियों से समन्वय
मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं के अलावा पुलिस, प्रशासन और अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय भी महत्वपूर्ण होगा। खासतौर पर भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और बड़े आयोजनों के दौरान विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बनाए रखना CEO की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा।
- विकास परियोजनाओं की भी होगी निगरानी
मंदिर परिसर और उससे जुड़ी श्रद्धालु सुविधाओं के विस्तार के लिए चल रही विकास परियोजनाओं की प्रगति पर भी नजर रखी जाएगी। संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय, काम की गति और तय समयसीमा में परियोजनाओं को पूरा कराने की दिशा में CEO की भूमिका अहम हो सकती है।
- रामनवमी और दीपोत्सव जैसे आयोजनों की तैयारी
रामनवमी, दीपोत्सव, जन्माष्टमी जैसे बड़े धार्मिक अवसरों पर अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे आयोजनों को देखते हुए भीड़ प्रबंधन, दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, स्वच्छता और श्रद्धालु सुविधाओं की तैयारी पहले से करना जरूरी होगा। CEO के स्तर से इन सभी विभागों के बीच समन्वय को एकीकृत रूप से संचालित किए जाने की संभावना है।
इस तरह ट्रस्ट के विस्तारित सामाजिक स्वरूप और CEO की नियुक्ति को नीतिगत नेतृत्व के साथ पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य और स्थायी सदस्य :
1- के. परासरन: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य।
2- महंत नृत्य गोपाल दास : अध्यक्ष, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट।
3- स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज : महामंत्री/महासचिव।
4- कृष्ण मोहन : सदस्य।
5- जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज : सदस्य (प्रयागराज)
6- जगतगुरु मध्वाचार्य स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ जी महाराज : सदस्य (पेजावर मठ, उडुपी)
7- युगपुरुष परमानंद जी महाराज : सदस्य (हरिद्वार)।
8- महंत दिनेंद्र दास : सदस्य (निर्मोही अखाड़ा के प्रतिनिधि)।
9- निर्मला यादव : नई महिला ट्रस्टी (शिकोहाबाद)।
10- मदन मोहन पांडेय : नए ट्रस्टी (अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता)।
11- महेश भालचंद : कोषाध्यक्ष (दिल्ली)।
- पदेन और सरकारी सदस्य :
* नृपेंद्र मिश्रा: अध्यक्ष, मंदिर निर्माण समिति।
* प्रशांत लोखंडे : केंद्र सरकार के प्रतिनिधि।
* संजय प्रसाद : उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि।
* शशांक त्रिपाठी : जिलाधिकारी अयोध्या।
Sep 03 2026, 10:21
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