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नेपाल में 5 मार्च को चुनाव, भारत के लिए क्यों है अहम?

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भारत से सटे देश नेपाल में 5 मार्च को राष्ट्रीय चुनाव होने जा रहा है। यह चुनाव युवाओं के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के छह महीने बाद हो रहा है, जिन्होंने मार्क्सवादी नेता केपी शर्मा ओली के प्रशासन को गिरा दिया था। इस प्रदर्शन के दौरान दर्जनों लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों पर हमला किया था और पुलिस ने गोलीबारी की थी।

तय होगी भारत-नेपाल संबंध की दिशा

इस बार के चुनाव में मुख्य मुकाबला केपी शर्मा ओली और काठमांडू के पूर्व मेयर और राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी के युवा चेहरे बालेंद्र शाह के बीच है। पड़ोसी देश होने के नाते इस चुनाव के परिणाम का सीधा असर भारत पर भी पड़ेगा। काठमांडू की सत्ता में कौन बैठेगा, यह तय करेगा कि आने वाले समय में भारत-नेपाल संबंध किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।

लिखित इतिहास से भी पुराना भारत-नेपाल संबंध

भारत के लिए नेपाल केवल एक पड़ोसी नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच 'रोटी-बेटी' का पुराना नाता है। दोनों देशों के बीच का संबंध लिखित इतिहास से भी पुराना बताया जाता है, जिसकी छवि आज भी खुली सीमाओं में नजर आती है। इसलिए नेपाल से जुड़ा हर अहम विषय भारत को बहुत ही गहराई से प्रभावित करता है।

1,850 किमी लंबी खुली सीमा की चिंता

भारत और नेपाल के बीच 1,850 किलोमीटर से अधिक लंबी खुली सीमा है। नेपाल में राजनीतिक स्थिरता भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। अगर नेपाल में एक मजबूत और भारत-समर्थक सरकार बनती है, तो सीमा पार से होने वाली तस्करी, जाली नोटों के कारोबार और घुसपैठ जैसी समस्याओं पर लगाम लगाना आसान हो जाता है।

भारत के लिए स्थिर नेपाल जरूरी

भारत की अपने संबंधों के भविष्य के लिहाज से नेपाल के चुनाव पर नजर लगी हुई है। भारत को एक शांतिपूर्ण पड़ोस की आवश्यकता है। अशांति से ग्रस्त पड़ोस भारत की ऊर्जा को सोख लेगा। इसलिए पड़ोस भारत के अपने विकास, क्षेत्रीय और वैश्विक भूमिका, और राजनीतिक और भू-रणनीतिक भूमिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नेपाल में बढ़ी चीन की दखल

वहीं, पिछले कुछ वर्षों में नेपाल की राजनीति में चीन की दखलंदाजी तेजी से बढ़ी है। बीजिंग लगातार बुनियादी ढांचे और निवेश के जरिए काठमांडू को लुभाने की कोशिश कर रहा है। नेपाल के चुनावों में अक्सर वामपंथी गठबंधन (जिनका झुकाव कभी-कभी चीन की तरफ होता है) और लोकतांत्रिक ताकतों (जो भारत के करीब माने जाते हैं) के बीच कड़ी टक्कर होती है। नई दिल्ली की नजर इस बात पर है कि चुनाव जीतकर आने वाली नई सरकार का कूटनीतिक झुकाव किस तरफ होगा।

चीन की दखल भारत के लिए चिंता का विषय

बता दें कि नेपाल की खुली सीमा तीन दिशाओं में भारत के पाँच अलग-अलग राज्यों से जुड़ी है। उत्तर में तिब्बत के पठार से सीमा जुड़ने के कारण नेपाल की रणनीतिक भू-राजनीतिक स्थिति और यहाँ बढ़ते दिख रहे चीनी प्रभाव को लेकर पश्चिमी देश भी रुचि दिखाते रहे हैं। साल 2017 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल की सरकार के दौरान नेपाल चीन की परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशियेटिव (बीआरआई) में शामिल हुआ था। बाद में 2024 के अंत में के पी शर्मा ओली के नेतृत्व में नेपाल ने बीआरआई कार्यान्वयन ढांचे पर हस्ताक्षर किए। चीन के सहयोग से नेपाल में रेलमार्ग निर्माण पर भारत को कोई आपत्ति नहीं होगी। लेकिन यदि नेपाल द्वारा दी गई कोई भी रियायत भारत की सुरक्षा को प्रभावित करती है, तो वहीं हमारी चिंता शुरू होगी।

नेपाल में क्यों फैली हिंसा? हालात बेकाबू, भारत में सीमा पर बढ़ाई गई सुरक्षा

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नेपाल के पर्सा और धनुषा जिलों में धार्मिक विवाद के बाद हालात बेकाबू हो गए हैं। मस्जिद में तोड़फोड़ और पवित्र ग्रंथ जलाने की कथित घटना की खबर फैलते ही विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जो कुछ ही समय में हिंसक रूप ले बैठा है। चिंताजनक स्थिति को देखते हुए स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने एहतियाती कर्फ्यू लगाने का एलान किया। पड़ोसी देश में तनाव और उथल-पुथल के बीच भारत में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

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वीडियो वायरल होने से तनाव और बढ़ा

पर्सा जिले के बीरगंज शहर में धनुषा की मस्जिद में तोड़फोड़ और पवित्र ग्रंथ जलाने की घटना के बाद हालात बेकाबू हैं। सोशल मीडिया पर धार्मिक सामग्री वाला वीडियो वायरल होने से तनाव और बढ़ गया। हिंसक प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने पथराव किया, जिसके बाद पुलिस को हालात संभालने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। स्थिति को काबू में करने के लिए प्रशासन ने बीरगंज में कर्फ्यू लागू कर दिया है।

सुरक्षाकर्मियों को देखते ही गोली मारने का अधिकार

हालात की समीक्षा के बाद सरकार और स्थानीय प्रशासन ने बस पार्क, नागवा, इनारवा (पूर्व); सिरसिया नदी (पश्चिम); गंडक चौक (उत्तर) और शंकराचार्य गेट (दक्षिण) को संवेदनशील इलाके के रूप में चिह्नित किया है। प्रशासन ने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा, 'कर्फ्यू के दौरान, सुरक्षाकर्मियों को देखते ही गोली मारने का अधिकार दिया गया है। इसलिए नागरिकों से अनुरोध है कि बहुत जरूरी होने पर ही अपने घरों से बाहर निकलें। बाहर निकलने की विवशता होने पर निकटतम सुरक्षाकर्मी से संपर्क करें। मोबाइल से 100 पर कॉल करें।

भारत-नेपाल सीमा सील

भारत-नेपाल सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया है। मैत्री पुल समेत सभी बॉर्डर पॉइंट्स पर आवागमन रोक दिया गया है। केवल आपातकालीन सेवाओं को सीमा पार करने की अनुमति दी जा रही है। सीमा सुरक्षा बल (SSB) ने अतिरिक्त जवानों की तैनाती कर दी है और हर आने-जाने वाले व्यक्ति की कड़ी जांच की जा रही है।

नेपाल में फंसी भारतीय वॉलीबॉल टीम का रेस्क्यू, मदद की गुहार लगाते वीडियो हुआ था वायरल

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नेपाल हिंसा की आग में सुलग रहा है। हिंसा में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 51 पहुंच गया है। विरोध प्रदर्शन के 5वें दिन 17 मौतों की पुष्टि हुई है। इस बीच केपी शर्मा ओली के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे दो दिन बाद भी अभी तक अंतरिम प्रधानमंत्री तय नहीं हो सका है। इस बीच नेपाल में फंसी भारत की वॉलीबॉल टीम को रेस्क्यू कर लिया गया है।

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नेपाल में भड़के हिंसक प्रदर्शन के बीच भारत की एक वॉलीबॉल टीम को काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने सुरक्षित निकाल लिया है। जानकारी के मुताबिक, दूतावास लगातार टीम से संपर्क में रहा और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था की। टीवी प्रेजेंटर उपासना गिल द्वारा सोशल मीडिया पर मदद की अपील के बाद सरकार ने तेजी से कार्रवाई की।

टीवी प्रेजेंटर और वॉलीबॉल लीग की होस्ट उपासना गिल ने सोशल मीडिया के जरिये एक आपातकालीन वीडियो बनाया था और भारतीय सरकार से उन्हें और टीम को बचाने की अपील की थी। उन्होंने बताया कि उनका होटल आग की चपेट में आ गया है और वह हिंसक भीड़ के हमले से बचकर भागी हैं। उपासना ने कहा, मैं पोखरा में फंसी हुई हूं, होटल जला दिया गया है, मेरा सारा सामान वहीं था। मैं स्पा में थी जब लोग बड़े लाठी लेकर आए। मैं मुश्किल से अपनी जान बचा पाई।

भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर सरकार के प्रतिबंध के खिलाफ सोमवार को ‘जेन-जी’ द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में कम से कम 19 लोगों की मौत के बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के इस्तीफे की मांग को लेकर उनके कार्यालय में घुस गए थे, जिसके तुरंत बाद मंगलवार को उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया. सोशल मीडिया पर प्रतिबंध सोमवार रात हटा लिया गया था।

नेपाल में अंतरिम पीएम के नाम पर फिर यूटर्न, देर रात खत्म हुआ सस्पेंस, सुशीला कार्की के नाम पर लगी मुहर

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नेपाल में राजनीतिक उथल पुथल के बीच आज नई सरकार को लेकर सहमति बन सकती है। देर रात राष्ट्रपति आवास पर हुई बैठक के दौरान नई सरकार को लेकर सहमति बन गई है। नई सरकार की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की होंगी। नेपाल के सेना प्रमुख और राष्ट्रपति ने उनके नाम पर सहमति जता दी है।

नेपाल अब भी सुलग रहा है। इस बीच देश की कमान आर्मी ने संभाल ली है। मगर सत्ता का संकट अब भी बरकरार है। नेपाल में आर्मी चीफ और राष्ट्रपति अंतरिम सरकार गठन करने की कवायद में जुटे हैं। केपी ओली के इस्तीफे के 60 घंटे बाद भी नेपाल पीएम के रूप में सुशीला कार्की का नाम सामने आया है। गुरुवार की आधी रात को आर्मी चीफ, राष्ट्रपति और अन्य लोगों की एक खास मीटिंग हुई। उसमें सुशीला कार्की पर सभी सहमत हुए। हालांकि अभी भी पेच फंसा हुआ है।

इस बीच नेपाल के सेना प्रमुख अशोक राज सिगदेल, मुख्य न्यायाधीश प्रकाश मान सिंह राउत और सीपीएन (माओवादी सेंटर) नेताओं के बीच शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक होगी। नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल के भी इस बैठक में भाग लेने की उम्मीद है। उम्मीद की जा रही है कि नेपाल पीएम पर आज आम सहमति बन जाएगी।

दरअसल, जेन जी के नेतृत्व वाले युवा प्रदर्शनकारियों ने पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री के लिए अपना समर्थन दिया है। मगर एक धड़ा अब भी इसे लेकर सहमत नहीं है। जेन जी प्रदर्शनकारियों के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाने की प्रक्रिया अटक गई है। देश में कर्फ्यू लगा हुआ है। आर्मी कानून-व्यवस्था संभाल रही है। इस बीच नेपाल के अंतरिम पीएम के चयन पर ही सस्पेंस छाया है।

देश में जारी राजनीतिक संकट के बीच 'We Nepali' ग्रुप के अध्यक्ष और जेन ज़ी आंदोलन के नेता सुदन गुरुंग ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नाम का समर्थन किया है। गुरुंग ने साफ कहा है कि संसद का विघटन उनकी मूल मांग है और तभी एक नई अंतरिम कैबिनेट का गठन होना चाहिए। गुरुंग ने कहा, "हम पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की का नेतृत्व स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।" हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि जेन-जी पीढ़ी इस कैबिनेट की निगरानी करेगी, ताकि जनता की अपेक्षाओं के मुताबिक काम हो सके।

नेपाल में सोशल मीडिया बैन से भड़की सत्ता-विरोधी लहर, अब नए संविधान, प्रतिनिधि सभा भंग करने की उठी मांग

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नेपाल में जेनरेशन जेड (जेन-जी) आंदोलन अब बेकाबू होता जा रहा है। सोशल मीडिया बैन से भड़की युवा-नेतृत्व वाली लहर अब सत्ता-विरोधी सुनामी में बदल चुकी है। संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, सिंहदरबार सचिवालय और कई नेताओं के घरों को आग के हवाले कर दिया गया। इस बवाल के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने अचानक इस्तीफा दे दिया। हालात इतने बिगड़े कि सेना को मंगलवार रात 10 बजे से राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेनी पड़ी। देशभर में कर्फ्यू लागू है और सीमाएं सील कर दी गई हैं। इस बीच जेन जी प्रदर्शनकारियों ने कई राजनीतिक और सामाजिक मांगें रखी हैं।

सेना ने ली देश की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी

नेपाल में हालात बिगड़ने के बाद सेना ने सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है। काठमांडू एयरपोर्ट और सरकार के मुख्य सचिवालय सिंहदरबार जैसे अहम ठिकानों पर सेना का नियंत्रण है. वहीं, देश की सीमाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। कर्फ्यू जारी है, हालांकि एंबुलेंस और शववाहन जैसी जरूरी सेवा से जुड़ी गाड़ियों को छूट दी गई है। सेना ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शन, तोड़फोड़, लूट, आगजनी या किसी भी व्यक्ति और संपत्ति पर हमला अब दंडनीय अपराध माना जाएगा और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सेना ने नागरिकों और मीडिया से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।

आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिग्देल खुद मोर्चे पर

हालात को शांत करने के लिए नेपाल आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिग्देल खुद मोर्चे पर हैं। उन्होंने देर रात जेन जी आंदोलन के प्रतिनिधियों को सेना मुख्यालय बुलाकर उनसे बातचीत की और उनकी मांगों को सुना। उन्होंने मौतों पर शोक जताते हुए युवाओं से संवाद के जरिए समाधान खोजने की अपील की। साथ ही उन्होंने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा कठिन परिस्थिति को सामान्य करना, सार्वजनिक और निजी संपत्ति की सुरक्षा करना और आम नागरिकों तथा राजनयिक मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही सेना की पहली प्राथमिकता है।

देश के संविधान में संशोधन की मांग

इधर नेपाल में केपी शर्मा ओली की सरकार को उखाड़ फेंकने वाले प्रदर्शनकारियों ने शासन में व्यापक सुधार और पिछले तीन दशकों में राजनेताओं की लूटी गई संपत्तियों की जांच की मांग की है। आंदोलनकारियों ने घोषणा की है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान जान गंवाने वाले सभी लोगों को आधिकारिक शहीद का दर्जा दिया जाएगा। उनके परिवारों को राजकीय सम्मान, पहचान और सहायता दी जाएगी। इसकी सबसे प्रमुख मांगों में देश के संविधान में संशोधन या इसे नए तरीके से लिखा जाना शामिल है।

नई राजनीतिक व्यवस्था की बात

आयोजकों ने बेरोजगारी से निपटने, पलायन पर अंकुश लगाने और सामाजिक अन्याय को दूर करने के लिए विशेष कार्यक्रमों का भी वादा किया है। प्रदर्शनकारियों की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया, 'यह आंदोलन किसी पार्टी या व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी और राष्ट्र के भविष्य के लिए है। शांति आवश्यक है, लेकिन यह एक नई राजनीतिक व्यवस्था की नींव पर ही संभव है।

नेपाल में प्रधानमंत्री की कुर्सी गई, पीएम ओली ने दिया इस्तीफा

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नेपाल में सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ सोमवार को शुरू हा भीषण बवाल मंगलवार को भी जारी है। इस बीच नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने पद से को इस्तीफा दे दिया है। नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने केपी शर्मा ओली का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। ओली को आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिगडेल ने कुर्सी छोड़ने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि इस्तीफे के बाद ही हालात सुधरेंगे।

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नेपाल पीएम ने इस्तीफे में क्या लिखा

नेपाल में सोशल मीडिया ऐप्स पर लगे बैन को लेकर Gen-Z विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के घर को आग के हवाले कर दिया था। देश के बिगड़े हालात के बीच राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे को स्वीकार भी कर लिया है। केपी शर्मा ओली ने इस्तीफे में लिखा, ''माननीय राष्ट्रपति जी, नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76 (2) के अनुसार 31 असद 2081 बी.एस. को प्रधानमंत्री नियुक्त होने के बाद, तथा देश में वर्तमान में विद्यमान असाधारण स्थिति को ध्यान में रखते हुए, मैंने संविधान के अनुच्छेद 77 (1) (ए) के अनुसार आज से प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है, ताकि संविधान के अनुसार समस्याओं के राजनीतिक समाधान और समाधान की दिशा में आगे कदम उठा सकूं।

इस्तीफे के बाद सेना के सुरक्षा घेरे में ओली

नेपाल में पीएम केपी शर्मा ओली ने इस्‍तीफा भले ही दे दिया है लेकिन उनकी मुश्किलें खत्‍म नहीं होने जा रही हैं। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि केपी ओली पर हत्‍या का मुकदमा चलाया जाए। इस बीच नेपाली सेना ने केपी ओली को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया है ताकि प्रदर्शनकारी उन पर हमला नहीं कर सकें। इस बीच प्रदर्शकारियों ने नेपाली संसद को फूंक दिया है।

नेपाल के पूर्व डिप्टी पीएम को प्रदर्शनकारियों ने जेल से छुड़ाया

नेपाली प्रधानमंत्री के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारियों ने पूर्व डिप्टी पीएम रवि लामीछाने को जेल से निकाल लिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि वे आने वाले परिदृश्य में वे बड़ी भूमिका में नजर आएं।

नेपाल में प्रदर्शनकारियों का राष्ट्रपति-पीएम के घर में आगजनी, ओली ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

#nepalprotestersburntdownhousesofprimeministerand_president 

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नेपाल में आक्रोश की आग भड़कती ही जा रही है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के आवास को प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया है। वहीं इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सूचना एवं संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग के आवास में भी आग लगा दी। पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड के घर के बाहर पुलिस चौकी में भी आग लगा दी गई। 

सड़कें युद्धक्षेत्र बनी

सोमवार को शुरू हुआ छात्रों का ये प्रदर्शन मंगलवार को पूरे देश में फैल गया है। काठमांडू में प्रदर्शनकारियों की उग्र भीड़ ने बवाल मचा रखा है। शहर की सड़कें युद्धक्षेत्र जैसी नजर आ रही हैं। काठमांडू में प्रदर्शनकारियों ने सीपीएन-एमसी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल, संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक सहित अन्य के आवास पर पथराव किया और आगजनी की। मकवानपुर में, हेटौडा और पूर्वी मनहारी बाज़ार में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर पूर्व-पश्चिम राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया, जिससे यातायात बाधित हुआ। पुलिस ने अशांति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं।

राष्ट्रपति- प्रधानमंत्री का घर आग के हवाले

प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल के आवास को आग के हवाले दिया है। ओली के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शनकारियों ने उनके आवास को जला दिया है। प्रदर्शनकारियों ने बालकोट स्थित प्रधानमंत्री ओली के आवास में आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह परिसर में घुसने और घर के कुछ हिस्सों में आग लगाने से पहले, घर में मौजूद सामानों को बाहर निकाल लिया था। आग फैलने पर आवास से धुएं का घना गुबार उठता देखा गया। वहीं, देश के ऊर्जा मंत्री और राष्ट्रपति के घर को भी प्रदर्शनकारियों ने जला दिया है। प्रदर्शनकारियों ने "केपी चोर, देश छोड़" , "भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करो" जैसे नारे लगा रहे हैं। 

सेना ने पीएम केपी ओली से इस्तीफा मांगा

नेपाल में दो दिन से चल रहे बवाल के बाद सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। विकट होते हालात को देखते हुए सेना ने पीएम केपी ओली से इस्तीफा मांगा है। नेपाली आर्मी चीफ ने कहा है कि पीएम ओली अब गद्दी छोड़ देंष

नेपाल में कई जगहों पर लगा कर्फ्यू

काठमांडू में गृह मंत्रालय के अधीन तीन जिला प्रशासन कार्यालयों (डीएओ) ने अलग-अलग नोटिस जारी करके कई स्थानों पर कर्फ्यू लगा दिया, जिसमें शहर के प्रमुख एंट्री प्वाइंट शामिल हैं. काठमांडू डीएओ ने मंगलवार को राजधानी में अनिश्चितकाल तक के लिए कर्फ्यू लागू कर दिया, जिसमें लोगों को आवाजाही, प्रदर्शन, सभाएं या धरने पर रोक है. कर्फ्यू के दौरान जरूरी सेवाओं जैसे एम्बुलेंस, अग्निशमन वाहन, शव वाहन, स्वास्थ्यकर्मियों, पत्रकारों, पर्यटक वाहनों, हवाई यात्रियों और मानवाधिकार व राजनयिक मिशनों के वाहनों की आवाजाही की अनुमति होगी.

केपी शर्मा ओली ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

देश के बिगड़े हालात के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आज शाम एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। मैं स्थिति का आकलन करने और एक सार्थक निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहा हूं। इसके लिए, मैंने आज शाम 6 बजे एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है। मैं सभी भाइयों और बहनों से विनम्र अनुरोध करता हूं कि इस कठिन परिस्थिति में धैर्य बनाए रखें।

20 की मौत के बाद झुकी नेपाल की ओली सरकार, GEN-Z के आक्रोश के बाद सोशल मीडिया से हटा बैन

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नेपाल की केपी शर्मा ओली सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बैन हटा लिया है। यह फैसला सोमवार को देश भर में युवाओं के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के लिए बाद लिया गया। नेपाल में सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन के खिलाफ हजारों Gen-Z युवाओं ने सोमवार को राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में प्रदर्शन किया। हिंसक प्रदर्शन के दौरान 20 लोगों की मौत हो गई, जबकि 400 से ज्यादा लोग घायल हो गए। हिंसक प्रदर्शन के बाद नेपाल सरकार ने देर रात सोशल मीडिया से प्रतिबंध हटा लिया है। इससे पहले प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने बैन हटाने से इनकार किया था।

देर रात बेन हटाने की हुई घोषणा

GEN-Z प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसमें कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा घायल हुए हैं। नेपाल के संचार, सूचना एवं प्रसारण मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने देर रात घोषणा की कि सोशल मीडिया साइटों पर प्रतिबंध लगान का फैसला वापस ले लिया गया है। एक आपातकालीन कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री ने कहा, सरकार ने GEN-Z की मांग को रखते हुए सोशल मीडिया को खोलने का फैसला पहले ही कर लिया है।

पहले लिए गए फैसले पर सरकार को पछतावा नहीं

हालांकि, मंत्री ने कहा कि सरकार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बंद करने को लेकर पहले लिए गए फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। गुरुंग ने कहा, 'इस मुद्दे को बहाने के तौर पर इस्तेमाल करके विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे, इसलिए सोशल मीडिया साइटों को फिर से खोलने का फैसला लिया गया है।' गुरुंग ने जेन-जी प्रदर्शनकारियों के विरोध प्रदर्शन वापस लेने की अपील की।

नेपाली गृह मंत्री रमेश लेखक का इस्तीफा

इससे पहले सोमवार को नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर पाबंदी के खिलाफ युवाओं न जोरदार प्रदर्शन का। विरोध प्रदर्शन के हिंसक हो जाने से 20 लोगों की मौत हो गई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह झड़पें हुईं। काठमांडो में प्रदर्शनकारी संसद भवन परिसर में घुस गए और तोड़फोड़ की। विरोध प्रदर्शन पोखरा, बुटवल, भैरहवा, भरतपुर, इटाहारी और दमक तक फैल गया। हालात काबू में करने के लिए काठमांडो समेत कई शहरों में कर्फ्यू लगाने के साथ सेना को तैनात करना पड़ा। बेकाबू हिंसा के बाद नेपाली गृह मंत्री रमेश लेखक को इस्तीफा दे दिया।

हिंसा की जांच के लिए कमेटी बनेगी

इसके साथ ही कैबिनेट ने हिंसा की जांच के लिए एक जांच समिति का भी गठन किया है। कमेटी को 15 दिनों में रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इन मौतों पर दुख जताया, साथ ही आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्व घुस आए थे। सरकारी संपत्ति को बचाने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का मकसद सोशल मीडिया को बंद करना नहीं, बल्कि नियंत्रित करना था।

नेपाल में बवाल, सोशल मीडिया पर रोक से भड़के युवा, संसद भवन में भी घुसे

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पड़ोसी देश नेपाल में विरोध की आग भड़क उठी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले के खिलाफ नेपाल में युवाओं ने सोमवार को काठमांडू में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। जेनरेशन जेड पीढ़ी के युवाओं ने सड़कों पर सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद की। सोशल मीडिया बैन होने के विरोध में प्रदर्शन कर रही भीड़ उग्र हो गई और उन्होंने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए। प्रदर्शनकारी गेट पार कर संसद के भीतर प्रवेश कर गए। इन्हें रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वॉटर कैनन चलाई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग भी की, इस दौरान एक शख्स की मौत हो गई, 70 लोग घायल हैं।

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ओेली सरकार के खिलाफ अगली पीढ़ी के युवाओं की बगावत

नेपाल में ओेली सरकार के खिलाफ अगली पीढ़ी के युवाओं ने बगावत कर दी है। नेपाल में अचानक शुरू हुए इस भीषण प्रदर्शन के पीछे की वजह ओली सरकार का हालिया फैसला है। सरकार ने नियमों का हवाला देकर अचानक 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगा दिए, जिनमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर भी शामिल हैं। इस फैसले के विरोध में राजधानी काठमांडू में हजारों छात्र-युवा, सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ भीषण प्रदर्शन कर रहे हैं। कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने लाठिया भांजी हैं, जिसमें एक छात्र की अभी तक मौत की रिपोर्ट है।

'हामी नेपाल' के बैनर तले प्रदर्शन

बताया गया कि सोमवार सुबह 9 बजे से प्रदर्शनकारी काठमांडू के मैतीघर में एकत्रित होने लगे। हाल के दिनों में 'नेपो किड' और 'नेपो बेबीज' जैसे हैशटैग ऑनलाइन ट्रेंड कर रहे हैं। सरकार की ओर से अपंजीकृत प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करने के फैसले के बाद इसमें और तेजी आई है। काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय के अनुसार, 'हामी नेपाल' ने इस रैली का आयोजन किया था। इसके लिए पूर्व अनुमति ली गई थी।

बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और आर्थिक मंदी के खिलाफ भी गुस्सा

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार का कहना है कि इन कंपनियों ने नेपाल सरकार के साथ रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं की, इसलिए यह कार्रवाई करनी पड़ी। लेकिन छात्रों और युवा वर्ग का आरोप है कि यह फैसला उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। युवाओं का कहना है सरकार अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए उनके आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। प्रदर्शनकारी बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और आर्थिक मंदी के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

नेपाल के रास्ते बिहार में घुसे जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी, पुलिस मुख्यालय ने जारी किया हाई अलर्ट

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बिहार पुलिस मुख्यालय ने एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। पुलिस मुख्यालय ने सूबे के सभी जिलों को अलर्ट किया है। अलर्ट करने की वजह यह है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकी के नेपाल के रास्ते बिहार में घुसने की सूचना मिली है। खबर है कि जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकी, हसनैन अली, आदिल हुसैन और मोहम्मद उस्मान, नेपाल के रास्ते बिहार में प्रवेश कर चुके हैं। जो किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में हैं। इसके बाद राज्य में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और सीमावर्ती जिलों में विशेष चौकसी बरती जा रही है।

तीन आतंकी नेपाल के रास्ते बिहार में घुसे

पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकी नेपाल के रास्ते बिहार में घुसे हैं। इन आतंकियों के नाम हैं हसनैन अली जो कि रावलपिंडी, पाकिस्तान का रहने वाला है। वहीं दूसरे के नाम आदिल हुसैन है जो उमरकोट का रहने वाला है। जबकि तीसरा आतंकी मोहम्मद उस्मान है जो पाकिस्तान के ही बहावलपुर का बाशिंदा है।

तीनों आतंकियों की तस्वीर जारी

बिहार पुलिस मुख्यालय की ओर से इन तीनों आतंकियों की तस्वीर जारी की गई है। इनके पासपोर्ट से संबंधित जानकारी सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों से साझा की गई है। बिहार में विधानसभा चुनाव को देखते हुए आतंकी गतिविधि पर लगातार पुलिस मुख्यालय की नजर है। इसी बीच यह अहम जानकारी सामने आई जिसके बाद हाई अलर्ट जारी किया गया है।

तीनों आतंकी अगस्त के दूसरे सप्ताह में काठमांडू पहुंचे

पुलिस मुख्यालय ने जिलों से कहा है कि पुलिस मुख्यालय के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार तीनों आतंकी अगस्त के दूसरे सप्ताह में काठमांडू पहुंचे थे। वहां से अगस्त के तीसरे सप्ताह में नेपाल बॉर्डर से बिहार में घुसे। तीनों आतंकवादियों के पासपोर्ट से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई है। पुलिस मुख्यालय ने आशंका जताते हुए कहा है कि हो न हो ये लोग किसी बड़ी घटनाओं को अंजाम देने के फिराक में हैं। पुलिस मुख्यालय ने बिहार के सभी जिलों को स्थानीय स्तर पर खुफिया तंत्र को सक्रिय कर आसूचना संकलन करने और संदिग्ध आतंकियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई का निर्देश दिया है।

इन जिलों में खास सख्ती

पुलिस मुख्यालय ने खास तौर पर नेपाल से सटे बिहार के सीमावर्ती जिले सीतामढ़ी, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, अररिया, किशनगंज और सुपौल में चौकसी बढ़ा दी गई है। भागलपुर और अन्य जिलों में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि संदिग्ध गतिविधि या किसी भी जानकारी को तुरंत स्थानीय थाने या पुलिस हेल्पलाइन को सूचित करें। फिलहाल सभी सुरक्षा एजेंसियां तीनों आतंकियों की तलाश में जुटी हुई हैं।

नेपाल में 5 मार्च को चुनाव, भारत के लिए क्यों है अहम?

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भारत से सटे देश नेपाल में 5 मार्च को राष्ट्रीय चुनाव होने जा रहा है। यह चुनाव युवाओं के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के छह महीने बाद हो रहा है, जिन्होंने मार्क्सवादी नेता केपी शर्मा ओली के प्रशासन को गिरा दिया था। इस प्रदर्शन के दौरान दर्जनों लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों पर हमला किया था और पुलिस ने गोलीबारी की थी।

तय होगी भारत-नेपाल संबंध की दिशा

इस बार के चुनाव में मुख्य मुकाबला केपी शर्मा ओली और काठमांडू के पूर्व मेयर और राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी के युवा चेहरे बालेंद्र शाह के बीच है। पड़ोसी देश होने के नाते इस चुनाव के परिणाम का सीधा असर भारत पर भी पड़ेगा। काठमांडू की सत्ता में कौन बैठेगा, यह तय करेगा कि आने वाले समय में भारत-नेपाल संबंध किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।

लिखित इतिहास से भी पुराना भारत-नेपाल संबंध

भारत के लिए नेपाल केवल एक पड़ोसी नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच 'रोटी-बेटी' का पुराना नाता है। दोनों देशों के बीच का संबंध लिखित इतिहास से भी पुराना बताया जाता है, जिसकी छवि आज भी खुली सीमाओं में नजर आती है। इसलिए नेपाल से जुड़ा हर अहम विषय भारत को बहुत ही गहराई से प्रभावित करता है।

1,850 किमी लंबी खुली सीमा की चिंता

भारत और नेपाल के बीच 1,850 किलोमीटर से अधिक लंबी खुली सीमा है। नेपाल में राजनीतिक स्थिरता भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। अगर नेपाल में एक मजबूत और भारत-समर्थक सरकार बनती है, तो सीमा पार से होने वाली तस्करी, जाली नोटों के कारोबार और घुसपैठ जैसी समस्याओं पर लगाम लगाना आसान हो जाता है।

भारत के लिए स्थिर नेपाल जरूरी

भारत की अपने संबंधों के भविष्य के लिहाज से नेपाल के चुनाव पर नजर लगी हुई है। भारत को एक शांतिपूर्ण पड़ोस की आवश्यकता है। अशांति से ग्रस्त पड़ोस भारत की ऊर्जा को सोख लेगा। इसलिए पड़ोस भारत के अपने विकास, क्षेत्रीय और वैश्विक भूमिका, और राजनीतिक और भू-रणनीतिक भूमिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नेपाल में बढ़ी चीन की दखल

वहीं, पिछले कुछ वर्षों में नेपाल की राजनीति में चीन की दखलंदाजी तेजी से बढ़ी है। बीजिंग लगातार बुनियादी ढांचे और निवेश के जरिए काठमांडू को लुभाने की कोशिश कर रहा है। नेपाल के चुनावों में अक्सर वामपंथी गठबंधन (जिनका झुकाव कभी-कभी चीन की तरफ होता है) और लोकतांत्रिक ताकतों (जो भारत के करीब माने जाते हैं) के बीच कड़ी टक्कर होती है। नई दिल्ली की नजर इस बात पर है कि चुनाव जीतकर आने वाली नई सरकार का कूटनीतिक झुकाव किस तरफ होगा।

चीन की दखल भारत के लिए चिंता का विषय

बता दें कि नेपाल की खुली सीमा तीन दिशाओं में भारत के पाँच अलग-अलग राज्यों से जुड़ी है। उत्तर में तिब्बत के पठार से सीमा जुड़ने के कारण नेपाल की रणनीतिक भू-राजनीतिक स्थिति और यहाँ बढ़ते दिख रहे चीनी प्रभाव को लेकर पश्चिमी देश भी रुचि दिखाते रहे हैं। साल 2017 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल की सरकार के दौरान नेपाल चीन की परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशियेटिव (बीआरआई) में शामिल हुआ था। बाद में 2024 के अंत में के पी शर्मा ओली के नेतृत्व में नेपाल ने बीआरआई कार्यान्वयन ढांचे पर हस्ताक्षर किए। चीन के सहयोग से नेपाल में रेलमार्ग निर्माण पर भारत को कोई आपत्ति नहीं होगी। लेकिन यदि नेपाल द्वारा दी गई कोई भी रियायत भारत की सुरक्षा को प्रभावित करती है, तो वहीं हमारी चिंता शुरू होगी।

नेपाल में क्यों फैली हिंसा? हालात बेकाबू, भारत में सीमा पर बढ़ाई गई सुरक्षा

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नेपाल के पर्सा और धनुषा जिलों में धार्मिक विवाद के बाद हालात बेकाबू हो गए हैं। मस्जिद में तोड़फोड़ और पवित्र ग्रंथ जलाने की कथित घटना की खबर फैलते ही विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जो कुछ ही समय में हिंसक रूप ले बैठा है। चिंताजनक स्थिति को देखते हुए स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने एहतियाती कर्फ्यू लगाने का एलान किया। पड़ोसी देश में तनाव और उथल-पुथल के बीच भारत में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

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वीडियो वायरल होने से तनाव और बढ़ा

पर्सा जिले के बीरगंज शहर में धनुषा की मस्जिद में तोड़फोड़ और पवित्र ग्रंथ जलाने की घटना के बाद हालात बेकाबू हैं। सोशल मीडिया पर धार्मिक सामग्री वाला वीडियो वायरल होने से तनाव और बढ़ गया। हिंसक प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने पथराव किया, जिसके बाद पुलिस को हालात संभालने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। स्थिति को काबू में करने के लिए प्रशासन ने बीरगंज में कर्फ्यू लागू कर दिया है।

सुरक्षाकर्मियों को देखते ही गोली मारने का अधिकार

हालात की समीक्षा के बाद सरकार और स्थानीय प्रशासन ने बस पार्क, नागवा, इनारवा (पूर्व); सिरसिया नदी (पश्चिम); गंडक चौक (उत्तर) और शंकराचार्य गेट (दक्षिण) को संवेदनशील इलाके के रूप में चिह्नित किया है। प्रशासन ने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा, 'कर्फ्यू के दौरान, सुरक्षाकर्मियों को देखते ही गोली मारने का अधिकार दिया गया है। इसलिए नागरिकों से अनुरोध है कि बहुत जरूरी होने पर ही अपने घरों से बाहर निकलें। बाहर निकलने की विवशता होने पर निकटतम सुरक्षाकर्मी से संपर्क करें। मोबाइल से 100 पर कॉल करें।

भारत-नेपाल सीमा सील

भारत-नेपाल सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया है। मैत्री पुल समेत सभी बॉर्डर पॉइंट्स पर आवागमन रोक दिया गया है। केवल आपातकालीन सेवाओं को सीमा पार करने की अनुमति दी जा रही है। सीमा सुरक्षा बल (SSB) ने अतिरिक्त जवानों की तैनाती कर दी है और हर आने-जाने वाले व्यक्ति की कड़ी जांच की जा रही है।

नेपाल में फंसी भारतीय वॉलीबॉल टीम का रेस्क्यू, मदद की गुहार लगाते वीडियो हुआ था वायरल

#indian_embassy_rescues_volleyball_team_stranded_in_nepal

नेपाल हिंसा की आग में सुलग रहा है। हिंसा में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 51 पहुंच गया है। विरोध प्रदर्शन के 5वें दिन 17 मौतों की पुष्टि हुई है। इस बीच केपी शर्मा ओली के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे दो दिन बाद भी अभी तक अंतरिम प्रधानमंत्री तय नहीं हो सका है। इस बीच नेपाल में फंसी भारत की वॉलीबॉल टीम को रेस्क्यू कर लिया गया है।

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नेपाल में भड़के हिंसक प्रदर्शन के बीच भारत की एक वॉलीबॉल टीम को काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने सुरक्षित निकाल लिया है। जानकारी के मुताबिक, दूतावास लगातार टीम से संपर्क में रहा और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की व्यवस्था की। टीवी प्रेजेंटर उपासना गिल द्वारा सोशल मीडिया पर मदद की अपील के बाद सरकार ने तेजी से कार्रवाई की।

टीवी प्रेजेंटर और वॉलीबॉल लीग की होस्ट उपासना गिल ने सोशल मीडिया के जरिये एक आपातकालीन वीडियो बनाया था और भारतीय सरकार से उन्हें और टीम को बचाने की अपील की थी। उन्होंने बताया कि उनका होटल आग की चपेट में आ गया है और वह हिंसक भीड़ के हमले से बचकर भागी हैं। उपासना ने कहा, मैं पोखरा में फंसी हुई हूं, होटल जला दिया गया है, मेरा सारा सामान वहीं था। मैं स्पा में थी जब लोग बड़े लाठी लेकर आए। मैं मुश्किल से अपनी जान बचा पाई।

भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर सरकार के प्रतिबंध के खिलाफ सोमवार को ‘जेन-जी’ द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में कम से कम 19 लोगों की मौत के बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के इस्तीफे की मांग को लेकर उनके कार्यालय में घुस गए थे, जिसके तुरंत बाद मंगलवार को उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया. सोशल मीडिया पर प्रतिबंध सोमवार रात हटा लिया गया था।

नेपाल में अंतरिम पीएम के नाम पर फिर यूटर्न, देर रात खत्म हुआ सस्पेंस, सुशीला कार्की के नाम पर लगी मुहर

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नेपाल में राजनीतिक उथल पुथल के बीच आज नई सरकार को लेकर सहमति बन सकती है। देर रात राष्ट्रपति आवास पर हुई बैठक के दौरान नई सरकार को लेकर सहमति बन गई है। नई सरकार की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की होंगी। नेपाल के सेना प्रमुख और राष्ट्रपति ने उनके नाम पर सहमति जता दी है।

नेपाल अब भी सुलग रहा है। इस बीच देश की कमान आर्मी ने संभाल ली है। मगर सत्ता का संकट अब भी बरकरार है। नेपाल में आर्मी चीफ और राष्ट्रपति अंतरिम सरकार गठन करने की कवायद में जुटे हैं। केपी ओली के इस्तीफे के 60 घंटे बाद भी नेपाल पीएम के रूप में सुशीला कार्की का नाम सामने आया है। गुरुवार की आधी रात को आर्मी चीफ, राष्ट्रपति और अन्य लोगों की एक खास मीटिंग हुई। उसमें सुशीला कार्की पर सभी सहमत हुए। हालांकि अभी भी पेच फंसा हुआ है।

इस बीच नेपाल के सेना प्रमुख अशोक राज सिगदेल, मुख्य न्यायाधीश प्रकाश मान सिंह राउत और सीपीएन (माओवादी सेंटर) नेताओं के बीच शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक होगी। नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल के भी इस बैठक में भाग लेने की उम्मीद है। उम्मीद की जा रही है कि नेपाल पीएम पर आज आम सहमति बन जाएगी।

दरअसल, जेन जी के नेतृत्व वाले युवा प्रदर्शनकारियों ने पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री के लिए अपना समर्थन दिया है। मगर एक धड़ा अब भी इसे लेकर सहमत नहीं है। जेन जी प्रदर्शनकारियों के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाने की प्रक्रिया अटक गई है। देश में कर्फ्यू लगा हुआ है। आर्मी कानून-व्यवस्था संभाल रही है। इस बीच नेपाल के अंतरिम पीएम के चयन पर ही सस्पेंस छाया है।

देश में जारी राजनीतिक संकट के बीच 'We Nepali' ग्रुप के अध्यक्ष और जेन ज़ी आंदोलन के नेता सुदन गुरुंग ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नाम का समर्थन किया है। गुरुंग ने साफ कहा है कि संसद का विघटन उनकी मूल मांग है और तभी एक नई अंतरिम कैबिनेट का गठन होना चाहिए। गुरुंग ने कहा, "हम पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की का नेतृत्व स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।" हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि जेन-जी पीढ़ी इस कैबिनेट की निगरानी करेगी, ताकि जनता की अपेक्षाओं के मुताबिक काम हो सके।

नेपाल में सोशल मीडिया बैन से भड़की सत्ता-विरोधी लहर, अब नए संविधान, प्रतिनिधि सभा भंग करने की उठी मांग

#nepalgenzprotestersdemandsnewconstitution

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नेपाल में जेनरेशन जेड (जेन-जी) आंदोलन अब बेकाबू होता जा रहा है। सोशल मीडिया बैन से भड़की युवा-नेतृत्व वाली लहर अब सत्ता-विरोधी सुनामी में बदल चुकी है। संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, सिंहदरबार सचिवालय और कई नेताओं के घरों को आग के हवाले कर दिया गया। इस बवाल के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने अचानक इस्तीफा दे दिया। हालात इतने बिगड़े कि सेना को मंगलवार रात 10 बजे से राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेनी पड़ी। देशभर में कर्फ्यू लागू है और सीमाएं सील कर दी गई हैं। इस बीच जेन जी प्रदर्शनकारियों ने कई राजनीतिक और सामाजिक मांगें रखी हैं।

सेना ने ली देश की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी

नेपाल में हालात बिगड़ने के बाद सेना ने सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है। काठमांडू एयरपोर्ट और सरकार के मुख्य सचिवालय सिंहदरबार जैसे अहम ठिकानों पर सेना का नियंत्रण है. वहीं, देश की सीमाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। कर्फ्यू जारी है, हालांकि एंबुलेंस और शववाहन जैसी जरूरी सेवा से जुड़ी गाड़ियों को छूट दी गई है। सेना ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शन, तोड़फोड़, लूट, आगजनी या किसी भी व्यक्ति और संपत्ति पर हमला अब दंडनीय अपराध माना जाएगा और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सेना ने नागरिकों और मीडिया से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।

आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिग्देल खुद मोर्चे पर

हालात को शांत करने के लिए नेपाल आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिग्देल खुद मोर्चे पर हैं। उन्होंने देर रात जेन जी आंदोलन के प्रतिनिधियों को सेना मुख्यालय बुलाकर उनसे बातचीत की और उनकी मांगों को सुना। उन्होंने मौतों पर शोक जताते हुए युवाओं से संवाद के जरिए समाधान खोजने की अपील की। साथ ही उन्होंने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा कठिन परिस्थिति को सामान्य करना, सार्वजनिक और निजी संपत्ति की सुरक्षा करना और आम नागरिकों तथा राजनयिक मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही सेना की पहली प्राथमिकता है।

देश के संविधान में संशोधन की मांग

इधर नेपाल में केपी शर्मा ओली की सरकार को उखाड़ फेंकने वाले प्रदर्शनकारियों ने शासन में व्यापक सुधार और पिछले तीन दशकों में राजनेताओं की लूटी गई संपत्तियों की जांच की मांग की है। आंदोलनकारियों ने घोषणा की है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान जान गंवाने वाले सभी लोगों को आधिकारिक शहीद का दर्जा दिया जाएगा। उनके परिवारों को राजकीय सम्मान, पहचान और सहायता दी जाएगी। इसकी सबसे प्रमुख मांगों में देश के संविधान में संशोधन या इसे नए तरीके से लिखा जाना शामिल है।

नई राजनीतिक व्यवस्था की बात

आयोजकों ने बेरोजगारी से निपटने, पलायन पर अंकुश लगाने और सामाजिक अन्याय को दूर करने के लिए विशेष कार्यक्रमों का भी वादा किया है। प्रदर्शनकारियों की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया, 'यह आंदोलन किसी पार्टी या व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी और राष्ट्र के भविष्य के लिए है। शांति आवश्यक है, लेकिन यह एक नई राजनीतिक व्यवस्था की नींव पर ही संभव है।

नेपाल में प्रधानमंत्री की कुर्सी गई, पीएम ओली ने दिया इस्तीफा

#kpsharmaoliresignsasprimeminister_nepal

नेपाल में सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ सोमवार को शुरू हा भीषण बवाल मंगलवार को भी जारी है। इस बीच नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने पद से को इस्तीफा दे दिया है। नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने केपी शर्मा ओली का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। ओली को आर्मी चीफ जनरल अशोक राज सिगडेल ने कुर्सी छोड़ने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि इस्तीफे के बाद ही हालात सुधरेंगे।

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नेपाल पीएम ने इस्तीफे में क्या लिखा

नेपाल में सोशल मीडिया ऐप्स पर लगे बैन को लेकर Gen-Z विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के घर को आग के हवाले कर दिया था। देश के बिगड़े हालात के बीच राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफे को स्वीकार भी कर लिया है। केपी शर्मा ओली ने इस्तीफे में लिखा, ''माननीय राष्ट्रपति जी, नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76 (2) के अनुसार 31 असद 2081 बी.एस. को प्रधानमंत्री नियुक्त होने के बाद, तथा देश में वर्तमान में विद्यमान असाधारण स्थिति को ध्यान में रखते हुए, मैंने संविधान के अनुच्छेद 77 (1) (ए) के अनुसार आज से प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है, ताकि संविधान के अनुसार समस्याओं के राजनीतिक समाधान और समाधान की दिशा में आगे कदम उठा सकूं।

इस्तीफे के बाद सेना के सुरक्षा घेरे में ओली

नेपाल में पीएम केपी शर्मा ओली ने इस्‍तीफा भले ही दे दिया है लेकिन उनकी मुश्किलें खत्‍म नहीं होने जा रही हैं। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि केपी ओली पर हत्‍या का मुकदमा चलाया जाए। इस बीच नेपाली सेना ने केपी ओली को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया है ताकि प्रदर्शनकारी उन पर हमला नहीं कर सकें। इस बीच प्रदर्शकारियों ने नेपाली संसद को फूंक दिया है।

नेपाल के पूर्व डिप्टी पीएम को प्रदर्शनकारियों ने जेल से छुड़ाया

नेपाली प्रधानमंत्री के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारियों ने पूर्व डिप्टी पीएम रवि लामीछाने को जेल से निकाल लिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि वे आने वाले परिदृश्य में वे बड़ी भूमिका में नजर आएं।

नेपाल में प्रदर्शनकारियों का राष्ट्रपति-पीएम के घर में आगजनी, ओली ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

#nepalprotestersburntdownhousesofprimeministerand_president 

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नेपाल में आक्रोश की आग भड़कती ही जा रही है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के आवास को प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया है। वहीं इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सूचना एवं संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग के आवास में भी आग लगा दी। पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड के घर के बाहर पुलिस चौकी में भी आग लगा दी गई। 

सड़कें युद्धक्षेत्र बनी

सोमवार को शुरू हुआ छात्रों का ये प्रदर्शन मंगलवार को पूरे देश में फैल गया है। काठमांडू में प्रदर्शनकारियों की उग्र भीड़ ने बवाल मचा रखा है। शहर की सड़कें युद्धक्षेत्र जैसी नजर आ रही हैं। काठमांडू में प्रदर्शनकारियों ने सीपीएन-एमसी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल, संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक सहित अन्य के आवास पर पथराव किया और आगजनी की। मकवानपुर में, हेटौडा और पूर्वी मनहारी बाज़ार में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर पूर्व-पश्चिम राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया, जिससे यातायात बाधित हुआ। पुलिस ने अशांति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं।

राष्ट्रपति- प्रधानमंत्री का घर आग के हवाले

प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल के आवास को आग के हवाले दिया है। ओली के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शनकारियों ने उनके आवास को जला दिया है। प्रदर्शनकारियों ने बालकोट स्थित प्रधानमंत्री ओली के आवास में आग लगा दी। प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह परिसर में घुसने और घर के कुछ हिस्सों में आग लगाने से पहले, घर में मौजूद सामानों को बाहर निकाल लिया था। आग फैलने पर आवास से धुएं का घना गुबार उठता देखा गया। वहीं, देश के ऊर्जा मंत्री और राष्ट्रपति के घर को भी प्रदर्शनकारियों ने जला दिया है। प्रदर्शनकारियों ने "केपी चोर, देश छोड़" , "भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करो" जैसे नारे लगा रहे हैं। 

सेना ने पीएम केपी ओली से इस्तीफा मांगा

नेपाल में दो दिन से चल रहे बवाल के बाद सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। विकट होते हालात को देखते हुए सेना ने पीएम केपी ओली से इस्तीफा मांगा है। नेपाली आर्मी चीफ ने कहा है कि पीएम ओली अब गद्दी छोड़ देंष

नेपाल में कई जगहों पर लगा कर्फ्यू

काठमांडू में गृह मंत्रालय के अधीन तीन जिला प्रशासन कार्यालयों (डीएओ) ने अलग-अलग नोटिस जारी करके कई स्थानों पर कर्फ्यू लगा दिया, जिसमें शहर के प्रमुख एंट्री प्वाइंट शामिल हैं. काठमांडू डीएओ ने मंगलवार को राजधानी में अनिश्चितकाल तक के लिए कर्फ्यू लागू कर दिया, जिसमें लोगों को आवाजाही, प्रदर्शन, सभाएं या धरने पर रोक है. कर्फ्यू के दौरान जरूरी सेवाओं जैसे एम्बुलेंस, अग्निशमन वाहन, शव वाहन, स्वास्थ्यकर्मियों, पत्रकारों, पर्यटक वाहनों, हवाई यात्रियों और मानवाधिकार व राजनयिक मिशनों के वाहनों की आवाजाही की अनुमति होगी.

केपी शर्मा ओली ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

देश के बिगड़े हालात के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आज शाम एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। मैं स्थिति का आकलन करने और एक सार्थक निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहा हूं। इसके लिए, मैंने आज शाम 6 बजे एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है। मैं सभी भाइयों और बहनों से विनम्र अनुरोध करता हूं कि इस कठिन परिस्थिति में धैर्य बनाए रखें।

20 की मौत के बाद झुकी नेपाल की ओली सरकार, GEN-Z के आक्रोश के बाद सोशल मीडिया से हटा बैन

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नेपाल की केपी शर्मा ओली सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बैन हटा लिया है। यह फैसला सोमवार को देश भर में युवाओं के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के लिए बाद लिया गया। नेपाल में सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन के खिलाफ हजारों Gen-Z युवाओं ने सोमवार को राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों में प्रदर्शन किया। हिंसक प्रदर्शन के दौरान 20 लोगों की मौत हो गई, जबकि 400 से ज्यादा लोग घायल हो गए। हिंसक प्रदर्शन के बाद नेपाल सरकार ने देर रात सोशल मीडिया से प्रतिबंध हटा लिया है। इससे पहले प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने बैन हटाने से इनकार किया था।

देर रात बेन हटाने की हुई घोषणा

GEN-Z प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसमें कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा घायल हुए हैं। नेपाल के संचार, सूचना एवं प्रसारण मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने देर रात घोषणा की कि सोशल मीडिया साइटों पर प्रतिबंध लगान का फैसला वापस ले लिया गया है। एक आपातकालीन कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री ने कहा, सरकार ने GEN-Z की मांग को रखते हुए सोशल मीडिया को खोलने का फैसला पहले ही कर लिया है।

पहले लिए गए फैसले पर सरकार को पछतावा नहीं

हालांकि, मंत्री ने कहा कि सरकार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बंद करने को लेकर पहले लिए गए फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। गुरुंग ने कहा, 'इस मुद्दे को बहाने के तौर पर इस्तेमाल करके विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे, इसलिए सोशल मीडिया साइटों को फिर से खोलने का फैसला लिया गया है।' गुरुंग ने जेन-जी प्रदर्शनकारियों के विरोध प्रदर्शन वापस लेने की अपील की।

नेपाली गृह मंत्री रमेश लेखक का इस्तीफा

इससे पहले सोमवार को नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर पाबंदी के खिलाफ युवाओं न जोरदार प्रदर्शन का। विरोध प्रदर्शन के हिंसक हो जाने से 20 लोगों की मौत हो गई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह झड़पें हुईं। काठमांडो में प्रदर्शनकारी संसद भवन परिसर में घुस गए और तोड़फोड़ की। विरोध प्रदर्शन पोखरा, बुटवल, भैरहवा, भरतपुर, इटाहारी और दमक तक फैल गया। हालात काबू में करने के लिए काठमांडो समेत कई शहरों में कर्फ्यू लगाने के साथ सेना को तैनात करना पड़ा। बेकाबू हिंसा के बाद नेपाली गृह मंत्री रमेश लेखक को इस्तीफा दे दिया।

हिंसा की जांच के लिए कमेटी बनेगी

इसके साथ ही कैबिनेट ने हिंसा की जांच के लिए एक जांच समिति का भी गठन किया है। कमेटी को 15 दिनों में रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इन मौतों पर दुख जताया, साथ ही आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्व घुस आए थे। सरकारी संपत्ति को बचाने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का मकसद सोशल मीडिया को बंद करना नहीं, बल्कि नियंत्रित करना था।

नेपाल में बवाल, सोशल मीडिया पर रोक से भड़के युवा, संसद भवन में भी घुसे

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पड़ोसी देश नेपाल में विरोध की आग भड़क उठी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले के खिलाफ नेपाल में युवाओं ने सोमवार को काठमांडू में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। जेनरेशन जेड पीढ़ी के युवाओं ने सड़कों पर सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद की। सोशल मीडिया बैन होने के विरोध में प्रदर्शन कर रही भीड़ उग्र हो गई और उन्होंने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए। प्रदर्शनकारी गेट पार कर संसद के भीतर प्रवेश कर गए। इन्हें रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वॉटर कैनन चलाई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग भी की, इस दौरान एक शख्स की मौत हो गई, 70 लोग घायल हैं।

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ओेली सरकार के खिलाफ अगली पीढ़ी के युवाओं की बगावत

नेपाल में ओेली सरकार के खिलाफ अगली पीढ़ी के युवाओं ने बगावत कर दी है। नेपाल में अचानक शुरू हुए इस भीषण प्रदर्शन के पीछे की वजह ओली सरकार का हालिया फैसला है। सरकार ने नियमों का हवाला देकर अचानक 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगा दिए, जिनमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर भी शामिल हैं। इस फैसले के विरोध में राजधानी काठमांडू में हजारों छात्र-युवा, सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ भीषण प्रदर्शन कर रहे हैं। कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने लाठिया भांजी हैं, जिसमें एक छात्र की अभी तक मौत की रिपोर्ट है।

'हामी नेपाल' के बैनर तले प्रदर्शन

बताया गया कि सोमवार सुबह 9 बजे से प्रदर्शनकारी काठमांडू के मैतीघर में एकत्रित होने लगे। हाल के दिनों में 'नेपो किड' और 'नेपो बेबीज' जैसे हैशटैग ऑनलाइन ट्रेंड कर रहे हैं। सरकार की ओर से अपंजीकृत प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करने के फैसले के बाद इसमें और तेजी आई है। काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय के अनुसार, 'हामी नेपाल' ने इस रैली का आयोजन किया था। इसके लिए पूर्व अनुमति ली गई थी।

बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और आर्थिक मंदी के खिलाफ भी गुस्सा

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार का कहना है कि इन कंपनियों ने नेपाल सरकार के साथ रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं की, इसलिए यह कार्रवाई करनी पड़ी। लेकिन छात्रों और युवा वर्ग का आरोप है कि यह फैसला उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। युवाओं का कहना है सरकार अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए उनके आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। प्रदर्शनकारी बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और आर्थिक मंदी के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

नेपाल के रास्ते बिहार में घुसे जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी, पुलिस मुख्यालय ने जारी किया हाई अलर्ट

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बिहार पुलिस मुख्यालय ने एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। पुलिस मुख्यालय ने सूबे के सभी जिलों को अलर्ट किया है। अलर्ट करने की वजह यह है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकी के नेपाल के रास्ते बिहार में घुसने की सूचना मिली है। खबर है कि जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकी, हसनैन अली, आदिल हुसैन और मोहम्मद उस्मान, नेपाल के रास्ते बिहार में प्रवेश कर चुके हैं। जो किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में हैं। इसके बाद राज्य में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और सीमावर्ती जिलों में विशेष चौकसी बरती जा रही है।

तीन आतंकी नेपाल के रास्ते बिहार में घुसे

पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकी नेपाल के रास्ते बिहार में घुसे हैं। इन आतंकियों के नाम हैं हसनैन अली जो कि रावलपिंडी, पाकिस्तान का रहने वाला है। वहीं दूसरे के नाम आदिल हुसैन है जो उमरकोट का रहने वाला है। जबकि तीसरा आतंकी मोहम्मद उस्मान है जो पाकिस्तान के ही बहावलपुर का बाशिंदा है।

तीनों आतंकियों की तस्वीर जारी

बिहार पुलिस मुख्यालय की ओर से इन तीनों आतंकियों की तस्वीर जारी की गई है। इनके पासपोर्ट से संबंधित जानकारी सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों से साझा की गई है। बिहार में विधानसभा चुनाव को देखते हुए आतंकी गतिविधि पर लगातार पुलिस मुख्यालय की नजर है। इसी बीच यह अहम जानकारी सामने आई जिसके बाद हाई अलर्ट जारी किया गया है।

तीनों आतंकी अगस्त के दूसरे सप्ताह में काठमांडू पहुंचे

पुलिस मुख्यालय ने जिलों से कहा है कि पुलिस मुख्यालय के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार तीनों आतंकी अगस्त के दूसरे सप्ताह में काठमांडू पहुंचे थे। वहां से अगस्त के तीसरे सप्ताह में नेपाल बॉर्डर से बिहार में घुसे। तीनों आतंकवादियों के पासपोर्ट से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई है। पुलिस मुख्यालय ने आशंका जताते हुए कहा है कि हो न हो ये लोग किसी बड़ी घटनाओं को अंजाम देने के फिराक में हैं। पुलिस मुख्यालय ने बिहार के सभी जिलों को स्थानीय स्तर पर खुफिया तंत्र को सक्रिय कर आसूचना संकलन करने और संदिग्ध आतंकियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई का निर्देश दिया है।

इन जिलों में खास सख्ती

पुलिस मुख्यालय ने खास तौर पर नेपाल से सटे बिहार के सीमावर्ती जिले सीतामढ़ी, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, अररिया, किशनगंज और सुपौल में चौकसी बढ़ा दी गई है। भागलपुर और अन्य जिलों में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि संदिग्ध गतिविधि या किसी भी जानकारी को तुरंत स्थानीय थाने या पुलिस हेल्पलाइन को सूचित करें। फिलहाल सभी सुरक्षा एजेंसियां तीनों आतंकियों की तलाश में जुटी हुई हैं।