‘गाण्डीव के पार’ का हरिद्वार में भव्य लोकार्पण, बलिया के विद्वान डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को मिली बधाई
संजीव सिंह बलिया! सेवा मिशन, हरिद्वार के तत्वावधान में अवधूत मंडल आश्रम में आयोजित द्वितीय अंतरराष्ट्रीय दिव्य गंगा महोत्सव एवं साहित्यिक कुंभ में बलिया निवासी प्रकांड विद्वान डॉ. विद्यासागर उपाध्याय के खंडकाव्य ‘गाण्डीव के पार’ का भव्य लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए साहित्यकारों, विद्वानों, शोधार्थियों, संतों और संस्कृति चिंतकों की उपस्थिति रही। कृति का लोकार्पण उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, रामभद्राचार्य राज्य विश्वविद्यालय चित्रकूट के कुलपति प्रो. शिशिर पांडेय, उत्तराखंड हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश लोकपाल वर्मा, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा बिहार के पूर्व कुलपति आचार्य धर्मेंद्र, त्रिभुवन विश्वविद्यालय काठमांडू नेपाल के प्रो. गोपाल अधिकारी, नेपाल के डॉ. हरि तिमिलसेना तथा उत्तराखंड के पूर्व मुख्य शिक्षा अधिकारी डॉ. विद्याशंकर चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से किया। कृति की विशेषता अठारह छंदों से छः अनुवाक व अठारह पर्व में रचित मौलिक खंडकाव्य ‘गाण्डीव के पार’ में गत-प्रत्यागत, अनुलोम-विलोम, शार्दूलविक्रीड़ित, मंदाक्रांता, चंडवृष्टिप्रयात दंडक, भुजंगप्रयात, घनाक्षरी, सवैया, दोहा, कुंडलिया, वीर, चौपाई आदि छंदों का प्रयोग किया गया है। विद्वानों ने इस कृति को भारतीय इतिहास, महाभारत परंपरा और समकालीन साहित्यिक विमर्श की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। यह ग्रंथ महाभारत के युद्ध प्रसंग के उपरांत वानप्रस्थ होते वृद्ध अर्जुन और उनके प्रपौत्र परीक्षित का एक रात्रि में घटित संवाद है, जो श्रीमद्भगवद्गीता की अभिनव व्याख्या प्रस्तुत करता है। डॉ. उपाध्याय का व्याख्यान महोत्सव के प्रथम उद्घाटन सह बौद्धिक सत्र में ‘भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना के विकास में गंगा का महत्व’ विषय पर विशिष्ट अतिथि के रूप में व्याख्यान देते हुए डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने कहा कि भारतीय परंपरा में गंगा केवल भौगोलिक जलधारा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक स्मृति, आध्यात्मिक चेतना और सभ्यतागत निरंतरता की प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि गंगा को बचाने का प्रश्न केवल नदी और पर्यावरण के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की उस सांस्कृतिक दृष्टि की रक्षा का प्रश्न भी है, जिसमें प्रकृति को जीवन और चेतना से पृथक नहीं माना गया। सम्मान समारोह कार्यक्रम में साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनेक रचनाकारों और विद्वानों को ‘गंगा सेवी सम्मान’ और ‘टीजीटी सम्मान’ से सम्मानित किया गया। अंतिम सत्र में शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप जी महाराज मुख्य अतिथि रहे, जबकि हर्ष प्रसाद काला, रामभद्राचार्य राज्य विश्वविद्यालय चित्रकूट के शिक्षा संकाय के विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक शुक्ला विशिष्ट अतिथि रहे। बलिया में हर्ष डॉ. विद्यासागर उपाध्याय के इस आध्यात्मिक खंडकाव्य का आध्यात्मिक नगरी हरिद्वार में लोकार्पण होने पर बलिया के विद्वानों में हर्ष व्याप्त है। महामंडलेश्वर कौशलेन्द्र गिरी, संत बालक नाथ, स्वामी आनंद स्वरूप, डॉ. मणिकर्णिका, करुणानिधि तिवारी, हरेंद्र नाथ मिश्रा, संतोष कुमार दीक्षित, पंडित विजय नारायण शरण, डॉ. गणेश पाठक, लल्लन पाण्डेय, कौशल कुमार उपाध्याय, विजय प्रताप आर्य आदि ने बधाई दी है। कार्यक्रम का कुशल संचालन मनीष श्रीवास्तव एवं मनीषा आवले चौगांवकर ने संयुक्त रूप से किया। अंत में समस्त अभ्यगतों के प्रति दिव्य गंगा सेवा मिशन के संस्थापक एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय ने आभार व्यक्त किया।
Sep 02 2026, 12:26
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