पीएम-सेतु से यूपी में बदलेगी आईटीआई की तस्वीर, उद्योगों की जरूरत के हिसाब से तैयार होंगे युवा
- लखनऊ में उद्योग सम्मेलन में कौशल विकास और रोजगार के बीच साझेदारी मजबूत करने पर जोर; राजनाथ सिंह बोले- कुशल मानव संसाधन के बिना तकनीक का पूरा लाभ संभव नहीं
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करने और युवाओं को बेहतर रोजगार से जोड़ने की दिशा में पीएम-सेतु योजना को महत्वपूर्ण पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी उद्देश्य से लखनऊ के ताज पैलेस में पीएम-सेतु उद्योग सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में सरकार, उद्योग जगत और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी मजबूत करने तथा आईटीआई को आधुनिक उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित करने पर मंथन हुआ।
कार्यक्रम में रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह, केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल समेत केंद्र एवं प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, प्रमुख औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधि और शिक्षण संस्थानों के अधिकारी शामिल हुए।
- कुशल मानव संसाधन विकास की सबसे बड़ी जरूरत
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी देश के विकास में मानव संसाधन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। भारत को वैश्विक विनिर्माण और तकनीकी शक्ति बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक के साथ प्रशिक्षित और कुशल कार्यबल भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कोई देश अत्याधुनिक मशीनें खरीद सकता है, लेकिन उन्हें प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन का होना अनिवार्य है। रक्षा उत्पादन, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, ड्रोन, रोबोटिक्स, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं, इसलिए युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करना होगा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि पीएम-सेतु के तहत सरकारी आईटीआई में आधुनिक सुविधाएं, प्रयोगशालाएं, डिजिटल लर्निंग और नवीनतम पाठ्यक्रम विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने उद्योगों और रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों से इस योजना में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि योजना की सफलता का पैमाना केवल मशीनें लगाना नहीं, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार पैदा करना होना चाहिए।
- प्रशिक्षण से रोजगार तक बने स्पष्ट रास्ता
केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि पीएम-सेतु सरकार, उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी का नया मॉडल है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण और रोजगार के बीच मौजूद अंतर को कम करना है।
उन्होंने उद्योग जगत से अपील की कि वे अपनी भूमिका केवल सीएसआर गतिविधियों तक सीमित न रखें, बल्कि आईटीआई क्लस्टरों के विकास, संचालन और प्रबंधन में सक्रिय भागीदारी करें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण ऐसा हो, जिसके बाद युवाओं के लिए अप्रेंटिसशिप और रोजगार तक पहुंच का स्पष्ट रास्ता तैयार हो।
- यूपी में 8 क्लस्टर, 32 आईटीआई होंगे विकसित
कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पीएम-सेतु के तहत 8 क्लस्टर और 32 आईटीआई चिन्हित किए गए हैं। इनमें से सात क्लस्टर उद्योगों की साझेदारी के लिए उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण व्यवस्था विकसित करने के लिए हर संभव सहयोग करेगी।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बड़ा बाजार, विशाल युवा आबादी और तकनीकी रूप से सक्षम मानव संसाधन उपलब्ध है। उन्होंने सम्मेलन में शामिल उद्योगों को राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया।
- रक्षा और विनिर्माण क्षेत्र में कुशल तकनीशियनों की बढ़ती मांग
सम्मेलन में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, ब्रह्मोस एयरोस्पेस, ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड, एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड, अशोक लेलैंड समेत प्रमुख औद्योगिक एवं रक्षा संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
उद्योग प्रतिनिधियों ने एयरोस्पेस, जहाज निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्रिसिजन इंजीनियरिंग, रक्षा उत्पादन, उन्नत वेल्डिंग, मेकाट्रॉनिक्स और ड्रोन तकनीक जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित तकनीशियनों की बढ़ती मांग पर जोर दिया।
- एक क्लस्टर पर 241 करोड़ तक का निवेश
पीएम-सेतु के तहत एक हब आईटीआई और चार स्पोक आईटीआई वाले क्लस्टर में 241 करोड़ रुपये तक का निवेश संभव है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत, राज्य सरकार की 33 प्रतिशत और उद्योग साझेदारों का 17 प्रतिशत योगदान प्रस्तावित है।
क्लस्टर के संचालन के लिए प्रस्तावित एसपीवी व्यवस्था में एंकर इंडस्ट्री पार्टनर्स को 51 प्रतिशत हिस्सेदारी, जबकि केंद्र और राज्य सरकार को 24.5-24.5 प्रतिशत हिस्सेदारी दी जाएगी। सम्मेलन में बताया गया कि पांच राज्यों के सात क्लस्टरों में स्वीकृत उद्योग साझेदारी प्रस्ताव 1,500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- 'शौर्य अकादमी’ के लिए एमओयू
कार्यक्रम के दौरान युवाओं को सशस्त्र बलों, पुलिस और अन्य वर्दीधारी सेवाओं में करियर के लिए तैयार करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) और लखनऊ छावनी बोर्ड के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत ‘शौर्य अकादमी’ की स्थापना की जाएगी।
सम्मेलन का मुख्य संदेश यही रहा कि आईटीआई में प्रशिक्षण और उद्योगों में रोजगार के बीच सीधा संबंध मजबूत किया जाए, ताकि प्रदेश के युवाओं को बदलती औद्योगिक अर्थव्यवस्था के अनुरूप कौशल मिले और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें।
Aug 31 2026, 19:23
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