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लखनऊ में नाला निर्माण और सफाई कार्यों का मंत्री ए.के. शर्मा ने किया निरीक्षण
-- विश्वास खंड में 600 मीटर नाले का 500 मीटर निर्माण पूरा, शक्ति उपवन में वृहद वृक्षारोपण और योजनाओं के प्रचार के भी निर्देश


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने शुक्रवार को राजधानी के विश्वास खंड और विवेक खंड क्षेत्रों में चल रहे नाला निर्माण एवं सफाई कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्षाकाल में कहीं भी जलभराव की स्थिति न बनने पाए और सभी परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूरी की जाएं।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि विश्वास खंड में 600 मीटर लंबे नाले में से 500 मीटर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य तेजी से जारी है। इस पर मंत्री ने कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद विश्वास खंड और आसपास के इलाकों को जलभराव की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी तथा वर्षा जल की निकासी सुचारु रूप से हो सकेगी।
मंत्री ने नालों की सफाई व्यवस्था का भी निरीक्षण किया और नियमित सफाई एवं रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्षा के दौरान जल निकासी बाधित न हो, इसके लिए सभी संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाए और जहां भी समस्या सामने आए, उसका तत्काल समाधान किया जाए।
ए.के. शर्मा ने अधिकारियों से कहा कि गुणवत्ता और समयबद्धता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने नागरिक सुविधाओं को विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि जनता की शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने निर्माणाधीन शक्ति उपवन का भी जायजा लिया। उन्होंने नगर आयुक्त को निर्देश दिया कि यहां वृहद स्तर पर वृक्षारोपण कराया जाए और सरकार की विभिन्न योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए सूचना प्रदर्शित करने वाले डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएं।
इस अवसर पर महापौर सुषमा खर्कवाल, नगर आयुक्त गौरव कुमार, अपर नगर आयुक्त तथा अन्य संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे।
खाद्य प्रसंस्करण में निवेश को बढ़ावा, यूपी में 70 करोड़ रुपये की 9 परियोजनाओं को मिली संस्तुति

-  डिप्टी सीएम केशव मौर्य बोले- किसानों की आय बढ़ेगी, युवाओं को मिलेंगे रोजगार के नए अवसर; पीएमएफएमई योजना में 99% लोन वितरण के साथ यूपी देश में नंबर-1

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने करीब 70 करोड़ रुपये की 9 निवेश परियोजनाओं को स्वीकृति के लिए संस्तुत किया है। डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने का प्रभावी माध्यम बनेगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार औद्योगिक विकास और हरित ऊर्जा को समान प्राथमिकता दे रही है। सौर ऊर्जा आधारित औद्योगिक मॉडल उद्योगों की लागत कम करने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के तहत उपलब्ध प्रोत्साहनों और निवेश सुविधाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक निवेशक उत्तर प्रदेश में उद्योग स्थापित करें।

-  11 प्रस्तावों में से 9 को मिली मंजूरी की संस्तुति
अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा की अध्यक्षता में आयोजित एप्रेजल समिति की बैठक में प्राप्त 11 निवेश प्रस्तावों की समीक्षा की गई। इनमें से 70 करोड़ रुपये के 9 प्रस्तावों को निर्धारित शर्तों के साथ राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (SLEC) के समक्ष अनुमोदन के लिए भेजने की संस्तुति की गई। इनमें बरेली के 2, गोरखपुर के 2 तथा कानपुर नगर, ललितपुर, बदायूं, लखनऊ और हापुड़ के एक-एक प्रस्ताव शामिल हैं।

-  पीएमएफएमई योजना में यूपी देश में प्रथम
बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (PMFME) योजना के तहत 99 प्रतिशत लोन डिस्बर्समेंट के साथ उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। साथ ही, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत लेटर ऑफ कम्फर्ट औसतन 20 दिनों में जारी किए जा रहे हैं, जबकि स्वीकृत इकाइयाँ अब औसतन 200 दिनों में संचालित होने लगी हैं। पहले यही प्रक्रिया लगभग 500 दिन लेती थी।

-  बैंकों को लंबित आवेदन जल्द निपटाने के निर्देश
बैठक में जुलाई के अंत तक 31 हजार स्वीकृत परियोजनाओं का लक्ष्य पूरा करने पर जोर दिया गया। समीक्षा में विभिन्न बैंकों के स्तर पर 6,208 आवेदन लंबित पाए गए। अपर मुख्य सचिव ने सभी बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण कर उद्यमियों को समय पर ऋण उपलब्ध कराया जाए।

- 'क्रेजी स्नैक्स' के आईपीओ की सफलता का उल्लेख
बैठक में गोरखपुर की खाद्य प्रसंस्करण इकाई क्रेजी स्नैक्स लिमिटेड के बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर आईपीओ सूचीबद्ध होने की जानकारी भी साझा की गई। कंपनी के प्रतिनिधि नवीन अग्रवाल को इस उपलब्धि पर सम्मानित किया गया। सरकार ने इसे पूर्वांचल में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की बढ़ती संभावनाओं का सकारात्मक संकेत बताया।
फिरोजाबाद में पुलिस-बदमाश मुठभेड़: स्कूल में घुसे दो बदमाश ढेर, बच्चों को बनाया था ढाल, दो एसओजी जवान घायल
3 जुलाई को एक डॉक्टर से लूट की घटना में वांछित थे
फायरिंग में एसओजी के जवान डेविड और पुष्पेंद्र घायल हो गए
मृत बदमाशों की पहचान सुमित और अंकित उर्फ सीपू के रूप में हुई

लखनऊ /फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब दो वांछित बदमाश पुलिस से बचते हुए एक प्राथमिक विद्यालय में घुस गए। पुलिस के अनुसार, बदमाशों ने वहां मौजूद बच्चों को अपनी ढाल बनाने की कोशिश की और एसओजी टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों बदमाश मारे गए, जबकि एसओजी के दो जवान गोली लगने से घायल हो गए। सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

जानकारी के मुताबिक, मारे गए बदमाश इटावा के फ्रेंड्स कॉलोनी क्षेत्र में 3 जुलाई को एक डॉक्टर से लूट की घटना में वांछित थे। उस वारदात में शामिल एक आरोपी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था, जबकि दो आरोपी फरार चल रहे थे। शुक्रवार को उनके शिकोहाबाद क्षेत्र में होने की सूचना मिलने पर एसओजी और पुलिस टीम ने पीछा शुरू किया।

पुलिस के दबाव में भाग रहे दोनों आरोपी पहले एक ग्रामीण की बाइक लेकर फरार हुए और फिर नगला कन्हई स्थित प्राथमिक विद्यालय में जा घुसे। बताया जा रहा है कि उस समय विद्यालय में बच्चे मौजूद थे। पुलिस के अनुसार, बदमाशों ने बच्चों को ढाल बनाकर निकलने की कोशिश की और पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं।फायरिंग में एसओजी के जवान डेविड चौहान और पुष्पेंद्र चौधरी घायल हो गए। दोनों को तत्काल शिकोहाबाद संयुक्त चिकित्सालय ले जाया गया। डेविड चौहान की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए आगरा रेफर किया गया, जबकि दूसरे घायल जवान का उपचार जारी है।

घटना की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। विद्यालय और उसके आसपास के पूरे इलाके को घेर लिया गया। बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें दोनों बदमाश मारे गए।पुलिस ने घटनास्थल से हथियार और अन्य साक्ष्य बरामद किए हैं। मृत बदमाशों की पहचान सुमित और अंकित उर्फ सीपू के रूप में हुई है। अधिकारियों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई जारी है।
सुरेश मिश्र को मिला प्रतिष्ठित महाकवि बाण पुरस्कार
लखनऊ। देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था 'महाकवि  वाण प्रतिष्ठान' द्वारा पं. छैलबिहारी 'वाण' की स्मृति में दिया जाने वाला 'महाकवि वाण पुरस्कार' मुंबई के प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेश मिश्र को उनकी नवीनतम कृति 'डमरू शतक' के लिए राजाजीपुरम स्थित देशभारती इंटर कॉलेज लखनऊ के 'वाण सभागार' में लखनऊ की प्रथम नागरिक व महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल के हाथों से प्रदान किया गया। डमरू शतक हिंदी साहित्य इतिहास की डमरू छंद संग्रह की प्रथम पुस्तक है। इसके तहत स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र व इक्यावन हजार रुपए नकद दिया गया। इसी अवसर पर महापौर सुषमा खर्कवाल, प्रतिष्ठान के प्रमुख ओजरस के शिखर वेदव्रत वाजपेई, हरदोई की मल्हेरा के राजा कुंवर वीरेंद्र सिंह,नबाव खानदान के नबाव सैयद असद रिजवी, कर्नल दयाशंकर दूबे, भाजपा नेता शिवप्रकाश मिश्र सेनानी, उद्योगपति मुरलीधर आहूजा ने सुरेश मिश्र की दो पुस्तकों ,'डमरू शतक' और 'दोहे श्रृंगार के' का विमोचन किया। देशभारती इंटर कॉलेज के संस्थापक पंडित वेदव्रत वाजपेई के जन्म दिवस को गुरु पर्व के रूप में मनाया गया।
इस अवसर पर संयोजक मनुव्रत वाजपेई के संचालन में एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें हास्य कवि सुरेश मिश्र, वेदव्रत वाजपेई, श्रीमती व्यंजना शुक्ला, सोनी शुक्ला क्रांति व आलोक तिवारी ने काव्य पाठ किया। प्राचार्य जयव्रत वाजपेई ने आगंतुक अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर रेड जैसी अनेक फिल्मों में अभिनय कर चुकीं श्रीमती साधना वाजपेई, आचार्य राजा अवस्थी, वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी द्वय एस के द्विवेदी, सी पी तिवारी, मूलचंद वाजपेई, राजेश अवस्थी, राकेश दीक्षित, राष्ट्रीय कृषक दल के प्रमुख सरोज दीक्षित,प्रकाशक प्रशांत श्रीवास्तव, पार्षद रेखा सिंह,अजय दीक्षित, के. के. शुक्ल, अरविंद मिश्र,राजू पंडित,प्रतिमा मिश्रा, अजय शुक्ला, मो. नईम, राजेन्द्र कात्यायन, वाहिद अली वाहिद,रेखा मिश्रा, सुशीला परिहार, संतोष सिंह जैसे गणमान्य सहित हजारों साहित्य रसिक, विधायक, पत्रकार,शिक्षक, विद्यार्थी तथा उनके पालक उपस्थित थे।
अलीगंज अग्निकांड: ए, विभागीयलडीए कोर्ट का पेशकार निलंबित जांच शुरू

-  फाइल में गलत तथ्य दर्ज करने का आरोप, अवैध निर्माण पर समय रहते कार्रवाई न होने की आशंका

-  18 अधिकारियों के नाम पहले ही शासन को भेजे जा चुके हैं, जिनकी हो रही है जांच

लखनऊ। अलीगंज अग्निकांड मामले में जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अपने विहित न्यायालय में तैनात पेशकार विमलेश कुमार गौतम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर अवैध निर्माण से जुड़े प्रकरण की फाइल में गलत तथ्य प्रस्तुत करने का आरोप है, जिसके कारण समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।
एलडीए के अनुसार, विमलेश कुमार गौतम वर्तमान में जोन-7 के विहित न्यायालय में तैनात हैं, जबकि संबंधित मामला उनके जोन-5 में कार्यरत रहने के दौरान का है। प्रारंभिक जांच में अभिलेखीय प्रक्रिया के पालन और दायित्वों के निर्वहन में अनियमितताएं सामने आने के बाद उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई।
निलंबन अवधि के दौरान उन्हें एलडीए मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। साथ ही पूरे प्रकरण की विस्तृत विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, अग्निकांड से जुड़े न्यायालयी अभिलेखों और फाइलों की समीक्षा के दौरान कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के निर्देश पर जांच कराई गई। जांच में प्रथम दृष्टया पेशकार की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर निलंबन का निर्णय लिया गया।
गौरतलब है कि अलीगंज अग्निकांड प्रकरण में कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इससे पहले 18 अधिकारियों के नाम भी शासन को भेजे जा चुके हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है। एलडीए का कहना है कि मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
15 साल बाद यूपी के नगर निगमों में बढ़ सकता है हाउस टैक्स, लखनऊ समेत सभी शहरों में दरों के संशोधन की तैयारी
-  नगर निकायों की आय बढ़ाने की कवायद तेज, वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड ने दिए संकेत; अंतिम फैसला अभी बाकी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के नगर निगम क्षेत्रों में करीब 15 वर्ष बाद हाउस टैक्स की दरों में संशोधन की तैयारी शुरू हो गई है। प्रस्तावित बदलाव के दायरे में लखनऊ सहित प्रदेश के सभी नगर निगम शामिल हो सकते हैं। इसका उद्देश्य नगर निकायों की आय बढ़ाना और उनकी वित्तीय स्थिति को अधिक मजबूत बनाना बताया जा रहा है।
राजधानी लखनऊ में वर्ष 2010 के बाद से हाउस टैक्स की दरों में कोई संशोधन नहीं हुआ है। बीच में 2016 और 2023 में दरें बढ़ाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन पार्षदों और जनप्रतिनिधियों के विरोध के चलते प्रस्ताव लागू नहीं हो सका।
सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश नगर पालिका वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड ने नगर निकायों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए हाउस टैक्स की दरों में संशोधन की आवश्यकता जताई है। बोर्ड का मानना है कि बढ़ती शहरी आबादी और नागरिक सुविधाओं पर बढ़ते खर्च को देखते हुए राजस्व के स्रोतों को मजबूत करना आवश्यक है।
हालांकि, हाउस टैक्स में कितनी वृद्धि होगी, किस श्रेणी की संपत्तियों पर इसका प्रभाव पड़ेगा और नई दरें कब से लागू होंगी, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा।
अयोध्या में संघ, विहिप और संत समाज की बड़ी बैठक 23 जुलाई को, 300 संतों के जुटने की संभावना
-  महंत नृत्य गोपाल दास के आश्रम में बैठक प्रस्तावित, हिंदू समाज को संदेश देने और हालिया घटनाक्रम पर हो सकती है चर्चा

लखनऊ/अयोध्या। अयोध्या में 23 जुलाई को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और संत समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। यह बैठक महंत नृत्य गोपाल दास के आश्रम में आयोजित किए जाने की तैयारी है, जिसमें देशभर से करीब 300 साधु-संतों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक का उद्देश्य हिंदू समाज के बीच विश्वास का संदेश देना और हाल के घटनाक्रमों पर संत समाज के साथ विचार-विमर्श करना है। बैठक में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और संगठनात्मक विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
बताया जा रहा है कि हाल के घटनाक्रमों और एसआईटी रिपोर्ट में उठे कुछ सवालों पर भी मंथन हो सकता है। साथ ही अब तक हुई कार्रवाई और आगे की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किए जाने की संभावना है।
हालांकि, बैठक के एजेंडे को लेकर संबंधित संगठनों की ओर से अभी कोई आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया गया है। प्रस्तावित बैठक को लेकर अयोध्या में राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
मंडी व्यवस्था बनेगी और पारदर्शी व आधुनिक, किसानों को मिलेगा उपज का बेहतर मूल्य: दिनेश प्रताप सिंह

-  सितंबर तक एग्रीमॉल के उद्घाटन के निर्देश, ‘मंडी हाट पैड’ योजना को तेजी से लागू करने पर जोर

लखनऊ। प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने मंडी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और किसान हितैषी बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए मंडियों में आधुनिक सुविधाओं के साथ डिजिटल व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

गुरुवार को राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने विभागीय योजनाओं और विकास कार्यों की प्रगति का आकलन करते हुए अधिकारियों को सभी परियोजनाएं समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरी करने के निर्देश दिए।

- मंडियों में बढ़ेंगी आधुनिक सुविधाएं
दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश की मंडियों को किसानों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनाया जाए। उन्होंने मंडियों में स्वच्छता, पेयजल, विद्युत, सड़क, सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों के विपणन को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ई-नाम (e-NAM) सहित अन्य डिजिटल सेवाओं का व्यापक उपयोग सुनिश्चित किया जाए, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।

- सितंबर तक शुरू होगा एग्रीमॉल
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को आधुनिक विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किए जा रहे एग्रीमॉल का उद्घाटन सितंबर 2026 तक हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। साथ ही निर्माणाधीन परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

-  'मंडी हाट पैड' योजना को मिलेगी गति
बैठक में मंत्री ने 'मंडी हाट पैड' योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक स्थलों का शीघ्र विकास कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि इस योजना से किसानों को अपने गांव या निकटवर्ती क्षेत्र में ही उपज बेचने की सुविधा मिलेगी, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों की बचत होगी तथा उनकी आय में वृद्धि होगी।

-  प्रचार-प्रसार पर भी जोर
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मंडी परिषद की योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि पात्र किसान सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठा सकें। बैठक में मंडी निदेशक इंद्र विक्रम सिंह सहित मंडी परिषद के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
ऊर्जा क्षेत्र में यूपी ने रचा नया इतिहास, 9 वर्षों में बिजली व्यवस्था बनी अधिक मजबूत और आधुनिक

-  60,858 सर्किट किमी पारेषण लाइन, 765 नए उपकेंद्र और 99.30% बिजली उपलब्धता; 59 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए गए

लखनऊ। उत्तर प्रदेश ने पिछले नौ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक बदलाव दर्ज करते हुए विद्युत उत्पादन, पारेषण, वितरण और उपभोक्ता सेवाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। आधुनिक तकनीक, मजबूत विद्युत अवसंरचना और पारदर्शी व्यवस्था के दम पर प्रदेश की बिजली प्रणाली अब पहले से अधिक सुदृढ़ और विश्वसनीय बन गई है।

ऊर्जा विभाग के अनुसार, प्रदेश में 60,858 सर्किट किलोमीटर नई पारेषण लाइनें बिछाई गई हैं तथा 765 नए विद्युत उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता 2,05,632 एमवीए है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश में 99.30 प्रतिशत बिजली उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

-  पारेषण क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि
पिछले नौ वर्षों में 765 केवी के 7, 400 केवी के 45, 220 केवी के 173 और 132 केवी के 490 उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा 2 लाख ट्रांसमिशन टावर, 2,100 ट्रांसफॉर्मर लगाए गए तथा पारेषण हानियों में 3.2 प्रतिशत की कमी लाई गई है। विभाग ने 31,486 मेगावाट की पीक बिजली मांग की सफल आपूर्ति भी सुनिश्चित की है।

-  हर घर तक पहुंची बिजली
प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) के तहत सभी चिन्हित घरों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया है। वहीं आरडीएसएस (RDSS) योजना के अंतर्गत 2.51 लाख से अधिक नए घरों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है।

निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 60 नए 33/11 केवी उपकेंद्र स्थापित किए गए, 1,109 उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई गई, जबकि वर्ष 2024-25 में 28 नए उपकेंद्रों का निर्माण और 576 उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि का कार्य पूरा किया गया।

-  किसानों को मिली ऊर्जा सुरक्षा
कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के तहत वर्ष 2025 तक 2.42 लाख निजी नलकूपों का विद्युतीकरण किया गया। वहीं पीएम-कुसुम योजना के तहत 96,128 से अधिक किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे सिंचाई में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ा है।

-  डिजिटल सेवाओं का विस्तार
उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए 59.17 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा ऑनलाइन नए बिजली कनेक्शन, ऑनलाइन बिल भुगतान, शिकायत पंजीकरण और त्वरित समाधान जैसी डिजिटल सेवाओं का व्यापक विस्तार किया गया है।

-  ग्रीन एनर्जी पर सरकार का फोकस
प्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन विकसित करने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश को भी बढ़ावा दे रही है।
ऊर्जा विभाग के अनुसार, आधुनिक तकनीक, मजबूत विद्युत अवसंरचना और स्वच्छ ऊर्जा के समन्वय से उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में हुए ये सुधार औद्योगिक विकास, कृषि प्रगति, रोजगार सृजन और आम नागरिकों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव का आधार बन रहे हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में यूपी ने रचा नया इतिहास, 9 वर्षों में बिजली व्यवस्था बनी अधिक मजबूत और आधुनिक
l -  60,858 सर्किट किमी पारेषण लाइन, 765 नए उपकेंद्र और 99.30% बिजली उपलब्धता; 59 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए गएलखनऊ। उत्तर प्रदेश ने पिछले नौ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक बदलाव दर्ज करते हुए विद्युत उत्पादन, पारेषण, वितरण और उपभोक्ता सेवाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। आधुनिक तकनीक, मजबूत विद्युत अवसंरचना और पारदर्शी व्यवस्था के दम पर प्रदेश की बिजली प्रणाली अब पहले से अधिक सुदृढ़ और विश्वसनीय बन गई है।ऊर्जा विभाग के अनुसार, प्रदेश में 60,858 सर्किट किलोमीटर नई पारेषण लाइनें बिछाई गई हैं तथा 765 नए विद्युत उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता 2,05,632 एमवीए है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश में 99.30 प्रतिशत बिजली उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।-  पारेषण क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि
पिछले नौ वर्षों में 765 केवी के 7, 400 केवी के 45, 220 केवी के 173 और 132 केवी के 490 उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा 2 लाख ट्रांसमिशन टावर, 2,100 ट्रांसफॉर्मर लगाए गए तथा पारेषण हानियों में 3.2 प्रतिशत की कमी लाई गई है। विभाग ने 31,486 मेगावाट की पीक बिजली मांग की सफल आपूर्ति भी सुनिश्चित की है।-  हर घर तक पहुंची बिजली
प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) के तहत सभी चिन्हित घरों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया है। वहीं आरडीएसएस (RDSS) योजना के अंतर्गत 2.51 लाख से अधिक नए घरों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है।निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 60 नए 33/11 केवी उपकेंद्र स्थापित किए गए, 1,109 उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई गई, जबकि वर्ष 2024-25 में 28 नए उपकेंद्रों का निर्माण और 576 उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि का कार्य पूरा किया गया।-  किसानों को मिली ऊर्जा सुरक्षा
कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के तहत वर्ष 2025 तक 2.42 लाख निजी नलकूपों का विद्युतीकरण किया गया। वहीं पीएम-कुसुम योजना के तहत 96,128 से अधिक किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे सिंचाई में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ा है।-  डिजिटल सेवाओं का विस्तार
उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए 59.17 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा ऑनलाइन नए बिजली कनेक्शन, ऑनलाइन बिल भुगतान, शिकायत पंजीकरण और त्वरित समाधान जैसी डिजिटल सेवाओं का व्यापक विस्तार किया गया है।-  ग्रीन एनर्जी पर सरकार का फोकस
प्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन विकसित करने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश को भी बढ़ावा दे रही है।
ऊर्जा विभाग के अनुसार, आधुनिक तकनीक, मजबूत विद्युत अवसंरचना और स्वच्छ ऊर्जा के समन्वय से उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में हुए ये सुधार औद्योगिक विकास, कृषि प्रगति, रोजगार सृजन और आम नागरिकों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव का आधार बन रहे हैं।