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JPSC परीक्षा में गड़बड़ी का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, जनहित याचिका दायर

#jpscexam2025irregularitiessupremecourtpil

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएमसी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर रांची में छात्रों का प्रदर्शन जारी है। इस बीच ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने याचिका दाखिल की है। इस याचिका में नए सिरे से परीक्षा के आयोजन और मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है।

48 सवालों के जवाब देने पर ही पास हो गया एक कैंडिडेट

बता दें कि ये मामला JPSC की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 से जुड़ा है। यह परीक्षा 19 अप्रैल 2026 को हुई थी और इसका प्रारंभिक रिजल्ट 2 जुलाई 2026 को जारी किया गया था। रिजल्ट आने के बाद एक सफल उम्मीदवार की OMR शीट की कार्बन कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल होने की खबर सामने आई थी। फिर आरोप लगा कि उम्मीदवार ने पहले पेपर में 100 में से सिर्फ 48 सवालों के जवाब दिए, फिर भी वह परीक्षा में सफल घोषित हुआ।

याचिका में क्या मांग की गई?

अब सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर याचिका दायर की गई है। याचिका में 9 अप्रैल 2026 को हुई प्रारंभिक परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई है। याचिका में खास तौर पर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, OMR शीट की कस्टडी और मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की गई। याचिकाकर्ता ने जांच की जिम्मेदारी CBI को सौंपने या सुप्रीम कोर्ट या झारखंड से बाहर के किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र कमेटी गठित करने की मांग की है।

परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग

याचिका में प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि नई परीक्षा अदालत की निगरानी में तय सुरक्षा उपायों के साथ कराई जाए। इसके अलावा OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी की गई है।

परीक्षा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से परीक्षा से जुड़े सभी भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की गई है।परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर, स्कैनिंग रिकॉर्ड, समेत तमाम इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। परीक्षा से जुड़े सभी डिजिटल रिकॉर्ड संरक्षित किए जाने की भी मांग की गी है।

10 अगस्त को झारखंड में राष्ट्रव्यापी रास्ता रोको-रेल रोको: अल्बर्ट एक्का चौक पर 3 घंटे का चक्का जाम

रांची: केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में 10 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी रास्ता रोको-रेल रोको अभियान को सफल बनाने को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य कार्यालय रांची में संयुक्त किसान मोर्चा एवं संयुक्त मजदूर संगठनो के और से प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक झारखंड राज्य किसान सभा के प्रदेश संयोजक भंते जैनेंद्र तथागत सीटू के प्रतीक मिश्रा का निर्माण बॉस खेत मजदूर यूनियन के प्रदेश सचिव इम्तियाज़ खान जिला सचिव अजय कुमार सिंह उपस्थित थे

10 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी जेल भरो कार्यक्रम के तहत अल्बर्ट एक्का चौक, रांची में शाम 4:00 बजे से 7:00 बजे तक रोड ब्लॉक करने का निर्णय लिया गया। इसमें सैकड़ों की तादाद में किसान, मजदूर, महिलाएं, छात्र-नौजवान शामिल होंगे।

मुख्य मांगें:

1. 4 श्रम कानून/लेबर कोड वापस लो

2. असंगठित मजदूरों को ₹26,000 न्यूनतम मजदूरी लागू करो

3. 12 घंटे की जगह 8 घंटे काम का समय तय करो

4. भूमि बैंक रद्द करो

5. किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दो

6. किसानों, महिलाओं एवं छात्रों का कर्ज माफ करो

7. विस्थापन नीति एवं पुनर्वास नीति बनाओ

8. मनरेगा में 250 दिन काम और ₹700 दैनिक मजदूरी की गारंटी करो

9. JPSC परीक्षा रद्द करो एवं JSSC पेपर लीक मामले में वर्तमान जजों की कमेटी से न्यायिक जांच करो

नेताओं के बयान:

बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी किसानों-मजदूरों के रास्ता रोको अभियान का तन-मन-धन से समर्थन करती है और सड़कों पर उतरकर आंदोलन में साथ देगी।

झारखंड राज किसान सभा के प्रदेश संयोजक भारतीय जैनेंद्र तथागत ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कहा कि केंद्र सरकार लगातार किसानों, मजदूरों, छात्रों, नौजवानों और महिलाओं पर अत्याचार कर रही है। सिर्फ पूंजीपतियों के हित में कानून बना रही है, सार्वजनिक संस्थाओं को बेच रही है। बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है। पेपर लीक के कारण छात्र-युवा आत्महत्या कर रहे हैं। इन सभी के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जिम्मेदार है। सीटू के अनिर्बन बस एवं प्रतीक मिश्रा ने कहा

कि केंद्र एवं राज्य सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में रास्ता रोको-रेल रोको_ आंदोलन को सफल बनाएं।

बैठक में उपस्थित:*

महेंद्र पाठक - प्रदेश सचिव, भाकपा

अजय कुमार सिंह - जिला सचिव, भाकपा रांची

अशोक यादव - महासचिव, एटक

भंते जैनेंद्र तथागत - प्रदेश संयोजक, किसान सभा

इशहाक अंसारी - जिला सचिव, किसान सभा

छुमु उरांव, प्रतीक मिश्रा - सीटू

परफूल लिंडा - आदिवासी जन अधिकार मंच

शुभेंदु सेन सहित सैकड़ों कार्यकर्ता

बाबूलाल मरांडी ने सीआईडी जांच एवं एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका पर उठाया गंभीर सवाल

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया के एक्स हैंडल ताबड़तोड़ दो पोस्ट कर सीआईडी जांच की कार्यप्रणाली एवं इसके एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर करारा प्रहार किया है।

श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और सीजीएल (CGL) परीक्षा घोटालों की जांच कर रही सीआईडी (CID) की सत्यनिष्ठा और कार्यप्रणाली पर अब आम जनता का रत्ती भर भी विश्वास नहीं रह गया है। यह अविश्वास निराधार नहीं है। जिस सीआईडी ने सीजीएल परीक्षा धोखाधड़ी में दुर्भावनापूर्ण तरीके से जांच की प्रकृति ही बदल दी और अपनी नाकामी व असली दोषियों को छिपाने के लिए सारा दोष नेपाल में कोचिंग लेने वाले छात्रों पर मढ़ दिया, उससे जेपीएससी घोटाले में न्याय की उम्मीद करना पूरी तरह बेमानी है। वास्तविकता तो यह थी कि सीजीएल के अधिकांश प्रश्न पिछले प्रश्नपत्रों से हूबहू उठाए गए थे और चयनित 'खास' उम्मीदवारों को पहले से ही उन सवालों की कोचिंग दे दी गई थी, लेकिन सीआईडी ने ट्रायल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक को गुमराह किया और अहम साक्ष्य छिपा लिए।

उन्होंने कहा कि इस पूरी साजिश के केंद्र में सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक हैं, जिनका खुद हजारीबाग में कोयले और बालू की तस्करी से अवैध उगाही का दागदार इतिहास रहा है। ऐसे दागी अधिकारी को सरकार ने मेहरबानी करते हुए तीन-तीन अहम पदों से नवाजा है, जबकि कई योग्य अधिकारी बिना काम के बैठे हैं। यह साफ दर्शाता है कि मनोज कौशिक के नेतृत्व में महत्वपूर्ण आपराधिक मामलों के अनुभव से विहीन अफसरों वाली सीआईडी महज सरकार की कठपुतली बनकर रह गई है।

उन्होंने कहा कि इसी कठपुतली एजेंसी ने एफआईआर दर्ज करने से पहले आरोपों की कोई जांच कराए बिना ही जानबूझकर एक बेहद कमजोर एफआईआर दर्ज की है, ताकि सत्ताधारी दल के राजनेताओं और इस महाघोटाले के असली मास्टरमाइंड्स को सुरक्षित निकाला जा सके।

उन्होंने कहा कि जेपीएससी चेयरमैन से चार-चार बार पूछताछ होने के बावजूद आज तक उनकी गिरफ्तारी न होना और परीक्षा आयोजित करने वाली निजी एजेंसी पर सारा ठीकरा फोड़ने का प्रयास यह साबित करता है कि सीआईडी जांच और तलाशी की आड़ में असल में महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने और सफेदपोश चेहरों को बचाने का घिनौना खेल खेल रही है। एक पेशेवर जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली के बिल्कुल उलट, सीआईडी जानबूझकर जांच के परिणामों को नियमित रूप से मीडिया में लीक कर रही है। इसका एकमात्र उद्देश्य जनता का ध्यान भटकाकर और भ्रम फैलाकर अपने आकाओं को बचाने के लिए एक झूठा नैरेटिव सेट करना है, बिल्कुल वैसे ही जैसे सीजीएल मामले में सिर्फ नेपाल जाने वाले छात्रों को ही दोषी ठहराने की साजिश रची गई थी।

श्री मरांडी ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि यह महज कोई साधारण पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा सुनियोजित महाघोटाला है जिसमें सत्ता के शीर्ष पर बैठे राजनेताओं के इशारे पर पैसों के बदले पूरी परीक्षा प्रक्रिया को ही हाईजैक कर लिया गया, ताकि अयोग्य उम्मीदवारों को सफल घोषित किया जा सके। सबसे हैरानी और सीआईडी की नीयत पर शक पैदा करने वाली बात तो यह है कि जब यह तथ्य सार्वजनिक डोमेन में आ चुका है कि परीक्षा कराने वाली दागी एजेंसी के पीछे का मुख्य व्यक्ति अभय कुमार तिवारी खुद धोखाधड़ी के जरिए कई अन्य परीक्षाओं में नौकरियां पा चुका है, तो सीआईडी ने उन पुरानी परीक्षाओं के हेरफेर के मामले में अब तक कोई नई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की? सीआईडी जानबूझकर केवल छोटे उम्मीदवारों और निजी एजेंसियों को मोहरा बनाकर कार्रवाई का दिखावा कर रही है, जबकि सत्ता के गलियारों में बैठे असली गुनाहगारों को छुआ तक नहीं जा रहा।

उन्होंने कहा कि सीआईडी का पिछला इतिहास हमेशा से सच को दबाने और समझौता करने वाला रहा है। ऐसे में राज्य के हर युवा और नागरिक का अब सरकार से सीधा सवाल है कि अगर उसके हाथ वाकई साफ हैं और उसे किसी बात का डर नहीं है, तो वह इस पूरे महाघोटाले की निष्पक्ष जांच सीबीआई (CBI) को क्यों नहीं सौंप देती?

वहीं अपने दूसरे पोस्ट में श्री मरांडी ने कहा है कि झारखंड में आज सिपाही से लेकर एसपी तक हर कोई जानता है कि राज्य में पुलिस का असली नियंत्रण डीजीपी के पास नहीं, बल्कि मनोज कौशिक के पास है, जिनका अतीत कोयले के काले कारोबार और भ्रष्टाचार से जुड़ा रहा है। 2013 से 2015 के बीच हजारीबाग एसपी रहते हुए उन पर बड़े पैमाने पर कोयला चोरी में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसका भंडाफोड़ तत्कालीन ईमानदार और कड़क आईजी मुरारीलाल मीणा ने किया था।

इसके बाद उन पर दूसरी गाज तब गिरी जब एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) में भी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतें दर्ज हुईं। शुरुआत में नीरज सिन्हा जैसे विवादास्पद अधिकारी (जिन्होंने खुद जेएसएससी घोटाले में फंसने के डर से हाल ही में इस्तीफा दे दिया) ने जांच की दिशा भटकाकर मामले को गोल-गोल घुमाने और रफा-दफा करने की पूरी कोशिश की। लेकिन जब वही ईमानदार अफसर मुरारीलाल मीणा एसीबी के चीफ बनकर आए, तो रुकी हुई जांच सही दिशा में आगे बढ़ी।

यह दूसरी बार था जब मनोज कौशिक कानूनी शिकंजे में फंसे; एसीबी की निष्पक्ष जांच में उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप पूरी तरह से सही पाए गए। इसके बाद एसीबी ने इन आरोपों की पुष्टि करते हुए, उनके खिलाफ आगे की दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की औपचारिक अनुमति प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार को सीधे पत्र लिखा। इन दो-दो ठोस आधिकारिक जांच रिपोर्टों और दागी कारनामों के बावजूद, आज आलम यह है कि पुलिस महकमे के सारे कामकाज और 'धंधे' का निर्देश अधिकारी डीजीपी से नहीं, बल्कि मनोज कौशिक से लेते हैं।

श्री मरांडी ने कहा कि सत्ता से लेकर विपक्ष तक सब जानते हैं कि पुलिस के नियंत्रण में कोयला, बालू और पत्थर चोरी के कारोबार का पूरा कंट्रोल किसके हाथ में है और कौन इसे संचालित और मैनेज करवा रहा है। सरकार जानबूझकर सीआईडी और एसीबी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में ऐसे ही दागदार अफसरों को चुनकर बैठाती है ताकि वे कानून के प्रति नहीं, बल्कि राजनीतिक आकाओं और उनके दलालों के नौकर बनकर काम करें। इसका जीता-जागता प्रमाण तब मिला जब सीआईडी का प्रभार संभालते ही मनोज कौशिक ने जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) जांच की दिशा भटका दी और सत्ता के दलालों को बचाने के लिए हाईकोर्ट में सीआईडी की तरफ से भ्रामक शपथ पत्र दिलवाकर पूरी जांच की हवा निकाल दी। सत्ता के मनमाफिक ये सारे गैर-कानूनी काम करके वह सरकार के सबसे बड़े चहेते बन गए हैं। मनोज कौशिक के इसी काले इतिहास, उन पर हुई दो-दो आधिकारिक जांचों और वर्तमान की सत्ता-परस्ती को देखते हुए यह साफ हो चुका है कि झारखंड में अब किसी को भी सीआईडी जांच पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं रह गया है।

बिग न्यूज:JPSC-JSSC विवाद पर बड़ी बैठक ,देवेन्द्रनाथ महतो गुट और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हो रही है बात चित

रांची: झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों और सरकार के बीच शनिवार को एक और दौर की मह्त्वपूर्ण वार्ता शुरू होने जा रही है।

JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच का 8-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल कड़े सुरक्षा घेरे में स्टेट गेस्ट हाउस पहुंच चुका है.शुक्रवार की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद, आज की इस बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में JLKM नेता देवेन्द्रनाथ महतो पिछले 6 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर हैं, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया .

शुक्रवार को सरकार और छात्रों के दूसरे गुट के बीच हुई वार्ता से कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया था। हालांकि, दोनों ही पक्ष बातचीत के जरिए रास्ता निकालने के पक्ष में हैं।

देवेन्द्रनाथ महतो की बिगड़ती सेहत के बीच, आज की यह बैठक बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि क्या आज की वार्ता से अभ्यर्थियों की मांगों पर कोई ठोस सहमति बन पाती है या गतिरोध यूं ही बरकरार रहेगा।

नोट: इस खबर से जुड़ी पल-पल की अपडेट के लिए बने रहिए streetbuzz.co.in साथ।

रांची में बैठे प्रदर्शनकारियों से राहुल गांधी ने की बात, मांगों पर सीएम हेमंत से बात करने का दिलाया भरोसा

#jharkhand

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ यह प्रदर्शन हो रहा है। आज 14वें दिन भी स्टूडेंट्स आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से फोन पर बात की है और हर संभव मदद का भरोसा दिया है। बता दें कि कांग्रेस राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) नीत गठबंधन का एक घटक दल है।

छात्रों को दिया हर संभव मदद का भरोसा

छात्र नेताओं ने दावा किया कि गुरुवार देर शाम राहुल गांदी से फोन पर बातचीत हुई। धरना दे रहे छात्र नेताओं की राहुल गांधी से बातचीत रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा के मोबाइल फोन के माध्यम से कराई गई। बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों से अपनी मांगों का विवरण भेजने को कहा और उन्हें आश्वासन दिया कि वह उनकी समस्याओं को लेकर राज्य सरकार से बात करेंगे। वो इस मामले को लेकर सीएम हेमंत सोरेन से भी बात कर सकते हैं।

मांगों की सूची व्हाट्सएप पर मंगाई

ये बातचीत लगभग 10 मिनट तक चली। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से कहा कि वे अपनी सभी मांगों का विस्तृत ज्ञापन उन्हें व्हाट्सएप पर भेजें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह पूरे मामले पर झारखंड सरकार से बात करेंगे और छात्रों की मांगों के समाधान का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए और उनके साथ न्याय होना चाहिए।

क्या है छात्रों की मांगें?

प्रदर्शनकारी 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने और भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि यह जांच या तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए या फिर राज्य के बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक पैनल से कराई जाए। उन्होंने जेपीएससी और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में व्यापक सुधारों पर भी जोर दिया।

वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित

इधर, प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने गतिरोध को समाप्त करने के लिए सरकार के साथ बातचीत करने के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित किया। प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र प्रतिनिधियों के अलावा दो पत्रकार और एक अधिवक्ता को शामिल किया गया। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि सरकार के समक्ष केवल छात्र प्रतिनिधि ही अपनी मांगें रखेंगे। पत्रकार और अधिवक्ता केवल अभिभावक एवं मार्गदर्शक की भूमिका में मौजूद रहेंगे।

जेपीएससी-जेएससीसी परीक्षा विवाद पर डटे आंदोलकारी छात्र, सीएम हेमंत से वार्ता का इंतजार

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झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्र आंदोलन अब एक व्यापक अभियान का रूप ले चुका है। छात्रों का आरोप है कि राज्य में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता लगातार सवालों के घेरे में रही है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि सिर्फ 14वीं जेपीएससी ही नहीं बल्कि पिछले सात वर्षों में जेपीएससी और जेएसएससी की कई भर्ती परीक्षाएं विवादों में रही हैं। इसलिए वे केवल एक परीक्षा की नहीं बल्कि वर्ष 2019 से अब तक आयोजित सभी विवादित भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलनकारी छात्रों का प्रतिनिधिमंडल तैयार

जयपाल सिंह स्टेडियम में जारी छात्रों आंदोलन के बीच बातचीत का रास्ता भी खुल गया है। सरकार के साथ होने वाली बातचीत को लेकर आंदोलनकारी छात्रों ने प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी कर दी है। इस प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व में राज्य सरकार के साथ वार्ता होगी। प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र प्रतिनिधियों के अलावा दो पत्रकार और एक वकील को शामिल किया गया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वार्ता के दौरान सभी मांगे और तथ्य केवल छात्र प्रतिनिधि ही सरकार के सामने रखेंगे।

वार्ता के प्रस्ताव के बाद भी नहीं आया बुलावा

सरकार की ओर से वार्ता का प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद अब तक छात्र प्रतिनिधियों को औपचारिक रूप से बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया है। इससे आंदोलनरत छात्रों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार के साथ होने वाली वार्ता सकारात्मक नहीं रही, तो 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। आंदोलन अब तक पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। प्रदर्शन स्थल पर राष्ट्रभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्र अपनी बात रख रहे हैं।

छात्रों की प्रमुख मांगें हैं

-वर्ष 2019 से अब तक JPSC और JSSC की सभी विवादित परीक्षाओं की CBI जांच।

-जिन परीक्षाओं में अनियमितता साबित हो, उन्हें रद्द कर दोबारा परीक्षा कराई जाए।

-दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों, बिचौलियों और लाभार्थियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

-भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।

-भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।

JPSC के सवालों से भाग रही कांग्रेस-जेएमएम सरकार, भाजपा के आंदोलन से पहले बौखलाई कांग्रेस : अशोक बड़ाईक

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अशोक बड़ाईक ने कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा के बयान को झूठ, राजनीतिक हताशा और युवाओं के मुद्दों से ध्यान भटकाने की असफल कोशिश बताया है। उन्होंने कहा कि 22 जुलाई को होने वाले भारतीय जनता युवा मोर्चा के ऐतिहासिक JPSC घेराव से घबराकर कांग्रेस और झामुमो के नेताओं की बौखलाहट साफ दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि यदि झामुमो-कांग्रेस सरकार के दामन पर कोई दाग नहीं है तो वह JPSC को लेकर उठ रहे सवालों से भाग क्यों रही है? 14वीं JPSC का परिणाम आधी रात में, वह भी आयोग के सक्षम हस्ताक्षर के बिना क्यों जारी किया गया? कटऑफ सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया को गोपनीय क्यों रखा गया? उत्तर प्रदेश में ब्लैकलिस्टेड रही एजेंसी को भर्ती प्रक्रिया की जिम्मेदारी किसके संरक्षण में दी गई? इन सवालों का जवाब देने के बजाय कांग्रेस भाजपा पर आरोप लगाकर अपनी विफलताओं पर पर्दा डालना चाहती है।

अशोक बड़ाईक ने कहा कि 22 जुलाई का JPSC घेराव किसी दल का नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य, उनके सम्मान और उनके अधिकारों का आंदोलन है। प्रदेशभर से हजारों छात्र, अभ्यर्थी और भाजयुमो कार्यकर्ता रांची पहुंचकर सरकार को यह संदेश देंगे कि अब युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस भाजपा को नैतिकता का पाठ पढ़ाने से पहले अपने इतिहास पर नजर डाले। कांग्रेस के दस वर्षीय शासनकाल में AIPMT, AIEEE, AIIMS, CBSE सहित अनेक राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली आम बात बन चुकी थी। लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद हुआ, लेकिन कांग्रेस सरकार ने न पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ कोई कठोर कानून बनाया, न कोई ठोस कार्रवाई की और न ही कभी जवाबदेही तय की। कांग्रेस की चुप्पी ने ही पेपर लीक माफियाओं के हौसले बुलंद किए।

अशोक बड़ाईक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार देश में पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरू हुई। केंद्र सरकार ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू कर स्पष्ट संदेश दिया कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के लिए देश में कोई जगह नहीं है। अब ऐसे अपराधियों के खिलाफ कठोर कारावास और भारी आर्थिक दंड का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि NEET परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी मिलते ही केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई की, आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा, जांच एजेंसियों को सक्रिय किया और लाखों विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए पुनः परीक्षा कराकर समयबद्ध तरीके से परिणाम घोषित किया। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा है कि पेपर लीक करने वाले युवाओं के सपनों के अपराधी हैं और उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

अशोक बड़ाईक ने कहा कि कांग्रेस और झामुमो सरकार दूसरों पर उंगली उठाने से पहले झारखंड के युवाओं को जवाब दे कि JPSC में पारदर्शिता क्यों नहीं है? भर्ती प्रक्रिया पर लगातार सवाल क्यों उठ रहे हैं? और आखिर सरकार दोषियों को बचाने की कोशिश क्यों कर रही है?

उन्होंने कहा कि भाजपा झारखंड के युवाओं के न्याय की लड़ाई लड़ रही है और लड़ती रहेगी। जब तक JPSC से जुड़े प्रत्येक आरोप की निष्पक्ष जांच, पूरी पारदर्शिता और दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, भाजपा का संघर्ष सड़क से सदन तक पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा।

JPSC रोजगार देने वाला आयोग नहीं, बल्कि "रोजगार का व्यापार" करने वाला बना संस्थान : शशांक राज

भारतीय जनता युवा मोर्चा, झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष शशांक राज ने प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस आयोग पर राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी है, वही आज कथित भ्रष्टाचार, अपारदर्शिता एवं अनियमितताओं का केंद्र बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि JPSC रोजगार देने वाला आयोग नहीं, बल्कि "रोजगार का व्यापार" करने वाला संस्थान बन गया है।

श्री राज ने कहा कि हाल ही में जारी परीक्षा परिणामों में आयोग के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आयोग के तीन सदस्यों के हस्ताक्षर ही नहीं थे, तो परिणाम किस नियम और अधिकार के तहत जारी किया गया?

उन्होंने घोषणा किया कि भारतीय जनता युवा मोर्चा 20 जुलाई को JPSC के खिलाफ पुरे प्रदेश स्तर पर सोशल मीडिया कैंपेन चलाएगी, 21 जुलाई को पूरे झारखंड में मशाल जुलूस निकालकर युवाओं के आक्रोश को बुलंद करेगा तथा 22 जुलाई को "चलो JPSC घेरते हैं" अभियान के तहत जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से JPSC कार्यालय तक मार्च करते हुए घेराव करेगी। इस दौरान "JPSC सफाई अभियान" भी चलाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि कथित भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ है। भारतीय जनता युवा मोर्चा झारखंड के लाखों प्रतियोगी छात्रों के साथ मजबूती से खड़ा है और उनके अधिकारों की लड़ाई अंतिम सांस तक लड़ता रहेगा।

उन्होंने कहा कि पूर्व अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा के कार्यकाल में बिना सभी आवश्यक हस्ताक्षरों के कभी परिणाम जारी नहीं किए जाते थे। उन्होंने वर्ष 2011-13 JPSC प्रकरण का उल्लेख करते हुए आयोग की कार्यप्रणाली की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि सूचना का अधिकार (RTI) के तहत अभ्यर्थियों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का अवलोकन नहीं कराया जाता और न ही कॉपियां सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड की जाती हैं। आयोग परीक्षा का कट-ऑफ भी सार्वजनिक नहीं करता, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ जाती है।

उन्होंने कहा कि परिणाम देर रात लगभग 12 बजे जारी किए जाते हैं और आयोग वर्षों से नियमित परीक्षा कैलेंडर जारी करने में भी विफल रहा है। यह स्थिति युवाओं के साथ अन्याय है।

श्री राज ने कहा कि पड़ोसी राज्य बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष तक है, जबकि झारखंड के लाखों अभ्यर्थी कम आयु सीमा के कारण अवसरों से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से तत्काल आयु सीमा बढ़ाने की मांग की।

श्री राज ने कहा कि यदि JPSC को पारदर्शी, जवाबदेह और निष्पक्ष नहीं बनाया गया तो युवा अपना लोकतांत्रिक आंदोलन और तेज करेंगे।

प्रेस वार्ता के अंत में श्री राज ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा—

"छात्रों की हुंकार, अब नहीं सहेंगे रोजगार का व्यापार।"

प्रेस वार्ता में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष राहुल चौधरी, प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रिंस कुमार एवं प्रदेश प्रवक्ता बबन बैठा उपस्थित रहे।

झारखंड पुलिस को मिले 336 नए जवान, CM ने किया पारण परेड का निरीक्षण, महिला भागीदारी 25%

आप लोग बहुत लम्बे समय से आज के इस दिन का इंतजार कर रहे थे। आप सभी ने लगभग 30 हफ्तों तक बहुत ही कड़ा और लंबा प्रशिक्षण लिया है। मुझे जानकारी दी गई है कि यहाँ बड़े पैमाने पर अनुकंपा के आधार पर नियुक्त हुए राज्य के जवान और जेपीएससी (JPSC) के माध्यम से डीएसपी के पद पर नियुक्त हुए अधिकारी शामिल हैं।

इसमें सबसे अधिक खुशी देने वाली बात यह है कि इस बैच में लगभग 25% महिलाओं की भागीदारी है। इस महिला पुलिस बल को मेरी ओर से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। हम चाहते हैं कि राज्य के हर क्षेत्र में पुरुषों और महिलाओं की भागीदारी समान और बराबर हो, जो यहाँ दिख भी रहा है। राज्य के पुलिस विभाग और हमारे पुलिस जवानों की भूमिका तथा जिम्मेदारियों को लेकर मुझे बहुत अधिक व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आप सभी इसके महत्व को अच्छी तरह समझते हैं।

उक्त बातें मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने आज जैप 1 ग्राउंड, डोरंडा में आयोजित "बुनियादी प्रशिक्षुओं का पारण परेड समारोह-2026" को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने जैप 1 ग्राउंड परिसर स्थित शहीद स्मारक पर माल्यार्पण एवं पारण परेड-2026 का निरीक्षण किया। मौके पर मुख्यमंत्री ने सी०टी०सी०, स्वासपुर, मुसाबनी में प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षक एवं विभिन्न जिला/इकाई से नव नियुक्त आरक्षियों का बुनियादी प्रक्षिणोपरांत आयोजित अंतिम परीक्षा का प्रकाशित परीक्षाफल के विभिन्न विषयों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं के बीच पुरस्कार वितरण किया।

आप सिर्फ एक व्यक्ति मात्र या खुद के लिए नहीं रह गए हैं, बल्कि राज्य के आम नागरिकों की रक्षा के लिए समर्पित हैं

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि अभी थोड़ी देर पहले आप सभी ने झमाझम बारिश के बीच शपथ ली है। निश्चित रूप से हमारी इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में शपथ ग्रहण करना सिर्फ एक प्रक्रिया या माध्यम नहीं है, इसी प्रतिज्ञा और शपथ के बदौलत हम लोगों ने इस देश को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का रूप दिया है।

उन्होंने कहा कि यह शपथ सिर्फ वर्दी के लिए ही नहीं, बल्कि आम जनता की सेवा के लिए भी है। चूंकि आप सभी वर्दीधारी राज्य के प्रहरी हैं, इसलिए यह शपथ आपके लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। आज के बाद से आप एक व्यवस्था से बंध चुके हैं। अब सिर्फ एक व्यक्ति मात्र या खुद के लिए नहीं रह गए हैं, बल्कि राज्य के आम नागरिकों की रक्षा के लिए समर्पित हैं। इस दौरान हो सकता है कि आपके सामने बहुत बड़ी चुनौतियां आकर खड़ी हो जाएं, यहाँ तक कि आपकी जान पर भी बन आए, पूर्व में इसी कर्तव्य का निर्वहन करते हुए आपके परिजनों ने भी अपने प्राणों की आहुति दी है। आपके परिजनों के उसी अधूरे रास्ते और सफर को पूरा करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार ने अब आपके कंधों पर सौंपने का निर्णय लिया है। हम सिर्फ नौकरी या तनख्वाह के लिए पुलिस बल में शामिल नहीं होते हैं, बल्कि कुछ सर्वोच्च कर्तव्यों के संकल्प के साथ इस व्यवस्था से बंध जाते हैं।

प्रशिक्षण का परिणाम कानून एवं विधि-व्यवस्था के संधारण में दिखनी चाहिए

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आपको प्रशिक्षण के दौरान जिन अलग-अलग विषयों की ट्रेनिंग दी गई है, उसका परिणाम अब राज्य की कानून-व्यवस्था, विधि-व्यवस्था और राज्य के भीतर घटने वाली या संभावित घटनाओं को नियंत्रित करने में दिखना चाहिए। अगर आप सभी पूरी निष्ठा से प्रयास करेंगे, तो हमारे बीच आने वाली हर चुनौती को समाप्त करते हुए उसका समाधान किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि आज मौसम अनुकूल न होने की वजह से इस पारण परेड कार्यक्रम को हमें पुलिस परिसर (Premises) के भीतर ही संपन्न करना पड़ा। लेकिन आपका उत्साह कम न हो और आपके परिजन हतोत्साहित न हों, इसके लिए हमारी सरकार लगातार आपके साथ खड़ी रहने के लिए कृतसंकल्पित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि पुलिस विभाग के लिए अलग से आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त आवासीय विद्यालयों का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही, पुलिस विभाग के अंतर्गत अलग से विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं भी स्थापित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि निश्चित रूप से, एक-एक करके हम अपनी सारी मंजिलों तक पहुंचेंगे। इसमें आपका भी प्रयास होना चाहिए और हमारी सरकार का भी पूरा सहयोग रहेगा। मुख्यमंत्री ने सभी नव नियुक्त पुलिस उपाधीक्षकों एवं नव नियुक्त आरक्षियों को आज के इस बेहतरीन परेड प्रदर्शन के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं दी। साथ ही पुलिस विभाग को इस पूरी प्रशिक्षण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए बहुत-बहुत बधाई दी। उन्होंने जय हिंद, जय झारखंड, जोहार।" के साथ अपनी बातों का समापन किया।

प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके जवानों ने शानदार मार्चपास्ट और आकर्षक कदमताल के माध्यम से अपने कौशल का प्रदर्शन किया। वहीं नव नियुक्त जवानों को अनुशासन, देश व राज्य सेवा, संविधान, पुलिस बल की गरिमा, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के प्रति शपथ दिलाई गयी।

इस अवसर पर महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखंड श्रीमती तदाशा मिश्रा, अपर पुलिस महानिदेशक श्रीमती प्रिया दुबे सहित पुलिस विभाग के वरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

झारखंड स्वास्थ्य सेवा में बड़ा कदम: स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने 76 चिकित्सा पदाधिकारियों को सौंपे नियुक्ति पत्र

रांची | 24 मार्च 2026: विश्व यक्ष्मा (टीबी) दिवस के अवसर पर मंगलवार को नामकुम स्थित आईपीएच सभागार में एक भव्य नियुक्ति पत्र वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संविदा पर चयनित 76 चिकित्सा पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।

1250 डॉक्टरों की जल्द होगी बहाली, स्वास्थ्य ढांचे में सुधार

समारोह को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने घोषणा की कि डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए जल्द ही JPSC के माध्यम से 1250 नियमित डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी। डॉ. अंसारी ने कहा, "चिकित्सकों का योगदान समाज में अमूल्य है। पिछले एक वर्ष में 8 नए मेडिकल कॉलेज और राज्य की पहली मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।"

आधुनिक तकनीक और सुविधाओं पर जोर

मंत्री ने बताया कि राज्य के प्रमुख अस्पतालों को सीटी स्कैन, एमआरआई और एआई (AI) जैसी रोबोटिक तकनीकों से लैस किया जा रहा है ताकि मरीजों को दूसरे राज्यों में रेफर न करना पड़े। इसके अलावा:

ब्लड सप्लाई सिस्टम: जरूरतमंदों के लिए टोल फ्री नंबर आधारित नई व्यवस्था शुरू की जा रही है।

गंभीर बीमारियाँ: सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया की पहचान के लिए राज्यव्यापी जांच अभियान चलेगा।

मिशन 2030: टीबी मुक्त झारखंड का लक्ष्य

अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने जानकारी दी कि सरकार ने इस वर्ष 12 लाख लोगों की टीबी जांच का लक्ष्य रखा है। पिछले वर्ष के 9.5 लाख के आंकड़े को पार करने के लिए संसाधनों में वृद्धि की गई है। अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि आगामी 100 दिनों में पंचायत स्तर तक टीबी स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान को तेज किया जाएगा। साथ ही, टीबी मरीजों की प्रोत्साहन राशि का लंबित भुगतान भी जल्द निपटाया जाएगा।

जागरूकता वाहनों को दिखाई हरी झंडी

कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों में टीबी उन्मूलन का संदेश फैलाने वाले विशेष जागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने नवनियुक्त डॉक्टरों से आह्वान किया कि वे न केवल मरीजों का इलाज करें, बल्कि अस्पतालों की व्यवस्थागत कमियों की रिपोर्ट भी सरकार को दें ताकि जमीनी स्तर पर सुधार हो सके।

कार्यक्रम में मुख्य उपस्थिति

समारोह में अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, अभियान निदेशक (NHM) शशि प्रकाश झा, निदेशक प्रमुख (स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. सिद्धार्थ सान्याल सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

JPSC परीक्षा में गड़बड़ी का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, जनहित याचिका दायर

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झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएमसी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर रांची में छात्रों का प्रदर्शन जारी है। इस बीच ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने याचिका दाखिल की है। इस याचिका में नए सिरे से परीक्षा के आयोजन और मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई है।

48 सवालों के जवाब देने पर ही पास हो गया एक कैंडिडेट

बता दें कि ये मामला JPSC की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 से जुड़ा है। यह परीक्षा 19 अप्रैल 2026 को हुई थी और इसका प्रारंभिक रिजल्ट 2 जुलाई 2026 को जारी किया गया था। रिजल्ट आने के बाद एक सफल उम्मीदवार की OMR शीट की कार्बन कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल होने की खबर सामने आई थी। फिर आरोप लगा कि उम्मीदवार ने पहले पेपर में 100 में से सिर्फ 48 सवालों के जवाब दिए, फिर भी वह परीक्षा में सफल घोषित हुआ।

याचिका में क्या मांग की गई?

अब सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर याचिका दायर की गई है। याचिका में 9 अप्रैल 2026 को हुई प्रारंभिक परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई है। याचिका में खास तौर पर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, OMR शीट की कस्टडी और मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की गई। याचिकाकर्ता ने जांच की जिम्मेदारी CBI को सौंपने या सुप्रीम कोर्ट या झारखंड से बाहर के किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र कमेटी गठित करने की मांग की है।

परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग

याचिका में प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि नई परीक्षा अदालत की निगरानी में तय सुरक्षा उपायों के साथ कराई जाए। इसके अलावा OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी की गई है।

परीक्षा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से परीक्षा से जुड़े सभी भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की गई है।परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर, स्कैनिंग रिकॉर्ड, समेत तमाम इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। परीक्षा से जुड़े सभी डिजिटल रिकॉर्ड संरक्षित किए जाने की भी मांग की गी है।

10 अगस्त को झारखंड में राष्ट्रव्यापी रास्ता रोको-रेल रोको: अल्बर्ट एक्का चौक पर 3 घंटे का चक्का जाम

रांची: केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में 10 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी रास्ता रोको-रेल रोको अभियान को सफल बनाने को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य कार्यालय रांची में संयुक्त किसान मोर्चा एवं संयुक्त मजदूर संगठनो के और से प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक झारखंड राज्य किसान सभा के प्रदेश संयोजक भंते जैनेंद्र तथागत सीटू के प्रतीक मिश्रा का निर्माण बॉस खेत मजदूर यूनियन के प्रदेश सचिव इम्तियाज़ खान जिला सचिव अजय कुमार सिंह उपस्थित थे

10 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी जेल भरो कार्यक्रम के तहत अल्बर्ट एक्का चौक, रांची में शाम 4:00 बजे से 7:00 बजे तक रोड ब्लॉक करने का निर्णय लिया गया। इसमें सैकड़ों की तादाद में किसान, मजदूर, महिलाएं, छात्र-नौजवान शामिल होंगे।

मुख्य मांगें:

1. 4 श्रम कानून/लेबर कोड वापस लो

2. असंगठित मजदूरों को ₹26,000 न्यूनतम मजदूरी लागू करो

3. 12 घंटे की जगह 8 घंटे काम का समय तय करो

4. भूमि बैंक रद्द करो

5. किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दो

6. किसानों, महिलाओं एवं छात्रों का कर्ज माफ करो

7. विस्थापन नीति एवं पुनर्वास नीति बनाओ

8. मनरेगा में 250 दिन काम और ₹700 दैनिक मजदूरी की गारंटी करो

9. JPSC परीक्षा रद्द करो एवं JSSC पेपर लीक मामले में वर्तमान जजों की कमेटी से न्यायिक जांच करो

नेताओं के बयान:

बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी किसानों-मजदूरों के रास्ता रोको अभियान का तन-मन-धन से समर्थन करती है और सड़कों पर उतरकर आंदोलन में साथ देगी।

झारखंड राज किसान सभा के प्रदेश संयोजक भारतीय जैनेंद्र तथागत ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कहा कि केंद्र सरकार लगातार किसानों, मजदूरों, छात्रों, नौजवानों और महिलाओं पर अत्याचार कर रही है। सिर्फ पूंजीपतियों के हित में कानून बना रही है, सार्वजनिक संस्थाओं को बेच रही है। बेरोजगारी और महंगाई चरम पर है। पेपर लीक के कारण छात्र-युवा आत्महत्या कर रहे हैं। इन सभी के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जिम्मेदार है। सीटू के अनिर्बन बस एवं प्रतीक मिश्रा ने कहा

कि केंद्र एवं राज्य सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में रास्ता रोको-रेल रोको_ आंदोलन को सफल बनाएं।

बैठक में उपस्थित:*

महेंद्र पाठक - प्रदेश सचिव, भाकपा

अजय कुमार सिंह - जिला सचिव, भाकपा रांची

अशोक यादव - महासचिव, एटक

भंते जैनेंद्र तथागत - प्रदेश संयोजक, किसान सभा

इशहाक अंसारी - जिला सचिव, किसान सभा

छुमु उरांव, प्रतीक मिश्रा - सीटू

परफूल लिंडा - आदिवासी जन अधिकार मंच

शुभेंदु सेन सहित सैकड़ों कार्यकर्ता

बाबूलाल मरांडी ने सीआईडी जांच एवं एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका पर उठाया गंभीर सवाल

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया के एक्स हैंडल ताबड़तोड़ दो पोस्ट कर सीआईडी जांच की कार्यप्रणाली एवं इसके एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर करारा प्रहार किया है।

श्री मरांडी ने कहा कि झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और सीजीएल (CGL) परीक्षा घोटालों की जांच कर रही सीआईडी (CID) की सत्यनिष्ठा और कार्यप्रणाली पर अब आम जनता का रत्ती भर भी विश्वास नहीं रह गया है। यह अविश्वास निराधार नहीं है। जिस सीआईडी ने सीजीएल परीक्षा धोखाधड़ी में दुर्भावनापूर्ण तरीके से जांच की प्रकृति ही बदल दी और अपनी नाकामी व असली दोषियों को छिपाने के लिए सारा दोष नेपाल में कोचिंग लेने वाले छात्रों पर मढ़ दिया, उससे जेपीएससी घोटाले में न्याय की उम्मीद करना पूरी तरह बेमानी है। वास्तविकता तो यह थी कि सीजीएल के अधिकांश प्रश्न पिछले प्रश्नपत्रों से हूबहू उठाए गए थे और चयनित 'खास' उम्मीदवारों को पहले से ही उन सवालों की कोचिंग दे दी गई थी, लेकिन सीआईडी ने ट्रायल कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक को गुमराह किया और अहम साक्ष्य छिपा लिए।

उन्होंने कहा कि इस पूरी साजिश के केंद्र में सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक हैं, जिनका खुद हजारीबाग में कोयले और बालू की तस्करी से अवैध उगाही का दागदार इतिहास रहा है। ऐसे दागी अधिकारी को सरकार ने मेहरबानी करते हुए तीन-तीन अहम पदों से नवाजा है, जबकि कई योग्य अधिकारी बिना काम के बैठे हैं। यह साफ दर्शाता है कि मनोज कौशिक के नेतृत्व में महत्वपूर्ण आपराधिक मामलों के अनुभव से विहीन अफसरों वाली सीआईडी महज सरकार की कठपुतली बनकर रह गई है।

उन्होंने कहा कि इसी कठपुतली एजेंसी ने एफआईआर दर्ज करने से पहले आरोपों की कोई जांच कराए बिना ही जानबूझकर एक बेहद कमजोर एफआईआर दर्ज की है, ताकि सत्ताधारी दल के राजनेताओं और इस महाघोटाले के असली मास्टरमाइंड्स को सुरक्षित निकाला जा सके।

उन्होंने कहा कि जेपीएससी चेयरमैन से चार-चार बार पूछताछ होने के बावजूद आज तक उनकी गिरफ्तारी न होना और परीक्षा आयोजित करने वाली निजी एजेंसी पर सारा ठीकरा फोड़ने का प्रयास यह साबित करता है कि सीआईडी जांच और तलाशी की आड़ में असल में महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने और सफेदपोश चेहरों को बचाने का घिनौना खेल खेल रही है। एक पेशेवर जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली के बिल्कुल उलट, सीआईडी जानबूझकर जांच के परिणामों को नियमित रूप से मीडिया में लीक कर रही है। इसका एकमात्र उद्देश्य जनता का ध्यान भटकाकर और भ्रम फैलाकर अपने आकाओं को बचाने के लिए एक झूठा नैरेटिव सेट करना है, बिल्कुल वैसे ही जैसे सीजीएल मामले में सिर्फ नेपाल जाने वाले छात्रों को ही दोषी ठहराने की साजिश रची गई थी।

श्री मरांडी ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि यह महज कोई साधारण पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा सुनियोजित महाघोटाला है जिसमें सत्ता के शीर्ष पर बैठे राजनेताओं के इशारे पर पैसों के बदले पूरी परीक्षा प्रक्रिया को ही हाईजैक कर लिया गया, ताकि अयोग्य उम्मीदवारों को सफल घोषित किया जा सके। सबसे हैरानी और सीआईडी की नीयत पर शक पैदा करने वाली बात तो यह है कि जब यह तथ्य सार्वजनिक डोमेन में आ चुका है कि परीक्षा कराने वाली दागी एजेंसी के पीछे का मुख्य व्यक्ति अभय कुमार तिवारी खुद धोखाधड़ी के जरिए कई अन्य परीक्षाओं में नौकरियां पा चुका है, तो सीआईडी ने उन पुरानी परीक्षाओं के हेरफेर के मामले में अब तक कोई नई एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की? सीआईडी जानबूझकर केवल छोटे उम्मीदवारों और निजी एजेंसियों को मोहरा बनाकर कार्रवाई का दिखावा कर रही है, जबकि सत्ता के गलियारों में बैठे असली गुनाहगारों को छुआ तक नहीं जा रहा।

उन्होंने कहा कि सीआईडी का पिछला इतिहास हमेशा से सच को दबाने और समझौता करने वाला रहा है। ऐसे में राज्य के हर युवा और नागरिक का अब सरकार से सीधा सवाल है कि अगर उसके हाथ वाकई साफ हैं और उसे किसी बात का डर नहीं है, तो वह इस पूरे महाघोटाले की निष्पक्ष जांच सीबीआई (CBI) को क्यों नहीं सौंप देती?

वहीं अपने दूसरे पोस्ट में श्री मरांडी ने कहा है कि झारखंड में आज सिपाही से लेकर एसपी तक हर कोई जानता है कि राज्य में पुलिस का असली नियंत्रण डीजीपी के पास नहीं, बल्कि मनोज कौशिक के पास है, जिनका अतीत कोयले के काले कारोबार और भ्रष्टाचार से जुड़ा रहा है। 2013 से 2015 के बीच हजारीबाग एसपी रहते हुए उन पर बड़े पैमाने पर कोयला चोरी में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसका भंडाफोड़ तत्कालीन ईमानदार और कड़क आईजी मुरारीलाल मीणा ने किया था।

इसके बाद उन पर दूसरी गाज तब गिरी जब एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) में भी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतें दर्ज हुईं। शुरुआत में नीरज सिन्हा जैसे विवादास्पद अधिकारी (जिन्होंने खुद जेएसएससी घोटाले में फंसने के डर से हाल ही में इस्तीफा दे दिया) ने जांच की दिशा भटकाकर मामले को गोल-गोल घुमाने और रफा-दफा करने की पूरी कोशिश की। लेकिन जब वही ईमानदार अफसर मुरारीलाल मीणा एसीबी के चीफ बनकर आए, तो रुकी हुई जांच सही दिशा में आगे बढ़ी।

यह दूसरी बार था जब मनोज कौशिक कानूनी शिकंजे में फंसे; एसीबी की निष्पक्ष जांच में उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप पूरी तरह से सही पाए गए। इसके बाद एसीबी ने इन आरोपों की पुष्टि करते हुए, उनके खिलाफ आगे की दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की औपचारिक अनुमति प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार को सीधे पत्र लिखा। इन दो-दो ठोस आधिकारिक जांच रिपोर्टों और दागी कारनामों के बावजूद, आज आलम यह है कि पुलिस महकमे के सारे कामकाज और 'धंधे' का निर्देश अधिकारी डीजीपी से नहीं, बल्कि मनोज कौशिक से लेते हैं।

श्री मरांडी ने कहा कि सत्ता से लेकर विपक्ष तक सब जानते हैं कि पुलिस के नियंत्रण में कोयला, बालू और पत्थर चोरी के कारोबार का पूरा कंट्रोल किसके हाथ में है और कौन इसे संचालित और मैनेज करवा रहा है। सरकार जानबूझकर सीआईडी और एसीबी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में ऐसे ही दागदार अफसरों को चुनकर बैठाती है ताकि वे कानून के प्रति नहीं, बल्कि राजनीतिक आकाओं और उनके दलालों के नौकर बनकर काम करें। इसका जीता-जागता प्रमाण तब मिला जब सीआईडी का प्रभार संभालते ही मनोज कौशिक ने जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) जांच की दिशा भटका दी और सत्ता के दलालों को बचाने के लिए हाईकोर्ट में सीआईडी की तरफ से भ्रामक शपथ पत्र दिलवाकर पूरी जांच की हवा निकाल दी। सत्ता के मनमाफिक ये सारे गैर-कानूनी काम करके वह सरकार के सबसे बड़े चहेते बन गए हैं। मनोज कौशिक के इसी काले इतिहास, उन पर हुई दो-दो आधिकारिक जांचों और वर्तमान की सत्ता-परस्ती को देखते हुए यह साफ हो चुका है कि झारखंड में अब किसी को भी सीआईडी जांच पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं रह गया है।

बिग न्यूज:JPSC-JSSC विवाद पर बड़ी बैठक ,देवेन्द्रनाथ महतो गुट और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हो रही है बात चित

रांची: झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों और सरकार के बीच शनिवार को एक और दौर की मह्त्वपूर्ण वार्ता शुरू होने जा रही है।

JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच का 8-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल कड़े सुरक्षा घेरे में स्टेट गेस्ट हाउस पहुंच चुका है.शुक्रवार की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद, आज की इस बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में JLKM नेता देवेन्द्रनाथ महतो पिछले 6 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर हैं, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया .

शुक्रवार को सरकार और छात्रों के दूसरे गुट के बीच हुई वार्ता से कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया था। हालांकि, दोनों ही पक्ष बातचीत के जरिए रास्ता निकालने के पक्ष में हैं।

देवेन्द्रनाथ महतो की बिगड़ती सेहत के बीच, आज की यह बैठक बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि क्या आज की वार्ता से अभ्यर्थियों की मांगों पर कोई ठोस सहमति बन पाती है या गतिरोध यूं ही बरकरार रहेगा।

नोट: इस खबर से जुड़ी पल-पल की अपडेट के लिए बने रहिए streetbuzz.co.in साथ।

रांची में बैठे प्रदर्शनकारियों से राहुल गांधी ने की बात, मांगों पर सीएम हेमंत से बात करने का दिलाया भरोसा

#jharkhand

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ यह प्रदर्शन हो रहा है। आज 14वें दिन भी स्टूडेंट्स आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से फोन पर बात की है और हर संभव मदद का भरोसा दिया है। बता दें कि कांग्रेस राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) नीत गठबंधन का एक घटक दल है।

छात्रों को दिया हर संभव मदद का भरोसा

छात्र नेताओं ने दावा किया कि गुरुवार देर शाम राहुल गांदी से फोन पर बातचीत हुई। धरना दे रहे छात्र नेताओं की राहुल गांधी से बातचीत रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा के मोबाइल फोन के माध्यम से कराई गई। बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों से अपनी मांगों का विवरण भेजने को कहा और उन्हें आश्वासन दिया कि वह उनकी समस्याओं को लेकर राज्य सरकार से बात करेंगे। वो इस मामले को लेकर सीएम हेमंत सोरेन से भी बात कर सकते हैं।

मांगों की सूची व्हाट्सएप पर मंगाई

ये बातचीत लगभग 10 मिनट तक चली। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से कहा कि वे अपनी सभी मांगों का विस्तृत ज्ञापन उन्हें व्हाट्सएप पर भेजें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह पूरे मामले पर झारखंड सरकार से बात करेंगे और छात्रों की मांगों के समाधान का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए और उनके साथ न्याय होना चाहिए।

क्या है छात्रों की मांगें?

प्रदर्शनकारी 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने और भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि यह जांच या तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए या फिर राज्य के बाहर के उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक पैनल से कराई जाए। उन्होंने जेपीएससी और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) में व्यापक सुधारों पर भी जोर दिया।

वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित

इधर, प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने गतिरोध को समाप्त करने के लिए सरकार के साथ बातचीत करने के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित किया। प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र प्रतिनिधियों के अलावा दो पत्रकार और एक अधिवक्ता को शामिल किया गया। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि सरकार के समक्ष केवल छात्र प्रतिनिधि ही अपनी मांगें रखेंगे। पत्रकार और अधिवक्ता केवल अभिभावक एवं मार्गदर्शक की भूमिका में मौजूद रहेंगे।

जेपीएससी-जेएससीसी परीक्षा विवाद पर डटे आंदोलकारी छात्र, सीएम हेमंत से वार्ता का इंतजार

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झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्र आंदोलन अब एक व्यापक अभियान का रूप ले चुका है। छात्रों का आरोप है कि राज्य में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता लगातार सवालों के घेरे में रही है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि सिर्फ 14वीं जेपीएससी ही नहीं बल्कि पिछले सात वर्षों में जेपीएससी और जेएसएससी की कई भर्ती परीक्षाएं विवादों में रही हैं। इसलिए वे केवल एक परीक्षा की नहीं बल्कि वर्ष 2019 से अब तक आयोजित सभी विवादित भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलनकारी छात्रों का प्रतिनिधिमंडल तैयार

जयपाल सिंह स्टेडियम में जारी छात्रों आंदोलन के बीच बातचीत का रास्ता भी खुल गया है। सरकार के साथ होने वाली बातचीत को लेकर आंदोलनकारी छात्रों ने प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी कर दी है। इस प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व में राज्य सरकार के साथ वार्ता होगी। प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र प्रतिनिधियों के अलावा दो पत्रकार और एक वकील को शामिल किया गया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वार्ता के दौरान सभी मांगे और तथ्य केवल छात्र प्रतिनिधि ही सरकार के सामने रखेंगे।

वार्ता के प्रस्ताव के बाद भी नहीं आया बुलावा

सरकार की ओर से वार्ता का प्रस्ताव दिए जाने के बावजूद अब तक छात्र प्रतिनिधियों को औपचारिक रूप से बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया है। इससे आंदोलनरत छात्रों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार के साथ होने वाली वार्ता सकारात्मक नहीं रही, तो 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। आंदोलन अब तक पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। प्रदर्शन स्थल पर राष्ट्रभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से छात्र अपनी बात रख रहे हैं।

छात्रों की प्रमुख मांगें हैं

-वर्ष 2019 से अब तक JPSC और JSSC की सभी विवादित परीक्षाओं की CBI जांच।

-जिन परीक्षाओं में अनियमितता साबित हो, उन्हें रद्द कर दोबारा परीक्षा कराई जाए।

-दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों, बिचौलियों और लाभार्थियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

-भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।

-भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।

JPSC के सवालों से भाग रही कांग्रेस-जेएमएम सरकार, भाजपा के आंदोलन से पहले बौखलाई कांग्रेस : अशोक बड़ाईक

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अशोक बड़ाईक ने कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा के बयान को झूठ, राजनीतिक हताशा और युवाओं के मुद्दों से ध्यान भटकाने की असफल कोशिश बताया है। उन्होंने कहा कि 22 जुलाई को होने वाले भारतीय जनता युवा मोर्चा के ऐतिहासिक JPSC घेराव से घबराकर कांग्रेस और झामुमो के नेताओं की बौखलाहट साफ दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि यदि झामुमो-कांग्रेस सरकार के दामन पर कोई दाग नहीं है तो वह JPSC को लेकर उठ रहे सवालों से भाग क्यों रही है? 14वीं JPSC का परिणाम आधी रात में, वह भी आयोग के सक्षम हस्ताक्षर के बिना क्यों जारी किया गया? कटऑफ सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया को गोपनीय क्यों रखा गया? उत्तर प्रदेश में ब्लैकलिस्टेड रही एजेंसी को भर्ती प्रक्रिया की जिम्मेदारी किसके संरक्षण में दी गई? इन सवालों का जवाब देने के बजाय कांग्रेस भाजपा पर आरोप लगाकर अपनी विफलताओं पर पर्दा डालना चाहती है।

अशोक बड़ाईक ने कहा कि 22 जुलाई का JPSC घेराव किसी दल का नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य, उनके सम्मान और उनके अधिकारों का आंदोलन है। प्रदेशभर से हजारों छात्र, अभ्यर्थी और भाजयुमो कार्यकर्ता रांची पहुंचकर सरकार को यह संदेश देंगे कि अब युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस भाजपा को नैतिकता का पाठ पढ़ाने से पहले अपने इतिहास पर नजर डाले। कांग्रेस के दस वर्षीय शासनकाल में AIPMT, AIEEE, AIIMS, CBSE सहित अनेक राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली आम बात बन चुकी थी। लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद हुआ, लेकिन कांग्रेस सरकार ने न पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ कोई कठोर कानून बनाया, न कोई ठोस कार्रवाई की और न ही कभी जवाबदेही तय की। कांग्रेस की चुप्पी ने ही पेपर लीक माफियाओं के हौसले बुलंद किए।

अशोक बड़ाईक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार देश में पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरू हुई। केंद्र सरकार ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू कर स्पष्ट संदेश दिया कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के लिए देश में कोई जगह नहीं है। अब ऐसे अपराधियों के खिलाफ कठोर कारावास और भारी आर्थिक दंड का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि NEET परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी मिलते ही केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई की, आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा, जांच एजेंसियों को सक्रिय किया और लाखों विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए पुनः परीक्षा कराकर समयबद्ध तरीके से परिणाम घोषित किया। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा है कि पेपर लीक करने वाले युवाओं के सपनों के अपराधी हैं और उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

अशोक बड़ाईक ने कहा कि कांग्रेस और झामुमो सरकार दूसरों पर उंगली उठाने से पहले झारखंड के युवाओं को जवाब दे कि JPSC में पारदर्शिता क्यों नहीं है? भर्ती प्रक्रिया पर लगातार सवाल क्यों उठ रहे हैं? और आखिर सरकार दोषियों को बचाने की कोशिश क्यों कर रही है?

उन्होंने कहा कि भाजपा झारखंड के युवाओं के न्याय की लड़ाई लड़ रही है और लड़ती रहेगी। जब तक JPSC से जुड़े प्रत्येक आरोप की निष्पक्ष जांच, पूरी पारदर्शिता और दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, भाजपा का संघर्ष सड़क से सदन तक पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा।

JPSC रोजगार देने वाला आयोग नहीं, बल्कि "रोजगार का व्यापार" करने वाला बना संस्थान : शशांक राज

भारतीय जनता युवा मोर्चा, झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष शशांक राज ने प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस आयोग पर राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी है, वही आज कथित भ्रष्टाचार, अपारदर्शिता एवं अनियमितताओं का केंद्र बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि JPSC रोजगार देने वाला आयोग नहीं, बल्कि "रोजगार का व्यापार" करने वाला संस्थान बन गया है।

श्री राज ने कहा कि हाल ही में जारी परीक्षा परिणामों में आयोग के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आयोग के तीन सदस्यों के हस्ताक्षर ही नहीं थे, तो परिणाम किस नियम और अधिकार के तहत जारी किया गया?

उन्होंने घोषणा किया कि भारतीय जनता युवा मोर्चा 20 जुलाई को JPSC के खिलाफ पुरे प्रदेश स्तर पर सोशल मीडिया कैंपेन चलाएगी, 21 जुलाई को पूरे झारखंड में मशाल जुलूस निकालकर युवाओं के आक्रोश को बुलंद करेगा तथा 22 जुलाई को "चलो JPSC घेरते हैं" अभियान के तहत जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से JPSC कार्यालय तक मार्च करते हुए घेराव करेगी। इस दौरान "JPSC सफाई अभियान" भी चलाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि कथित भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ है। भारतीय जनता युवा मोर्चा झारखंड के लाखों प्रतियोगी छात्रों के साथ मजबूती से खड़ा है और उनके अधिकारों की लड़ाई अंतिम सांस तक लड़ता रहेगा।

उन्होंने कहा कि पूर्व अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा के कार्यकाल में बिना सभी आवश्यक हस्ताक्षरों के कभी परिणाम जारी नहीं किए जाते थे। उन्होंने वर्ष 2011-13 JPSC प्रकरण का उल्लेख करते हुए आयोग की कार्यप्रणाली की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि सूचना का अधिकार (RTI) के तहत अभ्यर्थियों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का अवलोकन नहीं कराया जाता और न ही कॉपियां सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड की जाती हैं। आयोग परीक्षा का कट-ऑफ भी सार्वजनिक नहीं करता, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ जाती है।

उन्होंने कहा कि परिणाम देर रात लगभग 12 बजे जारी किए जाते हैं और आयोग वर्षों से नियमित परीक्षा कैलेंडर जारी करने में भी विफल रहा है। यह स्थिति युवाओं के साथ अन्याय है।

श्री राज ने कहा कि पड़ोसी राज्य बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष तक है, जबकि झारखंड के लाखों अभ्यर्थी कम आयु सीमा के कारण अवसरों से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से तत्काल आयु सीमा बढ़ाने की मांग की।

श्री राज ने कहा कि यदि JPSC को पारदर्शी, जवाबदेह और निष्पक्ष नहीं बनाया गया तो युवा अपना लोकतांत्रिक आंदोलन और तेज करेंगे।

प्रेस वार्ता के अंत में श्री राज ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा—

"छात्रों की हुंकार, अब नहीं सहेंगे रोजगार का व्यापार।"

प्रेस वार्ता में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष राहुल चौधरी, प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रिंस कुमार एवं प्रदेश प्रवक्ता बबन बैठा उपस्थित रहे।

झारखंड पुलिस को मिले 336 नए जवान, CM ने किया पारण परेड का निरीक्षण, महिला भागीदारी 25%

आप लोग बहुत लम्बे समय से आज के इस दिन का इंतजार कर रहे थे। आप सभी ने लगभग 30 हफ्तों तक बहुत ही कड़ा और लंबा प्रशिक्षण लिया है। मुझे जानकारी दी गई है कि यहाँ बड़े पैमाने पर अनुकंपा के आधार पर नियुक्त हुए राज्य के जवान और जेपीएससी (JPSC) के माध्यम से डीएसपी के पद पर नियुक्त हुए अधिकारी शामिल हैं।

इसमें सबसे अधिक खुशी देने वाली बात यह है कि इस बैच में लगभग 25% महिलाओं की भागीदारी है। इस महिला पुलिस बल को मेरी ओर से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। हम चाहते हैं कि राज्य के हर क्षेत्र में पुरुषों और महिलाओं की भागीदारी समान और बराबर हो, जो यहाँ दिख भी रहा है। राज्य के पुलिस विभाग और हमारे पुलिस जवानों की भूमिका तथा जिम्मेदारियों को लेकर मुझे बहुत अधिक व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आप सभी इसके महत्व को अच्छी तरह समझते हैं।

उक्त बातें मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने आज जैप 1 ग्राउंड, डोरंडा में आयोजित "बुनियादी प्रशिक्षुओं का पारण परेड समारोह-2026" को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने जैप 1 ग्राउंड परिसर स्थित शहीद स्मारक पर माल्यार्पण एवं पारण परेड-2026 का निरीक्षण किया। मौके पर मुख्यमंत्री ने सी०टी०सी०, स्वासपुर, मुसाबनी में प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षक एवं विभिन्न जिला/इकाई से नव नियुक्त आरक्षियों का बुनियादी प्रक्षिणोपरांत आयोजित अंतिम परीक्षा का प्रकाशित परीक्षाफल के विभिन्न विषयों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं के बीच पुरस्कार वितरण किया।

आप सिर्फ एक व्यक्ति मात्र या खुद के लिए नहीं रह गए हैं, बल्कि राज्य के आम नागरिकों की रक्षा के लिए समर्पित हैं

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि अभी थोड़ी देर पहले आप सभी ने झमाझम बारिश के बीच शपथ ली है। निश्चित रूप से हमारी इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में शपथ ग्रहण करना सिर्फ एक प्रक्रिया या माध्यम नहीं है, इसी प्रतिज्ञा और शपथ के बदौलत हम लोगों ने इस देश को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का रूप दिया है।

उन्होंने कहा कि यह शपथ सिर्फ वर्दी के लिए ही नहीं, बल्कि आम जनता की सेवा के लिए भी है। चूंकि आप सभी वर्दीधारी राज्य के प्रहरी हैं, इसलिए यह शपथ आपके लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। आज के बाद से आप एक व्यवस्था से बंध चुके हैं। अब सिर्फ एक व्यक्ति मात्र या खुद के लिए नहीं रह गए हैं, बल्कि राज्य के आम नागरिकों की रक्षा के लिए समर्पित हैं। इस दौरान हो सकता है कि आपके सामने बहुत बड़ी चुनौतियां आकर खड़ी हो जाएं, यहाँ तक कि आपकी जान पर भी बन आए, पूर्व में इसी कर्तव्य का निर्वहन करते हुए आपके परिजनों ने भी अपने प्राणों की आहुति दी है। आपके परिजनों के उसी अधूरे रास्ते और सफर को पूरा करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार ने अब आपके कंधों पर सौंपने का निर्णय लिया है। हम सिर्फ नौकरी या तनख्वाह के लिए पुलिस बल में शामिल नहीं होते हैं, बल्कि कुछ सर्वोच्च कर्तव्यों के संकल्प के साथ इस व्यवस्था से बंध जाते हैं।

प्रशिक्षण का परिणाम कानून एवं विधि-व्यवस्था के संधारण में दिखनी चाहिए

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आपको प्रशिक्षण के दौरान जिन अलग-अलग विषयों की ट्रेनिंग दी गई है, उसका परिणाम अब राज्य की कानून-व्यवस्था, विधि-व्यवस्था और राज्य के भीतर घटने वाली या संभावित घटनाओं को नियंत्रित करने में दिखना चाहिए। अगर आप सभी पूरी निष्ठा से प्रयास करेंगे, तो हमारे बीच आने वाली हर चुनौती को समाप्त करते हुए उसका समाधान किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि आज मौसम अनुकूल न होने की वजह से इस पारण परेड कार्यक्रम को हमें पुलिस परिसर (Premises) के भीतर ही संपन्न करना पड़ा। लेकिन आपका उत्साह कम न हो और आपके परिजन हतोत्साहित न हों, इसके लिए हमारी सरकार लगातार आपके साथ खड़ी रहने के लिए कृतसंकल्पित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि पुलिस विभाग के लिए अलग से आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त आवासीय विद्यालयों का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही, पुलिस विभाग के अंतर्गत अलग से विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं भी स्थापित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि निश्चित रूप से, एक-एक करके हम अपनी सारी मंजिलों तक पहुंचेंगे। इसमें आपका भी प्रयास होना चाहिए और हमारी सरकार का भी पूरा सहयोग रहेगा। मुख्यमंत्री ने सभी नव नियुक्त पुलिस उपाधीक्षकों एवं नव नियुक्त आरक्षियों को आज के इस बेहतरीन परेड प्रदर्शन के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं दी। साथ ही पुलिस विभाग को इस पूरी प्रशिक्षण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए बहुत-बहुत बधाई दी। उन्होंने जय हिंद, जय झारखंड, जोहार।" के साथ अपनी बातों का समापन किया।

प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके जवानों ने शानदार मार्चपास्ट और आकर्षक कदमताल के माध्यम से अपने कौशल का प्रदर्शन किया। वहीं नव नियुक्त जवानों को अनुशासन, देश व राज्य सेवा, संविधान, पुलिस बल की गरिमा, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के प्रति शपथ दिलाई गयी।

इस अवसर पर महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखंड श्रीमती तदाशा मिश्रा, अपर पुलिस महानिदेशक श्रीमती प्रिया दुबे सहित पुलिस विभाग के वरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

झारखंड स्वास्थ्य सेवा में बड़ा कदम: स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने 76 चिकित्सा पदाधिकारियों को सौंपे नियुक्ति पत्र

रांची | 24 मार्च 2026: विश्व यक्ष्मा (टीबी) दिवस के अवसर पर मंगलवार को नामकुम स्थित आईपीएच सभागार में एक भव्य नियुक्ति पत्र वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संविदा पर चयनित 76 चिकित्सा पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।

1250 डॉक्टरों की जल्द होगी बहाली, स्वास्थ्य ढांचे में सुधार

समारोह को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने घोषणा की कि डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए जल्द ही JPSC के माध्यम से 1250 नियमित डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी। डॉ. अंसारी ने कहा, "चिकित्सकों का योगदान समाज में अमूल्य है। पिछले एक वर्ष में 8 नए मेडिकल कॉलेज और राज्य की पहली मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।"

आधुनिक तकनीक और सुविधाओं पर जोर

मंत्री ने बताया कि राज्य के प्रमुख अस्पतालों को सीटी स्कैन, एमआरआई और एआई (AI) जैसी रोबोटिक तकनीकों से लैस किया जा रहा है ताकि मरीजों को दूसरे राज्यों में रेफर न करना पड़े। इसके अलावा:

ब्लड सप्लाई सिस्टम: जरूरतमंदों के लिए टोल फ्री नंबर आधारित नई व्यवस्था शुरू की जा रही है।

गंभीर बीमारियाँ: सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया की पहचान के लिए राज्यव्यापी जांच अभियान चलेगा।

मिशन 2030: टीबी मुक्त झारखंड का लक्ष्य

अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने जानकारी दी कि सरकार ने इस वर्ष 12 लाख लोगों की टीबी जांच का लक्ष्य रखा है। पिछले वर्ष के 9.5 लाख के आंकड़े को पार करने के लिए संसाधनों में वृद्धि की गई है। अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि आगामी 100 दिनों में पंचायत स्तर तक टीबी स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान को तेज किया जाएगा। साथ ही, टीबी मरीजों की प्रोत्साहन राशि का लंबित भुगतान भी जल्द निपटाया जाएगा।

जागरूकता वाहनों को दिखाई हरी झंडी

कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों में टीबी उन्मूलन का संदेश फैलाने वाले विशेष जागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने नवनियुक्त डॉक्टरों से आह्वान किया कि वे न केवल मरीजों का इलाज करें, बल्कि अस्पतालों की व्यवस्थागत कमियों की रिपोर्ट भी सरकार को दें ताकि जमीनी स्तर पर सुधार हो सके।

कार्यक्रम में मुख्य उपस्थिति

समारोह में अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, अभियान निदेशक (NHM) शशि प्रकाश झा, निदेशक प्रमुख (स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. सिद्धार्थ सान्याल सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।