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सुरेश मिश्र को मिला प्रतिष्ठित महाकवि बाण पुरस्कार
लखनऊ। देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था 'महाकवि  वाण प्रतिष्ठान' द्वारा पं. छैलबिहारी 'वाण' की स्मृति में दिया जाने वाला 'महाकवि वाण पुरस्कार' मुंबई के प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेश मिश्र को उनकी नवीनतम कृति 'डमरू शतक' के लिए राजाजीपुरम स्थित देशभारती इंटर कॉलेज लखनऊ के 'वाण सभागार' में लखनऊ की प्रथम नागरिक व महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल के हाथों से प्रदान किया गया। डमरू शतक हिंदी साहित्य इतिहास की डमरू छंद संग्रह की प्रथम पुस्तक है। इसके तहत स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र व इक्यावन हजार रुपए नकद दिया गया। इसी अवसर पर महापौर सुषमा खर्कवाल, प्रतिष्ठान के प्रमुख ओजरस के शिखर वेदव्रत वाजपेई, हरदोई की मल्हेरा के राजा कुंवर वीरेंद्र सिंह,नबाव खानदान के नबाव सैयद असद रिजवी, कर्नल दयाशंकर दूबे, भाजपा नेता शिवप्रकाश मिश्र सेनानी, उद्योगपति मुरलीधर आहूजा ने सुरेश मिश्र की दो पुस्तकों ,'डमरू शतक' और 'दोहे श्रृंगार के' का विमोचन किया। देशभारती इंटर कॉलेज के संस्थापक पंडित वेदव्रत वाजपेई के जन्म दिवस को गुरु पर्व के रूप में मनाया गया।
इस अवसर पर संयोजक मनुव्रत वाजपेई के संचालन में एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें हास्य कवि सुरेश मिश्र, वेदव्रत वाजपेई, श्रीमती व्यंजना शुक्ला, सोनी शुक्ला क्रांति व आलोक तिवारी ने काव्य पाठ किया। प्राचार्य जयव्रत वाजपेई ने आगंतुक अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर रेड जैसी अनेक फिल्मों में अभिनय कर चुकीं श्रीमती साधना वाजपेई, आचार्य राजा अवस्थी, वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी द्वय एस के द्विवेदी, सी पी तिवारी, मूलचंद वाजपेई, राजेश अवस्थी, राकेश दीक्षित, राष्ट्रीय कृषक दल के प्रमुख सरोज दीक्षित,प्रकाशक प्रशांत श्रीवास्तव, पार्षद रेखा सिंह,अजय दीक्षित, के. के. शुक्ल, अरविंद मिश्र,राजू पंडित,प्रतिमा मिश्रा, अजय शुक्ला, मो. नईम, राजेन्द्र कात्यायन, वाहिद अली वाहिद,रेखा मिश्रा, सुशीला परिहार, संतोष सिंह जैसे गणमान्य सहित हजारों साहित्य रसिक, विधायक, पत्रकार,शिक्षक, विद्यार्थी तथा उनके पालक उपस्थित थे।
अलीगंज अग्निकांड: ए, विभागीयलडीए कोर्ट का पेशकार निलंबित जांच शुरू

-  फाइल में गलत तथ्य दर्ज करने का आरोप, अवैध निर्माण पर समय रहते कार्रवाई न होने की आशंका

-  18 अधिकारियों के नाम पहले ही शासन को भेजे जा चुके हैं, जिनकी हो रही है जांच

लखनऊ। अलीगंज अग्निकांड मामले में जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अपने विहित न्यायालय में तैनात पेशकार विमलेश कुमार गौतम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर अवैध निर्माण से जुड़े प्रकरण की फाइल में गलत तथ्य प्रस्तुत करने का आरोप है, जिसके कारण समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।
एलडीए के अनुसार, विमलेश कुमार गौतम वर्तमान में जोन-7 के विहित न्यायालय में तैनात हैं, जबकि संबंधित मामला उनके जोन-5 में कार्यरत रहने के दौरान का है। प्रारंभिक जांच में अभिलेखीय प्रक्रिया के पालन और दायित्वों के निर्वहन में अनियमितताएं सामने आने के बाद उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई।
निलंबन अवधि के दौरान उन्हें एलडीए मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। साथ ही पूरे प्रकरण की विस्तृत विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, अग्निकांड से जुड़े न्यायालयी अभिलेखों और फाइलों की समीक्षा के दौरान कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के निर्देश पर जांच कराई गई। जांच में प्रथम दृष्टया पेशकार की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर निलंबन का निर्णय लिया गया।
गौरतलब है कि अलीगंज अग्निकांड प्रकरण में कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इससे पहले 18 अधिकारियों के नाम भी शासन को भेजे जा चुके हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है। एलडीए का कहना है कि मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
15 साल बाद यूपी के नगर निगमों में बढ़ सकता है हाउस टैक्स, लखनऊ समेत सभी शहरों में दरों के संशोधन की तैयारी
-  नगर निकायों की आय बढ़ाने की कवायद तेज, वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड ने दिए संकेत; अंतिम फैसला अभी बाकी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के नगर निगम क्षेत्रों में करीब 15 वर्ष बाद हाउस टैक्स की दरों में संशोधन की तैयारी शुरू हो गई है। प्रस्तावित बदलाव के दायरे में लखनऊ सहित प्रदेश के सभी नगर निगम शामिल हो सकते हैं। इसका उद्देश्य नगर निकायों की आय बढ़ाना और उनकी वित्तीय स्थिति को अधिक मजबूत बनाना बताया जा रहा है।
राजधानी लखनऊ में वर्ष 2010 के बाद से हाउस टैक्स की दरों में कोई संशोधन नहीं हुआ है। बीच में 2016 और 2023 में दरें बढ़ाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन पार्षदों और जनप्रतिनिधियों के विरोध के चलते प्रस्ताव लागू नहीं हो सका।
सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश नगर पालिका वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड ने नगर निकायों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए हाउस टैक्स की दरों में संशोधन की आवश्यकता जताई है। बोर्ड का मानना है कि बढ़ती शहरी आबादी और नागरिक सुविधाओं पर बढ़ते खर्च को देखते हुए राजस्व के स्रोतों को मजबूत करना आवश्यक है।
हालांकि, हाउस टैक्स में कितनी वृद्धि होगी, किस श्रेणी की संपत्तियों पर इसका प्रभाव पड़ेगा और नई दरें कब से लागू होंगी, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा।
अयोध्या में संघ, विहिप और संत समाज की बड़ी बैठक 23 जुलाई को, 300 संतों के जुटने की संभावना
-  महंत नृत्य गोपाल दास के आश्रम में बैठक प्रस्तावित, हिंदू समाज को संदेश देने और हालिया घटनाक्रम पर हो सकती है चर्चा

लखनऊ/अयोध्या। अयोध्या में 23 जुलाई को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और संत समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। यह बैठक महंत नृत्य गोपाल दास के आश्रम में आयोजित किए जाने की तैयारी है, जिसमें देशभर से करीब 300 साधु-संतों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक का उद्देश्य हिंदू समाज के बीच विश्वास का संदेश देना और हाल के घटनाक्रमों पर संत समाज के साथ विचार-विमर्श करना है। बैठक में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और संगठनात्मक विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
बताया जा रहा है कि हाल के घटनाक्रमों और एसआईटी रिपोर्ट में उठे कुछ सवालों पर भी मंथन हो सकता है। साथ ही अब तक हुई कार्रवाई और आगे की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किए जाने की संभावना है।
हालांकि, बैठक के एजेंडे को लेकर संबंधित संगठनों की ओर से अभी कोई आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया गया है। प्रस्तावित बैठक को लेकर अयोध्या में राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
मंडी व्यवस्था बनेगी और पारदर्शी व आधुनिक, किसानों को मिलेगा उपज का बेहतर मूल्य: दिनेश प्रताप सिंह

-  सितंबर तक एग्रीमॉल के उद्घाटन के निर्देश, ‘मंडी हाट पैड’ योजना को तेजी से लागू करने पर जोर

लखनऊ। प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने मंडी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और किसान हितैषी बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए मंडियों में आधुनिक सुविधाओं के साथ डिजिटल व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

गुरुवार को राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने विभागीय योजनाओं और विकास कार्यों की प्रगति का आकलन करते हुए अधिकारियों को सभी परियोजनाएं समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरी करने के निर्देश दिए।

- मंडियों में बढ़ेंगी आधुनिक सुविधाएं
दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश की मंडियों को किसानों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनाया जाए। उन्होंने मंडियों में स्वच्छता, पेयजल, विद्युत, सड़क, सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों के विपणन को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ई-नाम (e-NAM) सहित अन्य डिजिटल सेवाओं का व्यापक उपयोग सुनिश्चित किया जाए, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।

- सितंबर तक शुरू होगा एग्रीमॉल
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को आधुनिक विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किए जा रहे एग्रीमॉल का उद्घाटन सितंबर 2026 तक हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। साथ ही निर्माणाधीन परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

-  'मंडी हाट पैड' योजना को मिलेगी गति
बैठक में मंत्री ने 'मंडी हाट पैड' योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक स्थलों का शीघ्र विकास कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि इस योजना से किसानों को अपने गांव या निकटवर्ती क्षेत्र में ही उपज बेचने की सुविधा मिलेगी, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों की बचत होगी तथा उनकी आय में वृद्धि होगी।

-  प्रचार-प्रसार पर भी जोर
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मंडी परिषद की योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि पात्र किसान सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठा सकें। बैठक में मंडी निदेशक इंद्र विक्रम सिंह सहित मंडी परिषद के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
ऊर्जा क्षेत्र में यूपी ने रचा नया इतिहास, 9 वर्षों में बिजली व्यवस्था बनी अधिक मजबूत और आधुनिक

-  60,858 सर्किट किमी पारेषण लाइन, 765 नए उपकेंद्र और 99.30% बिजली उपलब्धता; 59 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए गए

लखनऊ। उत्तर प्रदेश ने पिछले नौ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक बदलाव दर्ज करते हुए विद्युत उत्पादन, पारेषण, वितरण और उपभोक्ता सेवाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। आधुनिक तकनीक, मजबूत विद्युत अवसंरचना और पारदर्शी व्यवस्था के दम पर प्रदेश की बिजली प्रणाली अब पहले से अधिक सुदृढ़ और विश्वसनीय बन गई है।

ऊर्जा विभाग के अनुसार, प्रदेश में 60,858 सर्किट किलोमीटर नई पारेषण लाइनें बिछाई गई हैं तथा 765 नए विद्युत उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता 2,05,632 एमवीए है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश में 99.30 प्रतिशत बिजली उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

-  पारेषण क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि
पिछले नौ वर्षों में 765 केवी के 7, 400 केवी के 45, 220 केवी के 173 और 132 केवी के 490 उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा 2 लाख ट्रांसमिशन टावर, 2,100 ट्रांसफॉर्मर लगाए गए तथा पारेषण हानियों में 3.2 प्रतिशत की कमी लाई गई है। विभाग ने 31,486 मेगावाट की पीक बिजली मांग की सफल आपूर्ति भी सुनिश्चित की है।

-  हर घर तक पहुंची बिजली
प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) के तहत सभी चिन्हित घरों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया है। वहीं आरडीएसएस (RDSS) योजना के अंतर्गत 2.51 लाख से अधिक नए घरों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है।

निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 60 नए 33/11 केवी उपकेंद्र स्थापित किए गए, 1,109 उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई गई, जबकि वर्ष 2024-25 में 28 नए उपकेंद्रों का निर्माण और 576 उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि का कार्य पूरा किया गया।

-  किसानों को मिली ऊर्जा सुरक्षा
कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के तहत वर्ष 2025 तक 2.42 लाख निजी नलकूपों का विद्युतीकरण किया गया। वहीं पीएम-कुसुम योजना के तहत 96,128 से अधिक किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे सिंचाई में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ा है।

-  डिजिटल सेवाओं का विस्तार
उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए 59.17 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा ऑनलाइन नए बिजली कनेक्शन, ऑनलाइन बिल भुगतान, शिकायत पंजीकरण और त्वरित समाधान जैसी डिजिटल सेवाओं का व्यापक विस्तार किया गया है।

-  ग्रीन एनर्जी पर सरकार का फोकस
प्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन विकसित करने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश को भी बढ़ावा दे रही है।
ऊर्जा विभाग के अनुसार, आधुनिक तकनीक, मजबूत विद्युत अवसंरचना और स्वच्छ ऊर्जा के समन्वय से उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में हुए ये सुधार औद्योगिक विकास, कृषि प्रगति, रोजगार सृजन और आम नागरिकों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव का आधार बन रहे हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में यूपी ने रचा नया इतिहास, 9 वर्षों में बिजली व्यवस्था बनी अधिक मजबूत और आधुनिक
l -  60,858 सर्किट किमी पारेषण लाइन, 765 नए उपकेंद्र और 99.30% बिजली उपलब्धता; 59 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए गएलखनऊ। उत्तर प्रदेश ने पिछले नौ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक बदलाव दर्ज करते हुए विद्युत उत्पादन, पारेषण, वितरण और उपभोक्ता सेवाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। आधुनिक तकनीक, मजबूत विद्युत अवसंरचना और पारदर्शी व्यवस्था के दम पर प्रदेश की बिजली प्रणाली अब पहले से अधिक सुदृढ़ और विश्वसनीय बन गई है।ऊर्जा विभाग के अनुसार, प्रदेश में 60,858 सर्किट किलोमीटर नई पारेषण लाइनें बिछाई गई हैं तथा 765 नए विद्युत उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता 2,05,632 एमवीए है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश में 99.30 प्रतिशत बिजली उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।-  पारेषण क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि
पिछले नौ वर्षों में 765 केवी के 7, 400 केवी के 45, 220 केवी के 173 और 132 केवी के 490 उपकेंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा 2 लाख ट्रांसमिशन टावर, 2,100 ट्रांसफॉर्मर लगाए गए तथा पारेषण हानियों में 3.2 प्रतिशत की कमी लाई गई है। विभाग ने 31,486 मेगावाट की पीक बिजली मांग की सफल आपूर्ति भी सुनिश्चित की है।-  हर घर तक पहुंची बिजली
प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) के तहत सभी चिन्हित घरों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया है। वहीं आरडीएसएस (RDSS) योजना के अंतर्गत 2.51 लाख से अधिक नए घरों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है।निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 60 नए 33/11 केवी उपकेंद्र स्थापित किए गए, 1,109 उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई गई, जबकि वर्ष 2024-25 में 28 नए उपकेंद्रों का निर्माण और 576 उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि का कार्य पूरा किया गया।-  किसानों को मिली ऊर्जा सुरक्षा
कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के तहत वर्ष 2025 तक 2.42 लाख निजी नलकूपों का विद्युतीकरण किया गया। वहीं पीएम-कुसुम योजना के तहत 96,128 से अधिक किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे सिंचाई में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ा है।-  डिजिटल सेवाओं का विस्तार
उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए 59.17 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इसके अलावा ऑनलाइन नए बिजली कनेक्शन, ऑनलाइन बिल भुगतान, शिकायत पंजीकरण और त्वरित समाधान जैसी डिजिटल सेवाओं का व्यापक विस्तार किया गया है।-  ग्रीन एनर्जी पर सरकार का फोकस
प्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन विकसित करने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश को भी बढ़ावा दे रही है।
ऊर्जा विभाग के अनुसार, आधुनिक तकनीक, मजबूत विद्युत अवसंरचना और स्वच्छ ऊर्जा के समन्वय से उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में हुए ये सुधार औद्योगिक विकास, कृषि प्रगति, रोजगार सृजन और आम नागरिकों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव का आधार बन रहे हैं।
आईएसआईएस सहयोगी राकिब अंसारी को पांच साल की जेल
लखनऊ एनआईए कोर्ट का फैसला

लखनऊ। लखनऊ स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) का सहयोग करने के आरोपित राकिब इमाम अंसारी को पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत का यह फैसला उस समय आया, जब सुनवाई के दौरान अंसारी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार कर लिया।

एनआईए के विशेष न्यायाधीश उमाकांत जिंदल ने यह सजा सुनायी है। अभियोजन पक्ष ने बताया कि इस मामले में एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) अलीगढ़ के दारोगा मोहम्मद अकरम ने तीन नवंबर 2023 को गोमतीनगर के एटीएस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद जांच शुरु हुई ताे पता चला कि एक रिपोर्ट मुंबई के काला चौकी थाने में दर्ज हुई थी।

विवेचना के दौरान आरोपित शाहनवाज और रिजवान अली के बारे में सूचना इकट्ठी करते समय जानकारी मिली कि ये दोनों आरोपित आईएसआईएस के सक्रिय सदस्य हैं और दोनों के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संगठन स्टूडेंट ऑफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों से संबंध हैं। जानकारी यह भी मिली कि रिजवान यूनिवर्सिटी का छात्र नहीं था, लेकिन यूनिवर्सिटी के संगठन से जुड़कर आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार और प्रसार कर रहा है। एटीएस ने पाया कि राकिब इमाम अंसारी भी अन्य आरोपितों के संपर्क में था। साथ ही शाहनवाज और रिजवान अली के संपर्क में रहकर प्रतिबंधित आतंकी संगठन की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर था।

अभियोजन ने 17 गवाह पेश किए। इन गवाहों ने अदालत में बताया कि सभी आराेपित प्रतिबंधित आतंकी संगठन के लिए नए-नए लोगों को जोड़ने, जिहादी गतिविधियों को प्रेरित करने व भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़कर भारत में सरिया कानून स्थापित करने की साजिश रच रहे थे। इसमें दोषी राकिब इमाम अंसारी भी सक्रिय भूमिका निभा रहा था। मुकदमे के विचारण के दौरान दोषी राकिब इमाम अंसारी ने न्यायालय के समक्ष अर्जी देकर अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।
यूपी के 8 ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण पर ₹14.81 करोड़ खर्च होंगे, सरकार ने जारी की धनराशि

-  झांसी, ललितपुर, फिरोजाबाद, शामली और लखनऊ के स्मारकों का होगा वृहद अनुरक्षण, बोले जयवीर सिंह- विरासत का संरक्षण हमारी प्राथमिकता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य संरक्षित 8 स्मारकों के वृहद अनुरक्षण के लिए 14 करोड़ 81 लाख 81 हजार 200 रुपये की धनराशि जारी कर दी है। यह राशि कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल के माध्यम से जैन विद्या शोध संस्थान, लखनऊ के खाते में जमा करा दी गई है। इन निधियों से झांसी, ललितपुर, फिरोजाबाद, शामली और लखनऊ स्थित स्मारकों का संरक्षण एवं जीर्णोद्धार कराया जाएगा।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि प्राचीन स्मारक हमारी सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत के जीवंत प्रतीक हैं। उनका संरक्षण न केवल हमारी जिम्मेदारी है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

-  इन स्मारकों का होगा जीर्णोद्धार
जारी धनराशि के तहत झांसी की डिमरौनी गढ़ी के लिए 3.46 करोड़ रुपये, ठाकुरपुरा गढ़ी के लिए 4.89 करोड़ रुपये, ललितपुर की मर्दन सिंह की बैठक के लिए 1.42 करोड़ रुपये, लक्षमणगढ़ मंदिर (पिपराई) के लिए 55.40 लाख रुपये तथा रणक्षोण मंदिर (धोजारी) के लिए 28.55 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
इसके अलावा फिरोजाबाद के चंद्रवाड़ किला के संरक्षण के लिए 1.60 करोड़ रुपये, शामली के प्राचीन गुंबद के लिए 1.70 करोड़ रुपये तथा लखनऊ के बड़ा शिवाला के जीर्णोद्धार के लिए 88.88 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई है।

-  पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
जयवीर सिंह ने कहा कि ये स्मारक अपनी विशिष्ट स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व के कारण प्रदेश की अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरे प्रदेश में ऐतिहासिक स्मारकों, किलों, धार्मिक स्थलों और विरासत भवनों के संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उद्देश्य यह है कि प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए उसे आमजन और आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित एवं आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
मासूम बच्ची का अपहरण कर बेचने जा रहे पांच आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ। चौक थाना पुलिस ने 18 माह की बच्ची के अपहरण का 48 घंटे के भीतर पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस प्रभारी निरीक्षक नागेश उपाध्याय के अनुसार, आरोपित बच्ची को बेचने की फिराक में थे। गिरोह के दो अन्य सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। डीसीपी पश्चिमी जोन के निर्देशन में गठित टीम ने सीसीटीवी फुटेज, सर्विलांस और मुखबिर की सूचना के आधार पर बुधवार सुबह गुलजार नगर क्षेत्र से पांचों आरोपितों को दबोच लिया। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह बच्चों की खरीद-फरोख्त के उद्देश्य से मासूम बच्चों की तलाश करता था।
पुलिस के मुताबिक, 13 जुलाई की रात चौक क्षेत्र स्थित नेशनल मेडिकल कॉलेज के पास सो रहे दंपती के बीच से 18 माह की बच्ची का अपहरण किया गया था। आरोपित बच्ची को बाइक से गुलजार नगर ले गए और उसकी फोटो व वीडियो गिरोह के सरगना को भेजी। बच्ची उम्र में अपेक्षाकृत बड़ी होने के कारण पसंद नहीं आई, जिसके बाद उसे मछली मंडी के पास बने पुल पर छोड़ दिया गया और आरोपी दूसरे बच्चे की तलाश में निकल पड़े।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान ऋषभ कश्यप, रोहित पासी उर्फ जादू, मोहम्मद सुल्तान, मोहम्मद इरशाद शाह और श्याम जी यादव के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से अपहृत बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया है। साथ ही चार मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। पुलिस अधिकारी वरिष्ठ उपनिरीक्षक अखिलेश मिश्र ने बताया कि गिरोह के सरगना शेर सिंह और सहयोगी महेश फरार हैं। दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। आरोपितों के आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है।