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राम मंदिर वित्तीय अनियमितताओं की फोरेंसिक जांच हो: मुख्यमंत्री को अजय राय का पत्र

* कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने चढ़ावे, दान, भूमि खरीद और निर्माण कार्यों की स्वतंत्र बहु-एजेंसी जांच की मांग उठाई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय ने मुख्यमंत्री **योगी आदित्यनाथ** को पत्र लिखकर अयोध्या स्थित **श्री राम जन्मभूमि मंदिर** में कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए इससे जुड़े सभी आर्थिक लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह होने चाहिए।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में अजय राय ने कहा कि मंदिर में चढ़ावे की नकदी, श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई बहुमूल्य वस्तुओं, भूमि खरीद, निर्माण कार्यों और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े मामलों में सामने आए आरोपों की केवल सामान्य आपराधिक जांच पर्याप्त नहीं है। उन्होंने पूरे प्रकरण की बहु-एजेंसी फोरेंसिक जांच कराए जाने की मांग की है।
उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतरिम जांच के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है और कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी भी हुई है। साथ ही उन्होंने कहा कि जांच के दौरान पुराने सीसीटीवी रिकॉर्ड उपलब्ध न होना और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सीमित मिलने जैसे तथ्य भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
अजय राय ने वर्ष 2021 में मंदिर और आसपास के विकास कार्यों के लिए भूमि खरीद में कथित अनियमितताओं तथा निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी के आरोपों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों की भी समग्र जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि भूमि क्रय-विक्रय, निर्माण कार्यों, निविदाओं, अनुबंधों और भुगतान प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
उन्होंने मांग की कि मंदिर की स्थापना से अब तक प्राप्त नकद चढ़ावे, डिजिटल दान, स्वर्ण-रजत एवं अन्य बहुमूल्य दान का स्वतंत्र ऑडिट और भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही बैंक खातों, लेखा पुस्तकों, ऑडिट रिपोर्टों, स्टॉक रजिस्टरों और डिजिटल अभिलेखों की फोरेंसिक जांच भी कराई जाए। यदि जांच में धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) या अन्य वित्तीय अपराधों के संकेत मिलते हैं तो संबंधित एजेंसियां विधि के अनुसार कार्रवाई करें।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि यदि कथित अनियमितताएं लंबे समय तक चलती रहीं तो आंतरिक नियंत्रण, लेखा परीक्षण और प्रशासनिक निगरानी क्यों विफल रही तथा जिम्मेदार अधिकारियों ने सरकार को समय रहते इसकी जानकारी क्यों नहीं दी।
पत्र के अंत में अजय राय ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, सार्वजनिक धन की पवित्रता और शासन की विश्वसनीयता का विषय है। उन्होंने मांग की कि जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र, समयबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से कराई जाए तथा उसकी प्रगति और निष्कर्ष यथासंभव सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर किसी व्यक्ति को संरक्षण दिए जाने की आशंका उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।
हज-2026: बकाया हवाई किराया 13 जुलाई तक जमा करना अनिवार्य, हज कमेटी ने जारी किए निर्देश


-  शेष राशि जमा न करने वाले यात्रियों से तत्काल भुगतान करने की अपील, एसबीआई या यूनियन बैंक में जमा होगी धनराशि

लखनऊ। हज-2026 के यात्रियों के लिए हज कमेटी ऑफ इंडिया ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। उत्तर प्रदेश हज कमेटी के सचिव एवं कार्यपालक अधिकारी मोहम्मद तारिक ने बताया कि जिन हज यात्रियों ने अब तक संशोधित हवाई किराये की शेष राशि जमा नहीं की है, उन्हें हर हाल में 13 जुलाई, 2026 तक भुगतान करना होगा।
उन्होंने बताया कि हज कमेटी ऑफ इंडिया के सर्कुलर-42 (3 जुलाई, 2026) के अनुसार, मध्य पूर्व में उत्पन्न असाधारण परिस्थितियों के कारण अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार ने हवाई किराये में संशोधन किया था। इसके तहत प्रत्येक हज यात्री को 10,000 रुपये की अतिरिक्त राशि जमा करने के निर्देश दिए गए थे, जिसकी अंतिम तिथि पहले 15 मई, 2026 निर्धारित की गई थी।
अब हज-2026 की वापसी उड़ानें पूरी हो चुकी हैं, लेकिन अभी भी कई यात्रियों ने हवाई किराये की शेष राशि जमा नहीं कराई है। ऐसे सभी यात्रियों को निर्देशित किया गया है कि वे 13 जुलाई, 2026 तक निर्धारित पे-इन-स्लिप के माध्यम से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया या यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की किसी भी शाखा में हज कमेटी ऑफ इंडिया के बैंक खाते में बकाया राशि जमा कर दें।
भुगतान करते समय यात्रियों को अपना बैंक रेफरेंस नंबर अवश्य अंकित करना होगा। बैंक रेफरेंस नंबर हज कमेटी ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। हज कमेटी ने सभी संबंधित यात्रियों से समय सीमा के भीतर बकाया राशि जमा कर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने की अपील की है।
आम महोत्सव में बच्चों ने दिखाया उत्साह, आम खाने की प्रतियोगिता बनी आकर्षण का केंद्र - 27 बच्चों ने लिया हिस्सा, समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री

-  27 बच्चों ने लिया हिस्सा, समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक करेंगे विजेताओं को सम्मानित

लखनऊ। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमतीनगर में आयोजित उत्तर प्रदेश आम महोत्सव-2026 के दूसरे दिन शनिवार को बच्चों के लिए आयोजित आम खाने की प्रतियोगिता आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। योगी सरकार की पहल पर आयोजित इस प्रतियोगिता में 8 से 12 वर्ष आयु वर्ग के 27 बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।
प्रतियोगिता के दौरान प्रत्येक प्रतिभागी को दो-दो किलोग्राम आम दिए गए। निर्धारित समय में सबसे अधिक आम खाने वाले बच्चों को विजेता चुना गया। प्रतियोगिता के दौरान बच्चों का उत्साह और दर्शकों का जोश पूरे आयोजन में देखने लायक रहा।
प्रतियोगिता के विजेताओं को आम महोत्सव के समापन समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
आम महोत्सव के अंतिम दिन 5 जुलाई की शुरुआत खाद्य प्रसंस्करण विषय पर एक तकनीकी सत्र से होगी। इसमें विशेषज्ञ आम के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और आधुनिक तकनीकों पर जानकारी देंगे।
शाम 4 बजे आयोजित होने वाले समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि होंगे। उनके साथ उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह भी मौजूद रहेंगे। समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित कर पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
जन भवन में ‘मैंगो बायर-सेलर मीट’ सम्पन्न, आम उत्पादकों और निर्यातकों के बीच हुए एमओयू

**राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और मंत्री दिनेश प्रताप सिंह रहे मौजूद; यूपी के आम को वैश्विक बाजार दिलाने पर जोर**

**लखनऊ।** योगी सरकार की पहल पर आयोजित तीन दिवसीय **‘उत्तर प्रदेश आम महोत्सव-2026’** के दूसरे दिन शनिवार को जन भवन में **‘मैंगो बायर-सेलर मीट’** का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल **आनंदीबेन पटेल**, उपमुख्यमंत्री **केशव प्रसाद मौर्य** तथा उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) **दिनेश प्रताप सिंह** की उपस्थिति में आम उत्पादकों और निर्यातकों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के प्रगतिशील आम उत्पादकों और बागवानों को देश-विदेश के खरीदारों से सीधे जोड़ना था, ताकि प्रदेश के विश्वप्रसिद्ध आमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार और बेहतर मूल्य मिल सके।
उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि पहली बार जन भवन परिसर में आम महोत्सव आयोजित किया गया है। उन्होंने राज्यपाल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जन भवन का आंगन किसानों के लिए खोलना उनके सम्मान और मनोबल को बढ़ाने वाला ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री **नरेंद्र मोदी** के नेतृत्व और मुख्यमंत्री **योगी आदित्यनाथ** के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि देश के कुल आम उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग **26 प्रतिशत** है। उन्होंने उद्योग जगत से प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित करने की अपील करते हुए कहा कि योगी सरकार इस क्षेत्र में **50 प्रतिशत तक सब्सिडी** उपलब्ध करा रही है। उन्होंने ‘काशी ब्रांड शहद’ का उदाहरण देते हुए कहा कि ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन से किसानों को वैश्विक बाजार मिलेगा और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
मंत्री ने कहा कि **जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा** शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश से कृषि उत्पादों का निर्यात और अधिक आसान होगा। इससे प्रदेश के आम सीधे रूस सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सकेंगे और किसानों को बेहतर कीमत मिल सकेगी।
उन्होंने बताया कि प्रदेश की कुल कृषि भूमि में उद्यान फसलों का क्षेत्रफल केवल **9 प्रतिशत** है, लेकिन कृषि उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी **42 प्रतिशत** और कुल मूल्य में **52 प्रतिशत** है। उद्यान विभाग आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों, जैसे शिमला मिर्च और स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है।
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच), एपीडा, प्रगतिशील किसानों, एफपीओ प्रतिनिधियों और खाद्य प्रसंस्करण विशेषज्ञों ने किसानों को आम की सुरक्षित तुड़ाई, पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, निर्यात मानकों, ब्रांडिंग, प्राकृतिक खेती और कृषि स्टार्टअप की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी।
योगी सरकार का बड़ा फैसला: शासकीय भूमि से जुड़े मामलों की सुनवाई अब तीन सदस्यीय विशेष पीठ करेगी

सीएम योगी के निर्देश पर नई व्यवस्था तत्काल लागू, लखनऊ और प्रयागराज में गठित विशेष बेंच; हर बुधवार होगी नियमित सुनवाई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राजस्व न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद ने शासकीय एवं सार्वजनिक महत्व की भूमि से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय विशेष पीठ (थ्री मेंबर बेंच) गठित करने का फैसला किया है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

नई व्यवस्था के तहत आरक्षित श्रेणी की भूमि, शासकीय भूमि, ग्राम सभा, नजूल, निष्क्रांत संपत्ति तथा शत्रु संपत्ति (यदि कोई हो) से जुड़े सभी लंबित और नए वाद अब केवल तीन सदस्यीय विशेष पीठ के समक्ष ही सुने जाएंगे। इन मामलों की सुनवाई अब एकल पीठ या सर्किट कोर्ट में नहीं होगी।

राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप सरकारी एवं सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने, भूमि विवादों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने और राजस्व न्याय प्रणाली को अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-9 के तहत यह व्यवस्था लागू की गई है।

-  हर बुधवार होगी विशेष पीठ की सुनवाई
राजस्व परिषद ने लखनऊ और प्रयागराज स्थित न्यायालयों में अलग-अलग तीन सदस्यीय विशेष पीठों का गठन किया है। ये विशेष पीठ प्रत्येक बुधवार को नियमित रूप से संबंधित मामलों की सुनवाई करेंगी। परिषद ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस श्रेणी के सभी लंबित एवं नए वादों को चिह्नित कर विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कराया जाए, ताकि मामलों का त्वरित और व्यवस्थित निस्तारण सुनिश्चित हो सके।

-  पारदर्शिता और एकरूपता को मिलेगा बढ़ावा
नई व्यवस्था के तहत सामूहिक निर्णय प्रणाली अपनाए जाने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी। साथ ही समान प्रकृति के मामलों में एकरूप निर्णय आने से भविष्य में कानूनी विवाद और असमंजस की स्थिति भी कम होगी।

-  राजस्व सुधारों की कड़ी में एक और कदम
योगी सरकार पहले ही डिजिटल भू-अभिलेख, ऑनलाइन नामांतरण, आधुनिक तकनीक से भूमि पैमाइश, पारदर्शी राजस्व सेवाओं और सरकारी भूमि की सुरक्षा जैसे कई सुधार लागू कर चुकी है। तीन सदस्यीय विशेष पीठ का गठन इन्हीं सुधारों की श्रृंखला का नया और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे प्रदेश की राजस्व न्याय व्यवस्था को और अधिक प्रभावी तथा आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का लखनऊ में भव्य स्वागत, मुख्यमंत्री योगी ने एयरपोर्ट पर किया अभिनंदन
-  पहली बार उत्तर प्रदेश आगमन पर पुष्पगुच्छ व भगवा अंगवस्त्र से किया सम्मान, मंत्रियों और संगठन पदाधिकारियों से कराया परिचय

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद नितिन नबीन के पहली बार लखनऊ आगमन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एयरपोर्ट पहुंचकर उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने पुष्पगुच्छ भेंट कर और भगवा अंगवस्त्र पहनाकर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष का प्रदेश सरकार के मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों से परिचय भी कराया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर स्वागत संदेश साझा करते हुए लिखा कि "प्रभु श्रीराम एवं लीलाधारी भगवान श्रीकृष्ण के चरणरज से पावन हुई संस्कृति, संस्कार और सृजन की साधना स्थली उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन जी का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन।"
एयरपोर्ट पर स्वागत के दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, केंद्रीय राज्यमंत्री कमलेश पासवान, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश खन्ना, सूर्य प्रताप शाही, स्वतंत्र देव सिंह, भूपेंद्र चौधरी, ए.के. शर्मा, धर्मपाल सिंह, नंद गोपाल गुप्ता 'नन्दी', संजय निषाद, दारा सिंह चौहान, जेपीएस राठौर, राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा, संजय सेठ, ब्रजलाल, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित अनेक मंत्री, जनप्रतिनिधि और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रथम उत्तर प्रदेश आगमन को लेकर कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। एयरपोर्ट पर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लखनऊ पहुंचे, योगी ने किया स्वागत
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन दो दिवसीय उत्तर प्रदेश दौरे पर शनिवार को लखनऊ पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप्र भाजपा अध्यक्ष व केन्द्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी समेत भाजपा के अन्य नेताओं ने उनका अमौसी हवाई अड्डे पर स्वागत किया। उनके स्वागत काे लेकर राजधानी लखनऊ को भव्य तरीके से सजाया गया है।

योगी आदित्यनाथ सरकार के सभी मंत्रियों, भाजपा के प्रदेश पदाधिकारियों ने होर्डिंग लगाकर नितिन नवीन का स्वागत कर रहे हैं। कृष्णा नगर मोड़ से यूपी बीजेपी ऑफिस तक होगा भव्य रोड शो शुरू हो गया है। आज भाजपा अध्यक्ष उप्र भाजपा की नवगठित टीम का मार्गदर्शन करेंगे।

नितिन नवीन मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री, भाजपा सांसद एवं विधायकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। इसके अलावा, राष्ट्रीय अध्यक्ष की उपस्थिति में उप्र की कोर कमेटी की बैठक भी होगी। आगामी 2027 के विधान सभा चुनाव को लेकर विस्तार से चर्चा कर रणनीति बनेगी। इसके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन कई प्रमुख हस्तियों से भी मुलाकात करेंगे।
काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट पर पीएसी जवान की कार्बाइन से चली गोली, तीन दुकानदार घायल
ड्यूटी के दौरान हाथ से फिसलकर गिरी लोडेड कार्बाइन, पत्थर से टकराकर उड़े छर्रे और गिट्टियां, घायलों का प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी

लखनऊ/वाराणसी  । उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर-4बी के पास शनिवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। ड्यूटी पर तैनात पीएसी के एक जवान की लोडेड कार्बाइन हाथ से फिसलकर जमीन पर गिर गई। कार्बाइन गिरते ही उससे अचानक फायर हो गया। गोली सीधे किसी व्यक्ति को नहीं लगी, लेकिन सड़क और पत्थर से टकराने के बाद उसके छर्रे व गिट्टियां आसपास मौजूद लोगों पर जा गिरीं, जिससे तीन लोग घायल हो गए। घटना के बाद मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना शनिवार सुबह करीब सात बजे की है। उस समय मंदिर के गेट नंबर-4बी के बाहर श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो चुकी थी और फूल-माला की दुकानें भी खुली थीं। इसी दौरान पीएसी जवान की कार्बाइन हाथ से फिसलकर जमीन पर गिर गई और उससे अचानक गोली चल गई। गोली सड़क पर लगी, जिससे पत्थर और गिट्टियां उछलकर आसपास खड़े लोगों को लगीं।

इस हादसे में फूल-माला की दुकान लगाने वाले निक्की गुप्ता, रामबाबू और विकास यादव घायल हो गए। तीनों को मामूली चोटें आईं। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा घायलों को तत्काल मंडलीय चिकित्सालय, कबीरचौरा भेजा गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद तीनों की हालत सामान्य बताते हुए उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी।

गोली चलने की आवाज सुनते ही मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत स्थिति को नियंत्रित कर लिया, जिससे किसी प्रकार की भगदड़ नहीं मची और हालात जल्द सामान्य हो गए।

घटना की सूचना पर वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद एहतियात के तौर पर गेट नंबर-4बी और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया।

पुलिस ने घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए हैं और संबंधित पीएसी जवान से पूछताछ भी की जा रही है। प्रारंभिक जांच में मामला आकस्मिक फायरिंग का प्रतीत हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि गोली किन परिस्थितियों में चली और क्या सुरक्षा मानकों के पालन में किसी प्रकार की लापरवाही हुई है।

पुलिस के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल घटना के बाद मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य है और श्रद्धालुओं का दर्शन-पूजन सुचारु रूप से जारी है।
राजस्व परिषद की बड़ी पहल: अब प्रमाणित स्कैन कॉपी से होगी न्यायिक कार्यवाही, मूल अभिलेख रहेंगे सुरक्षित
-  डिजिटल व्यवस्था से न्यायिक प्रक्रिया होगी तेज, पारदर्शी और समयबद्ध; विशेष परिस्थितियों में ही तलब होंगे मूल अभिलेख


लखनऊ। उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, दक्ष और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब राजस्व परिषद के न्यायालयों में विचाराधीन मामलों में सामान्यतः मूल अभिलेखों के स्थान पर अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा उपलब्ध कराई गई प्रमाणित पूर्ण स्कैन प्रति (Certified Complete Scanned Copy) के आधार पर ही न्यायिक कार्यवाही की जाएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य मूल अभिलेखों का सुरक्षित संरक्षण सुनिश्चित करने के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है।
राजस्व परिषद की अध्यक्ष श्रीमती अर्चना अग्रवाल के निर्देश पर यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। नई प्रणाली लागू होने से मूल अभिलेखों को बार-बार एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे उनके क्षतिग्रस्त होने, गुम होने अथवा समय पर उपलब्ध न हो पाने जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत अधीनस्थ न्यायालयों को वाद से संबंधित प्रत्येक दस्तावेज, परिशिष्ट, मानचित्र, नोटशीट, आदेश पत्रक तथा अन्य सभी संलग्न अभिलेखों की क्रमवार एवं स्पष्ट स्कैन प्रति उपलब्ध करानी होगी। प्रत्येक स्कैन प्रति के साथ संबंधित राजस्व रिकॉर्ड कीपर (RRK) द्वारा विधिवत प्रमाणित प्रमाण-पत्र संलग्न करना भी अनिवार्य होगा।
राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया है कि केवल विशेष परिस्थितियों में, जब न्यायालय लिखित कारण दर्ज करते हुए मूल अभिलेख प्रस्तुत करने का निर्देश देगा, तभी मूल पत्रावली मंगाई जाएगी। अन्य सभी मामलों में प्रमाणित स्कैन प्रतियों के आधार पर ही सुनवाई और अन्य न्यायिक कार्यवाही संपन्न होगी।
व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी स्तर पर अपूर्ण, अस्पष्ट या अप्रमाणित स्कैन प्रति भेजी जाती है तो संबंधित राजस्व रिकॉर्ड कीपर (RRK) को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार मानते हुए उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व परिषद ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नई व्यवस्था से तत्काल अवगत कराते हुए इसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। साथ ही, न्यायालयों द्वारा मांगी गई प्रमाणित स्कैन प्रतियां निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
राजस्व परिषद का मानना है कि यह पहल डिजिटल अभिलेख प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने, मूल अभिलेखों के दीर्घकालिक संरक्षण तथा न्यायिक कार्यप्रणाली को आधुनिक तकनीक के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। भविष्य में CCMS पोर्टल के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन संचालित करने की भी तैयारी की जा रही है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया और अधिक सरल, पारदर्शी तथा प्रभावी बन सकेगी।
राजस्व परिषद की बड़ी पहल: अब प्रमाणित स्कैन कॉपी से होगी न्यायिक कार्यवाही, मूल अभिलेख रहेंगे सुरक्षित
-  डिजिटल व्यवस्था से न्यायिक प्रक्रिया होगी तेज, पारदर्शी और समयबद्ध; विशेष परिस्थितियों में ही तलब होंगे मूल अभिलेख


लखनऊ। उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, दक्ष और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब राजस्व परिषद के न्यायालयों में विचाराधीन मामलों में सामान्यतः मूल अभिलेखों के स्थान पर अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा उपलब्ध कराई गई प्रमाणित पूर्ण स्कैन प्रति (Certified Complete Scanned Copy) के आधार पर ही न्यायिक कार्यवाही की जाएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य मूल अभिलेखों का सुरक्षित संरक्षण सुनिश्चित करने के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है।
राजस्व परिषद की अध्यक्ष श्रीमती अर्चना अग्रवाल के निर्देश पर यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। नई प्रणाली लागू होने से मूल अभिलेखों को बार-बार एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे उनके क्षतिग्रस्त होने, गुम होने अथवा समय पर उपलब्ध न हो पाने जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत अधीनस्थ न्यायालयों को वाद से संबंधित प्रत्येक दस्तावेज, परिशिष्ट, मानचित्र, नोटशीट, आदेश पत्रक तथा अन्य सभी संलग्न अभिलेखों की क्रमवार एवं स्पष्ट स्कैन प्रति उपलब्ध करानी होगी। प्रत्येक स्कैन प्रति के साथ संबंधित राजस्व रिकॉर्ड कीपर (RRK) द्वारा विधिवत प्रमाणित प्रमाण-पत्र संलग्न करना भी अनिवार्य होगा।
राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया है कि केवल विशेष परिस्थितियों में, जब न्यायालय लिखित कारण दर्ज करते हुए मूल अभिलेख प्रस्तुत करने का निर्देश देगा, तभी मूल पत्रावली मंगाई जाएगी। अन्य सभी मामलों में प्रमाणित स्कैन प्रतियों के आधार पर ही सुनवाई और अन्य न्यायिक कार्यवाही संपन्न होगी।
व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी स्तर पर अपूर्ण, अस्पष्ट या अप्रमाणित स्कैन प्रति भेजी जाती है तो संबंधित राजस्व रिकॉर्ड कीपर (RRK) को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार मानते हुए उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व परिषद ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नई व्यवस्था से तत्काल अवगत कराते हुए इसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। साथ ही, न्यायालयों द्वारा मांगी गई प्रमाणित स्कैन प्रतियां निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
राजस्व परिषद का मानना है कि यह पहल डिजिटल अभिलेख प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने, मूल अभिलेखों के दीर्घकालिक संरक्षण तथा न्यायिक कार्यप्रणाली को आधुनिक तकनीक के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। भविष्य में CCMS पोर्टल के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन संचालित करने की भी तैयारी की जा रही है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया और अधिक सरल, पारदर्शी तथा प्रभावी बन सकेगी।