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जलसा शोहदा-ए-इस्लाम 1448 हिजरी के आठवें इजलास में औलाद-ए-नबी और अज़वाज-ए-मुतहरात पर रोशनी

सुल्तानपुर, 24 जून 2026। जामिया इस्लामिया सुल्तानपुर में जारी "जलसा शोहदा-ए-इस्लाम 1448 हिजरी" के आठवें इजलास का आयोजन हज़रत मौलाना मोहम्मद उस्मान क़ासमी साहब, नाज़िम जामिया इस्लामिया सुल्तानपुर की सदारत में नमाज़-ए-ईशा के बाद किया गया। कार्यक्रम का आग़ाज़ मोहम्मद फहद (मुतअल्लिम जामिया इस्लामिया) की तिलावत-ए-कुरआन से हुआ, जबकि नात व मनक़बत के अशआर मोहम्मद अजमल (दर्जा अरबी सोम), मोहम्मद अनस ढीमा (दर्जा अरबी अव्वल) और बाद-अज़ाँ मौलाना तारिक़ हाशिम नदवी ने पेश किए।

इजलास के ख़ुसूसी मुकर्रिर मौलाना मोहम्मद कौसर नदवी साहब ने "औलाद-उन-नबी व अज़वाज-उन-नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम" के उन्वान पर ख़िताब करते हुए कहा कि आम तौर पर यह समझा जाता है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की केवल एक ही साहबज़ादी थीं, जबकि हक़ीक़त यह है कि आपकी चार साहबज़ादियाँ—हज़रत ज़ैनब, हज़रत रुकय्या, हज़रत उम्मे कुलसूम और हज़रत फ़ातिमा ज़हरा रज़ियल्लाहु अन्हुन्ना—थीं। इसी तरह आपके तीन साहबज़ादे हज़रत क़ासिम, हज़रत अब्दुल्लाह (तय्यब व ताहिर) और हज़रत इब्राहीम रज़ियल्लाहु अन्हुम थे। उन्होंने इन तमाम औलाद-ए-मुबारका की उम्र, सीरत और ख़ुसूसियात पर इजमाली रोशनी डाली।

अपने बयान के दूसरे हिस्से में मौलाना ने अज़वाज-ए-मुतह्हरात का तज़किरा करते हुए बताया कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कुल 11 अज़वाज थीं, जिन्हें उम्महात-उल-मोमिनीन कहा जाता है। उन्होंने तमाम अज़वाज-ए-मुतह्हरात की सीरत, फ़ज़ाइल और उम्मत के लिए उनकी ख़िदमात का मुख़्तसर मगर जामेअ तआरुफ़ पेश किया।

मौलाना कौसर नदवी ने उन एतराज़ात का भी जवाब दिया जो नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के निकाहों के संबंध में उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के निकाहात दीनी, शरई, समाजी और सियासी मसालिह के तहत हुए, जिनका मक़सद उम्मत की रहनुमाई और इस्लामी समाज की तामीर था।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मुसलमानों के लिए यह ज़रूरी है कि वे औलाद-ए-नबी और अज़वाज-ए-मुतह्हरात के बारे में सही मालूमात हासिल करें, क्योंकि ये सभी अहल-ए-बैत का अहम हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि अहल-ए-बैत का तसव्वुर केवल हज़रत फ़ातिमा ज़हरा रज़ियल्लाहु अन्हा तक महदूद नहीं है, बल्कि इसमें औलाद-ए-नबी और अज़वाज-ए-मुतह्हरात भी शामिल हैं।

इजलास का इख़्तिताम मौलाना मोहम्मद कौसर नदवी साहब की दुआ पर हुआ। अंत में हज़रत नाज़िम साहब ने तमाम मेहमानों का शुक्रिया अदा करते हुए लोगों से अपील की कि वे जलसे के बाक़ी बचे दोनों इजलासों में अपने दोस्तों और अहबाब के साथ शिरकत करें।

इस इल्मी व रूहानी इजलास के पैग़ाम को अवाम तक पहुँचाने के लिए जदीद मीडिया और इंटरनेट का प्रभावी उपयोग किया गया, जिससे कार्यक्रम की जानकारी दूर-दराज़ क्षेत्रों तक भी पहुँची।
नगर पालिका परिषद सुलतानपुर द्वारा शासन से धनावंटन कराकर सड़क व नाली निर्माण कार्य का पालिकाध्यक्ष प्रवीन कुमार अग्रवाल ने भूमि पूजन कर शुभारम्भ क

सुल्तानपुर ।आदर्श नगर वार्ड स्थित पल्टू का पुरवा तिराहे से एम0एस0बी0 स्कूल को जाने वाला मार्ग, जो कि गत कई वर्षों से अत्यन्त जर्जर अवस्था में था, नगर पालिका परिषद सुलतानपुर द्वारा शासन से धनावंटन कराकर सड़क व नाली निर्माण कार्य का पालिकाध्यक्ष प्रवीन कुमार अग्रवाल ने भूमि पूजन कर शुभारम्भ किया।

इस अवसर पर पालिकाध्यक्ष ने बताया कि काफी समय से स्थानीय सभासद व लोगों द्वारा इस जर्जर सड़क के पुनर्निर्माण व नाली इत्यादि सुविधाओं की मॉग की जा रही थी, जिसकी पहल कर पालिका द्वारा प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था, पं0 दीन दयाल उपाध्याय नगर विकास योजना के तहत लगभग 45.00 लाख की लागत से इस 317मी0 लम्बी सी0सी0सड़क व नाली के कार्य का शुभारम्भ किया गया है। नगर पालिका द्वारा इसी प्रकार से आगे भी विभिन्न मार्गों नाला-नालियों का निर्माण सहित चौराहों के सौन्दर्यीकरण आदि नगर क्षेत्र के विकास कार्य कराये जाने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है, हम ‘‘स्वच्छ सुन्दर सुलतानपुर’’ बनाते हुए समग्र विकास का कार्य कर रहे हैं, जिसके लिए पालिका पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध होने के साथ ही विकास के पथ पर अग्रसर है। पालिकाध्यक्ष ने इस अवसर पर स्थानीय लोगों से अपील किया कि पर्यावरण एवं आने वाले समय को देखते हुए पूरे मोहल्ले में उचित स्थान देखकर अधिक से अधिक वृक्ष लगायें तथा अपने आस-पास स्वच्छता का विशेष ध्यान दें। भूमि पूजन कार्यक्रम का संयोजन स्थानीय सभासद विजय कुमार जायसवाल ने किया। इस अवसर पर सभासद मंगरू प्रसाद प्रजापति एवं स्थानीय गायत्री विजय मिश्रा, श्रीराम शुक्ला, जमुना प्रसाद तिवारी, हृदय नारायण रावत, दिलीप गुप्ता, नरेंन्द्र श्रीवास्तव, बाल चंद सोनी, मनोज मौर्या, परमानंद सिंह, छंगा, त्रिवेणी प्रसाद, रौनक त्रिपाठी, हजारी सोनी, राम टहल सहित भारी संख्या में स्थानीय जनमानस व गणमान्य बन्धु उपस्थित रहे।
समरस फाउंडेशन ने किया पूर्व अधीक्षक रामचंद्र पांडे का सम्मान
सुल्तानपुर। मुंबई की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था समरस फाउंडेशन द्वारा आज बृहन्मुंबई महानगरपालिका शिक्षण विभाग के पूर्व अधीक्षक रामचंद्र पांडे का सुल्तानपुर जनपद के बेदूपारा गांव स्थित उनके घर पर सम्मान किया गया। संस्था के महासचिव तथा वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे और संस्था के सचिव एडवोकेट भारत पांडे ने संस्था की तरफ से उनका सम्मान किया तथा संस्था के चेयरमैन डॉ किशोर सिंह की तरफ से शुभकामनाएं दी। 2010 में सेवानिवृत होने के बाद श्री पांडे लगातार शैक्षणिक तथा सामाजिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।  गांव में भी उन्होंने सुंदर घर बनाने के साथ साथ आसपास आम के बगीचे लगा रखे हैं, जिनमें तैयार फलों का भी आज आनंद लिया गया। रामचंद्र पांडे ने कहा कि सेवानिवृत होने के बाद गांव में रहने का आनंद ही कुछ और है। यहां शुद्ध जल ,शुद्ध हवा और शुद्ध भोजन मिलने से शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा प्राप्त होती है।
जामिया इस्लामिया सुल्तानपुर में 'जलसा,शुहदा-ए-इस्लाम' की सातवीं नशिस्त सम्पन्न,
"सहाबा-ए-कराम नबी और उम्मत के दरमियान एक मज़बूत वास्ता हैं,दीन की हिफ़ाज़त के लिए उनकी अज़मत को समझना ज़रूरी है"-मुफ्ती मुहम्मद सालेह सहारनपुरी।

सुल्तानपुर, जामिया इस्लामिया सुल्तानपुर में जारी दस रोज़ा 'जलसा शुहदा-ए-इस्लाम' की सातवीं नशिस्त इल्मी, रूहानी और फ़िक्री माहौल में सम्पन्न हुई। कार्यक्रम की सदारत जामिया के नाज़िम-ए-आला मौलाना मुहम्मद उस्मान क़ासमी ने की, जबकि देश के विभिन्न हिस्सों से आए उलमा-ए-कराम ने शिरकत की।
नशिस्त के मेहमान-ए-ख़ुसूसी एवं जामिया मज़ाहिर उलूम सहारनपुर के अमीन-ए-आम मुफ्ती मुहम्मद सालेह सहारनपुरी ने अपने ख़िताब में सहाबा-ए-कराम की अज़मत और उम्मत के साथ उनके गहरे ताल्लुक़ पर तफ़्सीली रौशनी डाली। उन्होंने कहा कि सहाबा-ए-कराम नबी-ए-अकरम ﷺ और उम्मत के दरमियान वह मज़बूत कड़ी हैं जिनके ज़रिये क़ुरआन, सुन्नत और दीन की तमाम तालीमात हम तक पहुँची हैं। उन्होंने कहा कि सहाबा की अदालत और अमानत पर शक करना दरअसल दीन की बुनियादों पर सवाल उठाने के बराबर है।
मुशाजरात-ए-सहाबा के मौज़ू पर वज़ाहत करते हुए उन्होंने कहा कि सहाबा-ए-कराम के दरमियान जो इख़्तिलाफ़ात हुए, वे किसी नफ़्सानी ख़्वाहिश का नतीजा नहीं थे बल्कि इज्तिहादी मसाइल में राय के फ़र्क़ की बुनियाद पर थे। उन्होंने हज़रत तल्हा (रज़ि.) की मिसाल पेश करते हुए कहा कि जिन हस्तियों को दुनिया में ही जन्नत की बशारत दी गई हो, उनके बारे में बदगुमानी की कोई गुंजाइश नहीं रहती। उन्होंने कहा कि जंगे सिफ़्फ़ीन के सिलसिले में अहले सुन्नत का मौक़िफ़ यही है कि हज़रत अली (रज़ि.) का इज्तिहाद ज़्यादा दुरुस्त था, लेकिन हज़रत मुआविया (रज़ि.) को गुनहगार नहीं कहा जा सकता।
इसी नशिस्त को ख़िताब करते हुए मुफ्ती अब्दुर रशीद ने कहा कि सहाबा-ए-कराम हिदायत के चमकते सितारे और रोशनी के मीनारे हैं। वे इल्म, अमल, तज़किया और इख़्लास की बुलंद मिसाल थे तथा उनकी फ़ज़ीलत और मक़बूलियत की गवाही स्वयं अल्लाह तआला ने क़ुरआन में दी है।
कार्यक्रम का आग़ाज़ जामिया के उस्ताज़-ए-हिफ्ज़ मौलाना इफ़हामुल्लाह की तिलावत-ए-क़ुरआन से हुआ। इसके बाद दर्जा अरबी चहारुम के छात्र मुहम्मद अहनफ़ तथा क़ारी मुहम्मद नदीम फ़ैज़ी ने नात व मनक़बत पेश कर महफ़िल को रूहानी रंग में रंग दिया। वहीं दर्जा फ़ारसी के छात्र मुहम्मद यासिर इलाहाबादी ने मदह-ए-सहाबा के विषय पर प्रभावशाली तक़रीर प्रस्तुत की।
नशिस्त का समापन दुआ के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने इस प्रकार के इल्मी और इस्लाही कार्यक्रमों को समाज में दीन की सही समझ और उम्मत की राहनुमाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
डीएम व एसपी द्वारा संयुक्त रूप से कोचिंग सेंटर का किया गया औचक निरीक्षण

जिलाधिकारी ने सभी कोचिंग संस्थानों को सुरक्षा मानकों के दृष्टिगत समस्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के दिये निर्देश


सुलतानपुर।शासन द्वारा दिये गये निर्देश के क्रम में जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह व पुलिस अधीक्षक चारू निगम द्वारा संयुक्त रूप से कोहिनूर इण्डिया कोचिंग सेंटर, निकट मेहमान होटल, सिविल लाइन सुलतानपुर का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान अध्ययनरत छात्र/छात्राओं हेतु उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं जैस- बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, विद्युत, अग्निशमन उपकरण, प्रवेश व निकास हेतु पर्याप्त जगह का होना, रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र, विद्युत व अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र आदि के सम्बन्ध में जायजा लिया गया।
  
जिलाधिकारी द्वारा निरीक्षण के दौरान मानक के अनुरूप अपनाई जाने वाली सभी सावधानियों का अवलोकन किया गया। उन्होंने कोचिंग सेन्टर का रजिस्ट्रीकरण प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। संचालक द्वारा प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया गया, जिसकी वैधता जून, 2027 तक विधिमान्य है। इसी प्रकार उन्होंने  अग्निशमन यंत्र का मौके पर डिमॉन्सट्रेशन भी कराया गया, जो सही पाया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संस्थान प्रबन्धक को निर्देशित किया कि विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाय तथा शासन द्वारा निर्धारित सभी मानको का अनुपालन सुनिश्चित किया जाय।
  
जिलाधिकारी ने जनपद के सभी 196 कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण किये जाने हेतु अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। उन्होंने निर्देशित किया कि तीन दिन का अभियान चलाकर सभी सुरक्षा मानकों जैसे- अग्निशमन यंत्र, एनओसी, वाल पैनलिंग, आपातकालीन द्वार, विद्युत ओवरलोड आदि पैरामीटर्स पर सभी अपनी-अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें तथा जिन कोचिंग संस्थानों में मानक के अनुरूप व्यवस्थाएं नहीं पायी जाती हैं, उन्हें नोटिस दिया जाय, जिससे सुरक्षा मानको का प्रबन्ध कराया जा सके।           
          
पुलिस अधीक्षक द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत आपाकालीन निकास द्वार, सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता, अग्निशमन उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता तथा एनओसी आदि के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की गयी। उन्होंने सीएफओ से अग्निशमन एनओसी आदि उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कोचिंग संचालक को निर्देशित किया कि सभी सुरक्षा मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाय।
सुलतानपुर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की होगी व्यापक जांच, मानक पूरे न करने वालों पर होगी कार्रवाई
सुलतानपुर, 23 जून। राजस्थान के कोटा और  लखनऊ एव अन्य स्थानों पर कोचिंग संस्थानों में हुई दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए सुलतानपुर प्रशासन ने जिले के सभी कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच शुरू कर दी है। इसी क्रम में मंगलवार को जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त रूप से सिविल लाइन स्थित मेहमान होटल के निकट संचालित कोहिनूर इंडिया कोचिंग सेंटर का निरीक्षण किया तथा वहां मौजूद सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में लगभग 196 कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। इन सभी संस्थानों में अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) मानकों, भवन की संरचना, आपातकालीन निकास व्यवस्था तथा अन्य सुरक्षा उपायों की गहन जांच कराई जा रही है। इसके लिए प्रशासन द्वारा तीन अलग-अलग जांच टीमें गठित की गई हैं, जो स्थलीय निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी कोचिंग संस्थान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि विद्युत विभाग को भी निर्देशित किया गया है कि जिन कोचिंग संस्थानों में एयर कंडीशनर (एसी) एवं अन्य विद्युत उपकरण संचालित हो रहे हैं, वहां विद्युत कनेक्शन की स्वीकृत क्षमता (लोड) की जांच की जाए। यदि कहीं आवश्यकता से अधिक विद्युत भार का उपयोग किया जा रहा है तो उसे चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि कई भवन स्वामी एवं संचालक भवनों के अंदर सजावट के नाम पर लकड़ी अथवा अन्य ज्वलनशील सामग्री की पैनलिंग करा लेते हैं, जो आग लगने की स्थिति में बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। ऐसे स्थानों पर आग तेजी से फैलती है और बचाव कार्य में भी कठिनाइयां आती हैं। इसलिए इन बिंदुओं की भी विशेष रूप से जांच की जाएगी।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिन कोचिंग संस्थानों में कोई कमी पाई जाएगी, उन्हें निर्धारित समयावधि में कमियों को दूर करने का अवसर दिया जाएगा। इसके बावजूद यदि संचालक सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशासन की इस पहल को विद्यार्थियों और अभिभावकों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जिले भर में चल रहे निरीक्षण अभियान से कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों के अनुपालन को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और भविष्य में किसी भी संभावित दुर्घटना की आशंका को कम किया जा सकेगा !!
जलसा शोहदा-ए-इस्लाम की छठी नशिस्त संपन्न, सहाबा-ए-किराम की सीरत पर डाली गई रोशनी
सुल्तानपुर,जामिया इस्लामिया सुल्तानपुर में जारी दस दिवसीय ‘जलसा शोहदा-ए-इस्लाम’ की छठी नशिस्त (बैठक) अकीदत और रूहानियत के माहौल में कामयाबी के साथ सम्पन्न हुई। जलसे में उलमा-ए-किराम ने सहाबा-ए-किराम की फज़ीलत, मुहर्रम की अहमियत और इस्लामी अक़ीदों की इस्लाह पर विस्तृत प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता मौलाना मोहम्मद क़सीम क़ासमी ने अपने खिताब में कहा कि “नबी-ए-करीम हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तमाम सहाबा रुश्द व हिदायत के आसमान के दरख़्शंदा सितारे हैं और रिसालत के गुलसितां के महकते हुए फूल हैं।” उन्होंने कहा कि मदह-ए-सहाबा और दिफ़ा-ए-सहाबा हर मुसलमान की जिम्मेदारी है तथा सहाबा-ए-किराम की मुहब्बत ईमान का अहम हिस्सा है।
अपने बयान में उन्होंने विशेष रूप से हज़रत ज़ैद बिन हारिसा की ज़िन्दगी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार हज़रत ज़ैद (रज़ि.) ने नबी-ए-करीम की ख़िदमत को दुनिया की हर चीज़ पर तरजीह दी और वफ़ादारी व मोहब्बत की मिसाल कायम की।
इस अवसर पर मौलाना मुतह्हर-उस-सलाम क़ासमी ने अपने संबोधन में कहा कि शोहदा-ए-इस्लाम के ये जलसे उम्मत के अक़ीदे की इस्लाह और दीन की सही समझ पैदा करने का माध्यम हैं। उन्होंने माहे मुहर्रम की फ़ज़ीलत और उसकी अज़मत पर भी प्रकाश डाला तथा कहा कि इस मुबारक महीने का उल्लेख क़ुरआन मजीद में विशेष महत्व के साथ किया गया है।
कार्यक्रम का आगाज़ मोहम्मद सादान द्वारा क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुआ। इसके बाद दर्जा-ए-हिफ़्ज़ के छात्र मोहम्मद ज़ैद ने मनक़बत पेश कर श्रोताओं को प्रभावित किया। वहीं दर्जा-ए-फ़ारसी के छात्र मोहम्मद इज़आन ने हज़रत मुआविया की सीरत पर प्रभावशाली तक़रीर प्रस्तुत की।
जलसे में सुल्तानपुर शहर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की।
कार्यक्रम का समापन मौलाना मोहम्मद क़सीम क़ासमी की दुआ के साथ हुआ। जलसे की सदारत कर रहे जामिया इस्लामिया के नाज़िम मौलाना मोहम्मद उस्मान क़ासमी ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए आगामी चारों इजलासों में भी अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील।
पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के हितार्थ कल्याणकारी योजनाएं पूर्णतया निःशुल्क ऑनलाइन संचालित*
सुल्तानपुर,सहायक श्रम आयुक्त मधुबन राम ने बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि श्रम विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा उ०प्र० भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के हितार्थ कल्याणकारी योजनाएं जैसे- मातृत्व, शिशु एवं बालिका मद्द योजना, संत रविदास शिक्षा प्रोत्साहन योजना, अटल आवासीय विद्यालय योजना, कन्या विवाह सहायता योजना, महात्मा गाँधी पेंशन योजना, गम्भीर बीमारी सहायता योजना, मृत्यु एवं दिव्यांगता सहायता योजना पूर्णतया निःशुल्क ऑनलाइन संचालित है। योजना का हितलाभ प्राप्त करने के लिए बोर्ड की वेबसाइट www.upbocw.in पर स्वयं अथवा निकटतम जन-सुविधा केन्द्रों के माध्यम से आवेदन कर सकते है, किन्तु आवेदन करते समय योजना में दी गयी व्यवस्थानुसार वांक्षित अभिलेख अपलोड करना अनिवार्य। तात्कालिक समस्याओं के समाधान के लिए कार्यालय सहायक श्रम आयुक्त गनपत सहाय पी०जी० कालेज के सामने पयागीपुर सुलतानपुर में हेल्प डेस्क की व्यवस्था। किसी भी कार्य दिवस में कार्यालय में उपस्थित होकर अथवा मोबाइल नम्बर 9140687628/8090531532 पर सम्पर्क कर अपनी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं।
22 तारीख़ से बंद हो होगा माँ कामाख्या के दरबार पुनः 26 को खोला जाएगा


तीर्थ राज धोपाप, उत्तर प्रदेश के अवध प्रांत के सुल्तानपुर जनपद में आदि-गंगा गोमती नदी के तट पर स्थित एक प्रमुख धार्मिक तीर्थस्थल है, इसे "धोपाप धाम" के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि यह वही स्थान है जहां पर भगवान श्री राम ने लंकेश्वर रावण का वध करने के पश्चात महर्षि वशिष्ठ के आदेशानुसार स्नान करके स्वयं को "ब्रह्महत्या"के पाप से मुक्त किया था। लोगों का मानना है कि जो भी व्यक्ति गंगा दशहरे के अवसर पर यहां स्नान करता है, उसके सभी पाप आदिगंगा गोमती नदी में धुल जाते हैं।

आदिमकाल में यहां भरों का राज था राजा गरहा भर और राजा हेल भर जैसे नाम इतिहास के पन्नों में आज भी दर्ज है। यहां एक विशाल मंदिर भी स्थित है। गंगा दशहरा के अवसर पर यहाँ सुलतानपुर ,उत्तर प्रदेश के ही नहीं बल्कि भारत के अन्य प्रांतों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और आदिगंगा गोमती में डुबकी लगाने के पश्चात पूजन-अर्चन करते हैं।

सम्पूर्ण अवध में "धोपाप" के महत्व को कुछ इस तरह से समझाया गया है:--

ग्रहणे काशी, मकरे प्रयाग। चैत्र नवमी अयोध्या, दशहरा धोपाप।।

अर्थात् अगर वर्ष भर में ग्रहण का स्नान काशी में, मकर संक्रान्ति स्नान प्रयाग में, चैत्र मास नवमी तिथि का स्नान अयोध्या में और ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशहरा तिथि का स्नान "धोपाप" में कर लिया जाय तो अन्य किसी जगह जाने की आवश्यकता ही नहीं है। बस इतने मात्र से ही मनुष्य को सीधे बैकुण्ठ की प्राप्ति होती है...!!

यह पावन स्थली की स्थापना भगवान रामचंद्र ने किया था जिसका पुनर्निर्माण दीप नगर के राजा ने किया था मान्यता के अनुसार राजा को भवानी सपना आई और भवानी ने आदेश दिया की मंदिर तीन पीठ की स्थापना हो राजा ने स्वपन को मानते हुए भूतल सौभाग्य गणपति, श्री राम दरबार, शिव परिवार , माँ कामाख्या, द्वितीय तल पर त्रिपुरा सुंदरी व ऊपरी तल पर बरही देवी की स्थापना की इस मंदिर को उल्लेख पद्म पुराण ( पंकज पुराण ) व रामायण एवं  रामचरितमानस में मिलता है। यहाँ कामाख्या माँ तीन दिवस मासिक धर्म में जाति है इस दौरान माँ के कपट पूजन-अर्चन उपरांत बंद कर दिया जाता है फिर चार दिन बाद खोला जाता है

अम्बुवाची पर्व

विश्व के सभी तांत्रिकों, मांत्रिकों एवं सिद्ध-पुरुषों के लिये वर्ष में एक बार पड़ने वाला अम्बूवाची योग पर्व वस्तुत एक वरदान है। यह अम्बूवाची पर्व भगवती (सती) का रजस्वला पर्व होता है। पौराणिक शास्त्रों के अनुसार सतयुग में यह पर्व 16 वर्ष में एक बार, द्वापर में 12 वर्ष में एक बार, त्रेता युग में 7 वर्ष में एक बार तथा कलिकाल में प्रत्येक वर्ष जून माह (आषाढ़) में तिथि के अनुसार मनाया जाता है। यह एक प्रचलित धारणा है कि देवी कामाख्या मासिक धर्म चक्र के माध्यम से तीन दिनों के लिए गुजरती है, इन तीन दिनों के दौरान, कामाख्या मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इस बार अम्बूवाची योग पर्व जून की 22, 23, 24, 25, 26 तिथियों में मनाया गया।

पौराणिक सन्दर्भ

पौराणिक सत्य है कि अम्बूवाची पर्व के दौरान माँ भगवती रजस्वला होती हैं और मां भगवती की गर्भ गृह स्थित महामुद्रा (योनि-तीर्थ) से निरंतर तीन दिनों तक जल-प्रवाह के स्थान से रक्त प्रवाहित होता है। यह अपने आप में, इस कलिकाल में एक अद्भुत आश्चर्य का विलक्षण नजारा है। कामाख्या तंत्र के अनुसार -

योनि मात्र शरीराय कुंजवासिनि कामदा।
रजोस्वला महातेजा कामाक्षी ध्येताम सदा॥
शरणागतदिनार्त परित्राण परायणे ।
सर्वस्याति हरे देवि नारायणि नमोस्तु ते ।।
इस बारे में `राजराजेश्वरी कामाख्या रहस्य' एवं `दस महाविद्याओं' नामक ग्रंथ के रचयिता एवं मां कामाख्या के अनन्य भक्त ज्योतिषाचार्य पंडित सुधांशु तिवारी ने बताया कि अम्बूवाची योग पर्व के दौरान मां भगवती के गर्भगृह के कपाट स्वत ही बंद हो जाते हैं और उनका दर्शन भी निषेध हो जाता है। इस पर्व की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे विश्व से इस पर्व में तंत्र-मंत्र-यंत्र साधना हेतु सभी प्रकार की सिद्धियाँ एवं मंत्रों के पुरश्चरण हेतु उच्च कोटियों के तांत्रिकों-मांत्रिकों, अघोरियों का बड़ा जमघट लगा रहता है। तीन दिनों के उपरांत मां भगवती की रजस्वला समाप्ति पर उनकी विशेष पूजा एवं साधना की जाती है।
जलसा शुहदा-ए-इस्लाम के पांचवें इजलास में सहाबा-ए-किराम की अज़मत पर रोशनी
सुल्तानपुर,जामिया इस्लामिया सुल्तानपुर में जारी दस दिवसीय "जलसा शुहदा-ए-इस्लाम" के पांचवें इजलास का आयोजन जामिया के नाज़िम-ए -आला मौलाना मुहम्मद उस्मान कासमी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं वक्ता मौलाना मुहम्मद आसिफ आज़मी ने सहाबा-ए-किराम के मक़ाम, फज़ीलत और खिलाफत-ए-राशिदा के विषय पर विस्तार से संबोधित किया।
अपने बयान में मौलाना आसिफ आज़मी ने कहा कि नबी-ए-करीम ﷺ के बाद मक़ाम और मर्तबे के लिहाज से हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ि.), हज़रत उमर फ़ारूक़ (रज़ि.), हज़रत उस्मान ग़नी (रज़ि.) और हज़रत अली अल-मुर्तज़ा (रज़ि.) का दर्जा क्रमवार सबसे ऊंचा है। उन्होंने कहा कि खुलफ़ा-ए-राशिदीन की वर्तमान तरतीब ही तरतीब-ए-बरहक़ है और यही अहल-ए-सुन्नत का मान्य दृष्टिकोण रहा है।
मौलाना ने अपने संबोधन में कहा कि सहाबा-ए-किराम इस्लाम में हक़ और मार्गदर्शन का पैमाना हैं तथा उनके सम्मान और तक़द्दुस की हिफाज़त हर मुसलमान की जिम्मेदारी है। उन्होंने वाक़िया-ए-ग़दीर-ए-ख़ुम का उल्लेख करते हुए कहा कि उसका संदर्भ और पृष्ठभूमि अलग थी तथा उसे खिलाफत के मसले से जोड़कर देखना सही नहीं है।
कार्यक्रम में मौलाना मुहम्मद मुख़्तार कासमी ने भी सहाबा-ए-किराम की अज़मत और उनके दीन के लिए किए गए योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
जलसे का शुभारंभ जामिया के छात्र मुहम्मद ज़ाहिद की तिलावत-ए-कुरआन से हुआ। इसके बाद अरबी सोम के छात्र मुहम्मद अजमल ने "सीरत-ए-अली" विषय पर प्रभावशाली तकरीर प्रस्तुत की। वहीं मौलाना मुहम्मद अराफात कासमी तथा छात्र मुहम्मद सरफराज ने नात व मनकबत पेश कर माहौल को रूहानी रंग में रंग दिया।
इस अवसर पर शहर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में उलेमा, तलबा और आम नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन मौलाना मुहम्मद आसिफ आज़मी की दुआ के साथ हुआ। जलसा शुहदा-ए-इस्लाम का यह पांचवां इजलास अत्यंत शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।