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लखनऊ अग्निकांड: धुएं में घुल गई दोस्ती, राख हो गए सपने—सूरज और संयम की अधूरी कहानी
लखनऊ । लखनऊ के अलीगंज की वह इमारत अब सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं रही। वह एक ऐसी याद बन चुकी है, जहां हर कोना किसी न किसी छात्र की आखिरी सांस का गवाह है। कोचिंग और एनीमेशन सेंटर में लगी आग ने न सिर्फ 15 जिंदगियां छीन लीं, बल्कि कई घरों की पूरी दुनिया उजाड़ दी।

इन 15 कहानियों में सबसे ज्यादा दिल को तोड़ देने वाली कहानी दो दोस्तों—सूरज और संयम—की है। कानपुर के गोविंदनगर और बर्रा के रहने वाले ये दोनों नाम अब सिर्फ एक हादसे के नहीं, बल्कि एक ऐसी दोस्ती के प्रतीक बन गए हैं जो जिंदगी से आगे जाकर भी साथ रही—लेकिन लौटकर कभी नहीं आई।

बचपन से शुरू हुई कहानी, जो आग में खत्म हो गई

सूरज और संयम की दोस्ती किसी कहानी जैसी नहीं थी, वह जिंदगी का हिस्सा थी। रतनलालनगर के दून स्कूल में दोनों ने साथ पढ़ाई की, साथ शरारतें कीं, साथ सपने देखे। टीचर उन्हें हमेशा एक जोड़ी की तरह याद रखते थे—जहां एक बोलता था, दूसरा समझ जाता था।

स्कूल के बाद भी यह साथ नहीं टूटा। दोनों ने एक ही एनीमेशन स्टूडियो में नौकरी जॉइन की। परिवारों को भरोसा था कि यह दोस्ती अब भविष्य की सफलता बनेगी। लेकिन किसे पता था कि यह साथ एक ही आग में खत्म होने वाला है।

वह दोपहर, जब धुआं किस्मत बन गया

अलीगंज स्थित उस इमारत में रोज़ की तरह क्लास चल रही थी। किसी को यह अहसास नहीं था कि ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद वेयरहाउस में उठती एक चिंगारी कुछ ही मिनटों में मौत का तूफान बन जाएगी।

दोपहर करीब ढाई बजे आग लगी। पहले किसी ने इसे मामूली समझा, लेकिन कुछ ही मिनटों में धुआं इतनी तेजी से ऊपर की मंजिलों तक पहुंचा कि तीसरी मंजिल पर मौजूद छात्र फंस गए। सीढ़ियों से उतरना मुश्किल हो गया, खिड़कियों से बाहर की हवा भी जहरीली हो चुकी थी।

कुछ छात्रों ने मदद के लिए चिल्लाया, कुछ ने फोन उठाए, कुछ ने खिड़कियों से झांककर आखिरी उम्मीद तलाशने की कोशिश की—लेकिन आग उम्मीदों से तेज थी।

आखिरी फैसला—साथ जिए, साथ मरेंगे

इसी अफरा-तफरी के बीच सूरज और संयम भी फंस गए। परिजनों के अनुसार, दोनों ने भागने की कोशिश की, लेकिन धुआं इतना घना था कि सांस लेना मुश्किल हो गया। शायद उसी पल दोनों ने एक-दूसरे का हाथ नहीं छोड़ा।

कहा जाता है कि दोनों ने किसी कमरे या बाथरूम में खुद को बंद कर लिया, यह सोचकर कि शायद वहां थोड़ी देर और सांस मिल जाए। लेकिन आग ने दीवारों तक को गर्म कर दिया था। दम घुटने से दोनों की मौत हो गई—लेकिन सबसे दर्दनाक बात यह थी कि वे आखिरी पल तक भी साथ थे।

यह सिर्फ मौत नहीं थी, यह उस दोस्ती का अंत था जो जिंदगी से बड़ी लगती थी।

घर पहुंचे तो टूट गया आसमान

जब संयम का शव गोविंदनगर पहुंचा, मां सोनिया की चीख ने पूरे मोहल्ले को हिला दिया। वह बार-बार बेटे को पकड़कर पूछती रहीं—“बोल क्यों नहीं रहा तू? अभी तो ठीक था ना तू…” हर शब्द जैसे किसी दिल पर हथौड़ा था।

पड़ोसी भी रो पड़े, क्योंकि संयम वही लड़का था जो हमेशा मुस्कुराकर मिलता था। किसी ने सोचा भी नहीं था कि उसकी मुस्कान इतनी जल्दी खामोश हो जाएगी।

इधर सूरज के घर का हाल भी अलग नहीं था। मां मीरा बेटे के शव से लिपटकर बार-बार बेहोश हो रही थीं। कुछ घंटे पहले ही बेटा उन्हें फोन पर कहकर गया था कि वह ठीक है। लेकिन लौटकर वह खुद नहीं आया।

जिम्मेदारियों से भरा एक अधूरा सफर

सूरज सिर्फ एक छात्र या कर्मचारी नहीं था। वह अपने परिवार की रीढ़ था। पिता की मौत के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उसी पर आ गई थी। छोटे भाई और बहन की पढ़ाई, घर का खर्च, भविष्य की उम्मीदें—सब कुछ उसी के कंधों पर था।

वह हाल ही में शादी के लिए लड़की देखने भी गया था। घर में नई शुरुआत की बातें हो रही थीं। लेकिन अब वहां सिर्फ सन्नाटा है—और एक ऐसा खालीपन, जिसे कोई भर नहीं सकता।

रेस्क्यू, जो देर से पहुंचा

हादसे के बाद SDRF और दमकल विभाग ने बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि नियंत्रण पाना मुश्किल हो गया। दो घंटे के भीतर 15 शव बरामद किए गए और कई घायल अस्पताल पहुंचाए गए।

हर निकला हुआ शव एक कहानी खत्म कर रहा था, और हर घायल आंखें एक नई उम्मीद ढूंढ रही थीं।

अंतिम यात्रा—जहां दोस्ती भी जल उठी

सूरज और संयम का अंतिम संस्कार अलग-अलग स्थानों पर हुआ, लेकिन दोनों घरों की हालत एक जैसी थी—टूटा हुआ परिवार, सूनी आंखें और खत्म होते सपने।

मोहल्ले के लोग आज भी कहते हैं कि दोनों की दोस्ती इतनी गहरी थी कि मौत भी उन्हें अलग नहीं कर सकी। वे साथ जिए, साथ काम किया और साथ ही इस दुनिया से चले गए।

एक सवाल, जो हर दिल में रह गया

यह हादसा सिर्फ आग नहीं था। यह एक चेतावनी थी—उन लापरवाहियों की, जिनके बीच हम अपने बच्चों को छोड़ देते हैं।

क्या यह हादसा टल सकता था? क्या ये 15 जिंदगियां बच सकती थीं?

इन सवालों के जवाब शायद कभी न मिलें, लेकिन सूरज और संयम की कहानी हमेशा याद दिलाती रहेगी कि कुछ दोस्तियां इतनी सच्ची होती हैं कि वे मौत के बाद भी खत्म नहीं होतीं—बस खामोश हो जाती हैं।
मुजफ्फरनगर : एनकाउंटर में मारा गया छोटा राजन गैंग का गुर्गा सतपाल
—यूपी हरियाणा, पंजाब के राज्यों में दर्ज हैं अपराधिक मुकदमें, 25 हजार का था इनाम


लखनऊ /मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में सोमवार की देर रात को सिविल लाइन थाना पुलिस, एसओजी टीम की इनामी बदमाश से मुठभेड़ हो गई। घायल बदमाश को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके खिलाफ यूपी, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 30 से अधिक मुकदमें दर्ज हैं। छोटी—छोटी लड़कियों का अपहरण कर उनसे दुष्कर्म करना उसका पेशा था। वह छोटा राजन गैंग का गुर्गा था।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजय कुमार वर्मा ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि 19 जून को कचहरी से एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर लिया गया था। इस मामले में पुलिस की 10 टीमों को लगाया गया था। सोमवार देर रात को पुलिस को उसकी लोकेशन इलाके में मिली थी। इसके बाद पुलिस और एसओजी की सयुंक्त टीम ने दो टीमों को बनाकर चेकिंग शुरू कर दी। पहली टीम रामपुर तिराहे से शहर की तरफ और दूसरी टीम मुजफ्फरनगर की तरफ से रामपुर तिराहे की तरफ आने जाने वाली सभी वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इस दौरान एक कार रामपुर तिराहे की तरफ आती हुई दिखाई दी, जिसे पुलिस टीम ने रुकने का इशारा किया तो अभियुक्त ने वाहन को तेजी से मोड़कर बामनहेडी रेलवे स्टेशन की तरफ भागने लगा।

पुलिस टीम ने कार सवार का पीछा किया तो आगे चलकर घना जंगल होने की वजह से रास्ता बन्द हो गया। पुलिस टीम ने बदमाश की घेराबन्दी की तो उसने फायरिंग शुरू कर दी। इसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गये। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई और दोनों पैर में गोली लगने से बदमाश घायल हो गया। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दौरान उसकी तबीयत बिगड़ने पर वेंटीलेटर पर रखा गया, जहां मंगलवार दोपहर को डॉक्टरों ने बदमाश को मृत घोषित कर दिया।

एसएसपी ने बताया कि बदमाश की पहचान चंडीगढ़ के रामदरबार निवासी सतपाल उर्फ सत्तू के रूप में हुई है। पुलिस को उसके पास से एक पिस्टल, तमंचा और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किया है। अभियुक्त सतपाल उर्फ सत्तू अन्तराज्यीय अपराधी है। उसके खिलाफ विभिन्न थानों पर हत्या, लूट, दुष्कर्म अपहरण जैसी गंभीर धाराओं में करीब 30 मुकदमें दर्ज है। वह चंडीगढ़ के थाने से हिस्ट्रीशीटर था। अभियुक्त के कुख्यात छोटा राजन गैंग से संबंध रहे हैं। अभियुक्त फरवरी माह से लुधियाना जेल से फरार था। फरार होने के उपरान्त अभियुक्त द्वारा पंजाब से आकर उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर नाबालिग किशोरियों का अपहरण व दुष्कर्म करने की घटनाएं कारित की गयी। सिविल लाइन थाना में दर्ज मुकदमें में उसके खिलाफ 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
लखनऊ अग्निकांड के पीड़ितों से मिलने केजीएमयू पहुंचे अखिलेश यादव

कहा - पीड़ितों की सरकार करे मदद

लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को अलीगंज इलाके में स्थित कोचिंग एवं एनीमेशन सेंटर में लगी भीषण अग्निकांड में घायल बच्चों और उनके अभिभावकों से मिलने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मंगलवार को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) पहुंचे।

सपा अध्यक्ष ने अस्पताल में उपचाराधीन बच्चों का हालचाल लिया और अभिभावकों से कार्रवाई को लेकर जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों की टीम से उपचार की भी जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की बात कही।

अखिलेश यादव ने कोचिंग अग्निकांड के पीड़ित बच्चों और अभिभावकों से मुलाकात के बाद मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि घटना बहुत ही दुखद है। अगर सुरक्षा नियमों का पालन किया गया होता तो शायद इतना बड़ा हादसा ना होता और लोगों की जान नहीं गई होती। पीड़ित परिवारों की हर संभव मदद होनी चाहिए।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि अस्पताल में भर्ती एक नौजवान से मेरी मुलाकात हुई है। जो वहां पर नौकरी करता था। उसने आग से बचने के लिए कूदकर अपनी जान बचाई। उसके शरीर और रीढ़ की हड्डी में चोट आईं हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, उसका काफी दिनों तक इलाज चलेगा, उसकी मां भी नहीं है। वह परिवार का इकलौता भरण पोषण करने वाला नवयुवक है। उसकी सरकार को पूरी मदद करनी चाहिए।

अखिलेश ने कहा कि जब तक इस हादसे के पीड़ित पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो जाते और उन्हें नौकरी दोबारा नहीं मिलती, तब तक सरकार उन्हें वेतन एवं उपचार की व्यवस्था करे। उन्होंने सरकार से मृतकों के परिवारों की कम से कम 01 करोड़ रुपये की मदद किए जाने की बात कही।
यूपी में पीएम स्वनिधि योजना के लिए एक महीने का विशेष अभियान
-  30 जून तक चलेगा यह विशेष अभियान, 'सेंसस टाउन रिपोर्ट' के आधार पर तय होंगे लक्ष्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए चलाई जा रही 'पीएम स्वनिधि योजना' की रफ्तार बढ़ाने जा रही है। इसके तहत पूरे प्रदेश में 1 जून से 30 जून 2026   तक एक माह का विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशों के क्रम मे ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी द्वारा राज्य के सभी संबंधित मुख्य विकास अधिकारियों को एक आधिकारिक पत्र जारी कर इस अभियान को युद्धस्तर पर सफल बनाने के निर्देश दिए गए हैं। सभी मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने जिलों के खण्ड विकास अधिकारियों को अपने स्तर से निर्देशित करें। इसका मुख्य उद्देश्य ‘सेंसस टाउन रिपोर्ट’ और विभाग द्वारा भेजी गई सूची के आधार पर तय लक्ष्यों को समय से पूरा करना है। राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा), उत्तर प्रदेश के मिशन निदेशक की अपेक्षा के क्रम में यह अभियान चलाया जा रहा है।
योजना के दायरे में आने वाले सभी पात्र लाभार्थियों की पहचान करना, उनसे आवश्यक समन्वय स्थापित करना और समयबद्ध तरीके से प्रक्रिया को पूरा करने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। निर्देश दिये गये हैं तय लक्ष्यों को पूरा करते हुए प्रगति रिपोर्ट से ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय को भी लगातार अवगत कराया जाए, ताकि योजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की ढिलाई न हो।
यह आदेश उत्तर प्रदेश के तमाम प्रमुख जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों को भेजा गया है, जिनमें आगरा, अलीगढ़, अमेठी, आजमगढ़, बरेली, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर नगर, मेरठ, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, सहारनपुर, वाराणसी, सीतापुर, और सुल्तानपुर सहित कई अन्य जिले शामिल हैं।
सरकार के इस कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि जून महीने के अंत तक हजारों नए छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों को पीएम स्वनिधि योजना के तहत ऋण और अन्य सरकारी लाभ आसानी से मिल सकेंगे।
पिछड़ा वर्ग के विकास को नई रफ्तार: सरकार लाई 3 नई योजनाओं का प्रस्ताव

-  'मुख्यमंत्री डिजिटल प्रशिक्षण', 'छात्रावास निर्माण' और 'तकनीकी दक्षता प्रशिक्षण' योजनाएं जल्द हो सकती हैं शुरू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार पिछड़ा वर्ग के सर्वांगीण विकास के लिए तीन नई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू करने की तैयारी में है। पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने विभागीय समीक्षा बैठक में बताया कि 'मुख्यमंत्री डिजिटल प्रशिक्षण योजना', 'मुख्यमंत्री छात्रावास निर्माण योजना' और 'मुख्यमंत्री तकनीकी दक्षता प्रशिक्षण योजना' के संचालन का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है।
विधानसभा स्थित कार्यालय में आयोजित बैठक में मंत्री ने लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर अग्निकांड के मद्देनजर प्रदेश के सभी पिछड़ा वर्ग एवं दिव्यांगजन छात्रावासों में फायर सेफ्टी सिस्टम का ऑडिट कराने और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि पिछड़ा वर्ग शादी अनुदान योजना के तहत वर्ष 2026-27 में निर्धारित 1.05 लाख लाभार्थियों के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 5,032 लोगों को लाभान्वित किया जा चुका है। मंत्री ने दिव्यांग एवं कुष्ठावस्था पेंशन का भुगतान जुलाई के पहले सप्ताह में सुनिश्चित करने तथा पेंशन से वंचित दिव्यांगजनों की पहचान कर उन्हें लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए।
बैठक में विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर जोर देते हुए मंत्री ने अधिकारियों को सोशल मीडिया के सभी प्रमुख प्लेटफॉर्मों के माध्यम से योजनाओं की जानकारी व्यापक स्तर पर प्रसारित करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र व्यक्तियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंच सके।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा में बताया गया कि निःशुल्क मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल योजना के तहत वर्ष 2026-27 में 1,125 ट्राइसाइकिल वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभिन्न जिलों में अतिरिक्त ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने के लिए भी धनराशि स्वीकृत की गई है।
बैठक में प्रमुख सचिव पिछड़ा वर्ग कल्याण राजेश कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक दिव्यांगजन सशक्तिकरण अमित सिंह सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
पिछड़ा वर्ग के विकास को नई रफ्तार: सरकार लाई 3 नई योजनाओं का प्रस्ताव

-  'मुख्यमंत्री डिजिटल प्रशिक्षण', 'छात्रावास निर्माण' और 'तकनीकी दक्षता प्रशिक्षण' योजनाएं जल्द हो सकती हैं शुरू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार पिछड़ा वर्ग के सर्वांगीण विकास के लिए तीन नई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू करने की तैयारी में है। पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने विभागीय समीक्षा बैठक में बताया कि 'मुख्यमंत्री डिजिटल प्रशिक्षण योजना', 'मुख्यमंत्री छात्रावास निर्माण योजना' और 'मुख्यमंत्री तकनीकी दक्षता प्रशिक्षण योजना' के संचालन का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है।
विधानसभा स्थित कार्यालय में आयोजित बैठक में मंत्री ने लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर अग्निकांड के मद्देनजर प्रदेश के सभी पिछड़ा वर्ग एवं दिव्यांगजन छात्रावासों में फायर सेफ्टी सिस्टम का ऑडिट कराने और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि पिछड़ा वर्ग शादी अनुदान योजना के तहत वर्ष 2026-27 में निर्धारित 1.05 लाख लाभार्थियों के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 5,032 लोगों को लाभान्वित किया जा चुका है। मंत्री ने दिव्यांग एवं कुष्ठावस्था पेंशन का भुगतान जुलाई के पहले सप्ताह में सुनिश्चित करने तथा पेंशन से वंचित दिव्यांगजनों की पहचान कर उन्हें लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए।
बैठक में विभागीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर जोर देते हुए मंत्री ने अधिकारियों को सोशल मीडिया के सभी प्रमुख प्लेटफॉर्मों के माध्यम से योजनाओं की जानकारी व्यापक स्तर पर प्रसारित करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र व्यक्तियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंच सके।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा में बताया गया कि निःशुल्क मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल योजना के तहत वर्ष 2026-27 में 1,125 ट्राइसाइकिल वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभिन्न जिलों में अतिरिक्त ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने के लिए भी धनराशि स्वीकृत की गई है।
बैठक में प्रमुख सचिव पिछड़ा वर्ग कल्याण राजेश कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक दिव्यांगजन सशक्तिकरण अमित सिंह सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
लखनऊ आग हादसे में एसआईटी ने जांच शुरू की, केजीएमयू पहुंची टीम
लखनऊ। लखनऊ स्थित अलीगंज में एक कोचिंग सेंटर में लगी आग की जांच शुरू हो गई है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को घटना स्थल की जांच कर साक्ष्य जुटाया। इसके बाद एसआईटी केजीएमयू पहुंचकर घायलों से मामले की जानकारी ली।इसके पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलीगंज अग्निकांड को लेकर देर रात उच्चस्तरीय बैठक की थी। उन्होंने दोषियों को चिह्नित कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित एसआईटी में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ के एडीजी जोन प्रवीण कुमार सदस्य हैं। जांच दल सात दिन में रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगा। घटना के बाद मंगलवार को एसआईटी के साथ फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंच चुकी है। फोरेंसिक टीम ने जांच के लिए पूरी इमारत को सील कर दिया है। टीम अंदर से सबूत जुटा रही है।

घटना के बाद पत्रकारों के सवाल जा जवाब देते हुए एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार ने बताया कि फॉरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं। अस्पताल में घायलों का हालचाल लेकर जो भी निष्कर्ष निकलेगा उसकी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।

उल्लेखनीय है कि अलीगंज के पुरनियां में जिस बिल्डिंग में आग लगी है उसके प्रथम तल पर पेट शॉप और दूसरे तल पर कोचिंग सेंटर है। इसके अलावा लाईब्रेरी, गेमिंग जोन भी है। सोमवार दोपहर को आग पेट शॉप में लगी थी, जिसके बाद विकराल रूप लेकर दूसरे तल पर बनी कोचिंग सेंटर में फैल गई। आग और धुआं को फैलता देखकर कोचिंग में मौजूद छात्र-छात्राएं अपनी जान बचने के लिए बाथरूम और कमरों में छिप गये। कुछ लोगों ने तो दीवार से गुजर रही केबिल से उतरे तो कुछ छत से ही कूद गये, जिसमें उन्हें चोटें आई हैं। आग में हुई जनहानि के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी। वहीं, अलीगंज थाने में छह लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इनमें से चार को गिरफ्तार कर लिया गया है। जिम्मेदार चार अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया हैं।

बोले अधिकारीलखनऊ के संयुक पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार ने मंगलवार को जारी अपने बयान में कहा कि अलीगंज थाना क्षेत्र में एक बिल्डिंग में हुई आगजनी की घटना में 15 लोगों की मौत हो गई है। इस मामले में अलीगंज थाना में मुकदमा दर्ज कर किया गया। ये एफआईआर बिल्डिंग के मालिक और इसमें चल रही प्रतिष्ठानों के ऑनर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पूछताछ कर जेल भेजा जा रहा हैं। इस मामले में जांच की जा रही जो भी दोषी होगा आगे की कार्रवाई की जा रही हैं ।
अलीगंज अग्निकांड में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत, प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल;

लखनऊ। राजधानी के अलीगंज क्षेत्र स्थित एक तीन मंजिला इमारत में भीषण आग लगने से कोचिंग और एनीमेशन कोर्स कर रहे 15 छात्र-छात्राओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए हैं। हादसे में घायल 9 लोगों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जिनमें कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है।

कई लोग जान बचाने के लिए बिल्डिंग से कूद गए

जानकारी के अनुसार, अलीगंज सेक्टर-डी स्थित इस इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप और वेयरहाउस था, जबकि दूसरी मंजिल पर 3D एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर और कोचिंग क्लासेज संचालित हो रही थीं। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट और एसी कंप्रेसर फटने को आग लगने का कारण माना जा रहा है।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोपहर करीब ढाई बजे अचानक वेयरहाउस से आग भड़की और देखते ही देखते पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। दूसरी और तीसरी मंजिल पर मौजूद छात्र बाहर निकल नहीं सके और कई लोग जान बचाने के लिए बिल्डिंग से कूद गए, जिससे वे भी घायल हो गए।

करीब दो घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका

सूचना के बाद पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ की टीमों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन करीब दो घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस दौरान 15 शव बरामद किए गए। मृतकों में लखनऊ, सीतापुर, बाराबंकी, कानपुर और अन्य जिलों के छात्र शामिल हैं।हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में चल रहे कार्यक्रम को बीच में छोड़कर लखनऊ लौट आए और सीधे घटनास्थल का निरीक्षण किया। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी दिल्ली से लखनऊ पहुंचकर केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर गए और घायलों का हालचाल जाना।

दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

सीएम योगी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय बैठक की और दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया, जिसे सात दिन में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। साथ ही चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।पुलिस ने इस मामले में बिल्डिंग मालिक, पेट शॉप संचालक और कोचिंग/एनीमेशन सेंटर संचालक सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। एफआईआर में कुल छह लोगों को नामजद किया गया है।

करीब 40 मिनट की देरी से पहली गाड़ी मौके पर पहुंची

हादसे के बाद प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि दमकल विभाग को सूचना देने के बावजूद करीब 40 मिनट की देरी से पहली गाड़ी मौके पर पहुंची, जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया। एंबुलेंस सेवाओं में भी देरी की शिकायतें सामने आई हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है और पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता की घोषणा की है।फिलहाल घटना की जांच जारी है और प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की बात कही है।
मोहर्रम जुलूस को लेकर लखनऊ में यातायात डायवर्जन, कई मार्गों पर प्रतिबंध लागू
लखनऊ। सातवीं मोहर्रम के अवसर पर 23 जून 2026 से लखनऊ में शाही जरी जुलूस निकाला जाएगा। यह जुलूस बड़ा इमामबाड़ा, चौक, रूमी गेट, घंटाघर और छोटा इमामबाड़ा मार्ग से होकर गुजरेगा। जुलूस को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने शहर में व्यापक यातायात डायवर्जन और प्रतिबंध लागू किए हैं।

जारी ट्रैफिक एडवाइजरी के अनुसार जुलूस के दौरान सीतापुर रोड, हरदोई रोड, कैसरबाग, हुसैनाबाद, चौक, मेडिकल क्रॉस, नीबू पार्क, शाहमीना तिराहा सहित कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रहेगी। कुछ मार्गों पर पूरी तरह से यातायात प्रतिबंधित किया गया है, जबकि कई स्थानों पर वैकल्पिक रूट से वाहन निकाले जाएंगे।

डायवर्जन व्यवस्था के तहत डालीगंज, आईटी चौराहा, कपूरथला, मड़ियांव, मेडिकल कॉलेज, कोनेश्वर और रकाबगंज जैसे मार्गों को वैकल्पिक रास्ते के रूप में प्रयोग किया जाएगा।प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जुलूस मार्ग पर सुरक्षा और व्यवस्था के मद्देनजर यातायात पूरी तरह नियंत्रित रहेगा। हालांकि, आपातकालीन सेवाओं जैसे एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, शव वाहन और स्कूल वाहनों को आवश्यकतानुसार मार्ग उपलब्ध कराया जाएगा।

ट्रैफिक पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और किसी भी असुविधा से बचने के लिए पहले से योजना बनाकर यात्रा करें। यातायात संबंधी सहायता के लिए ट्रैफिक कंट्रोल नंबर 9454405155 पर संपर्क किया जा सकता है।
लखनऊ कोचिंग आग हादसे में पुलिस ने चार को किया गिरफ्तार, चार अफसर सस्पेंड
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके की एक इमारत में लगी आग से हुई जनहानि के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ताबड़तोड़ एक्शन के मूड में दिख रही है। इस प्रकरण में व्यावसायिक इमारत के मालिक सहित समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर उनको गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही नगर निगम के दो और ऊर्जा विभाग व फायर के एक-एक अधिकारियों को निलंबित किया गया है।

अलीगंज पुलिस की ओर से देर रात को इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद अलीगंज सेक्टर डी निवासी रामकृष्ण उपाध्याय, सीतापुर रोड निवासी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, ठाकुरगंज का रहने वाला तूशॉक कृष्णा जयसवाल और मड़ियाव के केशवनगर निवासी सुरेश कुमार साहू को गिरफ्तार किया है। इधर, मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिजली विभाग के जानकीपुरम एक्सेन कलेक्शन गौरव कुमार, एफएसएसओ फायर विभाग इंदिरानगर के प्रभारी कमलेन्द्र कुमार सिंह, लखनऊ विकास प्राधिकरण के ऐई अनिल कुमार और जेई प्रमोद पांडे को सस्पेंड ंकर दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने पाँच कालीदास मार्ग स्थित अपने आवास पर हाईलेवल मीटिंग आयोजित की जिसमें सभी बड़े और प्रमुख अफसर शामिल हुए। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अमृत अभिजात, अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, धर्मार्थ और संस्कृति विभाग व प्रवीण कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन के नेतृत्व में दो सदस्यीय विशेष जांच दल के गठन का निर्देश दिया। विशेष जांच दल को सात दिनों के अंदर अपनी जांच पूरी करके मुख्यमंत्री को सौंपना है। जांच के दायरे में कई बड़े अफसरों के आने की आशंका है। वहीं, एलडीए वीसी ने जांच के लिए टीम गठित की है।

2016 में निरस्त किया गया था बिल्डिंग के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश

अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब भवन से जुड़े पुराने दस्तावेज और प्राधिकरण की कार्रवाई गंभीर सवालों के घेरे में हैं। सोमवार को जिस भवन में आग लगने की यह दुःखद घटना हुई, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था, लेकिन दो माह से कम समय में ही उस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया।

1980 में हुआ था आवंटन

अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी मूल रूप से 11 जुलाई 1980 को लॉटरी प्रणाली के तहत विजय कुमार को किराया-क्रय पद्धति पर आवंटित किया गया था। 4 नवंबर 1980 को अनुबंध निष्पादित होने के बाद भवन का कब्जा आवंटी को सौंप दिया गया। 2005 में यह भवन विक्रय विलेख के जरिए विजय कुमार और उनकी पत्नी उषा के नाम दर्ज हुआ। वहीं 19 जनवरी 2013 को इन लोगों ने यह भवन वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला और सुरेन्द्र प्रताप शुक्ला के नाम बेच दिया। 7 अगस्त 2014 को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र व सुरेन्द्र के पक्ष में नामांतरण की प्रक्रिया पूरी की। करीब 1992 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले इस भवन का मानचित्र 20 अगस्त 2014 को स्वतः मानचित्र योजना के तहत आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था।

ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त होने पर उठे सवाल

हालांकि, बाद में भवन में अनधिकृत निर्माण की बात सामने आई। इसके बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वीरेन्द्र प्रताप शुक्ला के खिलाफ मुकदमा संख्या-08/2016 दर्ज कराया। जांच के बाद विहित प्राधिकारी ने 10 मई 2016 को अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध ध्वस्तीकरण आदेश पारित कर दिया। लेकिन, ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने के दो माह के अंदर ही 5 जुलाई 2016 को इस आदेश को निरस्त भी कर दिया गया।