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सेवाढ़ाब में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, माइका लदा वाहन जब्त चालक अंधेरे का फायदा उठाकर फरार, जांच में दो नाम आए सामने;

  गिरिडीह: जिले के तिसरी थाना क्षेत्र के सेवाढाब में वन विभाग ने अवैध माइका कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए माइका से लदे एक पिकअप वाहन को जब्त किया है। हालांकि कार्रवाई के दौरान चालक अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। वन विभाग ने वाहन को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में दो लोगों के नाम सामने आने के बाद अवैध माइका कारोबार से जुड़े नेटवर्क को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारी के अनुसार, वन विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि तिसरी क्षेत्र के जंगलों से अवैध रूप से निकाला गया माइका पिकअप वाहन के माध्यम से बाहर भेजा जा रहा है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने देर रात सेवादाब के समीप घेराबंदी की। इसी दौरान संदिग्ध पिकअप वाहन को रोकने का प्रयास किया गया। वनकर्मियों को देखते ही चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। जब वाहन की तलाशी ली गई तो उसमें भारी मात्रा में माइका लदा मिला। इसके बाद वाहन को जब्त कर गावां बीट कार्यालय ले जाया गया। सूत्रों के अनुसार, पचरुखी, गड़कुरा समेत आसपास के जंगलों से माइका निकालकर विभिन्न रास्तों से उसकी ढुलाई किए जाने की सूचना वन विभाग को लगातार मिल रही थी। इसी आधार पर यह कार्रवाई की गई। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि जब्त माइका किस स्थान से लाया गया था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। इस संबंध में गावां के वनपाल राजेंद्र कुमार ने बताया कि मामले की जांच जारी है। अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। प्रारंभिक जांच में मुकेश बरनवाल एवं पिंटू यादव का नाम सामने आया है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के बावजूद थम नहीं रहा अवैध कारोबार स्थानीय सूत्रों की माने तो तिसरी, गावां और आसपास के क्षेत्रों में अवैध माइका कारोबार पर पूरी तरह लगाम नहीं लग सकी है। वन विभाग और प्रशासन की समय-समय पर होने वाली कार्रवाइयों के बावजूद कई माइका कारोबारी अब भी सक्रिय हैं और धड़ल्ले से अवैध कारोबार संचालित कर रहे हैं। जंगलों और बंद खदानों से माइका निकालकर विभिन्न माध्यमों से उसकी ढुलाई की जाती है। हालिया कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अवैध माइका कारोबार का नेटवर्क किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है और इस पर प्रभावी रोक कब लगेगी। छापेमारी दल में प्रभारी वनपाल राजेंद्र प्रसाद, वन उप परिसर पदाधिकारी, होमगार्ड जवान सुरेश महतो समेत अन्य वनकर्मी शामिल थे। वन विभाग का कहना है कि जांच के आधार पर जल्द ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब देखना है कि आगे और वन विभाग को कितनी सफलता मिलती है और कितना जल्द इस अवैध कारोबार पर पूर्णतः रोक लगाया जा सकेगा।
तिसरी में फिर फल-फूल रहा प्रतिबंधित ढिबरा कारोबार, प्रशासनिक दावों पर उठे सवाल


गिरिडीह।

तिसरी प्रखंड में प्रतिबंधित ढिबरा (माइका) का अवैध कारोबार एक बार फिर खुलेआम फल-फूल रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब जिला प्रशासन अवैध खनन पर सख्ती के बड़े-बड़े दावे कर रहा है। सवाल यह है कि आखिर रोजाना लाखों रुपये के इस अवैध कारोबार की भनक संबंधित विभागों को क्यों नहीं लग रही, या फिर सब कुछ जानकर भी जिम्मेदार आंखें मूंदे हुए हैं? रोज लाखों का कारोबार, फिर भी कार्रवाई नदारद स्थानीय सूत्रों के मुताबिक तिसरी क्षेत्र के कई जंगलों से प्रतिदिन 15 लाख रुपये से अधिक मूल्य के ढिबरा की अवैध निकासी हो रही है। खनन से लेकर भंडारण और तस्करी तक का पूरा नेटवर्क सक्रिय है।
इसके बावजूद अब तक किसी बड़ी कार्रवाई का सामने नहीं आना कई सवाल खड़े करता है। गांवों में बन गए अवैध गोदाम पचरुखी, मनसाडीह, भोक्ताडीह, चंदवापहरी, बरईपांट, कर्णपुरा, चरकी बलबली, नारोटांड, असुरहड्डी, गड़कुरा, लक्ष्मणिया, दानोखूंटा, लोकाय, बरवाडीह और असनातरी समेत कई गांवों में आदिवासी घरों का इस्तेमाल कथित तौर पर ढिबरा भंडारण केंद्र के रूप में किया जा रहा है। दिनभर माल जमा होता है और रात होते ही पिकअप वाहनों के जरिए बाहर भेज दिया जाता है। माफिया बदले, नहीं बदला कारोबार प्रशासनिक कार्रवाई के बाद कुछ समय तक शांत पड़ा यह धंधा अब नए तरीकों से संचालित हो रहा है। पहले जहां सीधे गोदामों और फैक्ट्रियों तक माल पहुंचता था, वहीं अब गांवों के घरों को अस्थायी भंडारण केंद्र बनाया जा रहा है। इससे कार्रवाई करने वाली एजेंसियों के लिए नेटवर्क तक पहुंचना और मुश्किल हो गया है। क्या विभागीय निगरानी सिर्फ कागजों तक सीमित? स्थानीय लोगों का आरोप है कि तस्करी में शामिल लोगों ने पुलिस और वन विभाग की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अलग व्यवस्था कर रखी है। विभागीय वाहनों की सूचना मिलते ही माइका लदे वाहन रास्ते में रोक दिए जाते हैं और खतरा टलने पर आगे बढ़ा दिए जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब तस्करों के पास इतनी मजबूत सूचना व्यवस्था है, तो संबंधित विभागों की खुफिया निगरानी व्यवस्था आखिर कहां है? पुराने नाम फिर चर्चा में सूत्र बताते हैं कि पहले भी अवैध ढिबरा कारोबार से जुड़े रहे कई चेहरे दोबारा सक्रिय हो गए हैं। यदि यह सच है तो यह संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। आखिर जिन लोगों पर पहले कार्रवाई हुई, वे दोबारा कारोबार में कैसे लौट आए? विभाग बोले- होगी जांच गावां रेंजर अनिल कुमार ने कहा कि यदि तिसरी क्षेत्र में ढिबरा का अवैध कारोबार दोबारा शुरू हुआ है तो मामले की जांच कराई जाएगी। छापेमारी अभियान चलाकर दोषियों की पहचान की जाएगी और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सबसे बड़ा सवाल जब रोजाना कई वाहन प्रतिबंधित ढिबरा लेकर क्षेत्र से बाहर जा रहे हैं, तब भी यदि विभाग अनजान है तो यह उसकी विफलता है। और यदि जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है, तो मामला और भी गंभीर है। तिसरी में दोबारा पैर पसार रहा यह अवैध कारोबार सिर्फ वन संपदा की लूट नहीं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।