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डीके शिवकुमार होंगे कर्नाटक के अगले सीएम, सिद्धारमैया ने खुद किया ऐलान, आज देंगे इस्तीफा

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कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस सरकार में आज बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सीएम सिद्धारमैया आज सीएम पद से इस्तीफा देंगे और उनकी जगह डीके शिवकुमार राज्य के अगले सीएम बनाए जाएंगे।विधायकों की बैठक में सिद्धारमैया ने उनके नाम का ऐलान किया। उन्होंने सभी विधायकों से डीके का साथ देने की अपील की।

आज शाम 3 बजे इस्तीफा देंगे सिद्धारमैया

कर्नाटक सरकार के मंत्री एच के पाटिल ने बताया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज शाम 3 बजे इस्तीफा दे देंगे। सिद्धारमैया ने ही कहा है कि डीके शिवकुमार नए सीएम होंगे। एच के पाटिल ने बताया कि नाश्ते के दौरान हुई बैठक में सिद्धारमैया ने ये बातें कहीं।

इस्तीफे से पहले मंत्रियों का जताया आभार

कर्नाटक के मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को नाश्ते पर बुलाया और इस्तीफा देने से पहले वह सभी मंत्रियों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देना चाहते थे। मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि सिद्धारमैया को दिल्ली में किसी पद की पेशकश की गई है या नहीं। यह हाई कमान पर निर्भर करता है।

कर्नाटक कांग्रेस के लंबे समय खींचतान

कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर खींचतान कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार गुट के बीच सत्ता की खींचतान चर्चा में रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में चली कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर पद छोड़ने का दबाव बनाया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने पर सहमति जता दी। बताया जा रहा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में दो सप्ताह का समय मांगा था, ताकि वह जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश कर सकें, लेकिन पार्टी नेतृत्व तत्काल नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में था। कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें याद दिलाया कि 2023 में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के साथ ढाई-ढाई साल के सत्ता साझेदारी फार्मूले पर सहमति बनी थी और सिद्दारमैया पहले ही तय अवधि से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज, ब्रेकफास्‍ट मीटिंग में डीके शिवकुमार ने सिद्दारमैया के छुए पैर

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कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे सत्ता हस्तांतरण के विवाद पर आखिरकार कांग्रेस हाईकमान ने निर्णायक कदम उठा लिया है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में चली कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर पद छोड़ने का दबाव बनाया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने पर सहमति जता दी।

डीके ने पैर छूकर लिया सिद्धारमैया से आशीर्वाद

राज्य में जारी सियासी हलचल के बीच सिद्धारमैया ने आज ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई। इस मीटिंग में पहुंचे डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल नजर आया। सत्ता हस्तांतरण से पहले डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छूकर आशीर्वाद लिए। सिद्धा ने भी उन्हें गले लगाया।

आज इस्तीफा दे सकते हैं सिद्धारमैया

सीएम सिद्धारमैया आज सीएम पद से इस्तीफा दे सकते हैं और उनकी जगह डीके शिवकुमार को अगला सीएम बनाया जा सकता है। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि सीएम सिद्धारमैया आज राज्यपाल से मुलाकात करेंगे और इस मुलाकात में वे अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप सकते हैं।

राज्यपाल थावरचंद गहलोत बंगलूरू में मौजूद नहीं

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के संभावित इस्तीफे को लेकर बढ़ते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राज्यपाल थावरचंद गहलोत के बंगलूरू छोड़ने से राज्य की राजनीति में अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि राज्यपाल की गैरमौजूदगी इस्तीफा प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेगी और सिद्धारमैया गुरुवार दोपहर 3 बजे तय कार्यक्रम के अनुसार अपना इस्तीफा राज्यपाल कार्यालय को सौंप सकते हैं। कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि सिद्धारमैया को निर्देश दिया गया है कि राज्यपाल के बंगलूरू में नहीं होने के बावजूद वे अपना इस्तीफा राज्यपाल कार्यालय में जमा करें। पार्टी नेताओं का कहना है कि तय कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं होगा और सभी घटनाक्रम पहले से निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ेंगे।

कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें याद दिलाया कि 2023 में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के साथ ढाई-ढाई साल के सत्ता साझेदारी फार्मूले पर सहमति बनी थी और सिद्दारमैया पहले ही तय अवधि से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं. ‘डेक्‍कन हेराल्‍ड’ की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने बंद कमरे में हुई बैठकों के दौरान सिद्दारमैया से कहा कि पार्टी की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पुराने वादे का सम्मान जरूरी है. इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में बताए जा रहे हैं. राहुल गांधी ने दोनों नेताओं (सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार) से संयुक्त और अलग-अलग बैठकें कर पार्टी एकता बनाए रखने की अपील की

केरल में ईडी की टीम पर हमला, पूर्व सीएम पी विजयन के समर्थकों ने अफसरों को घेरा, गाड़ियों में तोड़फोड़

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केरल में राजनीतिक भूचाल आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम बुधवार सुबह-सुबह केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के ठिकानों पर धावा बोला। तिरुवनंतपुरम से लेकर कन्नूर तक हुई इस अचानक छापेमारी से राज्य में हड़कंप मच गया। इसी क्रम में कन्नूर में छापेमारी का विरोध करते हुए विजयन के समर्थकों ने जमकर बवाल किया। विजयन के समर्थकों ने ईडी अधिकारियों को घेर लिया। और जांच अधिकारियों की गाड़ियों पर जमकर पथराव किया।

ईडी अधिकारियों की गाड़ी पर हमला

तिरुवनंतपुरम में पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा नेता प्रतिपक्ष पिनाराई विजयन के आवास के बाहर उस वक्त भारी हंगामा मच गया, जब सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं ने ईडी अधिकारियों की गाड़ी पर हमला कर दिया। ये कार्यकर्ता केंद्रीय एजेंसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। सैकड़ों की संख्या में आए समर्थकों ने ईडी की गाड़ियों पर पत्थर फेंके हैं। सीपीएम के समर्थकों ने ईडी की टीम की गाड़ियों को तोड़ने की कोशिश की।

ईडी के तीन वाहनों को नुकसान पहुंचाया

जानकारी के मुताबिक ईडी अधिकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास पर छापा पूरा कर लिया था और जब वे वहां से निकल रहे थे, तो पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके वाहनों को रोक दिया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। आरोप है कि काफिला निकलने से पहले सीपीआई (एम) के कार्यकर्ताओं ने ईडी के तीन वाहनों को नुकसान पहुंचाया और उन पर पत्थर फेंके। इस बीच जैसे-तैसे ईडी के अधिकारी केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीआई (एम) नेता पिनाराई विजयन के आवास से रवाना हुए।

विजयन की बेटी से जुड़ा है मामला

ईडी की इस बड़ी कार्रवाई के केंद्र में पूर्व सीएम पिनाराई विजयन की बेटी टी. वीणा हैं। यह पूरा विवाद टी. वीणा की पूर्व आईटी कंपनी ‘एक्सालॉजिक’ और एक निजी खनन कंपनी कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड से जुड़ा है। आरोप है कि 2017 से 2021 के बीच, वीणा की कंपनी को बिना कोई वास्तविक आईटी सर्विस दिए ही, सीएमआरएल की तरफ से हर महीने भारी-भरकम ‘रिटेनर फीस’ का भुगतान किया गया। ईडी इसी कथित ‘पॉलिटिकल पे-ऑफ’ और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से मामले की गहराई से जांच कर रही है।

प्यासे को एक गिलास पानी जरूर दें...प्रचंड गर्मी में पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील

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पूरे देश में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। खासकर पूरा उत्तर भारत चिलचिलाती धूप और लू के थेपेड़ों से परेशान है। कई इलाकों में पारा 47 के आसपास पहुंच गया है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से सावधानी बरतने और खुद को हाइड्रेटेड रखने की अपील की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के अदिकांश हिस्सों में तापमान को देखते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों तक अपनी बात पहुंचाई है और इसकी चपेट में आने से बचने के लिए सभी सावधानी बरतने का अनुरोध किया है। पीएम मोदी ने एक के बाद एक कई एक्स पोस्ट किए हैं।

लोगों को हाइड्रेटेड रहने की सलाह

पीएम मोदी ने कहा, ‘देश के अलग-अलग हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही दैनिक जीवन में गर्मी से होने वाली कई कठिनाइयां भी बढ़ रही हैं। मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं कि जितनी अधिक सावधानी बरत सकें, अवश्य बरतें। कृपया स्वयं को हाइड्रेटेड रखें, घर से बाहर निकलते समय पानी साथ रखें।

प्यासे को पानी पिलाने की अपील

ऐसे मौसम में आपकी संवेदनशीलता भी बहुत बड़ा सहारा बन जाती है। यदि संभव हो, तो किसी प्यासे व्यक्ति को एक गिलास पानी अवश्य दें। मैं ऐसे लोगों की सराहना भी करूंगा जो अपने घरों के और दुकानों के बाहर मटके में जल रखते हैं ताकि कोई भी उनसे पानी पी सके।

सतर्कता बरतने की सलाह

प्रधानमंत्री ने आगे लिखा है, अत्यधिक गर्मी से होने वाली परेशानी, जैसे चक्कर आना, मतली या ज्यादा थकान लगे तो उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। यदि आपके आसपास किसी व्यक्ति को अचानक बेहोशी जैसा लगे, कमजोरी महसूस करे या फिर अस्वस्थ दिखाई दे, तो उसे तुरंत किसी ठंडी और छायादार जगह पर ले जाएं। उसे पानी, ORS या अन्य तरल पदार्थ दें, जिससे शरीर को राहत मिल सके। बच्चे, बुज़ुर्ग और धूप में काम करने वाले लोग इस भीषण गर्मी में सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। समय रहते ध्यान न देने पर यह स्थिति हीटस्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या का रूप ले सकती है। ऐसे समय में आपकी सतर्कता और देखभाल किसी का जीवन बचा सकती है।

'हीट वेव' की चेतावनी

बता दें कि इन दिनों नौतपा चल रहा है। 25 मई से 2 जून तक का समय भीषम गर्म रहेगा। मौसम विभाग ने साफ तौर पर 'हीट वेव' यानी लू चलने की चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही दोपहर और शाम के समय तेज सतही हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, 27 मई को हवा में नमी का स्तर अधिकतम 40 प्रतिशत और न्यूनतम 25 प्रतिशत रहने का अनुमान है। विभाग ने दोपहर और शाम दोनों समय तेज गर्म हवाओं के साथ लू चलने की चेतावनी दी है। ऐसे में लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और धूप से बचाव करने की सलाह दी गई है।

SIR पर लगी मुहर, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- चुनाव आयोग का ये अधिकार है

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सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसआईआर कराना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि मुक्त और निष्पक्ष चुनाव के लिए एसआईआर जरूरी है।

SIR चुनाव आयोग का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21(3) चुनाव आयोग को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का अधिकार देते हैं। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि SIR प्रक्रिया जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में ‘नई जान फूंकने’ का काम करती है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची को ज्यादा शुद्ध और विश्वसनीय बनाना है।

कोर्ट ने बताया SIR क्यों जरूरी

सीजेआई सूर्यकांत ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कहा कि बिहार में चल रही SIR प्रक्रिया संविधान के उस मूल दायित्व से अलग नहीं है, जिसका संबंध स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने से है। अदालत ने माना कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की प्रक्रिया चलाने का अधिकार है। अदालत ने कहा कि बिहार में बड़े पैमाने पर जनसांख्यिकीय बदलाव, शहरीकरण और प्रवासन के कारण मतदाता सूची में व्यापक परिवर्तन हुए हैं, जिसके चलते चुनाव आयोग ने यह प्रक्रिया शुरू की।

दस्तावेज मांगने का मतलब उन्हें नागरिक ना मानना नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR की प्रकिया में कोई गलती नहीं है। लोगों को अपनी जानकारी जोड़ने, सुधार करने और आपत्ति/अपील करने के कई मौके दिए गए। अगर मतदाताओं से SIR के दौरान अपने दस्तावेज या जानकारी देने के लिए कहा जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उनको नागरिक नहीं माना जा रहा है। निष्पक्ष चुनाव सिर्फ वोट डालने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं होते। उनका सबसे महत्वपूर्ण आधार सही, भरोसेमंद और सटीक वोटर लिस्ट होती है। ऐसे में वोटर लिस्ट को अपडेट करना गलत नहीं माना जा सकता।

SIR के खिलाफ याचिका में क्या?

इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि इतने बड़े स्तर पर SIR कराना जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के खिलाफ है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया कानून के दायरे में है और उसका उद्देश्य वैध है। इस फैसले को बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कराए गए वोटर लिस्ट सुधार अभियान पर चुनाव आयोग के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। साथ ही यह निर्णय भविष्य में देशभर में मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

केरल में ईडी का बड़ा एक्शन, पूर्व सीएम विजयन के ठिकानों पर रेड, जानें क्या है पूरा मामला

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केरल में सत्ता हाथ से निकलते ही पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर प्रवर्तन निदेशालय का शिकंजा कस गया है। ईडी ने कोचिन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) घोटाले के मामले में बुधवार को बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने केरल में बड़े पैमाने पर छापेमारी शुरू कर दी है। जांच एजेंसी की टीमों ने 10 ठिकानों पर सर्च अभियान चलाया है, जिसमें मौजूदा विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनारई विजयन के आवास भी शामिल हैं।

सत्ता से बेदखल होने के बाद ईटी का शिकंजा

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री पिनरई विजयन से जुड़े ठिकानों समेत 10 जगहों पर छापेमारी की है। यह मामला सिर्फ एक कारोबारी लेनदेन तक सीमित नहीं दिख रहा बल्कि इसमें सत्ता, कॉरपोरेट और कथित वित्तीय गड़बड़ियों का बड़ा नेटवर्क सामने आने की आशंका जताई जा रही है। पिछले कुछ महीनों से विजयन परिवार पर विपक्ष लगातार हमलावर था। सरकार से बेदखल होने के बाद और अब ED की एंट्री ने इस पूरे विवाद को और ज्यादा गंभीर बना दिया है।

विवाद के केंद्र में विजयन की बेटी की कंपनी

ईडी पहले ही विजयन की बेटी टी वीना का बयान दर्ज कर चुकी है। वीना की आईटी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशन इस पूरे विवाद के केंद्र में है। आरोप है कि कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) नाम की एक प्राइवेट कंपनी ने साल 2018 से 2019 के बीच तत्कालीन सीएम विजयन की बेटी वीणा की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को 1.72 करोड़ रुपये का गैर-कानूनी पेमेंट किया, जबकि आईटी फर्म ने कंपनी को कोई सर्विस नहीं दी थी। ईडी की ये छापेमारी केरल हाई कोर्ट द्वारा मंगलवार को सीएमआरएल की उस याचिका को खारिज करने के बाद हुई, जिसमें इस मामले में ईडी की कार्रवाई को रद्द करने की मांग की गई थी।

हाईकोर्ट के फैसले के एक दिन बाद कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 6 बजे ईडी की समन्वित कार्रवाई शुरू हुई। यह छापेमारी केरल हाईकोर्ट के उस फैसले के एक दिन बाद हुई, जिसमें अदालत ने ईडी को सीएमआरएल और एक्सालॉजिक के बीच कथित वित्तीय लेनदेन की जांच जारी रखने की अनुमति दी थी। एजेंसी ने केरल में एक साथ 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इनमें तिरुवनंतपुरम के बेकरी जंक्शन के पास स्थित विजयन का किराए का आवास भी शामिल था, जहां टी वीना भी रहती हैं। इसके अलावा CMRL के दफ्तरों और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े परिसरों पर भी छापेमारी की गई। CMRL के प्रबंध निदेशक ससिधरन कार्था से जुड़े ठिकाने भी जांच के दायरे में रहे।

अब्राहम' समझौते पर पाकिस्तान ने ट्रंप की अपील ठुकराई, शहबाज के रक्षामंत्री ने दिखाई आंख

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पाकिस्तान ने अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने और इजरायल को औपचारिक मान्यता देने के अमेरिकी दबाव को पूरी तरह ठुकरा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुस्लिम देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की मांग की थी। जिसके बाद पाकिस्तान ने अब्राहम समझौते में शामिल होने से इनकार कर दिया। रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कहा कि इस्लामाबाद किसी भी ऐसे समझौते का समर्थन नहीं करेगा जो देश की मौलिक विचारधाराओं के खिलाफ हो।

ट्रंप की मांग पाक को किसी भी हाल में मंजूर नहीं

दरअसल, सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत मुस्लिम बहुल देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने और इजराइल को औपचारिक रूप से मान्यता देने की मांग की थी। जिसके बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने समा टीवी के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि हम इजरायल के साथ जाने का विकल्प नहीं चुन सकते हैं। यह अपनी मूल विचारधारा से समझौता करने जैसा होगा, जो किसी भी हाल में मंजूर नहीं है।

ख्वाजा आसिफ बोले- एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं

आसिफ ने कहा कि इजरायल को लेकर पाकिस्तान का बीते करीब आठ दशक से एक मजबूत रुख रहा है, जिसे छोड़कर वह 'अब्राहम समझौते' में शामिल नहीं हो सकता। आप उन लोगों (इजरायलियों) के साथ कैसे बैठ सकते हैं, जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता है। बता दें कि पाकिस्तान ने अपने 78 साल के इतिहास में कभी-भी इजरायल को मान्यता नहीं दी है।

डोनाल्ड ट्रंप क्या चाहते हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की और कतर जैसे देशों को ईरान समझौते का हिस्सा बनने के लिए अब्राहम अकॉर्ड्स पर दस्तखत करने को कहा है। ट्रंप ने मुस्लिम देशों के नेताओं से कहा कि ईरान में शांति के लिए उनको अब्राहम एकॉर्ड या अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करना चाहिए। उनको इजरायल से रिश्ते कायम करने चाहिए।

क्या है अब्राहम समझौता?

अब्राहम एकॉर्ड या अब्राहम समझौता अमेरिका की मध्यस्थता से 2020 में शुरू किया गया था। यह इजरायल और अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को सामान्य बनाने के लिए शुरू किया गया था। यह एक ऐसी दुविधा है जिससे ज्यादातर मुस्लिम देश दूर ही रहना चाहते हैं। कई मुस्लिम देशों की मुसीबत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि ट्रंप ने कहा है कि अगर इस पहल का समर्थन नहीं किया गया तो अमेरिका के साथ संबंधों पर असर पड़ सकता है। अब्राहम समझौते पर सबसे पहले 15 सितंबर, 2020 को इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल-बहरीन के बीच हस्ताक्षर हुए थे। बाद में इस ढांचे का विस्तार करके इसमें मोरक्को और सूडान को भी शामिल किया गया। 2025 में औपचारिक रूप से इस समूह में कज़ाकिस्तान भी शामिल हुआ।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्वाड देश एकजुट, जानें क्या हुआ फैसला

#quadforeignministers_meeting 

देश की राजधानी नई दिल्ली में मंगलवार को भारत-ऑस्ट्रेलिया-जापान-अमेरिका क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बैठक की अध्यक्षता की और उनके साथ इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने भाग लिया। क्वाड की बैठक में होर्मुज का मुद्दा छाया रहा। इस संगठन में शामिल देशों के विदेश मंत्रियों ने होर्मुज स्ट्रेट को जल्दी से जल्दी खोलने पर चर्चा की।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ‘टोल’ या अतिरिक्त शुल्क से इनकार

दिल्ली में हुई क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जारी साझा बयान में हॉर्मूज स्ट्रेट और लाल सागर को लेकर बड़ा संदेश दिया गया है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने साफ कहा है कि वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री मार्ग खुले और निर्बाध रहने चाहिए तथा किसी भी तरह के ‘टोल’ या अतिरिक्त शुल्क को स्वीकार नहीं किया जाएगा। क्वाड देशों ने अपने साझा बयान में मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता जताते हुए क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए जारी कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया। हालांकि बयान में किसी देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन इसे ईरान की उस चेतावनी से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें हॉर्मूज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण और संभावित शुल्क की बात सामने आई थी।

होर्मुज में जहाजों की आवाजाही नहीं रूकेगी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, भारत और अमेरिका सहित क्वाड देशों ने वैश्विक व्यापार को बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। क्वाड ने साफ कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे दुनिया के प्रमुख समुद्री रास्तों पर व्यापारिक जहाजों की आवाजाही किसी भी कीमत पर नहीं रुकने दी जाएगी। अगर किसी ने भी इन जहाजों को रोकने की कोशिश की, तो चारों देश मिलकर उसका कड़ा विरोध करेंगे। क्वाड देशों ने ऊर्जा बाजार को स्थिर और पारदर्शी बनाने की बात कही है। इसके लिए आपूर्ति शृंखला को मजबूत और विविध बनाया जाएगा। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए। यह वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।

अमेरिका ने लॉन्च किया सर्विलांस प्लान

क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यह साझेदारी अब सिर्फ चर्चा का मंच नहीं रह गई है, बल्कि ‘फ़ोरम ऑफ एक्शन’ बन चुकी है। उन्होंने भारत को सफल मेज़बानी के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि बैठक में बेहद उपयोगी और सार्थक चर्चा हुई। रुबियो ने कहा कि भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया चारों देश मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि क्वाड देशों ने इंडो-पैसिफिक सर्विलांस लॉन्च करने का फैसला किया है। उनका कहना था कि इंडो-पैसिफिक दुनिया का सबसे अहम समुद्री क्षेत्र है, जहां से करीब 60 प्रतिशत वैश्विक समुद्री व्यापार गुजरता है। ऐसे में समुद्री सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है। रुबियो ने कहा कि बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क लॉन्च करने का भी फैसला लिया गया है। माना जा रहा है कि इसका मकसद चीन पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक सप्लाई चेन को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि क्वाड सिर्फ सदस्य देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और अन्य देशों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।

राम रहीम को मिली 30 दिन की पैरोल, 16वीं बार रोहतक जेल से आया बाहर

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डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है। हरियाणा सरकार ने गुरमीत राम रहीम को 30 दिन की पैरोल मंजूर की है। इसके बाद मंगलवार सुबह वह रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर निकला। यह दूसरी बार है जब इस विवादित उपदेशक को राज्य सरकार ने इस साल पैरोल पर रिहा किया है। इससे पहले इस साल जनवरी में राज्य सरकार ने 40 दिन की पैरोल दी थी। वहीं, 16वीं बार है जब गुरमीत राम रहीम पैरोल या फरलो पर जेल से बाहर आया है।

बड़े और कड़े काफिले के साथ सिरसा रवाना

साध्वियों के यौन उत्पीड़न और एक पत्रकार की हत्या से मामले में दोषी गुरुमीत राम रहीम को रोहतक की सुनारिया जेल सुबह 6:30 बजे सिरसा के लिए रवाना किया गया। जेल से बाहर आते ही राम रहीम को पंजाब और हरियाणा पुलिस के भारी सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। सुरक्षा कारणों और स्थानीय कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए, राम रहीम को पुलिस के एक बहुत बड़े और कड़े काफिले के साथ सीधे सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के लिए रवाना किया गया है। सिरसा में ही डेरा चीफ का मुख्य आश्रम है।

जनवरी में भी आया था जेल से बाहर

इसी साल जनवरी में भी वह जेल से बाहर आया था। जानकारी के मुताबिक, इससे पहले 15 सितंबर, 2025 को भी राम रहीम को 40 दिनों की पैरोल मिली थी। इस बार की पैरोल के साथ वह 16वीं बार जेल से बाहर आया है।

2017 से जेल में बंद है

दोषी राम रहीम 25 अगस्त 2017 से जेल में है, जब उसे साध्वियों के यौन उत्पीड़न से संबंधित दो मामलों में 20 साल की कैद की सजा सुनाई गई थी। साल 2019 की जनवरी में राम रहीम को पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या मामले में दोषी करार देकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अक्टूबर 2021 में, सीबीआई कोर्ट ने डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में भी आजीवन कारावास की सजा दी थी। हालांकि, तीन साल बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में राम रहीम को बरी कर दिया था।

राम रहीम को कब-कब पैरोल या फरलो मिला?

अक्टूबर 2020 : 1 दिन की पैरोल

मई 2021 : 1 दिन की पैरोल

फरवरी 2022 : 21 दिन की फरलो

जून 2022 : 30 दिन की पैरोल

अक्टूबर 2022 : 40 दिन की पैरोल

जनवरी 2023 : 40 दिन की पैरोल

जुलाई 2023 : 30 दिन की पैरोल

नवंबर 2023 : 21 दिन की फरलो

जनवरी 2024 : 50 दिन की पैरोल

अगस्त 2024 : 21 दिन की फरलो

अक्टूबर 2024 : 20 दिन की पैरोल

जनवरी 2025 : 30 दिन की पैरोल

अप्रैल 2025 : 21 दिन की फरलो

अगस्त 2025 : 40 दिन की पैरोल

जनवरी 2026 : 40 दिन की पैरोल

मई 2026 : 30 दिन की पैरोल

इसे इतनी भावुकता से न लें..' कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर बोले सीजेआई

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कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। इसमें पार्टी की गतिविधियों की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में आरोप है कि संगठन सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों का गलत इस्तेमाल कर उनका व्यावसायिक फायदा उठा रहा है। PIL में फेक वकीलों की सीबीआई जांच की भी अपील की गई। इस जनहित याचिका पर भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा है कि इस मामले पर इतनी ज्यादा भावुक होने की जरूरत नहीं है।

सोमवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी ने सीजेआई की 'तिलचट्टे' वाली टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश की ओर से स्पष्टीकरण दिए जाने के बावजूद न्यापालिका को बदनाम करने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से पेश किया जा रहा है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के मुद्दे को इतना भावनात्मक तरीके से न लें।

उचित समय पर नियमानुसार होगी सुनवाई-सीजेआई

मुख्य न्यायाधीश ने जनहित याचिका की जल्द सुनवाई की मांग पर कहा कि ऐसी कोई गंभीर तात्कालिकता नहीं है और सर्वोच्च न्यायालय उचित समय पर इसकी नियमानुसार सुनवाई करेगा। जनहित याचिका में निर्देश देने की मांग की गई है कि अदालत में होने वाली बातचीत का इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए न किया जाए और फर्जी वकीलों की डिग्रियों के मामले में सीबीआई जांच की जाए। इसी मामले पर एक अन्य जनहित याचिका में मुख्य न्यायाधीश की 'तिलचट्टे' वाली टिप्पणी के बाद उभरे व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ी गतिविधियों की सीबीआई जांच की मांग की गई है। 

सीजेआई की टिप्पणी पर लॉन्च हुई सीजेपी

बता दें कि 15 मई, 2026 को सीजेआई सूर्यकांत की अदालत में वकीलों की फर्जी डिग्री के एक मामले की सुनवाई हो रही थी। एक वकील ने सीनियर वकील का दर्जा पाने के लिए अदालत से गुहार लगाई थी। इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने देश के उन कुछ चुनिंदा बेरोजगारों की बात की, जो बिना जिम्मेदारी के बात-बात पर सिस्टम को निशाना बनाते हैं। ऐसे कुछ बेरोजगारों के लिए सीजेआई ने ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल का। सीजेआई की इसी टिप्पणी को अमेरिका के बोस्टन में बैठे पुणे के रहने वाले एक भारतीय अभिजीत दीपके ने हथियार बनाया और अपने इंस्टाग्राम पोर्टल के जरिए व्यंग के इरादे से कॉकरोच जनता पार्टी नाम का मूवमेंट लॉन्च कर दिया। देखते ही देखते इंस्टाग्राम पर यह मूवमेंट फॉलोअर्स के मामले में बहुत ही सफल अभियान साबित हुआ और आज इसके फॉलोअरों की संख्या 23 मिलियन के करीब पहुंच चुकी है।

कौन से ‘सीजेपी’ बनाने वाले अभिजीत दीपके

30 साल के अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटजिस्ट हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल वो अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। अभिजीत 2020 से 2022 तक केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया स्ट्रैटजिस्ट रहे हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभिजीत आप के लिए वायरल मीम बेस्ड ऑनलाइन प्रचार का मटेरियल बनाते थे। एक इंटरव्यू में अभिजीत ने बताया कि उन्होंने निजी जिंदगी और आर्थिक स्थिरता के लिए आप छोड़कर बोस्टन यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया था। एडमिशन मिल गया, तो वे अमेरिका शिफ्ट हो गए। अभिजीत किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर एक्स अकाउंट पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं।