मनुष्य के जीवन में भक्ति ही वह शक्ति है जो उसे अंदर से मजबूत बनाती है : शंकराचार्य स्वामी नारायण नंद तीर्थ
लालगंज, मीरजापुर। गंगहरा कला में आयोजित शिव शक्ति महायज्ञ में मंगलवार को कथा के दौरान काशी धर्मपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नारायण नंद तीर्थ महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में भक्ति ही वह शक्ति है जो उसे अंदर से मजबूत बनाती है। भक्ति से ही ऊर्जा, विश्वास और कर्तव्यबोध उत्पन्न होता है जो व्यक्ति को सही मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं है बल्कि यह जीवन जीने का तरीका है। सच्ची भक्ति मनुष्य के अंतर्मन के विकारों को दूर कर उसे शांति और संतुलन प्रदान करती है। जो व्यक्ति श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान का स्मरण करता है।उसका जीवन स्वयं ही सरल होने लगता है।कथा में उन्होंने शिवपुराण के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए भगवान शिव और भक्त मार्कंडेय की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि सच्ची भक्ति में इतनी शक्ति होती है कि वह मृत्यु जैसे संकट को भी टाल सकती है। जब भक्त पूर्ण विश्वास के साथ ईश्वर की शरण में जाता है तब भगवान स्वयं उसकी रक्षा करते हैं।जगतगुरु ने कहा यह संसार नश्वर है और ब्रह्म ही एकमात्र सत्य है। सगुण और निर्गुण दोनों रूपों में ईश्वर की आराधना संभव है लेकिन भाव की शुद्धता सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि अहंकार त्यागकर भक्ति के मार्ग पर चलें तभी जीवन में सच्चे सुख और शांति की प्राप्ति होगी।उन्होंने कहा सद्गुरु का सान्निध्य जीवन को दिशा देता है और गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही मनुष्य इस भवसागर से पार हो सकता है। प्रवचन के दौरान पूरा वातावरण भक्ति रस में डूबा रहा और श्रद्धालु एकाग्र होकर कथा श्रवण करते रहे।इस दौरान समिति अध्यक्ष कृष्ण कुमार दुबे, जगत नारायण दुबे, रामजतन दुबे, डॉ गोविंद दुबे, अमरेश द्विवेदी, अनिल शुक्ला, चंद्रदत्त त्रिपाठी, राजेंद्र सिंह यादव, लवकुश त्रिपाठी, चंद्रभूषण पाल, सुनील दुबे, अमरेंद्र, लक्ष्मीनारायण, ज्ञानेंद्र दुबे, राहुल पांडे, उदित नारायण दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
Apr 13 2026, 20:34
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