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लखनऊ में डबल डेकर बस पलटी, 6 की मौत, 21 घायल
लखनऊ । राजधानी के गोसाईगंज इलाके में सोमवार शाम 4:30 बजे एक बड़ा हादसा हुआ। जौखंडी गांव के पास पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर लुधियाना (पंजाब) से दरभंगा (बिहार) जा रही डबल डेकर बस अनियंत्रित होकर पलट गई।

घटना में प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार 6 लोगों की मौत हो गई जबकि 21 यात्री गंभीर रूप से घायल हैं। बस में कुल लगभग 40 यात्री सवार थे।

पुलिस और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर बस में फंसे यात्रियों को निकाला। क्रेन की मदद से बस को उठाने का प्रयास किया गया। घायल यात्रियों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे का कारण चालक को झपकी आना बताया जा रहा है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को सूचित किया जा रहा है।यह हादसा यात्रियों की सुरक्षा और तेज़ रफ्तार पर नियंत्रण की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करता है।
पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर की रिपोर्ट: रात की दुर्घटनाओं में शराब और बिना हेलमेट बड़ी वजह
लखनऊ। राजधानी स्थित एपेक्स ट्रॉमा सेंटर पीजीआई लखनऊ की एक अध्ययन रिपोर्ट में सामने आया है कि रात के समय होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में शराब पीकर वाहन चलाना और हेलमेट न पहनना बड़ी वजह बन रहे हैं। वर्ष 2018 से 2024 के बीच रात में भर्ती हुए घायलों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।डॉ. एके सिंह और डॉ. पीके मिश्रा द्वारा तैयार यह शोध रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल Cureus में प्रकाशित हुई है। अध्ययन में कुल 3,705 घायलों को शामिल किया गया। रिपोर्ट की प्रमुख बातें रात में लाए गए घायलों में से लगभग हर दूसरे व्यक्ति ने शराब पी रखी थी। केवल एक तिहाई दोपहिया सवारों ने हेलमेट पहना था। चार पहिया वाहन चालकों में सिर्फ 41% ने सीट बेल्ट लगाई थी। कुल मामलों में 67.3% सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े थे। इनमें से 84.7% दोपहिया वाहन दुर्घटनाएं थीं। 78.3% मरीज पुरुष थे, औसत आयु 37.5 वर्ष। 44.5% मामलों में सिर की चोट पाई गई। आईसीयू और मृत्यु दर अध्ययन में पाया गया कि 58.4% मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। 45.8% को मैकेनिकल वेंटिलेशन की जरूरत हुई। कुल मृत्यु दर 4% रही, जिनमें से 42.2% मौतें 24 घंटे के भीतर हुईं। बुजुर्गों में बाथरूम में गिरने की घटनाएं रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि काफी बुजुर्ग बाथरूम में फिसलकर घायल हो रहे हैं। इसकी बड़ी वजह चिकनी टाइल्स को बताया गया है, जिनकी फिसलन से गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ की राय ट्रॉमा सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. वैभव जायसवाल के अनुसार, दुर्घटनाओं में तेज रफ्तार, लापरवाही और जागरूकता की कमी बड़ी वजह है। बेहतर सड़कें और एक्सप्रेसवे यात्रा का समय तो कम कर रहे हैं, लेकिन सावधानी न बरतने पर हादसों का खतरा भी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने जगह-जगह ट्रॉमा सेंटर बनाने और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है।
यूपी में छह लघु जल विद्युत परियोजनाएं 42 साल के लिए लीज पर देने की तैयारी, विरोध तेज
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार छह लघु जल विद्युत परियोजनाओं को 42 वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को लीज पर देने की तैयारी में है। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने टेंडर जारी कर दिया है। टेंडर के अनुसार निजी कंपनियों को 1.5 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट अग्रिम प्रीमियम के आधार पर परियोजनाएं सौंपी जाएंगी, जिसके बाद वे 42 वर्षों तक उनका संचालन करेंगी।

प्रदेश की प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएं

प्रदेश में पहले से
300 मेगावाट रिहंद,
99 मेगावाट ओबरा,
72 मेगावाट माताटीला (ललितपुर),
72 मेगावाट खारा

जल विद्युत परियोजनाएं संचालित हैं। इसके अतिरिक्त छह लघु जल विद्युत परियोजनाएं भी हैं, जिनके पास करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि और अन्य परिसंपत्तियां मौजूद हैं।

लीज पर प्रस्तावित परियोजनाएं

लीज पर दी जाने वाली परियोजनाओं में शामिल हैं –
भोला (2.7 मेगावाट)
सलावा (3 मेगावाट)
निर्गजनी (5 मेगावाट)
चित्तौरा (3 मेगावाट)
पलरा (0.6 मेगावाट)
सुमेरा (1.5 मेगावाट)
ये सभी परियोजनाएं अपर गंगा नहर पर स्थित हैं और लगभग 90 से 97 वर्ष पुरानी बताई जा रही हैं।

निजीकरण के खिलाफ संगठनों का विरोध

टेंडर जारी होते ही ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।

ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडेरेशन की आपत्ति

ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडेरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि अपर गंगा नहर में वर्षभर पानी उपलब्ध रहता है, जिससे इन परियोजनाओं में लगातार बिजली उत्पादन संभव है।उन्होंने दावा किया कि सीमित निवेश से इनके पुनरुद्धार और आधुनिकीकरण की लागत एक वर्ष में वसूल की जा सकती है। साथ ही आरोप लगाया कि टेंडर में स्थापित क्षमता 15.5 मेगावाट के बजाय 6.3 मेगावाट दर्शाई गई है और परिसंपत्तियों का मूल्य भी कम आंका गया है। उन्होंने टेंडर निरस्त होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।

कर्मचारियों पर असर का मुद्दा

पॉवर ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी केन और कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि यह कदम निजीकरण की नई रणनीति है। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है और आरक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।उन्होंने यह भी कहा कि निजी कंपनियां अपनी शर्तों पर नियुक्तियां करेंगी और सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है। संगठनों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर टेंडर निरस्त करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अलीगढ़ में चर्चा बनी अजब प्रेम की गजब कहानी
* शादी में नाचने आई डांसर संग दूल्हा फरार, नवविवाहिता ने लगाया हनीट्रैप का आरोप
अलीगढ़। अलीगढ़ के गांधी पार्क थाना क्षेत्र से एक ऐसी फिल्मी कहानी सामने आई है, जिसने दो परिवारों की खुशियों को अचानक चिंता में बदल दिया। शादी के जश्न, बैंड-बाजे और मेहमानों की भीड़ के बीच जो हुआ, उसने सभी को हैरान कर दिया।
जानकारी के मुताबिक, हाल ही में इलाके के एक युवक की धूमधाम से शादी हुई थी। विवाह समारोह में रंग जमाने के लिए एक डांसर को बुलाया गया था। कार्यक्रम के दौरान दूल्हा और डांसर के बीच बातचीत शुरू हुई, जो देर रात तक चलती रही। परिजनों का कहना है कि शादी के कुछ ही समय बाद दूल्हा अचानक लापता हो गया। बाद में पता चला कि वह उसी डांसर के साथ घर छोड़कर चला गया है।
घटना के बाद नई नवेली दुल्हन ने आरोप लगाया है कि डांसर ने उसके पति को हनीट्रैप में फंसाकर अपने साथ ले गई। दुल्हन का कहना है कि शादी के दौरान ही डांसर ने योजनाबद्ध तरीके से उसके पति से नजदीकियां बढ़ाईं और फिर उसे बहला-फुसलाकर फरार हो गई।
परिवार वालों ने इस मामले की शिकायत पुलिस से की है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है और दोनों की तलाश की जा रही है। मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल के आधार पर संभावित ठिकानों की छानबीन की जा रही है।
इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। जहां एक ओर दुल्हन और उसका परिवार सदमे में है, वहीं दूसरी ओर लोग इस ‘अजब प्रेम की गजब कहानी’ को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पुलिस जांच के बाद ही सच्चाई पूरी तरह सामने आ सकेगी।
सीएम योगी आज सिंगापुर-जापान दौरे पर रवाना
यूपी को ‘मैन्युफैक्चरिंग हब ऑफ इंडिया’ बनाने की मुहिम तेज, 33 वैश्विक कंपनियों से करेंगे संवाद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश को ‘मैन्युफैक्चरिंग हब ऑफ इंडिया’ बनाने के लक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज चार दिवसीय सिंगापुर और जापान दौरे पर रवाना होंगे। वर्ष 2017 में म्यांमार यात्रा के बाद यह उनका पहला विदेशी दौरा है, जिसे प्रदेश की निवेश कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
23-24 फरवरी को सिंगापुर और 25-26 फरवरी को जापान प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री 33 वैश्विक कंपनियों के शीर्ष प्रतिनिधियों से मुलाकात कर प्रदेश में निवेश, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विस्तार के अवसरों पर चर्चा करेंगे।

* जी-टू-बी और राउंड टेबल मीटिंग में होगा सीधा संवाद
दौरे की खास बात यह होगी कि मुख्यमंत्री जी-टू-बी (गवर्नमेंट टू बिजनेस) बैठकों और राउंड टेबल मीटिंग के माध्यम से निवेशकों से सीधे संवाद करेंगे। वे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक रोडमैप, नीति स्थिरता, भूमि बैंक, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और कौशल विकास की संभावनाओं पर स्पष्ट और परिणामोन्मुख चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री प्रवासी भारतीयों और उत्तर प्रदेश मूल के लोगों को संबोधित करने के साथ स्कूली बच्चों से भी संवाद करेंगे और प्रदेश की बदली तस्वीर साझा करेंगे।

* सिंगापुर में 25 कंपनियों से मुलाकात
सिंगापुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री 25 प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे।

* डेटा सेंटर और टेक्नोलॉजी: Google, ST Telemedia Global Data Centres

* एग्रीबिजनेस: Japfa, Olam International

* लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर: Mapletree Investments, SATS Ltd

* ग्रीन और सौर ऊर्जा: AVPN, EDP Renewables

* इंडस्ट्रियल पार्क और एविएशन: Sembcorp Industries, Singapore Airlines Engineering Company

* ग्लोबल फंड्स: Temasek Holdings, GIC, Blackstone Inc.

* फिनटेक व बैंकिंग: DBS Bank

* जापान में ऑटोमोबाइल और सेमीकंडक्टर पर फोकस
जापान प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री आठ प्रमुख कंपनियों से निवेश वार्ता करेंगे।

* ऑटोमोबाइल: Kubota, Suzuki

* सेमीकंडक्टर: Tokyo Electron

* इलेक्ट्रॉनिक्स: Toshiba

- ग्रीन हाइड्रोजन व रियल एस्टेट: Marubeni

* वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर कदम
प्रदेश सरकार का मानना है कि 25 करोड़ की आबादी वाला उत्तर प्रदेश उत्पादन और उपभोग दोनों का बड़ा केंद्र बन सकता है। मजबूत कानून व्यवस्था, नीति स्थिरता और तीव्र कनेक्टिविटी के आधार पर यह दौरा राज्य को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।मुख्यमंत्री की यह विदेश यात्रा न केवल निवेश आकर्षित करने का प्रयास है, बल्कि वैश्विक मंच पर ‘ब्रांड यूपी’ को सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में भी एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।
लखनऊ मेट्रो की पटरियां मानकों से कमजोर, CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
* स्पीड लिमिट प्रमाणपत्र का नवीनीकरण नहीं, सुरक्षा मानकों की अनदेखी; तत्कालीन एमडी कुमार केशव पर उठे सवाल

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मेट्रो संचालन को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। Comptroller and Auditor General of India (CAG) की हालिया रिपोर्ट में सामने आया है कि मेट्रो की रेल पटरियां निर्धारित तकनीकी मानकों से कमजोर पाई गईं। रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की बात कही गई है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, मेट्रो ट्रैक से संबंधित कई विशेष मानकों का पालन नहीं किया गया। इतना ही नहीं, स्पीड लिमिट प्रमाणपत्र का समय पर नवीनीकरण भी नहीं कराया गया, जिससे उच्च गति पर संचालन के दौरान संभावित खतरे की आशंका बढ़ गई। यह स्थिति सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा को जोखिम में डालने वाली मानी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, परियोजना से जुड़ी प्रमुख कंपनियों जैसे Tata Group और Larsen & Toubro (L&T) ने पहले ही मेट्रो प्रशासन को तकनीकी खामियों को लेकर आगाह किया था। बावजूद इसके, आवश्यक सुधारात्मक कदम समय पर नहीं उठाए गए।

जांच में यह भी सामने आया है कि ‘कालिंदी’ नामक फर्म को पटरियां बिछाने का ठेका दिया गया था, जो कथित तौर पर कागजों पर ही सक्रिय बताई जा रही है। इस फर्म और मेट्रो प्रशासन के बीच सांठगांठ के आरोप भी उभरकर सामने आए हैं।

मामले में तत्कालीन प्रबंध निदेशक Kumar Keshav की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि परियोजना में अनियमितताओं के बावजूद उन्होंने प्रभावी निगरानी नहीं की। सूत्रों का दावा है कि इस मुद्दे पर संपर्क किए जाने के बावजूद उन्होंने फोन उठाना भी बंद कर दिया है।

इस पूरे मामले ने मेट्रो प्रशासन की कार्यशैली और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि संबंधित एजेंसियां इस रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई करती हैं और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण मोर्चा की रैली, हलवासिया चौराहे पर पुलिस से नोकझोंक


* सैकड़ों ब्राह्मण बटुकों के शंखनाद के साथ परिवर्तन चौक से गांधी प्रतिमा तक शांति मार्च का प्रयास

लखनऊ। यूजीसी कानून को वापस लेने, सवर्ण आयोग के गठन और आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर शनिवार को सवर्ण मोर्चा के बैनर तले परिवर्तन चौक से गांधी प्रतिमा, हजरतगंज तक शांति मार्च निकाला गया।
हजारों की संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने जगह-जगह बैरिकेडिंग की व्यवस्था की थी। परिवर्तन चौक और केडी सिंह बाबू मेट्रो स्टेशन के पास लगाए गए बैरिकेड्स को पार करते हुए कई कार्यकर्ता हलवासिया चौराहे तक पहुंच गए, जहां भारी पुलिस बल ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक भी हुई। बाद में कई कार्यकर्ता सड़क पर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया।
रैली की शुरुआत परिवर्तन चौक से हुई, जहां सैकड़ों ब्राह्मण बटुकों ने शंखनाद कर कार्यक्रम का आगाज किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता तिरंगा और भगवा ध्वज लेकर मार्च में शामिल हुए। शंखनाद की गूंज के बीच मार्च आगे बढ़ा, जिससे क्षेत्र में विशेष माहौल देखने को मिला।
सवर्ण मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक प्रदीप सिंह और राष्ट्रीय प्रवक्ता पंडित अभिनव नाथ त्रिपाठी ने कहा कि यूजीसी का यह कानून सवर्ण समाज के हितों के विरुद्ध है और इसे वापस लिए जाने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सवर्ण आयोग के गठन, आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने तथा सवर्ण समाज के इतिहास के संरक्षण की मांग उठाई। साथ ही बिना पर्याप्त जांच के एससी-एसटी कानून के तहत दर्ज मुकदमों पर रोक लगाने की भी मांग की।
प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि रैली को प्रभावित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश पुलिस ने प्रदेश भर में सैकड़ों कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को हाउस अरेस्ट किया तथा नोटिस जारी किए। उन्होंने इसे जनआवाज दबाने का प्रयास बताया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय राजपूत करनी सेना के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह रघुवंशी, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा युवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अवनीश सिंह तथा अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष राजेंद्र नाथ त्रिपाठी अपने समर्थकों के साथ मौजूद रहे।
इसके अतिरिक्त सवर्ण मोर्चा के संरक्षक कुंवर दुर्गेश प्रताप सिंह, बसंत सिंह बघेल, टी.पी. पांडे (समाजसेवी), आनंद त्रिपाठी और मीडिया प्रभारी उमेश मिश्रा व प्रवक्ता पंडित अभिनव नाथ त्रिपाठी सहित अनेक कार्यकर्ता कार्यक्रम में शामिल रहे।
SIR-2026 के तहत 22 फरवरी को प्रदेशभर में विशेष अभियान, बूथों पर मिलेंगे बीएलओ
* मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और त्रुटि सुधार का अवसर, सुबह 10:30 से दोपहर 1:30 बजे तक चलेगा अभियान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने जानकारी दी कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम (SIR)-2026 के अंतर्गत दावा एवं आपत्ति अवधि में अधिक से अधिक पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने तथा सूची को शुद्ध करने के उद्देश्य से चार विशेष अभियान दिवस निर्धारित किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि पूर्व में 11 जनवरी, 18 जनवरी और 31 जनवरी 2026 को विशेष अभियान दिवस आयोजित किए जा चुके हैं। इसी क्रम में रविवार, 22 फरवरी 2026 को प्रदेश के सभी मतदेय स्थलों पर चौथा विशेष अभियान दिवस आयोजित किया जा रहा है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विशेष अभियान दिवस पर प्रत्येक मतदेय स्थल पर प्रातः 10:30 बजे से अपराह्न 1:30 बजे तक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) उपस्थित रहेंगे। उनके पास 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित आलेख्य मतदाता सूची तथा फार्म-6, 6A, 7 और 8 उपलब्ध रहेंगे।
प्रत्येक मतदान केंद्र पर हेल्प डेस्क की व्यवस्था की जाएगी, जहां मतदाताओं को फार्म भरने में सहायता प्रदान की जाएगी। साथ ही मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) को भी अभियान की जानकारी देकर सहयोग लिया जाएगा। सभासदों, ग्राम प्रधानों एवं स्वयंसेवकों का नियमानुसार सहयोग भी सुनिश्चित किया जाएगा।
अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी भ्रमणशील रहकर पर्यवेक्षण करेंगे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रदेश के नागरिकों से अपील की है कि 22 फरवरी 2026 को अपने-अपने बूथ पर जाकर 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित मतदाता सूची में अपना एवं परिवार के सदस्यों का नाम अवश्य जांच लें। यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम सूची में दर्ज नहीं है या 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके युवाओं का नाम शामिल नहीं है, तो वे फार्म-6 भरकर बीएलओ को जमा करें। आवेदन ECINET मोबाइल एप्लीकेशन अथवा Voters' Service Portal (voters.eci.gov.in) के माध्यम से ऑनलाइन भी किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त मतदाता सूची में दर्ज विवरण में किसी भी प्रकार की त्रुटि के सुधार के लिए फार्म-8 भरा जा सकता है।
यूपी बजट सत्र खत्म, ‘लखनऊ दर्शन’ बस में फिर शामिल हुई विधानसभा की सैर

* इलेक्ट्रिक डबल डेकर से राजधानी के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण, रिंग थियेटर से लोकतंत्र के दरबार तक खास अनुभव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश का बजट सत्र समाप्त होते ही राजधानी के पर्यटकों के लिए अच्छी खबर है। अब ‘लखनऊ दर्शन’ बस सेवा के जरिए पर्यटक एक बार फिर भव्य उत्तर प्रदेश विधानसभा भवन का भ्रमण कर सकेंगे। बजट सत्र के दौरान सुरक्षा कारणों से विधानसभा भ्रमण अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया था, जिसे अब पुनः शुरू कर दिया गया है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि विशाल गुंबद, भव्य स्थापत्य और ऐतिहासिक महत्व से युक्त विधानसभा भवन राजधानी की पहचान है। इसके दोबारा टूर में शामिल होने से ‘लखनऊ दर्शन’ और भी आकर्षक हो गया है।

* रिंग थियेटर (जीपीओ): काकोरी कांड की गूंज आज भी जीवंत
‘लखनऊ दर्शन’ के प्रमुख स्थलों में जनरल पोस्ट ऑफिस लखनऊ (पूर्व का रिंग थियेटर) भी शामिल है। 9 अगस्त 1925 को हुए काकोरी कांड के बाद अंग्रेज सरकार ने करीब 40 क्रांतिकारियों को गिरफ्तार किया था। सुरक्षा कारणों से तत्कालीन रिंग थियेटर में विशेष अदालत गठित की गई, जहां लगभग 10 महीने तक मुकदमा चला।
अदालत ने राम प्रसाद बिस्मिल, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह और अशफाक उल्ला खान को फांसी की सजा सुनाई। वहीं शचीन्द्रनाथ सान्याल को आजीवन कारावास (कालापानी) तथा मन्मथनाथ गुप्त सहित अन्य क्रांतिकारियों को कठोर कारावास दिया गया। आज भी यहां मौजूद ऐतिहासिक निशानियां और संग्रहालय पर्यटकों को उस दौर की याद दिलाते हैं।

* पर्यटन विस्तार के लिए सरकार प्रतिबद्ध
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “बजट सत्र की समाप्ति के साथ ही विधानसभा भ्रमण दोबारा शुरू किया जा रहा है। ‘लखनऊ दर्शन’ इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस सेवा के माध्यम से पर्यटक राजधानी की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक विरासत को नजदीक से देख सकेंगे। सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने और प्रदेश की समृद्ध परंपराओं से लोगों को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।”

* इलेक्ट्रिक डबल डेकर से करें लखनऊ की सैर
उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) द्वारा संचालित ‘लखनऊ दर्शन’ इलेक्ट्रिक डबल डेकर बस सेवा प्रतिदिन सुबह और शाम दो पालियों में 1090 चौराहे से संचालित होती है। यह बस राजधानी के प्रमुख ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्थलों का भ्रमण कराती है।
विधानसभा भवन के पुनः शामिल होने से इस टूर का आकर्षण और बढ़ गया है। टिकट आधिकारिक वेबसाइट या प्रस्थान स्थल से प्राप्त की जा सकती है। किराया वयस्कों के लिए ₹500 और बच्चों के लिए ₹400 निर्धारित है। बस में प्रशिक्षित टूर गाइड यात्रा के दौरान विस्तृत जानकारी देते हैं और इलेक्ट्रिक बस होने के कारण सफर पर्यावरण के अनुकूल एवं आरामदायक रहता है।
युवाओं को विरासत से जोड़ने की अनूठी पहल, लखनऊ में ‘यूथ हेरिटेज लीडरशिप प्रोग्राम’ आयोजित
* छतर मंजिल से कैसरबाग तक ऐतिहासिक धरोहरों का शैक्षणिक भ्रमण, 70 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भारतीय विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय “यूथ हेरिटेज लीडरशिप प्रोग्राम” का आयोजन किया गया। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय (संस्कृति विभाग) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का सफल संचालन इतिहास संस्थान, नई दिल्ली के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को भारतीय सांस्कृतिक धरोहरों के महत्व से परिचित कराना और उन्हें विरासत संरक्षण के लिए नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार करना था। इसी क्रम में प्रतिभागी छात्रों को लखनऊ के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया।
विद्यार्थियों ने छतर मंजिल तथा कैसरबाग स्थित जनरल कोठी का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें इन इमारतों के इतिहास, स्थापत्य शैली और संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी सरल भाषा में दी गई, जिससे वे अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
निदेशक सुश्री रेनू द्विवेदी ने विद्यार्थियों को विरासत की परिभाषा, स्वरूप और उसकी पहचान के बारे में विस्तार से बताया। संवादात्मक सत्र के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्रों को अपनी विरासत के प्रति जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित किया।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अपने संदेश में कहा, “इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक इमारतों का भ्रमण कराना नहीं है, बल्कि युवाओं को अपनी विरासत से भावनात्मक रूप से जोड़ना है। विरासत केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि हमारी पहचान और भविष्य की दिशा भी है। इसलिए युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।”
इस अवसर पर जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालक विद्यालय एवं जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय के कक्षा 9वीं और 11वीं के लगभग 70 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में इतिहास संस्थान से सुश्री सुयशा सहित पुरातत्व निदेशालय के अधिकारी, शिक्षकगण और विद्यालय कर्मचारी उपस्थित रहे। युवा सहभागिता के माध्यम से विरासत संरक्षण की दिशा में यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।