झारखंड विधानसभा में गणतंत्र दिवस: "संविधान केवल विधिक दस्तावेज नहीं, एक सामाजिक अनुबंध है" – अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो
रांची, 26 जनवरी 2026: 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर झारखंड विधानसभा परिसर में गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। विधानसभा अध्यक्ष श्री रबीन्द्रनाथ महतो ने ध्वजारोहण के पश्चात उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए संविधान की महत्ता और लोकतंत्र की जड़ों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
भाषण की मुख्य बातें:
1. संविधान: लोकतंत्र की आधुनिक आत्मा अध्यक्ष ने कहा कि 26 जनवरी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक संकल्प का प्रतीक है जिसने भारत को संप्रभु और लोकतांत्रिक गणराज्य बनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र भारत के लिए नया नहीं है; वैशाली के गणराज्य और हमारी प्राचीन ग्राम सभाओं की परंपरा इस बात का प्रमाण हैं कि लोकतंत्र हमारी सभ्यता की आत्मा में बसा है।
2. सामाजिक और आर्थिक समानता की चुनौती बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को उद्धृत करते हुए उन्होंने आत्ममंथन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक समानता तो हमें मिल गई, लेकिन सामाजिक और आर्थिक असमानता को दूर करना आज भी हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती और संवैधानिक जिम्मेदारी है।
3. झारखंड के वीर सपूतों को नमन अध्यक्ष ने झारखंड की क्रांतिकारी माटी के महानायकों को याद किया। उन्होंने तिलका मांझी, सिदो-कान्हू, भगवान बिरसा मुंडा, नीलाम्बर-पीताम्बर और शेख भिखारी जैसे वीरों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सपूतों ने विदेशी शासन के विरुद्ध न्याय और स्वाभिमान की जो अलख जगाई, वही हमारे लोकतंत्र की नींव है।
4. समावेशी विकास और आरक्षण सामाजिक न्याय पर जोर देते हुए उन्होंने कहा:
"आरक्षण और समान अवसर जैसे प्रावधान किसी वर्ग के विरुद्ध विशेषाधिकार नहीं हैं, बल्कि ये सदियों से वंचित और हाशिये पर रहे समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने का संवैधानिक संकल्प हैं।"
5. भविष्य का संकल्प उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से आग्रह किया कि संविधान की भावना को केवल शब्दों में नहीं, बल्कि व्यवहार में आत्मसात करें ताकि लोकतंत्र का लाभ समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुँच सके।



















3 hours ago
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