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शिक्षक भर्ती घोटाला मामले ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, 25 हजार भर्ती रद्द करने का फैसला बरकरार

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पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में 25,000 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती रद करने के कोलकाता हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने इस बारे में पिछले साल आए हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। इसके अलावा भी इस मसले पर 120 से ज्यादा याचिकाएं दाखिल हुई थीं।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि व्यापक अनियमितताओं के कारण पूरी चयन प्रक्रिया को दोषपूर्ण घोषित करना सही है। सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हमें हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई वैध आधार या कारण नहीं मिला।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले भर्ती किए गए लोगों को अपनी नौकरी के दौरान प्राप्त वेतन वापस करने की आवश्यकता नहीं है। बता दें कि अप्रैल 2024 में दिए फैसले में हाई कोर्ट ने सभी नौकरियों को रद्द करते हुए इन लोगों से ब्याज समेत पूरा वेतन वसूलने के लिए भी कहा था।

वहीं, सु़प्रीम कोर्ट ने कहा कि नई चयन प्रक्रिया को 3 महीने के भीतर शुरू करके पूरा करना होगा। नई चयन प्रक्रिया में मौजूदा प्रक्रिया के बेदाग उम्मीदवारों के लिए छूट भी हो सकती है।

बीते साल 7 मई को सुप्रीम कोर्ट ने नौकरी रद्द करने के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच जारी रखने के लिए कहा था। सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा था कि इनमें से जितने लोगों की भर्ती भ्रष्टाचार के जरिए हुई है, उनको ही नौकरी से बाहर करना बेहतर होगा।

राज्य सरकार ने दावा किया था कि 7-8 हज़ार लोगों ने गलत तरीके से नौकरी पाई है। हालांकि कोर्ट का मानना था कि इस बारे में संतोषजनक आंकड़ा रखा नहीं गया। सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि राज्य सरकार को इस नियुक्ति से जुड़ा डिजिटल रिकॉर्ड बनाए रखना चाहिए था।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि यह व्यवस्थागत तरीके से गड़बड़ी हुई है। सरकारी नौकरियां बहुत कम हैं। लोग उन्हें हासिल करने के लिए गंभीरता से प्रयास करते हैं। अगर जनता का विश्वास चला गया तो कुछ नही बचेगा।

पीठ ने सीबीआई जांच के उच्च न्यायालय के निर्देश को चुनौती देने वाली पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई 4 अप्रैल के लिए तय की। शीर्ष अदालत ने 10 फरवरी को इस मामले में दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

वक्फ बिल पर सोनिया गांधी ने सरकार को घेरा, बोलीं- जबरन पारित किया विधेयक, संविधान पर हमला

#soniagandhionwaqfamendment_bill

वक्फ संशोधन बिल लोकसभा में पास हो गया है। अब इसे आज राज्यसभा में पेश किया जाएगा। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर सरकार को घेरा है। उन्होंने विधेयक और उसे पारित कराने के लिए सरकार की ओर से दिखाई गई जल्दबाजी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस विधेयक को जबरन पारित किया गया। हमारी पार्टी का रुख स्पष्ट है। यह विधेयक संविधान पर एक हमला है।

कांग्रेस संसदीय पार्टी (सीपीपी) की आम सभा की बैठक में सोनिया गांधी ने कहा, कल, वक्फ अमेंडमेंट बिल, 2024 लोकसभा में पारित हो गया, और आज यह राज्यसभा में आने वाला है। यह बिल वास्तव में जबरदस्ती पारित कराया गया। हमारी पार्टी का रुख स्पष्ट है। यह बिल संविधान पर सीधा हमला है।

बीजेपी समाज को बांटकर राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है-सोनिया गांधी

सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) की एक सोची-समझी रणनीति है, जिसका उद्देश्य समाज में हमेशा विभाजन बनाए रखना है। उनका मानना है कि बीजेपी समाज को बांटकर अपना राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।

मोदी सरकार देश को रसातल में धकेल रही-सोनिया गांधी

लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित किए जाने के कुछ घंटों बाद कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में कांग्रेस सांसदों को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार देश को रसातल में धकेल रही है। सरकार शिक्षा, नागरिक अधिकार, लोगों की स्वतंत्रता, हमारे संघीय ढांचे, या चुनाव का संचालन हो, किसी को भी बख्श नहीं रही है। उन्होंने दावा किया कि अब हमारा संविधान केवल कागजों पर रह जाएगा। हम जानते हैं कि उनका इरादा उसे भी ध्वस्त करने का है।

लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय-सोनिया गांधी

सोनिया गांधी ने कहा कि यह हमारे लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने की अनुमति नहीं मिल रही है। इसी तरह, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे जी को बार-बार अनुरोध के बावजूद वह कहने की अनुमति नहीं दी जाती है जो वह कहना चाहते हैं और वास्तव में उन्हें कहना चाहिए। आपकी तरह मैं भी इसकी साक्षी रही हूं कि कैसे सदन हमारी वजह से नहीं, बल्कि खुद सत्तापक्ष के विरोध के कारण स्थगित होता है।

12 घंटे की चर्चा के बाद वक्फ संशोधन बिल लोकसभा में आधी रात को हुआ पास, अब राज्य सभा की बारी

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वक्फ़ संशोधन बिल लोकसभा में पास हो गया है। विधेयक पर लोकसभा में 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई। वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 रात 1.56 बजे लोकसभा में पारित हुआ। विधेयक पर 1 घंटे 50 मिनट तक वोटिंग चली। विधेयक के समर्थन में 288 वोट पड़े, जबकि विरोध में 232 वोट पड़े। इससे पहले विधेयक पर लोकसभा में 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई। सदन ने विपक्ष के सभी संशोधनों को भी ध्वनिमत से खारिज कर दिया। अब आज विधेयक को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। राज्यसभा में भी विधेयक को लेकर हंगामे के आसार हैं।

लोकसभा से हरी झंडी मिलने के बाद अब ये बिल गुरुवार को राज्य सभा में पेश किया जाएगा। बिल के लोकसभा में पेश होने के बाद बुधवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। कांग्रेस, एसपी, टीएमसी समेत इंडिया गठबंधन के दल इस बिल का विरोध किया। कांग्रेस के गौरव गोगोई और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सांवत ने आरोप लगाया कि बिल पर बनी संयुक्त संसदीय समिति में ठीक से चर्चा तक नहीं हुई।

वहीं बीजेपी के सहयोगी दलों जेडीयू और टीडीपी ने इस बिल का समर्थन किया। सरकार 1995 में बने वक़्फ़ बिल में संशोधन कर कई नए प्रावधान जोड़ने जा रही है।

संसद के निचले सदन में विधेयक पारित होने पर विभिन्न दलों के सांसदों और नेताओं ने प्रतिक्रिया में क्या कहा, आइए जानते हैं-

विधेयक को अदालत में चुनौती दी जाएगी- कल्याण बनर्जी

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, 'यह असांविधानिक विधेयक है। इस विधेयक को अदालत में चुनौती दी जाएगी। यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के लिए खतरनाक है। बीजेपी को इसे पारित करने की कीमत चुकानी होगी।'

आज काला दिन, हमारे अधिकारों पर हमला- इमरान मसूद

संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सदस्य और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, 'यह काला दिन है। यह हमारे अधिकारों पर हमला है। मुस्लिम समुदाय और वक्फ दोनों को इससे नुकसान होगा। यह दिन इतिहास में काले दिन के रूप में दर्ज होगा। हम अदालत जाएंगे और इस विधेयक के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे।'

सरकार की नीयत और मकसद सही नहीं- अवधेश प्रताप सिंह

समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, 'हमने लगातार इस विधेयक का विरोध किया है और सरकार की नीयत व मकसद सही नहीं है। वे वक्फ बोर्ड की संपत्ति हड़पना चाहते हैं। यह विधेयक संविधान के खिलाफ है।

विधेयक संविधान और मुसलमानों के खिलाफ: चंद्रशेखर आजाद

आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा, हम इस विधेयक के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और सड़कों पर उतरेंगे, जैसे किसान आंदोलन के दौरान किया था। जब तक सरकार इस विधेयक को वापस नहीं लेती, हमारी लड़ाई जारी रहेगी, जैसे उन्होंने किसान बिल वापस लिया था। वक्फ (संशोधन) विधेयक संविधान और मुसलमानों के खिलाफ है।

यह विधेयक सही नहीं- हनुमान बेनीवाल

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल ने कहा, हमने इस विधेयक का विरोध किया। जेपीसी में विपक्षी सदस्यों को बोलने नहीं दिया गया। हिंदू और मुसलमान दोनों ने मिलकर देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी। यह विधेयक सही नहीं है। वे जनता को गुमराह करना चाहते हैं।

संविधान को नजरअंदाज किया जा रहा- पप्पू यादव

बिहार के पूर्णियां से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा, सिर्फ इसलिए कि उनके पास संख्या है, वे संविधान को नजरअंदाज कर रहे हैं। क्या उनके पास एक भी मुस्लिम सांसद है? क्या वे किसी मुसलमान को टिकट देते हैं? वे असली मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहते हैं। देश इसे स्वीकार नहीं करेगा और उन्हें करारा जवाब देगा।

ट्रंप के टैरिफ का भारत पर कितना होगा असर, दवा से लेकर स्टील और ज्वैलरी तक पर सीधा पड़ेगा प्रभाव

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अमेरिका ने 'डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ़' का ऐलान कर दिया है। 100 से ज्यादा देशों पर लगाए गए जवाबी टैरिफ वाले देशों की सूची में भारत का नाम भी है। भारत पर 26% टैरिफ़ लगाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के एलान के बाद से एशियाई देशों पर खासा असर पड़ा है। भारत अमेरिकी वस्तुओं पर सबसे ज़्यादा टैरिफ लगाने वाले देशों में शामिल है।

ट्रंप ने चीन पर 34 फीसदी, वियतनाम पर 46 फीसदी और कंबोडिया पर 49 फीसदी टैरिफ लगाया है। लेकिन इन देशों की तुलना में भारत की स्थिति काफी बेहतर है। एशिया डिकोडेड की प्रियंका किशोर के मुताबिक, भारत के लिए 26 फ़ीसदी टैरिफ काफी ज़्यादा है और इससे भारत के कामगार बुरी तरह से प्रभावित होंगे।

दवाओं की कीमतों में उछाल

भारत अमेरिका को हर साल करीब 12.7 अरब डॉलर की जेनेरिक दवाएं निर्यात करता है। रेसिप्रोकल टैरिफ लागू होने से इन दवाओं पर शुल्क बढ़ सकता है, जिससे दवा कंपनियों की लागत बढ़ेगी। इसका असर भारत में भी दवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे आपकी मेडिकल खर्च की योजना प्रभावित होगी।

खाद्य तेल और कृषि उत्पाद होंगे महंगे

खाद्य तेल जैसे नारियल और सरसों तेल पर 10.67% टैरिफ अंतर की संभावना है। इससे इनकी कीमतें बढ़ेंगी, जो आपकी रसोई के बजट को सीधे प्रभावित करेगा। साथ ही, निर्यात में कमी से किसानों की आय पर भी असर पड़ेगा।

प्रसंस्कृत खाद्य, अनाज, सब्जियां, फल मसाले होंगे महंगे

प्रसंस्कृत खाद्य, चीनी और कोको निर्यात पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि इसमें टैरिफ अंतर 24.99 प्रतिशत है। पिछले साल इसका निर्यात 1.03 अरब डॉलर था। इसी तरह, अनाज, सब्जियां, फल और मसाले के क्षेत्र में टैरिफ अंतर 5.72 प्रतिशत है। एक निर्यातक ने कहा, टैरिफ अंतर जितना अधिक होगा, संबंधित क्षेत्र उतना ही अधिक प्रभावित हो सकता है।

डेयरी उत्पादों की लागत में इजाफा

डेयरी सेक्टर में 38.23% टैरिफ अंतर की बात है। घी, मक्खन और दूध पाउडर जैसे उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं। निर्यात प्रभावित होने से भारत में इनकी कीमतें सस्ती हो सकती हैं, लेकिन किसानों की कमाई घटने से अप्रत्यक्ष रूप से आपकी जेब पर बोझ बढ़ेगा।

आभूषणों पर दोहरा प्रभाव

भारत अमेरिका को 11.88 अरब डॉलर के सोने, चांदी और हीरे निर्यात करता है। 13.32% टैरिफ से ये अमेरिका में महंगे होंगे, लेकिन भारत में सस्ते हो सकते हैं। इससे आपके आभूषण खरीदने के फैसले पर असर पड़ सकता है।

कपड़े और टेक्सटाइल होंगे महंगे

भारत का टेक्सटाइल निर्यात अमेरिका के लिए अहम है। टैरिफ बढ़ने से कपड़े और वस्त्रों की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे आपके वार्डरोब का खर्च बढ़ सकता है

ट्रंप के टैरिफ का ऐलानः दोस्त मोदी पर दिखाई ‘मेहरबानी’, भारत पर लगाया 26% टैरिफ

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरकार रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा कर दी है। उन्होंने 185 देशों से आने वाले सामान पर टैरिफ लगाया है। यह अमेरिका के इतिहास में सबसे बड़ा टैरिफ है। ट्रंप ने इंटरनेशनल व्यापार नीति को लेकर बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप ने इसे डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ नाम दिया है। बुधवार (2 अप्रैल) को व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में 'मुक्ति दिवस' की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा कि मेरे साथी अमेरिकियों, यह मुक्ति दिवस है, जिसका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। 2 अप्रैल 2025 को वह दिन माना जाएगा जब अमेरिकी उद्योग का पुनर्जन्म हुआ, अमेरिका की किस्मत बदली और हमने अमेरिका को फिर से समृद्ध बनाना शुरू किया है।

ट्रंप के दैरिफ नीति के ऐलान के बाद भारत को अब अमेरिका में अपने सामान भेजने पर 26% टैक्स देना होगा। दूसरे देशों पर भी इसी तरह के टैक्स लगाए जाएंगे। चीन पर 34 फीसदी टैरिफ लगाया गया है। यह पहले लगाए गए 20 फीसदी के अतिरिक्त है। इस तरह चीन को 54 फीसदी टैरिफ देना होगा। चीन अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है।

पीएम मोदी को बताया अच्छा दोस्त

राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि कुछ देश गलत तरीके से व्यापार कर रहे हैं, इसलिए ये टैरिफ लगाए गए हैं। जिन देशों में अमेरिका से आने वाले सामान पर ज्यादा टैक्स लगता है, उन पर ये टैरिफ लगेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने रोज गार्डन में "मेक अमेरिकन वेल्दी अगेन" कार्यक्रम में कहा, 'भारत बहुत, बहुत सख्त है। प्रधानमंत्री अभी गए हैं और मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं, लेकिन आप हमारे साथ सही व्यवहार नहीं कर रहे हैं। वे हमसे 52% चार्ज करते हैं और हम उनसे लगभग कुछ भी नहीं लेगे।

भारत भी टैक्स कम करने को तैयार!

2024 में भारत और अमेरिका के बीच 124 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। भारत ने अमेरिका को 81 अरब डॉलर का सामान बेचा, जबकि अमेरिका से 44 अरब डॉलर का सामान खरीदा। इस तरह, भारत को 37 अरब डॉलर का फायदा हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत अमेरिका से आने वाले 23 अरब डॉलर के सामान पर टैक्स कम करने को तैयार है। ये बहुत बड़ी छूट होगी।

इन देशों पर लगाया इतना टैरिफ

कंबोडिया पर सबसे ज्यादा 49 फीसदी टैरिफ लगाया गया है। वियतनाम को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, क्योंकि उसे 46% टैक्स देना होगा। स्विटजरलैंड पर 31, ताइवान पर 32, जापान पर 24, ब्रिटेन पर 10, ब्राजील पर 10, इंडोनेशिया पर 32, सिंगापुर पर 10, दक्षिण अफ्रीका पर 30 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। उन्होंने विदेश से ऑटोमोबाइल के आयात पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया है, जबकि ऑटो पार्ट पर भी इतना ही टैरिफ लगाने की घोषणा की है। ऑटोमोबाइल पर नया टैरिफ 3 अप्रैल से और ऑटो पार्ट 3 मई से प्रभावी होगा।

10 फीसदी टैरिफ वाले देश

यूनाइटेड किंगडम, ब्राजील, सिंगापुर, चिली, ऑस्ट्रेलिया, तुर्की, कोलंबिया, पेरू, न्यूजीलैंड, यूएई, डोमिकन गणराज्य, अर्जेंटीना, इक्वाडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरास, मिस्र, सऊदी अरब, अल सल्वाडोर, मोरक्को, त्रिनिदाद और टोबैगो

गैर-मुस्लिम संशोधन के बाद नई समिति का हिस्सा नहीं होंगे, वक्फ बिल पर लोकसभा में बोले अमित शाह

#amitshahonwaqfbill 

लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पेश हो गया है। वक्फ संशोधन विधेयक पर लोकसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा बयान दिया। सरकार की ओर पक्ष रखते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मुझे लगता है कि या तो निर्दोष भाव से या राजनीतिक कारणों से ढेर सारी भ्रांतियां सदस्यों के मन में भी हैं और इन्हें फैलाने का प्रयास भी हो रहा है। 

सदन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि वक्फ एक अरबी शब्द है। एक प्रकार से इसकी आज की भाषा में व्याख्या करें तो ये एक प्रकार का चैरिटेबल एंडोमेंट है। भारत का जहां तक सवाल है तो दिल्ली में सल्तनत काल के प्रारंभ में पहली बार वक्फ अस्तित्व में आया। बाद में चैरिटेबल प्रॉपर्टी एक्ट चला। आजादी के बाद 1954 में बदलाव किया गया। इसके बाद आगे चलकर वक्फ बोर्ड बना। ये पूरा झगड़ा जो चल रहा है वो इसमें दखल करना का है।

अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि मैं अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगी द्वारा पेश किए गए बिल के समर्थन में खड़ा हुआ हूं। मैं दोपहर 12 बजे से चल रही चर्चा को ध्यान से सुन रहा हूं। मुझे लगता है कि या तो निर्दोष भाव से या राजनीतिक कारणों से कई भ्रांतियां कई सदस्यों के मन में है और सदन के माध्यम से कई सारी भ्रांतियां पूरे देश में फैलाने की कोशिश की जा रही है। ये जो भ्रम खड़ा किया जा रहा है कि यह एक्ट मुस्लिम भाइयों के धार्मिक क्रियाकलापों के अंदर उनकी दान की हुई संपत्ति के अंदर दखल करने का है। ये बहुत बड़ी भ्रांति फैलाकर माइनोरिटी को डराकर अपनी वोटबैंक खड़ी करने के लिए किया जा रहा है। मैं कुछ बातों को स्पष्ट करने का प्रयास करूंगा।

'वक्फ में किसी भी गैर-मुस्लिम व्यक्ति की नियुक्ति नहीं'

केंद्रीय मंत्री शाह ने सदन में दो टूक कहा कि सबसे पहले, वक्फ में किसी भी गैर-मुस्लिम व्यक्ति की नियुक्ति नहीं की जाएगी। हमने धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन के लिए गैर-मुस्लिमों को नियुक्त करने का न तो कोई प्रावधान किया है और न ही ऐसा करने का इरादा है। वक्फ परिषद और वक्फ बोर्ड की स्थापना 1995 में हुई थी। यह गलत धारणा है कि यह अधिनियम मुसलमानों की धार्मिक गतिविधियों और दान की गई संपत्तियों में हस्तक्षेप करता है। अल्पसंख्यकों में डर पैदा करने और विशिष्ट मतदाता जनसांख्यिकी को खुश करने के लिए यह गलत सूचना फैलाई जा रही है।

'कांग्रेस ने दिल्ली लुटियंस की 125 संपत्तियां वक्फ को दे दीं'

गृह मंत्री ने कहा, वक्फ बोर्ड में जो संपत्तियां बेच खाने वाले, सौ-सौ साल के लिए औने-पौने दाम पर किराए पर देने वाले लोग है, वक्फ बोर्ड और वक्फ परिषद उन्हें पकड़ने का काम करेगा। ये चाहते हैं कि इनके राज में जो मिलीभगत चलती रहे। अब ये नहीं चलेगा। अमित शाह ने कहा कि 2013 का जो संशोधन आया, वो नहीं आया होता तो आज ये संशोधन लाने की नौबत नहीं आती। कांग्रेस सरकार ने दिल्ली लूटियंस की 125 संपत्तियां वक्फ को दे दीं। उत्तर रेलवे की जमीन वक्फ को दे दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल में वक्फ की जमीन बताकर मस्जिद बनाने का काम हुआ। 

'विपक्ष अल्पसंख्यकों को भड़का रहा'

सदन में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- 2013 में किया संशोधन सिर्फ पांच घंटे के बाद हुआ था, इस बार दोनों सदनों में 16 घंटे चर्चा हो रही है। गृह मंत्री ने कहा कि- विपक्ष अल्पसंख्यकों को भड़का रहा है। वक्फ मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधि निकाय नहीं है और ये बिल जन कल्याण के लिए है, वोटबैंक के लिए हैं। 1913 से लेकर 2013 तक वक्फ बोर्ड की कुल भूमि 18 लाख एकड़ थी और 2013 से 2025 तक 21 लाख भूमि बढ़ गई है। इसमें 2013 के बाद खासी बढ़ोत्तरी हुई है। अमित शाह ने कहा कि लोगों को डराया जा रहा है कि पूर्वव्यापी प्रभाव से आएगा। इस विधेयक के पहले तीन पेज और धाराएं पढ़ ली होतीं तो पता चल जाता।

ट्रंप के टैरिफ के बीच जिनपिंग को आई भारत की याद, चीनी राष्ट्रपति ने क्यों किया ड्रैगन और हाथी का जिक्र?


#china_india_should_strengthen_ties_in_dragon_elephant_tango_says_jinping 

हाल के दिनों में भारत और चीन के बीच फिर से रिश्तों में गरमाहट बढ़ती दिख रही है। भारत-चीन राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ पर भी दोनों देशों के बीच दूरियां मिटती दिखीं। भारत-चीन राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर भारत में चीनी राजदूत जू फेइहोंग ने दोनों देशों के भविष्य के बारे में सकारात्मक आशा व्यक्त की। इस दौरान चीनी राजदूत जू ने कहा कि चीन और भारत के नेताओं ने इस खास मौके पर बधाई संदेशों का आदान-प्रदान किया।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के 75 साल के राजनयिक रिश्तों पर एक लेटर लिखा। अपने संदेश में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि चीन और भारत के संबंधों को "ड्रैगन-हाथी टैंगो" का रूप लेना चाहिए। टैंगो इन दोनों प्रतीकात्मक जानवरों के बीच का एक चीनी नृत्य है।

भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से बातचीत करते हुए उन्होंने यह बात कही। भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति मुर्मु को बधाई दी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। साथ ही दोनों देशों को शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, आपसी विश्वास और आपसी लाभ की दिशा में आम विकास के लिए साथ आने के तरीके तलाशने चाहिए। 

भारत और चीन को प्राचीन सभ्यताएं बताते हुए शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देश प्रमुख विकासशील देश हैं और ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपने-अपने आधुनिकीकरण प्रयासों के महत्वपूर्ण चरण में हैं।

शी जिनपिंग और द्रौपदी मुर्मू के अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी एक दूसरे को बधाई और शुभकामना संदेश भेजे हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इस बात पर प्रकाश डाला कि दोनों देश प्राचीन सभ्यताएं हैं और वैश्विक दक्षिण के भीतर महत्वपूर्ण विकासशील देश हैं, जो वर्तमान में महत्वपूर्ण आधुनिकीकरण चरणों से गुजर रहे हैं।

बता दें कि चीन को अक्सर ड्रैगन से जोड़ा जाता है, क्योंकि चीनी संस्कृति में ड्रैगन को एक शक्तिशाली, भाग्यशाली और शुभ जीव माना जाता है, जो शक्ति, भाग्य और सफलता का प्रतीक है।

दूसरी ओर, हाथी को भारत से धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक वजहों से जोड़ा जाता है। वहीं, टैंगो एक अंग्रेजी शब्द है। जिसका मतलब दोस्ताना रिश्ता या नृत्य होता है। शी जिनपिंग का कहना था कि वो भारत के साथ रिश्तों को बेहतर करना चाहते हैं।

अखिलेश यादव ने ऐसा क्या कहा कि अमित शाह ने ले ली चुटकी, बोले-आप तो 25 साल अध्यक्ष रहेंगे

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कई महीनों के विवाद के बाद वक्फ संशोधन विधेयक 2024 एक बार फिर लोकसभा के पटल पर पेश किया गया है। कांग्रेस समेत सभी विपक्षी देशों ने इस बिल पर विरोध जताया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता अखिलेश यादव ने भी इस बिल को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। लोकसभा में भाषण के दौरान अखिलेश सत्तापक्ष पर जमकर बरसे हैं। हालांकि, बिल पर चर्चा के दौरान उन्होंने बीजेपी को लेकर कुछ ऐसा बोल कि अमित शाह ने उल्टे उनकी ही चुटकी ले ली।

दरअसल, वक्फ बिल पर बोलते हुए अखिलेश ने भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष के चुनाव में देरी को लेकर तंज कसा।उन्होंने कहा कि ये जो बिल लाया जा रहा है बीजेपी में तो मुकाबला चल रहा है कि बीजेपी के अंदर खराब हिंदू कौन बड़ा है। ये बात मैं ऐसे नहीं कह रहा हूं। जो पार्टी ये कहती हो कि दुनिया की सबसे बड़ी हो अध्यक्ष महोदय वो राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं चुन पाए अबतक। बीजेपी क्या है?

अखिलेश ने बीजेपी पर तंज कसा तो बीजेपी की तरफ से मोर्चा खुद गृह मंत्री अमित शाह ने संभाल लिया। वो अखिलेश के भाषण के बीच में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि अखिलेश जी ने हंसते-हंसते कहा है इसलिए मैं भी हंसते-हंसते ही जवाब दूंगा। उन्होंने कहा कि सामने जितनी पार्टियां हैं उनका राष्ट्रीय अध्यक्ष उनको 5 में से ही चुनना है। एक ही परिवार से चुनना है। माननीय अध्यक्ष जी करोड़ों सदस्यों में से 12-13 करोड़ सदस्यों में से प्रक्रिया करके चुनना है तो देर लगती है। आपके यहां जरा भी देर नहीं लगेगी। मैं कह देता हूं कि आप 25 साल तक अध्यक्ष हो जाओ। नहीं बदल सकता।

जब अमित शाह ने उन्हें 25 साल वाला आशीर्वाद दिया तो अखिलेश ठहाके लगाकर हंसने लगे। उनके पास बैठे अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद मेज थपथपाकर शाह की बात का स्वागत करते दिखे।

वक्फ बिल पर गौरव गोगोई ने उठाए सरकार की मंशा पर सवाल, बोले- कल किसी और धर्म की जमीन पर होगी नजर

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केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया। विधेयक को सदन में पेश करते ही विपक्षी दलों ने विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने संसद में बिल के विरोध में विपक्ष का पक्ष रखा है। इसके साथ ही उन्होंने इस बिल को लेकर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा।गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि वह वक्फ संशोधन विधेयक के जरिए संविधान को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।

लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने किरेन रिजिजू के बयान पर आपत्ति जताते हुए अपनी बात शुरू की। उन्होंने मंत्री के बयान को गुमराह करने वाला बताया। गोगोई ने कहा, मंत्री ने 2013 में यूपीए सरकार के विषय में जो कहा, वह पूरा का पूरा मिसलीड करने वाला बयान है, झूठ है। इन्होंने जो आरोप लगाए हैं और भ्रम फैलाया है, वो बेबुनियाद है। 

भविष्य में अन्य अल्पसंख्यक भी बनेगा निशाना- गोगोई

विधेयक के खिलाफ बहस करते हुए गौरव गोगोई ने चेतावनी दी कि सरकार भविष्य में अन्य अल्पसंख्यकों को भी निशाना बनाएगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, आज वे एक समुदाय की जमीन को निशाना बना रहे हैं, कल वे दूसरे समुदाय को निशाना बनाएंगे। उन्होंने दावा किया, वक्फ संशोधन विधेयक का उद्देश्य संविधान को कमजोर करना, अल्पसंख्यक समुदायों को बदनाम करना, भारतीय समाज को विभाजित करना और अल्पसंख्यकों को मताधिकार से वंचित करना है।

संशोधनों से समस्याएं और विवाद बढ़ेंगे-गोगोई

सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए गोगोई ने कहा, मैं यह नहीं कहता कि संशोधन नहीं होना चाहिए। संशोधन ऐसा होना चाहिए कि बिल ताकतवर बने। इनके संशोधनों से समस्याएं और विवाद बढ़ेंगे। ये चाहते हैं कि देश के कोने-कोने में केस चले। ये देश में भाईचारे का वातावरण तोड़ना चाहते हैं।

बीसीसीआई के किस फैसले से “आहत” हैं शर्मिला टैगोर, बोलीं-वे टाइगर की विरासत को याद नहीं रखना चाहते


#sharmila_tagore_hurt_by_bcci 

इग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने भारतीय क्रिकेट टीम और इंग्लैंड के बीच खेली जाने वाली पटौदी ट्रॉफी को रिटायर करने की तैयारी कर ली है। इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के इस फैसले से क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी की पत्नी एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर काफी आहत हैं। साथ ही उन्होंने बीसीसीआई पर नाराजगी बी दिखाई है। उन्होंने कहा है कि बीसीसीआई पटौदी ट्रॉफी की विरासत को संजोना नहीं चाहता, तो ये उनका फैसला है।

बताया जा रहा है कि इस साल जून-जुलाई में भारत के आगामी इंग्लैंड दौरे के दौरान इस ट्रॉफी को रिटायर कर सकता है। हालांकि, अभी ट्रॉफी को रिटायर करने के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। शर्मिला टैगोर इस खबर से खासा दुखी हैं। उन्होंने बताया कि उनके बेटे सैफ अली खान को ईसीबी से एक पत्र मिला है, जिसमें ट्रॉफी को रिटायर किए जाने की बात कही गई है।

हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में शर्मिला टैगोर ने कहा कि उनके बेटे सैफ अली खान को इन बारे में सूचना दी गई है। एक्ट्रेस ने कहा, मुझे उनसे कोई सूचना नहीं मिली है, लेकिन ईसीबी ने सैफ को एक लेटर भेजा है कि वे ट्रॉफी को रिटायर कर रहे हैं। नाराजगी जाहिर हुए उन्होंने कहा ‘बीसीसीआई ‘टाइगर’ की विरासत को याद रखना चाहता है या नहीं, यह उनका फैसला है। वह इस कदम से ‘आहत’ हैं।

पटौदी ट्रॉफी की शुरुआत 2007 में हुई थी, जो भारत और इंग्लैंड के बीच 1932 में खेले गए पहले टेस्ट मैच की याद में खेली जाती है। ये ट्रॉफी भारत के महान क्रिकेटर और पूर्व कप्तान मंसूर अली खान पटौदी की विरासत को सम्मानित करने के लिए बनाई गई थी। क्रिकेट जगत में ‘टाइगर पटौदी’ के नाम से जाने जाने वाले मंसूर अली खान ने भारतीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई थी।