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SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे असदुद्दीन ओवैसी, चुनाव आयोग पर अनियमितताओं का आरोप

#asaduddinowaisifilesreviewpetitionoversir_verdict

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। ओवैसी ने अपनी रिट याचिका के जरिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनकी याचिका पर कल गुरुवार, 15 अक्टूबर को सुनवाई होने की संभावना है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार की मांग

एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने वोटर लिस्ट के एसआईआर को बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है। याचिका में चुनाव आयोग के फैसले लेने के प्रोसेस में कथित अनियमितताओं से जुड़े नए खुलासों का हवाला दिया गया है। ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट से 27 मई, 2026 के फैसले की समीक्षा करने और उसे वापस लेने की मांग की है। इसके साथ ही, एसआईआर लागू करने के लिए चुनाव आयोग की तरफ से जारी आदेशों को रद्द करने की भी मांग की गई है।

राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने दायर की याचिता

शीर्ष अदालत इस मुद्दे पर पहले से लंबित अन्य याचिकाओं के साथ ओवैसी की याचिका पर भी सुनवाई करने के लिए सहमत हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष के 10 प्रमुख नेताओं ने भी एसआईआर तथा उससे जुड़ी प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिकाएं दायर की हैं।

ओवैसी की याचिका में क्या ?

याचिका में 'रिपोर्टर्स कलेक्टिव' की एक पड़ताल का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए दाखिल 87, 127 फॉर्म 7 अनुरोधों में से 85,854 कथित तौर पर ऑटो जनरेट किए गए थे और उनमें नाम हटाने के पीछे की वजहों का जिक्र नहीं था। ओवैसी की याचिका में गोवा का भी उदाहरण दिया गया है। दावा है कि वहां 97 मतदाताओं के नाम लिस्ट में शामिल किए जाने के योग्य पाए जाने के बावजूद उन्हें बाहर रखा गया, क्योंकि संबंधित सॉफ्टवेयर में उनके नाम बहाल करने की सुविधा कथित तौर पर उपलब्ध नहीं थी।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज

देशभर में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग को निशाने पर लिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कई जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं, एसआईआर की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाएं दायर की गई हैं। ऐसे में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का मुद्दा अब राजनीतिक टकराव के साथ-साथ कानूनी बहस का भी केंद्र बन गया है।

मस्जिद को बुलडोज नहीं कर सकते क्योंकि आपको खुजली हो रही है’, सहारनपुर मामले में ओवैसी का हमला

#asaduddinowaisiquestionssaharanpurmosque_demolition

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को शनिवार सुबह ध्वस्त कर दिया गया। करीब 115 साल पुरानी बताई जा रही मस्जिद को ढहाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रशासन का कहना है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी थी और यह कार्रवाई अदालत के आदेश के बाद की गई। वहीं, विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई के तरीके और मस्जिद की जमीन को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।

ओवैसी ने पूछे तीखे सवाल

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सहारनपुर की मस्जिद गिराए जाने पर सवाल उठाए। ओवैसी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तीखा हमला किया। ओवैसी ने एक्स पर लिखा, सुबह 5 बजे सहारनपु कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को गिराया गया। हाईकोर्ट जाने के पहले ही एक्शन ले लिया गया। क्या धर्म की स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी मुसलमानों पर लागू नहीं होती? ऐसा क्यों है कि हमारी इबादतगाहों को छोटी-छोटी वजहों से बुलडोजर चलाकर गिराया जाता है?

जमीन पर सरकार के दावे को लेकर किया सवाल

ओवैसी ने कहा कि मस्जिद कमेटी ने अदालत में 1911 के दस्तावेज पेश किए थे। उनके मुताबिक, इन दस्तावेजों के जरिए यह बताने की कोशिश की गई थी कि मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले से मौजूद थी। ओवैसी ने मस्जिद की जमीन पर सरकार के दावे को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने लिमिटेशन एक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को किसी जमीन पर अपना दावा करने के लिए असीमित समय नहीं मिल जाता। उन्होंने कहा कि अगर किसी जमीन पर एक सदी से ज्यादा समय से खुले तौर पर लगातार कब्जा रहा है तो सरकार अचानक यह नहीं कह सकती कि जमीन अब उसकी है। ओवैसी ने कहा कि इतने लंबे समय तक कब्जे की स्थिति में एडवर्स पजेशन का सवाल भी उठता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मस्जिद पहले बनी थी और उसके बाद कलेक्ट्रेट का निर्माण हुआ।

मेरी धार्मिक आजादी आपकी दया पर निर्भर नहीं-ओवैसी

ओवैसी ने अपने पोस्ट में तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, कुछ लोगों को शायद मस्जिद को देखना बुरा लगता है। यह उनकी परेशानी है, हमारी नहीं। अगर चाहें तो नजरें फेर लें। इसलिए कि आपको कोई खुजली है। आप हमारी मस्जिद पर बुलडोज़र नहीं चला सकते। मेरी धार्मिक आजादी आपकी दया पर निर्भर नहीं है।

SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे असदुद्दीन ओवैसी, चुनाव आयोग पर अनियमितताओं का आरोप

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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। ओवैसी ने अपनी रिट याचिका के जरिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनकी याचिका पर कल गुरुवार, 15 अक्टूबर को सुनवाई होने की संभावना है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार की मांग

एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने वोटर लिस्ट के एसआईआर को बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है। याचिका में चुनाव आयोग के फैसले लेने के प्रोसेस में कथित अनियमितताओं से जुड़े नए खुलासों का हवाला दिया गया है। ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट से 27 मई, 2026 के फैसले की समीक्षा करने और उसे वापस लेने की मांग की है। इसके साथ ही, एसआईआर लागू करने के लिए चुनाव आयोग की तरफ से जारी आदेशों को रद्द करने की भी मांग की गई है।

राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने दायर की याचिता

शीर्ष अदालत इस मुद्दे पर पहले से लंबित अन्य याचिकाओं के साथ ओवैसी की याचिका पर भी सुनवाई करने के लिए सहमत हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष के 10 प्रमुख नेताओं ने भी एसआईआर तथा उससे जुड़ी प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिकाएं दायर की हैं।

ओवैसी की याचिका में क्या ?

याचिका में 'रिपोर्टर्स कलेक्टिव' की एक पड़ताल का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए दाखिल 87, 127 फॉर्म 7 अनुरोधों में से 85,854 कथित तौर पर ऑटो जनरेट किए गए थे और उनमें नाम हटाने के पीछे की वजहों का जिक्र नहीं था। ओवैसी की याचिका में गोवा का भी उदाहरण दिया गया है। दावा है कि वहां 97 मतदाताओं के नाम लिस्ट में शामिल किए जाने के योग्य पाए जाने के बावजूद उन्हें बाहर रखा गया, क्योंकि संबंधित सॉफ्टवेयर में उनके नाम बहाल करने की सुविधा कथित तौर पर उपलब्ध नहीं थी।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज

देशभर में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग को निशाने पर लिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कई जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं, एसआईआर की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में भी कई याचिकाएं दायर की गई हैं। ऐसे में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का मुद्दा अब राजनीतिक टकराव के साथ-साथ कानूनी बहस का भी केंद्र बन गया है।

मस्जिद को बुलडोज नहीं कर सकते क्योंकि आपको खुजली हो रही है’, सहारनपुर मामले में ओवैसी का हमला

#asaduddinowaisiquestionssaharanpurmosque_demolition

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को शनिवार सुबह ध्वस्त कर दिया गया। करीब 115 साल पुरानी बताई जा रही मस्जिद को ढहाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रशासन का कहना है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी थी और यह कार्रवाई अदालत के आदेश के बाद की गई। वहीं, विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई के तरीके और मस्जिद की जमीन को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।

ओवैसी ने पूछे तीखे सवाल

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सहारनपुर की मस्जिद गिराए जाने पर सवाल उठाए। ओवैसी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तीखा हमला किया। ओवैसी ने एक्स पर लिखा, सुबह 5 बजे सहारनपु कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को गिराया गया। हाईकोर्ट जाने के पहले ही एक्शन ले लिया गया। क्या धर्म की स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी मुसलमानों पर लागू नहीं होती? ऐसा क्यों है कि हमारी इबादतगाहों को छोटी-छोटी वजहों से बुलडोजर चलाकर गिराया जाता है?

जमीन पर सरकार के दावे को लेकर किया सवाल

ओवैसी ने कहा कि मस्जिद कमेटी ने अदालत में 1911 के दस्तावेज पेश किए थे। उनके मुताबिक, इन दस्तावेजों के जरिए यह बताने की कोशिश की गई थी कि मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले से मौजूद थी। ओवैसी ने मस्जिद की जमीन पर सरकार के दावे को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने लिमिटेशन एक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को किसी जमीन पर अपना दावा करने के लिए असीमित समय नहीं मिल जाता। उन्होंने कहा कि अगर किसी जमीन पर एक सदी से ज्यादा समय से खुले तौर पर लगातार कब्जा रहा है तो सरकार अचानक यह नहीं कह सकती कि जमीन अब उसकी है। ओवैसी ने कहा कि इतने लंबे समय तक कब्जे की स्थिति में एडवर्स पजेशन का सवाल भी उठता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मस्जिद पहले बनी थी और उसके बाद कलेक्ट्रेट का निर्माण हुआ।

मेरी धार्मिक आजादी आपकी दया पर निर्भर नहीं-ओवैसी

ओवैसी ने अपने पोस्ट में तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, कुछ लोगों को शायद मस्जिद को देखना बुरा लगता है। यह उनकी परेशानी है, हमारी नहीं। अगर चाहें तो नजरें फेर लें। इसलिए कि आपको कोई खुजली है। आप हमारी मस्जिद पर बुलडोज़र नहीं चला सकते। मेरी धार्मिक आजादी आपकी दया पर निर्भर नहीं है।