क्या राष्ट्रपति चुनाव की रेस से बाहर होंगे बाइडन? जल्द ले सकते हैं बड़ा फैसला
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अमेरिका में पिछले कई महीनों से नवंबर में होने जा रहे राष्ट्रपति पद के चुनावों को लेकर हलचल मची हुई है। इसी बीच खबर आ रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर हो सकते हैं।माना जा रहा है कि वह जल्द ही चुनावी रेस से हटने का फैसला ले सकते हैं। बाइडन पर उनकी पार्टी के कई सीनियर नेताओं की ओर से चुनावी मैदान से हटने का दबाव डाला जा रहा है। बता दें कि पूर्व डोनाल्ड ट्रंप में हुए जानलेवा हमले के बाद बाइडन प्रशासन की मुश्किलें और भी बढ़ गईं हैं। पूरे देश को ट्रंप को बंपर समर्थन और सहानुभूति मिल रही है।
कुछ दिनों पहले अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए थे, जिसके बाद से उन पर चुनावी रेस से बाहर निकलने का दबाव बनाया जा रहा है। हाल ही में इस बाइडेन के चुनावी रेस से बाहर निकलने की खबर में बहुत तेजी आ गई है और अब कहा जा रहा है कि बाइडेन इस चुनाव से हटने को लेकर कभी भी फैसला कर सकते हैं, यहां तक कि बाइडेन के टीम से जुड़े एक सोर्स ने कहा है कि इस बात का ऐलान इस रविवार यानी 21 जुलाई को ही हो सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति बाइडन के कई करीबी लोगों ने गुरुवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति को भी अब लगने लगा है कि वह नवंबर में होने वाले चुनाव में जीत नहीं पाएंगे। ऐसे में उन्हें अपनी पार्टी के कई सदस्यों के भारी दबाव के आगे झुकते हुए दौड़ से बाहर होना पड़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रेसिडेंशियल डिबेट में खराब प्रदर्शन, खराब सेहत और प्रतिद्वंद्वी ट्रंप पर गोली चलने के बाद कई डेमोक्रेटिक नेताओं ने सुझाव दिया है कि बाइडन अपनी उम्मीदवारी छोड़ दें। बाइडन को राष्ट्रपति पद की रेस छोड़ने के लिए कहने वालों में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा, पूर्व हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी और चक शूमर जैसे डेमोक्रेटिक पार्टी के शीर्ष नेता शामिल हैं।
अधिकांश मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि बाइडन की फिर से चुनाव लड़ने या न लड़ने को लेकर घोषणा मिल्वौकी में रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन के समापन के बाद हो सकती है। हालांकि, यह भी बताया जा रहा है कि उनके करीबी लोगों में से एक ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रपति ने अपनी बात पर अडिग हैं कि वे ही राष्ट्रपति पद के लिए पार्टी के उम्मीदवार होंगे। उन्होंने अभी तक दौड़ से बाहर होने का मन नहीं बनाया है। कुछ भी उन्हें इस रेस से बाहर नहीं कर सकता।









नौकरी में आरक्षण खत्म करने की मांग कर रहे बांग्लादेश के छात्रों का आंदोलन हिंसक हो गया है। सरकारी नौकरियों के लिए आरक्षण प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान राजधानी ढाका समेत अन्य जगहों पर हिंसा भड़क गई है। जिसमें अब तक 39 लोगों की मौत हो गई। वहीं, 2,500 से अधिक लोग घायल हो गए। ढाका और अन्य शहरों में विश्वविद्यालय के छात्र 1971 में पाकिस्तान से देश की आजादी के लिए लड़ने वाले युद्ध नायकों के रिश्तेदारों के लिए कुछ नौकरियों को आरक्षित करने की प्रणाली के खिलाफ कई दिनों से रैलियां कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने ढाका के रामपुरा इलाके में सरकारी बांग्लादेश टेलीविजन भवन की घेराबंदी कर दी और इसके अगले हिस्से को क्षतिग्रस्त कर दिया। साथ ही वहां खड़े अनेक वाहनों को आग लगा दी। इससे वहां पत्रकारों सहित कई कर्मचारी फंस गए। दरअसल एक दिन पहले यानी बुधवार को ही बांग्लादेश के सरकारी टीवी बीटीवी ने प्रधानमंत्री शेख हसीना का इंटरव्यू लिया था। *स्कूल-कॉलेज अनिश्चितकाल के लिए बंद* बढ़ती हिंसा के कारण अधिकारियों को गुरुवार दोपहर से ढाका आने-जाने वाली रेलवे सेवाओं के साथ-साथ राजधानी के अंदर मेट्रो रेल को भी बंद करना पड़ा। आधिकारिक समाचार एजेंसी ने बताया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों को विफल करने के लिए इंटरनेट बंद करने का आदेश दिया है। शेख हसीना सरकार ने हिंसा को देखते हुए देश के सभी स्कूलों और विश्वविद्यालयों को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का आदेश दिया है। साथ ही हालात को काबू करने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही राजधानी सहित देश भर में अर्धसैनिक बल बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के जवानों को तैनात किया गया है। *बांग्लादेश मे बवाल की वजह* बांग्लादेश को साल 1971 में आजादी मिली थी। आजादी के बाद से ही बांग्लादेश में आरक्षण व्यवस्था लागू है। इसके तहत स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों को 30 प्रतिशत, देश के पिछड़े जिलों के युवाओं को 10 प्रतिशत, महिलाओं को 10 प्रतिशत, अल्पसंख्यकों के लिए 5 प्रतिशत और दिव्यांगों के लिए एक प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था। इस तरह बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में 56 प्रतिशत आरक्षण था। साल 2018 में बांग्लादेश के युवाओं ने इस आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन किया। कई महीने तक चले प्रदर्शन के बाद बांग्लादेश सरकार ने आरक्षण खत्म करने का एलान किया। बीते महीने 5 जून को बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने देश में फिर से आरक्षण की पुरानी व्यवस्था लागू करने का आदेश दिया। शेख हसीना सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील भी की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आदेश को बरकरार रखा। इससे छात्र नाराज हो गए और उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बांग्लादेश के विश्वविद्यालयों से शुरू हुआ ये विरोध प्रदर्शन अब बढ़ते-बढ़ते हिंसा में तब्दील हो गया है।

Jul 19 2024, 14:47
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