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CM साय ने राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता जताते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को किया कटघरे में खड़ा

रायपुर-  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए एक तरफ जहां अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाया, वहीं दूसरी ओर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार, नक्सलवाद को बढ़ावा देने, किसानों और जनता को धोखा देने, प्रचार के नाम पर जनता के पैसे की बर्बादी करने और लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन करने जैसे गंभीर आरोप लगाए. 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने भाषण की शुरुआत में ही नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस को मिली हार पर निशाना साधते हुए कहा कि आप सोचिए ऐसी स्थिति क्यों बनी है, यह आपके पांच वर्षों के कुशासन और अराजकता पर जनता का जवाब था.

मुख्यमंत्री ने हमला जारी रखते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने महापौर का अप्रत्यक्ष चुनाव इसलिए करवाया ताकि योग्य प्रत्याशी की जगह अपने गुट के अपने कृपापात्र को महापौर बनवा दिया जाए. आखिर में थोपे हुए मेयर पार्षद का चुनाव भी हमारे एक जमीनी कार्यकर्ता से हार गए.

विष्णु देव साय ने जल जीवन मिशन में हुए भ्रष्टाचार का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने वहां टंकियां और पाइपलाइन बिछा दी गईं, जहां पानी का स्रोत ही नहीं था. PSC परीक्षा घोटाला का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं और PSC अधिकारियों के रिश्तेदारों का चयन हुआ, जिससे युवाओं के सपने टूट गए.

सर्वाधिक चर्चित महादेव एप घोटाले का जिक्र करते हुए कांग्रेस सरकार के संरक्षण में सट्टे और ग़ैर-क़ानूनी धंधों को बढ़ावा मिला. वहीं शराब घोटाले का जिक्र कांग्रेस सरकार ने आबकारी नीति में बदलाव कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुँचाया, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला।

प्रधानमंत्री आवास योजना में लापरवाही का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 18 लाख लोगों को मकान मिलने थे, लेकिन राज्य सरकार ने अपना अंशदान नहीं दिया, जिससे गरीबों को नुकसान हुआ. वहीं पांच साल के कार्यकाल के दौरान नक्सलवाद से निपटने में गंभीरता नहीं दिखाई गई, जिससे नक्सल समस्या बनी रही.

कांग्रेस शासनकाल में प्रचार-प्रसार पर किए गए भारी-भरकम खर्च का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रचार पर सबसे अधिक बजट खर्च किया, लेकिन जमीनी स्तर पर विकास कार्य नगण्य रहे. पूरे राज्य में बड़े-बड़े होर्डिंग्स और विज्ञापनों में केवल भूपेश बघेल ही नजर आते थे, लेकिन जनता को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिला.

भूपेश सरकार की प्रिय गौठान योजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने गौठानों और गोबर खरीदी के बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन जब जांच की गई तो वहां “नील बटे सन्नाटा” था, यानी ज़मीनी हकीकत कुछ और थी. धान खरीदी का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने झूठे आरोपों और दुष्प्रचार के जरिए किसानों को गुमराह करने की कोशिश की गई.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिंदुवार पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए पत्रकारों पर किए दमन का जिक्र करते हुए कहा कि जो पत्रकार भ्रष्टाचार उजागर करते थे, उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता था, जेल में डाल दिया जाता था. विशेष पिछड़ी जनजातियों को सिर्फ भावनात्मक सहानुभूति दी गई, लेकिन उनके लिए कोई ठोस कार्य नहीं किया.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर हमला करने के साथ-साथ अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को गिनाते हुए बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश में नक्सलवाद के सफाए की समय सीमा मार्च 2026 रखी है. हम इस अवधि तक पूरे छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का सफाया कर देंगे. सरकार ने बोली का जवाब बोली से और गोली का जवाब गोली से देने का निश्चय किया है. वहीं आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए अच्छी पुनर्वास नीति बनाई है. उनके लिए 15 हजार प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए हैं.

भ्रष्टाचार के खिलाफ की जा रही सरकार की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि हमने खनिजों का ऑनलाइन ट्रांजिट पास पुन: आरंभ किया है. आबकारी की पुरानी नीति को समाप्त कर नई नीति लागू की है, जिससे फर्जीवाड़े पर लगाम लगी और राजस्व दोगुना हो गया. यही नहीं खरीदी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार रोकने के लिए जेम पोर्टल से खरीदी अनिवार्य किया.

गरीब परिवारों के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी सरकार जरूरतमंद 68 लाख परिवारों को पांच साल तक मुफ्त राशन प्रदान करेगी.

नई शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कक्षा पहली व दूसरी में विभिन्न स्थानीय भाषा एवं चार प्रांतीय भाषाओं में द्विभाषिक पुस्तकें तैयार की गई है. पालकों और शिक्षकों का संवाद बना रहे इसके लिए पेरेंट्स टीचर मीडिया शुरू कराई. उच्च शिक्षा में भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाते हुए एमबीबीएस की पढ़ाई की सुविधा हिन्दी माध्यम से शुरू की है.

उद्योगों को बढ़ावा देने के लिहाज से नई औद्योगिक नीति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री बताया कि में सरगुजा और बस्तर में उद्योग लगाने पर विशेष रियायत दी गई है. इसके साथ नई नीति में सेवानिवृत्त अग्निवीर, आत्मसमर्पित नक्सली और नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों को उद्यम लगाने के लिए विशेष प्रावधान किए जाने की बात कही.

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़ मामलाः सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, मांगा 200 मौतों के दावे का सबूत

#scdismissespleaonnewdelhirailwaystationstampede

15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ हुई थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आज सुनवाई की और इसे खारिज कर दिया। साथ ही कोर्ट ने 200 मौतों के दावे का सबूत भी मांगा। दरअसल, आनंद लीगल एड फोरम ट्रस्ट की तरफ से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि मौतों का वास्तविक आंकड़ा रेलवे प्रशासन छिपा रहा है। जनहित याचिका में भगदड़ में करीब 200 लोगों की मौत का आरोप लगाया गया। याचिका में ये भी दावा किया गया कि रेलवे प्रशासन ने सिर्फ 18 मौतों की बात कही, जो गलत है।

महाकुंभ में संगम स्नान के लिए प्रयागराज जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने के दौरान नई दिल्ली स्टेशन पर भगदड़ मच गई थी। जिसमे कई लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। जिसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दावा किया था कि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भगदड़ के दौरान करीब 200 मौतें हुई थीं।याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने रेलवे अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की। साथ ही रेलवे स्टेशन और अस्पतालों के सभी सीसीटीवी फुटेज संरक्षित करने की मांग की।

15 फरवरी की घटना

दरअसल, 15 फरवरी की रात करीब साढ़े नौ बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में अधिकतर महिलाएं और बच्चे थे। स्टेशन पर महाकुंभ जाने वाले लोगों की भारी भीड़ थी साथ ही अन्य यात्री भी थे। दो ट्रेनों के लेट होने के चलते भीड़ नियंत्रण से बाहर हो गई और भगदड़ मच गई। यह पूरी घटना महज 10 मिनट में घटी और प्रशासन की लापरवाही और यात्रियों में दुविधा के चलते इतना बड़ा हादसा हो गया।

बिहार विधानमंडल का बजट सत्र : राज्यपाल ने अपने अभिभाषण के दौरान किया बड़ा एलान, विस चुनाव से पहले मिलेगी 12 लाख को सरकारी नौकरी और 34 लाख को

डेस्क : आज शुक्रवार 28 फरवरी से राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के अभिभाषण के साथ बिहार विधान मंडल के बजट सत्र की शुरुआत हो गई है। वहीं राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में बड़ा एलान किया है। उन्होंने कहा है कि बिहार में इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले 12 लाख सरकारी नौकरियां मिल जाएँगी। इसी तरह रोजगार के मामले में भी नीतीश सरकार बड़ा काम करने जा रही है। इस वर्ष चुनाव की घोषणा के पहले रोजगार देने के 34 लाख के लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि बिहार में 3 लाख 68 हजार शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। 28 हजार नियोजित शिक्षक पास हुए। आने वाले दिनों में और बड़ी संख्या में नौकरी मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में पहले 6 मेडिकल कॉलेज थे अब 12 नए मेडिकल कॉलेज खुले हैं जबकि 14 नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। राज्य में सड़क पुल पुलियो का निर्माण कराया जा रहा। राज्य के किसी भी कोने से पांच घंटे में पटना तक पहुँचने का लक्ष्य हासिल किया है। अब इस लक्ष्य को और कम किए जा रहा है।

राज्यपाल ने कहा कि 2018 से SC ST के विद्यार्थियों के लिए सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना का लाभ दें रही। ग्राम परिवहन योजना लागू की गई है। अब प्रखंड स्तर पर योजना चलाई जा रही। अल्पसंख्यक स्टूडेंट्स के लिए मुफ्त कोचिंग छात्रवृति योजना दी जा रही है। इसी तरह मुस्लिम समुदाय के मदरसो को सरकारी मान्यता दी जा रही। 2008 से ही क़ृषि रोड मैप चलाए जा रहे। धान गेहूं मक्का की उत्पादिकता काफ़ी बढ़ी है। मछली के उत्पादन में बिहार आत्मनिर्भर हो चुका है। उन्होंने इस वर्ष के केंद्रीय बजट में बिहार के लिए घोषित कई योजनाओं का जिक्र करते हुए इसे बिहार में कृषि, रोजगार, ढांचागत विकास के लिए बड़ा कदम बताया।

होलाष्टक के दौरान भूल से भी न खरीदें ये चीजें, बढ़ जाती हैं मुश्किलें!

हिंदू धर्म में होलाष्टक की अवधि अशुभ मानी जाती है. ये आठ दिनों की अवधि होती है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, होलाष्टक की शुरुआत फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है. पंचांग के अनुसार, होलाष्टक की अवधि की शुरुआत होली से आठ दिन पहले हो जाती है. इसका समापन होलिका दहन के साथ हो जाता है. होलाष्टक की अवधि में गृह प्रवेश, विवाह या मुंडन संस्कार जैसे शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक की अवधि में किए गए शुभ कामों का फल प्राप्त नहीं होता है. इसके विपरीत होलाष्टक की अवधि में अगर वर्जित काम किए जाते हैं, तो जीवन में कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं. होलाष्टक की अवधि में शुभ काम न करने के साथ-साथ इस दौरान नई चीजों की खरीदारी भी वर्जित मानी गई हैं. मान्यता है कि इस दौरान कोई नहीं चीज खरीदना शुभ नहीं होता. ऐसा करने से जीवन में मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

इस साल कब से होलाष्टक?

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 7 मार्च से हो शुरू हो रही है. ऐसे में होलाष्टक की भी शुरुआत 7 मार्च से हो जाएगी. इसका समापन 13 मार्च को हो जाएगा. क्योंकि 13 मार्च को होलिका दहन की जाएगी. इसके बाद 14 मार्च को होली का मनाई जाएगी.

होलाष्टक में न खरीदें ये चीजें

हिंदू मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक दिनों में बाजार से कोई नई चीज खरीदकर घर न लाएं.

होलाष्टक के दौरान नए कपड़े, नई गाड़ी, घरेलू उपयोग में आने वाली चीजें, सोना और चांदी भी नहीं खरीदें. इस दौरान नया मकान न लें और बनवाएं भी नहीं.

होलाष्टक के दिनों में यज्ञ, हवन या अन्य धार्मिक अनुष्ठान नहीं करवाएं.

हालांकि इस दौरान नियमित पूजा की जा सकती है.

हिंदू मान्यता है कि इस समय में नकारात्मक ऊर्जा का वेग बहुत ज्यादा होता है. इसलिए इस दौरान नया निवेश और लेन देन न करें. इससे जीवन में आर्थिक संकट आ सकता है.

करें ये काम

होलाष्टक के दौरान दान करें. इससे घर में सुख-समृद्धि आती है.

हनुमान चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. ऐसा करना विशेष फलदायी माना जाता है.

इस दौरान लड्डू गोपाल का पूजन करें. उनके गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ करें. इससे जीवन में सकारात्मकता रहती है.

Disclaimer:इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. हम इसकी पुष्टि नहीं करता है.

Celebrating 1.5 Years of Success: World EdX’s Impact on Study Abroad Aspirants in India!

February 14, Kanpur- Imagine stepping onto a university campus in a foreign land, a dream you once thought impossible is now a vibrant reality. For countless Indian students, this dream is becoming a reality, thanks to the dedicated efforts of organizations like World EdX Pvt. Ltd. Today, we celebrate a significant milestone: 1.5 years of empowering study abroad aspirants in India!

World EdX was founded on a simple yet powerful idea: to bridge the gap between Indian students and their global education aspirations. The visionaries behind this initiative, Directors Ankit Srivastava, Ashish Gupta, Atul Agarwal, and Manika Gupta envisioned a future where pursuing international education was accessible and achievable for every determined student. Their passion, combined with a deep understanding of the challenges faced by Indian students, laid the foundation for World EdX’s remarkable journey.

Ashish Gupta has mentioned that since the inception of World EdX, we’ve witnessed incredible growth and achieved milestones that fill us with pride. We have helped 5000+ students embark on international education journeys, securing placements in top-tier universities across 10+ countries. From navigating complex application processes to providing personalized guidance on visa requirements, World EdX has been a constant companion for students. We are expanding our network of partner universities, forging strong relationships with institutions that recognize the potential of Indian students.

The Voice of Success:  

"The support I received from World EdX was invaluable," says Saransh Shukla, who recently secured admission to the University of York in the UK. "They helped me every step of the way, from choosing the right program to preparing for my visa interview."

What truly sets World EdX apart is its commitment to personalized support. Their team of expert counselors works closely with each student, providing tailored guidance that maximizes their chances of success. Whether it's identifying the right university, crafting a compelling statement of purpose, or preparing for standardized tests, they provide the support and resources needed. Under COO Ashish Mathur’s leadership, World EdX has streamlined its processes, ensuring a seamless and efficient experience for every student. Ashish Mathur's expertise in the international education industry has been instrumental in scaling our operations and expanding our reach.

Ashish Mathur shares: “World EdX is constantly evolving and innovating to better serve the needs of its students. We're excited to introduce a new AI-powered platform, which will provide personalized study-abroad recommendations and streamline the application process.”

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Visit the website www.worldedx.com to learn more about their services and how they can help you achieve your study abroad goals. Follow us on social media YouTubeInstagram for the latest updates and student success stories. For a limited time.

They remain committed to the mission of empowering Indian students and shaping the future of global education. Here's to many more years of helping students reach for the stars!

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आजमगढ़। चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति का धरना जारी , चन्द्र शेखर आजाद की शहादत पर निकाला जूलूस
निजामाबाद (आजमगढ़)। चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति के तत्वाधान में 112 वें दिन भी धरना जारी रहा। धरना स्थल पर तमाम किसान नेताओं ने मिलकर आज चंद्रशेखर आजाद की शहादत दिवस को मनाने के लिए जुलूस मार्च निकाला। जुलूस कलेक्ट्रेट परिसर से निकलकर मेडिकल कॉलेज के उत्तरी गेट पर स्थित चंद्रशेखर स्मारक तक पहुंचा । वक्ताओं ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में चंद्रशेखर आजाद की कुर्बानी को भुलाया नहीं जा सकता उन्होंने भारत देश को न सिर्फ आजाद कराने बल्कि मजदूर किसानों के नेतृत्व में समाजवादी राज्य का सपना भी देखा। इसके लिए उन्होंने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन नामक क्रांतिकारी संगठन भी बनाया। आज भी क्रांतिकारियों का सपना अधूरा है देश में मजदूर किसान सड़कों पर आंदोलन के लिए मजबूर हैं। देवरिया में ही 112 दिनों से चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति इसका एक उदाहरण है। इस कार्यक्रम में बृजेंद मणि त्रिपाठी ,विकास दुबे ,राजेश आजाद ,मनोज मणि त्रिपाठी , नक, छेद सिंह ,फूलचंद , राम सिंगार , शेर सिंह , श्री राम ,राम प्रकाश सिंह ,कलेक्टर शर्मा ,अशोक मालवीय ,जगदीश यादव ,पंडित वेद प्रकाश, बकरीदन उर्फ बरकत अली ,टाइगर यादव ,महात्मा बजरंगी दास ,जयप्रकाश गुप्ता, विजय कुमार सिंह ,अशोक कुमार सिंह, राज मंगल सिंह, एकेश चंद्र मिश्रा ,विवेक कुमार गुप्ता इत्यादि लोग उपस्थित रहे। द्वारा ‌‌‌ बृजेंद्र मणि त्रिपाठी अध्यक्ष -चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति
झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते बने झारखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, राज्यपाल ने दी सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी


रांची (डेस्क )झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

 राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आज राज्य सरकार के प्रस्ताव पर तत्काल निर्णय लेते हुए यह नियुक्ति की है ।

राज्यपाल ने उम्मीद जताई कि उनकी नियुक्ति से राज्य में नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी आएगी और आयोग द्वारा सभी परीक्षाओं का संचालन निर्धारित कैलेंडर के अनुसार समयबद्ध एवं सुचारु रूप से किया जा सकेगा। इसके साथ ही, आयोग की कार्यप्रणाली में गति और पारदर्शिता आने की भी संभावना जताई गई है।

एल. खियांग्ते का प्रशासनिक अनुभव और नेतृत्व क्षमता आयोग को नई दिशा देने में सहायक साबित हो सकती है। राज्य में युवाओं के लिए यह नियुक्ति उम्मीदों का संचार करती है, क्योंकि इससे नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार और तेजी आने की संभावना है।

एल खियांगते मिजोरम के मूल निवासी हैं और आदिवासी समुदाय से आते हैं। वे झारखंड के 24वें मुख्य सचिव भी रह चुके हैं । 26 अक्टूबर 1964 को जन्मे एल खियांगते 31 अक्टूबर 2024 को सेवानिवृत्त हुए हैं।

खड़गे ने एससी-एसटी-ओबीसी और अल्पसंख्यकों की छात्रवृत्ति में 'गिरावट' का लगाया आरोप, क्या कहते हैं आंकड़े

#mallikarjunkhargeslamsgovtoverdecliningscholarships

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया है कि केन्द्र सरकार ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं की छात्रवृत्तियां छीन ली हैं। साथ ही खड़गे ने दावा किया कि बीजेपी का नारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ कमजोर वर्गों की आकांक्षाओं का मजाक उड़ाता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में ये दावा का।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को संबोधित करते हुए पोस्ट में लिखा कि 'देश के एससी, एसटी और ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के युवाओं की छात्रवृत्तियों को आपकी सरकार ने हथियाने का काम किया है। सरकारी आंकड़े बातते हैं कि सभी वजीफों में मोदी सरकार ने लाभार्थियों की भारी कटौती तो की है, साथ ही साल-दर-साल फंड में औसतन 25 फीसदी कम खर्च किया है।'

लाभार्थियों की संख्या में चार साल में 94% की गिरावट

खरगे के मुताबिक, अल्पसंख्यक छात्रों को मिलने वाले प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के लाभार्थियों की संख्या में पिछले चार बरस के दौरान 94 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के लाभार्थियों की संख्या पिछले चार बरस ही में 83 फीसदी तक घटी है। इसके अलावा, मेरिट कम मीन्स छात्रवृत्ति योजना, जो अल्पसंख्यक छात्रों को दी जाती है, उसके लाभार्थियों की संख्या में चार बरस के भीतर 51 फीसदी तक की कमी आई है।

अब अगर सरकार के हवाले ही से सामने आए कुछ आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि जरूर स्कॉलरशिप के कई स्कीम्स में लाभार्थियों और बजट का आवंटन घटा हैः-

प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप एक साल में 40 फीसदी घटा

संसदीय समिति की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2021-22 में प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप के लिए आवंटित बजट 1,378 करोड़ रुपये थी। जो 2024-25 में घटकर 326 करोड़ रुपये के करीब रह गई। वहीं, इस वित्त वर्ष के लिए सरकार ने महज 198 करोड़ रुपये के करीब का आवंटन प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप के लिए किया है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इस बार का आवंटन 40 फीसदी तक घट गया है। अगर लाभार्थियों की बात की जाए तो 2021-22 में सरकार ने जहां 28 लाख 90 हजार छात्रों को ये स्कॉलरशिप दिया। तो 2023-24 में सरकार महज 4 लाख 91 हजार छात्रों को ही वजीफा दे सकी। लाभार्थियों और फंड में इतनी बड़ी गिरावट की वजह सरकार का क्लास 1 से लेकर 8 तक के छात्रों के लिए इस स्कीम को बंद करना रहा। अब ये स्कीम केवल नौवीं और दसवीं के छात्रों को दी जाती है। सरकार का कहना है कि 1 से लेकर 8 तक के छात्रों को पहले ही सरकार शिक्षा के अधिकार कानून के जरिये मदद कर रही है।

पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप का आवंटन 64 फीसदी घटा

वहीं, पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में सरकार ने 2023-24 में इस मद में 1145 करोड़ रुपये का आवंटन किया था मगर सरकार 1065 करोड़ ही खर्च कर पाई। वर्ष 2024-25 में सरकार ने ज्यादा खर्च किया, और यह बढ़कर 1,145 करोड़ रुपये तक पहुंचा। मगर इस 2025-26 के बजट में इस योजना के लिए बजट का आवंटन पिछले साल के मुकाबले 64 फीसदी तक घट चुका है। सरकार ने इस साल के बजट में महज 414 करोड़ रुपये के करीब का आवंटन किया है। ये पिछले साल के मुकाबले कम से कम सात सौ करोड़ रुपये कम है। इस तरह ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि फंड का आवंटन कम होने से लाभार्थियों की संख्या पर भी इसका असर पड़ेगा।

मेरिट कम मीन्स स्कॉलरशिप 78 फीसदी तक घटा

ये वजीफा अल्पसंख्यक समुदाय के उन छात्रों को दिया जाता है जो ग्रैजुएशन या फिर पोस्ट ग्रैजुएशन प्रोफेशनल औऱ टेक्निकल कोर्स में करना चाहते हैं। 2020-21 में इस मद में जहां सरकार का बजट आवंटन 400 करोड़ था, वह अगले अकादमिक वर्ष में 325 करोड़ रुपये रह गया। वहीं ये आवंटन 2023-24 में 44 करोड़ जबकि 2024-25 में आवंटन घटकर महज 34 करोड़ रुपये के करीब रह गया। अगर इस बरस के आवंटन की बात की जाए तो यह पिछले बरस के मुकाबले 78 फीसदी तक घट चुका है। इस साल सरकार ने बजट में इस वजीफे के लिए महज 7 करोड़ रुपये के करीब का आवंटन किया है। पोस्ट-मैट्रिक वजीफे ही की तरह मेरिट कम मीन्स स्कॉलरशिप के फंड में आवंटन घटने से इसके लाभार्थियों की संख्या पर भी असर पड़ेगा।

केन्द्र सरकार ने दोषी नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने का किया विरोध, सुप्रीम कोर्ट में दायर किया हलफनामा
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सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों केंद्र सरकार से जवाब मांगा था कि क्या दोषी सांसदों और विधायकों के चुनाव लड़ने पर हमेशा के लिए बैन लगना चाहिए। इस मामले पर अब केंद्र सरकार की तरफ से हलफनामा दाखिल किया गया है। केन्द्र सरकार ने दोषी राजनेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग का विरोध किया है। केंद्र ने कहा कि आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए नेताओं पर आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाना सही नहीं होगा।

*अयोग्यता तय करना संसद के अधिकार क्षेत्र में- केंद्र*
केंद्र सरकार ने दोषी करार दिये गए राजनीतिक नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की सजा को कठोर कहा है। साथ ही अनुरोध करने वाली एक याचिका का उच्चतम न्यायालय में विरोध करते हुए कहा है कि इस तरह की अयोग्यता तय करना केवल संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे में केंद्र ने कहा कि याचिका में जो अनुरोध किया गया है वह विधान को फिर से लिखने या संसद को एक विशेष तरीके से कानून बनाने का निर्देश देने के समान है, जो न्यायिक समीक्षा संबंधी उच्चतम न्यायालय की शक्तियों से पूरी तरह से परे है।

*6 साल की अयोग्यता ही काफी-केंद्र*
केंद्र ने कहा,वर्तमान में 6 वर्षों की अयोग्यता अवधि से बढ़कर आजीवन प्रतिबंध लगाना अनुचित कठोरता होगी और यह संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। केंद्र ने कहा कि न्यायपालिका संसद को किसी कानून में संशोधन करने या उसे लागू करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। केंद्र ने मद्रास बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ के फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि कोर्ट संसद को कानून बनाने या संशोधन का निर्देश नहीं दे सकती।

*क्या है मामला?*
वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने 2016 में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए नेताओं को 6 साल के लिए अयोग्यता को अपर्याप्त बताते हुए राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए दोषी विधायकों और सांसदों पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। उन्होंने याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनिम, 1951 की धारा 8 और 9 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी।
मौजूदा कानून के तहत आपराधिक मामलों में 2 साल या उससे अधिक की सजा होने पर सजा की अवधि पूरी होने के 6 साल बाद तक चुनाव लड़ने पर ही रोक है। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने याचिका में दोषी राजनेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने और अलग-अलग अदालतों में उनके खिलाफ लंबित मुकदमों को तेजी से निपटाने की मांग की है।
CM साय ने राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता जताते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को किया कटघरे में खड़ा

रायपुर-  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए एक तरफ जहां अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाया, वहीं दूसरी ओर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार, नक्सलवाद को बढ़ावा देने, किसानों और जनता को धोखा देने, प्रचार के नाम पर जनता के पैसे की बर्बादी करने और लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन करने जैसे गंभीर आरोप लगाए. 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने भाषण की शुरुआत में ही नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस को मिली हार पर निशाना साधते हुए कहा कि आप सोचिए ऐसी स्थिति क्यों बनी है, यह आपके पांच वर्षों के कुशासन और अराजकता पर जनता का जवाब था.

मुख्यमंत्री ने हमला जारी रखते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने महापौर का अप्रत्यक्ष चुनाव इसलिए करवाया ताकि योग्य प्रत्याशी की जगह अपने गुट के अपने कृपापात्र को महापौर बनवा दिया जाए. आखिर में थोपे हुए मेयर पार्षद का चुनाव भी हमारे एक जमीनी कार्यकर्ता से हार गए.

विष्णु देव साय ने जल जीवन मिशन में हुए भ्रष्टाचार का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने वहां टंकियां और पाइपलाइन बिछा दी गईं, जहां पानी का स्रोत ही नहीं था. PSC परीक्षा घोटाला का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं और PSC अधिकारियों के रिश्तेदारों का चयन हुआ, जिससे युवाओं के सपने टूट गए.

सर्वाधिक चर्चित महादेव एप घोटाले का जिक्र करते हुए कांग्रेस सरकार के संरक्षण में सट्टे और ग़ैर-क़ानूनी धंधों को बढ़ावा मिला. वहीं शराब घोटाले का जिक्र कांग्रेस सरकार ने आबकारी नीति में बदलाव कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुँचाया, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला।

प्रधानमंत्री आवास योजना में लापरवाही का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 18 लाख लोगों को मकान मिलने थे, लेकिन राज्य सरकार ने अपना अंशदान नहीं दिया, जिससे गरीबों को नुकसान हुआ. वहीं पांच साल के कार्यकाल के दौरान नक्सलवाद से निपटने में गंभीरता नहीं दिखाई गई, जिससे नक्सल समस्या बनी रही.

कांग्रेस शासनकाल में प्रचार-प्रसार पर किए गए भारी-भरकम खर्च का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रचार पर सबसे अधिक बजट खर्च किया, लेकिन जमीनी स्तर पर विकास कार्य नगण्य रहे. पूरे राज्य में बड़े-बड़े होर्डिंग्स और विज्ञापनों में केवल भूपेश बघेल ही नजर आते थे, लेकिन जनता को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिला.

भूपेश सरकार की प्रिय गौठान योजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने गौठानों और गोबर खरीदी के बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन जब जांच की गई तो वहां “नील बटे सन्नाटा” था, यानी ज़मीनी हकीकत कुछ और थी. धान खरीदी का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने झूठे आरोपों और दुष्प्रचार के जरिए किसानों को गुमराह करने की कोशिश की गई.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिंदुवार पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए पत्रकारों पर किए दमन का जिक्र करते हुए कहा कि जो पत्रकार भ्रष्टाचार उजागर करते थे, उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता था, जेल में डाल दिया जाता था. विशेष पिछड़ी जनजातियों को सिर्फ भावनात्मक सहानुभूति दी गई, लेकिन उनके लिए कोई ठोस कार्य नहीं किया.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर हमला करने के साथ-साथ अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को गिनाते हुए बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश में नक्सलवाद के सफाए की समय सीमा मार्च 2026 रखी है. हम इस अवधि तक पूरे छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का सफाया कर देंगे. सरकार ने बोली का जवाब बोली से और गोली का जवाब गोली से देने का निश्चय किया है. वहीं आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए अच्छी पुनर्वास नीति बनाई है. उनके लिए 15 हजार प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए हैं.

भ्रष्टाचार के खिलाफ की जा रही सरकार की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि हमने खनिजों का ऑनलाइन ट्रांजिट पास पुन: आरंभ किया है. आबकारी की पुरानी नीति को समाप्त कर नई नीति लागू की है, जिससे फर्जीवाड़े पर लगाम लगी और राजस्व दोगुना हो गया. यही नहीं खरीदी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार रोकने के लिए जेम पोर्टल से खरीदी अनिवार्य किया.

गरीब परिवारों के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी सरकार जरूरतमंद 68 लाख परिवारों को पांच साल तक मुफ्त राशन प्रदान करेगी.

नई शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कक्षा पहली व दूसरी में विभिन्न स्थानीय भाषा एवं चार प्रांतीय भाषाओं में द्विभाषिक पुस्तकें तैयार की गई है. पालकों और शिक्षकों का संवाद बना रहे इसके लिए पेरेंट्स टीचर मीडिया शुरू कराई. उच्च शिक्षा में भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाते हुए एमबीबीएस की पढ़ाई की सुविधा हिन्दी माध्यम से शुरू की है.

उद्योगों को बढ़ावा देने के लिहाज से नई औद्योगिक नीति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री बताया कि में सरगुजा और बस्तर में उद्योग लगाने पर विशेष रियायत दी गई है. इसके साथ नई नीति में सेवानिवृत्त अग्निवीर, आत्मसमर्पित नक्सली और नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों को उद्यम लगाने के लिए विशेष प्रावधान किए जाने की बात कही.

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़ मामलाः सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, मांगा 200 मौतों के दावे का सबूत

#scdismissespleaonnewdelhirailwaystationstampede

15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ हुई थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आज सुनवाई की और इसे खारिज कर दिया। साथ ही कोर्ट ने 200 मौतों के दावे का सबूत भी मांगा। दरअसल, आनंद लीगल एड फोरम ट्रस्ट की तरफ से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि मौतों का वास्तविक आंकड़ा रेलवे प्रशासन छिपा रहा है। जनहित याचिका में भगदड़ में करीब 200 लोगों की मौत का आरोप लगाया गया। याचिका में ये भी दावा किया गया कि रेलवे प्रशासन ने सिर्फ 18 मौतों की बात कही, जो गलत है।

महाकुंभ में संगम स्नान के लिए प्रयागराज जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने के दौरान नई दिल्ली स्टेशन पर भगदड़ मच गई थी। जिसमे कई लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। जिसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दावा किया था कि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भगदड़ के दौरान करीब 200 मौतें हुई थीं।याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने रेलवे अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की। साथ ही रेलवे स्टेशन और अस्पतालों के सभी सीसीटीवी फुटेज संरक्षित करने की मांग की।

15 फरवरी की घटना

दरअसल, 15 फरवरी की रात करीब साढ़े नौ बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में अधिकतर महिलाएं और बच्चे थे। स्टेशन पर महाकुंभ जाने वाले लोगों की भारी भीड़ थी साथ ही अन्य यात्री भी थे। दो ट्रेनों के लेट होने के चलते भीड़ नियंत्रण से बाहर हो गई और भगदड़ मच गई। यह पूरी घटना महज 10 मिनट में घटी और प्रशासन की लापरवाही और यात्रियों में दुविधा के चलते इतना बड़ा हादसा हो गया।

बिहार विधानमंडल का बजट सत्र : राज्यपाल ने अपने अभिभाषण के दौरान किया बड़ा एलान, विस चुनाव से पहले मिलेगी 12 लाख को सरकारी नौकरी और 34 लाख को

डेस्क : आज शुक्रवार 28 फरवरी से राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के अभिभाषण के साथ बिहार विधान मंडल के बजट सत्र की शुरुआत हो गई है। वहीं राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में बड़ा एलान किया है। उन्होंने कहा है कि बिहार में इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले 12 लाख सरकारी नौकरियां मिल जाएँगी। इसी तरह रोजगार के मामले में भी नीतीश सरकार बड़ा काम करने जा रही है। इस वर्ष चुनाव की घोषणा के पहले रोजगार देने के 34 लाख के लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि बिहार में 3 लाख 68 हजार शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। 28 हजार नियोजित शिक्षक पास हुए। आने वाले दिनों में और बड़ी संख्या में नौकरी मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में पहले 6 मेडिकल कॉलेज थे अब 12 नए मेडिकल कॉलेज खुले हैं जबकि 14 नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। राज्य में सड़क पुल पुलियो का निर्माण कराया जा रहा। राज्य के किसी भी कोने से पांच घंटे में पटना तक पहुँचने का लक्ष्य हासिल किया है। अब इस लक्ष्य को और कम किए जा रहा है।

राज्यपाल ने कहा कि 2018 से SC ST के विद्यार्थियों के लिए सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना का लाभ दें रही। ग्राम परिवहन योजना लागू की गई है। अब प्रखंड स्तर पर योजना चलाई जा रही। अल्पसंख्यक स्टूडेंट्स के लिए मुफ्त कोचिंग छात्रवृति योजना दी जा रही है। इसी तरह मुस्लिम समुदाय के मदरसो को सरकारी मान्यता दी जा रही। 2008 से ही क़ृषि रोड मैप चलाए जा रहे। धान गेहूं मक्का की उत्पादिकता काफ़ी बढ़ी है। मछली के उत्पादन में बिहार आत्मनिर्भर हो चुका है। उन्होंने इस वर्ष के केंद्रीय बजट में बिहार के लिए घोषित कई योजनाओं का जिक्र करते हुए इसे बिहार में कृषि, रोजगार, ढांचागत विकास के लिए बड़ा कदम बताया।

होलाष्टक के दौरान भूल से भी न खरीदें ये चीजें, बढ़ जाती हैं मुश्किलें!

हिंदू धर्म में होलाष्टक की अवधि अशुभ मानी जाती है. ये आठ दिनों की अवधि होती है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, होलाष्टक की शुरुआत फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है. पंचांग के अनुसार, होलाष्टक की अवधि की शुरुआत होली से आठ दिन पहले हो जाती है. इसका समापन होलिका दहन के साथ हो जाता है. होलाष्टक की अवधि में गृह प्रवेश, विवाह या मुंडन संस्कार जैसे शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक की अवधि में किए गए शुभ कामों का फल प्राप्त नहीं होता है. इसके विपरीत होलाष्टक की अवधि में अगर वर्जित काम किए जाते हैं, तो जीवन में कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं. होलाष्टक की अवधि में शुभ काम न करने के साथ-साथ इस दौरान नई चीजों की खरीदारी भी वर्जित मानी गई हैं. मान्यता है कि इस दौरान कोई नहीं चीज खरीदना शुभ नहीं होता. ऐसा करने से जीवन में मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

इस साल कब से होलाष्टक?

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 7 मार्च से हो शुरू हो रही है. ऐसे में होलाष्टक की भी शुरुआत 7 मार्च से हो जाएगी. इसका समापन 13 मार्च को हो जाएगा. क्योंकि 13 मार्च को होलिका दहन की जाएगी. इसके बाद 14 मार्च को होली का मनाई जाएगी.

होलाष्टक में न खरीदें ये चीजें

हिंदू मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक दिनों में बाजार से कोई नई चीज खरीदकर घर न लाएं.

होलाष्टक के दौरान नए कपड़े, नई गाड़ी, घरेलू उपयोग में आने वाली चीजें, सोना और चांदी भी नहीं खरीदें. इस दौरान नया मकान न लें और बनवाएं भी नहीं.

होलाष्टक के दिनों में यज्ञ, हवन या अन्य धार्मिक अनुष्ठान नहीं करवाएं.

हालांकि इस दौरान नियमित पूजा की जा सकती है.

हिंदू मान्यता है कि इस समय में नकारात्मक ऊर्जा का वेग बहुत ज्यादा होता है. इसलिए इस दौरान नया निवेश और लेन देन न करें. इससे जीवन में आर्थिक संकट आ सकता है.

करें ये काम

होलाष्टक के दौरान दान करें. इससे घर में सुख-समृद्धि आती है.

हनुमान चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. ऐसा करना विशेष फलदायी माना जाता है.

इस दौरान लड्डू गोपाल का पूजन करें. उनके गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ करें. इससे जीवन में सकारात्मकता रहती है.

Disclaimer:इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. हम इसकी पुष्टि नहीं करता है.

Celebrating 1.5 Years of Success: World EdX’s Impact on Study Abroad Aspirants in India!

February 14, Kanpur- Imagine stepping onto a university campus in a foreign land, a dream you once thought impossible is now a vibrant reality. For countless Indian students, this dream is becoming a reality, thanks to the dedicated efforts of organizations like World EdX Pvt. Ltd. Today, we celebrate a significant milestone: 1.5 years of empowering study abroad aspirants in India!

World EdX was founded on a simple yet powerful idea: to bridge the gap between Indian students and their global education aspirations. The visionaries behind this initiative, Directors Ankit Srivastava, Ashish Gupta, Atul Agarwal, and Manika Gupta envisioned a future where pursuing international education was accessible and achievable for every determined student. Their passion, combined with a deep understanding of the challenges faced by Indian students, laid the foundation for World EdX’s remarkable journey.

Ashish Gupta has mentioned that since the inception of World EdX, we’ve witnessed incredible growth and achieved milestones that fill us with pride. We have helped 5000+ students embark on international education journeys, securing placements in top-tier universities across 10+ countries. From navigating complex application processes to providing personalized guidance on visa requirements, World EdX has been a constant companion for students. We are expanding our network of partner universities, forging strong relationships with institutions that recognize the potential of Indian students.

The Voice of Success:  

"The support I received from World EdX was invaluable," says Saransh Shukla, who recently secured admission to the University of York in the UK. "They helped me every step of the way, from choosing the right program to preparing for my visa interview."

What truly sets World EdX apart is its commitment to personalized support. Their team of expert counselors works closely with each student, providing tailored guidance that maximizes their chances of success. Whether it's identifying the right university, crafting a compelling statement of purpose, or preparing for standardized tests, they provide the support and resources needed. Under COO Ashish Mathur’s leadership, World EdX has streamlined its processes, ensuring a seamless and efficient experience for every student. Ashish Mathur's expertise in the international education industry has been instrumental in scaling our operations and expanding our reach.

Ashish Mathur shares: “World EdX is constantly evolving and innovating to better serve the needs of its students. We're excited to introduce a new AI-powered platform, which will provide personalized study-abroad recommendations and streamline the application process.”

They invite you to join them in celebrating this milestone!

Visit the website www.worldedx.com to learn more about their services and how they can help you achieve your study abroad goals. Follow us on social media YouTubeInstagram for the latest updates and student success stories. For a limited time.

They remain committed to the mission of empowering Indian students and shaping the future of global education. Here's to many more years of helping students reach for the stars!

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आजमगढ़। चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति का धरना जारी , चन्द्र शेखर आजाद की शहादत पर निकाला जूलूस
निजामाबाद (आजमगढ़)। चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति के तत्वाधान में 112 वें दिन भी धरना जारी रहा। धरना स्थल पर तमाम किसान नेताओं ने मिलकर आज चंद्रशेखर आजाद की शहादत दिवस को मनाने के लिए जुलूस मार्च निकाला। जुलूस कलेक्ट्रेट परिसर से निकलकर मेडिकल कॉलेज के उत्तरी गेट पर स्थित चंद्रशेखर स्मारक तक पहुंचा । वक्ताओं ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में चंद्रशेखर आजाद की कुर्बानी को भुलाया नहीं जा सकता उन्होंने भारत देश को न सिर्फ आजाद कराने बल्कि मजदूर किसानों के नेतृत्व में समाजवादी राज्य का सपना भी देखा। इसके लिए उन्होंने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन नामक क्रांतिकारी संगठन भी बनाया। आज भी क्रांतिकारियों का सपना अधूरा है देश में मजदूर किसान सड़कों पर आंदोलन के लिए मजबूर हैं। देवरिया में ही 112 दिनों से चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति इसका एक उदाहरण है। इस कार्यक्रम में बृजेंद मणि त्रिपाठी ,विकास दुबे ,राजेश आजाद ,मनोज मणि त्रिपाठी , नक, छेद सिंह ,फूलचंद , राम सिंगार , शेर सिंह , श्री राम ,राम प्रकाश सिंह ,कलेक्टर शर्मा ,अशोक मालवीय ,जगदीश यादव ,पंडित वेद प्रकाश, बकरीदन उर्फ बरकत अली ,टाइगर यादव ,महात्मा बजरंगी दास ,जयप्रकाश गुप्ता, विजय कुमार सिंह ,अशोक कुमार सिंह, राज मंगल सिंह, एकेश चंद्र मिश्रा ,विवेक कुमार गुप्ता इत्यादि लोग उपस्थित रहे। द्वारा ‌‌‌ बृजेंद्र मणि त्रिपाठी अध्यक्ष -चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति
झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते बने झारखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, राज्यपाल ने दी सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी


रांची (डेस्क )झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

 राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आज राज्य सरकार के प्रस्ताव पर तत्काल निर्णय लेते हुए यह नियुक्ति की है ।

राज्यपाल ने उम्मीद जताई कि उनकी नियुक्ति से राज्य में नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी आएगी और आयोग द्वारा सभी परीक्षाओं का संचालन निर्धारित कैलेंडर के अनुसार समयबद्ध एवं सुचारु रूप से किया जा सकेगा। इसके साथ ही, आयोग की कार्यप्रणाली में गति और पारदर्शिता आने की भी संभावना जताई गई है।

एल. खियांग्ते का प्रशासनिक अनुभव और नेतृत्व क्षमता आयोग को नई दिशा देने में सहायक साबित हो सकती है। राज्य में युवाओं के लिए यह नियुक्ति उम्मीदों का संचार करती है, क्योंकि इससे नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार और तेजी आने की संभावना है।

एल खियांगते मिजोरम के मूल निवासी हैं और आदिवासी समुदाय से आते हैं। वे झारखंड के 24वें मुख्य सचिव भी रह चुके हैं । 26 अक्टूबर 1964 को जन्मे एल खियांगते 31 अक्टूबर 2024 को सेवानिवृत्त हुए हैं।

खड़गे ने एससी-एसटी-ओबीसी और अल्पसंख्यकों की छात्रवृत्ति में 'गिरावट' का लगाया आरोप, क्या कहते हैं आंकड़े

#mallikarjunkhargeslamsgovtoverdecliningscholarships

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया है कि केन्द्र सरकार ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं की छात्रवृत्तियां छीन ली हैं। साथ ही खड़गे ने दावा किया कि बीजेपी का नारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ कमजोर वर्गों की आकांक्षाओं का मजाक उड़ाता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में ये दावा का।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को संबोधित करते हुए पोस्ट में लिखा कि 'देश के एससी, एसटी और ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के युवाओं की छात्रवृत्तियों को आपकी सरकार ने हथियाने का काम किया है। सरकारी आंकड़े बातते हैं कि सभी वजीफों में मोदी सरकार ने लाभार्थियों की भारी कटौती तो की है, साथ ही साल-दर-साल फंड में औसतन 25 फीसदी कम खर्च किया है।'

लाभार्थियों की संख्या में चार साल में 94% की गिरावट

खरगे के मुताबिक, अल्पसंख्यक छात्रों को मिलने वाले प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के लाभार्थियों की संख्या में पिछले चार बरस के दौरान 94 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के लाभार्थियों की संख्या पिछले चार बरस ही में 83 फीसदी तक घटी है। इसके अलावा, मेरिट कम मीन्स छात्रवृत्ति योजना, जो अल्पसंख्यक छात्रों को दी जाती है, उसके लाभार्थियों की संख्या में चार बरस के भीतर 51 फीसदी तक की कमी आई है।

अब अगर सरकार के हवाले ही से सामने आए कुछ आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि जरूर स्कॉलरशिप के कई स्कीम्स में लाभार्थियों और बजट का आवंटन घटा हैः-

प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप एक साल में 40 फीसदी घटा

संसदीय समिति की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2021-22 में प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप के लिए आवंटित बजट 1,378 करोड़ रुपये थी। जो 2024-25 में घटकर 326 करोड़ रुपये के करीब रह गई। वहीं, इस वित्त वर्ष के लिए सरकार ने महज 198 करोड़ रुपये के करीब का आवंटन प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप के लिए किया है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इस बार का आवंटन 40 फीसदी तक घट गया है। अगर लाभार्थियों की बात की जाए तो 2021-22 में सरकार ने जहां 28 लाख 90 हजार छात्रों को ये स्कॉलरशिप दिया। तो 2023-24 में सरकार महज 4 लाख 91 हजार छात्रों को ही वजीफा दे सकी। लाभार्थियों और फंड में इतनी बड़ी गिरावट की वजह सरकार का क्लास 1 से लेकर 8 तक के छात्रों के लिए इस स्कीम को बंद करना रहा। अब ये स्कीम केवल नौवीं और दसवीं के छात्रों को दी जाती है। सरकार का कहना है कि 1 से लेकर 8 तक के छात्रों को पहले ही सरकार शिक्षा के अधिकार कानून के जरिये मदद कर रही है।

पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप का आवंटन 64 फीसदी घटा

वहीं, पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में सरकार ने 2023-24 में इस मद में 1145 करोड़ रुपये का आवंटन किया था मगर सरकार 1065 करोड़ ही खर्च कर पाई। वर्ष 2024-25 में सरकार ने ज्यादा खर्च किया, और यह बढ़कर 1,145 करोड़ रुपये तक पहुंचा। मगर इस 2025-26 के बजट में इस योजना के लिए बजट का आवंटन पिछले साल के मुकाबले 64 फीसदी तक घट चुका है। सरकार ने इस साल के बजट में महज 414 करोड़ रुपये के करीब का आवंटन किया है। ये पिछले साल के मुकाबले कम से कम सात सौ करोड़ रुपये कम है। इस तरह ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि फंड का आवंटन कम होने से लाभार्थियों की संख्या पर भी इसका असर पड़ेगा।

मेरिट कम मीन्स स्कॉलरशिप 78 फीसदी तक घटा

ये वजीफा अल्पसंख्यक समुदाय के उन छात्रों को दिया जाता है जो ग्रैजुएशन या फिर पोस्ट ग्रैजुएशन प्रोफेशनल औऱ टेक्निकल कोर्स में करना चाहते हैं। 2020-21 में इस मद में जहां सरकार का बजट आवंटन 400 करोड़ था, वह अगले अकादमिक वर्ष में 325 करोड़ रुपये रह गया। वहीं ये आवंटन 2023-24 में 44 करोड़ जबकि 2024-25 में आवंटन घटकर महज 34 करोड़ रुपये के करीब रह गया। अगर इस बरस के आवंटन की बात की जाए तो यह पिछले बरस के मुकाबले 78 फीसदी तक घट चुका है। इस साल सरकार ने बजट में इस वजीफे के लिए महज 7 करोड़ रुपये के करीब का आवंटन किया है। पोस्ट-मैट्रिक वजीफे ही की तरह मेरिट कम मीन्स स्कॉलरशिप के फंड में आवंटन घटने से इसके लाभार्थियों की संख्या पर भी असर पड़ेगा।

केन्द्र सरकार ने दोषी नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने का किया विरोध, सुप्रीम कोर्ट में दायर किया हलफनामा
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सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों केंद्र सरकार से जवाब मांगा था कि क्या दोषी सांसदों और विधायकों के चुनाव लड़ने पर हमेशा के लिए बैन लगना चाहिए। इस मामले पर अब केंद्र सरकार की तरफ से हलफनामा दाखिल किया गया है। केन्द्र सरकार ने दोषी राजनेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग का विरोध किया है। केंद्र ने कहा कि आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए नेताओं पर आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाना सही नहीं होगा।

*अयोग्यता तय करना संसद के अधिकार क्षेत्र में- केंद्र*
केंद्र सरकार ने दोषी करार दिये गए राजनीतिक नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की सजा को कठोर कहा है। साथ ही अनुरोध करने वाली एक याचिका का उच्चतम न्यायालय में विरोध करते हुए कहा है कि इस तरह की अयोग्यता तय करना केवल संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे में केंद्र ने कहा कि याचिका में जो अनुरोध किया गया है वह विधान को फिर से लिखने या संसद को एक विशेष तरीके से कानून बनाने का निर्देश देने के समान है, जो न्यायिक समीक्षा संबंधी उच्चतम न्यायालय की शक्तियों से पूरी तरह से परे है।

*6 साल की अयोग्यता ही काफी-केंद्र*
केंद्र ने कहा,वर्तमान में 6 वर्षों की अयोग्यता अवधि से बढ़कर आजीवन प्रतिबंध लगाना अनुचित कठोरता होगी और यह संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। केंद्र ने कहा कि न्यायपालिका संसद को किसी कानून में संशोधन करने या उसे लागू करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। केंद्र ने मद्रास बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ के फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि कोर्ट संसद को कानून बनाने या संशोधन का निर्देश नहीं दे सकती।

*क्या है मामला?*
वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने 2016 में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए नेताओं को 6 साल के लिए अयोग्यता को अपर्याप्त बताते हुए राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए दोषी विधायकों और सांसदों पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। उन्होंने याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनिम, 1951 की धारा 8 और 9 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी।
मौजूदा कानून के तहत आपराधिक मामलों में 2 साल या उससे अधिक की सजा होने पर सजा की अवधि पूरी होने के 6 साल बाद तक चुनाव लड़ने पर ही रोक है। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने याचिका में दोषी राजनेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने और अलग-अलग अदालतों में उनके खिलाफ लंबित मुकदमों को तेजी से निपटाने की मांग की है।