/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1671688716481923.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1671688716481923.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1671688716481923.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1759985149539199.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1759985149539199.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1759985149539199.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1630055818836552.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/_noavatar_user.gif/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs1/1560738387629953.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs4/1560738387629953.png/home/streetbuzz1/public_html/ajaydev/system/../storage/avatars/thumbs5/1560738387629953.png StreetBuzz s:allahabad
पौष पूर्णिमा पर स्नान के साथ में माघ मेला शुरू, सुबह 9 बजे तक 6 लाख से ज्यादा लोगों ने लगाई डुबकी

#allahabadmaghmela_2026

संगम की पवित्र रेती पर आस्था का महासागर उमड़ पड़ा है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर आज से माघ मेले का भव्य आगाज़ हो चुका है। संगम तट की ओर तड़के से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया है। संगम में आस्था की डुबकी लगाकर लोग पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। शनिवार की अलसुबह से ही लाखों श्रद्धालु पवित्र त्रिवेणी में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।

पौष पूर्णिमा के स्नान के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे हैं। भोर होते ही संगम तट पर जयकारों का शोर गूंजने लगा था। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। पवित्र त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है, लेकिन भक्ति की भावना सभी को प्रेरित कर रही है।

सुबह 9 बजे तक 6 लाख से ज्यादा लोगों ने लगाई डुबकी

माघ मेला अधिकारी ऋषि राज ने कहा, आज पौष पूर्णिमा के अवसर पर माघ मेला शुरू हो गया है। सभी घाटों पर स्नान चल रहा है। हम अभी संगम क्षेत्र में हैं और सभी इंतज़ाम पूरे हो चुके हैं। हमारे पास यहां पर्याप्त संख्या में चेंजिंग रूम उपलब्ध हैं। आज सुबह 8 बजे तक 6 लाख 50 हज़ार श्रद्धालुओं ने संगम में पवित्र डुबकी लगाई है।

44 दिनों तक मेला

माघ मेला 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि तक चलेगा। 44 दिनों तक चलने वाला यह ऐतिहासिक माघ मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, संस्कृति और सुरक्षा व्यवस्था का अद्भुत उदाहरण है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।

400 से अधिक एआई-इनेबल्ड सीसीटीवी कैमरे लगे

मेले की सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व बताई जा रही है। पूरे मेला क्षेत्र में 400 से अधिक एआई-इनेबल्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके जरिए हर गतिविधि पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। इसके अलावा ड्रोन के माध्यम से भी भीड़ और यातायात की लगातार निगरानी की जा रही है। जल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के गोताखोरों को संगम और आसपास के घाटों पर तैनात किया गया है। किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए एटीएस, बम डिस्पोजल स्क्वॉड (बीडीएस) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की भी तैनाती की गई है। मेला क्षेत्र को कई सेक्टरों में बांटकर पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

शाही ईदगाह मामले में हिंदू पक्ष को झटका, हाईकोर्ट ने खारिज विवादित ढांचा घोषित करने की मांग वाली याचिका

#allahabad_high_court_order_on_declaring_shahi_idgah_as_a_disputed_structure

मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट से हिंदू पक्ष को बड़ा झटका दिया है। मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मामले में शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह से जुड़ी संपत्ति को विवादित घोषित करने से इनकार कर दिया।

पिछली सुनवाई पर बहस पूरी होने पर हाईकोर्ट ने फैसला रिजर्व कर लिया था। साथ ही निर्णय के लिए चार जुलाई की तारीख नियत की थी। जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की अदालत ने वादी महेंद्र प्रताप सिंह की ओर से दाखिल अर्जी खारिज कर दी।

हिंदू पक्ष के सूट नंबर 13 में वादी अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने यह अर्जी दाखिल की थी। उन्होंने मासरे आलम गिरी से लेकर मथुरा के कलेक्टर रहे एफ एस ग्राउस तक के समय की लिखी पुस्तकों का अदालत में हवाला दिया था। सूट नंबर 13 के वादी द्वारा आवेदन A-44 प्रस्तुत किया गया था, जिसमें संबंधित स्टेनोग्राफर को इस मूल मुकदमे की संपूर्ण आगे की कार्रवाई में शाही ईदगाह मस्जिद के स्थान पर “विवादित ढांचा” शब्द का उपयोग करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। हालांकि मुस्लिम पक्ष द्वारा इस आवेदन पर लिखित आपत्ति दायर की गई थी।

साथ ही दावा किया था कि मथुरा की शाही मस्जिद भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मूल गर्भगृह को तोड़कर ही बनाई गई है। हालांकि हिंदू पक्ष की इस मांग पर मुस्लिम पक्ष ने विरोध जताया था। साथ ही कोर्ट में लिखित आपत्ति भी दाखिल की थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की कोर्ट ने शाही ईदगाह को विवादित ढांचा घोषित करने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी, मानसून सत्र में हो सकता है फैसला

#allahabadhighcourtjusticeyashwantvarmacash_row 

दिल्ली स्थित अपने सरकारी आवास से भारी मात्रा में नकदी मिलने के मामले में हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। खबर आ रही है कि उन्हें पद से हटाने की तैयारी चल रही है।केंद्र सरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने के विकल्प पर विचार कर रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली से इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजे गए जस्टिस वर्मा यदि खुद इस्तीफा नहीं देते हैं, तो संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाना एक स्पष्ट विकल्प है।

जस्टिस वर्मा के इस्तीफे का इंतजार

न्यूज एजेंसी PTI ने सरकार से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया कि 15 जुलाई के बाद शुरू होने वाले मानसून सत्र में यह प्रस्ताव लाया जा सकता है। हालांकि सरकार अभी इस बात का इंतजार कर रही है कि जस्टिस वर्मा खुद इस्तीफा दे दें। वहीं, दूसरी तरफ सरकार महाभियोग लाने के अपने इरादे से विपक्षी नेताओं को अवगत करा रही है। 

विपक्षी दलों का साधने में जुटी सरकार

सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे पर विपक्षी दलों का समर्थन मिलने की पूरी उम्मीद है। बीते शुक्रवार से केंद्र सरकार विपक्षी दलों को साधने में लगी है। केंद्र सरकार को भरोसा है कि संसद के दोनों सदनों में उसको दो तिहाई बहुमत प्राप्त हो जाएगा। जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। जस्टिस वर्मा के खिलाफ संसद के दोनों सदनों में महाभियोग चलाकर हटाने के लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए होगा।

सरकारी आवास से मिले थे नोटों के बंडलों से भरे बोरे

दरअसल, जस्टिस वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित घर में 14 मार्च की रात आग लगी थी। उनके घर के स्टोर रूम से 500-500 रुपए के जले नोटों के बंडलों से भरे बोरे मिले थे। जिसके बाद उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था।

22 मार्च को इस मामले में तत्कालीन सीजेआई ने जांच समिति बनाई थी। कमेटी ने 3 मई को रिपोर्ट तैयार की और 4 मई को सीजेआई को सौंपी थी। कमेटी ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों को सही पाया और उन्हें दोषी ठहराया था।

पूर्व सीजेआई ने की थी महाभियोग चलाने की सिफारिश

देश के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उनके खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश की थी। खन्ना ने यह पत्र सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित एक आंतरिक जांच पैनल द्वारा वर्मा को दोषी ठहराए जाने के बाद भेजा था, हालांकि इसके निष्कर्षों को सार्वजनिक नहीं किया गया था।

रेप मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा असंवेदनशील, जानें क्या था हाईकोर्ट का जजमेंट

#allahabadhighcourtjudgementcontroversysupremecourt

नाबालिग लड़की के साथ रेप की कोशिश से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 17 मार्च को दिए विवादित फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था, जिस पर फैसला आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में की गई टिप्पणियों पर रोक लगाई। कोर्ट ने कहा कि टिप्पणी पूरी तरह असंवेदनशीलता और अमानवीय दृष्टिकोण को दर्शाती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश में की गई विवादास्पद टिप्पणियों पर शुरू की गई स्वत: संज्ञान कार्यवाही में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, यूपी सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि छाती पकड़ना, पायजामा का नाड़ा खींचना दुष्कर्म के प्रयास का अपराध नहीं है।

इस मामले की जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ सुनवाई कर रही थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट के विवादित फैसले के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें यह कहते हुए दुख हो रहा है कि निर्णय लेखक की ओर से संवेदनशीलता की कमी दर्शाती है। यह निर्णय तत्काल नहीं लिया गया था और इसे सुरक्षित रखने के 4 महीने बाद सुनाया गया। इस प्रकार इसमें विवेक का प्रयोग किया गया। हम आमतौर पर इस चरण में स्थगन देने में हिचकिचाते हैं, लेकिन चूंकि पैरा 21, 24 और 26 में की गई टिप्पणियां कानून के सिद्धांतों से अनभिज्ञ हैं और अमानवीय दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। हम उक्त पैरा में की गई टिप्पणियों पर रोक लगाते हैं।

हाईकोर्ट ने दिआ था विवादित फैसला

इससे पहले हाईकोर्ट ने दो आरोपियों पवन व आकाश के मामले में यह विवादित फैसला दिया था। शुरुआत में, दोनों पर दुष्कर्म और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। लेकिन, हाईकोर्ट ने फैसले में कहा था, उनका कृत्य दुष्कर्म या दुष्कर्म का प्रयास माने जाने के योग्य नहीं था।किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश से रेप या 'अटेम्प्ट टु रेप' का मामला नहीं बनता।

सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने ये फैसला सुनाते हुए 2 आरोपियों पर लगी धाराएं बदल दीं। वहीं 3 आरोपियों के खिलाफ दायर क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन स्वीकार कर ली थी।

क्या है पूरा मामला?

यूपी के कासगंज की एक महिला ने 12 जनवरी, 2022 को कोर्ट में एक शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप था लगाया कि 10 नवंबर, 2021 को वह अपनी 14 साल की बेटी के साथ कासगंज के पटियाली में देवरानी के घर गई थीं। उसी दिन शाम को अपने घर लौट रही थीं। रास्ते में गांव के रहने वाले पवन, आकाश और अशोक मिल गए।

पवन ने बेटी को अपनी बाइक पर बैठाकर घर छोड़ने की बात कही। मां ने उस पर भरोसा करते हुए बाइक पर बैठा दिया, लेकिन रास्ते में पवन और आकाश ने लड़की के प्राइवेट पार्ट को पकड़ लिया। आकाश ने उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास करते हुए उसके पायजामे की डोरी तोड़ दी।

लड़की की चीख-पुकार सुनकर ट्रैक्टर से गुजर रहे सतीश और भूरे मौके पर पहुंचे। इस पर आरोपियों ने देसी तमंचा दिखाकर दोनों को धमकाया और फरार हो गए।

हाईकोर्ट ने कहा था कि आरोपियों पर ‘अटेम्प्ट टु रेप’ का चार्ज हटाया जाए। उन पर यौन उत्पीड़न की अन्य धाराओं के तहत केस चलाने का आदेश दिया था। जब पीड़ित बच्ची की मां आरोपी पवन के घर शिकायत करने पहुंची, तो पवन के पिता अशोक ने उसके साथ गालीगलौज की और जान से मारने की धमकी दी। महिला अगले दिन थाने में एफआईआर दर्ज कराने गई। जब पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, तो उसने अदालत का रुख किया।

*देवरिया न्यायालय में लॉ बुक्स की बाइंडिंग के लिए कोटेशन आमंत्रित*

देवरिया- केंद्रीय नाजिर, नजारत अनुभाग जजी ने बताया है कि जनपद न्यायाधीश के निर्देशानुसार पुस्तकालय एवं लेखन सामग्री अनुभाग जजी देवरिया के मासिक और वार्षिक लॉ बुक्स जनरल की बाइंडिंग से संबंधित कार्य कराया जाना है। इसके लिए बाइंडिंग फर्मों से बाइंडिंग कार्य का कोटेशन आमंत्रित किया गया है।

इच्छुक फर्में मानक और गुणवत्ता के अनुसार प्रति पुस्तक बाइंडिंग कार्य के लिए अपनी कोटेशन दर, सूचना निर्गत होने की तिथि से दो सप्ताह के अंदर, किसी भी कार्य दिवस में, ईमेल आईडी पर अथवा पंजीकृत डाक या व्यक्तिगत रूप से कार्यालय नजारत अनुभाग जजी, देवरिया में प्रस्तुत कर सकते हैं।

मुसलमानों पर दिए अपने बयान पर कायम हैं जस्टिस यादव, बोले-मैंने किसी न्यायिक सीमा का उल्लंघन नहीं किया

#justice_shekhar_yadav_respond_allahabad_high_court_his_remarks_muslims

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। पिछले दिनों प्रयागराज में विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रम में उन्होंने हिंदू और मुस्लिम धार्मिक कानूनों या मान्यताओं को लेकर बयान दिया था। इसके बाद वह विवादों के घेरे में आ गएय़ उनको सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के सामने पेश भी होना पड़ा था। हालांकि, अपने बयान पर कायम हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से तलब किए जाने के एक महीने बाद, जस्टिस यादव ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कहा है कि वह अपनी टिप्पणी पर कायम हैं, और उनके अनुसार यह न्यायिक आचरण के किसी भी सिद्धांत का उल्लंघन नहीं करती है।

सीजेआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण भांसाली से लेटेस्ट अपडेट मांगी थी। इसके बाद जस्टिस भांसाली ने जस्टिस कुमार से कॉलेजियम के बाद उनके जवाब मांगी थी, जिसके बाद उन्होंने लेटर लिख कर जवाब दिया। जस्टिस शेखर कुमार यादव ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर बताया कि वह अपनी टिप्पणी पर कायम हैं, जो उनके अनुसार न्यायिक आचरण के किसी भी सिद्धांत का उल्लंघन नहीं करती है।

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण भंसाली ने भी 17 दिसंबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अगुवाई वाले कॉलेजियम के साथ जस्टिस यादव की बैठक के बाद उनसे जवाब तलब किया था। इस महीने की शुरुआत में, अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की ओर से बताया गया कि सीजेआई ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस भंसाली को पत्र लिखकर इस मसले पर नई रिपोर्ट मांगी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक जवाब मांगने वाले उक्त पत्र में लॉ के एक छात्र और एक आईपीएस अधिकारी की ओर से उनके भाषण के खिलाफ दायर की गई शिकायत का जिक्र किया गया था, जिसे सरकार ने अनिवार्य रूप से रिटायर कर दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार के अनुसार, जस्टिस यादव ने अपने जवाब में दावा किया कि उनके भाषण को निहित स्वार्थ वाले लोगों की ओर से तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है, और न्यायपालिका से जुड़े लोग जो सार्वजनिक रूप से खुद का बचाव करने में असमर्थ हैं, उन्हें न्यायिक बिरादरी के सीनियर लोगों द्वारा सुरक्षा दिए जाने की जरुरत है।

क्या बोले थे यादव

जस्टिस यादव ने कहा, आपको यह गलतफहमी है कि अगर कोई कानून (यूसीसी) लाया जाता है, तो यह आपके शरीयत, आपके इस्लाम और आपके कुरान के खिलाफ होगा, लेकिन मैं एक और बात कहना चाहता हूं। चाहे वह आपका पर्सनल लॉ हो, हमारा हिंदू कानून हो, आपका कुरान हो या फिर हमारी गीता हो, जैसा कि मैंने कहा कि हमने अपनी प्रथाओं में बुराइयों (बुराइयों) को संबोधित किया है, कमियां थीं, दुरुस्त कर लिए हैं, छुआछूत, सती, जौहर, कन्या भ्रूण हत्या, हमने उन सभी मुद्दों को संबोधित किया है, फिर आप इस कानून को खत्म क्यों नहीं कर रहे हैं, कि जब आपकी पहली पत्नी मौजूद है, तो आप तीन पत्नियां रख सकते हैं, उसकी सहमति के बिना, यह स्वीकार्य नहीं है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट भर्ती 2024: 3306 पदों पर आवेदन कल से शुरू, कक्षा 6 से लेकर 12वीं पास तक करें अप्लाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के जिला न्यायालयों में यूपी सिविल कोर्ट स्टाफ सेंट्रलाइज्ड भर्ती 2024-25 के तहत ग्रुप सी और डी के विभिन्न पदों पर भर्तियों का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इसके लिए एप्लीकेशन प्रोसेस 4 अक्टूबर से शुरू होगा. अभ्यर्थी हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट allahabadhighcourt.in के जरिए 24 अक्टूबर तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन ऑनलाइन मोड में ही करना होगा.

इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए कुल 3306 पदों को भरा जाना है. इन पदों में स्टेनोग्राफर ग्रेड 3 के 583 पद, जूनियर असिस्टेंट के 1054, ड्राइवर के 30 और ट्यूबवेल ऑपरेटर कम इलेक्ट्रीशियन/ स्वीपर के कुल 1639 पद शामिल हैं.

ये होनी चाहिए आवेदन की योग्यता

स्टेनोग्राफर पदों के लिए आवेदन करने वाले कैंडिडेट का ग्रेजुएशन पास होने के साथ स्टेनोग्राफर में डिप्लोमा होना चाहिए. वहीं जूनियर असिस्टेंट के लिए 12वीं पास के साथ CCC सर्टिफिकेट होना चाहिए. ड्राइवर और ट्यूबवेल ऑपरेटर कम इलेक्ट्रीशियन पदों के लिए 10वीं पास होना चाहिए. स्वीपर पदों के लिए कैंडिडेट का क्लास 6 पास होना अनिवार्य है. सभी पदों के लिए अभ्यर्थी की उम्र 18 वर्ष से 40 वर्ष क बीच होनी चाहिए. उम्र की गणना 1 जुलाई 2024

एप्लीकेशन फीस

स्टेनोग्राफर पदों के लिए सामान्य और ओबीसी कैटेगरी के लिए अभ्यर्थी को 950 रुपए एप्लीकेशन फीस और बैंक शुल्क जमा करना होगा. वहीं एससी/एसटी वर्ग को 750 रुपए आवेदन शुल्क के साथ बैंक शुल्क देना होगा. सभी पदों के लिए आवेदन शुल्क अलग-अलग हैं. अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी जारी भर्ती विज्ञापन को चेक कर सकते हैं.

ऐसे करें अप्लाई

हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट allahabadhighcourt.in पर जाएं.

होम पेज पर नीचे दिए गए Recruitment टैब पर क्लिक करें.

अब नोटिफिकेशन को पढ़े और नियमानुसार आवेदन करें.

कैसे होगा चयन?

इन सभी पदों पर चयन लिखित परीक्षा के जरिए किया जाएगा. एग्जाम ओएमआर शीट पर होगा. इसके बाद हिंदी/अंग्रेजी कंप्यूटर टाइप टेस्ट, हिंदी/अंग्रेजी स्टेनोग्राफी टेस्ट और तकनीकी ड्राइविंग टेस्ट होगा.

राहुल गांधी की नागरिकता पर फिर छिड़ी बहस, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भारत सरकार से मांगा जवाब

#allahabad_high_court_seeks_answer_from_central_govt_on_rahul_gandhi_citizenship

राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुलगांधी की नागरिकता के विवाद पर केंद्र सरकार से ब्योरा मांगा है। कोर्ट ने नागरिकता अधिनियम-1955 के तहत की गई शिकायत पर केंद्र सरकार से कार्रवाई का ब्योरा मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेच में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता को लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। ये याचिका कर्नाटक के बीजेपी कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर ने दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर सीबीआई जांच कराई जाए। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने एएसजी सूर्यभान पांडेय को निर्देश देते हुए कहा कि वो इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय से जानकारी हासिल करें।

जून में रायबरेली लोकसभा से इलेक्शन को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ में 3 महीने पहले ये जनहित याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया है कि राहुल गांधी भारत के नहीं बल्कि ब्रिटेन के नागरिक हैं। इसके आधार पर राहुल गांधी का चुनाव पर्चा रद्द करने की मांग की गई थी।

जुलाई में इस याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इस पर कोर्ट ने कहा था कि याची पहले तो सिटीजनशिप एक्ट कतहत सक्षम प्राधिकारी के पास शिकायत कर सकता है। हालांकि याचिकाकर्ता का कहना है कि उसके पास पर्याप्त सबूत हैं कि राहुल गांधी ब्रिटेन नागरिक हैं। याची ने दलील दी कि उसके पास तमाम दस्तावेज और ब्रिटिश सरकार के कुछ ई-मेल हैं जिनसे ये साबित होता है कि राहुल गांधी एक ब्रिटिश नागरिक हैं। ऐसे में वो भारत में चुनाव लड़ने के अयोग्य है। वो लोकसभा के सदस्य पद पर नहीं रह सकते हैं।

याचिकाकर्ता ने गांधी की ब्रिटिश नागरिकता के आरोपों की सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता को भारतीय न्याय संहिता व पासपोर्ट एक्ट के तहत अपराध बताया और केस दर्ज करने की मांग की। याची ने कहा कि वो इस संबंध में सक्षम अधिकारी से दो-दो बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने कोर्ट में याचिका दाखिल है।

*वंचित तथा कमजोर वर्ग की प्रतिरक्षा हेतु लीगल एड डिफेंस काउंसलिंग की होगी स्थापना*

गोण्डा - गोण्डा में आपराधिक मामलों में वंचितों एवं कमजोर वर्ग की प्रतिरक्षा के लिए लीगल एड डिफेंस काउंसलिंग की स्थापना की जाएगी। जिस पर कई पदों पर आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं इसमें के लीगल एड डिफेंस काउंसिल का एक पद, डिप्टी के लीगल एड डिफेंस काउंसिल का एक पद व असिस्टेंट लीगल एट डिफेंस काउंसिल के दो पदों पर भर्ती की जाएगी।

सभी पदों के लिए योग्यता अलग-अलग निर्धारित की गई है। सभी पदों पर चयन समिति द्वारा आवेदक को मेरिट के आधार पर चयनित किया जाएगा। मेरिट आवेदकों की योग्यता के आधार पर बनेगी। इसमें आवेदक के विधिक ज्ञान, कौशल, वकालत प्रैक्टिस और अनुभव का ध्यान में रखा जाएगा। सभी पदों पर चयन 2 वर्षों के लिए संविदा पर किया जाएगा। कार्य संतोषजनक पाए जाने पर उनकी वार्षिक सेवा का विस्तार किया जाए सकेगा।

अपर जिला जज सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोण्डा नितिन श्रीवास्तव ने बताया कि सभी पदों हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 15 फरवरी शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई है। इच्छुक आवेदक आवेदन पूर्ण रूप से भरकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोंडा के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से अथवा स्पीड पोस्ट के माध्यम से जमा कर सकते हैं। आवेदन पत्र जनपद न्यायालय की वेबसाइट gonda.dcourts.gov.in उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की वेबसाइट upslsa.up.nic.in एवं माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की वेबसाइट allahabadhighcourt.in से डाउनलोड किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोंडा के कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।

Allahabad High Court UP HJSOnline Form 2024

Important Dates :

  • Application : 15/01/2024
  • Last Date : 29/02/2024
  • Last Date Pay Exam Fee :  29/02/2024

Total Vacancy : 83

Age Limit (as on 01/01/2024) :

  • Min Age : 35 Yrs.
  • Max Age : 45 Yrs.

Application Fee :

  • General / OBC / EWS : ₹1400/-
  • SC / ST : ₹1200/-
  • PH Divyang Gen / OBC / EWS : ₹750/-
  • PH Divyang SC / ST : ₹500/-

For More Details, Please Read Official Notification Carefully OR Visit Official Website.

Important Links :

Apply Online : Link Activate on 15/01/2024

Download Notification : Click Here

Official Website : Official Website

पौष पूर्णिमा पर स्नान के साथ में माघ मेला शुरू, सुबह 9 बजे तक 6 लाख से ज्यादा लोगों ने लगाई डुबकी

#allahabadmaghmela_2026

संगम की पवित्र रेती पर आस्था का महासागर उमड़ पड़ा है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर आज से माघ मेले का भव्य आगाज़ हो चुका है। संगम तट की ओर तड़के से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया है। संगम में आस्था की डुबकी लगाकर लोग पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। शनिवार की अलसुबह से ही लाखों श्रद्धालु पवित्र त्रिवेणी में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।

पौष पूर्णिमा के स्नान के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे हैं। भोर होते ही संगम तट पर जयकारों का शोर गूंजने लगा था। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। पवित्र त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है, लेकिन भक्ति की भावना सभी को प्रेरित कर रही है।

सुबह 9 बजे तक 6 लाख से ज्यादा लोगों ने लगाई डुबकी

माघ मेला अधिकारी ऋषि राज ने कहा, आज पौष पूर्णिमा के अवसर पर माघ मेला शुरू हो गया है। सभी घाटों पर स्नान चल रहा है। हम अभी संगम क्षेत्र में हैं और सभी इंतज़ाम पूरे हो चुके हैं। हमारे पास यहां पर्याप्त संख्या में चेंजिंग रूम उपलब्ध हैं। आज सुबह 8 बजे तक 6 लाख 50 हज़ार श्रद्धालुओं ने संगम में पवित्र डुबकी लगाई है।

44 दिनों तक मेला

माघ मेला 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि तक चलेगा। 44 दिनों तक चलने वाला यह ऐतिहासिक माघ मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, संस्कृति और सुरक्षा व्यवस्था का अद्भुत उदाहरण है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।

400 से अधिक एआई-इनेबल्ड सीसीटीवी कैमरे लगे

मेले की सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व बताई जा रही है। पूरे मेला क्षेत्र में 400 से अधिक एआई-इनेबल्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके जरिए हर गतिविधि पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। इसके अलावा ड्रोन के माध्यम से भी भीड़ और यातायात की लगातार निगरानी की जा रही है। जल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के गोताखोरों को संगम और आसपास के घाटों पर तैनात किया गया है। किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए एटीएस, बम डिस्पोजल स्क्वॉड (बीडीएस) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की भी तैनाती की गई है। मेला क्षेत्र को कई सेक्टरों में बांटकर पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

शाही ईदगाह मामले में हिंदू पक्ष को झटका, हाईकोर्ट ने खारिज विवादित ढांचा घोषित करने की मांग वाली याचिका

#allahabad_high_court_order_on_declaring_shahi_idgah_as_a_disputed_structure

मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट से हिंदू पक्ष को बड़ा झटका दिया है। मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मामले में शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह से जुड़ी संपत्ति को विवादित घोषित करने से इनकार कर दिया।

पिछली सुनवाई पर बहस पूरी होने पर हाईकोर्ट ने फैसला रिजर्व कर लिया था। साथ ही निर्णय के लिए चार जुलाई की तारीख नियत की थी। जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की अदालत ने वादी महेंद्र प्रताप सिंह की ओर से दाखिल अर्जी खारिज कर दी।

हिंदू पक्ष के सूट नंबर 13 में वादी अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने यह अर्जी दाखिल की थी। उन्होंने मासरे आलम गिरी से लेकर मथुरा के कलेक्टर रहे एफ एस ग्राउस तक के समय की लिखी पुस्तकों का अदालत में हवाला दिया था। सूट नंबर 13 के वादी द्वारा आवेदन A-44 प्रस्तुत किया गया था, जिसमें संबंधित स्टेनोग्राफर को इस मूल मुकदमे की संपूर्ण आगे की कार्रवाई में शाही ईदगाह मस्जिद के स्थान पर “विवादित ढांचा” शब्द का उपयोग करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। हालांकि मुस्लिम पक्ष द्वारा इस आवेदन पर लिखित आपत्ति दायर की गई थी।

साथ ही दावा किया था कि मथुरा की शाही मस्जिद भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मूल गर्भगृह को तोड़कर ही बनाई गई है। हालांकि हिंदू पक्ष की इस मांग पर मुस्लिम पक्ष ने विरोध जताया था। साथ ही कोर्ट में लिखित आपत्ति भी दाखिल की थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की कोर्ट ने शाही ईदगाह को विवादित ढांचा घोषित करने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी, मानसून सत्र में हो सकता है फैसला

#allahabadhighcourtjusticeyashwantvarmacash_row 

दिल्ली स्थित अपने सरकारी आवास से भारी मात्रा में नकदी मिलने के मामले में हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। खबर आ रही है कि उन्हें पद से हटाने की तैयारी चल रही है।केंद्र सरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने के विकल्प पर विचार कर रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, दिल्ली से इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजे गए जस्टिस वर्मा यदि खुद इस्तीफा नहीं देते हैं, तो संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाना एक स्पष्ट विकल्प है।

जस्टिस वर्मा के इस्तीफे का इंतजार

न्यूज एजेंसी PTI ने सरकार से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया कि 15 जुलाई के बाद शुरू होने वाले मानसून सत्र में यह प्रस्ताव लाया जा सकता है। हालांकि सरकार अभी इस बात का इंतजार कर रही है कि जस्टिस वर्मा खुद इस्तीफा दे दें। वहीं, दूसरी तरफ सरकार महाभियोग लाने के अपने इरादे से विपक्षी नेताओं को अवगत करा रही है। 

विपक्षी दलों का साधने में जुटी सरकार

सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे पर विपक्षी दलों का समर्थन मिलने की पूरी उम्मीद है। बीते शुक्रवार से केंद्र सरकार विपक्षी दलों को साधने में लगी है। केंद्र सरकार को भरोसा है कि संसद के दोनों सदनों में उसको दो तिहाई बहुमत प्राप्त हो जाएगा। जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। जस्टिस वर्मा के खिलाफ संसद के दोनों सदनों में महाभियोग चलाकर हटाने के लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए होगा।

सरकारी आवास से मिले थे नोटों के बंडलों से भरे बोरे

दरअसल, जस्टिस वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित घर में 14 मार्च की रात आग लगी थी। उनके घर के स्टोर रूम से 500-500 रुपए के जले नोटों के बंडलों से भरे बोरे मिले थे। जिसके बाद उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था।

22 मार्च को इस मामले में तत्कालीन सीजेआई ने जांच समिति बनाई थी। कमेटी ने 3 मई को रिपोर्ट तैयार की और 4 मई को सीजेआई को सौंपी थी। कमेटी ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों को सही पाया और उन्हें दोषी ठहराया था।

पूर्व सीजेआई ने की थी महाभियोग चलाने की सिफारिश

देश के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उनके खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश की थी। खन्ना ने यह पत्र सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित एक आंतरिक जांच पैनल द्वारा वर्मा को दोषी ठहराए जाने के बाद भेजा था, हालांकि इसके निष्कर्षों को सार्वजनिक नहीं किया गया था।

रेप मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा असंवेदनशील, जानें क्या था हाईकोर्ट का जजमेंट

#allahabadhighcourtjudgementcontroversysupremecourt

नाबालिग लड़की के साथ रेप की कोशिश से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 17 मार्च को दिए विवादित फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था, जिस पर फैसला आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में की गई टिप्पणियों पर रोक लगाई। कोर्ट ने कहा कि टिप्पणी पूरी तरह असंवेदनशीलता और अमानवीय दृष्टिकोण को दर्शाती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश में की गई विवादास्पद टिप्पणियों पर शुरू की गई स्वत: संज्ञान कार्यवाही में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, यूपी सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि छाती पकड़ना, पायजामा का नाड़ा खींचना दुष्कर्म के प्रयास का अपराध नहीं है।

इस मामले की जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ सुनवाई कर रही थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट के विवादित फैसले के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें यह कहते हुए दुख हो रहा है कि निर्णय लेखक की ओर से संवेदनशीलता की कमी दर्शाती है। यह निर्णय तत्काल नहीं लिया गया था और इसे सुरक्षित रखने के 4 महीने बाद सुनाया गया। इस प्रकार इसमें विवेक का प्रयोग किया गया। हम आमतौर पर इस चरण में स्थगन देने में हिचकिचाते हैं, लेकिन चूंकि पैरा 21, 24 और 26 में की गई टिप्पणियां कानून के सिद्धांतों से अनभिज्ञ हैं और अमानवीय दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। हम उक्त पैरा में की गई टिप्पणियों पर रोक लगाते हैं।

हाईकोर्ट ने दिआ था विवादित फैसला

इससे पहले हाईकोर्ट ने दो आरोपियों पवन व आकाश के मामले में यह विवादित फैसला दिया था। शुरुआत में, दोनों पर दुष्कर्म और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। लेकिन, हाईकोर्ट ने फैसले में कहा था, उनका कृत्य दुष्कर्म या दुष्कर्म का प्रयास माने जाने के योग्य नहीं था।किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश से रेप या 'अटेम्प्ट टु रेप' का मामला नहीं बनता।

सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने ये फैसला सुनाते हुए 2 आरोपियों पर लगी धाराएं बदल दीं। वहीं 3 आरोपियों के खिलाफ दायर क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन स्वीकार कर ली थी।

क्या है पूरा मामला?

यूपी के कासगंज की एक महिला ने 12 जनवरी, 2022 को कोर्ट में एक शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप था लगाया कि 10 नवंबर, 2021 को वह अपनी 14 साल की बेटी के साथ कासगंज के पटियाली में देवरानी के घर गई थीं। उसी दिन शाम को अपने घर लौट रही थीं। रास्ते में गांव के रहने वाले पवन, आकाश और अशोक मिल गए।

पवन ने बेटी को अपनी बाइक पर बैठाकर घर छोड़ने की बात कही। मां ने उस पर भरोसा करते हुए बाइक पर बैठा दिया, लेकिन रास्ते में पवन और आकाश ने लड़की के प्राइवेट पार्ट को पकड़ लिया। आकाश ने उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास करते हुए उसके पायजामे की डोरी तोड़ दी।

लड़की की चीख-पुकार सुनकर ट्रैक्टर से गुजर रहे सतीश और भूरे मौके पर पहुंचे। इस पर आरोपियों ने देसी तमंचा दिखाकर दोनों को धमकाया और फरार हो गए।

हाईकोर्ट ने कहा था कि आरोपियों पर ‘अटेम्प्ट टु रेप’ का चार्ज हटाया जाए। उन पर यौन उत्पीड़न की अन्य धाराओं के तहत केस चलाने का आदेश दिया था। जब पीड़ित बच्ची की मां आरोपी पवन के घर शिकायत करने पहुंची, तो पवन के पिता अशोक ने उसके साथ गालीगलौज की और जान से मारने की धमकी दी। महिला अगले दिन थाने में एफआईआर दर्ज कराने गई। जब पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, तो उसने अदालत का रुख किया।

*देवरिया न्यायालय में लॉ बुक्स की बाइंडिंग के लिए कोटेशन आमंत्रित*

देवरिया- केंद्रीय नाजिर, नजारत अनुभाग जजी ने बताया है कि जनपद न्यायाधीश के निर्देशानुसार पुस्तकालय एवं लेखन सामग्री अनुभाग जजी देवरिया के मासिक और वार्षिक लॉ बुक्स जनरल की बाइंडिंग से संबंधित कार्य कराया जाना है। इसके लिए बाइंडिंग फर्मों से बाइंडिंग कार्य का कोटेशन आमंत्रित किया गया है।

इच्छुक फर्में मानक और गुणवत्ता के अनुसार प्रति पुस्तक बाइंडिंग कार्य के लिए अपनी कोटेशन दर, सूचना निर्गत होने की तिथि से दो सप्ताह के अंदर, किसी भी कार्य दिवस में, ईमेल आईडी पर अथवा पंजीकृत डाक या व्यक्तिगत रूप से कार्यालय नजारत अनुभाग जजी, देवरिया में प्रस्तुत कर सकते हैं।

मुसलमानों पर दिए अपने बयान पर कायम हैं जस्टिस यादव, बोले-मैंने किसी न्यायिक सीमा का उल्लंघन नहीं किया

#justice_shekhar_yadav_respond_allahabad_high_court_his_remarks_muslims

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। पिछले दिनों प्रयागराज में विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रम में उन्होंने हिंदू और मुस्लिम धार्मिक कानूनों या मान्यताओं को लेकर बयान दिया था। इसके बाद वह विवादों के घेरे में आ गएय़ उनको सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के सामने पेश भी होना पड़ा था। हालांकि, अपने बयान पर कायम हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से तलब किए जाने के एक महीने बाद, जस्टिस यादव ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कहा है कि वह अपनी टिप्पणी पर कायम हैं, और उनके अनुसार यह न्यायिक आचरण के किसी भी सिद्धांत का उल्लंघन नहीं करती है।

सीजेआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण भांसाली से लेटेस्ट अपडेट मांगी थी। इसके बाद जस्टिस भांसाली ने जस्टिस कुमार से कॉलेजियम के बाद उनके जवाब मांगी थी, जिसके बाद उन्होंने लेटर लिख कर जवाब दिया। जस्टिस शेखर कुमार यादव ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर बताया कि वह अपनी टिप्पणी पर कायम हैं, जो उनके अनुसार न्यायिक आचरण के किसी भी सिद्धांत का उल्लंघन नहीं करती है।

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण भंसाली ने भी 17 दिसंबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अगुवाई वाले कॉलेजियम के साथ जस्टिस यादव की बैठक के बाद उनसे जवाब तलब किया था। इस महीने की शुरुआत में, अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की ओर से बताया गया कि सीजेआई ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस भंसाली को पत्र लिखकर इस मसले पर नई रिपोर्ट मांगी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक जवाब मांगने वाले उक्त पत्र में लॉ के एक छात्र और एक आईपीएस अधिकारी की ओर से उनके भाषण के खिलाफ दायर की गई शिकायत का जिक्र किया गया था, जिसे सरकार ने अनिवार्य रूप से रिटायर कर दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार के अनुसार, जस्टिस यादव ने अपने जवाब में दावा किया कि उनके भाषण को निहित स्वार्थ वाले लोगों की ओर से तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है, और न्यायपालिका से जुड़े लोग जो सार्वजनिक रूप से खुद का बचाव करने में असमर्थ हैं, उन्हें न्यायिक बिरादरी के सीनियर लोगों द्वारा सुरक्षा दिए जाने की जरुरत है।

क्या बोले थे यादव

जस्टिस यादव ने कहा, आपको यह गलतफहमी है कि अगर कोई कानून (यूसीसी) लाया जाता है, तो यह आपके शरीयत, आपके इस्लाम और आपके कुरान के खिलाफ होगा, लेकिन मैं एक और बात कहना चाहता हूं। चाहे वह आपका पर्सनल लॉ हो, हमारा हिंदू कानून हो, आपका कुरान हो या फिर हमारी गीता हो, जैसा कि मैंने कहा कि हमने अपनी प्रथाओं में बुराइयों (बुराइयों) को संबोधित किया है, कमियां थीं, दुरुस्त कर लिए हैं, छुआछूत, सती, जौहर, कन्या भ्रूण हत्या, हमने उन सभी मुद्दों को संबोधित किया है, फिर आप इस कानून को खत्म क्यों नहीं कर रहे हैं, कि जब आपकी पहली पत्नी मौजूद है, तो आप तीन पत्नियां रख सकते हैं, उसकी सहमति के बिना, यह स्वीकार्य नहीं है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट भर्ती 2024: 3306 पदों पर आवेदन कल से शुरू, कक्षा 6 से लेकर 12वीं पास तक करें अप्लाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के जिला न्यायालयों में यूपी सिविल कोर्ट स्टाफ सेंट्रलाइज्ड भर्ती 2024-25 के तहत ग्रुप सी और डी के विभिन्न पदों पर भर्तियों का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इसके लिए एप्लीकेशन प्रोसेस 4 अक्टूबर से शुरू होगा. अभ्यर्थी हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट allahabadhighcourt.in के जरिए 24 अक्टूबर तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन ऑनलाइन मोड में ही करना होगा.

इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए कुल 3306 पदों को भरा जाना है. इन पदों में स्टेनोग्राफर ग्रेड 3 के 583 पद, जूनियर असिस्टेंट के 1054, ड्राइवर के 30 और ट्यूबवेल ऑपरेटर कम इलेक्ट्रीशियन/ स्वीपर के कुल 1639 पद शामिल हैं.

ये होनी चाहिए आवेदन की योग्यता

स्टेनोग्राफर पदों के लिए आवेदन करने वाले कैंडिडेट का ग्रेजुएशन पास होने के साथ स्टेनोग्राफर में डिप्लोमा होना चाहिए. वहीं जूनियर असिस्टेंट के लिए 12वीं पास के साथ CCC सर्टिफिकेट होना चाहिए. ड्राइवर और ट्यूबवेल ऑपरेटर कम इलेक्ट्रीशियन पदों के लिए 10वीं पास होना चाहिए. स्वीपर पदों के लिए कैंडिडेट का क्लास 6 पास होना अनिवार्य है. सभी पदों के लिए अभ्यर्थी की उम्र 18 वर्ष से 40 वर्ष क बीच होनी चाहिए. उम्र की गणना 1 जुलाई 2024

एप्लीकेशन फीस

स्टेनोग्राफर पदों के लिए सामान्य और ओबीसी कैटेगरी के लिए अभ्यर्थी को 950 रुपए एप्लीकेशन फीस और बैंक शुल्क जमा करना होगा. वहीं एससी/एसटी वर्ग को 750 रुपए आवेदन शुल्क के साथ बैंक शुल्क देना होगा. सभी पदों के लिए आवेदन शुल्क अलग-अलग हैं. अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी जारी भर्ती विज्ञापन को चेक कर सकते हैं.

ऐसे करें अप्लाई

हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट allahabadhighcourt.in पर जाएं.

होम पेज पर नीचे दिए गए Recruitment टैब पर क्लिक करें.

अब नोटिफिकेशन को पढ़े और नियमानुसार आवेदन करें.

कैसे होगा चयन?

इन सभी पदों पर चयन लिखित परीक्षा के जरिए किया जाएगा. एग्जाम ओएमआर शीट पर होगा. इसके बाद हिंदी/अंग्रेजी कंप्यूटर टाइप टेस्ट, हिंदी/अंग्रेजी स्टेनोग्राफी टेस्ट और तकनीकी ड्राइविंग टेस्ट होगा.

राहुल गांधी की नागरिकता पर फिर छिड़ी बहस, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भारत सरकार से मांगा जवाब

#allahabad_high_court_seeks_answer_from_central_govt_on_rahul_gandhi_citizenship

राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुलगांधी की नागरिकता के विवाद पर केंद्र सरकार से ब्योरा मांगा है। कोर्ट ने नागरिकता अधिनियम-1955 के तहत की गई शिकायत पर केंद्र सरकार से कार्रवाई का ब्योरा मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेच में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता को लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। ये याचिका कर्नाटक के बीजेपी कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर ने दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर सीबीआई जांच कराई जाए। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने एएसजी सूर्यभान पांडेय को निर्देश देते हुए कहा कि वो इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय से जानकारी हासिल करें।

जून में रायबरेली लोकसभा से इलेक्शन को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ में 3 महीने पहले ये जनहित याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया है कि राहुल गांधी भारत के नहीं बल्कि ब्रिटेन के नागरिक हैं। इसके आधार पर राहुल गांधी का चुनाव पर्चा रद्द करने की मांग की गई थी।

जुलाई में इस याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इस पर कोर्ट ने कहा था कि याची पहले तो सिटीजनशिप एक्ट कतहत सक्षम प्राधिकारी के पास शिकायत कर सकता है। हालांकि याचिकाकर्ता का कहना है कि उसके पास पर्याप्त सबूत हैं कि राहुल गांधी ब्रिटेन नागरिक हैं। याची ने दलील दी कि उसके पास तमाम दस्तावेज और ब्रिटिश सरकार के कुछ ई-मेल हैं जिनसे ये साबित होता है कि राहुल गांधी एक ब्रिटिश नागरिक हैं। ऐसे में वो भारत में चुनाव लड़ने के अयोग्य है। वो लोकसभा के सदस्य पद पर नहीं रह सकते हैं।

याचिकाकर्ता ने गांधी की ब्रिटिश नागरिकता के आरोपों की सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता को भारतीय न्याय संहिता व पासपोर्ट एक्ट के तहत अपराध बताया और केस दर्ज करने की मांग की। याची ने कहा कि वो इस संबंध में सक्षम अधिकारी से दो-दो बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने कोर्ट में याचिका दाखिल है।

*वंचित तथा कमजोर वर्ग की प्रतिरक्षा हेतु लीगल एड डिफेंस काउंसलिंग की होगी स्थापना*

गोण्डा - गोण्डा में आपराधिक मामलों में वंचितों एवं कमजोर वर्ग की प्रतिरक्षा के लिए लीगल एड डिफेंस काउंसलिंग की स्थापना की जाएगी। जिस पर कई पदों पर आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं इसमें के लीगल एड डिफेंस काउंसिल का एक पद, डिप्टी के लीगल एड डिफेंस काउंसिल का एक पद व असिस्टेंट लीगल एट डिफेंस काउंसिल के दो पदों पर भर्ती की जाएगी।

सभी पदों के लिए योग्यता अलग-अलग निर्धारित की गई है। सभी पदों पर चयन समिति द्वारा आवेदक को मेरिट के आधार पर चयनित किया जाएगा। मेरिट आवेदकों की योग्यता के आधार पर बनेगी। इसमें आवेदक के विधिक ज्ञान, कौशल, वकालत प्रैक्टिस और अनुभव का ध्यान में रखा जाएगा। सभी पदों पर चयन 2 वर्षों के लिए संविदा पर किया जाएगा। कार्य संतोषजनक पाए जाने पर उनकी वार्षिक सेवा का विस्तार किया जाए सकेगा।

अपर जिला जज सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोण्डा नितिन श्रीवास्तव ने बताया कि सभी पदों हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 15 फरवरी शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई है। इच्छुक आवेदक आवेदन पूर्ण रूप से भरकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोंडा के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से अथवा स्पीड पोस्ट के माध्यम से जमा कर सकते हैं। आवेदन पत्र जनपद न्यायालय की वेबसाइट gonda.dcourts.gov.in उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की वेबसाइट upslsa.up.nic.in एवं माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की वेबसाइट allahabadhighcourt.in से डाउनलोड किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोंडा के कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।

Allahabad High Court UP HJSOnline Form 2024

Important Dates :

  • Application : 15/01/2024
  • Last Date : 29/02/2024
  • Last Date Pay Exam Fee :  29/02/2024

Total Vacancy : 83

Age Limit (as on 01/01/2024) :

  • Min Age : 35 Yrs.
  • Max Age : 45 Yrs.

Application Fee :

  • General / OBC / EWS : ₹1400/-
  • SC / ST : ₹1200/-
  • PH Divyang Gen / OBC / EWS : ₹750/-
  • PH Divyang SC / ST : ₹500/-

For More Details, Please Read Official Notification Carefully OR Visit Official Website.

Important Links :

Apply Online : Link Activate on 15/01/2024

Download Notification : Click Here

Official Website : Official Website