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मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन गिरिडीह पहुंचे, दिवंगत मंत्री स्व० सुदिव्य कुमार सोनू जी के श्राद्ध कर्म में शामिल होकर दी भावभीनी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन आज गिरिडीह के हरसिंहरायडीह स्थित स्मृति-शेष पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व० सुदिव्य कुमार सोनू जी के आवास पहुंचे। झारखंड मंत्रीमंडल के सदस्य एवं जनसेवा के समर्पित सहयोगी स्मृति-शेष सुदिव्य कुमार सोनू जी के असामयिक निधन से शोकाकुल मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन द्वादशकर्म कार्यक्रम में सम्मिलित हुए और उनके तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस भावुक क्षण में मुख्यमंत्री ने दिवंगत मंत्री के परिजनों ,शोक-संतप्त पत्नी, पुत्र, पुत्री से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में असहनीय दु:ख को सहने की शक्ति, धैर्य और संबल प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।

मीडिया से बातचीतके क्रम में मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बड़े भाई सुदिव्य कुमार सोनू जी के असामयिक घटना से हम सभी अवगत हैं। आज विधिवत रीति-रिवाज के साथ द्वादशकर्म कार्यक्रम किए जा रहे हैं। हमलोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। यह घटना बहुत ही दु:खद है। राज्य के लिए अपूरणीय क्षति है, इसकी भरपाई करना बहुत ही कठिन है।

मंत्री रहते हुए सुदिव्य कुमार सोनू जी की बड़ी सक्रियता थी, उनकी सक्रियता एवं व्यक्तित्व किसी से छिपा नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता समाज और राज्य को हमेशा रहती है। उनके जैसा हौसला और जुनून चाहिए। सोनू जी में सारे भाव व लक्षण थे। एक लंबे समय के बाद उन्होंने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में दिशा देने का भी काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी भी मन मानने को तैयार नहीं है, कि वे हमारे बीच नहीं हैं।

विधि के विधान को न हम टाल सकते हैं और न ही कोई और। इस विधान के साथ हम सभी को चलना है। उन्होंने कहा कि दलगत भावना से ऊपर उठकर लोग उनके द्वादशकर्म में यहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि सुदिव्य सोनू जी व्यक्तित्व के धनी रहे हैं। उन्होंने सभी लोगों, सभी वर्गों की समस्या और अपनी पहचान को लेकर आगे बढ़ते रहे हैं। हमारे बीच नहीं रहते हुए भी वे एक मिसाल के तौर पर कायम रहेंगे।

हमसभी लोग ईश्वर से प्रार्थना करें कि उनकी आत्मा को श्री चरणों में स्थान दें। दु:ख की इस घड़ी में हमसभी उनके समस्त परिजनों के साथ हैं। मुख्यमंत्री ने स्मृति-शेष सुदिव्य कुमार सोनू के द्वादशकर्म में सम्मिलित होने पहुंचे सभी आमलोगों से मिलकर भी ढांढ़स बंधाया।

विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने भी स्मृति-शेष स्व० सुदिव्य कुमार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोक-संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदना व्यक्त की तथा ईश्वर से इस कठिन समय में दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

द्वादशकर्म में मंत्रिमंडल के अन्य मंत्रीगण, राज्यसभा सांसदगण, विधायकगण, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, राज्य सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारी, गिरिडीह जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक तथा बड़ी संख्या में उनके समर्थक एवं चाहने वाले लोग शामिल होकर दिवंगत मंत्री स्वर्गीय सुदिव्य कुमार को नम आंखों से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर सेवा संकल्प अभियान के तहत भाजयुमो द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत प्रदेश कार्यालय में आयोजित रक्तदान शिविर का उद्घाटन प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राय एवं भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष शशांक राज ने संयुक्त रूप से किया।

शिविर में भाजयुमो के अनेक कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक रक्तदान किया और समाज के अन्य लोगों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर आदित्य साहू ने कहा कि रक्तदान महादान है और इससे बड़ा कोई दान नहीं, क्योंकि हमारे द्वारा किया गया रक्तदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन देने का माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को समय-समय पर रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए। रक्तदान के माध्यम से हम जरूरतमंदों की सहायता के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाते हैं।

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि रक्तदान महादान है, और युवा मोर्चा के कर्मठ कार्यकर्ताओं का यह उत्साह समाज में एक सकारात्मक संदेश दे रहा है। रक्तदान केवल सेवा नहीं, किसी जरूरतमंद के लिए जीवन की उम्मीद होती है।

संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने कहा कि रक्तदान मानव सेवा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि युवा कार्यकर्ताओं को सामाजिक सेवा के ऐसे कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए और समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलानी चाहिए।

भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष शशांक राज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर भाजयुमो द्वारा सेवा और समर्पण की भावना के साथ विभिन्न सेवा कार्य किए जा रहे हैं। रक्तदान शिविर इसी सेवा संकल्प का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहेगी और रक्तदान जैसे जनसेवा के कार्यों को आगे भी निरंतर जारी रखा जाएगा।

इस अवसर पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश एवं रवींद्र कुमार राय, प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही, प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी, नीरज सिंह , भाजयुमो रांची महानगर अध्यक्ष रोमित नारायण सिंह, दिवाकांत दुबे, धीरज अग्रवाल, देवराज सिंह, अमिताभ धीरज, नीरज कुमार, अंशु सिन्हा, कालिंदी, प्रियांशु, सचिन साहू सहित भाजयुमो के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पीवीयूएनएल पतरातू में धूमधाम से मनाई गई विश्वकर्मा पूजा

पतरातू, 17 सितंबर। पीवीयूएनएल पतरातू में भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना श्रद्धा एवं उत्साह के साथ धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर परियोजना के विभिन्न स्थानों एवं विभागों में विधिवत पूजा का आयोजन किया गया।

पूजा में पीवीयूएनएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री ए.के. सहगल, महाप्रबंधकगण, वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की।

विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर विभिन्न कार्यस्थलों पर भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें पीवीयूएनएल के कर्मचारियों के साथ-साथ विभिन्न कार्यदायी एजेंसियों के श्रमिकों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और

प्रसाद ग्रहण किया। पीवीयूएनएल लेडीज क्लब की सदस्यों ने भी विभिन्न पूजा स्थलों पर आयोजित कार्यक्रमों में सहभागिता की। पूरे परियोजना परिसर में भक्तिमय एवं उत्सवपूर्ण वातावरण बना रहा।

रांची में 16 से 26 सितंबर तक SSC परीक्षा, विधि-व्यवस्था को लेकर धारा-163 के तहत निषेधाज्ञा जारी

क्षेत्रीय निदेशक, भारत सरकार, कर्मचारी चयन आयोग (पूर्वी क्षेत्र) कोलकाता द्वारा सूचित किया है कि दिनांक-16.09.2026 से 26.09.2026 तक तीन पालियों में प्रातः 08:00 बजे से संध्या 06:30 बजे तक चयन पदों की परीक्षा "चरण XIV/2026" राँची के 03 (तीन) परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित की गई है।

परीक्षा के कदाचार मुक्त संचालनार्थ एवं विधि-व्यवस्था संधारणार्थ हेतु उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के आदेश द्वारा पुलिस बल एवं पुलिस पदाधिकारी के साथ दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है। फिर भी ऐसी आशंका है कि परीक्षा केन्द्रों पर असामाजिक तत्वों के द्वारा भीड़ लगाकर विधि-व्यवस्था भंग करने की चेष्टा कर सकते हैं।

जिसको लेकर श्री कुमार रजत, अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर,रांची, द्वारा बि०एन०एस०एस० की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इन परीक्षा केन्द्रों के 200 मीटर की परिधि में निम्नलिखित निषेधाज्ञा जारी किया गया :-

(1) पाँच या पाँच से अधिक

व्यक्तियों का एक जगह जमा होना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों / कर्मचारियों तथा सरकारी कार्यक्रम एवं शवयात्रा को छोड़कर)।

(2) किसी प्रकार का ध्वनि विस्तारक यंत्र का व्यवहार करना।

(3) किसी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र, जैसे-बंदुक, राईफल, रिवाल्वर, बम, बारूद आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।

(4) किसी प्रकार का हरवे हथियार जैसे-लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा-भाला आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)

(5) किसी प्रकार की बैठक या आमसभा का आयोजन करना।

यह निषेधाज्ञा दिनांक-16.09.2026 से 26.09.2026 तक (दिनांक-20.09.2026 को छोड़कर) के प्रातः 05:00 से अपराह्न 9:30 बजे तक प्रभावी रहेगा।

परीक्षा केन्द्र का नामः-

(1) Ideal International School, Near Shiv Mandir, Daladili Ranchi, Jharkhand.

(2) Capstone Tech Online Examination Centre, Outer ring road, near nationaol LAW University, Opposite Sunaina Banquet Hall, Kanke, Ranchi, Jharkhand-834006

(3) Cambridge Institute of Technology, Near Milan Chowk, Purulia Road, Tatisilwai, Ranchi, Jharkhand.

राहुल गांधी ने पीएम मोदी को फिर बताया ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’, बोले- अमेरिकी दबाव के सामने कर रहे सरेंडर

#rahulgandhitargetsmodigovtoverpossibleupicharges

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने के संभावित व्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी भुगतान कंपनियों के दबाव में आकर देश की शून्य व्यापारी छूट दर नीति को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने एक्स पर किए एक पोस्ट में आरोप लगाया कि सरकार ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर चुपचाप एमडीआर ( Merchant Discount Rate)लगाने का रास्ता खोल रही है। राहुल गांधी के मुताबिक, ऐसे लेनदेन की संख्या भले ही यूपीआई के कुल लेनदेन का करीब 5% हो, लेकिन इनका हिस्सा कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में लगभग 65% है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ग्राहक से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो दुकानदार पर लगने वाली फीस का बोझ आखिरकार किसकी जेब पर पड़ेगा।

राहुल बोले- अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहक की जेब पर पड़ेगा भार

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि सरकार भले ही कह रही हो कि आम ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन व्यापारी पर लगने वाली फीस का असर अंततः ग्राहकों पर ही पड़ सकता है। उनके मुताबिक, दुकानदार इस अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं और इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से इसका भार ग्राहक की जेब पर पड़ेगा।

अमेरिकी कंपनियों के दबाव का भी लगाया आरोप

राहुल गांधी ने अपने बयान में अमेरिकी भुगतान कंपनियों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ऐसी नीति की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जिससे यूपीआई पर शुल्क लगाने का रास्ता खुल सकता है।

बीजेपी ने कांग्रेस के दावे को बताया गलत

वहीं, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर राहुल गांधी और कांग्रेस के दावे को खारिज करते हुए कहा कि 2,000 रुपये से ऊपर के UPI भुगतान पर 0.5% टैक्स या चार्ज लगाने का कोई सरकारी आदेश नहीं है। उनके मुताबिक, 5,000 रुपये के भुगतान पर 25 रुपये और 10,000 पर 50 रुपये वसूले जाने की बात काल्पनिक 0.5% दर के आधार पर कही जा रही है।

झारखण्ड SIR 2026: दावा-आपत्ति की अंतिम तिथि आज, 19 अक्टूबर को आएगी फाइनल वोटर लिस्ट

(A) दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान प्राप्त आवेदन प्रपत्रों की स्थिति (13 सितम्बर 2026 तक)

1). फॉर्म-6 के माध्यम से प्राप्त कुल आवेदन:- 4,86,783

(14 सितम्बर को प्राप्त आवेदन:- 23,833)

2). फॉर्म-6A के माध्यम से प्राप्त कुल आवेदन:- 87

(14 सितम्बर को प्राप्त आवेदन:- 4)

3). फॉर्म-7 के माध्यम से प्राप्त कुल आवेदन/आपत्तियां:- 5,689

(14 सितम्बर को प्राप्त आवेदन:- 469)

4). फॉर्म-8 के माध्यम से प्राप्त कुल आवेदन:- 3,11,770

(14 सितम्बर को प्राप्त आवेदन:-17,156)

(B) दावा एवं आपत्ति (Claims & Objections) प्राप्त करने की अंतिम तिथि:- 15 सितम्बर 2026

(C) अंतिम मतदाता सूची (Final Roll) के प्रकाशन की तिथि:- 19 अक्टूबर 2026

भारत बना ईरान-यूएई के बीच 'मध्यस्थ', दिल्ली में ब्रिक्स समिट की अहम कामयाबी

#indiabringsiranandtheuaeontoasingle_platform

नई दिल्ली में संपन्न ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच भारत ने उस वक्त बड़ी कूटनीतिक कामयाबी हासिल की, जब पश्चिम एशिया के युद्ध को लेकर आमने-सामने खड़े ईरान और संयुक्त अरब अमीरात एक साझा ब्रिक्स घोषणा पर सहमत हो गए। पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ईरान के बीच गंभीर मतभेद देख जा रहे हैं। युद्ध और लगातार बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच दोनों देशों के बीच सहमति बनना सिर्फ ब्रिक्स के लिए नहीं, बल्कि भारत की कूटनीतिक भूमिका के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

ईरान-यूएई को एक साथ लाना था चुनौती

ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की मई में हुई बैठक के दौरान ईरान और यूएई के बीच मतभेद इतने गहरे थे कि संयुक्त बयान तक जारी नहीं हो पाया था। पश्चिम एशिया में युद्ध को लेकर दोनों देशों की प्राथमिकताएं और संघर्ष की व्याख्या अलग-अलग थी। ऐसे में दिल्ली शिखर सम्मेलन से पहले सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि ऐसी भाषा तैयार की जाए, जिस पर ईरान और यूएई समेत ब्रिक्स के सभी सदस्य देश एक साथ खड़े हो सकें। अंतिम घोषणा में किसी एक देश को सीधे तौर पर युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराने के बजाय पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर सामूहिक चिंता जताई गई। सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई, जो स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं।

ईरानी राष्ट्रपति और यूएई के क्राउन प्रिंस की मुलाकात

इसी बीच दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट के दौरान एक अप्रत्याशित राजनयिक क्षण सामने आया। यूएई के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने ब्रिक्स सिखर सम्मेलन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान से मुलाकात की, जिसमें दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों, तनाव कम करने, स्थिरता और क्षेत्रीय शांति और विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की। युद्ध शुरू होने के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच यह सबसे महत्वपूर्ण संपर्कों में से एक माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह बैठक ऐसे समय हुई, जब क्षेत्रीय संघर्ष ने ईरान और खाड़ी देशों के रिश्तों को बेहद संवेदनशील बना दिया है।

भारत की भूमिका क्यों अहम?

नई दिल्ली के संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों के साथ गहरे रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं, साथ ही ईरान के साथ भी उसके दीर्घकालिक संबंध बने हुए हैं। इसके अलावा, भारत के अमेरिका, रूस और इज़राइल के साथ भी घनिष्ठ साझेदारी है। इससे भारत को राजनयिक स्तर पर ऐसी पहुँच प्राप्त है जो कई अन्य देशों के पास नहीं है। चुनौती यह है कि उस पहुंच का उपयोग इस तरह से किया जाए कि ऐसा न लगे कि आप किसी का पक्ष ले रहे हैं। नई दिल्ली ने ईरान और अमेरिका या ईरान और अरब देशों के बीच औपचारिक मध्यस्थ के रूप में अपनी भूमिका नहीं निभाई है। इसके बजाय, उसने लगातार संवाद, कूटनीति, तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा और निर्बाध व्यापार एवं नौवहन की वकालत की है। दूसरे शब्दों में कहें तो, भारत का प्रस्ताव किसी बड़े शांति समझौते की मध्यस्थता करने से कम और राजनयिक चैनलों को खुला रखने से अधिक संबंधित है।

हिंदी दिवस पर एटीआई में व्याख्यान एवं काव्यपाठ - हिंदी को बताया जनसरोकार की भाषा

रांची। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग, झारखंड सरकार की ओर से हिंदी दिवस के अवसर पर एटीआई के सभागार में भव्यव्याख्यान एवं काव्यपाठ समारोह का आयोजन किया गया।विभागीय सचिव श्री प्रवीण टोप्पो ने कहा कि सुशासन की असली पहचान सरल हिंदी, सुगम प्रक्रियाएं और पारदर्शी व्यवस्था से होती है। जब सरकारी भाषा आमजन की समझ में आती है, तब योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचता है। उन्होंने जोर दिया कि कार्यालयों में अनावश्यक जटिल शब्दों और प्रक्रियाओं को कम कर नागरिकों के लिए काम को आसान बनाया जाए।

सचिव ने कहा कि तकनीक के उपयोग से पारदर्शिता बढ़ाई जा रही है, जिससे हर निर्णय और प्रक्रिया स्पष्ट और जवाबदेह बने। ऑनलाइन सेवाएं, समयबद्ध निस्तारण और शिकायतों की निगरानी से जनता का भरोसा मजबूत होता है।

उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे जनहित को सर्वोपरि रखते हुए सरल भाषा और स्पष्ट कार्यशैली अपनाएं, ताकि शासन वास्तव में जनता के करीब और भरोसेमंद बन सके।

कार्यक्रम में हिंदी पट्टी के कई प्रख्यात कवियों और विद्वानों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी की समृद्धि, संवेदनशीलता और व्यापकता को रेखांकित किया। समारोह में उपस्थित साहित्यकारों, अधिकारियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि जनसरोकार और सांस्कृतिक एकता का सशक्त माध्यम है। उन्होंने हिंदी को “बोली और भाषा के बीच का आत्मसमर्पण” बताते हुए कहा कि यह भाषा देश की विविध लोकभाषाओं और बोलियों को आत्मसात कर निरंतर समृद्ध होती रही है। हिंदी की यही विशेषता उसे जन-जन की भाषा बनाती है।

काव्यपाठ के दौरान कवियों ने सामाजिक सरोकार, राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक विविधता और समकालीन मुद्दों पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं, जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा। विद्वानों ने इस बात पर जोर दिया कि हिंदी ने स्वतंत्रता आंदोलन में केंद्रीय भूमिका निभाई थी और आज भी यह देश को एकसूत्र में बांधने का कार्य कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदी की प्रगति में लोकभाषाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हिंदी का स्वरूप लगातार विकसित हो रहा है, जिसमें विभिन्न भाषाओं के शब्दों का सम्मिश्रण देखने को मिलता है। वक्ताओं ने आह्वान किया कि हिंदी को केवल अतीत की विरासत के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की भाषा के रूप में विकसित करने की दिशा में सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

समारोह का समापन हिंदी के प्रचार-प्रसार और उसके संवर्धन के संकल्प के साथ किया गया।

कार्यक्रम में काव्यपाठ करने आए विद्वानों में मुख्यरूप से डॉक्टर जिंदर सिंह मुंडा - अध्यक्ष, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, डॉ केदार सिंह - सेवानिवृत प्राध्यापक - विनोबा भावे विश्वविद्यालय, डॉ वन्दना टेटे - प्रख्यात कवियित्री लेखिका, डॉ सावित्री बड़ाईक-सहायक प्राध्यापक - एसएस मेमोरियल महाविद्यालय, डॉ कुमारी उर्वशी सहित कई हिंदी के प्रख्यात विद्वान उपस्थित थे। स्वागत संबोधन श्री संजय रजक, उप सचिव ने किया। कार्मिक विभाग से मुख्य रूप से संयुक्त निदेशक श्री आसिफ हसन, श्री इश्तियाक अहमद, एटीआई से श्रीमती शालिनी खलखो, अपर निदेशक श्री

मती सीमा सिंह की उपस्थिति रही।

ब्रेकफास्ट से डिनर तक सब दिल्ली में नहीं होगा…” क्यों तिलमिलाए तारिक रहमान के मंत्री

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भारत के न्योते के बाद भी बांग्लादेश ब्रिक्स समिट में शामिल नहीं हुआ। अब नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट की धमाकेदार सफलता और भारत के बढ़ते ग्लोबल प्रभाव को देखकर पड़ोसी देश बांग्लादेश के पेट में मरोड़ उठने लगी है। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने अजीबोगरीब बयान देकर अपनी भड़ास निकाली है।

बांग्लादेश सरकार भारत से अच्छे संबंध चाहती है लेकिन...

बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि उनकी सरकार भारत के साथ अच्छे संबंध चाहती है लेकिन दिल्ली को दूसरे देशों से ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाएगी। बांग्लादेश भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से शुरू करना चाहता है। हमारी सरकार एक नए रिश्ते की ओर बढ़ना चाहते हैं और इसे द्विपक्षीय बातचीत के जरिए आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ना कि किसी बहुपक्षीय मंच के जरिए ये होना चाहिए।

भारत के प्रति आकर्षण से आगे बढ़ना होगा- हुमायूं कबीर

भारत से रिश्ते को लेकर हुए सवाल पर कबीर ने कहा, भारत में ही नाश्ता, भारत में लंच, भारत में ही डिनर होगा तो फिर आप अपना खाना कब खाएंगे। हमें भारत के प्रति इस आकर्षण से आगे बढ़ना होगा। बाकी दुनिया के देशों की तरह भारत भी बस एक और देश है, जिसके साथ बांग्लादेश अच्छे द्विपक्षीय संबंध चाहता है।

भारत से बना रहा दूरी

हुमायूं कबीर के इस बयान से दो दिन पहले बांग्लादेश की तरफ से ऐलान किया गया था कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि उन्हें इस कार्यक्रम के लिए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के तौर पर आमंत्रित नहीं किया गया था। इसके बजाय उन्हें बिम्सटेक के अध्यक्ष के तौर पर निमंत्रण भेजा गया था। हालांकि, इससे पहले फरवरी में भी तारीक रहमान को एक अलग द्विपक्षीय निमंत्रण भी भेजा जा चुका था। बावजूद इसके बांग्लादेशी सरकार ने निमंत्रण को ठुकरा दिया था।

भारत को मिला यूएन चीफ एंटोनियो गुटेरेस का साथ, सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार का समर्थन

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भारत की बढ़ती ताकत का लोहा पूरी दुनिया मान रही है। अब भारत को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का भी साथ मिल गया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद में सुधार और उसके विस्तार की मांग का खुलकर समर्थन किया है। एंटोनियो गुटेरेस ने रविवार को दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स समिट के दौरान इस बात पर जोर दिया।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने साफ कहा कि आज की दुनिया 1945 वाली दुनिया नहीं है। तब जो आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक तस्वीर थी, वह अब पूरी तरह बदल चुकी है। ऐसे में वैश्विक संस्थाओं की संरचना भी आज की दुनिया के हिसाब से बदलनी चाहिए। उन्होंने यह स्पष्ट है कि परिषद को और अधिक प्रतिनिधित्व वाली संस्था बनाने की जरूरत है, जिसमें विकासशील देशों और खासकर अफ्रीका की आवाज को सही जगह मिले।

गुटेरेस ने खास तौर पर लिया भारत का नाम

सबसे खास बात यह है कि गुटेरेस ने भारत का नाम लेकर कहा कि वह सुरक्षा परिषद में विस्तार की मांग के सबसे आगे रहने वाले देशों में है। आज एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की भूमिका कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है। गुटेरेस ने कहा कि बदलती आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को वैश्विक संस्थाओं में भी जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने खास तौर पर कहा कि भारत इस मांग को आगे बढ़ाने में सबसे आगे रहा है।

रूस-चीन ने भी की भारत को बड़ी भूमिका देने की मांग

ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में रूस और चीन ने भी भारत और ब्राजील को संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका देने की मांग का समर्थन दोहराया है। दोनों देश सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और इनके पास अभी वीटो अधिकार भी है। ऐसे में उनका भारत के पक्ष में खड़ा होना काफी अहम माना जा रहा है।

ग्लोबल साउथ की हिस्सेदारी होनी चाहिए- पीएम मोदी

इससे पहले रविवार को पीएम मोदी ने कहा था, मौजूदा वैश्विक शासन ढांचा एक 'पिरामिड' जैसा है, जिसमें सत्ता और निर्णय लेने की शक्ति शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि उन फैसलों से प्रभावित होने वाले देशों की उन्हें आकार देने की क्षमता सीमित है। पीएम मोदी ने कहा था कि ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों में सबसे आगे रहता है लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में पिछली पंक्ति में रहता है। उन्होंने विशेषाधिकार के पिरामिड को साझेदारी के मंच में बदलने का प्रस्ताव दिया, जहां हर देश की अपनी आवाज और हिस्सेदारी हो। ऐसे में यूएन के महासचिव का पीएम मोदी की बात को सीधा समर्थन देना अहम माना जा रहा है।

यूएन महासचिव का समर्थन भारत के लिए क्यों अहम?

भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की उसकी मांग नई नहीं है। अब उसे रूस और चीन का समर्थन मिला है। ब्रिक्स के मंच से भी आवाज मजबूत हुई है और संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी सुरक्षा परिषद में विस्तार की जरूरत को स्वीकार किया है। इससे भारत की दावेदारी पहले से ज्यादा मजबूती के साथ वैश्विक मंच पर आई है।