कूटनीति से नेतृत्व तक—राष्ट्र सर्वोपरि: युवाओं में पढ़ने, कौशल और राष्ट्र निर्माण की भावना जरूरी
- तरनजीत सिंह संधू ने लखनऊ विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों से किया संवाद, कहा—डिग्री के साथ बदलती दुनिया के अनुरूप कौशल विकसित करें
लखनऊ। गोमती पुस्तक महोत्सव-2026 के अंतर्गत गुरुवार को लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित विशेष सत्र ‘कूटनीति से नेतृत्व तक—राष्ट्र सर्वोपरि’ में दिल्ली के उपराज्यपाल एवं पूर्व राजनयिक सरदार तरनजीत सिंह संधू ने विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि युवाओं में पढ़ने की आदत, कौशल विकास, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना आवश्यक है। असफलताओं से सीख लेकर निरंतर आगे बढ़ना जीवन में सफलता का महत्वपूर्ण आधार है।
कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् के गायन और राष्ट्रगान के साथ हुआ। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के निदेशक युवराज मलिक ने सरदार तरनजीत सिंह संधू और लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जयप्रकाश सैनी का शॉल ओढ़ाकर एवं पुस्तकें भेंट कर स्वागत किया। इस दौरान संधू के जीवन, व्यक्तित्व और सार्वजनिक जीवन में योगदान पर केंद्रित वीडियो भी प्रदर्शित किया गया।
- पढ़ने से विकसित होती है सोचने-समझने की क्षमता
सरदार संधू ने कहा कि गोमती पुस्तक महोत्सव केवल पुस्तकों और साहित्य तक सीमित मंच नहीं है, बल्कि नए विचारों, विद्वानों और समाज को दिशा देने वाले संवाद का अवसर भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि पढ़ने से व्यक्ति को केवल जानकारी ही नहीं मिलती, बल्कि सोचने, समझने और नए विचार विकसित करने की क्षमता भी मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि व्यस्त जीवनशैली के कारण आज पढ़ने के लिए समय निकालना चुनौती बनता जा रहा है, ऐसे में पुस्तकों का महत्व और बढ़ जाता है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेलों से भी जुड़ना चाहिए, क्योंकि खेल टीम भावना, अनुशासन और सहयोग की भावना विकसित करते हैं। संधू ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेनी चाहिए। असफलता को अनुभव और सीख में बदलकर आगे बढ़ना सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
- डिग्री के साथ कौशल विकास पर भी दें जोर
अपने विदेश सेवा के अनुभव साझा करते हुए संधू ने बताया कि उन्होंने 36 वर्ष तक विदेश सेवा में कार्य किया और विभिन्न देशों में रहते हुए अलग-अलग समाजों, व्यवस्थाओं और नीतियों को समझने का अवसर मिला। अमेरिका और जर्मनी सहित विभिन्न देशों के अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ऐसे समय में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ ऐसे कौशल विकसित करने का आह्वान किया, जो भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हों। युवाओं को यह समझने का प्रयास करना चाहिए कि आने वाले समय में किन क्षेत्रों और कौशलों की मांग बढ़ेगी।
- युवा शक्ति को अवसर और कौशल से जोड़ना जरूरी
संधू ने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की महत्वपूर्ण शक्ति है। इस क्षमता को सही अवसरों और कौशल से जोड़कर भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी क्षमताओं को पहचानकर उनका सकारात्मक दिशा में उपयोग करने का आग्रह किया।उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत प्रगति के साथ परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी को समझना भी जरूरी है। युवाओं को अपने विकास के साथ सामाजिक सरोकारों और जिम्मेदारियों को भी महत्व देना चाहिए।
- एआई का उपयोग करें, लेकिन निर्णय क्षमता बरकरार रखें
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर संधू ने कहा कि तकनीक आज जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। विद्यार्थियों को एआई का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए। तकनीक सहायता का माध्यम हो सकती है, लेकिन अपनी सोच और निर्णय लेने की क्षमता को पूरी तरह उस पर निर्भर नहीं करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को समाज के विभिन्न वर्गों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जीवन के अनुभव भी सीखने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
- तेजा सिंह समुंदरी के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान
सरदार संधू ने स्वतंत्रता संघर्ष से जुड़े सरदार तेजा सिंह समुंदरी के जीवन और योगदान का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से ऐसे प्रेरणादायी व्यक्तित्वों के बारे में पढ़ने और उनके योगदान को समझने का आह्वान किया। उन्होंने लखनऊ की साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख करते हुए प्रेमचंद और भगवती चरण वर्मा जैसे साहित्यकारों को याद किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ साहित्य, संस्कृति और विचार की समृद्ध परंपरा वाला शहर है। विद्यार्थियों को अपनी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत से परिचित होना चाहिए।
- आधुनिक कौशल के साथ भारतीय मूल्यों का समन्वय जरूरी
संधू ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल तकनीक और आधुनिक साधनों के बल पर नहीं होगा। इसके लिए भारतीय परंपरा, संस्कृति, साहित्य, ज्ञान और मूल्यों के साथ आधुनिक कौशल का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग समाज और राष्ट्र की प्रगति में करने का आह्वान किया।
- तीन पुस्तकों का हुआ अनावरण, विद्यार्थियों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मंचस्थ अतिथियों ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा प्रकाशित तीन पुस्तकों का अनावरण किया। इनमें सरदार तेजा सिंह समुंदरी के जीवन और योगदान से संबंधित पुस्तक भी शामिल रही। गोमती पुस्तक महोत्सव के आयोजन में योगदान देने वाले व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया। सरदार तरनजीत सिंह संधू ने श्री चंद्र प्रकाश को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इसके अलावा प्रो. रोली मिश्रा और सुश्री सांत्वना तिवारी को भी सम्मानित किया गया। विभिन्न गतिविधियों और प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को भी स्मृति चिह्न प्रदान किए गए। कार्यक्रम में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के निदेशक युवराज मलिक, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जयप्रकाश सैनी और सरदार तरनजीत सिंह संधू सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
Sep 17 2026, 16:52
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