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कपिल सिब्बल ने कहा दल-बदलुओं पर लगे 10 साल का बैन, प्रस्ताव का सीजेपी ने किया समर्थन

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सीनियर वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने पैसे या दबाव के चलते राजीनीतिक पार्टी बदलने वाले विधायक और सांसदों पर 10 साल के बैन का प्रस्ताव रखा है। कपिल सिब्बल के प्रस्ताव पर घमासान तेज हो गया है। एक तरफ सिब्बल के इस प्रस्ताव का 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) ने समर्थन किया है।

क्या है कपिल सिब्बल का प्रस्ताव?

केरल के कोच्चि में 'हॉर्स ट्रेडिंग और लोकतंत्र' पर बोलते हुए सिब्बल ने संविधान की दसवीं अनुसूची में बदलाव की मांग की, ताकि पार्टियों का विलय बड़े पैमाने पर पार्टी छोड़ने का जरिया न बन सके। वरिष्ठ वकील ने बताया कि मौजूदा कानून के तहत, अगर किसी विधायी दल के दो-तिहाई सदस्य दूसरी पार्टी में चले जाते हैं, तो इसे विलय माना जाता है और दल-बदल के कारण उनकी सदस्यता रद नहीं होती।

दसवीं अनुसूची में संशोधन करने पर जोर

सिब्बल ने इस कमी को दूर करने के लिए दसवीं अनुसूची में संशोधन करने पर जोर दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि 'विलय का मतलब राजनीतिक पार्टियों का विलय हो, न कि विधायकों का सामूहिक रूप से पार्टी छोड़ना।'

सिब्बल के प्रस्ताव का सीजेपी ने किया स्वागत

सिब्बल के प्रस्ताव का कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने स्वागत किया है। सौरव दास ने एक्स पर पोस्ट कर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के उस प्रस्ताव का स्वागत किया, जिसमें पार्टी X के चुनाव चिह्न पर जीतने के बाद पैसे या दबाव में पार्टी Y में जाने वाले सांसदों और विधायकों पर 10 साल का प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। दास ने लिखा कि सीजेपी के पहले मांग-पत्र के पांचवें बिंदु में भी यही मांग की गई थी, लेकिन इसमें और सख्त प्रावधान सुझाया गया था।

सीमा पर शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के ले जरूरी शर्त’, पीएम मोदी और जिनपिंग मुलाकात में हुई ये बातें

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में ब्रिक्स समिट से अलग चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक की। यह मीटिंग करीब 50 मिनट चली। मुलाकात के दौरान चीन के साथ संबंधों को लेकर भारत की चिंताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के संबंध में विदेश मंत्रालय चीनी पक्ष की ओर से जारी बयान पर पूछे गए सवाल का जवाब दिया।

पीएम मोदी ने कहा-एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता जरूरी

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के साथ भारत के रिश्तों को लेकर अपनी चिंताएं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने रखीं। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। विदेश मंत्रालय ने यह बयान चीन की ओर से जारी किए गए उस विवरण के जवाब में दिया, जिसमें कहा गया था कि पीएम मोदी ने तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति में बदलाव नहीं होने की बात कही है। चीन के मुताबिक, मोदी ने यह भी कहा कि भारत अपनी जमीन पर किसी को चीन विरोधी गतिविधियां करने की अनुमति नहीं देता।

रिश्ते आगे बढ़ाने की बुनियाद सीमा पर शांति-पीएम मोदी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग के साथ बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को तीन पारस्परिक सिद्धांतों- आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता से निर्देशित होना चाहिए।

ताइवान और तिब्बत पर भारत का रुख

तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति लगातार एक जैसी रही है। भारत ने करीब 16 साल पहले सार्वजनिक रूप से अपनी ‘वन चाइना पॉलिसी’ को दोहराना बंद कर दिया था। ‘वन चाइना पॉलिसी’ का मतलब है कि दुनिया में एक ही संप्रभु चीन है और ताइवान को चीन का हिस्सा माना जाता है। भारत ताइवान के साथ व्यापार, निवेश, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में संबंध बनाए रखता है। तिब्बत को लेकर भी भारत तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र को चीन का हिस्सा मानता है। 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान भारत और चीन के बीच संबंधों और सहयोग को लेकर एक समझौता हुआ था। इसमें भारत ने कहा था कि वह अपनी जमीन से चीन विरोधी गतिविधियों की अनुमति नहीं देगा।

पीएम मोदी-शी जिनपिंग

पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात पिछले हफ्ते नई दिल्ली में हुए 18वें BRICS सम्मेलन से इतर हुई थी। शी जिनपिंग 12 सितंबर को भारत पहुंचे थे। जिनपिंग करीब 7 साल बाद भारत आए। गलवान घाटी में 2020 में हुई हिंसक झड़प के बाद यह उनकी पहली नई दिल्ली यात्रा थी। इसी दौरान पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। यह मीटिंग करीब 50 मिनट चली। जिसमें दोनों देसों के संबंधों पर बातचीत हुई।

पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाकर 70 लाख किया, जानें इस पैंतरे की पीछे की वजह

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पाकिस्तान ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी(एफआईए) ने अपनी वेबसाइट पर 2026 की "रेड बुक- मोस्ट वॉन्डेट हाई प्रोफ़ाइल टेररिस्ट' लिस्ट जारी की है। इसमें आतंकी मसूद अज़हर का नाम भी है। जिसमें उसकी गिरफ़्तारी के लिए सूचना देने पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये देने का इनाम भी रखा गया है।

इनाम की राशि 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख किया

पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने एफआईए ने अपनी नई 'रेड बुक' में जेश जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को भगोड़ा घोषित किया है। उसके सिर पर घोषित इनाम को भी बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए कर दिया गया है। पहले ये इनामी राशि 50 लाख पाकिस्तानी रुपए थी। अजहर को 2021 में भी भगोड़ा घोषित किया था और 50 लाख इनाम रखा था। मसूद अजहर भारत में संसद के अलावा 2016 पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 पुलवामा अटैक में भी आरोपी है।

रेड बुक में दी जाती है हाई-प्रोफ़ाइल आतंकवादियों की जानकारी

रेड बुक पाकिस्तान की एफआईए की ऐसी सूची है, जिसमें देश के मोस्ट वॉन्टेड और हाई-प्रोफ़ाइल आतंकवादियों के बारे में जानकारी दर्ज की जाती है। इसमें उन लोगों की तस्वीर, पहचान, संगठन से जुड़ाव, मामलों की जानकारी और उनकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी जैसी चीज़ें दी जाती हैं। यह कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए एक वॉन्टेड-टेररिस्ट डेटाबेस/रिकॉर्ड की तरह काम करती है। एफआईए का काउंटर टेररिज़्म विंग इसे तैयार करता है। एफआईए की नई रेड बुक में 26-11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े 19 आतंकियों के नाम भी शामिल हैं। ये वे लोग हैं, जिन्होंने हमले के लिए आतंकियों को समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचाने में मदद की, उन्हें आर्थिक सहायता दी या अभियान के प्रबंधन में भूमिका निभाई। इनमें से 17 आतंकियों के नाम के साथ उनकी तस्वीर और 26-11 हमले में उनकी भूमिका का विवरण दिया गया है। लेकिन दो मामलों में पाकिस्तान ने अहम जानकारियां हटा दी हैं।

एफएटीएफ की बैठक से मसूद पर कार्रवाई

मसूद अजहर का नाम इस लिस्ट में आने को एफ़एटीएफ़ (फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स) रिव्यू से जोड़कर देखा जा रहा है। एफएटीएफ की अक्टूबर में होने वाली प्लीनरी से पहले पाकिस्तान की कार्रवाई दिखावे के तौर पर देखी जा रही है। इससे पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दिखाने की कोशिश कर सकता है कि वह आतंकवाद और आतंकी फंडिंग के खिलाफ कदम उठा रहा है। पाकिस्तान पहले एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में रह चुका है। इस दौरान उस पर आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कार्रवाई करने का अंतरराष्ट्रीय दबाव था। अक्टूबर 2022 में एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया था। अब अक्टूबर में एफएटीएफ की बैठक होने वाली है। ऐसे में मसूद अजहर जैसे आतंकी के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा पाकिस्तान के लिए अहम मानी जा रही है।

ब्रिक्स सम्मेलन भारत के लिए कूटनीतिक परीक्षा, पश्चिम के साथ बिगाड़ के बिना रूस-चीन का संतुलन साध पाएगा?

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भारत की मेजबानी में 12-13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। 11 बड़ी और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता मिलने वाले हैं। ये नेता 18वें ब्रिक्स (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ़्रीका) शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली में इकट्ठा होंगे। व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग को बुलाए जाने से इस सम्मेलन का महत्व और बढ़ गया है, खासकर ऐसे समय में जब भू-राजनीति में उथल-पुथल मची है और दो बड़े युद्धों के खत्म होने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। पश्चिम में ऐसी आशंकाएं जताई जा रही हैं कि यह संगठन किसी नए शीत युद्ध के अखाड़े में तब्दील न हो जाए। ऐसे में भारत की असल चुनौती ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी धड़े वाली छवि से बचाने की होगी।

अमेरिका-रूस और चीन के साथ संतुलन बनाए रख सकेगा भारत?

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत में हो रहा है और यह चौथी बार है जब भारत इसकी मेजबानी कर रहा है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने इस सम्मेलन के महत्व को और बढ़ा दिया है। अमेरिकी प्रतिबंधों और व्यापारिक नीतियों से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है और मंदी की आशंका भी मजबूत हुई है। इस परिस्थिति में रूस और चीन ब्रिक्स को डॉलर के वर्चस्व को तोड़ने और पश्चिमी संस्थानों के विकल्प के तौर पर पेश करते हैं। इससे पश्चिमी नीति-निर्माताओं में इसे एक पश्चिम विरोध ब्लॉक के रूप में देखने की प्रवृत्ति बढ़ी है। भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वह पश्चिमी देशों का भरोसा खोए बिना रूस और चीन के साथ अपने रिश्तों का संतुलन बनाए रख सकता है?

'बहु-गठबंधन'की नीति पर भारत

इस बैठक में सबसे अहम मुद्दा अमेरिका होगा, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति ने दोस्तों और दुश्मनों, दोनों को ही हैरान कर दिया है। वॉशिंगटन ने रूस से भारतीय तेल आयात पर कई बार आपत्ति जताई है, लेकिन भारत का रुख स्पष्ट रहा है कि उसकी ऊर्जा आवश्यकताएं किसी भू-राजनीतिक गुट द्वारा तय नहीं होंगी। भारत 'गुटनिरपेक्षता' के पुराने ढर्रे के बजाय 'बहु-गठबंधन' की नीति पर चल रहा है—यानी अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर विभिन्न शक्तियों के साथ अलग-अलग मुद्दों पर सहयोग करना।

भारत को विशिष्ट कूटनीतिक भूमिका निभाने का अवसर

इन परिस्थितियों में ब्रिक्स की मेजबानी भारत को एक विशिष्ट कूटनीतिक भूमिका निभाने का अवसर देती है। भारत न तो ब्रिक्स के भीतर पश्चिम-विरोधी रुख का समर्थन करने वाला देश है और न ही पश्चिमी देशों के समूह का हिस्सा है। यही स्थिति भारत को सम्मेलन में अलग भूमिका निभाने की क्षमता देती है। भारत ब्रिक्स के भीतर आने वाले प्रस्तावों और संयुक्त घोषणाओं को संतुलित एवं व्यावहारिक दिशा देने का प्रयास कर सकता है, ताकि उनका रुख किसी एक ध्रुव के पक्ष या विरोध में जाने के बजाय समाधान की ओर हो।

वंदे मातरम' के सम्मान में उड़े हुए उमर अबुल्ला, तिलमिलाई कांग्रेस तो बीजेपी भड़की

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वंदे मातरम को लेकर देश का सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। इस बार मामला जम्मू-कश्मीर से उठा है। जम्मू-कश्मीर में पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में संपूर्ण ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम में राष्ट्र गीत के सभी छह छंदों का गायन हुआ, जिस दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला समेत कई प्रमुख नेता करीब तीन मिनट 10 सेकंड तक सम्मान में सावधान की मुद्रा में खड़े रहे। जिससे कांग्रेस को मिर्ची लग गई है।

कांग्रेस को रास नहीं आया पूरा वंदे मातरम का गायन

जम्मू-कश्मीर में पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन के दौरान वंदे मातरम् के गायन का वीडियो के सामने आने के बाद कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि वंदे मातरम् का पूरा संस्करण उस बहुलतावादी और समावेशी सोच के अनुरूप नहीं है, जिसे स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत के लिए अपनाया था।

केसी वेणुगोपाल ने दी ये नसीहत

कांग्रेस सांसद और पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि वंदे मातरम का पूरा वर्जन उस सामंजस्यपूर्ण और बहुलवादी सोच के अनुरूप नहीं है, जिसकी कल्पना भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने की थी और जिसे उन्होंने आगे बढ़ाया था। वेणुगोपाल ने देश के कुछ महान स्वतंत्रता सेनानियों का हवाला देते हुए सहयोगी दलों से उनके फैसलों और विचारों का सम्मान करने की अपील की। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि सहयोगी दलों को भी वंदे मातरम के वही दो छंद गाने चाहिए, जिन्हें स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अपनाया गया था।

बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस की आपत्ति पर बीजेपी ने तीखा हमला बोला है। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कट्टरपंथियों के हाथ की कठपुतली बन गई है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस के सहयोगी ही उसके रुख से सहमत नहीं दिख रहे हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस के सहयोगियों को वंदे मातरम् के पूरे गीत से परेशानी नहीं है, तो कांग्रेस इस मुद्दे पर इतना कड़ा रुख क्यों अपना रही है।

कांग्रेस 21वीं सदी की मुस्लिम लीग- सुधांशु त्रिवेदी*

भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर बेहद तीखा राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि अब इस बात में कोई संदेह नहीं है कि कांग्रेस 21वीं सदी की मुस्लिम लीग बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का ‘सेकुलरिज्म का नकाब’ उतर चुका है और पार्टी कट्टरपंथी ताकतों के आगे पूरी तरह आत्मसमर्पण कर खुद को नई मुस्लिम लीग में बदल रही है।

BRICS समिट के लिए भारत आएंगे रूसी राष्ट्रपति पुतिन, 11 सितंबर को पीएम मोदी के साथ बैठक

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत दौरे पर आएंगे। 11 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी तय हो गई है।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस मुलाकात की पुष्टि की है। दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को भारतीय पत्रकारों के साथ वर्चुअल बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाला है।

पीएम मोदी और पुतिन के बीच करीबी व्यक्तिगत संबंध

मॉस्को से वर्चुअल ब्रीफिंग के जरिए पत्रकारों से बात करते हुए पेस्कोव ने कहा, "दोनों नेता भारतीय और रूसी नेता बहुत करीबी व्यक्तिगत संपर्क में हैं। उनके रिश्ते बहुत व्यावहारिक हैं, और वे इतने ईमानदार हैं कि हमारे एजेंडे और द्विपक्षीय संबंधों के सबसे संवेदनशील मुद्दों पर बहुत खुले और रचनात्मक तरीके से चर्चा कर सकते हैं। ज़ाहिर है, इससे हमारे सहयोग के लिए नए रास्ते खुलते हैं।"

इन मुद्दों पर होगी बात

मोदी-पुतिन की बैठक में व्यापार, आर्थिक सहयोग और परिवहन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। दोनों देश आपसी कारोबार बढ़ाने और अपनी कंपनियों के लिए नए मौके तलाशने पर भी बात कर सकते हैं। भारतीय कंपनियां रूस के बाजार में विस्तार करना चाहती हैं, जबकि रूस भारत में अपने कारोबार और उत्पादों की पहुंच बढ़ाने में रुचि रखता है।

रूस यूक्रेन युद्ध पर चर्चा संभव

यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ने, पश्चिमी प्रतिबंधों और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे कई बड़े सवालों से जूझ रही है। ऐसे में बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध और फारस की खाड़ी में जारी तनाव भी चर्चा का हिस्सा हो सकता है। दोनों नेता युद्ध की मौजूदा स्थिति और उसके असर पर बात कर सकते हैं। रूस के मुताबिक, खाड़ी में जारी घटनाओं का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन

भारत 12-13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। यह तेजी से आगे बढ़ रहे प्रमुख उभरते बाजार वाले देशों और विकासशील देशों के अंतर-सरकारी मंच के लिए एक अहम पल होगा। भारत ने इस साल 1 जनवरी को ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली, जो इस समूह की कमान संभालने का उसका चौथा मौका है। साल 2026 ब्रिक्स की स्थापना के 20 साल पूरे होने का भी प्रतीक है।

ब्रिक्स समिट: 11-13 सितंबर तक दिल्ली जुटेंगे दिग्गज, पुतिन-जिनपिंग समेत आएंगे 10 देशों के मेहमान

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए तैयार है. ब्रिक्स की अध्यक्षता इस साल भारत कर रहा है और अध्यक्ष के नाते इस बार के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की जिम्मेदारी भी भारत की है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होना है।

पुतिन और जिनपिंग आ सकते हैं दिल्ली

11 से 13 सितंबर तक होने जा रहे इस आयोजन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री और डेलीगेट्स आएंगे। इस शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए ब्रिक्स के सदस्य देशों के साथ ही कई अन्य कद्दावर भी नई दिल्ली में होंगे। इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली आ सकते हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी भारत आ सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी इसमें शामिल होने भारत आ सकते हैं।

ब्रिक्स देशों में कितने नाम?

ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा ब्रिक्स देशों में साल 2024 में पांच और देश- मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जुड़े। 2025 में इंडोनेशिया को भी इस समूह से जोड़ा गया। ऐसे में 11 देशों के इस समूह के प्रतिनिधि भारत की राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेंगे।

यातायात व्यवस्था को लेकर एडवाइजरी

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व यातायात व्यवस्था के संबंध में एक नई और विस्तृत एडवाइजरी जारी की है।राष्ट्रीय राजधानी के लिए जारी इस एडवाइजरी में, दिल्ली पुलिस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों की आवाजाही के दौरान राजधानी और उसके आसपास की कुछ सड़कों पर ट्रैफिक को अस्थायी रूप से नियंत्रित या डायवर्ट कियाएगा। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा कर नागरिकों से अपील की है कि वे शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाले रूट डायवर्जन को ध्यान में रखकर अपनी यात्रा की प्लानिंग करें।

दिल्ली में मणिपुरी संगीतकार की पीट-पीटकर हत्या, शोर-शराबे का विरोध करने पर हमला, जानें पूरा मामला

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मणिपुर के प्रसिद्ध संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की दिल्ली में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। वे किलोकारी गांव में अपने घर के बाहर शोर-शराबे और उपद्रव का विरोध कर रहे थे। इससे नाराज होकर डिलीवरी बॉय और ढाबे के कर्मचारियों ने उन पर हमला कर दिया। गंभीर घायल अवस्था में विक्रम को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

शोर और शराब पीने का विरोध करने पर मारपीट

आरोप है कि विक्रम ने अपने फ्लैट के बाहर शोर मचाने, गाली-गलौज और शराब पीने का विरोध किया था। पहले उन्होंने बालकनी से ही लड़कों को समझाने की कोशिश की और जब बात नहीं बनी तो नीचे पहुंचे। इसके बाद वहां मौजूद डिलीवरी कर्मियों और ढाबा कर्मचारियों से उनका विवाद हो गया। आरोपियों ने विक्रम को मुक्कों और घूंसों से बुरी तरह पीटा। मारपीट में उन्हें गंभीर चोटें आईं। उनका बेटा याइफाबा उन्हें तुरंत होली फैमिली अस्पताल ले गया। इलाज के दौरान विक्रम की मौत हो गई।

आठ आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में हत्या की धाराओं में FIR दर्ज कर सात बालिग और एक नाबालिग समेत कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, विक्रम सिंह किलोकरी गांव में अपने घर पर थे। उनके घर के सामने सैनी ढाबे से जुड़े कुछ लड़के मौजूद थे। आरोप है कि वहां शोर-शराबा और गाली-गलौज हो रही थी। विक्रम सिंह ने पहले अपने घर की बालकनी से ही इन लड़कों को समझाने और शोर बंद करने के लिए कहा। लेकिन जब बात नहीं बनी तो विक्रम सिंह खुद नीचे उन्हें समझाने पहुंचे।

घर तक पहुंच गए थे हमलावर

शुरुआती जांच और परिवार की तरफ से सामने आए आरोपों के मुताबिक, नीचे पहुंचने के बाद विक्रम सिंह की लड़कों से कहासुनी हुई और फिर हाथापाई शुरू हो गई। आरोप है कि कई लड़कों ने मिलकर उनके साथ मारपीट की। इसके बाद विक्रम सिंह अपने घर की तरफ बढ़े, लेकिन आरोप है कि लड़के उनके पीछे-पीछे घर तक पहुंच गए। परिवार और पड़ोसी के मुताबिक, विक्रम सिंह जब अपने घर के दरवाजे तक पहुंचे तो उनके बेटे ने दरवाजा खोला। इसके बाद लड़के वहां से चले गए। मारपीट में विक्रम सिंह को चोटें आईं। उनके बेटे याइफाबा उन्हें इलाज के लिए होली फैमिली अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन इलाज के दौरान विक्रम सिंह ने दम तोड़ दिया।

कौन थे विक्रम सिंह ?

सी. विक्रम सिंह मणिपुर के वेस्टर्न म्यूजिक क्षेत्र में जाना-पहचाना नाम थे। वह गिटार बजाते थे और कई बैंड के साथ काम कर चुके थे। विक्रम ने अल्ट्रा वाइर्स, फीनिक्स और ईस्टर्न डार्क जैसे बैंड के साथ गिटार बजाया था। वह मशहूर मणिपुरी गायिका चोंगथम कमला के सबसे बड़े बेटे थे। विक्रम लंबे समय से किलोकरी में रह रहे थे। वह मैतेई समुदाय से ताल्लुक रखते थे। उनकी मौत के बाद पूर्वोत्तर के संगठनों ने घटना पर दुख और विरोध जताया है।

राम मंदिर ट्रस्ट CEO जितेंद्र मिश्रा का फर्जी वीडियो शेयर कर फंसे अभिजीत दीपके, अब दी सफाई

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राम मंदिर के CEO रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का एक फेक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दावा किया गया कि वीडियो में मिश्रा फिल्मी गाने ‘जमाल कुडू’ पर डांस कर रहे हैं। वीडियो को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी अपने एक्स अकाउंट पर शेयर कर दिया। रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर एक फर्जी वीडियो शेयर कर अभिजीत दीपके विवादों में घिर गए हैं।

दीपके ने 6 सितंबर को एक्स पर एक पोस्ट को शेयर किया था। इसमें एक व्यक्ति फिल्मी गाने ‘जमाल कुडू’ पर डांस करता नजर आ रहा था। दीपके ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा था कि किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी में वह क्या करता है, इससे उन्हें कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने आगे यह भी लिखा कि यदि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति राम मंदिर ट्रस्ट का CEO नहीं होता, तो धर्म के ‘ठेकेदार’ उस पर कैसी प्रतिक्रिया देते।

पाकिस्तान स्थित फेसबुक पेज से किया गया अपलोड

मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला कि यह वीडियो सबसे पहले 3 सितंबर को पाकिस्तान स्थित फेसबुक पेज ‘Defence Watch’ पर अपलोड किया गया था, जहां से यह भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक पहुंचा। पाकिस्तानी फेसबुक पेज से शुरू हुए एक वीडियो को बाद में कांग्रेस और सीजेपी से जुड़े हैंडल्स ने आगे बढ़ाया।

गलत दावे वाले वीडियो शेयर कर फंसे दीपके

हालांकि, बाद में सामने आया कि वीडियो में मौजूद व्यक्ति जितेंद्र मिश्रा नहीं हैं। गलत दावे वाले वीडियो को शेयर करने के बाद दीपके को सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ा। कई यूजर्स ने उनसे सवाल किए। इसके बाद उन्होंने एक और पोस्ट के जरिए मामले पर सफाई दी। दीपके ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति जितेंद्र मिश्रा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका मकसद किसी व्यक्ति की निजी पसंद पर सवाल उठाना नहीं था। उनके मुताबिक, उनका मुद्दा इस बात को लेकर था कि किसी व्यक्ति के बारे में किसी चीज को उसकी पहचान और पद के आधार पर अलग नजरिए से क्यों देखा जाता है।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पहले सीईओ

बता दें 2 सितंबर को रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का पहला सीईओ बनाया गया है। 62 साल के जितेंद्र मिश्रा ने इंडियन एयर फ़ोर्स (IAF) में अपनी सेवा दी है और उन्हें युद्ध सेवा मेडल समेत कई मिलिट्री अवॉर्ड मिले हैं।

ईरान के नक्शे पर डोनाल्ड ट्रंप ने लगाई अपनी तस्वीर, अमेरिकी राष्ट्रपति के पोस्ट ने बढ़ाई हलचल

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अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल और पिकैक्स माउंटेन पर हमलों की धमकी के बाद डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के बारे में किए नए पोस्ट ने हलचल मची दी है। ट्रंप ने पश्चिम एशिया का नक्शा शेयर करते हुए ईरान के मैप को अपने सिर के आकार में दिखाया है। यानी एक तरह से उन्होंने ईरान पर कब्जे की धमकी दी है।

ईरान के नक्शे पर ट्रंप की फोटो

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक घंटे के अंदर 7 पोस्ट किए हैं, जो ईरान से जुड़े हुए हैं। ट्रंप के पहले पोस्ट में ईरान के नक्शे पर उनकी खुद की फोटो लगी है। इससे कुछ ही दिन पहले उन्होंने सामरिक रूप से बेहद अहम 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' का नाम बदलकर "ट्रंप स्ट्रेट" रखने की बात भी कही थी।

होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई को लेकर दावा

ट्रंप ने होर्मुज ऑयल वॉल्यूम्स आर बैक शीर्षक वाला एक ग्राफिक पोस्ट किया है। इसमें ईरान और ओमान के बीच के संकरे जलमार्ग का नक्शा दिखाया गया। साथ ही ऐसे आंकड़े थे, जिनमें दावा किया गया था कि तेल की मात्रा बढ़कर 18 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गई है, जबकि टकराव से पहले यह 20 मिलियन बैरल प्रति दिन थी।

ईरानी अर्थव्यवस्था और मुद्रा में टूट का दावा

ट्रंप ने ईरान की अर्थव्यवस्था और मुद्रा की बदहाली पर दो ग्राफिक्स शेयर किए हैं। एक में दिखाया है अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल 9 लाख (2025 की शुरुआत) से गिरकर 22.7 लाख से भी नीचे चला गया है। दूसरे ग्राफिक में संदेश दिया गया कि ईरान की करेंसी पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।

खार्ग द्वीप को लेकर भी पोस्ट

ट्रंप ने इसके बाद खार्ग द्वीप को लेकर एक बेहद आक्रामक तस्वीर शेयर की। इसे बाय-बाय खर्ग शब्दों के साथ शेयर किया गया। AI-जनरेटेड ग्राफिक में एक लड़ाकू विमान को विस्फोटों और आग की लपटों से घिरे तेल संयंत्र की ओर तेजी से बढ़ते हुए दिखाया गया है। यह तस्वीर खार्ग द्वीप पर हमले की संभावना को दर्शाती है, जो ईरान का मुख्य कच्चा तेल निर्यात केंद्र है।

ईरान एक नाकाम देश बताया

अपनी आखिरी पोस्ट में ट्रंप ने ईरान के नक्शे के साथ लिखा कि ईरान एक नाकाम देश बनता जा रहा है। अमेरिका-इजरायल ने इस साल 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए थे। इसके बाद से ही दोनों पक्षों में लड़ाई चल रही है।