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लोहिया ट्रस्ट की कमान अब अखिलेश के हाथ, शिवपाल की भूमिका बदली
2017 से शिवपाल संभाल रहे थे जिम्मेदारी, अब सपा प्रमुख के पास लोहिया और जनेश्वर ट्रस्ट दोनों की कमान
लखनऊ। समाजवादी पार्टी में संगठन और परिवार से जुड़े संस्थानों को लेकर एक अहम बदलाव सामने आया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव अब लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष बन गए हैं। पिछले करीब एक दशक से इस ट्रस्ट की जिम्मेदारी शिवपाल यादव संभाल रहे थे। ट्रस्ट की कमान अखिलेश यादव को सौंपे जाने के बाद पार्टी से जुड़े इस महत्वपूर्ण संस्थान का नियंत्रण भी अब उनके हाथ में आ गया है।

जानकारी के मुताबिक, हाल में हुई ट्रस्ट की बैठक में अखिलेश यादव को अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। बैठक में मौजूद शिवपाल यादव समेत ट्रस्ट के सभी सदस्यों ने इस फैसले पर सहमति जताई। इसके साथ ही अखिलेश यादव अब लोहिया ट्रस्ट के साथ जनेश्वर ट्रस्ट के भी अध्यक्ष हो गए हैं।

सपा की विरासत में अहम स्थान रखता है ट्रस्ट
लोहिया ट्रस्ट को समाजवादी विचारधारा से जुड़े प्रमुख संस्थानों में गिना जाता है। इसका गठन समाजवादी पार्टी के गठन से पहले हुआ था। ट्रस्ट का उद्देश्य समाजवादी विचारधारा और डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों को आगे बढ़ाना तथा उनसे जुड़े सामाजिक और राजनीतिक सरोकारों को बढ़ावा देना रहा है।

वर्ष 2017 में समाजवादी पार्टी और यादव परिवार के भीतर हुए राजनीतिक विवाद के दौरान लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी प्रोफेसर रामगोपाल यादव से हटाकर शिवपाल यादव को दी गई थी। तब से शिवपाल यादव ट्रस्ट के अध्यक्ष की भूमिका में थे।

अब अध्यक्ष पद में बदलाव के बाद ट्रस्ट का संचालन सीधे अखिलेश यादव के नेतृत्व में होगा। ट्रस्ट में अखिलेश यादव, शिवपाल यादव, दीपक मिश्रा, आदित्य यादव, राम नरेश यादव इटावा, राम सेवक यादव, वीरपाल यादव बरेली और राजेश यादव सदस्य बताए गए हैं।

पार्टी और संस्थानों में नेतृत्व का केंद्रीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा पिछले कुछ वर्षों में संगठनात्मक रूप से काफी आगे बढ़ी है। पार्टी की कमान संभालने के साथ अब उनसे जुड़े प्रमुख संस्थानों में भी नेतृत्व की भूमिका मजबूत होती दिखाई दे रही है।

लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी अखिलेश यादव को मिलने को इसी बदलाव की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पार्टी और उससे जुड़े संस्थानों में निर्णय लेने की प्रक्रिया के अधिक केंद्रीकृत होने की चर्चा तेज हो गई है।

विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी चर्चा
उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले लोहिया ट्रस्ट में हुए इस बदलाव ने राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। खासतौर पर अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच रिश्तों के राजनीतिक पहलुओं को लेकर इस फैसले को देखा जा रहा है।

हालांकि ट्रस्ट की बैठक में शिवपाल यादव समेत सभी सदस्यों की सहमति से निर्णय लिए जाने की बात सामने आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे सपा के भीतर बदलते शक्ति संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है।

2017 का विवाद अब भी सियासी संदर्भ
समाजवादी पार्टी के इतिहास में वर्ष 2017 का दौर पारिवारिक और राजनीतिक टकराव के लिए जाना जाता है। उस समय तत्कालीन पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच मतभेद खुलकर सामने आए थे। इसी दौर में अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच भी राजनीतिक दूरी बढ़ी थी।

अब लोहिया ट्रस्ट की कमान अखिलेश यादव के हाथ में आने के बाद एक बार फिर सपा परिवार और संगठन से जुड़े घटनाक्रम पर राजनीतिक नजरें टिक गई हैं। हालांकि ट्रस्ट के भीतर इस फैसले पर सर्वसम्मति की बात कही जा रही है, लेकिन चुनावी वर्ष में इसके राजनीतिक मायने निकाले जाना तय माना जा रहा है।
युगांडा की उपराष्ट्रपति आज निहारेंगी ताज की खूबसूरती को
लखनऊ /आगरा। दिल्ली में ब्रिक्स देशों के 18 वें सम्मेलन में भाग लेने दिल्ली पहुंची रिपब्लिक ऑफ युगांडा की उपराष्ट्रपति सोमवार को दिल्ली से सड़क मार्ग द्वारा चलकर आगरा पहुंचेंगी और ताज का दीदार करेंगी ।आगरा में ताजमहल पर करीब डेढ़ घंटे रहने के बाद दिल्ली लौट जाएंगी।

सोमवार को रिपब्लिक आफ युगांडा की उप राष्ट्रपति जेसिका अलपो सडक मार्ग द्वारा नई दिल्ली से प्रस्थान कर आगरा यमुना एक्सप्रेस होते हुए करीब 12:00 बजे ताजमहल पहुंचेंगी।करीब डेढ़ घंटे ताजमहल का दीदार करने और उसकी खूबसूरती निहारने के बाद उपराष्ट्रपति ताजमहल की निकट ही एक पांच सितारा होटल पहुंच कर वहां अल्प विश्राम करने और दोपहर का भोजन लेने के बाद करीब 3:30 बजे सड़क मार्ग से ही दिल्ली लौट जायँगी

युगांडा के उपराष्ट्रपति के ताजमहल भ्रमण कार्यक्रम को लेकर जिला पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए है, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा भी उनके आगमन के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन करने और आम पर्यटकों को सुविधा को दृस्टिगत विशेष प्रबंध किए गए हैं।

डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास द्वारा बताया गया कि युगांडा की उपराष्ट्रपति करीब 3:30 घंटे आगरा में रहेंगी और इस दौरान ताजमहल भ्रमण भी करेंगे, आगरा भ्रमण के कार्यक्रम के दौरान मानक अनुसार उनकी सुरक्षा व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं
सपा में होता है गुंडों और अपराधियों का संरक्षण: केशव प्रसाद मौर्य
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता व उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा में गुंडों और अपराधियों का संरक्षण है।

उप मुख्यमंत्री ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि भाजपा अगड़ा-पिछड़ा-दलित समाज की उस पवित्र ‘त्रिवेणी’ संगम की तरह है, जिसमें सबका सम्मान, सबका विकास और सबका विश्वास शामिल है। दूसरी ओर सपा का पीडीए यानी परिवार डेवलपमेंट एजेंसी- जहां जनता के विकास से ज्यादा परिवार, गुंडों और अपराधियों के संरक्षण की चिंता होती है। उन्होंने लिखा सपा का इतिहास उत्तर प्रदेश के लिए ख़तरनाक रहा है। साज़िश और झूठ के सहारे चुनाव एक बार जीता जा सकता है, बार-बार नहीं।

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन को जो राजनीतिक लाभ मिला, वह साल 2027 में दोहराया नहीं जाएगा। उत्तर प्रदेश की जनता सब देख रही है और तीसरी बार भाजपा सरकार बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
उत्तर प्रदेश में 14 आईएएस और 34 पीसीएस अधिकारियों के तबादले

लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्रदेश सरकार ने रविवार की देर रात 14 आईएएस का तबादला हो गया हैं। इनमें तीन सचिव, छह विशेष सचिव और जिला स्तर के पांच सीडीओ, अपर पदनाम के कुल 14 आईएएस अफसर शामिल है। इसके साथ ही साथ शासन ने 34 पीसीएस अधिकारियों के तबादले भी किए हैं।

तबादले के क्रम आईएएस सुमित राजेश महाजन मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) सहारनपुर से मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ), उत्तर प्रदेश स्टार्ट-अप मिशन बनाए गए हैं। डॉ० सुनील कुमार वर्मा अपर आयुक्त, राज्य कर, उत्तर प्रदेश से मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) सहारनपुर के पद पर तैनात किए गए हैं। राहुल सिंह को विशेष सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग से अब विशेष सचिव, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), अभिषेक कुमार को मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ), लखीमपुर खीरी से हटाकर विशेष सचिव, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग, उत्तर प्रदेश शासन की जिम्मेदारी दी गई है।

योगानन्द पाण्डेय को अपर जिलाधिकारी (नगर), अयोध्या से अब मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ), लखीमपुर खीरी बनाए गए हैं। साहब सिंह को सदस्य (न्यायिक), राजस्व परिषद, प्रयागराज से अब सचिव, सचिवालय प्रशासन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के पद पर भेजे गए हैं। डॉ० विश्राम को अपर आयुक्त, विन्ध्याचल मंडल से अब सदस्य (न्यायिक), राजस्व परिषद, प्रयागराज नियुक्त किए गए हैं। इनके अलावा देवेन्द्र कुमार सिंह कुशवाहा को विशेष सचिव, रेशम विभाग एवं निदेशक, रेशम से अब सदस्य (न्यायिक), राजस्व परिषद, प्रयागराज, आनन्द कुमार शुक्ला को मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ), अम्बेडकर नगर से अब विशेष सचिव, रेशम विभाग तथा निदेशक, रेशम, उत्तर प्रदेश, वैभव मिश्रा को अपर जिलाधिकारी (वि०/रा०), कुशीनगर से अब मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ), अम्बेडकर नगर बनाए गए हैं।

अशोक कुमार कनौजिया को संयुक्त निदेशक, युवा कल्याण से विशेष सचिव, माध्यमिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन बनाए गए हैं। अरुण कुमार को अपर आयुक्त, अलीगढ़ मंडल से विशेष सचिव, ग्राम्य विकास विभाग, प्रदीप कुमार यादव को अपर नगर आयुक्त, नगर निगम, सहारनपुर से अपर आयुक्त, अलीगढ़ मंडल बनाए गए हैं। नेहा शर्मा को महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ वर्तमान में संभाल रही सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के पद से मुक्त कर दी गई हैं।

पीसीएस अफसरों के तबादले

इसी तरह शासन ने पीसीएस अफसरों के तबादले किये हैं, इनमें सबसे पहले जंग बहादुर यादव को संयुक्त आयुक्त (प्रशासन), कार्यालय आयुक्त, ग्राम्य विकास बने हैं। विश्वभूषण मिश्रा को उपसचिव, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, संजय कुमार पाण्डेय को अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), गौतमबुद्धनगर, अमित कुमार- द्वितीय को प्रधान प्रबन्धक, उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ, मंगलेश दुबे को उपसंचालक चकबंदी, प्रयागराज बने, विनीत उपाध्याय को प्रधान प्रबन्धक, उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ , राम शंकर उपायुक्त (प्रशासन), कार्यालय आयुक्त खाद्य एवं रसद बने हैं। दिग्विजय प्रताप सिंह उपनिदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद, संगम लाल अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति), मिर्जापुर, योगेंद्र सिंह उपनिदेशक (प्रशासन), रेशम निदेशालय,

बरखा सिंह अपर नगर आयुक्त, नगर निगम, वाराणसी,पंकज प्रकाश राठौड़ अपर जिलाधिकारी (वि/रा) देवरिया, दीपक कुमार पाल नगर मैजिस्ट्रेट, मुजफ्फरनगर, रेणु अपर नगर आयुक्त, नगर निगम, गाज़ियाबाद, अजय आनंद वर्मा उपजिलाधिकारी, आजमगढ़, रेणु मिश्रा: उपजिलाधिकारी, फ़र्रुखाबाद, प्रदीप कुमार सिंह: उपजिलाधिकारी, गौतमबुद्धनगर, दिव्या सिकरवार उपजिलाधिकारी, औरैया बनी हैं। इनके अलावा प्रद्युम्न कुमार: उपजिलाधिकारी, बस्ती, वंदना त्रिवेदीउपनिदेशक, डॉ राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी ,अरुण कुमार अपर जिलाधिकारी (वि/रा) बहराइच , मानवेंद्र सिंह अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), बदायूं , राजीव कुमार राय को अपर जिलाधिकारी (वि/रा) बागपत बनाया गया हैं। अजय नारायण सिंह को अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), एटा, प्रशांत कुमार को अपर जिलाधिकारी (नागरिक आपूर्ति), आगरा, प्रियंका सिंह अपर नगर आयुक्त, नगर निगम, मथुरा, अभय कुमार पाण्डेय, जिलाधिकारी अपर (वि/रा) कासगंज, सुखलाल प्रसाद वर्मा जिलाधिकारी अपर (नजूल), प्रयागराज , शत्रुहन पाठक जिलाधिकारी अपर (न्यायिक), जालौन, देवेंद्र प्रताप सिंह- द्वितीय सचिव, मुरादाबाद विकास प्राधिकरण, विजेता मुख्य राजस्व अधिकारी, मिर्जापुर एवं उपसंचालक चकबंदी, मिर्जापुर , शुभी गुप्ता: सहायक निदेशक, डॉ राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी अशोक कुमार उपजिलाधिकारी, हापुड़ और शुभेन्दु शेखर सिंह: विशेष कार्याधिकारी, यूपीडा बनाया गया हैं।
लखनऊ की पर्वतारोही पूर्वा धवन ने 5,826 मीटर ऊंची रुद्रगैरा चोटी पर फहराया तिरंगा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान मिली थी प्रेरणा, अब एवरेस्ट फतह का लक्ष्य

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर ‘बेटी बढ़ाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश लेकर पर्वतारोहण अभियान पर निकलीं लखनऊ की पर्वतारोही पूर्वा धवन ने माउंट रुद्रगैरा की 5,826 मीटर ऊंची चोटी पर भारतीय तिरंगा फहराकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया। 10 सितंबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे शिखर पर पहुंचीं पूर्वा ने कठिन बर्फीले और चट्टानी रास्तों, कम ऑक्सीजन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच यह उपलब्धि हासिल की। अब उनका अगला लक्ष्य दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह करना है।

सीएम योगी से मुलाकात कर सौंपा था ‘बेटी बढ़ाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश

मई 2018 में पूर्वा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का बैनर सौंप चुकी हैं। सीएम योगी ने शुभकामनाएं देकर उनका हौसला बढ़ाया था। पूर्वा ने रुद्रगैरा फतह का श्रेय परिवार के सहयोग और सीएम की प्रेरणा को दिया। अभियान में शैलेश सेमवाल और बिहारी सिंह राणा की भी अहम भूमिका रही। क्योंकि उन्हीं के मार्गदर्शन में पूर्वा ने गंगोत्री में विशेष प्रशिक्षण लिया।

गंगोत्री से दो दिन का सफर, फिर 1,300 मीटर की कठिन चढ़ाई

पूर्वा, शैलेश सेमवाल और बिहारी सिंह राणा ने 07 सितंबर को सुबह 09 बजे गंगोत्री से ट्रेक शुरू किया। दो दिन की चुनौतीपूर्ण ट्रेकिंग के बाद टीम 4,350 मीटर की ऊंचाई पर रुद्रगैरा बेस कैंप पहुंची। 10 सितंबर को सुबह चार बजे बेस कैंप से समिट पुश शुरू हुआ। करीब आठ घंटे 30 मिनट की कठिन चढ़ाई में टीम ने लगभग 1,300 मीटर की ऊंचाई हासिल की और दोपहर 12:30 बजे 5,826 मीटर ऊंचे शिखर पर पहुंची। रास्ते में खड़ी बर्फ, चट्टानी हिस्से और कठिन खुले सेक्शन थे। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की कमी और शारीरिक थकान ने चुनौती बढ़ाई, लेकिन टीम ने हिम्मत नहीं छोड़ी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान मिले प्रोत्साहन को पूर्वा ने अपने अभियान की ऊर्जा बनाया और लगातार नए लक्ष्य की ओर बढ़ रही हैं।

पर्यावरण संरक्षण संग अब मिशन एवरेस्ट

पूर्वा ने अपने अभियान को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा है। ‘पीक्स एंड प्लास्टिक’ पहल के जरिए वह पर्वतीय क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के प्रति जागरूकता और जिम्मेदार पर्वतारोहण का संदेश दे रही हैं। उनका कहना है कि हिमालय की चोटियों को फतह करना जितना गौरवपूर्ण है, उतना ही जरूरी उन्हें स्वच्छ और सुरक्षित रखना भी है। रुद्रगैरा पर तिरंगा फहराने के बाद अब पूर्वा की नजर 8,848.86 मीटर ऊंचे माउंट एवरेस्ट पर है। उनका लक्ष्य एवरेस्ट पर भारतीय तिरंगा फहराने के साथ महिला सशक्तीकरण, युवा प्रेरणा और स्वच्छ हिमालय का संदेश पहुंचाना है।
स्किन टीबी के मरीजों में बढ़ा डीआर-टीबी का खतरा, केजीएमयू के शोध में खुलासा
दीपक कुमार
लखनऊ । क्षय रोग (टीबी) केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं है। टीबी का जीवाणु शरीर के अन्य अंगों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है, जिसमें स्किन (त्वचा) भी शामिल है। चिकित्सा जगत में इसे एक्स्ट्रा-पल्मोनरी टीबी कहा जाता है। मतलब ऐसी टीबी जो फेफड़ों के अलावा शरीर के किसी और हिस्से में अपनी जड़ें जमा लेती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि स्किन टीबी से पीड़ित मरीजों में दवा-प्रतिरोधी (डीआर) टीबी का जोखिम बढ़ रहा है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में हुए एक अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया है। यह अध्ययन इंडियन जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी, वेनेरोलॉजी एंड लेप्रोलॉजी (आईडीजीवीएल) में प्रकाशित हुआ है।  

54 मरीजों पर हुआ अध्ययन

केजीएमयू के त्वचा रोग विभाग के वर्ष 2019 से 2022 के बीच हुए अध्ययन में स्किन टीबी के 54 मरीजों को शामिल किया गया। इनकी उम्र 20 से 40 वर्ष के बीच थी। इनमें सात मरीजों में दवा-प्रतिरोधी टीबी पाई गई। सभी मरीज एचआईवी निगेटिव थे। शोध में पाया गया कि छह मरीजों पर टीबी की सबसे असरदार दवा का असर नहीं हो रहा था। ऐसे में इन्हें बहु दवा-प्रतिरोधी (एमडीआर) टीबी की दवाएं दी गईं। वहीं एक मरीज पर एक और मुख्य टीबी-रोधी दवा असर नहीं कर रही थी। उसका इलाज तय मानक के तहत किया गया। राहत की बात यह रही कि इलाज शुरू होने के लगभग एक महीने के भीतर ही मरीजों की हालत में सुधार होने लगा। इलाज पूरा करने वाले मरीजों में त्वचा के घाव पूरी तरह ठीक हो गए। 

सात मरीजों में चार तरह की स्किन टीबी

शोध में सामने आया कि इन सात मरीजों में तीन को ल्यूपस वल्गैरिस (त्वचा पर लाल-भूरे रंग के चकत्ते और घाव), दो को स्क्रोफूलोडरमा (गांठों से मवाद रिसना), एक को ट्यूबरकुलर एब्सेस (त्वचा के नीचे मवाद भरी गांठ) और एक मरीज को ट्यूबरकुलर चैंक्र (त्वचा पर छाले जैसा घाव) थे। शोध में अहम चुनौती यह रही कि स्किन टीबी में बैक्टीरिया की संख्या सामान्यत: बहुत कम होती है। जिससे मरीजों की कल्चर जांच से टीबी के जीवाणु की पहचान और दवा-प्रतिरोध का पता लगाना मुश्किल होता है। ऐसे में आधुनिक मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक टेस्ट बेहतर नतीजे देते हैं।

स्किन टीबी की पुष्टि के लिए जरूरी जांचें

केजीएमयू के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के संस्थापक प्रभारी प्रो. सूर्यकांत के मुताबिक,  स्किन टीबी को केवल त्वचा तक सीमित बीमारी मानकर दवा-प्रतिरोध की संभावना को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे मरीजों की जीन एक्सपर्ट, हिस्टोपैथोलॉजी, कल्चर और ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग (डीएसटी) जांच बेहद जरूरी है। ताकि बीमारी की सही स्थिति का पता चल सके। प्रो. सूर्यकांत के अनुसार, दवा प्रतिरोधी टीबी की जल्द पहचान और सही इलाज क्षय रोग नियंत्रण की दिशा में कारगर कदम है। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत का संकल्प पूरे समाज की जिम्मेदारी है। गांव के प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक, हर व्यक्ति को टीबी के खिलाफ इस जन-अभियान में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

दिमाग तक पहुंच सकता है संक्रमण

केजीएमयू की प्रोफेसर डॉ. पारुल वर्मा के अनुसार, स्किन टीबी में भी दवा-प्रतिरोधी टीबी के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि दवा-प्रतिरोधी स्किन टीबी के लक्षण सामान्य स्किन टीबी जैसे ही होते हैं। इसलिए बाहरी जांच से दोनों में अंतर करना मुश्किल होता है। इसलिए हर टीबी मरीज में दवा-प्रतिरोधी टीबी की जांच के लिए सीबीएनएएटी और कल्चर टेस्ट कराया जाता है। जांच में दवा-प्रतिरोधी टीबी की पुष्टि होने पर उसी के अनुसार इलाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसे मरीज को सामान्य टीबी की दवाएं देने पर उसे कोई फायदा नहीं होगा और बीमारी शरीर के अन्य अंगों में फैल सकती है। छाती और दिमाग तक संक्रमण पहुंचने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए के त्वचा तक सीमित रहने के दौरान ही इसकी पहचान और सही इलाज जरूरी है।

डब्ल्यूजीएस तकनीक पर जोर

विश्वविद्यालय के त्वचा रोग विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. स्वास्तिका सुविर्या के मुताबिक, भारत में टीबी के जीवाणुओं में ऐसे जेनेटिक बदलाव पाए गए हैं, जिनकी वजह से वे दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं। इन जीवाणुओं को सामान्य मॉलिक्यूलर टेस्ट हमेशा पहचान नहीं पाते। इसलिए भविष्य में होल जीनोम सीक्वेंसिंग (डब्ल्यूजीएस) जैसी उन्नत तकनीक दवा-प्रतिरोधी टीबी की सटीक पहचान में अहम भूमिका निभा सकती है।

घाव ठीक न होने पर स्किन टीबी की जांच जरूरी

श्वसन रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ज्योति बाजपेयी के मुताबकि, त्वचा पर होने वाले घाव और अल्सर को मामूली रोग समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सामान्य इलाज के बाद भी अगर घाव चार से छह हफ्ते तक ठीक न हो, तो इसकी वजह स्किन टीबी भी हो सकती है। ऐसे मरीजों को स्किन टीबी की जांच जरूरी करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि स्किन टीबी का इलाज 9 से 18 महीने तक चल सकता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर संक्रमण लौट सकता है। दवा का कोर्स अधूरा छोड़ने पर डीआर-टीबी हो सकती है।

अध्ययन में ये भी रहे शामिल

इस अध्ययन में प्रकृति शुक्ला, अमिता जैन, उर्मिला सिंह, सौम्या सिंह, अतिन सिंघई, एवं सृष्टि त्रिपाठी भी शामिल रहे।
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्र को नोटिस देने वाला दारोगा निलंबित

लखनऊ/नोएडा। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के एलएलबी द्वितीय वर्ष के छात्र अक्षत को दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में 5 लाख रुपये के निजी में मुचलका पर पाबंद करने का नोटिस जारी करने वाले उप निरीक्षक शिवा पांडे को निलंबित कर दिया गया है।

अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था राजीव नारायण मिश्रा ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि इसके अलावा कोतवाली प्रभारी ईकोटेक प्रथम अरविंद कुमार और सहायक पुलिस आयुक्त ग्रेटर नोएडा तीन के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

चार सितंबर को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की ओर से छात्र को नोटिस जारी किया गया था। इसमें 6 माह तक शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 50 हजार रुपये के निजी बंध पत्र के साथ पाबंद किए जाने का कारण बताने को कहा गया था। सुनवाई के लिए 5 सितंबर की तारीख तय की गई थी। सोशल मीडिया पर नोटिस सामने आने के बाद मामला विवादों में आ गया। पुलिस ने 5 सितंबर को ही नोटिस वापस ले लिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। शीर्ष अदालत की सख्ती के बाद अब पुलिस ने मामले में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। छात्र के खिलाफ कार्रवाई करने के पीछे पुलिस की रिपोर्ट मुख्य आधार बनी थी।

बिजनौर हाइवे पर खाना खाते समय कार ने युवकों को कुचला, तीन की मौत

लखनऊ, बिजनौर। उत्तर प्रदेश में बिजनाैर जिले के थाना नजीबाबाद में गुुुरूवार की देर रात काे एक तेज रफ्तान वाहन की टक्कर लगने से में तीन लाेगाें की मौत हो गई। दो बच्चे घायल हाे गये। घटना के बाद चालक वाहन छाेड़कर फरार हाे गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस घटना का प्रदेश के मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है।उन्हाेंने घायलाें काे बेहतर इलाज मुहैया कराये जाने के निर्देश अफसराें काे दिए हैं।

पुलिस अधीक्षक (एसपी सिटी) कृष्ण गाेपाल ने शुक्रवार काे बताया कि यह घटना देर रात की है। पीलीभीत से अमनदीप, अर्शदीप सिंह, जग्गू और दाे बच्चे प्रिंस व सनी पिकअप वाहन से घोड़े लेकर पंजाब जा रहे थे। रास्ते में नजीबाबाद बशीरपुर नहर पटरी मार्ग के माेड़ से पहले सभी ने रुककर खाना खाने लगे। इसी दाैरान एक तेज रफ्तार स्विफ्ट कार ने उन्हें राैंद दिया। हादसे में अमनदीप, अर्शदीप सिंह, जग्गू की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दाे बच्चे बाल-बाल बच गये। घटना के बाद चालक कार छाेड़कर फरार हाे गया।

एसपी सिटी ने बताया कि कार पुलिस के कब्जे में है तथा आरोपित ड्राइवर की तलाश की जा रही है | दुर्घटना में बचे दो बच्चों की स्थिति सामान्य है | इस मामले में मुख्यमंत्री योगी ने मृतकों के प्रति दुख व्यक्त करते हुए अधिकारियों को घायलों का समुचित उपचार कराने के आदेश दिये है |

जो काम अंग्रेजों नहीं किया वो काम आजाद भारत में कांगेस सपा बसपा भाजपा जैसी पार्टियों ने राजनीतिक फायदे हिन्दुओं को जातिवादी कानूनों के माध्यम से

लखनऊ। यूजीसी काला कानून वापस,जातिगत नितियों में बदलाव रिजर्वेशन में सुधार SCSTACT में संशोधन और सवर्ण आयोग के गठन माँगो को लेकर सवर्ण समाज के लोगों प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के शास्त्री घाट पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं धरने का आज 14 दिन है आरक्षण हटाओ आंदोलन के संयोजक ठाकुर शिवम सिंह उनके साथ जंतर मंतर दिल्ली के सत्याग्रही मनोज मिश्रा विकास दुबे, धर्मेन्द्र कुमार मिश्रा, बुलंदशहर के गौरक्षक स्वामी बाबा जी आज शास्त्रीय घाट पर धरने का समर्थन किया ,धरने का पूर्ण समर्थन करते हुए सवर्ण आर्मी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने एस सी एस टी एक्ट में संशोधन की मांग उठाई उन्होंने ने कहा कि शिकायत के आधार पर तत्काल कार्रवाई के बजाय पहले निष्पक्ष जाँच का प्रावधान होना चाहिए साथ ही गलत शिकायत पाए जाने पर शिकायत करता के खिलाफ भी कार्यवही कि मांग की ,आरक्षण का आधार आर्थिक होना चाहिए क्यों कि गरीबी जाति देख कर नहीं आती है हर वर्ग हर जाती में गरीब होते हैं उन्हें आरक्षण के दायरे से बाहर किया जाय जो मंत्री सांसद विधायक आई पी एस आई ए एस डाक्टर इंजीनियर या अन्य पदों पर उनके पिता हो या परिवार के लोग है उनकी जगह पर उन्हीं वर्ग के जो गरीब है वास्तव में आरक्षण की जरूरत उन्हें है उनको मिलना चाहिए जिनका हक सम्पन्न दलित खा रहा है ।

यूजीसी रेगुलेशन वापस होना चाहिए यह एक वर्ग सामान्य को जन्म जाती अपराधी एवं शोषण करता बता रहा है जबकि दूसरे वर्ग को शोषक शिक्षा व्यवस्था में जातिगत आधार पर भेद भाव बढ़ायाने जाने की सरकार की यह नीति सवर्ण समाज को स्वीकार नहीं है इसे वापस लिया जाना देश एव सवर्ण समाज के हित में है अगर सरकार ने समय रहते जनता की आवाज नहीं सुनी तो आने वाले चुनाव बीजेपी के लिए नुकसान दायक साबित हो सकते हैं सत्ता तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं होगा। धरने पर बैठे सवर्ण समाज के लोगों का हौसला बढ़ाते हुए आर एच ए संयोजक ठाकुर शिवम सिंह ने कहा कि धरने का पूर्ण समर्थन है सरकार मांगों पर जल्दी अमल में नहीं लाई तो आंदोलन तेज कर दिया जाएगा सवर्ण समाज के साथ तमाम समाजिक संगठन राजनीतिक दल जल्दी ही धरने पर आ कर धरना देगे जिसके लिए सवर्ण समाज के अन्य संगठनों से वार्ता की जा रही है।

बीच सड़क चेयरमैन व पूर्व चेयरमैन में मारपीट, मचा हंगामा

महिला चेयरमैन व सपा की पूर्व चेयरमैन के बीच मारपीट का वीडियो वायरल

लखनऊ/ हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के कस्बा कुरारा के वार्ड नौ में गुरुवार को पानी निकास की व्यवस्था के लिए निरीक्षण करने गई चेयरमैन व पूर्व चेयरमैन के बीच वाद विवाद होने पर दोनों के बीच हाथापाई हो गई, तथा मारपीट हुई। वहां मौजूद लोगों ने बीच बचाव किया तथा थाना पुलिस को घटना की जानकारी दी। तब पुलिस ने मौके पर जाकर दोनों पक्ष को थाने ले गई। दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ थाने में तहरीर देकर कार्यवाही किए जाने की मांग की है।

कस्बा के बस स्टैंड के समीप वार्ड नौ में पूर्व चेयरमैन माया बाल्मीकि का मकान है। इनके मकान के आगे से जल निकासी के लिए नाली बनी हुई है। बुधवार को नगर पंचायत के कर्मचारियों ने दीवार के आगे बनी नौ इंच की पट्टी को जे सी बी मशीन से तोड़ दिया था। जिसको इन्होंने दोबारा बना लिया था। गुरुवार को मोहल्ले के लोगों की शिकायत पर नगर पंचायत चेयरमैन आशारानी कबीर वहां पर निरीक्षण के लिए गई थी। जल निकासी की व्यवस्था के लिए पट्टी को तोड़ने के लिए जेसीबी मशीन लेकर गई थी वहीं पर दोनों के बीच विवाद हो गया तथा हाथापाई हो गई। विवाद बढ़ने पर पुलिस को सूचना मिलने पर दोनों को पुलिस थाने ले गई, तथा मामला शांत हुआ।

चेयरमैन आशारानी कबीर ने माया बाल्मीकि व चार अज्ञात के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने व जानलेवा हमला करने की तहरीर थाने में दी है। वहीं माया बाल्मीकि ने चेयरमैन आशारानी सहित नगर पंचायत के जेई व कर्मचारियों इनके साथ में मौजूद अन्य लोगों के खिलाफ थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में चेयरमैन आशारानी कबीर ने बताया कि वार्ड नौ में पानी निकासी के लिए निरीक्षण करने के दौरान पूर्व चेयरमैन माया बाल्मीकि द्वारा जानलेवा हमला किया गया है तथा पूर्व चेयरमैन माया बाल्मीकि ने बताया कि चेयरमैन आशारानी कबीर ने मेरे मकान को क्षति पहुंचाई है। यह चुनाव के बाद से ही हमसे रंजिश मानती है। इस मामले में थाना प्रभारी प्रिंस दीक्षित ने गुरुवार को शाम बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।