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राहुल गांधी और खरगे ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, डेटा जुटाने के तरीके का किया विरोध, दिए ये सुझाव

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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से पत्र लिखकर जनगणना में पूछे जाने वाले सवाल बदलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसे बनाने से पहले राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से सलाह ली जानी चाहिए।

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट में कहा, “ओपन-एंडेड सवालों के जरिए जातियों की सही गिनती संभव नहीं है। खड़गे और राहुल गांधी ने कहा कि भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों और भाषाई रूपों से जानी जाती है। एक ही जाति अलग-अलग नामों और उपजातियों में दर्ज हुई तो आंकड़े बिखरेंगे और सबसे बड़ा नुकसान ओबीसी, अति पिछड़े और वंचित समुदायों को होगा। हमारी मांग स्पष्ट है कि मौजूदा प्रश्नावली रद्द हो, जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली बने और राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों व जनता से व्यापक परामर्श किया जाए।”

पहले से तैयार और प्रमाणित सूची इस्तेमाल करने का सुझाव

खड़गे और राहुल गांधी ने जातियों की पहचान के लिए पहले से तैयार और प्रमाणित सूची इस्तेमाल करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना में इसी तरह की सूची का इस्तेमाल किया जाता है। सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की मौजूदा सरकारी सूचियों तथा भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण की सूची के आधार पर ऐसी सूची तैयार की जा सकती है।

बिहार-तेलंगाना जैसी प्रक्रिया अपनाने की मांग

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि तेलंगाना और बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री को दोनों राज्यों के जाति सर्वेक्षणों में इस्तेमाल की गई सूचियों की प्रतियां भी भेजी हैं। दोनों नेताओं ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा तरीके से हो रही जाति जनगणना उन्हें स्वीकार नहीं है और सरकार को नई प्रक्रिया तैयार करनी चाहिए।

शिबू सोरेन के गांव से देवेंद्र महतो की नई मुहिम, शुरू की भर्ती प्रणाली सुधार यात्रा*

झारखंड में सरकारी नियुक्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने एक नई मुहिम शुरू की है। पहले से ही जेपीएससी-जेएसएससी को लेकर चल रहे विवाद के बीच देवेंद्र नाथ महतो ने सोमवार को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव से ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा' की शुरुआत की।

लुकईयाटांड़ से 'भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा' शुरू

हालांकि, देवेंद्रनाथ महतो ने सीएम हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा के अपनी यात्रा की शुरुआत करने वाले थे। इस सूचना पर नेमरा गांव के स्थानीय ग्रामीण देवेन्द्र नाथ महतो के खिलाफ गोलबंद हो गए। ग्रामीणों ने सख्त चेतावनी दी कि वो देवेंद्रनाथ महतो को गांव में घुसने नहीं देंगे। नेमरा गांव के ग्रामीणों ने हाथ में कुल्हाड़ी, फरसा और तीर-धनुष लेकर सड़क को जाम कर दिया। नेमरा गांव के ग्रामीणों के भारी विरोध के बीच देवेंद्र नाथ महतो नेमरा से करीब चार किलोमीटर दूर लुकईयाटांड़ गांव पहुंचे। वहां दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत की। लुकईयाटांड़ में ही शिबू सोरेन के पिता सोबरन मांझी की हत्या की गई थी।

सभी 24 जिले तक पहुंचेगी यात्रा

देवेंद्रनाथ महतो ने 'भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा' की शुरूआत लुकईयाटांड़ स्थित शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की। मौके पर भारी बारिश के बीच बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शनकारी भी मौजूद थे।

इस क्रम में देवेंद्र नाथ महतो ने एक सखुआ का पेड़ उस परिसर में लगाया और उस पेड़ का संकल्प लेकर राज्य के सभी 24 जिले के लिए अपनी यात्रा की शुरुआत की। इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने बताया कि भर्ती व्यवस्था सुधर यात्रा का शुभारंभ सखुआ पौधरोपण के बाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह झारखंड के नव निर्माण की यात्रा है।

परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शी बनाने की मांग

मीडिया से बातचीत में देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग को लेकर यह यात्रा शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ लाखों छात्रों ने आंदोलन किया, जिसके बाद राज्य सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लिया और छात्रों से वार्ता की।

पेपर लीक और धांधली को रोकने की मांग

देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि वो छात्रों की आवाज को हर गांव तक पहुंचाएंगे और इस अभियान से गांवों और शहरों को जोड़ने का काम करेंगे। उन्होंने कहा यहां कि व्यवस्था में भ्रष्टाचार को खत्म करना होगा, पेपर लीक को रोकना होगा और सरकार को भविष्य की सभी परीक्षाओं पर कार्रवाई करनी होगी। 45 विवादित परीक्षाओं पर लिया गया फैसला कायम रहना चाहिए। चाहे यह मामला हाईकोर्ट जाए या कहीं और, यह आदेश लागू रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कि भविष्य में किसी भी परीक्षा में कोई गड़बड़ी न हो, सरकार गारंटी दे कि कोई पेपर लीक न हो, कोई धांधली न हो और लॉबिंग के ज़रिए कोई नौकरी न मिले।

ट्रंप के बेटे के सिर पर ईरान ने रखा 95 करोड़ का इनाम, नेतन्याहू ने भी अपने बेटे को लेकर किया बड़ा दावा

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ईरान और अमेरिकी संघर्ष के बीच यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार को धमकी मिली है। ईरान ने कथित तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मेलानिया के बेटे बैरन को मारने पर इनाम का ऐलान किया है। ईरान के सरकारी टेलिविजन पर प्रसारित एक वीडियो में बैरन ट्रंप तक पहुंचने के तरीकों के बारे में बताया गया है। यही नहीं ट्रंप के बेटे के सिर पर 10 मिलियन डॉलर (95 करोड़ रुपए से ज्यादा) का इनाम भी रखा गया है। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान ने उनके बेटे की हत्या करने की कोशिश की।

बैरन ट्रंप तक पहुंचने के तरीके बताए

ईरानी गार्ड कोर (IRGC) से जुड़े मीडिया की ओर से जारी और ईरानी सरकारी टीवी के चैनल 3 पर दिखाए गए वीडियो में बताया गया है कि बैरन ट्रंप को कहां और कैसे मारें। इसमें 20 साल के बैरन की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई है। क्लिप में दावा किया गया है कि बैरन पर नजर रखी जा रही है। इसमें दावा किया गया है कि एक लड़की सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा को चकमा देकर बैरन के बगल में बैठ गई थी। ऐसे में उस तक पहुंचा जा सकता है।

बैरन के ऑनलाइन गेमिंग और बातचीत से जुड़े दावे भी किए गए

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सरकारी चैनल 3 पर टेलिकास्ट वीडियो का टाइटल Where to Kill Barron Trump है। इसमें बैरन ट्रंप की गतिविधियों और उनकी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी दिखाने का दावा किया गया। इसमें उनकी ऑनलाइन गेमिंग और बातचीत से जुड़े कुछ दावे भी किए गए हैं। वीडियो में दावा किया गया कि बैरोन ट्रंप अपने सुरक्षा घेरे से दूर Xbox पर वॉयस और टेक्स्ट के जरिए बातचीत करते हैं और Xbox, FIFA वीडियो गेम्स एवं डिस्कॉर्ड पर उनके अकाउंट का पता लगा लिया गया है।

ट्रंप की पत्नी मेलानिया को लेकर भी आया था वीडियो

यह पहली बार नहीं है, जब ईरानी स्टेट मीडिया से जुड़े किसी वीडियो में ट्रंप परिवार को निशाना बनाने की बात सामने आई हो। पिछले महीने ईरान के सरकारी टेलीविजन ने एक ऐसा वीडियो जारी किया था, जिसमें खुले तौर पर अमेरिकी प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप को निशाना बनाया गया था। उस वीडियो में मेलानिया के सार्वजनिक कार्यक्रमों, यात्रा और न्यूयॉर्क में उनकी गतिविधियों से जुड़ी तस्वीरें दिखाई गई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो के अंत में बैरन ट्रंप का भी जिक्र किया गया था।

नेतन्याहू का भी विस्फोटक दावा

वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान ने उनके एक बेटे की भी हत्या की कोशिश की थी, जिसके बाद उनके परिवार की सुरक्षा बढ़ाई गई है। नेतन्याहू ने यह बात इजरायली टीवी चैनल 14 को दिए एक इंटरव्यू में कही। पत्रकार नोआम अमीर से बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि ईरान ने उनके एक बेटे को मारने की साजिश रची थी। हालांकि उन्होंने इसे लेकर ये साफ नहीं किया कि निशाना छोटे बेटे थे या बड़े बेटे। इसके बाद बैरन ट्रंप को दी गई पब्लिक थ्रेट ये साफ कर रही है कि ईरान एक मानसिक खेल खेल रहा है, ताकि दुश्मनों का हौसला तोड़ा जा सके.

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की प्रथम बैठक संपन्न, वेटलैंड संरक्षण को मिलेगी नई दिशा

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में आज झारखंड मंत्रालय में झारखंड राज्य आद्रभूमि (वेटलैंड) प्राधिकरण की बैठक हुई। इसमें राज्य के वेटलैंड क्षेत्रों के संरक्षण, सीमांकन और बेहतर प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप राज्य में अवस्थित आद्रभूमि (वेटलैंड) को चिन्हित करने, उनका गहन अध्ययन एवं व्यवस्थित दस्तावेजीकरण कराने तथा डिमार्केशन के बाद नोटिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। उन्होंने राज्य की सभी आद्रभूमि की सूची तैयार करने एवं उसका नियमित अद्यतन, आद्रभूमि का डेटाबेस विकसित तथा संधारित करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि संभावित वेटलैंड की पहचान से लेकर सत्यापन, डिमार्केशन, नोटिफिकेशन, दस्तावेजीकरण और मैनेजमेंट प्लान तक की प्रक्रिया राज्य के प्राकृतिक जल क्षेत्रों को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वेटलैंड जल क्षेत्र के साथ-साथ राज्य की जैव विविधता, पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय पारिस्थितिकी के महत्वपूर्ण आधार हैं। इनके संरक्षण के लिए गहण अध्ययन और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर प्रभावी मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने वेटलैंड की वर्तमान स्थिति, जल स्रोत, आसपास की गतिविधियों तथा समय के साथ हुए बदलावों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने पर बल दिया।

बैठक में राज्य के पर्यावरण, जल स्रोतों और जैव विविधता के संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण एवं दूरगामी निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य की सभी प्रमुख आर्द्रभूमियों (wetlands) के संरक्षण, सीमांकन और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। इस उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, जल संसाधन विभाग, नगर विकास विभाग तथा भूमि राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य के पारिस्थितिक तंत्र (ecosystem) को मजबूत करना और जल संकट से निपटने के लिए प्राकृतिक जल निकायों का जीर्णोद्धार करना है।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इसरो से प्राप्त एटलस के आधार पर झारखंड में 2119 संभावित वेटलैंड की सूची प्राप्त हुई है। अब इन संभावित स्थलों का जिला स्तरीय आद्रभूमि समितियों द्वारा भौतिक एवं तथ्यात्मक सत्यापन किया जाएगा। साथ ही आद्रभूमि नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने, अतिक्रमण की रोकथाम, गतिविधियों का विनियमन तथा राज्य आद्रभूमि प्राधिकरण को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जायेगा। इसके बाद राज्य स्तरीय कमेटी द्वारा वेटलैंड की पहचान एवं सीमांकन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। बैठक में स्पष्ट किया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए चिन्हित वेटलैंड का डिमार्केशन कर नोटिफिकेशन किया जाएगा। साथ ही प्रत्येक महत्वपूर्ण वेटलैंड के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए आवश्यकतानुसार मैनेजमेंट प्लान तैयार करने का निर्देश दिया।

बैठक में झारखंड राज्य आद्रभूमि प्राधिकरण के प्रभावी संचालन से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इनमें टेंडर एवं प्रोक्योरमेंट डॉक्यूमेंट की स्क्रीनिंग तथा टेंडर अनुमोदन के लिए समिति के गठन का प्रस्ताव के अतिरिक्त तकनीकी समिति के गठन तथा जनता से प्राप्त शिकायतों की सुनवाई कर, उन्हें अनुशंसा के साथ राज्य आद्रभूमि प्राधिकरण के समक्ष अंतिम निर्णय के लिए अग्रसारित करने संबंधी समिति के गठन पर भी चर्चा हुई। वहीं

प्राधिकरण के कार्यालय के संचालन के लिए आवश्यक राशि का प्रावधान, पर्याप्त बजट एवं मानव संसाधन की उपलब्धता तथा आद्रभूमि संरक्षण एवं प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित प्रस्तावों पर भी विस्तार से विमर्श किया गया।

बैठक में राज्य के मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक-सह-वन बल प्रमुख (PCCF HoFF) श्री संजीव कुमार, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव श्री अबू बकर सिद्दीकी पी०, राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव श्री चंद्रशेखर, वित्त विभाग के सचिव श्री प्रशांत कुमार, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री मनोज कुमार, पर्यटन विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव-सह-विशेष सचिव सूचना एवं जनसंपर्क विभाग श्री राजीव लोचन बक्शी, पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ श्री रवि रंजन, सीसीएफ वाइल्डलाइफ-सह- सदस्य सचिव झारखंड राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण श्री एस० आर० नटेश सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में CAMPA शासी निकाय की पहली बैठक संपन्न

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में आज झारखंड प्रतिकरात्मक वनरोपण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA)-राज्य प्राधिकरण की शासी निकाय (GOVERNING BODY) की पहली बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्यमंत्री एवं अधिकारियों के बीच राज्य में प्रतिपूरक वनीकरण, वन संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन तथा वन क्षेत्रों के विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं की अद्यतन कार्य प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को कैम्पा मद से संचालित सभी योजनाओं का ससमय क्रियान्वयन निर्धारित मानकों के अनुरूप और पूरी पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका प्रत्यक्ष सकारात्मक प्रभाव वन क्षेत्रों, ग्रामीण आबादी और स्थानीय समुदायों के जीवन में दिखाई देनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आजीविका और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। वन क्षेत्रों में पौधरोपण एवं उसके संरक्षण, जल संरक्षण, मृदा संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण तथा पर्यावरणीय पुनर्स्थापन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पौधरोपण के बाद उसकी नियमित निगरानी एवं संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित हो, ताकि लगाए गए पौधे वृक्ष का रूप ले सकें और कैंपा के उद्देश्य वास्तविक रूप से धरातल पर साकार हों। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वानरोपण कार्यक्रम में वैसे पौधों का उपयोग करें जो मानव तथा वन्य जीव दोनों के लिए कारगर सिद्ध हो। उन्होंने वनरोपण के दौरान औषधीय वृक्षों के पौधे लगाए जाने का निर्देश अधिकारियों को दिया। मुख्यमंत्री ने मृदा-सह-जल संरक्षण पर विशेष बल दिए जाने की बात कही।

राज्य के भीतर सभी हाथी कॉरिडोर की सूक्ष्मता के साथ हो मैपिंग

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के भीतर सभी हाथी कॉरिडोर की सूक्ष्मता के साथ मैपिंग कराई जाए। यह सुनिश्चित हो कि हाथियों और अन्य वन्यजीवों के आवागमन में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो और उनके पारंपरिक कॉरिडोर किसी भी स्थिति में बाधित न हों। कॉरिडोर में आ रही समस्याओं और संवेदनशील क्षेत्रों की विस्तृत मैपिंग करते हुए आवश्यकतानुसार एरिया डिमार्केशन किया जाए तथा वन्यजीवों के आवास एवं आवागमन वाले क्षेत्रों को अनावश्यक रूप से डिस्टर्ब न किया जाए। मुख्यमंत्री ने वन क्षेत्रों में जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन से जुड़े कार्यों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश देते हुए कहा कि स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप योजनाओं का चयन किया जाए। उन्होंने संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने को कहा।

विकास कार्यों एवं वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन कायम करते हुए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में क्रशर संचालन, जंगल क्षेत्रों में कोयला मिलने तथा उत्खनन जैसी गतिविधियों के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और आवागमन प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में विकास कार्यों और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन कायम करते हुए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि हाथी कॉरिडोर वाले क्षेत्रों में यदि सड़क निर्माण आवश्यक हो तो एलिवेटेड रोड जैसी तकनीक का उपयोग किया जाए, ताकि हाथियों एवं अन्य वन्यजीवों के आवागमन में बाधा न आए। साथ ही, वन्यजीवों के लिए पसंदीदा एवं उपयोगी खाद्य प्रजातियों के पौधों का अधिकाधिक रोपण कराया जाए, ताकि उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में पर्याप्त भोजन उपलब्ध हो और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की समृद्ध प्राकृतिक विरासत और वन संपदा आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है। इसके संरक्षण के साथ विकास के बीच संतुलन कायम करना सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का निर्देश दिया। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कैंपा के तहत संचालित एवं प्रस्तावित योजनाओं की अद्यतन स्थिति, उपलब्ध राशि, व्यय, कार्यों की गुणवत्ता तथा जमीनी प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और जहां भी कार्यों में अनावश्यक विलंब हो रहा हो, वहां जिम्मेदारी तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

वन विभाग द्वारा आधुनिक तकनीक का किया जा रहा है उपयोग

बैठक में वन विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि मानव एवं वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग द्वारा आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। विशेषकर हाथियों के आवागमन और उनके संभावित हमले से बचाव के लिए रामगढ़, बोकारो और चाकुलिया सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में थर्मल बेस एवं इंफ्रारेड कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं। इन कैमरों के माध्यम से हाथियों की गतिविधियों और आवागमन की पूर्व जानकारी प्राप्त हो सकेगी। टावर पर लगे कैमरों से हाथियों की मौजूदगी का पता चलते ही हूटर के माध्यम से स्थानीय स्तर पर अलर्ट जारी किया जाएगा। साथ ही, संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय लोगों के मोबाइल नंबर रजिस्टर किए जा रहे हैं, ताकि हाथियों की गतिविधि की जानकारी उन्हें रियल टाइम मैसेज के माध्यम से तत्काल मिल सके। इसकी ऑनलाइन सूचना संबंधित विभागीय कार्यालय को भी प्राप्त होगी, जिससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके। विभागीय अधिकारियों ने पीपीटी प्रजेन्टेशन के माध्यम से इस तकनीकी पहल की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और संभावित लाभों की विस्तृत जानकारी मुख्यमंत्री को दी। यह पहल मानव जीवन की सुरक्षा के साथ-साथ हाथियों एवं अन्य वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

*बैठक में राज्य के मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव श्री सुनील कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक-सह-वन बल प्रमुख (PCCF HoFF) श्री संजीव कुमार, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव श्री अबू बकर सिद्दीकी पी०, अनु० जनजाति, अनु० जाति कल्याण विभाग के सचिव श्री कृपानंद झा, राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव श्री चंद्रशेखर, वित्त विभाग के सचिव श्री प्रशांत कुमार, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री मनोज कुमार, पर्यटन विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव-सह-विशेष सचिव सूचना एवं जनसंपर्क विभाग श्री राजीव लोचन बक्शी, पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ श्री रवि रंजन, सीसीएफ वाइल्डलाइफ श्री एस० आर० नटेश सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

भाजपा का बयान हताशा और राजनीतिक दिवालियेपन की पराकाष्ठा : विनोद कुमार पांडेय

झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता के बयान पर कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि जिन लोगों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और विपक्षी आवाजों को दबाने की राजनीति को देशभर में स्थापित किया, उन्हें झारखंड की लोकतांत्रिक सरकार को नसीहत देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

विनोद पांडेय ने कहा कि झारखंड सरकार की तुलना इतिहास की गंभीर त्रासदियों से करना न सिर्फ राजनीतिक दुरुपयोग है, बल्कि भाजपा की बौखलाहट और राजनीतिक कुंठा को भी दर्शाता है। भाजपा को चाहिए कि वह ऐसे अमर्यादित और गैर-जिम्मेदाराना बयानों के बजाय जनता के वास्तविक मुद्दों पर बात करे।

उन्होंने कहा कि धरना-प्रदर्शन, कानून-व्यवस्था और सोशल मीडिया से जुड़े नियमों को तोड़-मरोड़कर पेश करना भाजपा की पुरानी राजनीतिक शैली है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान प्रदत्त अधिकार है, लेकिन कोई भी अधिकार कानून से ऊपर नहीं है। सरकार का दायित्व है कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ कानून-व्यवस्था भी सुनिश्चित करे। प्रशासनिक प्रक्रिया को राजनीतिक दमन बताना पूरी तरह भ्रामक है।

विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा नेताओं को पहले अपने शासन वाले राज्यों में लोकतांत्रिक अधिकारों, छात्रों, किसानों और विपक्षी नेताओं के साथ हुए व्यवहार का हिसाब देना चाहिए। दूसरों को लोकतंत्र का प्रमाणपत्र बांटने से पहले भाजपा अपने राजनीतिक इतिहास के पन्ने पलट ले।

जेपीएससी पर भाजपा की राजनीति तथ्यहीन और अवसरवादी

जेपीएससी मामले पर भाजपा के आरोपों पर विनोद पांडेय ने कहा कि न्यायपालिका में सरकार की ओर से कौन अधिवक्ता किस स्तर पर पैरवी करेगा, यह पूरी तरह विधिक प्रक्रिया और सरकार के अधिवक्ताओं का विषय है। इसे राजनीतिक षड्यंत्र का रंग देना न्यायिक प्रक्रिया पर अनावश्यक सवाल खड़े करने की कोशिश है।

उन्होंने कहा कि अगर भाजपा के पास जेपीएससी मामले में कोई ठोस तथ्य, दस्तावेज या कानूनी आपत्ति है, तो उसे सक्षम न्यायालय के समक्ष रखना चाहिए, न कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए भ्रम फैलाना चाहिए। विद्यार्थियों के हितों के नाम पर राजनीति करने के बजाय भाजपा को यह बताना चाहिए कि उसने उनके भविष्य को लेकर अपने शासनकाल में क्या ठोस कदम उठाए थे।

विनोद पांडेय ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार युवाओं, विद्यार्थियों और आम जनता के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है। भाजपा की परेशानी यह है कि झारखंड की जनता अब उसकी राजनीतिक बयानबाजी और झूठे नैरेटिव के बजाय विकास, अधिकार और सामाजिक न्याय की राजनीति को समझ रही है।

उन्होंने भाजपा को नसीहत देते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन लोकतांत्रिक विरोध और तथ्यहीन आरोपों के बीच की मर्यादा नहीं टूटनी चाहिए। भाजपा नेताओं को अपनी भाषा और तथ्यों दोनों पर संयम रखना चाहिए। झारखंड की जनता को नाजी जर्मनी जैसे भयावह ऐतिहासिक संदर्भों से डराने के बजाय भाजपा अपनी नीतियों और अपने काम का हिसाब दे।

उन्होंने कहा कि भाजपा पड़ोस में महाराष्ट्र में अपनी सरकार के नए फरमान के बारे में जानकारी हासिल कर लें जिसमें कहा गया है कि मराठी नहीं आता - तो चालान कटेगा - महाराष्ट्र में रोजी रोजगार नहीं करने दिया जाएगा। झारखंड समेत अन्य राज्य के निवासी को महाराष्ट्र में अब गाड़ी चलाने के लिए सिर्फ लाइसेंस और परमिट काफी नहीं - मराठी का टेस्ट भी पास करना होगा। पूरा मराठी आना होगा। भाजपा की अब अपनी राजनीति चमकाने के लिए भाषा को भी डर और दंड का औजार बना दिया है। हिंदी का सम्मान कहां गया ? कल तक “एक देश, एक भाषा” की बातें, और आज रोज़गार के लिए आए आम आदमी से भाषा की परीक्षा? भाजपा बताए - क्या अब देश के हर राज्य में रोज़गार करने के लिए पहले वहाँ की भाषा की परीक्षा होगी? भाजपा पूरे देश को टुकड़ों में बाँटने की घृणित राजनीति कर रही है।

झारखंड में अगले माह से शुरू होगा एयर होस्टेस और ग्राउंड क्रू का प्रशिक्षण

रांची। झारखंड सरकार के नागर विमानन विभाग के अंतर्गत संचालित झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट के एयर होस्टेस एवं ग्राउंड क्रू ट्रेनिंग विभाग द्वारा डिप्लोमा इन एविएशन एंड मैनेजमेंट पाठ्यक्रम के लिए चयन साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। वर्षों के अथक प्रयास के बाद राज्य में अब एयर होस्टेस, फ्लाइट स्टीवर्ड और ग्राउंड क्रू जैसे रोजगारोन्मुखी विमानन प्रशिक्षण की शुरुआत होने जा रही है। प्रशिक्षण कार्यक्रम अगले माह से शुरू होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की परिकल्पना और मार्गदर्शन के अनुरूप आयोजित चयन साक्षात्कार में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। चयन प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता, संचार कौशल, अंग्रेजी भाषा में दक्षता, आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और विमानन क्षेत्र के प्रति रुचि का मूल्यांकन किया गया। प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरा किया गया।

झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट के प्रबंध निदेशक कैप्टन एस.पी. सिन्हा ने कहा कि देश में विमानन क्षेत्र का विस्तार हो रहा है और रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे में झारखंड के युवाओं को राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण और व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें विमानन उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना संस्थान की प्राथमिकता है और एयर होस्टेस, फ्लाइट स्टीवर्ड और ग्राउंड क्रू के रूप में प्रशिक्षित युवाओं के लिए एयरलाइंस, एयरपोर्ट, ग्राउंड हैंडलिंग, यात्री सेवा और एविएशन हॉस्पिटैलिटी सहित विभिन्न क्षेत्रों में करियर के अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।

कैप्टन एस.पी. सिन्हा ने कहा संस्थान का उद्देश्य युवाओं को सिर्फ प्रमाण-पत्र देना नहीं, बल्कि उन्हें व्यावसायिक दक्षता, संचार क्षमता, अनुशासन, व्यक्तित्व विकास और उद्योग-उन्मुख कौशल से सुसज्जित करना है। संस्थान द्वारा इससे पूर्व कमर्शियल पायलट लाइसेंस प्रशिक्षण भी शुरू किया जा चुका है।

बता दें कि साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों की प्रथम वरीयता सूची माह के अंतिम सप्ताह में झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाने की संभावना है। चयनित अभ्यर्थियों को नामांकन और प्रशिक्षण से संबंधित जानकारी निर्धारित माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के कदम से छात्रों को जगी न्याय की उम्मीद : आदित्य साहू


भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि JPSC-JSSC नियुक्ति महाघोटाले की CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा हेमंत सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया जाना छात्रों के संघर्ष में एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने सीबीआई जांच की दिशा में इसे बढ़ता हुआ पहला कदम बताया है। सुप्रीम कोर्ट के कदम से छात्रों को न्याय की उम्मीद जगी है।

उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार और राज्य सरकार की एजेंसियां न्याय का अंतिम दरवाजा नहीं है। छात्रों के हक और उनके भविष्य की लड़ाई अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुकी है। झारखंड में JSSC और JPSC के माध्यम से नौकरी बेचे जाने और युवाओं के साथ हुए धोखे की CBI जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा कि याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट की यह टिप्पणी कि मामले में सक्षम एजेंसी से जांच की आवश्यकता हो सकती है, बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि अब झारखंड सरकार की सारी काली करतूतों का सच सामने आकर रहेगा और झारखंड के लाखों युवाओं को उनका अधिकार मिलकर रहेगा। कहा कि अब हेमंत सरकार को बहानेबाजी और पैंतरेबाज़ी छोड़ जवाब देना होगा कि आखिर वह CBI जांच से क्यों भाग रही है? सरकार के द्वारा युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बचाने की कोशिश क्यों हो रही है?

श्री साहू ने कहा कि झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने छात्रों के साथ जो सलूक किया है, क्रूरता की है, उससे राज्य पूरे देश में शर्मसार हुआ है। राहुल गांधी और हेमंत सोरेन ने मिलकर राज्य के अबोध बच्चों के साथ छल एवं साजिश करने का काम किया है और पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है। छात्रों को पहले पुलिस से पिटवाया, बाद में सरकार ने अपनी पार्टी के गुंडों से पिटवाया। फिर फर्जी मुकदमों का खेल खेला। सोशल मीडिया सहित उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रतिबंधित किया। हेमंत सरकार पूरी तरह हिटलरशाही पर उतर आई है। सरकार की सारी करतूत काले अध्याय के रूप में दर्ज हो चुकी है। राहुल गांधी और कांग्रेस ने भी छात्रहित का ढोंग किया है। सीआईडी जांच के नाम पर केवल आईवॉश की जा रही है। यह मुख्य सरगना और बड़ी मछलियों को बचाने की कवायद के सिवाय कुछ नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह जनविरोधी सरकार जितना जुल्म करना है, कर ले। हमारी पार्टी की सरकार 2029 में राज्य में बननी तय है। जिस दिन सरकार बनी, पहली ही कैबिनेट में सारे मामलों की सीबीआई जांच की अनुशंसा और सभी छात्रों पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस करने का फैसला लिया जाएगा। भाजपा छात्रों के साथ सदैव खड़ी है और जब तक दोषियों का चेहरा बेनकाब नहीं होता और युवाओं को न्याय नहीं मिलता, संघर्ष जारी रहेगा।

झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल में भ्रष्टाचार पर सियासी भूचाल, बाबूलाल मरांडी ने CM सोरेन से की CBI जांच की मांग


नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल में कथित भ्रष्टाचार की स्वतंत्र जाँच कराने की मांग की है।

श्री मरांडी ने कहा कि पूरे प्रकरण की CBI अथवा माननीय उच्च न्यायालय के वर्त्तमान न्यायाधीश की निगरानी में निष्पक्ष जाँच आवश्यक है। साथ ही पिछले दस वर्षों में जारी सभी NOC, मान्यताओं, सीट आवंटन और डिग्रियों का व्यापक ऑडिट कराने तथा संबंधित मंत्री,

अधिकारियों, काउंसिल पदाधिकारियों एवं बिचौलियों की भूमिका भी जाँच के दायरे में लाने की मांग राज्य सरकार से की है। उन्होंने कहा कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो ताकि निर्दाेष विद्यार्थियों के हितों की रक्षा हो सके।

भाजपा नेताओं को छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करने की आदत छोड़ देनी चाहिए : विनोद पांडेय

झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद पांडेय ने भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा नेताओं को छात्रों के मुद्दों की आड़ में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश बंद करनी चाहिए। उन्होंने भाजपा पर व्यंग करते कहा कि जो लोग सत्ता में रहते हुए युवाओं और छात्रों के सवालों का समाधान नहीं कर पाए, वे आज छात्रों के पीछे खड़े होकर राजनीतिक ड्रामा कर रहे हैं। जबकि हकीकत अब पूरा देश जान चुका है कि माननीय मुख्यमंत्री ने छात्रों की सभी मांगों को मान लिया है, छात्र अपने घर लौट चुके हैं और 25 अगस्त को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में कई और महत्वपूर्ण निर्णय सरकार छात्र हित में लेने जा रही है।

विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा नेताओं की राजनीति अब इतनी कमजोर हो चुकी है कि उन्हें अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए छात्रों को आगे करना पड़ रहा है। छात्र-युवा पढ़ाई, रोजगार और अपने भविष्य को लेकर संघर्ष करें, यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उनके आंदोलनों को राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करना भाजपा की पुरानी कार्यशैली रही है।

उन्होंने कहा कि भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी बताएं कि यदि उन्हें वास्तव में छात्रों की चिंता है तो वे छात्रों के बीच जाकर उनके मुद्दों पर सकारात्मक संवाद क्यों नहीं करते? हर प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक दमन बताकर माहौल गरमाना और फिर थाने पहुंचकर राजनीतिक प्रदर्शन करना समस्या का समाधान नहीं, बल्कि छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करना है।

झामुमो महासचिव ने कहा कि कानून अपना काम करेगा और किसी भी मामले में पुलिस को कानून के दायरे में ही कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन किसी व्यक्ति पर कार्रवाई को लेकर बिना पूरी जानकारी के पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाना और उसे राजनीतिक रंग देना जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका नहीं है। भाजपा को कानून और लोकतंत्र की दुहाई देने से पहले अपने राजनीतिक आचरण का आईना देखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाजपा नेता लगातार ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे छात्रों और युवाओं के बीच भ्रम और टकराव की स्थिति पैदा हो। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर कानून हाथ में लेने या राजनीतिक उकसावे की राजनीति को जायज नहीं ठहराया जा सकता।

विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा की परेशानी यह है कि झारखंड की जनता ने उसकी राजनीति को नकार दिया है। अब कभी छात्रों के नाम पर, कभी युवाओं के नाम पर और कभी कानून-व्यवस्था के नाम पर भाजपा अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रही है। जनता सब देख रही है और समझ रही है कि कौन छात्रों के भविष्य की चिंता कर रहा है और कौन उनके मुद्दों को अपनी राजनीति का ईंधन बना रहा है।

उन्होंने बाबूलाल मरांडी से सवाल किया कि यदि भाजपा को सचमुच छात्रों की इतनी चिंता है तो वह यह बताए कि केंद्र की भाजपा सरकार के कार्यकाल में युवाओं के रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवालों पर उसने क्या ठोस कदम उठाए? सिर्फ थाने में दो घंटे बैठ जाने से छात्र हितैषी होने का प्रमाणपत्र नहीं मिल जाता।

विनोद पांडेय ने कहा कि झामुमो छात्रों और युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करता है, लेकिन किसी भी आंदोलन को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश का विरोध करेगा। भाजपा नेताओं को सलाह है कि छात्रों को आगे करके अपनी राजनीति चमकाने के बजाय खुद मैदान में उतरें और जनता के सवालों का सामना करें।

उन्होंने कहा भाजपा नेताओं को यह समझ लेना चाहिए कि छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर झामुमो से राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। जनता के बीच जाकर लड़ना है तो भाजपा नेता खुद मैदान में उतरें।